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West Bengal Controversy ‘Bangladesh जैसे हालात’ बयान से बढ़ा Political Tension

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मामला क्या है?

पश्चिम बंगाल (West Bengal) में एक बार फिर धार्मिक और राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। भाजपा नेता और राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी के हालिया बयान ने इस बहस को और तेज कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में मंदिरों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं बढ़ रही हैं और हाल ही में भगवान श्रीराम की एक मूर्ति को भी तोड़ा गया।

Suvendu Adhikari का बयान

सुवेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल की स्थिति की तुलना बांग्लादेश से करते हुए कहा कि यहां अब मंदिर तोड़ना आम बात होती जा रही है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है और सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर बहस छिड़ गई है।

BJP vs TMC: आरोप-प्रत्यारोप

भाजपा का कहना है कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है और धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है। वहीं, सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस इन आरोपों को सिरे से खारिज करती है। पार्टी का दावा है कि भाजपा जानबूझकर राज्य का माहौल खराब करने की कोशिश कर रही है और ऐसी घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।

आम जनता पर असर

स्थानीय लोगों की मानें तो इस तरह की घटनाएं समाज में तनाव पैदा करती हैं और आम जनता के बीच असुरक्षा की भावना बढ़ाती हैं। कई लोगों का कहना है कि राजनीति से ऊपर उठकर शांति और आपसी सौहार्द बनाए रखना जरूरी है।

जांच और सच्चाई का इंतजार

फिलहाल इस मामले में प्रशासन की ओर से विस्तृत जांच की जरूरत बताई जा रही है, ताकि सच्चाई सामने आ सके। जब तक आधिकारिक रिपोर्ट नहीं आती, तब तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

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IMF ने बढ़ाया भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान, 2026 और 2027 में 7% विकास दर रहने की उम्मीद

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने साल 2026 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान 6.4% से बढ़ाकर 7% कर दिया है। वैश्विक तनाव, आर्थिक सुस्ती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का ध्यान खींचा है। मजबूत घरेलू मांग और सर्विसेज सेक्टर के बेहतर प्रदर्शन को भारत की तेज विकास दर की प्रमुख वजह माना गया है। IMF ने अक्टूबर 2026 की अपनी वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में भारत की विकास संभावनाओं को सकारात्मक बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा आयात पर निर्भर कई उभरती अर्थव्यवस्थाएं जहां दबाव का सामना कर रही हैं, वहीं भारत की आर्थिक गतिविधियों में मजबूती बनी हुई है। 2027 में भी 7% ग्रोथ का अनुमान IMF ने 2026 के लिए भारत की विकास दर के अनुमान में जुलाई के मुकाबले 0.6 प्रतिशत अंक और अप्रैल के मुकाबले 0.5 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी की है। वहीं, 2027 के लिए भी विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7% कर दिया गया है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2027 का अनुमान जुलाई के मुकाबले 0.3 प्रतिशत अंक और अप्रैल के मुकाबले 0.5 प्रतिशत अंक अधिक है। इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भी भारत में विकास की संभावनाओं को लेकर उम्मीद बनी हुई है। IMF से पहले विश्व बैंक और आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी भारत की विकास दर के अनुमान में बढ़ोतरी कर चुकी हैं। चीन की सुस्ती के बीच भारत पर नजर रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया की अर्थव्यवस्थाओं में मजबूती देखने को मिल रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी गतिविधियों में तेजी ने भी वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को प्रभावित किया है। भारत और चीन एशिया की आर्थिक गतिविधियों में अहम भूमिका निभा रहे हैं, हालांकि दोनों देशों की विकास संभावनाओं में अंतर दिखाई दे रहा है। IMF के अनुमान के अनुसार, चीन की विकास दर 2026 में 4.5% और 2027 में 4% रह सकती है। वैश्विक तनाव और ऊर्जा की ऊंची कीमतों को चीन की आर्थिक वृद्धि के सामने चुनौतियों में शामिल किया गया है। दुनिया की आर्थिक विकास दर पर दबाव IMF के मुताबिक, 2028 से 2031 के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था औसतन 3.2% की दर से बढ़ सकती है। यह 2000 से 2019 के बीच महामारी से पहले दर्ज औसत 3.7% की विकास दर से कम है। रिपोर्ट में वैश्विक तनाव, ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और ऊर्जा आयात पर निर्भर उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ने वाले दबाव को आर्थिक विकास के लिए चुनौती बताया गया है। ऐसे माहौल में भारत की अनुमानित विकास दर अपेक्षाकृत मजबूत दिखाई देती है। मजबूत घरेलू मांग और जनसांख्यिकी से मिल रहा सहारा भारत की आर्थिक मजबूती के पीछे बढ़ता घरेलू बाजार, मजबूत मांग, अनुकूल जनसांख्यिकी और सुधारों को अहम कारक माना गया है। सर्विसेज सेक्टर का बेहतर प्रदर्शन भी विकास दर को सहारा दे रहा है। हालांकि, बेहतर अनुमान के बावजूद चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव डाल सकती हैं। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय तनाव और वैश्विक मांग में कमजोरी का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

भीलवाड़ा में सरकारी शिक्षक ने फंदा लगाकर दी जान, किराए के कमरे में मिला शव

भीलवाड़ा। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के गंगापुर कस्बे में 28 वर्षीय सरकारी शिक्षक कालूराम मीणा का शव उनके किराए के कमरे में फंदे पर लटका मिला। मंगलवार सुबह कमरे से बदबू आने पर पड़ोसियों ने मकान मालिक को सूचना दी। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और कमरे का गेट तोड़कर अंदर दाखिल हुई। पुलिस के अनुसार, शव करीब दो दिन पुराना होने की आशंका है। कालूराम मीणा टोंक जिले के रहने वाले थे और गंगापुर क्षेत्र के एक सरकारी स्कूल में शिक्षक के पद पर कार्यरत थे। पुलिस मामले की जांच कर रही है। फिलहाल उनकी मौत के कारणों का पता नहीं चल पाया है। कमरे से बदबू आने पर हुआ खुलासा थाना प्रभारी पूरण मीणा के मुताबिक, कालूराम गंगापुर कस्बे के वार्ड नंबर 5 में सुरेश सुवलका के मकान में किराए से रहते थे। मंगलवार सुबह करीब 11 बजे कमरे से बदबू आने पर पड़ोसियों को संदेह हुआ। उन्होंने मकान मालिक को इसकी जानकारी दी। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। कमरे का गेट तोड़कर अंदर देखा गया तो शिक्षक का शव फंदे पर लटका मिला। पुलिस ने घटनास्थल की जांच कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। अगस्त में हुई थी स्कूल में पोस्टिंग जानकारी के अनुसार, कालूराम मीणा की 18 अगस्त 2026 को गंगापुर क्षेत्र की उल्लाई पंचायत के रूपारेल कस्बे स्थित सरकारी स्कूल में पोस्टिंग हुई थी। वह शनिवार को आखिरी बार स्कूल गए थे। रविवार को छुट्टी थी, जबकि सोमवार को वह स्कूल नहीं पहुंचे। पुलिस के मुताबिक, शव की स्थिति को देखते हुए मौत करीब दो दिन पहले होने की आशंका जताई जा रही है। एक साल पहले हुआ था तलाक बताया गया है कि कालूराम मीणा चार भाइयों में सबसे छोटे थे। रविवार सुबह उनकी अपने बड़े भाई से फोन पर बातचीत हुई थी। जानकारी के अनुसार, करीब एक साल पहले आपसी अनबन के चलते उनका तलाक हो गया था। हालांकि, इन परिस्थितियों का उनकी मौत से कोई संबंध था या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। आत्महत्या के कारणों की जांच कर रही पुलिस थाना प्रभारी पूरण मीणा ने बताया कि शिक्षक ने किन कारणों से यह कदम उठाया, इसकी फिलहाल जानकारी नहीं मिली है। परिजनों के पहुंचने के बाद मामले से जुड़ी अन्य जानकारियां सामने आ सकती हैं। पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है।

कैंसर की दवाओं की कीमतों में बड़ा अंतर: ₹538 का इंजेक्शन बाजार में ₹1,500 तक, एक ही दवा की MRP में 16 गुना तक फर्क

रायपुर। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों और उनके परिजनों पर इलाज के खर्च का भारी बोझ पड़ रहा है। दवाओं की कीमतों में बड़े अंतर ने इस परेशानी को और बढ़ा दिया है। एक ही दवा अलग-अलग कंपनियों के ब्रांड में अलग कीमत पर बेची जा रही है। वहीं, सरकारी खरीद दर और बाजार में मिलने वाली कीमत के बीच भी काफी अंतर सामने आया है। कैंसर की दवाओं की कीमतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी सवाल उठाया है। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए पूछा कि 2,700 रुपये की दवा 27,000 रुपये की कैसे हो सकती है? इसी मुद्दे पर दैनिक भास्कर की पड़ताल में दवाओं की एमआरपी, बाजार में उपलब्ध कीमत और सरकारी खरीद दरों के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। ₹538 का इंजेक्शन बाजार में 1,500 रुपये तक पड़ताल के मुताबिक, एज़ासिटिडाइन (Azacitidine) 100 एमजी इंजेक्शन सरकारी खरीद में 538 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि बाजार में इसकी कीमत करीब 1,200 से 1,500 रुपये तक बताई गई है। एक ही दवा के अलग-अलग ब्रांड की एमआरपी और वास्तविक बिक्री कीमत में भी बड़ा अंतर मिला। एक ब्रांड के इंजेक्शन की एमआरपी 8,888 रुपये दर्ज है, लेकिन कुछ मेडिकल स्टोर पर यह 1,890 रुपये में मिल रहा है। दूसरे ब्रांड की एमआरपी 6,337 रुपये है, जबकि इसकी कीमत 1,100 रुपये बताई गई। वहीं, तीसरे ब्रांड की एमआरपी 5,964.70 रुपये होने के बावजूद यह 800 रुपये में बिक रहा है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि केवल एमआरपी देखकर मरीज के लिए दवा की वास्तविक कीमत का अंदाजा लगाना मुश्किल हो सकता है। 10 में से 8 दवाओं की कीमतों में बड़ा अंतर दैनिक भास्कर की पड़ताल में कैंसर की 10 आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली दवाओं की कीमतों की सरकारी खरीद दरों से तुलना की गई। इसके लिए रायपुर के थोक दवा बाजार, मेडिकल स्टोर, निजी अस्पतालों की फार्मेसी, एम्स की फार्मेसी और सरकारी खरीद के आंकड़े जुटाए गए। कैंसर विशेषज्ञों की मदद से इन कीमतों का विश्लेषण भी किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, 10 में से 2 दवाओं की कीमतों में सरकारी खरीद दर की तुलना में 12 से 16 गुना तक अंतर मिला। वहीं, 6 अन्य दवाओं की कीमतें 2 से 8 गुना तक अधिक पाई गईं। पड़ताल में यह भी सामने आया कि कई दवाओं की एमआरपी काफी ऊंची दर्ज है। ऐसे में मेडिकल स्टोर पर मरीजों को वास्तविक कीमत और उपलब्ध विकल्पों की जानकारी न होने पर अधिक खर्च करना पड़ सकता है। सरकारी अस्पताल में मुफ्त दवा, बिल आयुष्मान कार्ड से रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल स्थित कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट की फार्मेसी में सरकारी दरों पर खरीदी गई दवाओं पर 12 प्रतिशत टैक्स लगाए जाने की जानकारी भी पड़ताल में सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, यहां मरीजों को ये दवाएं मुफ्त दी जाती हैं, जबकि इनका बिल आयुष्मान कार्ड के माध्यम से समायोजित किया जाता है। मरीजों के लिए कीमतों में पारदर्शिता जरूरी कैंसर का इलाज अक्सर लंबे समय तक चलता है और मरीजों को कई महंगी दवाओं की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में सरकारी खरीद दर, दवा की एमआरपी और वास्तविक बिक्री मूल्य के बीच बड़ा अंतर मरीजों के लिए आर्थिक परेशानी बढ़ा सकता है। दवाओं की कीमतों में पारदर्शिता, अलग-अलग ब्रांड की कीमतों की स्पष्ट जानकारी और निर्धारित दरों की निगरानी से मरीजों को राहत मिल सकती है। हालांकि, किसी दवा की वास्तविक कीमत उसके ब्रांड, पैकिंग, उपलब्धता और खरीद की शर्तों के आधार पर अलग हो सकती है।

बिलासपुर एयरपोर्ट को 4C श्रेणी में अपग्रेड करने पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से 3 सप्ताह में मांगा जवाब

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासा देवी केवट एयरपोर्ट के रनवे विस्तार और हवाई सुविधाओं में बढ़ोतरी को लेकर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) से जवाब मांगा है। मंगलवार को हुई सुनवाई में चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र और जस्टिस संतोष शर्मा की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि बिलासपुर एयरपोर्ट को 4C श्रेणी में अपग्रेड करने के लिए अब तक किए गए प्रयासों की विस्तृत जानकारी तीन सप्ताह के भीतर शपथ पत्र के जरिए पेश की जाए। कोर्ट ने AAI से भी एयरपोर्ट के प्रबंधन, संचालन और विकास की जिम्मेदारी संभालने के संबंध में अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी। पत्राचार से नहीं चलेगा काम, ठोस कदम उठाने की जरूरत सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि बिलासपुर एयरपोर्ट और हवाई सुविधाओं के विस्तार के लिए केंद्र और राज्य सरकार से ठोस कदमों की अपेक्षा है। केवल आपस में पत्राचार करते हुए समय नहीं गंवाया जाना चाहिए। राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि बिलासपुर एयरपोर्ट वर्तमान में 3C श्रेणी में एटीआर विमानों के संचालन के लिए उपयुक्त है। साथ ही, इसे 4C श्रेणी में अपग्रेड करने के लिए राज्य सरकार तैयार है। AAI के जवाब पर याचिकाकर्ताओं ने उठाए सवाल पिछली सुनवाई 29 सितंबर को हुई थी। उस दौरान हाईकोर्ट ने AAI के वरिष्ठ और सक्षम अधिकारी को शपथ पत्र दाखिल कर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया था कि बिलासपुर एयरपोर्ट के प्रबंधन, विकास और संचालन की जिम्मेदारी AAI को सौंपने के राज्य सरकार के प्रस्ताव पर क्या कार्रवाई की गई है। मंगलवार को याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि AAI की ओर से दाखिल शपथ पत्र ऐसे वरिष्ठ और सक्षम अधिकारी का नहीं है, जैसा कोर्ट ने निर्देश दिया था। याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, दस्तावेजों से यह भी सामने आया है कि राज्य सरकार बिलासपुर के साथ अंबिकापुर और जगदलपुर एयरपोर्ट को भी AAI को सौंपने पर विचार कर रही है। जमीन और सुविधाओं की जानकारी मांगने में उलझा मामला याचिकाकर्ताओं ने बताया कि राज्य सरकार के प्रस्ताव पर AAI ने स्पष्ट सहमति या असहमति देने के बजाय एयरपोर्ट की उपलब्ध जमीन, कुल क्षेत्रफल, खसरा-वार विवरण, स्वामित्व और मौजूदा सुविधाओं से जुड़ी जानकारी मांगी है। उनका कहना है कि इस तरह के पत्राचार से एयरपोर्ट को समयबद्ध तरीके से AAI को सौंपने की प्रक्रिया आगे बढ़ती नहीं दिख रही है। बिलासपुर का रनवे अंबिकापुर और जगदलपुर से छोटा याचिकाकर्ताओं के अनुसार, बिलासपुर एयरपोर्ट का रनवे करीब 1,495 मीटर लंबा है। वहीं, अंबिकापुर एयरपोर्ट का रनवे 1,900 मीटर और जगदलपुर का रनवे 1,707 मीटर लंबा बताया गया है। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि गर्मियों में तापमान बढ़ने के कारण विमान की क्षमता के अनुसार सभी यात्रियों को ले जाना संभव नहीं हो पाता। उनके मुताबिक, 72 यात्रियों की क्षमता वाले विमान में यात्रियों की संख्या घटाकर करीब 52 करनी पड़ती है। इसी वजह से अब तक कोई निजी विमानन कंपनी बिलासपुर से अपना संचालन शुरू नहीं कर पाई है। रनवे विस्तार और नए ATC टावर के प्रस्ताव अटके याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि रनवे विस्तार के लिए 63 करोड़ रुपये और नए एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) टावर के निर्माण के लिए 41 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बिलासपुर एयरपोर्ट प्रबंधन की ओर से मंत्रालय भेजा जा चुका है। हालांकि, इन कार्यों को AAI करेगी या राज्य सरकार, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसी असमंजस के कारण काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। तीन सप्ताह में शपथ पत्र, 23 नवंबर को अगली सुनवाई हाईकोर्ट ने विमानन विभाग के सचिव को निर्देश दिया है कि बिलासपुर एयरपोर्ट को 4C श्रेणी में अपग्रेड करने के लिए अब तक किए गए प्रयासों का विस्तृत ब्यौरा तीन सप्ताह के भीतर शपथ पत्र के माध्यम से पेश किया जाए। AAI को भी मामले की अद्यतन स्थिति बताते हुए शपथ पत्र दाखिल करना होगा। अब अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी। इस मामले में केंद्र और राज्य सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर एयरपोर्ट के विस्तार और बेहतर हवाई कनेक्टिविटी की दिशा तय हो सकती है।

छत्तीसगढ़ में बस किराया 75% तक बढ़ा, रायपुर-बिलासपुर सफर के लिए अब देने होंगे ₹228

छत्तीसगढ़ में यात्री बसों का किराया करीब एक साल के भीतर दूसरी बार बढ़ा दिया गया है। परिवहन विभाग ने 8 अक्टूबर को नई किराया दरों की अधिसूचना जारी की है। इस बार सबसे ज्यादा असर साधारण बसों में सफर करने वाले यात्रियों पर पड़ेगा। साधारण बसों का प्रति किलोमीटर किराया 1 रुपये से बढ़ाकर 1.75 रुपये कर दिया गया है। यानी प्रति किलोमीटर दर में 75 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा शुरुआती 5 किलोमीटर का किराया भी 8 रुपये से बढ़ाकर 10 रुपये कर दिया गया है। नई दरें साधारण बसों के साथ डीलक्स, लग्जरी और एसी स्लीपर बसों पर भी लागू होंगी। रायपुर से बिलासपुर और जगदलपुर का सफर होगा महंगा नई किराया दरों के कारण प्रदेश के प्रमुख शहरों के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को अब अधिक पैसे खर्च करने होंगे। इस बढ़ोतरी का असर रोजाना और नियमित रूप से बसों में यात्रा करने वाले लोगों के मासिक खर्च पर भी पड़ सकता है। पिछले साल किराया घटने से मिली राहत अब खत्म साल 2025 में सरकार ने साधारण बसों का शुरुआती किराया 7.50 रुपये से बढ़ाकर 8 रुपये किया था। हालांकि, उस समय प्रति किलोमीटर किराया 1.25 रुपये से घटाकर 1 रुपये कर दिया गया था। अब नई दरों में प्रति किलोमीटर किराया 1 रुपये से बढ़ाकर 1.75 रुपये कर दिया गया है। इससे पिछले साल प्रति किलोमीटर दर में कटौती से यात्रियों को मिली राहत खत्म हो गई है और उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। प्रदेश में 13 हजार से ज्यादा यात्री बसें छत्तीसगढ़ में 13 हजार से अधिक यात्री बसें पंजीकृत हैं। इनमें करीब 5 हजार साधारण बसें हैं। बाकी बसें स्लीपर, एसी, सेमी स्लीपर, डीलक्स और लग्जरी श्रेणियों में आती हैं। साधारण बसों का इस्तेमाल मुख्य रूप से मध्यम और कम आय वर्ग के यात्री करते हैं। ऐसे में किराया बढ़ने का सीधा असर इन यात्रियों के परिवहन खर्च पर पड़ने की संभावना है। बस ऑपरेटरों की मांग के बाद बढ़ाया गया किराया बस ऑपरेटर पिछले कई दिनों से किराया बढ़ाने की मांग कर रहे थे। उनका कहना था कि ईंधन, टायर, कल-पुर्जों और वाहनों के रखरखाव का खर्च बढ़ने के कारण पुरानी दरों पर बसों का संचालन मुश्किल हो रहा है। ऑपरेटरों ने मांग पूरी नहीं होने पर हड़ताल करने और बसों का संचालन बंद करने की चेतावनी भी दी थी। इसके बाद किराया बढ़ाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया, जिस पर परिवहन विभाग ने नई दरों की अधिसूचना जारी की।

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