प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे (PM Tshering Tobgay) का एक बयान इन दिनों चर्चा में है। टोबगे ने अपने एक लेख में पीएम मोदी को ‘भगवान विष्णु का अवतार’ बताया है। उन्होंने यह बात किसी राजनीतिक बयान के तौर पर नहीं, बल्कि अपने व्यक्तिगत अनुभव और प्रधानमंत्री मोदी के साथ लंबे समय से चले आ रहे संबंधों के संदर्भ में कही है।
टोबगे ने अपने लेख में पीएम मोदी के साथ हुई पुरानी मुलाकातों को याद किया और बताया कि आखिर उन्होंने नरेंद्र मोदी को विष्णु का अवतार क्यों कहा था। उन्होंने पीएम मोदी को अपना ‘बड़ा भाई’ और Mentor भी बताया।
2019 की मुलाकात में कही थी ये बात
भूटान के प्रधानमंत्री ने अपने लेख में 27 जुलाई 2019 को दिल्ली में हुई मुलाकात का खास तौर पर जिक्र किया। उस समय शेरिंग टोबगे भूटान के प्रधानमंत्री नहीं थे। उनकी पार्टी चुनाव हार चुकी थी और वह सांसद भी नहीं थे।
इसके बावजूद पीएम मोदी ने उनसे मुलाकात की। टोबगे के मुताबिक, इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को उनके पुराने कार्यकाल में मिले सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। इसी बातचीत में उन्होंने कहा कि वह मोदी को अपने बड़े भाई की तरह मानते हैं।
टोबगे ने आगे बताया कि उन्होंने पीएम मोदी से कहा था कि वह उन्हें ‘विष्णु का अवतार’ मानते हैं। बाद में उन्होंने खुद भी इस बात पर विचार किया कि आखिर उन्होंने ऐसा क्यों कहा था।
PM Modi के नेतृत्व में दिखे ये गुण
टोबगे ने अपने लेख में पीएम मोदी के नेतृत्व की तुलना भूटान की बौद्ध परंपराओं में बताए गए कुछ मूल्यों से की। उन्होंने ज्ञान, करुणा, साहस और लोगों की सेवा जैसे गुणों को अच्छे नेतृत्व का आधार बताया।
उनके अनुसार, एक नेता के लिए सिर्फ सत्ता में होना जरूरी नहीं है, बल्कि लोगों के लिए काम करने और बड़े लक्ष्य को जमीन पर उतारने की क्षमता भी महत्वपूर्ण है। टोबगे ने दावा किया कि उन्हें पीएम मोदी के काम करने के तरीके में ये गुण दिखाई देते हैं।
‘Viksit Bharat’ Mission की भी तारीफ
भूटान के प्रधानमंत्री ने पीएम मोदी के ‘Viksit Bharat’ विजन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने का लक्ष्य सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि एक बड़े राष्ट्रीय मिशन के रूप में सामने आया है।
लेख में उन्होंने ‘Sabka Saath, Sabka Vikas’ और ‘Sabka Prayas’ जैसे नारों का भी जिक्र किया। टोबगे के मुताबिक, इतने बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश के लोगों, संस्थाओं और सरकार के सामूहिक प्रयास की जरूरत होगी।
2014 की Bhutan Visit भी रही खास
टोबगे ने पीएम मोदी की 2014 की भूटान यात्रा को भी याद किया। प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी की यह पहली विदेश यात्रा थी। उस समय शेरिंग टोबगे खुद भूटान के प्रधानमंत्री थे।
टोबगे के मुताबिक, दोनों देशों के रिश्तों को लेकर पीएम मोदी ने ‘B4B’ यानी Bharat for Bhutan और Bhutan for Bharat की भावना पर जोर दिया था। इसके बाद भारत और भूटान के बीच विकास, ऊर्जा, कनेक्टिविटी और दूसरे क्षेत्रों में सहयोग लगातार आगे बढ़ा।
भारत के सहयोग का भी किया जिक्र
अपने लेख में टोबगे ने भूटान की विकास यात्रा में भारत के सहयोग को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने दोनों देशों के बीच आर्थिक और विकास साझेदारी का जिक्र करते हुए कहा कि भारत की मदद से भूटान में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पुल, ऊर्जा और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में कई परियोजनाएं आगे बढ़ी हैं।
उन्होंने भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना के लिए भारत की ओर से घोषित सहायता का भी उल्लेख किया।
PM Modi को मिला Bhutan का सर्वोच्च सम्मान
टोबगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भूटान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘Order of the Druk Gyalpo’ से सम्मानित किए जाने का भी जिक्र किया। पीएम मोदी को यह सम्मान 2024 में दिया गया था।
भूटान की ओर से दिए गए इस सम्मान को दोनों देशों के बीच मजबूत रिश्तों और प्रधानमंत्री मोदी के योगदान से जोड़कर देखा गया।
2024 की मुलाकात में फिर याद आया ‘अवतार’ वाला किस्सा
टोबगे ने अपने लेख में मार्च 2024 की मुलाकात का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस दौरान 2019 में कही गई अपनी बात को लेकर उन्होंने फिर विचार किया।
टोबगे ने लिखा कि उन्हें अब भी लगता है कि पीएम मोदी को भगवान विष्णु का अवतार कहना गलत नहीं था। उन्होंने आगे अपने विचार में पीएम मोदी की तुलना भगवान विष्णु के कल्कि अवतार से भी की। हालांकि, यह शेरिंग टोबगे की व्यक्तिगत व्याख्या और उनके लेख में व्यक्त विचार है।
PM Modi ने खुद शेयर किया लेख
शेरिंग टोबगे के इस लेख को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया पर शेयर किया। पीएम मोदी ने टोबगे के विचारों को साझा करते हुए भारत और भूटान के बीच दोस्ती और आपसी विश्वास को भी रेखांकित किया।
टोबगे का यह लेख ऐसे समय सामने आया है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में शीर्ष कार्यकारी पद पर 25 साल पूरे होने की चर्चा हो रही है। लेख में टोबगे ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों के जरिए पीएम मोदी के नेतृत्व, भारत-भूटान संबंधों और ‘Viksit Bharat’ के विजन पर अपनी बात रखी है।
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