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Modi-Putin Car Photo अमेरिका में कांग्रेस में क्यों बनी चर्चा?

वाशिंगटन: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Modi) और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की हालिया कार यात्रा की तस्वीर ने अमेरिकी कांग्रेस में हलचल मचा दी। डेमोक्रेट सांसद सिडनी कामलाजर-डोव ने इस फोटो को “हजार शब्दों के बराबर पोस्टर” बताते हुए चेतावनी दी कि अमेरिका की हालिया नीतियों से भारत रूस के और करीब जा सकता है। सांसद ने कहा कि ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए उच्च टैरिफ और व्यापार प्रतिबंध न केवल भारत-यूएस संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं, बल्कि वैश्विक रणनीति में भी बदलाव ला सकते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका को भारत के साथ मजबूत और भरोसेमंद रिश्ते बनाए रखने चाहिए। तस्वीर में क्या है खास? कार में Modi और Putin आराम से बैठे दिख रहे हैं, जो उनके गहरे और गर्म संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है। अमेरिकी कांग्रेस में इस तस्वीर का इस्तेमाल एक चेतावनी के रूप में किया गया कि अगर अमेरिका भारत के साथ सहयोग में कठिनाइयाँ पैदा करता है, तो भारत रूस के करीब हो सकता है। व्यापार और रणनीतिक असर हाल ही में अमेरिका ने भारत पर कई निर्यात वस्तुओं पर 50% तक के टैरिफ लगाए हैं। इस कदम को कुछ विशेषज्ञ “अमेरिका द्वारा भारत को दबाव में लाने की कोशिश” कहते हैं। इसके चलते दोनों देशों के बीच ट्रेड तनाव बढ़ा है और रणनीतिक साझेदारी पर असर पड़ सकता है। भारत अपनी विदेश नीति में स्ट्रैटेजिक ऑटोमॉमी को महत्व देता है। रूस के साथ करीबी रिश्ते बनाए रखना उसकी वैश्विक रणनीति का हिस्सा है। लेकिन अमेरिका की कड़ी नीतियों से भारत रूस के और करीब जा सकता है, यह चिंता अमेरिकी नेताओं को है। अमेरिकी संसद की चेतावनी सांसद कामलाजर-डोव ने कहा कि ट्रंप प्रशासन की यह रणनीति “कान काटने जैसा” है — यानी अमेरिका खुद को नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि अमेरिका को भारत के साथ सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम करना चाहिए, क्योंकि मजबूत US-India रिलेशनशिप दोनों देशों के लिए फायदेमंद है। यह घटना दिखाती है कि वैश्विक राजनीति में संकेत और प्रतीकों का महत्व बहुत बड़ा है। कभी-कभी एक तस्वीर भी देशों के रिश्तों और रणनीति पर गहरा प्रभाव डाल सकती है। Modi-Putin कार फोटो ने सिर्फ मीडिया में चर्चा नहीं बनाई, बल्कि यह दुनिया को संकेत दे गया कि भारत अपनी विदेश नीति में संतुलन बनाये रखने में गंभीर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rajasthan

Rajasthan एथेनॉल प्रोजेक्ट के विरोध में हिंसा, Hanumangarh में आगजनी व बवाल

Rajasthan के हनुमानगढ़ में एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर चल रहा तनाव सोमवार को अचानक बढ़ गया। कई दिनों से विरोध कर रहे किसानों ने टिब्बी इलाके में हुई महापंचायत के बाद फैक्ट्री साइट की ओर कूच किया। भीड़ बड़ी थी, गुस्सा भी उतना ही। पुलिस ने बैरिकेड लगाकर रास्ता रोकने की कोशिश की, लेकिन किसान आगे बढ़ते गए और देखते-देखते माहौल बिगड़ गया। कैसे भड़की हिंसा? प्रदर्शन के बीच कुछ लोगों ने फैक्ट्री की दीवार गिरा दी। उसके बाद भीड़ में मौजूद उग्र समूह ने निर्माणाधीन परिसर में खड़े दर्जनों वाहनों को आग लगा दी। रिपोर्टों के मुताबिक 10 से 16 वाहन— जिनमें पुलिस की जीपें, मशीनें और निजी गाड़ियाँ शामिल थीं — जलकर पूरी तरह नष्ट हो गए।स्थिति तेजी से बिगड़ती देखकर पुलिस को लाठीचार्ज, आंसू-गैस और रबर बुलेट तक का इस्तेमाल करना पड़ा। इस झड़प में कई किसान, पुलिसकर्मी और आसपास मौजूद लोग घायल हो गए। क्यों भड़का इतना विरोध? किसानों का कहना है कि एथेनॉल फैक्ट्री उनके खेतों, भूजल और हवा—तीनों को नुकसान पहुंचा सकती है। उनका डर साफ है: किसानों का तर्क है कि “विकास ज़रूरी है, लेकिन हमारी ज़िंदगी और खेत किस कीमत पर?” फैक्ट्री और प्रशासन का पक्ष फैक्ट्री प्रबंधन का कहना है कि यह प्रोजेक्ट Zero Liquid Discharge Technology पर आधारित है, जिसमें गंदा पानी रिसने का खतरा नहीं होगा। कंपनी दावा करती है कि स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।प्रशासन भी यही कहता है कि सभी पर्यावरणीय मानकों का पालन किया जाएगा। लेकिन ग्रामीणों का भरोसा टूट चुका है—उन्हें लगता है कि वादों की बजाय व्यवहार ज्यादा मायने रखता है। घटना के बाद क्या बदलाव हुए? हिंसा रोकने के लिए जिला प्रशासन ने तुरंत: माहौल अभी भी तनावपूर्ण है, लेकिन नियंत्रण में बताया जा रहा है। आगे क्या? स्थानीय लोगों का कहना है कि समस्या फैक्ट्री से ज्यादा बातचीत की कमी है। किसानों को लगता है कि उनकी चिंता को गंभीरता से नहीं लिया गया।यदि कंपनी और प्रशासन, किसानों को पारदर्शिता के साथ भरोसा दिलाए—पर्यावरण परीक्षण, पानी की खपत, कचरा प्रबंधन और स्थानीय रोजगार पर स्पष्ट लिखित गारंटी दे—तो माहौल शांत हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Goa

Goa Fire हादसा Thailand में लूथरा ब्रदर्स हिरासत में, हथकड़ी में पहली तस्वीर सामने

गोवा (Goa) में 6 दिसंबर 2025 की रात शुरू हुई एक पार्टी कुछ ही मिनटों में दर्द और अफरा-तफरी का सबसे बड़ा हादसा बन गई। अर्पोरा स्थित Birch by Romeo Lane नाइटक्लब में लगी आग ने 25 लोगों की जान ले ली—कुछ पर्यटक, कुछ कर्मचारी, और कुछ वे लोग जो बस एक खुशगवार रात बिताने आए थे। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है—इतना बड़ा क्लब बिना सुरक्षा इंतज़ाम के कैसे चल रहा था? आग कैसे फैली — चंद सेकंड में मची तबाही प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार क्लब के अंदर चल रहे फायर-शो के दौरान एक चिंगारी ने सजावट में लगी ज्वलनशील सामग्री को पकड़ लिया।आग तेजी से फैली और धुआँ इतना घना था कि बाहर निकलने का रास्ता ढूँढना भी मुश्किल हो गया। क्लब में: ये सभी बातें बाद में पुलिस और प्रशासन की शुरुआती रिपोर्ट में सामने आईं। हादसे के बाद असली सवाल: मालिक कहाँ गायब हो गए? क्लब के मालिक सौरभ लुथरा और गौरव लुथरा पर गंभीर धाराओं में FIR दर्ज हुई।लेकिन जांच शुरू होते ही दोनों भाई भारत छोड़कर थाईलैंड पहुँच चुके थे।उनकी फ्लाइट रात में ही बुक कराई गई, जब गोवा में लोग अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। इस भागदौड़ ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया। सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय लोगों तक सभी में गुस्सा बढ़ गया। पासपोर्ट रद्द — सरकार का बड़ा एक्शन गोवा (Goa) पुलिस ने विदेश मंत्रालय (MEA) को दोनों भाइयों के पासपोर्ट रद्द करने की सिफारिश की।सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पासपोर्ट सस्पेंड/इम्पाउंड कर दिए। इसका मतलब साफ है—वह देश से बाहर हैं तो भी वापस लाए जा सकते हैं, और भारत लौटे बिना बचना असंभव है। Interpol का Blue Corner Notice भी जारी किया गया है। प्रशासन की सख़्त कार्रवाई — अवैध निर्माण पर बुलडोज़र हादसे के बाद प्रशासन ने क्लब से जुड़े सभी निर्माणों की जांच शुरू की।कई हिस्सों को अवैध पाया गया, जिन पर कार्रवाई करते हुए बुलडोज़र चलाया गया। मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने ऐलान किया कि: लोगों की प्रतिक्रिया — सिर्फ दुख नहीं, गुस्सा भी स्थानीय लोग, पर्यटक और क्लब इंडस्ट्री से जुड़े लोग एक ही बात कह रहे हैं:अगर सुरक्षा नियम लागू होते, तो 25 परिवार आज उजड़ते नहीं। कई लोग क्लब के पुराने वीडियो साझा कर रहे हैं, जिनमें भीड़ भरे माहौल में सुरक्षा इंतज़ामों की कमी साफ दिखती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Surya Kant

CJI Surya Kant Remarks on Rohingya 44 Former Judges का जोरदार समर्थन और विवाद

दिसंबर 2025 में भारत की सुप्रीम कोर्ट में रोहिंग्या शरणार्थियों से जुड़े एक मामले ने सुर्खियां बटोरीं। इस मामले में Chief Justice of India (CJI) Surya Kant की टिप्पणी पर विवाद खड़ा हो गया। कोर्ट ने रोहिंग्या प्रवासियों के कानूनी दर्जे और भारत में उनकी स्थिति पर सवाल उठाए, जिससे कुछ पूर्व न्यायाधीश और कानूनी विशेषज्ञों ने आपत्ति जताई। क्या हुआ था: CJI की टिप्पणी सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत की पीठ ने पूछा कि क्या ऐसे लोग, जो भारत में अनधिकृत रूप से आए हैं, उन्हें “रेड कार्पेट” बिछाकर स्वागत करना चाहिए। इस पर कई पूर्व जजों और वरिष्ठ वकीलों ने कहा कि इस तरह के सवाल शरणार्थियों की गरिमा और संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ हैं। उनके अनुसार, कोर्ट को ऐसे मामलों में संवैधानिक और मानवाधिकार दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। 44 Former Judges का समर्थन इस विवाद के जवाब में 44 पूर्व न्यायाधीशों ने एक संयुक्त बयान जारी कर CJI सूर्यकांत के खिलाफ “motivated campaign” को गलत बताया। उनके प्रमुख बिंदु थे: पूर्व जजों ने जोर देकर कहा कि अदालत का काम संवैधानिक दायित्व और मानव गरिमा दोनों को ध्यान में रखकर न्याय करना है। क्यों है यह विवाद महत्वपूर्ण यह मामला सिर्फ एक टिप्पणी का विवाद नहीं है। यह मानवाधिकार, राष्ट्रीय सुरक्षा और कानूनी प्रक्रिया के बीच संतुलन पर सवाल खड़ा करता है। भारत में शरणार्थियों के लिए कोई स्थायी कानून नहीं है, इसलिए अदालतें इस पर निर्णय लेते समय संवेदनशीलता और विवेक दोनों दिखाती हैं। साथ ही, यह विवाद यह भी दिखाता है कि: CJI सूर्यकांत के विवादित बयान और 44 पूर्व जजों के समर्थन ने एक बार फिर न्यायपालिका में संतुलन, स्वतंत्रता और संवैधानिक जिम्मेदारी पर बहस छेड़ दी है। यह मामला हमें याद दिलाता है कि शरणार्थियों और प्रवासियों के साथ न्याय करते समय मानवता, संवैधानिक अधिकार और कानूनी विवेक को एक साथ रखना कितना जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Australia

Australia Social Media Rules बच्चों पर Facebook, Instagram, TikTok Ban

Australia में 10 दिसंबर 2025 से एक बड़ा बदलाव शुरू हुआ है। अब 16 साल से कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया अकाउंट नहीं बना सकते। यह नियम किसी छोटे शहर या राज्य में नहीं, बल्कि पूरे देश में लागू हुआ है। इसे दुनिया का पहला ऐसा कदम माना जा रहा है जहां एक सरकार ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म्स पर इतनी सख्ती से नियंत्रण कर रही है। क्यों लिया गया यह फैसला? कई सालों से विशेषज्ञ और माता-पिता एक ही बात कह रहे थे— “सोशल मीडिया बच्चों के दिमाग और आत्मविश्वास पर असर डाल रहा है।” इसी चिंता के बीच सरकार ने कानून बनाया। उद्देश्य साफ है: सरकार का कहना है कि बड़े प्लेटफ़ॉर्म बच्चों से मुनाफा कमाते हैं, लेकिन जिम्मेदारी नहीं लेते। नया नियम यही संतुलन बदलने की कोशिश है। किन प्लेटफ़ॉर्म्स पर बैन? प्रतिबंध सबसे लोकप्रिय सोशल मीडिया ऐप्स पर लागू है: अगर कोई प्लेटफ़ॉर्म नियम तोड़ता है, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। लाखों अकाउंट बंद: बच्चों की मिलीजुली प्रतिक्रिया नियम लागू होते ही लाखों किशोरों के अकाउंट बंद या हटाए गए।बहुत से बच्चों ने आखिरी पोस्ट डाले: “मुझे दोस्तों की याद आएगी।”“ये अंत जैसा लग रहा है, लेकिन शायद अच्छा भी हो।” किसी ने राहत की सांस ली, तो किसी को गुस्सा आया।पर एक बात स्पष्ट थी — यह बदलाव छोटा नहीं है। माता-पिता क्या कह रहे हैं? कुछ माता-पिता ने राहत महसूस की: “कम फोन, ज्यादा पढ़ाई… शायद अब घर में शांति होगी।” दूसरी तरफ कुछ परिवार चिंतित भी हैं: “कई बच्चे ऑनलाइन मदद और दोस्ती पाते हैं। पूरी तरह बैन करना सही तो नहीं लगता।” यह द्वंद्व पूरे देश में देखा जा रहा है। क्या इससे बच्चे छुपकर इंटरनेट इस्तेमाल करेंगे? विशेषज्ञों को डर है: यानी, समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होती — बस दिशा बदलती है। क्या यह दुनिया के लिए उदाहरण बनेगा? दुनिया भर की नजरें अब ऑस्ट्रेलिया पर हैं। किसी भी तरह, यह कदम डिजिटल दुनिया के इतिहास में एक टर्निंग पॉइंट है। आगे क्या? अगले महीनों में देखा जाएगा: सच यह है:सोशल मीडिया सिर्फ ऐप नहीं है—यह आज के बच्चों का सामाजिक जीवन भी है।उसके दरवाज़े बंद करना आसान है, लेकिन उसकी जगह क्या आएगा — यह बड़ा सवाल है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Goa

Goa Night Club Fire गोवा क्लब हादसा, 25 मौतें Luthra Brothers फरार, Ajay Gupta Arrest

गोवा (Goa) की सर्द रात, तेज़ संगीत, भरी भीड़ और अचानक उठती आग।6 दिसंबर 2025 की वह रात कभी नहीं भूली जाएगी।अर्पोरा के मशहूर नाइट क्लब ‘Birch by Romeo Lane’ में लगी भीषण आग ने देखते ही देखते 25 जिंदगियाँ छीन लीं।यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि लापरवाही की दर्दनाक कहानी बन गया। आग कैसे लगी? जांच के शुरुआती निष्कर्षों में सामने आया कि: धुआँ इतनी तेजी से फैला कि कई लोग भाग ही नहीं पाए।आँखों के सामने जलती हुई ज़िंदगियाँ —जो बाहर निकले, उनकी आवाज़ आज भी कांपती है। क्लब का मालिक कौन? इस नाइट क्लब का संचालन Luthra Brothers – सौरभ और गौरव लूथरा करते थे।उनके साथ Ajay Gupta और Surinder Khosla भी पार्टनर बताए जाते हैं। हादसे के तुरंत बाद: Ajay Gupta Arrest – पहली प्रतिक्रिया दिल्ली में पुलिस ने Ajay Gupta को हिरासत में लिया।उनका कहना था: “मैं सिर्फ पार्टनर हूँ… मैं कुछ नहीं जानता।” लेकिन जांच टीम के पास ऐसे कागज़ हैं जिनसे पता चलता है कि मालिकाना हिस्सेदारी तीनों के पास थी और लाइसेंस के मामले में गंभीर सवाल हैं। उनके खिलाफ Look Out Circular पहले से जारी था। सरकार की सख्त कार्रवाई हादसे के बाद गोवा सरकार तुरंत हरकत में आई: यह कार्रवाई सिर्फ गोवा तक सीमित नहीं रही —उत्तराखंड जैसे राज्यों ने भी अपने यहाँ सुरक्षा जांच शुरू कर दी। मानवीय पहलू: अंदर कैसा था? बचे हुए लोग बताते हैं: कई परिवारों ने एक साथ अपने लोग खो दिए।हंसी और संगीत की जगह अब सन्नाटा और सवाल हैं। सबसे बड़ा सवाल: ज़िम्मेदार कौन? यह हादसा सिर्फ आग की वजह से नहीं हुआ।बड़ी वजहें थीं: लोग पूछ रहे हैं: आगे क्या? अब सबकी नज़रें हैं: हादसा बहुत कुछ बदल सकता है।ब्रेकिंग न्यूज़ के पीछे असली कहानी है — खोई हुई जिंदगियाँ। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rahul Gandhi

Election Commission under Pressure? राहुल बोले BJP फायदा उठा रही है, संस्थाएँ Neutral नहीं रहीं

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि देश की अहम संस्थाएँ आज पहले जितनी स्वतंत्र नहीं रह गईं। राहुल गांधी का आरोप है कि RSS सभी प्रमुख संस्थाओं पर नियंत्रण चाहता है और इसी दिशा में लगातार कदम बढ़ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि Election Commission को भी “कब्जे में लेने की कोशिश” हो रही है, जिससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। राहुल गांधी का मानना है कि अगर चुनाव आयोग पर दबाव बढ़ेगा, तो इसका सीधा असर लोकतंत्र पर पड़ेगा। “चुनाव आयोग तटस्थ नहीं दिख रहा” – राहुल गांधी राहुल गांधी के मुताबिक चुनाव लोकतंत्र की रीढ़ होते हैं। उन्होंने कहा कि: “अगर संस्थाएँ neutral नहीं रहेंगी, तो देश में free and fair elections कैसे होंगे? जब Election Commission पर दबाव होगा, तो विपक्ष के लिए मैदान बराबर नहीं रहेगा।” उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावों में भाजपा को फायदा दिलाने के लिए संस्थाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों पर सरकार या आयोग की तरफ से कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं आई है। लोकतंत्र की चिंता जताई राहुल गांधी ने कहा कि संस्थाओं का उद्देश्य संविधान की रक्षा करना है, न कि किसी संगठन या पार्टी की सुविधा देना। उनका कहना है: “संस्थाएँ strong और independent रहनी चाहिए। तभी लोकतंत्र सुरक्षित रहेगा।” उन्होंने मीडिया, एजेंसियों और चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। विपक्ष की अपील – “देश को जागरूक रहना होगा” राहुल गांधी ने नागरिकों, सोशल संगठनों और राजनीतिक दलों से अपील की कि वे लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए एकजुट हों। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि पूरे देश का है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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NDA

PM Modi NDA Meeting Highlights बिहार की जीत पर नई Energy और Big Plans

बिहार चुनाव के शानदार नतीजों के बाद संसद भवन में हुई NDA Parliamentary Party Meeting पूरी तरह उत्साह और भरोसे के माहौल में हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बैठक में खुलकर कहा कि बिहार की जीत ने उन्हें “नई ऊर्जा और नया आत्मविश्वास” दिया है। उन्होंने सांसदों को याद दिलाया कि जनता ने उन्हें केवल वोट नहीं दिया, बल्कि उम्मीदें दी हैं, और इन उम्मीदों को पूरा करने के लिए अब तेज़ और साफ काम की ज़रूरत है। बिहार में NDA की जीत: भरोसे की कहानी बिहार में NDA की जीत: भरोसे की कहानी हाल ही में हुए चुनावों में NDA ने 243 में से 202 सीटें प्राप्त कीं। यह नतीजे दिखाते हैं कि लोगस्थिरता चाहते हैंविकास चाहते हैंऔर गठबंधन पर भरोसा करते हैं बैठक में बिहार के सभी सांसद मौजूद रहे। माहौल उत्साहपूर्ण था – किसी पार्टी के चेहरे पर थकान नहीं, बल्कि जीत की चमक थी। PM Modi का साफ संदेश: अनुशासन पहले अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने एक बात बहुत स्पष्ट कही: “अनुशासन ही हमारी ताक़त है। नियम तोड़ने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी।” यह संदेश सिर्फ चेतावनी नहीं था, बल्कि दिशा भी था।उन्होंने कहा कि अब प्रदर्शन और परिणाम ही सबसे बड़ा पैमाना होंगे। Action और Accountability: सरकार का अगला फोकस बैठक में यह भी सामने आया कि इन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उदाहरण के तौर पर, ₹830 करोड़ से अधिक की राशि तुरंत जारी किए जाने का उल्लेख किया गया। यह बताता है कि केंद्र जनता से जुड़े फैसलों में देर नहीं करना चाहता। NDA Unity: BJP + JDU का तालमेल बिहार की राजनीति में एक समय अनिश्चितता थी, लेकिन अब तस्वीर साफ है। नीतीश कुमार सरकार को चलाते हैंबीजेपी अधिक सक्रिय और मज़बूत भूमिका में दिख रही है PM मोदी ने सहयोगी दलों को इशारे में याद दिलाया कि Parliament + Meeting: दो मोर्चों पर सक्रिय PM उसी दिन संसद में वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर भी विशेष चर्चा चल रही थी।PM Modi दोनों जगह मौजूद रहे। यह दिखाता है कि राजनीतिक ज़िम्मेदारी और संसदीय परंपरा – दोनों को वे बराबर महत्व देते हैं। आगे क्या? विकास की रफ्तार बढ़ेगी बैठक का सार एक ही था: काम, काम और सिर्फ काम। आने वाले महीनों में सब तेज़ होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री का संदेश सरल था: “जनता ने हमें प्रेम दिया है। अब हमारी बारी है कि हम परिणाम दें।” हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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असीम मुनीर

Indo-Pak Border Alert असीम मुनीर बोले – हमला हुआ तो जवाब और तेज़ होगा

पाकिस्तान के चीफ़ ऑफ़ डिफ़ेन्स फ़ोर्सेज़ (CDF) और सेना प्रमुख असीम मुनीर ने हाल ही में एक बयान दिया जिसने Indo-Pak संबंधों में फिर से हलचल पैदा कर दी। उन्होंने कहा कि अगर भारत कोई भी “आक्रामक कदम” उठाता है, तो पाकिस्तान की प्रतिक्रिया “तेज़, सख़्त और प्रभावी” होगी। यह बयान सिर्फ़ सैन्य चेतावनी नहीं, बल्कि एक राजनैतिक संकेत भी माना जा रहा है, क्योंकि पाकिस्तान की सेना एक नए ढांचे में काम करना शुरू कर चुकी है। New Defence System: तीनों सेनाओं की संयुक्त कमान हाल में हुए सैन्य सुधारों के बाद: अब एक ही unified command के तहत काम करेंगी। इसका leadership असीम मुनीर के पास है। इसे पाकिस्तान में historic change कहा जा रहा है।विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे: निर्णय लेने की स्पीड बढ़ेगीऑपरेशन में तालमेल बेहतर होगासीमा सुरक्षा मजबूत होगी यानी अगर कोई तनाव बढ़ा, तो प्रतिक्रिया ज़्यादा संगठित और तेज़ हो सकती है। असीम मुनीर ने क्या कहा? अपने Address में मुनीर ने मुख्य बातें कही: उनका स्वर confident था, और संदेश साफ – आवाज़ उठाओगे तो जवाब तैयार है। India की प्रतिक्रिया कैसी रही? भारत की तरफ़ से इस बयान को ज़्यादातर नेताओं ने political rhetoric बताया।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इस तरह के बयान पाकिस्तान की कमज़ोर स्थिति दिखाते हैं। अन्य analysts ने सुझाव दिया कि भारत को: military strengthborder securitydiplomatic strategy पर ध्यान रखना चाहिए, और बिना वजह तनाव नहीं बढ़ाना चाहिए। Why This Matters: यह सिर्फ़ बयान नहीं, संकेत भी है दक्षिण एशिया में स्थिति संवेदनशील है। दोनों देश: ऐसे में किसी भी उकसावे से हालत बिगड़ सकती है। लेकिन एक मानवीय पहलू भी है – सीमा के दोनों तरफ़ लोग शांति चाहते हैं।लोगों की पहली इच्छा होती है: यही कारण है कि हर बड़े बयान के पीछे चिंता भी छिपी रहती है। Future Perspective: आगे क्या होगा? कुछ चीजें देखने लायक होंगी: क्या Pakistan border पर deployment या drill बढ़ाता है?भारत की कूटनीति क्या रुख लेती है?क्या global powers mediation में आएंगी? अगर दोनों देश संवाद करें, तो tension कम हो सकता है।लेकिन अगर बयानबाज़ी बढ़ी, तो हालात खतरनाक भी हो सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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7वें दिन भी 250+ flight रद्द, IndiGo पर लोगों की परेशानी

7वें दिन भी 250+ flight रद्द, IndiGo पर लोगों की परेशानी

IndiGo का संकट सातवें दिन भी थमा नहीं — आज देशभर में 250 से भी ज़्यादा उड़ानें रद्द कर दी गईं। लाखों यात्री अपने गंतव्य के लिए फंसे हुए हैं, सामान और रिफंड की स्थिति अभी तक अनिश्चित। Supreme Court of India ने सुनवाई से किया इनकार यात्रियों ने रद्द उड़ानों और देरी से हुए नुकसान के लिए चाही थी तुरंत न्याय — लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “हम एयरलाइन नहीं चलाते, इसलिए सुनवाई नहीं करेंगे।” यह कहकर अदालत ने मामले को अस्वीकृत कर दिया, जिससे यात्रियों की उम्मीदें टूट गईं। यात्री परेशान — लंबा इंतजार, रिफंड का इंतज़ार, और भविष्य अनिश्चित इस संकट ने न सिर्फ यात्रियों को प्रभावित किया है, बल्कि उन परिवारों को भी परेशानी में डाला है, जो अचानक मिले या लौटने वाले थे। समस्या की जड़ — सिर्फ रद्द उड़ान नहीं, प्रणाली में खामियां विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या केवल एक-दो दिन की नहीं है। इंडिगो में पायलट और क्रू की कमी, नई ड्यूटी नियमों का जल्दबाजी में लागू होना, और शेड्यूलिंग में घबराहट — इन सब कारणों ने मिलकर आज का संकट खड़ा किया है। कई यात्रियों ने बताया कि देरी-रद्दीकरण और खराब व्यवस्था ने उनकी ज़िंदगियाँ प्रभावित कर दी हैं — ऐसा लग रहा है कि कोई भविष्य का भरोसा नहीं है। अब आगे क्या? — जवाबदेही, सुधार और यात्रियों की आवाज़ हमें उम्मीद है कि इंडिगो-संकट जितनी भी बड़ी हो — लेकिन न्याय, पारदर्शिता और सुधार की ज़रूरत पहले से कहीं ज़्यादा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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जबलपुर-कटंगी मार्ग पर तेज रफ्तार ट्रक का कहर, दो की मौत; एक युवक गंभीर घायल

जबलपुर-कटंगी मार्ग पर शनिवार शाम तेज रफ्तार ट्रक की चपेट में आने से दो लोगों की मौत हो गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसा पाटन थाना क्षेत्र में सैयद बाबा मजार के पास हुआ। घटना के बाद ट्रक चालक ने मौके से भागने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने पीछा कर उसे संग्रामपुर गांव के पास पकड़ लिया। पुलिस ने ट्रक जब्त कर चालक को गिरफ्तार कर लिया है। बाइक सवार दो युवकों और पैदल जा रहे व्यक्ति को कुचला जानकारी के मुताबिक, कटंगी निवासी राहुल यादव और नरेंद्र यादव मोटरसाइकिल पर सवार थे। वहीं, मनीष बर्मन पैदल जा रहे थे। इसी दौरान जबलपुर से दमोह की ओर जा रहे तेज रफ्तार ट्रक (नंबर AP39UJ3324) ने तीनों को अपनी चपेट में ले लिया। हादसा इतना गंभीर था कि नरेंद्र यादव और मनीष बर्मन की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, राहुल यादव गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया है। भागने की कोशिश कर रहा चालक गिरफ्तार हादसे की सूचना मिलते ही पाटन थाना पुलिस मौके पर पहुंची। दुर्घटना के बाद ट्रक चालक ने भागने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने पीछा कर उसे संग्रामपुर गांव के पास पकड़ लिया। पुलिस ने ट्रक जब्त कर चालक को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए पाटन भेजे गए हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है। सड़क सुरक्षा पर फिर उठे सवाल जबलपुर-कटंगी मार्ग पर तेज रफ्तार और बेकाबू वाहनों के कारण होने वाले हादसों ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पुलिस दुर्घटना के कारणों की जांच कर रही है।

इंदौर में दर्दनाक हादसा: दशहरे की छुट्टी पर घर लौट रही 9वीं की छात्रा की ट्रक के नीचे आने से मौत

दशहरे की छुट्टियों में हॉस्टल से घर लौट रही 15 साल की छात्रा महिमा की सड़क हादसे में मौत हो गई। वह अपने मौसा के साथ मोटरसाइकिल पर डबल चौकी से इंदौर आ रही थी। इसी दौरान नेमावर रोड पर पालदा क्षेत्र में हनुमान मंदिर के आगे उनकी बाइक ट्रक की चपेट में आ गई। हादसे में महिमा ट्रक के टायर के नीचे आ गई, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। मोटरसाइकिल चला रहे उसके मौसा घायल हो गए। हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करती थी महिमा मृतका की पहचान महिमा पिता गलसिंग सोलंकी, निवासी ग्राम भायली, जिला देवास के रूप में हुई है। वह कक्षा 9वीं की छात्रा थी और हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही थी। दशहरे की छुट्टियां होने के कारण महिमा अपने मौसा मूलचंद बघेला (28) के साथ मोटरसाइकिल से इंदौर आ रही थी। पालदा क्षेत्र में हनुमान मंदिर के आगे उनकी बाइक हादसे का शिकार हो गई। हेलमेट पहने होने से मौसा की बची जान हादसे के समय मोटरसाइकिल चला रहे मूलचंद ने हेलमेट पहन रखा था। हादसे में उन्हें चोटें आई हैं और उनके पैर में गंभीर चोट लगने की जानकारी सामने आई है। वहीं, मोटरसाइकिल पर पीछे बैठी महिमा ट्रक के टायर के नीचे आ गई। गंभीर चोटों के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा घटना की सूचना मिलते ही भंवरकुआं पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने मर्ग कायम कर महिमा के शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है। पुलिस हादसे के कारणों और ट्रक चालक की भूमिका की जांच कर रही है। जांच के बाद ही दुर्घटना से जुड़ी अन्य परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी। पालदा क्षेत्र में सड़क सुरक्षा पर उठे सवाल पालदा क्षेत्र में पहले भी सड़क हादसों में लोगों की जान जाने की घटनाएं सामने आती रही हैं। इस हादसे के बाद एक बार फिर क्षेत्र में सड़क सुरक्षा और दुर्घटनाओं की रोकथाम के इंतजामों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

भारत-A के न्यूजीलैंड दौरे के सभी मैच सोनी स्पोर्ट्स पर होंगे लाइव, जुरेल की कप्तानी में खेलेंगे राहुल-जायसवाल

भारत-A की टीम न्यूजीलैंड दौरे पर तीन चार दिवसीय मुकाबले खेलेगी। इन सभी मैचों का लाइव टेलीकास्ट सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क पर किया जाएगा। नेटवर्क मैचों के प्रसारण के साथ उनकी प्रोडक्शन जिम्मेदारी भी संभालेगा। ये मुकाबले न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली टेस्ट सीरीज की तैयारी के लिहाज से अहम होंगे। ध्रुव जुरेल की कप्तानी वाली भारत-A टीम में केएल राहुल, यशस्वी जायसवाल, देवदत्त पडिक्कल, वॉशिंगटन सुंदर और साई सुदर्शन जैसे खिलाड़ी शामिल हैं। टीम 18 अक्टूबर को बेंगलुरु से न्यूजीलैंड के लिए रवाना होगी। तीन चरणों में खेले जाएंगे चार दिवसीय मुकाबले भारत-A और न्यूजीलैंड के बीच तीन चार दिवसीय मैच खेले जाएंगे। सभी मुकाबले भारतीय समयानुसार सुबह 3:30 बजे शुरू होंगे। मैच तारीख पहला चार दिवसीय मैच 24 से 27 अक्टूबर दूसरा चार दिवसीय मैच 31 अक्टूबर से 3 नवंबर तीसरा चार दिवसीय मैच 7 से 10 नवंबर इन मैचों के जरिए भारतीय खिलाड़ियों को न्यूजीलैंड की परिस्थितियों में खेलने और टेस्ट क्रिकेट की तैयारी करने का मौका मिलेगा। भारत की इंटरनेशनल टीम के मैच भी दिखाएगा सोनी स्पोर्ट्स सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क न्यूजीलैंड दौरे पर भारत की सीनियर इंटरनेशनल टीम के मुकाबलों का प्रसारण भी करेगा। इस दौरे पर भारतीय टीम को पांच टी-20, पांच वनडे और दो टेस्ट मैच खेलने हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की सीनियर टीम और भारत-A के मुकाबले कुछ तारीखों पर एक ही समय खेले जा सकते हैं। ऐसे में दोनों टीमों के मैचों का लाइव प्रसारण किया जाएगा। एशियन गेम्स वाला सपोर्ट स्टाफ भी रहेगा साथ भारत-A टीम के साथ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) का सपोर्ट स्टाफ न्यूजीलैंड जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, एशियन गेम्स में भारतीय टीम के साथ जापान गए सपोर्ट स्टाफ को ही इस दौरे की जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि, एशियन गेम्स में भारतीय टीम के हेड कोच रहे वीवीएस लक्ष्मण के न्यूजीलैंड दौरे पर जाने को लेकर फिलहाल स्पष्ट जानकारी नहीं है। भारत-A के इस दौरे से खिलाड़ियों को विदेशी परिस्थितियों में अपनी क्षमता दिखाने और टेस्ट क्रिकेट के लिए तैयारी मजबूत करने का अवसर मिलेगा।

बिलासपुर के मल्हार स्कूल विवाद में प्राचार्य कल्याण संघ की एंट्री, निष्पक्ष जांच और CCTV फुटेज खंगालने की मांग

जिले के मल्हार स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में प्राचार्य और शिक्षकों के खिलाफ छात्रों की शिकायत का मामला तूल पकड़ने लगा है। छात्रों के प्रदर्शन के बाद अब प्राचार्य कल्याण संघ और प्राचार्य मंच भी प्राचार्य व शिक्षकों के समर्थन में उतर आए हैं। संगठनों ने कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। संघ का आरोप है कि स्कूल में अनुशासन और व्यवस्था सुधारने की कोशिशों से नाराज कुछ शिक्षकों ने छात्रों को भड़काया, जिससे विवाद बढ़ा। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। प्राचार्य के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई का विरोध प्राचार्य मंच के संयोजक संजय शर्मा ने कहा कि छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से लेना जरूरी है, लेकिन प्राचार्य और संबंधित शिक्षकों का पक्ष सुने बिना एकतरफा कार्रवाई करना उचित नहीं होगा। उन्होंने मांग की कि मामले की जांच में स्कूल की शाला प्रबंधन एवं विकास समिति (SMC) का प्रस्ताव पंजी, वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक खाते, रसीद और CCTV फुटेज को भी शामिल किया जाए। उनके मुताबिक, सभी दस्तावेजों और तथ्यों की पड़ताल के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना चाहिए। नवंबर 2025 में प्राचार्य ने संभाला था पद प्राचार्य कल्याण संघ के अनुसार, संबंधित प्राचार्य ने नवंबर 2025 में पदभार संभालने के बाद पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने, अनुशासन बनाए रखने और स्कूल की व्यवस्था बेहतर करने की कोशिश की थी। संघ का दावा है कि स्कूल के कुछ व्याख्याता और कर्मचारी इन प्रयासों में सहयोग नहीं कर रहे थे। इससे स्टाफ के बीच तालमेल की कमी बढ़ी और विवाद की स्थिति बनी। संघ ने प्रशासन से इस पहलू की भी जांच कराने की मांग की है। शिकायत के बाद दोबारा कलेक्ट्रेट पहुंचे छात्र इससे पहले छात्रों ने प्राचार्य और कुछ शिक्षकों के खिलाफ शिकायत की थी। जिला शिक्षा अधिकारी ने मामले में कार्रवाई भी की थी। इसके बावजूद छात्र दोबारा कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और प्राचार्य सहित अन्य शिक्षकों के खिलाफ FIR दर्ज कराने की मांग की। इसके बाद प्राचार्य कल्याण संघ ने प्रशासन से पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियों की जांच करने और शिकायतों से जुड़े सभी पक्षों की बात सुनने की मांग की है। SMC रिकॉर्ड और वित्तीय दस्तावेजों की जांच पर जोर प्राचार्य मंच के संयोजक संजय शर्मा ने कहा कि स्कूल में छात्रों और शिक्षकों के बीच संवाद की कमी भी विवाद की वजह हो सकती है। उन्होंने नियमित पढ़ाई, सभी विषयों के लिए शिक्षकों की उपलब्धता और तय समय पर कक्षाएं संचालित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की समस्याओं और सवालों का समाधान करना भी जरूरी है। साथ ही, शिकायतों की जांच के दौरान स्कूल के सभी संबंधित रिकॉर्ड और CCTV फुटेज देखे जाने चाहिए, ताकि घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति सामने आ सके। दिव्यांग प्राचार्य के मामले में नैसर्गिक न्याय की मांग संजय शर्मा के मुताबिक, संबंधित प्राचार्य दिव्यांग हैं और उनकी नौकरी का एक साल से भी कम समय बचा है। उन्होंने कहा कि प्राचार्य नियमित रूप से स्कूल आ रहे हैं और व्यवस्था सुधारने का प्रयास कर रहे हैं। मंच का कहना है कि प्राचार्य का पक्ष सुने बिना उनके खिलाफ कार्रवाई करना नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं होगा। वहीं, छात्रों की शिकायतों पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। संगठन ने दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर देने की मांग की है। बैठक कर विवाद सुलझाने का सुझाव प्राचार्य कल्याण संघ और प्राचार्य मंच ने स्कूल में सौहार्दपूर्ण वातावरण बहाल करने के लिए प्राचार्य, शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच संवाद बढ़ाने की जरूरत बताई है। संगठनों ने प्रशासन से बैठक आयोजित कर आपसी समन्वय बहाल करने और पढ़ाई की व्यवस्था सुधारने के लिए दीर्घकालिक योजना बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि विवाद का असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर नहीं पड़ना चाहिए। फिलहाल मामले में सभी पक्षों के आरोपों और शिकायतों की निष्पक्ष जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

जबलपुर में गरबा कार्यक्रम में बवाल, बाउंसरों और बजरंग दल कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट; वीडियो सामने आया

मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित धनवंतरी नगर के जसूजा सिटी में शुक्रवार रात गरबा कार्यक्रम के दौरान जमकर हंगामा हुआ। प्रवेश के लिए पास मांगने को लेकर बाउंसरों और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के बीच विवाद शुरू हुआ, जो देखते ही देखते धक्का-मुक्की और मारपीट में बदल गया। घटना का वीडियो भी सामने आया है। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को शांत कराया। पास मांगने पर शुरू हुआ विवाद जानकारी के मुताबिक, जसूजा सिटी के निजी परिसर में गरबा कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और बच्चे मौजूद थे। सुरक्षा व्यवस्था के लिए बाउंसर तैनात किए गए थे। इसी दौरान करीब 15 से 20 बजरंग दल के कार्यकर्ता वहां पहुंचे। इनमें महिलाएं भी शामिल थीं। कार्यक्रम में प्रवेश के लिए बाउंसरों ने उनसे पास मांगे। इसी बात पर दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर एक महिला कार्यकर्ता ने बाउंसर को थप्पड़ मार दिया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की और लात-घूंसे चलने लगे। आयोजक का आरोप- महिलाओं और बच्चों के साथ मारपीट की गई कार्यक्रम के आयोजक और जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीष मिश्रा ने आरोप लगाया कि गरबा कार्यक्रम के दौरान कुछ लोग वहां पहुंचे और खुद को धार्मिक संगठन का कार्यकर्ता बताया। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोगों के पास चाकू थे और महिलाओं पर हमला किया गया। मिश्रा ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस के मौके पर पहुंचने के बाद उनके साथ भी विवाद किया गया। उनके मुताबिक, कुछ लोग योजना बनाकर कार्यक्रम में पहुंचे थे और जानबूझकर हंगामा किया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में पुलिस की जांच जारी है। आयोजकों ने CCTV फुटेज की जांच की मांग की मनीष मिश्रा ने कहा कि कार्यक्रम आयोजित करने के लिए प्रशासन से अनुमति ली जाती है। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी धार्मिक संगठन के कार्यकर्ता यह तय नहीं कर सकते कि कौन कार्यक्रम आयोजित करेगा और कौन उसमें शामिल होगा। आयोजकों ने पुलिस से घटनास्थल के सभी CCTV फुटेज की जांच करने और मारपीट में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। पुलिस CCTV फुटेज के आधार पर कर रही जांच घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को शांत कराया। फिलहाल पुलिस CCTV फुटेज और सामने आए वीडियो के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। जांच के बाद ही विवाद की शुरुआत, मारपीट में शामिल लोगों और दोनों पक्षों की भूमिका को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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