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Manali

Manali Snow Alert 2026 ट्रैफिक जाम और फंसे Tourist का हाल

हिमाचल प्रदेश का मनाली (Manali) और कुल्लू क्षेत्र इस समय भारी बर्फबारी और ट्रैफिक जाम की चपेट में है। 26 जनवरी के लॉन्ग वीकेंड पर बर्फ देखने आए tourists को यहां का नज़ारा बेहद रोमांचक तो लग रहा था, लेकिन असली चुनौती तब आई जब सड़कों पर लंबा जाम और फंसे वाहन सामने आए। Kullu-Manali Highway पर Traffic Jam का तांडव भारी हिमपात और वीकेंड ट्रैफिक के चलते राष्ट्रीय राजमार्ग 3 (NH3) पर 8 से 15 किलोमीटर तक लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। कई यात्रियों को सिर्फ 15 किलोमीटर की दूरी तय करने में 10-12 घंटे का समय लग गया। ट्रैफिक के बीच कई पर्यटक बर्फ में अपने सामान के साथ पैदल चलने को मजबूर हुए। Tourists की मुश्किलें स्थानीय लोगों ने भी आगे आकर बर्फ में फंसे पर्यटकों को गर्म चाय और मदद प्रदान की। प्रशासन की तैयारी और उपाय मौसम विभाग की चेतावनी मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और बर्फबारी/बारिश की संभावना के लिए चेतावनी जारी की है। पर्यटकों को सलाह दी जा रही है कि वे सड़कें खुलने और मौसम अनुकूल होने पर ही यात्रा करें। Social Media पर वायरल दृश्य सोशल मीडिया पर भी Manali की कई वीडियो और तस्वीरें वायरल हुई हैं, जिनमें ट्रैफिक जाम, बर्फ में फंसे लोग और हिमाचल की सर्दी का नज़ारा साफ दिखाई दे रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Republic Day

Republic Day परेड 2026 कर्तव्य पथ पर रचा गया इतिहास, New India की नई पहचान

कर्तव्य पथ पर आयोजित 77वें गणतंत्र दिवस (Republic Day ) की परेड इस बार सिर्फ एक सरकारी समारोह नहीं, बल्कि बदलते भारत की कहानी बन गई। परंपरा के रंग, आधुनिक तकनीक की चमक और समावेशिता का संदेश — सब कुछ एक ही मंच पर दिखाई दिया। इस साल की परेड में कई ऐसे पल रहे, जो लंबे समय तक याद रखे जाएंगे। दो Chief Guest, एक मंच Republic Day के इतिहास में पहली बार दो मुख्य अतिथि आमंत्रित किए गए। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेन की मौजूदगी ने भारत-यूरोप रिश्तों की मजबूती को नए स्तर पर पहुंचाया। दर्शकों के बीच यह चर्चा का बड़ा विषय रहा कि एक साथ दो वैश्विक नेता भारत के लोकतंत्र के इस उत्सव में शामिल हुए। महिला कमांडेंट के पीछे पूरा पुरुष दस्ता CRPF की पुरुष टुकड़ी का नेतृत्व जब सहायक कमांडेंट सिमरन बाला ने किया, तो तालियों की गूंज खुद परेड से ज्यादा तेज़ थी। यह सिर्फ एक परेड मूव नहीं था, बल्कि उस बदलाव का संकेत था, जिसमें महिलाएं अब हर मोर्चे पर नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं। सेना का लाइव युद्ध प्रदर्शन इस बार परेड में सेना ने ‘बैटल एरे फॉर्मेशन’ के जरिए युद्ध जैसी स्थिति का लाइव डेमो दिखाया। आधुनिक हथियार, तेज़ मूवमेंट और रणनीतिक अभ्यास ने लोगों को रोमांचित कर दिया। कई दर्शकों के लिए यह पल परेड का सबसे दमदार हिस्सा साबित हुआ। ड्रोन से लेकर ब्रह्मोस तक AI आधारित सिस्टम, ड्रोन, रोबोटिक यूनिट्स, ब्रह्मोस और आकाश मिसाइल जैसी प्रणालियों की झलक ने यह साफ कर दिया कि भारत अब रक्षा तकनीक में भी आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। दो कूबड़ वाले ऊंट भी बने आकर्षण परेड में दो कूबड़ वाले बेक्ट्रियन ऊंटों की मौजूदगी ने सभी का ध्यान खींचा। यह नज़ारा जितना अनोखा था, उतना ही यह संदेश भी देता था कि कठिन इलाकों में तैनाती के लिए सेना किस तरह पारंपरिक और आधुनिक संसाधनों का संतुलन बना रही है। थीम: ‘वंदे मातरम् के 150 वर्ष’ इस साल की थीम “वंदे मातरम् के 150 वर्ष” रही। झांकियों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के ज़रिए राष्ट्रीय गीत की ऐतिहासिक यात्रा, आज़ादी की लड़ाई में उसकी भूमिका और आज के भारत में उसकी अहमियत को खूबसूरती से दिखाया गया। झांकियां और कलाकारों की भव्य प्रस्तुति करीब 2500 कलाकारों ने मंच संभाला और 30 से ज्यादा झांकियों ने भारत की विविधता, संस्कृति और विकास की कहानी सुनाई। डिजिटल इंडिया, महिला सशक्तिकरण, हरित ऊर्जा और स्टार्टअप इंडिया जैसे विषयों पर आधारित झांकियां खास तौर पर चर्चा में रहीं। नई सैन्य इकाइयों की पहली झलक ‘भैरव बटालियन’ और ‘शक्तिबान रेजिमेंट’ जैसी नई इकाइयों को पहली बार परेड में शामिल किया गया। यह भारत की बदलती सुरक्षा रणनीति और नई पीढ़ी की सैन्य ताकत का संकेत माना जा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Republic Day

Republic Day India 77वां गणतंत्र दिवस वायुसेना का ‘Sindoor Formation’ और नई मिसाइल की झलक

देश ने आज 77वां गणतंत्र दिवस (Republic Day) पूरे जोश, गर्व और भावनात्मक माहौल में मनाया। सुबह की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नेशनल वॉर मेमोरियल पर शहीदों को श्रद्धांजलि देने से हुई। इसके बाद कर्तव्य पथ पर भव्य परेड में भारत की सैन्य शक्ति, स्वदेशी तकनीक और सांस्कृतिक विविधता की शानदार झलक देखने को मिली। शहीदों को नमन से शुरू हुआ गणतंत्र दिवस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले नेशनल वॉर मेमोरियल पहुंचकर पुष्पचक्र अर्पित किया और देश के लिए बलिदान देने वाले वीरों को नमन किया। यह क्षण भावुक भी था और प्रेरणादायक भी, जिसने पूरे समारोह को गरिमा और गंभीरता प्रदान की। कर्तव्य पथ पर भव्य परेड, विदेशी मेहमान भी रहे मौजूद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की अध्यक्षता में आयोजित परेड में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। यह भारत और यूरोप के बीच मजबूत होते रिश्तों का संकेत माना गया। ‘Sindoor Formation’ में वायुसेना का दमदार फ्लायपास्ट भारतीय वायुसेना ने इस बार ‘सिंदूर फॉर्मेशन’ नाम से खास फ्लायपास्ट किया। राफेल, सुखोई-30, मिग-29 और जगुआर जैसे आधुनिक लड़ाकू विमानों ने जब आसमान में एक साथ उड़ान भरी, तो पूरा कर्तव्य पथ तालियों से गूंज उठा। कुल 29 विमानों और हेलीकॉप्टरों ने हिस्सा लिया, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। स्वदेशी Hypersonic Glide Missile का पहली बार सार्वजनिक प्रदर्शन परेड का सबसे चर्चित आकर्षण डीआरडीओ की स्वदेशी हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल का डेब्यू रहा। यह मिसाइल बेहद तेज रफ्तार से उड़ान भरने में सक्षम है और दुश्मन के रडार से बचना इसके लिए मुश्किल माना जाता है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, यह भारत की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता की दिशा में एक बड़ा कदम है। त्रि-सेवा झांकियां और सैन्य शक्ति की झलक थलसेना, नौसेना और वायुसेना की संयुक्त झांकियों में ब्रह्मोस, आकाश और अन्य आधुनिक हथियार प्रणालियां प्रदर्शित की गईं। हर झांकी भारत की बढ़ती सैन्य ताकत और तकनीकी प्रगति की कहानी कह रही थी। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में दिखी भारत की विविधता करीब 2,500 कलाकारों ने देश के अलग-अलग राज्यों की लोकसंस्कृति, नृत्य और संगीत की प्रस्तुति दी। इस वर्ष की थीम ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति को समर्पित रही। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई इस रंगारंग कार्यक्रम में खोया नजर आया। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Indigo

DGCA ने Indigo को कहा Flights कम करें 717 Slots 16 हवाईअड्डों से रद्द

घरेलू एयरलाइन्स Indigo Airlines ने हाल ही में 16 प्रमुख Airports पर अपने 717 Flight Slots छोड़ दिए हैं। DGCA (Directorate General of Civil Aviation) के आदेश के तहत यह कदम एयरलाइन के Winter Schedule में 10% कटौती सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया। इस कदम का उद्देश्य ऑपरेशनल Challenges को कम करना और यात्रियों को बेहतर और समय पर Flight Services देना है। DGCA ने यह सुनिश्चित किया कि एयरलाइन अपने Slot Management और समयबद्ध उड़ानों के मामलों में सुधार करे। प्रमुख हवाईअड्डों में Flight कटौती इन Slots को अन्य एयरलाइन्स के लिए रीलोकेट किया जा सकता है। Indigo का कहना है कि यह कदम यात्री सुविधाओं में सुधार और Operational Stability के लिए जरूरी था। यात्रियों के लिए असर Flights की कटौती और Slots छोड़ने से यात्रियों को कुछ अस्थायी असुविधा हो सकती है, लेकिन एयरलाइन का दावा है कि यह कदम Flight Delays और Cancellation को भविष्य में रोकने में मदद करेगा। Indigo के प्रवक्ता ने कहा:“हम लगातार अपनी Operations को बेहतर बना रहे हैं ताकि यात्रियों को समय पर और सुरक्षित सेवाएं मिलती रहें।” हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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शंकराचार्य

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का कालनेमि बयान और राजनीतिक बहस

प्रयागराज, उत्तर प्रदेश – 2026 के माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का विवाद अब पूरे देश की चर्चा का विषय बन गया है। यह विवाद सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी तेज बहस को जन्म दे रहा है। “कालनेमि” बयान क्या है? शंकराचार्य ने हाल ही में कहा: “चोला तो साधु का और गोहत्या हो रही है। आप बताइए कालनेमि कौन?” इस बयान का मतलब गहरा है। रामायण के कालनेमि राक्षस की तरह, वे लोगों को धर्म के नाम पर भ्रमित करने वालों की ओर इशारा कर रहे हैं। यह सीधे तौर पर यह सवाल उठाता है कि धर्म और संस्कृति के संरक्षण में कौन वास्तव में बाधक है। स्नान विवाद और प्रशासन की भूमिका माघ मेले की मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य को संगम में स्नान करने से रोका गया। शिष्यों के साथ झड़प हुई और वीडियो वायरल हो गया। शंकराचार्य ने इसे अपमानजनक बताया और स्नान से इनकार कर दिया। संत समाज और साधु‑संप्रदायों में इस पर गहरी नाराजगी है। कई संतों ने प्रशासन से साधुओं के सम्मान की सुरक्षा की मांग की है। राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ इस तरह, विवाद धीरे‑धीरे धार्मिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। लोकप्रिय सवाल: कालनेमि कौन? शंकराचार्य का यह सवाल समाज में गहरी सोच पैदा कर रहा है। लोग पूछ रहे हैं कि कौन हैं वे लोग जो धर्म और संस्कृति के नाम पर भ्रम फैला रहे हैं? यह बयान युवाओं और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ है और हर तरफ चर्चाएँ तेज हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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EU

भारत-EU Free Trade Agreement Mother of All Deal से बदलेगा कारोबार, तीन दिन बाद ऐलान

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के रिश्तों में एक नया अध्याय जुड़ने वाला है। करीब दो दशकों से जिस मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement – FTA) पर बातचीत चल रही थी, वह अब अपने आखिरी मोड़ पर है। इसे ही दुनिया भर में “Mother of All Deal” कहा जा रहा है।सूत्रों के मुताबिक, इस ऐतिहासिक करार का औपचारिक ऐलान 27 जनवरी को किया जा सकता है — यानी अब से ठीक तीन दिन बाद। आज भारत पहुंचे EU के टॉप लीडर्स इसी बड़े ऐलान से पहले यूरोपीय संघ के शीर्ष नेता भारत पहुंच रहे हैं।यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत दौरे पर हैं।ये नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे और भारत-EU शिखर बैठक में हिस्सा लेंगे। खास बात यह है कि ये नेता 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह में भी शामिल होंगे। इसके अगले ही दिन यानी 27 जनवरी को FTA को लेकर बड़ा ऐलान होने की उम्मीद है। क्यों कहा जा रहा है इसे “Mother of All Deal”? इस समझौते को इतना बड़ा इसलिए माना जा रहा है क्योंकि: इस पर बातचीत साल 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन कई बार अटकने के बाद अब यह लगभग तय माना जा रहा है। भारत के लिए क्या बदलेगा? अगर यह FTA लागू होता है तो इसका सीधा फायदा भारत के कारोबार और आम लोगों तक पहुंचेगा। दूसरी ओर, यूरोपीय कंपनियों को भारत में कार, शराब और हाई-टेक मशीनरी जैसे सेक्टरों में आसान एंट्री मिलेगी। बदलती वैश्विक राजनीति में अहम कदम दुनिया के कई बड़े देश आज संरक्षणवादी नीतियों और ऊंचे टैरिफ की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे माहौल में भारत और EU के बीच यह समझौता रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भारत की वैश्विक सप्लाई चेन में भूमिका और मजबूत होगी। आगे क्या होगा? हालांकि, समझौते को जमीन पर लागू होने में अभी कुछ कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी, लेकिन संकेत साफ हैं —भारत और EU एक नए आर्थिक रिश्ते की दहलीज पर खड़े हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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T20

T20 World Cup 2026 आज ICC का बड़ा फैसला, Bangladesh की छुट्टी, Scotland की एंट्री तय

क्रिकेट फैंस के लिए आज का दिन बेहद अहम है। इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) आज T20 वर्ल्ड कप 2026 को लेकर अपना अंतिम फैसला लेने जा रही है। ताज़ा संकेत यही बता रहे हैं कि बांग्लादेश की टीम टूर्नामेंट से बाहर हो सकती है और उसकी जगह स्कॉटलैंड को खेलने का सुनहरा मौका मिलेगा। पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने भारत में अपने मैच खेलने से इनकार कर दिया। BCB का कहना था कि उसके मुकाबले न्यूट्रल वेन्यू पर कराए जाएं। हालांकि, ICC ने इस मांग को साफ तौर पर खारिज कर दिया और स्पष्ट कर दिया कि टूर्नामेंट तय शेड्यूल और मेज़बान देश के नियमों के तहत ही खेला जाएगा। इसके बाद ICC ने बांग्लादेश को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया था कि वह बताए कि टीम भारत में आकर खेलेगी या नहीं। लेकिन तय समय सीमा खत्म होने तक बांग्लादेश की ओर से कोई ठोस और आधिकारिक जवाब नहीं आया। इस चुप्पी को ICC ने गंभीरता से लिया और अब बांग्लादेश को बाहर करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी गई है। क्यों बाहर हो रहा है Bangladesh? इन सभी वजहों से अब माना जा रहा है कि बांग्लादेश का T20 वर्ल्ड कप 2026 से बाहर होना लगभग तय है। Scotland को मिलेगा बड़ा मौका इस पूरे घटनाक्रम के बीच स्कॉटलैंड को स्टैंड-बाय टीम के रूप में पहले से तैयार रखा गया था। अब ICC उसी विकल्प को लागू करने जा रही है। कई रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड को टूर्नामेंट में शामिल किया जाएगा और आज इस पर आधिकारिक मुहर लग सकती है। स्कॉटलैंड के लिए यह किसी सपने के सच होने जैसा होगा। सीमित संसाधनों के बावजूद इस टीम ने हाल के वर्षों में शानदार प्रदर्शन किया है और अब उसे दुनिया के सबसे बड़े T20 मंच पर खुद को साबित करने का मौका मिल सकता है। क्रिकेट फैंस की नजरें ICC पर आज होने वाला ICC का फैसला सिर्फ एक टीम के बाहर होने या शामिल होने तक सीमित नहीं है। यह यह भी दिखाएगा कि टूर्नामेंट के नियमों और मेज़बान शर्तों को लेकर ICC कितना सख्त रुख अपनाती है। अगर बांग्लादेश बाहर होता है, तो यह पहली बार होगा जब उसे किसी बड़े ICC टूर्नामेंट से इस तरह बाहर किया जाएगा। वहीं स्कॉटलैंड के लिए यह ऐतिहासिक पल बन सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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उज्जैन

Breaking News Tarana उज्जैन के तराना में उपद्रव, घरों पर पथराव, 10 से ज्यादा बसों को नुकसान

मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले के तराना कस्बे में एक बार फिर हिंसा ने लोगों की नींद उड़ा दी। गुरुवार शाम मामूली कहासुनी से शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते बड़े बवाल में बदल गया। गुस्साई भीड़ ने कई घरों पर पत्थर फेंके, दुकानों में तोड़फोड़ की और बस स्टैंड पर खड़ी बसों को निशाना बनाया। कुछ बसों में आग लगाए जाने की भी पुष्टि हुई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, विवाद की जड़ एक युवक पर हुआ हमला बताया जा रहा है। युवक गंभीर रूप से घायल हो गया और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसी घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया और कुछ ही देर में भीड़ उग्र हो गई। लोग अपने घरों में दुबक गए, बाजार बंद हो गए और सड़कों पर अफरा-तफरी मच गई। बस स्टैंड पर सबसे ज्यादा नुकसान हिंसा के दौरान तराना बस स्टैंड पर खड़ी करीब 10 से 11 बसों के शीशे तोड़ दिए गए। कुछ बसों में आग लगाने की कोशिश की गई और एक-दो बसों के अंदर आग भी भड़क गई। इसके अलावा आसपास खड़ी गाड़ियां और दुकानों को भी नुकसान पहुंचा। कई घरों पर पत्थर फेंके गए, जिससे लोगों में भारी दहशत फैल गई। पुलिस और प्रशासन हरकत में स्थिति बिगड़ने की खबर मिलते ही पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। भारी पुलिस बल तैनात किया गया और हालात काबू में करने के लिए इलाके में धारा 144 लागू कर दी गई। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्का बल प्रयोग भी करना पड़ा। रात भर पुलिस गश्त करती रही ताकि हालात दोबारा न बिगड़ें। प्रशासन ने उपद्रवियों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगालना शुरू कर दिया है और ड्रोन की मदद भी ली जा रही है। अब तक कई लोगों के खिलाफ केस दर्ज किए गए हैं और कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। लोग सहमे, बाजार बंद घटना के बाद तराना के कई इलाकों में सन्नाटा पसरा रहा। दुकानदारों ने एहतियात के तौर पर बाजार बंद रखे। जिन घरों और दुकानों को नुकसान पहुंचा है, उनके मालिक गहरे सदमे में हैं। लोगों का कहना है कि पहले भी यहां तनाव की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन इस बार हिंसा ने ज्यादा डर पैदा कर दिया है। प्रशासन की अपील प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन एहतियात के तौर पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहेगा। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और नुकसान का आकलन कर मुआवजे की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। तराना की यह घटना एक बार फिर सवाल खड़े करती है कि छोटे-से विवाद कैसे बड़ी हिंसा में बदल जाते हैं। स्थानीय लोग चाहते हैं कि हालात जल्द सामान्य हों और कस्बे में फिर से सुकून लौटे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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अमेरिका

अमेरिका में 5 साल के बच्चे की हिरासत US Immigration Action ने इंसानियत पर सवाल खड़े किए

अमेरिका से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने इंसानियत, कानून और बच्चों के अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मिनेसोटा राज्य में एक पाँच साल के बच्चे को उसके पिता के साथ इमिग्रेशन अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया। यह सब उस वक्त हुआ, जब बच्चा रोज़ की तरह स्कूल से घर लौट रहा था। घटना क्या थी? कोलंबिया हाइट्स इलाके में पाँच साल का लियाम कोनेजो रामोस अपने पिता एड्रियन अलेक्जेंडर कोनेजो एरियस के साथ प्री-स्कूल से लौट रहा था। तभी अमेरिकी इमिग्रेशन और कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) के एजेंटों ने उनकी गाड़ी रुकवाई और दोनों को हिरासत में ले लिया। इसके बाद पिता और बेटे को टेक्सास के एक डिटेंशन सेंटर भेज दिया गया। बच्चे को “चारा” बनाने का आरोप स्थानीय स्कूल अधिकारियों और समुदाय के लोगों का कहना है कि एजेंटों ने बच्चे को जानबूझकर अपने साथ रखा ताकि घर के अन्य लोगों को बाहर बुलाया जा सके। इस दावे ने लोगों को झकझोर कर रख दिया। कई लोगों का कहना है कि एक छोटे बच्चे को इस तरह की कार्रवाई में घसीटना अमानवीय है और उसके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल सकता है। सरकार का जवाब होमलैंड सिक्योरिटी विभाग और ICE ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि बच्चा किसी तरह से निशाना नहीं था और कार्रवाई का उद्देश्य केवल पिता को हिरासत में लेना था। एजेंसी के मुताबिक, बच्चे की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक अधिकारी को उसके साथ रखा गया। कानूनी स्थिति पर सवाल परिवार के समर्थकों और वकीलों का कहना है कि इस परिवार का अमेरिका में शरण (asylum) का मामला पहले से चल रहा था और उन्हें देश से निकालने का कोई अंतिम आदेश नहीं मिला था। ऐसे में अचानक हिरासत में लेना कानूनी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करता है। लोगों की प्रतिक्रिया और विरोध घटना सामने आते ही स्थानीय स्कूल प्रशासन, सामाजिक संगठनों और कई नेताओं ने ICE की कार्रवाई की आलोचना की। उनका कहना है कि इससे प्रवासी परिवारों में डर का माहौल बनता है और बच्चों की पढ़ाई व भावनात्मक स्थिति पर बुरा असर पड़ता है। कई माता-पिता ने चिंता जताई कि अगर स्कूल से लौटते बच्चों के साथ ऐसा हो सकता है, तो कोई भी सुरक्षित नहीं है। इंसानियत बनाम कानून यह मामला सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि अमेरिका की इमिग्रेशन नीतियों और उनके लागू होने के तरीकों पर बड़ा सवाल है। आलोचकों का कहना है कि कानून लागू करना ज़रूरी है, लेकिन बच्चों को ऐसी सख्त कार्रवाई में शामिल करना न तो नैतिक है और न ही मानवीय। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gold

Gold & Silver Market Trend सोना और चांदी की कीमतें बढ़ीं निवेशक खुश

सोने की कीमतों में लगातार तेजी सोना (Gold) निवेशकों के लिए खुशखबरी है। हाल ही में सोने की कीमत ₹1.55 लाख प्रति 10 ग्राम के ऑल टाइम हाई पर पहुँच गई है। पिछले 23 दिनों में सोने की कीमत में कुल ₹22,000 की बढ़ोतरी हुई है। हाल ही में ₹4,300 की तेजी ने निवेशकों के लिए अच्छे संकेत दिए हैं। चांदी की कीमतें भी हुई बढ़त चांदी (Silver) के दाम भी तेजी से बढ़ रहे हैं। आज चांदी की कीमत ₹3.19 लाख प्रति किलो तक पहुँच गई है, जिसमें हाल ही में ₹19,249 का इजाफा हुआ है। यह तेजी निवेशकों की सुरक्षित निवेश विकल्पों में रुचि बढ़ने का संकेत है। विशेषज्ञों की राय विशेषज्ञों का मानना है कि सोने और चांदी की कीमतों में यह उछाल वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, डॉलर की मजबूती और निवेशकों की बढ़ती मांग की वजह से है। हालांकि, बाजार में तेजी के बावजूद निवेशकों को जल्दबाजी करने के बजाय सोच-समझकर कदम उठाने की सलाह दी जा रही है। निवेशकों के लिए सुझाव सोना और चांदी में निवेश वर्तमान में लाभदायक हो सकता है, लेकिन बाजार की अस्थिरता और वैश्विक आर्थिक हालात को ध्यान में रखते हुए ही कोई निर्णय लेना चाहिए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Editor's Picks

Lucknow

Lucknow Fire Breaking इंस्टीट्यूट में आग से मची अफरा-तफरी, कई छात्र घायल

उत्तर प्रदेश की राजधानी Lucknow में एक इंस्टीट्यूट में अचानक लगी भीषण आग ने पूरे इलाके में अफरा-तफरी मचा दी। कुछ ही मिनटों में आग ने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे अंदर मौजूद छात्र-छात्राएं और स्टाफ घबरा गए। धुआं भरते ही बिगड़े हालात प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही आग लगी, पूरे भवन में घना धुआं फैल गया और बाहर निकलने के रास्ते बंद होने लगे। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि कई छात्रों को अपनी जान बचाने के लिए पहली मंजिल से नीचे कूदना पड़ा। कई छात्र घायल, अस्पताल में भर्ती इस हादसे में कुछ छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। एक छात्र के नीचे गिरने से लोहे की ग्रिल से टकराने की भी जानकारी सामने आई है, जिससे उसकी हालत चिंताजनक बताई जा रही है। सभी घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। रेस्क्यू ऑपरेशन और राहत कार्य जारी घटना के बाद मौके पर भारी अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने की कोशिश शुरू की गई। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Sensex

Market Update: Sensex 500 Points Jump, Nifty में 150 अंकों की बढ़त

आज भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों के चेहरे पर खुशी लौट आई जब पूरे दिन खरीदारी का माहौल बना रहा। शुरुआती कारोबार से ही बाजार में तेजी का रुख देखने को मिला और दिन के अंत तक यह मजबूती और गहरी हो गई। Sensex करीब 500 अंकों की बढ़त के साथ 77,300 के स्तर तक पहुंच गया। वहीं Nifty 50 में भी लगभग 150 अंकों की तेजी दर्ज की गई, जिससे बाजार में सकारात्मक माहौल बना रहा। बाजार में क्यों लौटी रौनक? पिछले कुछ सत्रों की सुस्ती के बाद आज बाजार में जो तेजी देखने को मिली, उसके पीछे कई अहम वजहें रहीं— इन सभी कारणों ने मिलकर बाजार को मजबूत सपोर्ट दिया। सेक्टर अपडेट: किसने कितना दिया साथ? आज के कारोबार में अलग-अलग सेक्टरों का प्रदर्शन इस तरह रहा— IT सेक्टर: दिन का सबसे बड़ा स्टार, लगातार खरीदारी देखने को मिलीOil & Gas: मजबूत उछाल के साथ निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ीBanking: स्थिर से सकारात्मक रुझानFMCG: हल्की लेकिन स्थिर बढ़त बाजार का मूड कैसा रहा? बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक यह तेजी फिलहाल एक राहत भरी रिकवरी (relief rally) का हिस्सा हो सकती है। हालांकि, आगे भी ग्लोबल संकेत और आर्थिक डेटा बाजार की दिशा तय करेंगे। निवेशकों के बीच फिलहाल बड़े और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों को लेकर भरोसा बढ़ता दिख रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gold

Gold Silver Market कीमतों में जोरदार उछाल, निवेशक सतर्क

देश के सर्राफा बाजार में आज सोना (Gold) और चांदी (Silver) की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। लगातार बढ़ते दामों ने जहां निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ा दी है, वहीं आम खरीदारों के बजट पर भी दबाव साफ नजर आने लगा है। ताजा अपडेट के अनुसार चांदी के भाव में आज ₹5,826 प्रति किलोग्राम की बड़ी छलांग दर्ज की गई है। इस तेजी के बाद चांदी का रेट अब करीब ₹2.37 लाख प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। बाजार में यह स्तर काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ दिनों से चांदी लगातार मजबूत बनी हुई है। वहीं दूसरी ओर सोने की कीमतों में भी तेजी जारी है। 24 कैरेट सोना (10 ग्राम) अब ₹1,46,000 के आसपास पहुंच गया है, जिसमें ₹1,694 की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सोने के दामों में यह उछाल घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों ही बाजारों के संकेतों का असर माना जा रहा है। आखिर क्यों बढ़ रहे हैं Gold-Silver के दाम? विशेषज्ञों के अनुसार सोना-चांदी की कीमतों में तेजी के पीछे कई कारण हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता, डॉलर में उतार-चढ़ाव और सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ती मांग इसका मुख्य कारण है। इसके साथ ही भारत में शादी और त्योहारों का सीजन भी नजदीक है, जिससे ज्वेलरी की मांग तेजी से बढ़ रही है। आम लोगों पर असर और निवेश का संकेत लगातार बढ़ते रेट्स का सीधा असर आम खरीदारों पर पड़ रहा है, खासकर उन लोगों पर जो शादी या निवेश के लिए सोना-चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं। दूसरी तरफ, निवेशक इसे अभी भी सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बाजार की स्थिति को देखते हुए सोच-समझकर निवेश करना चाहिए। कुल मिलाकर, सोना-चांदी की यह तेजी संकेत दे रही है कि आने वाले दिनों में सर्राफा बाजार और भी ज्यादा सक्रिय और अस्थिर रह सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

21 दिन से नहीं मिला जीवनरक्षक इंजेक्शन, बच्चों की जान बचाने सड़क पर बैठा पिता; जिला अस्पताल के सामने लगाया जाम

सीहोर में एक पिता की बेबसी उस वक्त सड़क पर उतर आई, जब हीमोफीलिया से पीड़ित उसके दो बच्चों को पिछले 21 दिनों से जीवनरक्षक इंजेक्शन नहीं मिल पाया। बच्चों की बिगड़ती हालत से परेशान पिता ने परिवार सहित जिला अस्पताल के सामने चक्काजाम कर प्रशासन से मदद की गुहार लगाई। आष्टा तहसील के ग्राम गुराडिया रूपचन्द्र निवासी श्रवण कुमार मेवाड़ा के दो बच्चे हीमोफीलिया जैसी गंभीर अनुवांशिक बीमारी से पीड़ित हैं। इस बीमारी में चोट लगने या रक्तस्राव होने पर खून का थक्का नहीं जमता, जिससे मरीज की जान तक खतरे में पड़ सकती है। इलाज के लिए नियमित रूप से फैक्टर VIII (Factor VIII) इंजेक्शन की आवश्यकता होती है। 21 दिनों से अस्पताल में नहीं है इंजेक्शन परिजनों के अनुसार डॉक्टरों ने बच्चों के लिए फैक्टर VIII इंजेक्शन लिख रखा है, लेकिन जिला अस्पताल के मुख्य दवा स्टोर में पिछले 21 दिनों से यह दवा उपलब्ध नहीं है। इतना ही नहीं, भोपाल में भी सरकारी स्तर पर यह इंजेक्शन नहीं मिल पा रहा है। आर्थिक तंगी बनी मजबूरी श्रवण कुमार ने बताया कि वे बेरोजगार हैं और उनकी आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं है कि निजी मेडिकल स्टोर से महंगा इंजेक्शन खरीद सकें। उन्होंने 19 जून को कलेक्टर को आवेदन देकर मदद की मांग भी की थी। पिता का कहना है कि यदि मध्य प्रदेश में दवा उपलब्ध नहीं है तो प्रशासन उन्हें बच्चों के इलाज के लिए मुंबई जाने हेतु कम से कम 15 दिनों की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराए। बच्चों की जान बचाने सड़क पर बैठा परिवार जब लगातार शिकायतों के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला तो परेशान पिता अपने परिवार के साथ जिला चिकित्सालय के सामने सड़क पर बैठ गए। देखते ही देखते सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात प्रभावित हो गया। बच्चों की जान बचाने की गुहार लगाते इस परिवार को देखकर मौके पर मौजूद लोग भी भावुक हो गए। सिविल सर्जन ने दिया आश्वासन चक्काजाम और हंगामे की सूचना मिलते ही जिला अस्पताल के सिविल सर्जन मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिवार से बातचीत कर उनकी समस्या सुनी और जल्द से जल्द फैक्टर VIII इंजेक्शन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद प्रदर्शन समाप्त कराने के प्रयास किए गए। व्यवस्था पर उठे सवाल इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता और गरीब मरीजों को समय पर इलाज मिलने की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते दवा उपलब्ध करा दी जाती, तो एक परिवार को सड़क पर उतरकर अपनी पीड़ा जाहिर करने की नौबत नहीं आती। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
Keir Starmer

Keir Starmer Resigns: ब्रिटेन की राजनीति में बड़ा उलटफेर, Andy Burnham सबसे बड़े दावेदार

ब्रिटेन की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर (Keir Starmer) ने अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने साफ कहा कि उनकी अपनी पार्टी लेबर पार्टी (Labour Party) के कई सांसदों को अब यह भरोसा नहीं है कि वह अगले आम चुनाव (General Election) में पार्टी को जीत दिला पाएंगे। ऐसे में उन्होंने पार्टी और देश के हित को प्राथमिकता देते हुए पद छोड़ने का फैसला लिया। स्टार्मर ने अपने संबोधन में कहा कि नेतृत्व केवल पद पर बने रहने का नाम नहीं है, बल्कि सही समय पर सही फैसला लेना भी उतना ही जरूरी होता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नए नेता के चुने जाने तक वह कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे, ताकि सत्ता का हस्तांतरण बिना किसी राजनीतिक अस्थिरता के पूरा हो सके। पार्टी के भीतर बढ़ता गया दबाव पिछले कुछ महीनों से लेबर पार्टी के अंदर स्टार्मर के नेतृत्व को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। कई सांसदों का मानना था कि सरकार की लोकप्रियता में गिरावट और हाल के चुनावी प्रदर्शन को देखते हुए मौजूदा नेतृत्व के साथ अगले चुनाव में जीत आसान नहीं होगी। इसी बीच कुछ उपचुनावों के नतीजों और पार्टी के अंदर बढ़ती नाराजगी ने नेतृत्व परिवर्तन की मांग को और मजबूत कर दिया। आखिरकार, लगातार बढ़ते दबाव के बाद स्टार्मर ने इस्तीफा देने का फैसला किया। Andy Burnham बन सकते हैं नए प्रधानमंत्री स्टार्मर के इस्तीफे के बाद एंडी बर्नहैम (Andy Burnham) का नाम सबसे मजबूत दावेदार के रूप में सामने आया है। पार्टी के कई सांसद उनके समर्थन में बताए जा रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि नेतृत्व चुनाव में कोई बड़ा उलटफेर नहीं हुआ, तो बर्नहैम ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं। हालांकि, लेबर पार्टी की आधिकारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नए नेता और प्रधानमंत्री के नाम की औपचारिक घोषणा होगी। ब्रिटेन की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर? प्रधानमंत्री के अचानक इस्तीफे से ब्रिटेन की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। नई सरकार बनने के बाद आर्थिक नीतियों, विदेश नीति और घरेलू सुधारों में कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नया नेतृत्व आने के बाद लेबर पार्टी अपनी रणनीति में बदलाव कर सकती है ताकि अगले आम चुनाव से पहले जनता का भरोसा दोबारा हासिल किया जा सके। वहीं विपक्ष भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। सत्ता परिवर्तन पर दुनिया की नजर कीर स्टार्मर ने अपने कार्यकाल के दौरान कई अहम फैसले लिए, लेकिन पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष ने उनके लिए पद पर बने रहना मुश्किल बना दिया। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि लेबर पार्टी अपना नया नेता किसे चुनती है और ब्रिटेन की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है। यदि एंडी बर्नहैम प्रधानमंत्री बनते हैं, तो यह केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं होगा, बल्कि लेबर पार्टी के लिए नई राजनीतिक शुरुआत भी मानी जाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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