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PM Modi

PM Modi और Lula की अहम बैठक Aerospace Investment से मजबूत होंगे भारत-Brazil रिश्ते

नई दिल्ली में भारत और ब्राजील के रिश्तों को नई मजबूती तब मिली जब PM Narendra Modi ने ब्राजील के राष्ट्रपति Luiz Inácio Lula da Silva का गर्मजोशी से स्वागत किया। राष्ट्रपति भवन परिसर में आयोजित औपचारिक समारोह ने इस मुलाकात को खास बना दिया। Rashtrapati Bhavan में गार्ड ऑफ ऑनर के साथ हुआ यह स्वागत दोनों देशों की मजबूत होती दोस्ती का प्रतीक रहा। क्या रही बैठक की खास बातें? पीएम मोदी और राष्ट्रपति लूला के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। रक्षा सहयोग, व्यापार विस्तार, कृषि तकनीक, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और डिजिटल इनोवेशन जैसे विषयों पर गंभीर मंथन हुआ। दोनों नेताओं ने साफ संकेत दिया कि भारत और ब्राजील सिर्फ साझेदार ही नहीं, बल्कि भरोसेमंद मित्र भी हैं। सूत्रों के अनुसार, आपसी व्यापार को नई ऊंचाई देने और निवेश के अवसर बढ़ाने पर खास जोर दिया गया। पिछले कुछ वर्षों में भारत-ब्राजील व्यापार में लगातार वृद्धि हुई है, और अब लक्ष्य इसे और व्यापक बनाने का है। Aerospace Plant: Make in India को Boost इस दौरे की सबसे चर्चित घोषणा ब्राजील की एक प्रमुख एयरोस्पेस कंपनी द्वारा भारत में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने की योजना रही। राष्ट्रपति लूला ने पहले ही संकेत दिया था कि उनकी कंपनी भारत में निवेश करने के लिए उत्सुक है। यदि यह परियोजना साकार होती है, तो इससे भारतीय एविएशन और डिफेंस सेक्टर को नई तकनीक, स्किल डेवलपमेंट और रोजगार के अवसर मिलेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम “मेक इन इंडिया” पहल को वास्तविक गति देगा और भारत को एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा। Global South पर साझा सोच भारत और ब्राजील दोनों ही उभरती अर्थव्यवस्थाएं हैं और ग्लोबल साउथ की आवाज को वैश्विक मंचों पर मजबूती से उठाते रहे हैं। चाहे जलवायु न्याय की बात हो या विकासशील देशों के अधिकारों की, दोनों देशों की सोच कई मुद्दों पर मिलती-जुलती है। यही कारण है कि यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक कूटनीति तक सीमित नहीं रही, बल्कि भविष्य की साझा रणनीति पर भी केंद्रित रही। रिश्तों में बढ़ती गर्मजोशी इस मुलाकात में सिर्फ समझौते और घोषणाएं ही नहीं थीं, बल्कि आपसी सम्मान और विश्वास की झलक भी दिखी। दोनों नेताओं के बीच सहज बातचीत ने यह संकेत दिया कि भारत-ब्राजील संबंध आने वाले समय में और मजबूत होंगे। कुल मिलाकर, PM Modi–Lula Meeting ने यह साफ कर दिया कि भारत और ब्राजील मिलकर व्यापार, टेक्नोलॉजी और रक्षा जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाओं की उड़ान भरने को तैयार हैं। आने वाले समय में यह साझेदारी न केवल दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को गति देगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी नई दिशा तय कर सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rahul Gandhi

Maharashtra Politics भिवंडी में Rahul Gandhi की पेशी कहा कानून का सामना करूंगा, माफी नहीं मांगूंगा

महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi)ने साफ शब्दों में कहा है कि वे किसी भी कीमत पर माफी नहीं मांगेंगे और कानूनी प्रक्रिया का सामना करेंगे। यह बयान उस समय सामने आया जब वे महाराष्ट्र के भिवंडी स्थित अदालत में एक आपराधिक मानहानि मामले में पेश हुए। क्या है पूरा मामला? यह मामला Maharashtra के Bhiwandi की अदालत में चल रहा है। शिकायत एक पुराने बयान को लेकर दर्ज की गई थी, जिसमें कथित तौर पर एक संगठन से जुड़े लोगों की मानहानि का आरोप लगाया गया है। अदालत में पेशी के दौरान Rahul Gandhi ने कहा कि वे न्यायपालिका का सम्मान करते हैं और अपना पक्ष अदालत में मजबूती से रखेंगे, लेकिन माफी मांगने का सवाल ही नहीं उठता। उनके इस रुख ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। कोर्ट परिसर के बाहर गरमाया माहौल पेशी के दिन अदालत के बाहर माहौल तनावपूर्ण रहा। Bharatiya Janata Party (बीजेपी) के कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाकर विरोध प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई थी ताकि किसी तरह की अप्रिय घटना न हो। राजनीतिक मायने क्या हैं? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। एक तरफ कांग्रेस इसे विचारों की लड़ाई बता रही है, तो दूसरी ओर बीजेपी का कहना है कि कानून सबके लिए बराबर है और अदालत में सच सामने आएगा। राहुल गांधी का “माफी नहीं, ट्रायल फेस करूंगा” वाला रुख उनके समर्थकों के बीच दृढ़ता की छवि बना रहा है। वहीं विरोधी इसे राजनीतिक बयानबाज़ी बता रहे हैं। आगे क्या? अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में जाती है। महाराष्ट्र की सियासत में यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में और भी हलचल पैदा कर सकता है। फिलहाल इतना तय है कि यह मामला सिर्फ कोर्टरूम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राजनीतिक मंचों पर भी इसकी गूंज सुनाई देती रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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PM MODI से मिले ब्राजील के राष्ट्रपति लूला, राष्ट्रपति भवन में भव्य स्वागत

PM MODI से मिले ब्राजील के राष्ट्रपति लूला, राष्ट्रपति भवन में भव्य स्वागत

PM MODI ने ब्राजील के राष्ट्रपति Luiz Inacio Lula da Silva का राष्ट्रपति भवन में भव्य स्वागत किया। पारंपरिक सम्मान और गार्ड ऑफ ऑनर के साथ यह मुलाकात खास रही। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक जारी है, जिसमें व्यापार, रक्षा, टेक्नोलॉजी और एयरोस्पेस सेक्टर पर खास चर्चा हो रही है। राष्ट्रपति लूला पहले ही संकेत दे चुके हैं कि ब्राजील की प्रमुख एयरोस्पेस कंपनी भारत में अपना प्लांट लगाने की योजना बना रही है। अगर यह योजना साकार होती है तो भारत में रोजगार और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को बड़ी गति मिल सकती है। भारत और ब्राजील के बीच लंबे समय से रणनीतिक साझेदारी रही है। दोनों देश BRICS जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर साथ काम करते रहे हैं। इस मुलाकात को वैश्विक स्तर पर भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह सहयोग रक्षा उत्पादन, विमानन और औद्योगिक निवेश को नई दिशा दे सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा सिर्फ कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने की ठोस पहल है। आम लोगों के लिए भी यह खबर उम्मीद लेकर आई है—नई फैक्ट्रियां, नए निवेश और नए रोजगार के अवसर। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trade

Global Trade 18% से 10% पर आया भारत का टैरिफ, ट्रम्प की नई नीति लागू

अमेरिका की व्यापार नीति में एक बड़ा और अचानक बदलाव देखने को मिला है। Donald Trump ने सभी देशों से अमेरिका में आयात होने वाले सामान पर 10% का नया यूनिवर्सल टैरिफ लगाने की घोषणा की है। यह फैसला ऐसे समय में आया जब इससे कुछ घंटे पहले ही Supreme Court of the United States ने एक पुराने आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत भारत पर 18% का विशेष टैरिफ लागू था। इस घटनाक्रम ने भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। क्या है पूरा मामला? पहले भारत से अमेरिका जाने वाले कुछ उत्पादों पर 18% तक का अतिरिक्त शुल्क लगाया गया था। इससे भारतीय निर्यातकों—खासतौर पर स्टील, इंजीनियरिंग गुड्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर—को सीधा असर झेलना पड़ रहा था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह 18% टैरिफ समाप्त हो गया। लेकिन उसी के तुरंत बाद 10% का नया सार्वभौमिक टैरिफ लागू करने की घोषणा ने तस्वीर बदल दी। भारत के लिए राहत या नई चुनौती? सीधी बात करें तो 18% से घटकर 10% होना भारत के लिए आंशिक राहत है।मतलब: लेकिन 10% टैरिफ पूरी तरह राहत नहीं है। इससे लागत बढ़ेगी और मुनाफे पर असर पड़ेगा। Global Trade पर क्या असर पड़ेगा? यह फैसला सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। सभी देशों पर समान 10% शुल्क लगाने से: विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अमेरिकी घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है। आम लोगों पर क्या असर? यह सवाल भी अहम है।अगर आयात महंगे होंगे तो अमेरिका में उपभोक्ताओं को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। वहीं भारत में निर्यात से जुड़े उद्योगों और कामगारों के लिए यह राहत और चिंता—दोनों का मिश्रण है। आगे क्या? अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भारत सरकार इस नए 10% टैरिफ को लेकर क्या रुख अपनाती है। क्या द्विपक्षीय व्यापार वार्ता तेज होगी? क्या कुछ सेक्टर को छूट मिल सकती है? फिलहाल इतना साफ है कि अमेरिका की यह नई टैरिफ नीति वैश्विक व्यापार संतुलन को प्रभावित करेगी, और भारत को भी अपनी रणनीति नए सिरे से तय करनी होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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AI SUMMIT में कांग्रेस का विरोध, आज BJP का प्रदर्शन: भिवंडी में राहुल गांधी को काले झंडे

AI SUMMIT में कांग्रेस का विरोध, आज BJP का प्रदर्शन: भिवंडी में राहुल गांधी को काले झंडे

AI Summit के दौरान कांग्रेस के विरोध के बाद अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) सड़कों पर उतर आई है। इस पूरे घटनाक्रम ने राजधानी दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र के भिवंडी तक राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। भिवंडी में राहुल गांधी को दिखाए गए काले झंडे Rahul Gandhi जब महाराष्ट्र के भिवंडी पहुंचे, तो वहां कुछ लोगों ने उनका विरोध किया। प्रदर्शनकारियों ने काले झंडे दिखाकर नाराजगी जताई। मौके पर मौजूद पुलिस ने स्थिति को संभाला और किसी बड़े टकराव की खबर नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हाल के राजनीतिक बयानों को लेकर असंतोष है, जिसके कारण यह विरोध हुआ। हालांकि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसे राजनीतिक साजिश बताया है। दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय के बाहर BJP का प्रदर्शन राजधानी दिल्ली में भी राजनीतिक हलचल देखने को मिली। Bharatiya Janata Party के कार्यकर्ताओं ने Indian National Congress मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान जमकर नारेबाजी की गई। BJP नेताओं का कहना है कि AI समिट के दौरान कांग्रेस द्वारा किए गए प्रदर्शन के जवाब में यह विरोध दर्ज कराया गया है। बढ़ता राजनीतिक तनाव दोनों पार्टियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले चुनावों को देखते हुए इस तरह के विरोध और प्रदर्शन और तेज हो सकते हैं। आम जनता के लिए यह राजनीतिक खींचतान कई सवाल खड़े करती है—क्या यह मुद्दों की राजनीति है या सिर्फ सियासी रणनीति? फिलहाल देश की राजनीति में गर्माहट बढ़ी हुई है और आने वाले दिनों में यह विवाद और तूल पकड़ सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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AI

AI Summit Controversy भारत मंडपम में Youth Congress का Protest, लगे “Modi is Compromised” के नारे

नई दिल्ली के प्रतिष्ठित भारत मंडपम में आयोजित एक हाई-प्रोफाइल एआई (AI) समिट उस समय अचानक सुर्खियों में आ गया, जब यूथ कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम के दौरान विरोध प्रदर्शन किया। इस समिट में देश-विदेश से टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ, उद्योगपति और नीति-निर्माता शामिल हुए थे। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री Narendra Modi की मौजूदगी भी चर्चा का केंद्र थी। अचानक बदला माहौल कार्यक्रम अपने निर्धारित एजेंडे के अनुसार चल रहा था, तभी कुछ युवक अपनी सीटों से खड़े हुए और टी-शर्ट उतारकर नारे लगाने लगे। “Modi is Compromised” के नारे कुछ मिनटों तक गूंजते रहे। वहां मौजूद लोगों के लिए यह एक अप्रत्याशित पल था—तकनीक और भविष्य की बातों के बीच अचानक राजनीतिक विरोध ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया। सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए प्रदर्शनकारियों को बाहर ले जाया। थोड़ी देर की अफरा-तफरी के बाद कार्यक्रम फिर सामान्य रूप से जारी रहा। विरोध की वजह क्या है? यूथ कांग्रेस से जुड़े प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर उनकी चिंताएं हैं। उनका आरोप है कि इस तरह के समझौते से छोटे उद्योगों, किसानों और स्थानीय व्यापारियों पर दबाव बढ़ सकता है। उनका मानना है कि सरकार को किसी भी बड़े अंतरराष्ट्रीय समझौते से पहले व्यापक चर्चा और पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए। राजनीतिक बयानबाजी तेज घटना के बाद सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई। विपक्षी नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक विरोध का हिस्सा बताया, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष के नेताओं ने इसे एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला कदम करार दिया। यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि वैश्विक साझेदारियों और आर्थिक नीतियों को लेकर देश के भीतर अलग-अलग मत मौजूद हैं। सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल भारत मंडपम जैसे उच्च-सुरक्षा वाले स्थल पर इस तरह का विरोध कैसे हुआ, इसे लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि स्थिति को तुरंत नियंत्रण में ले लिया गया था और किसी तरह की बड़ी बाधा नहीं आई। तकनीक के मंच पर राजनीति की गूंज एआई समिट का मकसद भारत की तकनीकी क्षमता और वैश्विक सहयोग को मजबूत करना था। लेकिन इस घटना ने यह भी दिखा दिया कि देश में आर्थिक नीतियों और अंतरराष्ट्रीय समझौतों को लेकर भावनाएं कितनी प्रबल हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Tharoor

PR Show या Progress Delhi AI Summit पर Tharoor और Rahul आमने-सामने

नई दिल्ली में आयोजित Delhi AI Summit 2026 इन दिनों सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि राजनीति का भी बड़ा मुद्दा बन गया है। जहां एक तरफ यह समिट भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत पहचान दिलाने की कोशिश के रूप में पेश किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ इसे लेकर सियासी बयानबाज़ी भी तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इतने बड़े स्तर के कार्यक्रमों में छोटी-मोटी गड़बड़ियां होना असामान्य नहीं है। उनका मानना है कि भारत को नई तकनीकों, खासकर AI, के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंच बेहद जरूरी हैं। थरूर ने संकेत दिया कि कमियों पर ध्यान देना चाहिए, लेकिन सकारात्मक पहल को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। वहीं कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने इस समिट को “PR तमाशा” करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बड़े आयोजनों के जरिए अपनी छवि चमकाने की कोशिश कर रही है, जबकि असली जरूरत रोजगार सृजन, शिक्षा सुधार और तकनीकी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की है। क्या है Delhi AI Summit का मकसद? सरकार के अनुसार, इस समिट का उद्देश्य भारत को AI इनोवेशन हब के रूप में स्थापित करना, स्टार्टअप्स को बढ़ावा देना, निवेश आकर्षित करना और नीति-निर्माण में वैश्विक सहयोग बढ़ाना है। कई देशी-विदेशी विशेषज्ञों, कंपनियों और नीति-निर्माताओं की भागीदारी इसे अंतरराष्ट्रीय महत्व का आयोजन बना रही है। राजनीतिक हलकों में क्यों बढ़ी चर्चा? दिलचस्प बात यह है कि एक ही पार्टी के दो बड़े नेताओं के अलग-अलग रुख ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। थरूर का संतुलित समर्थन और राहुल गांधी की कड़ी आलोचना इस बात की ओर इशारा करती है कि AI समिट अब तकनीकी मंच से आगे बढ़कर राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन चुका है। आम लोगों के लिए इसका क्या मतलब? तकनीकी समिट की चर्चा भले ही बड़े मंचों पर हो रही हो, लेकिन आम नागरिक के मन में सवाल यही है—क्या इससे रोजगार बढ़ेंगे? क्या युवाओं को नए अवसर मिलेंगे? क्या भारत सच में AI क्षेत्र में अग्रणी बन पाएगा? फिलहाल, Delhi AI Summit 2026 ने एक बात साफ कर दी है—AI सिर्फ टेक्नोलॉजी का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह राजनीति, विकास और भविष्य की दिशा तय करने वाला विषय बन चुका है। आने वाले दिनों में इस पर बहस और तेज होने की संभावना है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Himachal

Himachal Road Trip 2026 नई Entry Fee लागू, अब सफर होगा महंगा

अगर आप इस साल गर्मियों में Himachal Trip प्लान कर रहे हैं, तो आपके बजट पर थोड़ा अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। Himachal Pradesh सरकार ने बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों पर लगने वाली Entry Fee/Green Tax में बड़ा इजाफा कर दिया है। नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी। इस फैसले का सीधा असर उन पर्यटकों पर पड़ेगा जो अपनी गाड़ी से Shimla, मनाली या धर्मशाला जैसी जगहों की यात्रा करते हैं। क्या है नया Entry Fee Structure? सरकार द्वारा जारी नई दरों के अनुसार: कुछ श्रेणियों में फीस लगभग ढाई गुना तक बढ़ाई गई है। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह शुल्क केवल बाहरी राज्यों में रजिस्टर्ड वाहनों पर लागू होगा। हिमाचल में पंजीकृत गाड़ियों को इससे छूट मिलेगी। क्यों बढ़ाई गई फीस? राज्य सरकार का कहना है कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और अतिरिक्त राजस्व जुटाने के लिए यह कदम उठाया गया है। प्राकृतिक आपदाओं और वित्तीय दबाव के बीच सरकार नए संसाधन जुटाने की कोशिश कर रही है। सरकार का तर्क है कि पर्यटन से होने वाली आय का एक हिस्सा बुनियादी ढांचे और सड़कों के रखरखाव पर खर्च किया जाएगा। आम यात्रियों पर क्या असर पड़ेगा? साफ है कि अब हिमाचल की यात्रा पहले से थोड़ी महंगी हो जाएगी। हालांकि कई पर्यटक मानते हैं कि हिमाचल की खूबसूरती और ठंडी वादियां आज भी हर खर्च को जायज़ ठहराती हैं। फिर भी, अगर आप Road Trip प्लान कर रहे हैं, तो अब अपने बजट में Entry Tax को जरूर शामिल करें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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राहुल गांधी

Defamation Case में राहुल गांधी का बयान सुल्तानपुर कोर्ट के बाहर नजर आया ‘सत्यमेव जयते’

सुल्तानपुर, 20 फरवरी 2026: कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आज सुल्तानपुर कोर्ट पहुंचे, जहां उनका Defamation Case (मानहानि मुकदमा) सुनवाई के लिए निर्धारित था। यह मामला 2018 का है, जब स्थानीय भाजपा नेता विजय मिश्रा ने राहुल गांधी के कथित आपत्तिजनक बयान को लेकर शिकायत दर्ज करवाई थी। राहुल गांधी सुबह कोर्ट पहुंचे और उन्होंने सीधे अपनी बयानबाजी की। सुनवाई के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे। कोर्ट परिसर के बाहर कांग्रेस समर्थकों ने ‘सत्यमेव जयते’ जैसे पोस्टर लगाकर सत्य और न्याय का संदेश फैलाया। केस की पृष्ठभूमि इस मानहानि केस में राहुल गांधी ने कथित रूप से अमित शाह (केंद्र गृह मंत्री) के खिलाफ बयान दिया था, जिसे वादी ने मानहानि बताया। पिछले पाँच साल से यह मामला कोर्ट में चल रहा है। दिसंबर 2023 में राहुल गांधी की गैरमौजूदगी के कारण उनके खिलाफ वारंट जारी हुआ था। इसके बाद उन्होंने कोर्ट में आत्मसमर्पण किया और दो जमानतें (प्रत्येक ₹25,000) पर जमानत दी गई। राहुल गांधी ने अपनी बयानबाजी में खुद को निर्दोष बताया और इसे राजनीतिक साजिश करार दिया। कोर्ट ने वादी को साक्ष्य पेश करने का निर्देश दिया था, और आज की सुनवाई में राहुल गांधी ने अपना बयान दर्ज करवाया। राजनीतिक और सामाजिक असर यह मामला न केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि चुनावी माहौल पर भी असर डाल सकता है। कोर्ट के बाहर लगे पोस्टर और समर्थकों का उत्साह इस बात का संकेत दे रहे हैं कि यह केस जनता और मीडिया की नजरों में है। संक्षेप: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Om Birla

Speaker Om Birla AI Controversy लोकसभा विशेषाधिकार विभाग का कांग्रेस के 8 नेताओं को नोटिस

देश की राजनीति में एक बार फिर डिजिटल कंटेंट को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला (Om Birla) से जुड़े एक कथित AI-जनित वीडियो को लेकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के मीडिया सेल को लोकसभा के विशेषाधिकार विभाग की ओर से नोटिस जारी किया गया है। इस मामले में पार्टी के आठ नेताओं से जवाब मांगा गया है, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। क्या है पूरा मामला? सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो शेयर किया गया, जिसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक से तैयार बताया जा रहा है। आरोप है कि वीडियो में लोकसभा स्पीकर के संदर्भ में आपत्तिजनक और भ्रामक प्रस्तुति की गई। शिकायत के मुताबिक, इससे न केवल एक संवैधानिक पद की गरिमा प्रभावित हुई, बल्कि संसद के विशेषाधिकार का भी संभावित उल्लंघन हुआ है। डिजिटल दौर में इस तरह की सामग्री तेजी से वायरल होती है और आम लोगों तक कुछ ही मिनटों में पहुंच जाती है। यही वजह है कि यह मामला राजनीतिक दायरे से निकलकर सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है। शिकायत के बाद कैसे बढ़ा मामला? बीजेपी सांसद विष्णु दत्त शर्मा ने इस वीडियो को लेकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में कहा गया कि वीडियो भ्रामक है और इससे लोकसभा की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई है। शिकायत मिलने के बाद लोकसभा के विशेषाधिकार विभाग ने संज्ञान लेते हुए कांग्रेस मीडिया सेल को नोटिस जारी कर दिया। किन नेताओं को मिला नोटिस? नोटिस के दायरे में कांग्रेस की सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म की चेयरपर्सन सुप्रिया श्रीनेत समेत कुल आठ पदाधिकारी शामिल हैं। सभी से तीन दिनों के भीतर लिखित जवाब मांगा गया है। सूत्रों के अनुसार, जवाब मिलने के बाद उसे स्पीकर के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा और उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। AI और राजनीति: क्यों बढ़ रही चिंता? यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब राजनीति में AI और डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तकनीक का जिम्मेदारी से उपयोग न हो, तो इससे भ्रम, गलतफहमियां और संस्थाओं की साख पर असर पड़ सकता है। आम नागरिकों के लिए भी यह एक याद दिलाने वाला क्षण है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाली हर चीज पूरी तरह सच हो—यह जरूरी नहीं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gold Mining: ऑस्ट्रेलिया में सोने की नई खोज से बदलेगी तस्वीर, भारत को मिल सकता है नया सप्लायर

भारत में सोना सिर्फ गहना नहीं, बल्कि लोगों की बचत और निवेश का भी अहम हिस्सा है। शादी का सीजन हो या दिवाली-धनतेरस, सोने की खरीदारी को लेकर बाजार में हमेशा हलचल रहती है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया से आई सोने की खोज और बढ़ते निवेश की खबर भारत के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऑस्ट्रेलिया में सोने की नई खोज के लिए कंपनियां बड़े स्तर पर खर्च कर रही हैं। इससे आने वाले समय में सोने की वैश्विक सप्लाई बढ़ने की संभावना है। भारत जैसे देश के लिए यह एक अहम घटनाक्रम है, क्योंकि अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा पूरा करने के लिए भारत को दूसरे देशों से सोना आयात करना पड़ता है। Australia में Gold Exploration पर कितना खर्च हुआ? ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज से जुड़ा निवेश जून 2026 की तिमाही में बढ़कर लगभग 565.6 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पहुंच गया। ऑस्ट्रेलियाई सांख्यिकी ब्यूरो (ABS) के आंकड़ों के अनुसार, पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें 23.6% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह खर्च जमीन के नीचे मौजूद सोने के संभावित भंडार का पता लगाने, ड्रिलिंग और खनन की संभावनाओं का आकलन करने जैसे कामों पर किया जाता है। हालांकि, खोज पर खर्च बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि हर जगह सोने का नया भंडार मिल गया है। किसी जगह सोना मिलने के बाद भी यह देखना पड़ता है कि वहां से उसे निकालना आर्थिक रूप से कितना व्यावहारिक होगा। ऑस्ट्रेलिया में कितना Gold Reserve मौजूद है? ऑस्ट्रेलिया दुनिया के प्रमुख सोना उत्पादक देशों में शामिल है। सरकारी संस्था Geoscience Australia के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2024 तक देश के अनुमानित Ore Reserves करीब 4,785 टन थे। वहीं, पहचाने गए कुल Gold Resources का आंकड़ा इससे काफी ज्यादा था। यहां एक बात समझना जरूरी है। Gold Resources में सोने के संभावित और पहचाने गए संसाधन शामिल होते हैं, जबकि Ore Reserves उस सोने को दर्शाते हैं जिसे मौजूदा तकनीकी और आर्थिक परिस्थितियों में निकालना व्यावहारिक माना जाता है। इसीलिए ऑस्ट्रेलिया में सोने के बड़े भंडार होने और किसी नई खोज को दुनिया का सबसे बड़ा भंडार बताने में अंतर है। किसी खास नई खोज के बारे में ऐसा दावा करने से पहले उसके आधिकारिक आंकड़ों की पुष्टि जरूरी है। भारत को कैसे मिल सकता है फायदा? भारत में सोने की मांग काफी बड़ी है और घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अगर ऑस्ट्रेलिया में आने वाले वर्षों में सोने का उत्पादन बढ़ता है, तो भारतीय आयातकों के लिए सप्लाई का एक अतिरिक्त विकल्प तैयार हो सकता है। इसके तीन संभावित फायदे हो सकते हैं: हालांकि, ऑस्ट्रेलिया में निकाला गया सोना अपने आप भारत नहीं पहुंचेगा। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि उत्पादन कितना बढ़ता है, कंपनियां किस देश को निर्यात करती हैं और भारतीय आयातकों के साथ किस तरह के व्यापारिक समझौते होते हैं। क्या भारत में सस्ता हो जाएगा सोना? सोने की नई खोज की खबर सुनकर खरीदारों के मन में सबसे पहले यही सवाल आता है कि क्या अब Gold Price कम होगा? फिलहाल ऐसा कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत केवल उत्पादन पर निर्भर नहीं करती। निवेशकों की मांग, केंद्रीय बैंकों की खरीद, डॉलर की चाल और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी भाव को प्रभावित करती हैं। भारत में इसके अलावा रुपये और डॉलर की विनिमय दर, आयात शुल्क, टैक्स और घरेलू मांग का भी असर पड़ता है। इसलिए ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज बढ़ने के बावजूद भारतीय बाजार में कीमतें तुरंत कम होंगी, इसकी गारंटी नहीं है। ₹13,000 करोड़ के निवेश की खबर कितनी सही है? ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज पर खर्च बढ़ने के आंकड़े सामने आए हैं। लेकिन ₹13,000 करोड़ के निवेश को किसी खास नई खोज या दुनिया के सबसे बड़े सोना भंडार से जोड़ने के लिए संबंधित कंपनी और परियोजना के आधिकारिक दस्तावेजों की जरूरत है। इसलिए इस रकम को किसी एक नए गोल्ड रिजर्व की खोज पर खर्च हुई राशि बताने से पहले इसकी पुष्टि करना जरूरी है। खोज पर किया गया खर्च, जमीन में मौजूद कुल सोने का मूल्य और खनन परियोजना में कुल निवेश तीन अलग-अलग बातें हैं। आगे क्या होगा? ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज पर बढ़ता खर्च वैश्विक गोल्ड इंडस्ट्री के लिए अहम है। अगर आने वाले वर्षों में नए भंडार की पहचान होती है और उनसे व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो पाता है, तो इससे अंतरराष्ट्रीय सप्लाई के विकल्प बढ़ सकते हैं। भारत के लिए भी यह एक संभावित अवसर है। लेकिन नए सप्लायर की भूमिका, आयात पर असर और सोने की कीमतों में बदलाव का पता तभी चलेगा, जब वास्तविक उत्पादन और निर्यात के आंकड़े सामने आएंगे। फिलहाल, ऑस्ट्रेलिया की गोल्ड इंडस्ट्री पर नजर रखना जरूरी है, लेकिन नई खोज के नाम पर सोना सस्ता होने की उम्मीद करना अभी जल्दबाजी होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

इंदौर में 175 डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के अटैचमेंट खत्म, मूल पदस्थापना पर जॉइनिंग के बाद ही मिलेगा अक्टूबर का वेतन

स्वास्थ्य विभाग में मूल पदस्थापना के बजाय दूसरी जगह काम कर रहे 175 डॉक्टरों, नर्सों और अन्य कर्मचारियों के अटैचमेंट समाप्त कर दिए गए हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने 16 अक्टूबर को आदेश जारी कर सभी अटैचमेंट तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए। आदेश के बाद संबंधित कर्मचारियों को अपने मूल पदस्थापना स्थल पर वापस जाकर जॉइनिंग देनी होगी। ऐसा करने के बाद ही उन्हें अक्टूबर महीने का वेतन मिल सकेगा। स्वास्थ्य विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को आदेश का तत्काल पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। तत्काल कार्यमुक्त कर मूल पदस्थापना पर भेजने के निर्देश CMHO के आदेश के मुताबिक, संबंधित अधिकारियों को अटैचमेंट पर काम कर रहे कर्मचारियों को उसी दिन कार्यमुक्त कर उनके मूल पदस्थापना स्थल पर भेजना होगा। इसकी जानकारी CMHO कार्यालय को भी उपलब्ध करानी होगी। वेतन आहरण केंद्रों को निर्देश दिए गए हैं कि कर्मचारियों की मूल पदस्थापना पर उपस्थिति सुनिश्चित होने के बाद ही अक्टूबर का वेतन जारी किया जाए। इससे कर्मचारियों को अपने निर्धारित कार्यस्थल पर लौटना अनिवार्य होगा। अटैचमेंट जारी मिला तो जिम्मेदार अधिकारी पर होगी कार्रवाई स्वास्थ्य विभाग ने आदेश के पालन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। CMHO ने स्पष्ट किया है कि आदेश जारी होने के बाद भी कोई कर्मचारी या अधिकारी अटैचमेंट पर काम करता पाया गया, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसकी जिम्मेदारी संबंधित संस्था के प्रभारी की होगी। विभाग ने अधिकारियों को निर्देशों का पालन कराने और इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थाओं को भेजा गया आदेश यह आदेश सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक, देपालपुर, मानपुर, सांवेर और हातोद के खंड चिकित्सा अधिकारियों, महू सहित विभिन्न अस्पतालों के प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों, शहरी स्वास्थ्य संस्थाओं और मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक के प्रभारियों को भेजा गया है। आदेश में भोपाल में हुई बैठकों और 16 अक्टूबर को मुख्यालय स्तर से मिले निर्देशों का भी हवाला दिया गया है। सभी संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से आदेश लागू कराने के निर्देश दिए गए हैं।

नवरात्रि पर रायपुर सेंट्रल जेल में सेवा की मिसाल, काली माता सेवा समिति ने 1300 बंदियों को बांटे फल

नवरात्रि के अवसर पर काली माता सेवा समिति ने रायपुर सेंट्रल जेल में करीब 1300 बंदियों को फल वितरित किए। समिति ने यह पहल उन बंदियों के लिए की, जो नवरात्रि में उपवास रखकर माता रानी की आराधना कर रहे हैं। इस आयोजन के जरिए समिति ने सेवा, करुणा और मानवीय संवेदना का संदेश दिया। समिति के अध्यक्ष दीपक भारद्वाज (पोल्ले) ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य बंदियों के प्रति संवेदनशीलता और सेवा भाव को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की गलती या अपराध से उसके सुधरने और बेहतर जीवन जीने की संभावनाएं समाप्त नहीं हो जातीं। बंदियों के सुधार और पुनर्वास पर दिया जोर दीपक भारद्वाज ने कहा कि समाज को न्याय के प्रति सम्मान बनाए रखने के साथ-साथ सुधार और पुनर्वास की भावना को भी महत्व देना चाहिए। बंदियों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने से समाज में मानवीय मूल्यों को मजबूती मिलती है। समिति का मानना है कि जेल में बंद लोगों के साथ भी सम्मानजनक और मानवीय व्यवहार होना चाहिए, ताकि उनमें सकारात्मक बदलाव की भावना विकसित हो सके। पहले भी जेल में कर चुके हैं फल वितरण काली माता सेवा समिति के अनुसार, वह पहले भी कई बार जेल में बंदियों को फल वितरित कर चुकी है। समिति का कहना है कि नवरात्रि केवल पूजा-पाठ और उपवास तक सीमित पर्व नहीं है, बल्कि यह सेवा, करुणा और सद्भावना को जीवन में अपनाने का अवसर भी है। इसी भावना के साथ समिति के सदस्यों ने उपवास रखने वाले बंदियों तक फल पहुंचाए। आगे भी जारी रहेंगे सेवा कार्य समिति ने समाज में सेवा, सद्भावना और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए ऐसे आयोजन आगे भी जारी रखने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में अशोक त्रिपाठी, गुड्डू, सुनील प्रमुख, राजू भाई तारवानी और रामकृष्ण धीवर सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
वैभव सूर्यवंशी

IND vs WI T20: वैभव सूर्यवंशी का भरोसा कायम, 4 दिन में दूसरी पोस्ट; अब भी मौके का इंतजार

भारत और वेस्टइंडीज (IND vs WI) के बीच T-20 सीरीज के निर्णायक मुकाबले से पहले युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी एक बार फिर चर्चा में हैं। सीरीज में अब तक खेलने का मौका नहीं मिलने के बावजूद वैभव ने उम्मीद नहीं छोड़ी है। चार दिन के भीतर उनकी दूसरी सोशल मीडिया पोस्ट सामने आई है, जिसमें भरोसे का संदेश देखने को मिला। वैभव को इस सीरीज में अब तक मैदान पर उतरने का मौका नहीं मिला है। ऐसे में क्रिकेट फैंस के मन में एक ही सवाल है—क्या पांचवें टी-20 में उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा? Vaibhav Sooryavanshi की दूसरी पोस्ट ने खींचा ध्यान वैभव सूर्यवंशी की सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर फैंस के बीच चर्चा हो रही है। चार दिन में दूसरी पोस्ट आने के बाद उनके संदेश पर लोगों की नजरें टिकी हैं। हालांकि, पोस्ट को टीम में चयन या किसी खास फैसले से जोड़कर देखना सही नहीं होगा, क्योंकि प्लेइंग-11 में किसे मौका मिलेगा, इसका फैसला टीम मैनेजमेंट करता है। कम उम्र में अपनी बल्लेबाजी से पहचान बनाने वाले वैभव के लिए टीम के साथ रहना और मौके का इंतजार करना भी अनुभव का हिस्सा है। अब देखना होगा कि उन्हें इस सीरीज में खेलने का मौका मिलता है या नहीं। IND vs WI 5th T20: निर्णायक मुकाबले पर नजर भारत और वेस्टइंडीज की टी-20 सीरीज का पांचवां मुकाबला दोनों टीमों के लिए अहम है। सीरीज के आखिरी मैच में जीत हासिल करने वाली टीम खिताब अपने नाम करेगी। ऐसे में भारतीय टीम की प्लेइंग-11 को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। फैंस यह जानना चाहते हैं कि क्या टीम मैनेजमेंट इस मुकाबले में युवा खिलाड़ियों को मौका देगा। वैभव सूर्यवंशी का नाम भी इसी चर्चा में शामिल है। हालांकि, उनके खेलने को लेकर आधिकारिक पुष्टि के बिना किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। क्या वैभव सूर्यवंशी को मिलेगा डेब्यू का मौका? वैभव को लेकर उत्सुकता की एक बड़ी वजह उनकी कम उम्र और क्रिकेट में तेजी से बनी पहचान है। फैंस उन्हें भारतीय टीम की जर्सी में खेलते देखना चाहते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौका मिलना टीम की जरूरत और चयन रणनीति पर निर्भर करता है। फिलहाल वैभव के लिए इंतजार जारी है। पांचवें टी-20 में उनका नाम प्लेइंग-11 में शामिल होता है या नहीं, इसका पता टीम की आधिकारिक घोषणा के बाद ही चलेगा। क्रिकेट में हर खिलाड़ी को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। वैभव के समर्थकों को उम्मीद है कि उन्हें जल्द ही मैदान पर अपनी काबिलियत दिखाने का अवसर मिलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
लालकृष्ण आडवाणी

LK Advani Hospitalised ICU में भर्ती लालकृष्ण आडवाणी की सेहत कैसी? जानें ताजा अपडेट

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की सेहत को लेकर 17 अक्टूबर को ताजा जानकारी सामने आई है। 98 वर्षीय आडवाणी को सीने में संक्रमण (Chest Infection) की शिकायत के बाद दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है और डॉक्टरों की टीम उनकी निगरानी कर रही है। परिवार और समर्थकों के लिए यह खबर चिंता बढ़ाने वाली जरूर है, लेकिन फिलहाल राहत की बात यह है कि अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक उनकी स्थिति स्थिर है। डॉक्टर उनकी सेहत से जुड़ी जरूरी जांच कर रहे हैं और इलाज जारी है। LK Advani Health Update: अस्पताल में क्या चल रहा है इलाज? लालकृष्ण आडवाणी को शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 की शाम करीब 7:30 बजे अस्पताल लाया गया था। उन्हें सीने में संक्रमण की शिकायत के बाद पल्मोनरी विभाग में भर्ती किया गया। यहां डॉक्टरों की एक टीम उनकी सेहत पर नजर रख रही है और जरूरी मेडिकल जांच की जा रही है। 17 अक्टूबर तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनकी हालत स्थिर है। हालांकि, उनकी सेहत में आगे कितना सुधार हुआ है और अस्पताल से छुट्टी कब मिलेगी, इस बारे में अभी कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। पहले भी अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं लालकृष्ण आडवाणी लालकृष्ण आडवाणी को इससे पहले मई 2026 में भी उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई थी। दिसंबर 2024 में भी उन्हें अपोलो अस्पताल की ICU में रखा गया था। उस समय डॉक्टरों ने उनकी मेडिकल जांच और इलाज किया था। जून और जुलाई 2024 में भी उन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बढ़ती उम्र को देखते हुए उनकी सेहत पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मौजूदा समय में डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार जारी है। PM Modi ने हाल ही में की थी लालकृष्ण आडवाणी से मुलाकात लालकृष्ण आडवाणी के अस्पताल में भर्ती होने से कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2026 को उनके दिल्ली स्थित आवास पर मुलाकात की थी। इस दौरान प्रधानमंत्री ने उनसे आशीर्वाद लिया और सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान की सराहना की थी। आडवाणी लंबे समय तक बीजेपी के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं। पार्टी को राष्ट्रीय राजनीति में स्थापित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यही वजह है कि उनकी सेहत से जुड़ी खबर पर राजनीतिक जगत और उनके समर्थकों की नजर बनी हुई है। राम रथ यात्रा से उपप्रधानमंत्री तक का सफर लालकृष्ण आडवाणी का राजनीतिक सफर कई दशकों तक फैला रहा है। वह भारतीय जनता पार्टी के तीन बार राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे और पार्टी के विस्तार में अहम भूमिका निभाई। साल 1990 में निकाली गई उनकी राम रथ यात्रा ने राष्ट्रीय राजनीति में व्यापक चर्चा पैदा की थी। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद 2002 से 2004 तक वह भारत के उपप्रधानमंत्री रहे। देश की राजनीति में उनके लंबे योगदान को देखते हुए वर्ष 2024 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। LK Advani अब अगले हेल्थ अपडेट का इंतजार लालकृष्ण आडवाणी फिलहाल दिल्ली के अपोलो अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में हैं। 17 अक्टूबर तक सामने आई जानकारी के मुताबिक, उनकी हालत स्थिर है और सीने में संक्रमण के लिए इलाज चल रहा है। अब सभी की नजर अस्पताल की ओर से जारी होने वाले अगले हेल्थ अपडेट पर है। उनकी सेहत में सुधार, इलाज की स्थिति और डिस्चार्ज को लेकर नई जानकारी मिलने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल सबसे अहम बात यही है कि लालकृष्ण आडवाणी की हालत स्थिर बताई गई है और उनका इलाज जारी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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