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SIR

SIR & BLO Issues Supreme Court ने सुनवाई में कहा ड्यूटी अनिवार्य, पर Human Approach जरूरी

देश भर में चल रही Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के दौरान अनेक सरकारी कर्मचारियों को बूथ स्तर पर ड्यूटी दे दी गई है। रोज़मर्रा की नौकरी के साथ यह अतिरिक्त ज़िम्मेदारी कई जगहों पर मुश्किलें खड़ी कर रही थी। इसी मुद्दे पर Supreme Court of India ने एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है, जिसमें कर्तव्य भी है और राहत भी। सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट संदेश: जिम्मेदारी निभाना ज़रूरी अदालत ने कहा कि: इसमें BLOs, शिक्षक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, क्लर्क और अन्य सरकारी कर्मचारी शामिल हैं। लेकिन राहत भी: जरूरत पड़े तो Extra Staff लगाया जाए Supreme Court ने यह भी स्पष्ट कहा कि: यह निर्देश ऐसे समय आया है जब कई क्षेत्रों में कर्मचारी सुबह बहुत जल्दी और रात देर तक SIR कार्य कर रहे थे। कर्मचारियों की पीड़ा भी सुनी गई याचिका में बताया गया कि: सुप्रीम कोर्ट ने संवेदनशीलता के साथ कहा: यदि किसी कर्मचारी के पास वाजिब कारण है, वह ड्यूटी से छूट की मांग कर सकता है।राज्य सरकार को केस-टू-केस आधार पर विचार करना चाहिए। कानूनी स्थिति: FIR तक का अधिकार चुनाव आयोग के पास कानूनन अधिकार है कि: मुआवजे का प्रश्न याचिका में मांग की गई थी कि जिन कर्मचारियों की मृत्यु या नुकसान SIR कार्य के दौरान हुआ, उनके परिवार को मुआवजा मिले। Supreme Court ने कहा: यह परिवारों को न्याय पाने का सीधा रास्ता देता है। यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण है Human Touch: ड्यूटी भी, इंसानियत भी इस आदेश का सार यह है: “Democracy का पहिया तभी चलेगा, जब काम करने वाले इंसान टूटे नहीं।” हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Babri

Bengal में Babri Replica मस्जिद बनाने का विवाद और Humayun Kabir की सस्पेंशन

Trinamool Congress (TMC) के विधायक हुमायूँ कबीर ने मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में Babri Masjid की प्रतिकृति बनाने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि मस्जिद का नींव‑पत्थर 6 दिसंबर 2025 को रखा जाएगा। इस घोषणा ने राजनीतिक और सामाजिक हलचल मचा दी। Kabir का बयान विवाद और प्रतिक्रिया TMC की कार्रवाई आगे क्या हो सकता है पश्चिम बंगाल जैसे विविधतापूर्ण राज्य में ऐसे कदम सोच-समझकर ही उठाए जाने चाहिए। Humayun Kabir का विवाद यह सिखाता है कि धर्म और राजनीति का मेल बहुत संवेदनशील मुद्दा है, जिसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Putin

Vladimir Putin in India भारत-रूस के रिश्तों में नया मोड़, 2025 Summit से क्या-क्या होगा फायदेमंद?

भारत और रूस के रिश्ते हमेशा से भरोसे और साझेदारी पर टिके रहे हैं। दिसंबर 2025 में रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin का भारत दौरा इसी भरोसे को एक नए दौर में ले जाने जैसा माना जा रहा है। 4–5 दिसंबर को होने वाला यह India-Russia Annual Summit कई बड़े फैसलों और मजबूत आर्थिक-सामरिक समझौतों का मंच बन सकता है। यह लेख आपको पूरे दौरे की गहराई, संभावनाओं, चुनौतियों और दोनों देशों के रिश्तों पर इसके असर को आसान भाषा में समझाता है। क्या है इस बार के दौरे की खासियत? लगभग चार साल बाद, पुतिन भारत आ रहे हैं और यह यात्रा समय की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है।दुनिया कई भू-राजनीतिक चुनौतियों से गुजर रही है—ऊर्जा संकट, आर्थिक अस्थिरता, और बदलते सामरिक समीकरण।ऐसे समय में भारत और रूस की मुलाकात केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने वाली बातचीत है। Defence Cooperation: सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी में बड़ा कदम Trade & Economy: 2030 तक $100 Billion का Vision दोनों देशों का फोकस अब रक्षा से आगे बढ़कर व्यापार पर भी है।दौरे के दौरान: पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। इसमें शामिल होंगे: दोनों देश मिलकर 2030 तक $100 बिलियन bilateral trade का लक्ष्य बना रहे हैं। Energy Deals: भारत की जरूरतें, रूस के अवसर भारत की ऊर्जा सुरक्षा में रूस बड़ी भूमिका निभा रहा है।इस बार कच्चे तेल (crude oil), LNG, कोयला और उर्वरक की सप्लाई पर बड़े फैसले हो सकते हैं। ऊर्जा क्षेत्र में स्थिरता से भारत को राहत मिलेगी और रूस को दीर्घकालिक खरीदार। Labour Mobility Agreement: भारतीय युवाओं के लिए नए अवसर इस यात्रा का सबसे मानवीय और प्रभावशाली पहलू है एक संभावित Labour Mobility Pact। इससे: में भारतीय युवाओं को रूस में रोजगार के बड़े अवसर मिल सकते हैं। रूस की जनसंख्या घट रही है, जबकि भारत के पास कुशल जनशक्ति की बड़ी ताकत है—दोनों देशों के हित आपस में मिलते हैं। Space, Health, Technology: नए क्षेत्रों में कदम Gaganyaan से लेकर उपग्रह तकनीक तक, भारत-रूस साझेदारी पहले से ही मजबूत है।इस बार: जैसे क्षेत्रों में नई पहल शुरू होने की संभावना है। रणनीतिक नज़रिए से क्यों जरूरी है यह दौरा? दौरा दोनों देशों के रिश्तों को अगले दशक के लिए नई दिशा देगा। चुनौतियाँ भी कम नहीं इन चुनौतियों को समझना और संभालना दोनों देशों के लिए जरूरी होगा। पुतिन का भारत दौरा केवल protocol visit नहीं है।यह दोस्त से बढ़कर साझेदार जैसे रिश्ते का प्रतीक है—जहाँ defence एक मजबूत स्तंभ है और trade उसका नया इंजन बनने जा रहा है। अगर सभी प्रस्तावित समझौते वास्तविक रूप में आगे बढ़ते हैं, तो आने वाले वर्षों में भारत-रूस संबंध एक नई ऊँचाई पर पहुंच सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IndiGo

IndiGo Airlines क्रू शॉर्टेज के बीच सैकड़ों फ्लाइट्स कैंसल, DGCA ने मांगा जवाब

देश की सबसे बड़ी घरेलू एयरलाइन IndiGo इस समय ऐसे परिचालन संकट से गुजर रही है, जिसने हजारों यात्रियों की यात्रा योजनाएँ बिगाड़ दी हैं। बीते कुछ दिनों में दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और कई बड़े एयरपोर्ट्स पर इंडिगो की उड़ानें लगातार कैंसल और लंबे समय तक लेट हो रही हैं। कई लोग रातभर एयरपोर्ट पर फंसे रहे, कई की कनेक्टिंग फ्लाइट छूट गई, और बहुत-सी यात्राएँ आखिरी मिनट पर बिगड़ गईं। हालात इतने खराब बने कि DGCA को हस्तक्षेप करना पड़ा। आखिर इंडिगो में ये संकट क्यों आया? इंडस्ट्री सूत्रों और रिपोर्टों से सामने आई कुछ मुख्य वजहें: 1. Crew Shortage – पायलट और क्रू की भारी कमी नई FDTL (Flight Duty Time Limitations) नियमावली लागू होने के बाद क्रू की उपलब्धता कम हो गई। एयरलाइन आवश्यक संख्या में पायलट और कैबिन क्रू तैनात नहीं कर सकी। इसकी वजह से कई उड़ानों को मजबूरन कैंसिल या री-शेड्यूल करना पड़ा। 2. Technical Glitches – सिस्टम दिक्कतें कई एयरपोर्ट्स पर चेक-इन सिस्टम, बैगेज मैनेजमेंट और कोऑर्डिनेशन में तकनीकी दिक्कतें देखी गईं, जिससे लेट बढ़ता चला गया। 3. Airport Congestion – एयरपोर्ट पर भीड़ का दबाव सीजन पीक चल रहा है, ऐसे में भीड़ और अतिरिक्त ट्रैफिक ने देरी को और बढ़ा दिया। एयरलाइन शेड्यूल तेजी से एडजस्ट नहीं कर पाई। यात्रियों पर असर: नाराज़गी, इंतज़ार और उथल-पुथल यात्रियों के अनुभव बताते हैं कि लोगों में नाराज़गी जितनी बड़ी है, उतना ही भ्रम और थकान भी बढ़ी है। DGCA की कार्रवाई: जवाब तलब शुरू DGCA ने इंडिगो से तुरंत रिपोर्ट मांगी है और पूछा है कि यह अफरा-तफरी कैसे हुई।नियामक ने स्पष्ट कहा है कि एयरलाइन को IndiGo ने बयान जारी कर कहा है कि अगले 48 घंटों में हालात सामान्य करने की कोशिश की जा रही है। क्यों है यह मुद्दा इतना बड़ा? IndiGo भारत के घरेलू एविएशन मार्केट का सबसे बड़ा हिस्सा संभालती है। लाखों लोग रोजाना इसके शेड्यूल पर निर्भर होते हैं।ऐसे में फ्लाइट-कैंसिलेशन की यह लहर सिर्फ यात्रियों का भरोसा नहीं तोड़ती, बल्कि भारतीय उड्डयन व्यवस्था में मौजूद खामियों को भी उजागर करती है। यात्रियों के लिए उपयोगी सलाह अगर आपकी उड़ान आने वाले दिनों में इंडिगो से है, तो: इंडिगो का यह संकट सिर्फ एक एयरलाइन की अंदरूनी खराबी नहीं, बल्कि भारतीय एविएशन सेक्टर के दबाव और क्षमता की सच्चाई भी दिखाता है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में क्रू की कमी दूर होगी, तकनीकी दिक्कतें सुधरेंगी और यात्रियों को फिर वही भरोसेमंद सेवा मिलेगी जिसकी वजह से IndiGo देश की नंबर-1 एयरलाइन बन पाई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Imran Khan

PTI Protests और Imran Khan स्वास्थ्य अफवाहों के बीच राजनीतिक तनाव

पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री और PTI (Pakistan Tehreek-e-Insaf) के संस्थापक इमरान खान (Imran Khan) की सेहत को लेकर फैल रही अफवाहें देश की राजनीतिक हवा को गरमा रही हैं। सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि इमरान खान की हालत गंभीर है और उन्हें “death cell” में रखा गया है। इस लेख में हम आपको उनकी Sehat की वर्तमान स्थिति, परिवार और PTI के कदम, सरकार का रुख और देश में बढ़ते राजनीतिक तनाव की पूरी जानकारी देंगे। अफवाहों की शुरुआत और चिंता पिछले कुछ हफ्तों से सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि Imran Khan के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी गुप्त रखी जा रही है। उनके बेटे कासिम खान ने चिंता जताते हुए कहा कि पिता से संपर्क पूरी तरह बंद है और यह माहौल “psychological torture” जैसा बन गया है। PTI के नेताओं और समर्थकों ने “Proof of Life” की मांग की है और सरकार से सार्वजनिक रूप से उनकी स्थिति बताने की अपील की है। सोशल मीडिया पर #WhereIsImranKhan जैसे हैशटैग वायरल हो रहे हैं, जो आम जनता और समर्थकों की चिंता को दर्शाते हैं। परिवार और PTI का दबाव यह सिर्फ व्यक्तिगत चिंता नहीं है — PTI इसे मानवाधिकारों और संवैधानिक अधिकारों का मुद्दा भी मानती है। जेल प्रशासन और सरकार का बयान सरकार और जेल अधिकारियों ने बार-बार कहा है कि इमरान खान सुरक्षित और स्वस्थ हैं। उन्हें पूरी मेडिकल देखभाल, आहार और व्यायाम की सुविधा मिल रही है। हालांकि, अधिकारियों ने अभी तक परिवार और पार्टी के प्रतिनिधियों को उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी है। सरकार का आरोप है कि अफवाहें सोशल मीडिया और विदेशी मीडिया से फैल रही हैं, और इसका उद्देश्य देश में अस्थिरता पैदा करना है। बड़े पैमाने पर प्रदर्शन और राजनीतिक माहौल देश में राजनीतिक माहौल गरम है और हर कोई इस स्थिति पर नजर रख रहा है। क्यों मामला इतना संवेदनशील है Imran Khan सिर्फ एक पूर्व प्रधानमंत्री नहीं हैं, बल्कि देश में उनके समर्थकों का बड़ा नेटवर्क है। उनकी Sehat और सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की अनिश्चितता राजनीतिक अस्थिरता, मानवाधिकार और न्याय प्रणाली पर प्रश्न उठाती है। अगर सरकार स्थिति स्पष्ट नहीं करती है, तो देशभर में असंतोष और बड़े प्रदर्शन होने की संभावना है। वर्तमान स्थिति Imran Khan स्वास्थ्य और उनकी सुरक्षा को लेकर स्थिति लगातार बदल रही है। देश और दुनिया की नजरें इस पर टिकी हुई हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ditwah

Chennai Weather Alert Cyclone Ditwah के कारण Flood और Heavy Rain,Flights Cancelled

चक्रवात Ditwah सबसे पहले श्रीलंका (Sri Lanka) को प्रभावित किया। तेज बारिश, बाढ़ और landslide के कारण वहां भारी तबाही हुई, जिसमें 350+ लोग मृत और सैकड़ों लोग लापता हुए। इसके बाद यह India के दक्षिणी तटीय राज्यों की ओर बढ़ा। India Meteorological Department (IMD) ने Tamil Nadu, Puducherry और आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों में Red Alert जारी किया। Chennai और आसपास के जिले – Tiruvallur, Kancheepuram – सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। Chennai और Nearby Areas में क्या स्थिति है Heavy Rain और Flood Risk Cyclone Ditwah ने भारत में अपना “deep depression” रूप लिया, लेकिन इसका असर अभी भी जारी है। Weather experts का कहना है कि December 2–7 के बीच rainfall moderate to heavy बनी रहेगी। Sri Lanka से India तक – व्यापक असर हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Lok Sabha में Manickam Tagore का स्थगन प्रस्ताव, बीएलओ की मौत की राष्ट्रीय जांच की मांग

Lok Sabha में Manickam Tagore का स्थगन प्रस्ताव, बीएलओ की मौत की राष्ट्रीय जांच की मांग

कांग्रेस सांसद Manickam Tagore ने लोकसभा में एसआईआर (SIR) मुद्दे और बीएलओ (BLO) की संदिग्ध मौत को लेकर स्थगन प्रस्ताव पेश किया है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस पूरे मामले की राष्ट्रीय स्तर पर जांच कराने की मांग की। मणिकम टैगोर ने कहा कि बीएलओ की मौत सिर्फ एक हादसा नहीं है, बल्कि कई सवाल खड़े करती है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे कर्मचारियों की सुरक्षा और कामकाजी हालात पर सरकार को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। सांसद ने आरोप लगाया कि मामले को ठीक से नहीं देखा जा रहा है, इसलिए इसमें स्वतंत्र और पारदर्शी जांच जरूरी है। उन्होंने लोकसभा में कहा कि जब एक सरकारी कर्मचारी ड्यूटी के दौरान संदिग्ध हालात में जान गंवा देता है, तो यह पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी है। बीएलओ के परिवार को न्याय मिलना चाहिए और सच्चाई सामने आनी चाहिए। विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग की है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Balrampur

UP Road Accident Balrampur में बस और ट्रक की भिड़ंत में आग लगी, कई घायल

उत्तर प्रदेश के Balrampur में हुआ भयावह सड़क हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि तेज रफ्तार की एक गलती, कई परिवारों की ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल सकती है। मंगलवार तड़के एक निजी बस और तेज रफ्तार ट्रक की जोरदार टक्कर में तीन लोगों की मौत हो गई और दो दर्जन से ज्यादा यात्री घायल हुए। हादसा इतना भीषण था कि टक्कर के तुरंत बाद दोनों वाहनों में आग लग गई और मौके पर अफरा-तफरी मच गई। कैसे हुआ हादसा? प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रात के लगभग 2–3 बजे जब ज्यादातर लोग गहरी नींद में थे, उसी समय दिल्ली जा रही एक प्राइवेट बस की सामने से आ रहे ट्रक से भिड़ंत हो गई।भारी टक्कर के बाद बस एक बिजली के खंभे से जा टकराई। कहा जा रहा है कि इसी टक्कर के बाद शॉर्ट-सर्किट हुआ और आग तेजी से फैल गई। आग की लपटों ने कुछ ही मिनटों में बस और ट्रक, दोनों को अपनी चपेट में ले लिया। जिंदगी और मौत के बीच जूझते यात्री घायल यात्रियों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। कुछ यात्रियों को बेहतर इलाज के लिए दूसरे जिलों के बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया है। राहत-बचाव में प्रशासन की तेज कार्रवाई सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग मौके पर पहुंचे और बचाव अभियान शुरू किया।प्रशासन ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई है और घायलों के इलाज की पूरी जिम्मेदारी ली है।प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और लापरवाही को हादसे की मुख्य वजह बताया जा रहा है। 2025 में Balrampur में बढ़ते सड़क हादसे – एक बड़ी चेतावनी यह हादसा इस साल का पहला या अकेला बड़ा हादसा नहीं है।2025 में Balrampur में कई और गंभीर दुर्घटनाएँ सामने आ चुकी हैं: इन सभी घटनाओं को देखने के बाद साफ है कि Balrampur की सड़कें तेज रफ्तार और भारी वाहनों के लिए बेहद संवेदनशील होती जा रही हैं। सवाल जो उठते हैं… हादसों की बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि अब सिर्फ जांच या बयान देने भर से काम नहीं चलेगा।सड़क सुरक्षा की मजबूत व्यवस्था और सख्त नियम ही ऐसी त्रासदियों को रोक सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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LOK SABHA में जोरदार हंगामा: विपक्ष वेल में उतरा, खड़गे बोले— लोकतंत्र बचाना जरूरी

LOK SABHA में जोरदार हंगामा: विपक्ष वेल में उतरा, खड़गे बोले— लोकतंत्र बचाना जरूरी

Lok Sabha की कार्यवाही सोमवार को उस समय गरमा गई, जब विपक्षी सांसद विभिन्न मुद्दों को लेकर वेल में पहुंच गए। सांसदों ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कराना उनका हक है। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि “लोकतंत्र को बचाना आज सबसे जरूरी है। संसद में बहस हो, सवाल पूछे जाएं और जवाब भी मिले।” खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा से बच रही है। दूसरी ओर केंद्र सरकार ने कहा कि वह किसी भी मुद्दे पर बहस के लिए पूरी तरह तैयार है। लेकिन सरकार का कहना है कि विपक्ष बहस पर समय सीमा थोपने की कोशिश कर रहा है, जो संसद की परंपराओं के खिलाफ है। सरकार ने विपक्ष से शांतिपूर्ण चर्चा की अपील की। लोकसभा अध्यक्ष ने भी सांसदों से सदन की गरिमा बनाए रखने और व्यवधान न पैदा करने की अपील की। सदन में हंगामे के चलते कई बार कार्यवाही बाधित करनी पड़ी। अब सभी की नजर इस बात पर है कि अगली बैठक में क्या विपक्ष और सत्ता पक्ष किसी सहमति पर पहुंच पाते हैं या नहीं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Pinarayi

466 करोड़ का KIIFB मसाला बांड मामला ED ने Kerala CM Pinarayi Vijayan को भेजा नोटिस

केरल के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन (Pinarayi Vijayan) के लिए राजनीतिक और कानूनी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। Enforcement Directorate (ED) ने Kerala Infrastructure Investment Fund Board (KIIFB) और उसके वरिष्ठ अधिकारियों को 466 करोड़ रुपये के मसला बांड (Masala Bond) मामले में नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में CM Pinarayi Vijayan, पूर्व वित्त मंत्री थॉमस आयज़क (Thomas Isaac) और KIIFB के पूर्व CEO के.एम. अब्राहम (K.M. Abraham) को FEMA (Foreign Exchange Management Act) के संभावित उल्लंघन पर जवाब देने के लिए कहा गया है। नोटिस का कारण 2019 में KIIFB द्वारा जारी मसला बांड को लेकर ED की जांच जारी है। इन बांडों के जरिए विदेशों से केरल के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए लगभग 2,150 करोड़ रुपये जुटाए गए थे। ED का आरोप है कि इन फंड्स का इस्तेमाल FEMA नियमों के उल्लंघन के साथ किया गया हो सकता है। नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अभी यह केवल प्रारंभिक जवाब है, और इसमें व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य नहीं है। हालांकि, इससे KIIFB और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए कानूनी जिम्मेदारी तय हो सकती है। पृष्ठभूमि और पहले के मामले राजनीतिक और कानूनी असर विशेषज्ञों के अनुसार, अगर यह जांच आगे बढ़ती है, तो इससे केरल की सत्तारूढ़ सरकार और KIIFB के वरिष्ठ अधिकारियों पर बड़ा दबाव बन सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस मामले से 2025-26 चुनावों पर भी असर पड़ सकता है। आलोचक दावा कर रहे हैं कि बांड जारी करने और फंड उपयोग में केंद्रीय अनुमोदन का अभाव था। दूसरी ओर, समर्थक इसे राज्य के बुनियादी ढांचे के लिए वैध वित्तीय साधन मानते हैं। केरल के लिए यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक चुनौती भी बन गया है। ED का यह नोटिस राज्य सरकार और KIIFB के लिए एक चेतावनी जैसा है कि फंड के इस्तेमाल और वित्तीय लेन-देन में पूरी पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rahul Gandhi

Mallikarjun Kharge Shuddhikaran Row: मंच ‘शुद्ध’ कराने पर बवाल, Rahul Gandhi ने BJP-RSS को घेरा

 उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष Rahul Gandhi मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद कथित तौर पर मंच के ‘शुद्धिकरण’ को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इस मामले को लेकर Rahul Gandhi ने BJP और RSS पर जातिगत भेदभाव तथा ‘मनुवादी सोच’ को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। वहीं, BJP ने आरोपों से दूरी बनाते हुए मामले की जांच कराने की बात कही है। क्या है Haldwani Shuddhikaran विवाद? मल्लिकार्जुन खड़गे ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस की रैली को संबोधित किया था। रैली के कुछ दिन बाद कथित तौर पर कुछ लोगों ने मैदान में पूजा-पाठ और हवन कर ‘शुद्धिकरण’ किया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई खड़गे के दलित समुदाय से होने के कारण की गई। पार्टी ने इसे छुआछूत और जातिगत भेदभाव की मानसिकता का उदाहरण बताया है। हालांकि, BJP की ओर से कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया गया है। BJP नेताओं का कहना है कि रैली के दौरान लगाए गए कुछ नारों से धार्मिक भावनाएं आहत हुई थीं और इसी वजह से धार्मिक अनुष्ठान किया गया था। BJP ने इस कार्रवाई को खड़गे की जाति से जोड़ने पर भी सवाल उठाए हैं। Mallikarjun Kharge ने राज्यसभा में उठाया मुद्दा मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मामले को राज्यसभा में भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके भाषण के बाद उस मंच का ‘शुद्धिकरण’ किया गया, जिससे उन्हें बेहद अपमानित महसूस हुआ। खड़गे ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी व्यक्ति को उसकी जाति के आधार पर अपवित्र मानना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। उन्होंने इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ Untouchability Act के तहत कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग की। खड़गे का कहना है कि ऐसी घटनाएं केवल किसी एक व्यक्ति का अपमान नहीं हैं, बल्कि देश में सामाजिक समानता और संवैधानिक मूल्यों पर भी सवाल खड़े करती हैं। Rahul Gandhi का BJP-RSS पर हमला हल्द्वानी के इस विवाद पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कथित ‘शुद्धिकरण’ को दलितों के अपमान से जोड़ते हुए BJP और RSS पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इस तरह की सोच BJP-RSS की कथित ‘मनुवादी मानसिकता’ को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और छुआछूत तथा जातिगत भेदभाव के लिए आधुनिक भारत में कोई जगह नहीं होनी चाहिए। कांग्रेस ने इस मुद्दे को सामाजिक न्याय और दलित सम्मान से जोड़ते हुए सरकार से दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। क्या Rahul Gandhi ने SC/ST Act के तहत FIR की मांग की? इस मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार SC/ST Act के तहत FIR दर्ज कराने की स्पष्ट मांग राहुल गांधी की ओर से नहीं बताई गई है। रिपोर्टों में मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा Untouchability Act के तहत मामला दर्ज करने और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग का उल्लेख है। वहीं, राहुल गांधी ने घटना को दलितों के अपमान, जातिगत भेदभाव और कथित मनुवादी सोच से जोड़कर BJP-RSS पर राजनीतिक हमला किया। इसलिए खबर को पेश करते समय राहुल गांधी के बयान और खड़गे की कानूनी कार्रवाई की मांग को अलग-अलग रखना जरूरी है। BJP ने क्या कहा? BJP ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया है। पार्टी की ओर से कहा गया कि वह किसी भी तरह के भेदभावपूर्ण व्यवहार का समर्थन नहीं करती। केंद्रीय मंत्री और BJP के वरिष्ठ नेता जेपी नड्डा ने मामले की जांच का आश्वासन दिया। BJP नेताओं का कहना है कि घटना के पीछे धार्मिक कारण हो सकते हैं और इसे खड़गे की जाति से जोड़ना उचित नहीं है। अब इस मामले में जांच के परिणाम महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि इसी से यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित ‘शुद्धिकरण’ किसने कराया और इसके पीछे वास्तविक कारण क्या था। कांग्रेस ने राज्यपाल से भी की शिकायत मामले को लेकर कांग्रेस नेताओं ने उत्तराखंड के राज्यपाल से मुलाकात कर कथित ‘शुद्धिकरण’ की निष्पक्ष जांच की मांग भी की है। कांग्रेस का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की जाति के आधार पर किसी सार्वजनिक स्थान या मंच को ‘अपवित्र’ माना गया है, तो यह गंभीर सामाजिक और संवैधानिक मुद्दा है। Haldwani Row बना Political मुद्दा हल्द्वानी का ‘शुद्धिकरण’ विवाद अब स्थानीय घटना से आगे बढ़कर राष्ट्रीय राजनीति का मुद्दा बन गया है। कांग्रेस इसे Dalit dignity, social equality और constitutional values से जोड़ रही है, जबकि BJP कांग्रेस पर घटना को राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगा रही है। फिलहाल दोनों पक्षों के दावों के बीच इस मामले में जांच और संभावित कानूनी कार्रवाई पर सबकी नजर है। विवाद के आगे बढ़ने के साथ Rahul Gandhi, Mallikarjun Kharge, Haldwani Shuddhikaran Row, FIR और SC/ST Act जैसे मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में बने हुए हैं।
H-1B

H-1B Rules में बड़ा बदलाव: Trump हटाएंगे 60 Days Grace Period? Indian IT Professionals पर असर

अमेरिका में काम करने वाले भारतीय H-1B visa holders के लिए Donald Trump administration की immigration policies लगातार चिंता बढ़ा रही हैं। अब H-1B के तहत मिलने वाली 60 Days Grace Period को खत्म करने की तैयारी की खबरों ने भारतीय IT professionals के बीच नई चिंता पैदा कर दी है। अगर यह प्रस्ताव अंतिम रूप से लागू होता है, तो नौकरी जाने के बाद H-1B workers को अमेरिका में नई नौकरी तलाशने के लिए मिलने वाली मौजूदा 60 दिनों की राहत खत्म हो सकती है। इसके साथ ही H-1B visa से जुड़ी बढ़ी हुई लागत और दूसरे proposed immigration changes भी भारतीय professionals के लिए अमेरिका में नौकरी और long-term career planning को प्रभावित कर सकते हैं। क्या है H-1B 60 Days Grace Period? मौजूदा नियमों के तहत, अगर किसी H-1B worker की नौकरी समाप्त हो जाती है, तो कुछ परिस्थितियों में उसे अधिकतम 60 दिन या उसके authorized stay की समाप्ति तक, जो भी पहले हो, अमेरिका में रहने की अनुमति मिल सकती है। इस दौरान कर्मचारी: टेक्नोलॉजी सेक्टर में layoffs के दौरान यह grace period H-1B workers के लिए एक महत्वपूर्ण safety net बन गई है। Trump Administration क्यों बदलना चाहती है H-1B Rules? Trump administration लंबे समय से अमेरिकी workers को प्राथमिकता देने और foreign workers पर अमेरिकी कंपनियों की निर्भरता कम करने की नीति पर जोर देती रही है। प्रस्तावित बदलावों का व्यापक उद्देश्य H-1B program में ज्यादा सख्ती और oversight लाना है। हालांकि, 60-day grace period को खत्म करने का प्रस्ताव अभी अंतिम रूप से लागू नियम नहीं माना जा सकता। अंतिम regulatory process और effective date यह तय करेंगे कि बदलाव वास्तव में कब और किस रूप में लागू होगा। Indians पर सबसे बड़ा असर क्या होगा? H-1B program में भारतीय professionals की बड़ी हिस्सेदारी होने के कारण किसी भी बड़े बदलाव का असर भारतीयों पर विशेष रूप से पड़ सकता है। 1. Layoff के बाद बढ़ेगा Immigration Pressure अगर किसी भारतीय H-1B employee की नौकरी चली जाती है, तो मौजूदा 60 दिनों का buffer उपलब्ध नहीं होने पर उसे बहुत तेजी से नया employer या दूसरा वैध immigration option तलाशना पड़ सकता है। इससे layoffs का असर सिर्फ नौकरी खोने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अमेरिका में रहने की स्थिति भी तुरंत चिंता का विषय बन सकती है। 2. IT Professionals पर ज्यादा असर भारतीय H-1B workers की बड़ी संख्या technology और specialized professional roles में काम करती है। इसलिए software engineers, IT consultants, data professionals और दूसरे skilled workers के लिए नौकरी बदलने की समय-सीमा महत्वपूर्ण हो सकती है। नई व्यवस्था में companies के बीच job switch करने की प्रक्रिया को पहले से ज्यादा जल्दी पूरा करना जरूरी हो सकता है। 3. कम समय में Job Search का दबाव 60 दिन की grace period खत्म होने की स्थिति में कर्मचारी के पास नई नौकरी तलाशने के लिए कम flexibility होगी। ऐसे में कुछ workers को: H-1B Fee में भारी बढ़ोतरी से भी बढ़ी चिंता H-1B program में प्रस्तावित एक और बड़ा बदलाव इसकी लागत से जुड़ा है। Trump administration ने नए H-1B petitions से जुड़ी $103,265 की proposed fee को लेकर कदम उठाए हैं। यह समझना जरूरी है कि इसका अर्थ यह नहीं है कि हर H-1B employee को अपनी जेब से करीब $100,000 देना होगा। यह मुख्य रूप से employer-side cost से जुड़ा प्रस्ताव है। फिर भी इतनी बड़ी लागत कंपनियों के hiring decisions को प्रभावित कर सकती है। Indian IT Companies के लिए क्या बदल सकता है? H-1B rules में सख्ती और बढ़ी हुई लागत का असर भारतीय IT companies की US business strategy पर भी पड़ सकता है। कंपनियां संभावित रूप से: इसका मतलब यह हो सकता है कि आने वाले समय में भारतीय IT professionals के लिए US onsite opportunities की competition और बढ़ जाए। H-4 Visa पर रहने वाले परिवारों पर भी असर H-1B employee की immigration स्थिति का असर उसके परिवार पर भी पड़ सकता है। H-4 status पर अमेरिका में रहने वाले spouse और children के लिए भी primary H-1B holder की स्थिति महत्वपूर्ण होती है। अगर principal H-1B worker को नौकरी जाने के बाद जल्दी नया immigration solution नहीं मिलता, तो परिवार को भी relocation या दूसरे immigration options पर विचार करना पड़ सकता है। इसका असर बच्चों की schooling, spouse की employment और परिवार की financial planning पर भी पड़ सकता है। क्या हर H-1B worker को नौकरी जाते ही अमेरिका छोड़ना पड़ेगा? यह सबसे महत्वपूर्ण बात है। 60-day grace period खत्म करने का प्रस्ताव अगर लागू होता भी है, तो उसकी वास्तविक conditions अंतिम नियम में स्पष्ट होंगी। इसके अलावा H-1B worker की स्थिति उसके individual immigration circumstances, pending petitions, authorized stay और उपलब्ध दूसरे legal options पर निर्भर कर सकती है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि grace period हटते ही हर H-1B worker को नौकरी खत्म होने के अगले दिन अमेरिका छोड़ना पड़ेगा। क्या भारतीयों के लिए US में Jobs खत्म हो जाएंगी? ऐसा कहना भी सही नहीं होगा। अमेरिका की technology, healthcare, research, engineering और दूसरे specialized sectors में skilled professionals की मांग बनी हुई है। लेकिन नए नियमों से H-1B sponsorship की लागत और immigration uncertainty बढ़ सकती है। इसका सबसे बड़ा असर नए applicants और ऐसे professionals पर पड़ सकता है जिन्हें employer sponsorship की जरूरत है। H-1B Indians के लिए आगे क्या महत्वपूर्ण होगा? भारतीय H-1B professionals को आने वाले समय में immigration policy में होने वाले बदलावों पर नजर रखनी होगी। खासकर ये चार चीजें महत्वपूर्ण रहेंगी: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
PM Modi

PM Modi in Uzbekistan: SCO Summit से पहले पीएम मोदी का बड़ा बयान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) शनिवार को Uzbekistan और Kyrgyz Republic के चार दिवसीय दौरे के लिए रवाना हो गए। 29 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक चलने वाली इस यात्रा में पीएम मोदी पहले उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद जाएंगे। इसके बाद वह किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित होने वाले 26वें Shanghai Cooperation Organisation (SCO) Summit में हिस्सा लेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने दौरे से पहले कहा कि भारत SCO के सदस्य देशों के साथ मिलकर ऐसा क्षेत्र बनाने की दिशा में काम करेगा, जो आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से मुक्त हो। उन्होंने SCO के लिए भारत की प्राथमिकताओं को Security, Connectivity और Opportunity से जोड़ा है। PM Modi Uzbekistan Visit: द्विपक्षीय संबंधों पर होगी अहम बातचीत उज्बेकिस्तान की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। दोनों नेताओं के बीच भारत और उज्बेकिस्तान के संबंधों को और मजबूत करने के लिए कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। इस दौरान Trade and Investment, Defence, Energy, Education और Digital Connectivity जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होगा। भारत के लिए उज्बेकिस्तान Central Asia का एक महत्वपूर्ण साझेदार है। ऐसे में पीएम मोदी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच आर्थिक, सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। Tashkent में Shastri Memorial और Mahatma Gandhi Centre जाएंगे PM Modi ताशकंद में प्रधानमंत्री मोदी Lal Bahadur Shastri Memorial और Mahatma Gandhi Centre का दौरा भी करेंगे। इन कार्यक्रमों के जरिए भारत और उज्बेकिस्तान के बीच ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित किया जाएगा। भारत और Central Asia के बीच सदियों पुराने व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। मौजूदा दौर में दोनों पक्ष इन रिश्तों को आधुनिक आर्थिक और रणनीतिक सहयोग में बदलने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। SCO Summit 2026 में Terrorism पर भारत का सख्त रुख उज्बेकिस्तान दौरे के बाद पीएम मोदी 31 अगस्त और 1 सितंबर को बिश्केक में होने वाले 26वें SCO Summit में शामिल होंगे। यह सम्मेलन SCO की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। SCO Summit में regional security, terrorism, extremism, connectivity और economic cooperation जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। भारत लंबे समय से आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत कार्रवाई की वकालत करता रहा है। पीएम मोदी ने कहा है कि भारत SCO के माध्यम से ऐसे क्षेत्र के निर्माण के लिए काम करेगा, जो terrorism, separatism और extremism से मुक्त हो। उनका यह संदेश SCO Summit में भारत की सुरक्षा प्राथमिकताओं को स्पष्ट करता है। Security और Connectivity पर भी रहेगा फोकस SCO के मंच पर भारत के लिए Security, Connectivity और Opportunity प्रमुख प्राथमिकताएं हैं। मध्य एशिया के साथ बेहतर connectivity भारत के आर्थिक और रणनीतिक हितों के लिए महत्वपूर्ण है। व्यापार मार्गों, ऊर्जा सहयोग, डिजिटल कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा देने से भारत और Central Asian देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूती मिल सकती है। प्रधानमंत्री मोदी SCO Summit के दौरान अन्य सदस्य देशों के नेताओं के साथ Bilateral Meetings भी कर सकते हैं। इन बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर बातचीत की संभावना है। World Nomad Games के Opening Ceremony में शामिल होंगे PM Modi किर्गिस्तान दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी 6th World Nomad Games के Opening Ceremony में भी शामिल होंगे। यह आयोजन Central Asia की पारंपरिक संस्कृति, खेल और विरासत को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करता है। पीएम मोदी की इस कार्यक्रम में भागीदारी भारत और किर्गिस्तान के बीच people-to-people और cultural ties को और मजबूत करने का अवसर भी होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
RBI

EMI नहीं चुकाई तो क्या होगा? RBI Loan Recovery Rules में बदलाव, जानिए Bank क्या नहीं कर सकता

अगर आपने Personal Loan, Home Loan, Car Loan या किसी अन्य तरह का Loan लिया है और किसी वजह से EMI समय पर नहीं चुका पा रहे हैं, तो आपके लिए RBI के Loan Recovery Rules जानना बेहद जरूरी है। EMI डिफॉल्ट होने पर बैंक या NBFC बकाया रकम की Recovery कर सकता है, लेकिन इसके लिए उसे RBI के नियमों का पालन करना जरूरी है। कई लोग यह मान लेते हैं कि EMI मिस होने के बाद Recovery Agent घर आकर धमका सकता है या किसी भी समय फोन कर सकता है। ऐसा नहीं है। RBI ने Loan Recovery के दौरान ग्राहकों के सम्मान, Privacy और उचित व्यवहार को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए हैं। EMI Miss होने पर सबसे पहले क्या होता है? अगर आपकी EMI तय तारीख पर जमा नहीं होती है, तो बैंक इसे Overdue Payment के रूप में दर्ज कर सकता है। Loan Agreement के मुताबिक बैंक बकाया रकम के साथ लागू ब्याज या अन्य वैध Charges की मांग कर सकता है। अगर EMI लगातार Miss होती रहती है, तो बैंक ग्राहक से संपर्क कर सकता है और बकाया रकम चुकाने के लिए कह सकता है। लंबे समय तक भुगतान न होने पर बैंक अपने नियमों और लागू कानून के अनुसार Recovery Process आगे बढ़ा सकता है। इसलिए RBI के नियमों का मतलब यह नहीं है कि EMI नहीं चुकाने पर बैंक पैसा नहीं मांग सकता। नियम मुख्य रूप से यह तय करते हैं कि Recovery किस तरीके से की जा सकती है। RBI Loan Recovery Rules: Bank आपको कब कॉल कर सकता है? RBI के निर्देशों के अनुसार Overdue Loan की Recovery के लिए ग्राहक से सुबह 8 बजे से पहले और शाम 7 बजे के बाद संपर्क नहीं किया जाना चाहिए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि Recovery Agent ग्राहकों को अनुचित समय पर फोन करके परेशान न करें। अगर कोई Recovery Agent लगातार देर रात या सुबह-सुबह कॉल करता है, तो ग्राहक इस मामले की शिकायत संबंधित Bank या NBFC से कर सकता है। Recovery Agent आपको धमका नहीं सकता Loan की Recovery के लिए Bank या NBFC Recovery Agent की मदद ले सकता है, लेकिन Agent को ग्राहक के साथ धमकी, गाली-गलौज, अपमानजनक व्यवहार या मानसिक दबाव बनाने की अनुमति नहीं है। Recovery का उद्देश्य बकाया रकम की वसूली करना है, ग्राहक को डराना या परेशान करना नहीं। RBI ने Regulated Entities को अपने Recovery Agents की गतिविधियों पर उचित निगरानी रखने की जिम्मेदारी भी दी है। परिवार और दोस्तों को भी परेशान नहीं कर सकता Bank अगर आपकी EMI बकाया है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि Recovery Agent आपके परिवार, दोस्तों या परिचितों को परेशान करके आप पर दबाव बनाए। ग्राहक की Privacy और सम्मान का ध्यान रखना जरूरी है। किसी व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करना या उसके कर्ज की जानकारी का अनुचित तरीके से इस्तेमाल करना Recovery का स्वीकार्य तरीका नहीं है। क्या Bank घर आकर Recovery कर सकता है? बकाया Loan की Recovery के लिए Bank या उसका अधिकृत Recovery Agent ग्राहक से संपर्क कर सकता है। हालांकि, Recovery करते समय निर्धारित नियमों और कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। अगर Loan के बदले कोई Asset जैसे Car, Property या अन्य Security रखी गई है, तो Default की स्थिति में Bank के पास कानून और Loan Agreement के तहत Recovery के अधिकार हो सकते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि Recovery Agent अपनी मर्जी से जबरन सामान या संपत्ति पर कब्जा कर सकता है। Loan Default होने पर Credit Score पर भी असर पड़ सकता है EMI का लगातार भुगतान न करने का असर केवल Bank Recovery तक सीमित नहीं रहता। Loan Repayment History आपके Credit Profile को प्रभावित कर सकती है। अगर Loan Account में लगातार Default होता है, तो भविष्य में Loan या Credit Card लेने में परेशानी हो सकती है। इसलिए आर्थिक परेशानी होने पर EMI को नजरअंदाज करने के बजाय Bank से समय रहते संपर्क करना बेहतर होता है। Recovery Agent परेशान करे तो क्या करें? अगर कोई Recovery Agent RBI के नियमों का उल्लंघन करता है, तो ग्राहक को सबसे पहले संबंधित Bank या NBFC के Grievance Redressal Mechanism में शिकायत करनी चाहिए। शिकायत करते समय कॉल रिकॉर्ड, SMS, WhatsApp Message, Email या अन्य उपलब्ध सबूत सुरक्षित रखना उपयोगी हो सकता है। अगर Bank या NBFC से शिकायत का समाधान नहीं होता है, तो पात्र मामलों में RBI की Ombudsman व्यवस्था के तहत शिकायत की जा सकती है। क्या EMI नहीं भरने पर Bank Loan माफ कर देगा? नहीं। RBI के Recovery Rules का उद्देश्य ग्राहकों को अनुचित Recovery Practices से सुरक्षा देना है। इसका मतलब यह नहीं है कि EMI नहीं भरने पर Loan अपने आप माफ हो जाएगा। Bank अपने Loan Agreement और लागू कानून के अनुसार बकाया रकम की Recovery कर सकता है। लंबे समय तक Default की स्थिति में कानूनी कार्रवाई भी संभव है। EMI भरने में परेशानी हो तो क्या करें? अगर आपको लगता है कि किसी महीने या आने वाले समय में EMI भरना मुश्किल हो सकता है, तो Bank या NBFC से जल्द संपर्क करें। अपनी Financial Situation के बारे में जानकारी देकर उपलब्ध विकल्पों के बारे में पूछें। सबसे जरूरी बात यह है कि Recovery Agent के दबाव में आकर किसी अनजान व्यक्ति के Personal Account में पैसा जमा न करें। Payment हमेशा Bank/NBFC के अधिकृत माध्यम से ही करें। RBI Loan Recovery Rules का सबसे जरूरी सार EMI समय पर नहीं चुकाने पर Bank आपसे बकाया रकम की मांग कर सकता है और नियमों के अनुसार Recovery Process शुरू कर सकता है। लेकिन Recovery के दौरान Bank या उसके Agent को ग्राहक की Privacy और सम्मान का ध्यान रखना होगा। याद रखें: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CNG Price

Delhi CNG Price: CNG के दाम में ₹3.89 की बढ़ोतरी, अब ₹86.98 प्रति किलो मिलेगा गैस

दिल्ली-NCR में CNG इस्तेमाल करने वाले वाहन चालकों को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। CNG Price Hike के तहत इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने CNG की कीमत में ₹3.89 प्रति किलो की बढ़ोतरी की है। नई कीमतें 29 अगस्त 2026 से लागू हो गई हैं। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में CNG का रेट ₹83.09 प्रति किलो से बढ़कर ₹86.98 प्रति किलो हो गया है। यह 2026 में दिल्ली-NCR में CNG की पांचवीं कीमत बढ़ोतरी है। लगातार हो रही बढ़ोतरी से CNG कार चलाने वाले लोगों के साथ-साथ ऑटो, टैक्सी, कैब और कमर्शियल वाहनों के ड्राइवरों पर भी ईंधन खर्च का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। Delhi CNG Price: अब कितना हुआ CNG का रेट? IGL की नई कीमतों के मुताबिक दिल्ली-NCR के अलग-अलग शहरों में CNG के दाम इस प्रकार हैं: दिल्ली में CNG की कीमत में सीधे ₹3.89 प्रति किलो की वृद्धि हुई है। इसका मतलब है कि जो वाहन रोजाना बड़ी मात्रा में CNG की खपत करते हैं, उनके लिए महीने का fuel budget पहले की तुलना में और बढ़ जाएगा। Why CNG Price Increased: क्यों बढ़े CNG के दाम? IGL के अनुसार, CNG की कीमत बढ़ाने की मुख्य वजह imported LNG की बढ़ी हुई लागत है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में LNG की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर गैस की supply और import cost पर पड़ा है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण LNG की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ी है। इसके चलते global energy market में कीमतों पर दबाव बना हुआ है। IGL ने इसी बढ़ी हुई input cost के एक हिस्से को CNG की कीमतों में शामिल किया है। 2026 में पांचवीं बार महंगी हुई CNG दिल्ली-NCR में वर्ष 2026 के दौरान CNG की कीमतों में यह पांचवीं बढ़ोतरी है। इससे पहले भी इस साल अलग-अलग चरणों में CNG के दाम बढ़ाए गए थे। बार-बार होने वाली price hike के कारण CNG को economical fuel मानकर इस्तेमाल करने वाले वाहन मालिकों की लागत लगातार बढ़ रही है। हालांकि पेट्रोल और डीजल की तुलना में CNG अभी भी कई वाहन चालकों के लिए एक महत्वपूर्ण alternative fuel बनी हुई है। CNG Price Hike का आम लोगों पर क्या असर होगा? CNG की कीमत बढ़ने का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो रोजाना लंबी दूरी तय करते हैं। निजी CNG कारों के अलावा auto-rickshaw, taxi, cab और commercial vehicles चलाने वालों की operating cost भी बढ़ेगी। ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए बढ़ती fuel cost का सीधा असर उनकी daily earnings पर पड़ सकता है। अगर CNG की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो भविष्य में इसका असर transportation charges और passenger fares पर भी देखने को मिल सकता है। CNG महंगी होने से बढ़ सकता है Monthly Fuel Budget उदाहरण के तौर पर, अगर कोई वाहन प्रतिदिन 5 किलो CNG की खपत करता है, तो ₹3.89 प्रति किलो की अतिरिक्त कीमत के कारण उसका खर्च करीब ₹19.45 प्रतिदिन बढ़ जाएगा। 30 दिनों में यह अतिरिक्त खर्च लगभग ₹584 हो सकता है। जिन commercial vehicles की रोजाना CNG consumption इससे कहीं अधिक है, उनके लिए अतिरिक्त मासिक खर्च भी काफी ज्यादा होगा। आगे CNG के दाम पर क्या रहेगा असर? CNG की कीमतों पर आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय LNG prices, global gas supply और पश्चिम एशिया की स्थिति का असर महत्वपूर्ण रहेगा। अगर imported gas की लागत ऊंची बनी रहती है, तो domestic CNG prices पर भी दबाव बना रह सकता है। फिलहाल दिल्ली-NCR के लोगों को 29 अगस्त से CNG के लिए ₹3.89 प्रति किलो ज्यादा भुगतान करना होगा। दिल्ली में नई CNG कीमत ₹86.98 प्रति किलो पहुंच गई है, जबकि नोएडा और गाजियाबाद में यह ₹95.59 प्रति किलो हो गई है। CNG Price Hike 2026 की यह पांचवीं बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब बढ़ती fuel और transportation costs पहले से ही आम लोगों के बजट को प्रभावित कर रही हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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