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Tej Pratap Yadav

Tej Pratap Controversy: गर्लफ्रेंड की बेटी से मिलने पहुंचे तेजप्रताप? FIR के बाद बढ़ा विवाद

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के वरिष्ठ नेता तेजप्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। इस बार मामला उनकी निजी जिंदगी से जुड़ा है, जिसने बिहार की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। कथित गर्लफ्रेंड अनुष्का के भाई आकाश द्वारा दर्ज कराई गई FIR के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि तेजप्रताप यादव कथित तौर पर अनुष्का की बेटी से मिलने के लिए उनके घर पहुंचे और बिना अनुमति अंदर प्रवेश करने की कोशिश की। मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इसकी चर्चा हो रही है। FIR में क्या लगाए गए हैं आरोप? आकाश द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत में कहा गया है कि तेजप्रताप यादव अचानक उनके घर पहुंचे। परिवार का आरोप है कि उन्होंने घर में जबरन प्रवेश किया, जिससे परिवार के सदस्यों को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल अधिकारियों द्वारा दोनों पक्षों की बात सुनी जा रही है और तथ्यों की पड़ताल की जा रही है। तेजप्रताप यादव ने आरोपों को बताया बेबुनियाद विवाद बढ़ने के बाद तेजप्रताप यादव ने अपनी सफाई दी है। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है और यह सब उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। तेजप्रताप का कहना है कि वे किसी भी जांच का सामना करने के लिए तैयार हैं और उन्हें कानून पर पूरा भरोसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग जानबूझकर उनके नाम को विवादों में घसीटने की कोशिश कर रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज तेजप्रताप यादव बिहार के सबसे चर्चित राजनीतिक चेहरों में से एक हैं। ऐसे में उनसे जुड़ा कोई भी मामला तेजी से सुर्खियां बन जाता है। इस विवाद के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में भी कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि अभी तक मामले को लेकर किसी प्रमुख राजनीतिक दल की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन घटनाक्रम पर सभी की नजर बनी हुई है। जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई फिलहाल पूरा मामला पुलिस जांच के अधीन है। जांच एजेंसियां शिकायत, गवाहों के बयान और अन्य उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही हैं। मामले में एक पक्ष गंभीर आरोप लगा रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे साजिश करार दे रहा है। ऐसे में अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जिससे इस विवाद की वास्तविक तस्वीर साफ हो सकेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मानसून

India Weather मानसून की धीमी चाल से बढ़ी टेंशन, 19 राज्यों में कम बारिश का असर

जून का महीना आधा से ज्यादा गुजर चुका है, लेकिन देश के कई हिस्सों में मानसून अब भी उम्मीद के मुताबिक सक्रिय नहीं हो पाया है। जहां लोगों को तेज गर्मी से राहत देने वाली बारिश का इंतजार है, वहीं मौसम के बदलते मिजाज ने चिंता बढ़ा दी है। भारतीय मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश के 19 राज्यों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। इनमें से 7 राज्यों में बारिश की कमी 60 प्रतिशत तक पहुंच गई है। बारिश में आई इस कमी का असर अब खेतों, जल स्रोतों और आम जनजीवन पर साफ दिखाई देने लगा है। कई इलाकों में किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं, जबकि शहरों में लोग उमस और तेज गर्मी से परेशान हैं। कई राज्यों में मानसून की चाल हुई धीमी मौसम विभाग के मुताबिक, मानसून की प्रगति फिलहाल धीमी बनी हुई है। कुछ क्षेत्रों में बादल आने के बावजूद पर्याप्त बारिश नहीं हो रही है। यही वजह है कि कई राज्यों में वर्षा का आंकड़ा सामान्य स्तर से काफी नीचे पहुंच गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है। धान, मक्का, सोयाबीन और अन्य प्रमुख फसलों के लिए यह समय बेहद अहम माना जाता है। UP समेत कई राज्यों में 40 डिग्री के पार पहुंचा पारा बारिश की कमी के बीच उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में तापमान फिर से बढ़ने लगा है। सात राज्यों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया है। दिन के समय तेज धूप और शाम को बढ़ती उमस लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। गर्मी का असर केवल बड़े शहरों में ही नहीं, बल्कि छोटे कस्बों और ग्रामीण इलाकों में भी महसूस किया जा रहा है। बिजली की बढ़ती मांग और पानी की खपत ने भी स्थानीय प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। खेती पर पड़ सकता है सीधा असर देश की बड़ी आबादी आज भी खेती पर निर्भर है और खेती का बड़ा हिस्सा मानसून आधारित है। ऐसे में बारिश की कमी किसानों के लिए चिंता का विषय बन गई है। कई जगहों पर खेत तैयार हैं, लेकिन पर्याप्त नमी न होने के कारण बुवाई की रफ्तार धीमी पड़ गई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून जल्द सक्रिय नहीं हुआ तो किसानों की लागत बढ़ सकती है, क्योंकि उन्हें सिंचाई के वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ेगा। जलाशयों और भूजल स्तर पर भी नजर मानसून की कमजोर शुरुआत का असर जलाशयों और तालाबों पर भी पड़ सकता है। कई राज्यों में जल संरक्षण को लेकर पहले से ही योजनाएं बनाई जा रही हैं ताकि भविष्य में किसी संभावित जल संकट से निपटा जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई के शुरुआती दिनों में अच्छी बारिश हुई तो स्थिति में सुधार संभव है, लेकिन फिलहाल मौसम का यह रुख चिंता बढ़ाने वाला है। आगे क्या कहता है मौसम विभाग? मौसम विभाग ने उम्मीद जताई है कि आने वाले दिनों में मानसून दोबारा सक्रिय हो सकता है। कुछ राज्यों में हल्की से मध्यम बारिश और कुछ क्षेत्रों में भारी वर्षा की संभावना भी जताई गई है। यदि ऐसा होता है तो तापमान में गिरावट आएगी और किसानों के साथ-साथ आम लोगों को भी राहत मिलेगी। फिलहाल देश के करोड़ों लोगों की निगाहें आसमान पर टिकी हैं और सभी को मानसून की अगली अच्छी बारिश का इंतजार है।
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Telegram

Telegram को बड़ा झटका! Delhi High Court ने बैन हटाने से किया साफ इनकार

मैसेजिंग ऐप Telegram को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन अदालत ने केंद्र सरकार के फैसले को सही ठहराते हुए कंपनी की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने साफ कहा कि राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण परीक्षा की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है और जरूरत पड़ने पर वह ऐसे कदम उठा सकती है। इस फैसले के बाद Telegram पर लगा अस्थायी प्रतिबंध फिलहाल जारी रहेगा। मामला केवल एक ऐप तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परीक्षा सुरक्षा, डिजिटल स्वतंत्रता और सरकारी अधिकारों के बीच संतुलन की बड़ी बहस का हिस्सा बन गया है। क्या है पूरा विवाद? केंद्र सरकार ने हाल ही में Telegram पर अस्थायी रोक लगाने का फैसला लिया था। सरकार का कहना है कि प्लेटफॉर्म के कुछ चैनलों और बॉट्स के जरिए NEET-UG री-एग्जाम से जुड़ी कथित लीक सामग्री, फर्जी प्रश्नपत्र और भ्रामक जानकारी फैलाए जाने की आशंका थी। सरकार का तर्क था कि ऐसी गतिविधियां लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर सकती हैं और परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर सकती हैं। इसी कारण एहतियाती कदम के रूप में यह फैसला लिया गया। हाई कोर्ट ने क्या कहा? सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार के आदेश की वैधता पर विचार किया। अदालत ने माना कि यह फैसला सार्वजनिक हित और परीक्षा सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है। कोर्ट ने कहा कि जब किसी राष्ट्रीय परीक्षा की विश्वसनीयता दांव पर हो, तब सरकार को आवश्यक कदम उठाने का अधिकार है। इसी आधार पर Telegram की याचिका खारिज कर दी गई। Telegram की दलील क्या थी? Telegram ने अदालत में कहा कि कुछ लोगों की गलत गतिविधियों के कारण करोड़ों सामान्य उपयोगकर्ताओं को परेशानी नहीं होनी चाहिए। कंपनी ने दावा किया कि उसने संदिग्ध चैनलों और लिंक के खिलाफ कार्रवाई की है और जांच एजेंसियों के साथ सहयोग भी किया है। कंपनी का यह भी कहना था कि प्लेटफॉर्म पर पूरी तरह रोक लगाने से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संचार के अधिकार पर असर पड़ता है। करोड़ों यूजर्स के अधिकारों पर भी हुई चर्चा सुनवाई के दौरान यह सवाल भी उठा कि क्या कुछ संदिग्ध गतिविधियों के कारण बड़ी संख्या में उपयोगकर्ताओं के अधिकार सीमित किए जा सकते हैं। इस पर सरकार ने जवाब दिया कि Telegram की तकनीकी संरचना और बॉट सिस्टम का दुरुपयोग तेजी से जानकारी फैलाने में किया जा सकता है, जिससे परीक्षा सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। सरकार का मानना है कि ऐसी असाधारण परिस्थितियों में अस्थायी प्रतिबंध जरूरी हो जाता है। NEET परीक्षा बनी फैसले की बड़ी वजह इस पूरे मामले का केंद्र NEET-UG री-एग्जाम है। पिछले कुछ समय से परीक्षा से जुड़े विवाद और कथित पेपर लीक के आरोप चर्चा में रहे हैं। ऐसे माहौल में सरकार किसी भी संभावित जोखिम से बचना चाहती है। शिक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और भरोसा बनाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि इससे लाखों छात्रों का भविष्य जुड़ा होता है। डिजिटल Freedom बनाम National Interest Telegram मामले ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय हितों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। एक तरफ सरकार परीक्षा सुरक्षा और कानून व्यवस्था की बात कर रही है, वहीं दूसरी तरफ डिजिटल अधिकारों के पक्षधर सवाल उठा रहे हैं कि क्या पूरे प्लेटफॉर्म पर रोक लगाना उचित कदम है। आगे क्या होगा? फिलहाल हाई कोर्ट के फैसले के बाद Telegram को तत्काल राहत नहीं मिली है। अब सभी की नजर केंद्र सरकार के अगले कदम और NEET री-एग्जाम के सफल आयोजन पर टिकी हुई है। यह मामला आने वाले समय में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही, ऑनलाइन कंटेंट मॉडरेशन और सरकारी हस्तक्षेप से जुड़ी नीतियों पर भी असर डाल सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Telegram

Telegram Controversy: सरकार बोली- आतंकी नेटवर्क के लिए आसान माध्यम बनता जा रहा ऐप

लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप Telegram एक बार फिर कानूनी और सुरक्षा बहस के केंद्र में आ गया है। हाई कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने दावा किया कि इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कई मामलों में आतंकी गतिविधियों, कट्टरपंथी प्रचार और अवैध नेटवर्किंग के लिए किया जा रहा है। सरकार ने अदालत से कहा कि Telegram धीरे-धीरे ऐसे तत्वों के लिए एक सुरक्षित डिजिटल माध्यम बनता जा रहा है, जो देश की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। केंद्र सरकार ने कोर्ट में क्या कहा? सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश वकीलों ने बताया कि Telegram के कुछ फीचर्स, खासकर एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन और बड़े पैमाने पर संचालित चैनल, सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं। सरकार का कहना है कि कई बार जांच एजेंसियों को जरूरी जानकारी समय पर नहीं मिल पाती, जिससे संवेदनशील मामलों की जांच प्रभावित होती है। केंद्र ने यह भी कहा कि तकनीक का उद्देश्य लोगों को सुविधा देना है, लेकिन जब उसी तकनीक का उपयोग कानून-विरोधी गतिविधियों के लिए होने लगे तो सरकार का हस्तक्षेप जरूरी हो जाता है। सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ी चिंता सरकारी पक्ष के अनुसार, हाल के वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें Telegram का उपयोग संदिग्ध गतिविधियों के लिए किया गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि कुछ आतंकी और आपराधिक संगठन इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल अपने नेटवर्क को सक्रिय रखने और संदेशों के आदान-प्रदान के लिए कर रहे हैं। यही वजह है कि सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अधिक जवाबदेही और सहयोग की मांग करती रही हैं। प्राइवेसी बनाम सुरक्षा की बहस Telegram को दुनियाभर में सुरक्षित और निजी संवाद के लिए जाना जाता है। लाखों लोग इसका इस्तेमाल रोजमर्रा की बातचीत, बिजनेस और सूचना साझा करने के लिए करते हैं। लेकिन जब किसी प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग की खबरें सामने आती हैं, तो निजता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर बहस तेज हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यूजर्स की प्राइवेसी भी महत्वपूर्ण है और सुरक्षा भी। इसलिए दोनों के बीच संतुलित समाधान निकालना सबसे बड़ी चुनौती है। आगे क्या होगा? हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई जारी है और आने वाले दिनों में इस पर और महत्वपूर्ण बहस हो सकती है। अदालत का फैसला सिर्फ Telegram तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में अन्य सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए भी एक महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकता है। फिलहाल, इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि डिजिटल युग में राष्ट्रीय सुरक्षा, तकनीकी स्वतंत्रता और यूजर प्राइवेसी के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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NEET

NEET की दर्दनाक सच्चाई: 2 दिन में 4 मौतें, छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर बड़ी बहस

देश में मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को लेकर बढ़ता मानसिक दबाव एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। पिछले 48 घंटों में अलग-अलग राज्यों से सामने आए दर्दनाक मामलों ने न सिर्फ परिवारों को तोड़ दिया, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी बहस छेड़ दी है। गुजरात और तमिलनाडु से सामने आए दर्दनाक मामले गुजरात में एक छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की खबर सामने आई है। वहीं तमिलनाडु की एक छात्रा ने अपने आखिरी संदेश में दोबारा परीक्षा देने के डर और लगातार बढ़ते मानसिक दबाव का जिक्र किया, जिसने सभी को भावुक कर दिया। इसी दौरान अन्य राज्यों से भी ऐसे ही दुखद मामले सामने आए हैं, जिससे कुल मिलाकर दो दिनों में कम से कम चार छात्रों की मौत की स्थिति बनी है। परिवारों ने बताया— लंबे समय से था तनाव परिजनों का कहना है कि बच्चे लंबे समय से NEET की तैयारी में दिन-रात मेहनत कर रहे थे, लेकिन लगातार बढ़ती प्रतिस्पर्धा, कोचिंग का दबाव और भविष्य की अनिश्चितता उन्हें अंदर ही अंदर तोड़ रही थी। कई माता-पिता ने बताया कि बच्चे तनाव में रहते थे, लेकिन खुलकर अपनी बात साझा नहीं कर पा रहे थे। विशेषज्ञों की चिंता: मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान जरूरी विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ परीक्षा का दबाव नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता की कमी भी एक बड़ा कारण है। छात्रों के लिए समय रहते काउंसलिंग, भावनात्मक सपोर्ट और सुरक्षित माहौल बेहद जरूरी है, ताकि वे दबाव को संभाल सकें। शिक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल इन घटनाओं के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि क्या हमारी शिक्षा व्यवस्था केवल रैंक और मार्क्स पर ही केंद्रित रह गई है? समाज के कई वर्ग अब मांग कर रहे हैं कि परीक्षा प्रणाली के साथ-साथ छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को भी उतनी ही गंभीरता से लिया जाए। देश में गहराता संकट और बढ़ती चिंता फिलहाल इन मामलों ने पूरे देश को झकझोर दिया है और एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि सफलता की दौड़ में कहीं हम अपने बच्चों को खो तो नहीं रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Stock Market

Stock Market Rally: NSE ₹30,000 करोड़ IPO अपडेट से निवेशकों में जोश, PSU शेयरों में भारी खरीदारी

Stock Market में आज सुबह से ही अलग तरह की हलचल देखने को मिली। वजह थी NSE (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज) के ₹30,000 करोड़ के संभावित IPO को लेकर आई बड़ी अपडेट। जैसे ही यह खबर सामने आई, बाजार में निवेशकों की दिलचस्पी अचानक बढ़ गई और कई जुड़े हुए शेयरों में तेज खरीदारी देखने को मिली। कुछ स्टॉक्स तो दिन के कारोबार में करीब 14% तक उछल गए। NSE IPO को लेकर क्या है नई अपडेट? NSE ने अपना DRHP (Draft Red Herring Prospectus) SEBI के पास दाखिल कर दिया है, जिसे IPO प्रक्रिया का सबसे अहम कदम माना जाता है। अनुमान लगाया जा रहा है कि यह इश्यू करीब ₹30,000 करोड़ का हो सकता है, जो इसे भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO बना सकता है। खास बात यह है कि यह पूरा IPO Offer for Sale (OFS) होगा, यानी इसमें कंपनी को नई पूंजी नहीं मिलेगी, बल्कि मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे। शेयरों में क्यों आई 14% तक की तेजी? NSE IPO की खबर का सीधा असर उन कंपनियों पर पड़ा जिनका NSE में निवेश या संबंध है। बाजार में “value unlocking” और listing excitement की वजह से खरीदारी बढ़ गई। मुख्य असर: कौन बेच रहा है हिस्सेदारी? इस मेगा IPO में कई बड़े सरकारी और संस्थागत निवेशक अपनी हिस्सेदारी कम कर सकते हैं: LIC का अहम फैसला इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह रही कि LIC ने NSE में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखने का संकेत दिया है। इससे बाजार में यह संदेश गया कि NSE के लॉन्ग टर्म ग्रोथ को लेकर भरोसा मजबूत है। NSE IPO क्यों माना जा रहा है ऐतिहासिक? निवेशकों के लिए जरूरी बात हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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अयोध्या

अयोध्या में हलचल: चढ़ावा केस के बीच CM योगी का दौरा, प्रशासन ने चंपत राय को रोका

अयोध्या एक बार फिर सुर्खियों में है। चढ़ावा चोरी से जुड़े कथित मामले की जांच के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath (CM योगी) का कल Ayodhya दौरा प्रस्तावित है। इस दौरे को लेकर प्रशासन और ट्रस्ट स्तर पर लगातार बैठकों और सुरक्षा समीक्षा का दौर चल रहा है। सूत्रों के अनुसार, संवेदनशील हालात और जांच की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव Champat Rai से आग्रह किया है कि वे स्वयं कार्यक्रम में मौजूद न रहें और उनकी जगह किसी प्रतिनिधि को भेजा जाए। यह निर्णय पूरी तरह सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण को ध्यान में रखकर लिया गया है। सुरक्षा और जांच के बीच बढ़ी सतर्कता चढ़ावा चोरी मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे अयोध्या में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। प्रशासन का फोकस इस बात पर है कि VIP मूवमेंट और श्रद्धालुओं की भीड़ दोनों को बिना किसी बाधा के नियंत्रित किया जा सके। विकास कार्यों की समीक्षा भी संभव मुख्यमंत्री के इस दौरे को केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं माना जा रहा है। माना जा रहा है कि वे इस दौरान अयोध्या में चल रहे विकास कार्यों और धार्मिक परियोजनाओं की भी समीक्षा कर सकते हैं। हाल के वर्षों में अयोध्या में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच यह दौरा काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक और प्रशासनिक माहौल गर्म इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल बढ़ा दी है। जहां एक तरफ जांच एजेंसियां मामले की तह तक जाने में जुटी हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक स्तर पर हर गतिविधि को बेहद सावधानी से संभाला जा रहा है। कुल मिलाकर, चढ़ावा चोरी जांच और मुख्यमंत्री के दौरे ने अयोध्या के माहौल को संवेदनशील बना दिया है, जहां हर कदम अब पहले से ज्यादा अहम हो गया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bank

UP Bank Locker Scam: 96 Gold Packets गायब, करोड़ों की हेराफेरी का शक

उत्तर प्रदेश से एक चौंकाने वाला बैंकिंग मामला सामने आया है, जिसने आम लोगों से लेकर बैंकिंग सिस्टम तक में चिंता बढ़ा दी है। एक बैंक के लॉकर से 96 सोने के पैकेट गायब पाए गए हैं, जिसके बाद करोड़ों रुपये की हेराफेरी और गंभीर गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है। इस घटना के बाद बैंक में अफरा-तफरी का माहौल है और पूरे मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई है। कैसे खुला पूरा मामला? यह मामला तब सामने आया जब बैंक में नियमित ऑडिट और लॉकर वेरिफिकेशन की प्रक्रिया चल रही थी। जांच के दौरान रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में बड़ा अंतर पाया गया। दस्तावेजों में दर्ज 96 सोने के पैकेट लॉकर में मौजूद नहीं थे। इस गड़बड़ी ने बैंक प्रशासन को तुरंत अलर्ट कर दिया। तीन कर्मचारियों पर FIR, जांच तेज मामले में शुरुआती तौर पर बैंक के तीन कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। आरोप है कि लॉकर सिस्टम में लापरवाही या संभावित मिलीभगत के जरिए यह बड़ी गड़बड़ी हुई हो सकती है। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और कई अहम पहलुओं को खंगाला जा रहा है। जांच टीम अब बैंक के CCTV फुटेज, लॉकर एक्सेस लॉग, एंट्री रिकॉर्ड और आंतरिक दस्तावेजों की गहराई से जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह गड़बड़ी कब और कैसे हुई। करोड़ों रुपये की हेराफेरी की आशंका प्रारंभिक अनुमान में इस पूरे मामले में करोड़ों रुपये के सोने की हेराफेरी की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, असली नुकसान कितना है, यह पूरी जांच के बाद ही साफ हो पाएगा। फिलहाल बैंक और पुलिस दोनों ही किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से बच रहे हैं। बैंक प्रशासन का रिएक्शन बैंक अधिकारियों का कहना है कि इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि जांच पूरी तरह पारदर्शी होगी और अगर किसी कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही ग्राहकों की सुरक्षा और संपत्ति को पूरी तरह सुरक्षित रखने का आश्वासन भी दिया गया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Priyanka Gandhi

Priyanka Gandhi का सरकार पर हमला: NEET छात्रों से ₹1.32 लाख करोड़ वसूली, लोन माफी पर छिड़ा विवाद

देश में मेडिकल शिक्षा और NEET परीक्षा व्यवस्था को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि NEET और मेडिकल एडमिशन के नाम पर छात्रों और उनके परिवारों से भारी रकम वसूली जा रही है। ₹1.32 लाख करोड़ वसूली का दावा प्रियंका गांधी ने दावा किया कि NEET सिस्टम के जरिए छात्रों से करीब ₹1.32 लाख करोड़ तक की राशि वसूली गई है। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा देश के शिक्षा बजट के लगभग बराबर है, जो चिंता का विषय है। लोन माफी पर भी सवाल उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दूसरी तरफ बड़े उद्योगपतियों के लगभग ₹16 लाख करोड़ तक के लोन माफ किए गए हैं। इस तुलना को लेकर उन्होंने सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं। राजनीतिक बहस तेज इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है और सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है। हालांकि, सरकार की ओर से इस पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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TMC

West Bengal Political Crisis TMC को झटका, ऋतब्रत बनर्जी की LoP कुर्सी बरकरार

पश्चिम बंगाल (West Bengal) की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition) की नियुक्ति को लेकर चल रहे विवाद में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और TMC को कलकत्ता हाईकोर्ट से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। इस फैसले के बाद ऋतब्रत बनर्जी का LoP पद पर बने रहना तय माना जा रहा है, जिससे राज्य की सियासत और ज्यादा गरमा गई है। क्या है पूरा राजनीतिक विवाद? पूरा मामला तब शुरू हुआ जब विधानसभा में कुछ विधायकों के समर्थन के बाद ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष घोषित किया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें एक बड़े विधायक समूह का समर्थन मिला, जिससे सदन में शक्ति संतुलन बदल गया। इसके बाद विधानसभा स्पीकर ने उनके नाम पर मुहर लगाई, लेकिन टीएमसी के आधिकारिक गुट ने इस फैसले को असंवैधानिक बताते हुए विरोध दर्ज कराया। हाईकोर्ट का अहम फैसला टीएमसी की ओर से इस नियुक्ति को चुनौती दी गई और अदालत से अंतरिम रोक लगाने की मांग की गई। हालांकि, कलकत्ता हाईकोर्ट ने इस पर कोई स्टे देने से साफ इनकार कर दिया। इसका सीधा मतलब है कि मौजूदा स्थिति बनी रहेगी और ऋतब्रत बनर्जी फिलहाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद पर कार्य करते रहेंगे। कोर्ट ने कहा कि मामले की विस्तृत सुनवाई आगे की तारीख में की जाएगी। टीएमसी में अंदरूनी तनाव बढ़ा इस फैसले के बाद टीएमसी के भीतर असंतोष और गहरा गया है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि पार्टी में मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं। राजनीतिक असर क्या होगा? यह मामला सिर्फ एक पद का नहीं, बल्कि बंगाल की पूरी राजनीतिक दिशा को प्रभावित कर सकता है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के लिए यह स्थिति एक बड़ी चुनौती मानी जा रही है, क्योंकि इससे पार्टी की एकता और विधानसभा में उसकी रणनीति दोनों पर असर पड़ सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Donald Trump बयान: ईरानी स्कूल पर अमेरिकी मिसाइल गिरने के सबूत नहीं, 175 मौतों पर भी अनिश्चितता

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने एक हालिया बयान में कहा है कि ईरान में एक स्कूल पर अमेरिकी मिसाइल गिरने के कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उस समय क्षेत्र में “हर तरफ मिसाइलें चल रही थीं”, ऐसे में यह तय करना मुश्किल है कि किस हमले के लिए कौन जिम्मेदार है। क्या कहा ट्रम्प ने? ट्रम्प के अनुसार, जिस घटना में 175 लोगों की मौत की बात सामने आई थी, उसे लेकर अभी तक स्पष्ट जानकारी नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि उस समय हालात बेहद तनावपूर्ण थे और कई तरफ से हमले हो रहे थे। पृष्ठभूमि यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव पहले से ही कई बार बढ़ चुका है। विभिन्न घटनाओं को लेकर दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा है। मौतों के आंकड़े पर सवाल रिपोर्ट्स में 175 लोगों की मौत का दावा किया गया था, लेकिन ट्रम्प ने कहा कि वास्तविक जिम्मेदारी तय करना मुश्किल है क्योंकि युद्ध जैसी स्थिति में अलग-अलग हमलों की पुष्टि करना आसान नहीं होता।
‘वेलकम टू द जंगल’ की धमाकेदार शुरुआत: 56 हजार टिकट बिके, एडवांस बुकिंग से ₹1.34 करोड़ की कमाई

‘वेलकम टू द जंगल’ की धमाकेदार शुरुआत: 56 हजार टिकट बिके, एडवांस बुकिंग से ₹1.34 करोड़ की कमाई

बॉलीवुड फिल्म Welcome to the Jungle को लेकर दर्शकों में जबरदस्त क्रेज देखने को मिल रहा है। रिलीज से पहले ही फिल्म ने एडवांस बुकिंग में शानदार प्रदर्शन किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म के करीब 56 हजार टिकट पहले ही बिक चुके हैं, जिससे मेकर्स को लगभग ₹1.34 करोड़ की कमाई हो चुकी है। स्टारकास्ट ने नए गाने पर किया धमाकेदार डांस फिल्म के नए रिलीज हुए गाने “ओ मेरे बलम” में पूरी स्टारकास्ट जमकर थिरकती नजर आ रही है। गाने की एनर्जी और मस्ती भरे डांस मूव्स सोशल मीडिया पर भी काफी वायरल हो रहे हैं। फैंस इस गाने को खूब पसंद कर रहे हैं और फिल्म को लेकर उत्साह और भी बढ़ गया है। एडवांस बुकिंग में रिकॉर्ड शुरुआत फिल्म की एडवांस बुकिंग से साफ है कि दर्शकों में इसे लेकर काफी उम्मीदें हैं। कॉमेडी और एंटरटेनमेंट से भरपूर यह फिल्म रिलीज से पहले ही चर्चा में बनी हुई है।
“धोखे से दूसरे के बच्चे मेरी कोख में डाल दिए” – महिला का गंभीर आरोप, DNA टेस्ट के बाद उठा सवाल

“धोखे से दूसरे के बच्चे मेरी कोख में डाल दिए” – महिला का गंभीर आरोप, DNA टेस्ट के बाद उठा सवाल

एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक महिला ने आरोप लगाया है कि उसे धोखे में रखकर किसी और के बच्चे उसकी कोख में डाल दिए गए। महिला का कहना है कि जब जन्म के बाद बच्चों की शक्ल-सूरत परिवार से मेल नहीं खाई, तो उसने शक के आधार पर DNA टेस्ट करवाया। DNA रिपोर्ट के बाद मामला और भी उलझ गया है, और अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर उसके अपने बच्चे कहां गए? क्या है पूरा मामला? पीड़िता का आरोप है कि इलाज या प्रक्रिया के दौरान बड़ी लापरवाही या धोखाधड़ी हुई, जिसकी वजह से उसे अपने जैविक बच्चों की जगह किसी और के बच्चे मिल गए। शक बढ़ने पर परिवार ने DNA टेस्ट कराया, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद मामले में गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच और सवाल अब इस पूरे मामले में यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि गलती कहां हुई—क्या यह मेडिकल लापरवाही है या फिर किसी तरह की धोखाधड़ी। पीड़िता लगातार अपने असली बच्चों का पता लगाने की मांग कर रही है। फिलहाल संबंधित पक्षों से पूछताछ और जांच की संभावना जताई जा रही है।
भारत ने बांग्लादेश को 5 विकेट से हराया, विमेंस वर्ल्ड कप में सेमीफाइनल की उम्मीदें बरकरार

भारत ने बांग्लादेश को 5 विकेट से हराया, विमेंस वर्ल्ड कप में सेमीफाइनल की उम्मीदें बरकरार

विमेंस वर्ल्ड कप में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बांग्लादेश को 5 विकेट से हरा दिया। इस जीत के साथ भारतीय टीम की सेमीफाइनल में पहुंचने की उम्मीदें एक बार फिर मजबूत हो गई हैं। टीम ने दबाव वाले मैच में संयम दिखाते हुए लक्ष्य को हासिल किया और महत्वपूर्ण दो अंक अपने नाम किए। शेफाली का दमदार अर्धशतक, राधा ने गेंद से मचाया कहर भारत की ओर से युवा बल्लेबाज शेफाली वर्मा ने बेहतरीन बल्लेबाजी करते हुए अर्धशतक लगाया और टीम को मजबूत शुरुआत दी। उनकी पारी ने मैच की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाई। वहीं गेंदबाजी में राधा यादव ने शानदार प्रदर्शन किया और 3 विकेट लेकर बांग्लादेश की बल्लेबाजी को काफी हद तक रोक दिया।
सिया की मां का बयान: “बेटी दोषी है तो फांसी दे दो”, पिता ने उठाए सवाल

सिया की मां का बयान: “बेटी दोषी है तो फांसी दे दो”, पिता ने उठाए सवाल

एक दिल दहला देने वाले मामले में सिया के माता-पिता के अलग-अलग बयान सामने आए हैं। मां ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि अगर उनकी बेटी दोषी पाई जाती है तो उसे सजा-ए-फांसी दी जानी चाहिए। वहीं पिता ने इस पूरे मामले पर अलग ही पक्ष रखा है। उनका कहना है कि सिया अपने रिश्ते से खुश थी और लोहगढ़ जाने की जिद केतन ने की थी। क्या है पूरा मामला? जानकारी के मुताबिक, यह मामला सिया और केतन से जुड़े एक रिश्ते और उसके बाद की घटनाओं से संबंधित है। इसी मामले में दोनों परिवारों के बयान सामने आने के बाद कहानी और उलझती नजर आ रही है। परिवार में अलग-अलग राय इस घटना में सबसे खास बात यह है कि एक ही परिवार के भीतर भी राय बंटी हुई नजर आ रही है। मां जहां सख्त सजा की मांग कर रही हैं, वहीं पिता घटना को अलग नजरिए से देख रहे हैं।

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