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Atiq Ahmed

Atiq Ahmed Son Accident: भाई से मुलाकात के लिए निकले अबान की रास्ते में मौत

उत्तर प्रदेश से एक बड़ी खबर सामने आई है। माफिया-राजनेता अतीक अहमद (Atiq Ahmed) के बेटे अबान अहमद की सड़क हादसे में मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक, अबान अपने बड़े भाई से मिलने झांसी जेल जा रहा था, इसी दौरान रास्ते में उसकी कार बेकाबू होकर डिवाइडर से टकरा गई। हादसा इतना गंभीर था कि अबान ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और दुर्घटना की जांच शुरू कर दी। शुरुआती जानकारी के अनुसार, कार की रफ्तार अधिक होने या अचानक नियंत्रण बिगड़ने के कारण यह हादसा हुआ हो सकता है। हालांकि, दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल पाएगा। Jhansi Road Accident: भाई से मिलने जा रहा था अबान बताया जा रहा है कि अबान अहमद झांसी जेल में बंद अपने बड़े भाई से मुलाकात करने के लिए निकला था। सफर के दौरान अचानक कार अनियंत्रित हो गई और सड़क के बीच बने डिवाइडर से जा टकराई। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने घटना की जानकारी पुलिस को दी। पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। Atiq Ahmed Family: लगातार चर्चा में रहा परिवार अतीक अहमद का परिवार पिछले कई वर्षों से उत्तर प्रदेश की राजनीति और अपराध से जुड़ी खबरों में रहा है। अतीक अहमद के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं और उसकी गतिविधियों को लेकर लंबे समय तक जांच एजेंसियां सक्रिय रहीं। अतीक अहमद के बड़े बेटे अली अहमद भी जेल में बंद हैं। वहीं, इससे पहले अतीक के बेटे असद अहमद की झांसी में पुलिस मुठभेड़ के दौरान मौत हुई थी। असद उमेश पाल हत्याकांड में आरोपी था। सड़क हादसे के बाद उठे कई सवाल अबान अहमद की मौत के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर कार किस वजह से अनियंत्रित हुई। क्या वाहन की गति अधिक थी या फिर किसी अन्य कारण से दुर्घटना हुई, इसकी जांच की जा रही है। फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। इस हादसे के बाद अतीक अहमद परिवार से जुड़ी चर्चाएं एक बार फिर तेज हो गई हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Cockroach Janta Party

Cockroach Janta Party का ऐलान: Election Politics से दूरी, अब Youth Movement पर रहेगा Focus

महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर से एक नए तरह की राजनीतिक चर्चा सामने आई है। Cockroach Janta Party (CJP) ने फिलहाल चुनावी राजनीति में उतरने से इनकार करते हुए खुद को एक जन आंदोलन (People’s Movement) के रूप में आगे बढ़ाने का फैसला किया है। संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उनका उद्देश्य सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि जनता से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाना और व्यवस्था में जवाबदेही लाना है। CJP का चुनाव लड़ने से इनकार, आंदोलन के रास्ते पर आगे बढ़ेगा संगठन प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अभिजीत दीपके ने साफ किया कि Cockroach Janta Party अभी किसी राजनीतिक पार्टी के रूप में चुनाव नहीं लड़ेगी। उनका कहना है कि वर्तमान समय में देश के सामने कई गंभीर समस्याएं हैं, जिन पर जनता की भागीदारी और दबाव जरूरी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव तक सीमित नहीं है। एक मजबूत लोकतंत्र के लिए जरूरी है कि सरकार, संस्थाएं और प्रशासन जनता के प्रति जवाबदेह रहें। Youth Issues और Education System बने CJP के मुख्य मुद्दे Cockroach Janta Party पिछले कुछ समय से युवाओं और छात्रों से जुड़े मामलों को लेकर चर्चा में रही है। संगठन ने exam paper leak, competitive exams में गड़बड़ी और education system में सुधार जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। CJP का कहना है कि लाखों युवाओं का भविष्य परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़ा है। अगर इन प्रक्रियाओं में पारदर्शिता नहीं होगी तो इसका सीधा असर छात्रों और उनके परिवारों पर पड़ेगा। किसी Political Party के साथ गठबंधन नहीं करेगी CJP अभिजीत दीपके ने यह भी स्पष्ट किया कि संगठन किसी मौजूदा राजनीतिक दल के साथ नहीं जुड़ेगा। उनका कहना है कि Cockroach Janta Party का लक्ष्य किसी पार्टी का समर्थन करना या सत्ता की राजनीति करना नहीं है, बल्कि जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाना है। हालांकि, जो लोग या संगठन उनके उठाए गए मुद्दों का समर्थन करना चाहते हैं, वे आंदोलन के साथ जुड़ सकते हैं। Social Media से शुरू हुआ आंदोलन बना राष्ट्रीय चर्चा का विषय Cockroach Janta Party की पहचान एक युवा केंद्रित आंदोलन के रूप में बनी है। सोशल मीडिया के जरिए संगठन ने छात्रों, युवाओं और आम लोगों के बीच अपनी पहुंच बनाई। कम समय में CJP के मुद्दे राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बने, खासकर परीक्षा व्यवस्था, बेरोजगारी और सरकारी संस्थाओं की जवाबदेही जैसे मामलों को लेकर। CJP का अगला कदम क्या होगा? अब Cockroach Janta Party का फोकस देशभर में युवाओं और आम लोगों को जोड़ने पर है। संगठन खुद को एक ऐसे प्लेटफॉर्म के रूप में पेश करना चाहता है जहां लोग अपने मुद्दों को सामने रख सकें और सरकारों से जवाब मांग सकें। राजनीतिक विशेषज्ञों की नजर अब इस बात पर है कि क्या CJP एक बड़े जन आंदोलन का रूप ले पाएगी या भविष्य में चुनावी राजनीति में वापसी करेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi

15 August 2026 से पहले Delhi में हाई अलर्ट, सुरक्षा घेरा मजबूत

Independence Day 2026 से पहले राजधानी Delhi में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया गया है। खुफिया इनपुट और संभावित सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए दिल्ली पुलिस समेत कई सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। खासतौर पर Pakistan-supported terror organizations और Khalistani extremist networks से जुड़े संभावित खतरों को ध्यान में रखते हुए राजधानी में विशेष सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। हर साल 15 अगस्त के मौके पर दिल्ली में सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल होती है। लाल किले पर होने वाले स्वतंत्रता दिवस समारोह में देश के शीर्ष नेता, गणमान्य व्यक्ति और बड़ी संख्या में आम लोग शामिल होते हैं। ऐसे में किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने पहले से व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। Delhi Security Alert: संवेदनशील इलाकों में बढ़ाई गई निगरानी दिल्ली के संवेदनशील क्षेत्रों, प्रमुख बाजारों, रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस की अतिरिक्त टीमें तैनात की गई हैं और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए निगरानी तंत्र को मजबूत किया गया है। लाल किले और उसके आसपास के इलाकों में सुरक्षा का विशेष घेरा बनाया गया है। कार्यक्रम स्थल की सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक, सीसीटीवी कैमरों और अन्य सुरक्षा उपायों का इस्तेमाल किया जा रहा है। Terror Groups और Khalistani Elements को लेकर एजेंसियां सतर्क सुरक्षा एजेंसियां उन संगठनों और नेटवर्क पर नजर बनाए हुए हैं जो देश में अशांति फैलाने की कोशिश कर सकते हैं। अधिकारियों के अनुसार, बड़े राष्ट्रीय आयोजनों के दौरान आतंकी संगठन अपनी मौजूदगी दर्ज कराने या माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर सकते हैं। इसी को देखते हुए ऑनलाइन गतिविधियों, संदिग्ध संपर्कों और संभावित स्लीपर नेटवर्क की निगरानी बढ़ाई गई है। एजेंसियां किसी भी छोटी सूचना को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई कर रही हैं। Delhi Police ने बढ़ाई पेट्रोलिंग, Verification Drive तेज राजधानी में पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है। होटल, गेस्ट हाउस और किराएदारों के सत्यापन अभियान को भी तेज किया गया है। इसके अलावा दिल्ली की सीमाओं पर भी सुरक्षा जांच को मजबूत किया गया है ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि को रोका जा सके। सुरक्षा बलों के बीच बेहतर तालमेल के लिए लगातार बैठकें की जा रही हैं और सभी जरूरी सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा की जा रही है। 15 August Security Arrangements: शांतिपूर्ण आयोजन की तैयारी स्वतंत्रता दिवस समारोह को सुरक्षित और सफल बनाने के लिए दिल्ली पुलिस, खुफिया एजेंसियां और अन्य सुरक्षा बल मिलकर काम कर रहे हैं। प्रशासन का लक्ष्य है कि आम लोग बिना किसी चिंता के राष्ट्रीय पर्व में हिस्सा ले सकें और समारोह शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और राजधानी की सुरक्षा पर लगातार नजर रखी जा रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Monsoon Session

Monsoon Session: लोकसभा की कार्यवाही हंगामे के बीच स्थगित

संसद के मानसून सत्र (Monsoon Session) के दौरान लोकसभा में गुरुवार को जोरदार हंगामा देखने को मिला। विपक्ष के विरोध और नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई। लोकसभा स्पीकर ने विपक्ष के व्यवहार पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सदन की मर्यादा बनाए रखना सभी सांसदों की जिम्मेदारी है। लगातार हंगामे के बाद लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। विपक्ष के हंगामे से लोकसभा की कार्यवाही प्रभावित लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने कई मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। सदन में नारेबाजी बढ़ने के कारण प्रश्नकाल और अन्य जरूरी कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल सकी। स्पीकर ने सांसदों से शांति बनाए रखने और संसदीय नियमों का पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सदन में अनुशासन और गरिमा बनाए रखना बेहद जरूरी है। हालांकि, विपक्ष के लगातार विरोध के कारण स्थिति सामान्य नहीं हो पाई और कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। Speaker ने विपक्ष के आचरण पर जताई नाराजगी लोकसभा स्पीकर ने विपक्षी सदस्यों के व्यवहार को लेकर असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन सदन की कार्यवाही बाधित करना उचित नहीं है। स्पीकर ने सभी दलों से अपील की कि वे चर्चा और संवाद के माध्यम से अपने मुद्दे उठाएं ताकि संसद की कार्यवाही बेहतर तरीके से चल सके। Foreign Fund Bill पर Amit Shah का जवाब संभव इस बीच, केंद्र सरकार के एक अहम विधेयक को लेकर सदन में चर्चा होने की संभावना है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह विदेशी फंड से जुड़े बिल पर सरकार का पक्ष रख सकते हैं। यह बिल विदेशी धन के उपयोग, निगरानी और नियमों से संबंधित है। सरकार का कहना है कि ऐसे प्रावधानों से पारदर्शिता बढ़ेगी और विदेशी फंड के इस्तेमाल पर बेहतर नियंत्रण हो सकेगा। वहीं विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार से कई सवाल पूछ रहा है। संसद में आगे की कार्यवाही पर नजर लोकसभा में जारी गतिरोध के बीच अब सबकी नजर आगे की कार्यवाही पर है। विपक्ष और सरकार के बीच मतभेदों के बावजूद सदन में महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा होना जरूरी माना जा रहा है। अमित शाह के जवाब के बाद विदेशी फंड से जुड़े बिल पर संसद में आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Tarun Tejpal

Breaking Tarun Tejpal Case में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, Trial Court Verdict पलटा, दोषी करार

वरिष्ठ पत्रकार और तहलका (Tehelka) के पूर्व संपादक-इन-चीफ तरुण तेजपाल (Tarun Tejpal) से जुड़े 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने गोवा की ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें तेजपाल को आरोपों से बरी कर दिया गया था। अब हाईकोर्ट ने उन्हें इस मामले में दोषी करार दिया है। करीब 13 साल पुराने इस मामले में आया यह फैसला एक बार फिर देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। यह केस भारतीय मीडिया जगत के सबसे चर्चित मामलों में से एक रहा है, जिसने कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और यौन उत्पीड़न के मुद्दे पर व्यापक बहस को जन्म दिया था। क्या है Tarun Tejpal Sexual Assault Case? मामला साल 2013 का है, जब गोवा में तहलका पत्रिका के एक कार्यक्रम के दौरान एक महिला सहकर्मी ने तरुण तेजपाल पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। शिकायत के अनुसार, घटना गोवा के एक होटल की लिफ्ट में हुई थी। आरोप सामने आने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया और जांच शुरू की गई। इस केस ने मीडिया संस्थानों में Internal Complaints Committee (ICC), महिला सुरक्षा और कार्यस्थल पर सम्मानजनक माहौल को लेकर कई सवाल खड़े किए। 2021 में Trial Court ने किया था बरी गोवा की सत्र अदालत ने साल 2021 में तरुण तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। ट्रायल कोर्ट के इस फैसले के बाद गोवा सरकार ने इसे बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी। राज्य सरकार की ओर से दायर अपील में कहा गया था कि निचली अदालत ने मामले में मौजूद सबूतों और परिस्थितियों का सही मूल्यांकन नहीं किया। Bombay High Court ने बदला फैसला बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान ट्रायल कोर्ट के फैसले की समीक्षा की। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों और रिकॉर्ड में मौजूद तथ्यों पर विचार करने के बाद निचली अदालत के फैसले को पलट दिया। हाईकोर्ट के इस निर्णय के बाद तरुण तेजपाल को दोषी करार दिया गया है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और सजा से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान रहेगा। क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला? Tarun Tejpal Case सिर्फ एक व्यक्ति से जुड़ा मामला नहीं रहा, बल्कि यह भारत में workplace safety और महिलाओं के अधिकारों से जुड़े बड़े मुद्दों के बीच सामने आया था। इस केस ने यह बहस भी तेज की कि प्रभावशाली पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ लगे गंभीर आरोपों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है। लंबे इंतजार के बाद आया फैसला 2013 में शुरू हुआ यह मामला कई कानूनी पड़ावों से गुजरने के बाद अब एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंचा है। ट्रायल कोर्ट के फैसले के बाद हाईकोर्ट का यह निर्णय इस केस की दिशा बदलने वाला माना जा रहा है। तरुण तेजपाल मामले पर अब आगे की कानूनी कार्रवाई और अदालत के अगले निर्देशों पर सभी की नजर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Heavy Rain

Heavy Rain Alert: यूपी के 40 Schools में घुसा पानी, 100 साल पुराना मकान गिरा

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भारी बारिश (Heavy Rain) ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लगातार हो रही बारिश के कारण जहां यूपी के कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं, वहीं उत्तराखंड में पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन से जनजीवन प्रभावित हुआ है। प्राकृतिक आपदाओं के बीच कई परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। यूपी में बाढ़ का असर, 40 स्कूलों में घुसा पानी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बारिश के बाद जलभराव और बाढ़ की स्थिति देखने को मिल रही है। हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि करीब 40 स्कूलों में पानी भर गया है। स्कूल परिसरों में पानी आने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई है और प्रशासन को हालात संभालने के लिए कदम उठाने पड़ रहे हैं। ग्रामीण और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई जगहों पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने का काम जारी है। 100 साल पुराना मकान गिरा, हादसे में 6 लोगों की मौत बारिश के बीच एक दर्दनाक हादसे ने लोगों को झकझोर दिया। एक करीब 100 साल पुराना मकान अचानक ढह गया, जिसमें छह लोगों की मौत हो गई। हादसे के बाद इलाके में शोक का माहौल है। राहत और बचाव टीमों ने मलबा हटाकर लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया। यह घटना पुराने और कमजोर भवनों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा रही है। बारिश के मौसम में जर्जर मकानों में रहने वाले लोगों के लिए खतरा और बढ़ जाता है। Kedarnath Highway पर Landslide, मलबे में दबे कई वाहन उत्तराखंड में भारी बारिश का असर पहाड़ी इलाकों में भी दिखाई दे रहा है। केदारनाथ हाईवे पर भूस्खलन के कारण बड़ी मात्रा में मलबा सड़क पर आ गया, जिसकी वजह से यातायात प्रभावित हुआ। कई गाड़ियों के मलबे में दबने की जानकारी सामने आई है। प्रशासन और सड़क निर्माण विभाग की टीमें मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने और रास्ता खोलने में जुटी हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रियों और स्थानीय लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। बारिश और बाढ़ से बढ़ी चुनौतियां उत्तर प्रदेश से लेकर उत्तराखंड तक बारिश ने कई इलाकों में परेशानी खड़ी कर दी है। कहीं स्कूल बंद करने की नौबत आ गई है तो कहीं सड़कें और रास्ते बाधित हो गए हैं। प्रशासन, आपदा राहत दल और स्थानीय टीमें प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाने में जुटी हैं। मौसम विभाग की चेतावनियों के बीच लोगों से अपील की जा रही है कि वे नदी, नाले और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों से दूर रहें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Jharkhand

Jharkhand Exam Controversy: परीक्षा गड़बड़ी पर छात्रों का प्रदर्शन जारी, सरकार से बातचीत के लिए तैयार लेकिन रखी बड़ी शर्त

Jharkhand में कथित परीक्षा गड़बड़ी (Exam Scam) को लेकर जारी छात्र आंदोलन अब बातचीत की दिशा में बढ़ता नजर आ रहा है। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कहा है कि वे सरकार के साथ बातचीत करने के लिए तैयार हैं, लेकिन उनकी मांग है कि मुख्यमंत्री (CM) खुद मीडिया के सामने आकर छात्रों से संवाद करें। छात्रों का कहना है कि खुली बातचीत से प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहेगी और जनता भी पूरे मामले को समझ सकेगी। छात्रों का कहना- मुद्दा सिर्फ विरोध नहीं, भविष्य का सवाल है प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल आंदोलन करना नहीं है, बल्कि अपनी समस्याओं का समाधान चाहते हैं। उनका आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं ने हजारों अभ्यर्थियों की मेहनत और भविष्य पर असर डाला है। कई छात्रों का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक तैयारी की, लेकिन परीक्षा विवाद के कारण उनके सपनों पर संकट खड़ा हो गया। वे चाहते हैं कि सरकार उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुने और ऐसा फैसला ले जिससे आगे होने वाली परीक्षाओं में भरोसा कायम हो सके। Exam Scam Case में अब तक 19 गिरफ्तार परीक्षा गड़बड़ी मामले में प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। इस केस में अब तक 19 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस के अनुसार, मामले की जांच जारी है और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। छात्रों की प्रमुख मांगें क्या हैं? छात्रों ने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं। इनमें मुख्य रूप से: CM से Open Dialogue की उम्मीद, समाधान पर टिकी नजरें अब सभी की नजर सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच होने वाली संभावित बातचीत पर है। छात्र चाहते हैं कि मुख्यमंत्री सीधे उनसे संवाद करें और उनकी समस्याओं का समाधान निकालने की पहल करें। अगर सरकार और छात्रों के बीच सकारात्मक बातचीत होती है, तो लंबे समय से चले आ रहे इस विवाद को खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ सकता है। वहीं, जांच की प्रगति और सरकार की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी। युवाओं को फैसले का इंतजार झारखंड के छात्र अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं। उनका कहना है कि निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था ही युवाओं के भरोसे को वापस ला सकती है। आने वाले दिनों में सरकार का रुख और छात्रों के साथ होने वाली बातचीत इस आंदोलन के भविष्य को तय करेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Meta

Meta Action पर मचा बवाल: PM Modi Video हटाने के बाद Zuckerberg ने मांगी माफी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े एक वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद मामला अब तूल पकड़ चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक, वीडियो हटाए जाने को लेकर सरकार ने Meta के सामने नाराजगी जताई और कंपनी को तीन दिन के भीतर मामले पर जवाब देने का अल्टीमेटम दिया। इसके बाद Meta की ओर से इस मामले में माफी मांगे जाने की बात सामने आई है। मामला उस समय का है, जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन चल रहा था। इसी दौरान प्रधानमंत्री मोदी से संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया। कुछ समय बाद यह वीडियो प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। वीडियो हटने के बाद सवाल उठे कि आखिर इसे किस आधार पर हटाया गया और इसके पीछे Meta की क्या वजह थी। Jantar Mantar Protest के दौरान पोस्ट हुआ था Video बताया जा रहा है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया गया था। प्रदर्शन से जुड़े इस वीडियो के हटने के बाद मामला सरकारी स्तर तक पहुंच गया। सरकार की ओर से Meta से इस कार्रवाई को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया। साथ ही कंपनी को तीन दिन के भीतर जवाब देने के लिए कहा गया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर कंटेंट हटाने की प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई। Government के Ultimatum के बाद Meta ने मांगी माफी सरकार की ओर से समयसीमा दिए जाने के बाद Meta की तरफ से मामले पर प्रतिक्रिया सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने वीडियो हटाए जाने को लेकर माफी मांगी है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि Social Media Platforms पर राजनीतिक और सार्वजनिक महत्व वाले कंटेंट को हटाने का फैसला किस प्रक्रिया के तहत लिया जाता है। किसी वीडियो को हटाने से पहले प्लेटफॉर्म की नीतियों और परिस्थितियों का आकलन किस तरह किया जाता है, यह भी चर्चा का विषय बन गया है। PM Modi से जुड़े Content पर क्यों बढ़ी चर्चा? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ी किसी भी पोस्ट या वीडियो पर सोशल मीडिया पर तेजी से प्रतिक्रिया देखने को मिलती है। ऐसे में किसी वीडियो का अचानक हटना स्वाभाविक रूप से लोगों का ध्यान खींचता है। इस मामले में सरकार के हस्तक्षेप और उसके बाद Meta की ओर से माफी की खबर ने पूरे घटनाक्रम को और अहम बना दिया है। हालांकि, वीडियो हटाने की सटीक वजह और Meta की आंतरिक प्रक्रिया को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है। Social Media Companies की Accountability पर सवाल यह घटना केवल एक वीडियो हटाए जाने तक सीमित नहीं है। इससे सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही और Content Moderation Policy पर भी सवाल उठ रहे हैं। आज करोड़ों लोग सोशल मीडिया को खबरों और सूचनाओं के प्रमुख माध्यम के रूप में इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में किसी महत्वपूर्ण वीडियो या पोस्ट को हटाए जाने पर प्लेटफॉर्म की ओर से स्पष्ट कारण बताना और पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी माना जाता है। फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा सरकार के तीन दिन के अल्टीमेटम और उसके बाद Meta की ओर से आई माफी को लेकर है। आने वाले समय में कंपनी की ओर से इस मामले पर और स्पष्ट जानकारी सामने आती है या नहीं, इस पर सभी की नजर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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RBI

RBI On Plastic Currency: ₹10-₹20 के Plastic Notes को लेकर सामने आया नया Update

अगर आपके बटुए में रखे ₹10 और ₹20 के नोट कुछ ही दिनों में पुराने और मुड़े-तुड़े नजर आने लगते हैं, तो आने वाले समय में इसमें बदलाव देखने को मिल सकता है। ₹10 और ₹20 के Plastic यानी Polymer Notes को लेकर RBI की तैयारी एक बार फिर चर्चा में है। लंबे समय से इन नोटों को लाने की बात चल रही है और अब इसके संभावित लॉन्च को लेकर भी जानकारी सामने आई है। हालांकि, यहां एक बात साफ समझना जरूरी है कि Polymer Notes को लेकर प्रक्रिया अभी चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगी। पहले इनका ट्रायल और जरूरी तकनीकी जांच होगी। इसके बाद ही इन्हें बड़े स्तर पर बाजार में उतारने का फैसला किया जाएगा। क्यों जरूरी महसूस हो रहे हैं Plastic Notes? भारत में ₹10 और ₹20 के नोटों का इस्तेमाल रोजमर्रा की छोटी-बड़ी जरूरतों के लिए खूब होता है। चाय की दुकान से लेकर ऑटो का किराया और छोटे-मोटे सामान की खरीदारी तक, इन नोटों का इस्तेमाल लगातार होता रहता है। यही वजह है कि ये नोट अपेक्षाकृत जल्दी खराब भी हो जाते हैं। Polymer Notes इसी समस्या का एक संभावित समाधान माने जा रहे हैं। ये कागजी नोटों के मुकाबले ज्यादा टिकाऊ होते हैं और पानी या नमी के संपर्क में आने पर भी बेहतर तरीके से टिक सकते हैं। ₹10 और ₹20 के नोटों से क्यों हो सकती है शुरुआत? Plastic Currency को लेकर शुरुआती फोकस ₹10 और ₹20 denomination पर रहने की संभावना है। इन दोनों मूल्यवर्ग के नोटों का सर्कुलेशन काफी ज्यादा है। ऐसे में इनके Polymer Version को इस्तेमाल में लाकर इसकी व्यावहारिकता को बेहतर तरीके से परखा जा सकता है। अगर ट्रायल सफल रहता है और लोगों के इस्तेमाल से जुड़े पहलू संतोषजनक पाए जाते हैं, तो आगे चलकर दूसरे मूल्यवर्ग की करेंसी पर भी विचार हो सकता है। कब लॉन्च होंगे Polymer Notes? सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ₹10 और ₹20 के Plastic Notes आम लोगों के हाथ में कब पहुंचेंगे? उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पहले field trial और अन्य जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। इसके बाद RBI इनके बड़े पैमाने पर इस्तेमाल को लेकर फैसला करेगा। इसलिए अभी इसे ऐसी योजना नहीं माना जा सकता जिसमें कोई निश्चित तारीख तय हो चुकी हो। यानी लोगों को फिलहाल पुराने ₹10 और ₹20 के नोटों को लेकर किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है। मौजूदा नोट सामान्य रूप से चलन में बने रहेंगे, जब तक RBI की तरफ से कोई अलग निर्देश जारी नहीं किया जाता। नकली नोटों पर भी लग सकती है लगाम Polymer Currency का एक अहम फायदा इसकी security features से भी जुड़ा है। इन नोटों में ऐसे सुरक्षा फीचर्स शामिल किए जा सकते हैं, जिन्हें कॉपी करना नकली नोट बनाने वालों के लिए मुश्किल हो। हालांकि, किसी नए नोट को जारी करने से पहले RBI को उसकी सुरक्षा के साथ-साथ ATM, cash counting machines और दूसरे banking systems के साथ compatibility भी जांचनी होती है। क्या पुराने ₹10 और ₹20 के नोट बंद हो जाएंगे? नहीं। Polymer Notes आने का मतलब यह नहीं है कि मौजूदा कागजी नोट तुरंत बंद कर दिए जाएंगे। अगर नए नोट जारी होते हैं तो RBI की ओर से उनकी वैधता और पुराने नोटों के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट जानकारी दी जाएगी। इसलिए अभी सोशल मीडिया पर चलने वाली ऐसी किसी भी खबर पर भरोसा करने से बचें जिसमें पुराने ₹10 या ₹20 के नोटों को अचानक बंद किए जाने का दावा किया जा रहा हो। भारत में Currency का बदलता रूप भारत में समय के साथ करेंसी में कई बदलाव हुए हैं। सुरक्षा फीचर्स को मजबूत करने से लेकर नोटों के डिजाइन और आकार में बदलाव तक, RBI लगातार करेंसी सिस्टम को बेहतर बनाने पर काम करता रहा है। अब अगर Polymer Notes का प्रयोग सफल रहता है, तो यह भारतीय करेंसी के क्षेत्र में एक और बड़ा बदलाव हो सकता है। खासकर छोटे नोटों की durability बढ़ाने में इसका फायदा मिल सकता है। RBI के फैसले पर टिकी नजर फिलहाल ₹10 और ₹20 के Plastic Notes को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रक्रिया अभी आगे बढ़ रही है और अंतिम लॉन्च से पहले ट्रायल व जरूरी जांच पूरी की जाएगी। इसलिए निश्चित लॉन्च डेट को लेकर RBI की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना ही सही रहेगा। आम लोगों के लिए फिलहाल राहत की बात यही है कि मौजूदा ₹10 और ₹20 के नोट चलते रहेंगे। Polymer Notes आते हैं तो RBI उनकी उपलब्धता, इस्तेमाल और पुराने नोटों को लेकर पूरी जानकारी सार्वजनिक करेगा।
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Supreme Court

Car-Bike Insurance पर Supreme Court सख्त, नई Car के लिए 4 साल और Bike के लिए 6 साल का Cover

अगर आप कार या बाइक चलाते हैं, तो वाहन के इंश्योरेंस से जुड़ी यह खबर आपके काम की है। Supreme Court ने बिना वैध बीमा वाले वाहनों पर सख्ती की जरूरत बताई है। कोर्ट के निर्देश के बाद अब ऐसे इंतजाम पर जोर दिया जा रहा है, जिससे बिना इंश्योरेंस वाले वाहन सड़कों पर न चल सकें और उन्हें पेट्रोल-डीजल भी आसानी से न मिल पाए। इस मामले में नई गाड़ियों के लिए लंबी अवधि के बीमा कवर की व्यवस्था का भी जिक्र हुआ है। इसके तहत नई कार के लिए 4 साल और नई बाइक के लिए 6 साल का Insurance Cover रखने की बात सामने आई है। इसका मकसद वाहन खरीदने के कुछ समय बाद इंश्योरेंस खत्म होने और उसके बाद बिना बीमा वाहन चलाने की समस्या पर लगाम लगाना है। बिना Insurance गाड़ी चलाने वालों पर बढ़ेगी सख्ती देश में कई वाहन ऐसे हैं जिनका इंश्योरेंस खत्म हो चुका होता है, लेकिन वे फिर भी सड़कों पर दौड़ते रहते हैं। सड़क दुर्घटना की स्थिति में ऐसे वाहनों के कारण पीड़ितों को मुआवजा मिलने में परेशानी हो सकती है। यही वजह है कि वैध Motor Insurance को लेकर नियमों के पालन पर लगातार जोर दिया जा रहा है। Supreme Court की ओर से जिस व्यवस्था पर जोर दिया गया है, उसमें पेट्रोल पंप पर वाहन का Insurance Status चेक करने की संभावना भी महत्वपूर्ण है। यदि किसी वाहन का बीमा वैध नहीं पाया जाता है, तो उसे Petrol या Diesel देने पर रोक लगाने की व्यवस्था की जा सकती है। नई Car खरीदने वालों के लिए 4 साल का Insurance नई कार खरीदने वालों के लिए 4 साल का बीमा कवर एक महत्वपूर्ण बदलाव हो सकता है। इससे ग्राहक को कार खरीदने के बाद शुरुआती वर्षों में बीमा रिन्यू कराने की परेशानी कम होगी। इसी तरह नई बाइक खरीदने वालों के लिए 6 साल का Insurance Cover रखने की व्यवस्था पर जोर दिया गया है। लंबी अवधि का बीमा होने से दोपहिया वाहन मालिकों के लिए पॉलिसी की वैधता बनाए रखना आसान हो सकता है। Petrol Pump पर कैसे होगी Insurance की जांच? अगर यह व्यवस्था लागू होती है, तो पेट्रोल पंप पर वाहन का नंबर डालकर उसके Insurance की वैधता जांची जा सकती है। इसके लिए सरकारी वाहन रिकॉर्ड और Insurance Database को आपस में जोड़ना होगा। ऐसी व्यवस्था सफल रहती है तो पेट्रोल पंप पर ही बिना बीमा वाले वाहन की पहचान की जा सकेगी। इससे वाहन मालिकों पर अपने इंश्योरेंस को समय पर Renew कराने का दबाव बढ़ेगा। वाहन मालिक अभी से कर लें यह काम अगर आपके पास Car, Bike या कोई अन्य वाहन है, तो सबसे पहले अपनी Insurance Policy की Expiry Date चेक कर लें। बीमा खत्म हो गया है तो वाहन चलाने से पहले उसे Renew कराना जरूरी है। सिर्फ चालान से बचने के लिए नहीं, बल्कि दुर्घटना की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा के लिहाज से भी Valid Insurance बेहद जरूरी है। खासकर पुराने वाहनों के मालिकों को अपनी पॉलिसी की स्थिति नियमित रूप से जांचते रहना चाहिए। क्यों अहम है Supreme Court का यह निर्देश? इस पूरी कवायद का उद्देश्य सड़क पर चलने वाले वाहनों को बीमा के दायरे में लाना और दुर्घटना के बाद पीड़ितों को मिलने वाली आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करना है। अगर पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता को भी वैध Insurance से जोड़ दिया जाता है, तो बिना बीमा वाहन चलाने वालों पर प्रभावी रोक लग सकती है। यानी आने वाले समय में वाहन मालिकों के लिए RC और Driving Licence के साथ Valid Insurance रखना भी उतना ही जरूरी हो सकता है। नई व्यवस्था लागू होने पर इसका सीधा असर वाहन मालिकों और पेट्रोल पंप संचालकों, दोनों पर देखने को मिलेगा।
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मेरठ हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, पति सौरभ की हत्या के मामले में कोर्ट का फैसला

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई है। दोनों पर सौरभ की हत्या करने का आरोप साबित होने के बाद यह फैसला सुनाया गया। सजा सुनाते हुए जज ने वारदात को नृशंस हत्याकांड बताया और कहा कि इसमें माफी स्वीकार नहीं होगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कोर्ट में पेश हुए मुस्कान और साहिल सजा सुनाए जाने से पहले जेल में बंद मुस्कान और साहिल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत से जोड़ा गया। इस दौरान दोनों रोने लगे। जज ने मुस्कान से पूछा कि पति सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद वह क्या सजा चाहती है। इस पर मुस्कान ने कहा, “मेरी बच्चियों का ख्याल रखा जाए।” इसके बाद वह खामोश हो गई। वहीं, साहिल से भी यही सवाल पूछा गया, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। सजा के ऐलान के बाद रो पड़ीं सौरभ की मां अदालत के फैसले के बाद सौरभ राजपूत की मां भावुक हो गईं और रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि उन्हें शांति से न्याय मिल गया। इस मामले में सजा का ऐलान सौरभ के परिवार के लिए लंबे इंतजार के बाद आया है। 3 मार्च 2025 को हुई थी सौरभ की हत्या सौरभ राजपूत की हत्या 3 मार्च 2025 को हुई थी। मामले में सामने आए विवरण के अनुसार, हत्या के बाद शव के पांच टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में भर दिया गया था। इस वारदात ने पूरे देश में व्यापक चर्चा बटोरी थी। अदालत ने मामले में मुस्कान रस्तोगी और साहिल को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है।

इंदौर में प्लॉट बेचने के नाम पर 7.80 लाख की ठगी का आरोप, ब्रोकर समेत दो पर FIR

शहर के एरोड्रम थाना क्षेत्र में प्लॉट बेचने के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि प्लॉट का सौदा करने के बाद ब्रोकर और प्लॉट मालिक ने फरियादी से 7 लाख 80 हजार रुपये ले लिए, लेकिन न तो प्लॉट की रजिस्ट्री कराई और न ही कब्जा दिया। शिकायत की जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। 9.30 लाख में तय हुआ था प्लॉट का सौदा पुलिस के मुताबिक, नंदबाग कॉलोनी निवासी विजय चौहान ने शिकायत में बताया कि उन्होंने नंदबाग में एक प्लॉट का सौदा 9 लाख 30 हजार रुपये में तय किया था। इस संबंध में एग्रीमेंट भी किया गया था। फरियादी ने आरोप लगाया कि उन्होंने नकद और ऑनलाइन माध्यम से कुल 7 लाख 80 हजार रुपये का भुगतान कर दिया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें प्लॉट का कब्जा नहीं मिला और रजिस्ट्री भी नहीं कराई गई। ब्रोकर ने परिचित बताकर कराया था सौदा विजय चौहान के अनुसार, धर्मेंद्र ठाकुर ने उन्हें बताया था कि नंदकिशोर मनावत उसका परिचित है और वह अपना प्लॉट बेचना चाहता है। इसके बाद धर्मेंद्र ने सौदे में ब्रोकर की भूमिका निभाई और इसके बदले 10 हजार रुपये लिए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि भुगतान के बाद जब उन्होंने रजिस्ट्री कराने और प्लॉट का कब्जा देने की मांग की, तो उन्हें लगातार टालमटोल का सामना करना पड़ा। 25 से ज्यादा केस होने की धमकी देने का आरोप फरियादी ने आरोप लगाया कि रजिस्ट्री और कब्जे के लिए दबाव बनाने पर धर्मेंद्र ठाकुर ने धमकी दी। शिकायत के मुताबिक, उसने कहा कि उसके खिलाफ 25 से ज्यादा मामले चल रहे हैं। साथ ही, उसके या नंदकिशोर मनावत के पास दोबारा आने पर अंजाम भुगतने की चेतावनी भी दी। 2.80 लाख रुपये लौटाए, 5 लाख बाकी होने का दावा विजय चौहान के मुताबिक, पुलिस में शिकायत करने की बात कहने के बाद नंदकिशोर मनावत ने 2 लाख 50 हजार रुपये नकद और 30 हजार रुपये ऑनलाइन वापस किए। हालांकि, फरियादी का आरोप है कि बाकी 5 लाख रुपये लौटाने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद विजय चौहान ने पुलिस अधिकारियों से शिकायत की। जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी बाकी है।

SIR के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों से मिले राहुल गांधी, दिल्ली पुलिस पर मारपीट के आरोप

नई दिल्ली। SIR के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन करने वाले छात्रों ने बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। इसके बाद राहुल गांधी और छात्रों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस पर मारपीट और हिरासत के दौरान दुर्व्यवहार करने के आरोप लगाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में NSUI के छात्रों, कार्यकर्ताओं और कंटेंट क्रिएटर्स ने अपने साथ हुई कथित घटनाओं की जानकारी दी। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। छात्रा ने कान पर चोट लगने का लगाया आरोप प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक छात्रा ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान पुलिसकर्मी ने उसके प्राइवेट पार्ट पर लात मारी। वहीं, दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा अदिरा ने दावा किया कि पुलिस की पिटाई के कारण उसके एक कान की सुनने की क्षमता चली गई। प्रदर्शनकारियों ने हिरासत के दौरान कथित ज्यादती और मारपीट से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है। RSS और भाजपा से जुड़े लोगों के कहने पर हिरासत का आरोप एक अन्य प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि पुलिस RSS और भाजपा से जुड़े लोगों के कहने पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले रही थी। यह आरोप भी प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाया गया है। राहुल गांधी ने सबूत सुरक्षित रखने को कहा राहुल गांधी ने छात्रों से घटनाओं से जुड़े वीडियो और अन्य सबूत सुरक्षित रखने को कहा। उन्होंने कहा कि इन सबूतों के आधार पर पुलिसकर्मियों से लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त तक, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी। प्रदर्शनकारियों के आरोपों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।

बांग्लादेश टेस्ट सीरीज से बाहर हुए शाई होप और अल्जारी जोसेफ, केविन विकहम को पहली बार मिला मौका

क्रिकेट न्यूज। वेस्टइंडीज को बांग्लादेश के खिलाफ आगामी दो टेस्ट मैचों की सीरीज से पहले बड़ा झटका लगा है। टीम के बल्लेबाज शाई होप और तेज गेंदबाज अल्जारी जोसेफ सीरीज से बाहर हो गए हैं। क्रिकेट वेस्टइंडीज (CWI) ने 23 वर्षीय टॉप ऑर्डर बल्लेबाज केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया है। ऑलराउंडर कीमो पॉल को भी टीम में जगह मिली है। CWI के मुताबिक, मेडिकल जांच और विशेषज्ञों की सलाह के बाद अल्जारी जोसेफ को सीरीज से हटाने का फैसला लिया गया। बोर्ड उनके कार्यभार को नियंत्रित कर चोट के जोखिम को कम करना चाहता है। वहीं, तीनों फॉर्मेट में लगातार खेलने के बाद शाई होप को आराम दिया गया है। चोट के खतरे को देखते हुए जोसेफ को आराम क्रिकेट वेस्टइंडीज ने बताया कि अल्जारी जोसेफ को टीम से बाहर रखने का फैसला उनकी सहमति से लिया गया है। बोर्ड के अनुसार, टेस्ट क्रिकेट में तेज गेंदबाजों को लंबे स्पेल में लगातार गेंदबाजी करनी पड़ती है। इससे छोटे फॉर्मेट की तुलना में कार्यभार और चोट का जोखिम बढ़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए जोसेफ के वर्कलोड को कम करने का फैसला किया गया है, ताकि उनके स्वास्थ्य और फिटनेस का ध्यान रखा जा सके। शाई होप को भी दिया गया आराम CWI ने कहा कि शाई होप तीनों फॉर्मेट में लगातार खेल रहे थे। ऐसे में उनके कार्यभार और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें टेस्ट सीरीज से आराम दिया गया है। बोर्ड का यह फैसला फरवरी 2027 में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप क्वालिफायर्स को ध्यान में रखकर भी लिया गया है। टीम प्रबंधन चाहता है कि खिलाड़ी आगामी महत्वपूर्ण मुकाबलों के लिए फिट रहें। केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में मौका शाई होप की गैरमौजूदगी में 23 वर्षीय टॉप ऑर्डर बल्लेबाज केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया गया है। इसके अलावा ऑलराउंडर कीमो पॉल को भी टीम में जगह मिली है। अब देखना होगा कि बांग्लादेश की घरेलू परिस्थितियों में वेस्टइंडीज की टीम नए संयोजन के साथ कैसा प्रदर्शन करती है। कोच डैरेन सैमी ने सीरीज जीत को बताया अहम वेस्टइंडीज के मुख्य कोच डैरेन सैमी ने कहा कि वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के मौजूदा चक्र की शुरुआत में टीम ने कुछ लक्ष्य तय किए थे। इनमें टेस्ट रैंकिंग के ऊपरी आधे हिस्से में जगह बनाना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के खिलाफ सीरीज जीतने से टीम अपने लक्ष्य के करीब पहुंच सकती है। सैमी के मुताबिक, बांग्लादेश को उसकी घरेलू परिस्थितियों में हराना चुनौतीपूर्ण होगा, लेकिन टीम इसके लिए तैयार है। 28 अक्टूबर से शुरू होगा पहला टेस्ट बांग्लादेश और वेस्टइंडीज के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेली जाएगी। पहला टेस्ट 28 अक्टूबर से ढाका में शुरू होगा, जबकि दूसरा टेस्ट 5 नवंबर से सिलहट में खेला जाएगा।

IMF ने बढ़ाया भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान, 2026 और 2027 में 7% विकास दर रहने की उम्मीद

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने साल 2026 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान 6.4% से बढ़ाकर 7% कर दिया है। वैश्विक तनाव, आर्थिक सुस्ती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का ध्यान खींचा है। मजबूत घरेलू मांग और सर्विसेज सेक्टर के बेहतर प्रदर्शन को भारत की तेज विकास दर की प्रमुख वजह माना गया है। IMF ने अक्टूबर 2026 की अपनी वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में भारत की विकास संभावनाओं को सकारात्मक बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा आयात पर निर्भर कई उभरती अर्थव्यवस्थाएं जहां दबाव का सामना कर रही हैं, वहीं भारत की आर्थिक गतिविधियों में मजबूती बनी हुई है। 2027 में भी 7% ग्रोथ का अनुमान IMF ने 2026 के लिए भारत की विकास दर के अनुमान में जुलाई के मुकाबले 0.6 प्रतिशत अंक और अप्रैल के मुकाबले 0.5 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी की है। वहीं, 2027 के लिए भी विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7% कर दिया गया है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2027 का अनुमान जुलाई के मुकाबले 0.3 प्रतिशत अंक और अप्रैल के मुकाबले 0.5 प्रतिशत अंक अधिक है। इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भी भारत में विकास की संभावनाओं को लेकर उम्मीद बनी हुई है। IMF से पहले विश्व बैंक और आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी भारत की विकास दर के अनुमान में बढ़ोतरी कर चुकी हैं। चीन की सुस्ती के बीच भारत पर नजर रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया की अर्थव्यवस्थाओं में मजबूती देखने को मिल रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी गतिविधियों में तेजी ने भी वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को प्रभावित किया है। भारत और चीन एशिया की आर्थिक गतिविधियों में अहम भूमिका निभा रहे हैं, हालांकि दोनों देशों की विकास संभावनाओं में अंतर दिखाई दे रहा है। IMF के अनुमान के अनुसार, चीन की विकास दर 2026 में 4.5% और 2027 में 4% रह सकती है। वैश्विक तनाव और ऊर्जा की ऊंची कीमतों को चीन की आर्थिक वृद्धि के सामने चुनौतियों में शामिल किया गया है। दुनिया की आर्थिक विकास दर पर दबाव IMF के मुताबिक, 2028 से 2031 के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था औसतन 3.2% की दर से बढ़ सकती है। यह 2000 से 2019 के बीच महामारी से पहले दर्ज औसत 3.7% की विकास दर से कम है। रिपोर्ट में वैश्विक तनाव, ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और ऊर्जा आयात पर निर्भर उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ने वाले दबाव को आर्थिक विकास के लिए चुनौती बताया गया है। ऐसे माहौल में भारत की अनुमानित विकास दर अपेक्षाकृत मजबूत दिखाई देती है। मजबूत घरेलू मांग और जनसांख्यिकी से मिल रहा सहारा भारत की आर्थिक मजबूती के पीछे बढ़ता घरेलू बाजार, मजबूत मांग, अनुकूल जनसांख्यिकी और सुधारों को अहम कारक माना गया है। सर्विसेज सेक्टर का बेहतर प्रदर्शन भी विकास दर को सहारा दे रहा है। हालांकि, बेहतर अनुमान के बावजूद चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव डाल सकती हैं। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय तनाव और वैश्विक मांग में कमजोरी का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

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