अयोध्या राम मंदिर (Ram Mandir) में 25 नवंबर 2025 को इतिहास रचते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंदिर के शिखर पर Dharma Dhwaj फहराया। यह ध्वज राम मंदिर के पूर्ण निर्माण का प्रतीक माना गया। इस ऐतिहासिक समारोह के बाद भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई तरह की प्रतिक्रियाएँ सामने आईं—जहाँ पाकिस्तान ने इसे लेकर नाराज़गी जताई, वहीं अयोध्या के मुस्लिम समुदाय ने इसे शांति और सद्भाव का संदेश बताया।
PM Modi का Dharma Dhwaj रोहण: राम मंदिर को मिला अंतिम रूप
राम मंदिर(Ram Mandir) लंबे समय बाद अपने पूर्ण रूप में तैयार हो गया है। इसी उपलक्ष्य में प्रधानमंत्री मोदी ने मंदिर के मुख्य शिखर पर भगवा धर्म ध्वज स्थापित किया।
ध्वज पर ‘ॐ’, सूर्य और पवित्र वृक्ष जैसे आध्यात्मिक चिन्ह मौजूद हैं, जो भगवान राम की उपस्थिति और मंदिर की पवित्रता का प्रतीक माने जाते हैं।
ध्वजारोहण के समय मंदिर परिसर में भारी उत्साह, जयकारों और भक्ति का वातावरण देखने को मिला।
Pakistan की नाराज़गी: India पर लगाया ‘Islamophobia’ का आरोप
ध्वजारोहण के तुरंत बाद पाकिस्तान के कुछ TV चैनलों, पत्रकारों और राजनीतिक समूहों ने भारत पर आरोप लगाना शुरू कर दिया। उनकी प्रमुख प्रतिक्रियाएँ इस प्रकार थीं:
- यह कदम “Islamophobia को बढ़ावा” देता है
- भारत मुस्लिम समुदाय को “उकसाने” की कोशिश कर रहा है
- मोदी सरकार धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ माहौल बना रही है
पाकिस्तान की मीडिया ने इस घटना को बढ़ा-चढ़ाकर धार्मिक मुद्दा बना पेश किया, जिसका भारत में विशेषज्ञों ने विरोध किया।
Ayodhya के मुसलमानों की प्रतिक्रिया: ‘हमारी प्राथमिकता शांति और भाईचारा’
दिलचस्प बात यह रही कि जहाँ पाकिस्तान आपत्ति जता रहा है, वहीं अयोध्या के मुस्लिम समुदाय ने बिल्कुल विपरीत प्रतिक्रिया दी।
स्थानीय मुस्लिम परिवारों और समाजसेवकों ने कहा:
- मंदिर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत बना है
- शहर में शांति, एकता और विकास सबसे महत्वपूर्ण है
- राम मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं से स्थानीय रोजगार बढ़ रहा है
- मंदिर उद्घाटन और कार्यक्रमों में हमने हमेशा प्रशासन को सहयोग दिया है
अयोध्या के मुसलमानों ने कहा कि उन्हें किसी प्रकार की समस्या नहीं, बल्कि सभी समुदायों के बीच सौहार्द बढ़ा है।
भारत में सकारात्मक माहौल, विदेशों में राजनीतिक बहस
देश के भीतर इस घटना को ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, खासकर पाकिस्तान में, इसे धार्मिक राजनीति के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक कार्यक्रमों को विदेशों में अक्सर राजनीतिक चश्मे से देखा जाता है।
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