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Indus Water Treaty, Pakistan India Water Conflict, Khawaja Asif Statement

Indus Water Threat: पाकिस्तान ने दी भारत को युद्ध की धमकी, कहा- पानी रोका तो करेंगे हमला

Islamabad: भारत-पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) एक बार फिर चर्चा में है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भारत को लेकर एक भड़काऊ और उकसाने वाला बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि अगर भारत ने पाकिस्तान जाने वाले नदियों के पानी को रोकने के लिए किसी तरह की संरचना बनाई तो पाकिस्तान उस पर सैन्य हमला करेगा और उसे पूरी तरह नष्ट कर देगा। भारत द्वारा पहलगाम आतंकी हमले के बाद इस संधि को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया था। इस हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे। तब से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है और अब ये बयान उसकी कूटनीतिक असहायता और पानी पर बढ़ती बेचैनी को दिखाता है। पाकिस्तान को डर है कि अगर भारत ने नदियों का प्रवाह रोक दिया, तो इसका सीधा असर उसकी खेती, पीने के पानी और आम जनता की जिंदगी पर पड़ेगा। खुद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यह मान चुके हैं कि भारत से आने वाला पानी ही 24 करोड़ पाकिस्तानियों की जीवनरेखा है। जलवायु विशेषज्ञों का कहना है कि अगर भारत ने संधि के अंतर्गत मिलने वाले पानी का कुछ हिस्सा भी रोक लिया, तो पाकिस्तान में खेती ठप, जल संकट चरम पर और आर्थिक तबाही तय है। भारत ने अब तक संधि का सम्मान किया है, लेकिन बार-बार के आतंकी हमलों और पाकिस्तान के उकसावे के चलते अब भारत का रुख सख्त होता जा रहा है। पानी अब न सिर्फ जीवन की जरूरत बल्कि रणनीतिक हथियार बन चुका है। पाकिस्तान के नेता जिस तरह के बयान दे रहे हैं, वे ना सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि पूरे क्षेत्र की शांति के लिए खतरा बन सकते हैं। भारत ने हमेशा शांति की पहल की है, लेकिन अगर उकसावे जारी रहे तो जवाब भी सख्त हो सकता है
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Pragya Thakur

Supreme Court Closes Plea Against Pragya Thakur’s Bail, Final Verdict in Malegaon Blast Case Awaited

Supreme Court ने बीजेपी सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर को 2008 के मालेगांव ब्लास्ट केस में मिली ज़मानत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई बंद कर दी है। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट यानी एनआईए अदालत ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है, इसलिए अब टॉप कोर्ट का हस्तक्षेप करना ठीक नहीं होगा। याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि प्रज्ञा ठाकुर की ज़मानत रद्द की जाए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “जब निचली अदालत इस पर फैसला देने वाली है, तो हम इसमें दखल नहीं दे सकते।” सितंबर 2008 में महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए धमाकों में 6 लोगों की मौत हुई थी और 100 से ज़्यादा लोग घायल हुए थे। बम मोटरसाइकिल पर रखे गए थे। इस मामले में प्रज्ञा ठाकुर को आरोपी बनाया गया था। उन्हें कई साल जेल में रहना पड़ा, फिर 2017 में उन्हें ज़मानत मिली। आज वे भोपाल से सांसद हैं। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस राजेश बिंदल की बेंच ने कहा कि एनआईए कोर्ट ने पूरी सुनवाई कर ली है और अब वो जल्द ही फैसला सुनाएगी। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का दखल देना ज़रूरी नहीं है। यह फैसला प्रज्ञा ठाकुर के लिए फिलहाल राहत भरा है, लेकिन असली फैसला एनआईए कोर्ट का होगा – जो ये तय करेगा कि वो दोषी हैं या नहीं। यह मामला सिर्फ कानून की किताबों तक सीमित नहीं है। इसमें उन परिवारों की भी बात है जिन्होंने 2008 में अपनों को खोया। पिछले 16 सालों से वे इंसाफ का इंतजार कर रहे हैं। वहीं, प्रज्ञा ठाकुर, जो अब एक सांसद हैं, खुद को निर्दोष बताती रही हैं। अब सबकी निगाहें एनआईए कोर्ट के आखिरी फैसले पर टिकी हैं।
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Vizhinjam

पीएम मोदी ने किया Vizhinjam International Port राष्ट्र को समर्पित – भारत का पहला Deep Water Transshipment Port अब केरल में

तिरुवनंतपुरम (केरल), 2 मई 2025: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल के तट पर बने Vizhinjam International Seaport को देश को समर्पित किया। यह बंदरगाह भारत का पहला Deep Water Transshipment Port है और इसे भारत के समुद्री क्षेत्र के लिए एक Game Changer माना जा रहा है। इस ऐतिहासिक मौके पर केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और अडाणी ग्रुप के सीईओ करण अडाणी भी मौजूद रहे। PM Modi Kerala Visit: Vizhinjam Port से भारत को क्या मिलेगा? विजिंजम पोर्ट की गहराई 24 मीटर है और यह दुनिया के सबसे बड़े कंटेनर जहाजों को संभालने में सक्षम है। इसकी खासियत यह है कि यह पोर्ट अंतरराष्ट्रीय समुद्री रूट से सिर्फ 10 नॉटिकल माइल्स दूर है, जिससे भारत को अब कोलंबो, सिंगापुर और दुबई जैसे विदेशी ट्रांसशिपमेंट हब्स पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। 5000+ रोजगार और ₹5000 करोड़ का इंफ्रास्ट्रक्चर बूस्ट इस प्रोजेक्ट से केरल और भारत दोनों को जबरदस्त आर्थिक और रोजगार लाभ मिलने की उम्मीद है। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, यह बंदरगाह 5,000 से ज्यादा लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार देगा और लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और टूरिज्म जैसे क्षेत्रों को भी बूस्ट करेगा। केरल सरकार ने इसके लिए ₹5,000 करोड़ का विशेष इंफ्रास्ट्रक्चर पैकेज घोषित किया है, जिसमें सड़क और रेलवे कनेक्टिविटी को भी सुधारा जाएगा। 10 KM रेलवे टनल और Smart Cargo Handling विजिंजम पोर्ट को Balaramapuram स्टेशन से जोड़ने के लिए 10.2 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन प्रस्तावित है, जिसमें 9.2 किमी लंबी सुरंग (Tunnel) होगी। इससे माल की आवाजाही आसान, तेज़ और सुरक्षित होगी। यह परियोजना पर्यावरण और सामाजिक स्वीकृतियों की प्रक्रिया में है। Adani Ports और सरकार की मजबूत साझेदारी यह पोर्ट भारत सरकार और निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक Adani Ports & SEZ Limited की साझेदारी में विकसित किया जा रहा है। यह एक Public-Private Partnership (PPP) मॉडल का बेहतरीन उदाहरण है, जिसकी कुल लागत करीब ₹8,867 करोड़ है। करण अडाणी ने इसे प्रधानमंत्री मोदी के “Maritime Amrit Kaal 2047” विजन का अहम हिस्सा बताया और कहा कि यह भारत को आत्मनिर्भर समुद्री राष्ट्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। PM Modi का संदेश: “विजिंजम भारत की शक्ति का प्रतीक है” प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर कहा:
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WAVES 2025

WAVES 2025 समिट मुंबई में शुरू: भारत बनेगा Global Entertainment Hub, बोले PM मोदी

1 मई 2025 — मुंबई के जिओ वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में आज से शुरू हुआ ‘WAVES 2025’ (World Audio Visual and Entertainment Summit) — एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय मंच जो भारत को ग्लोबल मीडिया और एंटरटेनमेंट हब बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है। यह चार दिवसीय समिट 4 मई तक चलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक आयोजन को लेकर कहा, “भारत की रचनात्मकता और सांस्कृतिक विविधता अब वैश्विक पहचान पा रही है। WAVES 2025 इस बदलाव को और मजबूत करेगा।” PM मोदी ने इस समिट की घोषणा पहले ‘मन की बात’ के 117वें एपिसोड में की थी, और तब से देशभर में इसकी चर्चा जोरों पर है। क्या है WAVES 2025? WAVES 2025 एक अंतरराष्ट्रीय समिट है जिसमें दुनिया भर के मीडिया हाउस, फिल्म निर्माता, एनीमेशन और गेमिंग इंडस्ट्री के दिग्गज, तकनीकी विशेषज्ञ और निवेशक भाग ले रहे हैं। इसका उद्देश्य भारत को ऑडियो-विज़ुअल और मनोरंजन उद्योग के क्षेत्र में वैश्विक केंद्र बनाना है। सम्मलेन के प्रमुख उद्देश्य: किसने क्या कहा? भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर हॉलीवुड, बॉलीवुड और साउथ इंडस्ट्री के टॉप चेहरों तक—हर कोई इस समिट को भारत के लिए “गेम-चेंजर” मान रहा है। यह मंच भारत की soft power को बढ़ावा देगा और दुनिया को यह दिखाएगा कि हम न केवल कंटेंट का उपभोग करते हैं, बल्कि अब उसे गढ़ते भी हैं। पहले गोवा, अब मुंबई गौरतलब है कि यह समिट पहले नवंबर 2024 में गोवा में होने वाली थी, लेकिन बाद में इसे मुंबई में मई 2025 के लिए रीशेड्यूल किया गया — ताकि अधिक प्रतिभागियों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों को शामिल किया जा सके। DeshHarpal पर पढ़ें देश-दुनिया से जुड़ी हर बड़ी खबर।
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Supreme Court

Supreme Court ने Pahalgam Terror Attack की Judicial Inquiry वाली PIL को किया खारिज, कहा – “Desh ko Jodne ka Waqt Hai”

1 मई 2025 – Supreme Court ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की न्यायिक जांच की मांग करने वाली जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने इसे गैर-ज़िम्मेदार बताते हुए कहा कि ऐसे वक्त में सुरक्षा बलों का मनोबल गिराने वाली याचिकाएं नहीं लाई जानी चाहिए। Supreme Court ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले की न्यायिक जांच की मांग करने वाली जनहित याचिका (PIL) को सख्त शब्दों में खारिज कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को फटकार लगाते हुए कहा कि ऐसे समय में इस तरह की याचिकाएं देश की सुरक्षा एजेंसियों का मनोबल गिरा सकती हैं। 22 अप्रैल को हुए इस आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी, जिनमें कई पर्यटक भी शामिल थे। इस दर्दनाक घटना के बाद तीन नागरिक – मोहम्मद जुनैद, फतेह कुमार साहू और विक्की कुमार – ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर एक सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट जज की अध्यक्षता में न्यायिक जांच की मांग की थी। लेकिन जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने इस याचिका को गैर-जिम्मेदाराना करार दिया और स्पष्ट शब्दों में कहा: “ऐसी याचिकाएं सुरक्षा बलों का मनोबल तोड़ती हैं। यह समय एकजुट होकर आतंक के खिलाफ खड़े होने का है, न कि जांच के नाम पर अफसरों को कटघरे में खड़ा करने का। देश के लिए जिम्मेदार बनिए।” कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि न्यायिक जांच की मांग क्यों की जा रही है, जबकि जांच की ज़िम्मेदारी पहले से ही एजेंसियों के पास है। “हम न्याय करते हैं, जांच नहीं। रिटायर्ड जज जांच के विशेषज्ञ नहीं होते। हर मामले में न्यायिक आयोग बना देना समाधान नहीं है,” कोर्ट ने कहा। इन सख्त टिप्पणियों के बाद याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका वापस ले ली। Supreme Court ने याचिका को वापस लेने की अनुमति तो दी, लेकिन साफ कर दिया कि भविष्य में ऐसी याचिकाएं दाखिल करने से पहले राष्ट्रीय भावना और ज़िम्मेदारी को समझना ज़रूरी है। DeshHarpal पर पढ़ें देश-दुनिया से जुड़ी हर बड़ी खबर।
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Census

Caste Census अब होगी Main Census का हिस्सा: 1931 के बाद पहली बार होगा जातीय डेटा कलेक्शन

देश की अगली Census अब सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगी — यह भारत के सामाजिक ताने-बाने को एक नई पारदर्शिता के साथ दुनिया के सामने लाएगी। केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए घोषणा की है कि अब जातीय आंकड़ों की गिनती भी मुख्य जनगणना का हिस्सा होगी। यह फैसला न केवल सरकार की सोच में बदलाव दर्शाता है, बल्कि देश की करोड़ों जातियों और उपजातियों को पहली बार मुख्य धारा के डेटा में लाने की कोशिश भी है। अब हर जाति की होगी गिनती, खुलेगा असली सामाजिक चित्र केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को प्रेस वार्ता में कहा कि कैबिनेट ने यह निर्णय लिया है कि आगामी Census में अब जातीय विवरण भी दर्ज किया जाएगा। उन्होंने साफ कहा, “समाज में बहुत सारी योजनाएं जातीय आधार पर बनती हैं, लेकिन ठोस आंकड़े नहीं होने के कारण असली लाभार्थी वंचित रह जाते हैं।“ अब पहली बार केंद्र सरकार यह जिम्मेदारी खुद उठाकर एक भरोसेमंद जातीय डेटा उपलब्ध कराएगी। राज्यों के जातीय सर्वे को बताया ‘राजनीतिक नाटक’ मंत्री ने कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्यों में हुए जातीय सर्वेक्षणों को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना था कि ये सर्वे राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित थे और इनमें पारदर्शिता की भारी कमी रही। केंद्र सरकार का मानना है कि जब तक जातीय Census पूरे देश में एकसमान रूप से नहीं होगी, तब तक इसके आधार पर नीति बनाना गलत होगा। क्यों है यह फैसला ऐतिहासिक? जातीय आंकड़े क्यों ज़रूरी हैं? भारत एक विविधता से भरा देश है। हर क्षेत्र, हर गाँव और हर समुदाय में अलग-अलग सामाजिक परतें हैं। लेकिन जब योजनाएं बनती हैं, तो बिना आंकड़ों के सिर्फ अनुमान के आधार पर फैसले होते हैं। अब जातीय Census के जरिए सरकार को यह स्पष्ट जानकारी मिलेगी कि कौन पीछे रह गया है, और किसे वास्तव में मदद की जरूरत है। आम जनता की आवाज को मिलेगा प्लेटफॉर्म यह कदम उन लोगों के लिए भी उम्मीद की किरण बनकर आया है जो लंबे समय से कहते आए हैं कि — “हमें गिना नहीं जाता, तो हमें क्यों माना जाएगा?” अब जातियों की पहचान और उनकी समस्याएं सिर्फ राजनीति का मुद्दा नहीं रहेंगी, बल्कि नीति और समाधान का हिस्सा बनेंगी। DeshHarpal पर पढ़ें देश-दुनिया से जुड़ी हर बड़ी खबर।
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Digital Access

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: Digital Access अब “मौलिक अधिकार” (Fundamental Right)

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने आज एक ऐतिहासिक निर्णय में डिजिटल एक्सेस (Digital Access) को मौलिक अधिकार (Fundamental Right) घोषित कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि अब सरकार की यह संवैधानिक जिम्मेदारी है कि वह सभी नागरिकों — खासकर ग्रामीण और हाशिए पर रहने वाले वर्गों — को समान रूप से डिजिटल सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करे। यह फैसला जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने दो जनहित याचिकाओं पर सुनाया, जिनमें से एक याचिका एक एसिड अटैक सर्वाइवर ने दायर की थी। पीड़िता ने बैंक में KYC (Know Your Customer) प्रक्रिया के दौरान आने वाली परेशानियों का ज़िक्र किया था। डिजिटल भेदभाव अब असंवैधानिक कोर्ट ने कहा, “डिजिटल डिवाइड को खत्म करना अब नीति का सवाल नहीं बल्कि संविधानिक कर्तव्य है। जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार (अनुच्छेद 21) में अब डिजिटल पहुंच को भी शामिल करना अनिवार्य हो गया है।” कोर्ट ने बताया कि आज के समय में हेल्थकेयर, बैंकिंग, शिक्षा जैसी ज़रूरी सेवाएं डिजिटल माध्यमों (Digital Access)से ही उपलब्ध होती हैं। ऐसे में जिनके पास इन सेवाओं तक पहुंच नहीं है, वे पीछे छूट रहे हैं। 20 अहम निर्देश दिए सुप्रीम कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और संबंधित एजेंसियों को KYC प्रक्रिया को अधिक समावेशी और सुलभ बनाने के लिए 20 जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने कहा कि विशेष रूप से विकलांग और एसिड अटैक पीड़ितों के लिए मौजूदा नियमों में बदलाव किया जाना चाहिए क्या था मामला? एक एसिड अटैक सर्वाइवर, प्रज्ञा प्रसून, जुलाई 2023 में बैंक में खाता खोलने पहुंची थीं। लेकिन Digital Access डिजिटल केवाईसी प्रक्रिया के दौरान बैंक ने उनसे “ब्लिंक” करने यानी पलकों को झपकाने की मांग की — ताकि यह साबित हो सके कि वे जीवित हैं। लेकिन उनके चेहरे की स्थिति के कारण यह संभव नहीं हो पाया। सोशल मीडिया पर मामला उठने के बाद बैंक ने अपवाद के रूप में खाता खोलने की अनुमति दी। प्रज्ञा ने कोर्ट से अपील की थी कि एसिड अटैक पीड़ितों और अन्य विकलांग व्यक्तियों के लिए केंद्र सरकार नई गाइडलाइंस जारी करे, ताकि वे बिना भेदभाव के डिजिटल सेवाओं का उपयोग कर सकें। जजों ने क्या कहा? जस्टिस महादेवन ने इस आदेश को लिखा, जिसे उनके साथी जस्टिस पारदीवाला ने “शानदार” बताते हुए सराहना की। उन्होंने कहा कि अब आर्थिक अवसरों से लेकर मूलभूत सेवाओं तक पहुंच डिजिटल माध्यमों से ही संभव है, इसलिए Article 21 (जीवन का अधिकार) की नई व्याख्या आवश्यक हो गई है। DeshHarpal पर पढ़ें देश-दुनिया से जुड़ी हर बड़ी खबर।
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Pahalgam Attack Live

Pahalgam Terror Attack: पहलगाम हमले पर PM Modi का एक्शन मोड, बोले – सेना को पूरी छूट, मिलेगा मुंहतोड़ जवाब

PM Modi का एक्शन मोड जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद देश में आक्रोश और चिंता का माहौल है। 22 अप्रैल को हुए इस हमले में 26 निर्दोष नागरिकों – जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे – की जान चली गई। यह हाल के वर्षों में कश्मीर घाटी में हुआ सबसे बड़ा आतंकी हमला माना जा रहा है। इस हमले के बाद मंगलवार को PM Modi ने दिल्ली स्थित अपने आवास 7, लोक कल्याण मार्ग पर एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह और नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी शामिल हुए। बैठक में PM Modi ने सशस्त्र बलों को यह संदेश दिया कि वे देश के दुश्मनों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए “पूरी तरह से स्वतंत्र” हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, “हमारे सैनिक तय करेंगे कि आतंकियों को कैसे, कब और कहां जवाब दिया जाए। उन्हें हर तरह की परिचालन छूट दी गई है।” “आतंकवाद को मिलेगा मुँहतोड़ जवाब” – PM Modi का सख्त संदेश सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने सेना की पेशेवर क्षमताओं पर पूरा विश्वास जताते हुए कहा कि आतंक के खिलाफ भारत का रुख बेहद स्पष्ट है – “यह हमारा राष्ट्रीय संकल्प है कि हम आतंकवाद को जड़ से खत्म करेंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि जो ताकतें भारत की शांति और अखंडता को चुनौती देंगी, उन्हें हर हाल में जवाब मिलेगा – चाहे वह सीमा पार हों या देश के भीतर छिपे हों। CCS बैठक में लिए गए बड़े फैसले – पाकिस्तान को दिया गया कड़ा संदेश हमले के एक दिन बाद 23 अप्रैल को हुई कैबिनेट सुरक्षा समिति (CCS) की बैठक में केंद्र सरकार ने कड़े कदम उठाए थे: इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सभी राज्यों को निर्देश दिया कि तय समयसीमा के बाद कोई भी पाकिस्तानी नागरिक भारत में न रुके। हर आतंकी को सजा मिलेगी – पीएम मोदी का संकल्प प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान को दो-टूक चेतावनी देते हुए कहा, “भारत हर एक आतंकी और उनके समर्थकों की पहचान करेगा, उन्हें ढूंढेगा और सजा देगा। हम उन्हें धरती के छोर तक भी क्यों न जाना पड़े, वहां तक पहुंचेंगे।” गृह मंत्रालय की तैयारी भी तेज इसी दिन केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक अहम बैठक की। इसमें BSF, NSG और असम राइफल्स के प्रमुखों के साथ-साथ सशस्त्र सीमा बल (SSB) के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए। इस बैठक में देशभर में सुरक्षा चाक-चौबंद रखने और आतंक विरोधी रणनीतियों पर चर्चा की गई। DeshHarpal पर पढ़ें देश-दुनिया से जुड़ी हर बड़ी खबर।
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Terror Attack

पाहलगाम Terror Attack पर उमर अब्दुल्ला का बयान: “राजनीति इतनी सस्ती नहीं हो सकती”

जम्मू और कश्मीर के पब्लिक टूरिस्ट डेस्टिनेशन, पाहलगाम की बाइसारन घाटी में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकवादी हमले (Terror Attack) में 26 पर्यटकों की जान चली गई। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद, जम्मू और कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने साफ तौर पर कहा है कि वह इस आतंकवादी हमले को राज्यhood की मांग के लिए राजनीतिक फायदा उठाने का मौका नहीं बनाएंगे। उमर अब्दुल्ला का राजनीति पर अहम बयान उमर अब्दुल्ला ने कहा, “अगर मैं इस आतंकवादी हमले ( Terror Attack) को राज्यhood की मांग के लिए इस्तेमाल करूं तो मुझे शर्म आनी चाहिए।” उनका मानना है कि एक राष्ट्रीय त्रासदी के बाद किसी राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाना पूरी तरह से गलत है। उन्होंने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए शहीदों और उनके परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने बयान में यह भी कहा कि उनका रुख राज्यhood के मुद्दे पर हमेशा एक जैसा रहा है और इसके लिए उन्हें केंद्र सरकार से एक जिम्मेदार और सम्मानजनक संवाद की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्यhood की मांग को इस तरह के संकट के समय में राजनीतिक लाभ के रूप में इस्तेमाल करना उनकी राजनीति के सिद्धांतों के खिलाफ है। उमर अब्दुल्ला का यह बयान यह दर्शाता है कि राजनीति में संवेदनशीलता और समझ होना चाहिए, खासकर ऐसे वक्त में जब पूरा देश एक दर्दनाक घटना से गुजर रहा हो। उनका यह कदम यह साबित करता है कि सही राजनीति कभी भी आतंकी हमले या किसी राष्ट्रीय संकट का फायदा उठाने के लिए नहीं हो सकती। देशहरपाल पर पढ़ें ताज़ा खबरें
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Supreme Court

Supreme Court ने OTT Platforms और Social Media पर Obscene Content को बताया गंभीर चिंता, सरकार लाएगी नए Regulations

Supreme Court ने सोमवार को OTT Platforms और Social Media पर अश्लील और आपत्तिजनक (Obscene and Indecent) कंटेंट के बढ़ते प्रसार पर गहरी चिंता जताई है। Court ने इस मुद्दे पर दायर Public Interest Litigation (PIL) को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है और Netflix, Amazon Prime, AltBalaji, Ullu Digital, Mubi, X (Twitter), Google, Meta (Facebook, Instagram) और Apple सहित कई डिजिटल दिग्गजों को नोटिस जारी किया है। Supreme Court ने क्यों जताई चिंता? Justice BR Gavai और Justice AG Masih की बेंच ने कहा कि यह याचिका “महत्वपूर्ण सार्वजनिक चिंता” (Important Public Concern) उठाती है। सुनवाई के दौरान Justice Gavai ने कहा:“Netflix व अन्य प्लेटफॉर्म्स की भी Social Responsibility बनती है।” उन्होंने यह भी कहा कि OTT Platforms और Social Media पर अश्लील कंटेंट का प्रसार समाज के लिए खतरनाक है और इस पर ध्यान देना जरूरी है। Solicitor General ने क्या कहा? याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वकील Vishnu Shankar Jain ने तर्क दिया कि यह मामला कोई विरोधी मुकदमा (Adversarial Litigation) नहीं, बल्कि एक Genuine Concern को उठाता है। Justice Gavai ने Solicitor General Tushar Mehta से केंद्र सरकार का रुख पूछा। SG Mehta ने सहमति जताते हुए कहा:“कुछ Content इतना Perverted है कि दो सम्माननीय लोग भी साथ बैठकर नहीं देख सकते।” उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि: Supreme Court का आदेश Supreme Court ने अपने आदेश में कहा:“यह याचिका OTT Platforms और Social Media पर आपत्तिजनक, अश्लील और विकृत (Perverted) कंटेंट के प्रदर्शन पर गंभीर चिंता उठाती है। Solicitor General ने भी माना कि और अधिक Regulations की आवश्यकता है।” याचिकाकर्ता कौन हैं? इस याचिका के मुख्य याचिकाकर्ता वरिष्ठ पत्रकार और पूर्व सूचना आयुक्त Uday Mahurkar हैं। उनके साथ Sanjeew Newar, Sudeshna Bhattacharjya Mukherjee, Shatabdi Pande और Svati Goyal अन्य याचिकाकर्ता हैं। DeshHarpal पर पढ़ें देश-दुनिया से जुड़ी हर बड़ी खबर।
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WhatsApp, Facebook और Instagram के नए Plus फीचर्स आएंगे, यूजर्स को देना पड़ सकता है पैसा

WhatsApp, Facebook और Instagram के नए Plus फीचर्स आएंगे, यूजर्स को देना पड़ सकता है पैसा

दुनियाभर में करोड़ों लोग रोजाना WhatsApp, Facebook और Instagram का इस्तेमाल करते हैं। अब इन प्लेटफॉर्म्स को चलाने वाली कंपनी Meta अपने यूजर्स के लिए एक नया “Plus” या प्रीमियम वर्जन लाने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि इसके लिए यूजर्स को हर महीने कुछ पैसे चुकाने पड़ सकते हैं, लेकिन बदले में कई नए और खास फीचर्स मिलने वाले हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Meta अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को और ज्यादा पर्सनल और एडवांस बनाने पर काम कर रही है। नए Plus वर्जन में यूजर्स को ऐसी सुविधाएं मिल सकती हैं, जो अभी फ्री वर्जन में उपलब्ध नहीं हैं। 24 घंटे बाद भी नहीं हटेगी स्टोरी Instagram और Facebook पर अभी स्टोरी सिर्फ 24 घंटे तक दिखाई देती है, लेकिन Plus वर्जन में यूजर्स अपनी स्टोरी को ज्यादा समय तक एक्टिव रख सकेंगे। इससे लोग अपनी खास यादों और जरूरी अपडेट्स को लंबे समय तक शेयर कर पाएंगे। पसंदीदा लोगों की अलग-अलग लिस्ट बना सकेंगे नए फीचर के तहत यूजर्स अपने करीबी दोस्तों, परिवार और ऑफिस के लोगों की अलग-अलग लिस्ट बना पाएंगे। इससे हर पोस्ट और स्टोरी को अपनी पसंद के लोगों तक ही शेयर करना आसान हो जाएगा। यह फीचर प्राइवेसी और पर्सनल कंट्रोल को बेहतर बनाएगा। आम यूजर्स पर क्या असर पड़ेगा? अगर Meta अपने Plus वर्जन को लॉन्च करता है, तो इससे यूजर्स को फ्री और पेड दोनों विकल्प मिल सकते हैं। जो लोग ज्यादा फीचर्स और बेहतर अनुभव चाहते हैं, वे प्रीमियम प्लान चुन सकते हैं। वहीं सामान्य यूजर्स पहले की तरह फ्री वर्जन इस्तेमाल कर पाएंगे। हालांकि, Meta की तरफ से अभी तक इन फीचर्स और कीमतों को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन सोशल मीडिया यूजर्स के बीच इसे लेकर काफी उत्सुकता बनी हुई है। अधिक जानकारी और ताजा खबरों के लिए पढ़ते रहें Deshharpal News Portal। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Twisha

Twisha Case Investigation: CBI ने तेज की जांच, गिरफ्तारी को लेकर बढ़ा Suspense

Twisha केस की जांच अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जहां हर नई जानकारी लोगों की बेचैनी बढ़ा रही है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मामले में अपनी कार्रवाई और तेज कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्य संदिग्ध मानी जा रही गिरिबाला से लगातार पूछताछ की जा रही है और एजेंसी अब हर छोटे-बड़े सबूत को जोड़कर केस की पूरी सच्चाई सामने लाने की कोशिश में जुटी है। जांच से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस केस में बड़ा कदम उठाया जा सकता है। इसी वजह से गिरिबाला की गिरफ्तारी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि CBI की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। 3D Camera Technology से रिकॉर्ड हो रहा पूरा घर इस हाई-प्रोफाइल मामले में CBI आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। जांच टीम ने घटनास्थल और घर के अंदर के हिस्सों को 3D कैमरे की मदद से रिकॉर्ड करना शुरू कर दिया है। इससे पूरे घर का डिजिटल मॉडल तैयार किया जाएगा, ताकि घटना के समय की परिस्थितियों को बेहतर तरीके से समझा जा सके। सूत्रों के अनुसार, टीम घर के हर कमरे, एंट्री और एग्जिट पॉइंट, फर्नीचर की स्थिति और अन्य संदिग्ध जगहों की बारीकी से जांच कर रही है। माना जा रहा है कि इस डिजिटल रिकॉर्डिंग से जांच एजेंसी को कई अहम सुराग मिल सकते हैं। पूछताछ में सामने आ रहे नए पहलू CBI अधिकारियों ने गिरिबाला से कई दौर की पूछताछ की है। जांच एजेंसी मोबाइल डेटा, कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल सबूत और घटनास्थल से मिले संकेतों को एक-दूसरे से जोड़कर पूरे घटनाक्रम को समझने की कोशिश कर रही है। सूत्रों का दावा है कि पूछताछ के दौरान कुछ ऐसे जवाब मिले हैं, जिन्होंने जांच को नई दिशा दी है। यही वजह है कि एजेंसी अब मामले से जुड़े हर व्यक्ति पर नजर बनाए हुए है। इलाके में बढ़ी हलचल ट्विशा केस को लेकर स्थानीय लोगों में भी काफी चर्चा है। इलाके में लगातार CBI की मौजूदगी और जांच टीम की गतिविधियों ने लोगों की उत्सुकता बढ़ा दी है। परिवार के करीबी लोगों का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि जांच के बाद जल्द सच्चाई सामने आएगी। फिलहाल CBI हर एंगल से केस की जांच कर रही है। फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स और तकनीकी टीम की मदद से जुटाए जा रहे सबूत आने वाले दिनों में इस मामले में बड़ा खुलासा कर सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
बकरीद

बकरीद Special: Delhi से UP तक Security Tight, Bengal और Uttarakhand में हलचल

बकरीद 2026 के मौके पर पूरे देश में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और उत्तराखंड में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। त्योहार के बीच जहां एक ओर शांति और सौहार्द बनाए रखने की कोशिश हो रही है, वहीं दूसरी ओर अलग-अलग राज्यों से कुछ चर्चित मुद्दे भी सामने आए हैं। Delhi-UP में मस्जिदों और भीड़भाड़ वाले इलाकों पर Drone से निगरानी दिल्ली और उत्तर प्रदेश में बकरीद के अवसर पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है।प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में ड्रोन कैमरों की मदद से लगातार निगरानी शुरू की है। अधिकारियों के अनुसार, किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी की गई है ताकि त्योहार शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके। West Bengal में Security Tight, Flag March से बढ़ा Confidence पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में सुरक्षा बलों ने फ्लैग मार्च निकाला। इसका मकसद लोगों में भरोसा बढ़ाना और किसी भी तरह की अफवाह या तनाव को रोकना है। संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस की अतिरिक्त तैनाती की गई है और लगातार पेट्रोलिंग जारी है। Uttarakhand में Cow को National Animal बनाने की मांग पर चर्चा उत्तराखंड में बकरीद के दौरान एक अलग ही मुद्दा चर्चा में रहा। कुछ लोगों ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग उठाई है। इस मांग के बाद स्थानीय स्तर पर बहस शुरू हो गई है और अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। प्रशासन फिलहाल स्थिति पर नजर बनाए हुए है। Administration Alert: Peaceful Celebration की अपील देशभर के प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बकरीद को शांति, भाईचारे और आपसी सम्मान के साथ मनाया जाए। Administration Alert: Peaceful Celebration की अपील देशभर के प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बकरीद को शांति, भाईचारे और आपसी सम्मान के साथ मनाया जाए।

गुना में पारिवारिक विवाद से परेशान विवाहिता मोबाइल टावर पर चढ़ी, 3 घंटे बाद प्रशासन ने सुरक्षित उतारा

मध्य प्रदेश के गुना जिले में गुरुवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब एक विवाहिता पारिवारिक विवाद से परेशान होकर गांव के मोबाइल टावर पर चढ़ गई। करीब तीन घंटे तक चले हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद पुलिस और प्रशासन की टीम ने समझाइश देकर महिला को सुरक्षित नीचे उतार लिया। मामला गुना जिले की कुंभराज तहसील के ग्राम खेजरा रामा का है। जानकारी के अनुसार, 23 वर्षीय निकिता की शादी करीब तीन साल पहले कुलदीप मीना से हुई थी। बताया जा रहा है कि ससुराल में लंबे समय से पारिवारिक विवाद चल रहा था। इसी बात से नाराज होकर गुरुवार सुबह करीब 5 बजे निकिता गांव में लगे मोबाइल टावर पर चढ़ गई। ग्रामीणों ने दी पुलिस को सूचना सुबह ग्रामीणों की नजर महिला पर पड़ी तो गांव में अफरा-तफरी मच गई। लोगों ने तुरंत पुलिस और प्रशासन को सूचना दी। खबर मिलते ही कुंभराज तहसीलदार कमल मंडेलिया, थाना प्रभारी पंकज त्यागी और पटवारी प्रवीण सिंह राणा टीम के साथ मौके पर पहुंचे। स्थिति को देखते हुए नगर परिषद और स्वास्थ्य विभाग की टीम को भी मौके पर बुलाया गया। समझाइश से शांत हुआ मामला महिला काफी नाराज थी और नीचे आने को तैयार नहीं हो रही थी। ऐसे में प्रशासन ने बल प्रयोग करने के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाया। अधिकारियों ने लाउडस्पीकर के जरिए महिला से लगातार संवाद किया और भरोसा दिलाया कि उसकी हर समस्या सुनी जाएगी। अधिकारियों ने महिला से कहा कि उसकी शिकायतों पर प्रशासन और कानून के दायरे में रहकर उचित कार्रवाई की जाएगी। लगातार समझाइश और भरोसे के बाद महिला का गुस्सा शांत हुआ और वह धीरे-धीरे टावर से नीचे उतर आई। सुरक्षित नीचे उतरने पर लोगों ने ली राहत की सांस महिला के सुरक्षित नीचे आने के बाद मौके पर मौजूद ग्रामीणों और अधिकारियों ने राहत की सांस ली। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने तुरंत महिला का प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण किया। घटना के बाद गांव में काफी देर तक लोगों की भीड़ जुटी रही। www.deshharpal.com पर पढ़ें देश-दुनिया और प्रदेश की ताजा खबरें।

ईद पर इंदौर से दिखी गंगा-जमुनी तहजीब, शहर काजी ने गाय को राष्ट्रीय धरोहर बनाने की उठाई मांग

ईद के मौके पर देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर से गंगा-जमुनी तहजीब और सांप्रदायिक सौहार्द की खूबसूरत तस्वीर सामने आई। सदर बाजार स्थित ईदगाह में नमाज से पहले शहर काजी डॉ. इशरत अली ने भाईचारे, पर्यावरण संरक्षण और नशे से दूर रहने का संदेश दिया। उन्होंने खुले मंच से गाय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग की, जिसका वहां मौजूद हजारों नमाजियों ने हाथ उठाकर समर्थन किया। इसके बाद शांतिपूर्ण माहौल में ईद की नमाज अदा की गई। गाय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग शहर काजी डॉ. इशरत अली ने कहा कि गाय को दूसरी कौम के लोग बेहद सम्मान की नजर से देखते हैं। मुसलमानों पर अक्सर गोवंश को लेकर आरोप लगाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि गाय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाए, ताकि उसके वध पर पूरी तरह रोक लग सके। पानी बचाने और पर्यावरण बचाने की अपील अपने संबोधन में शहर काजी ने लोगों से पानी बचाने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि बारिश के पानी को जमीन में उतारना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। सिर्फ सरकार या प्रशासन के भरोसे नहीं रहना चाहिए। उन्होंने लोगों से ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने की भी अपील की। नशे के कारोबार पर जताई चिंता शहर काजी ने नशे के बढ़ते कारोबार पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि समाज के कुछ लोग खुद नशा बेच रहे हैं, जिससे युवा पीढ़ी बर्बाद हो रही है। उन्होंने कहा कि इंदौर में नशे का मुद्दा वे लगातार उठाते रहे हैं। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी इस विषय को गंभीरता से उठा चुके हैं। इंदौर की ईद एक और वजह से खास रही। यहां पिछले 50 वर्षों से एक हिंदू परिवार शहर काजी को उनके घर से ईदगाह तक लाने और वापस छोड़ने की परंपरा निभा रहा है। 50 साल पुरानी परंपरा बनी मिसाल इस बार भी सत्यनारायण सलवाडिया और उनके परिवार ने शहर काजी का फूल-मालाओं से स्वागत किया और उन्हें ससम्मान विशेष रूप से सजाई गई बग्घी में ईदगाह तक पहुंचाया। इस परंपरा को लोगों ने गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल बताया। खंडवा में भी उठी गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग बकरीद के मौके पर खंडवा के मुख्य ईदगाह समेत करीब 40 मस्जिदों में मुल्क की खुशहाली के लिए दुआ की गई। शहर काजी सैयद निसार अली ने केंद्र सरकार से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि खंडवा के मुस्लिम समाज ने वर्षों से हिंदू समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए गोवंश की कुर्बानी नहीं दी है। साथ ही उन्होंने गोवंश के नाम पर होने वाली मॉब लिंचिंग और अवैध कारोबार पर सख्त कार्रवाई की मांग भी की। धीरेंद्र शास्त्री ने भी किया समर्थन बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भी गाय को राष्ट्र माता घोषित करने की मांग को लेकर 27 जुलाई से राष्ट्रव्यापी अभियान चलाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि देशभर में हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा और जिलों में ज्ञापन सौंपे जाएंगे। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि अब देश में इस मुद्दे को लेकर माहौल बदल रहा है और सभी समाजों से समर्थन मिल रहा है www.deshharpal.com पर पढ़ें देश-दुनिया और प्रदेश की ताजा खबरें।

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