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IndiGo Airlines क्रू शॉर्टेज के बीच सैकड़ों फ्लाइट्स कैंसल, DGCA ने मांगा जवाब

देश की सबसे बड़ी घरेलू एयरलाइन IndiGo इस समय ऐसे परिचालन संकट से गुजर रही है, जिसने हजारों यात्रियों की यात्रा योजनाएँ बिगाड़ दी हैं। बीते कुछ दिनों में दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और कई बड़े एयरपोर्ट्स पर इंडिगो की उड़ानें लगातार कैंसल और लंबे समय तक लेट हो रही हैं। कई लोग रातभर एयरपोर्ट पर फंसे रहे, कई की कनेक्टिंग फ्लाइट छूट गई, और बहुत-सी यात्राएँ आखिरी मिनट पर बिगड़ गईं। हालात इतने खराब बने कि DGCA को हस्तक्षेप करना पड़ा। आखिर इंडिगो में ये संकट क्यों आया? इंडस्ट्री सूत्रों और रिपोर्टों से सामने आई कुछ मुख्य वजहें: 1. Crew Shortage – पायलट और क्रू की भारी कमी नई FDTL (Flight Duty Time Limitations) नियमावली लागू होने के बाद क्रू की उपलब्धता कम हो गई। एयरलाइन आवश्यक संख्या में पायलट और कैबिन क्रू तैनात नहीं कर सकी। इसकी वजह से कई उड़ानों को मजबूरन कैंसिल या री-शेड्यूल करना पड़ा। 2. Technical Glitches – सिस्टम दिक्कतें कई एयरपोर्ट्स पर चेक-इन सिस्टम, बैगेज मैनेजमेंट और कोऑर्डिनेशन में तकनीकी दिक्कतें देखी गईं, जिससे लेट बढ़ता चला गया। 3. Airport Congestion – एयरपोर्ट पर भीड़ का दबाव सीजन पीक चल रहा है, ऐसे में भीड़ और अतिरिक्त ट्रैफिक ने देरी को और बढ़ा दिया। एयरलाइन शेड्यूल तेजी से एडजस्ट नहीं कर पाई। यात्रियों पर असर: नाराज़गी, इंतज़ार और उथल-पुथल यात्रियों के अनुभव बताते हैं कि लोगों में नाराज़गी जितनी बड़ी है, उतना ही भ्रम और थकान भी बढ़ी है। DGCA की कार्रवाई: जवाब तलब शुरू DGCA ने इंडिगो से तुरंत रिपोर्ट मांगी है और पूछा है कि यह अफरा-तफरी कैसे हुई।नियामक ने स्पष्ट कहा है कि एयरलाइन को IndiGo ने बयान जारी कर कहा है कि अगले 48 घंटों में हालात सामान्य करने की कोशिश की जा रही है। क्यों है यह मुद्दा इतना बड़ा? IndiGo भारत के घरेलू एविएशन मार्केट का सबसे बड़ा हिस्सा संभालती है। लाखों लोग रोजाना इसके शेड्यूल पर निर्भर होते हैं।ऐसे में फ्लाइट-कैंसिलेशन की यह लहर सिर्फ यात्रियों का भरोसा नहीं तोड़ती, बल्कि भारतीय उड्डयन व्यवस्था में मौजूद खामियों को भी उजागर करती है। यात्रियों के लिए उपयोगी सलाह अगर आपकी उड़ान आने वाले दिनों में इंडिगो से है, तो: इंडिगो का यह संकट सिर्फ एक एयरलाइन की अंदरूनी खराबी नहीं, बल्कि भारतीय एविएशन सेक्टर के दबाव और क्षमता की सच्चाई भी दिखाता है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में क्रू की कमी दूर होगी, तकनीकी दिक्कतें सुधरेंगी और यात्रियों को फिर वही भरोसेमंद सेवा मिलेगी जिसकी वजह से IndiGo देश की नंबर-1 एयरलाइन बन पाई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Imran Khan

PTI Protests और Imran Khan स्वास्थ्य अफवाहों के बीच राजनीतिक तनाव

पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री और PTI (Pakistan Tehreek-e-Insaf) के संस्थापक इमरान खान (Imran Khan) की सेहत को लेकर फैल रही अफवाहें देश की राजनीतिक हवा को गरमा रही हैं। सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि इमरान खान की हालत गंभीर है और उन्हें “death cell” में रखा गया है। इस लेख में हम आपको उनकी Sehat की वर्तमान स्थिति, परिवार और PTI के कदम, सरकार का रुख और देश में बढ़ते राजनीतिक तनाव की पूरी जानकारी देंगे। अफवाहों की शुरुआत और चिंता पिछले कुछ हफ्तों से सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि Imran Khan के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी गुप्त रखी जा रही है। उनके बेटे कासिम खान ने चिंता जताते हुए कहा कि पिता से संपर्क पूरी तरह बंद है और यह माहौल “psychological torture” जैसा बन गया है। PTI के नेताओं और समर्थकों ने “Proof of Life” की मांग की है और सरकार से सार्वजनिक रूप से उनकी स्थिति बताने की अपील की है। सोशल मीडिया पर #WhereIsImranKhan जैसे हैशटैग वायरल हो रहे हैं, जो आम जनता और समर्थकों की चिंता को दर्शाते हैं। परिवार और PTI का दबाव यह सिर्फ व्यक्तिगत चिंता नहीं है — PTI इसे मानवाधिकारों और संवैधानिक अधिकारों का मुद्दा भी मानती है। जेल प्रशासन और सरकार का बयान सरकार और जेल अधिकारियों ने बार-बार कहा है कि इमरान खान सुरक्षित और स्वस्थ हैं। उन्हें पूरी मेडिकल देखभाल, आहार और व्यायाम की सुविधा मिल रही है। हालांकि, अधिकारियों ने अभी तक परिवार और पार्टी के प्रतिनिधियों को उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी है। सरकार का आरोप है कि अफवाहें सोशल मीडिया और विदेशी मीडिया से फैल रही हैं, और इसका उद्देश्य देश में अस्थिरता पैदा करना है। बड़े पैमाने पर प्रदर्शन और राजनीतिक माहौल देश में राजनीतिक माहौल गरम है और हर कोई इस स्थिति पर नजर रख रहा है। क्यों मामला इतना संवेदनशील है Imran Khan सिर्फ एक पूर्व प्रधानमंत्री नहीं हैं, बल्कि देश में उनके समर्थकों का बड़ा नेटवर्क है। उनकी Sehat और सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की अनिश्चितता राजनीतिक अस्थिरता, मानवाधिकार और न्याय प्रणाली पर प्रश्न उठाती है। अगर सरकार स्थिति स्पष्ट नहीं करती है, तो देशभर में असंतोष और बड़े प्रदर्शन होने की संभावना है। वर्तमान स्थिति Imran Khan स्वास्थ्य और उनकी सुरक्षा को लेकर स्थिति लगातार बदल रही है। देश और दुनिया की नजरें इस पर टिकी हुई हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ditwah

Chennai Weather Alert Cyclone Ditwah के कारण Flood और Heavy Rain,Flights Cancelled

चक्रवात Ditwah सबसे पहले श्रीलंका (Sri Lanka) को प्रभावित किया। तेज बारिश, बाढ़ और landslide के कारण वहां भारी तबाही हुई, जिसमें 350+ लोग मृत और सैकड़ों लोग लापता हुए। इसके बाद यह India के दक्षिणी तटीय राज्यों की ओर बढ़ा। India Meteorological Department (IMD) ने Tamil Nadu, Puducherry और आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों में Red Alert जारी किया। Chennai और आसपास के जिले – Tiruvallur, Kancheepuram – सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। Chennai और Nearby Areas में क्या स्थिति है Heavy Rain और Flood Risk Cyclone Ditwah ने भारत में अपना “deep depression” रूप लिया, लेकिन इसका असर अभी भी जारी है। Weather experts का कहना है कि December 2–7 के बीच rainfall moderate to heavy बनी रहेगी। Sri Lanka से India तक – व्यापक असर हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Lok Sabha में Manickam Tagore का स्थगन प्रस्ताव, बीएलओ की मौत की राष्ट्रीय जांच की मांग

Lok Sabha में Manickam Tagore का स्थगन प्रस्ताव, बीएलओ की मौत की राष्ट्रीय जांच की मांग

कांग्रेस सांसद Manickam Tagore ने लोकसभा में एसआईआर (SIR) मुद्दे और बीएलओ (BLO) की संदिग्ध मौत को लेकर स्थगन प्रस्ताव पेश किया है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस पूरे मामले की राष्ट्रीय स्तर पर जांच कराने की मांग की। मणिकम टैगोर ने कहा कि बीएलओ की मौत सिर्फ एक हादसा नहीं है, बल्कि कई सवाल खड़े करती है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे कर्मचारियों की सुरक्षा और कामकाजी हालात पर सरकार को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। सांसद ने आरोप लगाया कि मामले को ठीक से नहीं देखा जा रहा है, इसलिए इसमें स्वतंत्र और पारदर्शी जांच जरूरी है। उन्होंने लोकसभा में कहा कि जब एक सरकारी कर्मचारी ड्यूटी के दौरान संदिग्ध हालात में जान गंवा देता है, तो यह पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी है। बीएलओ के परिवार को न्याय मिलना चाहिए और सच्चाई सामने आनी चाहिए। विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग की है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Balrampur

UP Road Accident Balrampur में बस और ट्रक की भिड़ंत में आग लगी, कई घायल

उत्तर प्रदेश के Balrampur में हुआ भयावह सड़क हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि तेज रफ्तार की एक गलती, कई परिवारों की ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल सकती है। मंगलवार तड़के एक निजी बस और तेज रफ्तार ट्रक की जोरदार टक्कर में तीन लोगों की मौत हो गई और दो दर्जन से ज्यादा यात्री घायल हुए। हादसा इतना भीषण था कि टक्कर के तुरंत बाद दोनों वाहनों में आग लग गई और मौके पर अफरा-तफरी मच गई। कैसे हुआ हादसा? प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रात के लगभग 2–3 बजे जब ज्यादातर लोग गहरी नींद में थे, उसी समय दिल्ली जा रही एक प्राइवेट बस की सामने से आ रहे ट्रक से भिड़ंत हो गई।भारी टक्कर के बाद बस एक बिजली के खंभे से जा टकराई। कहा जा रहा है कि इसी टक्कर के बाद शॉर्ट-सर्किट हुआ और आग तेजी से फैल गई। आग की लपटों ने कुछ ही मिनटों में बस और ट्रक, दोनों को अपनी चपेट में ले लिया। जिंदगी और मौत के बीच जूझते यात्री घायल यात्रियों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। कुछ यात्रियों को बेहतर इलाज के लिए दूसरे जिलों के बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया है। राहत-बचाव में प्रशासन की तेज कार्रवाई सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग मौके पर पहुंचे और बचाव अभियान शुरू किया।प्रशासन ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई है और घायलों के इलाज की पूरी जिम्मेदारी ली है।प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और लापरवाही को हादसे की मुख्य वजह बताया जा रहा है। 2025 में Balrampur में बढ़ते सड़क हादसे – एक बड़ी चेतावनी यह हादसा इस साल का पहला या अकेला बड़ा हादसा नहीं है।2025 में Balrampur में कई और गंभीर दुर्घटनाएँ सामने आ चुकी हैं: इन सभी घटनाओं को देखने के बाद साफ है कि Balrampur की सड़कें तेज रफ्तार और भारी वाहनों के लिए बेहद संवेदनशील होती जा रही हैं। सवाल जो उठते हैं… हादसों की बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि अब सिर्फ जांच या बयान देने भर से काम नहीं चलेगा।सड़क सुरक्षा की मजबूत व्यवस्था और सख्त नियम ही ऐसी त्रासदियों को रोक सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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LOK SABHA में जोरदार हंगामा: विपक्ष वेल में उतरा, खड़गे बोले— लोकतंत्र बचाना जरूरी

LOK SABHA में जोरदार हंगामा: विपक्ष वेल में उतरा, खड़गे बोले— लोकतंत्र बचाना जरूरी

Lok Sabha की कार्यवाही सोमवार को उस समय गरमा गई, जब विपक्षी सांसद विभिन्न मुद्दों को लेकर वेल में पहुंच गए। सांसदों ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कराना उनका हक है। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि “लोकतंत्र को बचाना आज सबसे जरूरी है। संसद में बहस हो, सवाल पूछे जाएं और जवाब भी मिले।” खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा से बच रही है। दूसरी ओर केंद्र सरकार ने कहा कि वह किसी भी मुद्दे पर बहस के लिए पूरी तरह तैयार है। लेकिन सरकार का कहना है कि विपक्ष बहस पर समय सीमा थोपने की कोशिश कर रहा है, जो संसद की परंपराओं के खिलाफ है। सरकार ने विपक्ष से शांतिपूर्ण चर्चा की अपील की। लोकसभा अध्यक्ष ने भी सांसदों से सदन की गरिमा बनाए रखने और व्यवधान न पैदा करने की अपील की। सदन में हंगामे के चलते कई बार कार्यवाही बाधित करनी पड़ी। अब सभी की नजर इस बात पर है कि अगली बैठक में क्या विपक्ष और सत्ता पक्ष किसी सहमति पर पहुंच पाते हैं या नहीं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Pinarayi

466 करोड़ का KIIFB मसाला बांड मामला ED ने Kerala CM Pinarayi Vijayan को भेजा नोटिस

केरल के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन (Pinarayi Vijayan) के लिए राजनीतिक और कानूनी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। Enforcement Directorate (ED) ने Kerala Infrastructure Investment Fund Board (KIIFB) और उसके वरिष्ठ अधिकारियों को 466 करोड़ रुपये के मसला बांड (Masala Bond) मामले में नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में CM Pinarayi Vijayan, पूर्व वित्त मंत्री थॉमस आयज़क (Thomas Isaac) और KIIFB के पूर्व CEO के.एम. अब्राहम (K.M. Abraham) को FEMA (Foreign Exchange Management Act) के संभावित उल्लंघन पर जवाब देने के लिए कहा गया है। नोटिस का कारण 2019 में KIIFB द्वारा जारी मसला बांड को लेकर ED की जांच जारी है। इन बांडों के जरिए विदेशों से केरल के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए लगभग 2,150 करोड़ रुपये जुटाए गए थे। ED का आरोप है कि इन फंड्स का इस्तेमाल FEMA नियमों के उल्लंघन के साथ किया गया हो सकता है। नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अभी यह केवल प्रारंभिक जवाब है, और इसमें व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य नहीं है। हालांकि, इससे KIIFB और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए कानूनी जिम्मेदारी तय हो सकती है। पृष्ठभूमि और पहले के मामले राजनीतिक और कानूनी असर विशेषज्ञों के अनुसार, अगर यह जांच आगे बढ़ती है, तो इससे केरल की सत्तारूढ़ सरकार और KIIFB के वरिष्ठ अधिकारियों पर बड़ा दबाव बन सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस मामले से 2025-26 चुनावों पर भी असर पड़ सकता है। आलोचक दावा कर रहे हैं कि बांड जारी करने और फंड उपयोग में केंद्रीय अनुमोदन का अभाव था। दूसरी ओर, समर्थक इसे राज्य के बुनियादी ढांचे के लिए वैध वित्तीय साधन मानते हैं। केरल के लिए यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक चुनौती भी बन गया है। ED का यह नोटिस राज्य सरकार और KIIFB के लिए एक चेतावनी जैसा है कि फंड के इस्तेमाल और वित्तीय लेन-देन में पूरी पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi

Air Quality in Delhi‑NCR प्रदूषण के आंकड़े और सर्दियों की चेतावनी

Delhi‑NCR में वायु प्रदूषण (Air Pollution) का मुद्दा हमेशा चर्चा में रहा है। 2025 में शहर और आसपास के इलाकों में वायु गुणवत्ता में सुधार देखने को मिला है, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि ये सुधार स्थायी नहीं हैं और सर्दियों में प्रदूषण (Pollution) फिर बढ़ सकता है। हाल के आंकड़े और सुधार 2025 के जनवरी से नवंबर तक के आंकड़े बताते हैं कि Delhi‑NCR की Air Quality Index (AQI) पिछले आठ साल में सबसे अच्छी रही है, लॉकडाउन 2020 को छोड़कर। “सख्त” और “बहुत खराब” प्रदूषण वाले दिनों की संख्या में भी गिरावट देखी गई। कई इलाकों में PM2.5 और PM10 का स्तर कम हुआ है, जिससे सांस संबंधी रोगों के जोखिम में थोड़ी राहत मिली है। CSE की चेतावनी: सिर्फ आंकड़े भरोसा नहीं सेंट्रल फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की रिपोर्ट में कहा गया है कि केवल PM प्रदूषण के आंकड़ों पर भरोसा करना सही नहीं। नागरिकों और अधिकारियों के लिए सुझाव Delhi‑NCR में वायु गुणवत्ता में सुधार तो दिखाई दे रहा है, लेकिन यह सतही है। Ground‑Level Ozone, सीमित निगरानी और सर्दियों में बढ़ता Pollution अभी भी गंभीर चिंता का विषय हैं। सच्चाई यह है कि सिर्फ आंकड़ों पर भरोसा करना गलत होगा। नागरिकों और अधिकारियों को मिलकर सतत और व्यापक उपाय करने होंगे, ताकि हवा की Quality सुरक्षित और स्वच्छ बनी रहे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Parliament Winter Session 2025 संसद का शीतकालीन सत्र शुरू,संसद में सुधारों की बौछार

संसद का बहुप्रतीक्षित Winter Session 2025 आज से शुरू हो गया है और 19 दिसंबर तक चलेगा। शुरुआती दिन से ही माहौल गर्माने की पूरी संभावना है, क्योंकि इस बार सरकार कई बड़े सुधारात्मक बिल लाने की तैयारी में है, जबकि विपक्ष कई संवेदनशील मुद्दों पर सरकार को घेरने के मूड में दिखाई दे रहा है। यह सत्र सिर्फ औपचारिक चर्चाओं तक सीमित नहीं रहेगा—इसके भीतर देश की ऊर्जा नीति, शिक्षा सुधार, टैक्स ढांचा और चुनावी प्रक्रियाओं पर बड़े फैसले लिए जा सकते हैं। सत्र का फोकस: कौन-कौन से बिल होंगे चर्चा में? इस सत्र में कई अहम विधेयक पेश किए जाएंगे, जिनसे न केवल मौजूदा नीतियों में बदलाव होगा, बल्कि आने वाले वर्षों का रोडमैप भी तय होगा। 1. एटॉमिक एनर्जी बिल 2025 (Atomic Energy Bill 2025) 2. HECI Bill – Higher Education Commission of India 3. Corporate Laws Amendment Bill 2025 4. Securities Market Code Bill 2025 5. Health Security & National Security Cess Bill 2025 6. Supplementary Demands for Grants 2025-26 विपक्ष के निशाने पर SIR: सत्र में टकराव की पूरी आशंका इस बार सत्र का सबसे विवादित मुद्दा है SIR – Special Intensive Revision of Electoral Rolls, यानी मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण।विपक्ष का आरोप है कि— विपक्ष ने संकेत दिया है कि यदि SIR पर विस्तृत चर्चा नहीं होती, तो वह संसद में तीखा विरोध और संभावित हंगामे की रणनीति अपना सकता है। इसके अलावा प्रदूषण, बेरोज़गारी, राष्ट्रीय सुरक्षा, श्रम कानून और राज्यों के बकाये जैसी समस्याएँ भी एजेंडा में रहेंगी। सरकार का रुख: “रोक नहीं, सहयोग चाहिए” सत्र से ठीक पहले हुई सर्वदलीय बैठक में सरकार ने कहा कि वह— प्रधानमंत्री ने विपक्ष से स्पष्ट कहा कि “नाटक नहीं, नतीजे चाहिए।” यह संदेश बताता है कि सरकार इस सत्र को सुधारों के लिए निर्णायक चरण बनाना चाहती है। क्यों अहम है यह Winter Session 2025? 1. ऊर्जा नीति में बड़ा मोड़ Atomic Energy Bill से भारत की पावर सेक्टर रणनीति बदल सकती है। 2. शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव HECI बिल से उच्च शिक्षा का ढांचा नई दिशा लेगा। 3. टैक्स और राजस्व नीति का नया मॉडल Sin Goods Cess सरकार के हेल्थ और नेशनल सिक्योरिटी फंड को नई ताकत देगा। 4. राजनीतिक तापमान ऊँचा SIR विवाद को देखते हुए सत्र के हर दिन में राजनीतिक गर्मी बनी रहने की संभावना है। मानवीय दृष्टिकोण: इस सत्र से आम लोगों को क्या उम्मीद? सत्र की चर्चा संसद तक सीमित नहीं है—इसका असर सीधे आम लोगों पर पड़ेगा। लोगों की सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि सत्र सिर्फ राजनीतिक टकराव में न फँसे, बल्कि कामकाज आगे बढ़े और कानून जनता के हित में बनें। Parliament Winter Session 2025 भारतीय लोकतंत्र का एक अहम पड़ाव है।एक तरफ सरकार बड़े सुधारों को गति देना चाहती है, वहीं विपक्ष मतदाता सूची और पारदर्शिता के मुद्दों पर आक्रामक है। अगले 19 दिनों में यह साफ हो जाएगा कि क्या संसद नीतियों, विकास और सुधार पर आगे बढ़ती है—या फिर राजनीतिक टकराव माहौल पर हावी हो जाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Siddaramaiah

Siddaramaiah vs Shivakumar Karnataka में Power-Sharing Fight से बढ़ा Political Tension

कर्नाटक कांग्रेस में पावर-शेयरिंग को लेकर शुरू हुआ विवाद अब बड़े राजनीतिक संकट में बदल गया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया (Siddaramaiah) और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ( Shivakumar) के बीच खींचतान लगातार गहराती जा रही है। दोनों गुटों के विधायकों की सक्रियता, बयानबाज़ी और अंदरूनी बैठकों ने कांग्रेस हाई-कमान को हस्तक्षेप करने पर मजबूर कर दिया है। CM House में Breakfast Meeting—लेकिन समाधान नहीं दिखा शनिवार सुबह बेंगलुरु में मुख्यमंत्री आवास पर सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच ब्रेकफास्ट मीटिंग हुई। हाई-कमान के निर्देश पर हुई यह मुलाकात “संकट कम करने” की कोशिश थी।लेकिन मीटिंग के बाद शिवकुमार ने कहा—“Breakfast अच्छा था, पर Political discussion नहीं हुई।”यह संकेत देता है कि मूल मुद्दा जस का तस बना हुआ है और मीटिंग सिर्फ औपचारिक साबित हुई। Power-Sharing का 2.5 Years Formula विवाद का केंद्र कर्नाटक में पूरा संकट 2023 के कथित “2.5 साल के CM फॉर्मूले” को लेकर है। यही विवाद अब महाराष्ट्र-स्टाइल राजनीतिक घमासान में बदल रहा है। Late-Night Meetings से बढ़ी टेंशन शुक्रवार देर रात शिवकुमार समर्थक कई विधायकों की मीटिंग हुई, जिसे हाई-कमान ने “गंभीर संकेत” माना।इसके बाद सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र का बयान आया—“High Command ने किसी CM Change का निर्देश नहीं दिया।”इसने साफ कर दिया कि सिद्धारमैया फिलहाल पद छोड़ने के मूड में नहीं हैं। High Command का Damage Control—दोनों नेता Delhi बुलाए गए कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व अब मामला अपने हाथ में लेकर Damage Control मोड में है।अधिकारियों ने दोनों नेताओं को दिल्ली बुलाया है, जहाँ पार्टी अध्यक्ष को पूरा रिपोर्ट दी जाएगी।यह साफ है कि मामला अब राज्य के स्तर से आगे निकल चुका है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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भारत-A के न्यूजीलैंड दौरे के सभी मैच सोनी स्पोर्ट्स पर होंगे लाइव, जुरेल की कप्तानी में खेलेंगे राहुल-जायसवाल

भारत-A की टीम न्यूजीलैंड दौरे पर तीन चार दिवसीय मुकाबले खेलेगी। इन सभी मैचों का लाइव टेलीकास्ट सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क पर किया जाएगा। नेटवर्क मैचों के प्रसारण के साथ उनकी प्रोडक्शन जिम्मेदारी भी संभालेगा। ये मुकाबले न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली टेस्ट सीरीज की तैयारी के लिहाज से अहम होंगे। ध्रुव जुरेल की कप्तानी वाली भारत-A टीम में केएल राहुल, यशस्वी जायसवाल, देवदत्त पडिक्कल, वॉशिंगटन सुंदर और साई सुदर्शन जैसे खिलाड़ी शामिल हैं। टीम 18 अक्टूबर को बेंगलुरु से न्यूजीलैंड के लिए रवाना होगी। तीन चरणों में खेले जाएंगे चार दिवसीय मुकाबले भारत-A और न्यूजीलैंड के बीच तीन चार दिवसीय मैच खेले जाएंगे। सभी मुकाबले भारतीय समयानुसार सुबह 3:30 बजे शुरू होंगे। मैच तारीख पहला चार दिवसीय मैच 24 से 27 अक्टूबर दूसरा चार दिवसीय मैच 31 अक्टूबर से 3 नवंबर तीसरा चार दिवसीय मैच 7 से 10 नवंबर इन मैचों के जरिए भारतीय खिलाड़ियों को न्यूजीलैंड की परिस्थितियों में खेलने और टेस्ट क्रिकेट की तैयारी करने का मौका मिलेगा। भारत की इंटरनेशनल टीम के मैच भी दिखाएगा सोनी स्पोर्ट्स सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क न्यूजीलैंड दौरे पर भारत की सीनियर इंटरनेशनल टीम के मुकाबलों का प्रसारण भी करेगा। इस दौरे पर भारतीय टीम को पांच टी-20, पांच वनडे और दो टेस्ट मैच खेलने हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की सीनियर टीम और भारत-A के मुकाबले कुछ तारीखों पर एक ही समय खेले जा सकते हैं। ऐसे में दोनों टीमों के मैचों का लाइव प्रसारण किया जाएगा। एशियन गेम्स वाला सपोर्ट स्टाफ भी रहेगा साथ भारत-A टीम के साथ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) का सपोर्ट स्टाफ न्यूजीलैंड जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, एशियन गेम्स में भारतीय टीम के साथ जापान गए सपोर्ट स्टाफ को ही इस दौरे की जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि, एशियन गेम्स में भारतीय टीम के हेड कोच रहे वीवीएस लक्ष्मण के न्यूजीलैंड दौरे पर जाने को लेकर फिलहाल स्पष्ट जानकारी नहीं है। भारत-A के इस दौरे से खिलाड़ियों को विदेशी परिस्थितियों में अपनी क्षमता दिखाने और टेस्ट क्रिकेट के लिए तैयारी मजबूत करने का अवसर मिलेगा।

बिलासपुर के मल्हार स्कूल विवाद में प्राचार्य कल्याण संघ की एंट्री, निष्पक्ष जांच और CCTV फुटेज खंगालने की मांग

जिले के मल्हार स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में प्राचार्य और शिक्षकों के खिलाफ छात्रों की शिकायत का मामला तूल पकड़ने लगा है। छात्रों के प्रदर्शन के बाद अब प्राचार्य कल्याण संघ और प्राचार्य मंच भी प्राचार्य व शिक्षकों के समर्थन में उतर आए हैं। संगठनों ने कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। संघ का आरोप है कि स्कूल में अनुशासन और व्यवस्था सुधारने की कोशिशों से नाराज कुछ शिक्षकों ने छात्रों को भड़काया, जिससे विवाद बढ़ा। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। प्राचार्य के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई का विरोध प्राचार्य मंच के संयोजक संजय शर्मा ने कहा कि छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से लेना जरूरी है, लेकिन प्राचार्य और संबंधित शिक्षकों का पक्ष सुने बिना एकतरफा कार्रवाई करना उचित नहीं होगा। उन्होंने मांग की कि मामले की जांच में स्कूल की शाला प्रबंधन एवं विकास समिति (SMC) का प्रस्ताव पंजी, वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक खाते, रसीद और CCTV फुटेज को भी शामिल किया जाए। उनके मुताबिक, सभी दस्तावेजों और तथ्यों की पड़ताल के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना चाहिए। नवंबर 2025 में प्राचार्य ने संभाला था पद प्राचार्य कल्याण संघ के अनुसार, संबंधित प्राचार्य ने नवंबर 2025 में पदभार संभालने के बाद पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने, अनुशासन बनाए रखने और स्कूल की व्यवस्था बेहतर करने की कोशिश की थी। संघ का दावा है कि स्कूल के कुछ व्याख्याता और कर्मचारी इन प्रयासों में सहयोग नहीं कर रहे थे। इससे स्टाफ के बीच तालमेल की कमी बढ़ी और विवाद की स्थिति बनी। संघ ने प्रशासन से इस पहलू की भी जांच कराने की मांग की है। शिकायत के बाद दोबारा कलेक्ट्रेट पहुंचे छात्र इससे पहले छात्रों ने प्राचार्य और कुछ शिक्षकों के खिलाफ शिकायत की थी। जिला शिक्षा अधिकारी ने मामले में कार्रवाई भी की थी। इसके बावजूद छात्र दोबारा कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और प्राचार्य सहित अन्य शिक्षकों के खिलाफ FIR दर्ज कराने की मांग की। इसके बाद प्राचार्य कल्याण संघ ने प्रशासन से पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियों की जांच करने और शिकायतों से जुड़े सभी पक्षों की बात सुनने की मांग की है। SMC रिकॉर्ड और वित्तीय दस्तावेजों की जांच पर जोर प्राचार्य मंच के संयोजक संजय शर्मा ने कहा कि स्कूल में छात्रों और शिक्षकों के बीच संवाद की कमी भी विवाद की वजह हो सकती है। उन्होंने नियमित पढ़ाई, सभी विषयों के लिए शिक्षकों की उपलब्धता और तय समय पर कक्षाएं संचालित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की समस्याओं और सवालों का समाधान करना भी जरूरी है। साथ ही, शिकायतों की जांच के दौरान स्कूल के सभी संबंधित रिकॉर्ड और CCTV फुटेज देखे जाने चाहिए, ताकि घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति सामने आ सके। दिव्यांग प्राचार्य के मामले में नैसर्गिक न्याय की मांग संजय शर्मा के मुताबिक, संबंधित प्राचार्य दिव्यांग हैं और उनकी नौकरी का एक साल से भी कम समय बचा है। उन्होंने कहा कि प्राचार्य नियमित रूप से स्कूल आ रहे हैं और व्यवस्था सुधारने का प्रयास कर रहे हैं। मंच का कहना है कि प्राचार्य का पक्ष सुने बिना उनके खिलाफ कार्रवाई करना नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं होगा। वहीं, छात्रों की शिकायतों पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। संगठन ने दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर देने की मांग की है। बैठक कर विवाद सुलझाने का सुझाव प्राचार्य कल्याण संघ और प्राचार्य मंच ने स्कूल में सौहार्दपूर्ण वातावरण बहाल करने के लिए प्राचार्य, शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच संवाद बढ़ाने की जरूरत बताई है। संगठनों ने प्रशासन से बैठक आयोजित कर आपसी समन्वय बहाल करने और पढ़ाई की व्यवस्था सुधारने के लिए दीर्घकालिक योजना बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि विवाद का असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर नहीं पड़ना चाहिए। फिलहाल मामले में सभी पक्षों के आरोपों और शिकायतों की निष्पक्ष जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

जबलपुर में गरबा कार्यक्रम में बवाल, बाउंसरों और बजरंग दल कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट; वीडियो सामने आया

मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित धनवंतरी नगर के जसूजा सिटी में शुक्रवार रात गरबा कार्यक्रम के दौरान जमकर हंगामा हुआ। प्रवेश के लिए पास मांगने को लेकर बाउंसरों और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के बीच विवाद शुरू हुआ, जो देखते ही देखते धक्का-मुक्की और मारपीट में बदल गया। घटना का वीडियो भी सामने आया है। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को शांत कराया। पास मांगने पर शुरू हुआ विवाद जानकारी के मुताबिक, जसूजा सिटी के निजी परिसर में गरबा कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और बच्चे मौजूद थे। सुरक्षा व्यवस्था के लिए बाउंसर तैनात किए गए थे। इसी दौरान करीब 15 से 20 बजरंग दल के कार्यकर्ता वहां पहुंचे। इनमें महिलाएं भी शामिल थीं। कार्यक्रम में प्रवेश के लिए बाउंसरों ने उनसे पास मांगे। इसी बात पर दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर एक महिला कार्यकर्ता ने बाउंसर को थप्पड़ मार दिया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की और लात-घूंसे चलने लगे। आयोजक का आरोप- महिलाओं और बच्चों के साथ मारपीट की गई कार्यक्रम के आयोजक और जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीष मिश्रा ने आरोप लगाया कि गरबा कार्यक्रम के दौरान कुछ लोग वहां पहुंचे और खुद को धार्मिक संगठन का कार्यकर्ता बताया। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोगों के पास चाकू थे और महिलाओं पर हमला किया गया। मिश्रा ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस के मौके पर पहुंचने के बाद उनके साथ भी विवाद किया गया। उनके मुताबिक, कुछ लोग योजना बनाकर कार्यक्रम में पहुंचे थे और जानबूझकर हंगामा किया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में पुलिस की जांच जारी है। आयोजकों ने CCTV फुटेज की जांच की मांग की मनीष मिश्रा ने कहा कि कार्यक्रम आयोजित करने के लिए प्रशासन से अनुमति ली जाती है। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी धार्मिक संगठन के कार्यकर्ता यह तय नहीं कर सकते कि कौन कार्यक्रम आयोजित करेगा और कौन उसमें शामिल होगा। आयोजकों ने पुलिस से घटनास्थल के सभी CCTV फुटेज की जांच करने और मारपीट में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। पुलिस CCTV फुटेज के आधार पर कर रही जांच घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को शांत कराया। फिलहाल पुलिस CCTV फुटेज और सामने आए वीडियो के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। जांच के बाद ही विवाद की शुरुआत, मारपीट में शामिल लोगों और दोनों पक्षों की भूमिका को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
ऑस्ट्रेलिया

Gold Mining: ऑस्ट्रेलिया में सोने की नई खोज से बदलेगी तस्वीर, भारत को मिल सकता है नया सप्लायर

भारत में सोना सिर्फ गहना नहीं, बल्कि लोगों की बचत और निवेश का भी अहम हिस्सा है। शादी का सीजन हो या दिवाली-धनतेरस, सोने की खरीदारी को लेकर बाजार में हमेशा हलचल रहती है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया से आई सोने की खोज और बढ़ते निवेश की खबर भारत के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऑस्ट्रेलिया में सोने की नई खोज के लिए कंपनियां बड़े स्तर पर खर्च कर रही हैं। इससे आने वाले समय में सोने की वैश्विक सप्लाई बढ़ने की संभावना है। भारत जैसे देश के लिए यह एक अहम घटनाक्रम है, क्योंकि अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा पूरा करने के लिए भारत को दूसरे देशों से सोना आयात करना पड़ता है। Australia में Gold Exploration पर कितना खर्च हुआ? ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज से जुड़ा निवेश जून 2026 की तिमाही में बढ़कर लगभग 565.6 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पहुंच गया। ऑस्ट्रेलियाई सांख्यिकी ब्यूरो (ABS) के आंकड़ों के अनुसार, पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें 23.6% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह खर्च जमीन के नीचे मौजूद सोने के संभावित भंडार का पता लगाने, ड्रिलिंग और खनन की संभावनाओं का आकलन करने जैसे कामों पर किया जाता है। हालांकि, खोज पर खर्च बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि हर जगह सोने का नया भंडार मिल गया है। किसी जगह सोना मिलने के बाद भी यह देखना पड़ता है कि वहां से उसे निकालना आर्थिक रूप से कितना व्यावहारिक होगा। ऑस्ट्रेलिया में कितना Gold Reserve मौजूद है? ऑस्ट्रेलिया दुनिया के प्रमुख सोना उत्पादक देशों में शामिल है। सरकारी संस्था Geoscience Australia के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2024 तक देश के अनुमानित Ore Reserves करीब 4,785 टन थे। वहीं, पहचाने गए कुल Gold Resources का आंकड़ा इससे काफी ज्यादा था। यहां एक बात समझना जरूरी है। Gold Resources में सोने के संभावित और पहचाने गए संसाधन शामिल होते हैं, जबकि Ore Reserves उस सोने को दर्शाते हैं जिसे मौजूदा तकनीकी और आर्थिक परिस्थितियों में निकालना व्यावहारिक माना जाता है। इसीलिए ऑस्ट्रेलिया में सोने के बड़े भंडार होने और किसी नई खोज को दुनिया का सबसे बड़ा भंडार बताने में अंतर है। किसी खास नई खोज के बारे में ऐसा दावा करने से पहले उसके आधिकारिक आंकड़ों की पुष्टि जरूरी है। भारत को कैसे मिल सकता है फायदा? भारत में सोने की मांग काफी बड़ी है और घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अगर ऑस्ट्रेलिया में आने वाले वर्षों में सोने का उत्पादन बढ़ता है, तो भारतीय आयातकों के लिए सप्लाई का एक अतिरिक्त विकल्प तैयार हो सकता है। इसके तीन संभावित फायदे हो सकते हैं: हालांकि, ऑस्ट्रेलिया में निकाला गया सोना अपने आप भारत नहीं पहुंचेगा। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि उत्पादन कितना बढ़ता है, कंपनियां किस देश को निर्यात करती हैं और भारतीय आयातकों के साथ किस तरह के व्यापारिक समझौते होते हैं। क्या भारत में सस्ता हो जाएगा सोना? सोने की नई खोज की खबर सुनकर खरीदारों के मन में सबसे पहले यही सवाल आता है कि क्या अब Gold Price कम होगा? फिलहाल ऐसा कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत केवल उत्पादन पर निर्भर नहीं करती। निवेशकों की मांग, केंद्रीय बैंकों की खरीद, डॉलर की चाल और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी भाव को प्रभावित करती हैं। भारत में इसके अलावा रुपये और डॉलर की विनिमय दर, आयात शुल्क, टैक्स और घरेलू मांग का भी असर पड़ता है। इसलिए ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज बढ़ने के बावजूद भारतीय बाजार में कीमतें तुरंत कम होंगी, इसकी गारंटी नहीं है। ₹13,000 करोड़ के निवेश की खबर कितनी सही है? ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज पर खर्च बढ़ने के आंकड़े सामने आए हैं। लेकिन ₹13,000 करोड़ के निवेश को किसी खास नई खोज या दुनिया के सबसे बड़े सोना भंडार से जोड़ने के लिए संबंधित कंपनी और परियोजना के आधिकारिक दस्तावेजों की जरूरत है। इसलिए इस रकम को किसी एक नए गोल्ड रिजर्व की खोज पर खर्च हुई राशि बताने से पहले इसकी पुष्टि करना जरूरी है। खोज पर किया गया खर्च, जमीन में मौजूद कुल सोने का मूल्य और खनन परियोजना में कुल निवेश तीन अलग-अलग बातें हैं। आगे क्या होगा? ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज पर बढ़ता खर्च वैश्विक गोल्ड इंडस्ट्री के लिए अहम है। अगर आने वाले वर्षों में नए भंडार की पहचान होती है और उनसे व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो पाता है, तो इससे अंतरराष्ट्रीय सप्लाई के विकल्प बढ़ सकते हैं। भारत के लिए भी यह एक संभावित अवसर है। लेकिन नए सप्लायर की भूमिका, आयात पर असर और सोने की कीमतों में बदलाव का पता तभी चलेगा, जब वास्तविक उत्पादन और निर्यात के आंकड़े सामने आएंगे। फिलहाल, ऑस्ट्रेलिया की गोल्ड इंडस्ट्री पर नजर रखना जरूरी है, लेकिन नई खोज के नाम पर सोना सस्ता होने की उम्मीद करना अभी जल्दबाजी होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

नवरात्रि पर रायपुर सेंट्रल जेल में सेवा की मिसाल, काली माता सेवा समिति ने 1300 बंदियों को बांटे फल

नवरात्रि के अवसर पर काली माता सेवा समिति ने रायपुर सेंट्रल जेल में करीब 1300 बंदियों को फल वितरित किए। समिति ने यह पहल उन बंदियों के लिए की, जो नवरात्रि में उपवास रखकर माता रानी की आराधना कर रहे हैं। इस आयोजन के जरिए समिति ने सेवा, करुणा और मानवीय संवेदना का संदेश दिया। समिति के अध्यक्ष दीपक भारद्वाज (पोल्ले) ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य बंदियों के प्रति संवेदनशीलता और सेवा भाव को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की गलती या अपराध से उसके सुधरने और बेहतर जीवन जीने की संभावनाएं समाप्त नहीं हो जातीं। बंदियों के सुधार और पुनर्वास पर दिया जोर दीपक भारद्वाज ने कहा कि समाज को न्याय के प्रति सम्मान बनाए रखने के साथ-साथ सुधार और पुनर्वास की भावना को भी महत्व देना चाहिए। बंदियों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने से समाज में मानवीय मूल्यों को मजबूती मिलती है। समिति का मानना है कि जेल में बंद लोगों के साथ भी सम्मानजनक और मानवीय व्यवहार होना चाहिए, ताकि उनमें सकारात्मक बदलाव की भावना विकसित हो सके। पहले भी जेल में कर चुके हैं फल वितरण काली माता सेवा समिति के अनुसार, वह पहले भी कई बार जेल में बंदियों को फल वितरित कर चुकी है। समिति का कहना है कि नवरात्रि केवल पूजा-पाठ और उपवास तक सीमित पर्व नहीं है, बल्कि यह सेवा, करुणा और सद्भावना को जीवन में अपनाने का अवसर भी है। इसी भावना के साथ समिति के सदस्यों ने उपवास रखने वाले बंदियों तक फल पहुंचाए। आगे भी जारी रहेंगे सेवा कार्य समिति ने समाज में सेवा, सद्भावना और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए ऐसे आयोजन आगे भी जारी रखने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में अशोक त्रिपाठी, गुड्डू, सुनील प्रमुख, राजू भाई तारवानी और रामकृष्ण धीवर सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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