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Yogi

CM Yogi Adityanath का सपा पर तीखा हमला Codeine Syrup मामला बना विधानसभा हंगामा

उत्तर प्रदेश विधानसभा (UP Assembly) के शीतकालीन सत्र में आज कोडीन युक्त कफ सिरप (Codeine Syrup) को लेकर जोरदार बहस हुई। विपक्षी समाजवादी पार्टी (SP) के विधायक इस मुद्दे पर सरकार की आलोचना कर रहे थे, वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने सपा पर तीखा हमला बोला और कई गंभीर आरोप लगाए। सीएम योगी का जवाब और आरोप CM Yogi ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कोडीन सिरप से कोई मौत नहीं हुई है, और जो मामले सामने आए हैं, वे अन्य राज्यों जैसे तमिलनाडु के हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि एसटीएफ लगातार सभी मामलों की जांच कर रही है। Yogi ने सपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन होलसेलरों के लाइसेंस जारी किए गए थे, वे सपा शासन के समय के हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सपा के नेताओं का माफिया के साथ पुराना संबंध रहा है और विपक्ष झूठ फैला कर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। CM Yogi ने अपने भाषण में सपा नेताओं की विदेश यात्राओं और “दो नमूने” जैसे तंज़ भरे उदाहरण भी दिए, जिससे सदन में माहौल और तनावपूर्ण हो गया। विपक्ष की प्रतिक्रिया सपा विधायकों ने सीएम योगी के आरोपों को निराधार बताया। उनका कहना था कि सरकार इस मुद्दे पर राजनीतिक शो करना चाह रही है। आरोपों के बाद सपा विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। सरकार की प्रतिक्रिया Yogi सरकार ने साफ किया कि ड्रग्स तस्करी के खिलाफ कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सभी आरोपों की पूरी जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। सियासी और सामाजिक परिप्रेक्ष्य कोडीन सिरप विवाद ने उत्तर प्रदेश विधानसभा में भारी राजनीतिक टकराव को जन्म दिया है। भाजपा और सपा के बीच यह मामला सत्ता संघर्ष और राजनीतिक रंजिश का नया अध्याय बन गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के विवाद जनता में सवाल पैदा करते हैं, लेकिन यह लोकतंत्र की प्रक्रिया का हिस्सा भी है। Codeine Syrup मामले ने UP Assembly में सरकार और विपक्ष के बीच सियासी जंग को और तेज कर दिया है। इस दौरान जनता की निगाहें न सिर्फ कानूनी कार्रवाई पर हैं, बल्कि इस बहस से जुड़े राजनीतिक संदेशों पर भी टिकी हुई हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Humayun Kabir

Humayun Kabir की नई पार्टी 2025 ममता Banerjee के खिलाफ बड़ा चुनावी कदम

पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया मोड़ देखने को मिल रहा है। मुरशिदाबाद के सस्पेंडेड टीएमसी विधायक हुमायूँ कबीर (Humayun Kabir) ने 22 दिसंबर 2025 को अपनी नई पार्टी का औपचारिक शुभारंभ किया। इस कदम को ममता बनर्जी और टीएमसी को सीधे चुनौती देने के रूप में देखा जा रहा है। नई पार्टी का नाम और Election Symbol Humayun Kabir ने पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह के बारे में कुछ संकेत दिए हैं, लेकिन आधिकारिक घोषणा आज की जाएगी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पार्टी का प्रतीक फूलों या प्राकृतिक प्रतीकों से प्रेरित हो सकता है। राजनीतिक उद्देश्य और रणनीति कबीर ने कहा कि ममता बनर्जी की सरकार मुस्लिम समुदाय और आम लोगों की जरूरतों को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी राज्य की लगभग 135 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, और टीएमसी के खिलाफ उम्मीदवार उतारेगी। इसके अलावा, हुमायूँ कबीर ने एंटी-टीएमसी और एंटी-बीजेपी दलों के बीच एकजुटता की अपील की है। उनका मानना है कि उनकी पार्टी पश्चिम बंगाल में तीसरे विकल्प के रूप में उभर सकती है। पृष्ठभूमि और विवाद हुमायूँ कबीर को टीएमसी से उनके मुरशिदाबाद में विवादित मस्जिद प्रोजेक्ट और पार्टी नेतृत्व की आलोचना के कारण निलंबित किया गया था। उन्होंने टीएमसी पर आरएसएस से जुड़े होने के आरोप भी लगाए थे। इस कदम ने 2026 विधानसभा चुनाव से पहले बंगाल की राजनीति में धार्मिक और पहचान आधारित मुद्दों को नए रूप में पेश किया है। पश्चिम बंगाल की राजनीति पर प्रभाव विशेषज्ञों का मानना है कि हुमायूँ कबीर की नई पार्टी: कुल मिलाकर, हुमायूँ कबीर की नई पार्टी पश्चिम बंगाल में चुनावी राजनीति को एक नया रंग दे सकती है, और आने वाले सालों में राज्य की राजनीतिक दिशा को प्रभावित कर सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Air India

Air India Emergency Landing दिल्ली एयरपोर्ट पर उड़ान के तुरंत बाद इंजन खराब

दिल्ली एयरपोर्ट पर उस समय हड़कंप मच गया, जब एयर इंडिया (Air India) की एक फ्लाइट को उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद तकनीकी खराबी के कारण आपात स्थिति में वापस लौटना पड़ा। हालांकि राहत की बात यह रही कि पायलटों की सतर्कता और सुरक्षा नियमों के पालन के चलते विमान की सुरक्षित लैंडिंग कराई गई और सभी यात्री पूरी तरह सुरक्षित हैं। उड़ान के तुरंत बाद आई परेशानी जानकारी के अनुसार, Air India की यह फ्लाइट दिल्ली से मुंबई के लिए रवाना हुई थी। टेकऑफ के कुछ मिनट बाद ही विमान के एक इंजन में तकनीकी समस्या सामने आई। कॉकपिट में चेतावनी संकेत मिलते ही पायलटों ने स्थिति को गंभीरता से लिया और बिना जोखिम उठाए वापस दिल्ली लौटने का फैसला किया। पायलटों की सूझ-बूझ से टली बड़ी अनहोनी पायलटों ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल को तुरंत सूचित किया और Mayday कॉल जारी की। इसके बाद एयरपोर्ट प्रशासन पूरी तरह अलर्ट हो गया। फायर ब्रिगेड और मेडिकल टीमें पहले से रनवे पर तैनात कर दी गईं। विमान ने कुछ ही देर में दिल्ली एयरपोर्ट पर सुरक्षित आपात लैंडिंग की। 300 से ज्यादा यात्री थे सवार Air India की इस फ्लाइट में 300 से अधिक यात्री और क्रू मेंबर मौजूद थे। लैंडिंग के बाद सभी यात्रियों को सुरक्षित विमान से उतारा गया। किसी के घायल होने या किसी तरह के नुकसान की कोई खबर नहीं है। यात्रियों ने भी राहत की सांस ली और पायलटों की तारीफ की। एयर इंडिया का बयान Air India की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यह फैसला पूरी तरह एहतियात के तौर पर लिया गया था। तकनीकी जांच के लिए विमान को ग्राउंड कर दिया गया है और इंजीनियरों की टीम इंजन की विस्तृत जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही विमान को दोबारा उड़ान की अनुमति दी जाएगी। विशेषज्ञ क्या कहते हैं? एविएशन विशेषज्ञों के मुताबिक, ट्विन-इंजन विमान एक इंजन पर भी सुरक्षित उड़ान भर सकते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय विमानन नियमों के अनुसार किसी भी तकनीकी चेतावनी को नजरअंदाज नहीं किया जाता। ऐसी स्थिति में नजदीकी उपयुक्त एयरपोर्ट पर लैंडिंग कराना ही सबसे सुरक्षित विकल्प होता है। पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले हाल के महीनों में Air India समेत अन्य एयरलाइंस की कुछ फ्लाइट्स में भी तकनीकी अलर्ट के बाद बीच रास्ते से वापसी के मामले सामने आए हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह घटनाएं यह दिखाती हैं कि एयरलाइंस अब सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं कर रही हैं। यात्रियों के लिए संदेश Air India और विमानन अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें। यह कोई दुर्घटना नहीं थी, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया एक ज़िम्मेदार और सही कदम था। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi

Delhi Air Pollution Crisis दिल्ली-एनसीआर में सांस लेना हुआ मुश्किल, AQI Severe Zone में

दिल्ली और एनसीआर में रहने वाले लोगों के लिए एक बार फिर सांस लेना मुश्किल होता जा रहा है। Delhi Air Pollution ने दोबारा गंभीर रूप ले लिया है और राजधानी की हवा लगातार Very Poor से Severe AQI के बीच बनी हुई है। सुबह की धुंध अब सिर्फ कोहरा नहीं रही, बल्कि यह प्रदूषण की मोटी चादर बन चुकी है, जो हर सांस के साथ शरीर में ज़हर घोल रही है। नरेला बना सबसे प्रदूषित इलाका ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली के नरेला इलाके में AQI 418 तक पहुँच गया, जो सीधे Severe Category में आता है। इसके अलावा बवाना, वज़ीरपुर और आनंद विहार जैसे इलाकों में भी हालात बेहद खराब हैं। इन क्षेत्रों में रहने वाले लोग आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। क्यों बिगड़ रही है Delhi NCR Air Quality? विशेषज्ञों का कहना है कि कम हवा की रफ्तार, ठंड बढ़ना और घना कोहरा प्रदूषण को फैलने नहीं दे रहे हैं। वाहनों का धुआं, निर्माण कार्यों की धूल और औद्योगिक उत्सर्जन हवा में ही फँस जाते हैं। नतीजा यह है कि पूरा शहर स्मॉग की गिरफ्त में चला जाता है। NCR Cities भी बेहाल दिल्ली के साथ-साथ नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में भी हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ बनी हुई है। हरियाणा का पंचकुला भी देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल हो गया है। पूरे एनसीआर में सुबह-शाम निकलना लोगों के लिए मजबूरी बन गया है, लेकिन साफ हवा मिलना मुश्किल। सेहत पर गहरा असर डॉक्टरों का कहना है कि इस स्तर का प्रदूषण बच्चों, बुजुर्गों और सांस या दिल के मरीजों के लिए बेहद खतरनाक है। लंबे समय तक ऐसी हवा में रहने से फेफड़ों की क्षमता घट सकती है। आम लोग भी थकान, सिरदर्द और सांस फूलने जैसी समस्याएं महसूस कर रहे हैं। प्रशासन की सलाह और ज़मीनी हकीकत सरकार की ओर से GRAP (Graded Response Action Plan) लागू किया गया है और लोगों को बिना ज़रूरत बाहर न निकलने की सलाह दी गई है। मास्क पहनने और भारी कसरत से बचने को कहा गया है। हालांकि ज़मीनी स्तर पर लोग उम्मीद कर रहे हैं कि हालात जल्द सुधरें। राहत की उम्मीद कब? मौसम विभाग के अनुसार, अगर आने वाले दिनों में तेज़ हवाएं या हल्की बारिश होती है, तो प्रदूषण से कुछ राहत मिल सकती है। फिलहाल, दिल्ली-एनसीआर के लोगों को सावधानी बरतने और अपनी सेहत को प्राथमिकता देने की ज़रूरत है। दिल्ली की हवा सिर्फ आंकड़ा नहीं, हर सांस से जुड़ा सवाल बन चुकी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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T20 World Cup 2026 के लिए भारतीय टीम का ऐलान : सूर्या कप्तानी करेंगे, ईशान किशन की वापसी

T20 World Cup 2026 के लिए भारतीय टीम का ऐलान : सूर्या कप्तानी करेंगे, ईशान किशन की वापसी

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने आगामी T20 World Cup 2026 के लिए भारतीय टीम का ऐलान कर दिया है। इस बार टीम की कमान सूर्यकुमार यादव के हाथों में सौंपी गई है। उनकी आक्रामक बल्लेबाज़ी और मैदान पर शांत नेतृत्व को देखते हुए चयनकर्ताओं ने उन पर भरोसा जताया है। टीम चयन में सबसे चौंकाने वाला फैसला शुभमन गिल को बाहर रखना रहा। हाल के समय में अच्छे फॉर्म में रहने के बावजूद गिल को इस टूर्नामेंट के लिए जगह नहीं मिल पाई है, जिससे उनके फैंस थोड़ा निराश नज़र आए। वहीं, लंबे समय बाद ईशान किशन की टीम में वापसी हुई है। विकेटकीपर-बल्लेबाज़ ईशान ने घरेलू क्रिकेट और IPL में अपने प्रदर्शन से फिर से चयनकर्ताओं का भरोसा जीता है। उनकी वापसी से टीम की बल्लेबाज़ी को मजबूती मिलने की उम्मीद है। टीम में अनुभव और युवा खिलाड़ियों का अच्छा संतुलन देखने को मिल रहा है। चयन समिति का मानना है कि यह संयोजन टी-20 जैसे छोटे फॉर्मेट में भारत को खिताब का मजबूत दावेदार बना सकता है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में भारतीय टीम टी-20 वर्ल्ड कप में कैसा प्रदर्शन करती है और क्या टीम एक बार फिर देश को विश्व विजेता बनने का मौका दिला पाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi Airport पर यात्री से मारपीट, पायलट सस्पेंड

Delhi Airport पर यात्री से मारपीट, पायलट सस्पेंड

Delhi Airport (इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे) पर एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां एक यात्री के साथ कथित रूप से मारपीट की गई, जिसमें एक पायलट का नाम सामने आया है। मामले के तूल पकड़ने के बाद संबंधित पायलट को सस्पेंड कर दिया गया है। पीड़ित यात्री का कहना है कि विवाद के दौरान उसके साथ हाथापाई हुई, जिससे उसके चेहरे पर गंभीर चोटें आईं और खून बहने लगा। यात्री का आरोप है कि घटना के बाद उससे जबरन मामला खत्म करने का दबाव बनाया गया। यात्री ने बताया कि जब उसकी नाबालिग बेटी ने अपने पिता को खून से सना हुआ देखा, तो वह गहरे सदमे में चली गई। परिवार के लिए यह अनुभव बेहद डरावना और मानसिक रूप से परेशान करने वाला रहा। इस घटना के सामने आने के बाद एयरलाइन प्रबंधन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच के आधार पर संबंधित पायलट को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। साथ ही, यात्रियों की सुरक्षा को लेकर एयरपोर्ट अथॉरिटी भी सतर्क हो गई है। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Mumbai

Mumbai Politics में बड़ा Twist BMC चुनाव से पहले Uddhav और Raj Thackeray एक साथ

मुंबई (Mumbai) की सियासत एक बार फिर करवट लेने को तैयार है। BMC Election 2025 से पहले जो संकेत मिल रहे हैं, वे बताते हैं कि ठाकरे परिवार की पुरानी दरार अब इतिहास बन सकती है। उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे—जो सालों से अलग-अलग राजनीतिक रास्तों पर थे—अब एक साझा मंज़िल की ओर बढ़ते दिख रहे हैं: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC)। अगर यह गठबंधन जमीन पर उतरता है, तो इसका असर सिर्फ चुनावी गणित तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि Mumbai Politics की पूरी दिशा बदल सकता है। क्यों खास है उद्धव–राज ठाकरे की नजदीकी? राज ठाकरे के शिवसेना से अलग होकर MNS बनाने के बाद दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक दूरी बनी रही। लेकिन समय बदला है। इन सबके बीच अब ठाकरे बंधुओं को लग रहा है कि मुंबई की सत्ता की चाबी साथ आए बिना हासिल करना मुश्किल है। MaMu Formula: चुनावी रणनीति की रीढ़ इस संभावित गठबंधन की सबसे अहम रणनीति है ‘MaMu Formula’—यानी Marathi + Muslim वोट बैंक। Mumbai के कई वार्ड ऐसे हैं जहाँ: उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) को जहां अल्पसंख्यक वोटों में भरोसा हासिल है, वहीं राज ठाकरे की MNS शहरी मराठी वोटर पर मजबूत पकड़ रखती है। दोनों का मेल सीधे BJP और महायुति के समीकरण को चुनौती दे सकता है। BMC Seat Sharing: फॉर्मूला तय, लेकिन पेंच बाकी सूत्रों के मुताबिक, BMC की 227 सीटों को लेकर एक मोटा खाका तैयार है: हालांकि माहिम, शिवड़ी और विक्रोली जैसे कुछ वार्डों पर दोनों दलों की दावेदारी ने बातचीत को थोड़ा मुश्किल जरूर बनाया है। लेकिन अंदरखाने यह संदेश साफ है कि सीट विवाद गठबंधन से बड़ा नहीं बनने दिया जाएगा। Joint Rally से मिलेगा बड़ा सियासी संदेश खबर है कि चुनाव से पहले मुंबई में 2 से 3 संयुक्त रैलियां हो सकती हैं। अगर उद्धव और राज ठाकरे एक ही मंच पर साथ दिखे, तो यह सिर्फ एक चुनावी कार्यक्रम नहीं होगा—यह मराठी अस्मिता और भावनाओं से जुड़ा एक बड़ा राजनीतिक संकेत होगा। दूसरी तरफ BJP–Shinde Alliance की तैयारी इधर BJP, एकनाथ शिंदे गुट और अजित पवार की NCP भी पीछे नहीं है। यानी मुकाबला सीधा और कांटे का है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi

10,000 Classrooms में Air Purifiers लगाकर Delhi सरकार ने बढ़ाया बच्चों का सुरक्षा कदम

दिल्ली (Delhi)सरकार ने राजधानी के सरकारी स्कूलों में 10,000 कक्षाओं में एयर प्यूरीफायर (Air Purifiers) लगाने की महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की है। यह कदम बच्चों के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने और बढ़ते air pollution से बचाने के लिए उठाया गया है। शिक्षा मंत्री आशिष सूद ने बताया कि एयर प्यूरीफायर लगाने की प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी और टेंडर (Tender) जारी करने के बाद चरणबद्ध तरीके से इसे लागू किया जाएगा। मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ एक अस्थायी समाधान नहीं है, बल्कि दीर्घकालीन pollution control strategy का हिस्सा है। हवा की गुणवत्ता और बच्चों पर असर दिल्ली (Delhi) में हाल के समय में Air Quality Index (AQI) लगातार खराब रहा है। बच्चे वयस्कों की तुलना में प्रदूषण के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं, जिससे उन्हें respiratory problems और स्वास्थ्य संबंधी खतरे ज्यादा होते हैं। इसलिए, कक्षाओं में एयर प्यूरीफायर लगाना बच्चों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के लिए जरूरी माना जा रहा है। सरकार की व्यापक योजना दिल्ली सरकार ने भलस्वा कचरा स्थल (Bhalswa landfill) को सितंबर 2026 तक साफ करने का भी लक्ष्य रखा है। यह शहर के सबसे बड़े प्रदूषण स्रोतों में से एक है। शिक्षा और पर्यावरण मंत्रालय की संयुक्त पहल से उम्मीद है कि यह उपाय Delhi की हवा की गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद करेगा। विशेषज्ञों की राय विशेषज्ञों का कहना है कि एयर प्यूरीफायर से PM2.5 और अन्य हानिकारक कणों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इससे बच्चों की health और immunity बेहतर बनी रहेगी और कक्षा का वातावरण स्वस्थ होगा। यह पहल Delhi सरकार की उन कोशिशों का हिस्सा है, जो बच्चों की well-being और safety को प्राथमिकता देती हैं। जैसे-जैसे यह योजना लागू होगी, राजधानी के सरकारी स्कूलों में स्वस्थ और प्रदूषण मुक्त वातावरण सुनिश्चित होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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PM Modi

Oman, Ethiopia और Brazil तक PM Modi को मिले 29 Global Honours

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने 11 साल के कार्यकाल में दुनिया के 29 देशों से सर्वोच्च अंतरराष्ट्रीय सम्मान (International Honours) प्राप्त कर अपनी वैश्विक प्रतिष्ठा को और मजबूत किया है। हाल ही में उन्हें ओमान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘Order of Oman’ दिया गया। यह सम्मान ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक ने भारत-ओमान के 70 साल के कूटनीतिक संबंधों के अवसर पर प्रदान किया। इन 29 अंतरराष्ट्रीय सम्मानों में एशिया, यूरोप, अफ्रीका, मध्य पूर्व और अमेरिका के देशों ने मोदी जी के द्विपक्षीय संबंध मजबूत करने, वैश्विक नेतृत्व और कूटनीति में योगदान को मान्यता दी। PM Modi के प्रमुख International Awards Country Honour Year Oman Order of Oman (First Class) 2025 Ethiopia Great Honour Nishan of Ethiopia 2025 Namibia Order of the Most Ancient Welwitschia Mirabilis 2025 Brazil Grand Collar of the National Order of the Southern Cross 2025 Trinidad & Tobago Order of the Republic of Trinidad and Tobago 2025 Ghana Officer of the Order of the Star of Ghana 2025 Cyprus Grand Cross of the Order of Makarios III 2025 Sri Lanka Mitra Vibhushana 2025 Mauritius Grand Commander of the Order of the Star and Key of the Indian Ocean 2025 Kuwait Order of Mubarak Al-Kabeer 2024 Russia Order of St. Andrew the Apostle 2019 France Grand Cross of the Legion of Honour 2023 Egypt Order of the Nile 2023 UAE Order of Zayed 2019 Palestine Grand Collar of the State of Palestine 2018 Afghanistan State Order of Ghazi Amir Amanullah Khan 2016 Saudi Arabia Order of King Abdulaziz 2016 United Nations UN Champion of the Earth Award 2018 Global Recognition और कूटनीतिक महत्व ये पुरस्कार पीएम मोदी की अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और भारत की वैश्विक छवि को दर्शाते हैं। ज्यादातर सम्मान राजकीय दौरे और द्विपक्षीय वार्ता के दौरान प्रदान किए गए। हालिया यात्राओं में ओमान, इथियोपिया, ब्राजील और नामीबिया शामिल हैं। इन 29 अंतरराष्ट्रीय सम्मान से यह साबित होता है कि भारत विश्व स्तर पर सम्मानित और प्रभावशाली भूमिका निभा रहा है। यह न केवल पीएम मोदी के व्यक्तिगत नेतृत्व की पहचान है, बल्कि भारत की साझेदारी, मित्रता और रणनीतिक सहयोग की वैश्विक मान्यता भी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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‘Ji Ram Ji’ बिल का विरोध: संसद में TMC का रातभर धरना

‘Ji Ram Ji’ बिल का विरोध: संसद में TMC का रातभर धरना

संसद में पेश किए गए ‘Ji Ram Ji’ बिल को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। इस बिल के विरोध में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों ने संसद परिसर में रातभर धरना दिया। विपक्ष का आरोप है कि यह कानून आम जनता और गरीबों के हित में नहीं है। धरने के दौरान विपक्षी नेताओं ने सरकार पर जमकर निशाना साधा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बेहद भावुक अंदाज में कहा,“मैं मां की कसम खाकर कहता हूं कि यह कानून गरीबों के लिए नहीं है। यह सिर्फ चुनिंदा लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए लाया गया है।” TMC और कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार बिना चर्चा के जल्दबाजी में बिल पास कराना चाहती है। उनका आरोप है कि इस कानून से आम लोगों की परेशानियां बढ़ेंगी और इसका सीधा असर गरीब और मध्यम वर्ग पर पड़ेगा। बिल के विरोध में TMC सांसदों ने संसद परिसर में रात बिताई और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। विपक्षी दलों की मांग है कि बिल को वापस लिया जाए या फिर इस पर विस्तृत चर्चा कराई जाए। विपक्ष ने सरकार पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने का आरोप लगाया। नेताओं का कहना है कि संसद में चर्चा के बजाय जबरन कानून थोपना सही नहीं है। फिलहाल ‘जी-राम-जी’ बिल पर टकराव बना हुआ है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद के अंदर और बाहर सियासत और तेज होने के आसार हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rahul Gandhi

Mallikarjun Kharge Shuddhikaran Row: मंच ‘शुद्ध’ कराने पर बवाल, Rahul Gandhi ने BJP-RSS को घेरा

 उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष Rahul Gandhi मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद कथित तौर पर मंच के ‘शुद्धिकरण’ को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इस मामले को लेकर Rahul Gandhi ने BJP और RSS पर जातिगत भेदभाव तथा ‘मनुवादी सोच’ को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। वहीं, BJP ने आरोपों से दूरी बनाते हुए मामले की जांच कराने की बात कही है। क्या है Haldwani Shuddhikaran विवाद? मल्लिकार्जुन खड़गे ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस की रैली को संबोधित किया था। रैली के कुछ दिन बाद कथित तौर पर कुछ लोगों ने मैदान में पूजा-पाठ और हवन कर ‘शुद्धिकरण’ किया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई खड़गे के दलित समुदाय से होने के कारण की गई। पार्टी ने इसे छुआछूत और जातिगत भेदभाव की मानसिकता का उदाहरण बताया है। हालांकि, BJP की ओर से कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया गया है। BJP नेताओं का कहना है कि रैली के दौरान लगाए गए कुछ नारों से धार्मिक भावनाएं आहत हुई थीं और इसी वजह से धार्मिक अनुष्ठान किया गया था। BJP ने इस कार्रवाई को खड़गे की जाति से जोड़ने पर भी सवाल उठाए हैं। Mallikarjun Kharge ने राज्यसभा में उठाया मुद्दा मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मामले को राज्यसभा में भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके भाषण के बाद उस मंच का ‘शुद्धिकरण’ किया गया, जिससे उन्हें बेहद अपमानित महसूस हुआ। खड़गे ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी व्यक्ति को उसकी जाति के आधार पर अपवित्र मानना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। उन्होंने इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ Untouchability Act के तहत कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग की। खड़गे का कहना है कि ऐसी घटनाएं केवल किसी एक व्यक्ति का अपमान नहीं हैं, बल्कि देश में सामाजिक समानता और संवैधानिक मूल्यों पर भी सवाल खड़े करती हैं। Rahul Gandhi का BJP-RSS पर हमला हल्द्वानी के इस विवाद पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कथित ‘शुद्धिकरण’ को दलितों के अपमान से जोड़ते हुए BJP और RSS पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इस तरह की सोच BJP-RSS की कथित ‘मनुवादी मानसिकता’ को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और छुआछूत तथा जातिगत भेदभाव के लिए आधुनिक भारत में कोई जगह नहीं होनी चाहिए। कांग्रेस ने इस मुद्दे को सामाजिक न्याय और दलित सम्मान से जोड़ते हुए सरकार से दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। क्या Rahul Gandhi ने SC/ST Act के तहत FIR की मांग की? इस मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार SC/ST Act के तहत FIR दर्ज कराने की स्पष्ट मांग राहुल गांधी की ओर से नहीं बताई गई है। रिपोर्टों में मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा Untouchability Act के तहत मामला दर्ज करने और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग का उल्लेख है। वहीं, राहुल गांधी ने घटना को दलितों के अपमान, जातिगत भेदभाव और कथित मनुवादी सोच से जोड़कर BJP-RSS पर राजनीतिक हमला किया। इसलिए खबर को पेश करते समय राहुल गांधी के बयान और खड़गे की कानूनी कार्रवाई की मांग को अलग-अलग रखना जरूरी है। BJP ने क्या कहा? BJP ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया है। पार्टी की ओर से कहा गया कि वह किसी भी तरह के भेदभावपूर्ण व्यवहार का समर्थन नहीं करती। केंद्रीय मंत्री और BJP के वरिष्ठ नेता जेपी नड्डा ने मामले की जांच का आश्वासन दिया। BJP नेताओं का कहना है कि घटना के पीछे धार्मिक कारण हो सकते हैं और इसे खड़गे की जाति से जोड़ना उचित नहीं है। अब इस मामले में जांच के परिणाम महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि इसी से यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित ‘शुद्धिकरण’ किसने कराया और इसके पीछे वास्तविक कारण क्या था। कांग्रेस ने राज्यपाल से भी की शिकायत मामले को लेकर कांग्रेस नेताओं ने उत्तराखंड के राज्यपाल से मुलाकात कर कथित ‘शुद्धिकरण’ की निष्पक्ष जांच की मांग भी की है। कांग्रेस का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की जाति के आधार पर किसी सार्वजनिक स्थान या मंच को ‘अपवित्र’ माना गया है, तो यह गंभीर सामाजिक और संवैधानिक मुद्दा है। Haldwani Row बना Political मुद्दा हल्द्वानी का ‘शुद्धिकरण’ विवाद अब स्थानीय घटना से आगे बढ़कर राष्ट्रीय राजनीति का मुद्दा बन गया है। कांग्रेस इसे Dalit dignity, social equality और constitutional values से जोड़ रही है, जबकि BJP कांग्रेस पर घटना को राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगा रही है। फिलहाल दोनों पक्षों के दावों के बीच इस मामले में जांच और संभावित कानूनी कार्रवाई पर सबकी नजर है। विवाद के आगे बढ़ने के साथ Rahul Gandhi, Mallikarjun Kharge, Haldwani Shuddhikaran Row, FIR और SC/ST Act जैसे मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में बने हुए हैं।
H-1B

H-1B Rules में बड़ा बदलाव: Trump हटाएंगे 60 Days Grace Period? Indian IT Professionals पर असर

अमेरिका में काम करने वाले भारतीय H-1B visa holders के लिए Donald Trump administration की immigration policies लगातार चिंता बढ़ा रही हैं। अब H-1B के तहत मिलने वाली 60 Days Grace Period को खत्म करने की तैयारी की खबरों ने भारतीय IT professionals के बीच नई चिंता पैदा कर दी है। अगर यह प्रस्ताव अंतिम रूप से लागू होता है, तो नौकरी जाने के बाद H-1B workers को अमेरिका में नई नौकरी तलाशने के लिए मिलने वाली मौजूदा 60 दिनों की राहत खत्म हो सकती है। इसके साथ ही H-1B visa से जुड़ी बढ़ी हुई लागत और दूसरे proposed immigration changes भी भारतीय professionals के लिए अमेरिका में नौकरी और long-term career planning को प्रभावित कर सकते हैं। क्या है H-1B 60 Days Grace Period? मौजूदा नियमों के तहत, अगर किसी H-1B worker की नौकरी समाप्त हो जाती है, तो कुछ परिस्थितियों में उसे अधिकतम 60 दिन या उसके authorized stay की समाप्ति तक, जो भी पहले हो, अमेरिका में रहने की अनुमति मिल सकती है। इस दौरान कर्मचारी: टेक्नोलॉजी सेक्टर में layoffs के दौरान यह grace period H-1B workers के लिए एक महत्वपूर्ण safety net बन गई है। Trump Administration क्यों बदलना चाहती है H-1B Rules? Trump administration लंबे समय से अमेरिकी workers को प्राथमिकता देने और foreign workers पर अमेरिकी कंपनियों की निर्भरता कम करने की नीति पर जोर देती रही है। प्रस्तावित बदलावों का व्यापक उद्देश्य H-1B program में ज्यादा सख्ती और oversight लाना है। हालांकि, 60-day grace period को खत्म करने का प्रस्ताव अभी अंतिम रूप से लागू नियम नहीं माना जा सकता। अंतिम regulatory process और effective date यह तय करेंगे कि बदलाव वास्तव में कब और किस रूप में लागू होगा। Indians पर सबसे बड़ा असर क्या होगा? H-1B program में भारतीय professionals की बड़ी हिस्सेदारी होने के कारण किसी भी बड़े बदलाव का असर भारतीयों पर विशेष रूप से पड़ सकता है। 1. Layoff के बाद बढ़ेगा Immigration Pressure अगर किसी भारतीय H-1B employee की नौकरी चली जाती है, तो मौजूदा 60 दिनों का buffer उपलब्ध नहीं होने पर उसे बहुत तेजी से नया employer या दूसरा वैध immigration option तलाशना पड़ सकता है। इससे layoffs का असर सिर्फ नौकरी खोने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अमेरिका में रहने की स्थिति भी तुरंत चिंता का विषय बन सकती है। 2. IT Professionals पर ज्यादा असर भारतीय H-1B workers की बड़ी संख्या technology और specialized professional roles में काम करती है। इसलिए software engineers, IT consultants, data professionals और दूसरे skilled workers के लिए नौकरी बदलने की समय-सीमा महत्वपूर्ण हो सकती है। नई व्यवस्था में companies के बीच job switch करने की प्रक्रिया को पहले से ज्यादा जल्दी पूरा करना जरूरी हो सकता है। 3. कम समय में Job Search का दबाव 60 दिन की grace period खत्म होने की स्थिति में कर्मचारी के पास नई नौकरी तलाशने के लिए कम flexibility होगी। ऐसे में कुछ workers को: H-1B Fee में भारी बढ़ोतरी से भी बढ़ी चिंता H-1B program में प्रस्तावित एक और बड़ा बदलाव इसकी लागत से जुड़ा है। Trump administration ने नए H-1B petitions से जुड़ी $103,265 की proposed fee को लेकर कदम उठाए हैं। यह समझना जरूरी है कि इसका अर्थ यह नहीं है कि हर H-1B employee को अपनी जेब से करीब $100,000 देना होगा। यह मुख्य रूप से employer-side cost से जुड़ा प्रस्ताव है। फिर भी इतनी बड़ी लागत कंपनियों के hiring decisions को प्रभावित कर सकती है। Indian IT Companies के लिए क्या बदल सकता है? H-1B rules में सख्ती और बढ़ी हुई लागत का असर भारतीय IT companies की US business strategy पर भी पड़ सकता है। कंपनियां संभावित रूप से: इसका मतलब यह हो सकता है कि आने वाले समय में भारतीय IT professionals के लिए US onsite opportunities की competition और बढ़ जाए। H-4 Visa पर रहने वाले परिवारों पर भी असर H-1B employee की immigration स्थिति का असर उसके परिवार पर भी पड़ सकता है। H-4 status पर अमेरिका में रहने वाले spouse और children के लिए भी primary H-1B holder की स्थिति महत्वपूर्ण होती है। अगर principal H-1B worker को नौकरी जाने के बाद जल्दी नया immigration solution नहीं मिलता, तो परिवार को भी relocation या दूसरे immigration options पर विचार करना पड़ सकता है। इसका असर बच्चों की schooling, spouse की employment और परिवार की financial planning पर भी पड़ सकता है। क्या हर H-1B worker को नौकरी जाते ही अमेरिका छोड़ना पड़ेगा? यह सबसे महत्वपूर्ण बात है। 60-day grace period खत्म करने का प्रस्ताव अगर लागू होता भी है, तो उसकी वास्तविक conditions अंतिम नियम में स्पष्ट होंगी। इसके अलावा H-1B worker की स्थिति उसके individual immigration circumstances, pending petitions, authorized stay और उपलब्ध दूसरे legal options पर निर्भर कर सकती है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि grace period हटते ही हर H-1B worker को नौकरी खत्म होने के अगले दिन अमेरिका छोड़ना पड़ेगा। क्या भारतीयों के लिए US में Jobs खत्म हो जाएंगी? ऐसा कहना भी सही नहीं होगा। अमेरिका की technology, healthcare, research, engineering और दूसरे specialized sectors में skilled professionals की मांग बनी हुई है। लेकिन नए नियमों से H-1B sponsorship की लागत और immigration uncertainty बढ़ सकती है। इसका सबसे बड़ा असर नए applicants और ऐसे professionals पर पड़ सकता है जिन्हें employer sponsorship की जरूरत है। H-1B Indians के लिए आगे क्या महत्वपूर्ण होगा? भारतीय H-1B professionals को आने वाले समय में immigration policy में होने वाले बदलावों पर नजर रखनी होगी। खासकर ये चार चीजें महत्वपूर्ण रहेंगी: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
PM Modi

PM Modi in Uzbekistan: SCO Summit से पहले पीएम मोदी का बड़ा बयान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) शनिवार को Uzbekistan और Kyrgyz Republic के चार दिवसीय दौरे के लिए रवाना हो गए। 29 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक चलने वाली इस यात्रा में पीएम मोदी पहले उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद जाएंगे। इसके बाद वह किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित होने वाले 26वें Shanghai Cooperation Organisation (SCO) Summit में हिस्सा लेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने दौरे से पहले कहा कि भारत SCO के सदस्य देशों के साथ मिलकर ऐसा क्षेत्र बनाने की दिशा में काम करेगा, जो आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से मुक्त हो। उन्होंने SCO के लिए भारत की प्राथमिकताओं को Security, Connectivity और Opportunity से जोड़ा है। PM Modi Uzbekistan Visit: द्विपक्षीय संबंधों पर होगी अहम बातचीत उज्बेकिस्तान की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। दोनों नेताओं के बीच भारत और उज्बेकिस्तान के संबंधों को और मजबूत करने के लिए कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। इस दौरान Trade and Investment, Defence, Energy, Education और Digital Connectivity जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होगा। भारत के लिए उज्बेकिस्तान Central Asia का एक महत्वपूर्ण साझेदार है। ऐसे में पीएम मोदी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच आर्थिक, सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। Tashkent में Shastri Memorial और Mahatma Gandhi Centre जाएंगे PM Modi ताशकंद में प्रधानमंत्री मोदी Lal Bahadur Shastri Memorial और Mahatma Gandhi Centre का दौरा भी करेंगे। इन कार्यक्रमों के जरिए भारत और उज्बेकिस्तान के बीच ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित किया जाएगा। भारत और Central Asia के बीच सदियों पुराने व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। मौजूदा दौर में दोनों पक्ष इन रिश्तों को आधुनिक आर्थिक और रणनीतिक सहयोग में बदलने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। SCO Summit 2026 में Terrorism पर भारत का सख्त रुख उज्बेकिस्तान दौरे के बाद पीएम मोदी 31 अगस्त और 1 सितंबर को बिश्केक में होने वाले 26वें SCO Summit में शामिल होंगे। यह सम्मेलन SCO की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। SCO Summit में regional security, terrorism, extremism, connectivity और economic cooperation जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। भारत लंबे समय से आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत कार्रवाई की वकालत करता रहा है। पीएम मोदी ने कहा है कि भारत SCO के माध्यम से ऐसे क्षेत्र के निर्माण के लिए काम करेगा, जो terrorism, separatism और extremism से मुक्त हो। उनका यह संदेश SCO Summit में भारत की सुरक्षा प्राथमिकताओं को स्पष्ट करता है। Security और Connectivity पर भी रहेगा फोकस SCO के मंच पर भारत के लिए Security, Connectivity और Opportunity प्रमुख प्राथमिकताएं हैं। मध्य एशिया के साथ बेहतर connectivity भारत के आर्थिक और रणनीतिक हितों के लिए महत्वपूर्ण है। व्यापार मार्गों, ऊर्जा सहयोग, डिजिटल कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा देने से भारत और Central Asian देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूती मिल सकती है। प्रधानमंत्री मोदी SCO Summit के दौरान अन्य सदस्य देशों के नेताओं के साथ Bilateral Meetings भी कर सकते हैं। इन बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर बातचीत की संभावना है। World Nomad Games के Opening Ceremony में शामिल होंगे PM Modi किर्गिस्तान दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी 6th World Nomad Games के Opening Ceremony में भी शामिल होंगे। यह आयोजन Central Asia की पारंपरिक संस्कृति, खेल और विरासत को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करता है। पीएम मोदी की इस कार्यक्रम में भागीदारी भारत और किर्गिस्तान के बीच people-to-people और cultural ties को और मजबूत करने का अवसर भी होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
RBI

EMI नहीं चुकाई तो क्या होगा? RBI Loan Recovery Rules में बदलाव, जानिए Bank क्या नहीं कर सकता

अगर आपने Personal Loan, Home Loan, Car Loan या किसी अन्य तरह का Loan लिया है और किसी वजह से EMI समय पर नहीं चुका पा रहे हैं, तो आपके लिए RBI के Loan Recovery Rules जानना बेहद जरूरी है। EMI डिफॉल्ट होने पर बैंक या NBFC बकाया रकम की Recovery कर सकता है, लेकिन इसके लिए उसे RBI के नियमों का पालन करना जरूरी है। कई लोग यह मान लेते हैं कि EMI मिस होने के बाद Recovery Agent घर आकर धमका सकता है या किसी भी समय फोन कर सकता है। ऐसा नहीं है। RBI ने Loan Recovery के दौरान ग्राहकों के सम्मान, Privacy और उचित व्यवहार को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए हैं। EMI Miss होने पर सबसे पहले क्या होता है? अगर आपकी EMI तय तारीख पर जमा नहीं होती है, तो बैंक इसे Overdue Payment के रूप में दर्ज कर सकता है। Loan Agreement के मुताबिक बैंक बकाया रकम के साथ लागू ब्याज या अन्य वैध Charges की मांग कर सकता है। अगर EMI लगातार Miss होती रहती है, तो बैंक ग्राहक से संपर्क कर सकता है और बकाया रकम चुकाने के लिए कह सकता है। लंबे समय तक भुगतान न होने पर बैंक अपने नियमों और लागू कानून के अनुसार Recovery Process आगे बढ़ा सकता है। इसलिए RBI के नियमों का मतलब यह नहीं है कि EMI नहीं चुकाने पर बैंक पैसा नहीं मांग सकता। नियम मुख्य रूप से यह तय करते हैं कि Recovery किस तरीके से की जा सकती है। RBI Loan Recovery Rules: Bank आपको कब कॉल कर सकता है? RBI के निर्देशों के अनुसार Overdue Loan की Recovery के लिए ग्राहक से सुबह 8 बजे से पहले और शाम 7 बजे के बाद संपर्क नहीं किया जाना चाहिए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि Recovery Agent ग्राहकों को अनुचित समय पर फोन करके परेशान न करें। अगर कोई Recovery Agent लगातार देर रात या सुबह-सुबह कॉल करता है, तो ग्राहक इस मामले की शिकायत संबंधित Bank या NBFC से कर सकता है। Recovery Agent आपको धमका नहीं सकता Loan की Recovery के लिए Bank या NBFC Recovery Agent की मदद ले सकता है, लेकिन Agent को ग्राहक के साथ धमकी, गाली-गलौज, अपमानजनक व्यवहार या मानसिक दबाव बनाने की अनुमति नहीं है। Recovery का उद्देश्य बकाया रकम की वसूली करना है, ग्राहक को डराना या परेशान करना नहीं। RBI ने Regulated Entities को अपने Recovery Agents की गतिविधियों पर उचित निगरानी रखने की जिम्मेदारी भी दी है। परिवार और दोस्तों को भी परेशान नहीं कर सकता Bank अगर आपकी EMI बकाया है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि Recovery Agent आपके परिवार, दोस्तों या परिचितों को परेशान करके आप पर दबाव बनाए। ग्राहक की Privacy और सम्मान का ध्यान रखना जरूरी है। किसी व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करना या उसके कर्ज की जानकारी का अनुचित तरीके से इस्तेमाल करना Recovery का स्वीकार्य तरीका नहीं है। क्या Bank घर आकर Recovery कर सकता है? बकाया Loan की Recovery के लिए Bank या उसका अधिकृत Recovery Agent ग्राहक से संपर्क कर सकता है। हालांकि, Recovery करते समय निर्धारित नियमों और कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। अगर Loan के बदले कोई Asset जैसे Car, Property या अन्य Security रखी गई है, तो Default की स्थिति में Bank के पास कानून और Loan Agreement के तहत Recovery के अधिकार हो सकते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि Recovery Agent अपनी मर्जी से जबरन सामान या संपत्ति पर कब्जा कर सकता है। Loan Default होने पर Credit Score पर भी असर पड़ सकता है EMI का लगातार भुगतान न करने का असर केवल Bank Recovery तक सीमित नहीं रहता। Loan Repayment History आपके Credit Profile को प्रभावित कर सकती है। अगर Loan Account में लगातार Default होता है, तो भविष्य में Loan या Credit Card लेने में परेशानी हो सकती है। इसलिए आर्थिक परेशानी होने पर EMI को नजरअंदाज करने के बजाय Bank से समय रहते संपर्क करना बेहतर होता है। Recovery Agent परेशान करे तो क्या करें? अगर कोई Recovery Agent RBI के नियमों का उल्लंघन करता है, तो ग्राहक को सबसे पहले संबंधित Bank या NBFC के Grievance Redressal Mechanism में शिकायत करनी चाहिए। शिकायत करते समय कॉल रिकॉर्ड, SMS, WhatsApp Message, Email या अन्य उपलब्ध सबूत सुरक्षित रखना उपयोगी हो सकता है। अगर Bank या NBFC से शिकायत का समाधान नहीं होता है, तो पात्र मामलों में RBI की Ombudsman व्यवस्था के तहत शिकायत की जा सकती है। क्या EMI नहीं भरने पर Bank Loan माफ कर देगा? नहीं। RBI के Recovery Rules का उद्देश्य ग्राहकों को अनुचित Recovery Practices से सुरक्षा देना है। इसका मतलब यह नहीं है कि EMI नहीं भरने पर Loan अपने आप माफ हो जाएगा। Bank अपने Loan Agreement और लागू कानून के अनुसार बकाया रकम की Recovery कर सकता है। लंबे समय तक Default की स्थिति में कानूनी कार्रवाई भी संभव है। EMI भरने में परेशानी हो तो क्या करें? अगर आपको लगता है कि किसी महीने या आने वाले समय में EMI भरना मुश्किल हो सकता है, तो Bank या NBFC से जल्द संपर्क करें। अपनी Financial Situation के बारे में जानकारी देकर उपलब्ध विकल्पों के बारे में पूछें। सबसे जरूरी बात यह है कि Recovery Agent के दबाव में आकर किसी अनजान व्यक्ति के Personal Account में पैसा जमा न करें। Payment हमेशा Bank/NBFC के अधिकृत माध्यम से ही करें। RBI Loan Recovery Rules का सबसे जरूरी सार EMI समय पर नहीं चुकाने पर Bank आपसे बकाया रकम की मांग कर सकता है और नियमों के अनुसार Recovery Process शुरू कर सकता है। लेकिन Recovery के दौरान Bank या उसके Agent को ग्राहक की Privacy और सम्मान का ध्यान रखना होगा। याद रखें: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CNG Price

Delhi CNG Price: CNG के दाम में ₹3.89 की बढ़ोतरी, अब ₹86.98 प्रति किलो मिलेगा गैस

दिल्ली-NCR में CNG इस्तेमाल करने वाले वाहन चालकों को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। CNG Price Hike के तहत इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने CNG की कीमत में ₹3.89 प्रति किलो की बढ़ोतरी की है। नई कीमतें 29 अगस्त 2026 से लागू हो गई हैं। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में CNG का रेट ₹83.09 प्रति किलो से बढ़कर ₹86.98 प्रति किलो हो गया है। यह 2026 में दिल्ली-NCR में CNG की पांचवीं कीमत बढ़ोतरी है। लगातार हो रही बढ़ोतरी से CNG कार चलाने वाले लोगों के साथ-साथ ऑटो, टैक्सी, कैब और कमर्शियल वाहनों के ड्राइवरों पर भी ईंधन खर्च का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। Delhi CNG Price: अब कितना हुआ CNG का रेट? IGL की नई कीमतों के मुताबिक दिल्ली-NCR के अलग-अलग शहरों में CNG के दाम इस प्रकार हैं: दिल्ली में CNG की कीमत में सीधे ₹3.89 प्रति किलो की वृद्धि हुई है। इसका मतलब है कि जो वाहन रोजाना बड़ी मात्रा में CNG की खपत करते हैं, उनके लिए महीने का fuel budget पहले की तुलना में और बढ़ जाएगा। Why CNG Price Increased: क्यों बढ़े CNG के दाम? IGL के अनुसार, CNG की कीमत बढ़ाने की मुख्य वजह imported LNG की बढ़ी हुई लागत है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में LNG की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर गैस की supply और import cost पर पड़ा है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण LNG की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ी है। इसके चलते global energy market में कीमतों पर दबाव बना हुआ है। IGL ने इसी बढ़ी हुई input cost के एक हिस्से को CNG की कीमतों में शामिल किया है। 2026 में पांचवीं बार महंगी हुई CNG दिल्ली-NCR में वर्ष 2026 के दौरान CNG की कीमतों में यह पांचवीं बढ़ोतरी है। इससे पहले भी इस साल अलग-अलग चरणों में CNG के दाम बढ़ाए गए थे। बार-बार होने वाली price hike के कारण CNG को economical fuel मानकर इस्तेमाल करने वाले वाहन मालिकों की लागत लगातार बढ़ रही है। हालांकि पेट्रोल और डीजल की तुलना में CNG अभी भी कई वाहन चालकों के लिए एक महत्वपूर्ण alternative fuel बनी हुई है। CNG Price Hike का आम लोगों पर क्या असर होगा? CNG की कीमत बढ़ने का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो रोजाना लंबी दूरी तय करते हैं। निजी CNG कारों के अलावा auto-rickshaw, taxi, cab और commercial vehicles चलाने वालों की operating cost भी बढ़ेगी। ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए बढ़ती fuel cost का सीधा असर उनकी daily earnings पर पड़ सकता है। अगर CNG की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो भविष्य में इसका असर transportation charges और passenger fares पर भी देखने को मिल सकता है। CNG महंगी होने से बढ़ सकता है Monthly Fuel Budget उदाहरण के तौर पर, अगर कोई वाहन प्रतिदिन 5 किलो CNG की खपत करता है, तो ₹3.89 प्रति किलो की अतिरिक्त कीमत के कारण उसका खर्च करीब ₹19.45 प्रतिदिन बढ़ जाएगा। 30 दिनों में यह अतिरिक्त खर्च लगभग ₹584 हो सकता है। जिन commercial vehicles की रोजाना CNG consumption इससे कहीं अधिक है, उनके लिए अतिरिक्त मासिक खर्च भी काफी ज्यादा होगा। आगे CNG के दाम पर क्या रहेगा असर? CNG की कीमतों पर आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय LNG prices, global gas supply और पश्चिम एशिया की स्थिति का असर महत्वपूर्ण रहेगा। अगर imported gas की लागत ऊंची बनी रहती है, तो domestic CNG prices पर भी दबाव बना रह सकता है। फिलहाल दिल्ली-NCR के लोगों को 29 अगस्त से CNG के लिए ₹3.89 प्रति किलो ज्यादा भुगतान करना होगा। दिल्ली में नई CNG कीमत ₹86.98 प्रति किलो पहुंच गई है, जबकि नोएडा और गाजियाबाद में यह ₹95.59 प्रति किलो हो गई है। CNG Price Hike 2026 की यह पांचवीं बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब बढ़ती fuel और transportation costs पहले से ही आम लोगों के बजट को प्रभावित कर रही हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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