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Sajjan Kumar

Sajjan Kumar Death: 1984 सिख दंगा केस के दोषी सज्जन कुमार का निधन, तिहाड़ में काट रहे थे उम्रकैद

1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों में दोषी ठहराए गए पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार (Sajjan Kumar) का निधन हो गया है। 80 वर्षीय सज्जन कुमार दिल्ली की तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे थे। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। सज्जन कुमार का नाम 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामलों में लंबे समय से चर्चा में रहा। दंगों के करीब चार दशक बाद अदालतों में चले मुकदमों के दौरान उनके खिलाफ गंभीर आरोप साबित हुए और उन्हें अलग-अलग मामलों में सजा सुनाई गई। तिहाड़ जेल में बंद थे सज्जन कुमार सज्जन कुमार को दिल्ली में 1984 की हिंसा से जुड़े एक मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने दिसंबर 2018 में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। मामला हिंसा के दौरान पांच लोगों की हत्या से जुड़ा था। इसके बाद भी उनके खिलाफ अन्य मामलों में कानूनी कार्रवाई जारी रही। 2025 में एक अन्य 1984 दंगा मामले में भी अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई। इन मामलों के चलते वह तिहाड़ जेल में बंद थे। 1984 के दंगों से कैसे जुड़ा था मामला? 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिख विरोधी हिंसा भड़क गई थी। राजधानी दिल्ली में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और कई परिवारों को हिंसा का सामना करना पड़ा। सज्जन कुमार पर इसी हिंसा के दौरान लोगों को भड़काने और हत्या से जुड़े मामलों में आरोप लगे थे। हालांकि, उनके खिलाफ दर्ज मामलों में अदालतों के फैसले अलग-अलग रहे। कुछ मामलों में मिली थी राहत सज्जन कुमार को सभी मामलों में दोषी नहीं ठहराया गया। जनवरी 2026 में दिल्ली की एक अदालत ने जनकपुरी और विकासपुरी इलाके में 1984 की हिंसा से जुड़े एक मामले में उन्हें बरी कर दिया था। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर पाया। इससे साफ है कि उनके खिलाफ चले अलग-अलग मामलों में न्यायिक फैसले एक जैसे नहीं रहे। राजनीति से जेल तक का सफर सज्जन कुमार दिल्ली की राजनीति में कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में रहे और लोकसभा सांसद भी बने। लेकिन 1984 के दंगा मामलों ने उनके राजनीतिक जीवन पर लंबे समय तक असर डाला। कई वर्षों तक चली जांच और अदालती सुनवाई के बाद उन्हें कुछ मामलों में दोषी ठहराया गया और उम्रकैद की सजा मिली। अब उनके निधन के साथ 1984 दंगा मामलों से जुड़ा उनका लंबा कानूनी और राजनीतिक अध्याय समाप्त हो गया है। हालांकि, 1984 की हिंसा आज भी हजारों प्रभावित परिवारों के लिए एक बेहद संवेदनशील अध्याय है। Sajjan Kumar Death पर क्यों है चर्चा? सज्जन कुमार की मौत की खबर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामलों में न्याय की प्रक्रिया कई दशकों तक चली। उनके खिलाफ कुछ मामलों में दोषसिद्धि हुई, जबकि कुछ में उन्हें अदालत से राहत भी मिली। यही वजह है कि उनके निधन के बाद एक बार फिर 1984 के दंगा मामलों और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Chamoli

Dog Attack in Chamoli: कुत्तों के आतंक से सहमे लोग, 10 स्कूल बंद; बच्चों की पढ़ाई Online

उत्तराखंड के चमोली (Chamoli) जिले के नारायणबगड़ इलाके में इन दिनों आवारा कुत्तों का आतंक लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। लगातार सामने आ रही हमले की घटनाओं के बाद बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने इलाके के 10 स्कूलों को चार दिन के लिए बंद रखने का फैसला किया है। स्कूल बंद होने के बावजूद बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए Online Classes चलाने के निर्देश दिए गए हैं। बच्चों को स्कूल भेजने से डर रहे अभिभावक नारायणबगड़ और आसपास के इलाकों में कुत्तों के आक्रामक व्यवहार से स्थानीय लोगों में डर बढ़ गया है। खासकर सुबह स्कूल जाने और छुट्टी के समय बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावक चिंतित हैं। हालात ऐसे बने कि कई लोग जरूरी काम से बाहर निकलते समय भी हाथ में डंडा लेकर चलने को मजबूर हैं। स्थानीय स्तर पर कुत्तों के हमले की कई घटनाएं सामने आने के बाद प्रशासन ने स्कूलों को अस्थायी रूप से बंद रखने का निर्णय लिया। अधिकारियों का मानना है कि स्थिति सामान्य होने तक बच्चों को स्कूल बुलाना जोखिम भरा हो सकता है। 20 से 23 अगस्त तक बंद रहेंगे 10 स्कूल प्रशासन के निर्देश के अनुसार नारायणबगड़ क्षेत्र के 10 विद्यालय 20, 21, 22 और 23 अगस्त को बंद रहेंगे। इस दौरान बच्चों को स्कूल नहीं बुलाया जाएगा। हालांकि, शिक्षकों को Online माध्यम से पढ़ाई जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि चार दिन के अवकाश का असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर न पड़े। यह फैसला स्थानीय लोगों और अभिभावकों की चिंता को देखते हुए लिया गया है। स्कूलों को बंद करने का उद्देश्य बच्चों को आवारा कुत्तों के संभावित हमलों से सुरक्षित रखना है। कुत्तों को पकड़ने का अभियान तेज मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने आवारा कुत्तों को पकड़ने की कार्रवाई भी शुरू कर दी है। वन विभाग की Quick Response Team यानी QRT को अभियान में लगाया गया है। वहीं पशुपालन विभाग की टीम कुत्तों को Anti-Rabies Vaccine देने का काम कर रही है। प्रशासन की कोशिश है कि जिन इलाकों में कुत्तों का आतंक ज्यादा है, वहां उनकी संख्या और गतिविधियों को नियंत्रित किया जाए। साथ ही लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। 600+ बच्चों की Online पढ़ाई? इस मामले को लेकर कुछ रिपोर्टों में 600 से ज्यादा बच्चों के Online Classes से जुड़ने की बात कही जा रही है। हालांकि, उपलब्ध प्रशासनिक जानकारी में विद्यार्थियों की कुल संख्या का स्पष्ट आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है। इसलिए 600+ का आंकड़ा प्रकाशित करते समय आधिकारिक पुष्टि को प्राथमिकता देना जरूरी है। कब खुलेगा स्कूल, अभी स्थिति पर नजर फिलहाल चार दिनों के लिए स्कूल बंद रखने का फैसला लिया गया है। इसके बाद इलाके की स्थिति की समीक्षा की जाएगी। अगर कुत्तों का खतरा कम होता है तो स्कूल दोबारा खोले जा सकते हैं। नारायणबगड़ में इस समय सबसे बड़ी चिंता बच्चों की सुरक्षा को लेकर है। प्रशासन की कार्रवाई से लोगों को राहत की उम्मीद है, लेकिन स्थानीय लोगों की नजर अब इस बात पर है कि आवारा कुत्तों की समस्या का स्थायी समाधान कब तक निकलता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Economic D-Day

Trump का Iran पर Economic D-Day: तेल तस्करी से जुड़े नेटवर्क होंगे निशाने पर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ आर्थिक मोर्चे पर अब तक का सबसे बड़ा दबाव बनाने का ऐलान किया है। Trump ने इसे “Economic D-Day” बताते हुए कहा कि अमेरिका ईरान की आर्थिक ताकत और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को कमजोर करने के लिए व्यापक कार्रवाई करेगा। साथ ही उन्होंने उन देशों, कंपनियों और संस्थानों को भी चेतावनी दी है, जो ईरान को किसी तरह की आर्थिक मदद या कारोबारी रास्ता उपलब्ध करा रहे हैं। ईरान के खिलाफ अब Economic Warfare ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका का नया अभियान सिर्फ सामान्य प्रतिबंधों तक सीमित नहीं रहेगा। उनका लक्ष्य ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करना है। ट्रम्प के मुताबिक, ईरान को समझौते का मौका दिया गया, लेकिन बातचीत में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई। इसके बाद वॉशिंगटन ने आर्थिक दबाव को और बढ़ाने का फैसला किया है। ट्रम्प ने इसे किसी देश के खिलाफ की जाने वाली सबसे कड़ी आर्थिक कार्रवाई बताया है। हालांकि, घोषणा के समय सभी नए प्रतिबंधों का विस्तृत खाका सार्वजनिक नहीं किया गया है। Oil Smuggling Network पर अमेरिका की नजर नई कार्रवाई का सबसे अहम हिस्सा ईरान के Oil Smuggling Network को निशाना बनाना है। अमेरिका उन रास्तों को बंद करना चाहता है जिनके जरिए ईरान प्रतिबंधों के बावजूद तेल बेचकर विदेशी मुद्रा हासिल करता है। ट्रम्प ने तेल की कथित तस्करी के अलावा Cash Transfers, Currency Exchange, Financial Swap Lines, Ship Registries और Front Companies जैसे नेटवर्क का भी जिक्र किया है। इन माध्यमों पर कार्रवाई से ईरान की विदेशों तक पहुंच और कारोबार प्रभावित हो सकता है। मदद करने वाले देशों को भी सीधी चेतावनी ट्रम्प का संदेश सिर्फ तेहरान तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा है कि जो देश, बैंक, कारोबारी संस्थान, एयरपोर्ट या सरकारी एजेंसियां ईरान को आर्थिक “lifeline” उपलब्ध कराती हैं, उन्हें भी गंभीर आर्थिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। इससे अमेरिकी प्रतिबंधों का दायरा दूसरे देशों तक पहुंचने की आशंका बढ़ गई है। यानी आने वाले दिनों में ईरान के साथ कारोबार करने वाली विदेशी कंपनियों और वित्तीय संस्थानों पर भी अमेरिकी दबाव बढ़ सकता है। UAE ने भी ईरान के साथ कारोबार रोका इसी बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने ईरान के साथ व्यापार और वित्तीय लेनदेन निलंबित करने का फैसला किया है। ईरान के साथ कारोबार के लिए UAE लंबे समय से एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय केंद्र रहा है। ऐसे में यह फैसला तेहरान के लिए आर्थिक तौर पर अहम झटका माना जा रहा है। UAE का यह कदम ऐसे समय आया है जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव पहले से काफी बढ़ा हुआ है। इससे ईरान के व्यापारिक और वित्तीय नेटवर्क पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। China की भूमिका पर भी नजर ईरान के तेल कारोबार में चीन की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसलिए अगर अमेरिका प्रतिबंधों का दायरा ईरान के साथ कारोबार करने वाली विदेशी कंपनियों और वित्तीय संस्थानों तक बढ़ाता है, तो इसका असर अमेरिका-चीन संबंधों पर भी पड़ सकता है। Reuters के अनुसार, चीन ईरानी तेल का प्रमुख खरीदार है। यही वजह है कि आने वाले समय में Washington के अगले कदम पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी। Strait of Hormuz से बढ़ी Global चिंता ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव के बीच Strait of Hormuz भी अंतरराष्ट्रीय चिंता का बड़ा कारण बना हुआ है। यह दुनिया के महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। यहां शिपिंग में किसी भी बड़े व्यवधान का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। गुरुवार को भी Middle East तनाव के बीच तेल की कीमतों में तेजी देखी गई। Reuters के मुताबिक, Brent crude करीब चार सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गया। आगे क्या होगा? ट्रम्प के इस ऐलान के बाद अमेरिका और ईरान के बीच आर्थिक टकराव और बढ़ने की संभावना है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अमेरिका आगे किन देशों, कंपनियों और वित्तीय संस्थानों पर कार्रवाई करता है। फिलहाल तस्वीर साफ है—Washington अब Tehran पर सिर्फ प्रतिबंधों का दबाव नहीं बढ़ा रहा, बल्कि उसके तेल, वित्त और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नेटवर्क को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है। अगर यह अभियान बड़े पैमाने पर लागू होता है, तो इसका असर ईरान के साथ-साथ वैश्विक तेल बाजार और दूसरे देशों के कारोबार पर भी पड़ सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gold-Silver

Gold-Silver Rate: सोना-चांदी ने फिर पकड़ी रफ्तार, जानिए आज का ताजा भाव

सोना-चांदी (Gold-Silver) खरीदने वालों के लिए आज का दिन खास रहा। सराफा बाजार में दोनों कीमती धातुओं के दाम में जोरदार तेजी देखने को मिली। चांदी की कीमत एक ही कारोबारी सत्र में ₹9,260 बढ़कर करीब ₹2.38 लाख प्रति किलो पहुंच गई। वहीं, 10 ग्राम सोने का भाव भी ₹3,519 चढ़कर करीब ₹1.57 लाख तक पहुंच गया। कीमती धातुओं की कीमतों में इस तेजी ने निवेशकों के साथ-साथ उन लोगों का भी ध्यान खींचा है, जो आने वाले समय में शादी या किसी खास मौके के लिए सोना-चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे हैं। Silver Price में बड़ा उछाल चांदी की कीमत में हुई तेजी इस बार सबसे ज्यादा चर्चा में है। करीब ₹9 हजार से ज्यादा की बढ़त के बाद चांदी का भाव ₹2.38 लाख प्रति किलो के आसपास पहुंच गया है। चांदी की कीमत में तेजी के पीछे घरेलू मांग के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार की चाल और औद्योगिक मांग को भी अहम माना जाता है। चांदी का इस्तेमाल सिर्फ गहनों और निवेश के लिए ही नहीं होता, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और कई औद्योगिक क्षेत्रों में भी किया जाता है। इसलिए इसकी कीमत पर वैश्विक आर्थिक गतिविधियों का असर तेजी से दिखाई देता है। Gold Price भी हुआ महंगा चांदी के साथ सोने ने भी तेजी दिखाई। 10 ग्राम सोने की कीमत में ₹3,519 का इजाफा हुआ और भाव करीब ₹1.57 लाख तक पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की मजबूती और निवेशकों की सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ती दिलचस्पी ने घरेलू बाजार को भी सहारा दिया। हाल के कारोबार में कमजोर डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी जैसे संकेतों ने भी सोने की कीमत को सपोर्ट किया है। ऐसे माहौल में निवेशक अक्सर Gold को सुरक्षित विकल्प के तौर पर देखते हैं। क्या ₹1.70 लाख तक पहुंच सकता है Gold? अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सोने का भाव इस साल ₹1.70 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है? बाजार में ऐसी संभावनाओं को लेकर चर्चा जरूर है, लेकिन कीमत का अगला स्तर कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। अमेरिकी फेड की ब्याज दर नीति, डॉलर की चाल, महंगाई, भू-राजनीतिक तनाव और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी सोने की दिशा तय करने वाले प्रमुख फैक्टर हैं। अगर इन परिस्थितियों से सोने को लगातार समर्थन मिलता रहा, तो आने वाले महीनों में नए रिकॉर्ड देखने को मिल सकते हैं। खरीदारों के लिए क्या है मतलब? सोने-चांदी की लगातार बढ़ती कीमतों से आम खरीदारों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। खासकर शादी-ब्याह के सीजन में बड़ी मात्रा में खरीदारी करने वालों के लिए कुछ हजार रुपये का अंतर भी बजट पर असर डाल सकता है। हालांकि, सिर्फ तेजी देखकर जल्दबाजी में खरीदारी करना सही रणनीति नहीं मानी जाती। अगर खरीदारी जरूरी है तो स्थानीय सराफा बाजार का ताजा भाव, GST और making charges की जानकारी लेने के बाद ही फैसला करना बेहतर रहेगा। Gold-Silver Rate में आगे भी उतार-चढ़ाव संभव सोना और चांदी इस समय ऊंचे स्तरों पर कारोबार कर रहे हैं। ऐसे में आगे भी तेजी और मुनाफावसूली दोनों देखने को मिल सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाला छोटा बदलाव भी घरेलू कीमतों पर असर डाल सकता है। फिलहाल चांदी में ₹9,260 की छलांग और सोने में ₹3,519 की बढ़त ने बाजार की तस्वीर जरूर बदल दी है। अगर वैश्विक परिस्थितियां कीमती धातुओं के पक्ष में बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में सोना-चांदी नए स्तरों की ओर बढ़ते नजर आ सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Vande Mataram

Vande Mataram Controversy: 1937 के फैसले पर BJP-Congress आमने-सामने, शाह ने साधा निशाना

‘वंदे मातरम्’ को लेकर BJP और Congress के बीच सियासी तकरार एक बार फिर तेज हो गई है। कांग्रेस वर्किंग कमिटी (CWC) ने 19 अगस्त को साफ किया कि पार्टी अपने कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के पहले दो पद ही गाएगी और 1937 के फैसले को ही जारी रखेगी। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और इस फैसले को तुष्टीकरण की राजनीति से जोड़ दिया। अमित शाह ने कांग्रेस पर साधा निशाना अमित शाह ने कांग्रेस के मौजूदा रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि 1937 में कांग्रेस ने ‘वंदे मातरम्’ के पूरे स्वरूप के बजाय कुछ हिस्सों को अपनाने का फैसला किया था। शाह ने आरोप लगाया कि यह फैसला तुष्टीकरण की राजनीति से प्रभावित था। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘वंदे मातरम्’ के मूल स्वरूप और उसके ऐतिहासिक महत्व को फिर से सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है। शाह ने कांग्रेस से अपने पुराने फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग भी की है। Congress का 1937 वाला रुख बरकरार कांग्रेस ने इस विवाद में अपना पक्ष बदलने से इनकार कर दिया है। CWC ने दोहराया कि पार्टी के कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के शुरुआती दो पद ही गाए जाएंगे। कांग्रेस इसे 1937 में लिए गए ऐतिहासिक फैसले की निरंतरता बता रही है। कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि उस समय गीत के बाद के हिस्सों में धार्मिक संदर्भों को लेकर अलग-अलग समुदायों की भावनाओं पर चर्चा हुई थी। इसी पृष्ठभूमि में सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए शुरुआती दो पदों को अपनाने का फैसला किया गया था। विवाद की एक और कड़ी: Independence Day कार्यक्रम ‘वंदे मातरम्’ विवाद सिर्फ 1937 के फैसले तक सीमित नहीं है। स्वतंत्रता दिवस के दौरान कांग्रेस मुख्यालय में गीत के दौरान कथित तौर पर हुई घटना को लेकर भी BJP ने कांग्रेस पर निशाना साधा था। अमित शाह ने कांग्रेस और सोनिया गांधी पर गीत के अपमान का आरोप लगाते हुए माफी की मांग की। कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज किया और कहा कि गीत को रोकने की कोई मंशा नहीं थी। BJP और Congress के बीच बढ़ी बयानबाजी विवाद बढ़ने के साथ दोनों पार्टियों के नेताओं के बयान भी तीखे होते जा रहे हैं। BJP की ओर से कांग्रेस पर राष्ट्रगीत के सम्मान को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। BJP अध्यक्ष नितिन नबीन ने भी कांग्रेस के 1937 वाले रुख की आलोचना की। दूसरी ओर, कांग्रेस नेताओं ने BJP पर इस मुद्दे को राजनीतिक रूप देने का आरोप लगाया है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा और अन्य नेताओं ने BJP तथा RSS की भूमिका को लेकर सवाल उठाए। 1937 का फैसला फिर चर्चा में क्यों? ‘वंदे मातरम्’ का भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन से गहरा संबंध रहा है। 1937 में कांग्रेस के भीतर इसके सार्वजनिक गायन के स्वरूप को लेकर चर्चा हुई थी। बाद में शुरुआती दो पदों को सार्वजनिक कार्यक्रमों में इस्तेमाल करने की परंपरा बनी। यही पुराना फैसला आज की राजनीति में फिर चर्चा का केंद्र बन गया है। कांग्रेस इसे ऐतिहासिक और सर्वसम्मति से जुड़ा निर्णय बता रही है, जबकि BJP इसे तुष्टीकरण की राजनीति का उदाहरण मान रही है। Modi सरकार के कदम से बढ़ी बहस विवाद के बीच केंद्र सरकार की ओर से ‘वंदे मातरम्’ के पूर्ण स्वरूप को आधिकारिक कार्यक्रमों में महत्व देने की पहल भी चर्चा में है। सरकार इसे गीत की ऐतिहासिक भूमिका और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े राष्ट्रीय भाव से जोड़ रही है। ऐसे में एक तरफ BJP इसे देश की राष्ट्रीय भावना से जुड़ा विषय बता रही है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस अपने 1937 के फैसले को सही ठहरा रही है। अब मुद्दा सिर्फ गीत का नहीं, सियासत का भी ‘वंदे मातरम्’ पर छिड़ी ताजा बहस ने इतिहास और राजनीति को एक ही मंच पर ला दिया है। अमित शाह के बयान के बाद कांग्रेस और BJP के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने के संकेत हैं। फिलहाल कांग्रेस अपने 1937 के रुख पर कायम है और BJP इसे बदलने की मांग कर रही है। ऐसे में ‘वंदे मातरम्’ आने वाले दिनों में भी देश की राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बना रह सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bangladesh

Bangladesh President Election: 11 दलों से मुकाबला, फिर भी BNP की जीत तय मानी जा रही

बांग्लादेश (Bangladesh) की राजनीति में आज का दिन खास है। देश में करीब 35 साल बाद राष्ट्रपति पद के लिए मुकाबले वाला चुनाव हो रहा है। गुरुवार, 20 अगस्त को संसद में सांसद नए राष्ट्रपति के लिए वोट डालेंगे। चुनाव में सत्तारूढ़ Bangladesh Nationalist Party (BNP) के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर और 11 दलों के गठबंधन के उम्मीदवार ओली अहमद आमने-सामने हैं। हालांकि मुकाबला दो उम्मीदवारों के बीच है, लेकिन संसद में सीटों का गणित BNP के पक्ष में है। यही वजह है कि मिर्जा फखरुल की जीत को लगभग तय माना जा रहा है। 35 साल बाद क्यों खास है Presidential Election? बांग्लादेश में राष्ट्रपति का चुनाव आम जनता सीधे वोट डालकर नहीं करती। यहां संसद सदस्य राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं। 1991 के बाद लंबे समय तक राष्ट्रपति पद के लिए केवल एक उम्मीदवार मैदान में रहा और चुनाव निर्विरोध होता रहा। इस बार पहली बार लंबे अंतराल के बाद दो उम्मीदवारों के बीच चुनाव हो रहा है। इसलिए नतीजे से ज्यादा चर्चा इस बात की है कि बांग्लादेश की राजनीति में यह मुकाबला किस तरह का संदेश देता है। BNP के पास मजबूत बहुमत राष्ट्रपति चुनाव में कुल 349 सांसद वोट डालने के पात्र हैं। इनमें BNP के पास 247 सांसद हैं। दूसरी तरफ जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11-दलीय गठबंधन के पास करीब 81 सांसद बताए जा रहे हैं। सीटों के इस अंतर को देखते हुए BNP उम्मीदवार मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर की जीत की संभावना काफी मजबूत है। विपक्षी गठबंधन ने ओली अहमद को उम्मीदवार बनाकर चुनाव को औपचारिक मुकाबले से आगे बढ़ाने की कोशिश की है। कौन हैं दोनों उम्मीदवार? BNP ने अपने महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को राष्ट्रपति पद के लिए मैदान में उतारा है। वह पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं और संसद सदस्य भी हैं। खास बात यह है कि उम्मीदवार होने के बावजूद वह सांसद होने के कारण राष्ट्रपति चुनाव में अपना वोट भी डाल सकते हैं। वहीं 11-दलीय गठबंधन ने ओली अहमद को उम्मीदवार बनाया है। वह लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी यानी LDP के नेता और पूर्व सैन्य अधिकारी हैं। हालांकि वह मौजूदा संसद के सदस्य नहीं हैं, इसलिए राष्ट्रपति चुनाव में वोट नहीं डाल सकते। आज संसद में होगा मतदान चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार मतदान दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक संसद परिसर में होगा। मतदान पूरा होने के बाद वोटों की गिनती की जाएगी और परिणाम घोषित किया जाएगा। संविधान के तहत बांग्लादेश में राष्ट्रपति का चुनाव सांसद करते हैं। ऐसे में इस चुनाव में जनता की सीधी भूमिका नहीं है। पूर्व राष्ट्रपति के इस्तीफे के बाद चुनाव राष्ट्रपति पद पर यह चुनाव पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के इस्तीफे के बाद हो रहा है। उनके पद छोड़ने के बाद संवैधानिक प्रक्रिया के तहत नए राष्ट्रपति के चुनाव की तैयारी शुरू हुई। अब सबकी नजरें संसद के मतदान और उसके बाद आने वाले आधिकारिक परिणाम पर हैं। हालांकि राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए BNP उम्मीदवार का पलड़ा भारी नजर आ रहा है। शुक्रवार को हो सकता है नए राष्ट्रपति का Oath चुनाव के बाद नए राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण की तैयारी भी की जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक नए राष्ट्रपति का Oath Ceremony शुक्रवार को बंगभवन में आयोजित किया जा सकता है। Bangladesh Election पर क्यों है सबकी नजर? यह चुनाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सिर्फ राष्ट्रपति चुनने की संवैधानिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि 35 साल बाद हुआ एक वास्तविक Presidential Contest भी है। एक तरफ संसद में मजबूत बहुमत वाली BNP है, तो दूसरी ओर 11 दलों का गठबंधन अपने उम्मीदवार के साथ मैदान में है। नतीजा भले ही पहले से काफी हद तक साफ दिखाई दे रहा हो, लेकिन बांग्लादेश की राजनीति में इस चुनाव की अहमियत लंबे समय तक चर्चा में रह सकती है।
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RSS

RSS Controversy: अमेरिका में संघ पर प्रतिबंध की मांग, 29 अगस्त को New York जाएंगे Bhagwat

अमेरिका में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। US Commission on International Religious Freedom (USCIRF) ने RSS से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। आयोग ने अमेरिकी प्रशासन से यह भी कहा है कि संघ के नेताओं को उच्चस्तरीय मुलाकातों और सम्मान से दूर रखा जाए। यह मामला ऐसे वक्त सामने आया है, जब RSS प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे की चर्चा तेज है। रिपोर्टों के अनुसार भागवत 29 अगस्त को New York में एक कार्यक्रम में शामिल होने वाले हैं। ऐसे में USCIRF के बयान ने उनकी यात्रा को लेकर राजनीतिक चर्चा और तेज कर दी है। USCIRF ने RSS को लेकर क्या कहा? USCIRF का कहना है कि धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े उसके आकलन के आधार पर RSS से जुड़े कुछ लोगों के खिलाफ अमेरिकी सरकार को कदम उठाने चाहिए। आयोग ने ऐसे लोगों पर लक्षित प्रतिबंध लगाने और अमेरिकी अधिकारियों की ओर से उन्हें विशेष सम्मान दिए जाने से बचने की सिफारिश की है। हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि USCIRF की सिफारिश का मतलब RSS पर अमेरिका में प्रतिबंध लगना नहीं है। आयोग अमेरिकी सरकार को धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े मामलों पर सलाह और सिफारिशें देता है। अंतिम फैसला अमेरिकी प्रशासन को लेना होता है। 29 अगस्त को New York पहुंचेंगे मोहन भागवत मोहन भागवत के प्रस्तावित अमेरिकी दौरे को लेकर भारतीय समुदाय के बीच भी उत्सुकता है। New York में उनके कार्यक्रम में भारतीय मूल के लोगों और विभिन्न सामाजिक संगठनों से संवाद की उम्मीद है। ऐसे में USCIRF का बयान सामने आने के बाद भागवत की यात्रा पर सबकी नजरें टिक गई हैं। यह देखना अहम होगा कि अमेरिकी प्रशासन इस मामले में कोई आधिकारिक कदम उठाता है या नहीं। भारत पहले भी USCIRF की रिपोर्ट पर जता चुका है आपत्ति USCIRF की भारत से जुड़ी रिपोर्टों को लेकर नई दिल्ली का रुख पहले भी स्पष्ट रहा है। भारत सरकार आयोग की रिपोर्टों को कई बार पक्षपातपूर्ण और चयनात्मक बताते हुए खारिज कर चुकी है। भारत का कहना रहा है कि देश में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर तस्वीर पेश करते समय आयोग कई महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज करता है। इसी वजह से USCIRF और भारत सरकार के बीच लंबे समय से मतभेद देखने को मिलते रहे हैं। RSS पर आरोपों को लेकर क्या है विवाद? RSS पर धार्मिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर समय-समय पर आरोप लगते रहे हैं। संगठन इन आरोपों को खारिज करता रहा है और खुद को सामाजिक सेवा, राष्ट्र निर्माण तथा सामाजिक समरसता के लिए काम करने वाला संगठन बताता है। USCIRF का ताजा बयान इसी पुराने विवाद को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर ले आया है। खासकर भागवत के अमेरिका दौरे से ठीक पहले यह मुद्दा ज्यादा चर्चा में है। India-US Relations के बीच बढ़ी राजनीतिक हलचल भारत और अमेरिका के संबंध कई क्षेत्रों में लगातार मजबूत हुए हैं। ऐसे में किसी अमेरिकी सरकारी आयोग की ओर से भारत के प्रमुख सामाजिक संगठनों में से एक RSS को लेकर इस तरह की सिफारिश राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, अभी इसे India-US Relations में किसी बड़े संकट के तौर पर देखना जल्दबाजी होगी। USCIRF की सिफारिश और अमेरिकी सरकार के अंतिम निर्णय के बीच स्पष्ट अंतर है। अभी सबसे बड़ी बात क्या है? फिलहाल RSS पर अमेरिका में कोई नया प्रतिबंध लागू नहीं हुआ है। USCIRF ने कार्रवाई की सिफारिश की है। अब निगाहें अमेरिकी प्रशासन के रुख और मोहन भागवत के 29 अगस्त के New York कार्यक्रम पर रहेंगी। भागवत की यात्रा के दौरान इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है या नहीं, यह आने वाले दिनों में इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकता है।
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India-Pakistan

India-Pakistan Tension: Delhi में Pakistan High Commission के बाहर बड़ा Action

भारत-पाकिस्तान (India-Pakistan) के बीच रिश्तों में चल रहा तनाव एक बार फिर राजधानी दिल्ली में नजर आया। गुरुवार को चाणक्यपुरी स्थित Pakistan High Commission के बाहर JCB पहुंची और सड़क की तरफ बने कुछ बैरिकेड, फेंसिंग और अन्य बाहरी ढांचों को हटा दिया गया। इस कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच चल रही राजनयिक तनातनी फिर चर्चा में आ गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली में हुई कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब कुछ दिन पहले इस्लामाबाद स्थित Indian High Commission के बाहर भी पाकिस्तानी अधिकारियों ने बैरिकेड और अन्य सुरक्षा ढांचे हटाए थे। इसी वजह से दिल्ली की कार्रवाई को दोनों घटनाओं के बीच जवाबी कदम के तौर पर देखा जा रहा है। Pakistan High Commission के बाहर क्या हुआ? चाणक्यपुरी में पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर JCB से सड़क की ओर मौजूद कुछ संरचनाएं हटाई गईं। इनमें बैरिकेड, फेंसिंग, ट्रैफिक बोलार्ड और लोगों की आवाजाही को व्यवस्थित करने के लिए लगाए गए कुछ क्यू-मैनेजमेंट स्ट्रक्चर शामिल बताए जा रहे हैं। खास बात यह रही कि कार्रवाई हाई कमीशन की मुख्य इमारत के अंदर नहीं हुई। बाहरी हिस्से में मौजूद उन संरचनाओं को हटाया गया, जिन्हें अधिकारियों ने स्वीकृत सीमा से बाहर बताया। Islamabad में पहले हुई थी कार्रवाई इस पूरे घटनाक्रम की कड़ी इस्लामाबाद से भी जुड़ती है। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ दिन पहले वहां भारतीय हाई कमीशन के बाहर सुरक्षा से जुड़े बैरिकेड और पार्किंग पोल हटाए गए थे। इसके बाद दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर हुई कार्रवाई ने राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में चर्चा बढ़ा दी। हालांकि, दोनों घटनाओं को सीधे तौर पर जोड़ने वाली कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। Diplomatic Tension के बीच बढ़ी हलचल भारत और पाकिस्तान के रिश्ते पहले से ही संवेदनशील दौर में हैं। ऐसे में दोनों देशों के हाई कमीशन के बाहर सुरक्षा व्यवस्था या बाहरी ढांचे में बदलाव भी आसानी से चर्चा का विषय बन जाता है। दिल्ली में हुई कार्रवाई को लेकर फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि अधिकारियों की ओर से इसे बाहरी हिस्से में मौजूद अनधिकृत या निर्धारित सीमा से बाहर के ढांचों को हटाने की कार्रवाई बताया गया है। वहीं, इसका समय इस घटनाक्रम को और ज्यादा महत्वपूर्ण बना रहा है। Kashmir को लेकर भी जारी है बयानबाजी इसी दौरान जम्मू-कश्मीर को लेकर भारत, पाकिस्तान और अमेरिका के बीच बयानबाजी भी सुर्खियों में रही है। अमेरिकी राजदूत Sergio Gor के कश्मीर संबंधी बयान पर पाकिस्तान ने आपत्ति जताई थी। हालांकि, दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर हुई कार्रवाई को उस बयान से सीधे जोड़ने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अब आगे क्या? दिल्ली और इस्लामाबाद में हाई कमीशन के बाहर हुई हालिया कार्रवाइयों ने दोनों देशों के रिश्तों पर फिर से ध्यान खींचा है। फिलहाल नजर इस बात पर है कि पाकिस्तान इस कार्रवाई पर औपचारिक प्रतिक्रिया देता है या नहीं और क्या आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच ऐसे और कदम देखने को मिलते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Monsoon

Monsoon Update: दिल्ली से मध्य प्रदेश तक भारी बारिश, Prayagraj में बिगड़े हालात

मानसून (Monsoon) की बारिश इस वक्त देश के कई हिस्सों में राहत से ज्यादा परेशानी का कारण बनती नजर आ रही है। Delhi-NCR, Uttar Pradesh, Madhya Pradesh और Uttarakhand में लगातार बारिश के कारण कहीं सड़कें जलमग्न हैं तो कहीं नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। प्रयागराज में जलभराव ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है, जबकि मध्य प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बनने लगे हैं। पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में बारिश के साथ भूस्खलन और हादसों का खतरा भी बढ़ गया है। प्रशासन संवेदनशील इलाकों पर नजर रख रहा है और लोगों से सावधानी बरतने की अपील की जा रही है। Delhi-NCR में बारिश के बाद Waterlogging दिल्ली-NCR में बारिश के बाद कई इलाकों में जलभराव देखने को मिला। सड़कों पर पानी जमा होने से ट्रैफिक की रफ्तार धीमी हुई और रोजमर्रा के काम से निकलने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। यमुना के जलस्तर में बदलाव ने भी प्रशासन की चिंता बढ़ाई है। नदी के आसपास के निचले इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। मौसम विभाग के अलर्ट के बीच लोगों को मौसम की स्थिति पर नजर रखने की सलाह दी गई है। Prayagraj में बारिश ने बढ़ाई मुश्किल उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में लगातार बारिश का असर शहर के कई हिस्सों में दिखाई दिया। निचले इलाकों में पानी भरने से लोगों को घरों से निकलने में परेशानी हुई। कई सड़कों और गलियों में पानी जमा होने के कारण आवाजाही प्रभावित हुई। करेली समेत कुछ इलाकों में स्थिति ज्यादा खराब रही। जलभराव के कारण स्थानीय लोगों को अपने रोजमर्रा के काम रोकने पड़े। प्रशासन की ओर से संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है। बारिश और बढ़ते जलस्तर के बीच स्कूलों को लेकर भी प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए हैं। नदी किनारे रहने वाले लोगों को भी सतर्क रहने को कहा गया है। MP के कई जिलों में Flood का खतरा मध्य प्रदेश में भी लगातार बारिश के चलते कई जिलों में हालात चुनौतीपूर्ण हो गए हैं। नदियों और छोटे-बड़े नालों का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में पानी भरने की आशंका बनी हुई है। कई जगह ग्रामीण इलाकों का संपर्क प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं। प्रशासन की टीमें हालात पर नजर रख रही हैं। लोगों से अपील की गई है कि वे उफनती नदियों, नालों और पुल-पुलियों को पार करने की कोशिश न करें। बारिश का दौर जारी रहने पर स्थिति और गंभीर हो सकती है, इसलिए स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों को नजरअंदाज न करने की सलाह दी जा रही है। Uttarakhand में बारिश बनी मुसीबत उत्तराखंड में पहाड़ी इलाकों के लिए भारी बारिश हमेशा अतिरिक्त चुनौती लेकर आती है। इस बार भी कई क्षेत्रों में बारिश के कारण भूस्खलन और सड़क बाधित होने का खतरा बना हुआ है। चमोली समेत कुछ इलाकों में राहत और बचाव कार्यों को लेकर प्रशासन सक्रिय है। पहाड़ों में मौसम खराब होने के कारण यात्रियों और स्थानीय लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है। कई राज्यों में Weather Alert मौसम का यह बदला हुआ मिजाज बताता है कि मानसून अभी पूरी तरह सक्रिय है। Delhi-NCR में जलभराव, Prayagraj में बारिश से बिगड़े हालात, MP में बढ़ता Flood Risk और Uttarakhand में पहाड़ी चुनौतियां एक साथ सामने आ रही हैं। ऐसे में अगले कुछ दिन प्रशासन के साथ आम लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचना, जलभराव वाले रास्तों से दूरी रखना और स्थानीय प्रशासन व मौसम विभाग के अपडेट पर नजर रखना जरूरी है। फिलहाल सबसे बड़ी चिंता उन इलाकों को लेकर है जहां लगातार बारिश के कारण पानी तेजी से बढ़ रहा है। मौसम साफ होने तक लोगों को सावधानी बरतने और किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन की मदद लेने की सलाह दी गई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bengal

Bengal Hotel Fire: बीरभूम के तारापीठ में दर्दनाक हादसा, 7 की मौत; 9 घायल

Bengal के बीरभूम जिले के तारापीठ में सावन सोमवार की सुबह एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया। मंदिर के पास स्थित एक होटल में अचानक आग लगने से 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि 9 लोग घायल हुए हैं। हादसे के वक्त होटल में ठहरे कई लोग सो रहे थे, इसलिए आग की खबर फैलते ही वहां अफरा-तफरी मच गई। सुबह-सुबह होटल में फैला धुआं बताया जा रहा है कि सोमवार तड़के होटल में आग लगी। देखते ही देखते धुआं कमरों और होटल के दूसरे हिस्सों में फैलने लगा। नींद में मौजूद लोगों को जब इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने बाहर निकलने की कोशिश की। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस और Fire Brigade की टीमें मौके पर पहुंचीं। राहत और बचाव अभियान चलाकर होटल में फंसे लोगों को बाहर निकाला गया। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। AC में Short Circuit बना आग की वजह? प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, होटल के AC के इलेक्ट्रिकल सिस्टम में Short Circuit होने के बाद आग लगने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, अधिकारियों ने अभी इसे अंतिम कारण नहीं माना है। आग की वास्तविक वजह जानने के लिए जांच की जा रही है। जांच में होटल की वायरिंग, बिजली के उपकरणों और Fire Safety व्यवस्था को भी देखा जा रहा है। 7 लोगों की मौत, 9 घायल इस हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत की पुष्टि की गई है, जबकि 9 लोग घायल बताए जा रहे हैं। घायलों को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। प्रशासन की ओर से मृतकों की पहचान और घायलों के इलाज से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है। हादसे की खबर सामने आने के बाद मृतकों के परिवारों में मातम पसरा हुआ है। तारापीठ पहुंचे दूसरे श्रद्धालु भी घटना से काफी चिंतित नजर आए। Sawan Monday पर तारापीठ में थी भारी भीड़ सोमवार को सावन का दिन होने के कारण तारापीठ मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ थी। देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग पूजा और दर्शन के लिए यहां पहुंचे थे। मंदिर के आसपास के होटल और लॉज भी श्रद्धालुओं से भरे हुए थे। ऐसे में होटल में लगी आग ने धार्मिक नगरी में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। Hotel Fire Safety पर उठे सवाल तारापीठ जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु ठहरते हैं। ऐसे में होटल और लॉज में Emergency Exit, Fire Extinguisher, सुरक्षित Electrical Wiring और पर्याप्त Fire Safety व्यवस्था होना बेहद जरूरी है। बीरभूम पुलिस और प्रशासन अब पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि आग किन परिस्थितियों में लगी और होटल में सुरक्षा नियमों का कितना पालन किया गया था। फिलहाल इस हादसे ने सावन सोमवार की धार्मिक आस्था के बीच एक गहरी चिंता छोड़ दी है। प्रशासन की जांच पूरी होने के बाद ही आग की असली वजह और अन्य जिम्मेदारियों की तस्वीर साफ हो सकेगी।
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गांधीनगर में बड़ा हादसा: निर्माणाधीन इमारत पर गिरी क्रेन, 10-15 मजदूरों के दबे होने की आशंका

गांधीनगर। गुजरात के गांधीनगर के पास कुडासन इलाके में बुधवार को एक बड़ा हादसा हो गया। निर्माणाधीन इमारत पर अचानक भारी क्रेन गिर गई। हादसे के समय नीचे काम कर रहे करीब 10 से 15 मजदूरों के मलबे और क्रेन के भारी हिस्सों के नीचे दबे होने की आशंका है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंच गईं। मलबे में फंसे मजदूरों को बाहर निकालने के लिए राहत और बचाव अभियान शुरू कर दिया गया है। मलबा हटाने के लिए दूसरी क्रेन बुलाई गई क्रेन और निर्माण सामग्री के भारी मलबे को हटाने के लिए मौके पर एक और क्रेन बुलाई गई है। बचाव दल मलबे के नीचे दबे मजदूरों तक पहुंचने का प्रयास कर रहा है। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। दमकल की चार से ज्यादा गाड़ियां मौके पर पहुंचकर राहत कार्य में जुटी हैं। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस भी घटनास्थल पर तैनात की गई हैं। फिलहाल हादसे में कितने लोग घायल हुए हैं या किसी की मौत हुई है, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। नगर आयुक्त और डिप्टी CM मौके पर पहुंचे हादसे की गंभीरता को देखते हुए गांधीनगर नगर आयुक्त और गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी भी घटनास्थल पर पहुंचे। अधिकारियों की निगरानी में राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन की प्राथमिकता मलबे में फंसे मजदूरों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकालना है। फिलहाल बचाव अभियान जारी है और हादसे से जुड़ी विस्तृत जानकारी का इंतजार है।

Apple iPhone 18 Pro और Pro Max लॉन्च, A20 Pro चिप और 45 घंटे तक की बैटरी; पहली बार फोल्डेबल iPhone भी

कैलिफोर्निया। Apple ने अपने नए iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max को लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने दोनों प्रीमियम मॉडल्स में नए डिजाइन, A20 Pro चिप, बेहतर AI फीचर्स और लंबी बैटरी लाइफ पर खास जोर दिया है। लॉन्च इवेंट नए CEO जॉन टर्नस के नेतृत्व में Apple का पहला बड़ा प्रोडक्ट प्रेजेंटेशन भी रहा। दोनों मॉडल चार कलर ऑप्शन में पेश किए गए हैं—डीप ब्लैक, सिल्वर, ग्लेशियर और बरगंडी। iPhone 18 Pro की शुरुआती कीमत 1,199 डॉलर और iPhone 18 Pro Max की 1,299 डॉलर रखी गई है। दोनों के बेस मॉडल में 256GB स्टोरेज दी गई है। A20 Pro चिप से मिलेगा तेज परफॉर्मेंस iPhone 18 Pro सीरीज में नया A20 Pro प्रोसेसर दिया गया है। Apple के मुताबिक यह 2nm टेक्नोलॉजी पर आधारित नई आर्किटेक्चर वाली चिप है। इसमें 6-कोर CPU और नया GPU दिया गया है, जबकि कंपनी ने GPU परफॉर्मेंस में करीब 40 फीसदी तक सुधार का दावा किया है। Apple Intelligence और Siri को भी नए हार्डवेयर के साथ ज्यादा सक्षम बनाया गया है। Siri में AI क्षमताओं और अधिक नैचुरल वॉइस अनुभव पर जोर दिया गया है। कंपनी का कहना है कि डिवाइस पर AI प्रोसेसिंग के साथ प्राइवेसी को भी प्राथमिकता दी गई है। बैटरी लाइफ में बड़ा अपग्रेड iPhone 18 Pro और Pro Max में अब तक की सबसे लंबी iPhone बैटरी लाइफ में से एक मिलने का दावा किया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक iPhone 18 Pro करीब 24 घंटे और Pro Max करीब 30 घंटे तक सामान्य उपयोग में चल सकता है। वहीं वीडियो प्लेबैक में Pro मॉडल करीब 36 घंटे और Pro Max करीब 45 घंटे तक का बैकअप दे सकता है। Pro Max का 45 घंटे का वीडियो प्लेबैक इस सीरीज की सबसे बड़ी बैटरी उपलब्धियों में से एक है। नई फास्ट चार्जिंग तकनीक भी दी गई है। कंपनी के अनुसार फोन करीब 15 मिनट की चार्जिंग में 50 फीसदी तक चार्ज हो सकता है। कैमरा सिस्टम में भी बड़ा बदलाव iPhone 18 Pro सीरीज में कैमरा सिस्टम को भी अपग्रेड किया गया है। मुख्य कैमरे में 48MP सेंसर के साथ डायनेमिक/वेरिएबल अपर्चर दिया गया है, जिससे अलग-अलग रोशनी की परिस्थितियों में फोटो क्वालिटी और लो-लाइट परफॉर्मेंस बेहतर करने में मदद मिलेगी। वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए भी नए प्रो कंट्रोल और 4K Dolby Vision HDR टाइम-लैप्स जैसे फीचर्स जोड़े गए हैं। Apple का पहला फोल्डेबल iPhone भी लॉन्च Apple के इस इवेंट की सबसे बड़ी खासियत कंपनी का पहला फोल्डेबल iPhone भी रहा। यह Apple के स्मार्टफोन डिजाइन में लंबे समय बाद सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है। Reuters के मुताबिक फोल्डेबल iPhone की कीमत 2,000 डॉलर से ज्यादा हो सकती है और कंपनी ने इसे लंबे समय तक इंजीनियरिंग चुनौतियों पर काम करने के बाद पेश किया है। इस साल Apple का फोकस प्रीमियम iPhone मॉडल्स और फोल्डेबल डिवाइस पर ज्यादा रहा है। बेस iPhone मॉडल के लॉन्च शेड्यूल में भी बदलाव किया गया है। नए CEO जॉन टर्नस का पहला बड़ा प्रेजेंटेशन 1 सितंबर को Tim Cook के बाद Apple के CEO बने John Ternus के लिए यह पहला बड़ा प्रोडक्ट लॉन्च प्रेजेंटेशन रहा। Ternus इससे पहले Apple के हार्डवेयर प्रमुख के तौर पर काम कर चुके हैं। Apple के इस इवेंट में iPhone के अलावा नए वियरेबल्स और अन्य प्रोडक्ट्स की घोषणाएं भी की गईं। कंपनी के लिए यह लॉन्च नए CEO के नेतृत्व में उसकी अगली प्रोडक्ट रणनीति की शुरुआत के तौर पर भी अहम माना जा रहा है।

दक्षिण अफ्रीका ने नामीबिया को 99 रन से हराया, डेब्यू में जॉर्डन हरमन ने जड़ा 150 रन का तूफानी शतक

विंडहोक। दक्षिण अफ्रीका ने नामीबिया के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज का पहला मुकाबला 99 रन से जीत लिया। दक्षिण अफ्रीका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 348/6 रन बनाए। जवाब में बारिश से दो बार प्रभावित नामीबिया की टीम 38 ओवर में 162/8 रन ही बना सकी। मुकाबले का फैसला DLS मेथड से हुआ। दक्षिण अफ्रीका की जीत के हीरो डेब्यू कर रहे जॉर्डन हरमन रहे, जिन्होंने शानदार 150 रन की पारी खेली। वहीं प्रेनेलन सब्रायेन ने करियर की सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी करते हुए चार विकेट झटके। सीरीज का दूसरा वनडे 11 सितंबर को विंडहोक में खेला जाएगा। डेब्यू पर 150 रन, हरमन ने बनाया बड़ा रिकॉर्ड जॉर्डन हरमन वनडे डेब्यू पर 150 रन बनाने वाले संयुक्त रूप से सबसे ज्यादा स्कोर करने वाले बल्लेबाज बन गए हैं। इससे पहले मैथ्यू ब्रीट्जके ने भी अपने वनडे डेब्यू पर 150 रन की पारी खेली थी। हरमन दक्षिण अफ्रीका की ओर से वनडे डेब्यू पर शतक लगाने वाले पांचवें बल्लेबाज भी बन गए। उनसे पहले कॉलिन इंग्राम, टेम्बा बावुमा, रीजा हेंड्रिक्स और मैथ्यू ब्रीट्जके यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं। हरमन ने टोनी डी जॉर्जी के साथ दूसरे विकेट के लिए 190 रन की साझेदारी की। डी जॉर्जी ने 84 गेंदों पर 72 रन बनाए और वनडे करियर का तीसरा अर्धशतक पूरा किया। शुरुआती 20 ओवर में 100 रन, इसके बाद बढ़ी रफ्तार दक्षिण अफ्रीका की शुरुआत बहुत तेज नहीं रही। नामीबिया के गेंदबाजों को शुरुआती ओवरों में पिच से कुछ मूवमेंट मिली। रूबेन ट्रम्पेलमैन ने हरमन के बल्ले का बाहरी किनारा भी छुआ और टॉप-एज का मौका बनाया, लेकिन विकेट नहीं मिल सका। सातवें ओवर में कॉनर एस्टरहुइजन ने शॉर्ट गेंद को पुल करने की कोशिश की, लेकिन फाइन लेग पर जैक ब्रासेल ने कैच पकड़ लिया। इससे शुरुआती साझेदारी 27 रन पर टूट गई। दूसरी ओर डी जॉर्जी को भी कई बार जीवनदान मिला। उन्होंने स्लिप के बाहर एज किया और विकेटकीपर के पास भी कैच का मौका बना, लेकिन नामीबिया उसे भुना नहीं सका। एक रनआउट का मौका भी टीम ने गंवा दिया। दक्षिण अफ्रीका ने 20 ओवर में 100/1 रन बनाए। इसके बाद अगले सात ओवर में 50 रन जोड़कर टीम ने रन गति बढ़ाई। इसी दौरान हरमन ने अपना अर्धशतक पूरा किया, जबकि डी जॉर्जी ने 64 गेंदों में फिफ्टी लगाई। शतक के बाद हरमन ने बदला अंदाज हरमन ने 93 गेंदों में अपना शतक पूरा किया। शतक के बाद उन्होंने आक्रामक अंदाज अपनाया और तेजी से रन बनाए। सेंचुरी के बाद उन्होंने पांच चौके और दो छक्के लगाए। हरमन ने मैदान के दोनों हिस्सों में शानदार शॉट खेले। कवर और मिडऑफ के बीच उन्होंने 59 रन बटोरे। उनके बाद क्रीज पर आए डेवाल्ड ब्रेविस ने महज दो गेंद बाद नो-लुक सिक्स लगाकर पारी को और रोमांचक बना दिया। आखिरी 10 ओवर में गिरे चार विकेट दक्षिण अफ्रीका ने आखिरी 10 ओवर की शुरुआत 266/2 के स्कोर से की थी। उस समय टीम के 350 रन के पार जाने की उम्मीद थी, लेकिन नामीबिया के गेंदबाजों ने वापसी की। हरमन ने बैक-ऑफ-द-हैंड स्लोअर गेंद को बैकवर्ड पॉइंट के ऊपर से खेलने की कोशिश की, लेकिन कैच लॉरेन स्टीनकैंप के हाथों में चला गया। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका ने केवल 58 रन के अंदर चार विकेट गंवा दिए। ट्रम्पेलमैन ने इनमें से तीन विकेट लिए। डेवाल्ड ब्रेविस डीप स्क्वायर लेग पर कैच हुए, रुबिन हरमन LBW आउट हुए और जेसन स्मिथ भी बड़ा शॉट लगाने के प्रयास में आउट हो गए। आखिर में कॉर्बिन बॉश ने 24 गेंदों पर नाबाद 39 रन बनाकर दक्षिण अफ्रीका को 348/6 तक पहुंचाया। नामीबिया की शुरुआत रही बेहद धीमी 349 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी नामीबिया की शुरुआत बेहद धीमी रही। टीम ने शुरुआती 10 ओवर में सिर्फ 24 रन बनाए। दूसरे से 12वें ओवर के बीच लगातार 10 ओवर तक कोई बाउंड्री नहीं आई। एलेक्स बुसिंग-वोल्शेंक 12 रन बनाकर फोर्टुइन की गेंद पर बड़ा शॉट खेलने गए। लॉन्गऑफ पर जेसन स्मिथ के पास कैच आया, लेकिन गेंद उनके हाथ से निकल गई। हालांकि अगली ही गेंद पर बुसिंग-वोल्शेंक ने क्वेना मफाका की गेंद पर गलत लाइन में शॉट खेला और विकेटकीपर के हाथों कैच आउट हो गए। जन फ्रायलिंक भी इस मुकाबले में प्रभाव नहीं छोड़ सके। उन्होंने 16 गेंदों पर सात रन बनाए और मफाका की गेंद पर बोल्ड हो गए। 73/3 के स्कोर पर बारिश ने रोका खेल दूसरे ओपनर मालन क्रुगर का संघर्ष 19वें ओवर में खत्म हुआ। वह सब्रायेन की गेंद पर फ्लिक करने से चूक गए और LBW आउट हो गए। 22वें ओवर में नामीबिया का स्कोर 73/3 था, तभी विंडहोक में बारिश शुरू हो गई और मैच रोकना पड़ा। करीब 1 घंटे 18 मिनट बाद खेल दोबारा शुरू हुआ। बारिश के कारण नामीबिया का लक्ष्य घटाकर 38 ओवर में 301 रन कर दिया गया। टीम को बचे हुए 16.3 ओवर में 225 रन बनाने थे। दूसरी बारिश के बाद 7 ओवर में चाहिए थे 167 रन खेल दोबारा शुरू होने के कुछ ही समय बाद लॉरेन स्टीनकैंप ने बॉश की गेंद को हवा में खेल दिया। शॉर्ट कवर पर सब्रायेन ने कैच पकड़ लिया और इसके बाद नामीबिया के विकेट तेजी से गिरने लगे। गेरहार्ड इरास्मस ने कुछ अच्छे शॉट लगाते हुए दो चौके लगाए, लेकिन बारिश ने एक बार फिर मैच रोक दिया। करीब आधे घंटे बाद खेल दोबारा शुरू हुआ। उस समय नामीबिया को केवल 7 ओवर में 167 रन बनाने थे। यह लक्ष्य लगभग असंभव था। नामीबिया ने इस दौरान 67 रन के अंदर चार और विकेट गंवा दिए और 38 ओवर में 162/8 रन ही बना सकी। इस तरह दक्षिण अफ्रीका ने मुकाबला 99 रन से अपने नाम कर सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली।

छत्तीसगढ़ कैबिनेट के बड़े फैसले: स्टार्टअप-NIPUN मिशन के लिए 500 करोड़, कर्मचारियों की उम्र सीमा 45 साल

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रालय महानदी भवन में हुई कैबिनेट बैठक में युवाओं, कर्मचारियों, निर्यात और न्यायिक अधोसंरचना से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। सरकार ने अगले पांच वर्षों के लिए मुख्यमंत्री स्टार्टअप और NIPUN मिशन के तहत 500 करोड़ रुपए खर्च करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा सरकारी और संबद्ध संस्थाओं में कार्यरत कर्मचारियों को दूसरी शासकीय सेवाओं और उच्च पदों के लिए आवेदन करने में बड़ी राहत दी गई है। अधिकतम आयु सीमा 38 वर्ष से बढ़ाकर 45 वर्ष करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली है। वहीं, छत्तीसगढ़ को प्रमुख निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए निर्यात प्रोत्साहन नीति 2026-30 को भी मंजूरी दी गई है। स्टार्टअप और NIPUN मिशन के लिए 500 करोड़ कैबिनेट ने युवाओं के लिए रोजगार, कौशल विकास, उद्यमिता और नवाचार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री स्टार्टअप और NIPUN मिशन को मंजूरी दी है। इसके लिए अगले पांच वर्षों में 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। मिशन के तहत प्रदेश के सभी 33 जिलों में उद्यमिता विकास केंद्र, 100 इमर्जिंग टेक्नोलॉजी लैब और 5 इंडस्ट्री एक्सीलेंस सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही NIPUN JOB Engine के माध्यम से उद्योगों की जरूरत के अनुसार युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें औपचारिक रोजगार से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा। छत्तीसगढ़ निर्यात प्रोत्साहन नीति 2026-30 को मंजूरी राज्य को देश के प्रमुख निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ निर्यात प्रोत्साहन नीति 2026-30 को मंजूरी दी है। नीति के तहत मजबूत निर्यात इकोसिस्टम और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा। प्रदेश के उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने के लिए ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, व्यापार मेलों और प्रदर्शनियों को बढ़ावा दिया जाएगा। कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों के मूल्य संवर्धित उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देना भी नीति का प्रमुख लक्ष्य होगा। नवा रायपुर में 200 करोड़ की लागत से बनेगा NSTI कैबिनेट ने नवा रायपुर अटल नगर के ग्राम तेंदुवा में नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (NSTI) की स्थापना के लिए 10 एकड़ शासकीय भूमि केंद्र सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमशीलता निदेशालय को मुफ्त उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। करीब 200 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इस संस्थान में आधुनिक शैक्षणिक, प्रशासनिक और हॉस्टल सुविधाएं विकसित की जाएंगी। NSTI में हर साल दीर्घकालीन पाठ्यक्रमों के तहत करीब 1,000 प्रशिक्षुओं और अल्पकालीन कार्यक्रमों में 3,000 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण देने की क्षमता होगी। सरकारी कर्मचारियों की अधिकतम आयु सीमा 45 साल कैबिनेट ने राज्य शासन के स्थायी और अस्थायी कर्मचारियों के साथ निगम-मंडल, स्वशासी संस्थाओं के कर्मचारियों, संविदाकर्मियों और नगर सैनिकों के लिए अधिकतम आयु सीमा बढ़ाने को मंजूरी दी है। अब दूसरी शासकीय सेवाओं और उच्च पदों के लिए आवेदन करने की अधिकतम आयु सीमा 38 से बढ़ाकर 45 वर्ष किए जाने का फैसला लिया गया है। सरकार के इस फैसले से संबंधित कर्मचारियों को दूसरी सरकारी सेवाओं और उच्च पदों पर आवेदन करने के लिए अतिरिक्त अवसर मिल सकेंगे। इसके लिए राज्य शासन की ओर से एकीकृत स्थायी दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। दुर्ग में बनेगा नया जिला न्यायालय भवन दुर्ग जिला न्यायालय के नए भवन के निर्माण का रास्ता भी कैबिनेट के फैसले से साफ हो गया है। सरकार ने ग्राम तितुरडीह में बीआईटी कॉलेज के पास 4 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके बदले ग्राम पाहंदा, तहसील पाटन में 5.024 हेक्टेयर शासकीय भूमि भिलाई इस्पात संयंत्र को दी जाएगी। दोनों जमीनों का वर्तमान मूल्य लगभग समान बताया गया है। इस फैसले के बाद दुर्ग में आधुनिक सुविधाओं से लैस और सुव्यवस्थित जिला न्यायालय परिसर के निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।

हर्षित राणा अफगानिस्तान के खिलाफ टी-20 सीरीज से हो सकते हैं बाहर, हैमस्ट्रिंग चोट से पूरी तरह नहीं उबरे

भारत के तेज गेंदबाज हर्षित राणा अफगानिस्तान के खिलाफ 13 सितंबर से शुरू होने वाली तीन मैचों की टी-20 सीरीज से बाहर हो सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, राणा अभी अपनी हैमस्ट्रिंग चोट से पूरी तरह फिट नहीं हुए हैं और उन्हें मैदान पर वापसी के लिए थोड़ा और समय लग सकता है। हर्षित राणा को अफगानिस्तान के खिलाफ तीनों टी-20 मैचों के लिए फिटनेस के आधार पर भारतीय टीम में शामिल किया गया है। उन्हें आगामी एशियन गेम्स के लिए चुनी गई भारतीय टीम में भी जगह मिली है। BCCI के एक सूत्र के मुताबिक, राणा अभी चोट से पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं और उन्हें फिट होने में और समय लगेगा। इंग्लैंड दौरे पर खेला था आखिरी मुकाबला हर्षित राणा ने भारत के लिए अपना आखिरी मुकाबला इंग्लैंड दौरे के दौरान खेला था। इसके बाद हैमस्ट्रिंग चोट के कारण वह टीम से बाहर चल रहे हैं। राणा को भी वॉशिंगटन सुंदर जैसी हैमस्ट्रिंग चोट से जूझना पड़ा है। हालांकि, सुंदर अब पूरी तरह फिट हो चुके हैं और उन्हें अफगानिस्तान के खिलाफ टी-20 सीरीज के लिए फिट घोषित किया गया है। बुमराह और नितीश भी फिटनेस के आधार पर टीम में अफगानिस्तान के खिलाफ टी-20 सीरीज के लिए तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह और ऑलराउंडर नितीश रेड्डी को भी फिटनेस के आधार पर टीम में शामिल किया गया है। बुमराह बाएं घुटने की चोट से उबर रहे हैं। वह जुलाई में इंग्लैंड दौरे के बाद से क्रिकेट से दूर हैं। वहीं, नितीश रेड्डी क्वाड्रिसेप्स की चोट से रिकवरी कर रहे हैं। BCCI सूत्र के अनुसार, बुमराह और नितीश दोनों की फिटनेस में सुधार हो रहा है और उनकी वापसी सही दिशा में है। अफगानिस्तान सीरीज के बाद एशियन गेम्स भारत और अफगानिस्तान के बीच तीन मैचों की टी-20 सीरीज के मुकाबले 13 सितंबर से दिल्ली में खेले जाने हैं। इसके बाद भारतीय टीम 22 सितंबर को टोक्यो में जापान के खिलाफ एकमात्र मैच खेलेगी। भारतीय टीम इसके बाद 28 सितंबर से एशियन गेम्स में अपना अभियान शुरू करेगी। हर्षित राणा को एशियन गेम्स की टीम में भी शामिल किया गया है। ऐसे में उनकी फिटनेस भारतीय टीम के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अफगानिस्तान सीरीज से पहले राणा की फिटनेस पर अंतिम फैसला उनकी रिकवरी और फिटनेस टेस्ट के आधार पर लिया जा सकता है।

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