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Tejas Mk-1A Fighter Jet की पहली डिलीवरी इस महीने से शुरू भारत का Made in India लड़ाकू विमान तैयार

भारत की डिफेंस टेक्नोलॉजी ने एक और बड़ी छलांग लगाई है। तेजस Mk-1A फाइटर जेट (Tejas Mk-1A Fighter Jet), जो पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित है, अब भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) को सौंपा जाने वाला है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) की नासिक फैक्ट्री से इस महीने पहला तेजस Mk-1A विमान डिलीवर किया जाएगा। यह भारत की ‘Make in India’ और ‘Atmanirbhar Bharat’ मुहिम का सबसे बेहतरीन उदाहरण है। Tejas Mk-1A के Advanced Features: तेजस Mk-1A पुराने Mk-1 वर्जन से कहीं अधिक शक्तिशाली और फुर्तीला है। इसमें भारतीय और अंतरराष्ट्रीय तकनीक का बेहतरीन संतुलन है। HAL ने बढ़ाई Production Capacity HAL ने अपनी नासिक यूनिट में नई असेंबली लाइन शुरू की है, जिससे अब हर साल 24 तेजस फाइटर जेट बनाए जा सकेंगे। इस साल की शुरुआत में उत्पादन लक्ष्य 8 यूनिट रखा गया है, जो अगले सालों में 16 से 24 तक पहुंचेगा। अमेरिकी GE इंजन से मिल रही पावर तेजस Mk-1A में General Electric (GE) का F404 इंजन लगाया गया है। GE ने मार्च 2025 से भारत को इंजन की आपूर्ति शुरू कर दी है, जिससे उत्पादन प्रक्रिया को गति मिली है। 🇮🇳 Indian Air Force को मिलेगा बड़ा Boost भारतीय वायुसेना की वर्तमान में 31 स्क्वाड्रन हैं, जबकि जरूरत 42 स्क्वाड्रन की है। तेजस Mk-1A की सीरीज वायुसेना की युद्ध शक्ति को मज़बूत करेगी और पुराने मिग-21 जैसे फाइटर जेट्स की जगह लेगी। IAF के लिए 83 तेजस Mk-1A फाइटर जेट्स का ऑर्डर पहले ही दिया जा चुका है, जिनकी डिलीवरी अब शुरू हो रही है। Tejas Jet के Mini Models और Toys भी उपलब्ध तेजस की लोकप्रियता अब बाजार में भी दिख रही है। यहां कुछ शानदार मॉडल्स हैं: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Spy Network Exposed

Spy Network Exposed: Delhi Highcourt ने देशद्रोह के आरोपी को जमानत देने से किया इनकार

नई दिल्ली: भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े एक बेहद गंभीर मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने देशद्रोह और जासूसी के आरोपों का सामना कर रहे आरोपी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। आरोपी पर आरोप है कि वह एक अंतरराष्ट्रीय जासूसी नेटवर्क (Spy Network) का हिस्सा था, जिसने भारतीय सशस्त्र बलों की गोपनीय जानकारी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों को लीक की। यह मामला Official Secrets Act, 1923 के तहत दर्ज किया गया है, जो भारत में जासूसी रोकने के लिए लागू एक सख्त कानून है। अदालत की सख्त टिप्पणी: “यह राष्ट्र के साथ विश्वासघात है” जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने सुनवाई के दौरान कहा: “जासूसी केवल एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि भारत की संप्रभुता, अखंडता और राष्ट्रीय सुरक्षा पर सीधा हमला है। यह राष्ट्र के साथ विश्वासघात है।” उन्होंने आगे कहा: “जब हमारे सैनिक सीमाओं पर सतर्क रहते हैं, तब ही देशवासी शांति से सांस लेते हैं। ऐसे जासूसी नेटवर्क भारत की सुरक्षा और सेना की रणनीतियों को खतरे में डालते हैं।” देश में बढ़ रहा है Spy Network का प्रभाव: NCRB डेटा से खुलासा नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में जासूसी और गोपनीय जानकारी लीक करने के मामलों में 2014 से 2022 तक 5 गुना वृद्धि हुई है — जो देश में एक संगठित Spy Network की सक्रियता की ओर इशारा करती है। वर्ष दर्ज केस 2014 11 2015 9 2016 30 2017 18 2018 40 2019 40 2020 39 2021 55 2022 55 विशेषज्ञों का मानना है कि यह डेटा संकेत देता है कि कई विदेशी एजेंसियां भारत में Spy Network फैला रही हैं ताकि रणनीतिक सूचनाएं प्राप्त की जा सकें। कौन चला रहा है ये जासूसी नेटवर्क? सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, इन जासूसी नेटवर्क में शामिल लोग अक्सर: क्यों बढ़ रहे हैं जासूसी मामले? सुरक्षा विशेषज्ञ बताते हैं कि इस ट्रेंड के पीछे ये प्रमुख कारण हैं: क्या है Official Secrets Act, 1923? Official Secrets Act भारत का मुख्य Anti-Espionage कानून है। इसके तहत: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Congress on Operation Sindoor, Salman Khurshid statement

Operation Sindoor: क्या घोर मोदी विरोधी कांग्रेसी भी राहुल गांधी की राजनीति से दूर हो रहे हैं ?

नई दिल्ली। देश के सफल सैन्य अभियान Operation Sindoor को लेकर अब राजनीतिक हलकों में दिलचस्प बदलाव देखने को मिल रहे हैं। विपक्ष में बैठी Congress पार्टी, जो अब तक इस ऑपरेशन को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री Narendra Modi पर सवाल उठाती रही थी, अब उसके कई वरिष्ठ नेता इस मुद्दे पर सरकार और भारतीय सेना के समर्थन में आ गए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह समर्थन उन चेहरों की ओर से आ रहा है जिन्हें कभी कट्टर मोदी विरोधी माना जाता था। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री Salman Khurshid ने हाल ही में एक बयान में यह स्पष्ट किया कि पाकिस्तान से हुई बातचीत में किसी तीसरे देश की कोई भूमिका नहीं रही। पार्टी लाइन से अलग हुई आवाजें जहां एक ओर Rahul Gandhi और Mallikarjun Kharge की अगुवाई में कांग्रेस नेतृत्व इस अभियान पर सवाल उठाने में लगा रहा, वहीं पार्टी के अंदर से ही ऐसी आवाजें सामने आईं जो इस लाइन से पूरी तरह अलग थीं।Salman Khurshid ने विदेश सचिव Vikram Misri की ब्रीफिंग के बाद कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच जो कुछ भी हुआ, उसमें किसी तीसरे देश की भूमिका नहीं थी। उनके अनुसार, “जब मामला गंभीर हो गया था, तब भी इसे सुलझाने की पहल पाकिस्तान के DGMO (Director General of Military Operations) ने की थी। भारत ने स्पष्ट कर दिया था कि अगर पाकिस्तान गंभीर है, तो हम भी तैयार हैं।” Trump का दावा और कांग्रेस का विरोध कांग्रेस ने अपने पिछले बयानों में यह आरोप लगाया था कि इस ऑपरेशन में अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने पाकिस्तान के साथ बातचीत में मध्यस्थता की थी, जो कि भारत की स्थापित विदेश नीति के खिलाफ है। लेकिन खुद ट्रंप ने भी बाद में इस दावे से पीछे हटते हुए भारत के स्टैंड को स्वीकार किया था। देश की एकजुटता बनी सबसे बड़ी ताकत Operation Sindoor की सफलता का सबसे बड़ा आधार रहा राष्ट्रीय एकता। सभी राजनीतिक दलों ने सरकार के साथ खड़े होकर यह संदेश दिया कि जब बात देश की सुरक्षा की हो, तो सब एक हैं। हालांकि अब कांग्रेस के अंदर इस अभियान को लेकर जो वैचारिक मतभेद उभर रहे हैं, वह 2024 के बाद बदलते राजनीतिक माहौल की ओर इशारा करते हैं। इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ हो गया है कि भारत की सख्त नीति, सेना की कार्रवाई और कूटनीति का ऐसा मेल है, जिस पर विपक्ष भी एकमत नहीं रह पा रहा है। कांग्रेस पार्टी के अंदर ही अब ऐसे नेता सामने आ रहे हैं जो बिना लाग-लपेट के कह रहे हैं कि ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने बिल्कुल सही किया। यदि आप इस प्रकार के विश्लेषण और ग्राउंड रिपोर्ट्स पढ़ना चाहते हैं, तो जुड़े रहें देश हरपल के साथ – जहां हर खबर है ‘हरपल’ की।
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Operation Sindoor, Rahul Gandhi vs BJP, S Jaishankar Statement,

Operation Sindoor Controversy: राहुल बोले अपराध था पाकिस्तान को बताना, BJP बोली- कितने पाकिस्तानी जेट गिराए, ये क्यों नहीं पूछा?

नई दिल्ली | देश हरपलOperation Sindoor को लेकर एक बार फिर देश की सियासत गरमा गई है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के आरोपों के बाद अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जोरदार पलटवार करते हुए कहा है कि राहुल गांधी “पाकिस्तान की भाषा” बोल रहे हैं। BJP आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, “राहुल को यह सवाल उठाना चाहिए था कि हमने कितने पाकिस्तानी फाइटर जेट गिराए। लेकिन वे सिर्फ यही पूछते रह गए कि हमने कितने विमान खोए। क्या राहुल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इतने सफल ऑपरेशन के लिए एक बार भी बधाई दी?” क्या है राहुल गांधी का आरोप? कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के एक पुराने बयान को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने से पहले भारत ने पाकिस्तान को इसकी सूचना दी, जो कि एक “अपराध” था। राहुल ने सवाल उठाया, “हमले से पहले पाकिस्तान को बताने का निर्णय किसने लिया? इससे हमें क्या नुकसान हुआ? वायुसेना ने कितने विमान गंवाए?” राहुल का कहना है कि जयशंकर ने खुद सार्वजनिक रूप से यह बात स्वीकार की है, और इसके लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए। BJP का तीखा पलटवार भाजपा ने राहुल गांधी के बयान को लेकर दो टूक शब्दों में कहा, “राहुल को पाकिस्तान और उसके हितैषियों की लाइन पर चलते देखना कोई आश्चर्य नहीं है। वे बार-बार हमारे नुकसान पूछते हैं लेकिन यह नहीं पूछते कि हमने कितने पाकिस्तानी एयरबेस पर हमला किया और वहां खड़े विमानों को तबाह किया।” बीजेपी नेताओं ने यह भी कहा कि राहुल गांधी ने ना सिर्फ प्रधानमंत्री की आलोचना की, बल्कि हमारी सेना के मनोबल को भी चोट पहुंचाई। अमित मालवीय ने व्यंग्यात्मक लहजे में पूछा, “क्या अब राहुल गांधी को निशान-ए-पाकिस्तान मिलने वाला है?” विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने क्या कहा था? दिल्ली में होंडुरास दूतावास के उद्घाटन के दौरान जयशंकर ने पत्रकारों से बातचीत में कहा था, “हमारे लक्ष्य आतंकवादी ढांचे को नष्ट करना था, जो हमने किया। शुरुआत में ही पाकिस्तान को यह बताया गया था कि हमला उनकी सेना पर नहीं, बल्कि आतंकवाद पर है। अगर वे हस्तक्षेप नहीं करते, तो हम इसे संघर्ष नहीं मानेंगे।” राजनीतिक विश्लेषण राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ऑपरेशन सिंदूर को लेकर हो रही यह बयानबाज़ी सिर्फ सरकार और विपक्ष की रणनीतिक सोच को दर्शाती है।जहां सरकार इसे एक रणनीतिक विजय बता रही है, वहीं विपक्ष सवाल उठाकर इसे जवाबदेही का मुद्दा बना रहा है। ऑपरेशन सिंदूर अब सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं रह गया है, यह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। राहुल गांधी के आरोप और भाजपा का तीखा जवाब इस बात को साफ करते हैं कि 2025 की राजनीति में राष्ट्रीय सुरक्षा भी अब एक चुनावी मुद्दा बन सकती है।
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modi

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रात 8 बजे देश को संबोधित करेंगे

Ceasefire Aftermath: PM Modi to Address Nation Tonight नई दिल्ली। PM Modi to Address Nation Tonight- भारत और पाकिस्तान के बीच तीन दिन पहले हुए सीजफायर के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रात 8 बजे देश को संबोधित करेंगे। उम्मीद है कि पीएम मोदी ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद के हालात पर बात करेंगे। इस ऑपरेशन के दौरान 5 आर्मी और 2 BSF जवान शहीद हुए हैं, जबकि 60 जवान घायल हैं। वहीं, पाकिस्तान की गोलाबारी में 27 सिविलियंस की भी जान गई है। ऑपरेशन सिंदूर: कब और कैसे शुरू हुआ? 7 मई को भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत की। यह ऑपरेशन पाकिस्तान की लगातार गोलाबारी के जवाब में किया गया था। इस दौरान पाकिस्तान ने सीमावर्ती इलाकों में भारी गोलाबारी की, जिसमें भारतीय सेना और BSF को नुकसान हुआ। पाकिस्तान का ऑपरेशन बनयान-उन-मर्सूस सीजफायर के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 10 मई की रात 11.30 बजे अपने देशवासियों को संबोधित किया। उन्होंने पाकिस्तानी सेना के ऑपरेशन बनयान-उन-मर्सूस की सफलता का दावा किया। पाकिस्तान में इसके बाद ‘यौम-ए-तशक्कुर’ मनाया जा रहा है, जिसका अर्थ है ‘शुक्रिया का दिन’। सेना के DGMO कर रहे प्रेस कॉन्फ्रेंस सीजफायर के बाद से लगातार तीन दिन से भारतीय सेना के तीनों अंगों के डीजीएमओ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं। इसमें सीजफायर के हालात और आगे की रणनीति पर चर्चा की जा रही है। क्या कह सकते हैं पीएम मोदी? प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन में ऑपरेशन सिंदूर की रणनीति और भविष्य की तैयारी पर चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा वे शहीद जवानों के परिवारों के लिए भी कुछ महत्वपूर्ण घोषणाएं कर सकते हैं। यौम-ए-तशक्कुर और भारत की प्रतिक्रिया पाकिस्तान में यौम-ए-तशक्कुर के उत्सव पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भारतीय रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान का यह दावा पूरी तरह से प्रोपेगेंडा है। देश हरपल पर बने रहें, पीएम मोदी के संबोधन की लाइव अपडेट्स के लिए।
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Barak-8

Pakistan Missile Attack: : भारत ने Barak-8 से दिया मुंहतोड़ जवाब

Pakistan Missile Attack: Barak-8 Air Defence System Shields India भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। 10 मई की सुबह, पाकिस्तान ने फतेह-1 मिसाइल से जम्मू एयर बेस और उधमपुर को निशाना बनाने की कोशिश की। लेकिन भारत ने अपनी दमदार वायु रक्षा प्रणाली बराक-8 से इस हमले को नाकाम कर दिया। Barak-8 : भारत-इजरायल की संयुक्त ताकत बराक-8 मिसाइल प्रणाली को भारत और इजरायल ने मिलकर विकसित किया है। यह सतह से हवा में मार करने वाली एडवांस मिसाइल है। बराक का हिब्रू में अर्थ ‘बिजली’ है, जो इसकी तेज गति और क्षमता का प्रतीक है। इसकी लंबाई 4.5 मीटर और वजन 275 किलोग्राम है। Barak-8 की क्षमताएँ और विशेषताएँ यह मिसाइल एक साथ कई हवाई खतरों का सामना कर सकती है। चाहे वह विमान हो, हेलीकॉप्टर, यूएवी, क्रूज मिसाइल या बैलिस्टिक मिसाइल, बराक-8 हर चुनौती का जवाब देने में सक्षम है। इसकी अधिकतम मारक दूरी 70-100 किलोमीटर तक है। इसकी अधिकतम गति मैक 2 है और 360-डिग्री कवरेज के साथ वर्टिकल लॉन्च की क्षमता भी है। दोहरी मोटर और थ्रस्ट वेक्टर कंट्रोल बराक-8 में दोहरी पल्स रॉकेट मोटर और थ्रस्ट वेक्टर कंट्रोल (TVC) है, जो मिसाइल को तेजी से लक्ष्य तक पहुँचाने में मदद करता है। सेचुरेशन अटैक के दौरान भी यह प्रणाली कई लक्ष्यों को एक साथ निशाना बना सकती है। क्यों है बराक-8 खास? बराक-8 आधुनिक वायु रक्षा प्रणाली और बहु-कार्य निगरानी ट्रैक और मार्गदर्शन रडार से लैस है। इसकी उच्चतम सटीकता और रडार सीकर प्रणाली दुश्मन के मिसाइल हमलों को नाकाम करने में मदद करती है। भारत की कूटनीतिक जीत इस हमले के विफल होने से पाकिस्तान की मंशा पर पानी फिर गया। भारत ने न केवल अपनी सुरक्षा प्रणाली की ताकत दिखाई, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी पाकिस्तान के इस कृत्य की कड़ी निंदा की जा रही है। बराक-8 मिसाइल प्रणाली ने साबित कर दिया कि भारत की वायु रक्षा में कोई कमी नहीं है। पाकिस्तान के हमले को बेअसर कर भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि उसकी सुरक्षा में सेंध लगाने की कोशिश का करारा जवाब मिलेगा।
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Pakistan Occupied Kashmir (PoK)

OPREATION SINDOOR-क्या भारत बिना युद्ध के PoK को वापस ले सकता है? जानें कहां अटका है पेच

Pakistan Occupied Kashmir (PoK) का मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच हमेशा से विवाद का विषय रहा है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या PoK को बिना युद्ध वापस हासिल किया जा सकता है? हाल ही में पाकिस्तान द्वारा राजस्थान, पंजाब और जम्मू-कश्मीर के कई शहरों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद भारतीय सेना ने कड़ा जवाब दिया। भारत के इस निर्णायक रुख ने एक बार फिर PoK पर नियंत्रण को लेकर बहस को हवा दे दी है। Pakistan Occupied Kashmir (PoK) का ऐतिहासिक और भौगोलिक परिप्रेक्ष्य PoK मुख्यतः दो हिस्सों में बंटा है: गिलगिट-बाल्टिस्तान (64,817 किमी²) और तथाकथित ‘आज़ाद कश्मीर’ (13,297 किमी²)। जब भारत आजाद हुआ था, उस समय जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने पाकिस्तान के आक्रमण से बचने के लिए भारत से मदद मांगी थी। इसके तहत 26 अक्टूबर 1947 को Instrument of Accession पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग बन गया। हालांकि, पाकिस्तान ने इस क्षेत्र के कुछ हिस्सों पर कब्जा कर लिया, जिसे आज PoK के नाम से जाना जाता है। PoK पर भारत का कानूनी दावा संविधानिक दृष्टिकोण से जम्मू-कश्मीर का पूरा क्षेत्र भारत का अभिन्न हिस्सा है। भारत का तर्क है कि महाराजा हरि सिंह द्वारा हस्ताक्षरित विलय पत्र (Instrument of Accession) के अनुसार PoK भी भारत का अंग है। 2019 में अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद केंद्र सरकार ने संसद में स्पष्ट किया था कि गिलगिट-बाल्टिस्तान समेत पूरा PoK भारत का अभिन्न हिस्सा है। अंतरराष्ट्रीय पेच और कूटनीतिक चुनौतियाँ भारत के लिए PoK को सीधा वापस लेना कूटनीतिक दृष्टि से आसान नहीं है। यह एक अंतरराष्ट्रीय विवाद का रूप ले चुका है। संयुक्त राष्ट्र का प्रस्ताव यह कहता है कि जब तक पाकिस्तान अपनी सेना को कश्मीर से नहीं हटाता, तब तक जनमत संग्रह की कोई संभावना नहीं है। पाकिस्तान ने न सिर्फ अपनी सेना बल्कि वहाँ के जनसांख्यिकी ढांचे में भी बदलाव किए हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाना भारत के लिए एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। क्या युद्ध ही एकमात्र विकल्प है? राजनीतिक और सामरिक विशेषज्ञों की राय में, बिना युद्ध के PoK को वापस लेना लगभग असंभव दिखता है। पाकिस्तान की सरकार और सेना कभी भी अपनी मर्जी से PoK को भारत को नहीं सौंपेंगी। हालांकि, युद्ध का विकल्प चुनने पर दोनों देशों के लिए आर्थिक और सामाजिक क्षति होगी। युद्ध की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय समुदाय का दबाव भी एक महत्वपूर्ण पहलू बनकर उभर सकता है। भारत का PoK पर दावा न केवल ऐतिहासिक और संवैधानिक आधार पर मजबूत है, बल्कि राजनीतिक रूप से भी सटीक है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय राजनीति और पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति इसे जटिल बना देती है। अगर पाकिस्तान शांति से PoK नहीं लौटाता, तो भारत के पास कूटनीतिक प्रयासों के बाद युद्ध के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
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India Thwarts Pakistani Drone-Missile Attack:

India Thwarts Pakistani Drone-Missile Attack:भारत ने पाकिस्तानी ड्रोन-मिसाइल अटैक को फेल किया:बॉर्डर से सटे एयरबेस और सेना पर हमला

India Thwarts Pakistani Drone-Missile Attack: Border Airbase and Army Safe दो JF-17 और एक F-16… भारत ने गिराए PAK के तीन फाइटर जेट, पाक एयरफोर्स का AWACS भी फेल भारत ने पाकिस्तान के दो JF-17 और एक F-16 फाइटर जेट को मार गिराया है, साथ ही पाकिस्तान एयरफोर्स का AWACS विमान उनके ही पंजाब प्रांत में ध्वस्त कर दिया
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India Destroys Pakistan's Air Defense System

India Destroys Pakistan’s Air Defense System: Lahore और कराची में Drone Attacks से मचा हड़कंप

India Destroys Pakistan’s Air Defense System: Lahore – भारत ने लाहौर में पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम को किया तबाह भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। गुरुवार को भारतीय सेना के ड्रोन हमलों ने पाकिस्तान के कई प्रमुख शहरों में हड़कंप मचा दिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, लाहौर से लेकर कराची और रावलपिंडी तक 25 से अधिक ड्रोन हमलों में पाकिस्तान का एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह तबाह हो गया है। एयर डिफेंस सिस्टम का विनाश लाहौर और कराची में ड्रोन हमले के बाद पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। पाकिस्तान सरकार ने पुष्टि की है कि अब तक 25 ड्रोन अटैक हो चुके हैं, जिसमें रावलपिंडी, लाहौर और कराची में 3 बड़े ड्रोन अटैक शामिल हैं। इन हमलों में रावलपिंडी स्थित आर्मी कैंप पूरी तरह नष्ट हो गया है। परमाणु ठिकाने तक ड्रोन की पहुंच सूत्रों के मुताबिक, भारतीय ड्रोन ने पाकिस्तान के परमाणु ठिकाने तक भी पहुंच बना ली है। एक के बाद एक धमाकों से लाहौर और कराची में दहशत का माहौल है। पाकिस्तान की वायु रक्षा प्रणाली इन हमलों को रोकने में नाकाम साबित हुई। पाकिस्तान का बयान पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने ड्रोन हमलों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस हमले से उनकी सुरक्षा तैयारियों में गंभीर खामियां उजागर हुई हैं। हालांकि, इस हमले के पीछे भारत का हाथ होने का दावा भी किया गया है। भारत की प्रतिक्रिया भारत सरकार ने ऑफिशियल बयान जारी करके बताया, “07 और 08 मई की दरमियानी रात को पाकिस्तान ने ड्रोन और मिसाइलों का उपयोग करके अवंतीपुरा, श्रीनगर जम्मू, पठानकोट, अमृतसर, कपूरथला, जालंधर, लुधियाना सहित कुल 15 शहरों में कई सैन्य ठिकानों पर हमला करने की कोशिश की. भारत ने पाकिस्तान पर जवाबी कार्रवाई करते हुए एयर डिफेंस सिस्टम तबाह कर दिया.” ड्रोन हमले के प्रभाव रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम का नष्ट होना एक बड़ा झटका है। इससे न केवल पाकिस्तान की सुरक्षा पर सवाल उठते हैं, बल्कि भारत की ड्रोन तकनीक और रणनीतिक क्षमता का भी प्रदर्शन होता है।
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Pakistan's Attack Foiled

Pakistan’s Attack Foiled:पाकिस्‍तान ने श्रीनगर, चंडीगढ़ समेत 15 शहरों में भारतीय सैन्य ठिकानों पर की हमले की कोशिश, भारत ने नाकाम

पाकिस्तान की नापाक साजिश नाकाम!Pakistan’s Attack Foiled पाकिस्तान ने उत्तरी और पश्चिमी भारत के कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर हमला करने की नाकाम कोशिश की। जम्मू-कश्मीर से लेकर पंजाब, राजस्थान और गुजरात तक के इलाकों में ड्रोन और मिसाइल के जरिए हमला करने की साजिश रची गई। हमले का मुख्य लक्ष्य अवंतीपुरा, श्रीनगर, पठानकोट, अमृतसर, लुधियाना और भुज जैसे अहम ठिकाने थे। हमलों को ऐसे किया गया नाकाम भारत की मजबूत रक्षा तैयारियों ने पाकिस्तान की इस साजिश को सफल नहीं होने दिया। देश की Integrated Counter-UAS Grid और Air Defence Systems ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और सभी हमलों को नाकाम कर दिया। विभिन्न स्थानों से बरामद ड्रोन और मिसाइल के मलबे ने हमले की पुष्टि की है। क्या है Integrated Counter-UAS Grid? यह प्रणाली विशेष रूप से ड्रोन और अन्य हवाई खतरों से निपटने के लिए तैयार की गई है। इसमें आधुनिक रडार सिस्टम, सेंसर और एंटी-ड्रोन तकनीक का उपयोग किया जाता है, जिससे किसी भी हमले का समय रहते पता लगाया जा सके। पाकिस्तान की रणनीति पर उठे सवाल इस नाकाम हमले के बाद पाकिस्तान की रणनीति पर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला भारत को अस्थिर करने के लिए किया गया था। लेकिन भारत की तैयारी और सुरक्षा तंत्र ने पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया है। भारत का कड़ा संदेश भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इस हमले के बाद भारत की सुरक्षा एजेंसियां और सतर्क हो गई हैं। निष्कर्ष इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारत की सुरक्षा प्रणालियां बेहद मजबूत और सक्षम हैं। पाकिस्तान की नापाक साजिश को नाकाम कर भारत ने यह संदेश दिया है कि किसी भी आक्रमण का कड़ा जवाब दिया जाएगा।
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UN

World Map में बड़ा बदलाव! UN ने Africa के असली Size को दिखाने का रास्ता साफ किया

दुनिया का नक्शा (World Map) देखते हुए शायद ही किसी ने सोचा होगा कि इसमें दिखाई देने वाले देशों और महाद्वीपों का आकार असलियत से अलग भी हो सकता है। लेकिन अब इसी मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र में एक अहम पहल हुई है। UN महासभा ने ऐसे World Map को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें धरती के अलग-अलग हिस्सों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाने की कोशिश की गई है। इस बदलाव के बाद नक्शे पर Africa पहले से काफी बड़ा दिखाई देगा, जबकि Europe और North America, खासकर US का आकार पुराने नक्शे की तुलना में छोटा नजर आ सकता है। प्रस्ताव को भारी समर्थन मिला, लेकिन अमेरिका ने इसका विरोध किया। पुराने World Map में आखिर समस्या क्या है? दुनिया के स्कूलों और कई नक्शों में लंबे समय से Mercator Projection का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसे 16वीं सदी में Gerardus Mercator ने तैयार किया था। उस समय इसका सबसे बड़ा फायदा समुद्री यात्राओं और Navigation में था। लेकिन Mercator Projection की एक खासियत ही इसकी सबसे बड़ी कमी भी बन गई। इसमें जैसे-जैसे कोई क्षेत्र Equator से दूर जाता है, उसका आकार नक्शे पर ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है। यही कारण है कि Greenland जैसे इलाके नक्शे पर अपनी वास्तविकता से बहुत बड़े नजर आते हैं। दूसरी तरफ Africa, जो दुनिया के सबसे बड़े महाद्वीपों में से एक है, अपेक्षाकृत छोटा दिखाई देता है। मसलन, सामान्य Mercator Map में Greenland और Africa का आकार देखकर किसी को लग सकता है कि दोनों लगभग बराबर हैं। असल में Africa का क्षेत्रफल Greenland से करीब 14 गुना ज्यादा है। Equal Earth Projection क्यों चर्चा में है? UN के प्रस्ताव में Equal Earth Projection जैसे नक्शों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इस Projection की खासियत यह है कि इसमें अलग-अलग महाद्वीपों के क्षेत्रफल को ज्यादा सही अनुपात में दिखाया जाता है। यानी नक्शे को देखकर Africa का वास्तविक विशाल आकार ज्यादा साफ समझ में आता है। Europe और North America भी Mercator Map की तुलना में छोटे दिखाई देते हैं। हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है—न तो Africa बड़ा हुआ है और न ही Europe या America छोटा। बदलाव सिर्फ उस तरीके में है, जिससे उन्हें नक्शे पर दिखाया जाता है। America ने UN के प्रस्ताव का विरोध क्यों किया? इस प्रस्ताव पर अमेरिका का रुख बाकी देशों से अलग रहा। मतदान के दौरान अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट किया। अमेरिकी पक्ष की ओर से यह सवाल उठाया गया कि संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक स्तर की बड़ी समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। वहीं प्रस्ताव के समर्थकों का मानना है कि नक्शा सिर्फ रास्ता या देश की लोकेशन बताने वाला साधन नहीं है। यह लोगों के मन में दुनिया की एक तस्वीर भी बनाता है। अफ्रीकी देशों की तरफ से लंबे समय से यह बात उठती रही है कि पुराने नक्शों में Africa का वास्तविक आकार सही तरीके से सामने नहीं आता। इसी सोच के साथ “Correct the Map” अभियान को आगे बढ़ाया गया। UN के फैसले से क्या सभी Maps बदल जाएंगे? यह मान लेना सही नहीं होगा कि अब अचानक हर जगह नया नक्शा दिखाई देने लगेगा। UN महासभा का यह फैसला कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। यानी Google Maps, स्कूल की किताबों, सरकारी दस्तावेजों या दूसरे Digital Platforms को तुरंत अपना नक्शा बदलना जरूरी नहीं है। इसका मकसद देशों, शैक्षणिक संस्थानों, मीडिया और दूसरे संगठनों को ऐसे Map Projections अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, जो दुनिया के क्षेत्रफल को ज्यादा सही तरीके से दिखाते हों। इसके बावजूद Mercator Projection पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है। Navigation और समुद्री यात्राओं जैसी जरूरतों में इसका इस्तेमाल आज भी उपयोगी माना जाता है। India पर क्या असर पड़ेगा? भारत को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस नए World Map से देश का आकार या सीमा बदल जाएगी? इसका जवाब है—नहीं। भारत की जमीन, क्षेत्रफल और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर इस प्रस्ताव का कोई असर नहीं पड़ेगा। सिर्फ नक्शे पर भारत और बाकी देशों को दिखाने का अनुपात बदल सकता है। अगर Equal Earth या इसी तरह की Projection का इस्तेमाल ज्यादा बढ़ता है तो आने वाले समय में School Geography Books, Educational Charts, News Graphics और Digital Maps में दुनिया की तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे सकती है। भारत के लिए इसका असर मुख्य रूप से शिक्षा और Geography की समझ के स्तर पर होगा। बच्चों और आम लोगों को यह समझने में मदद मिलेगी कि नक्शे पर दिखाई देने वाला आकार हमेशा किसी देश या महाद्वीप के वास्तविक क्षेत्रफल के बराबर नहीं होता। Africa के लिए इसे बड़ी उपलब्धि क्यों माना जा रहा है? इस पूरे विवाद में Africa सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र में है। समर्थकों का कहना है कि सदियों से इस्तेमाल हो रहे नक्शों ने अनजाने में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की एक असंतुलित तस्वीर बना दी है। Africa दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महाद्वीप है और इसके बावजूद Mercator Map में इसका आकार उसकी वास्तविक विशालता के मुकाबले कम नजर आता है। यही वजह है कि African countries और African Union की ओर से इस मुद्दे को लगातार उठाया गया। उनके लिए यह केवल Map Projection का मामला नहीं, बल्कि दुनिया के सामने Africa की वास्तविक तस्वीर रखने का भी सवाल है। क्या दुनिया सच में बदल गई? नहीं। दुनिया का भूगोल बिल्कुल नहीं बदला है। न कोई नया देश बना है, न किसी देश की सीमा बदली है और न ही Africa का क्षेत्रफल अचानक बढ़ गया है। बदलाव सिर्फ इतना है कि दुनिया को कागज या स्क्रीन पर किस तरह दिखाया जाए, इस पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा सामने आई है। एक तरह से देखें तो यह कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि नक्शा हमेशा पूरी तरह निष्पक्ष तस्वीर नहीं होता। उसे बनाने का तरीका तय करता है कि हमें दुनिया का कौन-सा हिस्सा कितना बड़ा या छोटा दिखाई देगा। आने वाले वर्षों में अगर Equal Earth जैसी projections को ज्यादा अपनाया जाता है, तो संभव है कि नई पीढ़ी के लिए World Map की तस्वीर वही न हो,...
Swatantra Bhardwaj

Swatantra Bhardwaj Detained: CJP Protest के बाद स्वतंत्र भारद्वाज हिरासत में

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP Protest के दौरान एक छात्रा के पिता के साथ कथित मारपीट का मामला अब फिर चर्चा में है। मामले में आरोपी बताए जा रहे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज (Swatantra Bhardwaj) को दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थकों के प्रदर्शन और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग के कुछ घंटे बाद हुई। Parliament Street Police Station के बाहर प्रदर्शन स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर CJP के प्रतिनिधि और समर्थक शुक्रवार को दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से मामले में जल्द कार्रवाई करने और आरोपी को गिरफ्तार करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुछ राजनीतिक नेता भी वहां पहुंचे। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बातचीत हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने मामले में कार्रवाई का भरोसा दिया और इसके बाद भारद्वाज को ट्रेस करने के लिए टीमें सक्रिय की गईं। क्या है पूरा मामला? यह विवाद जंतर-मंतर पर CJP के एक प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ कथित तौर पर मारपीट हुई थी। इस मामले में स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार के नाम FIR में शामिल किए गए थे। मामला उस समय और गरमा गया, जब स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े एक Podcast Video की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वीडियो में भारद्वाज ने घटना को लेकर आपत्तिजनक दावे किए थे। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई। Viral Video ने बढ़ाया विवाद वायरल वीडियो सामने आने के बाद CJP ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। संगठन का कहना था कि वीडियो में कथित तौर पर घटना को लेकर किए गए दावों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। वहीं दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही थी और मेडिकल रिपोर्ट में चोट को लेकर सोशल मीडिया पर किए गए कुछ दावों की पुष्टि नहीं हुई थी। Bulandshahr में पुलिस ने पकड़ा पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की टीमों ने स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में ट्रेस किया। रिपोर्टों में बताया गया कि पुलिस की कार्रवाई से पहले वह वहां से निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बाद में उन्हें हिरासत में ले लिया गया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थक स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इससे मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर चल रहा विवाद भी फिलहाल एक नए चरण में पहुंच गया है। FIR में SC/ST Act की धाराएं जोड़ने की जानकारी प्रदर्शन के बाद पुलिस की ओर से मामले में SC/ST Act से संबंधित धाराएं जोड़ने की बात सामने आई। पीड़ित की दोबारा मेडिकल जांच कराए जाने की जानकारी भी रिपोर्टों में दी गई है। हालांकि, मामले में अंतिम कानूनी स्थिति जांच और आगे की पुलिस कार्रवाई पर निर्भर करेगी। आरोपों की पुष्टि अदालत की प्रक्रिया में ही होगी। पुलिस के सामने अब आगे की जांच बड़ी चुनौती स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिए जाने के बाद अब पुलिस के सामने वायरल वीडियो, FIR में दर्ज आरोपों, मेडिकल रिपोर्ट और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच अहम होगी। फिलहाल इस मामले ने CJP Protest, Delhi Police और Social Media Influencer को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस को भी तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस की ओर से क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Saharanpur

UP Bulldozer Action: Saharanpur कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर चला बुलडोजर, मायावती-इकरा हसन ने उठाए सवाल

Saharanpur उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अदालत के आदेश के बाद प्रशासन ने शनिवार को मस्जिद के खिलाफ Bulldozer Action शुरू कर दिया। कार्रवाई की खबर फैलते ही इलाके में हलचल बढ़ गई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया। कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई। किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई अदालत के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन का एक्शन कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को लेकर जमीन के स्वामित्व और निर्माण की वैधता पर काफी समय से विवाद चल रहा था। प्रशासन का दावा है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है और निर्माण को अवैध माना गया है। मामला पहले सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पहुंचा। जुलाई में अदालत ने मस्जिद को हटाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही संबंधित पक्ष पर करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति लगाए जाने की बात भी सामने आई थी। इस फैसले को जिला अदालत में चुनौती दी गई थी। 4 सितंबर को जिला जज की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। इकरा हसन को सहारनपुर जाने से रोका मस्जिद पर कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन सहारनपुर जाने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इकरा हसन और पुलिस अधिकारियों के बीच इस दौरान तीखी बहस भी हुई। इसका वीडियो सामने आने के बाद मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। बाद में उनके आवास के बाहर पुलिस बल तैनात किए जाने की भी खबर सामने आई। इकरा हसन ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोका जा रहा है। उनका कहना था कि वह मौके पर जाकर हालात देखना चाहती थीं। मायावती ने सरकार से कार्रवाई रोकने को कहा सहारनपुर मस्जिद विवाद पर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सरकार से कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की और मामले को संवेदनशील बताते हुए सावधानी से कदम उठाने की बात कही। मायावती ने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह का तनाव बढ़ने से रोकना जरूरी है। उन्होंने लोगों से भी शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की। इमरान मसूद बोले- हाईकोर्ट जाएंगे सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया है। उनका कहना है कि मस्जिद की जमीन और उससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर उनका पक्ष अलग है। जिला अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद मसूद ने मामले को हाईकोर्ट ले जाने की बात कही है। उनका कहना है कि आगे की कानूनी लड़ाई अदालत में लड़ी जाएगी और उपलब्ध दस्तावेजों को वहां रखा जाएगा। प्रशासन और विपक्ष के दावे अलग-अलग पूरे विवाद में प्रशासन और मस्जिद पक्ष के दावे अलग हैं। प्रशासन जहां निर्माण को सरकारी जमीन पर हुआ अवैध निर्माण बता रहा है, वहीं मस्जिद से जुड़े लोग और कुछ विपक्षी नेता इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं। यही वजह है कि मामला सिर्फ बुलडोजर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। अब इसकी गूंज राजनीतिक मंच से लेकर अदालत तक सुनाई दे रही है। आगे क्या होगा? सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर हुई कार्रवाई के बाद अब सबकी नजर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर है। इमरान मसूद की ओर से हाईकोर्ट जाने की बात कही गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में अदालत में इस मामले को लेकर क्या रुख सामने आता है, यह महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई के बाद सहारनपुर में राजनीतिक माहौल गर्म है। एक तरफ अधिकारी कोर्ट के आदेश के पालन की बात कह रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Nepal

Nepal Flood: दार्चुला में Landslide का खतरा बढ़ा, Trishuli से भारतीय परिवार का Rescue; हजारों Missing

नेपाल (Nepal) में बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बाद हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। नदियों का जलस्तर बढ़ने, मलबा आने और पहाड़ी इलाकों में Landslide के खतरे ने राहत और बचाव अभियान को और मुश्किल बना दिया है। सबसे चिंता की बात यह है कि हादसे के कई दिन बाद भी हजारों लोगों का पता नहीं चल पाया है। हालांकि, इसी बीच Trishuli क्षेत्र से दो लोगों को नौ दिन बाद जिंदा निकालना राहत और उम्मीद की बड़ी खबर बनकर सामने आया है। दार्चुला में Landslide का खतरा, निचले इलाकों पर नजर नेपाल के पहाड़ी इलाकों में लगातार भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। दार्चुला समेत संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से निचले इलाकों को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। पहाड़ों से मलबा आने और नदियों में अचानक पानी बढ़ने की आशंका के बीच लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। बाढ़ से कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है। Trishuli से भारतीय नागरिकों का Rescue इस बीच त्रिशूली इलाके से तीन भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाले जाने की खबर सामने आई है। इनमें एक परिवार शामिल है। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, रेस्क्यू किए गए लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया और उनके भारत लौटने की प्रक्रिया में मदद की जा रही है। भारत सरकार नेपाल में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए लगातार नेपाली प्रशासन के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 166 भारतीय नागरिकों को Rescue किया गया है, जबकि 275 भारतीयों के लापता होने की जानकारी दी गई है। भारत ने राहत अभियान के लिए करीब 95 टन राहत सामग्री भी भेजी है। 9 दिन बाद Trishuli Tunnel से जिंदा निकले 2 मजदूर नेपाल में चल रहे Rescue Operation की सबसे बड़ी खबर Trishuli-3A Hydropower Project से आई। यहां सुरंग में फंसे संजय साह और कबीर महारजन को करीब नौ दिन बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया। दोनों को सुरंग के अंदर काफी गहराई से निकाला गया। बचाव दल ने पहले अंदर से आवाजें सुनीं और फिर संपर्क स्थापित होने के बाद ऑपरेशन तेज किया। आखिरकार दोनों को बाहर निकाल लिया गया। इस घटना ने उन परिवारों में भी उम्मीद जगाई है जिनके अपने लोग अभी तक लापता हैं। राहत दल अब अन्य संभावित Survivors तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं। 1300 के करीब मौतें, 5 हजार से ज्यादा लोग Missing इस प्राकृतिक आपदा का असर कितना बड़ा है, इसका अंदाजा मृतकों और लापता लोगों की संख्या से लगाया जा सकता है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार 1,294 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी और 5,053 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़ों में बदलाव देखने को मिल रहा है। कई इलाकों में घरों, सड़कों, पुलों और Hydropower Projects को भारी नुकसान पहुंचा है। बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं और राहत शिविरों में रह रहे हैं। Rescue Operation अभी भी जारी Trishuli Tunnel से दो लोगों को जिंदा निकाले जाने के बाद Rescue Teams का हौसला बढ़ा है। नेपाल सेना, पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञ लगातार प्रभावित इलाकों में Search Operation चला रहे हैं। Hydropower Projects के आसपास अभी भी बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका है। मलबा, पानी और क्षतिग्रस्त सुरंगें बचाव अभियान में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। इसके बावजूद टीमें लगातार नए रास्ते तलाश रही हैं। भारत ने नेपाल की मदद बढ़ाई नेपाल की इस मुश्किल घड़ी में भारत ने भी राहत और बचाव अभियान में सहयोग बढ़ाया है। भारतीय विशेषज्ञों और राहत सामग्री को नेपाल भेजा गया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत की टीमें Rescue, Medical और अन्य जरूरी सेवाओं में सहायता कर रही हैं। फिलहाल नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और पहाड़ी इलाकों में नए Landslide और Flood के खतरे से निपटना है। Trishuli Tunnel से नौ दिन बाद दो लोगों का जिंदा निकलना इस त्रासदी के बीच उम्मीद की एक किरण जरूर लेकर आया है। अब Rescue Teams की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
PM Modi

Teachers Day 2026: PM Modi ने Award-Winning Teachers से की बात, Public Speaking पर भी हुई चर्चा

शिक्षक सिर्फ किताबों का ज्ञान नहीं देते, बल्कि बच्चों के अंदर आत्मविश्वास और बेहतर सोच भी पैदा करते हैं। Teachers’ Day से पहले PM Modi ने National Teachers’ Award 2026 के लिए चुने गए शिक्षकों और educators से मुलाकात की। इस दौरान पढ़ाई के तरीकों से लेकर बच्चों की बदलती आदतों तक कई मुद्दों पर बातचीत हुई। मुलाकात के दौरान माहौल काफी सहज नजर आया। प्रधानमंत्री मोदी ने शिक्षकों से उनके अनुभव जानने के साथ यह भी समझने की कोशिश की कि वे बच्चों को पढ़ाई से जोड़ने के लिए किस तरह के नए तरीके अपना रहे हैं। PM Modi ने पूछा- Public से कैसे करें बात? बातचीत के दौरान Public Speaking और लोगों के सामने अपनी बात रखने का मुद्दा भी सामने आया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बारे में सवाल किया तो एक महिला Teacher ने सीधा जवाब दिया कि लोगों के सामने प्रभावी तरीके से बात करने के लिए सबसे जरूरी चीज Confidence यानी आत्मविश्वास है। उनकी यह बात छोटी जरूर थी, लेकिन Public Speaking को लेकर एक बड़ा संदेश देती है। किसी भी मंच पर अपनी बात रखने के लिए केवल जानकारी होना ही काफी नहीं है, बल्कि उसे भरोसे और स्पष्टता के साथ सामने रखना भी जरूरी है। Teachers ने PM Modi को बताए अपने Innovative Ideas प्रधानमंत्री मोदी ने Award-winning Teachers से उनके Teaching Experience और Classroom में अपनाए जा रहे नए प्रयोगों के बारे में भी जाना। शिक्षकों ने बताया कि वे बच्चों के लिए पढ़ाई को आसान और दिलचस्प बनाने के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। आज के समय में सिर्फ किताब और ब्लैकबोर्ड तक सीमित पढ़ाई बच्चों को हमेशा आकर्षित नहीं करती। ऐसे में कई शिक्षक Technology, Practical Activities और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े उदाहरणों की मदद से विषयों को समझाने की कोशिश कर रहे हैं। बच्चों में Screen Addiction को लेकर भी चर्चा PM Modi ने बच्चों में बढ़ते Screen Time और Digital Addiction को लेकर भी शिक्षकों से चर्चा की। उन्होंने बच्चों को खेल, Physical Activities और रचनात्मक कामों से जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही युवा छात्रों में नशे की समस्या को लेकर शिक्षकों को सतर्क रहने की बात भी कही गई। प्रधानमंत्री ने शिक्षकों की भूमिका को केवल Classroom तक सीमित नहीं माना। बच्चों के व्यवहार, उनकी आदतों और मानसिक-सामाजिक विकास में भी शिक्षक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 5 सितंबर को 48 Teachers को National Award Teachers’ Day के मौके पर 5 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 48 स्कूल शिक्षकों को National Teachers’ Awards प्रदान करेंगी। इन शिक्षकों का चयन देशभर से एक निर्धारित और पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए किया गया है। National Teachers’ Awards का मकसद ऐसे शिक्षकों को पहचान और सम्मान देना है, जिन्होंने पढ़ाई को बेहतर बनाने के साथ विद्यार्थियों पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। यह पुरस्कार हर साल Teachers’ Day पर शिक्षकों के योगदान को सम्मानित करने के लिए दिए जाते हैं। PM Modi की Teachers से मुलाकात का संदेश प्रधानमंत्री और शिक्षकों की इस मुलाकात में एक बात साफ तौर पर सामने आई—एक अच्छा Teacher सिर्फ पाठ नहीं पढ़ाता, बल्कि बच्चों को जीवन के लिए तैयार करता है। चाहे Public Speaking में Confidence की बात हो या Classroom में नए Teaching Methods अपनाने की, बदलते समय के साथ शिक्षकों की भूमिका भी लगातार व्यापक हो रही है। Teachers’ Day से पहले हुई यह मुलाकात इसी बदलाव और शिक्षकों के योगदान को रेखांकित करती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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