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Kiran Rijiju

वक्फ संशोधन बिल पर किरन रिजिजू का बड़ा बयान: ‘विरोध करने वाले करोड़ों की जमीन पर काबिज’, जानिए पूरा मामला

नई दिल्ली: वक्फ संशोधन बिल को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है। इस बीच, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जो लोग इस बिल का विरोध कर रहे हैं, वे खुद करोड़ों की जमीन पर अवैध कब्जा जमाए बैठे हैं। क्या है वक्फ संशोधन बिल? वक्फ संशोधन बिल 2023 को लेकर संसद में चर्चा जोरों पर है। सरकार का कहना है कि यह बिल वक्फ संपत्तियों से जुड़े विवादों को हल करने और पारदर्शिता लाने के लिए लाया गया है। इस बिल के जरिए वक्फ बोर्डों को दी जाने वाली कुछ विशेष शक्तियों में बदलाव किया गया है, जिससे संपत्ति विवादों को सुलझाने में आसानी होगी। किरन रिजिजू ने क्या कहा? केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक इंटरव्यू में कहा कि जो लोग इस बिल का विरोध कर रहे हैं, वे खुद करोड़ों रुपये की जमीन पर अवैध रूप से काबिज हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वक्फ की आड़ में कई जगहों पर अवैध कब्जे हुए हैं और सरकार इन मामलों को ठीक करने के लिए यह कानून ला रही है। केरल के बिशप का समर्थन केरल के कैथोलिक बिशप ने भी वक्फ संशोधन बिल का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि वक्फ संपत्तियों को लेकर कई राज्यों में विवाद हैं और इस बिल से इस समस्या का हल निकल सकता है। विपक्ष का विरोध क्यों? विपक्षी दलों का कहना है कि यह बिल मुस्लिम समुदाय की संपत्तियों के खिलाफ है और इससे उनके अधिकारों का हनन होगा। वहीं, सरकार का कहना है कि यह बिल केवल पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है। सरकार की मंशा क्या है? सरकार का कहना है कि वक्फ संपत्तियों पर अनियमितताओं और अवैध कब्जों को रोकने के लिए इस बिल की जरूरत है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि इससे किसी भी धर्म विशेष के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होगा। आगे क्या होगा? वक्फ संशोधन बिल पर संसद में बहस जारी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह बिल पास होता है या विपक्षी विरोध के कारण इसमें और बदलाव किए जाते हैं।
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PM pays tribute to RSS founders in Nagpur

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नागपुर दौरा: संघ संस्थापकों को श्रद्धांजलि, माधव नेत्रालय के कार्यक्रम में संबोधन

नागपुर, 30 मार्च: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने नागपुर दौरे के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संस्थापकों को श्रद्धांजलि अर्पित की और माधव नेत्रालय के एक विशेष कार्यक्रम में लोगों को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने चिकित्सा सेवा, सामाजिक योगदान और भारत के दृष्टिहीन नागरिकों के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला। संघ संस्थापकों को पुष्पांजलि प्रधानमंत्री मोदी ने नागपुर स्थित केशव कुंज पहुंचकर संघ के संस्थापकों डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और माधव सदाशिव गोलवलकर (गुरुजी) को पुष्पांजलि अर्पित की। यह स्थान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का ऐतिहासिक केंद्र माना जाता है, जहां से संघ की विचारधारा और राष्ट्र निर्माण की दिशा में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते हैं। माधव नेत्रालय के कार्यक्रम में PM मोदी का संबोधन इसके बाद प्रधानमंत्री माधव नेत्रालय के एक कार्यक्रम में पहुंचे, जहां उन्होंने समाज के जरूरतमंद लोगों के लिए इस संस्थान की सेवाओं की सराहना की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा,“माधव नेत्रालय केवल नेत्रों का इलाज करने का केंद्र नहीं, बल्कि समाज की सेवा का एक बड़ा उदाहरण है। दृष्टिहीनता को कम करने के लिए किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं।” प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत देशभर में आंखों की बीमारियों से बचाव और इलाज के लिए बड़े स्तर पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना, डिजिटल हेल्थ मिशन और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। राष्ट्रीय सेवा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में योगदान प्रधानमंत्री नेत्रालय के डॉक्टरों, विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भी प्रशंसा की, जो नि:स्वार्थ भाव से जरूरतमंदों की मदद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा और समाज सेवा के क्षेत्र में नागपुर जैसे शहरों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है, और यह संस्थान इस दिशा में एक मिसाल कायम कर रहा है। नागपुर दौरे का महत्व प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा कई मायनों में अहम माना जा रहा है। संघ के गढ़ नागपुर में उनकी उपस्थिति राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि आने वाले चुनावों में इससे भाजपा और संघ के संबंधों को नई ऊर्जा मिलने की संभावना जताई जा रही है। प्रधानमंत्री का यह दौरा केवल श्रद्धांजलि और संबोधन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने नागपुरवासियों को यह संदेश दिया कि सरकार स्वास्थ्य, सेवा और समाज कल्याण के लिए निरंतर प्रयासरत है। (देश हरपल न्यूज के लिए विशेष रिपोर्ट)
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सामूहिक विवाह में भाई-बहन की शादी

उत्तर प्रदेश के जौनपुर में आयोजित एक महोत्सव के दौरान हुए सामूहिक विवाह कार्यक्रम में फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि इस कार्यक्रम में भाई-बहन को दूल्हा-दुल्हन के रूप में बैठाकर उनकी शादी कराई गई। इस सामूहिक विवाह में लगभग 1001 जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ था, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल हुए थे। घटना के अनुसार, एक युवक ने अपनी बहन के साथ विवाह मंडप में बैठने के पीछे सफा पहनने की इच्छा का कारण बताया। उसका कहना था कि उसे सफा पहनने का शौक था, इसलिए वह अपनी बहन के साथ विवाह मंडप में बैठ गया। इस मामले के उजागर होने के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।  यह घटना मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत आयोजित कार्यक्रमों में सामने आए फर्जीवाड़े की घटनाओं में से एक है। इससे पहले भी अमरोहा जिले में एक महिला ने अपने चचेरे भाई के साथ शादी करके सरकारी लाभ प्राप्त करने की कोशिश की थी। इन घटनाओं के प्रकाश में आने के बाद प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है और जांच के आदेश दिए गए हैं। इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि सामूहिक विवाह योजनाओं में सख्त निगरानी और सत्यापन की आवश्यकता है, ताकि इस तरह के फर्जीवाड़े रोके जा सकें और सरकारी योजनाओं का सही लाभ पात्र लोगों तक पहुंच सके।
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SupremeCourtHearingControversy; Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर लगाई रोक, कहा- ‘टिप्पणी असंवेदनशील और अमानवीय’

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले पर रोक लगाते हुए उसकी कड़ी आलोचना की। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि किसी नाबालिग लड़की के ब्रेस्ट पकड़ना और उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ना रेप या ‘अटेम्प्ट टु रेप’ की श्रेणी में नहीं आता। सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को ‘असंवेदनशील’ और ‘अमानवीय दृष्टिकोण’ बताया है। सुप्रीम कोर्ट की कड़ी प्रतिक्रिया जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा, “यह बहुत गंभीर मामला है और जिस जज ने यह फैसला दिया, उसकी तरफ से बहुत असंवेदनशीलता दिखाई गई। हमें यह कहते हुए बहुत दुख हो रहा है कि फैसला लिखने वाले में संवेदनशीलता की पूरी तरह से कमी थी।” सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इससे पहले मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर स्वतः संज्ञान लिया था। यह फैसला आते ही कानूनी विशेषज्ञों, राजनेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को गंभीर मानते हुए तुरंत सुनवाई का निर्णय लिया। केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी सुप्रीम कोर्ट के रुख का समर्थन किया। उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने खुद लिया संज्ञान “कुछ फैसलों को रोकने के पीछे महत्वपूर्ण कारण होते हैं, और यह उनमें से एक है।” हाईकोर्ट का विवादास्पद फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था, “किसी लड़की के निजी अंग पकड़ लेना, उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ देना और जबरन उसे पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश करना रेप या ‘अटेम्प्ट टु रेप’ की श्रेणी में नहीं आता।” हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद महिला संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों ने इसकी आलोचना करते हुए कहा कि यह पीड़िता के अधिकारों का हनन करता है और यौन उत्पीड़न को हल्के में लेने जैसा है। न्यायपालिका पर उठे सवाल यह मामला देश में महिला सुरक्षा से जुड़े कानूनी ढांचे को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे फैसले अपराधियों को बचाव का आधार दे सकते हैं और महिलाओं के प्रति हो रहे अपराधों के खिलाफ न्याय मिलने में बाधा बन सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से अब पीड़िता को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। इस मामले की अगली सुनवाई जल्द ही होने की संभावना है। (देश हरपल की विशेष रिपोर्ट)
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Monsoon

Monsoon Update अरब सागर में अटका मानसून, MP में 5 दिन बाद बारिश के संकेत

देश के कई राज्यों में लोग बारिश का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन इस बार मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है। मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून (Monsoon) फिलहाल अरब सागर और तेलंगाना क्षेत्र में अटका हुआ है। तेलंगाना में पिछले 6 दिनों से मानसून आगे नहीं बढ़ पाया, जिसका असर अब मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में भी दिखाई देने लगा है। तेज गर्मी और उमस के बीच लोग बारिश का इंतजार कर रहे हैं, वहीं किसान भी खेतों की तैयारी के बाद आसमान की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। आखिर क्यों रुक गया मानसून? मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अरब सागर में बने मौसम सिस्टम और कमजोर हवा के दबाव के कारण मानसून की गति धीमी हो गई है। आमतौर पर जून के दूसरे सप्ताह तक मानसून मध्य भारत के बड़े हिस्से में पहुंच जाता है, लेकिन इस बार इसकी चाल काफी सुस्त बनी हुई है। तेलंगाना में मानसून पिछले 6 दिनों से लगभग स्थिर है। यही वजह है कि मध्य भारत के राज्यों में बारिश की गतिविधियां उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ पा रही हैं। MP में कब पहुंचेगा मानसून? मौसम विभाग के मुताबिक मध्य प्रदेश में मानसून की एंट्री अगले करीब 5 दिनों में हो सकती है। शुरुआत में बालाघाट, छिंदवाड़ा, मंडला और जबलपुर जैसे जिलों में हल्की बारिश देखने को मिल सकती है। इसके बाद धीरे-धीरे मानसून पूरे प्रदेश में सक्रिय होगा। भोपाल और इंदौर समेत कई शहरों में फिलहाल बादल छाए रहने और हल्की बूंदाबांदी के आसार हैं, लेकिन भारी बारिश के लिए अभी थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है। किसानों की बढ़ी चिंता मानसून में देरी का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ रहा है। खरीफ फसलों की बुवाई का समय शुरू हो चुका है, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने से किसान अभी इंतजार कर रहे हैं। सोयाबीन, धान और मक्का जैसी फसलों की खेती करने वाले किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। ग्रामीण इलाकों में कई किसान खेत तैयार करके बैठे हैं, लेकिन बारिश नहीं होने से बुवाई शुरू नहीं हो पा रही। अगर अगले सप्ताह तक मानसून सक्रिय हो जाता है तो स्थिति सामान्य हो सकती है। गर्मी और उमस से लोग बेहाल मानसून की देरी का असर आम लोगों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। दिन में तेज गर्मी और शाम को उमस लोगों की परेशानी बढ़ा रही है। कई शहरों में तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ है, जिससे बिजली की मांग भी लगातार बढ़ रही है। अगले सप्ताह बदल सकता है मौसम मौसम विभाग का अनुमान है कि बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में नए सिस्टम बनने के बाद मानसून को फिर से गति मिल सकती है। इसके बाद मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कई हिस्सों में अच्छी बारिश होने की संभावना है। फिलहाल लोगों और किसानों दोनों की नजरें आने वाले कुछ दिनों के मौसम पर टिकी हुई हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Cough Syrup

Government Action on Cough Syrup: बिना Prescription दवा बेचने पर होगी कार्रवाई

देशभर में अब कफ सिरप (Cough Syrup) खरीदना पहले जितना आसान नहीं रहेगा। केंद्र सरकार ने दवाओं की बिक्री को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए साफ कर दिया है कि अब बिना डॉक्टर की पर्ची के कफ सिरप और दूसरी सिरप आधारित दवाएं मेडिकल स्टोर पर नहीं मिलेंगी। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी नई अधिसूचना के बाद यह नियम पूरे देश में लागू किया जाएगा। सरकार का कहना है कि यह कदम लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है, क्योंकि पिछले कुछ समय में कफ सिरप के गलत इस्तेमाल और मिलावटी दवाओं के कई मामले सामने आए थे। खासकर बच्चों और युवाओं में बिना सलाह के दवाएं लेने की घटनाओं ने चिंता बढ़ा दी थी। अब मेडिकल स्टोर पर क्या बदलेगा? नई गाइडलाइन लागू होने के बाद अब मेडिकल दुकानदारों को कफ सिरप बेचने से पहले डॉक्टर की प्रिस्क्रिप्शन देखनी होगी। बिना पर्ची दवा बेचने पर कार्रवाई भी हो सकती है। इसके साथ ही कई दुकानों को दवा बिक्री का रिकॉर्ड रखने के निर्देश भी दिए जा सकते हैं। अब तक सामान्य खांसी-जुकाम में लोग सीधे मेडिकल स्टोर से सिरप खरीद लेते थे, लेकिन नए नियम के बाद पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो सकता है। सरकार ने क्यों लिया यह फैसला? दरअसल, बीते कुछ वर्षों में भारत में बने कुछ कफ सिरप को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सवाल उठे थे। कई मामलों में दूषित सिरप की वजह से बच्चों की मौत तक की खबरें सामने आई थीं। इसके अलावा कुछ लोग कफ सिरप का इस्तेमाल नशे के तौर पर भी कर रहे थे, जिसे रोकना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया था। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बिना जांच और सलाह के लंबे समय तक कफ सिरप लेना शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। कुछ सिरप में ऐसे तत्व होते हैं जो अधिक मात्रा में लेने पर गंभीर साइड इफेक्ट पैदा कर सकते हैं। आम लोगों पर क्या होगा असर? इस फैसले के बाद लोगों को छोटी बीमारी में भी डॉक्टर के पास जाना पड़ सकता है। हालांकि शुरुआत में इससे थोड़ी परेशानी महसूस हो सकती है, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि इससे दवाओं का गलत उपयोग कम होगा और मरीजों की सुरक्षा बढ़ेगी। विशेषज्ञों के मुताबिक, कई बार लोग बच्चों को भी बिना सलाह के सिरप दे देते हैं, जो खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसे में यह फैसला भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को रोकने में मदद कर सकता है। Health Experts ने फैसले को बताया जरूरी दवा विशेषज्ञों और डॉक्टरों ने सरकार के इस फैसले का समर्थन किया है। उनका कहना है कि भारत में लंबे समय से दवाओं की ओवर-द-काउंटर बिक्री पर सख्ती की जरूरत महसूस की जा रही थी। अब नए नियम से मेडिकल सिस्टम में ज्यादा पारदर्शिता आएगी और मरीजों को सुरक्षित इलाज मिल सकेगा। सरकार का उद्देश्य साफ है—लोगों तक सुरक्षित दवाएं पहुंचाना और कफ सिरप के अनियंत्रित इस्तेमाल पर रोक लगाना। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Earthquake

6.7 Magnitude Earthquake in Indonesia: भूकंप के तेज झटकों से सहमे लोग

Indonesia में मंगलवार को आए शक्तिशाली भूकंप (Earthquake) ने लोगों में दहशत फैला दी। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 6.7 मापी गई, जिसके बाद कई इलाकों में लोग घबराकर अपने घरों और इमारतों से बाहर निकल आए। अचानक धरती हिलने से लोगों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया। समुद्र के भीतर था भूकंप का केंद्र स्थानीय एजेंसियों के मुताबिक भूकंप का केंद्र समुद्र के भीतर था। झटके इतने तेज थे कि कई शहरों में लोगों ने कुछ सेकेंड तक जमीन को लगातार कांपते हुए महसूस किया। कई जगहों पर लोग खुले मैदानों और सड़कों पर जमा हो गए। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में लोग डर के कारण इधर-उधर भागते नजर आ रहे हैं। प्रशासन अलर्ट मोड पर, सुनामी का बड़ा खतरा नहीं हालांकि अब तक किसी बड़े जान-माल के नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन प्रशासन ने राहत और बचाव टीमों को अलर्ट पर रखा है। तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। फिलहाल सुनामी की कोई बड़ी चेतावनी जारी नहीं की गई है, लेकिन अधिकारियों की नजर पूरे हालात पर बनी हुई है। क्यों बार-बार आते हैं इंडोनेशिया में भूकंप? इंडोनेशिया दुनिया के सबसे ज्यादा भूकंप प्रभावित देशों में शामिल है। यह देश “Ring of Fire” क्षेत्र में स्थित है, जहां टेक्टोनिक प्लेट्स की हलचल के कारण अक्सर भूकंप आते रहते हैं। इससे पहले भी यहां कई विनाशकारी भूकंप आ चुके हैं, जिनमें भारी तबाही देखने को मिली थी। लोगों से अफवाहों से बचने की अपील भूकंप के बाद लोगों में डर का माहौल है। प्रशासन लगातार लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील कर रहा है। राहत की बात यह रही कि फिलहाल किसी बड़ी तबाही की खबर सामने नहीं आई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Ayodhya

Ayodhya Ram Mandir Case: चढ़ावे में गड़बड़ी पर SIT Action, आज हो सकती है बड़ी कार्रवाई

Ayodhya के Ram Mandir में चढ़ावे की रकम में कथित चोरी और गड़बड़ी का मामला अब तेजी से तूल पकड़ता जा रहा है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में जांच एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं। जानकारी के मुताबिक आज इस मामले में दो अलग-अलग FIR दर्ज की जा सकती हैं। वहीं SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) ने मंदिर परिसर में बंद कमरे में कर्मचारियों और सुरक्षा कर्मियों से लंबी पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार जांच टीम यह समझने की कोशिश कर रही है कि आखिर इतनी सख्त सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद चढ़ावे की रकम में गड़बड़ी कैसे हुई। इसी को लेकर कर्मचारियों से कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे गए। कर्मचारियों से पूछे गए अहम सवाल SIT ने पूछताछ के दौरान कर्मचारियों से यह जानने की कोशिश की कि मंदिर में ड्यूटी खत्म होने के बाद किसी प्रकार की चेकिंग होती थी या नहीं। इसके अलावा यह भी पूछा गया कि चढ़ावे की रकम को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया क्या थी और किन लोगों को उस जगह तक पहुंचने की अनुमति थी। जांच एजेंसियों ने कर्मचारियों की एंट्री-एग्जिट व्यवस्था, CCTV निगरानी और स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा को लेकर भी विस्तार से जानकारी जुटाई है। माना जा रहा है कि कई रिकॉर्ड और फुटेज को दोबारा खंगाला जा रहा है। दो FIR दर्ज होने की संभावना मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पहली FIR चढ़ावे की रकम में कथित चोरी और गबन को लेकर दर्ज हो सकती है। वहीं दूसरी FIR सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही और नियमों की अनदेखी को लेकर की जा सकती है। हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन जांच की गंभीरता को देखते हुए आने वाले दिनों में बड़ा खुलासा होने की संभावना जताई जा रही है। श्रद्धालुओं में नाराजगी, प्रशासन पर उठे सवाल राम मंदिर देश की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। ऐसे में चढ़ावे की रकम में गड़बड़ी की खबर सामने आने के बाद श्रद्धालुओं में नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि मंदिर जैसी संवेदनशील जगह पर सुरक्षा व्यवस्था और ज्यादा मजबूत होनी चाहिए थी। फिलहाल SIT पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। CCTV फुटेज, ड्यूटी रजिस्टर और कर्मचारियों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच में आखिर कौन-कौन लोग सामने आते हैं और प्रशासन क्या कदम उठाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
अमेरिका

अमेरिका-ईरान Peace Agreement से दुनिया में हलचल, 19 जून को हो सकता है ऐतिहासिक ऐलान

कई सालों से तनाव और टकराव के बीच उलझे अमेरिका और ईरान के रिश्तों में अब नरमी के संकेत दिखाई देने लगे हैं। दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत के बाद Peace Deal के ड्राफ्ट पर डिजिटल साइन होने की खबर सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस समझौते की औपचारिक घोषणा 19 जून को स्विट्जरलैंड में की जा सकती है। इस खबर के सामने आते ही दुनिया भर में राजनीतिक और आर्थिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि अगर यह डील पूरी तरह सफल होती है तो इसका असर सिर्फ मध्य पूर्व ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देगा। डिजिटल साइन के बाद बढ़ी उम्मीदें रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका और ईरान के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने शुरुआती समझौते पर इलेक्ट्रॉनिक तरीके से सहमति जताई है। हालांकि अभी कुछ तकनीकी और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अंतिम बातचीत बाकी है। सूत्रों की मानें तो इस बातचीत में कतर और पाकिस्तान जैसे देशों ने अहम भूमिका निभाई है। पिछले कुछ महीनों से दोनों देशों के बीच बैकडोर डिप्लोमेसी लगातार जारी थी, जिसके बाद अब यह बड़ा कदम सामने आया है। क्या-क्या शामिल है इस Peace Deal में? इस प्रस्तावित समझौते में कई अहम बिंदुओं पर चर्चा हुई है। इनमें युद्धविराम को मजबूत करना, स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज में समुद्री आवाजाही को सामान्य बनाना और ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर नई शर्तों के साथ बातचीत शुरू करना शामिल है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच अगले 60 दिनों तक तकनीकी स्तर पर चर्चा जारी रखने की भी बात कही जा रही है। जानकारों का मानना है कि यह कदम भविष्य में बड़े कूटनीतिक बदलाव का रास्ता खोल सकता है। ₹28 लाख करोड़ के Economic Package की चर्चा इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा अमेरिका की ओर से ईरान को दिए जाने वाले संभावित आर्थिक राहत पैकेज को लेकर हो रही है। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका करीब 300 अरब डॉलर यानी लगभग ₹28 लाख करोड़ तक की आर्थिक मदद, निवेश या फ्रीज की गई संपत्तियों को रिलीज कर सकता है। हालांकि अभी तक इस रकम की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अमेरिकी प्रशासन की तरफ से भी साफ कहा गया है कि अंतिम फैसला बातचीत पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। दुनिया की नजर 19 जून की बैठक पर अगर 19 जून को यह समझौता औपचारिक रूप लेता है तो इसे पिछले कई दशकों में अमेरिका और ईरान के बीच सबसे बड़ा डिप्लोमैटिक बदलाव माना जाएगा। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि इससे मध्य पूर्व में तनाव कम हो सकता है और वैश्विक तेल बाजार को भी राहत मिल सकती है। तेल व्यापार से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज में स्थिरता आने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। वहीं निवेशकों को भी वैश्विक व्यापार में सुधार की उम्मीद दिखाई दे रही है। अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ विवाद हालांकि माहौल सकारात्मक जरूर दिख रहा है, लेकिन दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद अब भी बने हुए हैं। ईरान जहां प्रतिबंधों में पूरी राहत चाहता है, वहीं अमेरिका सुरक्षा और न्यूक्लियर निगरानी को लेकर सख्त शर्तों पर अड़ा हुआ है। ऐसे में 19 जून की बैठक दोनों देशों के रिश्तों के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। अब पूरी दुनिया की नजर इसी बात पर टिकी है कि क्या यह Peace Deal वास्तव में इतिहास बदल पाएगी या फिर बातचीत एक बार फिर अधूरी रह जाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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