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मेसी 22 मिनट में स्टेडियम से निकले;फैंस नाराज, कुर्सी-बोतलें फेंकीं:कोलकाता में एक झलक के लिए लोगों ने ₹12 हजार तक दिए

अर्जेंटीना के दिग्गज फुटबॉलर लियोनल मेसी करीब 14 साल बाद भारत पहुंचे हैं। उनके साथ उरुग्वे के स्टार स्ट्राइकर लुईस सुआरेज और अर्जेंटीना के मिडफील्डर रोड्रिगो डी पॉल भी भारत आए हैं। तीनों खिलाड़ी देर रात करीब 2:30 बजे कोलकाता एयरपोर्ट पर उतरे, जहां फैंस ने उनका जोरदार स्वागत किया। आज सुबह 11 बजे कोलकाता में 70 फीट ऊंचे मेसी स्टैच्यू का वर्चुअल उद्घाटन किया गया। इस खास मौके पर बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान भी मौजूद रहे। कार्यक्रम के बाद मेसी, सुआरेज और डी पॉल सॉल्ट लेक स्टेडियम पहुंचे, लेकिन वहां महज करीब 22 मिनट रुकने के बाद ही रवाना हो गए। इससे नाराज़ फैंस ने स्टेडियम में हंगामा किया और कुछ जगहों पर बोतलें व कुर्सियां फेंके जाने की खबर सामने आई। 3 दिन में 4 शहरों का दौरा लियोनल मेसी UNICEF (United Nations Children’s Fund) के ब्रांड एम्बेसडर हैं। इसी के तहत वे भारत में ‘GOAT India Tour’ पर आए हैं। यह दौरा 15 दिसंबर तक चलेगा, जिसमें वे 3 दिन में 4 शहरों—कोलकाता के अलावा हैदराबाद, मुंबई और नई दिल्ली—का दौरा करेंगे। कोलकाता में मेसी की पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान सौरव गांगुली से मुलाकात प्रस्तावित है। वहीं, मुंबई में उनकी सचिन तेंदुलकर से भी मुलाकात तय मानी जा रही है। 15 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भेंट के साथ मेसी का भारत दौरा समाप्त होगा। टिकटों की कीमत पर विवाद, राज्यपाल ने मांगी रिपोर्ट इस इवेंट से पहले पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी. वी. आनंद बोस ने तैयारियों को लेकर राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की थी। फैंस की ओर से लोक भवन में शिकायत दी गई थी कि टिकटों की कीमत बहुत ज्यादा है, जिससे आम लोग अपने पसंदीदा खिलाड़ी को देखने से वंचित रह जाएंगे। राज्यपाल को इस मामले में कई फोन कॉल और ई-मेल भी मिले थे। इन्हीं शिकायतों के बाद राज्यपाल ने पूरे मामले पर रिपोर्ट मांगी। 👉 More updates, breaking news aur exclusive details ke liye Deshharpal site visit karein deshharpal.com
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Shivraj Patil

Shivraj Patil Passes Away पूर्व गृह मंत्री शिवराज पाटिल का निधन

भारत की राजनीति के संयमित और सादगी-भरे चेहरों में से एक, पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल (Shivraj Patil) अब हमारे बीच नहीं रहे। 12 दिसंबर 2025 की सुबह, महाराष्ट्र के लातूर स्थित उनके आवास पर उनका 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। पिछले कुछ समय से वे अस्वस्थ थे और परिवार के साथ ही रह रहे थे। उनके निधन के साथ भारतीय राजनीति ने एक ऐसा नेता खो दिया, जिसकी पहचान शांति, मर्यादा और धैर्य थी। पाटिल अपने पीछे बेटे शैलेश पाटिल, बहू अर्चना और दो पोतियों को छोड़ गए। Shivraj Patil: एक विनम्र नेता की लंबी राजनीतिक यात्र Shivraj Patil का करियर लगभग चार दशकों में फैला रहा।उनका सफर एक नगरपालिका अध्यक्ष के रूप में शुरू हुआ, फिर वे महाराष्ट्र विधानसभा पहुंचे और उसके बाद राष्ट्रीय राजनीति के शीर्ष पर पहुंच गए। मुख्य पद जिनसे वे देश की राजनीति में पहचान बने: उनकी छवि एक ऐसे नेता की थी जो कानून, संविधान और संसदीय परंपराओं के प्रति बेहद संवेदनशील थे। संसद में उनकी भाषा और संयम आज भी उदाहरण के रूप में याद किया जाता है। 26/11 के बाद दिया था नैतिक जिम्मेदारी का उदाहरण गृह मंत्री के रूप में पाटिल का कार्यकाल चुनौतियों भरा रहा।26/11 मुंबई आतंकी हमले के बाद देशभर में सुरक्षा पर उठे सवालों के बीच उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया। उस समय उनका निर्णय कई लोगों के लिए राजनीतिक ईमानदारी का प्रतीक बना। देशभर से श्रद्धांजलि, PM–President ने जताया शोक उनके निधन पर राजनीतिक जगत में गहरा दुख व्यक्त किया गया। एक सादा और शांत व्यक्तित्व – जनता के लिए समर्पित जीवन Shivraj Patil को उनके समर्थक हमेशा याद रखेंगे—उनकी सादगी,उनकी शांत भाषा,और जनता के प्रति उनका कर्तव्यबोध। वे उन नेताओं में से थे जो कम बोलते थे, लेकिन जिस काम को हाथ में लेते थे, उसे पूरी गंभीरता से निभाते थे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Goa

Goa Club Tragedy एक ही Delhi पते से चल रहीं 42 कंपनियाँ, जांच में बड़ा खुलासा

गोवा (Goa) के लोकप्रिय नाइटलाइफ़ सर्किट को हिला देने वाली Goa Nightclub Fire Tragedy के बाद अब जांच कई नए मोड़ ले चुकी है। 6 दिसंबर 2025 को “Birch by Romeo Lane” क्लब में लगी भीषण आग में दर्जनों लोगों की जान चली गई। हादसे की गूंज कम नहीं हुई थी कि जांच एजेंसियों ने क्लब के सह–मालिक सौरभ और गौरव लूथरा की कारोबारी दुनिया में एक चौंकाने वाला नेटवर्क खोज निकाला—42 कंपनियों का विशाल सेट-अप, वो भी एक ही दिल्ली पते पर रजिस्टर्ड। यह खुलासा न सिर्फ जांच को नई दिशा देता है, बल्कि लोगों में यह सवाल भी बढ़ा रहा है कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर एक ही पते से कंपनियाँ क्यों चल रही थीं। एक ही Delhi Address पर 42 Companies—जांच में बड़ा Surprise जांच रिकॉर्ड दिखाते हैं कि लूथरा बंधुओं से जुड़ी सभी कंपनियाँ 2590, Ground Floor, Hudson Line, Delhi पर रजिस्टर हैं।इतनी बड़ी संख्या में कंपनियों का एक ही पते पर दर्ज होना बेहद असामान्य माना जाता है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थिति आमतौर पर Shell Companies, paper-based entities या layered business structures की ओर इशारा करती है। इन कंपनियों में कई नाम हॉस्पिटैलिटी और फूड सेक्टर से प्रेरित लगते हैं—जैसे Being GS Hospitality, G3S Foodshala, Azizaa Food Studio LLP आदि।लेकिन कई फर्मों में ऑफिस, टीम या बिज़नेस एक्टिविटी के ठोस सबूत न मिलने से एजेंसियाँ इनके वास्तविक उद्देश्य को लेकर सतर्क हुई हैं। जांच एजेंसियों को Shell Company Pattern का शक कई रिपोर्टों के अनुसार शुरुआती जांच में निम्न बातें सामने आई हैं: हालाँकि यह सब अभी जांच का हिस्सा है। किसी भी वित्तीय गड़बड़ी या अवैध गतिविधि की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए सभी निष्कर्ष फिलहाल प्रारंभिक संकेत माने जा रहे हैं। थाईलैंड में हिरासत से बढ़ा मामला, भारत कर रहा प्रत्यर्पण की तैयारी हादसे के बाद लूथरा बंधु भारत से बाहर चले गए थे। इंटरपोल और भारतीय एजेंसियों की कार्रवाई के बाद दोनों को Phuket, Thailand में हिरासत में लिया गया।अब भारत सरकार उनकी कानूनी वापसी (extradition) की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है ताकि जांच पूरी की जा सके। आग, अव्यवस्थाएँ और अब आर्थिक जांच—कहानी हुई और जटिल क्लब में हुई मौतों के बाद सुरक्षा मानकों, अवैध निर्माण और लाइसेंस संबंधित चूक की जांच पहले से ही जारी थी।लेकिन 42 कंपनियों के इस नेटवर्क के सामने आने से अब पूरा मामला business background checks, financial scrutiny और corporate compliance के कोण से भी देखा जा रहा है। जांच एजेंसियाँ यह स्पष्ट करना चाहती हैं कि: आगे की राह अधिकारियों ने सभी कंपनियों के documents, transactions, partners, GST records, audit reports और operation trail की जांच शुरू कर दी है।जैसे-जैसे जानकारी सामने आएगी, यह समझा जा सकेगा कि यह पूरी संरचना एक सामान्य कारोबारी नेटवर्क था या कुछ और जटिल। फिलहाल जनता, उद्योग जगत और गोवा टूरिज़्म सभी की नज़रें इस जांच पर टिकी हैं—क्योंकि यह मामला केवल एक हादसा नहीं, बल्कि भारत के nightlife sector में safety और transparency पर बड़ा सवाल भी खड़ा करता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Modi

Modi-Putin Car Photo अमेरिका में कांग्रेस में क्यों बनी चर्चा?

वाशिंगटन: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Modi) और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की हालिया कार यात्रा की तस्वीर ने अमेरिकी कांग्रेस में हलचल मचा दी। डेमोक्रेट सांसद सिडनी कामलाजर-डोव ने इस फोटो को “हजार शब्दों के बराबर पोस्टर” बताते हुए चेतावनी दी कि अमेरिका की हालिया नीतियों से भारत रूस के और करीब जा सकता है। सांसद ने कहा कि ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए उच्च टैरिफ और व्यापार प्रतिबंध न केवल भारत-यूएस संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं, बल्कि वैश्विक रणनीति में भी बदलाव ला सकते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका को भारत के साथ मजबूत और भरोसेमंद रिश्ते बनाए रखने चाहिए। तस्वीर में क्या है खास? कार में Modi और Putin आराम से बैठे दिख रहे हैं, जो उनके गहरे और गर्म संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है। अमेरिकी कांग्रेस में इस तस्वीर का इस्तेमाल एक चेतावनी के रूप में किया गया कि अगर अमेरिका भारत के साथ सहयोग में कठिनाइयाँ पैदा करता है, तो भारत रूस के करीब हो सकता है। व्यापार और रणनीतिक असर हाल ही में अमेरिका ने भारत पर कई निर्यात वस्तुओं पर 50% तक के टैरिफ लगाए हैं। इस कदम को कुछ विशेषज्ञ “अमेरिका द्वारा भारत को दबाव में लाने की कोशिश” कहते हैं। इसके चलते दोनों देशों के बीच ट्रेड तनाव बढ़ा है और रणनीतिक साझेदारी पर असर पड़ सकता है। भारत अपनी विदेश नीति में स्ट्रैटेजिक ऑटोमॉमी को महत्व देता है। रूस के साथ करीबी रिश्ते बनाए रखना उसकी वैश्विक रणनीति का हिस्सा है। लेकिन अमेरिका की कड़ी नीतियों से भारत रूस के और करीब जा सकता है, यह चिंता अमेरिकी नेताओं को है। अमेरिकी संसद की चेतावनी सांसद कामलाजर-डोव ने कहा कि ट्रंप प्रशासन की यह रणनीति “कान काटने जैसा” है — यानी अमेरिका खुद को नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि अमेरिका को भारत के साथ सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम करना चाहिए, क्योंकि मजबूत US-India रिलेशनशिप दोनों देशों के लिए फायदेमंद है। यह घटना दिखाती है कि वैश्विक राजनीति में संकेत और प्रतीकों का महत्व बहुत बड़ा है। कभी-कभी एक तस्वीर भी देशों के रिश्तों और रणनीति पर गहरा प्रभाव डाल सकती है। Modi-Putin कार फोटो ने सिर्फ मीडिया में चर्चा नहीं बनाई, बल्कि यह दुनिया को संकेत दे गया कि भारत अपनी विदेश नीति में संतुलन बनाये रखने में गंभीर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rajasthan

Rajasthan एथेनॉल प्रोजेक्ट के विरोध में हिंसा, Hanumangarh में आगजनी व बवाल

Rajasthan के हनुमानगढ़ में एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर चल रहा तनाव सोमवार को अचानक बढ़ गया। कई दिनों से विरोध कर रहे किसानों ने टिब्बी इलाके में हुई महापंचायत के बाद फैक्ट्री साइट की ओर कूच किया। भीड़ बड़ी थी, गुस्सा भी उतना ही। पुलिस ने बैरिकेड लगाकर रास्ता रोकने की कोशिश की, लेकिन किसान आगे बढ़ते गए और देखते-देखते माहौल बिगड़ गया। कैसे भड़की हिंसा? प्रदर्शन के बीच कुछ लोगों ने फैक्ट्री की दीवार गिरा दी। उसके बाद भीड़ में मौजूद उग्र समूह ने निर्माणाधीन परिसर में खड़े दर्जनों वाहनों को आग लगा दी। रिपोर्टों के मुताबिक 10 से 16 वाहन— जिनमें पुलिस की जीपें, मशीनें और निजी गाड़ियाँ शामिल थीं — जलकर पूरी तरह नष्ट हो गए।स्थिति तेजी से बिगड़ती देखकर पुलिस को लाठीचार्ज, आंसू-गैस और रबर बुलेट तक का इस्तेमाल करना पड़ा। इस झड़प में कई किसान, पुलिसकर्मी और आसपास मौजूद लोग घायल हो गए। क्यों भड़का इतना विरोध? किसानों का कहना है कि एथेनॉल फैक्ट्री उनके खेतों, भूजल और हवा—तीनों को नुकसान पहुंचा सकती है। उनका डर साफ है: किसानों का तर्क है कि “विकास ज़रूरी है, लेकिन हमारी ज़िंदगी और खेत किस कीमत पर?” फैक्ट्री और प्रशासन का पक्ष फैक्ट्री प्रबंधन का कहना है कि यह प्रोजेक्ट Zero Liquid Discharge Technology पर आधारित है, जिसमें गंदा पानी रिसने का खतरा नहीं होगा। कंपनी दावा करती है कि स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।प्रशासन भी यही कहता है कि सभी पर्यावरणीय मानकों का पालन किया जाएगा। लेकिन ग्रामीणों का भरोसा टूट चुका है—उन्हें लगता है कि वादों की बजाय व्यवहार ज्यादा मायने रखता है। घटना के बाद क्या बदलाव हुए? हिंसा रोकने के लिए जिला प्रशासन ने तुरंत: माहौल अभी भी तनावपूर्ण है, लेकिन नियंत्रण में बताया जा रहा है। आगे क्या? स्थानीय लोगों का कहना है कि समस्या फैक्ट्री से ज्यादा बातचीत की कमी है। किसानों को लगता है कि उनकी चिंता को गंभीरता से नहीं लिया गया।यदि कंपनी और प्रशासन, किसानों को पारदर्शिता के साथ भरोसा दिलाए—पर्यावरण परीक्षण, पानी की खपत, कचरा प्रबंधन और स्थानीय रोजगार पर स्पष्ट लिखित गारंटी दे—तो माहौल शांत हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Goa

Goa Fire हादसा Thailand में लूथरा ब्रदर्स हिरासत में, हथकड़ी में पहली तस्वीर सामने

गोवा (Goa) में 6 दिसंबर 2025 की रात शुरू हुई एक पार्टी कुछ ही मिनटों में दर्द और अफरा-तफरी का सबसे बड़ा हादसा बन गई। अर्पोरा स्थित Birch by Romeo Lane नाइटक्लब में लगी आग ने 25 लोगों की जान ले ली—कुछ पर्यटक, कुछ कर्मचारी, और कुछ वे लोग जो बस एक खुशगवार रात बिताने आए थे। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है—इतना बड़ा क्लब बिना सुरक्षा इंतज़ाम के कैसे चल रहा था? आग कैसे फैली — चंद सेकंड में मची तबाही प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार क्लब के अंदर चल रहे फायर-शो के दौरान एक चिंगारी ने सजावट में लगी ज्वलनशील सामग्री को पकड़ लिया।आग तेजी से फैली और धुआँ इतना घना था कि बाहर निकलने का रास्ता ढूँढना भी मुश्किल हो गया। क्लब में: ये सभी बातें बाद में पुलिस और प्रशासन की शुरुआती रिपोर्ट में सामने आईं। हादसे के बाद असली सवाल: मालिक कहाँ गायब हो गए? क्लब के मालिक सौरभ लुथरा और गौरव लुथरा पर गंभीर धाराओं में FIR दर्ज हुई।लेकिन जांच शुरू होते ही दोनों भाई भारत छोड़कर थाईलैंड पहुँच चुके थे।उनकी फ्लाइट रात में ही बुक कराई गई, जब गोवा में लोग अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। इस भागदौड़ ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया। सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय लोगों तक सभी में गुस्सा बढ़ गया। पासपोर्ट रद्द — सरकार का बड़ा एक्शन गोवा (Goa) पुलिस ने विदेश मंत्रालय (MEA) को दोनों भाइयों के पासपोर्ट रद्द करने की सिफारिश की।सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पासपोर्ट सस्पेंड/इम्पाउंड कर दिए। इसका मतलब साफ है—वह देश से बाहर हैं तो भी वापस लाए जा सकते हैं, और भारत लौटे बिना बचना असंभव है। Interpol का Blue Corner Notice भी जारी किया गया है। प्रशासन की सख़्त कार्रवाई — अवैध निर्माण पर बुलडोज़र हादसे के बाद प्रशासन ने क्लब से जुड़े सभी निर्माणों की जांच शुरू की।कई हिस्सों को अवैध पाया गया, जिन पर कार्रवाई करते हुए बुलडोज़र चलाया गया। मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने ऐलान किया कि: लोगों की प्रतिक्रिया — सिर्फ दुख नहीं, गुस्सा भी स्थानीय लोग, पर्यटक और क्लब इंडस्ट्री से जुड़े लोग एक ही बात कह रहे हैं:अगर सुरक्षा नियम लागू होते, तो 25 परिवार आज उजड़ते नहीं। कई लोग क्लब के पुराने वीडियो साझा कर रहे हैं, जिनमें भीड़ भरे माहौल में सुरक्षा इंतज़ामों की कमी साफ दिखती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Surya Kant

CJI Surya Kant Remarks on Rohingya 44 Former Judges का जोरदार समर्थन और विवाद

दिसंबर 2025 में भारत की सुप्रीम कोर्ट में रोहिंग्या शरणार्थियों से जुड़े एक मामले ने सुर्खियां बटोरीं। इस मामले में Chief Justice of India (CJI) Surya Kant की टिप्पणी पर विवाद खड़ा हो गया। कोर्ट ने रोहिंग्या प्रवासियों के कानूनी दर्जे और भारत में उनकी स्थिति पर सवाल उठाए, जिससे कुछ पूर्व न्यायाधीश और कानूनी विशेषज्ञों ने आपत्ति जताई। क्या हुआ था: CJI की टिप्पणी सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत की पीठ ने पूछा कि क्या ऐसे लोग, जो भारत में अनधिकृत रूप से आए हैं, उन्हें “रेड कार्पेट” बिछाकर स्वागत करना चाहिए। इस पर कई पूर्व जजों और वरिष्ठ वकीलों ने कहा कि इस तरह के सवाल शरणार्थियों की गरिमा और संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ हैं। उनके अनुसार, कोर्ट को ऐसे मामलों में संवैधानिक और मानवाधिकार दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। 44 Former Judges का समर्थन इस विवाद के जवाब में 44 पूर्व न्यायाधीशों ने एक संयुक्त बयान जारी कर CJI सूर्यकांत के खिलाफ “motivated campaign” को गलत बताया। उनके प्रमुख बिंदु थे: पूर्व जजों ने जोर देकर कहा कि अदालत का काम संवैधानिक दायित्व और मानव गरिमा दोनों को ध्यान में रखकर न्याय करना है। क्यों है यह विवाद महत्वपूर्ण यह मामला सिर्फ एक टिप्पणी का विवाद नहीं है। यह मानवाधिकार, राष्ट्रीय सुरक्षा और कानूनी प्रक्रिया के बीच संतुलन पर सवाल खड़ा करता है। भारत में शरणार्थियों के लिए कोई स्थायी कानून नहीं है, इसलिए अदालतें इस पर निर्णय लेते समय संवेदनशीलता और विवेक दोनों दिखाती हैं। साथ ही, यह विवाद यह भी दिखाता है कि: CJI सूर्यकांत के विवादित बयान और 44 पूर्व जजों के समर्थन ने एक बार फिर न्यायपालिका में संतुलन, स्वतंत्रता और संवैधानिक जिम्मेदारी पर बहस छेड़ दी है। यह मामला हमें याद दिलाता है कि शरणार्थियों और प्रवासियों के साथ न्याय करते समय मानवता, संवैधानिक अधिकार और कानूनी विवेक को एक साथ रखना कितना जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Australia

Australia Social Media Rules बच्चों पर Facebook, Instagram, TikTok Ban

Australia में 10 दिसंबर 2025 से एक बड़ा बदलाव शुरू हुआ है। अब 16 साल से कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया अकाउंट नहीं बना सकते। यह नियम किसी छोटे शहर या राज्य में नहीं, बल्कि पूरे देश में लागू हुआ है। इसे दुनिया का पहला ऐसा कदम माना जा रहा है जहां एक सरकार ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म्स पर इतनी सख्ती से नियंत्रण कर रही है। क्यों लिया गया यह फैसला? कई सालों से विशेषज्ञ और माता-पिता एक ही बात कह रहे थे— “सोशल मीडिया बच्चों के दिमाग और आत्मविश्वास पर असर डाल रहा है।” इसी चिंता के बीच सरकार ने कानून बनाया। उद्देश्य साफ है: सरकार का कहना है कि बड़े प्लेटफ़ॉर्म बच्चों से मुनाफा कमाते हैं, लेकिन जिम्मेदारी नहीं लेते। नया नियम यही संतुलन बदलने की कोशिश है। किन प्लेटफ़ॉर्म्स पर बैन? प्रतिबंध सबसे लोकप्रिय सोशल मीडिया ऐप्स पर लागू है: अगर कोई प्लेटफ़ॉर्म नियम तोड़ता है, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। लाखों अकाउंट बंद: बच्चों की मिलीजुली प्रतिक्रिया नियम लागू होते ही लाखों किशोरों के अकाउंट बंद या हटाए गए।बहुत से बच्चों ने आखिरी पोस्ट डाले: “मुझे दोस्तों की याद आएगी।”“ये अंत जैसा लग रहा है, लेकिन शायद अच्छा भी हो।” किसी ने राहत की सांस ली, तो किसी को गुस्सा आया।पर एक बात स्पष्ट थी — यह बदलाव छोटा नहीं है। माता-पिता क्या कह रहे हैं? कुछ माता-पिता ने राहत महसूस की: “कम फोन, ज्यादा पढ़ाई… शायद अब घर में शांति होगी।” दूसरी तरफ कुछ परिवार चिंतित भी हैं: “कई बच्चे ऑनलाइन मदद और दोस्ती पाते हैं। पूरी तरह बैन करना सही तो नहीं लगता।” यह द्वंद्व पूरे देश में देखा जा रहा है। क्या इससे बच्चे छुपकर इंटरनेट इस्तेमाल करेंगे? विशेषज्ञों को डर है: यानी, समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होती — बस दिशा बदलती है। क्या यह दुनिया के लिए उदाहरण बनेगा? दुनिया भर की नजरें अब ऑस्ट्रेलिया पर हैं। किसी भी तरह, यह कदम डिजिटल दुनिया के इतिहास में एक टर्निंग पॉइंट है। आगे क्या? अगले महीनों में देखा जाएगा: सच यह है:सोशल मीडिया सिर्फ ऐप नहीं है—यह आज के बच्चों का सामाजिक जीवन भी है।उसके दरवाज़े बंद करना आसान है, लेकिन उसकी जगह क्या आएगा — यह बड़ा सवाल है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Goa

Goa Night Club Fire गोवा क्लब हादसा, 25 मौतें Luthra Brothers फरार, Ajay Gupta Arrest

गोवा (Goa) की सर्द रात, तेज़ संगीत, भरी भीड़ और अचानक उठती आग।6 दिसंबर 2025 की वह रात कभी नहीं भूली जाएगी।अर्पोरा के मशहूर नाइट क्लब ‘Birch by Romeo Lane’ में लगी भीषण आग ने देखते ही देखते 25 जिंदगियाँ छीन लीं।यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि लापरवाही की दर्दनाक कहानी बन गया। आग कैसे लगी? जांच के शुरुआती निष्कर्षों में सामने आया कि: धुआँ इतनी तेजी से फैला कि कई लोग भाग ही नहीं पाए।आँखों के सामने जलती हुई ज़िंदगियाँ —जो बाहर निकले, उनकी आवाज़ आज भी कांपती है। क्लब का मालिक कौन? इस नाइट क्लब का संचालन Luthra Brothers – सौरभ और गौरव लूथरा करते थे।उनके साथ Ajay Gupta और Surinder Khosla भी पार्टनर बताए जाते हैं। हादसे के तुरंत बाद: Ajay Gupta Arrest – पहली प्रतिक्रिया दिल्ली में पुलिस ने Ajay Gupta को हिरासत में लिया।उनका कहना था: “मैं सिर्फ पार्टनर हूँ… मैं कुछ नहीं जानता।” लेकिन जांच टीम के पास ऐसे कागज़ हैं जिनसे पता चलता है कि मालिकाना हिस्सेदारी तीनों के पास थी और लाइसेंस के मामले में गंभीर सवाल हैं। उनके खिलाफ Look Out Circular पहले से जारी था। सरकार की सख्त कार्रवाई हादसे के बाद गोवा सरकार तुरंत हरकत में आई: यह कार्रवाई सिर्फ गोवा तक सीमित नहीं रही —उत्तराखंड जैसे राज्यों ने भी अपने यहाँ सुरक्षा जांच शुरू कर दी। मानवीय पहलू: अंदर कैसा था? बचे हुए लोग बताते हैं: कई परिवारों ने एक साथ अपने लोग खो दिए।हंसी और संगीत की जगह अब सन्नाटा और सवाल हैं। सबसे बड़ा सवाल: ज़िम्मेदार कौन? यह हादसा सिर्फ आग की वजह से नहीं हुआ।बड़ी वजहें थीं: लोग पूछ रहे हैं: आगे क्या? अब सबकी नज़रें हैं: हादसा बहुत कुछ बदल सकता है।ब्रेकिंग न्यूज़ के पीछे असली कहानी है — खोई हुई जिंदगियाँ। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rahul Gandhi

Election Commission under Pressure? राहुल बोले BJP फायदा उठा रही है, संस्थाएँ Neutral नहीं रहीं

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि देश की अहम संस्थाएँ आज पहले जितनी स्वतंत्र नहीं रह गईं। राहुल गांधी का आरोप है कि RSS सभी प्रमुख संस्थाओं पर नियंत्रण चाहता है और इसी दिशा में लगातार कदम बढ़ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि Election Commission को भी “कब्जे में लेने की कोशिश” हो रही है, जिससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। राहुल गांधी का मानना है कि अगर चुनाव आयोग पर दबाव बढ़ेगा, तो इसका सीधा असर लोकतंत्र पर पड़ेगा। “चुनाव आयोग तटस्थ नहीं दिख रहा” – राहुल गांधी राहुल गांधी के मुताबिक चुनाव लोकतंत्र की रीढ़ होते हैं। उन्होंने कहा कि: “अगर संस्थाएँ neutral नहीं रहेंगी, तो देश में free and fair elections कैसे होंगे? जब Election Commission पर दबाव होगा, तो विपक्ष के लिए मैदान बराबर नहीं रहेगा।” उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावों में भाजपा को फायदा दिलाने के लिए संस्थाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों पर सरकार या आयोग की तरफ से कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं आई है। लोकतंत्र की चिंता जताई राहुल गांधी ने कहा कि संस्थाओं का उद्देश्य संविधान की रक्षा करना है, न कि किसी संगठन या पार्टी की सुविधा देना। उनका कहना है: “संस्थाएँ strong और independent रहनी चाहिए। तभी लोकतंत्र सुरक्षित रहेगा।” उन्होंने मीडिया, एजेंसियों और चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। विपक्ष की अपील – “देश को जागरूक रहना होगा” राहुल गांधी ने नागरिकों, सोशल संगठनों और राजनीतिक दलों से अपील की कि वे लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए एकजुट हों। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि पूरे देश का है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rahul Gandhi

Mallikarjun Kharge Shuddhikaran Row: मंच ‘शुद्ध’ कराने पर बवाल, Rahul Gandhi ने BJP-RSS को घेरा

 उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष Rahul Gandhi मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद कथित तौर पर मंच के ‘शुद्धिकरण’ को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इस मामले को लेकर Rahul Gandhi ने BJP और RSS पर जातिगत भेदभाव तथा ‘मनुवादी सोच’ को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। वहीं, BJP ने आरोपों से दूरी बनाते हुए मामले की जांच कराने की बात कही है। क्या है Haldwani Shuddhikaran विवाद? मल्लिकार्जुन खड़गे ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस की रैली को संबोधित किया था। रैली के कुछ दिन बाद कथित तौर पर कुछ लोगों ने मैदान में पूजा-पाठ और हवन कर ‘शुद्धिकरण’ किया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई खड़गे के दलित समुदाय से होने के कारण की गई। पार्टी ने इसे छुआछूत और जातिगत भेदभाव की मानसिकता का उदाहरण बताया है। हालांकि, BJP की ओर से कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया गया है। BJP नेताओं का कहना है कि रैली के दौरान लगाए गए कुछ नारों से धार्मिक भावनाएं आहत हुई थीं और इसी वजह से धार्मिक अनुष्ठान किया गया था। BJP ने इस कार्रवाई को खड़गे की जाति से जोड़ने पर भी सवाल उठाए हैं। Mallikarjun Kharge ने राज्यसभा में उठाया मुद्दा मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मामले को राज्यसभा में भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके भाषण के बाद उस मंच का ‘शुद्धिकरण’ किया गया, जिससे उन्हें बेहद अपमानित महसूस हुआ। खड़गे ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी व्यक्ति को उसकी जाति के आधार पर अपवित्र मानना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। उन्होंने इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ Untouchability Act के तहत कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग की। खड़गे का कहना है कि ऐसी घटनाएं केवल किसी एक व्यक्ति का अपमान नहीं हैं, बल्कि देश में सामाजिक समानता और संवैधानिक मूल्यों पर भी सवाल खड़े करती हैं। Rahul Gandhi का BJP-RSS पर हमला हल्द्वानी के इस विवाद पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कथित ‘शुद्धिकरण’ को दलितों के अपमान से जोड़ते हुए BJP और RSS पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इस तरह की सोच BJP-RSS की कथित ‘मनुवादी मानसिकता’ को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और छुआछूत तथा जातिगत भेदभाव के लिए आधुनिक भारत में कोई जगह नहीं होनी चाहिए। कांग्रेस ने इस मुद्दे को सामाजिक न्याय और दलित सम्मान से जोड़ते हुए सरकार से दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। क्या Rahul Gandhi ने SC/ST Act के तहत FIR की मांग की? इस मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार SC/ST Act के तहत FIR दर्ज कराने की स्पष्ट मांग राहुल गांधी की ओर से नहीं बताई गई है। रिपोर्टों में मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा Untouchability Act के तहत मामला दर्ज करने और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग का उल्लेख है। वहीं, राहुल गांधी ने घटना को दलितों के अपमान, जातिगत भेदभाव और कथित मनुवादी सोच से जोड़कर BJP-RSS पर राजनीतिक हमला किया। इसलिए खबर को पेश करते समय राहुल गांधी के बयान और खड़गे की कानूनी कार्रवाई की मांग को अलग-अलग रखना जरूरी है। BJP ने क्या कहा? BJP ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया है। पार्टी की ओर से कहा गया कि वह किसी भी तरह के भेदभावपूर्ण व्यवहार का समर्थन नहीं करती। केंद्रीय मंत्री और BJP के वरिष्ठ नेता जेपी नड्डा ने मामले की जांच का आश्वासन दिया। BJP नेताओं का कहना है कि घटना के पीछे धार्मिक कारण हो सकते हैं और इसे खड़गे की जाति से जोड़ना उचित नहीं है। अब इस मामले में जांच के परिणाम महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि इसी से यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित ‘शुद्धिकरण’ किसने कराया और इसके पीछे वास्तविक कारण क्या था। कांग्रेस ने राज्यपाल से भी की शिकायत मामले को लेकर कांग्रेस नेताओं ने उत्तराखंड के राज्यपाल से मुलाकात कर कथित ‘शुद्धिकरण’ की निष्पक्ष जांच की मांग भी की है। कांग्रेस का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की जाति के आधार पर किसी सार्वजनिक स्थान या मंच को ‘अपवित्र’ माना गया है, तो यह गंभीर सामाजिक और संवैधानिक मुद्दा है। Haldwani Row बना Political मुद्दा हल्द्वानी का ‘शुद्धिकरण’ विवाद अब स्थानीय घटना से आगे बढ़कर राष्ट्रीय राजनीति का मुद्दा बन गया है। कांग्रेस इसे Dalit dignity, social equality और constitutional values से जोड़ रही है, जबकि BJP कांग्रेस पर घटना को राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगा रही है। फिलहाल दोनों पक्षों के दावों के बीच इस मामले में जांच और संभावित कानूनी कार्रवाई पर सबकी नजर है। विवाद के आगे बढ़ने के साथ Rahul Gandhi, Mallikarjun Kharge, Haldwani Shuddhikaran Row, FIR और SC/ST Act जैसे मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में बने हुए हैं।
H-1B

H-1B Rules में बड़ा बदलाव: Trump हटाएंगे 60 Days Grace Period? Indian IT Professionals पर असर

अमेरिका में काम करने वाले भारतीय H-1B visa holders के लिए Donald Trump administration की immigration policies लगातार चिंता बढ़ा रही हैं। अब H-1B के तहत मिलने वाली 60 Days Grace Period को खत्म करने की तैयारी की खबरों ने भारतीय IT professionals के बीच नई चिंता पैदा कर दी है। अगर यह प्रस्ताव अंतिम रूप से लागू होता है, तो नौकरी जाने के बाद H-1B workers को अमेरिका में नई नौकरी तलाशने के लिए मिलने वाली मौजूदा 60 दिनों की राहत खत्म हो सकती है। इसके साथ ही H-1B visa से जुड़ी बढ़ी हुई लागत और दूसरे proposed immigration changes भी भारतीय professionals के लिए अमेरिका में नौकरी और long-term career planning को प्रभावित कर सकते हैं। क्या है H-1B 60 Days Grace Period? मौजूदा नियमों के तहत, अगर किसी H-1B worker की नौकरी समाप्त हो जाती है, तो कुछ परिस्थितियों में उसे अधिकतम 60 दिन या उसके authorized stay की समाप्ति तक, जो भी पहले हो, अमेरिका में रहने की अनुमति मिल सकती है। इस दौरान कर्मचारी: टेक्नोलॉजी सेक्टर में layoffs के दौरान यह grace period H-1B workers के लिए एक महत्वपूर्ण safety net बन गई है। Trump Administration क्यों बदलना चाहती है H-1B Rules? Trump administration लंबे समय से अमेरिकी workers को प्राथमिकता देने और foreign workers पर अमेरिकी कंपनियों की निर्भरता कम करने की नीति पर जोर देती रही है। प्रस्तावित बदलावों का व्यापक उद्देश्य H-1B program में ज्यादा सख्ती और oversight लाना है। हालांकि, 60-day grace period को खत्म करने का प्रस्ताव अभी अंतिम रूप से लागू नियम नहीं माना जा सकता। अंतिम regulatory process और effective date यह तय करेंगे कि बदलाव वास्तव में कब और किस रूप में लागू होगा। Indians पर सबसे बड़ा असर क्या होगा? H-1B program में भारतीय professionals की बड़ी हिस्सेदारी होने के कारण किसी भी बड़े बदलाव का असर भारतीयों पर विशेष रूप से पड़ सकता है। 1. Layoff के बाद बढ़ेगा Immigration Pressure अगर किसी भारतीय H-1B employee की नौकरी चली जाती है, तो मौजूदा 60 दिनों का buffer उपलब्ध नहीं होने पर उसे बहुत तेजी से नया employer या दूसरा वैध immigration option तलाशना पड़ सकता है। इससे layoffs का असर सिर्फ नौकरी खोने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अमेरिका में रहने की स्थिति भी तुरंत चिंता का विषय बन सकती है। 2. IT Professionals पर ज्यादा असर भारतीय H-1B workers की बड़ी संख्या technology और specialized professional roles में काम करती है। इसलिए software engineers, IT consultants, data professionals और दूसरे skilled workers के लिए नौकरी बदलने की समय-सीमा महत्वपूर्ण हो सकती है। नई व्यवस्था में companies के बीच job switch करने की प्रक्रिया को पहले से ज्यादा जल्दी पूरा करना जरूरी हो सकता है। 3. कम समय में Job Search का दबाव 60 दिन की grace period खत्म होने की स्थिति में कर्मचारी के पास नई नौकरी तलाशने के लिए कम flexibility होगी। ऐसे में कुछ workers को: H-1B Fee में भारी बढ़ोतरी से भी बढ़ी चिंता H-1B program में प्रस्तावित एक और बड़ा बदलाव इसकी लागत से जुड़ा है। Trump administration ने नए H-1B petitions से जुड़ी $103,265 की proposed fee को लेकर कदम उठाए हैं। यह समझना जरूरी है कि इसका अर्थ यह नहीं है कि हर H-1B employee को अपनी जेब से करीब $100,000 देना होगा। यह मुख्य रूप से employer-side cost से जुड़ा प्रस्ताव है। फिर भी इतनी बड़ी लागत कंपनियों के hiring decisions को प्रभावित कर सकती है। Indian IT Companies के लिए क्या बदल सकता है? H-1B rules में सख्ती और बढ़ी हुई लागत का असर भारतीय IT companies की US business strategy पर भी पड़ सकता है। कंपनियां संभावित रूप से: इसका मतलब यह हो सकता है कि आने वाले समय में भारतीय IT professionals के लिए US onsite opportunities की competition और बढ़ जाए। H-4 Visa पर रहने वाले परिवारों पर भी असर H-1B employee की immigration स्थिति का असर उसके परिवार पर भी पड़ सकता है। H-4 status पर अमेरिका में रहने वाले spouse और children के लिए भी primary H-1B holder की स्थिति महत्वपूर्ण होती है। अगर principal H-1B worker को नौकरी जाने के बाद जल्दी नया immigration solution नहीं मिलता, तो परिवार को भी relocation या दूसरे immigration options पर विचार करना पड़ सकता है। इसका असर बच्चों की schooling, spouse की employment और परिवार की financial planning पर भी पड़ सकता है। क्या हर H-1B worker को नौकरी जाते ही अमेरिका छोड़ना पड़ेगा? यह सबसे महत्वपूर्ण बात है। 60-day grace period खत्म करने का प्रस्ताव अगर लागू होता भी है, तो उसकी वास्तविक conditions अंतिम नियम में स्पष्ट होंगी। इसके अलावा H-1B worker की स्थिति उसके individual immigration circumstances, pending petitions, authorized stay और उपलब्ध दूसरे legal options पर निर्भर कर सकती है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि grace period हटते ही हर H-1B worker को नौकरी खत्म होने के अगले दिन अमेरिका छोड़ना पड़ेगा। क्या भारतीयों के लिए US में Jobs खत्म हो जाएंगी? ऐसा कहना भी सही नहीं होगा। अमेरिका की technology, healthcare, research, engineering और दूसरे specialized sectors में skilled professionals की मांग बनी हुई है। लेकिन नए नियमों से H-1B sponsorship की लागत और immigration uncertainty बढ़ सकती है। इसका सबसे बड़ा असर नए applicants और ऐसे professionals पर पड़ सकता है जिन्हें employer sponsorship की जरूरत है। H-1B Indians के लिए आगे क्या महत्वपूर्ण होगा? भारतीय H-1B professionals को आने वाले समय में immigration policy में होने वाले बदलावों पर नजर रखनी होगी। खासकर ये चार चीजें महत्वपूर्ण रहेंगी: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
PM Modi

PM Modi in Uzbekistan: SCO Summit से पहले पीएम मोदी का बड़ा बयान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) शनिवार को Uzbekistan और Kyrgyz Republic के चार दिवसीय दौरे के लिए रवाना हो गए। 29 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक चलने वाली इस यात्रा में पीएम मोदी पहले उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद जाएंगे। इसके बाद वह किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित होने वाले 26वें Shanghai Cooperation Organisation (SCO) Summit में हिस्सा लेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने दौरे से पहले कहा कि भारत SCO के सदस्य देशों के साथ मिलकर ऐसा क्षेत्र बनाने की दिशा में काम करेगा, जो आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से मुक्त हो। उन्होंने SCO के लिए भारत की प्राथमिकताओं को Security, Connectivity और Opportunity से जोड़ा है। PM Modi Uzbekistan Visit: द्विपक्षीय संबंधों पर होगी अहम बातचीत उज्बेकिस्तान की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। दोनों नेताओं के बीच भारत और उज्बेकिस्तान के संबंधों को और मजबूत करने के लिए कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। इस दौरान Trade and Investment, Defence, Energy, Education और Digital Connectivity जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होगा। भारत के लिए उज्बेकिस्तान Central Asia का एक महत्वपूर्ण साझेदार है। ऐसे में पीएम मोदी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच आर्थिक, सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। Tashkent में Shastri Memorial और Mahatma Gandhi Centre जाएंगे PM Modi ताशकंद में प्रधानमंत्री मोदी Lal Bahadur Shastri Memorial और Mahatma Gandhi Centre का दौरा भी करेंगे। इन कार्यक्रमों के जरिए भारत और उज्बेकिस्तान के बीच ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित किया जाएगा। भारत और Central Asia के बीच सदियों पुराने व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। मौजूदा दौर में दोनों पक्ष इन रिश्तों को आधुनिक आर्थिक और रणनीतिक सहयोग में बदलने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। SCO Summit 2026 में Terrorism पर भारत का सख्त रुख उज्बेकिस्तान दौरे के बाद पीएम मोदी 31 अगस्त और 1 सितंबर को बिश्केक में होने वाले 26वें SCO Summit में शामिल होंगे। यह सम्मेलन SCO की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। SCO Summit में regional security, terrorism, extremism, connectivity और economic cooperation जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। भारत लंबे समय से आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत कार्रवाई की वकालत करता रहा है। पीएम मोदी ने कहा है कि भारत SCO के माध्यम से ऐसे क्षेत्र के निर्माण के लिए काम करेगा, जो terrorism, separatism और extremism से मुक्त हो। उनका यह संदेश SCO Summit में भारत की सुरक्षा प्राथमिकताओं को स्पष्ट करता है। Security और Connectivity पर भी रहेगा फोकस SCO के मंच पर भारत के लिए Security, Connectivity और Opportunity प्रमुख प्राथमिकताएं हैं। मध्य एशिया के साथ बेहतर connectivity भारत के आर्थिक और रणनीतिक हितों के लिए महत्वपूर्ण है। व्यापार मार्गों, ऊर्जा सहयोग, डिजिटल कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा देने से भारत और Central Asian देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूती मिल सकती है। प्रधानमंत्री मोदी SCO Summit के दौरान अन्य सदस्य देशों के नेताओं के साथ Bilateral Meetings भी कर सकते हैं। इन बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर बातचीत की संभावना है। World Nomad Games के Opening Ceremony में शामिल होंगे PM Modi किर्गिस्तान दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी 6th World Nomad Games के Opening Ceremony में भी शामिल होंगे। यह आयोजन Central Asia की पारंपरिक संस्कृति, खेल और विरासत को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करता है। पीएम मोदी की इस कार्यक्रम में भागीदारी भारत और किर्गिस्तान के बीच people-to-people और cultural ties को और मजबूत करने का अवसर भी होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
RBI

EMI नहीं चुकाई तो क्या होगा? RBI Loan Recovery Rules में बदलाव, जानिए Bank क्या नहीं कर सकता

अगर आपने Personal Loan, Home Loan, Car Loan या किसी अन्य तरह का Loan लिया है और किसी वजह से EMI समय पर नहीं चुका पा रहे हैं, तो आपके लिए RBI के Loan Recovery Rules जानना बेहद जरूरी है। EMI डिफॉल्ट होने पर बैंक या NBFC बकाया रकम की Recovery कर सकता है, लेकिन इसके लिए उसे RBI के नियमों का पालन करना जरूरी है। कई लोग यह मान लेते हैं कि EMI मिस होने के बाद Recovery Agent घर आकर धमका सकता है या किसी भी समय फोन कर सकता है। ऐसा नहीं है। RBI ने Loan Recovery के दौरान ग्राहकों के सम्मान, Privacy और उचित व्यवहार को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए हैं। EMI Miss होने पर सबसे पहले क्या होता है? अगर आपकी EMI तय तारीख पर जमा नहीं होती है, तो बैंक इसे Overdue Payment के रूप में दर्ज कर सकता है। Loan Agreement के मुताबिक बैंक बकाया रकम के साथ लागू ब्याज या अन्य वैध Charges की मांग कर सकता है। अगर EMI लगातार Miss होती रहती है, तो बैंक ग्राहक से संपर्क कर सकता है और बकाया रकम चुकाने के लिए कह सकता है। लंबे समय तक भुगतान न होने पर बैंक अपने नियमों और लागू कानून के अनुसार Recovery Process आगे बढ़ा सकता है। इसलिए RBI के नियमों का मतलब यह नहीं है कि EMI नहीं चुकाने पर बैंक पैसा नहीं मांग सकता। नियम मुख्य रूप से यह तय करते हैं कि Recovery किस तरीके से की जा सकती है। RBI Loan Recovery Rules: Bank आपको कब कॉल कर सकता है? RBI के निर्देशों के अनुसार Overdue Loan की Recovery के लिए ग्राहक से सुबह 8 बजे से पहले और शाम 7 बजे के बाद संपर्क नहीं किया जाना चाहिए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि Recovery Agent ग्राहकों को अनुचित समय पर फोन करके परेशान न करें। अगर कोई Recovery Agent लगातार देर रात या सुबह-सुबह कॉल करता है, तो ग्राहक इस मामले की शिकायत संबंधित Bank या NBFC से कर सकता है। Recovery Agent आपको धमका नहीं सकता Loan की Recovery के लिए Bank या NBFC Recovery Agent की मदद ले सकता है, लेकिन Agent को ग्राहक के साथ धमकी, गाली-गलौज, अपमानजनक व्यवहार या मानसिक दबाव बनाने की अनुमति नहीं है। Recovery का उद्देश्य बकाया रकम की वसूली करना है, ग्राहक को डराना या परेशान करना नहीं। RBI ने Regulated Entities को अपने Recovery Agents की गतिविधियों पर उचित निगरानी रखने की जिम्मेदारी भी दी है। परिवार और दोस्तों को भी परेशान नहीं कर सकता Bank अगर आपकी EMI बकाया है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि Recovery Agent आपके परिवार, दोस्तों या परिचितों को परेशान करके आप पर दबाव बनाए। ग्राहक की Privacy और सम्मान का ध्यान रखना जरूरी है। किसी व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करना या उसके कर्ज की जानकारी का अनुचित तरीके से इस्तेमाल करना Recovery का स्वीकार्य तरीका नहीं है। क्या Bank घर आकर Recovery कर सकता है? बकाया Loan की Recovery के लिए Bank या उसका अधिकृत Recovery Agent ग्राहक से संपर्क कर सकता है। हालांकि, Recovery करते समय निर्धारित नियमों और कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। अगर Loan के बदले कोई Asset जैसे Car, Property या अन्य Security रखी गई है, तो Default की स्थिति में Bank के पास कानून और Loan Agreement के तहत Recovery के अधिकार हो सकते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि Recovery Agent अपनी मर्जी से जबरन सामान या संपत्ति पर कब्जा कर सकता है। Loan Default होने पर Credit Score पर भी असर पड़ सकता है EMI का लगातार भुगतान न करने का असर केवल Bank Recovery तक सीमित नहीं रहता। Loan Repayment History आपके Credit Profile को प्रभावित कर सकती है। अगर Loan Account में लगातार Default होता है, तो भविष्य में Loan या Credit Card लेने में परेशानी हो सकती है। इसलिए आर्थिक परेशानी होने पर EMI को नजरअंदाज करने के बजाय Bank से समय रहते संपर्क करना बेहतर होता है। Recovery Agent परेशान करे तो क्या करें? अगर कोई Recovery Agent RBI के नियमों का उल्लंघन करता है, तो ग्राहक को सबसे पहले संबंधित Bank या NBFC के Grievance Redressal Mechanism में शिकायत करनी चाहिए। शिकायत करते समय कॉल रिकॉर्ड, SMS, WhatsApp Message, Email या अन्य उपलब्ध सबूत सुरक्षित रखना उपयोगी हो सकता है। अगर Bank या NBFC से शिकायत का समाधान नहीं होता है, तो पात्र मामलों में RBI की Ombudsman व्यवस्था के तहत शिकायत की जा सकती है। क्या EMI नहीं भरने पर Bank Loan माफ कर देगा? नहीं। RBI के Recovery Rules का उद्देश्य ग्राहकों को अनुचित Recovery Practices से सुरक्षा देना है। इसका मतलब यह नहीं है कि EMI नहीं भरने पर Loan अपने आप माफ हो जाएगा। Bank अपने Loan Agreement और लागू कानून के अनुसार बकाया रकम की Recovery कर सकता है। लंबे समय तक Default की स्थिति में कानूनी कार्रवाई भी संभव है। EMI भरने में परेशानी हो तो क्या करें? अगर आपको लगता है कि किसी महीने या आने वाले समय में EMI भरना मुश्किल हो सकता है, तो Bank या NBFC से जल्द संपर्क करें। अपनी Financial Situation के बारे में जानकारी देकर उपलब्ध विकल्पों के बारे में पूछें। सबसे जरूरी बात यह है कि Recovery Agent के दबाव में आकर किसी अनजान व्यक्ति के Personal Account में पैसा जमा न करें। Payment हमेशा Bank/NBFC के अधिकृत माध्यम से ही करें। RBI Loan Recovery Rules का सबसे जरूरी सार EMI समय पर नहीं चुकाने पर Bank आपसे बकाया रकम की मांग कर सकता है और नियमों के अनुसार Recovery Process शुरू कर सकता है। लेकिन Recovery के दौरान Bank या उसके Agent को ग्राहक की Privacy और सम्मान का ध्यान रखना होगा। याद रखें: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CNG Price

Delhi CNG Price: CNG के दाम में ₹3.89 की बढ़ोतरी, अब ₹86.98 प्रति किलो मिलेगा गैस

दिल्ली-NCR में CNG इस्तेमाल करने वाले वाहन चालकों को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। CNG Price Hike के तहत इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने CNG की कीमत में ₹3.89 प्रति किलो की बढ़ोतरी की है। नई कीमतें 29 अगस्त 2026 से लागू हो गई हैं। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में CNG का रेट ₹83.09 प्रति किलो से बढ़कर ₹86.98 प्रति किलो हो गया है। यह 2026 में दिल्ली-NCR में CNG की पांचवीं कीमत बढ़ोतरी है। लगातार हो रही बढ़ोतरी से CNG कार चलाने वाले लोगों के साथ-साथ ऑटो, टैक्सी, कैब और कमर्शियल वाहनों के ड्राइवरों पर भी ईंधन खर्च का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। Delhi CNG Price: अब कितना हुआ CNG का रेट? IGL की नई कीमतों के मुताबिक दिल्ली-NCR के अलग-अलग शहरों में CNG के दाम इस प्रकार हैं: दिल्ली में CNG की कीमत में सीधे ₹3.89 प्रति किलो की वृद्धि हुई है। इसका मतलब है कि जो वाहन रोजाना बड़ी मात्रा में CNG की खपत करते हैं, उनके लिए महीने का fuel budget पहले की तुलना में और बढ़ जाएगा। Why CNG Price Increased: क्यों बढ़े CNG के दाम? IGL के अनुसार, CNG की कीमत बढ़ाने की मुख्य वजह imported LNG की बढ़ी हुई लागत है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में LNG की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर गैस की supply और import cost पर पड़ा है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण LNG की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ी है। इसके चलते global energy market में कीमतों पर दबाव बना हुआ है। IGL ने इसी बढ़ी हुई input cost के एक हिस्से को CNG की कीमतों में शामिल किया है। 2026 में पांचवीं बार महंगी हुई CNG दिल्ली-NCR में वर्ष 2026 के दौरान CNG की कीमतों में यह पांचवीं बढ़ोतरी है। इससे पहले भी इस साल अलग-अलग चरणों में CNG के दाम बढ़ाए गए थे। बार-बार होने वाली price hike के कारण CNG को economical fuel मानकर इस्तेमाल करने वाले वाहन मालिकों की लागत लगातार बढ़ रही है। हालांकि पेट्रोल और डीजल की तुलना में CNG अभी भी कई वाहन चालकों के लिए एक महत्वपूर्ण alternative fuel बनी हुई है। CNG Price Hike का आम लोगों पर क्या असर होगा? CNG की कीमत बढ़ने का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो रोजाना लंबी दूरी तय करते हैं। निजी CNG कारों के अलावा auto-rickshaw, taxi, cab और commercial vehicles चलाने वालों की operating cost भी बढ़ेगी। ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए बढ़ती fuel cost का सीधा असर उनकी daily earnings पर पड़ सकता है। अगर CNG की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो भविष्य में इसका असर transportation charges और passenger fares पर भी देखने को मिल सकता है। CNG महंगी होने से बढ़ सकता है Monthly Fuel Budget उदाहरण के तौर पर, अगर कोई वाहन प्रतिदिन 5 किलो CNG की खपत करता है, तो ₹3.89 प्रति किलो की अतिरिक्त कीमत के कारण उसका खर्च करीब ₹19.45 प्रतिदिन बढ़ जाएगा। 30 दिनों में यह अतिरिक्त खर्च लगभग ₹584 हो सकता है। जिन commercial vehicles की रोजाना CNG consumption इससे कहीं अधिक है, उनके लिए अतिरिक्त मासिक खर्च भी काफी ज्यादा होगा। आगे CNG के दाम पर क्या रहेगा असर? CNG की कीमतों पर आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय LNG prices, global gas supply और पश्चिम एशिया की स्थिति का असर महत्वपूर्ण रहेगा। अगर imported gas की लागत ऊंची बनी रहती है, तो domestic CNG prices पर भी दबाव बना रह सकता है। फिलहाल दिल्ली-NCR के लोगों को 29 अगस्त से CNG के लिए ₹3.89 प्रति किलो ज्यादा भुगतान करना होगा। दिल्ली में नई CNG कीमत ₹86.98 प्रति किलो पहुंच गई है, जबकि नोएडा और गाजियाबाद में यह ₹95.59 प्रति किलो हो गई है। CNG Price Hike 2026 की यह पांचवीं बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब बढ़ती fuel और transportation costs पहले से ही आम लोगों के बजट को प्रभावित कर रही हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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