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Harish Rana

Harish Rana Euthanasia SC का ऐतिहासिक फैसला, लाइफ सपोर्ट हटाने की मिली अनुमति

भारत में इच्छामृत्यु (Euthanasia) को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला सामने आया है। Supreme Court ने 13 साल से कोमा में पड़े हरीश राणा के मामले में Passive Euthanasia की अनुमति दे दी है। यह फैसला न केवल कानूनी रूप से महत्वपूर्ण है बल्कि मानवीय संवेदनाओं को भी झकझोर देने वाला है। फैसला सुनाते समय अदालत का माहौल भावुक हो गया और जस्टिस पारदीवाला की आवाज भी भर आई। लंबे समय से अपने बेटे को बेहोशी की हालत में देख रहे परिवार के लिए यह फैसला राहत और दर्द दोनों लेकर आया। 13 साल पहले हुई थी दर्दनाक दुर्घटना हरीश राणा साल 2013 में एक गंभीर दुर्घटना का शिकार हो गए थे। चंडीगढ़ में एक इमारत की चौथी मंजिल से गिरने के कारण उनके सिर में गहरी चोट लगी थी। इसके बाद से वह Permanent Vegetative State में चले गए। डॉक्टरों के मुताबिक, वह पिछले 13 साल से न तो होश में आए और न ही अपने आसपास की किसी चीज़ पर प्रतिक्रिया दे पाए। उनका पूरा जीवन अस्पताल के बिस्तर, मशीनों और ट्यूब से दिए जाने वाले भोजन पर निर्भर हो गया था। पिता ने बेटे के लिए मांगी थी ‘सम्मानजनक मृत्यु’ समय के साथ परिवार के लिए यह स्थिति बेहद कठिन होती चली गई। हरीश राणा के पिता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा कि उनका बेटा वर्षों से सिर्फ मशीनों के सहारे जीवित है और उसके ठीक होने की कोई उम्मीद नहीं है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि उनके बेटे को “Right to Die with Dignity” यानी सम्मान के साथ मृत्यु का अधिकार दिया जाए। परिवार का कहना था कि लगातार पीड़ा की स्थिति में उसे कृत्रिम रूप से जीवित रखना उचित नहीं है। मेडिकल रिपोर्ट ने साफ की स्थिति मामले की सुनवाई के दौरान मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट अदालत के सामने रखी। रिपोर्ट में कहा गया कि हरीश राणा की हालत में सुधार की संभावना लगभग समाप्त हो चुकी है। डॉक्टरों की राय थी कि वह लंबे समय से स्थायी वेजिटेटिव अवस्था में हैं और सामान्य जीवन में लौटने की उम्मीद नहीं के बराबर है। सुप्रीम कोर्ट ने दी Passive Euthanasia की अनुमति जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने हरीश राणा के लाइफ-सपोर्ट सिस्टम को हटाने की अनुमति दे दी। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में व्यक्ति को अनिश्चितकाल तक कृत्रिम जीवन में बनाए रखना मानवीय दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता। फैसला सुनाते वक्त भावुक हुए जज फैसला सुनाते समय अदालत में एक भावुक क्षण भी देखने को मिला। जस्टिस पारदीवाला निर्णय पढ़ते हुए कुछ पल के लिए रुक गए और उनकी आवाज भर आई। उन्होंने कहा कि यह अदालत के लिए आसान फैसला नहीं है, लेकिन किसी व्यक्ति को अनंत पीड़ा में बनाए रखना भी सही नहीं हो सकता। क्या होती है Passive Euthanasia Passive Euthanasia का मतलब है कि मरीज को जानबूझकर कोई घातक दवा नहीं दी जाती। इसके बजाय जीवन बनाए रखने वाले उपकरण या इलाज को धीरे-धीरे हटा दिया जाता है ताकि मृत्यु प्राकृतिक रूप से हो सके। भारत में 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में Right to Die with Dignity को मान्यता दी थी और कुछ शर्तों के साथ Passive Euthanasia को कानूनी माना था। क्यों महत्वपूर्ण है हरीश राणा केस हरीश राणा का मामला इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि यह उन मामलों में से एक है जहां सुप्रीम कोर्ट ने विस्तृत मेडिकल जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद किसी व्यक्ति के लिए Passive Euthanasia की अनुमति दी है। यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक अहम मिसाल बन सकता है, जहां मरीज लंबे समय तक कोमा में हो और उसके ठीक होने की कोई संभावना न बची हो। हरीश राणा की कहानी सिर्फ एक कानूनी केस नहीं है। यह एक परिवार की लंबी पीड़ा, उम्मीद और अंततः एक कठिन लेकिन मानवीय फैसले की कहानी भी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IndiGo CEO पीटर एलबर्स का इस्तीफा, राहुल भाटिया ने संभाली कमान

IndiGo CEO पीटर एलबर्स का इस्तीफा, राहुल भाटिया ने संभाली कमान

भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी IndiGo के CEO Pieter Elbers ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे के बाद कंपनी की कमान अब Rahul Bhatia को सौंपी गई है। कंपनी की ओर से बताया गया है कि यह फैसला प्रबंधन स्तर पर बदलाव के तहत लिया गया है। पीटर एलबर्स के कार्यकाल में IndiGo ने कई नए अंतरराष्ट्रीय रूट शुरू किए और अपने नेटवर्क का विस्तार किया। अब राहुल भाटिया के नेतृत्व में कंपनी से उम्मीद की जा रही है कि वह भारतीय एविएशन बाजार में अपनी मजबूत स्थिति को और आगे बढ़ाएगी। ईरान की 7 महिला खिलाड़ियों को ऑस्ट्रेलिया में मिली शरण दूसरी बड़ी खबर अंतरराष्ट्रीय खेल जगत से आई है। Iran की 7 महिला खिलाड़ियों को Australia ने शरण दे दी है। बताया जा रहा है कि इन खिलाड़ियों ने अपने देश में सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों के कारण सुरक्षा की चिंता जताई थी। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया सरकार ने मानवीय आधार पर उन्हें शरण देने का फैसला लिया। इस कदम को महिला खिलाड़ियों की सुरक्षा और स्वतंत्रता के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय खेल समुदाय में भी इस फैसले की चर्चा हो रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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कई राज्यों में Commercial LPG Cylinder की सप्लाई बंद, होटल-रेस्टोरेंट पर संकट

कई राज्यों में Commercial LPG Cylinder की सप्लाई बंद, होटल-रेस्टोरेंट पर संकट

देश के कई राज्यों में इन दिनों Commercial LPG Cylinder की सप्लाई अचानक रुक गई है। इससे होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट चलाने वालों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। कई जगहों पर कारोबारियों का कहना है कि उन्हें समय पर गैस नहीं मिल रही, जिससे खाना बनाना मुश्किल हो गया है। स्थिति को देखते हुए सरकार ने Essential Commodity Act (आवश्यक वस्तु अधिनियम) लागू कर दिया है। इसका मकसद गैस की जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकना है, ताकि जरूरतमंद लोगों तक गैस सिलेंडर की सप्लाई सही तरीके से पहुंच सके। होटल और रेस्टोरेंट मालिकों की बढ़ी चिंता गैस की कमी से सबसे ज्यादा परेशानी होटल, ढाबे और छोटे रेस्टोरेंट चला रहे लोगों को हो रही है। कई कारोबारियों का कहना है कि अगर जल्द गैस की सप्लाई शुरू नहीं हुई तो उन्हें अपना कारोबार कुछ समय के लिए बंद करना पड़ सकता है। एक रेस्टोरेंट संचालक ने कहा,“हमारा पूरा काम गैस पर ही चलता है। अगर सिलेंडर नहीं मिलेगा तो खाना कैसे बनेगा? ऐसे में दुकान बंद करने की नौबत आ सकती है।” सरकार की सख्ती सरकार का कहना है कि गैस की कमी को लेकर शिकायतें मिलने के बाद यह कदम उठाया गया है। Essential Commodity Act लागू होने के बाद अब प्रशासन जमाखोरी करने वालों और ज्यादा कीमत पर गैस बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकेगा। आम लोगों पर भी पड़ सकता है असर अगर कॉमर्शियल गैस की समस्या जल्दी हल नहीं हुई तो इसका असर आम लोगों पर भी पड़ सकता है। होटल-रेस्टोरेंट बंद होने से लोगों को बाहर खाने-पीने की सुविधा कम हो सकती है और खाने-पीने की चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं। फिलहाल प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही गैस सिलेंडर की सप्लाई सामान्य हो जाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Kejriwal

दिल्ली शराब घोटाला केस में नया मोड़ Kejriwal-Sisodia समेत 23 आरोपियों को High Court नोटिस

दिल्ली की चर्चित शराब नीति (Excise Policy) मामले में एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है। Delhi High Court ने इस केस में पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal, पूर्व उपमुख्यमंत्री Manish Sisodia और अन्य आरोपियों सहित कुल 23 लोगों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने इन सभी से जांच एजेंसी की अपील पर जवाब दाखिल करने को कहा है। यह मामला दिल्ली की राजनीति में लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है और अब एक बार फिर अदालत में इसकी सुनवाई से राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई है। कैसे फिर से अदालत पहुंचा Delhi Liquor Policy Case दरअसल, इस मामले में पहले दिल्ली की Rouse Avenue Court ने फरवरी 2026 में बड़ा फैसला सुनाया था। कोर्ट ने कहा था कि आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं, इसलिए केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य आरोपियों को डिस्चार्ज (आरोपों से मुक्त) किया जाता है। लेकिन जांच एजेंसी Central Bureau of Investigation (CBI) इस फैसले से संतुष्ट नहीं थी। एजेंसी का मानना है कि ट्रायल कोर्ट ने सबूतों का सही तरीके से मूल्यांकन नहीं किया। इसी वजह से CBI ने इस आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की। High Court की सुनवाई में क्या हुआ CBI की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने कुछ अहम कदम उठाए: अब अदालत अगली सुनवाई में सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आगे का फैसला करेगी। क्या है पूरा Delhi Excise Policy Controversy यह विवाद दिल्ली सरकार की 2021-22 की नई शराब नीति से जुड़ा है। उस समय सरकार ने शराब की बिक्री से जुड़े नियमों में कई बदलाव किए थे। जांच एजेंसियों का आरोप है कि: इस मामले की जांच Central Bureau of Investigation के साथ-साथ Enforcement Directorate (ED) भी कर रही है। क्यों अहम है यह मामला दिल्ली की राजनीति में यह केस सिर्फ एक कानूनी विवाद नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा भी बन चुका है। पिछले कुछ सालों में इस मामले को लेकर कई बार गिरफ्तारी, पूछताछ और अदालत में सुनवाई हुई है। अब जब हाई कोर्ट ने दोबारा नोटिस जारी किया है, तो यह साफ है कि मामला अभी खत्म नहीं हुआ है और आने वाले समय में अदालत का फैसला इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IRAN युद्ध को लेकर संसद में हंगामा, लोकसभा में शोर-शराबा, जयशंकर बोले– भारतीयों को पहले ही किया था अलर्ट

IRAN युद्ध को लेकर संसद में हंगामा, लोकसभा में शोर-शराबा, जयशंकर बोले– भारतीयों को पहले ही किया था अलर्ट

IRAN में चल रहे युद्ध और उससे भारत पर पड़ने वाले असर को लेकर सोमवार को संसद में जोरदार हंगामा देखने को मिला। विपक्ष ने इस मुद्दे पर संसद में विस्तृत चर्चा की मांग की, जबकि सरकार का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। लोकसभा में जैसे ही कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसदों ने ईरान युद्ध के मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग उठाई। उनका कहना था कि इस संघर्ष का असर भारतीयों और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है, इसलिए सरकार को साफ स्थिति बतानी चाहिए। इसी मांग को लेकर सदन में काफी शोर-शराबा हुआ। वहीं राज्यसभा में भी यही मुद्दा उठा। विपक्ष ने चर्चा की मांग करते हुए वॉकआउट कर दिया। विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार को इस गंभीर अंतरराष्ट्रीय स्थिति पर संसद को भरोसे में लेना चाहिए। इस बीच विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि सरकार पहले से ही सतर्क है। उन्होंने बताया कि खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों को जनवरी महीने में ही संभावित खतरे को लेकर अलर्ट जारी कर दिया गया था। जयशंकर ने कहा कि सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और विदेशों में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता है। जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित वापस लाने के लिए भी सभी जरूरी इंतजाम किए जाएंगे। गौरतलब है कि ईरान में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी स्थिति के कारण पूरे गल्फ क्षेत्र में चिंता का माहौल है। वहां बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं, इसलिए भारत सरकार भी इस मामले को गंभीरता से देख रही है। सरकार का कहना है कि भारतीय दूतावासों के जरिए लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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LPG

Gas Price ईरान तनाव का असर, घरेलू LPG सिलेंडर ₹60 महंगा

भारत में घरेलू रसोई गैस (LPG) की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी हुई है। सरकार ने 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर के दाम में 60 रुपये की वृद्धि कर दी है। वहीं 19 किलो के कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में लगभग 115 रुपये का इजाफा किया गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में तेजी और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को इस फैसले की बड़ी वजह माना जा रहा है। Middle East tension का असर भारत तक मिडिल ईस्ट में ईरान से जुड़े संघर्ष और क्षेत्रीय तनाव के कारण तेल और गैस सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल और गैस टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के तेल और गैस व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। ऐसे में क्षेत्र में किसी भी तरह का संकट सीधे भारत के ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है। इसी कारण LPG की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। सरकार ने LPG production बढ़ाने के दिए निर्देश संभावित गैस संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने तेल कंपनियों और रिफाइनरियों को LPG का उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा प्रोपेन और ब्यूटेन जैसी गैसों को पेट्रोकेमिकल उद्योग की बजाय घरेलू LPG उत्पादन में इस्तेमाल करने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बावजूद देश में रसोई गैस की सप्लाई प्रभावित न हो और आम लोगों को किसी तरह की कमी का सामना न करना पड़े। आम परिवारों के बजट पर असर LPG सिलेंडर के दाम बढ़ने से आम परिवारों के मासिक बजट पर असर पड़ना तय है। कई घरों में पहले से ही महंगाई को लेकर चिंता बनी हुई है, ऐसे में गैस की कीमतों में बढ़ोतरी लोगों के लिए अतिरिक्त बोझ बन सकती है। हालांकि सरकार का कहना है कि वैकल्पिक देशों से आयात बढ़ाने और घरेलू उत्पादन मजबूत करने की कोशिश की जा रही है, ताकि भविष्य में गैस की उपलब्धता बनी रहे। आगे क्या हो सकता है ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो LPG के साथ-साथ पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए आने वाले महीनों में ऊर्जा बाजार पर सभी की नजर बनी रहेगी। कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट के हालात ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि वैश्विक घटनाओं का असर सीधे आम लोगों की रसोई तक पहुंच सकता है। ऐसे में सरकार और तेल कंपनियां सप्लाई को स्थिर बनाए रखने के लिए लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ram Rahim

पत्रकार छत्रपति हत्याकांड में Ram Rahim बरी, High Court ने रद्द की उम्रकैद

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह (Ram Rahim)को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में बड़ी कानूनी राहत मिली है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने इस मामले में राम रहीम को बरी कर दिया है। करीब सात साल पहले सीबीआई की विशेष अदालत ने उन्हें हत्या की साजिश का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसे अब हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। हालांकि इस मामले में दोषी ठहराए गए तीन अन्य आरोपियों की सजा बरकरार रखी गई है। 2002 का बहुचर्चित मामला यह मामला साल 2002 का है, जब हरियाणा के सिरसा में स्थानीय पत्रकार रामचंद्र छत्रपति पर गोलीबारी की गई थी। गंभीर रूप से घायल होने के बाद कुछ दिनों बाद उनकी मौत हो गई थी। छत्रपति अपने अखबार में डेरा सच्चा सौदा से जुड़े विवादित मुद्दों और आरोपों पर लगातार खबरें प्रकाशित कर रहे थे। उस समय यह घटना पूरे क्षेत्र में सनसनी का कारण बनी थी। CBI जांच के बाद हुई थी उम्रकैद मामले की जांच बाद में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई। लंबी जांच और अदालती सुनवाई के बाद साल 2019 में सीबीआई की विशेष अदालत ने गुरमीत राम रहीम सिंह को हत्या की साजिश का दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके साथ ही तीन अन्य आरोपियों को भी सजा दी गई थी। हाईकोर्ट ने क्यों दिया राहत Ram Rahim ने निचली अदालत के फैसले को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सबूतों और गवाहों के आधार पर फैसला सुनाते हुए उन्हें बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उनकी दोषसिद्धि को बरकरार रखना उचित नहीं है। हालांकि बाकी तीन दोषियों के खिलाफ सजा को कायम रखा गया है। जेल में ही रहेंगे राम रहीम हालांकि इस मामले में राहत मिलने के बावजूद राम रहीम फिलहाल जेल से बाहर नहीं आएंगे। वे साध्वियों के यौन शोषण से जुड़े एक अन्य मामले में 20 साल की सजा काट रहे हैं। इसलिए कानूनी तौर पर उनकी रिहाई फिलहाल संभव नहीं है। देशभर में फिर चर्चा में आया मामला हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद एक बार फिर पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड चर्चा में आ गया है। लगभग दो दशक पुराने इस मामले का यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया और सबूतों की अहमियत को एक बार फिर सामने लाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Nepal

Nepal Election KP Sharma Oli पीछे, Balen Shah 6000 वोटों से आगे, नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव

Nepal की राजनीति में इस समय बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। आम चुनावों की मतगणना के शुरुआती रुझानों में पूर्व प्रधानमंत्री K. P. Sharma Oli अपनी सीट पर पीछे चल रहे हैं, जबकि काठमांडू के पूर्व मेयर Balendra Shah ने मजबूत बढ़त बना ली है। प्रारंभिक आंकड़ों के मुताबिक बालेन शाह करीब 6000 वोटों से आगे चल रहे हैं। यह रुझान Nepal की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत का संकेत माना जा रहा है। झापा सीट पर कड़ा मुकाबला चुनाव परिणामों की गिनती के दौरान सामने आए रुझानों में देखा गया कि झापा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे केपी शर्मा ओली को उम्मीद के मुताबिक समर्थन नहीं मिल रहा है। दूसरी ओर, बालेन शाह को युवाओं और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं का अच्छा समर्थन मिलता दिखाई दे रहा है। शुरुआती मतगणना में शाह को लगभग 10 हजार से अधिक वोट मिले हैं, जबकि ओली लगभग 4 हजार वोटों के आसपास बताए जा रहे हैं। RSP पार्टी को भी मिल रही बढ़त बालेन शाह से जुड़ी पार्टी Rastriya Swatantra Party (RSP) भी चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करती नजर आ रही है। शुरुआती रुझानों के अनुसार पार्टी करीब 47 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिणाम नेपाल में पारंपरिक राजनीति के खिलाफ बढ़ती नाराजगी को भी दिखाता है। नेपाल की संसद में कितनी सीटें? Nepal की संसद में कुल 275 सीटें हैं। इनमें सरकार बनाने के लिए किसी भी दल या गठबंधन को बहुमत का आंकड़ा पार करना जरूरी होता है। युवाओं का बदलता रुख इस चुनाव में एक दिलचस्प बात यह भी है कि बड़ी संख्या में युवा मतदाताओं ने बदलाव के पक्ष में मतदान किया है। यही वजह है कि नए चेहरे और अपेक्षाकृत नई पार्टियों को लोगों का समर्थन मिलता दिख रहा है। यदि शुरुआती रुझान अंतिम नतीजों में भी कायम रहते हैं, तो नेपाल की राजनीति में एक बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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India को रूस से तेल खरीदने की मिली राहत: अमेरिका ने 3 अप्रैल तक दी छूट

India को रूस से तेल खरीदने की मिली राहत: अमेरिका ने 3 अप्रैल तक दी छूट

India के लिए राहत भरी खबर है। रूस से तेल खरीदने को लेकर अमेरिका ने भारत को अस्थायी छूट दे दी है। यह छूट 3 अप्रैल तक के लिए दी गई है। माना जा रहा है कि इससे फिलहाल देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव नहीं पड़ेगा। दरअसल, ईरान और क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे समय में भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह राहत काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने कुछ देशों को रूस से तेल खरीदने की सीमित अनुमति दी है, ताकि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित न हो। भारत भी इस छूट का फायदा उठा सकेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर रूस से तेल की सप्लाई जारी रहती है तो भारतीय बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी की संभावना कम रहेगी। इससे आम लोगों को भी राहत मिलेगी। भारत अपनी जरूरत का लगभग 80% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में रूस से मिलने वाला सस्ता तेल भारतीय अर्थव्यवस्था और आम उपभोक्ताओं दोनों के लिए फायदेमंद साबित होता है। हालांकि, यह छूट फिलहाल 3 अप्रैल तक ही है। इसके बाद अमेरिका क्या फैसला लेता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। अगर आगे भी छूट मिलती रही तो भारत के लिए तेल की आपूर्ति और कीमतों के मामले में स्थिति स्थिर रह सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Khamenei

India’s Tribute to Khamenei भारत ने दूतावास में जताई संवेदना और शोक

भारत (India) ने ईरान (Iran) के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) के निधन पर पहली बार आधिकारिक तौर पर शोक (condolence) व्यक्त किया है। गुरुवार, 5 मार्च 2026 को भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री (Foreign Secretary Vikram Misri) नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास (Iran Embassy) पहुंचे और वहां शोक पुस्तिका (Condolence Book) पर हस्ताक्षर कर भारत सरकार की संवेदना और सम्मान व्यक्त किया। यह कदम भारत की कूटनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विदेश सचिव मिस्री ने दूतावास में ईरानी राजदूत से मुलाकात भी की और भारत सरकार की ओर से दिवंगत नेता के प्रति श्रद्धा अर्पित की। यह कदम न केवल औपचारिक शोक है, बल्कि वर्तमान तनावपूर्ण मध्य पूर्व (Middle East) हालात में एक सकारात्मक कूटनीतिक संदेश (Diplomatic Message) भी माना जा रहा है। क्या हुआ था – पृष्ठभूमि (Background of the Incident) अयातुल्ला अली खामेनेई का निधन 28 फरवरी 2026 को संयुक्त अमेरिका और इज़राइल (USA-Israel) के हवाई हमलों में हुआ था। ईरानी अधिकारियों ने इसे “शहादत” बताया। उनके निधन ने ईरान के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक और कूटनीतिक हलचल पैदा की है। ईरान दूतावास में शोक पुस्तिका (Condolence Book at Iran Embassy) ईरान के नई दिल्ली स्थित दूतावास में शोक पुस्तिका को 5, 6 और 9 मार्च को जनता और कूटनीतिक समुदाय के लिए खोला गया। इसमें देश के राजनीतिक प्रतिनिधि, दूतावास कर्मचारी और आम नागरिक अपनी संवेदनाएँ दर्ज कर सकते हैं। इससे पहले कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी खामेनेई के निधन पर शोक व्यक्त किया है और मध्य पूर्व में शांति की आवश्यकता पर जोर दिया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gold Mining: ऑस्ट्रेलिया में सोने की नई खोज से बदलेगी तस्वीर, भारत को मिल सकता है नया सप्लायर

भारत में सोना सिर्फ गहना नहीं, बल्कि लोगों की बचत और निवेश का भी अहम हिस्सा है। शादी का सीजन हो या दिवाली-धनतेरस, सोने की खरीदारी को लेकर बाजार में हमेशा हलचल रहती है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया से आई सोने की खोज और बढ़ते निवेश की खबर भारत के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऑस्ट्रेलिया में सोने की नई खोज के लिए कंपनियां बड़े स्तर पर खर्च कर रही हैं। इससे आने वाले समय में सोने की वैश्विक सप्लाई बढ़ने की संभावना है। भारत जैसे देश के लिए यह एक अहम घटनाक्रम है, क्योंकि अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा पूरा करने के लिए भारत को दूसरे देशों से सोना आयात करना पड़ता है। Australia में Gold Exploration पर कितना खर्च हुआ? ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज से जुड़ा निवेश जून 2026 की तिमाही में बढ़कर लगभग 565.6 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पहुंच गया। ऑस्ट्रेलियाई सांख्यिकी ब्यूरो (ABS) के आंकड़ों के अनुसार, पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें 23.6% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह खर्च जमीन के नीचे मौजूद सोने के संभावित भंडार का पता लगाने, ड्रिलिंग और खनन की संभावनाओं का आकलन करने जैसे कामों पर किया जाता है। हालांकि, खोज पर खर्च बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि हर जगह सोने का नया भंडार मिल गया है। किसी जगह सोना मिलने के बाद भी यह देखना पड़ता है कि वहां से उसे निकालना आर्थिक रूप से कितना व्यावहारिक होगा। ऑस्ट्रेलिया में कितना Gold Reserve मौजूद है? ऑस्ट्रेलिया दुनिया के प्रमुख सोना उत्पादक देशों में शामिल है। सरकारी संस्था Geoscience Australia के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2024 तक देश के अनुमानित Ore Reserves करीब 4,785 टन थे। वहीं, पहचाने गए कुल Gold Resources का आंकड़ा इससे काफी ज्यादा था। यहां एक बात समझना जरूरी है। Gold Resources में सोने के संभावित और पहचाने गए संसाधन शामिल होते हैं, जबकि Ore Reserves उस सोने को दर्शाते हैं जिसे मौजूदा तकनीकी और आर्थिक परिस्थितियों में निकालना व्यावहारिक माना जाता है। इसीलिए ऑस्ट्रेलिया में सोने के बड़े भंडार होने और किसी नई खोज को दुनिया का सबसे बड़ा भंडार बताने में अंतर है। किसी खास नई खोज के बारे में ऐसा दावा करने से पहले उसके आधिकारिक आंकड़ों की पुष्टि जरूरी है। भारत को कैसे मिल सकता है फायदा? भारत में सोने की मांग काफी बड़ी है और घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अगर ऑस्ट्रेलिया में आने वाले वर्षों में सोने का उत्पादन बढ़ता है, तो भारतीय आयातकों के लिए सप्लाई का एक अतिरिक्त विकल्प तैयार हो सकता है। इसके तीन संभावित फायदे हो सकते हैं: हालांकि, ऑस्ट्रेलिया में निकाला गया सोना अपने आप भारत नहीं पहुंचेगा। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि उत्पादन कितना बढ़ता है, कंपनियां किस देश को निर्यात करती हैं और भारतीय आयातकों के साथ किस तरह के व्यापारिक समझौते होते हैं। क्या भारत में सस्ता हो जाएगा सोना? सोने की नई खोज की खबर सुनकर खरीदारों के मन में सबसे पहले यही सवाल आता है कि क्या अब Gold Price कम होगा? फिलहाल ऐसा कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत केवल उत्पादन पर निर्भर नहीं करती। निवेशकों की मांग, केंद्रीय बैंकों की खरीद, डॉलर की चाल और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी भाव को प्रभावित करती हैं। भारत में इसके अलावा रुपये और डॉलर की विनिमय दर, आयात शुल्क, टैक्स और घरेलू मांग का भी असर पड़ता है। इसलिए ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज बढ़ने के बावजूद भारतीय बाजार में कीमतें तुरंत कम होंगी, इसकी गारंटी नहीं है। ₹13,000 करोड़ के निवेश की खबर कितनी सही है? ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज पर खर्च बढ़ने के आंकड़े सामने आए हैं। लेकिन ₹13,000 करोड़ के निवेश को किसी खास नई खोज या दुनिया के सबसे बड़े सोना भंडार से जोड़ने के लिए संबंधित कंपनी और परियोजना के आधिकारिक दस्तावेजों की जरूरत है। इसलिए इस रकम को किसी एक नए गोल्ड रिजर्व की खोज पर खर्च हुई राशि बताने से पहले इसकी पुष्टि करना जरूरी है। खोज पर किया गया खर्च, जमीन में मौजूद कुल सोने का मूल्य और खनन परियोजना में कुल निवेश तीन अलग-अलग बातें हैं। आगे क्या होगा? ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज पर बढ़ता खर्च वैश्विक गोल्ड इंडस्ट्री के लिए अहम है। अगर आने वाले वर्षों में नए भंडार की पहचान होती है और उनसे व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो पाता है, तो इससे अंतरराष्ट्रीय सप्लाई के विकल्प बढ़ सकते हैं। भारत के लिए भी यह एक संभावित अवसर है। लेकिन नए सप्लायर की भूमिका, आयात पर असर और सोने की कीमतों में बदलाव का पता तभी चलेगा, जब वास्तविक उत्पादन और निर्यात के आंकड़े सामने आएंगे। फिलहाल, ऑस्ट्रेलिया की गोल्ड इंडस्ट्री पर नजर रखना जरूरी है, लेकिन नई खोज के नाम पर सोना सस्ता होने की उम्मीद करना अभी जल्दबाजी होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

इंदौर में 175 डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के अटैचमेंट खत्म, मूल पदस्थापना पर जॉइनिंग के बाद ही मिलेगा अक्टूबर का वेतन

स्वास्थ्य विभाग में मूल पदस्थापना के बजाय दूसरी जगह काम कर रहे 175 डॉक्टरों, नर्सों और अन्य कर्मचारियों के अटैचमेंट समाप्त कर दिए गए हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने 16 अक्टूबर को आदेश जारी कर सभी अटैचमेंट तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए। आदेश के बाद संबंधित कर्मचारियों को अपने मूल पदस्थापना स्थल पर वापस जाकर जॉइनिंग देनी होगी। ऐसा करने के बाद ही उन्हें अक्टूबर महीने का वेतन मिल सकेगा। स्वास्थ्य विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को आदेश का तत्काल पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। तत्काल कार्यमुक्त कर मूल पदस्थापना पर भेजने के निर्देश CMHO के आदेश के मुताबिक, संबंधित अधिकारियों को अटैचमेंट पर काम कर रहे कर्मचारियों को उसी दिन कार्यमुक्त कर उनके मूल पदस्थापना स्थल पर भेजना होगा। इसकी जानकारी CMHO कार्यालय को भी उपलब्ध करानी होगी। वेतन आहरण केंद्रों को निर्देश दिए गए हैं कि कर्मचारियों की मूल पदस्थापना पर उपस्थिति सुनिश्चित होने के बाद ही अक्टूबर का वेतन जारी किया जाए। इससे कर्मचारियों को अपने निर्धारित कार्यस्थल पर लौटना अनिवार्य होगा। अटैचमेंट जारी मिला तो जिम्मेदार अधिकारी पर होगी कार्रवाई स्वास्थ्य विभाग ने आदेश के पालन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। CMHO ने स्पष्ट किया है कि आदेश जारी होने के बाद भी कोई कर्मचारी या अधिकारी अटैचमेंट पर काम करता पाया गया, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसकी जिम्मेदारी संबंधित संस्था के प्रभारी की होगी। विभाग ने अधिकारियों को निर्देशों का पालन कराने और इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थाओं को भेजा गया आदेश यह आदेश सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक, देपालपुर, मानपुर, सांवेर और हातोद के खंड चिकित्सा अधिकारियों, महू सहित विभिन्न अस्पतालों के प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों, शहरी स्वास्थ्य संस्थाओं और मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक के प्रभारियों को भेजा गया है। आदेश में भोपाल में हुई बैठकों और 16 अक्टूबर को मुख्यालय स्तर से मिले निर्देशों का भी हवाला दिया गया है। सभी संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से आदेश लागू कराने के निर्देश दिए गए हैं।

नवरात्रि पर रायपुर सेंट्रल जेल में सेवा की मिसाल, काली माता सेवा समिति ने 1300 बंदियों को बांटे फल

नवरात्रि के अवसर पर काली माता सेवा समिति ने रायपुर सेंट्रल जेल में करीब 1300 बंदियों को फल वितरित किए। समिति ने यह पहल उन बंदियों के लिए की, जो नवरात्रि में उपवास रखकर माता रानी की आराधना कर रहे हैं। इस आयोजन के जरिए समिति ने सेवा, करुणा और मानवीय संवेदना का संदेश दिया। समिति के अध्यक्ष दीपक भारद्वाज (पोल्ले) ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य बंदियों के प्रति संवेदनशीलता और सेवा भाव को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की गलती या अपराध से उसके सुधरने और बेहतर जीवन जीने की संभावनाएं समाप्त नहीं हो जातीं। बंदियों के सुधार और पुनर्वास पर दिया जोर दीपक भारद्वाज ने कहा कि समाज को न्याय के प्रति सम्मान बनाए रखने के साथ-साथ सुधार और पुनर्वास की भावना को भी महत्व देना चाहिए। बंदियों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने से समाज में मानवीय मूल्यों को मजबूती मिलती है। समिति का मानना है कि जेल में बंद लोगों के साथ भी सम्मानजनक और मानवीय व्यवहार होना चाहिए, ताकि उनमें सकारात्मक बदलाव की भावना विकसित हो सके। पहले भी जेल में कर चुके हैं फल वितरण काली माता सेवा समिति के अनुसार, वह पहले भी कई बार जेल में बंदियों को फल वितरित कर चुकी है। समिति का कहना है कि नवरात्रि केवल पूजा-पाठ और उपवास तक सीमित पर्व नहीं है, बल्कि यह सेवा, करुणा और सद्भावना को जीवन में अपनाने का अवसर भी है। इसी भावना के साथ समिति के सदस्यों ने उपवास रखने वाले बंदियों तक फल पहुंचाए। आगे भी जारी रहेंगे सेवा कार्य समिति ने समाज में सेवा, सद्भावना और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए ऐसे आयोजन आगे भी जारी रखने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में अशोक त्रिपाठी, गुड्डू, सुनील प्रमुख, राजू भाई तारवानी और रामकृष्ण धीवर सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
वैभव सूर्यवंशी

IND vs WI T20: वैभव सूर्यवंशी का भरोसा कायम, 4 दिन में दूसरी पोस्ट; अब भी मौके का इंतजार

भारत और वेस्टइंडीज (IND vs WI) के बीच T-20 सीरीज के निर्णायक मुकाबले से पहले युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी एक बार फिर चर्चा में हैं। सीरीज में अब तक खेलने का मौका नहीं मिलने के बावजूद वैभव ने उम्मीद नहीं छोड़ी है। चार दिन के भीतर उनकी दूसरी सोशल मीडिया पोस्ट सामने आई है, जिसमें भरोसे का संदेश देखने को मिला। वैभव को इस सीरीज में अब तक मैदान पर उतरने का मौका नहीं मिला है। ऐसे में क्रिकेट फैंस के मन में एक ही सवाल है—क्या पांचवें टी-20 में उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा? Vaibhav Sooryavanshi की दूसरी पोस्ट ने खींचा ध्यान वैभव सूर्यवंशी की सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर फैंस के बीच चर्चा हो रही है। चार दिन में दूसरी पोस्ट आने के बाद उनके संदेश पर लोगों की नजरें टिकी हैं। हालांकि, पोस्ट को टीम में चयन या किसी खास फैसले से जोड़कर देखना सही नहीं होगा, क्योंकि प्लेइंग-11 में किसे मौका मिलेगा, इसका फैसला टीम मैनेजमेंट करता है। कम उम्र में अपनी बल्लेबाजी से पहचान बनाने वाले वैभव के लिए टीम के साथ रहना और मौके का इंतजार करना भी अनुभव का हिस्सा है। अब देखना होगा कि उन्हें इस सीरीज में खेलने का मौका मिलता है या नहीं। IND vs WI 5th T20: निर्णायक मुकाबले पर नजर भारत और वेस्टइंडीज की टी-20 सीरीज का पांचवां मुकाबला दोनों टीमों के लिए अहम है। सीरीज के आखिरी मैच में जीत हासिल करने वाली टीम खिताब अपने नाम करेगी। ऐसे में भारतीय टीम की प्लेइंग-11 को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। फैंस यह जानना चाहते हैं कि क्या टीम मैनेजमेंट इस मुकाबले में युवा खिलाड़ियों को मौका देगा। वैभव सूर्यवंशी का नाम भी इसी चर्चा में शामिल है। हालांकि, उनके खेलने को लेकर आधिकारिक पुष्टि के बिना किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। क्या वैभव सूर्यवंशी को मिलेगा डेब्यू का मौका? वैभव को लेकर उत्सुकता की एक बड़ी वजह उनकी कम उम्र और क्रिकेट में तेजी से बनी पहचान है। फैंस उन्हें भारतीय टीम की जर्सी में खेलते देखना चाहते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौका मिलना टीम की जरूरत और चयन रणनीति पर निर्भर करता है। फिलहाल वैभव के लिए इंतजार जारी है। पांचवें टी-20 में उनका नाम प्लेइंग-11 में शामिल होता है या नहीं, इसका पता टीम की आधिकारिक घोषणा के बाद ही चलेगा। क्रिकेट में हर खिलाड़ी को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। वैभव के समर्थकों को उम्मीद है कि उन्हें जल्द ही मैदान पर अपनी काबिलियत दिखाने का अवसर मिलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
लालकृष्ण आडवाणी

LK Advani Hospitalised ICU में भर्ती लालकृष्ण आडवाणी की सेहत कैसी? जानें ताजा अपडेट

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की सेहत को लेकर 17 अक्टूबर को ताजा जानकारी सामने आई है। 98 वर्षीय आडवाणी को सीने में संक्रमण (Chest Infection) की शिकायत के बाद दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है और डॉक्टरों की टीम उनकी निगरानी कर रही है। परिवार और समर्थकों के लिए यह खबर चिंता बढ़ाने वाली जरूर है, लेकिन फिलहाल राहत की बात यह है कि अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक उनकी स्थिति स्थिर है। डॉक्टर उनकी सेहत से जुड़ी जरूरी जांच कर रहे हैं और इलाज जारी है। LK Advani Health Update: अस्पताल में क्या चल रहा है इलाज? लालकृष्ण आडवाणी को शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 की शाम करीब 7:30 बजे अस्पताल लाया गया था। उन्हें सीने में संक्रमण की शिकायत के बाद पल्मोनरी विभाग में भर्ती किया गया। यहां डॉक्टरों की एक टीम उनकी सेहत पर नजर रख रही है और जरूरी मेडिकल जांच की जा रही है। 17 अक्टूबर तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनकी हालत स्थिर है। हालांकि, उनकी सेहत में आगे कितना सुधार हुआ है और अस्पताल से छुट्टी कब मिलेगी, इस बारे में अभी कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। पहले भी अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं लालकृष्ण आडवाणी लालकृष्ण आडवाणी को इससे पहले मई 2026 में भी उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई थी। दिसंबर 2024 में भी उन्हें अपोलो अस्पताल की ICU में रखा गया था। उस समय डॉक्टरों ने उनकी मेडिकल जांच और इलाज किया था। जून और जुलाई 2024 में भी उन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बढ़ती उम्र को देखते हुए उनकी सेहत पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मौजूदा समय में डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार जारी है। PM Modi ने हाल ही में की थी लालकृष्ण आडवाणी से मुलाकात लालकृष्ण आडवाणी के अस्पताल में भर्ती होने से कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2026 को उनके दिल्ली स्थित आवास पर मुलाकात की थी। इस दौरान प्रधानमंत्री ने उनसे आशीर्वाद लिया और सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान की सराहना की थी। आडवाणी लंबे समय तक बीजेपी के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं। पार्टी को राष्ट्रीय राजनीति में स्थापित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यही वजह है कि उनकी सेहत से जुड़ी खबर पर राजनीतिक जगत और उनके समर्थकों की नजर बनी हुई है। राम रथ यात्रा से उपप्रधानमंत्री तक का सफर लालकृष्ण आडवाणी का राजनीतिक सफर कई दशकों तक फैला रहा है। वह भारतीय जनता पार्टी के तीन बार राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे और पार्टी के विस्तार में अहम भूमिका निभाई। साल 1990 में निकाली गई उनकी राम रथ यात्रा ने राष्ट्रीय राजनीति में व्यापक चर्चा पैदा की थी। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद 2002 से 2004 तक वह भारत के उपप्रधानमंत्री रहे। देश की राजनीति में उनके लंबे योगदान को देखते हुए वर्ष 2024 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। LK Advani अब अगले हेल्थ अपडेट का इंतजार लालकृष्ण आडवाणी फिलहाल दिल्ली के अपोलो अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में हैं। 17 अक्टूबर तक सामने आई जानकारी के मुताबिक, उनकी हालत स्थिर है और सीने में संक्रमण के लिए इलाज चल रहा है। अब सभी की नजर अस्पताल की ओर से जारी होने वाले अगले हेल्थ अपडेट पर है। उनकी सेहत में सुधार, इलाज की स्थिति और डिस्चार्ज को लेकर नई जानकारी मिलने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल सबसे अहम बात यही है कि लालकृष्ण आडवाणी की हालत स्थिर बताई गई है और उनका इलाज जारी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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