प्रयागराज, उत्तर प्रदेश – 2026 के माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का विवाद अब पूरे देश की चर्चा का विषय बन गया है। यह विवाद सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी तेज बहस को जन्म दे रहा है।
“कालनेमि” बयान क्या है?
शंकराचार्य ने हाल ही में कहा:
“चोला तो साधु का और गोहत्या हो रही है। आप बताइए कालनेमि कौन?”
इस बयान का मतलब गहरा है। रामायण के कालनेमि राक्षस की तरह, वे लोगों को धर्म के नाम पर भ्रमित करने वालों की ओर इशारा कर रहे हैं। यह सीधे तौर पर यह सवाल उठाता है कि धर्म और संस्कृति के संरक्षण में कौन वास्तव में बाधक है।
स्नान विवाद और प्रशासन की भूमिका
माघ मेले की मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य को संगम में स्नान करने से रोका गया। शिष्यों के साथ झड़प हुई और वीडियो वायरल हो गया। शंकराचार्य ने इसे अपमानजनक बताया और स्नान से इनकार कर दिया।
संत समाज और साधु‑संप्रदायों में इस पर गहरी नाराजगी है। कई संतों ने प्रशासन से साधुओं के सम्मान की सुरक्षा की मांग की है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कई लोग धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।
- कांग्रेस और सपा नेताओं ने भाजपा पर साधुओं और धर्म के प्रति उपेक्षा और दोहरी नीति का आरोप लगाया।
- धार्मिक संगठनों ने शांतिपूर्ण समाधान और सभी पक्षों के सम्मान की अपील की।
इस तरह, विवाद धीरे‑धीरे धार्मिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।
लोकप्रिय सवाल: कालनेमि कौन?
शंकराचार्य का यह सवाल समाज में गहरी सोच पैदा कर रहा है। लोग पूछ रहे हैं कि कौन हैं वे लोग जो धर्म और संस्कृति के नाम पर भ्रम फैला रहे हैं? यह बयान युवाओं और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ है और हर तरफ चर्चाएँ तेज हैं।
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