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Gold

आज सोना ₹5,000 महंगा चांदी Silver की तेजी ने Investors को किया उत्साहित

आज कीमती धातुओं के बाजार में तेज़ी देखने को मिली है। सोना (Gold) और चांदी (Silver) दोनों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, जिससे निवेशकों की नजरें इन धातुओं पर और बढ़ गई हैं। सोने की कीमतें (Gold Price): सोने में आज ₹5,000 की बढ़ोतरी हुई है और इसकी कीमत अब ₹1,59,000 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई है। पिछले कुछ हफ्तों में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन इस नई तेजी ने निवेशकों में उत्साह पैदा कर दिया है। चांदी की कीमतें (Silver Price): चांदी में भी आज ₹25,000 की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस साल सिर्फ 27 दिनों में चांदी की कीमतों में कुल ₹1,12,000 की तेजी आई है। इस उछाल ने चांदी को शॉर्ट टर्म निवेशकों के लिए भी आकर्षक बना दिया है। विशेषज्ञों की राय: बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और मुद्रास्फीति के बढ़ते दबाव के चलते निवेशक सुरक्षित विकल्प की ओर बढ़ रहे हैं। सोना (Gold) लंबे समय तक सुरक्षित निवेश माना जाता है, जबकि चांदी (Silver) की तेज़ बढ़ोतरी शॉर्ट टर्म निवेश के लिए अवसर प्रदान करती है। निवेशकों के लिए सुझाव: विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि निवेशक धैर्य रखें और बाजार की चाल को समझकर ही निवेश करें। कीमती धातुओं में निवेश करने से पहले हाल की कीमतों और वैश्विक मार्केट ट्रेंड पर ध्यान देना ज़रूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Alankar Agnihotri

Alankar Agnihotri बरेली CM Office में विवाद और सस्पेंशन

उत्तर प्रदेश के बरेली में City Magistrate अलंकार अग्निहोत्री (Alankar Agnihotri) ने 26 जनवरी को अचानक अपने पद से इस्तीफा (resignation) दे दिया, जिससे प्रशासन में हलचल मच गई। उन्होंने यह कदम मुख्य रूप से नई UGC नियमों और प्रशासनिक नीतियों के विरोध में उठाया। उनके इस्तीफे के बाद, उन्होंने इसे “काला कानून” बताते हुए इसकी वापसी की मांग की। Allegations और Administrative Response इस्तीफा देने के तुरंत बाद, Alankar Agnihotri ने आरोप लगाया कि उन्हें बरेली DM कार्यालय में बुलाकर अपमानित किया गया। उनका कहना था कि उन्हें कार्यालय में रोका गया और उनके साथ अपमानजनक व्यवहार हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें जान का खतरा महसूस हुआ। वहीं, प्रशासन ने इन आरोपों का खंडन किया और कहा कि मजिस्ट्रेट को सिर्फ बातचीत के लिए बुलाया गया था। किसी तरह का बंधक बनाने या अपमान करने का मामला नहीं था। Suspension और Departmental Inquiry उत्तर प्रदेश सरकार ने अलंकार अग्निहोत्री (Alankar Agnihotri) को सस्पेंड कर दिया। उनके खिलाफ departmental inquiry शुरू कर दी गई है। सरकार के मुताबिक प्रारंभिक तौर पर उनका व्यवहार अनुशासनहीन प्रतीत हुआ। सस्पेंड के दौरान उन्हें सीमित भत्ता मिलेगा। धरना और विरोध सस्पेंशन के बाद, Alankar Agnihotri कलेक्ट्रेट के बाहर धरने पर बैठ गए। उनका कहना है कि जब तक DM यह स्पष्ट नहीं करेंगे कि उन्हें अपमानजनक शब्द किसने कहे, धरना जारी रहेगा। मजिस्ट्रेट ने इसे अपनी न्याय की लड़ाई और प्रशासन पर विश्वासघात का प्रतीक बताया। विवाद के मुख्य पहलू यह मामला न केवल बरेली प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है, बल्कि राज्य सरकार की संवेदनशीलता और अधिकारी-सरकारी नीतियों पर सवाल भी उठा रहा है। अब देखना होगा कि departmental inquiry और प्रशासनिक कार्रवाई किस दिशा में जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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T20

IND vs NZ T20 2026 Tilak Varma बाहर, Shreyas Iyer की वापसी

भारत और न्यूजीलैंड के बीच चल रही 5 मैचों की T20 Series 2026 में अब तक भारत ने लगातार जीत दर्ज की हैं और सीरीज पर पकड़ मजबूत कर ली है। लेकिन सीरीज के आख़िरी दो मैचों से पहले दोनों टीमों ने Squad में अहम बदलाव किए हैं, जो अब फैंस के लिए चर्चा का विषय बन गया है। Team India: बड़ा बदलाव तिलक वर्मा (Tilak Varma) बाहर भारत के युवा बल्लेबाज़ तिलक वर्मा को फिटनेस के कारण 4th और 5th T20I के लिए टीम में नहीं रखा गया। उन्होंने अब तक शानदार प्रदर्शन किया है, लेकिन BCCI चाहता है कि वह पूरी तरह match-fit होकर आगे आने वाले ICC T20 World Cup 2026 के लिए तैयार रहें। श्रेयस अय्यर (Shreyas Iyer) बने टीम में तिलक वर्मा के रिप्लेसमेंट के रूप में श्रेयस अय्यर पहले से टीम में थे और अब उन्हें बाकी दोनों मैचों के लिए भी Squad में बनाए रखा गया है। यह कदम भारत की टीम की रणनीति का हिस्सा है, ताकि युवा खिलाड़ियों को दबाव के बिना फिट रहने का समय मिले। Team India का संभावित Squad (Updated) Suryakumar Yadav (C), Abhishek Sharma, Sanju Samson (WK), Shreyas Iyer, Hardik Pandya, Shivam Dube, Axar Patel (VC), Rinku Singh, Jasprit Bumrah, Harshit Rana, Arshdeep Singh, Kuldeep Yadav, Varun Chakaravarthy, Ishan Kishan (WK), Ravi Bishnoi New Zealand: दो खिलाड़ियों को किया बाहर न्यूज़ीलैंड ने भी अपने Squad में बदलाव किए हैं। यह बदलाव NZ टीम की कोशिश है कि वह अंतिम दो मैचों में वापसी करे और सीरीज में आत्मविश्वास बनाए रखे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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UGC

UGC New Rules विवाद शिक्षा नीति से सियासत तक, बीजेपी में असंतोष और विपक्ष की चुप्पी

University Grants Commission (UGC) के नए नियम इन दिनों सिर्फ शिक्षा जगत में ही नहीं, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का बड़ा विषय बने हुए हैं। दिलचस्प बात यह है कि जहां आमतौर पर ऐसे मुद्दों पर विपक्ष सबसे पहले मोर्चा खोलता है, इस बार तस्वीर उलटी है। सत्तारूढ़ बीजेपी के भीतर ही असहजता और विरोध के स्वर उभर रहे हैं, जबकि विपक्ष अपेक्षाकृत शांत दिखाई दे रहा है। यह पूरा विवाद अब केवल नियमों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संघीय ढांचे, राज्यों के अधिकार और आने वाले चुनावों की राजनीति से भी जुड़ गया है। UGC New Rules पर बीजेपी के अंदर विरोध क्यों? UGC के नए नियमों को लेकर सबसे बड़ा सवाल राज्यों की भूमिका पर उठ रहा है। शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची (Concurrent List) में आती है, यानी इसमें केंद्र और राज्य दोनों को अधिकार हैं। लेकिन नए प्रावधानों से यह धारणा बन रही है कि केंद्र सरकार का दखल राज्यों के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा व्यवस्था में बढ़ जाएगा। खास तौर पर कुलपतियों की नियुक्ति, प्रशासनिक ढांचे और अकादमिक स्वायत्तता जैसे मुद्दों पर कई राज्य सरकारें खुद को असहज महसूस कर रही हैं। यही वजह है कि बीजेपी-शासित राज्यों के कुछ नेता भी खुलकर या अंदरखाने इन नियमों पर सवाल उठा रहे हैं। उनकी चिंता सिर्फ सैद्धांतिक नहीं है। ज़मीनी हकीकत यह है कि विश्वविद्यालयों में अगर शिक्षक संगठनों या छात्र समूहों का विरोध तेज़ होता है, तो उसका सीधा असर राज्य सरकारों और स्थानीय नेतृत्व पर पड़ेगा। चुनावी सालों में कोई भी नेता ऐसा जोखिम नहीं लेना चाहता। पार्टी के भीतर एक और खींचतान भी साफ दिखती है। एक धड़ा मानता है कि उच्च शिक्षा में एकरूपता और तेज़ सुधार के लिए केंद्रीकरण ज़रूरी है। वहीं दूसरा धड़ा इसे “ओवर-रेगुलेशन” और संघीय ढांचे पर हमला बता रहा है। इसी टकराव ने बीजेपी के अंदर विरोध को हवा दी है। विपक्ष की चुप्पी के मायने क्या हैं? विपक्ष की चुप्पी पहली नज़र में अजीब लगती है, लेकिन इसके पीछे एक सोची-समझी रणनीति दिखती है। पहली बात, UGC के नियम आम जनता के लिए तकनीकी और जटिल हैं। यह ऐसा मुद्दा नहीं है जो तुरंत भावनात्मक प्रतिक्रिया पैदा करे। विपक्ष शायद इंतज़ार कर रहा है कि शिक्षक संगठन, छात्र संघ या राज्य सरकारें पहले खुलकर विरोध करें, ताकि इसे जन-आंदोलन का रूप दिया जा सके। दूसरी बात, विपक्ष बीजेपी के भीतर उभर रही दरार को अपने आप गहराने देना चाहता है। अगर सत्तारूढ़ पार्टी अपने ही फैसले पर बंटी हुई दिखती है, तो विपक्ष के लिए यह राजनीतिक रूप से फायदेमंद है। ऐसे में सीधे हमला करने के बजाय “वेट एंड वॉच” की नीति ज्यादा सुरक्षित मानी जा रही है। तीसरी वजह राज्यों की राजनीति से जुड़ी है। तमिलनाडु और केरल जैसे विपक्ष-शासित राज्यों में केंद्र के शिक्षा में हस्तक्षेप का विरोध पहले से ही होता रहा है। वहां यह मुद्दा नया नहीं है। राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष फिलहाल महंगाई, बेरोज़गारी, जाति जनगणना और किसानों जैसे हाई-वोल्टेज मुद्दों पर ज्यादा फोकस कर रहा है। राजनीति में इसके संकेत क्या हैं? इस पूरे विवाद से तीन बड़े संकेत मिलते हैं: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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India

India-EU Summit 2026 राजघाट विज़िट से लेकर Trade Deal तक, दिल्ली में सुरक्षा और ट्रैफिक अलर्ट

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के रिश्तों में आज का दिन खास बन गया। राजधानी दिल्ली में 16वां India-EU Summit आयोजित हो रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और EU के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी ने माहौल को बेहद महत्वपूर्ण बना दिया है। एक तरफ राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि, तो दूसरी ओर ट्रेड डील और रणनीतिक साझेदारी पर बड़ी बातचीत — आज का हर पल सुर्खियों में है। राजघाट दौरा: सुरक्षा के चलते ट्रैफिक पर असर सुबह EU नेताओं के राजघाट पहुंचने से पहले ही दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने कई इलाकों में ट्रैफिक कर्फ्यू और डायवर्जन लागू कर दिए थे।बहादुर शाह ज़फर मार्ग, ITO चौक, दिल्ली गेट, शांतिवन चौक, IP फ्लाईओवर और असफ अली रोड जैसे रास्तों पर कुछ घंटों तक गाड़ियों की आवाजाही सीमित रही। राजघाट में EU प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। यह पल सिर्फ औपचारिक नहीं था, बल्कि भारत-EU संबंधों में सम्मान और साझेदारी का प्रतीक भी माना गया। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने पहले ही यात्रियों से अपील की थी कि वे सुबह के समय इन मार्गों से बचें और वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करें। कई लोगों को दफ्तर और स्कूल पहुंचने में थोड़ी परेशानी हुई, लेकिन ज्यादातर लोगों ने इसे एक अहम अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के लिए जरूरी कदम बताया। Summit की बड़ी तस्वीर: रिश्तों में नया अध्याय राजघाट कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डर लेयेन से मुलाकात की। बातचीत में व्यापार, निवेश, क्लाइमेट चेंज, टेक्नोलॉजी, डिफेंस और ग्लोबल सिक्योरिटी जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। उर्सुला वॉन डर लेयेन ने कहा कि“एक मजबूत और सफल भारत पूरी दुनिया के लिए स्थिरता और समृद्धि लेकर आता है।”उनके इस बयान को दोनों पक्षों के बीच बढ़ते भरोसे का संकेत माना जा रहा है। Free Trade Agreement: दो दशकों बाद बड़ी उम्मीद इस शिखर सम्मेलन का सबसे बड़ा फोकस रहा India-EU Free Trade Agreement (FTA)। करीब 20 साल से अटका यह समझौता अब अंतिम दौर में पहुंचता दिख रहा है। सूत्रों के मुताबिक, अगर यह डील अगले कुछ महीनों में औपचारिक रूप से साइन हो जाती है, तो इससे भारत के मैन्युफैक्चरिंग, IT, फार्मा और टेक्सटाइल सेक्टर को बड़ा फायदा मिल सकता है। EU पहले से ही भारत का एक प्रमुख ट्रेड पार्टनर है, और यह समझौता रिश्तों को नई ऊंचाई दे सकता है। Republic Day से Summit तक: मजबूत होता भरोसा गौर करने वाली बात यह भी है कि EU नेताओं ने 26 जनवरी को भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर हिस्सा लिया था। परेड देखने के बाद ही यह साफ हो गया था कि इस बार का India-EU Summit सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि भविष्य की बड़ी साझेदारी की नींव रखने वाला है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Iran

Iran ने अमेरिका को चेतावनी दी US Warship और Fighter Jet के खौफनाक दृश्य

ईरान (Iran) और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बीच तेहरान के Enghelab चौक में ईरान ने एक विशाल पोस्टर जारी कर अमेरिका को सैन्य कार्रवाई से बचने की कड़ी चेतावनी दी है। पोस्टर में US युद्धपोत (Aircraft Carrier) और Fighter Jet को ध्वस्त और समुद्र में खून बहते हुए दिखाया गया है। पोस्टर पर अंग्रेज़ी में लिखा है:“If you sow the wind, you will reap the whirlwind”(जो बुवाई करेगा, तूफान काटेगा) — यह स्पष्ट संदेश है कि किसी भी आक्रामक कदम का जवाब ईरान द्वारा दिया जाएगा। क्यों बढ़ रहा है तनाव? पोस्टर का संदेश विशेषज्ञों के अनुसार यह पोस्टर सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं है। इसमें दिखाए गए ध्वस्त युद्धपोत और नष्ट विमान, समुद्र में खून के दृश्य के साथ, यह संदेश देते हैं कि यदि वास्तविक टकराव हुआ तो परिणाम भयंकर होंगे। यह ईरान द्वारा अमेरिका और उसके सहयोगियों को भेजी गई सख्त चेतावनी है। अंतरराष्ट्रीय नजर अंतरराष्ट्रीय समुदाय फिलहाल सैन्य टकराव रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहा है। अमेरिका और Iran दोनों ही अपनी तैयारियों में लगे हैं, लेकिन किसी भी अप्रत्याशित कदम से मध्य पूर्व में सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bhopal

Bhopal Republic Day Celebration भोपाल में राज्य स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह, राज्यपाल ने फहराया तिरंगा

लाल परेड मैदान में गरिमा और उत्साह का माहौल Bhopal के ऐतिहासिक लाल परेड मैदान में 76वां गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह, गरिमा और देशभक्ति के माहौल में मनाया गया। राज्य स्तरीय समारोह के मुख्य अतिथि राज्यपाल ने ध्वजारोहण किया और भव्य परेड की सलामी ली। इस मौके पर मुख्यमंत्री, मंत्रिमंडल के सदस्य, वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आम नागरिक मौजूद रहे। परेड में दिखा अनुशासन और देशभक्ति का जज़्बा सुबह से ही लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। परेड में पुलिस, होमगार्ड, एनसीसी, स्काउट-गाइड और स्कूली बच्चों की टुकड़ियों ने अनुशासन और समर्पण का परिचय दिया। जवानों की सधी हुई कदमताल और बैंड की देशभक्ति धुनों ने पूरे माहौल को गर्व से भर दिया। झांकियों में मध्यप्रदेश की संस्कृति और विकास की झलक समारोह का मुख्य आकर्षण विभिन्न विभागों और जिलों की झांकियां रहीं। इन झांकियों में मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, आदिवासी परंपराएं, महिला सशक्तिकरण, जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और विकास योजनाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। दर्शकों ने झांकियों को खूब सराहा और मोबाइल कैमरों में यादें कैद कीं। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन स्कूली बच्चों और सांस्कृतिक दलों की देशभक्ति गीतों और नृत्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। हर प्रस्तुति में देश के प्रति प्रेम, एकता और समर्पण का संदेश साफ झलक रहा था। उत्कृष्ट सेवा के लिए सम्मान कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट सेवा के लिए पुलिसकर्मियों, प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके समर्पण और जिम्मेदारी का प्रतीक रहा। राज्यपाल का संदेश राज्यपाल ने अपने संबोधन में प्रदेशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं और संविधान के मूल्यों को आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश विकास, समरसता और आत्मनिर्भरता की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Uttarakhand

Uttarakhand Temple बदरीनाथ-केदारनाथ में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक का प्लान

उत्तराखंड (Uttarakhand ) के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों बदरीनाथ धाम और केदारनाथ धाम को लेकर एक बड़ा फैसला सामने आ सकता है। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने के लिए एक औपचारिक प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रही है। यह प्रस्ताव समिति की आगामी बोर्ड बैठक में पेश किया जाएगा। BKTC के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के अनुसार, इस कदम का मकसद देवभूमि उत्तराखंड की धार्मिक परंपराओं और मंदिरों की पवित्रता को बनाए रखना है। उनका कहना है कि परंपरागत रूप से इन धामों में गैर-हिंदुओं का प्रवेश नहीं होता था, लेकिन समय के साथ यह नियम ढीला पड़ गया। अब समिति इसे फिर से सख्ती से लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। Gangotri Dham में पहले ही लागू हो चुका है बैन इस फैसले की पृष्ठभूमि में गंगोत्री धाम का उदाहरण भी अहम माना जा रहा है। वहां पहले ही गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक लगाई जा चुकी है। श्री गंगोत्री मंदिर समिति ने यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया था और इसका उद्देश्य मंदिर की धार्मिक गरिमा की रक्षा बताया गया था। अब गंगोत्री के बाद बदरीनाथ-केदारनाथ में भी इसी तरह के नियम लागू करने पर गंभीरता से विचार हो रहा है। इससे संकेत मिलते हैं कि चारधाम यात्रा से जुड़े प्रमुख स्थलों पर प्रवेश नियम और सख्त हो सकते हैं। अभी फैसला नहीं, सिर्फ प्रस्ताव महत्वपूर्ण बात यह है कि यह अभी सिर्फ एक प्रस्ताव है, कोई अंतिम निर्णय नहीं। BKTC की बोर्ड बैठक में इस पर चर्चा होगी और यदि इसे मंजूरी मिलती है, तो आगे राज्य सरकार और प्रशासन के साथ समन्वय कर इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। समिति के अधिकारियों का कहना है कि किसी भी तरह का नियम लागू करने से पहले कानूनी पहलुओं और सामाजिक प्रभावों पर भी विचार किया जाएगा। समर्थन और विरोध, दोनों तरफ प्रतिक्रियाएँ इस प्रस्ताव को लेकर प्रतिक्रियाएँ मिलीजुली हैं।समर्थकों का कहना है कि इससे मंदिरों की पवित्रता और परंपराएं सुरक्षित रहेंगी। उनका मानना है कि चारधाम जैसे तीर्थस्थलों को केवल श्रद्धा और आस्था के नजरिए से देखा जाना चाहिए। वहीं आलोचकों का तर्क है कि ऐसा कदम सामाजिक समावेशन और धार्मिक सौहार्द के खिलाफ जा सकता है। कुछ लोग इसे संवैधानिक दृष्टि से भी चुनौतीपूर्ण मान रहे हैं। आगे क्या हो सकता है? फिलहाल सबकी निगाहें BKTC की बोर्ड बैठक पर टिकी हैं।अगर प्रस्ताव पास होता है, तो बदरीनाथ और केदारनाथ मंदिर परिसर में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर औपचारिक रोक लग सकती है। यह फैसला न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि राजनीतिक, सामाजिक और कानूनी स्तर पर भी बड़ी बहस को जन्म दे सकता है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि देशभर में चर्चा का केंद्र बन सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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शंकराचार्य

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उठाया संगम स्नान का मुद्दा Deputy CM Keshav Maurya का बयान

प्रयागराज माघ मेले (Prayagraj Magh Mela 2026) में इस बार धार्मिक और राजनीतिक तनाव (Religious & Political Tension) देखने को मिला। मामला तब गरमा गया जब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (Swami Avimukteshwaranand) को संगम में स्नान करने से रोका गया और प्रशासन के साथ उनका विवाद तेज हो गया। इस घटना ने सिर्फ धार्मिक समुदाय ही नहीं बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी। विवाद की पृष्ठभूमि (Background of the Controversy) स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 18 जनवरी से मेला प्रशासन (Mela Administration) के खिलाफ विरोध करना शुरू किया। उनका कहना था कि बिना सम्मान और माफी के वह संगम में स्नान (Holy Dip in Sangam) नहीं करेंगे। इस बीच उनके शिविर के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई और प्रशासन ने सीसीटीवी कैमरे लगाए। स्वामी ने प्रशासन की चूक को सार्वजनिक रूप से उठाया और शांतिपूर्ण समाधान की मांग की। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का डिप्टी सीएम पर बयान इस विवाद के बीच स्वामी ने डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य (Deputy CM Keshav Maurya) की तारीफ की। उन्होंने कहा: “ऐसे समझदार नेता को दबाया नहीं जाना चाहिए। उन्हें उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री होना चाहिए।” यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया। स्वामी ने मौर्य को संयमित और समझदार नेतृत्व वाला नेता बताया और प्रशासन की गलतियों को सुधारने की क्षमता पर भी जोर दिया। डिप्टी CM केशव मौर्य का रुख (Deputy CM Keshav Maurya’s Response) केशव प्रसाद मौर्य ने स्पष्ट किया कि वे स्वामी से औपचारिक मुलाकात नहीं करेंगे, लेकिन उन्होंने सकारात्मक संवाद की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रशासन की गलती की जांच होगी और विवाद को शांति से सुलझाना चाहिए। मौर्य ने स्वामी को आग्रह किया कि वे संगम में स्नान कर लोगों को एक सकारात्मक संदेश (Positive Message) दें। सुरक्षा और प्रशासनिक पहलू (Security & Administrative Aspect) स्वामी के शिविर के बाहर सुरक्षा बढ़ाई गई और कुछ समूहों के तनावपूर्ण रुझान के चलते प्रशासन सतर्क है। यह विवाद अब केवल धार्मिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बन गया है। सियासी और सामाजिक प्रभाव (Political & Social Impact) प्रयागराज माघ मेले का यह विवाद केवल स्नान और धार्मिक अधिकार तक सीमित नहीं है। यह प्रशासनिक फैसलों, राजनीतिक संदेशों और धार्मिक भावनाओं के बीच संतुलन का जीवंत उदाहरण बन चुका है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Border 2

Sunny Deol की Border 2 Box Office पर धमाका और गदर 2 के रिकॉर्ड्स टक्कर

सनी देओल की फिल्म Border 2 ने रिलीज होते ही बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया है। फिल्म ने केवल तीन दिनों में ₹121 करोड़+ (नेट) इंडिया और ₹150 करोड़+ विश्वव्यापी की कमाई कर 100 करोड़ क्लब में तेज़ी से एंट्री की। इस शानदार प्रदर्शन के साथ, Border 2 सनी देओल के करियर की दूसरी सबसे बड़ी कमाई वाली फिल्म बन गई, और उन्होंने अपनी पिछली हिट जाट को पीछे छोड़ दिया है। Box Office पर धमाका Border 2 ने इस साल की कई फिल्मों के शुरुआती कलेक्शन को पार कर दिया है। गदर 2 के शुरुआती रिकॉर्ड के लगभग बराबर प्रदर्शन करते हुए, फिल्म ने कई पुराने रिकॉर्ड्स तोड़ दिए हैं। जनवरी की ओपनिंग में Border 2 को Pathaan (Shah Rukh Khan) के बाद दूसरा स्थान मिला। सफलता के पीछे की वजह फिल्म की सफलता के पीछे सनी देओल की दमदार एक्टिंग, रोमांचक एक्शन और दर्शकों का उत्साह सबसे बड़ा कारण है। बड़े परदे पर उनकी वापसी ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया और साबित किया कि सनी देओल की फिल्मों में अभी भी अपार क्रेज़ है। गदर 2 और Pathaan के रिकॉर्ड्स Border 2 ने केवल गदर 2 के शुरुआती आंकड़ों को चुनौती नहीं दी, बल्कि कई पुराने बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड्स के करीब पहुँचकर बॉलीवुड में अपनी खास पहचान बनाई। हालांकि गदर 2 का पूरी लाइफटाइम रिकॉर्ड अभी भी बरकरार है, लेकिन Border 2 ने बॉक्स ऑफिस पर एक नई लहर पैदा की है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Editor's Picks

Lucknow

Lucknow Fire Breaking इंस्टीट्यूट में आग से मची अफरा-तफरी, कई छात्र घायल

उत्तर प्रदेश की राजधानी Lucknow में एक इंस्टीट्यूट में अचानक लगी भीषण आग ने पूरे इलाके में अफरा-तफरी मचा दी। कुछ ही मिनटों में आग ने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे अंदर मौजूद छात्र-छात्राएं और स्टाफ घबरा गए। धुआं भरते ही बिगड़े हालात प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही आग लगी, पूरे भवन में घना धुआं फैल गया और बाहर निकलने के रास्ते बंद होने लगे। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि कई छात्रों को अपनी जान बचाने के लिए पहली मंजिल से नीचे कूदना पड़ा। कई छात्र घायल, अस्पताल में भर्ती इस हादसे में कुछ छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। एक छात्र के नीचे गिरने से लोहे की ग्रिल से टकराने की भी जानकारी सामने आई है, जिससे उसकी हालत चिंताजनक बताई जा रही है। सभी घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। रेस्क्यू ऑपरेशन और राहत कार्य जारी घटना के बाद मौके पर भारी अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने की कोशिश शुरू की गई। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Sensex

Market Update: Sensex 500 Points Jump, Nifty में 150 अंकों की बढ़त

आज भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों के चेहरे पर खुशी लौट आई जब पूरे दिन खरीदारी का माहौल बना रहा। शुरुआती कारोबार से ही बाजार में तेजी का रुख देखने को मिला और दिन के अंत तक यह मजबूती और गहरी हो गई। Sensex करीब 500 अंकों की बढ़त के साथ 77,300 के स्तर तक पहुंच गया। वहीं Nifty 50 में भी लगभग 150 अंकों की तेजी दर्ज की गई, जिससे बाजार में सकारात्मक माहौल बना रहा। बाजार में क्यों लौटी रौनक? पिछले कुछ सत्रों की सुस्ती के बाद आज बाजार में जो तेजी देखने को मिली, उसके पीछे कई अहम वजहें रहीं— इन सभी कारणों ने मिलकर बाजार को मजबूत सपोर्ट दिया। सेक्टर अपडेट: किसने कितना दिया साथ? आज के कारोबार में अलग-अलग सेक्टरों का प्रदर्शन इस तरह रहा— IT सेक्टर: दिन का सबसे बड़ा स्टार, लगातार खरीदारी देखने को मिलीOil & Gas: मजबूत उछाल के साथ निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ीBanking: स्थिर से सकारात्मक रुझानFMCG: हल्की लेकिन स्थिर बढ़त बाजार का मूड कैसा रहा? बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक यह तेजी फिलहाल एक राहत भरी रिकवरी (relief rally) का हिस्सा हो सकती है। हालांकि, आगे भी ग्लोबल संकेत और आर्थिक डेटा बाजार की दिशा तय करेंगे। निवेशकों के बीच फिलहाल बड़े और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों को लेकर भरोसा बढ़ता दिख रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gold

Gold Silver Market कीमतों में जोरदार उछाल, निवेशक सतर्क

देश के सर्राफा बाजार में आज सोना (Gold) और चांदी (Silver) की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। लगातार बढ़ते दामों ने जहां निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ा दी है, वहीं आम खरीदारों के बजट पर भी दबाव साफ नजर आने लगा है। ताजा अपडेट के अनुसार चांदी के भाव में आज ₹5,826 प्रति किलोग्राम की बड़ी छलांग दर्ज की गई है। इस तेजी के बाद चांदी का रेट अब करीब ₹2.37 लाख प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। बाजार में यह स्तर काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ दिनों से चांदी लगातार मजबूत बनी हुई है। वहीं दूसरी ओर सोने की कीमतों में भी तेजी जारी है। 24 कैरेट सोना (10 ग्राम) अब ₹1,46,000 के आसपास पहुंच गया है, जिसमें ₹1,694 की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सोने के दामों में यह उछाल घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों ही बाजारों के संकेतों का असर माना जा रहा है। आखिर क्यों बढ़ रहे हैं Gold-Silver के दाम? विशेषज्ञों के अनुसार सोना-चांदी की कीमतों में तेजी के पीछे कई कारण हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता, डॉलर में उतार-चढ़ाव और सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ती मांग इसका मुख्य कारण है। इसके साथ ही भारत में शादी और त्योहारों का सीजन भी नजदीक है, जिससे ज्वेलरी की मांग तेजी से बढ़ रही है। आम लोगों पर असर और निवेश का संकेत लगातार बढ़ते रेट्स का सीधा असर आम खरीदारों पर पड़ रहा है, खासकर उन लोगों पर जो शादी या निवेश के लिए सोना-चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं। दूसरी तरफ, निवेशक इसे अभी भी सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बाजार की स्थिति को देखते हुए सोच-समझकर निवेश करना चाहिए। कुल मिलाकर, सोना-चांदी की यह तेजी संकेत दे रही है कि आने वाले दिनों में सर्राफा बाजार और भी ज्यादा सक्रिय और अस्थिर रह सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

21 दिन से नहीं मिला जीवनरक्षक इंजेक्शन, बच्चों की जान बचाने सड़क पर बैठा पिता; जिला अस्पताल के सामने लगाया जाम

सीहोर में एक पिता की बेबसी उस वक्त सड़क पर उतर आई, जब हीमोफीलिया से पीड़ित उसके दो बच्चों को पिछले 21 दिनों से जीवनरक्षक इंजेक्शन नहीं मिल पाया। बच्चों की बिगड़ती हालत से परेशान पिता ने परिवार सहित जिला अस्पताल के सामने चक्काजाम कर प्रशासन से मदद की गुहार लगाई। आष्टा तहसील के ग्राम गुराडिया रूपचन्द्र निवासी श्रवण कुमार मेवाड़ा के दो बच्चे हीमोफीलिया जैसी गंभीर अनुवांशिक बीमारी से पीड़ित हैं। इस बीमारी में चोट लगने या रक्तस्राव होने पर खून का थक्का नहीं जमता, जिससे मरीज की जान तक खतरे में पड़ सकती है। इलाज के लिए नियमित रूप से फैक्टर VIII (Factor VIII) इंजेक्शन की आवश्यकता होती है। 21 दिनों से अस्पताल में नहीं है इंजेक्शन परिजनों के अनुसार डॉक्टरों ने बच्चों के लिए फैक्टर VIII इंजेक्शन लिख रखा है, लेकिन जिला अस्पताल के मुख्य दवा स्टोर में पिछले 21 दिनों से यह दवा उपलब्ध नहीं है। इतना ही नहीं, भोपाल में भी सरकारी स्तर पर यह इंजेक्शन नहीं मिल पा रहा है। आर्थिक तंगी बनी मजबूरी श्रवण कुमार ने बताया कि वे बेरोजगार हैं और उनकी आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं है कि निजी मेडिकल स्टोर से महंगा इंजेक्शन खरीद सकें। उन्होंने 19 जून को कलेक्टर को आवेदन देकर मदद की मांग भी की थी। पिता का कहना है कि यदि मध्य प्रदेश में दवा उपलब्ध नहीं है तो प्रशासन उन्हें बच्चों के इलाज के लिए मुंबई जाने हेतु कम से कम 15 दिनों की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराए। बच्चों की जान बचाने सड़क पर बैठा परिवार जब लगातार शिकायतों के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला तो परेशान पिता अपने परिवार के साथ जिला चिकित्सालय के सामने सड़क पर बैठ गए। देखते ही देखते सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात प्रभावित हो गया। बच्चों की जान बचाने की गुहार लगाते इस परिवार को देखकर मौके पर मौजूद लोग भी भावुक हो गए। सिविल सर्जन ने दिया आश्वासन चक्काजाम और हंगामे की सूचना मिलते ही जिला अस्पताल के सिविल सर्जन मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिवार से बातचीत कर उनकी समस्या सुनी और जल्द से जल्द फैक्टर VIII इंजेक्शन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद प्रदर्शन समाप्त कराने के प्रयास किए गए। व्यवस्था पर उठे सवाल इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता और गरीब मरीजों को समय पर इलाज मिलने की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते दवा उपलब्ध करा दी जाती, तो एक परिवार को सड़क पर उतरकर अपनी पीड़ा जाहिर करने की नौबत नहीं आती। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
Keir Starmer

Keir Starmer Resigns: ब्रिटेन की राजनीति में बड़ा उलटफेर, Andy Burnham सबसे बड़े दावेदार

ब्रिटेन की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर (Keir Starmer) ने अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने साफ कहा कि उनकी अपनी पार्टी लेबर पार्टी (Labour Party) के कई सांसदों को अब यह भरोसा नहीं है कि वह अगले आम चुनाव (General Election) में पार्टी को जीत दिला पाएंगे। ऐसे में उन्होंने पार्टी और देश के हित को प्राथमिकता देते हुए पद छोड़ने का फैसला लिया। स्टार्मर ने अपने संबोधन में कहा कि नेतृत्व केवल पद पर बने रहने का नाम नहीं है, बल्कि सही समय पर सही फैसला लेना भी उतना ही जरूरी होता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नए नेता के चुने जाने तक वह कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे, ताकि सत्ता का हस्तांतरण बिना किसी राजनीतिक अस्थिरता के पूरा हो सके। पार्टी के भीतर बढ़ता गया दबाव पिछले कुछ महीनों से लेबर पार्टी के अंदर स्टार्मर के नेतृत्व को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। कई सांसदों का मानना था कि सरकार की लोकप्रियता में गिरावट और हाल के चुनावी प्रदर्शन को देखते हुए मौजूदा नेतृत्व के साथ अगले चुनाव में जीत आसान नहीं होगी। इसी बीच कुछ उपचुनावों के नतीजों और पार्टी के अंदर बढ़ती नाराजगी ने नेतृत्व परिवर्तन की मांग को और मजबूत कर दिया। आखिरकार, लगातार बढ़ते दबाव के बाद स्टार्मर ने इस्तीफा देने का फैसला किया। Andy Burnham बन सकते हैं नए प्रधानमंत्री स्टार्मर के इस्तीफे के बाद एंडी बर्नहैम (Andy Burnham) का नाम सबसे मजबूत दावेदार के रूप में सामने आया है। पार्टी के कई सांसद उनके समर्थन में बताए जा रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि नेतृत्व चुनाव में कोई बड़ा उलटफेर नहीं हुआ, तो बर्नहैम ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं। हालांकि, लेबर पार्टी की आधिकारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नए नेता और प्रधानमंत्री के नाम की औपचारिक घोषणा होगी। ब्रिटेन की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर? प्रधानमंत्री के अचानक इस्तीफे से ब्रिटेन की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। नई सरकार बनने के बाद आर्थिक नीतियों, विदेश नीति और घरेलू सुधारों में कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नया नेतृत्व आने के बाद लेबर पार्टी अपनी रणनीति में बदलाव कर सकती है ताकि अगले आम चुनाव से पहले जनता का भरोसा दोबारा हासिल किया जा सके। वहीं विपक्ष भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। सत्ता परिवर्तन पर दुनिया की नजर कीर स्टार्मर ने अपने कार्यकाल के दौरान कई अहम फैसले लिए, लेकिन पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष ने उनके लिए पद पर बने रहना मुश्किल बना दिया। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि लेबर पार्टी अपना नया नेता किसे चुनती है और ब्रिटेन की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है। यदि एंडी बर्नहैम प्रधानमंत्री बनते हैं, तो यह केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं होगा, बल्कि लेबर पार्टी के लिए नई राजनीतिक शुरुआत भी मानी जाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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