फिल्ममेकर Karan Johar आज भले ही बॉलीवुड के सबसे बड़े और प्रभावशाली डायरेक्टर्स में गिने जाते हों, लेकिन उनका सफर आसान नहीं रहा। कई बार उन्हें अपने स्टाइल, व्यक्तित्व और बोलने के तरीके को लेकर ट्रोलिंग और तानों का सामना करना पड़ा।
एक समय ऐसा भी था जब लोग उनके उठने-बैठने और अंदाज़ को लेकर उन्हें “लड़कियों जैसा” कहकर मजाक उड़ाते थे। लेकिन समय के साथ उन्होंने इन सभी बातों को पीछे छोड़कर इंडस्ट्री में अपनी मजबूत पहचान बनाई।
अमिताभ बच्चन को डायरेक्ट करने का डर
करण जौहर ने एक इंटरव्यू में बताया था कि शुरुआती दौर में जब उन्हें अमिताभ बच्चन जैसे दिग्गज अभिनेता को डायरेक्ट करना था, तो वह बेहद नर्वस थे।
इतना ही नहीं, वह उस समय इतनी घबराहट में थे कि सेट पर लगभग बेहोश होने जैसी स्थिति में पहुंच गए थे।
लेकिन बाद में उन्होंने खुद को संभाला और प्रोफेशनल तरीके से काम पूरा किया।
मेट गाला में भारत का प्रतिनिधित्व
हाल ही में करण जौहर ने फैशन की दुनिया के सबसे बड़े इवेंट्स में से एक मेट गाला (Met Gala) में हिस्सा लेकर सुर्खियां बटोरीं।
वे इस इवेंट में शामिल होने वाले इकलौते भारतीय फिल्म डायरेक्टर बने, जिसने उन्हें ग्लोबल लेवल पर एक अलग पहचान दिलाई।
ट्रोलिंग से ग्लोबल पहचान तक का सफर
करण जौहर का करियर इस बात का उदाहरण है कि कैसे आलोचनाओं और ट्रोलिंग के बावजूद:
- एक कलाकार अपनी जगह बना सकता है
- लगातार मेहनत से अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल की जा सकती है
- और भारतीय सिनेमा को वैश्विक मंच तक पहुंचाया जा सकता है
