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Rohingya

Bay of Bengal Boat Accident: Rohingya शरणार्थियों से भरी दो नावें डूबीं, UN ने जताई गहरी चिंता

Rohingya Boat Tragedy ने एक बार फिर दुनिया को झकझोर दिया है। सुरक्षित जीवन की तलाश में समुद्र का रास्ता चुनने वाले सैकड़ों रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए यह सफर मौत का सफर बन गया। संयुक्त राष्ट्र (UN) की शुरुआती जानकारी के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में दो अलग-अलग नाव हादसों में 500 से अधिक लोगों के डूबने या लापता होने की आशंका है। अगर यह आंकड़ा आधिकारिक रूप से पुष्टि होता है, तो यह हाल के वर्षों की सबसे बड़ी समुद्री मानवीय त्रासदियों में गिना जाएगा। समुद्र में गायब हुईं दो नावें संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (UNHCR) और अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) के अनुसार, दोनों नावें जून के आखिर में म्यांमार के रखाइन राज्य और बांग्लादेश के कॉक्स बाजार शरणार्थी शिविरों से रवाना हुई थीं। इनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग समेत बड़ी संख्या में रोहिंग्या शरणार्थी सवार थे, जो बेहतर भविष्य की उम्मीद में मलेशिया और अन्य दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की ओर जा रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार, एक नाव समुद्र में निकलने के कुछ समय बाद ही लापता हो गई, जबकि दूसरी नाव 8 जुलाई के आसपास खराब मौसम के बीच पलट गई। शुरुआती आकलन में दोनों हादसों में 500 से ज्यादा लोगों के डूबने की आशंका जताई गई है। राहत एजेंसियां अभी भी लापता लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही हैं। आखिर क्यों समुद्र का खतरनाक रास्ता चुन रहे हैं रोहिंग्या? रोहिंग्या समुदाय कई वर्षों से म्यांमार में हिंसा, भेदभाव और नागरिकता से जुड़े संकट का सामना कर रहा है। 2017 में बड़े पैमाने पर हुई सैन्य कार्रवाई के बाद लाखों लोग जान बचाकर बांग्लादेश पहुंचे, जहां वे आज भी शरणार्थी शिविरों में सीमित संसाधनों के बीच जीवन गुजार रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार खराब होती आर्थिक स्थिति, रोजगार की कमी, घटती अंतरराष्ट्रीय सहायता और सुरक्षित भविष्य की उम्मीद लोगों को मानव तस्करों के भरोसे समुद्री रास्ता अपनाने के लिए मजबूर कर रही है। यह सफर जितना लंबा होता है, उतना ही जानलेवा भी साबित होता है। मानसून बना सबसे बड़ा खतरा बंगाल की खाड़ी में इस समय मानसून का मौसम चल रहा है। तेज हवाएं, ऊंची लहरें और लगातार खराब मौसम छोटी नावों के लिए बेहद खतरनाक साबित होते हैं। इसके बावजूद तस्कर ओवरलोडेड नावों में लोगों को समुद्र के रास्ते भेजते हैं, जिससे ऐसे हादसों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। UN ने जताई गंभीर चिंता संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों ने इस घटना को बेहद दुखद बताते हुए क्षेत्र के देशों से अपील की है कि समुद्र में फंसे लोगों की तलाश और बचाव अभियान तेज किए जाएं। साथ ही मानव तस्करी के नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई और रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए सुरक्षित एवं कानूनी रास्ते उपलब्ध कराने की जरूरत पर भी जोर दिया गया है। UN का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले महीनों में ऐसे हादसों की संख्या और बढ़ सकती है। Rohingya Crisis पर फिर उठे बड़े सवाल यह हादसा केवल दो नावों के डूबने की घटना नहीं है, बल्कि उस मानवीय संकट की तस्वीर है जो वर्षों से दुनिया के सामने मौजूद है। जब तक म्यांमार में रोहिंग्या समुदाय के लिए सुरक्षित माहौल, नागरिक अधिकार और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित नहीं किया जाता, तब तक हजारों लोग अपनी जान जोखिम में डालकर समुद्र के रास्ते पलायन करने को मजबूर रहेंगे। फिलहाल राहत एजेंसियां मृतकों और लापता लोगों की वास्तविक संख्या की पुष्टि करने में जुटी हैं। वहीं इस त्रासदी ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि रोहिंग्या संकट का स्थायी समाधान आखिर कब निकलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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E20 Car

E20 Car Complaint: सर्विस के बाद भी नहीं ठीक हुई कार, कोर्ट बोला- नई Car दो या पूरा पैसा वापस करो

नई कार खरीदते समय हर ग्राहक की उम्मीद होती है कि उसे लंबे समय तक बिना किसी परेशानी के बेहतर ड्राइविंग अनुभव मिलेगा। लेकिन एक E20 Car मालिक के लिए यह सपना जल्द ही परेशानी में बदल गया। नई गाड़ी खरीदने के कुछ ही दिनों बाद कार बार-बार चलते-चलते बंद होने लगी। कई बार सर्विस सेंटर के चक्कर लगाने और शिकायत दर्ज कराने के बावजूद समस्या खत्म नहीं हुई। आखिरकार मामला उपभोक्ता आयोग (Consumer Court) पहुंचा, जहां ग्राहक के पक्ष में ऐसा फैसला आया, जो भविष्य में दूसरे वाहन खरीदारों के लिए भी मिसाल बन सकता है। क्या था पूरा मामला? जानकारी के मुताबिक, ग्राहक ने कंपनी की नई E20 Compatible Car खरीदी थी। शुरुआत में सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन कुछ समय बाद कार में तकनीकी दिक्कतें आने लगीं। वाहन अचानक बंद हो जाता था और ड्राइविंग के दौरान कई बार इंजन से जुड़ी समस्याएं सामने आईं। ग्राहक ने अधिकृत सर्विस सेंटर पर कई बार कार दिखाई। हर बार मरम्मत की गई, लेकिन कुछ दिनों बाद वही खराबी दोबारा सामने आ जाती थी। लगातार हो रही इस परेशानी से ग्राहक का भरोसा टूट गया और आखिरकार उसने न्याय के लिए Consumer Court का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने क्या माना? मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने रिकॉर्ड, सर्विस हिस्ट्री और दोनों पक्षों की दलीलों का अध्ययन किया। आयोग ने माना कि यदि नई कार में एक ही तरह की खराबी बार-बार आती रहे और कंपनी कई प्रयासों के बाद भी उसे स्थायी रूप से ठीक न कर पाए, तो इसे सेवा में कमी (Deficiency in Service) माना जाएगा। कोर्ट ने साफ कहा कि ग्राहक को केवल बार-बार सर्विस सेंटर भेजना समाधान नहीं है। नई गाड़ी खरीदने वाला व्यक्ति भरोसेमंद उत्पाद पाने का अधिकार रखता है। कोर्ट ने दिया बड़ा आदेश उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को निर्देश दिया कि वह ग्राहक को नई E20 कार उपलब्ध कराए या फिर वाहन की पूरी कीमत वापस करे। इसके अलावा, आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कंपनी गुणवत्ता के अनुरूप उत्पाद उपलब्ध नहीं करा सकती, तो ग्राहक को आर्थिक नुकसान उठाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। वाहन खरीदारों के लिए क्यों अहम है यह फैसला? यह फैसला सिर्फ एक ग्राहक की जीत नहीं माना जा रहा, बल्कि उन लाखों लोगों के लिए भी राहत की खबर है जो नई गाड़ी खरीदने के बाद लगातार तकनीकी समस्याओं से जूझते हैं। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी वाहन में बार-बार एक जैसी खराबी आती है और कंपनी उसे ठीक करने में नाकाम रहती है, तो उपभोक्ता कानून के तहत ग्राहक नई गाड़ी, रिफंड या अन्य उचित मुआवजे की मांग कर सकता है। E20 Car क्या होती है? E20 Car ऐसे इंजन के साथ तैयार की जाती है जो 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल के मिश्रण वाले ईंधन पर चल सकती है। सरकार पर्यावरण संरक्षण और आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से E20 Fuel को बढ़ावा दे रही है। हालांकि, इस मामले का संबंध E20 तकनीक से नहीं, बल्कि वाहन में लगातार आई तकनीकी खराबी और कंपनी की सेवा से जुड़ा है। अगर आपकी नई कार में भी ऐसी दिक्कत आए तो क्या करें? यदि नई कार बार-बार खराब हो रही है, तो हर सर्विस का जॉब कार्ड, बिल, शिकायत नंबर और कंपनी के साथ हुई बातचीत का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें। जरूरत पड़ने पर यही दस्तावेज Consumer Court में आपके सबसे मजबूत सबूत साबित हो सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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NEET Exam Leak

NEET Exam Leak: CBI Investigation में बड़ा खुलासा, लातूर Coaching से जुड़ा पूरा Paper Leak Network

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 Exam Leak मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने ऐसा खुलासा किया है, जिसने पूरे शिक्षा तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, महाराष्ट्र के लातूर में एक कोचिंग सेंटर संचालक के पास से बरामद 136 हस्तलिखित प्रश्नों में से 111 प्रश्न हूबहू NEET-UG 2026 की परीक्षा में पूछे गए। इस खुलासे के बाद साफ हो गया है कि यह मामला केवल संदेह तक सीमित नहीं था, बल्कि परीक्षा से पहले ही प्रश्नों की पहुंच कुछ लोगों तक हो चुकी थी। CBI की जांच में क्या सामने आया? CBI ने इस मामले में लातूर के रेणुकाई केमिस्ट्री क्लासेस के संचालक शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर को गिरफ्तार किया है। एजेंसी का दावा है कि आरोपी के मोबाइल फोन से केमिस्ट्री विषय के हस्तलिखित प्रश्नों की कई तस्वीरें मिलीं। जब इन सवालों का मिलान राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के मास्टर प्रश्नपत्र से किया गया, तो 136 में से 111 प्रश्न पूरी तरह मेल खाते पाए गए। जांच अधिकारियों के अनुसार, यह अब तक का सबसे मजबूत डिजिटल और दस्तावेजी सबूत माना जा रहा है। परीक्षा से पहले ही पहुंच गया था प्रश्नपत्र CBI की जांच में सामने आया कि आरोपी के मोबाइल में मौजूद इन तस्वीरों की तारीख 23 अप्रैल 2026 की है, जबकि NEET-UG परीक्षा 3 मई 2026 को आयोजित हुई थी। यानी परीक्षा से करीब 10 दिन पहले ही ये प्रश्न आरोपी के पास मौजूद थे। जांच एजेंसी का कहना है कि इससे यह संकेत मिलता है कि प्रश्नपत्र आधिकारिक परीक्षा से पहले ही लीक हो चुका था। कैसे चला पूरा खेल? जांच के मुताबिक, प्रश्नपत्र कथित तौर पर NTA से जुड़े एक पैनल सदस्य और अनुवादक के माध्यम से बाहर पहुंचा। इसके बाद इसे चुनिंदा लोगों तक पहुंचाया गया और हस्तलिखित नोट्स तैयार कर छात्रों को याद करवाया गया। CBI को यह भी जानकारी मिली है कि कुछ अभ्यर्थियों को कथित तौर पर लीक प्रश्नपत्र और उत्तर परीक्षा से पहले उपलब्ध कराए गए थे। पूरे मामले में कई राज्यों में फैले नेटवर्क की भूमिका की जांच जारी है। Telegram के जरिए लाखों रुपये में हुई डील जांच में यह भी सामने आया है कि लीक प्रश्नपत्र की PDF फाइलें कथित तौर पर Telegram के माध्यम से बेची गईं। इसके अलावा करीब 150 पन्नों का एक गेस पेपर भी कुछ छात्रों तक पहुंचाया गया, जिसमें सैकड़ों प्रश्न शामिल थे। जांच के दौरान इनमें से बड़ी संख्या में सवाल वास्तविक परीक्षा में पूछे गए पाए गए। CBI अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा कितने छात्रों को इसका फायदा पहुंचाया गया। अब तक कई गिरफ्तारियां पेपर लीक मामले में अब तक 13 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें कोचिंग संस्थानों से जुड़े लोग, छात्र और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े कुछ अन्य आरोपी शामिल हैं। जांच एजेंसी लगातार डिजिटल रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की फोरेंसिक जांच कर रही है। CBI का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। छात्रों की मेहनत पर उठे सवाल NEET परीक्षा हर साल लाखों छात्रों के मेडिकल कॉलेज में प्रवेश का सपना तय करती है। ऐसे में पेपर लीक जैसे मामलों ने छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। जो विद्यार्थी महीनों तक ईमानदारी से तैयारी करते हैं, उनके लिए ऐसी घटनाएं पूरी परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती हैं। फिलहाल मामले की सुनवाई अदालत में जारी है और CBI पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हुई है। जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि इस पेपर लीक में कितने लोग शामिल थे और इसके पीछे कितना बड़ा संगठित गिरोह काम कर रहा था। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ketan Agarwal

Pune Murder Case: Ketan Agarwal Case में नया अपडेट, Siya Goyal के परिवार की दुकान पर FDA Action

Ketan Agarwal Murder Case में हर दिन नए खुलासे सामने आ रहे हैं। इस बीच अब मुख्य आरोपी Siya Goyal के परिवार की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने पुणे के मार्केट यार्ड स्थित उनके परिवार की मसाले और ड्राई फ्रूट्स की दुकान के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए कारोबार बंद करने का नोटिस जारी किया है। हालांकि प्रशासन ने साफ किया है कि यह कार्रवाई हत्या मामले की जांच का हिस्सा नहीं है, बल्कि खाद्य सुरक्षा नियमों के कथित उल्लंघन के आधार पर की गई है। Pune में FDA की बड़ी कार्रवाई महाराष्ट्र FDA की टीम ने हाल ही में पुणे के मार्केट यार्ड स्थित एम/एस बीजी गोयल एंड कंपनी का निरीक्षण किया। जांच के दौरान अधिकारियों ने हल्दी पाउडर, तिल और सोया उत्पाद समेत कई खाद्य पदार्थों के नमूने जांच के लिए भेजे। निरीक्षण के दौरान करीब 4,172 किलोग्राम खाद्य सामग्री, जिसकी अनुमानित कीमत 8.14 लाख रुपये बताई गई है, जब्त कर ली गई। विभाग का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। क्यों मिला कारोबार बंद करने का नोटिस? FDA के मुताबिक निरीक्षण के दौरान कई अनियमितताएं सामने आईं। विभाग ने दावा किया कि दुकान के लाइसेंस से जुड़ी जरूरी जानकारी समय पर अपडेट नहीं की गई थी। इसके अलावा कुछ उत्पादों की लेबलिंग में कमियां मिलीं और खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की आशंका भी जताई गई। इन्हीं कारणों के आधार पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (FSS Act) के तहत प्रतिष्ठान को अगले आदेश तक कारोबार बंद रखने का नोटिस जारी किया गया है। क्या Murder Case से जुड़ी है यह कार्रवाई? इस कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि FDA अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि दुकान के खिलाफ उठाया गया कदम केतन अग्रवाल हत्याकांड से जुड़ा नहीं है। यह केवल खाद्य सुरक्षा नियमों और लाइसेंस संबंधी प्रक्रियाओं के पालन को लेकर की गई प्रशासनिक कार्रवाई है। उधर, केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच पुणे पुलिस अपनी अलग प्रक्रिया के तहत कर रही है। आखिर क्या है Ketan Agarwal Murder Case? पुणे के युवा रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की जून 2026 में लोहागढ़ किले पर ट्रेकिंग के दौरान मौत हो गई थी। शुरुआत में इसे एक हादसा माना गया, लेकिन पुलिस जांच में मामला हत्या का निकला। पुलिस का आरोप है कि केतन की मंगेतर Siya Goyal और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने मिलकर पहले पूरी साजिश रची और फिर ट्रेकिंग के दौरान उन्हें खाई में धक्का देकर हत्या कर दी। दोनों आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं और मामले की जांच जारी है। गुपचुप शादी के दावे भी चर्चा में इस हाई-प्रोफाइल केस के बीच ऐसी खबरें भी सामने आईं कि सिया गोयल और चेतन चौधरी ने राजस्थान के खाटू श्याम मंदिर में गुपचुप शादी की थी। इन दावों की पुष्टि के लिए पुणे पुलिस ने मंदिर पहुंचकर सीसीटीवी फुटेज और अन्य रिकॉर्ड की जांच की। हालांकि अब तक पुलिस को ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला है, जिससे इन दावों की पुष्टि हो सके। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sonam Wangchuk

Sonam Wangchuk Protest: भूख हड़ताल के बीच Delhi High Court का बड़ा बयान, सरकार को जारी किया नोटिस

लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) की भूख हड़ताल अब कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गई है। लगातार बिगड़ती सेहत के बीच मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा, जहां अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि “जिंदगी अनमोल है और उसकी हर हाल में रक्षा की जानी चाहिए।” कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार से पूछा है कि वांगचुक की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। बिगड़ती तबीयत पर कोर्ट ने जताई गंभीर चिंता सोनम वांगचुक की ओर से दायर जनहित याचिका (PIL) में कहा गया कि लंबे समय से जारी भूख हड़ताल का उनकी सेहत पर गंभीर असर पड़ रहा है। याचिका में मांग की गई कि उन्हें तुरंत बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए और जरूरत पड़ने पर अस्पताल में भर्ती कर इलाज कराया जाए। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी नागरिक का जीवन सर्वोच्च महत्व रखता है। अदालत ने केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी करते हुए विस्तृत जवाब मांगा है कि वांगचुक की स्वास्थ्य निगरानी और इलाज के लिए क्या व्यवस्था की गई है। डॉक्टरों ने दी स्वास्थ्य को लेकर चेतावनी मेडिकल टीम के मुताबिक, लगातार अनशन के कारण सोनम वांगचुक का वजन काफी कम हो चुका है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि लंबे समय तक भोजन नहीं लिया गया तो शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल डॉक्टर नियमित रूप से उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रहे हैं। अनशन जारी रखने पर अड़े सोनम वांगचुक स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती चिंता के बावजूद सोनम वांगचुक ने फिलहाल भूख हड़ताल खत्म करने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर सरकार की ओर से ठोस पहल नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने अपने समर्थकों से भी शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन में शामिल रहने और आगामी कार्यक्रमों में भाग लेने की अपील की है। वांगचुक का कहना है कि उनका संघर्ष किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि जनहित के मुद्दों को उठाने के लिए है। क्या है पूरा मामला? सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनका आंदोलन शिक्षा व्यवस्था और अन्य सार्वजनिक मुद्दों से जुड़ी मांगों को लेकर चल रहा है। इस बीच देशभर के कई सामाजिक संगठनों, छात्रों और विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियों ने भी उनके आंदोलन का समर्थन किया है। अगली सुनवाई पर टिकी हैं निगाहें दिल्ली हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब इस मामले पर सभी की नजर अगली सुनवाई पर है। एक तरफ अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी व्यक्ति के जीवन की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, वहीं दूसरी ओर सोनम वांगचुक अपनी मांगों पर कायम हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार के जवाब और अदालत के अगले आदेश इस पूरे मामले की दिशा तय कर सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rath Yatra 2026

Rath Yatra 2026: अहमदाबाद में बदले सुरक्षा इंतजाम, हाथियों के पैर बांधकर निकाली यात्रा; Puri में निभेगी सदियों पुरानी रस्म

Rath Yatra 2026: भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा देशभर में आस्था और उत्साह के साथ मनाई जा रही है। गुजरात के अहमदाबाद और ओडिशा के पुरी में इस बार भी लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन के लिए उमड़े। हालांकि अहमदाबाद की रथयात्रा इस बार एक खास वजह से rerचर्चा में रही। पिछले साल हाथियों के बेकाबू होने की घटना के बाद प्रशासन ने सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यात्रा में शामिल हाथियों के पैरों को हल्के बंधन में रखा। दूसरी ओर पुरी में सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार गजपति महाराज सोने की झाड़ू से भगवान के रथों की सफाई करेंगे। पिछले साल की घटना के बाद बदली तैयारी अहमदाबाद की जगन्नाथ रथयात्रा देश की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक रथयात्राओं में से एक मानी जाती है। लेकिन वर्ष 2025 की यात्रा के दौरान तीन हाथी अचानक बेकाबू हो गए थे। भीड़ में अफरा-तफरी मच गई थी और कई श्रद्धालु घायल हुए थे। घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल उठे थे। इसी अनुभव से सीख लेते हुए इस बार प्रशासन, वन विभाग और पशु चिकित्सकों ने मिलकर विस्तृत सुरक्षा योजना तैयार की। हाथियों के आगे और पीछे के पैरों को हल्की रस्सियों से नियंत्रित रखा गया ताकि वे भीड़ में अचानक तेज़ी से न दौड़ सकें। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम केवल एहतियात के तौर पर उठाया गया है और इसमें पशुओं की सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा गया। सुरक्षा व्यवस्था रही हाई अलर्ट पर रथयात्रा के पूरे मार्ग पर हजारों पुलिसकर्मी तैनात किए गए। ड्रोन कैमरों, सीसीटीवी, कंट्रोल रूम और क्विक रिस्पॉन्स टीम के जरिए हर गतिविधि पर नजर रखी गई। हाथियों के साथ अनुभवी महावत, वन विभाग की टीम और पशु चिकित्सक भी लगातार मौजूद रहे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जगह-जगह मेडिकल कैंप, एम्बुलेंस, पेयजल केंद्र और हेल्प डेस्क बनाए गए। ट्रैफिक को भी पहले से तय डायवर्जन प्लान के अनुसार संचालित किया गया ताकि यात्रा बिना किसी बाधा के संपन्न हो सके। Puri में निभेगी ‘छेरा पहंरा’ की अनोखी परंपरा ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सदियों पुरानी संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है। यहां रथयात्रा के दौरान गजपति महाराज ‘छेरा पहंरा’ नामक विशेष अनुष्ठान करते हैं। इस रस्म में वे सोने की झाड़ू से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथों की सफाई करते हैं और चंदन मिश्रित पवित्र जल का छिड़काव करते हैं। यह परंपरा इस बात का संदेश देती है कि भगवान के सामने हर व्यक्ति समान है। चाहे वह राजा हो या आम भक्त, सभी भगवान के सेवक हैं। लाखों श्रद्धालुओं ने लगाए जयकारे अहमदाबाद और पुरी दोनों शहरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। भगवान जगन्नाथ के जयघोष के बीच भक्तों ने रथों को खींचकर अपनी आस्था व्यक्त की। पूरे वातावरण में भक्ति, उत्साह और पारंपरिक संस्कृति की झलक साफ दिखाई दी। आस्था के साथ सुरक्षा का भी संदेश इस बार की रथयात्रा ने दो महत्वपूर्ण संदेश दिए। पहला, धार्मिक परंपराओं का सम्मान और दूसरा, श्रद्धालुओं की सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं। अहमदाबाद में पिछले साल की घटना से सीख लेकर किए गए इंतजाम और पुरी में सदियों से चली आ रही परंपराओं का निर्वहन, दोनों ने इस आयोजन को और भी खास बना दिया। यही वजह है कि जगन्नाथ रथयात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का भी प्रतीक मानी जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट से जुड़े हजारों दस्तावेज लीक होने का दावा, संवेदनशील डेटा डार्क वेब पर होने की आशंका

नई दिल्ली। भारत के सबसे बड़े कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट से जुड़े हजारों दस्तावेज लीक होने का दावा सामने आया है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ‘वर्ल्ड लीक्स’ (World Leaks) नामक हैकर समूह ने डार्क वेब पर इस परियोजना से जुड़े बड़ी संख्या में दस्तावेज अपलोड करने का दावा किया है। दावा किए गए दस्तावेजों में प्लांट के कुछ हिस्सों के ब्लूप्रिंट, सप्लायरों की सूची, कंट्रोल रूम से संबंधित जानकारी, निरीक्षण रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी दस्तावेज शामिल हैं। बताया जा रहा है कि संबंधित सर्वर मई 2026 में हैक हुआ था और जून में डेटा लीक होने का दावा किया गया। यह मामला अब सार्वजनिक रूप से सामने आया है। रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने स्वीकार किया है कि उसके ठेके से जुड़े कुछ डेटा जिस थर्ड-पार्टी डेटा सेंटर कंपनी योट्टा (Yotta) के सर्वर पर संग्रहीत थे, उसमें साइबर सुरक्षा से जुड़ी घटना हुई है। कंपनी ने इसकी जानकारी संबंधित सरकारी एजेंसियों को दे दी है। कैसे हुआ कथित डेटा लीक? उपलब्ध जानकारी के अनुसार घटनाक्रम इस प्रकार है— फिलहाल न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL), रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) इस पूरे मामले की जांच और समीक्षा कर रहे हैं। कितना गंभीर हो सकता है यह मामला? परमाणु सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डार्क वेब पर साझा किए गए दस्तावेज वास्तविक और प्रमाणिक हैं, तो इनके जरिए कोई भी हमलावर प्लांट के सपोर्ट सिस्टम, सप्लाई चेन और सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत जानकारी हासिल कर सकता है। इससे भविष्य में साइबर हमलों या अन्य सुरक्षा जोखिमों की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि, अभी तक संबंधित एजेंसियों ने सार्वजनिक रूप से यह पुष्टि नहीं की है कि लीक हुए सभी दस्तावेज वास्तविक हैं या नहीं। 2019 में भी हुआ था साइबर हमला यह पहली बार नहीं है जब कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट साइबर हमले की खबरों में आया हो। वर्ष 2019 में भी प्लांट के प्रशासनिक नेटवर्क में उत्तर कोरिया से जुड़े एक हैकर समूह का मैलवेयर मिलने की पुष्टि हुई थी। उस समय NPCIL ने स्पष्ट किया था कि संयंत्र की संचालन प्रणाली (Operational System) प्रभावित नहीं हुई थी। जानिए इस मामले से जुड़े अहम सवाल और जवाब डार्क वेब क्या है? डार्क वेब इंटरनेट का वह हिस्सा है, जिसे सामान्य ब्राउज़र जैसे Chrome, Edge या Safari से एक्सेस नहीं किया जा सकता। इसे देखने के लिए विशेष ब्राउज़र, जैसे Tor Browser, की आवश्यकता होती है। सप्लाई चेन अटैक क्या होता है? जब साइबर अपराधी किसी संस्था पर सीधे हमला करने के बजाय उसके ठेकेदार, सॉफ्टवेयर प्रदाता या डेटा सेंटर को निशाना बनाते हैं, तो इसे सप्लाई चेन अटैक कहा जाता है। इसके जरिए मुख्य संस्था तक पहुंचना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है। हैकर्स डेटा डार्क वेब पर क्यों डालते हैं? विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे फिरौती मांगना, डेटा बेचना, जासूसी करना, अपनी हैकिंग क्षमता का प्रदर्शन करना या भविष्य के साइबर हमलों के लिए जानकारी साझा करना जैसे उद्देश्य हो सकते हैं। कंट्रोल रूम का लेआउट लीक होने से क्या खतरा है? यदि किसी संवेदनशील संस्थान के कंट्रोल रूम या तकनीकी ढांचे की जानकारी सार्वजनिक हो जाए, तो संभावित हमलावर सुरक्षा व्यवस्था और महत्वपूर्ण प्रणालियों की बेहतर समझ हासिल कर सकते हैं। इससे भविष्य में साइबर हमलों या घुसपैठ की योजना बनाने में मदद मिल सकती है। भारत में न्यूक्लियर प्लांट की साइबर सुरक्षा कौन देखता है? भारत में परमाणु संयंत्रों की साइबर सुरक्षा की जिम्मेदारी NPCIL, CERT-In, NCIIPC और AERB जैसी संस्थाओं के पास होती है, जो समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट और निगरानी करती हैं। नोट: फिलहाल दस्तावेजों के लीक होने और उनकी प्रामाणिकता को लेकर जांच जारी है। संबंधित एजेंसियों ने मामले की समीक्षा शुरू कर दी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे। देश-दुनिया, तकनीक और सुरक्षा से जुड़ी ताजा खबरों के लिए विजिट करें: deshharpal.com
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Donald Trump

रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिका की बड़ी तैयारी, भारत-चीन समेत 5 देशों पर 100% टैरिफ का प्रस्ताव

डेस्क | देशहरपल अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी सीनेट में एक नया बिल पेश किया गया है, जिसमें भारत, चीन, हंगरी, स्लोवाकिया और अजरबैजान से आने वाले सामान पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। इस बिल का उद्देश्य रूस की तेल आय को कम करना और यूक्रेन युद्ध के लिए उसकी आर्थिक क्षमता को कमजोर करना बताया गया है। बिल के तहत केवल टैरिफ ही नहीं, बल्कि रूस के ऊर्जा, वित्तीय और रक्षा क्षेत्र पर भी नए प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। शुरुआती मसौदे में 500% टैरिफ का सुझाव था, जिसे बाद में घटाकर 100% कर दिया गया। रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर बढ़ेगा दबाव यदि यह बिल कानून बन जाता है, तो अमेरिका पहली बार किसी देश पर सिर्फ इसलिए अतिरिक्त टैरिफ लगाएगा क्योंकि वह रूस से तेल खरीद रहा है। अमेरिकी सांसदों का मानना है कि इससे रूस की कमाई घटेगी और उस पर युद्ध रोकने का दबाव बढ़ेगा। यूरोपीय देशों को मिलेगी राहत बिल में 15 यूरोपीय देशों को प्रस्तावित 100% टैरिफ से छूट देने का प्रावधान है। अमेरिका का कहना है कि ये देश रूस से 15% से कम प्राकृतिक गैस खरीदते हैं और लगातार अपनी निर्भरता भी कम कर रहे हैं। डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा कि यह बिल यूरोपीय सहयोगियों के खिलाफ नहीं, बल्कि उन देशों के लिए है जो अभी भी रूस के ऊर्जा कारोबार को आर्थिक सहारा दे रहे हैं। दोनों दलों का समर्थन इस प्रस्ताव को रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों दलों का समर्थन मिला है। अमेरिकी राजनीति में ऐसे विधेयक को बाइपार्टिसन बिल कहा जाता है। हालांकि, इसे कानून बनने के लिए अभी सीनेट और प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) से मंजूरी और फिर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर जरूरी होंगे। ग्राहम की पहल, ट्रम्प का समर्थन यह बिल सबसे पहले रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने अप्रैल 2025 में पेश किया था। 11 जुलाई को ग्राहम के निधन से पहले उन्होंने कहा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस बिल को आगे बढ़ाने के पक्ष में हैं। व्हाइट हाउस में ट्रम्प ने भी कहा कि यह ग्राहम के सम्मान से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है और इसके कानून बनने की अच्छी संभावना है। अमेरिका रूस पर इतना सख्त क्यों? अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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CBSE की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, सरकार और बोर्ड से 10 दिन में मांगा जवाब

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की नई थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि “कोई भी भाषा सीखना कभी बेकार नहीं जाता।” हालांकि, नीति को लागू करने में सामने आ रही व्यावहारिक चुनौतियों को देखते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार, CBSE और संबंधित पक्षों से 10 दिन के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई को होगी। यह नीति शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू की गई है। इसके तहत छात्रों को दो भारतीय भाषाएं और एक विदेशी भाषा पढ़नी होगी। इससे कई छात्रों को पहले से पढ़ी जा रही भाषाओं में बदलाव करना पड़ सकता है। क्या है विवाद? याचिकाकर्ताओं का कहना है कि CBSE ने पर्याप्त तैयारी के बिना नई भाषा नीति लागू कर दी है। उनके मुताबिक कई स्कूलों में संबंधित भाषाओं के शिक्षक, पाठ्यपुस्तकें और आवश्यक शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध नहीं हैं, जिससे छात्रों और शिक्षकों दोनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी से जुड़े अहम सवाल और जवाब 1. मामला क्या है? सुप्रीम कोर्ट में CBSE के उस नियम को चुनौती दी गई है, जिसके तहत 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य किया गया है। इनमें कम-से-कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी है। हालांकि, CBSE ने 6 जून को संशोधित दिशा-निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया था कि इस वर्ष कक्षा 10 के छात्रों को तीसरी भाषा (R3) की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। 2. नए नियम में क्या बदलाव हुआ है? पहले कई छात्र अंग्रेजी के साथ एक भारतीय और एक विदेशी भाषा (जैसे फ्रेंच या जर्मन) पढ़ते थे। नए नियम के अनुसार अब तीन भाषाओं में से कम-से-कम दो भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य है। विदेशी भाषा तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में ही चुनी जा सकेगी। 3. याचिका किसने दायर की? यह याचिका छात्र यशिका भंडारी, अमनदीप कौर और अर्पण रॉय चौधरी की ओर से दायर की गई है। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर, मुकुल रोहतगी और गोपाल शंकरनारायणन ने पैरवी की। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की। 4. याचिकाकर्ताओं की मुख्य आपत्ति क्या है? याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नई व्यवस्था अचानक लागू कर दी गई। कई भारतीय भाषाओं की किताबें उपलब्ध नहीं हैं और अधिकांश स्कूलों में प्रशिक्षित शिक्षक भी नहीं हैं। ऐसे में छात्रों और स्कूलों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। 5. किताबों को लेकर क्या दलील दी गई? सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कहा कि 22 भारतीय भाषाओं में से फिलहाल केवल तीन भाषाओं की पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध हैं। ऐसे में बाकी भाषाओं की पढ़ाई शुरू करना व्यवहारिक रूप से कठिन होगा। 6. शिक्षकों की कमी पर क्या कहा गया? याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि नई भारतीय भाषाएं पढ़ाने के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की आवश्यकता होगी, लेकिन इतने कम समय में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति और प्रशिक्षण संभव नहीं है। 7. क्या विदेशी भाषाएं बंद हो जाएंगी? नहीं। छात्र फ्रेंच, जर्मन, जापानी जैसी विदेशी भाषाएं पढ़ सकते हैं, लेकिन इसके साथ उन्हें दो भारतीय भाषाएं भी पढ़नी होंगी। विदेशी भाषा तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में होगी। 8. क्या तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा होगी? नहीं। CBSE ने स्पष्ट किया है कि कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा (R3) का अलग बोर्ड एग्जाम नहीं होगा, ताकि छात्रों पर अतिरिक्त परीक्षा का दबाव न बढ़े। 9. अब आगे क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार केंद्र सरकार, CBSE और NCERT अपना जवाब दाखिल करेंगे। इसके बाद 29 जुलाई को अदालत इस मामले में आगे की सुनवाई करेगी। नई शिक्षा नीति 2020 क्या है? भारत सरकार ने 29 जुलाई 2020 को नई शिक्षा नीति (NEP 2020) को मंजूरी दी थी। यह 34 वर्षों बाद देश की शिक्षा व्यवस्था में किया गया सबसे बड़ा बदलाव माना जाता है। इससे पहले शिक्षा नीति 1986 में लागू हुई थी, जिसे 1992 में संशोधित किया गया था। नई शिक्षा नीति का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली को 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना, छात्रों में व्यावहारिक ज्ञान और कौशल विकसित करना है। केंद्र सरकार ने इसे चरणबद्ध तरीके से 2030 तक लागू करने का लक्ष्य रखा है। चूंकि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए इसे लागू करने में केंद्र और राज्य सरकारों दोनों की भूमिका होती है। देश, शिक्षा और करियर से जुड़ी ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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Crime

Maharashtra Crime: रिश्ते का खौफनाक अंत, पत्नी की हत्या के बाद पति ने खुद Police के सामने कबूला गुनाह

महाराष्ट्र से सामने आई एक दर्दनाक Crime News ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है। यहां एक पति पर अपनी पत्नी की हत्या करने का आरोप लगा है। हैरानी की बात यह है कि वारदात के बाद आरोपी पति पत्नी के शव को कार में लेकर कई घंटों तक घूमता रहा और फिर खुद पुलिस स्टेशन पहुंचकर सरेंडर कर दिया। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है। विवाद के बाद खौफनाक वारदात पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, पति-पत्नी के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। इसी दौरान मामला इतना गंभीर हो गया कि पति ने कथित तौर पर पत्नी की हत्या कर दी। वारदात के बाद आरोपी ने शव को कार में रखा और काफी समय तक इधर-उधर घूमता रहा। इसके बाद उसने पुलिस के सामने पहुंचकर घटना की जानकारी दी और आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस जांच में जुटी, सामने आएंगे कई सवाल घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। पुलिस अब हत्या के कारणों की जांच कर रही है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि पति-पत्नी के बीच विवाद की असली वजह क्या थी और घटना किस परिस्थिति में हुई। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके। परिवार और इलाके में छाया मातम इस घटना ने मृतका के परिवार और आसपास के लोगों को सदमे में डाल दिया है। एक घरेलू विवाद का इतना गंभीर रूप लेना लोगों के लिए चिंता का विषय बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस घटना ने पूरे इलाके को हिला दिया है। पुलिस अब मामले से जुड़े हर पहलू की गहराई से जांच कर रही है। आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू पुलिस ने आरोपी पति के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। आगे की कार्रवाई जांच और उपलब्ध सबूतों के आधार पर की जाएगी। महाराष्ट्र की इस घटना ने एक बार फिर घरेलू विवादों और रिश्तों में बढ़ते तनाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sugar

Sugar Rate Hike: त्योहारों से पहले चीनी के दाम बढ़े, Blinkit-Swiggy पर खरीदना हुआ Limited

चीनी (Sugar), जो हर घर की रसोई की रोजमर्रा की जरूरत है, इन दिनों लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है। पिछले कुछ हफ्तों में चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसी बीच Blinkit, Swiggy Instamart, BigBasket और D-Mart जैसे रिटेल और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर चीनी की खरीद को लेकर लिमिट लगाई गई है। कई जगहों पर ग्राहक एक बार में 3 से 5 किलो तक ही चीनी खरीद पा रहे हैं। यानी अगर घर में ज्यादा मात्रा में चीनी खरीदने की जरूरत है, तो एक साथ बड़ी खरीदारी करना अब आसान नहीं है। Sugar Price: एक महीने में तेजी से बढ़े दाम Sugar की कीमतों में हालिया तेजी ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब ₹48 प्रति किलो के आसपास थी, जो अगस्त में बढ़कर ₹55 से ऊपर पहुंच गई। इसके बाद कुछ बाजारों में कीमतें और ऊपर गई हैं। शहर और बाजार के हिसाब से कीमतों में अंतर जरूर है, लेकिन जिस रफ्तार से दाम बढ़े हैं, उसका असर घर के मासिक बजट पर साफ दिखाई दे रहा है। Online Grocery पर क्यों लगाई गई खरीद Limit? Blinkit और Swiggy Instamart जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर खरीदारी की लिमिट लगाए जाने के पीछे मुख्य वजह उपलब्ध स्टॉक को संतुलित रखना मानी जा रही है। त्योहारी सीजन में चीनी की मांग अचानक बढ़ जाती है। मिठाइयों से लेकर घर में बनने वाले पकवानों तक, इस दौरान चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसे में कंपनियां ज्यादा मात्रा में खरीदारी को रोककर स्टॉक को ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, यह लिमिट हर जगह एक जैसी नहीं है। कुछ स्थानों पर 5 किलो तक की खरीद की अनुमति है, जबकि कुछ जगहों पर इससे कम मात्रा की सीमा दिखाई दे रही है। चीनी महंगी होने की क्या है वजह? चीनी के दाम बढ़ने के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। घरेलू उत्पादन में कमी, मौसम से जुड़ी परेशानियां, बढ़ती मांग और बाजार में स्टॉक को लेकर गतिविधियां कीमतों पर दबाव बना रही हैं। त्योहारी सीजन भी इस समय एक बड़ा फैक्टर है। रक्षाबंधन के बाद अब आने वाले त्योहारों में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने की उम्मीद है। इसका सीधा असर चीनी की खपत पर पड़ सकता है। सरकार ने Duty-Free Sugar Import को दी मंजूरी बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने और घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के Duty-Free Import की अनुमति दी है। सरकार का लक्ष्य बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों पर दबाव कम करना है। इसके अलावा बड़े थोक खरीदारों के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा में भी बदलाव किया गया है। इससे बाजार में जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करने की गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है। आम लोगों के लिए क्या मतलब? फिलहाल इसका सबसे सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो महीने का राशन एक साथ खरीदते हैं। जहां दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खरीद सीमा लागू है, वहां लोगों को जरूरत के हिसाब से छोटी मात्रा में चीनी खरीदनी पड़ सकती है। दूसरी तरफ, सरकार की ओर से सप्लाई बढ़ाने के कदमों के बाद बाजार में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। अगर नई चीनी समय पर बाजार में पहुंचती है और त्योहारी मांग के मुताबिक स्टॉक उपलब्ध रहता है, तो कीमतों में आगे राहत मिल सकती है। Sugar Price पर आगे रहेगी नजर चीनी के बढ़ते दाम इस समय सिर्फ घरेलू बजट का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि आने वाले त्योहारी सीजन के लिए भी अहम हैं। सरकार, मिलों और रिटेल कंपनियों के फैसलों पर अब बाजार की नजर रहेगी। फिलहाल ग्राहकों के लिए बेहतर यही है कि जरूरत के मुताबिक ही खरीदारी करें और अलग-अलग दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कीमतों की तुलना कर लें। आने वाले दिनों में सप्लाई की स्थिति साफ होने के साथ चीनी के दाम में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
Gold-Silver

Gold-Silver Price: त्योहार से पहले मिली राहत, सोना-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट

Gold-Silver Price Today: रक्षाबंधन की खरीदारी के बीच सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए बाजार से राहत वाली खबर आई है। 27 अगस्त 2026 को सोने और चांदी दोनों के भाव में गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम सस्ता होकर ₹1,58,477 पर आ गया। वहीं, 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 घटकर करीब ₹2,40,168 रह गया। त्योहार से ठीक पहले कीमतों में आई इस कमी से उन लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है, जो राखी के मौके पर बहन या परिवार के लिए सोने-चांदी की ज्वेलरी खरीदने का मन बना रहे हैं। Gold Price Today: सोने के भाव में ₹2,860 की गिरावट 27 अगस्त को 24 कैरेट सोने की कीमत में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली। IBJA आधारित आंकड़ों के अनुसार, सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम टूटकर ₹1,58,477 पर पहुंच गया। वहीं, 23 कैरेट सोना करीब ₹1,57,842, 22 कैरेट सोना लगभग ₹1,45,165 और 18 कैरेट सोना करीब ₹1,18,858 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर रहा। हालांकि, यहां एक बात ध्यान रखना जरूरी है कि शहर और ज्वेलर के हिसाब से Gold Rate थोड़ा अलग हो सकता है। ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और दूसरे शुल्क भी जुड़ते हैं। Silver Price Today: चांदी भी हुई ₹2,791 सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट आई है। 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 कम होकर करीब ₹2,40,168 पर आ गया। चांदी में पिछले दिनों तेजी देखने को मिली थी, इसलिए मौजूदा गिरावट के बावजूद इसका भाव काफी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में चांदी की मांग बढ़ने से इसकी कीमत पर भी असर पड़ सकता है। Raksha Bandhan से पहले क्यों खास है Gold-Silver Price? रक्षाबंधन के मौके पर लोग सिर्फ राखी और मिठाई ही नहीं खरीदते, बल्कि कई परिवार इस दिन सोने या चांदी की छोटी ज्वेलरी खरीदना भी पसंद करते हैं। ऐसे में त्योहार से एक दिन पहले Gold और Silver के दाम में आई गिरावट खरीदारों के लिए अच्छी खबर मानी जा रही है। अगर आप भी खरीदारी की तैयारी कर रहे हैं तो बाजार में जाने से पहले अपने शहर का ताजा रेट जरूर देख लें। ऑनलाइन दिखने वाला IBJA या बुलियन रेट और ज्वेलरी शॉप का अंतिम बिल एक जैसा होना जरूरी नहीं है। सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान सोने की ज्वेलरी खरीदते समय केवल Gold Rate देखना काफी नहीं है। बिल बनते समय मेकिंग चार्ज, GST और अन्य शुल्क जुड़ सकते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले ज्वेलर से पूरी कीमत का ब्रेकअप मांगना बेहतर रहेगा। साथ ही, सोने की शुद्धता के लिए BIS Hallmark जरूर जांचें। इससे आपको खरीदे जा रहे सोने की शुद्धता के बारे में भरोसा मिलता है। आगे क्या हो सकता है Gold और Silver का भाव? सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, ब्याज दरों की उम्मीद और निवेशकों की खरीदारी जैसे कई फैक्टर कीमती धातुओं के भाव को प्रभावित करते हैं। इसलिए आज आई गिरावट को देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि आने वाले दिनों में कीमतें लगातार नीचे जाएंगी। बाजार की चाल बदलने में ज्यादा समय नहीं लगता। Gold-Silver Price Today का सीधा अपडेट रक्षाबंधन से पहले 24 कैरेट Gold करीब ₹2,860 सस्ता होकर ₹1,58,477 प्रति 10 ग्राम और Silver करीब ₹2,791 गिरकर ₹2,40,168 प्रति किलो पर आ गई है। अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने जा रहे हैं, तो अंतिम खरीदारी से पहले अपने स्थानीय बाजार का लेटेस्ट रेट जरूर जांचें।
Raksha Bandhan

Raksha Bandhan 2026: राखी बांधने से पहले जान लें Bhadra का समय, ये है शुभ Muhurat

Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन के रिश्ते में प्यार, अपनापन और थोड़ी-सी नोकझोंक हमेशा बनी रहती है। इन्हीं खूबसूरत रिश्तों को सेलिब्रेट करने वाला रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। राखी को लेकर इस बार एक सवाल काफी लोगों के मन में है—27 अगस्त या 28 अगस्त, आखिर किस दिन भाई की कलाई पर राखी बांधना शुभ रहेगा? पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। Raksha Bandhan 2026 Date: 27 या 28 अगस्त? रक्षाबंधन सावन मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे के बाद शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे तक रहेगी। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए इसी दिन रक्षाबंधन मनाने की परंपरा रहेगी। यानी बहनें 28 अगस्त को भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। Rakhi Shubh Muhurat 2026: इस समय बांधें राखी 28 अगस्त को राखी बांधने के लिए सुबह का समय शुभ माना जा रहा है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार सुबह करीब 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का समय बताया गया है। हालांकि, शुभ मुहूर्त में शहर के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए अगर आप किसी खास शहर में हैं, तो वहां के पंचांग से समय जरूर मिला लें। Bhadra Kaal: इस बार नहीं होगी बड़ी परेशानी रक्षाबंधन पर भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता। यही वजह है कि हर साल राखी बांधने से पहले लोग भद्रा समाप्त होने का इंतजार करते हैं। इस बार राहत की बात यह है कि 28 अगस्त को राखी बांधने के प्रमुख समय में भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। ऐसे में बहनों को राखी बांधने के लिए भद्रा खत्म होने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। Raksha Bandhan 2026: एक नजर में पूरी जानकारी जानकारी विवरण रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार पर्व सावन पूर्णिमा पूर्णिमा शुरुआत 27 अगस्त की सुबह पूर्णिमा समाप्त 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे राखी बांधने का शुभ समय सुबह करीब 5:57 से 9:48 बजे तक भद्रा 28 अगस्त के प्रमुख राखी मुहूर्त में नहीं Rakhi बांधने की पूजा विधि रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करके भगवान का ध्यान करें और पूजा की तैयारी करें। राखी की थाली में रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, फूल, मिठाई और राखी रखें। भाई को आसन पर बैठाकर पहले तिलक लगाएं। इसके बाद अक्षत लगाकर आरती करें और शुभ मुहूर्त में उसकी कलाई पर राखी बांधें। फिर मिठाई खिलाकर भाई के सुखी और खुशहाल जीवन की कामना करें। भाई भी बहन को प्यार और सम्मान के साथ उपहार देता है और हर परिस्थिति में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प करता है। Raksha Bandhan का असली मतलब क्या है? राखी का धागा देखने में भले ही छोटा हो, लेकिन इसके पीछे छिपी भावना बहुत बड़ी है। बचपन में एक-दूसरे से लड़ने वाले भाई-बहन जब बड़े होते हैं तो यही रिश्ता सबसे मजबूत सहारा बन जाता है। रक्षाबंधन इसी भरोसे और अपनापन को फिर से महसूस करने का दिन है। इसलिए इस बार राखी बांधते समय सिर्फ मुहूर्त ही नहीं, बल्कि उस रिश्ते की मिठास को भी याद रखें, जो जिंदगी के हर पड़ाव पर साथ चलती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Kanpur

Kanpur Plane Crash: अचानक नीचे गिरा Training Plane, दो पायलटों की मौत

उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur) से गुरुवार को एक बेहद दुखद खबर सामने आई। गंगा बैराज के पास नत्थूपुरवा गांव के नजदीक एक Twin-Engine Training Aircraft खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में सवार इंस्ट्रक्टर पायलट और ट्रेनी पायलट की मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने इलाके को घेरकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। Training Flight के दौरान हुआ हादसा मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विमान ट्रेनिंग उड़ान पर था और इसी दौरान हादसे का शिकार हो गया। यह चार सीटों वाला ट्विन-इंजन विमान था। शुरुआती जानकारी में बताया गया कि विमान नीचे गिरने से पहले आसपास के लोगों ने तेज आवाज सुनी थी। हालांकि, उस आवाज की वजह क्या थी, इसे लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि विमान गंगा बैराज के करीब नत्थूपुरवा गांव के पास खुले खेत में गिरा। हादसा आबादी वाले इलाके से कुछ दूरी पर हुआ, जिसके बाद स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। हादसे के बाद मची अफरा-तफरी विमान के खेत में गिरने की सूचना मिलते ही पुलिस और इमरजेंसी टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। दुर्घटनाग्रस्त विमान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था और उसका मलबा खेत में बिखरा मिला। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित किया और दोनों पायलटों को मलबे से बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। शुरुआती रिपोर्टों में एक पायलट की मौत और दूसरे के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई थी। बाद में पुलिस अधिकारियों के हवाले से दोनों पायलटों की मौत की पुष्टि हुई। Crash की असली वजह अभी सामने नहीं आई कानपुर Plane Crash की वजह फिलहाल साफ नहीं है। शुरुआती स्तर पर विमान के अचानक नियंत्रण खोने और नीचे गिरने की बात सामने आई है, लेकिन तकनीकी खराबी, इंजन से जुड़ी समस्या या किसी अन्य कारण की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अधिकारियों की ओर से दुर्घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। विमान के मलबे, उड़ान से जुड़ी जानकारी और घटनास्थल से मिले सबूतों की जांच के बाद ही Crash की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी। Aviation Safety पर फिर उठे सवाल कानपुर में हुआ यह हादसा Flight Training के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल खड़े करता है। हालांकि, अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसा किस वजह से हुआ और क्या इसके पीछे कोई तकनीकी या संचालन संबंधी कारण था। फिलहाल प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर मौजूद हैं और मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। कानपुर विमान हादसे से जुड़ी नई जानकारी जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी। Kanpur Plane Crash Latest Update: गंगा बैराज के पास Training Aircraft के क्रैश होने से दो पायलटों की मौत ने इलाके में शोक का माहौल पैदा कर दिया है। हादसे की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही साफ होगी।
Share Market

Share Market Today: Sensex 77,250 के करीब, Nifty भी टूटा; जानें बाजार में क्यों आई गिरावट

भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) में गुरुवार, 27 अगस्त को कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty बढ़त के साथ खुले, लेकिन कुछ ही देर बाद बाजार की चाल बदल गई। बिकवाली बढ़ने से दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में पहुंच गए। सुबह 10:30 बजे Sensex 123.89 अंक की गिरावट के साथ 77,349.05 पर था, जबकि Nifty 24.60 अंक टूटकर 24,183.15 पर कारोबार कर रहा था। Sensex-Nifty पर बढ़ा दबाव गुरुवार की शुरुआत बाजार के लिए सकारात्मक रही। Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से निवेशकों को कुछ राहत मिली, लेकिन यह बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं पाई। Nifty 24,200 के स्तर के नीचे चला गया, वहीं Sensex भी शुरुआती बढ़त गंवाकर कमजोर हो गया। इससे पहले सुबह 10:13 बजे Reuters के आंकड़ों में Sensex 77,379.50 और Nifty 24,191.85 पर था। यानी उस समय दोनों इंडेक्स में हल्की गिरावट दर्ज की जा रही थी। FMCG और Media Shares में बिकवाली सेक्टोरल कारोबार की बात करें तो FMCG शेयरों पर दबाव नजर आया। शुरुआती कारोबार में Nifty FMCG इंडेक्स भी लाल निशान में था। इसके साथ ही Media शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। सुबह 10:30 बजे Nifty Media करीब 0.60 फीसदी नीचे 1,601.30 पर कारोबार कर रहा था। Media इंडेक्स इससे पहले लगातार दो कारोबारी सत्रों में बढ़त दर्ज कर चुका था। ऐसे में आज की गिरावट को कुछ हद तक मुनाफावसूली से भी जोड़कर देखा जा रहा है। HDFC Bank बना बाजार पर दबाव का बड़ा कारण आज बाजार में HDFC Bank का प्रदर्शन भी निवेशकों के रडार पर रहा। शेयर में करीब 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। Reuters के मुताबिक, अमेरिका में बैंक और उसके दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ दायर एक securities lawsuit की खबर के बाद शेयर पर दबाव बढ़ा। Upstox के अनुसार, HDFC Bank में बिकवाली के चलते Sensex दिन के ऊपरी स्तर से करीब 300 अंक नीचे आया, जबकि Nifty 24,200 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे फिसल गया। Global Market से मिले-जुले संकेत भारतीय बाजार को एक तरफ Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से सहारा मिला। Brent crude करीब 87.4 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया था। ईरान और ओमान के बीच Strait of Hormuz को लेकर बातचीत आगे बढ़ने की खबरों से तेल आपूर्ति को लेकर चिंता कुछ कम हुई है। दूसरी ओर, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों को लेकर बनी चिंता ने निवेशकों को थोड़ा सतर्क रखा। यही वजह रही कि एशियाई बाजारों में मजबूती के बावजूद भारतीय बाजार में तेजी टिक नहीं सकी। निवेशकों की नजर अब बाजार की अगली चाल पर फिलहाल घरेलू बाजार में तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। एक तरफ कच्चे तेल में नरमी और मजबूत ग्लोबल टेक्नोलॉजी संकेत सकारात्मक हैं, तो दूसरी तरफ HDFC Bank जैसे बड़े शेयरों में कमजोरी और सेक्टोरल बिकवाली बाजार पर दबाव बना रही है। ऐसे माहौल में Sensex और Nifty की आगे की दिशा, 24,200 के आसपास Nifty की चाल और प्रमुख सेक्टर्स में खरीदारी-बिकवाली पर निवेशकों की नजर रहेगी। बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय लेना बेहतर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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