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3 नई airlines को केंद्र सरकार की हरी झंडी, हवाई सफर होगा और किफायती

3 नई airlines को केंद्र सरकार की हरी झंडी, हवाई सफर होगा और किफायती

देश के एविएशन सेक्टर में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने तीन नई Airlines – शंख एयर, अलहिंद एयर और फ्लाई एक्सप्रेस—को नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) दे दिया है। इससे अब देश में हवाई सेवाओं का दायरा बढ़ेगा और यात्रियों को ज्यादा विकल्प मिलेंगे। सरकार का मानना है कि नई एयरलाइंस के आने से मौजूदा कंपनियों की मोनोपॉली टूटेगी और हवाई किराए में भी कमी आ सकती है। खासकर छोटे शहरों और टियर-2 व टियर-3 शहरों को इसका सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। शंख एयर एक भारतीय ब्रांड के तौर पर घरेलू रूट्स पर फोकस करेगी, जबकि अलहिंद एयर एनआरआई और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को ध्यान में रखकर सेवाएं शुरू कर सकती है। वहीं फ्लाई एक्सप्रेस कम बजट में यात्रा का विकल्प बन सकती है। एविएशन विशेषज्ञों का कहना है कि इससे न सिर्फ यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। पायलट, केबिन क्रू, ग्राउंड स्टाफ और टेक्निकल स्टाफ की मांग बढ़ेगी। सरकार का यह कदम ‘उड़ान योजना’ और ‘विकसित भारत’ के विजन को मजबूती देता है, जहां हवाई सफर सिर्फ अमीरों तक सीमित न रहकर आम लोगों तक पहुंचे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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PM Modi

Christmas Celebration PM Modi ने लोगों के साथ मनाया साझा किया Peace और Love का Message

आज 25 दिसंबर 2025, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने The Cathedral Church of the Redemption, Delhi में आयोजित Christmas Morning Service में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने देशवासियों को Merry Christmas की शुभकामनाएँ दीं और प्रेम, शांति और सद्भाव का संदेश साझा किया। चर्च में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। सेवा में प्रार्थना, कैरोल और भजन शामिल थे, और Rt. Rev. Dr. Paul Swarup, Bishop of Delhi ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए विशेष प्रार्थना की। इस मौके पर उपस्थित लोगों में ईसाई समुदाय के साथ-साथ अन्य नागरिकों ने भी हिस्सा लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘X’ पर लिखा कि यह सेवा “Love, Peace और Compassion का timeless message” देती है। उन्होंने कहा कि “क्रिसमस की भावना समाज में भाईचारा और सद्भावना को बढ़ाए”। साथ ही उन्होंने सभी को आनंदमय और शांतिपूर्ण Christmas की शुभकामनाएँ दीं। मोदी ने अपने संदेश में यह भी कहा कि Jesus Christ की शिक्षाएँ हमारे समाज में Harmony और Unity को मजबूत करें। उन्होंने अपने पोस्ट में सेवा की कुछ तस्वीरें और वीडियो भी साझा किए, जिससे देशवासियों को इस पर्व की खुशी महसूस हो। इससे पहले प्रधानमंत्री ने पूरे देशवासियों को क्रिसमस के अवसर पर warm greetings भेजते हुए कहा कि यह पर्व Hope, Compassion और Unity का संदेश लेकर आता है। प्रधानमंत्री मोदी का यह कदम भारत में सभी धर्म और समुदायों के बीच भाईचारा और सहिष्णुता को दर्शाता है। पिछले कुछ सालों से मोदी विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होते रहे हैं, जिसमें Christmas और Easter जैसे अवसर शामिल हैं। इस प्रकार, Christmas 2025 का यह समारोह केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं, बल्कि भारत की Cultural Diversity और Social Harmony को प्रदर्शित करने के लिए भी महत्वपूर्ण रहा। यह आयोजन यह याद दिलाता है कि त्योहारों का असली मतलब प्यार, शांति और मानवता के साथ जुड़ना है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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17 साल बाद Bangladesh लौटे खालिदा जिया के बेटे, ढाका एयरपोर्ट पर उमड़ा समर्थकों का सैलाब

17 साल बाद Bangladesh लौटे खालिदा जिया के बेटे, ढाका एयरपोर्ट पर उमड़ा समर्थकों का सैलाब

Bangladesh की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे 17 साल बाद निर्वासन खत्म कर अपने देश बांग्लादेश लौट आए हैं। जैसे ही वे ढाका एयरपोर्ट पहुंचे, वहां करीब एक लाख से ज्यादा कार्यकर्ता और समर्थक उनका स्वागत करने के लिए मौजूद थे। ढाका एयरपोर्ट बना शक्ति प्रदर्शन का गवाह लंबे समय बाद देश वापसी पर एयरपोर्ट पर जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। BNP (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) के झंडे, नारे और समर्थकों की भारी भीड़ ने साफ संकेत दे दिया कि यह सिर्फ एक वापसी नहीं, बल्कि राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन भी है। लंदन में थे निर्वासन में खालिदा जिया के बेटे पिछले 17 साल से लंदन में निर्वासन का जीवन जी रहे थे। उनके ऊपर लगे कई मामलों के चलते वे लंबे समय तक बांग्लादेश से बाहर रहे। अब देश लौटने के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। PM बनने के दावेदार माने जा रहे राजनीतिक जानकारों की मानें तो खालिदा जिया के बेटे को प्रधानमंत्री पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा है। उनकी वापसी से बांग्लादेश की राजनीति में नया मोड़ आ सकता है और सत्तारूढ़ सरकार की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं। आने वाले चुनावों से पहले बड़ा संकेत उनकी वापसी ऐसे समय पर हुई है, जब बांग्लादेश में आगामी चुनावों की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। ऐसे में यह कदम विपक्ष को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। कुल मिलाकर, खालिदा जिया के बेटे की 17 साल बाद वापसी ने बांग्लादेश की राजनीति में हलचल मचा दी है और आने वाले दिनों में इसका असर साफ दिखाई देगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Tamil Nadu

Road Accident in Tamil Nadu डिवाइडर तोड़कर Bus की टक्कर, 9 लोगों की मौके पर मौत

तमिलनाडु (Tamil Nadu) के कुड्डालोर जिले से बुधवार शाम एक बेहद दुखद खबर सामने आई, जिसने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया। चेन्नई–तिरुचिरापल्ली National Highway पर हुए एक भयानक सड़क हादसे में 9 लोगों की जान चली गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा कैसे हुआ प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस के अनुसार, State Express Transport Corporation (SETC) की एक सरकारी बस तेज रफ्तार में जा रही थी। इसी दौरान बस का अगला टायर अचानक फट गया। टायर फटते ही चालक बस पर से नियंत्रण खो बैठा और वाहन डिवाइडर तोड़कर दूसरी लेन में घुस गया। विपरीत दिशा से आ रही दो कारों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और बस ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि कारें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। 9 जिंदगियाँ बुझ गईं इस दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वाले अधिकतर लोग कारों में सवार परिवारों के सदस्य थे। मृतकों में महिलाएँ, पुरुष और एक मासूम बच्चा भी शामिल है। हादसे की तस्वीरें देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि टक्कर कितनी भयानक थी। घायलों को तुरंत नजदीकी सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहाँ कुछ की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है। राहत-बचाव में जुटा प्रशासन हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, एंबुलेंस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुँचीं। घंटों की मशक्कत के बाद क्षतिग्रस्त वाहनों में फँसे लोगों को बाहर निकाला गया। इस दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग पर लंबा जाम भी लग गया। मुख्यमंत्री ने जताया शोक तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने इस सड़क दुर्घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों को ₹3 लाख और घायलों को ₹1 लाख की सहायता राशि मुख्यमंत्री राहत कोष से देने की घोषणा की। जांच जारी, सुरक्षा पर सवाल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और हादसे की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक तौर पर टायर फटना मुख्य कारण माना जा रहा है, लेकिन बस की तकनीकी स्थिति और रखरखाव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Karnataka

Karnataka Bus Fire Accident चित्रदुर्ग में स्लीपर बस बनी आग का गोला, कई जिंदगियां खत्म

Karnataka के चित्रदुर्ग (Chitradurga) जिले में गुरुवार तड़के एक ऐसा सड़क हादसा हुआ, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। NH-48 हाईवे पर चल रही एक निजी स्लीपर बस अचानक आग का गोला बन गई। इस दर्दनाक हादसे में कई यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई लोग गंभीर रूप से झुलस गए। कैसे हुआ Karnataka Bus Fire Accident प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना 25 दिसंबर की रात करीब 2:30 बजे की है। बेंगलुरु से शिवमोग्गा/गोकार्णा की ओर जा रही स्लीपर बस जब हिरियूर तालुक के गोरलथु क्रॉस के पास पहुंची, तभी सामने से आ रहे एक तेज रफ्तार ट्रक ने अचानक डिवाइडर पार कर बस को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बस के डीजल टैंक में आग लग गई और कुछ ही सेकंड में आग पूरी बस में फैल गई। यात्री नींद में थे और उन्हें संभलने तक का मौका नहीं मिल पाया। आग में फंसे यात्री, चीख-पुकार का मंजर प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, टक्कर के तुरंत बाद बस से आग की ऊंची लपटें उठने लगीं। कुछ यात्रियों ने शीशे तोड़कर जान बचाने की कोशिश की, लेकिन कई लोग बस के अंदर ही फंस गए। आग इतनी तेजी से फैली कि कई यात्री बाहर नहीं निकल सके। हादसे के बाद हाईवे पर चारों तरफ चीख-पुकार, अफरा-तफरी और जलती बस का खौफनाक दृश्य दिखाई दे रहा था। मृतकों और घायलों की स्थिति अलग-अलग रिपोर्ट्स के अनुसार, इस हादसे में 9 से 13 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कुछ सूत्रों का कहना है कि मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है। करीब 20 से ज्यादा यात्री घायल बताए जा रहे हैं, जिनमें कई की हालत गंभीर है। घायलों को हिरियूर, चित्रदुर्ग और आसपास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की टीम लगातार इलाज में जुटी हुई है। बचाव कार्य और प्रशासन की कार्रवाई घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग, पुलिस और एंबुलेंस टीमें मौके पर पहुंचीं। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। पुलिस ने मृतकों की पहचान शुरू कर दी है और उनके परिजनों से संपर्क किया जा रहा है। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि ट्रक चालक को नींद की झपकी या नियंत्रण खोने के कारण यह हादसा हुआ। हालांकि, पुलिस ने मामले की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं। सरकार की प्रतिक्रिया प्रधानमंत्री कार्यालय और कर्नाटक सरकार ने इस हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया है। मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख की अनुग्रह राशि, जबकि घायलों को ₹50 हजार की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है। एक हादसा, कई उजड़े सपने यह सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि कई परिवारों के सपनों का अंत है। जो लोग त्योहार के मौके पर अपने घर लौट रहे थे, उन्हें क्या पता था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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PIA

PIA विवाद से निजीकरण तक एक विज्ञापन से बिक्री तक पाकिस्तान एयरलाइंस की कहानी

Pakistan International Airlines (PIA) — जो कभी दक्षिण एशिया की प्रतिष्ठित एयरलाइनों में गिनी जाती थी — आज अपने अंत की कहानी लिख चुकी है। साल 2025 में एक विवादित विज्ञापन ने फिर से दुनिया का ध्यान इस एयरलाइन की ओर खींचा, लेकिन इस बार वजह सिर्फ एक ऐड नहीं थी, बल्कि दशकों से चले आ रहे संकट का अंतिम अध्याय था। जब एक विज्ञापन बन गया अंतरराष्ट्रीय विवाद जनवरी 2025 में PIA ने अपने यूरोप रूट्स की बहाली को लेकर एक प्रमोशनल विज्ञापन जारी किया। तस्वीर में एक विमान पेरिस के एफिल टॉवर की ओर उड़ता हुआ दिखाया गया था और नीचे लिखा था —“Paris, we’re coming today” यहीं से विवाद शुरू हुआ। सोशल मीडिया यूज़र्स ने इस इमेज को 9/11 आतंकी हमलों से जोड़ते हुए इसे असंवेदनशील बताया। देखते ही देखते यह विज्ञापन पाकिस्तान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म्स पर आलोचना का विषय बन गया। सोशल मीडिया गुस्सा और सरकारी दखल विज्ञापन पर बढ़ते दबाव के बाद: PIA ने सफाई देते हुए कहा कि उनका इरादा केवल यूरोप के लिए फ्लाइट्स दोबारा शुरू होने की खुशी जाहिर करना था। बाद में एयरलाइन को सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगनी पड़ी। PIA के विवाद: सिर्फ एक ऐड की कहानी नहीं हकीकत यह है कि PIA का संकट सिर्फ इस विज्ञापन से नहीं जुड़ा। बीते वर्षों में: कभी जो एयरलाइन Emirates जैसी कंपनियों के लिए रोल मॉडल मानी जाती थी, वही PIA धीरे-धीरे बोझ बनती चली गई। आर्थिक बोझ और आखिरकार Privatization लगातार घाटे और कर्ज से परेशान पाकिस्तान सरकार के पास अब ज्यादा विकल्प नहीं बचे थे। 2025 के अंत में सरकार ने PIA के निजीकरण (Privatization) का फैसला लिया। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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BMC

Mumbai BMC Election 2026 उद्धव-राज ठाकरे गठबंधन से राजनीति में बड़ा मोड़

आगामी Mumbai BMC Election 2026 से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में सनसनीखेज बदलाव देखने को मिला है। शिवसेना (उद्धव फाड़ गुट) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने दो दशकों बाद सियासी गठबंधन कर लिया है। इस गठबंधन का औपचारिक ऐलान 24 दिसंबर 2025 को मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान किया गया। गठबंधन का ढांचा और सीटों का बंटवारा राजनीतिक महत्त्व यह गठबंधन ठाकरे बंधुओं — उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे — का लगभग 20 साल बाद राजनीतिक रूप से मिलना है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह गठबंधन मुंबई की सियासी दिशा बदल सकता है और महापौर की सीट पर सीधी टक्कर ला सकता है। दोनों नेताओं की बात उद्धव ठाकरे ने कहा कि यह गठबंधन मराठी समाज और जनता की भलाई के लिए किया गया है।राज ठाकरे ने भी इसे मराठी मतदाताओं की शक्ति को एकजुट करने वाला कदम बताया। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि सीटों का बंटवारा पारदर्शी और समझौते के तहत किया गया है, ताकि हर वार्ड में साझा रणनीति के अनुसार उम्मीदवार मैदान में उतरे। विशेष जानकारी Mumbai BMC Election 2026 में उद्धव और राज ठाकरे का गठबंधन महाराष्ट्र की राजनीति में नया इतिहास रच सकता है। यह गठबंधन मराठी मतदाताओं के लिए निर्णायक साबित होगा और शहर की सत्ता पर बड़ा असर डाल सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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करबीांगलॉन्ग

Assam Karbi Anglong Violence असम में करबीांगलॉन्ग और वेस्ट करबीांगलॉन्ग हिंसा पर अपडेट

असम के करबीांगलॉन्ग (Karbi Anglong) और वेस्ट करबीांगलॉन्ग (West Karbi Anglong) जिलों में हाल के दिनों में बढ़ती हिंसा और अशांति ने लोगों की सुरक्षा पर चिंता बढ़ा दी है। यह तनाव मुख्य रूप से भूमि विवाद (land dispute) और अवैध अतिक्रमण (illegal encroachment) के कारण उत्पन्न हुआ है। Violence और Protest की वजह स्थानीय आदिवासी और करबी समुदाय ने संरक्षित चरागाह भूमि (protected grazing land) पर अवैध अतिक्रमण को लेकर विरोध किया। ये भूमि छठी अनुसूची (Sixth Schedule) के तहत सुरक्षित हैं। Casualties और Injuries Internet Shutdown और Security Measures असम सरकार ने इंटरनेट और मोबाइल डेटा सेवाओं को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। इसका उद्देश्य सोशल मीडिया पर अफवाहों और भड़काऊ सामग्री को फैलने से रोकना है। Police और Government Response हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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ISRO

ISRO Satellite Launch BlueBird Block-2 Mission से बदलेगा Mobile Connectivity का भविष्य

श्रीहरिकोटा से जब LVM3 ‘बाहुबली’ रॉकेट ने आसमान की ओर उड़ान भरी, तो यह सिर्फ़ एक उपग्रह प्रक्षेपण नहीं था, बल्कि भारत की बढ़ती अंतरिक्ष ताक़त का साफ़ संदेश था। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने इस मिशन के ज़रिये BlueBird Block-2 Communication Satellite को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित कर दिया, जो आने वाले समय में दुनिया के मोबाइल संचार को नई दिशा देगा। यह ऐतिहासिक लॉन्च आंध्र प्रदेश के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा से किया गया। मिशन की सफलता ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारत अब सिर्फ़ अंतरिक्ष अनुसंधान में ही नहीं, बल्कि Commercial Space Launch Services में भी वैश्विक स्तर पर भरोसेमंद नाम बन चुका है। क्या है BlueBird Block-2 Satellite? BlueBird Block-2 उपग्रह को अमेरिकी कंपनी AST SpaceMobile ने विकसित किया है। इसका सबसे बड़ा उद्देश्य है — बिना मोबाइल टावर के, सीधे सामान्य स्मार्टफोन तक 4G और 5G नेटवर्क पहुँचाना। यानी अब भविष्य में पहाड़ों, जंगलों, समुद्रों या दूर-दराज़ इलाकों में भी मोबाइल कनेक्टिविटी संभव हो सकेगी। इस उपग्रह की तकनीक इतनी उन्नत है कि इसके लिए किसी विशेष सैटेलाइट फोन की ज़रूरत नहीं होगी। आम मोबाइल फोन से ही कॉल, मैसेज, इंटरनेट और वीडियो सेवाएँ मिल सकेंगी। ISRO का अब तक का सबसे भारी Commercial Payload करीब 6,100 किलोग्राम वज़न वाला यह उपग्रह, ISRO द्वारा लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में भेजा गया अब तक का सबसे भारी व्यावसायिक पेलोड है। इसमें लगा विशाल फेज़्ड-एरे एंटीना (लगभग 223 वर्ग मीटर) इसे दुनिया के सबसे आधुनिक संचार उपग्रहों में शामिल करता है। इस भारी पेलोड को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित करना LVM3 रॉकेट की क्षमता और ISRO की इंजीनियरिंग दक्षता का बड़ा प्रमाण है। भारत की Commercial Space Power को मिली मजबूती यह मिशन ISRO की व्यावसायिक शाखा NewSpace India Limited (NSIL) के माध्यम से किया गया। इससे भारत की छवि एक मजबूत Commercial Satellite Launch Partner के रूप में और पुख्ता हुई है। अंतरराष्ट्रीय कंपनियों का ISRO पर बढ़ता भरोसा, भारत के लिए नए निवेश और रोज़गार के रास्ते खोल रहा है। प्रधानमंत्री और देश की प्रतिक्रिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सफल प्रक्षेपण पर ISRO के वैज्ञानिकों को बधाई दी और इसे भारत की तकनीकी क्षमता का गर्वपूर्ण उदाहरण बताया। देशभर में इस उपलब्धि को लेकर उत्साह और गर्व का माहौल देखा गया। क्यों खास है यह मिशन? भारत की अंतरिक्ष यात्रा का अगला कदम ISRO BlueBird Block-2 Mission यह दिखाता है कि भारत अब केवल अंतरिक्ष में पहुँचने वाला देश नहीं, बल्कि अंतरिक्ष से दुनिया को जोड़ने वाला देश बन रहा है। यह मिशन आने वाले वर्षों में डिजिटल कनेक्टिविटी, संचार तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए एक मजबूत आधार साबित होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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कारोबारी Vijay Mallya-Lalit Modi का वीडियो वायरल: खुद को बताया भारत के “दो सबसे बड़े भगोड़े”

कारोबारी Vijay Mallya-Lalit Modi का वीडियो वायरल: खुद को बताया भारत के “दो सबसे बड़े भगोड़े”

देश से बाहर रह रहे भगोड़े कारोबारी Vijay Mallya और Lalit Modi एक बार फिर चर्चा में हैं। दोनों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे खुद को भारत के “दो सबसे बड़े भगोड़े” बताते नजर आ रहे हैं। वीडियो में दोनों हँसी-मजाक के अंदाज़ में बात करते दिखते हैं, लेकिन यह वीडियो सामने आते ही देश में राजनीतिक और कानूनी हलकों में हलचल तेज हो गई है। आम लोगों के बीच भी यह सवाल उठ रहा है कि जिन पर हजारों करोड़ रुपये के घोटालों के आरोप हैं, वे इतने बेफिक्र कैसे दिखाई दे रहे हैं। मुंबई हाईकोर्ट का सख्त सवाल इस वीडियो के वायरल होने के बाद मुंबई हाईकोर्ट ने भी कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने साफ तौर पर सवाल उठाया है कि विजय माल्या आखिर भारत कब लौटेंगे?हाईकोर्ट ने कहा कि जब माल्या सार्वजनिक तौर पर वीडियो में नजर आ सकते हैं, तो फिर भारत लौटने से क्यों बच रहे हैं। लंबे समय से विदेश में हैं दोनों विजय माल्या पर बैंकों से हजारों करोड़ रुपये का कर्ज लेकर देश छोड़ने का आरोप है, वहीं ललित मोदी पर आईपीएल से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप हैं। दोनों ही कई सालों से विदेश में रह रहे हैं और भारत की जांच एजेंसियां उनकी वापसी की कोशिशों में जुटी हैं। जनता में नाराज़गी वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा साफ नजर आ रहा है। लोग सवाल कर रहे हैं कि कानून से भागे लोग खुलेआम मज़ाक कैसे कर सकते हैं और उन्हें कब तक जवाबदेही से बचने दिया जाएगा। अब देखना यह होगा कि कोर्ट की सख्ती के बाद सरकार और जांच एजेंसियां इस मामले में क्या अगला कदम उठाती हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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PM Modi

PM Modi Canada Tour दिसंबर में होगी अहम बातचीत, Trade Deal से दोनों देशों को उम्मीद

PM Modi 11 दिसंबर को कनाडा के दौरे पर जा सकते हैं। इस यात्रा को भारत और कनाडा के बीच व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने के लिहाज से अहम माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच ट्रेड डील यानी व्यापार समझौते को लेकर बातचीत होने की संभावना है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों के बीच कनाडा भी अपने कारोबार के लिए नए बाजार तलाश रहा है। कनाडा लंबे समय से अमेरिकी बाजार पर काफी हद तक निर्भर रहा है। ऐसे में भारत जैसे बड़े और तेजी से बढ़ते बाजार के साथ व्यापार बढ़ाना उसके लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। दूसरी ओर, भारत की भी कोशिश है कि दूसरे देशों के साथ आर्थिक सहयोग बढ़े और भारतीय कारोबारियों को नए अवसर मिलें। India-Canada Trade Deal पर क्यों है सबकी नजर? भारत और कनाडा के बीच प्रस्तावित Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) को लेकर काफी उम्मीदें हैं। इस समझौते का मकसद दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ाना, निवेश के अवसर खोलना और कारोबार से जुड़ी बाधाओं को कम करना है। अगर ट्रेड डील पर सहमति बनती है, तो दोनों देशों की कंपनियों को एक-दूसरे के बाजार में कारोबार बढ़ाने का मौका मिल सकता है। इससे कृषि, ऊर्जा, तकनीक, शिक्षा और कई दूसरे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 70 अरब कनाडाई डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। ऐसे में प्रस्तावित समझौता इस लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभा सकता है। Trump के Tariff दबाव के बीच कनाडा क्यों खोज रहा नए बाजार? डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर अनिश्चितता बढ़ाई है। इसका असर उन देशों पर भी पड़ता है, जिनका कारोबार अमेरिकी बाजार पर ज्यादा निर्भर है। कनाडा भी अपने व्यापारिक रिश्तों में विविधता लाने और नए बाजारों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहा है। भारत इस लिहाज से कनाडा के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प बन सकता है। भारत की बड़ी आबादी, बढ़ती अर्थव्यवस्था और अलग-अलग क्षेत्रों में बढ़ती मांग कनाडाई कंपनियों को आकर्षित करती है। हालांकि, भारत के साथ व्यापार बढ़ाना केवल अमेरिका पर निर्भरता कम करने तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच निवेश और कारोबारी सहयोग बढ़ने से लंबे समय में आर्थिक रिश्तों को भी मजबूती मिल सकती है। Energy और Technology सेक्टर में भी बढ़ सकते हैं मौके भारत और कनाडा के बीच कारोबार की संभावनाएं केवल ट्रेड डील तक सीमित नहीं हैं। ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, शिक्षा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाया जा सकता है। कनाडा के पास प्राकृतिक संसाधन और ऊर्जा क्षेत्र में अनुभव है, जबकि भारत तेजी से बढ़ता हुआ बड़ा बाजार है। दोनों देश अपनी जरूरतों और क्षमताओं के आधार पर साझेदारी को आगे बढ़ा सकते हैं। व्यापार समझौते पर बातचीत आगे बढ़ने से कंपनियों और निवेशकों को भी सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं। हालांकि, वास्तविक फायदा समझौते की शर्तों और उसके लागू होने पर निर्भर करेगा। पुराने तनाव के बाद रिश्तों को नई दिशा देने की कोशिश भारत और कनाडा के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कूटनीतिक तनाव भी देखने को मिला। इस वजह से दोनों देशों के बीच भरोसे और सहयोग को लेकर कई सवाल उठे थे। अब व्यापार और आर्थिक सहयोग जैसे साझा हितों पर बातचीत बढ़ाना दोनों देशों के लिए अहम हो सकता है। प्रधानमंत्री मोदी की प्रस्तावित यात्रा इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। फिर भी, व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए कई मुद्दों पर सहमति जरूरी होगी। इसलिए इस दौरे के दौरान होने वाली बातचीत और आधिकारिक घोषणाओं पर सबकी नजर रहेगी। भारत और कनाडा के लिए क्या होंगे इसके मायने? भारत-कनाडा ट्रेड डील आगे बढ़ती है, तो इससे दोनों देशों के कारोबारियों को नए बाजार मिल सकते हैं। निवेश बढ़ने, व्यापारिक अवसर पैदा होने और अलग-अलग क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत होने की संभावना भी रहेगी। कनाडा के लिए भारत के साथ व्यापार बढ़ाना अपने आर्थिक रिश्तों में विविधता लाने का अवसर है। वहीं, भारत के लिए यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश के क्षेत्र में अपनी पहुंच मजबूत करने का एक और रास्ता हो सकता है। अब नजर 11 दिसंबर की प्रस्तावित यात्रा पर है। क्या प्रधानमंत्री मोदी और कनाडा के नेतृत्व के बीच ट्रेड डील को लेकर कोई ठोस सहमति बन पाएगी? इसका जवाब दोनों देशों की बातचीत और आगे होने वाली आधिकारिक घोषणाओं से ही साफ होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Starlink

Reliance-Starlink Controversy: मस्क के आरोपों पर अंबानी की कंपनी का जवाब, कहा- Competition से नहीं डरते

भारत में सैटेलाइट इंटरनेट को लेकर रिलायंस (Reliance) इंडस्ट्रीज और एलन मस्क की कंपनी Starlink के बीच चर्चा तेज हो गई है। स्टारलिंक की भारत में एंट्री में देरी को लेकर मस्क ने सवाल उठाए थे। अब मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस ने अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि वह प्रतिस्पर्धा से कभी नहीं डरी और भारत में स्टारलिंक का स्वागत करती है। Reliance के इस बयान के बाद देश के टेलीकॉम और सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में मुकाबले को लेकर चर्चा बढ़ गई है। एक तरफ एलन मस्क की स्टारलिंक भारतीय बाजार में अपनी सेवाएं शुरू करना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ जियो भी सैटेलाइट इंटरनेट के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की तैयारी कर रहा है। Reliance ने Starlink को लेकर क्या कहा? Reliance इंडस्ट्रीज ने अपने बयान में कहा कि कंपनी ने हमेशा प्रतिस्पर्धा का सामना किया है और वह नई कंपनियों के बाजार में आने से नहीं घबराती। कंपनी के मुताबिक, भारत में कारोबार करने वाली सभी कंपनियों को देश के नियमों का पालन करना चाहिए। रिलायंस ने स्टारलिंक का स्वागत करते हुए यह भी संकेत दिया कि सैटेलाइट इंटरनेट के क्षेत्र में मुकाबला ग्राहकों के लिए फायदेमंद हो सकता है। कंपनी का मानना है कि बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से सेवाओं की गुणवत्ता और ग्राहकों के अनुभव में सुधार की गुंजाइश बनती है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की शुरुआत को लेकर कई कंपनियां तैयारी कर रही हैं। Elon Musk ने Mukesh Ambani पर क्यों उठाए सवाल? एलन मस्क ने भारत में स्टारलिंक की लॉन्चिंग में हो रही देरी को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ प्रभावशाली कारोबारी हित कंपनी की भारतीय बाजार में एंट्री को मुश्किल बना रहे हैं। इस विवाद में रिलायंस और मुकेश अंबानी का नाम भी सामने आया। मस्क का कहना है कि स्टारलिंक जैसी कंपनियों को भारतीय बाजार में काम करने का अवसर मिलना चाहिए, ताकि ग्राहकों के पास इंटरनेट सेवा चुनने के अधिक विकल्प हों। हालांकि, इन आरोपों से यह साबित नहीं होता कि स्टारलिंक की लॉन्चिंग में देरी के पीछे रिलायंस की भूमिका है। इसके लिए किसी ठोस प्रमाण की जरूरत होगी। भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने के लिए कंपनियों को लाइसेंस के साथ-साथ दूसरी जरूरी मंजूरियां भी हासिल करनी होती हैं। Jio भी Satellite Internet Market में उतरने को तैयार Reliance जियो ने साल 2016 में भारतीय टेलीकॉम बाजार में कदम रखा था। सस्ते डेटा और किफायती सेवाओं के कारण कंपनी ने तेजी से ग्राहक जोड़े और देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों में अपनी जगह बनाई। अब जियो की नजर सैटेलाइट इंटरनेट बाजार पर भी है। इस तकनीक के जरिए उन इलाकों तक इंटरनेट पहुंचाने में मदद मिल सकती है, जहां सामान्य मोबाइल नेटवर्क या ब्रॉडबैंड कनेक्शन उपलब्ध कराना मुश्किल है। दूसरी तरफ, स्टारलिंक अपने सैटेलाइट नेटवर्क के जरिए भारत में इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध कराना चाहती है। ऐसे में आने वाले समय में दोनों कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है। Starlink की India Launch में देरी की वजह क्या है? भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करना केवल लाइसेंस मिलने तक सीमित नहीं है। कंपनियों को सुरक्षा मानकों, तकनीकी आवश्यकताओं और सरकारी नियमों से जुड़ी प्रक्रियाएं भी पूरी करनी होती हैं। स्टारलिंक के अलावा जियो और भारती समूह से जुड़ी Eutelsat OneWeb भी इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन कंपनियों की सेवाओं की शुरुआत जरूरी मंजूरियों और नियामकीय शर्तों पर निर्भर करती है। इसलिए स्टारलिंक की लॉन्चिंग में देरी को किसी एक कंपनी से जोड़कर देखना जल्दबाजी होगी। वास्तविक स्थिति समझने के लिए सरकारी मंजूरियों और संबंधित कंपनियों की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखना जरूरी है। आम लोगों को क्या होगा फायदा? अगर भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू होती हैं, तो इसका फायदा खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को मिल सकता है। पहाड़ी क्षेत्रों और उन जगहों पर, जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर है, यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। हालांकि, ग्राहकों के लिए सबसे अहम सवाल इंटरनेट की कीमत, स्पीड और उपलब्धता का होगा। स्टारलिंक और जियो की सेवाएं कितनी किफायती होंगी, यह उनकी व्यावसायिक योजनाओं और लॉन्च के समय घोषित किए जाने वाले प्लान पर निर्भर करेगा। अब आगे क्या? रिलायंस के बयान से साफ है कि कंपनी सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार है। वहीं, एलन मस्क की स्टारलिंक भारतीय बाजार में अपनी सेवाएं शुरू करने का इंतजार कर रही है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि जरूरी सरकारी प्रक्रियाएं कब पूरी होती हैं और कंपनियां ग्राहकों के लिए अपनी सेवाएं कब पेश करती हैं। अगर बाजार में कई कंपनियां उतरती हैं, तो भारतीय ग्राहकों को इंटरनेट के नए विकल्प मिल सकते हैं। फिलहाल, रिलायंस और स्टारलिंक के बीच जारी यह बहस भारत के तेजी से बदलते डिजिटल और टेलीकॉम बाजार की एक अहम तस्वीर पेश करती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Weather

Weather Update राजस्थान में बारिश के साथ गिरे ओले, Kedarnath-Badrinath में बर्फबारी

देश के कई हिस्सों में मौसम (Weather) का मिजाज बदल गया है। राजस्थान में तेज बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई है, जबकि उत्तराखंड के केदारनाथ, बद्रीनाथ और हेमकुंड साहिब में बर्फबारी देखने को मिली है। वहीं, उत्तर प्रदेश और बिहार समेत कई राज्यों में बारिश को लेकर अलर्ट की खबर है। मौसम में आए इस बदलाव से कहीं गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है, तो कहीं किसानों और यात्रियों की चिंता बढ़ सकती है। Rajasthan Weather: बारिश के साथ ओलावृष्टि राजस्थान के कई इलाकों में बारिश के साथ ओले गिरने से मौसम सुहावना होने के साथ ठंडा भी हो गया है। अचानक बदले मौसम का असर आम जनजीवन पर पड़ सकता है। जिन इलाकों में ओलावृष्टि हुई है, वहां खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान होने की आशंका भी रहती है। ऐसे में किसानों को स्थानीय मौसम विभाग की सलाह पर ध्यान देना चाहिए। बारिश और तेज हवाओं के दौरान लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। Kedarnath-Badrinath में बर्फबारी, पहाड़ों पर बढ़ी ठंड उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम ने अलग ही रंग दिखाया है। केदारनाथ, बद्रीनाथ और हेमकुंड साहिब में बर्फबारी के बाद ठंड बढ़ गई है। पहाड़ों पर मौसम तेजी से बदलता है, इसलिए यहां जाने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को यात्रा की तैयारी सावधानी से करनी चाहिए। खासतौर पर धार्मिक स्थलों की यात्रा करने वाले लोगों को सड़क की स्थिति, मौसम का पूर्वानुमान और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों की जानकारी लेकर ही आगे बढ़ना चाहिए। UP-Bihar Rain Alert: इन राज्यों में भी बदल सकता है मौसम राजस्थान और उत्तराखंड के अलावा उत्तर प्रदेश और बिहार समेत कई राज्यों में बारिश की संभावना को लेकर अलर्ट की खबर सामने आई है। बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं की स्थिति में लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। हालांकि, बारिश का असर हर जिले में एक जैसा नहीं होगा। इसलिए अपने इलाके के लिए मौसम विभाग की ताजा चेतावनी जरूर देखें। किसानों और आम लोगों के लिए जरूरी सलाह बदलते मौसम को देखते हुए कुछ सावधानियां बरतना जरूरी है। आंधी या बिजली चमकने के दौरान खुले मैदानों में रुकने से बचें। किसान अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए स्थानीय कृषि विशेषज्ञों की सलाह लें। वहीं, पहाड़ी इलाकों में जाने वाले यात्री मौसम और रास्तों की स्थिति की जानकारी पहले ही हासिल कर लें। Weather Update Today: आगे कैसा रहेगा मौसम? अक्टूबर के मध्य में बारिश और पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी ने मौसम का रुख बदल दिया है। राजस्थान में ओलावृष्टि और उत्तराखंड में बर्फ गिरने के बीच दूसरे राज्यों के लोगों की नजर भी बारिश के पूर्वानुमान पर है। मौसम से जुड़ी योजनाएं बनाने से पहले अपने शहर का ताजा अपडेट देखना बेहतर रहेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Parliament

Parliament Special Session: इसी महीने बुलाया जा सकता है संसद का सत्र, लोकसभा सीटें बढ़ाने पर नजर

संसद (Parliament) के गलियारों में एक बार फिर हलचल तेज होने की चर्चा है। केंद्र सरकार इसी महीने संसद का विशेष सत्र बुला सकती है। इस सत्र में लोकसभा की सीटें बढ़ाने, परिसीमन (Delimitation) और महिला आरक्षण से जुड़े प्रस्तावों पर आगे बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक विशेष सत्र की तारीखों का आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार इस बार जरूरी समर्थन जुटा पाएगी? अप्रैल 2026 में परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा में जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं मिला था। ऐसे में सरकार के सामने अब राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाने की चुनौती है। लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने की चर्चा फिलहाल लोकसभा में 543 निर्वाचित सीटें हैं। प्रस्तावित योजना के तहत इनकी संख्या बढ़ाकर अधिकतम 850 करने की बात सामने आई है। इस बदलाव का संबंध महिला आरक्षण को लागू करने की प्रक्रिया से भी जोड़ा जा रहा है। अगर लोकसभा की सीटों में बढ़ोतरी होती है, तो संसदीय क्षेत्रों और राज्यों के प्रतिनिधित्व में बदलाव हो सकता है। हालांकि, सीटों की अंतिम संख्या और उनके बंटवारे को लेकर स्थिति विधेयक के प्रावधानों तथा संवैधानिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी। Delimitation Bill क्या है और इससे क्या बदलेगा? परिसीमन यानी Delimitation का मतलब लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं का दोबारा निर्धारण करना है। इसके जरिए निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं और प्रतिनिधित्व से जुड़े प्रावधानों में बदलाव किया जा सकता है। यह मुद्दा इसलिए अहम है, क्योंकि परिसीमन का असर संसद में अलग-अलग राज्यों की राजनीतिक भागीदारी पर पड़ सकता है। दक्षिण भारत के कुछ राज्यों ने चिंता जताई है कि आबादी के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण होने से उनका मौजूदा प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है। दूसरी ओर, सरकार की प्रस्तावित योजना में लोकसभा की सीटें बढ़ाने का मुद्दा शामिल है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नए प्रस्ताव में राज्यों के प्रतिनिधित्व से जुड़ी चिंताओं का किस तरह समाधान किया जाता है। महिला आरक्षण 2029 से लागू करने की तैयारी? महिला आरक्षण भी इस पूरे मामले का एक अहम हिस्सा है। संसद ने 2023 में महिला आरक्षण से जुड़ा कानून पारित किया था। इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। हालांकि, इस कानून के क्रियान्वयन को जनगणना के बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया है। सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से महिला आरक्षण लागू करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है। इसी वजह से परिसीमन और संविधान संशोधन से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा महत्वपूर्ण हो गई है। अप्रैल में क्यों पास नहीं हो पाया था बिल? अप्रैल 2026 में लोकसभा में संबंधित संविधान संशोधन विधेयक पर मतदान हुआ था। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े थे। इसके बावजूद जरूरी विशेष बहुमत नहीं मिल सका और विधेयक पारित नहीं हुआ। संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई मतों की जरूरत होती है। कुछ संविधान संशोधनों के लिए कम से कम आधे राज्यों की विधानसभाओं से मंजूरी लेना भी जरूरी होता है। यानी सरकार के लिए केवल सांसदों की साधारण बहुमत संख्या पर्याप्त नहीं होगी। उसे संवैधानिक नियमों के मुताबिक जरूरी समर्थन हासिल करना होगा। DMK समेत दूसरे दलों से संपर्क की चर्चा मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि सरकार विधेयकों के समर्थन में राजनीतिक दलों से बातचीत कर रही है। इसमें डीएमके (DMK) और कुछ छोटे दलों से संपर्क किए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इन दलों के अंतिम रुख को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी नहीं है। विपक्षी दलों की प्रमुख चिंताओं में परिसीमन की प्रक्रिया, राज्यों का प्रतिनिधित्व और प्रस्तावित बदलावों पर व्यापक चर्चा शामिल है। ऐसे में विशेष सत्र बुलाए जाने पर संसद में इस मुद्दे पर बहस तेज हो सकती है। कब हो सकता है संसद का Special Session? मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सरकार अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में संसद का विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर सकती है। 26 और 27 अक्टूबर को प्रस्तावित BRICS Parliamentary Forum के कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए सत्र की तारीखें तय किए जाने की संभावना भी जताई गई है। लेकिन अभी तक विशेष सत्र का आधिकारिक कार्यक्रम घोषित नहीं हुआ है। इसलिए तारीखों और विधेयकों को लेकर सामने आ रही जानकारियों को संभावित घटनाक्रम के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। अब सरकार के सामने क्या चुनौती है? सरकार के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं—पहली, विधेयकों के लिए जरूरी संवैधानिक समर्थन जुटाना और दूसरी, परिसीमन को लेकर राज्यों की चिंताओं पर सहमति बनाना। अगर विशेष सत्र बुलाया जाता है, तो लोकसभा की सीटों में बढ़ोतरी, महिला आरक्षण और राज्यों के प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे फिर से चर्चा के केंद्र में आ सकते हैं। फिलहाल सभी की नजर सरकार की आधिकारिक घोषणा और राजनीतिक दलों के रुख पर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

इंदौर में वर्ल्ड स्पाइन डे पर डॉक्टरों ने निकाली साइक्लोथॉन, सर्जरी के बाद मरीजों ने भी चलाई साइकिल

इंदौर: वर्ल्ड स्पाइन डे के अवसर पर शुक्रवार को इंदौर में रीढ़ की हड्डी के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए डॉक्टरों ने साइक्लोथॉन निकाली। इंदौर स्पाइन सर्जन एसोसिएशन (ISSA) की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में 70 से 80 वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक सर्जन, स्पाइन सर्जन और एनेस्थेटिस्ट शामिल हुए। साइक्लोथॉन के जरिए लोगों को नियमित व्यायाम, फिटनेस और रीढ़ की हड्डी की देखभाल का संदेश दिया गया। साथ ही, स्पाइन सर्जरी को लेकर लोगों के मन में मौजूद डर और भ्रांतियों को दूर करने की अपील की गई। स्पाइन सर्जरी करा चुके मरीजों ने भी लिया हिस्सा इस साइक्लोथॉन की खास बात यह रही कि हाल ही में स्पाइन सर्जरी करा चुके एक-दो मरीज भी डॉक्टरों के साथ साइकिल चलाते नजर आए। उनकी भागीदारी के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि उचित इलाज और डॉक्टर की सलाह के अनुसार रिकवरी के बाद मरीज दोबारा सक्रिय जीवनशैली अपना सकते हैं। ISSA के सचिव डॉ. अविनाश जैन ने बताया कि समाज में रीढ़ की हड्डी की सर्जरी को लेकर कई तरह की भ्रांतियां हैं। कुछ लोग ऑपरेशन के बाद सामान्य जीवन नहीं जी पाने की आशंका के कारण इलाज कराने से हिचकते हैं। ऐसे में सर्जरी के बाद मरीजों का साइकिल चलाना लोगों का भरोसा बढ़ाने वाला संदेश है। वरिष्ठ स्पाइन सर्जनों ने किया नेतृत्व साइक्लोथॉन का नेतृत्व ISSA के अध्यक्ष डॉ. एसके लूनावत, उपाध्यक्ष डॉ. प्रसाद पटगांवकर और सचिव डॉ. अविनाश जैन ने किया। एसोसिएशन ऑफ ऑर्थोपेडिक सर्जन्स ऑफ इंदौर (AOSI) के सचिव डॉ. प्रणव महाजन भी आयोजन में शामिल हुए। वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. मसंद और डॉ. मनचंदा सहित अन्य चिकित्सकों ने भी साइक्लोथॉन में भाग लेकर जागरूकता अभियान को समर्थन दिया। साइकिल राइडर्स के साथ यातायात पुलिस ने दिया सहयोग कार्यक्रम में शहर के सक्रिय साइकिल राइडर्स ने भी हिस्सा लिया। डॉक्टरों ने नियमित शारीरिक गतिविधि को स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया और लोगों से अपनी दिनचर्या में व्यायाम को शामिल करने की अपील की। साइक्लोथॉन के सुरक्षित और सुचारू संचालन में इंदौर यातायात पुलिस ने सहयोग किया। आयोजन के अंत में ISSA की ओर से इसमें शामिल चिकित्सकों, एनेस्थीसिया क्लब के सदस्यों, साइकिल राइडर्स और प्रशासन का आभार जताया गया।

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