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Hong Kong रिहाइशी कॉम्प्लेक्स में दिल दहला देने वाली आग, 44 लोगों की मौत – 279 अब भी लापता

Hong Kong रिहाइशी कॉम्प्लेक्स में दिल दहला देने वाली आग, 44 लोगों की मौत – 279 अब भी लापता

Hong Kong में एक बड़े रिहाइशी कॉम्प्लेक्स में लगी भीषण आग ने हड़कंप मचा दिया है। यह हादसा इतना बड़ा था कि 35 मंजिलों वाली 8 इमारतें आग की चपेट में आ गईं। दुख की बात है कि हादसे में 44 लोगों की मौत हो गई, जबकि 279 लोग अभी भी लापता हैं। दमकल कर्मी लगातार आग बुझाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन घटना के 20 घंटे बाद भी आग पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका है। धुआं और लपटें इतनी तेज थीं कि दूर-दूर तक इनकी रोशनी और गंध दिखाई दे रही थी। कई परिवार अपने प्रियजनों की तलाश में अस्पतालों और राहत केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि आग इतनी तेजी से फैली कि कई लोगों को बाहर निकलने तक का समय नहीं मिला। यह हादसा हॉन्गकॉन्ग की हाल की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक माना जा रहा है। राहत और बचाव टीमें लगातार काम कर रही हैं, लेकिन बढ़ती मौतों का आंकड़ा लोगों को और भी बेचैन कर रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ram Mandir

Ram Mandir में भगवा ध्वजारोहण पाकिस्तान की आलोचना और मुस्लिम समुदाय की सकारात्मक प्रतिक्रिया

अयोध्या राम मंदिर (Ram Mandir) में 25 नवंबर 2025 को इतिहास रचते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंदिर के शिखर पर Dharma Dhwaj फहराया। यह ध्वज राम मंदिर के पूर्ण निर्माण का प्रतीक माना गया। इस ऐतिहासिक समारोह के बाद भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई तरह की प्रतिक्रियाएँ सामने आईं—जहाँ पाकिस्तान ने इसे लेकर नाराज़गी जताई, वहीं अयोध्या के मुस्लिम समुदाय ने इसे शांति और सद्भाव का संदेश बताया। PM Modi का Dharma Dhwaj रोहण: राम मंदिर को मिला अंतिम रूप राम मंदिर(Ram Mandir) लंबे समय बाद अपने पूर्ण रूप में तैयार हो गया है। इसी उपलक्ष्य में प्रधानमंत्री मोदी ने मंदिर के मुख्य शिखर पर भगवा धर्म ध्वज स्थापित किया।ध्वज पर ‘ॐ’, सूर्य और पवित्र वृक्ष जैसे आध्यात्मिक चिन्ह मौजूद हैं, जो भगवान राम की उपस्थिति और मंदिर की पवित्रता का प्रतीक माने जाते हैं।ध्वजारोहण के समय मंदिर परिसर में भारी उत्साह, जयकारों और भक्ति का वातावरण देखने को मिला। Pakistan की नाराज़गी: India पर लगाया ‘Islamophobia’ का आरोप ध्वजारोहण के तुरंत बाद पाकिस्तान के कुछ TV चैनलों, पत्रकारों और राजनीतिक समूहों ने भारत पर आरोप लगाना शुरू कर दिया। उनकी प्रमुख प्रतिक्रियाएँ इस प्रकार थीं: पाकिस्तान की मीडिया ने इस घटना को बढ़ा-चढ़ाकर धार्मिक मुद्दा बना पेश किया, जिसका भारत में विशेषज्ञों ने विरोध किया। Ayodhya के मुसलमानों की प्रतिक्रिया: ‘हमारी प्राथमिकता शांति और भाईचारा’ दिलचस्प बात यह रही कि जहाँ पाकिस्तान आपत्ति जता रहा है, वहीं अयोध्या के मुस्लिम समुदाय ने बिल्कुल विपरीत प्रतिक्रिया दी।स्थानीय मुस्लिम परिवारों और समाजसेवकों ने कहा: अयोध्या के मुसलमानों ने कहा कि उन्हें किसी प्रकार की समस्या नहीं, बल्कि सभी समुदायों के बीच सौहार्द बढ़ा है। भारत में सकारात्मक माहौल, विदेशों में राजनीतिक बहस देश के भीतर इस घटना को ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, खासकर पाकिस्तान में, इसे धार्मिक राजनीति के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक कार्यक्रमों को विदेशों में अक्सर राजनीतिक चश्मे से देखा जाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Samvidhan Diwas

Samvidhan Diwas 2025 PM Modi ने कहा Rights के साथ Duties भी निभाएं, Vote जरूर करें

26 नवंबर 2025 (संविधान दिवस) के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को एक महत्वपूर्ण पत्र लिखा। इस पत्र में उन्होंने भारतीय संविधान की ताकत, उसके मूल्यों और नागरिकों की जिम्मेदारियों को याद दिलाया। पीएम मोदी ने कहा कि भारत का संविधान सिर्फ अधिकार (Rights) नहीं देता, बल्कि “कर्तव्य” (Duties) निभाने की प्रेरणा भी देता है, जो एक मजबूत लोकतंत्र की नींव है। संविधान सिर्फ अधिकार नहीं, कर्तव्य भी सिखाता है: PM Modi मोदी ने लिखा कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को समानता, गरिमा और स्वतंत्रता देता है, लेकिन साथ ही यह अपेक्षा करता है कि हर नागरिक अपने कर्तव्यों को ज़िम्मेदारी से निभाए।उन्होंने इसे “Strong Democracy की Foundation” बताया और कहा कि जब नागरिक अपने दायित्व निभाते हैं, तभी राष्ट्र और संविधान दोनों मजबूत बनते हैं। Voting is Your Duty — लोकतंत्र को मज़बूत बनाने का सबसे बड़ा तरीका प्रधानमंत्री ने मतदान को “सबसे बड़ा कर्तव्य” बताया।उन्होंने नागरिकों से अपील की कि हर चुनाव में मतदान ज़रूर करें, क्योंकि एक-एक वोट देश को दिशा देता है। उन्होंने यह सुझाव भी दिया कि स्कूल-कॉलेज अपने नए 18+ First Time Voters को सम्मानित करें, ताकि युवाओं में लोकतंत्र के प्रति जागरूकता और गर्व दोनों बढ़ें। विकसित भारत लक्ष्य के लिए कर्तव्य निभाना जरूरी PM Modi ने कहा कि आज के फैसले भारत के भविष्य को तय करेंगे।यदि नागरिक और सरकार मिलकर अपनी-अपनी जिम्मेदारियाँ निभाएँ, तो 2047 में स्वतंत्रता के 100 वर्ष और 2049 में संविधान के 100 वर्ष मनाते समय भारत एक Viksit Bharat बनकर खड़ा होगा। उन्होंने संवैधानिक मूल्यों—न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व—को हर दिन व्यवहार में अपनाने की अपील की। संविधान दिवस 2025 की खास बातें PM Modi के संदेश का सार हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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संविधान दिवस

संविधान दिवस 2025 President Murmu ने दोनों सदनों को किया संबोधित, बड़ी घोषणाएँ हुईं

26 नवंबर 2025 को पूरे देश में संविधान दिवस (Constitution Day) अत्यंत सम्मान और उत्साह के साथ मनाया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के दोनों सदनों को संबोधित किया और कई अहम घोषणाएँ कीं। इस बार समारोह की सबसे खास बात रही—भारतीय संविधान का 9 भारतीय भाषाओं में डिजिटल प्रकाशन, जिससे यह आम जनता तक और अधिक सुलभ हो जाएगा। Samvidhan Diwas 2025: संविधान को मिला नया डिजिटल रूप पुराने संसद भवन ‘संविधान सदन’ (Samvidhan Sadan) के सेंट्रल हॉल में आयोजित समारोह में संविधान को इन 9 भाषाओं में जारी किया गया: यह कदम भारत की बहुभाषी पहचान को मजबूत करता है और संविधान को अधिकतम नागरिकों तक पहुँचाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। President Murmu Speaks: ‘संविधान सिर्फ किताब नहीं, देश की आत्मा है’ अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मू ने प्रभावी संदेश दिया: संसद में बड़ी मौजूदगी: राष्ट्रीय नेतृत्व हुआ एकजुट कार्यक्रम में शामिल रहे— सबने एक स्वर में कहा कि संविधान ही वह धागा है जो भारत की विविधता को एकजुट रखता है। Citizens First: नागरिक अधिकारों और कर्तव्यों पर जोर संविधान दिवस के मौके पर यह संदेश प्रमुख रहा कि— संविधान दिवस 2025 ने एक बार फिर यह साबित किया कि भारत का संविधान न सिर्फ कानून का दस्तावेज है, बल्कि एक जीवंत मार्गदर्शक है, जो देश को आगे बढ़ने की ताकत देता है।9 भाषाओं में डिजिटल लॉन्च ने इसे नए युग की जरूरतों के अनुरूप और अधिक व्यापक बना दिया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Meerut

Meerut Murder Mystery Muskan ने जेल में दिया बच्चे को जन्म, बढ़ाई गई Hospital Security

मेरठ के चर्चित Meerut Blue Drum Murder Case में आरोपी मुस्कान रस्तोगी ने मंगलवार को एक Baby Girl को जन्म दिया। हत्या के आरोप में जेल में बंद मुस्कान की डिलीवरी मेरठ मेडिकल कॉलेज (LLRM) में कराई गई। डॉक्टरों के अनुसार, डिलीवरी नॉर्मल रही और मां-बेटी दोनों स्वस्थ हैं। अस्पताल में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए थे। रात में बढ़े दर्द के बाद अस्पताल लाया गया सोमवार रात मुस्कान को अचानक तेज लेबर पेन हुआ, जिसके बाद जेल प्रशासन ने उसे तुरंत एल.एल.आर.एम मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। डॉक्टरों की टीम ने रातभर उसकी स्थिति पर नजर रखी और मंगलवार सुबह उसने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया, जिसका वजन लगभग 2.4 किलो है। अस्पताल में उसके वार्ड के बाहर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था। क्या है पूरा Meerut Blue Drum Murder Case? यह मामला मार्च 2025 में सामने आया था, जब मुस्कान के पति सौरभ राजपूत की हत्या का खुलासा हुआ। जांच में सामने आया कि— इस पूरी साजिश में मुस्कान रस्तोगी और उसके कथित प्रेमी साहिल शुक्ला को आरोपी बनाया गया। दोनों को 18 मार्च को पुलिस ने गिरफ्तार किया। पुलिस ने इस मामले में 1000+ पन्नों की चार्जशीट दायर की है। बच्ची के पिता को लेकर सवाल बरकरार मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नवजात बच्ची के पिता को लेकर सौरभ के परिवार ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पुलिस और मेडिकल टीम को इस मामले पर स्पष्टता लानी चाहिए।अभी तक अधिकारियों की ओर से बच्ची के पितृत्व को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है। अस्पताल में हाई सिक्योरिटी मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए — आगे की प्रक्रिया क्या होगी? अब दो मुद्दे महत्वपूर्ण हैं— यह मामला हत्या, संबंधों, और शव को छिपाने की क्रूर वारदात के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में बना हुआ है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ayodhya

PM Modi Ayodhya Visit रामलला के मंदिर में पहली बार चढ़ा दिव्य धर्म ध्वज

२५ नवंबर २०२५ का दिन Ayodhya के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज हो गया। इस पवित्र अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्री राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर भगवा ध्वज (Bhagwa Flag) फहराया। विवाह पंचमी के शुभ योग पर हुआ यह आयोजन आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। PM Modi का अयोध्या दर्शन और पूजा-अर्चना PM मोदी ने सुबह पहुँचकर सबसे पहले सप्त मंदिरों में दर्शन किए। इसके बाद वे में पूजा-अर्चना के लिए पहुँचे। इसके बाद दोपहर के करीब 12 बजे उन्होंने मंदिर शिखर पर ध्वजारोहण (Flag Hoisting Ceremony) किया। हजारों भक्त इस पल के साक्षी बने, भले ही आम श्रद्धालुओं के लिए प्रवेश नियंत्रित रहा। कड़ी सुरक्षा और हाई-प्रोफाइल मेहमान इस भव्य आयोजन के लिए अयोध्या को हाई-सिक्योरिटी ज़ोन में बदला गया। मंदिर परिसर की तैयारियाँ ध्वजारोहण से पहले मंदिर परिसर को भव्य तरीके से सजाया गया। इन सब ने मंदिर परिसर को दिव्यता और शान से भर दिया। धार्मिक ही नहीं, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय भावना का भी उत्सव यह आयोजन केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और भावनात्मक एकता का प्रतीक भी बना। २५ नवंबर २०२५ को Ayodhya में हुआ Ram Mandir Flag Hoisting Ceremony देश के लिए एक ऐतिहासिक पल था। PM मोदी द्वारा भगवा ध्वज फहराना मंदिर निर्माण की पूर्णता, आस्था के उत्थान और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बना।यह सिर्फ ध्वजारोहण नहीं—एक आध्यात्मिक पुनर्जागरण, राष्ट्रीय गर्व और सदियों की भावनाओं का उत्सव था। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ayodhya

Ayodhya Ram Mandir ध्वजारोहण धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

अयोध्या, 25 नवंबर 2025 — अयोध्या (Ayodhya) में राम जन्मभूमि मंदिर पर आज एक ऐतिहासिक और भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंदिर के मुख्य शिखर पर धर्म ध्वजा (Dharma Dhwaja) फहराएंगे। इसे “ध्वजारोहण समारोह” कहा जाता है और यह अयोध्या के धार्मिक इतिहास में एक यादगार क्षण माना जा रहा है। धर्म ध्वजा का महत्व और विवरण पीएम मोदी का कार्यक्रम और पूजा-अर्चना सुरक्षा और आयोजन की तैयारियाँ अयोध्या के विकास और पर्यटन पर असर अंतिम शब्द आज का धर्म ध्वजा समारोह न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह अयोध्या को भारत और विश्व में एक धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित करेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Tenkasi

Tenkasi हादसा दो प्राइवेट बसों की टक्कर में 6 लोगों की मौत

टेन्कसी, तमिलनाडु: सोमवार को Tenkasi में एक भयंकर Bus Accident हुआ, जिसमें दो प्राइवेट बसें आमने-सामने टकरा गईं। इस हादसे में 6 लोगों की मौत हुई और करीब 30 लोग घायल हुए। हादसा इदाकल गांव के पास हुआ, जहां बसें अपने-अपने रूट पर जा रही थीं। जानकारी के अनुसार, एक बस मदुरै से सेनकोट्टई की ओर जा रही थी, जबकि दूसरी बस टेन्कसी से कोविलपट्टी जा रही थी। प्रारंभिक जांच में पता चला कि तेज रफ्तार और लापरवाह ड्राइविंग इस हादसे का मुख्य कारण हो सकता है। हादसे का विवरण: विशेषज्ञों की राय:विशेषज्ञों का कहना है कि यह हादसा तमिलनाडु की इंटरसिटी बस मार्गों पर road safety की गंभीर कमी को दर्शाता है। Driver training, bus maintenance, proper signage और speed control जैसी सावधानियां जरूरी हैं। सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया: Tenkasi Bus Accident ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि सड़क सुरक्षा पर ध्यान देना कितना जरूरी है। राज्य प्रशासन और बस ऑपरेटरों को मिलकर ऐसे हादसों को रोकने के लिए कदम उठाने होंगे हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Nitish

Nitish–Samrat गृह विभाग मिला, लेकिन असली ‘Command’ किसके पास?

बिहार की राजनीति एक बार फिर नए पावर बैलेंस के साथ सुर्खियों में है। मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने मंत्रिमंडल गठन के बाद गृह मंत्रालय का अहम विभाग भले ही बीजेपी नेता और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को सौंप दिया हो, लेकिन प्रशासनिक नियंत्रण अभी भी पूरी तरह उनके ही पास है।यानी Home Ministry BJP की, लेकिन असली Power Remote अभी भी CM Nitish के हाथ में। गृह मंत्री बने सम्राट चौधरी, पर असली कंट्रोल? एनडीए सरकार के शपथ ग्रहण के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की हुई कि क्या सम्राट चौधरी को पूरा अधिकार मिला है या सिर्फ विभाग?कागज़ों में गृह विभाग अब उनके पास है, लेकिन—✔ IAS–IPS की पोस्टिंग, ट्रांसफर✔ पुलिस प्रशासन के बड़े निर्णय✔ सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) —ये सब अभी भी मुख्यमंत्री के नियंत्रण में ही हैं। इसका मतलब साफ है कि बिहार की “Law & Order” मशीनरी पर अंतिम निर्णय अब भी नीतीश कुमार ही लेंगे। यह पावर शेयरिंग क्यों खास है? राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह फैसला भाजपा और जेडीयू के बीच पावर बैलेंस बनाए रखने की रणनीति है— एक तरह से यह power sharing with power control का मॉडल है। BJP के लिए बड़ा राजनीतिक संकेत गृह मंत्रालय जैसा बड़ा विभाग मिलना सम्राट चौधरी के लिए राजनीतिक तौर पर गेम-चेंजर साबित हो सकता है।यह माना जा रहा है कि— …तो वे बीजेपी के भविष्य के CM Face भी बन सकते हैं। हालाँकि अगर वे फेल होते हैं, तो समीकरण फिर बदल सकते हैं — बिहार की राजनीति में ये आम बात है। नीतीश कुमार का ‘silent control model’ जारी Nitish Kumar के बारे में कहा जाता है कि वे हमेशा प्रशासनिक कंट्रोल अपने पास रखते हैं — यही उनकी राजनीतिक पहचान का हिस्सा है।इस बार भी उन्होंने वही फॉर्मूला अपनाया—“दिखे कि शक्ति बंटी है, लेकिन असली शक्ति यहीं है।” हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Surya Kant

Justice Surya Kant शपथ समारोह भारत को मिला नया CJI, गांव से देश की सर्वोच्च अदालत तक का सफर

भारत के सुप्रीम कोर्ट को नया नेतृत्व मिल गया है। 24 नवंबर 2025 को जस्टिस सूर्य कांट (Justice Surya Kant) ने देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India – CJI) के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद की शपथ दिलाई। इस ऐतिहासिक पल के साथ न सिर्फ न्यायपालिका में नया अध्याय शुरू हुआ है, बल्कि देश के लाखों कानून छात्रों और युवा वकीलों के लिए एक नई प्रेरणा भी सामने आई है। नई शुरुआत: लगभग 15 महीने का कार्यकाल Surya Kant अब फरवरी 2027 तक सर्वोच्च न्यायालय का संचालन करेंगे। उनका कार्यकाल करीब 15 महीने का होगा।वे जस्टिस बी.आर. गवई के स्थान पर आए हैं, जिन्होंने अपने उत्तराधिकारी के रूप में सूर्य कांट का नाम सुझाया था। यह बदलाव संविधान की स्थापित परंपरा के अनुरूप हुआ, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के सीनियर-मोस्ट जज को CJI नियुक्त किया जाता है। गाँव से Supreme Court तक: Surya Kant की प्रेरक कहानी Justice Surya Kant का सफर सचमुच Common Indian Family की एक प्रेरणादायक कहानी जैसा है। गाँव से निकलकर एक साधारण परिवार का बच्चा देश की सर्वोच्च अदालत का प्रमुख बने — यह सपना लाखों युवाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। कानूनी करियर: Young Advocate General से CJI तक उनका करियर बताता है कि निरंतर मेहनत और ईमानदारी का फल कितना ऊंचा हो सकता है। महत्वपूर्ण फैसले और कानूनी दृष्टिकोण Justice Surya Kant अपनी संवेदनशील सोच और balanced approach के लिए जाने जाते हैं। उनके कई बड़े निर्णय सुर्खियों में रहे: उनके फैसलों में एक बात साफ दिखती है — कानून सिर्फ नियम नहीं, बल्कि समाज को न्याय देने का माध्यम है। क्यों खास है Surya Kant का CJI बनना? मानवीय संदेश: सीखना कभी न छोड़ें Justice Surya Kant ने कई बार कहा है:“कानून सिर्फ करियर नहीं, समाज की सेवा का तरीका है। सीखने और जिज्ञासु रहने से ही वकील आगे बढ़ता है।” उनकी यह सोच बताती है कि वे सिर्फ कानून के विशेषज्ञ नहीं, बल्कि एक संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण वाले नेता हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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ऑस्ट्रेलिया

Gold Mining: ऑस्ट्रेलिया में सोने की नई खोज से बदलेगी तस्वीर, भारत को मिल सकता है नया सप्लायर

भारत में सोना सिर्फ गहना नहीं, बल्कि लोगों की बचत और निवेश का भी अहम हिस्सा है। शादी का सीजन हो या दिवाली-धनतेरस, सोने की खरीदारी को लेकर बाजार में हमेशा हलचल रहती है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया से आई सोने की खोज और बढ़ते निवेश की खबर भारत के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऑस्ट्रेलिया में सोने की नई खोज के लिए कंपनियां बड़े स्तर पर खर्च कर रही हैं। इससे आने वाले समय में सोने की वैश्विक सप्लाई बढ़ने की संभावना है। भारत जैसे देश के लिए यह एक अहम घटनाक्रम है, क्योंकि अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा पूरा करने के लिए भारत को दूसरे देशों से सोना आयात करना पड़ता है। Australia में Gold Exploration पर कितना खर्च हुआ? ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज से जुड़ा निवेश जून 2026 की तिमाही में बढ़कर लगभग 565.6 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पहुंच गया। ऑस्ट्रेलियाई सांख्यिकी ब्यूरो (ABS) के आंकड़ों के अनुसार, पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें 23.6% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह खर्च जमीन के नीचे मौजूद सोने के संभावित भंडार का पता लगाने, ड्रिलिंग और खनन की संभावनाओं का आकलन करने जैसे कामों पर किया जाता है। हालांकि, खोज पर खर्च बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि हर जगह सोने का नया भंडार मिल गया है। किसी जगह सोना मिलने के बाद भी यह देखना पड़ता है कि वहां से उसे निकालना आर्थिक रूप से कितना व्यावहारिक होगा। ऑस्ट्रेलिया में कितना Gold Reserve मौजूद है? ऑस्ट्रेलिया दुनिया के प्रमुख सोना उत्पादक देशों में शामिल है। सरकारी संस्था Geoscience Australia के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2024 तक देश के अनुमानित Ore Reserves करीब 4,785 टन थे। वहीं, पहचाने गए कुल Gold Resources का आंकड़ा इससे काफी ज्यादा था। यहां एक बात समझना जरूरी है। Gold Resources में सोने के संभावित और पहचाने गए संसाधन शामिल होते हैं, जबकि Ore Reserves उस सोने को दर्शाते हैं जिसे मौजूदा तकनीकी और आर्थिक परिस्थितियों में निकालना व्यावहारिक माना जाता है। इसीलिए ऑस्ट्रेलिया में सोने के बड़े भंडार होने और किसी नई खोज को दुनिया का सबसे बड़ा भंडार बताने में अंतर है। किसी खास नई खोज के बारे में ऐसा दावा करने से पहले उसके आधिकारिक आंकड़ों की पुष्टि जरूरी है। भारत को कैसे मिल सकता है फायदा? भारत में सोने की मांग काफी बड़ी है और घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अगर ऑस्ट्रेलिया में आने वाले वर्षों में सोने का उत्पादन बढ़ता है, तो भारतीय आयातकों के लिए सप्लाई का एक अतिरिक्त विकल्प तैयार हो सकता है। इसके तीन संभावित फायदे हो सकते हैं: हालांकि, ऑस्ट्रेलिया में निकाला गया सोना अपने आप भारत नहीं पहुंचेगा। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि उत्पादन कितना बढ़ता है, कंपनियां किस देश को निर्यात करती हैं और भारतीय आयातकों के साथ किस तरह के व्यापारिक समझौते होते हैं। क्या भारत में सस्ता हो जाएगा सोना? सोने की नई खोज की खबर सुनकर खरीदारों के मन में सबसे पहले यही सवाल आता है कि क्या अब Gold Price कम होगा? फिलहाल ऐसा कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत केवल उत्पादन पर निर्भर नहीं करती। निवेशकों की मांग, केंद्रीय बैंकों की खरीद, डॉलर की चाल और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी भाव को प्रभावित करती हैं। भारत में इसके अलावा रुपये और डॉलर की विनिमय दर, आयात शुल्क, टैक्स और घरेलू मांग का भी असर पड़ता है। इसलिए ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज बढ़ने के बावजूद भारतीय बाजार में कीमतें तुरंत कम होंगी, इसकी गारंटी नहीं है। ₹13,000 करोड़ के निवेश की खबर कितनी सही है? ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज पर खर्च बढ़ने के आंकड़े सामने आए हैं। लेकिन ₹13,000 करोड़ के निवेश को किसी खास नई खोज या दुनिया के सबसे बड़े सोना भंडार से जोड़ने के लिए संबंधित कंपनी और परियोजना के आधिकारिक दस्तावेजों की जरूरत है। इसलिए इस रकम को किसी एक नए गोल्ड रिजर्व की खोज पर खर्च हुई राशि बताने से पहले इसकी पुष्टि करना जरूरी है। खोज पर किया गया खर्च, जमीन में मौजूद कुल सोने का मूल्य और खनन परियोजना में कुल निवेश तीन अलग-अलग बातें हैं। आगे क्या होगा? ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज पर बढ़ता खर्च वैश्विक गोल्ड इंडस्ट्री के लिए अहम है। अगर आने वाले वर्षों में नए भंडार की पहचान होती है और उनसे व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो पाता है, तो इससे अंतरराष्ट्रीय सप्लाई के विकल्प बढ़ सकते हैं। भारत के लिए भी यह एक संभावित अवसर है। लेकिन नए सप्लायर की भूमिका, आयात पर असर और सोने की कीमतों में बदलाव का पता तभी चलेगा, जब वास्तविक उत्पादन और निर्यात के आंकड़े सामने आएंगे। फिलहाल, ऑस्ट्रेलिया की गोल्ड इंडस्ट्री पर नजर रखना जरूरी है, लेकिन नई खोज के नाम पर सोना सस्ता होने की उम्मीद करना अभी जल्दबाजी होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

नवरात्रि पर रायपुर सेंट्रल जेल में सेवा की मिसाल, काली माता सेवा समिति ने 1300 बंदियों को बांटे फल

नवरात्रि के अवसर पर काली माता सेवा समिति ने रायपुर सेंट्रल जेल में करीब 1300 बंदियों को फल वितरित किए। समिति ने यह पहल उन बंदियों के लिए की, जो नवरात्रि में उपवास रखकर माता रानी की आराधना कर रहे हैं। इस आयोजन के जरिए समिति ने सेवा, करुणा और मानवीय संवेदना का संदेश दिया। समिति के अध्यक्ष दीपक भारद्वाज (पोल्ले) ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य बंदियों के प्रति संवेदनशीलता और सेवा भाव को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की गलती या अपराध से उसके सुधरने और बेहतर जीवन जीने की संभावनाएं समाप्त नहीं हो जातीं। बंदियों के सुधार और पुनर्वास पर दिया जोर दीपक भारद्वाज ने कहा कि समाज को न्याय के प्रति सम्मान बनाए रखने के साथ-साथ सुधार और पुनर्वास की भावना को भी महत्व देना चाहिए। बंदियों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने से समाज में मानवीय मूल्यों को मजबूती मिलती है। समिति का मानना है कि जेल में बंद लोगों के साथ भी सम्मानजनक और मानवीय व्यवहार होना चाहिए, ताकि उनमें सकारात्मक बदलाव की भावना विकसित हो सके। पहले भी जेल में कर चुके हैं फल वितरण काली माता सेवा समिति के अनुसार, वह पहले भी कई बार जेल में बंदियों को फल वितरित कर चुकी है। समिति का कहना है कि नवरात्रि केवल पूजा-पाठ और उपवास तक सीमित पर्व नहीं है, बल्कि यह सेवा, करुणा और सद्भावना को जीवन में अपनाने का अवसर भी है। इसी भावना के साथ समिति के सदस्यों ने उपवास रखने वाले बंदियों तक फल पहुंचाए। आगे भी जारी रहेंगे सेवा कार्य समिति ने समाज में सेवा, सद्भावना और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए ऐसे आयोजन आगे भी जारी रखने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में अशोक त्रिपाठी, गुड्डू, सुनील प्रमुख, राजू भाई तारवानी और रामकृष्ण धीवर सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
वैभव सूर्यवंशी

IND vs WI T20: वैभव सूर्यवंशी का भरोसा कायम, 4 दिन में दूसरी पोस्ट; अब भी मौके का इंतजार

भारत और वेस्टइंडीज (IND vs WI) के बीच T-20 सीरीज के निर्णायक मुकाबले से पहले युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी एक बार फिर चर्चा में हैं। सीरीज में अब तक खेलने का मौका नहीं मिलने के बावजूद वैभव ने उम्मीद नहीं छोड़ी है। चार दिन के भीतर उनकी दूसरी सोशल मीडिया पोस्ट सामने आई है, जिसमें भरोसे का संदेश देखने को मिला। वैभव को इस सीरीज में अब तक मैदान पर उतरने का मौका नहीं मिला है। ऐसे में क्रिकेट फैंस के मन में एक ही सवाल है—क्या पांचवें टी-20 में उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा? Vaibhav Sooryavanshi की दूसरी पोस्ट ने खींचा ध्यान वैभव सूर्यवंशी की सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर फैंस के बीच चर्चा हो रही है। चार दिन में दूसरी पोस्ट आने के बाद उनके संदेश पर लोगों की नजरें टिकी हैं। हालांकि, पोस्ट को टीम में चयन या किसी खास फैसले से जोड़कर देखना सही नहीं होगा, क्योंकि प्लेइंग-11 में किसे मौका मिलेगा, इसका फैसला टीम मैनेजमेंट करता है। कम उम्र में अपनी बल्लेबाजी से पहचान बनाने वाले वैभव के लिए टीम के साथ रहना और मौके का इंतजार करना भी अनुभव का हिस्सा है। अब देखना होगा कि उन्हें इस सीरीज में खेलने का मौका मिलता है या नहीं। IND vs WI 5th T20: निर्णायक मुकाबले पर नजर भारत और वेस्टइंडीज की टी-20 सीरीज का पांचवां मुकाबला दोनों टीमों के लिए अहम है। सीरीज के आखिरी मैच में जीत हासिल करने वाली टीम खिताब अपने नाम करेगी। ऐसे में भारतीय टीम की प्लेइंग-11 को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। फैंस यह जानना चाहते हैं कि क्या टीम मैनेजमेंट इस मुकाबले में युवा खिलाड़ियों को मौका देगा। वैभव सूर्यवंशी का नाम भी इसी चर्चा में शामिल है। हालांकि, उनके खेलने को लेकर आधिकारिक पुष्टि के बिना किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। क्या वैभव सूर्यवंशी को मिलेगा डेब्यू का मौका? वैभव को लेकर उत्सुकता की एक बड़ी वजह उनकी कम उम्र और क्रिकेट में तेजी से बनी पहचान है। फैंस उन्हें भारतीय टीम की जर्सी में खेलते देखना चाहते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौका मिलना टीम की जरूरत और चयन रणनीति पर निर्भर करता है। फिलहाल वैभव के लिए इंतजार जारी है। पांचवें टी-20 में उनका नाम प्लेइंग-11 में शामिल होता है या नहीं, इसका पता टीम की आधिकारिक घोषणा के बाद ही चलेगा। क्रिकेट में हर खिलाड़ी को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। वैभव के समर्थकों को उम्मीद है कि उन्हें जल्द ही मैदान पर अपनी काबिलियत दिखाने का अवसर मिलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
लालकृष्ण आडवाणी

LK Advani Hospitalised ICU में भर्ती लालकृष्ण आडवाणी की सेहत कैसी? जानें ताजा अपडेट

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की सेहत को लेकर 17 अक्टूबर को ताजा जानकारी सामने आई है। 98 वर्षीय आडवाणी को सीने में संक्रमण (Chest Infection) की शिकायत के बाद दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है और डॉक्टरों की टीम उनकी निगरानी कर रही है। परिवार और समर्थकों के लिए यह खबर चिंता बढ़ाने वाली जरूर है, लेकिन फिलहाल राहत की बात यह है कि अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक उनकी स्थिति स्थिर है। डॉक्टर उनकी सेहत से जुड़ी जरूरी जांच कर रहे हैं और इलाज जारी है। LK Advani Health Update: अस्पताल में क्या चल रहा है इलाज? लालकृष्ण आडवाणी को शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 की शाम करीब 7:30 बजे अस्पताल लाया गया था। उन्हें सीने में संक्रमण की शिकायत के बाद पल्मोनरी विभाग में भर्ती किया गया। यहां डॉक्टरों की एक टीम उनकी सेहत पर नजर रख रही है और जरूरी मेडिकल जांच की जा रही है। 17 अक्टूबर तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनकी हालत स्थिर है। हालांकि, उनकी सेहत में आगे कितना सुधार हुआ है और अस्पताल से छुट्टी कब मिलेगी, इस बारे में अभी कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। पहले भी अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं लालकृष्ण आडवाणी लालकृष्ण आडवाणी को इससे पहले मई 2026 में भी उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई थी। दिसंबर 2024 में भी उन्हें अपोलो अस्पताल की ICU में रखा गया था। उस समय डॉक्टरों ने उनकी मेडिकल जांच और इलाज किया था। जून और जुलाई 2024 में भी उन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बढ़ती उम्र को देखते हुए उनकी सेहत पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मौजूदा समय में डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार जारी है। PM Modi ने हाल ही में की थी लालकृष्ण आडवाणी से मुलाकात लालकृष्ण आडवाणी के अस्पताल में भर्ती होने से कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2026 को उनके दिल्ली स्थित आवास पर मुलाकात की थी। इस दौरान प्रधानमंत्री ने उनसे आशीर्वाद लिया और सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान की सराहना की थी। आडवाणी लंबे समय तक बीजेपी के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं। पार्टी को राष्ट्रीय राजनीति में स्थापित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यही वजह है कि उनकी सेहत से जुड़ी खबर पर राजनीतिक जगत और उनके समर्थकों की नजर बनी हुई है। राम रथ यात्रा से उपप्रधानमंत्री तक का सफर लालकृष्ण आडवाणी का राजनीतिक सफर कई दशकों तक फैला रहा है। वह भारतीय जनता पार्टी के तीन बार राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे और पार्टी के विस्तार में अहम भूमिका निभाई। साल 1990 में निकाली गई उनकी राम रथ यात्रा ने राष्ट्रीय राजनीति में व्यापक चर्चा पैदा की थी। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद 2002 से 2004 तक वह भारत के उपप्रधानमंत्री रहे। देश की राजनीति में उनके लंबे योगदान को देखते हुए वर्ष 2024 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। LK Advani अब अगले हेल्थ अपडेट का इंतजार लालकृष्ण आडवाणी फिलहाल दिल्ली के अपोलो अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में हैं। 17 अक्टूबर तक सामने आई जानकारी के मुताबिक, उनकी हालत स्थिर है और सीने में संक्रमण के लिए इलाज चल रहा है। अब सभी की नजर अस्पताल की ओर से जारी होने वाले अगले हेल्थ अपडेट पर है। उनकी सेहत में सुधार, इलाज की स्थिति और डिस्चार्ज को लेकर नई जानकारी मिलने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल सबसे अहम बात यही है कि लालकृष्ण आडवाणी की हालत स्थिर बताई गई है और उनका इलाज जारी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Weather

October Weather Update पहाड़ों में बर्फबारी से ठंड, राजस्थान में गिरा तापमान; यूपी में Flood Alert

अक्टूबर का महीना अभी आधा ही बीता है, लेकिन मौसम (Weather) ने कई राज्यों में अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी से ठंड बढ़ रही है। राजस्थान में मौसम के बदलाव के बीच तापमान में गिरावट की खबर है, जबकि उत्तर प्रदेश में बाढ़ से प्रभावित परिवारों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। कहीं लोग ठंड की तैयारी में जुटे हैं, तो कहीं परिवार सुरक्षित ठिकाने और जरूरी सुविधाओं के इंतजार में हैं। 17 अक्टूबर 2026 के Weather Update में पहाड़ी राज्यों से लेकर मैदानी इलाकों तक मौसम की अलग-अलग तस्वीर सामने आ रही है। बारिश, बर्फबारी और तापमान में उतार-चढ़ाव के बीच लोगों की नजर अब मौसम विभाग के अगले पूर्वानुमान पर है। उत्तराखंड और हिमाचल में Snowfall, बढ़ने लगी ठंड उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी और बारिश के कारण मौसम ठंडा होने लगा है। हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति, कुल्लू और किन्नौर जैसे क्षेत्रों में बर्फबारी का असर देखने को मिल रहा है। लाहौल-स्पीति के केलांग में बर्फबारी दर्ज की गई और न्यूनतम तापमान शून्य से नीचे पहुंच गया। उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर और पिथौरागढ़ के कुछ हिस्सों में बारिश की संभावना जताई गई है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी होने से ठंड और बढ़ सकती है। पहाड़ों में घूमने का प्लान बना रहे लोगों को खास सावधानी बरतने की जरूरत है। बारिश और बर्फबारी के कारण कुछ सड़कों पर आवाजाही मुश्किल हो सकती है। ऐसे में यात्रा शुरू करने से पहले स्थानीय मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी लेना बेहतर रहेगा। Rajasthan Weather: तापमान में गिरावट से बदला मौसम राजस्थान में भी मौसम का मिजाज बदलता नजर आ रहा है। कुछ इलाकों में बारिश और तेज हवाओं के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। मौसम में इस बदलाव से लोगों को गर्मी से राहत मिल सकती है, हालांकि राज्य के सभी जिलों में एक जैसी स्थिति नहीं है। जयपुर, अजमेर, भरतपुर और कोटा संभाग के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना जताई गई है। दूसरी ओर, पश्चिमी राजस्थान के कुछ इलाकों में गर्मी का असर बना रह सकता है। राजस्थान में तापमान में 6 डिग्री सेल्सियस की गिरावट का दावा सामने आया है, लेकिन यह गिरावट किन शहरों में और किस अवधि के दौरान दर्ज की गई, इसकी पुष्टि जरूरी है। इसलिए इसे पूरे राज्य के तापमान में गिरावट मानना सही नहीं होगा। UP Flood Update: बाढ़ से प्रभावित परिवारों की बढ़ीं मुश्किलें उत्तर प्रदेश में बाढ़ ने कई इलाकों में जनजीवन को प्रभावित किया है। बाढ़ के कारण लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में परेशानी हुई। प्रभावित परिवारों के लिए राहत, सुरक्षित आवास और जरूरी सुविधाएं बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। लखनऊ में गोमती नदी के जलस्तर और निचले इलाकों में पानी भरने की स्थिति को लेकर भी चिंता बनी रही है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को जलभराव, घरों की सफाई और सामान्य जीवन बहाल करने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। उत्तर प्रदेश में करीब 3 लाख लोगों के बाढ़ से प्रभावित होने का आंकड़ा चर्चा में है। हालांकि, लखनऊ में अकेले 3 लाख लोगों के प्रभावित होने की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए प्रभावित लोगों की वास्तविक संख्या और मौजूदा स्थिति को लेकर आधिकारिक आंकड़ों पर भरोसा करना जरूरी है। Delhi-NCR समेत मैदानी इलाकों में भी मौसम का असर उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में भी मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। बारिश और हवाओं के कारण कुछ स्थानों पर तापमान में उतार-चढ़ाव हो सकता है। सुबह और शाम के समय मौसम अपेक्षाकृत ठंडा महसूस होने लगा है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, अलग-अलग राज्यों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। हालांकि, हर शहर में मौसम की स्थिति एक जैसी नहीं रहेगी। इसलिए अपने क्षेत्र का स्थानीय पूर्वानुमान देखना ज्यादा उपयोगी होगा। दक्षिण भारत में बारिश की संभावना देश के दक्षिणी हिस्सों में भी कुछ स्थानों पर बारिश की गतिविधियां जारी रह सकती हैं। केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के कुछ इलाकों में बारिश और गरज-चमक की संभावना जताई गई है। बारिश के दौरान निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान देना जरूरी है। Weather Alert: बदलते मौसम में इन बातों का रखें ध्यान मौसम में तेजी से हो रहे बदलाव को देखते हुए लोगों को कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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