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क्या राणा सांगा ने बाबर को भारत आने का निमंत्रण दिया था? इतिहासकारों की राय और प्रमाण

देश हरपल एक्सक्लूसिव मुगल साम्राज्य के संस्थापक बाबर का भारत आगमन इतिहास के सबसे चर्चित विषयों में से एक है। एक लंबे समय से यह चर्चा होती रही है कि क्या मेवाड़ के राजा राणा सांगा ने वास्तव में बाबर को भारत पर आक्रमण करने के लिए आमंत्रित किया था या नहीं। इस सवाल का जवाब खोजने के लिए हमने कई प्रामाणिक ऐतिहासिक स्रोतों और इतिहासकारों की राय को खंगाला। क्या था ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य? 16वीं शताब्दी के प्रारंभ में उत्तर भारत छोटे-छोटे राज्यों में बंटा हुआ था। दिल्ली की सत्ता लोदी वंश के हाथों में थी, लेकिन सुल्तान इब्राहिम लोदी के खिलाफ कई विरोधी शासक थे, जिनमें राणा सांगा प्रमुख थे। दूसरी ओर, बाबर मध्य एशिया का एक शक्तिशाली शासक था, जिसने समरकंद और काबुल पर शासन किया था और उसकी नजरें हिंदुस्तान पर थीं। इतिहासकारों की राय और प्रमुख ग्रंथों का उल्लेख खानवा की लड़ाई: विश्वासघात या गलतफहमी? निष्कर्ष इतिहासकारों और प्रामाणिक ग्रंथों के अध्ययन से स्पष्ट होता है कि राणा सांगा ने बाबर को भारत आने का कोई औपचारिक निमंत्रण नहीं दिया था। हां, इब्राहिम लोदी के खिलाफ एक अनकहा गठबंधन जरूर था, लेकिन बाबर ने भारत पर अपने हितों के कारण आक्रमण किया था, न कि राणा सांगा के निमंत्रण पर। बाद में जब राणा सांगा को एहसास हुआ कि बाबर वापस नहीं जाने वाला, तो उन्होंने उसके खिलाफ युद्ध किया। (लेखक: देश हरपल न्यूज़ डेस्क)
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Kiran Rijiju

वक्फ संशोधन बिल पर किरन रिजिजू का बड़ा बयान: ‘विरोध करने वाले करोड़ों की जमीन पर काबिज’, जानिए पूरा मामला

नई दिल्ली: वक्फ संशोधन बिल को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है। इस बीच, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जो लोग इस बिल का विरोध कर रहे हैं, वे खुद करोड़ों की जमीन पर अवैध कब्जा जमाए बैठे हैं। क्या है वक्फ संशोधन बिल? वक्फ संशोधन बिल 2023 को लेकर संसद में चर्चा जोरों पर है। सरकार का कहना है कि यह बिल वक्फ संपत्तियों से जुड़े विवादों को हल करने और पारदर्शिता लाने के लिए लाया गया है। इस बिल के जरिए वक्फ बोर्डों को दी जाने वाली कुछ विशेष शक्तियों में बदलाव किया गया है, जिससे संपत्ति विवादों को सुलझाने में आसानी होगी। किरन रिजिजू ने क्या कहा? केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक इंटरव्यू में कहा कि जो लोग इस बिल का विरोध कर रहे हैं, वे खुद करोड़ों रुपये की जमीन पर अवैध रूप से काबिज हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वक्फ की आड़ में कई जगहों पर अवैध कब्जे हुए हैं और सरकार इन मामलों को ठीक करने के लिए यह कानून ला रही है। केरल के बिशप का समर्थन केरल के कैथोलिक बिशप ने भी वक्फ संशोधन बिल का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि वक्फ संपत्तियों को लेकर कई राज्यों में विवाद हैं और इस बिल से इस समस्या का हल निकल सकता है। विपक्ष का विरोध क्यों? विपक्षी दलों का कहना है कि यह बिल मुस्लिम समुदाय की संपत्तियों के खिलाफ है और इससे उनके अधिकारों का हनन होगा। वहीं, सरकार का कहना है कि यह बिल केवल पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है। सरकार की मंशा क्या है? सरकार का कहना है कि वक्फ संपत्तियों पर अनियमितताओं और अवैध कब्जों को रोकने के लिए इस बिल की जरूरत है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि इससे किसी भी धर्म विशेष के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होगा। आगे क्या होगा? वक्फ संशोधन बिल पर संसद में बहस जारी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह बिल पास होता है या विपक्षी विरोध के कारण इसमें और बदलाव किए जाते हैं।
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PM pays tribute to RSS founders in Nagpur

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नागपुर दौरा: संघ संस्थापकों को श्रद्धांजलि, माधव नेत्रालय के कार्यक्रम में संबोधन

नागपुर, 30 मार्च: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने नागपुर दौरे के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संस्थापकों को श्रद्धांजलि अर्पित की और माधव नेत्रालय के एक विशेष कार्यक्रम में लोगों को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने चिकित्सा सेवा, सामाजिक योगदान और भारत के दृष्टिहीन नागरिकों के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला। संघ संस्थापकों को पुष्पांजलि प्रधानमंत्री मोदी ने नागपुर स्थित केशव कुंज पहुंचकर संघ के संस्थापकों डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और माधव सदाशिव गोलवलकर (गुरुजी) को पुष्पांजलि अर्पित की। यह स्थान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का ऐतिहासिक केंद्र माना जाता है, जहां से संघ की विचारधारा और राष्ट्र निर्माण की दिशा में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते हैं। माधव नेत्रालय के कार्यक्रम में PM मोदी का संबोधन इसके बाद प्रधानमंत्री माधव नेत्रालय के एक कार्यक्रम में पहुंचे, जहां उन्होंने समाज के जरूरतमंद लोगों के लिए इस संस्थान की सेवाओं की सराहना की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा,“माधव नेत्रालय केवल नेत्रों का इलाज करने का केंद्र नहीं, बल्कि समाज की सेवा का एक बड़ा उदाहरण है। दृष्टिहीनता को कम करने के लिए किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं।” प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत देशभर में आंखों की बीमारियों से बचाव और इलाज के लिए बड़े स्तर पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना, डिजिटल हेल्थ मिशन और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। राष्ट्रीय सेवा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में योगदान प्रधानमंत्री नेत्रालय के डॉक्टरों, विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भी प्रशंसा की, जो नि:स्वार्थ भाव से जरूरतमंदों की मदद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा और समाज सेवा के क्षेत्र में नागपुर जैसे शहरों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है, और यह संस्थान इस दिशा में एक मिसाल कायम कर रहा है। नागपुर दौरे का महत्व प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा कई मायनों में अहम माना जा रहा है। संघ के गढ़ नागपुर में उनकी उपस्थिति राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि आने वाले चुनावों में इससे भाजपा और संघ के संबंधों को नई ऊर्जा मिलने की संभावना जताई जा रही है। प्रधानमंत्री का यह दौरा केवल श्रद्धांजलि और संबोधन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने नागपुरवासियों को यह संदेश दिया कि सरकार स्वास्थ्य, सेवा और समाज कल्याण के लिए निरंतर प्रयासरत है। (देश हरपल न्यूज के लिए विशेष रिपोर्ट)
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सामूहिक विवाह में भाई-बहन की शादी

उत्तर प्रदेश के जौनपुर में आयोजित एक महोत्सव के दौरान हुए सामूहिक विवाह कार्यक्रम में फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि इस कार्यक्रम में भाई-बहन को दूल्हा-दुल्हन के रूप में बैठाकर उनकी शादी कराई गई। इस सामूहिक विवाह में लगभग 1001 जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ था, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल हुए थे। घटना के अनुसार, एक युवक ने अपनी बहन के साथ विवाह मंडप में बैठने के पीछे सफा पहनने की इच्छा का कारण बताया। उसका कहना था कि उसे सफा पहनने का शौक था, इसलिए वह अपनी बहन के साथ विवाह मंडप में बैठ गया। इस मामले के उजागर होने के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।  यह घटना मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत आयोजित कार्यक्रमों में सामने आए फर्जीवाड़े की घटनाओं में से एक है। इससे पहले भी अमरोहा जिले में एक महिला ने अपने चचेरे भाई के साथ शादी करके सरकारी लाभ प्राप्त करने की कोशिश की थी। इन घटनाओं के प्रकाश में आने के बाद प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है और जांच के आदेश दिए गए हैं। इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि सामूहिक विवाह योजनाओं में सख्त निगरानी और सत्यापन की आवश्यकता है, ताकि इस तरह के फर्जीवाड़े रोके जा सकें और सरकारी योजनाओं का सही लाभ पात्र लोगों तक पहुंच सके।
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SupremeCourtHearingControversy; Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर लगाई रोक, कहा- ‘टिप्पणी असंवेदनशील और अमानवीय’

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले पर रोक लगाते हुए उसकी कड़ी आलोचना की। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि किसी नाबालिग लड़की के ब्रेस्ट पकड़ना और उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ना रेप या ‘अटेम्प्ट टु रेप’ की श्रेणी में नहीं आता। सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को ‘असंवेदनशील’ और ‘अमानवीय दृष्टिकोण’ बताया है। सुप्रीम कोर्ट की कड़ी प्रतिक्रिया जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा, “यह बहुत गंभीर मामला है और जिस जज ने यह फैसला दिया, उसकी तरफ से बहुत असंवेदनशीलता दिखाई गई। हमें यह कहते हुए बहुत दुख हो रहा है कि फैसला लिखने वाले में संवेदनशीलता की पूरी तरह से कमी थी।” सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इससे पहले मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर स्वतः संज्ञान लिया था। यह फैसला आते ही कानूनी विशेषज्ञों, राजनेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को गंभीर मानते हुए तुरंत सुनवाई का निर्णय लिया। केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी सुप्रीम कोर्ट के रुख का समर्थन किया। उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने खुद लिया संज्ञान “कुछ फैसलों को रोकने के पीछे महत्वपूर्ण कारण होते हैं, और यह उनमें से एक है।” हाईकोर्ट का विवादास्पद फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था, “किसी लड़की के निजी अंग पकड़ लेना, उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ देना और जबरन उसे पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश करना रेप या ‘अटेम्प्ट टु रेप’ की श्रेणी में नहीं आता।” हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद महिला संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों ने इसकी आलोचना करते हुए कहा कि यह पीड़िता के अधिकारों का हनन करता है और यौन उत्पीड़न को हल्के में लेने जैसा है। न्यायपालिका पर उठे सवाल यह मामला देश में महिला सुरक्षा से जुड़े कानूनी ढांचे को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे फैसले अपराधियों को बचाव का आधार दे सकते हैं और महिलाओं के प्रति हो रहे अपराधों के खिलाफ न्याय मिलने में बाधा बन सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से अब पीड़िता को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। इस मामले की अगली सुनवाई जल्द ही होने की संभावना है। (देश हरपल की विशेष रिपोर्ट)
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Keir Starmer

UK Politics Breaking: लेबर पार्टी में उथल-पुथल, PM Keir Starmer पर संकट गहराया

ब्रिटेन की राजनीति इस समय एक बड़े सियासी तनाव से गुजर रही है। प्रधानमंत्री Keir Starmer को लेकर इस्तीफे की चर्चाएं तेज हो गई हैं। कई रिपोर्ट्स और दावों में कहा जा रहा है कि उनकी ही पार्टी लेबर पार्टी के भीतर असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि अभी तक किसी भी आधिकारिक स्तर पर इस्तीफे की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक माहौल काफी गर्म हो चुका है। पार्टी के भीतर बढ़ा असंतोष, 100 सांसदों की नाराज़गी का दावा रिपोर्ट्स के मुताबिक लेबर पार्टी के अंदर हालात सामान्य नहीं हैं। बताया जा रहा है कि: इस स्थिति ने प्रधानमंत्री पर दबाव और बढ़ा दिया है। ब्रिटेन की राजनीति में लगातार अस्थिरता पिछले कुछ वर्षों में ब्रिटेन की राजनीतिक स्थिति काफी अस्थिर रही है: यह पैटर्न ब्रिटेन की राजनीतिक स्थिरता पर गंभीर सवाल उठाता है। आखिर क्यों बढ़ रहा है PM पर दबाव? विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा संकट के पीछे कई कारण हो सकते हैं: इन सभी कारणों ने मिलकर हालात को और जटिल बना दिया है। क्या सच में इस्तीफा देंगे Keir Starmer? फिलहाल यह पूरा मामला मीडिया रिपोर्ट्स और राजनीतिक दावों पर आधारित है। सरकार या प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से इस्तीफे की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन जिस तरह पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है, उससे यह साफ है कि आने वाले दिनों में ब्रिटिश राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
भारतीय नौसेना

भारतीय नौसेना को मिले 3 नए Warships: INS Androth और Sandhayak की बड़ी एंट्री

भारतीय नौसेना के बेड़े में तीन नए स्वदेशी युद्धपोतों की एंट्री हुई है, जिससे देश की समुद्री सुरक्षा और मजबूत हो गई है। ये जहाज न सिर्फ आधुनिक तकनीक से लैस हैं, बल्कि भारत की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता को भी नई दिशा देते हैं। इन नए युद्धपोतों में प्रमुख हैं INS Dunagiri, INS Androth और INS Sandhayak। इन तीनों को अलग-अलग रणनीतिक भूमिकाओं के लिए तैयार किया गया है, जिससे भारतीय नौसेना की ऑपरेशनल ताकत कई गुना बढ़ गई है। INS Dunagiri: Modern Stealth Frigate with BrahMos Capability INS Dunagiri को एक एडवांस स्टील्थ फ्रिगेट के रूप में डिजाइन किया गया है, जो दुश्मन के रडार से बचकर ऑपरेशन करने में सक्षम है। इसमें BrahMos missile जैसी हाई-स्पीड और सटीक मार करने वाली मिसाइल प्रणाली को इंटीग्रेट करने की क्षमता है, जिससे यह जहाज बेहद घातक बन जाता है। यह युद्धपोत समुद्री निगरानी, हमला और सुरक्षा अभियानों में अहम भूमिका निभाएगा। INS Androth: Anti-Submarine Warfare में नई ताकत INS Androth को खास तौर पर पनडुब्बी रोधी युद्ध (ASW) के लिए विकसित किया गया है। इसका मुख्य काम समुद्र में छिपी दुश्मन पनडुब्बियों का पता लगाना और उन्हें निष्क्रिय करना है। आधुनिक सेंसर और हथियार प्रणालियों के साथ यह जहाज भारत की समुद्री सीमाओं को और सुरक्षित बनाता है। INS Sandhayak: Hydrographic Survey में अहम भूमिका INS Sandhayak एक आधुनिक सर्वे वेसल है, जो समुद्र की गहराई, जलमार्ग और नेविगेशन मैपिंग का काम करती है। यह जहाज लगातार लंबे समय तक समुद्र में ऑपरेशन कर सकता है, जिससे भारत के समुद्री रास्तों की सुरक्षा और बेहतर योजना संभव होती है। आत्मनिर्भर भारत की ओर मजबूत कदम ये तीनों युद्धपोत पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से बनाए गए हैं, जो भारत के “Make in India” और “Atmanirbhar Bharat” मिशन को मजबूत करते हैं। इनके शामिल होने से भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी, युद्ध क्षमता और रणनीतिक पकड़ पहले से कहीं अधिक मजबूत हो गई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Shubman Gill

Shubman Gill Captain: इंग्लैंड दौरे के लिए भारतीय ODI टीम का ऐलान

इंग्लैंड दौरे के लिए भारतीय वनडे टीम का ऐलान हो गया है और इस बार चयन ने क्रिकेट फैंस के बीच काफी चर्चा पैदा कर दी है। टीम में बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां युवा स्टार Shubman Gill को वनडे टीम का नया कप्तान बनाया गया है। वहीं अनुभवी दिग्गज Rohit Sharma और Virat Kohli की टीम में वापसी ने माहौल और रोमांचक बना दिया है। इसके साथ ही Shreyas Iyer को उपकप्तान की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे टीम में नेतृत्व का संतुलन और मजबूत नजर आ रहा है। Team India में बड़ा बदलाव: नई कप्तानी, नया विज़न BCCI ने इस बार साफ संकेत दिया है कि टीम इंडिया अब भविष्य की ओर देख रही है। शुभमन गिल को कप्तान बनाना एक बड़ा फैसला है, जो बताता है कि अब युवा खिलाड़ियों पर भरोसा बढ़ाया जा रहा है। श्रेयस अय्यर को उपकप्तान बनाना भी एक रणनीतिक कदम है, जिससे टीम के अंदर नेतृत्व की गहराई बनी रहे। रोहित-कोहली की वापसी से बढ़ा अनुभव इंग्लैंड जैसी मुश्किल परिस्थितियों में रोहित शर्मा और विराट कोहली की मौजूदगी टीम इंडिया के लिए बेहद अहम होगी। दोनों खिलाड़ियों का अनुभव विदेशी पिचों पर हमेशा भारत के काम आता है। फैंस के लिए भी यह खबर किसी तोहफे से कम नहीं है, क्योंकि लंबे समय बाद यह दिग्गज एक साथ वनडे टीम में नजर आएंगे। India ODI Squad vs England (संभावित टीम) England Tour 2026 क्यों है इतना अहम? इंग्लैंड का दौरा हमेशा से भारतीय टीम के लिए एक बड़ी परीक्षा रहा है। वहां की स्विंग गेंदबाजी और तेज पिचें बल्लेबाजों की असली परीक्षा लेती हैं। यह सीरीज सिर्फ एक दौरा नहीं बल्कि आने वाले वनडे वर्ल्ड कप की तैयारी का अहम हिस्सा भी मानी जा रही है। फैंस की उम्मीदें और माहौल टीम के ऐलान के बाद सोशल मीडिया पर फैंस की प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। कुछ लोग गिल की कप्तानी को लेकर उत्साहित हैं, तो कुछ रोहित और कोहली की वापसी से काफी खुश नजर आ रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Ram Mandir

Ram Mandir Ayodhya Update: नकद दान घटा, Digital Donation ने बदली तस्वीर

Ram Mandir Ayodhya में दान को लेकर एक बड़ा बदलाव सामने आया है। जहां पहले मंदिर की दानपेटियों से रोजाना करीब ₹10 से ₹12 लाख तक का चढ़ावा निकलता था, वहीं अब यह आंकड़ा घटकर ₹1 लाख से भी कम बताया जा रहा है। इस बदलाव ने श्रद्धालुओं के बीच चर्चा तेज कर दी है। मंदिर परिसर में आने वाले भक्तों का कहना है कि यह सिर्फ रकम का बदलाव नहीं है, बल्कि दान देने के तरीके में भी बड़ा परिवर्तन दिख रहा है। पहले कितना मिलता था चढ़ावा? कुछ समय पहले तक राममंदिर की दानपेटियों में— यह दान मंदिर की व्यवस्थाओं और धार्मिक कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता था। अब क्यों घट गया कैश दान? अब स्थिति बदलती नजर आ रही है, जिसके पीछे कई कारण हैं— 1. Digital Donation का बढ़ता चलन UPI, QR code और ऑनलाइन दान ने नकद की जगह ले ली है। 2. कैश कम लेकर आने की आदत अब लोग कम नकद रखते हैं, जिससे दानपेटियों में पैसा कम जा रहा है। 3. पारदर्शिता की मांग डिजिटल दान को ज्यादा सुरक्षित और ट्रैक करने योग्य माना जा रहा है। 4. बदलती सोच नई पीढ़ी सीधे मोबाइल से दान करना ज्यादा आसान समझती है। श्रद्धालुओं की राय मंदिर आने वाले कई भक्तों का कहना है कि डिजिटल दान से पारदर्शिता बढ़ी है और भरोसा भी मजबूत हुआ है। लेकिन कुछ श्रद्धालुओं को लगता है कि नकद दान की कमी से पारंपरिक धार्मिक अनुभव थोड़ा बदल रहा है। कुछ लोगों ने यह भी सुझाव दिया कि दान व्यवस्था में और अधिक पारदर्शिता लाई जानी चाहिए ताकि श्रद्धा और विश्वास दोनों बने रहें। क्या है आगे की तस्वीर? विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में नकद दान और कम हो सकता है और डिजिटल माध्यम पूरी तरह प्रमुख बन सकता है। इससे मंदिर ट्रस्ट को रिकॉर्ड रखने और सुरक्षा में भी आसानी होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
International Yoga Day

International Yoga Day 2026 Celebration: India में लद्दाख से ऋषिकेश तक योग का अद्भुत नजारा

International Yoga Day 2026 इस बार बेहद भव्य और उत्साहपूर्ण तरीके से मनाया गया। भारत से लेकर दुनिया के कई देशों में लोगों ने सुबह-सुबह योगाभ्यास कर “स्वस्थ जीवन” का संदेश दिया। इस वर्ष की थीम “Yoga for Healthy Ageing” रही, जिसमें बढ़ती उम्र में फिट और मानसिक रूप से संतुलित रहने पर जोर दिया गया। लद्दाख में बर्फीली वादियों के बीच योग लद्दाख की ठंडी और खूबसूरत वादियों में योग दिवस की अलग ही तस्वीर देखने को मिली। बर्फ से ढके पहाड़ों के बीच सेना के जवानों, स्थानीय लोगों और छात्रों ने एक साथ योग किया। सुबह की हल्की धूप और ठंडी हवा के बीच जब लोगों ने सूर्य नमस्कार और प्राणायाम किया तो पूरा माहौल ऊर्जा और शांति से भर गया। यह नजारा सच में भारत की विविधता और योग की ताकत को दिखाता है। गंगा घाटों पर आध्यात्मिक माहौल उत्तराखंड के ऋषिकेश और गंगा किनारे योग दिवस का दृश्य बेहद शांत और आध्यात्मिक रहा। सुबह-सुबह गंगा की लहरों की आवाज और मंत्रोच्चारण के बीच लोगों ने ध्यान और योगाभ्यास किया। देश-विदेश से आए योग साधकों ने भी इसमें हिस्सा लिया और इसे एक “spiritual experience” बताया। गंगा किनारे का यह माहौल लोगों के मन और आत्मा दोनों को सुकून देने वाला रहा। देशभर में बड़े स्तर पर आयोजन देश के अलग-अलग हिस्सों में भी योग दिवस को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। कई शहरों में स्कूलों, कॉलेजों, सेना और सामाजिक संस्थाओं ने सामूहिक योग सत्र आयोजित किए। जबलपुर में हुए एक बड़े कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी योगाभ्यास किया और लोगों से योग को रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल करने की अपील की। थीम “Yoga for Healthy Ageing” का संदेश इस साल की थीम ने खासतौर पर यह संदेश दिया कि योग सिर्फ एक्सरसाइज नहीं बल्कि एक lifestyle है जो उम्र बढ़ने के साथ शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखता है। विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित योग तनाव कम करता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और जीवन को संतुलित बनाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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