आपका चैनल --
ताज़ा खबर
BREAKINGदेश-हरपलमेरठ हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, पति सौरभ की हत्या के मामले में कोर्ट का फैसला◆BREAKINGमध्य प्रदेशइंदौर में प्लॉट बेचने के नाम पर 7.80 लाख की ठगी का आरोप, ब्रोकर समेत दो पर FIR◆BREAKINGदेश-हरपलSIR के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों से मिले राहुल गांधी, दिल्ली पुलिस पर मारपीट के आरोप◆BREAKINGस्पोर्ट्सबांग्लादेश टेस्ट सीरीज से बाहर हुए शाई होप और अल्जारी जोसेफ, केविन विकहम को पहली बार मिला मौका◆BREAKINGबिज़नेसIMF ने बढ़ाया भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान, 2026 और 2027 में 7% विकास दर रहने की उम्मीद◆BREAKINGदेश-हरपलभीलवाड़ा में सरकारी शिक्षक ने फंदा लगाकर दी जान, किराए के कमरे में मिला शव◆BREAKINGछत्तीसगढ़कैंसर की दवाओं की कीमतों में बड़ा अंतर: ₹538 का इंजेक्शन बाजार में ₹1,500 तक, एक ही दवा की MRP में 16 गुना तक फर्क◆BREAKINGछत्तीसगढ़बिलासपुर एयरपोर्ट को 4C श्रेणी में अपग्रेड करने पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से 3 सप्ताह में मांगा जवाब◆BREAKINGदेश-हरपलमेरठ हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, पति सौरभ की हत्या के मामले में कोर्ट का फैसला◆BREAKINGमध्य प्रदेशइंदौर में प्लॉट बेचने के नाम पर 7.80 लाख की ठगी का आरोप, ब्रोकर समेत दो पर FIR◆BREAKINGदेश-हरपलSIR के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों से मिले राहुल गांधी, दिल्ली पुलिस पर मारपीट के आरोप◆BREAKINGस्पोर्ट्सबांग्लादेश टेस्ट सीरीज से बाहर हुए शाई होप और अल्जारी जोसेफ, केविन विकहम को पहली बार मिला मौका◆BREAKINGबिज़नेसIMF ने बढ़ाया भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान, 2026 और 2027 में 7% विकास दर रहने की उम्मीद◆BREAKINGदेश-हरपलभीलवाड़ा में सरकारी शिक्षक ने फंदा लगाकर दी जान, किराए के कमरे में मिला शव◆BREAKINGछत्तीसगढ़कैंसर की दवाओं की कीमतों में बड़ा अंतर: ₹538 का इंजेक्शन बाजार में ₹1,500 तक, एक ही दवा की MRP में 16 गुना तक फर्क◆BREAKINGछत्तीसगढ़बिलासपुर एयरपोर्ट को 4C श्रेणी में अपग्रेड करने पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से 3 सप्ताह में मांगा जवाब◆

NE

News Elementor

What's Hot

Banner

Latest Posts

परिसीमन Bill

Parliament Special Session: परिसीमन Bill पर सरकार का बड़ा प्लान, जल्द हो सकता है फैसला

देश की राजनीति में एक बार फिर Delimitation (परिसीमन) का मुद्दा चर्चा में है। केंद्र सरकार परिसीमन Bill को आगे बढ़ाने के लिए संसद का Special Session बुलाने के विकल्प पर विचार कर सकती है। अगर सरकार इस दिशा में आगे बढ़ती है, तो संसद के साथ-साथ राज्यों की राजनीति पर भी इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है। परिसीमन का मामला सिर्फ लोकसभा सीटों की संख्या बदलने तक सीमित नहीं है। इसके जरिए चुनावी क्षेत्रों की सीमाएं तय होती हैं और राज्यों को मिलने वाले राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर भी इसका असर पड़ सकता है। यही कारण है कि इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष के साथ विपक्षी दलों और राज्यों की भी नजर बनी हुई है। Special Session क्यों बुलाने की चर्चा? परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव को संसद में लाने के लिए सरकार विशेष सत्र का रास्ता अपना सकती है। हालांकि, अभी तक विशेष सत्र की तारीख या बिल के अंतिम प्रारूप को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। सरकार अगर विशेष सत्र बुलाती है, तो इस दौरान परिसीमन से जुड़े संवैधानिक और कानूनी पहलुओं पर चर्चा हो सकती है। साथ ही राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाने की कोशिश भी की जा सकती है। आखिर Delimitation क्या होता है? सरल भाषा में समझें तो Delimitation यानी परिसीमन का मतलब लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं और सीटों का पुनर्निर्धारण है। इसका उद्देश्य जनसंख्या में हुए बदलाव के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन करना होता है। देश में आखिरी बड़े परिसीमन की प्रक्रिया 1970 के दशक में हुई थी। इसके बाद लोकसभा सीटों के राज्यों के बीच आवंटन को लेकर एक निश्चित व्यवस्था लागू रही। अब 2026 के बाद होने वाली प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। किन राज्यों पर पड़ सकता है असर? परिसीमन की चर्चा में सबसे बड़ा सवाल राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का है। जिन राज्यों में पिछले दशकों में जनसंख्या तेजी से बढ़ी है, वहां लोकसभा सीटों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जाती रही है। दूसरी ओर, दक्षिण भारत के कई राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया है। इन राज्यों में यह चिंता रही है कि अगर सिर्फ मौजूदा जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण किया गया, तो उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि परिसीमन को लेकर उत्तर और दक्षिण भारत के बीच प्रतिनिधित्व का संतुलन एक अहम राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। विपक्ष के सामने भी बड़ा मुद्दा अगर Delimitation Bill संसद में पेश होता है, तो विपक्ष इस पर सरकार से कई सवाल पूछ सकता है। राज्यों के प्रतिनिधित्व, जनसंख्या नियंत्रण और संघीय ढांचे से जुड़े मुद्दे बहस के केंद्र में रह सकते हैं। विपक्षी दलों की कोशिश होगी कि परिसीमन की प्रक्रिया में राज्यों के हितों को नजरअंदाज न किया जाए। वहीं सरकार की ओर से जनसंख्या के बदलते आंकड़ों और समान प्रतिनिधित्व की जरूरत को आधार बनाया जा सकता है। क्या बदल सकती है लोकसभा की तस्वीर? परिसीमन होने की स्थिति में लोकसभा के निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं में बदलाव के साथ सीटों की संख्या में भी बदलाव संभव है। इसका सीधा असर आने वाले लोकसभा चुनावों के राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है। हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि किस राज्य को कितनी सीटें मिलेंगी। इसके लिए परिसीमन आयोग की प्रक्रिया, जनगणना के आंकड़े और सरकार की ओर से तय किए जाने वाले कानूनी प्रावधान महत्वपूर्ण होंगे। सरकार के अगले कदम पर नजर फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार परिसीमन को लेकर कब और किस रूप में कदम उठाती है। अगर संसद का Special Session बुलाया जाता है और Bill पेश होता है, तो यह मौजूदा राजनीतिक माहौल में एक बड़ा घटनाक्रम होगा। परिसीमन का असर लंबे समय तक देश की चुनावी राजनीति पर रह सकता है। इसलिए आने वाले दिनों में सरकार की घोषणा के साथ-साथ विपक्ष और राज्यों की प्रतिक्रिया भी काफी महत्वपूर्ण होगी।
Read more
CJP

Maharashtra में CJP की बड़ी बैठक, दीपक ने साफ किया- नहीं बनाएंगे Political Party

Maharashtra में CJP की दो दिवसीय बैठक शुरू हो गई है। बैठक के बीच दीपक ने संगठन की आगे की दिशा को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि CJP कोई Political Party नहीं बनाएगा, बल्कि Pressure Group की तरह काम करते हुए जनता से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाएगा। महाराष्ट्र में CJP की दो दिन की बैठक शुरू होने के साथ ही संगठन की आगे की रणनीति पर चर्चा तेज हो गई है। बैठक में देश के मौजूदा हालात, जनता से जुड़े मुद्दों और संगठन की भूमिका को लेकर विचार-विमर्श किया जा रहा है। इसी दौरान दीपक ने स्पष्ट कर दिया कि CJP का फिलहाल चुनावी राजनीति में उतरने का कोई इरादा नहीं है। दीपक ने कहा कि संगठन को Political Party बनाने के बजाय Pressure Group के तौर पर काम किया जाएगा। इसका मकसद सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि जनता के मुद्दों को सामने लाना और जरूरत पड़ने पर सरकार तथा राजनीतिक दलों पर लोकतांत्रिक तरीके से दबाव बनाना होगा। ‘देश को एक बड़े जन-आंदोलन की जरूरत’ दीपक ने देश में जन-आंदोलन की जरूरत पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक सिर्फ चुनाव लड़ने या सरकार बदलने से हर समस्या का समाधान नहीं हो सकता। समाज के लोगों को अपने अधिकारों और मुद्दों को लेकर जागरूक होना होगा। उन्होंने कहा कि जब आम लोग किसी मुद्दे पर एकजुट होकर अपनी आवाज उठाते हैं, तो व्यवस्था पर उसका असर पड़ता है। CJP इसी सोच के साथ जनता के बीच काम करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है। Maharashtra Meeting में किन मुद्दों पर मंथन? दो दिवसीय बैठक में संगठन के भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हो रही है। इसमें जनभागीदारी बढ़ाने, संगठन को मजबूत करने और अलग-अलग मुद्दों पर अभियान चलाने जैसे विषयों पर विचार किया जा रहा है। बैठक को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि आने वाले समय में CJP की गतिविधियों का स्वरूप इसी रणनीति के आधार पर तय हो सकता है। संगठन का जोर सीधे चुनावी मैदान में उतरने के बजाय सामाजिक और जनहित के मुद्दों पर सक्रिय रहने का है। Political Party से अलग क्यों रहेगा CJP? दीपक के बयान से साफ है कि CJP अपनी पहचान एक राजनीतिक दल के रूप में नहीं बनाना चाहता। संगठन का दावा है कि वह किसी एक पार्टी की राजनीति तक सीमित रहने के बजाय जनता के सवालों को प्राथमिकता देगा। Pressure Group के रूप में काम करते हुए CJP सरकार की नीतियों और फैसलों से जुड़े जनहित के मुद्दों को उठाने की कोशिश करेगा। इसके लिए लोगों के बीच जागरूकता अभियान और सामूहिक भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आगे क्या करेगा CJP? महाराष्ट्र में चल रही बैठक के बाद CJP की आगामी रणनीति को लेकर तस्वीर और साफ हो सकती है। संगठन किन मुद्दों को प्राथमिकता देगा और किस तरह के जन-अभियान शुरू करेगा, इस पर आने वाले दिनों में नजर रहेगी। फिलहाल दीपक के बयान ने एक बात स्पष्ट कर दी है—CJP चुनावी पार्टी बनने के बजाय Pressure Group के रूप में जनता के बीच अपनी भूमिका मजबूत करना चाहता है। अब असली चुनौती इस सोच को जमीन पर उतारने और लोगों को बड़े स्तर पर इससे जोड़ने की होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
Pradeep Rawat

Pradeep Rawat Funeral: ‘गजनी’ के विलेन को आज दी जाएगी अंतिम विदाई, 2 बजे होगा अंतिम संस्कार

फिल्म इंडस्ट्री से एक दुखद खबर सामने आई है। ‘लगान’ और ‘गजनी’ जैसी फिल्मों में अपनी दमदार एक्टिंग से पहचान बनाने वाले अभिनेता प्रदीप रावत (Pradeep Rawat) नहीं रहे। 74 साल की उम्र में मंगलवार शाम उनका निधन हो गया। वह लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर से बॉलीवुड के साथ-साथ साउथ फिल्म इंडस्ट्री में भी शोक का माहौल है। परिवार और करीबी लोगों के लिए यह बेहद भावुक पल है। प्रदीप रावत को आज अंतिम विदाई दी जाएगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बुधवार दोपहर 2 बजे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। 2 बजे होगी Pradeep Rawat की अंतिम विदाई प्रदीप रावत ने मंगलवार शाम करीब 6 से 6:30 बजे के बीच अंतिम सांस ली। उनके मैनेजर के मुताबिक, अभिनेता पहले भी कैंसर से जंग लड़ चुके थे। कुछ समय पहले बीमारी दोबारा सामने आई, जिसके बाद उनका इलाज चल रहा था। बीमारी के बावजूद उन्होंने अपने करियर में लंबे समय तक काम किया और दर्शकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाए रखी। अब उनके निधन के बाद परिवार, दोस्तों और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग उन्हें याद कर रहे हैं। ‘महाभारत’ के अश्वत्थामा से घर-घर में पहचान प्रदीप रावत का एक्टिंग करियर फिल्मों तक सीमित नहीं था। टीवी के मशहूर धारावाहिक ‘महाभारत’ में अश्वत्थामा की भूमिका ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई थी। इसके बाद उन्होंने बड़े पर्दे का रुख किया और धीरे-धीरे अपनी मजबूत स्क्रीन प्रेजेंस के लिए जाने जाने लगे। गंभीर और नकारात्मक किरदारों में उनकी पकड़ खास तौर पर मजबूत मानी जाती थी। ‘लगान’ के देवा सिंह सोढ़ी को आज भी याद करते हैं दर्शक आमिर खान की चर्चित फिल्म ‘लगान’ प्रदीप रावत के करियर की यादगार फिल्मों में शामिल रही। फिल्म में उन्होंने देवा सिंह सोढ़ी का किरदार निभाया था। फिल्म की कहानी और कलाकारों की टीम में उनका किरदार भले ही मुख्य भूमिका में नहीं था, लेकिन उनकी मौजूदगी ने दर्शकों का ध्यान खींचा। ‘लगान’ की लोकप्रियता के साथ प्रदीप रावत भी बड़ी संख्या में दर्शकों के बीच पहचाने जाने लगे। ‘गजनी’ में विलेन बनकर छोड़ी अलग छाप प्रदीप रावत को सबसे ज्यादा चर्चा ‘गजनी’ के किरदार को लेकर मिली। आमिर खान स्टारर हिंदी फिल्म में उन्होंने विलेन की भूमिका निभाई थी। उनका अंदाज, आवाज और स्क्रीन पर दिखाई देने वाला रौबदार व्यक्तित्व इस किरदार की खासियत बना। यही वजह है कि आज भी जब ‘गजनी’ के यादगार विलेन की बात होती है, तो प्रदीप रावत का नाम जरूर लिया जाता है। Bollywood के साथ South फिल्मों में भी किया काम प्रदीप रावत ने सिर्फ हिंदी सिनेमा में ही काम नहीं किया। उन्होंने Telugu, Tamil, Kannada और दूसरी भाषाओं की फिल्मों में भी अपनी एक्टिंग का हुनर दिखाया। उनके खाते में ‘सरफरोश’, ‘लगान’, ‘गजनी’, ‘चांदनी चौक टू चाइना’ समेत कई चर्चित फिल्में हैं। साउथ इंडियन फिल्मों में भी उन्होंने कई प्रभावशाली किरदार निभाए और वहां के दर्शकों के बीच अपनी पहचान बनाई। साथी कलाकारों ने दी श्रद्धांजलि प्रदीप रावत के निधन की खबर सामने आने के बाद उनके साथ काम कर चुके कलाकारों और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने उन्हें याद किया। ‘लगान’ के को-स्टार यशपाल शर्मा ने भी अभिनेता के निधन पर दुख जताया और उनकी अंतिम विदाई से जुड़ी जानकारी साझा की। प्रदीप रावत का जाना सिर्फ एक अभिनेता का चले जाना नहीं है, बल्कि उन किरदारों की याद भी है जिन्हें उन्होंने अपनी आवाज और अंदाज से यादगार बना दिया। अश्वत्थामा से लेकर देवा सिंह सोढ़ी और ‘गजनी’ के विलेन तक, उन्होंने अलग-अलग भूमिकाओं में अपनी छाप छोड़ी। आज जब उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी, तब उनके चाहने वालों के जेहन में उनके वही दमदार किरदार और पर्दे पर उनका खास अंदाज जरूर रहेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
Parliament

Parliament Protest: चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर विपक्ष का हल्ला बोल, Rahul Gandhi से मिले Kiren Rijiju

संसद (Parliament) परिसर में बुधवार को सियासी माहौल उस वक्त गरमा गया, जब विपक्षी सांसदों ने चढ़ावा चोरी और प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज के मुद्दे को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। विपक्ष ने इन घटनाओं पर सरकार से जवाब मांगा और कार्रवाई की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान संसद परिसर में नारेबाजी भी हुई, जिसका असर लोकसभा की कार्यवाही पर दिखाई दिया। विपक्षी सांसदों का कहना है कि जिन मुद्दों को लेकर वे प्रदर्शन कर रहे हैं, उन पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए। प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने सरकार पर विपक्ष की आवाज को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। दूसरी ओर, सत्ता पक्ष की ओर से सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने पर जोर दिया गया। Parliament परिसर में विपक्ष का Protest संसद परिसर में विपक्षी सांसद हाथों में तख्तियां लेकर पहुंचे और संबंधित घटनाओं को लेकर विरोध जताया। चढ़ावा चोरी के मामले और प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए। विपक्ष का आरोप है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वाले लोगों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया। नेताओं ने मांग की कि पूरे घटनाक्रम की जांच हो और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। हंगामे के बीच Lok Sabha की कार्यवाही प्रभावित विरोध प्रदर्शन का असर संसद के कामकाज पर भी पड़ा। लोकसभा में विपक्षी सांसदों की नारेबाजी और हंगामे के चलते कार्यवाही बाधित हुई। लगातार शोर-शराबे के बीच सदन को स्थगित करना पड़ा। संसद में इस तरह का गतिरोध कोई नया नहीं है, लेकिन इस बार विपक्ष ने जिन मुद्दों को उठाया है, उन्हें लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष जहां सरकार से जवाब मांग रहा है, वहीं सत्ता पक्ष की ओर से सदन चलने देने की अपील की जा रही है। Kiren Rijiju की Rahul Gandhi और Priyanka Gandhi से मुलाकात इसी बीच संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा से मुलाकात की। संसद में जारी गतिरोध के बीच हुई इस बैठक को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई। माना जा रहा है कि बैठक का उद्देश्य संसद की कार्यवाही को सुचारू बनाने और मौजूदा गतिरोध को कम करने की कोशिश से जुड़ा था। हालांकि, मुलाकात में किन-किन मुद्दों पर विस्तार से बातचीत हुई, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। विपक्ष और सरकार आमने-सामने संसद परिसर में हुए प्रदर्शन ने एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ती राजनीतिक खींचतान को सामने ला दिया है। विपक्ष लगातार अपने मुद्दों को संसद में उठाने और सरकार से जवाब मांगने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है। वहीं, सरकार के सामने चुनौती है कि सदन की कार्यवाही बिना व्यवधान के चले और महत्वपूर्ण विधायी कामकाज पूरा हो। ऐसे में रिजिजू की विपक्षी नेताओं के साथ मुलाकात को गतिरोध कम करने की दिशा में एक अहम कदम के तौर पर देखा जा रहा है। क्या है पूरा मामला? चढ़ावा चोरी और लाठीचार्ज से जुड़े मुद्दों को लेकर विपक्ष ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हुए। इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही भी प्रभावित हुई और सदन को स्थगित करना पड़ा। अब नजर इस बात पर है कि सरकार इन आरोपों पर क्या जवाब देती है और क्या दोनों पक्षों के बीच बातचीत के जरिए संसद में जारी गतिरोध को खत्म किया जा सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
UPI

UPI Payment पर लगेगा Charge? ₹2000 से ऊपर Transaction पर 0.40% Fee की चर्चा

UPI ने आम आदमी की जिंदगी में डिजिटल पेमेंट को बेहद आसान बना दिया है। चाय की दुकान से लेकर बड़े स्टोर तक, आज कुछ सेकंड में मोबाइल से भुगतान हो जाता है। ऐसे में अगर UPI Transaction पर चार्ज की व्यवस्था आती है, तो इसका असर सीधे करोड़ों लोगों और कारोबारियों पर पड़ सकता है। दरअसल, ₹2,000 से ज्यादा के UPI Transaction पर MDR (Merchant Discount Rate) लगाने का प्रस्ताव चर्चा में है। इसमें अधिकतम 0.40 फीसदी तक शुल्क लगाए जाने की संभावना बताई जा रही है। हालांकि, अभी इसे अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता है। शुल्क कब और किन ट्रांजैक्शन पर लागू होगा, यह आधिकारिक नियम आने के बाद ही साफ होगा। ₹2000 से ज्यादा के UPI Payment पर क्या बदलेगा? प्रस्तावित व्यवस्था में ₹2,000 से अधिक के कुछ UPI Payment को शुल्क के दायरे में लाने की बात सामने आई है। इसका मकसद छोटे और रोजमर्रा के डिजिटल पेमेंट को प्रभावित किए बिना बड़े ट्रांजैक्शन से जुड़े खर्च की भरपाई के लिए नया मॉडल तैयार करना हो सकता है। यानी अगर कोई व्यक्ति छोटी रकम का भुगतान करता है, तो उस पर अलग व्यवस्था हो सकती है। वहीं बड़े भुगतान के लिए MDR लागू किए जाने की संभावना है। क्या हर UPI Transaction पर 0.40% Charge लगेगा? नहीं, फिलहाल ऐसा कहना सही नहीं होगा। 0.40% को संभावित अधिकतम MDR दर के तौर पर बताया जा रहा है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर ₹2,000 से ज्यादा के UPI Payment पर अनिवार्य रूप से 0.40% चार्ज लगेगा। अंतिम नियमों में यह तय होगा कि शुल्क की दर कितनी होगी, कौन-से ट्रांजैक्शन इसके दायरे में आएंगे और भुगतान का बोझ ग्राहक या व्यापारी में से किस पर पड़ेगा। MDR Charge क्या होता है? MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है, जो डिजिटल पेमेंट को स्वीकार करने वाले कारोबारी से पेमेंट सिस्टम के तहत लिया जा सकता है। UPI के मामले में लंबे समय से यह बहस चलती रही है कि इतने बड़े डिजिटल पेमेंट नेटवर्क को चलाने की लागत की भरपाई किस तरह की जाए। बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और दूसरे सिस्टम पार्टनर इसके संचालन से जुड़े खर्च उठाते हैं। इसी वजह से UPI के लिए एक स्थायी Revenue Model को लेकर समय-समय पर चर्चा होती रही है। ₹10,000 के UPI Payment पर कितना Charge हो सकता है? मान लीजिए किसी पात्र ट्रांजैक्शन पर 0.40% MDR लागू होता है। ऐसे में ₹10,000 के भुगतान पर गणना के हिसाब से शुल्क करीब ₹40 बनता है। लेकिन इसे केवल उदाहरण के तौर पर समझना चाहिए। वास्तविक स्थिति में शुल्क की दर, टैक्स और अन्य नियम अलग हो सकते हैं। अंतिम व्यवस्था लागू होने के बाद ही सही रकम स्पष्ट होगी। आम UPI Users को सबसे ज्यादा चिंता किस बात की है? सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या UPI से पैसा भेजते समय सीधे यूजर के बैंक अकाउंट से चार्ज काटा जाएगा? जरूरी नहीं। MDR का संबंध मुख्य रूप से मर्चेंट और पेमेंट सिस्टम से जुड़ी शुल्क व्यवस्था से होता है। इसलिए MDR की चर्चा का सीधा मतलब यह नहीं है कि हर ग्राहक को UPI Payment करते समय अतिरिक्त पैसा देना पड़ेगा। हालांकि, भविष्य में अगर शुल्क व्यवस्था बदली जाती है, तो इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अंतिम नियम किस तरह तैयार किए जाते हैं। छोटे दुकानदारों और ग्राहकों पर क्या होगा असर? UPI का सबसे बड़ा फायदा यही रहा है कि छोटे कारोबारी भी बिना कैश के भुगतान ले सकते हैं। किराना दुकान, सब्जी वाला, रेस्टोरेंट या स्थानीय दुकानदार—हर जगह QR Code से भुगतान करना आसान हो गया है। अगर ₹2,000 की सीमा के आधार पर नया मॉडल बनाया जाता है, तो छोटे मूल्य वाले पेमेंट को इससे बाहर रखने की कोशिश की जा सकती है। इससे रोजाना होने वाले छोटे UPI Transactions पर असर सीमित रह सकता है। हालांकि, कारोबारियों के लिए बड़े भुगतान पर शुल्क का मुद्दा महत्वपूर्ण रहेगा। यही वजह है कि अंतिम नियम आने के बाद मर्चेंट और ग्राहक दोनों की प्रतिक्रिया अहम होगी। UPI पर Charge लगाने की जरूरत क्यों महसूस हो रही है? भारत में UPI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। करोड़ों लोग रोजाना डिजिटल पेमेंट के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। लेकिन इतने बड़े नेटवर्क को संचालित करने में तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर, बैंकिंग सिस्टम और पेमेंट कंपनियों की लागत भी जुड़ी होती है। ऐसे में UPI को लंबे समय तक आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाए रखने के लिए Revenue Model पर चर्चा होती रही है। MDR इसी बहस का एक संभावित हिस्सा है। अभी UPI Users को क्या करना चाहिए? फिलहाल UPI Payment को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। ₹2,000 से ऊपर के ट्रांजैक्शन पर 0.40% तक MDR की बात एक प्रस्तावित व्यवस्था के रूप में सामने आई है। इसे हर UPI Payment पर लागू हो चुका नियम समझना सही नहीं होगा। अंतिम फैसला आने के बाद ही पता चलेगा कि शुल्क किन ट्रांजैक्शन पर लागू होगा और इसका भुगतान कौन करेगा। UPI ने भारत में डिजिटल पेमेंट का तरीका ही बदल दिया है। ऐसे में किसी भी तरह की Fee या MDR व्यवस्था का असर बड़ा हो सकता है। ₹2,000 से अधिक के ट्रांजैक्शन पर संभावित 0.40% तक MDR Charge की चर्चा इसी वजह से महत्वपूर्ण है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि अंतिम नियम क्या होते हैं और सरकार किस तरह छोटे पेमेंट, आम ग्राहकों और कारोबारियों के हितों के बीच संतुलन बनाती है।
Read more
Monsoon

Monsoon का कहर: UP-Jharkhand में 17 मौतें, Uttarakhand-Himachal में 300 Roads बंद

देश के कई हिस्सों में मानसून (Monsoon) अब राहत से ज्यादा आफत बनता नजर आ रहा है। कहीं तेज बारिश के बीच बिजली गिरने से लोगों की जान जा रही है, तो कहीं पहाड़ दरकने से सड़कें बंद हो गई हैं। उत्तर प्रदेश और झारखंड में बारिश व आकाशीय बिजली से 17 लोगों की मौत की खबर है। वहीं हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश के कारण कई जगह Landslide हुआ है, जिससे करीब 300 सड़कें प्रभावित हुई हैं। केरल में भी बारिश से हालात चिंताजनक बने हुए हैं और पिछले चार दिनों में 25 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। UP-Jharkhand में बारिश और बिजली बनी जानलेवा उत्तर प्रदेश और झारखंड के कई इलाकों में तेज बारिश के साथ आकाशीय बिजली ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अलग-अलग घटनाओं में 17 लोगों की जान चली गई। बारिश के दौरान बिजली गिरने की घटनाओं ने खासकर ग्रामीण और खुले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम खराब होने पर लोगों को खुले स्थानों पर जाने से बचने और सुरक्षित जगह पर रहने की सलाह दी जा रही है। प्रशासन भी प्रभावित इलाकों पर नजर बनाए हुए है। Himachal और Uttarakhand में Landslide से रास्ते बंद पहाड़ी राज्यों हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बारिश का असर और ज्यादा गंभीर दिखाई दे रहा है। लगातार बारिश के कारण कई जगह पहाड़ों से मलबा सड़कों पर आ गया, जिसके चलते यातायात रोकना पड़ा। जानकारी के मुताबिक करीब 300 सड़कें बंद हैं। इससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ पहाड़ी क्षेत्रों में आने-जाने वाले यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। सड़कें खोलने के लिए प्रशासन और संबंधित विभागों की टीमें लगातार काम कर रही हैं। बारिश के बीच पहाड़ी रास्तों पर सफर करना भी जोखिम भरा हो गया है। ऐसे में प्रशासन की ओर से लोगों से मौसम की स्थिति देखकर ही यात्रा करने की अपील की जा रही है। Kerala में भी बारिश का कहर, 4 दिन में 25 मौतें दक्षिण भारत में केरल भी भारी बारिश से प्रभावित है। राज्य में पिछले चार दिनों के दौरान बारिश से जुड़ी घटनाओं में 25 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। कई इलाकों में लगातार बारिश के कारण जलभराव की स्थिति बनी हुई है। निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। राहत और बचाव एजेंसियां स्थिति पर नजर रख रही हैं। Monsoon ने बढ़ाई राज्यों की चिंता देश के अलग-अलग हिस्सों से सामने आ रही तस्वीरें बताती हैं कि इस समय मानसून का असर काफी तेज है। मैदानी राज्यों में जहां भारी बारिश और Lightning लोगों के लिए खतरा बनी हुई है, वहीं पहाड़ी क्षेत्रों में Landslide और सड़क बंद होने से सामान्य जीवन प्रभावित है। सबसे बड़ी चुनौती उन इलाकों में है जहां बारिश के साथ भूस्खलन का खतरा लगातार बना हुआ है। सड़कें बंद होने से जरूरी सेवाओं और आवाजाही पर भी असर पड़ सकता है। प्रशासन Alert, लोगों से सावधानी बरतने की अपील बारिश और प्राकृतिक घटनाओं को देखते हुए प्रभावित राज्यों में प्रशासन अलर्ट मोड पर है। बंद सड़कों को जल्द खोलने और जरूरत पड़ने पर लोगों तक राहत पहुंचाने का काम किया जा रहा है। मौसम खराब होने के दौरान लोगों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की Advisory पर ध्यान देने की जरूरत है। खासकर पहाड़ी इलाकों में बिना जरूरी काम के यात्रा से बचना बेहतर होगा। मानसून के इस दौर में देश के कई राज्यों में मौसम ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। यूपी और झारखंड में बिजली गिरने से हुई मौतों से लेकर हिमाचल-उत्तराखंड में Landslide और केरल में बारिश से हुई मौतों तक, हालात पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में मौसम को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने और सरकारी Advisory का पालन करने की जरूरत है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
JPSC

JPSC Protest: 4 दिन बाद देवेंद्र महतो ने तोड़ा जल उपवास, Sonam Wangchuk से हुई Live बातचीत

झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे छात्रों का गुस्सा एक बार फिर सड़कों पर दिखाई दे रहा है। JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर रांची में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच प्रदर्शनकारी नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अपना Water Fast तोड़ दिया। करीब चार दिन तक बिना अन्न और जल के अनशन पर रहने के बाद सोनम वांगचुक से Live बातचीत हुई। इसके बाद उनकी अपील मानते हुए महतो ने पानी ग्रहण किया। हालांकि, Water Fast खत्म होने का मतलब आंदोलन खत्म होना नहीं है। छात्रों की मांगें अभी भी बरकरार हैं और देवेंद्र महतो भी परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच और कार्रवाई की मांग पर कायम हैं। Sonam Wangchuk से बातचीत के बाद बदला फैसला देवेंद्र महतो के लगातार जल उपवास को लेकर समर्थकों और छात्रों में चिंता बढ़ रही थी। इसी बीच सोनम वांगचुक ने उनसे वीडियो कॉल के जरिए बातचीत की। बातचीत के दौरान वांगचुक ने महतो से अपनी सेहत का ध्यान रखने और Water Fast समाप्त करने की अपील की। सोनम वांगचुक की बात सुनने के बाद देवेंद्र महतो ने पानी पीकर अपना जल उपवास समाप्त किया। इस दौरान आंदोलन स्थल पर मौजूद छात्रों और समर्थकों ने भी राहत की सांस ली। लेकिन महतो ने साफ किया कि छात्रों की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। उनका विरोध JPSC-JSSC परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को लेकर जारी है। JPSC परीक्षा को लेकर क्यों नाराज हैं छात्र? रांची में चल रहे इस आंदोलन की मुख्य वजह 14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को लेकर उठे सवाल हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ियां हुई हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। छात्रों की मांग है कि अगर जांच में अनियमितताएं सामने आती हैं तो जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और अभ्यर्थियों के हित में स्पष्ट व्यवस्था तैयार करने की मांग भी उठ रही है। JSSC की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं को लेकर भी छात्रों के बीच नाराजगी है। यही वजह है कि आंदोलन अब केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रह गया है। CBI जांच की मांग ने बढ़ाई हलचल प्रदर्शनकारी छात्र मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं। आंदोलन से जुड़े कई लोगों की ओर से CBI जैसी केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग भी उठाई गई है। छात्रों का कहना है कि सरकारी नौकरियों के लिए होने वाली परीक्षाओं में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। युवाओं का भविष्य इन परीक्षाओं पर निर्भर करता है, इसलिए किसी भी तरह की कथित गड़बड़ी को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। CID जांच भी बनी चर्चा का विषय इस मामले में राज्य की जांच एजेंसी CID की कार्रवाई भी सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, जांच के दौरान पूछताछ और छापेमारी जैसी कार्रवाई की गई है। मामले से जुड़े कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी या दोष तय होना जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संभव है। फिलहाल छात्रों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और सच्चाई सामने लाई जाए। कौन हैं देवेंद्र नाथ महतो? देवेंद्र नाथ महतो झारखंड के छात्र आंदोलनों में सक्रिय नाम रहे हैं। भर्ती परीक्षाओं, छात्रों की समस्याओं और रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर वह पहले भी आवाज उठाते रहे हैं। मौजूदा JPSC-JSSC आंदोलन में भी उनकी भूमिका प्रमुख रही है। लंबे Water Fast के कारण वह इस प्रदर्शन का एक प्रमुख चेहरा बन गए थे। सोनम वांगचुक से उनकी बातचीत के बाद जल उपवास खत्म करने का फैसला भी आंदोलन के बीच काफी चर्चा में रहा। रांची में जारी है छात्रों का आंदोलन रांची में छात्रों का प्रदर्शन लगातार जारी है। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर सरकार से ठोस कदम उठाने की उम्मीद कर रहे हैं। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और समय पर नियुक्ति युवाओं के लिए सबसे अहम मुद्दों में से है। देवेंद्र महतो के Water Fast खत्म करने के बाद अब आंदोलन की अगली रणनीति पर सबकी नजर है। एक तरफ महतो ने स्वास्थ्य को देखते हुए जल उपवास खत्म किया है, वहीं दूसरी तरफ छात्रों की मुख्य मांगें अभी भी जस की तस हैं। आगे क्या होगा? फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाती है। अगर जांच को लेकर कोई ठोस फैसला होता है तो आंदोलन की दिशा बदल सकती है। वहीं, मांगों पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं होने पर प्रदर्शन आगे भी जारी रहने की संभावना है। एक बात फिलहाल साफ है—देवेंद्र महतो का Water Fast भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन JPSC-JSSC को लेकर छात्रों की नाराजगी अभी खत्म नहीं हुई है। अब नजर सरकार के अगले कदम और जांच की दिशा पर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
Meta

Meta पर बढ़ा Pressure: PM मोदी का Video हटाने पर संसदीय पैनल सख्त, Zuckerberg से जवाब तलब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ा एक Facebook Video कुछ समय के लिए हटाए जाने का मामला अब Meta के लिए मुश्किलें बढ़ाता नजर आ रहा है। वीडियो दोबारा बहाल किए जाने के बावजूद विवाद खत्म नहीं हुआ। संसदीय समिति ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए Meta से जवाब मांगा है और कंपनी के CEO मार्क जुकरबर्ग (Mark Zuckerberg) से माफी की मांग भी सामने आई है। मामला केवल एक वीडियो के हटने तक सीमित नहीं रह गया है। अब सवाल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, Content Moderation Policy और भारत में मिलने वाली Safe Harbour Protection को लेकर भी उठ रहे हैं। आखिर क्या है पूरा मामला? दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ा एक वीडियो Facebook पर पोस्ट किया गया था। यह वीडियो छात्रों और युवाओं से जुड़े एक अहम मुद्दे के संदर्भ में था। कुछ समय बाद यह वीडियो भारतीय यूजर्स के लिए Facebook पर उपलब्ध नहीं रहा। वीडियो के हटने की जानकारी सामने आने के बाद सरकार और संसदीय स्तर पर Meta से जवाब मांगा गया। मामला बढ़ने पर कंपनी ने सफाई दी कि वीडियो को गलती से हटा दिया गया था। बाद में इसे प्लेटफॉर्म पर बहाल कर दिया गया। Meta की ओर से इसे किसी जानबूझकर की गई कार्रवाई के बजाय एक तकनीकी या मॉडरेशन संबंधी गलती बताया गया। लेकिन समिति इस जवाब से पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आई। Zuckerberg से माफी की मांग क्यों? वीडियो हटाए जाने के मामले को लेकर संसदीय समिति ने Meta के कामकाज और उसकी जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं। समिति की ओर से मार्क जुकरबर्ग से व्यक्तिगत रूप से माफी मांगने की बात कही गई है। समिति का तर्क है कि किसी बड़े सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति से जुड़ा कंटेंट अगर प्लेटफॉर्म से हटता है, तो इसे महज एक सामान्य तकनीकी गलती मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह जानना जरूरी है कि वीडियो किस वजह से हटाया गया और इस फैसले के पीछे कौन-सी प्रक्रिया काम कर रही थी। यही वजह है कि अब Meta से सिर्फ सफाई नहीं, बल्कि Accountability की भी मांग की जा रही है। Safe Harbour Protection पर क्यों उठे सवाल? इस विवाद का सबसे अहम पहलू Meta को मिलने वाली Safe Harbour Protection है। भारत में Information Technology कानून के तहत सोशल मीडिया इंटरमीडियरी को कुछ परिस्थितियों में यूजर्स द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए कानूनी सुरक्षा मिलती है। लेकिन इस सुरक्षा के साथ प्लेटफॉर्म की कुछ जिम्मेदारियां भी जुड़ी हैं। ऐसे में अगर किसी प्लेटफॉर्म की Content Moderation प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठते हैं, तो उसकी जवाबदेही पर बहस होना स्वाभाविक है। संसदीय समिति की ओर से संकेत दिया गया है कि Meta को इस पूरे मामले पर गंभीरता से जवाब देना होगा। यही वजह है कि Safe Harbour को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। सरकार भी Meta से मांग सकती है जवाब मामले की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार की ओर से Meta के वरिष्ठ अधिकारियों से जवाब लेने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ी है। बातचीत में प्रधानमंत्री के वीडियो के अलावा प्लेटफॉर्म की Content Moderation व्यवस्था और अन्य डिजिटल कंटेंट से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है। सरकार यह जानना चाहती है कि Meta के प्लेटफॉर्म पर किसी महत्वपूर्ण पोस्ट को हटाने का फैसला किस स्तर पर लिया जाता है और ऐसी गलती दोबारा न हो, इसके लिए कंपनी की तरफ से क्या कदम उठाए जा रहे हैं। Meta के सामने अब सबसे बड़ा सवाल Meta के लिए चुनौती सिर्फ इस विवाद को खत्म करना नहीं है। कंपनी को यह भी स्पष्ट करना होगा कि आखिर ऐसा कौन-सा सिस्टम था जिसकी वजह से प्रधानमंत्री से जुड़ा वीडियो हट गया। अगर कंपनी इसे तकनीकी गलती बता रही है, तो यह सवाल भी उठता है कि भविष्य में ऐसी गलती रोकने के लिए क्या व्यवस्था बदली जाएगी। सोशल मीडिया आज केवल मनोरंजन या बातचीत का माध्यम नहीं रह गया है। राजनीतिक बयान, सरकारी घोषणाएं और सार्वजनिक बहस का बड़ा हिस्सा भी इन्हीं प्लेटफॉर्म पर होता है। ऐसे में किसी महत्वपूर्ण पोस्ट के हटने पर सवाल उठना स्वाभाविक है। आगे क्या होगा? फिलहाल वीडियो वापस Facebook पर आ चुका है, लेकिन विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। संसदीय समिति की सख्ती और सरकार की ओर से Meta के अधिकारियों से जवाब मांगने के बाद आने वाले दिनों में यह मुद्दा और चर्चा में रह सकता है। अब नजर इस बात पर है कि Meta इस पूरे मामले पर आगे क्या जवाब देता है और क्या कंपनी की ओर से इस घटना को लेकर औपचारिक रूप से जिम्मेदारी तय करने या माफी की दिशा में कोई कदम उठाया जाता है। कुल मिलाकर, PM Modi Video Removal Case ने एक बार फिर भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और Content Moderation Policy को बहस के केंद्र में ला दिया है। मामला भले एक वीडियो से शुरू हुआ हो, लेकिन अब चर्चा इससे कहीं आगे पहुंच चुकी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
Repo Rate

RBI का बड़ा फैसला: Repo Rate नहीं बदला, Home Loan और EMI पर राहत के लिए करना होगा इंतजार

RBI Repo Rate को लेकर आम लोगों को इस बार भी राहत नहीं मिली है। भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में Repo Rate को 5.25% पर बरकरार रखने का फैसला किया है। यानी फिलहाल Home Loan, Car Loan और दूसरे Floating Rate Loans की EMI कम होने की उम्मीद पर ब्रेक लग गया है। बैंक से लोन लेने वाले ग्राहकों के लिए यह फैसला इसलिए अहम है, क्योंकि Repo Rate में कटौती होने पर बैंकों के लिए कर्ज की लागत कम होने की संभावना रहती है। इसका फायदा आगे चलकर ग्राहकों को कम ब्याज दर और कम EMI के रूप में मिल सकता है। लेकिन इस बार दरों में बदलाव नहीं होने से ऐसी राहत तत्काल नहीं मिलने वाली। Loan की EMI पर क्या पड़ेगा असर? अगर आपने पहले से Floating Rate पर Home Loan या कोई दूसरा कर्ज लिया हुआ है, तो RBI के इस फैसले के बाद EMI में तुरंत कमी की उम्मीद नहीं है। इसी तरह नया Loan लेने वालों को भी ब्याज दरों में बड़ी कटौती का फायदा फिलहाल नहीं मिलेगा। हालांकि, Loan की EMI केवल RBI के Repo Rate पर ही निर्भर नहीं करती। बैंक अपनी lending rates, loan की अवधि, ग्राहक की प्रोफाइल और अन्य परिस्थितियों के आधार पर ब्याज दर तय करते हैं। इसलिए अलग-अलग ग्राहकों पर इसका असर अलग हो सकता है। RBI ने Rate Cut से क्यों बनाई दूरी? RBI के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती महंगाई और Global Market में जारी अस्थिरता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव और बाहरी आर्थिक परिस्थितियों का असर घरेलू अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। वैश्विक परिस्थितियों को लेकर सावधानी बरतने का संकेत दिया है। केंद्रीय बैंक के लिए आर्थिक विकास को गति देने के साथ-साथ महंगाई को नियंत्रण में रखना भी जरूरी है। ऐसे माहौल में Repo Rate को स्थिर रखना एक संतुलित कदम माना जा रहा है। महंगाई पर RBI की नजर ब्याज दरों से जुड़े फैसले में Inflation की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है। अगर महंगाई बढ़ती है तो केंद्रीय बैंक के लिए ब्याज दरों में जल्द कटौती करना मुश्किल हो सकता है। दूसरी तरफ, अगर महंगाई नियंत्रण में रहती है और आर्थिक गतिविधियों को सहारे की जरूरत महसूस होती है, तो आगे चलकर Rate Cut की गुंजाइश बन सकती है। इसलिए आने वाले महीनों के आर्थिक आंकड़े RBI के अगले फैसले के लिए महत्वपूर्ण होंगे। Home Loan लेने वालों को क्या करना चाहिए? RBI के फैसले के बाद मौजूदा Loan ग्राहकों को अपनी EMI और ब्याज दर की समीक्षा करनी चाहिए। अगर बैंक की ब्याज दर में भविष्य में कमी आती है तो ग्राहक अपने Loan की शर्तों के अनुसार इसका लाभ ले सकते हैं। नया Home Loan लेने की योजना बना रहे लोगों के लिए भी सिर्फ Repo Rate देखकर फैसला करना सही नहीं होगा। अलग-अलग बैंकों की Interest Rate, Processing Fee, Loan Tenure और अन्य शुल्कों की तुलना करना ज्यादा महत्वपूर्ण है। आगे क्या उम्मीद? फिलहाल RBI ने ब्याज दरों को स्थिर रखकर इंतजार और निगरानी की रणनीति अपनाई है। अब बाजार की नजर महंगाई, आर्थिक विकास और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति पर रहेगी। अगर आने वाले समय में महंगाई का दबाव कम होता है और वैश्विक परिस्थितियां बेहतर होती हैं, तो भविष्य में Repo Rate में कटौती की संभावना पर चर्चा फिर तेज हो सकती है। फिलहाल बैंक ग्राहकों को सस्ती EMI के लिए थोड़ा और इंतजार करना होगा। RBI का फैसला एक नजर में हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more

केंद्र का दावा: सात वर्षों में 36 देशों से 274 भगोड़े भारत लाए गए, ₹17,874 करोड़ की संपत्ति अटैच

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने मंगलवार को कहा कि पिछले सात वर्षों में 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाया गया है। सरकार के अनुसार, यह आंकड़ा वर्ष 2004 से 2013 के दौरान हुए प्रत्यर्पण की तुलना में करीब 10 गुना अधिक है। सरकार ने यह भी बताया कि इस अवधि में भगोड़ों की 17,874 करोड़ रुपये की संपत्ति भी अटैच की गई है। कई तरह के गंभीर मामलों में थे वांछित सरकार के मुताबिक, 2019 से जुलाई 2026 के बीच भारत लाए गए 274 भगोड़ों में विभिन्न गंभीर अपराधों के आरोपी शामिल हैं। इनमें 9 आर्थिक अपराध, 17 आतंकवाद, 42 संगठित अपराध, 62 हत्या, लूट और अन्य हिंसक अपराध, 53 यौन अपराध और बच्चों के खिलाफ यौन अपराध, 16 मादक पदार्थों की तस्करी, 12 नकली मुद्रा तस्करी, 18 मानव तस्करी और 45 अन्य मामलों में वांछित आरोपी शामिल थे। इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस में भी बढ़ोतरी केंद्र सरकार ने बताया कि हाल के वर्षों में इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में 40, 2023 में 100, 2024 में 107, 2025 में 112 और 2026 में अब तक 182 रेड नोटिस जारी किए जा चुके हैं। पिछले तीन वर्षों में कुल 401 भगोड़े अपराधियों के खिलाफ रेड नोटिस जारी किए गए। प्रत्यर्पण प्रक्रिया को बनाया गया अधिक प्रभावी गृह मंत्रालय के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री के मार्गदर्शन में प्रत्यर्पण संबंधी अनुरोधों को अब अधिक पेशेवर तरीके से तैयार किया जा रहा है। संबंधित देशों की कानूनी आवश्यकताओं के अनुरूप दस्तावेज, साक्ष्य और आवश्यक लिखित आश्वासन भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे प्रत्यर्पण प्रक्रिया को मजबूती मिली है। पुराने ढांचे पर भी सरकार का बयान सरकार ने दावा किया कि 2004-13 के दौरान भारत का प्रत्यर्पण तंत्र अपेक्षाकृत कमजोर था। उस समय केवल 37 देशों के साथ प्रत्यर्पण संधियां थीं और आर्थिक भगोड़ों से निपटने के लिए अलग कानून भी उपलब्ध नहीं था। सरकार के अनुसार, जटिल कागजी प्रक्रिया के कारण कई मामलों में विदेशी अदालतों ने भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध स्वीकार नहीं किए थे। केंद्र ने यह भी कहा कि वर्ष 2018 में Fugitive Economic Offenders Act लागू किया गया, जबकि 2019 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) में संशोधन कर कार्रवाई के दायरे को और मजबूत किया गया। देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
Read more
1 … 35 36 37 38 39 … 237

Trending News

Editor's Picks

मेरठ हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, पति सौरभ की हत्या के मामले में कोर्ट का फैसला

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई है। दोनों पर सौरभ की हत्या करने का आरोप साबित होने के बाद यह फैसला सुनाया गया। सजा सुनाते हुए जज ने वारदात को नृशंस हत्याकांड बताया और कहा कि इसमें माफी स्वीकार नहीं होगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कोर्ट में पेश हुए मुस्कान और साहिल सजा सुनाए जाने से पहले जेल में बंद मुस्कान और साहिल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत से जोड़ा गया। इस दौरान दोनों रोने लगे। जज ने मुस्कान से पूछा कि पति सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद वह क्या सजा चाहती है। इस पर मुस्कान ने कहा, “मेरी बच्चियों का ख्याल रखा जाए।” इसके बाद वह खामोश हो गई। वहीं, साहिल से भी यही सवाल पूछा गया, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। सजा के ऐलान के बाद रो पड़ीं सौरभ की मां अदालत के फैसले के बाद सौरभ राजपूत की मां भावुक हो गईं और रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि उन्हें शांति से न्याय मिल गया। इस मामले में सजा का ऐलान सौरभ के परिवार के लिए लंबे इंतजार के बाद आया है। 3 मार्च 2025 को हुई थी सौरभ की हत्या सौरभ राजपूत की हत्या 3 मार्च 2025 को हुई थी। मामले में सामने आए विवरण के अनुसार, हत्या के बाद शव के पांच टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में भर दिया गया था। इस वारदात ने पूरे देश में व्यापक चर्चा बटोरी थी। अदालत ने मामले में मुस्कान रस्तोगी और साहिल को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है।

इंदौर में प्लॉट बेचने के नाम पर 7.80 लाख की ठगी का आरोप, ब्रोकर समेत दो पर FIR

शहर के एरोड्रम थाना क्षेत्र में प्लॉट बेचने के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि प्लॉट का सौदा करने के बाद ब्रोकर और प्लॉट मालिक ने फरियादी से 7 लाख 80 हजार रुपये ले लिए, लेकिन न तो प्लॉट की रजिस्ट्री कराई और न ही कब्जा दिया। शिकायत की जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। 9.30 लाख में तय हुआ था प्लॉट का सौदा पुलिस के मुताबिक, नंदबाग कॉलोनी निवासी विजय चौहान ने शिकायत में बताया कि उन्होंने नंदबाग में एक प्लॉट का सौदा 9 लाख 30 हजार रुपये में तय किया था। इस संबंध में एग्रीमेंट भी किया गया था। फरियादी ने आरोप लगाया कि उन्होंने नकद और ऑनलाइन माध्यम से कुल 7 लाख 80 हजार रुपये का भुगतान कर दिया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें प्लॉट का कब्जा नहीं मिला और रजिस्ट्री भी नहीं कराई गई। ब्रोकर ने परिचित बताकर कराया था सौदा विजय चौहान के अनुसार, धर्मेंद्र ठाकुर ने उन्हें बताया था कि नंदकिशोर मनावत उसका परिचित है और वह अपना प्लॉट बेचना चाहता है। इसके बाद धर्मेंद्र ने सौदे में ब्रोकर की भूमिका निभाई और इसके बदले 10 हजार रुपये लिए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि भुगतान के बाद जब उन्होंने रजिस्ट्री कराने और प्लॉट का कब्जा देने की मांग की, तो उन्हें लगातार टालमटोल का सामना करना पड़ा। 25 से ज्यादा केस होने की धमकी देने का आरोप फरियादी ने आरोप लगाया कि रजिस्ट्री और कब्जे के लिए दबाव बनाने पर धर्मेंद्र ठाकुर ने धमकी दी। शिकायत के मुताबिक, उसने कहा कि उसके खिलाफ 25 से ज्यादा मामले चल रहे हैं। साथ ही, उसके या नंदकिशोर मनावत के पास दोबारा आने पर अंजाम भुगतने की चेतावनी भी दी। 2.80 लाख रुपये लौटाए, 5 लाख बाकी होने का दावा विजय चौहान के मुताबिक, पुलिस में शिकायत करने की बात कहने के बाद नंदकिशोर मनावत ने 2 लाख 50 हजार रुपये नकद और 30 हजार रुपये ऑनलाइन वापस किए। हालांकि, फरियादी का आरोप है कि बाकी 5 लाख रुपये लौटाने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद विजय चौहान ने पुलिस अधिकारियों से शिकायत की। जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी बाकी है।

SIR के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों से मिले राहुल गांधी, दिल्ली पुलिस पर मारपीट के आरोप

नई दिल्ली। SIR के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन करने वाले छात्रों ने बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। इसके बाद राहुल गांधी और छात्रों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस पर मारपीट और हिरासत के दौरान दुर्व्यवहार करने के आरोप लगाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में NSUI के छात्रों, कार्यकर्ताओं और कंटेंट क्रिएटर्स ने अपने साथ हुई कथित घटनाओं की जानकारी दी। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। छात्रा ने कान पर चोट लगने का लगाया आरोप प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक छात्रा ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान पुलिसकर्मी ने उसके प्राइवेट पार्ट पर लात मारी। वहीं, दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा अदिरा ने दावा किया कि पुलिस की पिटाई के कारण उसके एक कान की सुनने की क्षमता चली गई। प्रदर्शनकारियों ने हिरासत के दौरान कथित ज्यादती और मारपीट से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है। RSS और भाजपा से जुड़े लोगों के कहने पर हिरासत का आरोप एक अन्य प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि पुलिस RSS और भाजपा से जुड़े लोगों के कहने पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले रही थी। यह आरोप भी प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाया गया है। राहुल गांधी ने सबूत सुरक्षित रखने को कहा राहुल गांधी ने छात्रों से घटनाओं से जुड़े वीडियो और अन्य सबूत सुरक्षित रखने को कहा। उन्होंने कहा कि इन सबूतों के आधार पर पुलिसकर्मियों से लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त तक, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी। प्रदर्शनकारियों के आरोपों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।

बांग्लादेश टेस्ट सीरीज से बाहर हुए शाई होप और अल्जारी जोसेफ, केविन विकहम को पहली बार मिला मौका

क्रिकेट न्यूज। वेस्टइंडीज को बांग्लादेश के खिलाफ आगामी दो टेस्ट मैचों की सीरीज से पहले बड़ा झटका लगा है। टीम के बल्लेबाज शाई होप और तेज गेंदबाज अल्जारी जोसेफ सीरीज से बाहर हो गए हैं। क्रिकेट वेस्टइंडीज (CWI) ने 23 वर्षीय टॉप ऑर्डर बल्लेबाज केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया है। ऑलराउंडर कीमो पॉल को भी टीम में जगह मिली है। CWI के मुताबिक, मेडिकल जांच और विशेषज्ञों की सलाह के बाद अल्जारी जोसेफ को सीरीज से हटाने का फैसला लिया गया। बोर्ड उनके कार्यभार को नियंत्रित कर चोट के जोखिम को कम करना चाहता है। वहीं, तीनों फॉर्मेट में लगातार खेलने के बाद शाई होप को आराम दिया गया है। चोट के खतरे को देखते हुए जोसेफ को आराम क्रिकेट वेस्टइंडीज ने बताया कि अल्जारी जोसेफ को टीम से बाहर रखने का फैसला उनकी सहमति से लिया गया है। बोर्ड के अनुसार, टेस्ट क्रिकेट में तेज गेंदबाजों को लंबे स्पेल में लगातार गेंदबाजी करनी पड़ती है। इससे छोटे फॉर्मेट की तुलना में कार्यभार और चोट का जोखिम बढ़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए जोसेफ के वर्कलोड को कम करने का फैसला किया गया है, ताकि उनके स्वास्थ्य और फिटनेस का ध्यान रखा जा सके। शाई होप को भी दिया गया आराम CWI ने कहा कि शाई होप तीनों फॉर्मेट में लगातार खेल रहे थे। ऐसे में उनके कार्यभार और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें टेस्ट सीरीज से आराम दिया गया है। बोर्ड का यह फैसला फरवरी 2027 में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप क्वालिफायर्स को ध्यान में रखकर भी लिया गया है। टीम प्रबंधन चाहता है कि खिलाड़ी आगामी महत्वपूर्ण मुकाबलों के लिए फिट रहें। केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में मौका शाई होप की गैरमौजूदगी में 23 वर्षीय टॉप ऑर्डर बल्लेबाज केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया गया है। इसके अलावा ऑलराउंडर कीमो पॉल को भी टीम में जगह मिली है। अब देखना होगा कि बांग्लादेश की घरेलू परिस्थितियों में वेस्टइंडीज की टीम नए संयोजन के साथ कैसा प्रदर्शन करती है। कोच डैरेन सैमी ने सीरीज जीत को बताया अहम वेस्टइंडीज के मुख्य कोच डैरेन सैमी ने कहा कि वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के मौजूदा चक्र की शुरुआत में टीम ने कुछ लक्ष्य तय किए थे। इनमें टेस्ट रैंकिंग के ऊपरी आधे हिस्से में जगह बनाना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के खिलाफ सीरीज जीतने से टीम अपने लक्ष्य के करीब पहुंच सकती है। सैमी के मुताबिक, बांग्लादेश को उसकी घरेलू परिस्थितियों में हराना चुनौतीपूर्ण होगा, लेकिन टीम इसके लिए तैयार है। 28 अक्टूबर से शुरू होगा पहला टेस्ट बांग्लादेश और वेस्टइंडीज के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेली जाएगी। पहला टेस्ट 28 अक्टूबर से ढाका में शुरू होगा, जबकि दूसरा टेस्ट 5 नवंबर से सिलहट में खेला जाएगा।

IMF ने बढ़ाया भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान, 2026 और 2027 में 7% विकास दर रहने की उम्मीद

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने साल 2026 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान 6.4% से बढ़ाकर 7% कर दिया है। वैश्विक तनाव, आर्थिक सुस्ती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का ध्यान खींचा है। मजबूत घरेलू मांग और सर्विसेज सेक्टर के बेहतर प्रदर्शन को भारत की तेज विकास दर की प्रमुख वजह माना गया है। IMF ने अक्टूबर 2026 की अपनी वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में भारत की विकास संभावनाओं को सकारात्मक बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा आयात पर निर्भर कई उभरती अर्थव्यवस्थाएं जहां दबाव का सामना कर रही हैं, वहीं भारत की आर्थिक गतिविधियों में मजबूती बनी हुई है। 2027 में भी 7% ग्रोथ का अनुमान IMF ने 2026 के लिए भारत की विकास दर के अनुमान में जुलाई के मुकाबले 0.6 प्रतिशत अंक और अप्रैल के मुकाबले 0.5 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी की है। वहीं, 2027 के लिए भी विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7% कर दिया गया है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2027 का अनुमान जुलाई के मुकाबले 0.3 प्रतिशत अंक और अप्रैल के मुकाबले 0.5 प्रतिशत अंक अधिक है। इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भी भारत में विकास की संभावनाओं को लेकर उम्मीद बनी हुई है। IMF से पहले विश्व बैंक और आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी भारत की विकास दर के अनुमान में बढ़ोतरी कर चुकी हैं। चीन की सुस्ती के बीच भारत पर नजर रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया की अर्थव्यवस्थाओं में मजबूती देखने को मिल रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी गतिविधियों में तेजी ने भी वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को प्रभावित किया है। भारत और चीन एशिया की आर्थिक गतिविधियों में अहम भूमिका निभा रहे हैं, हालांकि दोनों देशों की विकास संभावनाओं में अंतर दिखाई दे रहा है। IMF के अनुमान के अनुसार, चीन की विकास दर 2026 में 4.5% और 2027 में 4% रह सकती है। वैश्विक तनाव और ऊर्जा की ऊंची कीमतों को चीन की आर्थिक वृद्धि के सामने चुनौतियों में शामिल किया गया है। दुनिया की आर्थिक विकास दर पर दबाव IMF के मुताबिक, 2028 से 2031 के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था औसतन 3.2% की दर से बढ़ सकती है। यह 2000 से 2019 के बीच महामारी से पहले दर्ज औसत 3.7% की विकास दर से कम है। रिपोर्ट में वैश्विक तनाव, ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और ऊर्जा आयात पर निर्भर उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ने वाले दबाव को आर्थिक विकास के लिए चुनौती बताया गया है। ऐसे माहौल में भारत की अनुमानित विकास दर अपेक्षाकृत मजबूत दिखाई देती है। मजबूत घरेलू मांग और जनसांख्यिकी से मिल रहा सहारा भारत की आर्थिक मजबूती के पीछे बढ़ता घरेलू बाजार, मजबूत मांग, अनुकूल जनसांख्यिकी और सुधारों को अहम कारक माना गया है। सर्विसेज सेक्टर का बेहतर प्रदर्शन भी विकास दर को सहारा दे रहा है। हालांकि, बेहतर अनुमान के बावजूद चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव डाल सकती हैं। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय तनाव और वैश्विक मांग में कमजोरी का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

About Me

देशहरपल सिर्फ खबरों का मंच नहीं, बल्कि आपकी आवाज़ को सामने लाने का एक सशक्त माध्यम भी है। यहां आपको ताज़ातरीन खबरों के साथ-साथ नौकरी, शिक्षा, और नए भारत की बदलती आर्थिक तस्वीर पर उपयोगी और भरोसेमंद जानकारी मिलेगी।

Phone: +91 9406783569, +91 755 484 8829
Email: support@deshharpal.com
Address : A-23 Sakshi Bunglow Trilanga Near Aura Mall Bhopal M.P

Recent Posts

  • All Post
  • Breaking News
  • Education
  • More News
  • Web Story
  • एंटरटेनमेंट
  • देश-हरपल
  • धर्म-कर्म
  • प्रदेश
  • बिज़नेस
  • वर्ल्ड न्यूज़
  • वीडियो
  • स्पोर्ट्स
    •   Back
    • एक्सक्लूसिव
    • Editorial
    •   Back
    • IPL 2026
    • T20 वर्ल्ड कप
    • FIFA 2026
    •   Back
    • सोच-विचार
    • हेल्थ
    • ट्रैवल
    • कल्चर
    • एनवायरनमेंट
    • Impact Feature
    •   Back
    • राशिफल
    • पंचांग
    • पर्व-त्यौहार
    • पूजा-पाठ
    • चैत्र नवरात्रि 2025
    •   Back
    • मध्य प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    •   Back
    • टीवी
    • वेब-सीरीज
    • फिल्म रिव्यू
    • बॉलीवुड
    •   Back
    • लाइफस्टाइल
    •   Back
    • स्टॉक-मार्केट

© 2023 Deshharpal. All Rights Reserved.