बड़वानी जिले के निवाली में विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) मनोज मराठे को पद से हटाने और निलंबित करने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच सेंधवा विधायक मोंटू सोलंकी को पुलिस ने उनके कार्यालय में करीब डेढ़ घंटे तक रोककर रखा।
विधायक अपने समर्थकों के साथ निवाली में चल रहे प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे थे। प्रशासनिक अधिकारियों से चर्चा और कार्रवाई का लिखित आदेश नहीं मिलने के बाद वे 300 से अधिक समर्थकों के साथ प्रदर्शन में शामिल होने के लिए रवाना हो गए।
बीईओ को निलंबित करने की मांग
जयस की ओर से बीईओ मनोज मराठे को हटाने की मांग को लेकर पिछले चार दिनों से निवाली में धरना दिया जा रहा है। बताया गया है कि बीईओ के खिलाफ सेंधवा ग्रामीण थाने में आपराधिक प्रकरण दर्ज है और उन पर एक शिक्षक को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है।
इसी मामले को लेकर विधायक मोंटू सोलंकी भी आंदोलन में शामिल होने जा रहे थे। उन्होंने बीईओ के वित्तीय अधिकार तत्काल वापस लेने और उन्हें निलंबित करने की मांग की।
अधिकारियों ने दिया कार्रवाई का आश्वासन
विधायक को कार्यालय में रोके जाने के दौरान सेंधवा एसडीओपी अजय वाघमारे ने उनसे चर्चा की। पुलिस और प्रशासन की ओर से कार्रवाई का मौखिक आश्वासन दिया गया, लेकिन विधायक को निलंबन से संबंधित कोई लिखित आदेश नहीं दिया गया।
करीब डेढ़ घंटे तक इंतजार करने के बाद विधायक अपने समर्थकों के साथ निवाली के लिए रवाना हो गए।
विधायक ने प्रशासन पर लगाए संरक्षण के आरोप
विधायक मोंटू सोलंकी ने आरोप लगाया कि आपराधिक मामले में आरोपी अधिकारी को शासन और प्रशासन का संरक्षण मिल रहा है। उन्होंने कहा कि बीईओ के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
विधायक ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की और आंदोलन को दबाने की कोशिश की गई तो प्रदर्शन को और उग्र किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।


