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RJD

Rajya Sabha Election 2026 5वीं सीट पर दिलचस्प मुकाबला, Owaisi–Mayawati दिलाएंगे RJD को जीत

बिहार में तेज हुई सियासी हलचल बिहार में राज्यसभा (Rajya Sabha)चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्म हो चुका है। विधानसभा के भीतर संख्या बल का गणित और बाहर जारी राजनीतिक बयानबाजी ने मुकाबले को रोचक बना दिया है। खासकर 5वीं सीट को लेकर जो स्थिति बनी है, उसने सभी दलों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। RJD के सामने कठिन गणित मौजूदा समीकरणों के अनुसार राष्ट्रीय जनता दल (RJD) शुरुआती सीटों पर तो मजबूत नजर आती है, लेकिन 5वीं सीट के लिए उसे अतिरिक्त समर्थन की जरूरत पड़ सकती है। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए तय कोटा पूरा करना जरूरी होता है, और यही गणित इस बार चुनौती बन गया है। Owaisi और Mayawati क्यों अहम? इस पूरे समीकरण में दो नाम लगातार चर्चा में हैं— असदुद्दीन ओवैसी और मायावती। AIMIM और BSP के विधायकों का रुख तय कर सकता है कि मुकाबला किस दिशा में जाएगा।अगर इनका समर्थन RJD को मिलता है, तो 5वीं सीट की राह आसान हो सकती है। लेकिन तटस्थता या विपक्ष का साथ पूरी तस्वीर बदल सकता है। सिंगल ट्रांसफरेबल वोट सिस्टम का असर राज्यसभा चुनाव सिंगल ट्रांसफरेबल वोट प्रणाली के तहत होता है। इसमें विधायकों की प्राथमिकताएं भी महत्वपूर्ण होती हैं। ऐसे में क्रॉस-वोटिंग या रणनीतिक मतदान की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यही वजह है कि यह मुकाबला आखिरी क्षण तक रोमांच बनाए रख सकता है। छोटे दल और निर्दलीय बन सकते हैं किंगमेकर इस चुनाव ने छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों की अहमियत भी बढ़ा दी है। कई बार यही नेता सत्ता के समीकरण बदल देते हैं। पर्दे के पीछे जारी बैठकों और बातचीत का दौर इसी रणनीतिक महत्व को दर्शाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Macron

PM Modi–Macron Mumbai Meet 3.25 लाख करोड़ Defence Deal, 114 Rafale Jets से बढ़ेगी भारत की ताकत

मुंबई की हलचल के बीच जब प्रधानमंत्री Narendra Modi ने फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron का स्वागत किया, तो यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक कूटनीति नहीं थी। यह दो भरोसेमंद साझेदारों के बीच भविष्य की सुरक्षा, तकनीक और आर्थिक सहयोग की नई इबारत लिखने की कोशिश थी। बैठक में रक्षा सहयोग को केंद्र में रखते हुए करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये के संभावित सौदे पर चर्चा हुई। इस डील के तहत भारत को 114 Rafale fighter jets मिल सकते हैं, जो भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता को नई ऊंचाई देंगे। Rafale Deal क्यों है खास? राफेल लड़ाकू विमान फ्रांस की प्रमुख एयरोस्पेस कंपनी Dassault Aviation द्वारा बनाए जाते हैं। ये मल्टीरोल फाइटर जेट्स हवा से हवा और हवा से जमीन पर सटीक हमले करने में सक्षम हैं। भारत पहले ही 36 राफेल विमानों को अपनी वायुसेना में शामिल कर चुका है। अब 114 अतिरिक्त विमानों की संभावित खरीद का मतलब है—सीमाओं की बेहतर सुरक्षा, तेज प्रतिक्रिया क्षमता और आधुनिक युद्ध तकनीक में बढ़त। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा क्षेत्रीय चुनौतियों को देखते हुए भारतीय वायुसेना के स्क्वाड्रन की संख्या बढ़ाना समय की मांग है। ऐसे में यह सौदा सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। Make in India और रोजगार पर असर इस डील में तकनीक हस्तांतरण (Technology Transfer) और भारत में निर्माण (Make in India) को भी प्राथमिकता मिलने की संभावना है। अगर ऐसा होता है, तो यह सिर्फ रक्षा क्षेत्र नहीं बल्कि भारतीय उद्योग, MSME सेक्टर और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा। स्थानीय उत्पादन से भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता (Defence Self-Reliance) को मजबूती मिलेगी और विदेशी निर्भरता घटेगी। Indo-Pacific Strategy में मजबूत साझेदारी भारत और फ्रांस के संबंध सिर्फ हथियारों की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं हैं। दोनों देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी सहयोग और अंतरिक्ष कार्यक्रमों में भी साथ काम कर रहे हैं। फ्रांस की इस क्षेत्र में रणनीतिक मौजूदगी और भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका—दोनों मिलकर एक संतुलित और स्थिर क्षेत्रीय व्यवस्था की दिशा में काम कर रहे हैं। भरोसे की साझेदारी का नया अध्याय मुंबई में हुई यह मुलाकात एक संदेश भी देती है—भारत और फ्रांस का रिश्ता समय के साथ और मजबूत हो रहा है। रक्षा सौदे से आगे बढ़कर यह साझेदारी तकनीक, ऊर्जा, नवाचार और वैश्विक कूटनीति तक फैली हुई है। यदि 114 Rafale Jets की यह डील अंतिम रूप लेती है, तो यह न सिर्फ भारत की सुरक्षा क्षमता को मजबूत करेगी, बल्कि दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग को भी नई ऊंचाई पर ले जाएगी। यह सिर्फ एक रक्षा समझौता नहीं, बल्कि दो लोकतांत्रिक देशों के बीच साझा भविष्य की कहानी है—जहां रणनीति के साथ-साथ भरोसा भी सबसे बड़ी ताकत है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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BNP

BNP vs Jamaat Bangladesh Election के नतीजे और India पर दिए बयान का पूरा सच

बांग्लादेश की हालिया राजनीति ने पूरे दक्षिण एशिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। एक तरफ कट्टरपंथी दल की चुनावी हार चर्चा में है, तो दूसरी तरफ भारत को लेकर दिया गया एक बयान नई बहस को जन्म दे रहा है। सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ चुनावी बयानबाज़ी है या क्षेत्रीय राजनीति में किसी बड़े बदलाव का संकेत? जमात की हार: क्या बदला बांग्लादेश में? हालिया चुनाव में बांग्लादेश की राजनीति ने नया मोड़ लिया। लंबे समय से प्रभाव रखने वाली जमात-ए-इस्लामी को उम्मीद के मुताबिक समर्थन नहीं मिला। मतदाताओं ने अपेक्षाकृत मुख्यधारा और राष्ट्रीय मुद्दों पर केंद्रित राजनीति को प्राथमिकता दी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि युवा मतदाता रोजगार, आर्थिक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को अधिक महत्व दे रहे हैं। यही वजह है कि कट्टर विचारधाराओं को इस बार ज्यादा समर्थन नहीं मिला। BNP की भूमिका और तारिक रहमान का संदर्भ चुनाव के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की स्थिति मजबूत दिखी। पार्टी के कार्यकारी प्रमुख तारिक रहमान का नाम भी लगातार चर्चा में रहा। इसी बीच उनके एक सलाहकार हुमायूँ कबीर ने बयान दिया कि बांग्लादेश में कट्टरपंथी ताकतों को जनता ने नकार दिया, लेकिन भारत में “हिंदू कट्टरता” बढ़ने की बात चिंताजनक है। यह टिप्पणी सीधे तौर पर भारत की आंतरिक राजनीति की ओर इशारा करती है। बयान क्यों महत्वपूर्ण है? यह बयान सिर्फ एक राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं माना जा रहा। इसके कई संभावित मायने निकाले जा रहे हैं: India-Bangladesh Relations: आगे क्या? भारत और बांग्लादेश के रिश्ते सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं हैं। व्यापार, सांस्कृतिक संबंध और सुरक्षा सहयोग दोनों देशों को जोड़ते हैं। ऐसे में सार्वजनिक मंच से दिए गए बयान कभी-कभी भावनात्मक प्रतिक्रिया तो पैदा करते हैं, लेकिन कूटनीतिक स्तर पर अक्सर संवाद के जरिए संतुलन बना लिया जाता है। एक आम नागरिक की नजर से देखें तो दक्षिण एशिया के लोग स्थिरता, विकास और बेहतर संबंध चाहते हैं। चुनावी बयानबाज़ी अपनी जगह है, लेकिन आम जनता की प्राथमिकताएँ रोजगार, शिक्षा और सुरक्षा से जुड़ी होती हैं। बांग्लादेश में जमात की हार को लोकतांत्रिक बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। वहीं भारत को लेकर दिया गया बयान क्षेत्रीय राजनीति में विचारधारात्मक बहस को तेज करता है। आने वाले समय में यह साफ होगा कि यह सिर्फ चुनावी बयान था या South Asia Politics में किसी बड़े बदलाव की शुरुआत। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bhagwant Mann

CM Bhagwant Mann in Hospital Polonium दावे के बीच Bomb Threat से सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

पंजाब की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में उस समय हलचल मच गई जब पंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Mann को अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद मोहाली स्थित Fortis Hospital Mohali में भर्ती कराया गया। सांस लेने में तकलीफ और थकान की शिकायत के बाद उन्हें डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार उनकी हालत फिलहाल स्थिर है और जरूरी मेडिकल जांच की जा रही है। Health Update क्या है मौजूदा स्थिति? मुख्यमंत्री को बीते कुछ दिनों से स्वास्थ्य संबंधी दिक्कत महसूस हो रही थी। जैसे ही सांस लेने में परेशानी बढ़ी, उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है। आधिकारिक बयान में कहा गया है कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन एहतियातन सभी जरूरी जांचें की जा रही हैं। राज्यभर से समर्थक और पार्टी कार्यकर्ता उनके जल्द स्वस्थ होने की दुआ कर रहे हैं। अस्पताल के बाहर समर्थकों की आवाजाही भी देखी गई। Bomb Threat अस्पताल को मिली धमकी से सुरक्षा कड़ी मुख्यमंत्री के भर्ती होने के बीच ही Fortis Hospital Mohali को ई-मेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी मिली, जिससे सुरक्षा एजेंसियां तुरंत अलर्ट हो गईं। पुलिस, बम निरोधक दस्ते और खुफिया टीमें मौके पर पहुंचीं और पूरे परिसर की गहन तलाशी ली गई। अब तक की जांच में कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था पहले से ज्यादा सख्त कर दी गई है। प्रशासन ने साफ किया है कि किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाएगी। Polonium Claim सच या अफवाह? इसी बीच सोशल मीडिया पर एक और सनसनीखेज दावा सामने आया—कि मुख्यमंत्री को कथित रूप से ‘पोलोनियम’ जैसे घातक केमिकल के संपर्क में लाया गया। हालांकि, इस दावे की न तो सरकार ने पुष्टि की है और न ही अस्पताल प्रशासन ने। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे गंभीर आरोपों की पुष्टि बिना आधिकारिक मेडिकल रिपोर्ट के नहीं की जा सकती। फिलहाल यह दावा अपुष्ट है और जांच के बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। प्रशासन की अपील सरकार और पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें। साइबर टीम धमकी वाले ई-मेल की जांच कर रही है और स्रोत तक पहुंचने की कोशिश जारी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Macron

India-France Relations Boost Macron के दौरे में 114 Rafale Deal पर बन सकती है सहमति

भारत और फ्रांस के रिश्तों में एक बार फिर गर्मजोशी देखने को मिली, जब फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron भारत दौरे पर पहुंचे। एयरपोर्ट पर उनका स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री Narendra Modi ने कहा, “Welcome to India, my dear friend.” यह एक साधारण कूटनीतिक वाक्य नहीं था, बल्कि दोनों नेताओं के व्यक्तिगत संबंधों और मजबूत होती रणनीतिक साझेदारी का संकेत भी था। India-France Relations: भरोसे और साझेदारी की कहानी भारत और France के बीच संबंध केवल औपचारिक नहीं हैं। रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग ने इस रिश्ते को खास बनाया है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों ने कई अहम समझौते किए हैं, जिनका असर वैश्विक रणनीति पर भी दिखता है। इस बार की मुलाकात में भी बातचीत का दायरा व्यापक रहा। इंडो-पैसिफिक में स्थिरता, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और नई रक्षा तकनीकों के साझा विकास जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। 114 Rafale Deal: Indian Air Force के लिए बड़ा कदम? इस दौरे की सबसे ज्यादा चर्चा 114 राफेल लड़ाकू विमानों की संभावित डील को लेकर रही। भारत पहले ही 36 राफेल जेट्स को अपनी वायुसेना में शामिल कर चुका है, जिससे उसकी मारक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। राफेल विमान फ्रांसीसी कंपनी Dassault Aviation द्वारा निर्मित किए जाते हैं और इन्हें आधुनिक तकनीक तथा बहु-भूमिका क्षमता के लिए जाना जाता है। यदि 114 राफेल डील पर मुहर लगती है, तो यह भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक फैसला हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक, इस संभावित समझौते में ‘मेक इन इंडिया’ पहल को भी प्राथमिकता दी जा सकती है। यानी कई विमानों का निर्माण भारत में हो सकता है, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी। Strategic Significance: हिंद-प्रशांत में नई रणनीति आज के दौर में हिंद-प्रशांत क्षेत्र वैश्विक राजनीति का केंद्र बन चुका है। ऐसे में भारत-फ्रांस साझेदारी केवल द्विपक्षीय संबंध नहीं, बल्कि एक व्यापक रणनीतिक संतुलन का हिस्सा है। समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए दोनों देशों का सहयोग अहम माना जा रहा है। एक दोस्ती, जो समय के साथ और मजबूत हुई Macron और मोदी के बीच व्यक्तिगत तालमेल भी इन संबंधों को मजबूती देता है। दोनों नेता कई वैश्विक मंचों पर साथ दिख चुके हैं और एक-दूसरे के देशों की यात्रा कर चुके हैं। इस बार का दौरा भी उसी भरोसे की कड़ी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Tarique Rahman

Tarique Rahman Swearing-in में PM Modi को Invite करने की तैयारी BNP का बड़ा संकेत

बांग्लादेश (Bangladesh) की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। हालिया संसदीय चुनावों में Bangladesh Nationalist Party (BNP) को स्पष्ट बहुमत मिला है और पार्टी के वरिष्ठ नेता Tarique Rahman देश के अगले प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं। इसी बीच एक अहम कूटनीतिक संकेत सामने आया है—BNP की ओर से भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi को शपथ ग्रहण समारोह (Swearing-in Ceremony) में आमंत्रित किए जाने की तैयारी चल रही है। क्या है पूरा मामला? सूत्रों के मुताबिक BNP नई सरकार की शुरुआत सकारात्मक संदेश के साथ करना चाहती है। पार्टी के कुछ नेताओं ने संकेत दिए हैं कि क्षेत्रीय देशों के प्रमुख नेताओं को आमंत्रित करने की योजना है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम प्रमुखता से चर्चा में है। हालांकि अभी तक औपचारिक निमंत्रण (Official Invitation) जारी नहीं हुआ है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे भारत-बांग्लादेश रिश्तों के लिहाज से एक अहम कदम माना जा रहा है। चुनाव के बाद बढ़ा संवाद चुनाव परिणाम आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को फोन पर बधाई दी थी। इस बातचीत में दोनों देशों के बीच मजबूत और सहयोगात्मक रिश्तों को आगे बढ़ाने की बात कही गई। BNP ने भी इस शुभकामना के लिए आभार जताया और संकेत दिया कि नई सरकार क्षेत्रीय सहयोग को प्राथमिकता देगी। यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद सभी की नजर इस बात पर है कि नई सरकार भारत के साथ अपने संबंधों को किस दिशा में ले जाती है। India-Bangladesh Relations पर क्या असर पड़ेगा? भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार (Trade), सीमा सुरक्षा (Border Security), ऊर्जा सहयोग (Energy Cooperation) और कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स जैसे कई रणनीतिक मुद्दे जुड़े हैं। ऐसे में अगर प्रधानमंत्री मोदी शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होते हैं, तो यह दोनों देशों के बीच भरोसे और निरंतरता का मजबूत संदेश होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह निमंत्रण केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक संकेत हो सकता है कि ढाका (Dhaka) नई सरकार के तहत भारत के साथ संतुलित और व्यावहारिक संबंध बनाए रखना चाहता है। लोगों की उम्मीदें भी जुड़ी बांग्लादेश और भारत के बीच केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रिश्ते भी गहरे हैं। सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों से लेकर व्यापार जगत तक—हर किसी की नजर इस नई शुरुआत पर टिकी है। नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में भारत की भागीदारी अगर होती है, तो इसे दक्षिण एशिया (South Asia) की राजनीति में एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जाएगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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AI

AI और Innovation का Future India AI Impact Summit 2026 में क्या होगा खास

India AI Impact Summit 2026 एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहां दुनिया भर की बड़ी टेक कंपनियों के CEO और इंडस्ट्री लीडर्स एक साथ आ रहे हैं। इस इवेंट का मकसद सिर्फ टेक डिस्कशन नहीं, बल्कि भारत को ग्लोबल इनोवेशन हब के रूप में पेश करना है। इस साल समिट में Google, Nvidia, OpenAI, Microsoft, और Qualcomm जैसे दिग्गज शामिल हैं। भारत क्यों बन रहा है Tech दुनिया का Focus Point? भारत की डिजिटल पॉपुलेशन और टेक टैलेंट इसे दुनिया की नजरों में खास बनाते हैं। 1.4 अरब से ज्यादा आबादी, तेजी से बढ़ते स्टार्टअप, और रिसर्च में रुचि रखने वाले युवा इसे एक आकर्षक टेक हब बनाते हैं। इस समिट का मकसद है कि कंपनियां भारत में रिसर्च, डेटा सेंटर और इनोवेशन लैब्स खोलें, जिससे टेक्नोलॉजी का विकास और रोजगार दोनों बढ़ सकें। Policy और Collaboration का मौका इस इवेंट में डेटा प्रोटेक्शन, डिजिटल इनोवेशन, और नई टेक्नोलॉजी के ethical इस्तेमाल जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। भारत सरकार इन पहलुओं को बढ़ावा दे रही है ताकि देश सस्टेनेबल और रिस्पॉन्सिबल टेक लीडर बन सके। ग्लोबल पार्टनरशिप के जरिए भारत और दुनिया के बीच नई बिजनेस और रिसर्च opportunities खुलेंगी। निवेश और बिजनेस Opportunities इस समिट के जरिए भारत में स्टार्टअप्स और बड़ी कंपनियों के लिए नए निवेश के दरवाजे खुल रहे हैं। क्लाउड, चिप डिज़ाइन, और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी में साझेदारी की संभावना बढ़ रही है। Sundar Pichai, Jensen Huang, और Sam Altman जैसे लीडर्स की उपस्थिति इस बात का संकेत है कि भारत अब ग्लोबल टेक डायलॉग में एक प्रमुख खिलाड़ी बन चुका है। भारत की Strategy भारत केवल टेक्नोलॉजी का उपभोक्ता नहीं रहना चाहता। देश की कोशिश है कि वह: इस समिट के जरिए भारत अपनी लीडरशिप और इनोवेशन की भूमिका को साबित कर रहा है। India AI Impact Summit 2026 भारत के लिए एक historic मौका है। यह आयोजन निवेश, टेक पार्टनरशिप और ग्लोबल डिस्कशन के नए अवसर लाएगा। 50+ ग्लोबल CEOs की उपस्थिति यह दर्शाती है कि दुनिया अब भारत की टेक क्षमता और इनोवेशन पावर को गंभीरता से देख रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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PM Modi

PM Modi in Assam National Highway बना Runway, Rafale और Sukhoi ने भरी उड़ान

असम की धरती पर एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने देशभर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। PM Modi का विमान डिब्रूगढ़ जिले के मोरन क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग पर बनी इमरजेंसी एयरस्ट्रिप पर उतरा। यह एयरस्ट्रिप चीन सीमा से लगभग 300 किलोमीटर दूर है, इसलिए इसका सामरिक महत्व काफी बढ़ जाता है। Moran Airstrip क्यों है खास? मोरन की यह हाईवे एयरस्ट्रिप सामान्य दिनों में एक व्यस्त सड़क का हिस्सा रहती है, लेकिन जरूरत पड़ने पर कुछ ही समय में इसे रनवे में बदला जा सकता है। आपातकाल, प्राकृतिक आपदा या सैन्य परिस्थिति में यहां से लड़ाकू विमान और अन्य एयरक्राफ्ट संचालन कर सकते हैं। पूर्वोत्तर भारत लंबे समय से रणनीतिक दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र रहा है। ऐसे में इस तरह की डुअल-यूज़ (civil + military) सुविधाएं देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करती हैं। स्थानीय लोगों के लिए यह गर्व का क्षण था, जब उन्होंने अपने इलाके को राष्ट्रीय स्तर की सुर्खियों में देखा। Rafale और Sukhoi की ताकत का प्रदर्शन कार्यक्रम के दौरान भारतीय वायुसेना के अत्याधुनिक फाइटर जेट — Dassault Rafale और Sukhoi Su-30MKI — ने भी इस एयरस्ट्रिप से उड़ान भरी। इन विमानों की मौजूदगी ने यह साफ संदेश दिया कि यह हाईवे स्ट्रिप सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि पूरी तरह सक्षम सैन्य सुविधा है। जब आसमान में राफेल और सुखोई की गूंज सुनाई दी, तो वहां मौजूद लोगों के चेहरे पर उत्साह और गर्व साफ नजर आया। यह सिर्फ एक एयर शो नहीं था, बल्कि आत्मनिर्भर और मजबूत भारत की झलक थी। China Border के पास रणनीतिक संदेश चीन सीमा के करीब इस तरह की एयरस्ट्रिप का विकास भारत की रक्षा तैयारियों को दर्शाता है। संकट की स्थिति में पारंपरिक एयरबेस के अलावा ऐसे वैकल्पिक रनवे बेहद उपयोगी साबित हो सकते हैं। इसके साथ ही, यह दौरा पूर्वोत्तर में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर केंद्र सरकार के फोकस को भी दिखाता है। बेहतर सड़कें, मजबूत कनेक्टिविटी और रणनीतिक परियोजनाएं — ये सभी क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को भी गति देंगी। विकास और सुरक्षा साथ-साथ PM Modi का असम दौरा केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं था। यह संदेश था कि देश की सीमाएं सुरक्षित रखने के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास भी उतना ही जरूरी है। मोरन एयरस्ट्रिप पर विमान की लैंडिंग और फाइटर जेट्स की उड़ान ने यह साफ कर दिया कि नया भारत सुरक्षा और विकास—दोनों मोर्चों पर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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PM Modi

Seva Teerth Inaugurated by PM Modi प्रशासनिक बदलाव की बड़ी शुरुआत

देश के प्रशासनिक तंत्र में आज एक बड़ा बदलाव दर्ज होने जा रहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) अब अपने नए कार्यालय ‘Seva Teerth’ (सेवा तीर्थ) से संचालित होगा। प्रधानमंत्री Narendra Modi (PM Modi) आज शाम नए दफ्तर की नेमप्लेट का अनावरण करेंगे और इसके साथ ही औपचारिक रूप से कामकाज की शुरुआत होगी। पुराने दफ्तर में आखिरी कैबिनेट बैठक उद्घाटन से पहले आज पुराने प्रधानमंत्री कार्यालय में आखिरी कैबिनेट बैठक आयोजित की जाएगी। यह बैठक सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक युग के समापन का प्रतीक मानी जा रही है। वर्षों से जहां अहम फैसले लिए जाते रहे, वहीं से अब नई शुरुआत का संदेश भी दिया जाएगा। ‘Seva Teerth’ नाम का अर्थ और संदेश नए कार्यालय का नाम ‘सेवा तीर्थ’ रखा गया है। यह नाम सेवा, समर्पण और राष्ट्रहित की भावना को दर्शाता है। सरकार का मानना है कि यह सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि सुशासन की सोच का प्रतीक है—जहां से देश के विकास से जुड़े बड़े फैसले लिए जाएंगे। आधुनिक सुविधाओं से लैस नया PMO सूत्रों के अनुसार, नया कार्यालय अत्याधुनिक तकनीक, बेहतर सुरक्षा व्यवस्था और आधुनिक कार्यप्रणाली से सुसज्जित है। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया गया है, ताकि विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय और तेज हो सके। इससे निर्णय प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। भावनात्मक जुड़ाव भी पुराने दफ्तर से जुड़े कई प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए यह बदलाव भावनात्मक भी है। लंबे समय तक वहीं से देश की नीतियां बनीं और कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए। अब वही जिम्मेदारी ‘Seva Teerth’ संभालेगा। प्रशासनिक सुधार की दिशा में कदम विशेषज्ञ इसे प्रशासनिक सुधार और कार्यकुशलता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं। नए परिसर में स्थानांतरण के साथ ही प्रधानमंत्री कार्यालय की कार्यशैली में नई ऊर्जा और नई गति आने की उम्मीद है। आज का दिन केवल भवन परिवर्तन का नहीं, बल्कि शासन व्यवस्था के एक नए अध्याय की शुरुआत का संकेत भी है। ‘Seva Teerth’ से शुरू होने वाला यह सफर आने वाले समय में देश की नीतियों और निर्णयों को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sugar Rate Hike: त्योहारों से पहले चीनी के दाम बढ़े, Blinkit-Swiggy पर खरीदना हुआ Limited

चीनी (Sugar), जो हर घर की रसोई की रोजमर्रा की जरूरत है, इन दिनों लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है। पिछले कुछ हफ्तों में चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसी बीच Blinkit, Swiggy Instamart, BigBasket और D-Mart जैसे रिटेल और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर चीनी की खरीद को लेकर लिमिट लगाई गई है। कई जगहों पर ग्राहक एक बार में 3 से 5 किलो तक ही चीनी खरीद पा रहे हैं। यानी अगर घर में ज्यादा मात्रा में चीनी खरीदने की जरूरत है, तो एक साथ बड़ी खरीदारी करना अब आसान नहीं है। Sugar Price: एक महीने में तेजी से बढ़े दाम Sugar की कीमतों में हालिया तेजी ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब ₹48 प्रति किलो के आसपास थी, जो अगस्त में बढ़कर ₹55 से ऊपर पहुंच गई। इसके बाद कुछ बाजारों में कीमतें और ऊपर गई हैं। शहर और बाजार के हिसाब से कीमतों में अंतर जरूर है, लेकिन जिस रफ्तार से दाम बढ़े हैं, उसका असर घर के मासिक बजट पर साफ दिखाई दे रहा है। Online Grocery पर क्यों लगाई गई खरीद Limit? Blinkit और Swiggy Instamart जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर खरीदारी की लिमिट लगाए जाने के पीछे मुख्य वजह उपलब्ध स्टॉक को संतुलित रखना मानी जा रही है। त्योहारी सीजन में चीनी की मांग अचानक बढ़ जाती है। मिठाइयों से लेकर घर में बनने वाले पकवानों तक, इस दौरान चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसे में कंपनियां ज्यादा मात्रा में खरीदारी को रोककर स्टॉक को ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, यह लिमिट हर जगह एक जैसी नहीं है। कुछ स्थानों पर 5 किलो तक की खरीद की अनुमति है, जबकि कुछ जगहों पर इससे कम मात्रा की सीमा दिखाई दे रही है। चीनी महंगी होने की क्या है वजह? चीनी के दाम बढ़ने के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। घरेलू उत्पादन में कमी, मौसम से जुड़ी परेशानियां, बढ़ती मांग और बाजार में स्टॉक को लेकर गतिविधियां कीमतों पर दबाव बना रही हैं। त्योहारी सीजन भी इस समय एक बड़ा फैक्टर है। रक्षाबंधन के बाद अब आने वाले त्योहारों में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने की उम्मीद है। इसका सीधा असर चीनी की खपत पर पड़ सकता है। सरकार ने Duty-Free Sugar Import को दी मंजूरी बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने और घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के Duty-Free Import की अनुमति दी है। सरकार का लक्ष्य बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों पर दबाव कम करना है। इसके अलावा बड़े थोक खरीदारों के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा में भी बदलाव किया गया है। इससे बाजार में जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करने की गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है। आम लोगों के लिए क्या मतलब? फिलहाल इसका सबसे सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो महीने का राशन एक साथ खरीदते हैं। जहां दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खरीद सीमा लागू है, वहां लोगों को जरूरत के हिसाब से छोटी मात्रा में चीनी खरीदनी पड़ सकती है। दूसरी तरफ, सरकार की ओर से सप्लाई बढ़ाने के कदमों के बाद बाजार में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। अगर नई चीनी समय पर बाजार में पहुंचती है और त्योहारी मांग के मुताबिक स्टॉक उपलब्ध रहता है, तो कीमतों में आगे राहत मिल सकती है। Sugar Price पर आगे रहेगी नजर चीनी के बढ़ते दाम इस समय सिर्फ घरेलू बजट का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि आने वाले त्योहारी सीजन के लिए भी अहम हैं। सरकार, मिलों और रिटेल कंपनियों के फैसलों पर अब बाजार की नजर रहेगी। फिलहाल ग्राहकों के लिए बेहतर यही है कि जरूरत के मुताबिक ही खरीदारी करें और अलग-अलग दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कीमतों की तुलना कर लें। आने वाले दिनों में सप्लाई की स्थिति साफ होने के साथ चीनी के दाम में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
Gold-Silver

Gold-Silver Price: त्योहार से पहले मिली राहत, सोना-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट

Gold-Silver Price Today: रक्षाबंधन की खरीदारी के बीच सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए बाजार से राहत वाली खबर आई है। 27 अगस्त 2026 को सोने और चांदी दोनों के भाव में गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम सस्ता होकर ₹1,58,477 पर आ गया। वहीं, 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 घटकर करीब ₹2,40,168 रह गया। त्योहार से ठीक पहले कीमतों में आई इस कमी से उन लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है, जो राखी के मौके पर बहन या परिवार के लिए सोने-चांदी की ज्वेलरी खरीदने का मन बना रहे हैं। Gold Price Today: सोने के भाव में ₹2,860 की गिरावट 27 अगस्त को 24 कैरेट सोने की कीमत में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली। IBJA आधारित आंकड़ों के अनुसार, सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम टूटकर ₹1,58,477 पर पहुंच गया। वहीं, 23 कैरेट सोना करीब ₹1,57,842, 22 कैरेट सोना लगभग ₹1,45,165 और 18 कैरेट सोना करीब ₹1,18,858 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर रहा। हालांकि, यहां एक बात ध्यान रखना जरूरी है कि शहर और ज्वेलर के हिसाब से Gold Rate थोड़ा अलग हो सकता है। ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और दूसरे शुल्क भी जुड़ते हैं। Silver Price Today: चांदी भी हुई ₹2,791 सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट आई है। 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 कम होकर करीब ₹2,40,168 पर आ गया। चांदी में पिछले दिनों तेजी देखने को मिली थी, इसलिए मौजूदा गिरावट के बावजूद इसका भाव काफी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में चांदी की मांग बढ़ने से इसकी कीमत पर भी असर पड़ सकता है। Raksha Bandhan से पहले क्यों खास है Gold-Silver Price? रक्षाबंधन के मौके पर लोग सिर्फ राखी और मिठाई ही नहीं खरीदते, बल्कि कई परिवार इस दिन सोने या चांदी की छोटी ज्वेलरी खरीदना भी पसंद करते हैं। ऐसे में त्योहार से एक दिन पहले Gold और Silver के दाम में आई गिरावट खरीदारों के लिए अच्छी खबर मानी जा रही है। अगर आप भी खरीदारी की तैयारी कर रहे हैं तो बाजार में जाने से पहले अपने शहर का ताजा रेट जरूर देख लें। ऑनलाइन दिखने वाला IBJA या बुलियन रेट और ज्वेलरी शॉप का अंतिम बिल एक जैसा होना जरूरी नहीं है। सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान सोने की ज्वेलरी खरीदते समय केवल Gold Rate देखना काफी नहीं है। बिल बनते समय मेकिंग चार्ज, GST और अन्य शुल्क जुड़ सकते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले ज्वेलर से पूरी कीमत का ब्रेकअप मांगना बेहतर रहेगा। साथ ही, सोने की शुद्धता के लिए BIS Hallmark जरूर जांचें। इससे आपको खरीदे जा रहे सोने की शुद्धता के बारे में भरोसा मिलता है। आगे क्या हो सकता है Gold और Silver का भाव? सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, ब्याज दरों की उम्मीद और निवेशकों की खरीदारी जैसे कई फैक्टर कीमती धातुओं के भाव को प्रभावित करते हैं। इसलिए आज आई गिरावट को देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि आने वाले दिनों में कीमतें लगातार नीचे जाएंगी। बाजार की चाल बदलने में ज्यादा समय नहीं लगता। Gold-Silver Price Today का सीधा अपडेट रक्षाबंधन से पहले 24 कैरेट Gold करीब ₹2,860 सस्ता होकर ₹1,58,477 प्रति 10 ग्राम और Silver करीब ₹2,791 गिरकर ₹2,40,168 प्रति किलो पर आ गई है। अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने जा रहे हैं, तो अंतिम खरीदारी से पहले अपने स्थानीय बाजार का लेटेस्ट रेट जरूर जांचें।
Raksha Bandhan

Raksha Bandhan 2026: राखी बांधने से पहले जान लें Bhadra का समय, ये है शुभ Muhurat

Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन के रिश्ते में प्यार, अपनापन और थोड़ी-सी नोकझोंक हमेशा बनी रहती है। इन्हीं खूबसूरत रिश्तों को सेलिब्रेट करने वाला रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। राखी को लेकर इस बार एक सवाल काफी लोगों के मन में है—27 अगस्त या 28 अगस्त, आखिर किस दिन भाई की कलाई पर राखी बांधना शुभ रहेगा? पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। Raksha Bandhan 2026 Date: 27 या 28 अगस्त? रक्षाबंधन सावन मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे के बाद शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे तक रहेगी। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए इसी दिन रक्षाबंधन मनाने की परंपरा रहेगी। यानी बहनें 28 अगस्त को भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। Rakhi Shubh Muhurat 2026: इस समय बांधें राखी 28 अगस्त को राखी बांधने के लिए सुबह का समय शुभ माना जा रहा है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार सुबह करीब 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का समय बताया गया है। हालांकि, शुभ मुहूर्त में शहर के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए अगर आप किसी खास शहर में हैं, तो वहां के पंचांग से समय जरूर मिला लें। Bhadra Kaal: इस बार नहीं होगी बड़ी परेशानी रक्षाबंधन पर भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता। यही वजह है कि हर साल राखी बांधने से पहले लोग भद्रा समाप्त होने का इंतजार करते हैं। इस बार राहत की बात यह है कि 28 अगस्त को राखी बांधने के प्रमुख समय में भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। ऐसे में बहनों को राखी बांधने के लिए भद्रा खत्म होने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। Raksha Bandhan 2026: एक नजर में पूरी जानकारी जानकारी विवरण रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार पर्व सावन पूर्णिमा पूर्णिमा शुरुआत 27 अगस्त की सुबह पूर्णिमा समाप्त 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे राखी बांधने का शुभ समय सुबह करीब 5:57 से 9:48 बजे तक भद्रा 28 अगस्त के प्रमुख राखी मुहूर्त में नहीं Rakhi बांधने की पूजा विधि रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करके भगवान का ध्यान करें और पूजा की तैयारी करें। राखी की थाली में रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, फूल, मिठाई और राखी रखें। भाई को आसन पर बैठाकर पहले तिलक लगाएं। इसके बाद अक्षत लगाकर आरती करें और शुभ मुहूर्त में उसकी कलाई पर राखी बांधें। फिर मिठाई खिलाकर भाई के सुखी और खुशहाल जीवन की कामना करें। भाई भी बहन को प्यार और सम्मान के साथ उपहार देता है और हर परिस्थिति में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प करता है। Raksha Bandhan का असली मतलब क्या है? राखी का धागा देखने में भले ही छोटा हो, लेकिन इसके पीछे छिपी भावना बहुत बड़ी है। बचपन में एक-दूसरे से लड़ने वाले भाई-बहन जब बड़े होते हैं तो यही रिश्ता सबसे मजबूत सहारा बन जाता है। रक्षाबंधन इसी भरोसे और अपनापन को फिर से महसूस करने का दिन है। इसलिए इस बार राखी बांधते समय सिर्फ मुहूर्त ही नहीं, बल्कि उस रिश्ते की मिठास को भी याद रखें, जो जिंदगी के हर पड़ाव पर साथ चलती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Kanpur

Kanpur Plane Crash: अचानक नीचे गिरा Training Plane, दो पायलटों की मौत

उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur) से गुरुवार को एक बेहद दुखद खबर सामने आई। गंगा बैराज के पास नत्थूपुरवा गांव के नजदीक एक Twin-Engine Training Aircraft खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में सवार इंस्ट्रक्टर पायलट और ट्रेनी पायलट की मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने इलाके को घेरकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। Training Flight के दौरान हुआ हादसा मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विमान ट्रेनिंग उड़ान पर था और इसी दौरान हादसे का शिकार हो गया। यह चार सीटों वाला ट्विन-इंजन विमान था। शुरुआती जानकारी में बताया गया कि विमान नीचे गिरने से पहले आसपास के लोगों ने तेज आवाज सुनी थी। हालांकि, उस आवाज की वजह क्या थी, इसे लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि विमान गंगा बैराज के करीब नत्थूपुरवा गांव के पास खुले खेत में गिरा। हादसा आबादी वाले इलाके से कुछ दूरी पर हुआ, जिसके बाद स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। हादसे के बाद मची अफरा-तफरी विमान के खेत में गिरने की सूचना मिलते ही पुलिस और इमरजेंसी टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। दुर्घटनाग्रस्त विमान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था और उसका मलबा खेत में बिखरा मिला। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित किया और दोनों पायलटों को मलबे से बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। शुरुआती रिपोर्टों में एक पायलट की मौत और दूसरे के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई थी। बाद में पुलिस अधिकारियों के हवाले से दोनों पायलटों की मौत की पुष्टि हुई। Crash की असली वजह अभी सामने नहीं आई कानपुर Plane Crash की वजह फिलहाल साफ नहीं है। शुरुआती स्तर पर विमान के अचानक नियंत्रण खोने और नीचे गिरने की बात सामने आई है, लेकिन तकनीकी खराबी, इंजन से जुड़ी समस्या या किसी अन्य कारण की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अधिकारियों की ओर से दुर्घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। विमान के मलबे, उड़ान से जुड़ी जानकारी और घटनास्थल से मिले सबूतों की जांच के बाद ही Crash की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी। Aviation Safety पर फिर उठे सवाल कानपुर में हुआ यह हादसा Flight Training के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल खड़े करता है। हालांकि, अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसा किस वजह से हुआ और क्या इसके पीछे कोई तकनीकी या संचालन संबंधी कारण था। फिलहाल प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर मौजूद हैं और मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। कानपुर विमान हादसे से जुड़ी नई जानकारी जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी। Kanpur Plane Crash Latest Update: गंगा बैराज के पास Training Aircraft के क्रैश होने से दो पायलटों की मौत ने इलाके में शोक का माहौल पैदा कर दिया है। हादसे की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही साफ होगी।
Share Market

Share Market Today: Sensex 77,250 के करीब, Nifty भी टूटा; जानें बाजार में क्यों आई गिरावट

भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) में गुरुवार, 27 अगस्त को कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty बढ़त के साथ खुले, लेकिन कुछ ही देर बाद बाजार की चाल बदल गई। बिकवाली बढ़ने से दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में पहुंच गए। सुबह 10:30 बजे Sensex 123.89 अंक की गिरावट के साथ 77,349.05 पर था, जबकि Nifty 24.60 अंक टूटकर 24,183.15 पर कारोबार कर रहा था। Sensex-Nifty पर बढ़ा दबाव गुरुवार की शुरुआत बाजार के लिए सकारात्मक रही। Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से निवेशकों को कुछ राहत मिली, लेकिन यह बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं पाई। Nifty 24,200 के स्तर के नीचे चला गया, वहीं Sensex भी शुरुआती बढ़त गंवाकर कमजोर हो गया। इससे पहले सुबह 10:13 बजे Reuters के आंकड़ों में Sensex 77,379.50 और Nifty 24,191.85 पर था। यानी उस समय दोनों इंडेक्स में हल्की गिरावट दर्ज की जा रही थी। FMCG और Media Shares में बिकवाली सेक्टोरल कारोबार की बात करें तो FMCG शेयरों पर दबाव नजर आया। शुरुआती कारोबार में Nifty FMCG इंडेक्स भी लाल निशान में था। इसके साथ ही Media शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। सुबह 10:30 बजे Nifty Media करीब 0.60 फीसदी नीचे 1,601.30 पर कारोबार कर रहा था। Media इंडेक्स इससे पहले लगातार दो कारोबारी सत्रों में बढ़त दर्ज कर चुका था। ऐसे में आज की गिरावट को कुछ हद तक मुनाफावसूली से भी जोड़कर देखा जा रहा है। HDFC Bank बना बाजार पर दबाव का बड़ा कारण आज बाजार में HDFC Bank का प्रदर्शन भी निवेशकों के रडार पर रहा। शेयर में करीब 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। Reuters के मुताबिक, अमेरिका में बैंक और उसके दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ दायर एक securities lawsuit की खबर के बाद शेयर पर दबाव बढ़ा। Upstox के अनुसार, HDFC Bank में बिकवाली के चलते Sensex दिन के ऊपरी स्तर से करीब 300 अंक नीचे आया, जबकि Nifty 24,200 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे फिसल गया। Global Market से मिले-जुले संकेत भारतीय बाजार को एक तरफ Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से सहारा मिला। Brent crude करीब 87.4 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया था। ईरान और ओमान के बीच Strait of Hormuz को लेकर बातचीत आगे बढ़ने की खबरों से तेल आपूर्ति को लेकर चिंता कुछ कम हुई है। दूसरी ओर, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों को लेकर बनी चिंता ने निवेशकों को थोड़ा सतर्क रखा। यही वजह रही कि एशियाई बाजारों में मजबूती के बावजूद भारतीय बाजार में तेजी टिक नहीं सकी। निवेशकों की नजर अब बाजार की अगली चाल पर फिलहाल घरेलू बाजार में तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। एक तरफ कच्चे तेल में नरमी और मजबूत ग्लोबल टेक्नोलॉजी संकेत सकारात्मक हैं, तो दूसरी तरफ HDFC Bank जैसे बड़े शेयरों में कमजोरी और सेक्टोरल बिकवाली बाजार पर दबाव बना रही है। ऐसे माहौल में Sensex और Nifty की आगे की दिशा, 24,200 के आसपास Nifty की चाल और प्रमुख सेक्टर्स में खरीदारी-बिकवाली पर निवेशकों की नजर रहेगी। बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय लेना बेहतर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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