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BREAKING NEWS:वक्फ संशोधन बिल पर लोकसभा में कल 12 बजे होगी चर्चा: सरकार और विपक्ष आमने-सामने, बड़ा सियासी संग्राम तय

नई दिल्ली: वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और प्रशासन से जुड़े वक्फ संशोधन विधेयक (Waqf Amendment Bill) को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। यह विधेयक कल दोपहर 12 बजे लोकसभा में पेश किया जाएगा, जिस पर 8 घंटे की चर्चा निर्धारित की गई है। हालांकि, विपक्ष ने इस चर्चा को 12 घंटे तक बढ़ाने की मांग की है, जिससे यह साफ हो गया है कि इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच बड़ा टकराव हो सकता है। क्या है वक्फ संशोधन विधेयक? वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन भारत में वक्फ अधिनियम, 1995 के तहत किया जाता है। वक्फ बोर्ड मुस्लिम समुदाय की धार्मिक और सामाजिक संपत्तियों को नियंत्रित करता है। हालांकि, समय-समय पर इस अधिनियम को लेकर विवाद होते रहे हैं। नए संशोधन में क्या बदलाव किए जा रहे हैं? विपक्ष ने जताया कड़ा विरोध इस विधेयक को लेकर विपक्ष ने तीखा विरोध जताया है। समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे समुदाय के खिलाफ बताया और कहा,“सरकार बिना सभी पक्षों को सुने यह विधेयक लाना चाहती है, जो पूरी तरह अनुचित है। यह मुसलमानों की धार्मिक और सामाजिक संपत्तियों पर हमला है। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे और पूरी ताकत से इसका विरोध करेंगे।” कांग्रेस, टीएमसी और अन्य विपक्षी दलों ने भी विधेयक पर चर्चा का समय बढ़ाने की मांग की है। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा,“यह कानून देश के लाखों लोगों को प्रभावित करेगा, इसलिए इस पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए। केवल 8 घंटे की चर्चा काफी नहीं है।” योगी आदित्यनाथ का समर्थन, कहा- बदलाव समय की मांग उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस विधेयक का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने कहा,“देश में वक्फ संपत्तियों का सही उपयोग बहुत ज़रूरी है। यह संशोधन पारदर्शिता लाने और गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए किया जा रहा है।” योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि,“वक्फ संपत्तियों को लेकर वर्षों से विवाद और अनियमितताएं रही हैं। अगर कोई बदलाव किया जा रहा है, तो वह राष्ट्रहित और समाजहित में है।” विधेयक के समर्थक और विरोधी कौन? इस विधेयक को लेकर दो खेमे बन चुके हैं।✅ समर्थक (BJP, JDU, AIADMK) – इन दलों का कहना है कि यह विधेयक संपत्तियों का सही प्रबंधन सुनिश्चित करेगा और भ्रष्टाचार को रोकेगा।❌ विरोधी (SP, Congress, TMC, AIMIM, Left) – विपक्षी दलों का मानना है कि सरकार इस कानून के ज़रिए वक्फ संपत्तियों पर नियंत्रण करना चाहती है और अल्पसंख्यकों को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रही है। अब आगे क्या होगा? निष्कर्ष: वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर संसद में जबरदस्त हंगामा देखने को मिल सकता है। सरकार इसे भ्रष्टाचार रोकने वाला कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ साजिश करार दे रहा है। कल संसद में होने वाली बहस के बाद ही यह तय होगा कि यह विधेयक पास होगा या नहीं।
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क्या राणा सांगा ने बाबर को भारत आने का निमंत्रण दिया था? इतिहासकारों की राय और प्रमाण

देश हरपल एक्सक्लूसिव मुगल साम्राज्य के संस्थापक बाबर का भारत आगमन इतिहास के सबसे चर्चित विषयों में से एक है। एक लंबे समय से यह चर्चा होती रही है कि क्या मेवाड़ के राजा राणा सांगा ने वास्तव में बाबर को भारत पर आक्रमण करने के लिए आमंत्रित किया था या नहीं। इस सवाल का जवाब खोजने के लिए हमने कई प्रामाणिक ऐतिहासिक स्रोतों और इतिहासकारों की राय को खंगाला। क्या था ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य? 16वीं शताब्दी के प्रारंभ में उत्तर भारत छोटे-छोटे राज्यों में बंटा हुआ था। दिल्ली की सत्ता लोदी वंश के हाथों में थी, लेकिन सुल्तान इब्राहिम लोदी के खिलाफ कई विरोधी शासक थे, जिनमें राणा सांगा प्रमुख थे। दूसरी ओर, बाबर मध्य एशिया का एक शक्तिशाली शासक था, जिसने समरकंद और काबुल पर शासन किया था और उसकी नजरें हिंदुस्तान पर थीं। इतिहासकारों की राय और प्रमुख ग्रंथों का उल्लेख खानवा की लड़ाई: विश्वासघात या गलतफहमी? निष्कर्ष इतिहासकारों और प्रामाणिक ग्रंथों के अध्ययन से स्पष्ट होता है कि राणा सांगा ने बाबर को भारत आने का कोई औपचारिक निमंत्रण नहीं दिया था। हां, इब्राहिम लोदी के खिलाफ एक अनकहा गठबंधन जरूर था, लेकिन बाबर ने भारत पर अपने हितों के कारण आक्रमण किया था, न कि राणा सांगा के निमंत्रण पर। बाद में जब राणा सांगा को एहसास हुआ कि बाबर वापस नहीं जाने वाला, तो उन्होंने उसके खिलाफ युद्ध किया। (लेखक: देश हरपल न्यूज़ डेस्क)
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Kiran Rijiju

वक्फ संशोधन बिल पर किरन रिजिजू का बड़ा बयान: ‘विरोध करने वाले करोड़ों की जमीन पर काबिज’, जानिए पूरा मामला

नई दिल्ली: वक्फ संशोधन बिल को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है। इस बीच, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जो लोग इस बिल का विरोध कर रहे हैं, वे खुद करोड़ों की जमीन पर अवैध कब्जा जमाए बैठे हैं। क्या है वक्फ संशोधन बिल? वक्फ संशोधन बिल 2023 को लेकर संसद में चर्चा जोरों पर है। सरकार का कहना है कि यह बिल वक्फ संपत्तियों से जुड़े विवादों को हल करने और पारदर्शिता लाने के लिए लाया गया है। इस बिल के जरिए वक्फ बोर्डों को दी जाने वाली कुछ विशेष शक्तियों में बदलाव किया गया है, जिससे संपत्ति विवादों को सुलझाने में आसानी होगी। किरन रिजिजू ने क्या कहा? केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक इंटरव्यू में कहा कि जो लोग इस बिल का विरोध कर रहे हैं, वे खुद करोड़ों रुपये की जमीन पर अवैध रूप से काबिज हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वक्फ की आड़ में कई जगहों पर अवैध कब्जे हुए हैं और सरकार इन मामलों को ठीक करने के लिए यह कानून ला रही है। केरल के बिशप का समर्थन केरल के कैथोलिक बिशप ने भी वक्फ संशोधन बिल का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि वक्फ संपत्तियों को लेकर कई राज्यों में विवाद हैं और इस बिल से इस समस्या का हल निकल सकता है। विपक्ष का विरोध क्यों? विपक्षी दलों का कहना है कि यह बिल मुस्लिम समुदाय की संपत्तियों के खिलाफ है और इससे उनके अधिकारों का हनन होगा। वहीं, सरकार का कहना है कि यह बिल केवल पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है। सरकार की मंशा क्या है? सरकार का कहना है कि वक्फ संपत्तियों पर अनियमितताओं और अवैध कब्जों को रोकने के लिए इस बिल की जरूरत है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि इससे किसी भी धर्म विशेष के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होगा। आगे क्या होगा? वक्फ संशोधन बिल पर संसद में बहस जारी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह बिल पास होता है या विपक्षी विरोध के कारण इसमें और बदलाव किए जाते हैं।
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PM pays tribute to RSS founders in Nagpur

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नागपुर दौरा: संघ संस्थापकों को श्रद्धांजलि, माधव नेत्रालय के कार्यक्रम में संबोधन

नागपुर, 30 मार्च: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने नागपुर दौरे के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संस्थापकों को श्रद्धांजलि अर्पित की और माधव नेत्रालय के एक विशेष कार्यक्रम में लोगों को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने चिकित्सा सेवा, सामाजिक योगदान और भारत के दृष्टिहीन नागरिकों के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला। संघ संस्थापकों को पुष्पांजलि प्रधानमंत्री मोदी ने नागपुर स्थित केशव कुंज पहुंचकर संघ के संस्थापकों डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और माधव सदाशिव गोलवलकर (गुरुजी) को पुष्पांजलि अर्पित की। यह स्थान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का ऐतिहासिक केंद्र माना जाता है, जहां से संघ की विचारधारा और राष्ट्र निर्माण की दिशा में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते हैं। माधव नेत्रालय के कार्यक्रम में PM मोदी का संबोधन इसके बाद प्रधानमंत्री माधव नेत्रालय के एक कार्यक्रम में पहुंचे, जहां उन्होंने समाज के जरूरतमंद लोगों के लिए इस संस्थान की सेवाओं की सराहना की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा,“माधव नेत्रालय केवल नेत्रों का इलाज करने का केंद्र नहीं, बल्कि समाज की सेवा का एक बड़ा उदाहरण है। दृष्टिहीनता को कम करने के लिए किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं।” प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत देशभर में आंखों की बीमारियों से बचाव और इलाज के लिए बड़े स्तर पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना, डिजिटल हेल्थ मिशन और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। राष्ट्रीय सेवा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में योगदान प्रधानमंत्री नेत्रालय के डॉक्टरों, विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भी प्रशंसा की, जो नि:स्वार्थ भाव से जरूरतमंदों की मदद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा और समाज सेवा के क्षेत्र में नागपुर जैसे शहरों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है, और यह संस्थान इस दिशा में एक मिसाल कायम कर रहा है। नागपुर दौरे का महत्व प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा कई मायनों में अहम माना जा रहा है। संघ के गढ़ नागपुर में उनकी उपस्थिति राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि आने वाले चुनावों में इससे भाजपा और संघ के संबंधों को नई ऊर्जा मिलने की संभावना जताई जा रही है। प्रधानमंत्री का यह दौरा केवल श्रद्धांजलि और संबोधन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने नागपुरवासियों को यह संदेश दिया कि सरकार स्वास्थ्य, सेवा और समाज कल्याण के लिए निरंतर प्रयासरत है। (देश हरपल न्यूज के लिए विशेष रिपोर्ट)
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सामूहिक विवाह में भाई-बहन की शादी

उत्तर प्रदेश के जौनपुर में आयोजित एक महोत्सव के दौरान हुए सामूहिक विवाह कार्यक्रम में फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि इस कार्यक्रम में भाई-बहन को दूल्हा-दुल्हन के रूप में बैठाकर उनकी शादी कराई गई। इस सामूहिक विवाह में लगभग 1001 जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ था, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल हुए थे। घटना के अनुसार, एक युवक ने अपनी बहन के साथ विवाह मंडप में बैठने के पीछे सफा पहनने की इच्छा का कारण बताया। उसका कहना था कि उसे सफा पहनने का शौक था, इसलिए वह अपनी बहन के साथ विवाह मंडप में बैठ गया। इस मामले के उजागर होने के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।  यह घटना मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत आयोजित कार्यक्रमों में सामने आए फर्जीवाड़े की घटनाओं में से एक है। इससे पहले भी अमरोहा जिले में एक महिला ने अपने चचेरे भाई के साथ शादी करके सरकारी लाभ प्राप्त करने की कोशिश की थी। इन घटनाओं के प्रकाश में आने के बाद प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है और जांच के आदेश दिए गए हैं। इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि सामूहिक विवाह योजनाओं में सख्त निगरानी और सत्यापन की आवश्यकता है, ताकि इस तरह के फर्जीवाड़े रोके जा सकें और सरकारी योजनाओं का सही लाभ पात्र लोगों तक पहुंच सके।
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SupremeCourtHearingControversy; Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर लगाई रोक, कहा- ‘टिप्पणी असंवेदनशील और अमानवीय’

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले पर रोक लगाते हुए उसकी कड़ी आलोचना की। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि किसी नाबालिग लड़की के ब्रेस्ट पकड़ना और उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ना रेप या ‘अटेम्प्ट टु रेप’ की श्रेणी में नहीं आता। सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को ‘असंवेदनशील’ और ‘अमानवीय दृष्टिकोण’ बताया है। सुप्रीम कोर्ट की कड़ी प्रतिक्रिया जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा, “यह बहुत गंभीर मामला है और जिस जज ने यह फैसला दिया, उसकी तरफ से बहुत असंवेदनशीलता दिखाई गई। हमें यह कहते हुए बहुत दुख हो रहा है कि फैसला लिखने वाले में संवेदनशीलता की पूरी तरह से कमी थी।” सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इससे पहले मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर स्वतः संज्ञान लिया था। यह फैसला आते ही कानूनी विशेषज्ञों, राजनेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को गंभीर मानते हुए तुरंत सुनवाई का निर्णय लिया। केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी सुप्रीम कोर्ट के रुख का समर्थन किया। उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने खुद लिया संज्ञान “कुछ फैसलों को रोकने के पीछे महत्वपूर्ण कारण होते हैं, और यह उनमें से एक है।” हाईकोर्ट का विवादास्पद फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था, “किसी लड़की के निजी अंग पकड़ लेना, उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ देना और जबरन उसे पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश करना रेप या ‘अटेम्प्ट टु रेप’ की श्रेणी में नहीं आता।” हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद महिला संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों ने इसकी आलोचना करते हुए कहा कि यह पीड़िता के अधिकारों का हनन करता है और यौन उत्पीड़न को हल्के में लेने जैसा है। न्यायपालिका पर उठे सवाल यह मामला देश में महिला सुरक्षा से जुड़े कानूनी ढांचे को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे फैसले अपराधियों को बचाव का आधार दे सकते हैं और महिलाओं के प्रति हो रहे अपराधों के खिलाफ न्याय मिलने में बाधा बन सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से अब पीड़िता को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। इस मामले की अगली सुनवाई जल्द ही होने की संभावना है। (देश हरपल की विशेष रिपोर्ट)
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ऑस्ट्रेलिया

Gold Mining: ऑस्ट्रेलिया में सोने की नई खोज से बदलेगी तस्वीर, भारत को मिल सकता है नया सप्लायर

भारत में सोना सिर्फ गहना नहीं, बल्कि लोगों की बचत और निवेश का भी अहम हिस्सा है। शादी का सीजन हो या दिवाली-धनतेरस, सोने की खरीदारी को लेकर बाजार में हमेशा हलचल रहती है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया से आई सोने की खोज और बढ़ते निवेश की खबर भारत के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऑस्ट्रेलिया में सोने की नई खोज के लिए कंपनियां बड़े स्तर पर खर्च कर रही हैं। इससे आने वाले समय में सोने की वैश्विक सप्लाई बढ़ने की संभावना है। भारत जैसे देश के लिए यह एक अहम घटनाक्रम है, क्योंकि अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा पूरा करने के लिए भारत को दूसरे देशों से सोना आयात करना पड़ता है। Australia में Gold Exploration पर कितना खर्च हुआ? ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज से जुड़ा निवेश जून 2026 की तिमाही में बढ़कर लगभग 565.6 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पहुंच गया। ऑस्ट्रेलियाई सांख्यिकी ब्यूरो (ABS) के आंकड़ों के अनुसार, पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें 23.6% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह खर्च जमीन के नीचे मौजूद सोने के संभावित भंडार का पता लगाने, ड्रिलिंग और खनन की संभावनाओं का आकलन करने जैसे कामों पर किया जाता है। हालांकि, खोज पर खर्च बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि हर जगह सोने का नया भंडार मिल गया है। किसी जगह सोना मिलने के बाद भी यह देखना पड़ता है कि वहां से उसे निकालना आर्थिक रूप से कितना व्यावहारिक होगा। ऑस्ट्रेलिया में कितना Gold Reserve मौजूद है? ऑस्ट्रेलिया दुनिया के प्रमुख सोना उत्पादक देशों में शामिल है। सरकारी संस्था Geoscience Australia के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2024 तक देश के अनुमानित Ore Reserves करीब 4,785 टन थे। वहीं, पहचाने गए कुल Gold Resources का आंकड़ा इससे काफी ज्यादा था। यहां एक बात समझना जरूरी है। Gold Resources में सोने के संभावित और पहचाने गए संसाधन शामिल होते हैं, जबकि Ore Reserves उस सोने को दर्शाते हैं जिसे मौजूदा तकनीकी और आर्थिक परिस्थितियों में निकालना व्यावहारिक माना जाता है। इसीलिए ऑस्ट्रेलिया में सोने के बड़े भंडार होने और किसी नई खोज को दुनिया का सबसे बड़ा भंडार बताने में अंतर है। किसी खास नई खोज के बारे में ऐसा दावा करने से पहले उसके आधिकारिक आंकड़ों की पुष्टि जरूरी है। भारत को कैसे मिल सकता है फायदा? भारत में सोने की मांग काफी बड़ी है और घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अगर ऑस्ट्रेलिया में आने वाले वर्षों में सोने का उत्पादन बढ़ता है, तो भारतीय आयातकों के लिए सप्लाई का एक अतिरिक्त विकल्प तैयार हो सकता है। इसके तीन संभावित फायदे हो सकते हैं: हालांकि, ऑस्ट्रेलिया में निकाला गया सोना अपने आप भारत नहीं पहुंचेगा। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि उत्पादन कितना बढ़ता है, कंपनियां किस देश को निर्यात करती हैं और भारतीय आयातकों के साथ किस तरह के व्यापारिक समझौते होते हैं। क्या भारत में सस्ता हो जाएगा सोना? सोने की नई खोज की खबर सुनकर खरीदारों के मन में सबसे पहले यही सवाल आता है कि क्या अब Gold Price कम होगा? फिलहाल ऐसा कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत केवल उत्पादन पर निर्भर नहीं करती। निवेशकों की मांग, केंद्रीय बैंकों की खरीद, डॉलर की चाल और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी भाव को प्रभावित करती हैं। भारत में इसके अलावा रुपये और डॉलर की विनिमय दर, आयात शुल्क, टैक्स और घरेलू मांग का भी असर पड़ता है। इसलिए ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज बढ़ने के बावजूद भारतीय बाजार में कीमतें तुरंत कम होंगी, इसकी गारंटी नहीं है। ₹13,000 करोड़ के निवेश की खबर कितनी सही है? ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज पर खर्च बढ़ने के आंकड़े सामने आए हैं। लेकिन ₹13,000 करोड़ के निवेश को किसी खास नई खोज या दुनिया के सबसे बड़े सोना भंडार से जोड़ने के लिए संबंधित कंपनी और परियोजना के आधिकारिक दस्तावेजों की जरूरत है। इसलिए इस रकम को किसी एक नए गोल्ड रिजर्व की खोज पर खर्च हुई राशि बताने से पहले इसकी पुष्टि करना जरूरी है। खोज पर किया गया खर्च, जमीन में मौजूद कुल सोने का मूल्य और खनन परियोजना में कुल निवेश तीन अलग-अलग बातें हैं। आगे क्या होगा? ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज पर बढ़ता खर्च वैश्विक गोल्ड इंडस्ट्री के लिए अहम है। अगर आने वाले वर्षों में नए भंडार की पहचान होती है और उनसे व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो पाता है, तो इससे अंतरराष्ट्रीय सप्लाई के विकल्प बढ़ सकते हैं। भारत के लिए भी यह एक संभावित अवसर है। लेकिन नए सप्लायर की भूमिका, आयात पर असर और सोने की कीमतों में बदलाव का पता तभी चलेगा, जब वास्तविक उत्पादन और निर्यात के आंकड़े सामने आएंगे। फिलहाल, ऑस्ट्रेलिया की गोल्ड इंडस्ट्री पर नजर रखना जरूरी है, लेकिन नई खोज के नाम पर सोना सस्ता होने की उम्मीद करना अभी जल्दबाजी होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

इंदौर में 175 डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के अटैचमेंट खत्म, मूल पदस्थापना पर जॉइनिंग के बाद ही मिलेगा अक्टूबर का वेतन

स्वास्थ्य विभाग में मूल पदस्थापना के बजाय दूसरी जगह काम कर रहे 175 डॉक्टरों, नर्सों और अन्य कर्मचारियों के अटैचमेंट समाप्त कर दिए गए हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने 16 अक्टूबर को आदेश जारी कर सभी अटैचमेंट तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए। आदेश के बाद संबंधित कर्मचारियों को अपने मूल पदस्थापना स्थल पर वापस जाकर जॉइनिंग देनी होगी। ऐसा करने के बाद ही उन्हें अक्टूबर महीने का वेतन मिल सकेगा। स्वास्थ्य विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को आदेश का तत्काल पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। तत्काल कार्यमुक्त कर मूल पदस्थापना पर भेजने के निर्देश CMHO के आदेश के मुताबिक, संबंधित अधिकारियों को अटैचमेंट पर काम कर रहे कर्मचारियों को उसी दिन कार्यमुक्त कर उनके मूल पदस्थापना स्थल पर भेजना होगा। इसकी जानकारी CMHO कार्यालय को भी उपलब्ध करानी होगी। वेतन आहरण केंद्रों को निर्देश दिए गए हैं कि कर्मचारियों की मूल पदस्थापना पर उपस्थिति सुनिश्चित होने के बाद ही अक्टूबर का वेतन जारी किया जाए। इससे कर्मचारियों को अपने निर्धारित कार्यस्थल पर लौटना अनिवार्य होगा। अटैचमेंट जारी मिला तो जिम्मेदार अधिकारी पर होगी कार्रवाई स्वास्थ्य विभाग ने आदेश के पालन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। CMHO ने स्पष्ट किया है कि आदेश जारी होने के बाद भी कोई कर्मचारी या अधिकारी अटैचमेंट पर काम करता पाया गया, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसकी जिम्मेदारी संबंधित संस्था के प्रभारी की होगी। विभाग ने अधिकारियों को निर्देशों का पालन कराने और इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थाओं को भेजा गया आदेश यह आदेश सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक, देपालपुर, मानपुर, सांवेर और हातोद के खंड चिकित्सा अधिकारियों, महू सहित विभिन्न अस्पतालों के प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों, शहरी स्वास्थ्य संस्थाओं और मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक के प्रभारियों को भेजा गया है। आदेश में भोपाल में हुई बैठकों और 16 अक्टूबर को मुख्यालय स्तर से मिले निर्देशों का भी हवाला दिया गया है। सभी संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से आदेश लागू कराने के निर्देश दिए गए हैं।

नवरात्रि पर रायपुर सेंट्रल जेल में सेवा की मिसाल, काली माता सेवा समिति ने 1300 बंदियों को बांटे फल

नवरात्रि के अवसर पर काली माता सेवा समिति ने रायपुर सेंट्रल जेल में करीब 1300 बंदियों को फल वितरित किए। समिति ने यह पहल उन बंदियों के लिए की, जो नवरात्रि में उपवास रखकर माता रानी की आराधना कर रहे हैं। इस आयोजन के जरिए समिति ने सेवा, करुणा और मानवीय संवेदना का संदेश दिया। समिति के अध्यक्ष दीपक भारद्वाज (पोल्ले) ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य बंदियों के प्रति संवेदनशीलता और सेवा भाव को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की गलती या अपराध से उसके सुधरने और बेहतर जीवन जीने की संभावनाएं समाप्त नहीं हो जातीं। बंदियों के सुधार और पुनर्वास पर दिया जोर दीपक भारद्वाज ने कहा कि समाज को न्याय के प्रति सम्मान बनाए रखने के साथ-साथ सुधार और पुनर्वास की भावना को भी महत्व देना चाहिए। बंदियों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने से समाज में मानवीय मूल्यों को मजबूती मिलती है। समिति का मानना है कि जेल में बंद लोगों के साथ भी सम्मानजनक और मानवीय व्यवहार होना चाहिए, ताकि उनमें सकारात्मक बदलाव की भावना विकसित हो सके। पहले भी जेल में कर चुके हैं फल वितरण काली माता सेवा समिति के अनुसार, वह पहले भी कई बार जेल में बंदियों को फल वितरित कर चुकी है। समिति का कहना है कि नवरात्रि केवल पूजा-पाठ और उपवास तक सीमित पर्व नहीं है, बल्कि यह सेवा, करुणा और सद्भावना को जीवन में अपनाने का अवसर भी है। इसी भावना के साथ समिति के सदस्यों ने उपवास रखने वाले बंदियों तक फल पहुंचाए। आगे भी जारी रहेंगे सेवा कार्य समिति ने समाज में सेवा, सद्भावना और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए ऐसे आयोजन आगे भी जारी रखने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में अशोक त्रिपाठी, गुड्डू, सुनील प्रमुख, राजू भाई तारवानी और रामकृष्ण धीवर सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
वैभव सूर्यवंशी

IND vs WI T20: वैभव सूर्यवंशी का भरोसा कायम, 4 दिन में दूसरी पोस्ट; अब भी मौके का इंतजार

भारत और वेस्टइंडीज (IND vs WI) के बीच T-20 सीरीज के निर्णायक मुकाबले से पहले युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी एक बार फिर चर्चा में हैं। सीरीज में अब तक खेलने का मौका नहीं मिलने के बावजूद वैभव ने उम्मीद नहीं छोड़ी है। चार दिन के भीतर उनकी दूसरी सोशल मीडिया पोस्ट सामने आई है, जिसमें भरोसे का संदेश देखने को मिला। वैभव को इस सीरीज में अब तक मैदान पर उतरने का मौका नहीं मिला है। ऐसे में क्रिकेट फैंस के मन में एक ही सवाल है—क्या पांचवें टी-20 में उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा? Vaibhav Sooryavanshi की दूसरी पोस्ट ने खींचा ध्यान वैभव सूर्यवंशी की सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर फैंस के बीच चर्चा हो रही है। चार दिन में दूसरी पोस्ट आने के बाद उनके संदेश पर लोगों की नजरें टिकी हैं। हालांकि, पोस्ट को टीम में चयन या किसी खास फैसले से जोड़कर देखना सही नहीं होगा, क्योंकि प्लेइंग-11 में किसे मौका मिलेगा, इसका फैसला टीम मैनेजमेंट करता है। कम उम्र में अपनी बल्लेबाजी से पहचान बनाने वाले वैभव के लिए टीम के साथ रहना और मौके का इंतजार करना भी अनुभव का हिस्सा है। अब देखना होगा कि उन्हें इस सीरीज में खेलने का मौका मिलता है या नहीं। IND vs WI 5th T20: निर्णायक मुकाबले पर नजर भारत और वेस्टइंडीज की टी-20 सीरीज का पांचवां मुकाबला दोनों टीमों के लिए अहम है। सीरीज के आखिरी मैच में जीत हासिल करने वाली टीम खिताब अपने नाम करेगी। ऐसे में भारतीय टीम की प्लेइंग-11 को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। फैंस यह जानना चाहते हैं कि क्या टीम मैनेजमेंट इस मुकाबले में युवा खिलाड़ियों को मौका देगा। वैभव सूर्यवंशी का नाम भी इसी चर्चा में शामिल है। हालांकि, उनके खेलने को लेकर आधिकारिक पुष्टि के बिना किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। क्या वैभव सूर्यवंशी को मिलेगा डेब्यू का मौका? वैभव को लेकर उत्सुकता की एक बड़ी वजह उनकी कम उम्र और क्रिकेट में तेजी से बनी पहचान है। फैंस उन्हें भारतीय टीम की जर्सी में खेलते देखना चाहते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौका मिलना टीम की जरूरत और चयन रणनीति पर निर्भर करता है। फिलहाल वैभव के लिए इंतजार जारी है। पांचवें टी-20 में उनका नाम प्लेइंग-11 में शामिल होता है या नहीं, इसका पता टीम की आधिकारिक घोषणा के बाद ही चलेगा। क्रिकेट में हर खिलाड़ी को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। वैभव के समर्थकों को उम्मीद है कि उन्हें जल्द ही मैदान पर अपनी काबिलियत दिखाने का अवसर मिलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
लालकृष्ण आडवाणी

LK Advani Hospitalised ICU में भर्ती लालकृष्ण आडवाणी की सेहत कैसी? जानें ताजा अपडेट

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की सेहत को लेकर 17 अक्टूबर को ताजा जानकारी सामने आई है। 98 वर्षीय आडवाणी को सीने में संक्रमण (Chest Infection) की शिकायत के बाद दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है और डॉक्टरों की टीम उनकी निगरानी कर रही है। परिवार और समर्थकों के लिए यह खबर चिंता बढ़ाने वाली जरूर है, लेकिन फिलहाल राहत की बात यह है कि अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक उनकी स्थिति स्थिर है। डॉक्टर उनकी सेहत से जुड़ी जरूरी जांच कर रहे हैं और इलाज जारी है। LK Advani Health Update: अस्पताल में क्या चल रहा है इलाज? लालकृष्ण आडवाणी को शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 की शाम करीब 7:30 बजे अस्पताल लाया गया था। उन्हें सीने में संक्रमण की शिकायत के बाद पल्मोनरी विभाग में भर्ती किया गया। यहां डॉक्टरों की एक टीम उनकी सेहत पर नजर रख रही है और जरूरी मेडिकल जांच की जा रही है। 17 अक्टूबर तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनकी हालत स्थिर है। हालांकि, उनकी सेहत में आगे कितना सुधार हुआ है और अस्पताल से छुट्टी कब मिलेगी, इस बारे में अभी कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। पहले भी अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं लालकृष्ण आडवाणी लालकृष्ण आडवाणी को इससे पहले मई 2026 में भी उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई थी। दिसंबर 2024 में भी उन्हें अपोलो अस्पताल की ICU में रखा गया था। उस समय डॉक्टरों ने उनकी मेडिकल जांच और इलाज किया था। जून और जुलाई 2024 में भी उन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बढ़ती उम्र को देखते हुए उनकी सेहत पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मौजूदा समय में डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार जारी है। PM Modi ने हाल ही में की थी लालकृष्ण आडवाणी से मुलाकात लालकृष्ण आडवाणी के अस्पताल में भर्ती होने से कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2026 को उनके दिल्ली स्थित आवास पर मुलाकात की थी। इस दौरान प्रधानमंत्री ने उनसे आशीर्वाद लिया और सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान की सराहना की थी। आडवाणी लंबे समय तक बीजेपी के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं। पार्टी को राष्ट्रीय राजनीति में स्थापित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यही वजह है कि उनकी सेहत से जुड़ी खबर पर राजनीतिक जगत और उनके समर्थकों की नजर बनी हुई है। राम रथ यात्रा से उपप्रधानमंत्री तक का सफर लालकृष्ण आडवाणी का राजनीतिक सफर कई दशकों तक फैला रहा है। वह भारतीय जनता पार्टी के तीन बार राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे और पार्टी के विस्तार में अहम भूमिका निभाई। साल 1990 में निकाली गई उनकी राम रथ यात्रा ने राष्ट्रीय राजनीति में व्यापक चर्चा पैदा की थी। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद 2002 से 2004 तक वह भारत के उपप्रधानमंत्री रहे। देश की राजनीति में उनके लंबे योगदान को देखते हुए वर्ष 2024 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। LK Advani अब अगले हेल्थ अपडेट का इंतजार लालकृष्ण आडवाणी फिलहाल दिल्ली के अपोलो अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में हैं। 17 अक्टूबर तक सामने आई जानकारी के मुताबिक, उनकी हालत स्थिर है और सीने में संक्रमण के लिए इलाज चल रहा है। अब सभी की नजर अस्पताल की ओर से जारी होने वाले अगले हेल्थ अपडेट पर है। उनकी सेहत में सुधार, इलाज की स्थिति और डिस्चार्ज को लेकर नई जानकारी मिलने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल सबसे अहम बात यही है कि लालकृष्ण आडवाणी की हालत स्थिर बताई गई है और उनका इलाज जारी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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