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T20

T20 World Cup 2026 जिम्बाब्वे की शानदार शुरुआत को झटका, Marumani आउट; Australia पर बढ़ा दबाव

मजबूत शुरुआत के बाद लगा पहला झटका ICC T20 World Cup के इस रोमांचक मुकाबले में जिम्बाब्वे ने आत्मविश्वास से भरी शुरुआत की। ओपनिंग जोड़ी ने शुरुआत से ही सकारात्मक रवैया अपनाया और ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ों पर दबाव बनाने की कोशिश की। पावरप्ले के दौरान बल्लेबाज़ों ने अच्छे शॉट्स लगाए और रन गति को बनाए रखा। मारुमनी और उनके साथी बल्लेबाज़ के बीच 61 रन की अहम साझेदारी हुई, जिसने टीम को मजबूत आधार दिया। दोनों ने संयम और आक्रामकता का संतुलन दिखाया। दर्शकों को लगने लगा था कि जिम्बाब्वे बड़ा स्कोर खड़ा कर सकता है। Marumani के आउट होने से बदला मैच का मूड हालांकि, 61 रन की साझेदारी टूटते ही मैच का रुख थोड़ा बदल गया। मारुमनी के आउट होते ही स्टेडियम का माहौल भी बदलता नजर आया। एक सेट बल्लेबाज़ का विकेट गिरना किसी भी टीम के लिए झटका होता है, खासकर तब जब टीम अच्छी लय में दिख रही हो। इस समय स्कोर 99/1 है और जिम्बाब्वे के सामने चुनौती है कि वह इस मजबूत शुरुआत को बड़े स्कोर में बदले। मिडिल ऑर्डर पर अब जिम्मेदारी बढ़ गई है कि वे रन गति को बनाए रखें और दबाव को हावी न होने दें। Australia का दूसरा Review भी गया बेकार दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया के लिए भी यह मुकाबला आसान नहीं रहा। टीम ने मैच के दौरान अपना दूसरा DRS Review भी गंवा दिया। रिव्यू का असफल होना किसी भी कप्तान के लिए चिंता का विषय होता है, क्योंकि आगे के अहम मौकों पर विकल्प सीमित हो जाते हैं। ऑस्ट्रेलिया की गेंदबाज़ी यूनिट अब तेजी से विकेट निकालकर वापसी करना चाहेगी। हालांकि रिव्यू गंवाने से रणनीति पर थोड़ा असर जरूर पड़ा है। आगे क्या होगा? मुकाबला अभी पूरी तरह खुला हुआ है। जिम्बाब्वे की कोशिश होगी कि वह 150 से अधिक का प्रतिस्पर्धी स्कोर बनाए, जबकि ऑस्ट्रेलिया की नजर नियमित अंतराल पर विकेट लेने पर रहेगी। हर ओवर के साथ मैच का रोमांच बढ़ता जा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sensex

US Stock Crash का असर India Markets पर Sensex-Nifty Down, Gold-Silver Up

विश्व के शेयर बाजारों में इस सप्ताह भारी बेचवाली देखने को मिली, जिससे अमेरिका और भारत दोनों के निवेशक चिंतित हैं। अमेरिका में Nasdaq, Dow Jones और S&P 500 में गिरावट आई, जबकि भारत में Sensex और Nifty भी लाल निशान पर बंद हुए। इसी बीच, Gold और Silver ने निवेशकों को राहत देते हुए U-turn लिया और तेजी पकड़ ली। अमेरिका में बाजार गिरावट के कारण नतीजा यह हुआ कि निवेशक Risk-off Sentiment के कारण सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं। भारत में असर अमेरिका की गिरावट का असर भारतीय शेयर बाजारों पर भी पड़ा। Gold & Silver का U-turn शेयर बाजार की कमजोरी के बीच Gold और Silver निवेशकों के लिए Safe Haven Assets बने। निवेशकों के लिए संदेश निवेशकों को संयम और विवेक के साथ अपने निवेश पर ध्यान देना होगा। Gold और Silver जैसे सुरक्षित विकल्प इस समय संतुलन बनाए रखने में मदद कर रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bangladesh

Bangladesh Election 2026 Tarique Rahman की सत्ता में वापसी की तैयारी

Bangladesh में राजनीतिक बदलाव की हवा बह रही है। लगभग 20 साल बाद BNP (Bangladesh Nationalist Party) ने चुनावी मैदान में जीत दर्ज की है और अब देश की जनता के सामने नए नेतृत्व की उम्मीदें हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने की संभावना बहुत मजबूत दिखाई दे रही है। इतिहास में एक बड़ा मोड़ यह जीत BNP के लिए सिर्फ सत्ता में वापसी नहीं, बल्कि बांग्लादेश की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत है। अगर तारिक रहमान प्रधानमंत्री बनते हैं, तो यह देश को 35 साल बाद पहला पुरुष प्रधानमंत्री देगा। पिछले तीन दशकों में देश की राजनीति में दो प्रमुख महिला नेता—शेख हसीना और खालिदा जिया— का वर्चस्व रहा है। Tarique Rahman का राजनीतिक सफर तारिक रहमान BNP के संस्थापक पूर्व राष्ट्रपति ज़ियाउर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे हैं। पार्टी में लंबे समय से उन्हें वास्तविक नेतृत्वकर्ता माना जाता रहा है। विदेश में रहने के बावजूद उन्होंने पार्टी की रणनीति और चुनावी तैयारी में अहम भूमिका निभाई। जनता की उम्मीदें और चुनौतियाँ नई सरकार के गठन के बाद जनता की नजरें इन मुख्य मुद्दों पर रहेंगी: बांग्लादेश के इस नए राजनीतिक अध्याय में जनता की आशाएँ और नेतृत्व की जिम्मेदारी दोनों ही बहुत बड़ी हैं। तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना न सिर्फ BNP के लिए, बल्कि पूरे देश के भविष्य के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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T20

T20 World Cup भारत की Biggest Victory, 47वीं बार 200+ Score और Hardik का 109m Six

T20 वर्ल्ड कप 2026 में टीम इंडिया ने ऐसा प्रदर्शन किया, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा। यह सिर्फ एक जीत नहीं थी, बल्कि आत्मविश्वास, आक्रामकता और टीमवर्क का शानदार उदाहरण थी। भारत ने टूर्नामेंट में अपनी अब तक की सबसे बड़ी जीत दर्ज करते हुए विरोधी टीम को पूरी तरह मात दी। 47वीं बार 200+ का आंकड़ा भारतीय बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही साफ कर दिया कि उनका इरादा बड़ा स्कोर खड़ा करने का है। पावरप्ले में तेज शुरुआत के बाद मिडिल ओवरों में रन गति कम नहीं होने दी गई। नतीजा यह रहा कि भारत ने टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में 47वीं बार 200+ रन का आंकड़ा पार किया।यह आंकड़ा दिखाता है कि भारतीय टीम सीमित ओवरों के क्रिकेट में कितनी निरंतर और खतरनाक बन चुकी है। Hardik Pandya का 109 मीटर लंबा सिक्स – मैच का Turning Point इस मुकाबले का सबसे रोमांचक पल रहा Hardik Pandya का 109 मीटर लंबा छक्का। स्टेडियम में बैठे दर्शक कुछ पल के लिए हैरान रह गए। गेंद हवा में इतनी ऊंचाई और दूरी तय करती हुई गई कि हर कोई बस उसे देखता रह गया। हार्दिक का यह सिक्स सिर्फ एक शॉट नहीं था, बल्कि विरोधी टीम के मनोबल पर सीधा वार था। उस पल के बाद मैच का रुख पूरी तरह भारत की तरफ झुक गया। गेंदबाजों का दमदार जवाब 200+ का विशाल लक्ष्य सामने होने के बावजूद भारतीय गेंदबाजों ने ढिलाई नहीं बरती। नई गेंद से शुरुआत हो या डेथ ओवरों की सटीक लाइन-लेंथ, हर विभाग में अनुशासन दिखा। विरोधी टीम दबाव से उबर नहीं पाई और नियमित अंतराल पर विकेट गंवाती रही। आखिरकार भारत ने रनों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की, जो टी20 वर्ल्ड कप इतिहास में उसकी सबसे बड़ी जीतों में गिनी जा रही है। नेट रन रेट और आत्मविश्वास दोनों मजबूत इस जीत से टीम का नेट रन रेट बेहतर हुआ, जो नॉकआउट की रेस में काफी अहम हो सकता है। उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है खिलाड़ियों का बढ़ता आत्मविश्वास। बल्लेबाजी में आक्रामकता, गेंदबाजी में नियंत्रण और मैदान पर ऊर्जा—तीनों का संतुलन भारत को खिताब का मजबूत दावेदार बनाता है। यह मुकाबला सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं था। यह उन फैंस के लिए जश्न का मौका था, जो हर मैच में उम्मीदों के साथ टीम का समर्थन करते हैं। टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत ने साफ संदेश दे दिया है—यह टीम बड़े मंच पर बड़े प्रदर्शन के लिए तैयार है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bangladesh

Bangladesh Out of T20 World Cup 2026 बयानबाजी से बढ़ा विवाद, टीम ने जताई नाराज़गी

T20 World Cup 2026 से पहले ही बांग्लादेश क्रिकेट में ऐसा तूफान आया, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। जिस टूर्नामेंट में खेलने का सपना हर खिलाड़ी बचपन से देखता है, उसी वर्ल्ड कप से बाहर होने की खबर ने बांग्लादेशी खिलाड़ियों, फैंस और क्रिकेट बोर्ड—तीनों को झकझोर कर रख दिया। क्या है पूरा मामला? | Bangladesh T20 World Cup Row Explained रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेश सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए टीम को भारत में होने वाले मैच खेलने की अनुमति नहीं दी। ICC ने टूर्नामेंट का शेड्यूल बदलने से इनकार कर दिया। नतीजा—बांग्लादेश टीम को T20 World Cup 2026 से बाहर कर दिया गया और उसकी जगह स्कॉटलैंड को शामिल कर लिया गया। खिलाड़ियों ने तोड़ी चुप्पी: “हम बेबस हैं” विवाद तब और गहरा गया जब बांग्लादेश सरकार के खेल सलाहकार ने बयान दिया कि टूर्नामेंट से हटने का फैसला खिलाड़ियों और BCB (Bangladesh Cricket Board) ने लिया था। इस बयान के बाद टीम के खिलाड़ियों ने पहली बार खुलकर अपनी बात रखी। एक खिलाड़ी ने भावुक होकर कहा:“हमारा इस फैसले से कोई लेना-देना नहीं था। हम बेबस हैं… हमारा कोई नहीं।” यह बयान सिर्फ शब्द नहीं थे, बल्कि उस दर्द की झलक थी जो एक खिलाड़ी महसूस करता है जब उसे मैदान से बाहर कर दिया जाता है—वो भी बिना उसकी गलती के। सरकार का यू-टर्न और बढ़ा विवाद खिलाड़ियों की प्रतिक्रिया के बाद खेल सलाहकार ने अपने बयान पर सफाई दी और कहा कि उनके शब्दों को गलत समझा गया। बाद में स्पष्ट किया गया कि निर्णय सरकार के स्तर पर लिया गया था। लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था।सोशल मीडिया पर #BangladeshCricket और #T20WorldCup ट्रेंड करने लगे। फैंस ने सवाल उठाए—क्या खिलाड़ियों को बलि का बकरा बनाया गया?क्या खेल राजनीति का शिकार हो गया? ICC का रुख क्या रहा? ICC ने साफ कहा कि: इस फैसले ने बांग्लादेशी क्रिकेट प्रेमियों को बड़ा झटका दिया। क्रिकेट वहां सिर्फ खेल नहीं, जुनून है। Pakistan, India और Regional Impact इस विवाद का असर क्षेत्रीय क्रिकेट संबंधों पर भी पड़ा। कुछ देशों ने पहले सख्त रुख अपनाया, लेकिन बाद में स्थिति संभालने की कोशिश की गई ताकि टूर्नामेंट पर बड़ा संकट न आए। स्पष्ट है कि T20 World Cup 2026 controversy सिर्फ एक टीम के बाहर होने की कहानी नहीं, बल्कि क्रिकेट और कूटनीति के टकराव की कहानी बन गई है। खिलाड़ियों के सपनों का क्या? किसी भी खिलाड़ी के लिए वर्ल्ड कप सिर्फ एक टूर्नामेंट नहीं होता—यह वर्षों की मेहनत, त्याग और उम्मीदों का मंच होता है। जब एक खिलाड़ी कहता है,“हमारा कोई नहीं”,तो वह केवल प्रशासनिक विवाद की बात नहीं कर रहा होता, बल्कि उस टूटे हुए सपने की बात कर रहा होता है जिसे उसने देश के लिए संजोया था। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Kanpur

Kanpur Lamborghini Accident नकली ड्राइवर पेश करने की कोशिश नाकाम, आरोपी गिरफ्तार

कानपुर (Kanpur) में हुए चर्चित Lamborghini Accident ने पूरे देश को झकझोर दिया है। रफ्तार, रसूख और जिम्मेदारी—इन तीन शब्दों के बीच फंसा यह मामला अब कानूनी मोड़ ले चुका है। वायरल वीडियो, नकली ड्राइवर पेश करने का आरोप और आखिरकार गिरफ्तारी… कानपुर लैंबोर्गिनी कांड लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। क्या है Kanpur Lamborghini Accident पूरा मामला? 8 फरवरी 2026 को कानपुर की वीआईपी रोड पर एक लग्जरी Lamborghini सुपरकार तेज रफ्तार में अनियंत्रित होकर कई वाहनों और राहगीरों से टकरा गई। हादसे में कम से कम छह लोग घायल हुए। स्थानीय लोगों के मुताबिक कार की रफ्तार बेहद तेज थी और टक्कर इतनी अचानक हुई कि संभलने का मौका ही नहीं मिला। घायलों में कुछ लोग काम से लौट रहे थे, तो कुछ सड़क किनारे खड़े थे। इस हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया कि शहर की सड़कों पर रफ्तार का रोमांच किस कीमत पर लिया जा रहा है? वीडियो वायरल: कहानी ने लिया नया मोड़ हादसे के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो तेजी से वायरल हुए। इन फुटेज में देखा गया कि: इन वीडियो के सामने आने के बाद मामला सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं रहा, बल्कि जांच और जवाबदेही का मुद्दा बन गया। अरबपति का बेटा गिरफ्तार जांच के दौरान सामने आया कि कार एक बड़े कारोबारी परिवार से जुड़ी है। आरोप है कि हादसे के समय कारोबारी का बेटा शिवम मिश्रा खुद गाड़ी चला रहा था। घटना के बाद वह सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आया, जिससे कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। करीब चार दिन बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। मेडिकल जांच के बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया। पुलिस ने उसके खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने और लोगों को नुकसान पहुंचाने जैसी धाराओं में मामला दर्ज किया है। नकली ड्राइवर पेश करने का आरोप मामले में सबसे बड़ा विवाद तब सामने आया जब परिवार की ओर से कहा गया कि हादसे के समय कार शिवम नहीं, बल्कि उनका ड्राइवर चला रहा था। एक व्यक्ति ने खुद को ड्राइवर बताते हुए जिम्मेदारी लेने की बात भी कही। हालांकि पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूतों के आधार पर इस दावे को खारिज कर दिया। जांच एजेंसियों का कहना है कि उपलब्ध प्रमाणों के अनुसार ड्राइविंग सीट पर शिवम ही था। बीमारी का दावा भी चर्चा में परिवार की ओर से यह भी कहा गया कि शिवम को मिर्गी (Epilepsy) की समस्या है और संभव है कि अचानक तबीयत बिगड़ने के कारण हादसा हुआ हो। पुलिस ने इस दावे की भी जांच शुरू की है, लेकिन अभी तक इसे हादसे का आधिकारिक कारण नहीं माना गया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gold

MCX Gold Silver Update सोना ₹1.56 लाख, चांदी ₹2.61 लाख किलो

12 फरवरी 2026 को सर्राफा बाजार में सोना (Gold) और चांदी (Silver) दोनों की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। जहां एक ओर चांदी ₹5,835 तक टूटकर करीब ₹2.61 लाख प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई, वहीं सोना भी ₹1,175 गिरकर लगभग ₹1.56 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गया। लगातार उतार-चढ़ाव के बीच यह गिरावट खरीदारों के लिए थोड़ी राहत लेकर आई है। आज का ताज़ा रेट (Gold Silver Rate Today) MCX पर भी दोनों धातुओं में दबाव देखा गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोरी का असर घरेलू बाजार पर साफ दिखाई दिया। शहरों में क्या रहे दाम? देश के प्रमुख शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और बेंगलुरु में सोने की कीमत लगभग समान दायरे में रही, जबकि चांदी के रेट में हल्का अंतर देखने को मिला। आमतौर पर स्थानीय टैक्स, डिमांड और ट्रांसपोर्ट लागत के कारण अलग-अलग शहरों में दाम थोड़ा ऊपर-नीचे हो सकते हैं। अगर आप खरीदारी की सोच रहे हैं तो अपने शहर के ज्वेलर से दिन का अंतिम रेट जरूर कन्फर्म करें, क्योंकि बाजार में दिनभर उतार-चढ़ाव जारी रहता है। गिरावट की वजह क्या है? बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट के पीछे मुख्य कारण हैं: जब डॉलर मजबूत होता है तो सोने जैसी सुरक्षित निवेश संपत्तियों की मांग में कमी आ सकती है, जिसका असर कीमतों पर पड़ता है। क्या यह खरीदारी का सही समय है? पिछले कुछ हफ्तों में सोना और चांदी रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचे थे। ऐसे में मौजूदा गिरावट उन लोगों के लिए मौका हो सकती है जो शादी-ब्याह या निवेश के लिए खरीदारी की योजना बना रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि एकमुश्त निवेश की बजाय चरणबद्ध (Systematic) तरीके से खरीदारी करना बेहतर रहता है। बाजार अभी भी अस्थिर है, इसलिए सोच-समझकर निर्णय लेना जरूरी है। ध्यान रखने वाली बातें हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rahul Gandhi

Membership Controversy in Parliament BJP का Rahul Gandhi पर एक्शन, रिजिजू के Video से मचा हंगामा

संसद के बजट सत्र 2026 में सियासी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। लोकसभा में हंगामे, आरोप-प्रत्यारोप और संवैधानिक प्रक्रियाओं पर उठे सवालों के बीच अब मामला सीधे Rahul Gandhi की सदस्यता (Membership) और स्पीकर चैंबर विवाद (Speaker Chamber Row) तक पहुंच गया है। सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं, और संसद का माहौल असाधारण रूप से तनावपूर्ण बना हुआ है। BJP MP का नोटिस: राहुल गांधी की सदस्यता खत्म करने की मांग बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा में एक नोटिस देकर राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की सदस्यता समाप्त करने की मांग की है। उनका आरोप है कि राहुल गांधी ने सदन के भीतर ऐसे बयान दिए जो तथ्यों पर आधारित नहीं थे और जिनसे देश की छवि प्रभावित होती है। दुबे का कहना है कि संसद की गरिमा बनाए रखना हर सदस्य की जिम्मेदारी है, और अगर कोई सदस्य भ्रामक जानकारी देता है तो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए। इस नोटिस के सामने आते ही सदन में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। कांग्रेस सांसदों ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया, जबकि बीजेपी इसे संसदीय अनुशासन का मामला बता रही है। Speaker Chamber Video: रिजिजू ने जारी किया क्लिप विवाद उस समय और गहरा गया जब केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो क्लिप साझा की। इस वीडियो में कथित तौर पर कुछ विपक्षी सांसद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के चैंबर में मौजूद दिखाई दे रहे हैं। रिजिजू ने दावा किया कि कुछ कांग्रेस सांसद स्पीकर के कक्ष में पहुंचे और वहां अनुचित व्यवहार किया। उन्होंने इसे संसदीय परंपराओं के खिलाफ बताया। वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई। विपक्ष का जवाब: लोकतांत्रिक अधिकारों का सवाल कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि उनके नेताओं को बोलने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया जा रहा था, जिसके चलते विरोध दर्ज कराया गया। उनका आरोप है कि सदन की कार्यवाही निष्पक्ष नहीं चल रही। कुछ विपक्षी नेताओं ने यह भी कहा कि स्पीकर की भूमिका पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकारों के दायरे में आता है। संसद में बढ़ता टकराव लगातार हंगामे के कारण कार्यवाही कई बार बाधित हुई। नारेबाजी, वेल में आना और विरोध प्रदर्शन के चलते प्रश्नकाल और अन्य कामकाज प्रभावित हुआ। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल एक बयान या वीडियो तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकार और विपक्ष के बीच गहरे अविश्वास को दर्शाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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India

Dal vs Deal India-US Trade Agreement में Pulses पर क्यों अटक गई बात? समझिए Red Line Strategy

India-US Trade Agreement 2026 इस समय वैश्विक व्यापार की सबसे चर्चित खबरों में से एक है। जहां एक तरफ दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ “दाल” यानी pulses इस समझौते की सबसे संवेदनशील कड़ी बनकर सामने आई। सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि व्हाइट हाउस को अपनी फैक्टशीट में बदलाव करना पड़ा? और क्यों कहा जा रहा है कि भारत की “Red Line” के आगे अमेरिका को झुकना पड़ा? क्या है India-US Trade Deal 2026? फरवरी 2026 में भारत और अमेरिका के बीच एक अंतरिम (interim) व्यापार समझौते की घोषणा हुई। इस डील का मुख्य उद्देश्य: अमेरिका ने कुछ भारतीय उत्पादों पर लगने वाले ऊंचे टैरिफ कम करने पर सहमति जताई। बदले में भारत भी कुछ अमेरिकी उत्पादों के लिए बाजार खोलने को तैयार हुआ। कागज पर यह डील “win-win” दिख रही थी। लेकिन असली कहानी यहां से शुरू होती है। ‘Dal’ क्यों बनी सबसे बड़ा मुद्दा? भारत दुनिया के सबसे बड़े दाल उत्पादक और उपभोक्ता देशों में शामिल है। दाल सिर्फ एक कृषि उत्पाद नहीं, बल्कि: शुरुआती अमेरिकी फैक्टशीट में “certain pulses” पर टैरिफ में राहत का उल्लेख किया गया था। इसका मतलब यह माना गया कि भारत अमेरिकी दालों के लिए अपना बाजार अधिक खोल सकता है। यहीं से विवाद शुरू हुआ। किसानों और कृषि संगठनों को आशंका थी कि अगर अमेरिकी दालें कम शुल्क पर भारत आएंगी, तो घरेलू बाजार में कीमतें गिर सकती हैं। इससे स्थानीय किसानों को सीधा नुकसान होगा। भारत की ‘Red Line’ क्या थी? ट्रेड नेगोशिएशन में “Red Line” का मतलब होता है — वह सीमा जिसे कोई देश पार नहीं करेगा। भारत ने साफ संकेत दिया कि: White House ने क्या बदला? विवाद बढ़ने और भारत की सख्त स्थिति के बाद व्हाइट हाउस ने अपनी फैक्टशीट में संशोधन किया। बदलाव इस प्रकार थे: “Certain Pulses” का उल्लेख हटाया गया नई फैक्टशीट में दालों का सीधा जिक्र नहीं किया गया। इससे यह संकेत गया कि pulses पर कोई बाध्यकारी प्रतिबद्धता नहीं है। “Committed” से “Intends” पहले कहा गया था कि भारत 500 बिलियन डॉलर के अमेरिकी सामान खरीदने के लिए committed है। बाद में इसे बदलकर “intends to buy” कर दिया गया।यह भाषा कानूनी और राजनीतिक रूप से कम कठोर मानी जाती है। डिजिटल टैक्स पर भी नरमी डिजिटल सर्विस टैक्स हटाने जैसी सख्त भाषा को भी नरम किया गया। इन संशोधनों ने यह स्पष्ट कर दिया कि अमेरिका ने भारत की संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखते हुए अपनी स्थिति में बदलाव किया। किसानों की प्रतिक्रिया और घरेलू राजनीति डील की शुरुआती खबर के बाद कई किसान संगठनों ने चिंता जताई। कुछ स्थानों पर विरोध प्रदर्शन भी हुए। विपक्षी दलों ने भी सवाल उठाए कि क्या यह समझौता कृषि क्षेत्र को प्रभावित करेगा। क्या यह Trump का U-Turn था? अमेरिकी राजनीतिक हलकों में भी इस बदलाव पर चर्चा हुई। कुछ विश्लेषकों ने इसे “softening of stance” यानी रुख नरम करना बताया। ट्रंप प्रशासन पर अमेरिकी कृषि लॉबी का दबाव था कि भारत अपना बाजार खोले। लेकिन भारत के स्पष्ट रुख के कारण दस्तावेज़ की भाषा बदलनी पड़ी। इसलिए कई रिपोर्टों में इसे “Trump took his finger off India’s sensitive pulse” जैसी अभिव्यक्ति दी गई। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi

UNSC Report on Delhi Blast Jaish-e-Mohammed Link से Pakistan की मुश्किलें बढ़ीं

Delhi के ऐतिहासिक लाल किले (Red Fort) के पास हुए आतंकी हमले को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की ताज़ा रिपोर्ट ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था को झकझोर दिया है। रिपोर्ट में पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammed) का नाम सामने आने के बाद इस मामले ने वैश्विक स्तर पर गंभीर रूप ले लिया है। क्या हुआ था Delhi Red Fort के पास? 10 नवंबर 2025 को लाल किले के नजदीक कार बम विस्फोट हुआ था। यह इलाका देश की ऐतिहासिक और रणनीतिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील जगहों में गिना जाता है। धमाके में कई लोगों की मौत हुई और कई घायल हुए। घटना के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसियों ने इसे सुनियोजित आतंकी हमला बताया था। शुरुआती जांच में सीमा पार आतंकी नेटवर्क की भूमिका की आशंका जताई गई थी। UN Report में क्या बड़ा खुलासा हुआ? संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध निगरानी समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस हमले के तार जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े नेटवर्क तक जाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार: रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुछ सदस्य देशों का मानना है कि यह संगठन अब भी खतरा बना हुआ है, जबकि कुछ इसे कमजोर बता रहे हैं। यही मतभेद अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा का विषय बने हुए हैं। पाकिस्तान पर क्या असर? UNSC की रिपोर्ट में नाम आने के बाद पाकिस्तान की स्थिति असहज मानी जा रही है। पाकिस्तान लंबे समय से दावा करता रहा है कि उसने आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई की है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय दस्तावेज में Jaish-e-Mohammed का जिक्र होने से पाकिस्तान पर जवाबदेही का दबाव बढ़ गया है। कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण Diplomatic Win हो सकता है। भारत के लिए क्यों अहम है यह रिपोर्ट? भारत वर्षों से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाता रहा है। ऐसे में UN Report में संगठन का नाम आना भारत के रुख को मजबूती देता है। इसके अलावा, यह रिपोर्ट सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी अहम संकेत देती है कि आतंकी संगठन अपनी रणनीति और संरचना में बदलाव कर रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Lucknow

Lucknow Fire Breaking इंस्टीट्यूट में आग से मची अफरा-तफरी, कई छात्र घायल

उत्तर प्रदेश की राजधानी Lucknow में एक इंस्टीट्यूट में अचानक लगी भीषण आग ने पूरे इलाके में अफरा-तफरी मचा दी। कुछ ही मिनटों में आग ने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे अंदर मौजूद छात्र-छात्राएं और स्टाफ घबरा गए। धुआं भरते ही बिगड़े हालात प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही आग लगी, पूरे भवन में घना धुआं फैल गया और बाहर निकलने के रास्ते बंद होने लगे। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि कई छात्रों को अपनी जान बचाने के लिए पहली मंजिल से नीचे कूदना पड़ा। कई छात्र घायल, अस्पताल में भर्ती इस हादसे में कुछ छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। एक छात्र के नीचे गिरने से लोहे की ग्रिल से टकराने की भी जानकारी सामने आई है, जिससे उसकी हालत चिंताजनक बताई जा रही है। सभी घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। रेस्क्यू ऑपरेशन और राहत कार्य जारी घटना के बाद मौके पर भारी अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने की कोशिश शुरू की गई। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Sensex

Market Update: Sensex 500 Points Jump, Nifty में 150 अंकों की बढ़त

आज भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों के चेहरे पर खुशी लौट आई जब पूरे दिन खरीदारी का माहौल बना रहा। शुरुआती कारोबार से ही बाजार में तेजी का रुख देखने को मिला और दिन के अंत तक यह मजबूती और गहरी हो गई। Sensex करीब 500 अंकों की बढ़त के साथ 77,300 के स्तर तक पहुंच गया। वहीं Nifty 50 में भी लगभग 150 अंकों की तेजी दर्ज की गई, जिससे बाजार में सकारात्मक माहौल बना रहा। बाजार में क्यों लौटी रौनक? पिछले कुछ सत्रों की सुस्ती के बाद आज बाजार में जो तेजी देखने को मिली, उसके पीछे कई अहम वजहें रहीं— इन सभी कारणों ने मिलकर बाजार को मजबूत सपोर्ट दिया। सेक्टर अपडेट: किसने कितना दिया साथ? आज के कारोबार में अलग-अलग सेक्टरों का प्रदर्शन इस तरह रहा— IT सेक्टर: दिन का सबसे बड़ा स्टार, लगातार खरीदारी देखने को मिलीOil & Gas: मजबूत उछाल के साथ निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ीBanking: स्थिर से सकारात्मक रुझानFMCG: हल्की लेकिन स्थिर बढ़त बाजार का मूड कैसा रहा? बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक यह तेजी फिलहाल एक राहत भरी रिकवरी (relief rally) का हिस्सा हो सकती है। हालांकि, आगे भी ग्लोबल संकेत और आर्थिक डेटा बाजार की दिशा तय करेंगे। निवेशकों के बीच फिलहाल बड़े और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों को लेकर भरोसा बढ़ता दिख रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gold

Gold Silver Market कीमतों में जोरदार उछाल, निवेशक सतर्क

देश के सर्राफा बाजार में आज सोना (Gold) और चांदी (Silver) की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। लगातार बढ़ते दामों ने जहां निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ा दी है, वहीं आम खरीदारों के बजट पर भी दबाव साफ नजर आने लगा है। ताजा अपडेट के अनुसार चांदी के भाव में आज ₹5,826 प्रति किलोग्राम की बड़ी छलांग दर्ज की गई है। इस तेजी के बाद चांदी का रेट अब करीब ₹2.37 लाख प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। बाजार में यह स्तर काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ दिनों से चांदी लगातार मजबूत बनी हुई है। वहीं दूसरी ओर सोने की कीमतों में भी तेजी जारी है। 24 कैरेट सोना (10 ग्राम) अब ₹1,46,000 के आसपास पहुंच गया है, जिसमें ₹1,694 की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सोने के दामों में यह उछाल घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों ही बाजारों के संकेतों का असर माना जा रहा है। आखिर क्यों बढ़ रहे हैं Gold-Silver के दाम? विशेषज्ञों के अनुसार सोना-चांदी की कीमतों में तेजी के पीछे कई कारण हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता, डॉलर में उतार-चढ़ाव और सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ती मांग इसका मुख्य कारण है। इसके साथ ही भारत में शादी और त्योहारों का सीजन भी नजदीक है, जिससे ज्वेलरी की मांग तेजी से बढ़ रही है। आम लोगों पर असर और निवेश का संकेत लगातार बढ़ते रेट्स का सीधा असर आम खरीदारों पर पड़ रहा है, खासकर उन लोगों पर जो शादी या निवेश के लिए सोना-चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं। दूसरी तरफ, निवेशक इसे अभी भी सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बाजार की स्थिति को देखते हुए सोच-समझकर निवेश करना चाहिए। कुल मिलाकर, सोना-चांदी की यह तेजी संकेत दे रही है कि आने वाले दिनों में सर्राफा बाजार और भी ज्यादा सक्रिय और अस्थिर रह सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

21 दिन से नहीं मिला जीवनरक्षक इंजेक्शन, बच्चों की जान बचाने सड़क पर बैठा पिता; जिला अस्पताल के सामने लगाया जाम

सीहोर में एक पिता की बेबसी उस वक्त सड़क पर उतर आई, जब हीमोफीलिया से पीड़ित उसके दो बच्चों को पिछले 21 दिनों से जीवनरक्षक इंजेक्शन नहीं मिल पाया। बच्चों की बिगड़ती हालत से परेशान पिता ने परिवार सहित जिला अस्पताल के सामने चक्काजाम कर प्रशासन से मदद की गुहार लगाई। आष्टा तहसील के ग्राम गुराडिया रूपचन्द्र निवासी श्रवण कुमार मेवाड़ा के दो बच्चे हीमोफीलिया जैसी गंभीर अनुवांशिक बीमारी से पीड़ित हैं। इस बीमारी में चोट लगने या रक्तस्राव होने पर खून का थक्का नहीं जमता, जिससे मरीज की जान तक खतरे में पड़ सकती है। इलाज के लिए नियमित रूप से फैक्टर VIII (Factor VIII) इंजेक्शन की आवश्यकता होती है। 21 दिनों से अस्पताल में नहीं है इंजेक्शन परिजनों के अनुसार डॉक्टरों ने बच्चों के लिए फैक्टर VIII इंजेक्शन लिख रखा है, लेकिन जिला अस्पताल के मुख्य दवा स्टोर में पिछले 21 दिनों से यह दवा उपलब्ध नहीं है। इतना ही नहीं, भोपाल में भी सरकारी स्तर पर यह इंजेक्शन नहीं मिल पा रहा है। आर्थिक तंगी बनी मजबूरी श्रवण कुमार ने बताया कि वे बेरोजगार हैं और उनकी आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं है कि निजी मेडिकल स्टोर से महंगा इंजेक्शन खरीद सकें। उन्होंने 19 जून को कलेक्टर को आवेदन देकर मदद की मांग भी की थी। पिता का कहना है कि यदि मध्य प्रदेश में दवा उपलब्ध नहीं है तो प्रशासन उन्हें बच्चों के इलाज के लिए मुंबई जाने हेतु कम से कम 15 दिनों की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराए। बच्चों की जान बचाने सड़क पर बैठा परिवार जब लगातार शिकायतों के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला तो परेशान पिता अपने परिवार के साथ जिला चिकित्सालय के सामने सड़क पर बैठ गए। देखते ही देखते सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात प्रभावित हो गया। बच्चों की जान बचाने की गुहार लगाते इस परिवार को देखकर मौके पर मौजूद लोग भी भावुक हो गए। सिविल सर्जन ने दिया आश्वासन चक्काजाम और हंगामे की सूचना मिलते ही जिला अस्पताल के सिविल सर्जन मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिवार से बातचीत कर उनकी समस्या सुनी और जल्द से जल्द फैक्टर VIII इंजेक्शन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद प्रदर्शन समाप्त कराने के प्रयास किए गए। व्यवस्था पर उठे सवाल इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता और गरीब मरीजों को समय पर इलाज मिलने की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते दवा उपलब्ध करा दी जाती, तो एक परिवार को सड़क पर उतरकर अपनी पीड़ा जाहिर करने की नौबत नहीं आती। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
Keir Starmer

Keir Starmer Resigns: ब्रिटेन की राजनीति में बड़ा उलटफेर, Andy Burnham सबसे बड़े दावेदार

ब्रिटेन की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर (Keir Starmer) ने अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने साफ कहा कि उनकी अपनी पार्टी लेबर पार्टी (Labour Party) के कई सांसदों को अब यह भरोसा नहीं है कि वह अगले आम चुनाव (General Election) में पार्टी को जीत दिला पाएंगे। ऐसे में उन्होंने पार्टी और देश के हित को प्राथमिकता देते हुए पद छोड़ने का फैसला लिया। स्टार्मर ने अपने संबोधन में कहा कि नेतृत्व केवल पद पर बने रहने का नाम नहीं है, बल्कि सही समय पर सही फैसला लेना भी उतना ही जरूरी होता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नए नेता के चुने जाने तक वह कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे, ताकि सत्ता का हस्तांतरण बिना किसी राजनीतिक अस्थिरता के पूरा हो सके। पार्टी के भीतर बढ़ता गया दबाव पिछले कुछ महीनों से लेबर पार्टी के अंदर स्टार्मर के नेतृत्व को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। कई सांसदों का मानना था कि सरकार की लोकप्रियता में गिरावट और हाल के चुनावी प्रदर्शन को देखते हुए मौजूदा नेतृत्व के साथ अगले चुनाव में जीत आसान नहीं होगी। इसी बीच कुछ उपचुनावों के नतीजों और पार्टी के अंदर बढ़ती नाराजगी ने नेतृत्व परिवर्तन की मांग को और मजबूत कर दिया। आखिरकार, लगातार बढ़ते दबाव के बाद स्टार्मर ने इस्तीफा देने का फैसला किया। Andy Burnham बन सकते हैं नए प्रधानमंत्री स्टार्मर के इस्तीफे के बाद एंडी बर्नहैम (Andy Burnham) का नाम सबसे मजबूत दावेदार के रूप में सामने आया है। पार्टी के कई सांसद उनके समर्थन में बताए जा रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि नेतृत्व चुनाव में कोई बड़ा उलटफेर नहीं हुआ, तो बर्नहैम ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं। हालांकि, लेबर पार्टी की आधिकारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नए नेता और प्रधानमंत्री के नाम की औपचारिक घोषणा होगी। ब्रिटेन की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर? प्रधानमंत्री के अचानक इस्तीफे से ब्रिटेन की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। नई सरकार बनने के बाद आर्थिक नीतियों, विदेश नीति और घरेलू सुधारों में कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नया नेतृत्व आने के बाद लेबर पार्टी अपनी रणनीति में बदलाव कर सकती है ताकि अगले आम चुनाव से पहले जनता का भरोसा दोबारा हासिल किया जा सके। वहीं विपक्ष भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। सत्ता परिवर्तन पर दुनिया की नजर कीर स्टार्मर ने अपने कार्यकाल के दौरान कई अहम फैसले लिए, लेकिन पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष ने उनके लिए पद पर बने रहना मुश्किल बना दिया। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि लेबर पार्टी अपना नया नेता किसे चुनती है और ब्रिटेन की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है। यदि एंडी बर्नहैम प्रधानमंत्री बनते हैं, तो यह केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं होगा, बल्कि लेबर पार्टी के लिए नई राजनीतिक शुरुआत भी मानी जाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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