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T20 World Cup 2026 के लिए भारतीय टीम का ऐलान : सूर्या कप्तानी करेंगे, ईशान किशन की वापसी

T20 World Cup 2026 के लिए भारतीय टीम का ऐलान : सूर्या कप्तानी करेंगे, ईशान किशन की वापसी

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने आगामी T20 World Cup 2026 के लिए भारतीय टीम का ऐलान कर दिया है। इस बार टीम की कमान सूर्यकुमार यादव के हाथों में सौंपी गई है। उनकी आक्रामक बल्लेबाज़ी और मैदान पर शांत नेतृत्व को देखते हुए चयनकर्ताओं ने उन पर भरोसा जताया है। टीम चयन में सबसे चौंकाने वाला फैसला शुभमन गिल को बाहर रखना रहा। हाल के समय में अच्छे फॉर्म में रहने के बावजूद गिल को इस टूर्नामेंट के लिए जगह नहीं मिल पाई है, जिससे उनके फैंस थोड़ा निराश नज़र आए। वहीं, लंबे समय बाद ईशान किशन की टीम में वापसी हुई है। विकेटकीपर-बल्लेबाज़ ईशान ने घरेलू क्रिकेट और IPL में अपने प्रदर्शन से फिर से चयनकर्ताओं का भरोसा जीता है। उनकी वापसी से टीम की बल्लेबाज़ी को मजबूती मिलने की उम्मीद है। टीम में अनुभव और युवा खिलाड़ियों का अच्छा संतुलन देखने को मिल रहा है। चयन समिति का मानना है कि यह संयोजन टी-20 जैसे छोटे फॉर्मेट में भारत को खिताब का मजबूत दावेदार बना सकता है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में भारतीय टीम टी-20 वर्ल्ड कप में कैसा प्रदर्शन करती है और क्या टीम एक बार फिर देश को विश्व विजेता बनने का मौका दिला पाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi Airport पर यात्री से मारपीट, पायलट सस्पेंड

Delhi Airport पर यात्री से मारपीट, पायलट सस्पेंड

Delhi Airport (इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे) पर एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां एक यात्री के साथ कथित रूप से मारपीट की गई, जिसमें एक पायलट का नाम सामने आया है। मामले के तूल पकड़ने के बाद संबंधित पायलट को सस्पेंड कर दिया गया है। पीड़ित यात्री का कहना है कि विवाद के दौरान उसके साथ हाथापाई हुई, जिससे उसके चेहरे पर गंभीर चोटें आईं और खून बहने लगा। यात्री का आरोप है कि घटना के बाद उससे जबरन मामला खत्म करने का दबाव बनाया गया। यात्री ने बताया कि जब उसकी नाबालिग बेटी ने अपने पिता को खून से सना हुआ देखा, तो वह गहरे सदमे में चली गई। परिवार के लिए यह अनुभव बेहद डरावना और मानसिक रूप से परेशान करने वाला रहा। इस घटना के सामने आने के बाद एयरलाइन प्रबंधन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच के आधार पर संबंधित पायलट को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। साथ ही, यात्रियों की सुरक्षा को लेकर एयरपोर्ट अथॉरिटी भी सतर्क हो गई है। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Mumbai

Mumbai Politics में बड़ा Twist BMC चुनाव से पहले Uddhav और Raj Thackeray एक साथ

मुंबई (Mumbai) की सियासत एक बार फिर करवट लेने को तैयार है। BMC Election 2025 से पहले जो संकेत मिल रहे हैं, वे बताते हैं कि ठाकरे परिवार की पुरानी दरार अब इतिहास बन सकती है। उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे—जो सालों से अलग-अलग राजनीतिक रास्तों पर थे—अब एक साझा मंज़िल की ओर बढ़ते दिख रहे हैं: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC)। अगर यह गठबंधन जमीन पर उतरता है, तो इसका असर सिर्फ चुनावी गणित तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि Mumbai Politics की पूरी दिशा बदल सकता है। क्यों खास है उद्धव–राज ठाकरे की नजदीकी? राज ठाकरे के शिवसेना से अलग होकर MNS बनाने के बाद दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक दूरी बनी रही। लेकिन समय बदला है। इन सबके बीच अब ठाकरे बंधुओं को लग रहा है कि मुंबई की सत्ता की चाबी साथ आए बिना हासिल करना मुश्किल है। MaMu Formula: चुनावी रणनीति की रीढ़ इस संभावित गठबंधन की सबसे अहम रणनीति है ‘MaMu Formula’—यानी Marathi + Muslim वोट बैंक। Mumbai के कई वार्ड ऐसे हैं जहाँ: उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) को जहां अल्पसंख्यक वोटों में भरोसा हासिल है, वहीं राज ठाकरे की MNS शहरी मराठी वोटर पर मजबूत पकड़ रखती है। दोनों का मेल सीधे BJP और महायुति के समीकरण को चुनौती दे सकता है। BMC Seat Sharing: फॉर्मूला तय, लेकिन पेंच बाकी सूत्रों के मुताबिक, BMC की 227 सीटों को लेकर एक मोटा खाका तैयार है: हालांकि माहिम, शिवड़ी और विक्रोली जैसे कुछ वार्डों पर दोनों दलों की दावेदारी ने बातचीत को थोड़ा मुश्किल जरूर बनाया है। लेकिन अंदरखाने यह संदेश साफ है कि सीट विवाद गठबंधन से बड़ा नहीं बनने दिया जाएगा। Joint Rally से मिलेगा बड़ा सियासी संदेश खबर है कि चुनाव से पहले मुंबई में 2 से 3 संयुक्त रैलियां हो सकती हैं। अगर उद्धव और राज ठाकरे एक ही मंच पर साथ दिखे, तो यह सिर्फ एक चुनावी कार्यक्रम नहीं होगा—यह मराठी अस्मिता और भावनाओं से जुड़ा एक बड़ा राजनीतिक संकेत होगा। दूसरी तरफ BJP–Shinde Alliance की तैयारी इधर BJP, एकनाथ शिंदे गुट और अजित पवार की NCP भी पीछे नहीं है। यानी मुकाबला सीधा और कांटे का है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi

10,000 Classrooms में Air Purifiers लगाकर Delhi सरकार ने बढ़ाया बच्चों का सुरक्षा कदम

दिल्ली (Delhi)सरकार ने राजधानी के सरकारी स्कूलों में 10,000 कक्षाओं में एयर प्यूरीफायर (Air Purifiers) लगाने की महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की है। यह कदम बच्चों के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने और बढ़ते air pollution से बचाने के लिए उठाया गया है। शिक्षा मंत्री आशिष सूद ने बताया कि एयर प्यूरीफायर लगाने की प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी और टेंडर (Tender) जारी करने के बाद चरणबद्ध तरीके से इसे लागू किया जाएगा। मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ एक अस्थायी समाधान नहीं है, बल्कि दीर्घकालीन pollution control strategy का हिस्सा है। हवा की गुणवत्ता और बच्चों पर असर दिल्ली (Delhi) में हाल के समय में Air Quality Index (AQI) लगातार खराब रहा है। बच्चे वयस्कों की तुलना में प्रदूषण के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं, जिससे उन्हें respiratory problems और स्वास्थ्य संबंधी खतरे ज्यादा होते हैं। इसलिए, कक्षाओं में एयर प्यूरीफायर लगाना बच्चों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के लिए जरूरी माना जा रहा है। सरकार की व्यापक योजना दिल्ली सरकार ने भलस्वा कचरा स्थल (Bhalswa landfill) को सितंबर 2026 तक साफ करने का भी लक्ष्य रखा है। यह शहर के सबसे बड़े प्रदूषण स्रोतों में से एक है। शिक्षा और पर्यावरण मंत्रालय की संयुक्त पहल से उम्मीद है कि यह उपाय Delhi की हवा की गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद करेगा। विशेषज्ञों की राय विशेषज्ञों का कहना है कि एयर प्यूरीफायर से PM2.5 और अन्य हानिकारक कणों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इससे बच्चों की health और immunity बेहतर बनी रहेगी और कक्षा का वातावरण स्वस्थ होगा। यह पहल Delhi सरकार की उन कोशिशों का हिस्सा है, जो बच्चों की well-being और safety को प्राथमिकता देती हैं। जैसे-जैसे यह योजना लागू होगी, राजधानी के सरकारी स्कूलों में स्वस्थ और प्रदूषण मुक्त वातावरण सुनिश्चित होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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PM Modi

Oman, Ethiopia और Brazil तक PM Modi को मिले 29 Global Honours

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने 11 साल के कार्यकाल में दुनिया के 29 देशों से सर्वोच्च अंतरराष्ट्रीय सम्मान (International Honours) प्राप्त कर अपनी वैश्विक प्रतिष्ठा को और मजबूत किया है। हाल ही में उन्हें ओमान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘Order of Oman’ दिया गया। यह सम्मान ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक ने भारत-ओमान के 70 साल के कूटनीतिक संबंधों के अवसर पर प्रदान किया। इन 29 अंतरराष्ट्रीय सम्मानों में एशिया, यूरोप, अफ्रीका, मध्य पूर्व और अमेरिका के देशों ने मोदी जी के द्विपक्षीय संबंध मजबूत करने, वैश्विक नेतृत्व और कूटनीति में योगदान को मान्यता दी। PM Modi के प्रमुख International Awards Country Honour Year Oman Order of Oman (First Class) 2025 Ethiopia Great Honour Nishan of Ethiopia 2025 Namibia Order of the Most Ancient Welwitschia Mirabilis 2025 Brazil Grand Collar of the National Order of the Southern Cross 2025 Trinidad & Tobago Order of the Republic of Trinidad and Tobago 2025 Ghana Officer of the Order of the Star of Ghana 2025 Cyprus Grand Cross of the Order of Makarios III 2025 Sri Lanka Mitra Vibhushana 2025 Mauritius Grand Commander of the Order of the Star and Key of the Indian Ocean 2025 Kuwait Order of Mubarak Al-Kabeer 2024 Russia Order of St. Andrew the Apostle 2019 France Grand Cross of the Legion of Honour 2023 Egypt Order of the Nile 2023 UAE Order of Zayed 2019 Palestine Grand Collar of the State of Palestine 2018 Afghanistan State Order of Ghazi Amir Amanullah Khan 2016 Saudi Arabia Order of King Abdulaziz 2016 United Nations UN Champion of the Earth Award 2018 Global Recognition और कूटनीतिक महत्व ये पुरस्कार पीएम मोदी की अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और भारत की वैश्विक छवि को दर्शाते हैं। ज्यादातर सम्मान राजकीय दौरे और द्विपक्षीय वार्ता के दौरान प्रदान किए गए। हालिया यात्राओं में ओमान, इथियोपिया, ब्राजील और नामीबिया शामिल हैं। इन 29 अंतरराष्ट्रीय सम्मान से यह साबित होता है कि भारत विश्व स्तर पर सम्मानित और प्रभावशाली भूमिका निभा रहा है। यह न केवल पीएम मोदी के व्यक्तिगत नेतृत्व की पहचान है, बल्कि भारत की साझेदारी, मित्रता और रणनीतिक सहयोग की वैश्विक मान्यता भी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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‘Ji Ram Ji’ बिल का विरोध: संसद में TMC का रातभर धरना

‘Ji Ram Ji’ बिल का विरोध: संसद में TMC का रातभर धरना

संसद में पेश किए गए ‘Ji Ram Ji’ बिल को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। इस बिल के विरोध में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों ने संसद परिसर में रातभर धरना दिया। विपक्ष का आरोप है कि यह कानून आम जनता और गरीबों के हित में नहीं है। धरने के दौरान विपक्षी नेताओं ने सरकार पर जमकर निशाना साधा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बेहद भावुक अंदाज में कहा,“मैं मां की कसम खाकर कहता हूं कि यह कानून गरीबों के लिए नहीं है। यह सिर्फ चुनिंदा लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए लाया गया है।” TMC और कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार बिना चर्चा के जल्दबाजी में बिल पास कराना चाहती है। उनका आरोप है कि इस कानून से आम लोगों की परेशानियां बढ़ेंगी और इसका सीधा असर गरीब और मध्यम वर्ग पर पड़ेगा। बिल के विरोध में TMC सांसदों ने संसद परिसर में रात बिताई और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। विपक्षी दलों की मांग है कि बिल को वापस लिया जाए या फिर इस पर विस्तृत चर्चा कराई जाए। विपक्ष ने सरकार पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने का आरोप लगाया। नेताओं का कहना है कि संसद में चर्चा के बजाय जबरन कानून थोपना सही नहीं है। फिलहाल ‘जी-राम-जी’ बिल पर टकराव बना हुआ है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद के अंदर और बाहर सियासत और तेज होने के आसार हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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PM Modi

PM Modi, Priyanka Gandhi और नेताओं की संसद बाद की Tea Party का संवाद

संसद के Winter Session 2025 के समापन के बाद संसद परिसर में एक अनौपचारिक Tea Party का आयोजन किया गया। यह बैठक न केवल नेताओं के बीच हल्के-फुल्के संवाद का अवसर थी, बल्कि राजनीतिक सौहार्द और सहयोग की भावना को भी बढ़ावा देती है। सांसदों का Human Touch इस Tea Party में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। इसके अलावा राजनाथ सिंह, सुप्रिया सुले और धर्मेंद्र यादव जैसे नेता भी उपस्थित थे। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सभी दलों के नेताओं को इस बैठक में आमंत्रित किया, ताकि सत्र के बाद बातचीत का सौहार्दपूर्ण माहौल बना रहे। विशेष रूप से इस बार की Tea Party में केवल सत्ताधारी दल ही नहीं, बल्कि मुख्य विपक्षी दलों के नेता भी शामिल थे। इससे यह संदेश गया कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद सहयोग और समझ की गुंजाइश बनी रहती है। Political Dialogue और लोकतंत्र संसद सत्र के बाद की इस तरह की अनौपचारिक बैठकें लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये न केवल कामकाज और विधायी मामलों पर चर्चा का अवसर देती हैं, बल्कि नेताओं के बीच सीधे संवाद और भरोसे का Human Touch भी बनाए रखती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कार्यक्रम राजनीतिक माहौल को शांत और सौहार्दपूर्ण बनाने में मदद करते हैं। जब सत्ता और विपक्ष के नेता एक-दूसरे के साथ अनौपचारिक तरीके से संवाद करते हैं, तो यह लोकतंत्र को मजबूती देने वाला संकेत माना जाता है। सोशल और राजनीतिक संदेश इस Tea Party ने यह भी दिखाया कि राजनीति सिर्फ़ बहस या मतभेद तक सीमित नहीं है। इसके पीछे सहयोग, समझ और संबंध बनाने की कला भी छिपी होती है। संसद में अनौपचारिक रूप से मिलने-जुलने से नेताओं के बीच भरोसा और मित्रता की भावना मजबूत होती है, जो भविष्य में राजनीतिक निर्णयों और संसद कार्यवाही में सकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bangladesh

Bangladesh India Tension बांग्लादेश में बढ़ती कट्टरता और Anti-India माहौल India की Security पर बढ़ रहा है खतरा

दक्षिण एशिया की राजनीति एक बार फिर अस्थिर दौर से गुजर रही है। इस बार केंद्र में है Bangladesh, जो अब तक भारत का भरोसेमंद पड़ोसी माना जाता रहा है। लेकिन हालिया घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या Bangladesh में बढ़ता Extremism और Anti-India Sentiment भारत की सुरक्षा के लिए नया खतरा बन सकता है? बांग्लादेश में क्या हो रहा है? पिछले कुछ दिनों में बांग्लादेश (Bangladesh) के कई हिस्सों में हिंसक प्रदर्शन देखने को मिले हैं। एक कट्टरपंथी नेता की मौत के बाद सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों ने न केवल सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया, बल्कि भारत के खिलाफ नारेबाज़ी भी की। कुछ जगहों पर भारतीय प्रतिष्ठानों और अवामी लीग के कार्यालयों को निशाना बनाया गया। यह केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहराती कट्टर सोच और राजनीतिक अस्थिरता की झलक भी दिखाई देती है। भारत-विरोधी माहौल क्यों बन रहा है? प्रदर्शनों के दौरान यह प्रचार किया गया कि इन घटनाओं के पीछे भारत की भूमिका है। भले ही इन आरोपों का कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया हो, लेकिन इस तरह की बातें आम लोगों के बीच भारत के प्रति अविश्वास को बढ़ा रही हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि चुनाव से पहले का माहौल, राजनीतिक ध्रुवीकरण और सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहें इस नफरत को हवा दे रही हैं। India की Security क्यों चिंतित है? भारत और बांग्लादेश के बीच लंबी और संवेदनशील सीमा है। अगर बांग्लादेश में हालात बिगड़ते हैं, तो इसके असर भारत के पूर्वोत्तर राज्यों पर पड़ सकते हैं।संभावित खतरे: इन्हीं आशंकाओं को देखते हुए भारत ने ढाका में स्थित Indian Visa Application Centre को अस्थायी रूप से बंद कर दिया और बांग्लादेश सरकार से अपने मिशनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा। Pakistan Angle: सच्चाई या आशंका? कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और सुरक्षा विश्लेषणों में यह भी चर्चा है कि बांग्लादेश के कुछ कट्टरपंथी गुट पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठनों से प्रेरणा ले सकते हैं। हालांकि अभी तक इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी, भारत के लिए यह एक चेतावनी है, क्योंकि अतीत में ऐसे संकेतों को नज़रअंदाज़ करना भारी पड़ चुका है। Election Pressure और Political Instability Bangladesh में आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल काफी गर्म है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव, सड़कों पर प्रदर्शन और कट्टर नारों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। इतिहास गवाह है कि चुनावी अस्थिरता के दौर में उग्रवादी ताकतें सक्रिय हो जाती हैं। यही कारण है कि भारत इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नज़र बनाए हुए है। India–Bangladesh Relations पर असर भारत और Bangladesh के रिश्ते सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं हैं। व्यापार, ट्रांजिट, सुरक्षा सहयोग और सांस्कृतिक रिश्ते भी इससे जुड़े हैं। मौजूदा तनाव अगर लंबा चला, तो इन सभी क्षेत्रों पर असर पड़ सकता है। हालांकि दोनों देशों की सरकारें अभी भी संवाद के रास्ते खुले रखने की कोशिश कर रही हैं। क्या बांग्लादेश “नया Pakistan” बन रहा है? इस सवाल का जवाब फिलहाल नहीं है। बांग्लादेश की स्थिति पाकिस्तान जैसी नहीं है, लेकिन जो संकेत सामने आ रहे हैं, वे भारत के लिए अलर्ट बेल ज़रूर हैं। कट्टरपंथ का बढ़ना, भारत-विरोधी सोच और राजनीतिक अस्थिरता—अगर इन पर समय रहते नियंत्रण नहीं पाया गया, तो भविष्य में हालात गंभीर हो सकते हैं। Bangladesh आज एक अहम मोड़ पर खड़ा है। यह तय होना अभी बाकी है कि वह स्थिरता और विकास का रास्ता चुनेगा या फिर कट्टरपंथ और अराजकता की ओर बढ़ेगा।भारत के लिए यह समय सतर्क रहने का है—न घबराने का, न लापरवाह होने का। आने वाले महीनों में बांग्लादेश की दिशा न केवल उसकी अपनी किस्मत तय करेगी, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की शांति और सुरक्षा को भी प्रभावित करेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Javed Akhtar का नीतीश सरकार पर हमला, बोले– बिना शर्त माफी मांगें

Javed Akhtar का नीतीश सरकार पर हमला, बोले– बिना शर्त माफी मांगें

प्रसिद्ध गीतकार और लेखक Javed Akhtar ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तीखा हमला किया है। उन्होंने कहा कि हिजाब से जुड़े फैसले को लेकर मुख्यमंत्री को बिना किसी शर्त के माफी मांगनी चाहिए। जावेद अख्तर का कहना है कि इस तरह के फैसले समाज में गलत संदेश देते हैं और अल्पसंख्यकों की भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं। वहीं दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने नीतीश सरकार के फैसले का खुलकर समर्थन किया है। गिरिराज सिंह ने कहा कि हिजाब हटाने का फैसला बिल्कुल सही है, क्योंकि भारत कोई इस्लामिक देश नहीं है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर किसी को नौकरी चाहिए, तो उसे चेहरा दिखाना ही होगा। गिरिराज सिंह का कहना है कि सरकारी और निजी नौकरियों में नियम सभी के लिए समान होते हैं और किसी भी धर्म के आधार पर विशेष छूट नहीं दी जा सकती। उन्होंने यह भी कहा कि देश में संविधान सर्वोपरि है और उसी के अनुसार फैसले लिए जाते हैं। इस पूरे विवाद को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। एक तरफ जहां जावेद अख्तर इस फैसले को गलत बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ गिरिराज सिंह इसे राष्ट्रहित और संविधान के अनुरूप बता रहे हैं। हिजाब को लेकर शुरू हुई यह बहस अब सामाजिक और राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बनती जा रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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जी राम जी

VB-जी राम जी Bill 2025 भारत में पारित मनरेगा का भविष्य और सांसदों का हंगामा

आज संसद में VB‑जी राम जी 2025 पारित हो गया, जो ग्रामीण रोजगार की पुरानी योजना मनरेगा (MGNREGA) का नया रूप है। सरकार का दावा है कि यह बिल ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका के अवसरों को आधुनिक और ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए लाया गया है। हालांकि, बिल के पारित होते ही लोकसभा में विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया। कई सांसदों ने विरोध के रूप में बिल की प्रतियां फाड़ दीं, नारे लगाए और पारित प्रक्रिया पर सवाल उठाए। विपक्ष का कहना है कि इस बिल को संसदीय समिति में भेजकर विस्तार से चर्चा करनी चाहिए थी, न कि इसे जल्दबाजी में पारित किया जाए। विपक्ष की नाराजगी के मुख्य कारण: सरकार का पक्ष: सरकार का कहना है कि यह बिल ग्रामीण रोजगार योजनाओं को नवीन और अधिक व्यापक बनाने का प्रयास है। रिपोर्ट्स के अनुसार, नए बिल के लागू होने पर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के गारंटीकृत दिनों में वृद्धि हो सकती है। इस बीच, राज्यसभा में भी इस बिल को लेकर हंगामा और चर्चा की संभावना बनी हुई है। विपक्ष ने संकेत दिए हैं कि वे बिल के खिलाफ सशक्त विरोध जारी रखेंगे। इस बिल का असर सीधे ग्रामीण रोजगार और रोज़गार सुरक्षा पर होगा, इसलिए जनता और स्थानीय प्रतिनिधियों की नजर इस बिल पर बनी रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gold Mining: ऑस्ट्रेलिया में सोने की नई खोज से बदलेगी तस्वीर, भारत को मिल सकता है नया सप्लायर

भारत में सोना सिर्फ गहना नहीं, बल्कि लोगों की बचत और निवेश का भी अहम हिस्सा है। शादी का सीजन हो या दिवाली-धनतेरस, सोने की खरीदारी को लेकर बाजार में हमेशा हलचल रहती है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया से आई सोने की खोज और बढ़ते निवेश की खबर भारत के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऑस्ट्रेलिया में सोने की नई खोज के लिए कंपनियां बड़े स्तर पर खर्च कर रही हैं। इससे आने वाले समय में सोने की वैश्विक सप्लाई बढ़ने की संभावना है। भारत जैसे देश के लिए यह एक अहम घटनाक्रम है, क्योंकि अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा पूरा करने के लिए भारत को दूसरे देशों से सोना आयात करना पड़ता है। Australia में Gold Exploration पर कितना खर्च हुआ? ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज से जुड़ा निवेश जून 2026 की तिमाही में बढ़कर लगभग 565.6 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पहुंच गया। ऑस्ट्रेलियाई सांख्यिकी ब्यूरो (ABS) के आंकड़ों के अनुसार, पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें 23.6% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह खर्च जमीन के नीचे मौजूद सोने के संभावित भंडार का पता लगाने, ड्रिलिंग और खनन की संभावनाओं का आकलन करने जैसे कामों पर किया जाता है। हालांकि, खोज पर खर्च बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि हर जगह सोने का नया भंडार मिल गया है। किसी जगह सोना मिलने के बाद भी यह देखना पड़ता है कि वहां से उसे निकालना आर्थिक रूप से कितना व्यावहारिक होगा। ऑस्ट्रेलिया में कितना Gold Reserve मौजूद है? ऑस्ट्रेलिया दुनिया के प्रमुख सोना उत्पादक देशों में शामिल है। सरकारी संस्था Geoscience Australia के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2024 तक देश के अनुमानित Ore Reserves करीब 4,785 टन थे। वहीं, पहचाने गए कुल Gold Resources का आंकड़ा इससे काफी ज्यादा था। यहां एक बात समझना जरूरी है। Gold Resources में सोने के संभावित और पहचाने गए संसाधन शामिल होते हैं, जबकि Ore Reserves उस सोने को दर्शाते हैं जिसे मौजूदा तकनीकी और आर्थिक परिस्थितियों में निकालना व्यावहारिक माना जाता है। इसीलिए ऑस्ट्रेलिया में सोने के बड़े भंडार होने और किसी नई खोज को दुनिया का सबसे बड़ा भंडार बताने में अंतर है। किसी खास नई खोज के बारे में ऐसा दावा करने से पहले उसके आधिकारिक आंकड़ों की पुष्टि जरूरी है। भारत को कैसे मिल सकता है फायदा? भारत में सोने की मांग काफी बड़ी है और घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अगर ऑस्ट्रेलिया में आने वाले वर्षों में सोने का उत्पादन बढ़ता है, तो भारतीय आयातकों के लिए सप्लाई का एक अतिरिक्त विकल्प तैयार हो सकता है। इसके तीन संभावित फायदे हो सकते हैं: हालांकि, ऑस्ट्रेलिया में निकाला गया सोना अपने आप भारत नहीं पहुंचेगा। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि उत्पादन कितना बढ़ता है, कंपनियां किस देश को निर्यात करती हैं और भारतीय आयातकों के साथ किस तरह के व्यापारिक समझौते होते हैं। क्या भारत में सस्ता हो जाएगा सोना? सोने की नई खोज की खबर सुनकर खरीदारों के मन में सबसे पहले यही सवाल आता है कि क्या अब Gold Price कम होगा? फिलहाल ऐसा कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत केवल उत्पादन पर निर्भर नहीं करती। निवेशकों की मांग, केंद्रीय बैंकों की खरीद, डॉलर की चाल और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी भाव को प्रभावित करती हैं। भारत में इसके अलावा रुपये और डॉलर की विनिमय दर, आयात शुल्क, टैक्स और घरेलू मांग का भी असर पड़ता है। इसलिए ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज बढ़ने के बावजूद भारतीय बाजार में कीमतें तुरंत कम होंगी, इसकी गारंटी नहीं है। ₹13,000 करोड़ के निवेश की खबर कितनी सही है? ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज पर खर्च बढ़ने के आंकड़े सामने आए हैं। लेकिन ₹13,000 करोड़ के निवेश को किसी खास नई खोज या दुनिया के सबसे बड़े सोना भंडार से जोड़ने के लिए संबंधित कंपनी और परियोजना के आधिकारिक दस्तावेजों की जरूरत है। इसलिए इस रकम को किसी एक नए गोल्ड रिजर्व की खोज पर खर्च हुई राशि बताने से पहले इसकी पुष्टि करना जरूरी है। खोज पर किया गया खर्च, जमीन में मौजूद कुल सोने का मूल्य और खनन परियोजना में कुल निवेश तीन अलग-अलग बातें हैं। आगे क्या होगा? ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज पर बढ़ता खर्च वैश्विक गोल्ड इंडस्ट्री के लिए अहम है। अगर आने वाले वर्षों में नए भंडार की पहचान होती है और उनसे व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो पाता है, तो इससे अंतरराष्ट्रीय सप्लाई के विकल्प बढ़ सकते हैं। भारत के लिए भी यह एक संभावित अवसर है। लेकिन नए सप्लायर की भूमिका, आयात पर असर और सोने की कीमतों में बदलाव का पता तभी चलेगा, जब वास्तविक उत्पादन और निर्यात के आंकड़े सामने आएंगे। फिलहाल, ऑस्ट्रेलिया की गोल्ड इंडस्ट्री पर नजर रखना जरूरी है, लेकिन नई खोज के नाम पर सोना सस्ता होने की उम्मीद करना अभी जल्दबाजी होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

इंदौर में 175 डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के अटैचमेंट खत्म, मूल पदस्थापना पर जॉइनिंग के बाद ही मिलेगा अक्टूबर का वेतन

स्वास्थ्य विभाग में मूल पदस्थापना के बजाय दूसरी जगह काम कर रहे 175 डॉक्टरों, नर्सों और अन्य कर्मचारियों के अटैचमेंट समाप्त कर दिए गए हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने 16 अक्टूबर को आदेश जारी कर सभी अटैचमेंट तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए। आदेश के बाद संबंधित कर्मचारियों को अपने मूल पदस्थापना स्थल पर वापस जाकर जॉइनिंग देनी होगी। ऐसा करने के बाद ही उन्हें अक्टूबर महीने का वेतन मिल सकेगा। स्वास्थ्य विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को आदेश का तत्काल पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। तत्काल कार्यमुक्त कर मूल पदस्थापना पर भेजने के निर्देश CMHO के आदेश के मुताबिक, संबंधित अधिकारियों को अटैचमेंट पर काम कर रहे कर्मचारियों को उसी दिन कार्यमुक्त कर उनके मूल पदस्थापना स्थल पर भेजना होगा। इसकी जानकारी CMHO कार्यालय को भी उपलब्ध करानी होगी। वेतन आहरण केंद्रों को निर्देश दिए गए हैं कि कर्मचारियों की मूल पदस्थापना पर उपस्थिति सुनिश्चित होने के बाद ही अक्टूबर का वेतन जारी किया जाए। इससे कर्मचारियों को अपने निर्धारित कार्यस्थल पर लौटना अनिवार्य होगा। अटैचमेंट जारी मिला तो जिम्मेदार अधिकारी पर होगी कार्रवाई स्वास्थ्य विभाग ने आदेश के पालन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। CMHO ने स्पष्ट किया है कि आदेश जारी होने के बाद भी कोई कर्मचारी या अधिकारी अटैचमेंट पर काम करता पाया गया, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसकी जिम्मेदारी संबंधित संस्था के प्रभारी की होगी। विभाग ने अधिकारियों को निर्देशों का पालन कराने और इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थाओं को भेजा गया आदेश यह आदेश सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक, देपालपुर, मानपुर, सांवेर और हातोद के खंड चिकित्सा अधिकारियों, महू सहित विभिन्न अस्पतालों के प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों, शहरी स्वास्थ्य संस्थाओं और मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक के प्रभारियों को भेजा गया है। आदेश में भोपाल में हुई बैठकों और 16 अक्टूबर को मुख्यालय स्तर से मिले निर्देशों का भी हवाला दिया गया है। सभी संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से आदेश लागू कराने के निर्देश दिए गए हैं।

नवरात्रि पर रायपुर सेंट्रल जेल में सेवा की मिसाल, काली माता सेवा समिति ने 1300 बंदियों को बांटे फल

नवरात्रि के अवसर पर काली माता सेवा समिति ने रायपुर सेंट्रल जेल में करीब 1300 बंदियों को फल वितरित किए। समिति ने यह पहल उन बंदियों के लिए की, जो नवरात्रि में उपवास रखकर माता रानी की आराधना कर रहे हैं। इस आयोजन के जरिए समिति ने सेवा, करुणा और मानवीय संवेदना का संदेश दिया। समिति के अध्यक्ष दीपक भारद्वाज (पोल्ले) ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य बंदियों के प्रति संवेदनशीलता और सेवा भाव को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की गलती या अपराध से उसके सुधरने और बेहतर जीवन जीने की संभावनाएं समाप्त नहीं हो जातीं। बंदियों के सुधार और पुनर्वास पर दिया जोर दीपक भारद्वाज ने कहा कि समाज को न्याय के प्रति सम्मान बनाए रखने के साथ-साथ सुधार और पुनर्वास की भावना को भी महत्व देना चाहिए। बंदियों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने से समाज में मानवीय मूल्यों को मजबूती मिलती है। समिति का मानना है कि जेल में बंद लोगों के साथ भी सम्मानजनक और मानवीय व्यवहार होना चाहिए, ताकि उनमें सकारात्मक बदलाव की भावना विकसित हो सके। पहले भी जेल में कर चुके हैं फल वितरण काली माता सेवा समिति के अनुसार, वह पहले भी कई बार जेल में बंदियों को फल वितरित कर चुकी है। समिति का कहना है कि नवरात्रि केवल पूजा-पाठ और उपवास तक सीमित पर्व नहीं है, बल्कि यह सेवा, करुणा और सद्भावना को जीवन में अपनाने का अवसर भी है। इसी भावना के साथ समिति के सदस्यों ने उपवास रखने वाले बंदियों तक फल पहुंचाए। आगे भी जारी रहेंगे सेवा कार्य समिति ने समाज में सेवा, सद्भावना और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए ऐसे आयोजन आगे भी जारी रखने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में अशोक त्रिपाठी, गुड्डू, सुनील प्रमुख, राजू भाई तारवानी और रामकृष्ण धीवर सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
वैभव सूर्यवंशी

IND vs WI T20: वैभव सूर्यवंशी का भरोसा कायम, 4 दिन में दूसरी पोस्ट; अब भी मौके का इंतजार

भारत और वेस्टइंडीज (IND vs WI) के बीच T-20 सीरीज के निर्णायक मुकाबले से पहले युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी एक बार फिर चर्चा में हैं। सीरीज में अब तक खेलने का मौका नहीं मिलने के बावजूद वैभव ने उम्मीद नहीं छोड़ी है। चार दिन के भीतर उनकी दूसरी सोशल मीडिया पोस्ट सामने आई है, जिसमें भरोसे का संदेश देखने को मिला। वैभव को इस सीरीज में अब तक मैदान पर उतरने का मौका नहीं मिला है। ऐसे में क्रिकेट फैंस के मन में एक ही सवाल है—क्या पांचवें टी-20 में उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा? Vaibhav Sooryavanshi की दूसरी पोस्ट ने खींचा ध्यान वैभव सूर्यवंशी की सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर फैंस के बीच चर्चा हो रही है। चार दिन में दूसरी पोस्ट आने के बाद उनके संदेश पर लोगों की नजरें टिकी हैं। हालांकि, पोस्ट को टीम में चयन या किसी खास फैसले से जोड़कर देखना सही नहीं होगा, क्योंकि प्लेइंग-11 में किसे मौका मिलेगा, इसका फैसला टीम मैनेजमेंट करता है। कम उम्र में अपनी बल्लेबाजी से पहचान बनाने वाले वैभव के लिए टीम के साथ रहना और मौके का इंतजार करना भी अनुभव का हिस्सा है। अब देखना होगा कि उन्हें इस सीरीज में खेलने का मौका मिलता है या नहीं। IND vs WI 5th T20: निर्णायक मुकाबले पर नजर भारत और वेस्टइंडीज की टी-20 सीरीज का पांचवां मुकाबला दोनों टीमों के लिए अहम है। सीरीज के आखिरी मैच में जीत हासिल करने वाली टीम खिताब अपने नाम करेगी। ऐसे में भारतीय टीम की प्लेइंग-11 को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। फैंस यह जानना चाहते हैं कि क्या टीम मैनेजमेंट इस मुकाबले में युवा खिलाड़ियों को मौका देगा। वैभव सूर्यवंशी का नाम भी इसी चर्चा में शामिल है। हालांकि, उनके खेलने को लेकर आधिकारिक पुष्टि के बिना किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। क्या वैभव सूर्यवंशी को मिलेगा डेब्यू का मौका? वैभव को लेकर उत्सुकता की एक बड़ी वजह उनकी कम उम्र और क्रिकेट में तेजी से बनी पहचान है। फैंस उन्हें भारतीय टीम की जर्सी में खेलते देखना चाहते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौका मिलना टीम की जरूरत और चयन रणनीति पर निर्भर करता है। फिलहाल वैभव के लिए इंतजार जारी है। पांचवें टी-20 में उनका नाम प्लेइंग-11 में शामिल होता है या नहीं, इसका पता टीम की आधिकारिक घोषणा के बाद ही चलेगा। क्रिकेट में हर खिलाड़ी को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। वैभव के समर्थकों को उम्मीद है कि उन्हें जल्द ही मैदान पर अपनी काबिलियत दिखाने का अवसर मिलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
लालकृष्ण आडवाणी

LK Advani Hospitalised ICU में भर्ती लालकृष्ण आडवाणी की सेहत कैसी? जानें ताजा अपडेट

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की सेहत को लेकर 17 अक्टूबर को ताजा जानकारी सामने आई है। 98 वर्षीय आडवाणी को सीने में संक्रमण (Chest Infection) की शिकायत के बाद दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है और डॉक्टरों की टीम उनकी निगरानी कर रही है। परिवार और समर्थकों के लिए यह खबर चिंता बढ़ाने वाली जरूर है, लेकिन फिलहाल राहत की बात यह है कि अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक उनकी स्थिति स्थिर है। डॉक्टर उनकी सेहत से जुड़ी जरूरी जांच कर रहे हैं और इलाज जारी है। LK Advani Health Update: अस्पताल में क्या चल रहा है इलाज? लालकृष्ण आडवाणी को शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 की शाम करीब 7:30 बजे अस्पताल लाया गया था। उन्हें सीने में संक्रमण की शिकायत के बाद पल्मोनरी विभाग में भर्ती किया गया। यहां डॉक्टरों की एक टीम उनकी सेहत पर नजर रख रही है और जरूरी मेडिकल जांच की जा रही है। 17 अक्टूबर तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनकी हालत स्थिर है। हालांकि, उनकी सेहत में आगे कितना सुधार हुआ है और अस्पताल से छुट्टी कब मिलेगी, इस बारे में अभी कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। पहले भी अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं लालकृष्ण आडवाणी लालकृष्ण आडवाणी को इससे पहले मई 2026 में भी उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई थी। दिसंबर 2024 में भी उन्हें अपोलो अस्पताल की ICU में रखा गया था। उस समय डॉक्टरों ने उनकी मेडिकल जांच और इलाज किया था। जून और जुलाई 2024 में भी उन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बढ़ती उम्र को देखते हुए उनकी सेहत पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मौजूदा समय में डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार जारी है। PM Modi ने हाल ही में की थी लालकृष्ण आडवाणी से मुलाकात लालकृष्ण आडवाणी के अस्पताल में भर्ती होने से कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2026 को उनके दिल्ली स्थित आवास पर मुलाकात की थी। इस दौरान प्रधानमंत्री ने उनसे आशीर्वाद लिया और सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान की सराहना की थी। आडवाणी लंबे समय तक बीजेपी के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं। पार्टी को राष्ट्रीय राजनीति में स्थापित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यही वजह है कि उनकी सेहत से जुड़ी खबर पर राजनीतिक जगत और उनके समर्थकों की नजर बनी हुई है। राम रथ यात्रा से उपप्रधानमंत्री तक का सफर लालकृष्ण आडवाणी का राजनीतिक सफर कई दशकों तक फैला रहा है। वह भारतीय जनता पार्टी के तीन बार राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे और पार्टी के विस्तार में अहम भूमिका निभाई। साल 1990 में निकाली गई उनकी राम रथ यात्रा ने राष्ट्रीय राजनीति में व्यापक चर्चा पैदा की थी। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद 2002 से 2004 तक वह भारत के उपप्रधानमंत्री रहे। देश की राजनीति में उनके लंबे योगदान को देखते हुए वर्ष 2024 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। LK Advani अब अगले हेल्थ अपडेट का इंतजार लालकृष्ण आडवाणी फिलहाल दिल्ली के अपोलो अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में हैं। 17 अक्टूबर तक सामने आई जानकारी के मुताबिक, उनकी हालत स्थिर है और सीने में संक्रमण के लिए इलाज चल रहा है। अब सभी की नजर अस्पताल की ओर से जारी होने वाले अगले हेल्थ अपडेट पर है। उनकी सेहत में सुधार, इलाज की स्थिति और डिस्चार्ज को लेकर नई जानकारी मिलने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल सबसे अहम बात यही है कि लालकृष्ण आडवाणी की हालत स्थिर बताई गई है और उनका इलाज जारी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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