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Karnataka Cabinet: कांग्रेस सरकार का बड़ा फैसला, 20 नेताओं को मिलेगा Minister पद

कर्नाटक की राजनीति में आज बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। राज्य की कांग्रेस सरकार में लंबे समय से अटका Cabinet Expansion अब होने जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 20 नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा। नए मंत्रियों के शपथ ग्रहण के साथ सरकार में खाली पड़े मंत्री पदों को भरने की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इस विस्तार को लेकर कांग्रेस के भीतर काफी समय से चर्चा चल रही थी। मुख्यमंत्री और पार्टी नेतृत्व के बीच कई दौर की बातचीत के बाद आखिरकार मंत्रियों के नामों पर सहमति बनी है। ऐसे में आज होने वाला शपथ ग्रहण समारोह कर्नाटक कांग्रेस के लिए काफी अहम माना जा रहा है। 20 नेताओं को मिल सकती है मंत्री पद की जिम्मेदारी मंत्रिमंडल विस्तार में कुल 20 नेताओं के नाम सामने आए हैं। इनमें कुछ अनुभवी चेहरे हैं तो कई ऐसे नेता भी हैं जिन्हें पहली बार सरकार में अहम जिम्मेदारी मिलने जा रही है। बताई जा रही सूची में पीएम नरेंद्रस्वामी, शिवराज तंगडागी, रुद्रप्पा लमाणी, केएस बसवन्तप्पा, बी. नागेंद्र, टी. रघुमूर्ति, बीजेड जमीर अहमद खान, रिजवान अरशद, संतोष लाड, मधु बंगारप्पा, पुत्तरंगशेट्टी, मंकाला वैद्य, डॉ. अजय सिंह, एन. चालुवराय स्वामी, केएम शिवलिंगे गौड़ा, एचसी बालकृष्ण, गायत्री शांतिगौड़ा, बसवराज रायरेड्डी, विजय आनंद काशप्पनावर और लक्ष्मण सावदी के नाम शामिल हैं। इन नामों से साफ है कि पार्टी ने मंत्रिमंडल में अलग-अलग क्षेत्रों और सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश की है। महिला प्रतिनिधित्व को लेकर भी पार्टी ने एक नाम शामिल किया है। विधानसभा Speaker को लेकर भी तस्वीर साफ कैबिनेट विस्तार के साथ कर्नाटक विधानसभा के Speaker पद को लेकर भी बड़ा फैसला सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार जी.एस. पाटिल को विधानसभा अध्यक्ष बनाया जा सकता है। वहीं ए.एस. पोन्नन्ना को विधानसभा उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा है। विधानसभा अध्यक्ष का पद खाली होने के बाद से ही नए नाम को लेकर अटकलें चल रही थीं। अब सरकार ने विधानसभा के आगामी सत्र से पहले इस पद को लेकर भी तस्वीर साफ करने की तैयारी कर ली है। Congress के लिए क्यों अहम है Cabinet Expansion? कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के लिए यह सिर्फ मंत्रियों की संख्या बढ़ाने का फैसला नहीं है। इसके पीछे कई राजनीतिक समीकरण भी जुड़े हैं। लंबे समय से मंत्री पद की उम्मीद लगाए बैठे विधायकों को जगह देना पार्टी के लिए जरूरी था। मंत्रिमंडल में नए चेहरों को शामिल करने से पार्टी के अंदर असंतोष कम करने की कोशिश भी मानी जा रही है। साथ ही अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों को प्रतिनिधित्व देकर संगठनात्मक संतुलन बनाने पर भी जोर दिया गया है। विधानसभा सत्र से पहले बड़ा फैसला कर्नाटक विधानसभा का मानसून सत्र भी जल्द शुरू होने वाला है। ऐसे में उससे पहले मंत्रिमंडल का विस्तार सरकार के लिए काफी महत्वपूर्ण है। नए मंत्रियों के आने के बाद विभागों का बंटवारा भी बड़ा मुद्दा होगा। शपथ ग्रहण के बाद सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि किस नेता को कौन-सा मंत्रालय मिलता है। Portfolio Allocation से यह भी साफ होगा कि सरकार किन क्षेत्रों को प्राथमिकता देने जा रही है। अब आगे क्या? कैबिनेट विस्तार के बाद कर्नाटक सरकार का फोकस आगामी विधानसभा सत्र और प्रशासनिक कामकाज पर रहेगा। 20 नए मंत्रियों के शामिल होने से सरकार को अपने कामकाज को और गति देने की उम्मीद है। फिलहाल कर्नाटक की राजनीति में सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की है कि नए मंत्रियों को कौन-कौन से विभाग मिलेंगे। शपथ ग्रहण के बाद विभागों के बंटवारे से सरकार की आगे की राजनीतिक और प्रशासनिक रणनीति की तस्वीर और साफ हो जाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Monsoon

Monsoon Update: उत्तराखंड में Landslide से Highway बंद, UP में सड़कों पर नाव

मानसून (Monsoon) की बारिश ने देश के कई राज्यों में हालात बिगाड़ दिए हैं। कहीं पहाड़ दरकने से रास्ते बंद हो गए हैं तो कहीं बारिश का पानी सड़कों पर जमा होने के कारण लोगों की आवाजाही मुश्किल हो गई है। उत्तराखंड में Landslide के चलते हाईवे पर यातायात प्रभावित हुआ है। छत्तीसगढ़ में बारिश और तेज बहाव के बीच पुल टूटने से लोगों की परेशानी बढ़ गई। वहीं उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में जलभराव इतना ज्यादा है कि सड़कों पर नाव चलाने की नौबत आ गई है। बिहार और झारखंड में आकाशीय बिजली भी जानलेवा साबित हुई है, जहां अलग-अलग घटनाओं में 10 लोगों की मौत की खबर है। उत्तराखंड में Landslide, Highway पर थमी रफ्तार उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के बीच Landslide की घटनाओं ने चिंता बढ़ा दी है। पहाड़ों से मलबा और पत्थर सड़क पर आने के कारण कई जगह यातायात प्रभावित हुआ। हाईवे पर आवाजाही रुकने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। बारिश के दौरान पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन का खतरा लगातार बना रहता है। ऐसे में प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई जा रही है और रास्तों से मलबा हटाने का काम किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में टूटा पुल, बढ़ी लोगों की मुश्किल छत्तीसगढ़ में भी भारी बारिश का असर सड़क और पुलों पर दिखाई दे रहा है। तेज बहाव और बढ़ते जलस्तर के बीच एक पुल टूटने की घटना सामने आई है। इसके बाद आसपास के लोगों का आवागमन प्रभावित हुआ और कई लोगों को दूसरे रास्तों का सहारा लेना पड़ा। ग्रामीण इलाकों में पुल और सड़कें संपर्क का प्रमुख साधन हैं। ऐसे में किसी पुल के क्षतिग्रस्त होने से आसपास के गांवों का संपर्क भी प्रभावित हो सकता है। UP में जलभराव ने बढ़ाई परेशानी, सड़कों पर चली नाव उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश के बाद जलभराव की स्थिति ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। निचले इलाकों में पानी जमा होने के कारण कई सड़कें पूरी तरह जलमग्न नजर आईं। कुछ जगह हालात इतने खराब रहे कि लोगों को आने-जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ा। पानी भरने से स्थानीय लोगों के सामने घर से बाहर निकलने, जरूरी सामान लाने और रोजमर्रा के काम निपटाने की चुनौती खड़ी हो गई है। जलनिकासी व्यवस्था को लेकर भी स्थानीय स्तर पर प्रशासन की सक्रियता बढ़ गई है। बिहार-झारखंड में Lightning बनी आफत, 10 लोगों की मौत बारिश के साथ बिहार और झारखंड में आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं ने चिंता बढ़ा दी है। अलग-अलग घटनाओं में 10 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। घटनाओं के बाद प्रभावित परिवारों में मातम पसरा है। मानसून के दौरान Lightning यानी आकाशीय बिजली ग्रामीण और खुले इलाकों में बड़ा खतरा बन जाती है। मौसम खराब होने पर लोगों को खुले मैदान, खेत या पेड़ के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी जाती है। बारिश ने कई राज्यों में बदली तस्वीर इस मानसून में देश के अलग-अलग हिस्सों से बारिश के कारण पैदा हुई मुश्किलों की तस्वीर सामने आ रही है। उत्तराखंड में Landslide और सड़क बंद होने से पहाड़ी इलाकों में सफर प्रभावित है, जबकि उत्तर प्रदेश में जलभराव ने सामान्य जनजीवन को परेशान किया है। छत्तीसगढ़ में पुल टूटने से आवागमन पर असर पड़ा है और बिहार-झारखंड में आकाशीय बिजली ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। बारिश भले ही गर्मी से राहत देती हो, लेकिन जब इसका असर बुनियादी ढांचे और जनजीवन पर पड़ता है तो मुश्किलें तेजी से बढ़ती हैं। ऐसे मौसम में लोगों के लिए जरूरी है कि वे प्रशासन और मौसम विभाग की Advisory को नजरअंदाज न करें। लोगों से सावधानी बरतने की अपील भारी बारिश के दौरान नदी-नालों और जलभराव वाले इलाकों के पास जाने से बचना चाहिए। पहाड़ी क्षेत्रों में Landslide की आशंका वाले रास्तों पर यात्रा करने से पहले स्थिति की जानकारी लेना भी जरूरी है। वहीं आकाशीय बिजली के दौरान खुले स्थानों पर खड़े होने के बजाय सुरक्षित जगह पर रहना चाहिए। मानसून के दौरान मौसम तेजी से बदल सकता है। इसलिए सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करना बेहद जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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बांकीपुर

Assembly Bypoll Results बांकीपुर में Prashant Kishor आगे

देश की तीन विधानसभा सीटों पर हो रहे उपचुनाव की मतगणना के शुरुआती रुझानों ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। बिहार की बांकीपुर सीट पर प्रशांत किशोर बढ़त बनाए हुए हैं। वहीं मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने बढ़त बना ली है। गुजरात की मांजलपुर सीट पर भाजपा आगे चल रही है। हालांकि, अभी मतगणना जारी है और अंतिम परिणाम आने तक तस्वीर बदल सकती है। बांकीपुर में प्रशांत किशोर ने चौंकाया बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर इस बार मुकाबला खासा दिलचस्प है। जन सुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर चुनाव मैदान में हैं और शुरुआती रुझानों में उन्होंने बढ़त बना रखी है। बांकीपुर को भाजपा के प्रभाव वाली सीट माना जाता है। ऐसे में प्रशांत किशोर का यहां आगे निकलना राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है। उनकी बढ़त ने चुनावी मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या शुरुआती बढ़त को प्रशांत किशोर जीत में बदल पाएंगे या आगे की गिनती में समीकरण बदल जाएगा। दतिया में Congress ने बनाई बढ़त मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर भी शुरुआती रुझान कांग्रेस के पक्ष में नजर आ रहे हैं। यहां कांग्रेस उम्मीदवार ने भाजपा प्रत्याशी को पीछे छोड़ते हुए बढ़त हासिल की है। दतिया सीट का चुनाव मध्य प्रदेश की राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। मतगणना के दौरान मुकाबला लगातार बदल रहा है और अभी कई राउंड के परिणाम सामने आना बाकी हैं। ऐसे में कांग्रेस समर्थकों की नजरें अंतिम नतीजे पर टिकी हुई हैं। मांजलपुर में BJP आगे गुजरात की मांजलपुर विधानसभा सीट से भाजपा के लिए फिलहाल राहत की खबर है। शुरुआती रुझानों में भाजपा उम्मीदवार बढ़त बनाए हुए हैं। तीनों सीटों के रुझानों को देखें तो तस्वीर फिलहाल काफी दिलचस्प दिखाई दे रही है। जहां बिहार में प्रशांत किशोर ने बढ़त बनाकर मुकाबले को सुर्खियों में ला दिया है, वहीं मध्य प्रदेश में कांग्रेस आगे है। गुजरात में भाजपा अपनी बढ़त के साथ मजबूत स्थिति में नजर आ रही है। तीनों सीटों के नतीजों पर टिकी नजर बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात की इन सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे राजनीतिक दलों के लिए काफी मायने रखते हैं। खासकर बांकीपुर में प्रशांत किशोर की मौजूदगी ने चुनाव को अतिरिक्त चर्चा दी है। फिलहाल सामने आए आंकड़े सिर्फ शुरुआती रुझान हैं। जैसे-जैसे वोटों की गिनती आगे बढ़ेगी, उम्मीदवारों की स्थिति भी बदल सकती है। इसलिए सभी की नजरें अब अंतिम राउंड और आधिकारिक चुनाव परिणाम पर टिकी हैं। बांकीपुर में प्रशांत किशोर की बढ़त, दतिया में कांग्रेस का आगे निकलना और मांजलपुर में भाजपा की बढ़त—इन तीनों सीटों ने उपचुनाव की तस्वीर को काफी रोचक बना दिया है। अब देखना होगा कि शुरुआती रुझान आखिरकार किसके पक्ष में अंतिम नतीजे में बदलते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Brij Bhushan Singh

Delhi Court का बड़ा फैसला: Brij Bhushan Singh महिला पहलवान केस में बरी, 3 साल बाद आया Verdict

भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Singh) को महिला पहलवानों से जुड़े Sexual Harassment Case में दिल्ली की अदालत से बड़ी राहत मिली है। करीब तीन साल तक चले इस मामले में कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया। फैसला आने के बाद बृजभूषण सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा- “होइहि सोइ जो राम रचि राखा।” बृजभूषण सिंह (Brij Bhushan Singh) के खिलाफ यह मामला साल 2023 में देशभर में सुर्खियों में आया था। कई महिला पहलवानों ने उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। इसके बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर पहलवानों ने लंबे समय तक विरोध प्रदर्शन किया था। मामला सामने आने के बाद खेल जगत के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों में भी इसकी चर्चा तेज हो गई थी। 3 साल बाद आया फैसला महिला पहलवानों की शिकायत के बाद दिल्ली पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने अदालत में चार्जशीट दाखिल की। इसके बाद मामले की सुनवाई दिल्ली की अदालत में चली। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अब अदालत ने बृजभूषण सिंह को मामले में बरी कर दिया है। कोर्ट के फैसले के साथ ही यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। फैसले के बाद बृजभूषण सिंह की पहली प्रतिक्रिया अदालत के फैसले के बाद बृजभूषण सिंह ने बेहद संक्षिप्त प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “होइहि सोइ जो राम रचि राखा।” अपने ऊपर लगे आरोपों को बृजभूषण सिंह पहले से ही खारिज करते रहे हैं। उनका कहना रहा है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप सही नहीं हैं। अब अदालत के फैसले के बाद उन्हें इस मामले में कानूनी राहत मिली है। 2023 में पहलवानों के Protest से मचा था हंगामा साल 2023 में बृजभूषण सिंह के खिलाफ महिला पहलवानों के आरोपों ने पूरे देश का ध्यान खींचा था। कई प्रमुख पहलवान दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे और कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। इस दौरान पहलवानों और सरकार के बीच बातचीत भी हुई थी। मामला इतना बढ़ गया था कि भारतीय कुश्ती व्यवस्था, खिलाड़ियों की सुरक्षा और Federation के कामकाज को लेकर भी सवाल उठने लगे थे। Political Controversy भी बना था बड़ा मुद्दा यह मामला केवल Sports तक सीमित नहीं रहा। बृजभूषण सिंह के खिलाफ पहलवानों के प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक दलों के बीच भी बयानबाजी हुई। विपक्ष ने केंद्र सरकार पर खिलाड़ियों की शिकायतों को लेकर सवाल उठाए, जबकि बृजभूषण सिंह लगातार अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार करते रहे। अब Delhi Court Verdict के बाद इस मामले में बृजभूषण सिंह को बड़ी राहत मिली है। हालांकि, इस पूरे प्रकरण ने भारतीय खेल व्यवस्था में खिलाड़ियों की शिकायतों और उनकी सुरक्षा को लेकर एक बड़ी बहस जरूर खड़ी की। क्या है पूरा मामला? हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ankit Sharma

Ankit Sharma Verdict: दिल्ली दंगों के चर्चित हत्याकांड में कोर्ट सख्त, ताहिर हुसैन समेत 5 को उम्रकैद

साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के सबसे चर्चित मामलों में शामिल आईबी (Intelligence Bureau) अधिकारी अंकित शर्मा (Ankit Sharma) हत्याकांड में आखिरकार अदालत ने अपना फैसला सुना दिया। दिल्ली की अदालत ने इस मामले में पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन सहित पांच दोषियों को उम्रकैद (Life Imprisonment) की सजा सुनाई है। करीब छह साल तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले को पीड़ित परिवार ने न्याय की दिशा में बड़ा कदम बताया है। यह मामला केवल एक हत्या का नहीं था, बल्कि उन दंगों की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक माना गया, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था। कैसे हुई थी अंकित शर्मा की हत्या? फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा भड़क उठी थी। इसी दौरान 26 फरवरी को आईबी अधिकारी अंकित शर्मा लापता हो गए थे। अगले दिन उनका शव चांद बाग इलाके के एक नाले से बरामद हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर कई गंभीर चोटों के निशान मिले थे। जांच एजेंसियों का आरोप था कि हिंसक भीड़ ने उन पर हमला किया और उनकी हत्या कर दी। इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम ने विस्तृत जांच शुरू की और कई लोगों को गिरफ्तार किया। अदालत ने किन आधारों पर सुनाई सजा? लंबी सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, फोरेंसिक रिपोर्ट, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और अन्य दस्तावेज पेश किए। इन साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने ताहिर हुसैन समेत पांचों आरोपियों को हत्या और दंगे से जुड़ी विभिन्न धाराओं में दोषी माना। सजा सुनाते समय अदालत ने कहा कि भीड़ की हिंसा के दौरान किसी व्यक्ति, विशेषकर एक सरकारी अधिकारी की हत्या, समाज और कानून दोनों के खिलाफ गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों में सख्त सजा जरूरी है ताकि कानून के प्रति लोगों का विश्वास बना रहे। परिवार ने कहा—लंबे इंतजार के बाद मिला न्याय फैसले के बाद अंकित शर्मा के परिवार ने संतोष जताया। परिवार का कहना है कि पिछले छह वर्षों से वे अदालत के फैसले का इंतजार कर रहे थे और अब उन्हें न्याय मिलने का एहसास हो रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी सजा से उनके बेटे की कमी पूरी नहीं हो सकती, लेकिन अदालत का फैसला यह भरोसा दिलाता है कि कानून अपना काम करता है। क्यों चर्चा में रहा यह मामला? 2020 के दिल्ली दंगों में कई लोगों की जान गई थी और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। अंकित शर्मा हत्याकांड उन मामलों में शामिल रहा, जिस पर पूरे देश की नजर बनी रही। जांच, गिरफ्तारी, आरोप तय होने से लेकर अदालत के अंतिम फैसले तक यह मामला लगातार सुर्खियों में रहा। इस फैसले को दिल्ली दंगों से जुड़े सबसे अहम न्यायिक निर्णयों में से एक माना जा रहा है। फैसले का क्या संदेश? कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत का यह फैसला स्पष्ट संदेश देता है कि भीड़ की हिंसा और सुनियोजित हत्या जैसे अपराधों को कानून किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं करेगा। न्यायिक प्रक्रिया भले समय ले, लेकिन गंभीर मामलों में दोषियों को सजा दिलाना न्याय व्यवस्था की जिम्मेदारी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bhojshala

Bhojshala Update: कमाल मौला मस्जिद के पास बढ़ी निगरानी, धार में प्रशासन ने संभाला मोर्चा

मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला (Bhojshala) परिसर में एक बार फिर गतिविधियां बढ़ गई हैं। कमाल मौला मस्जिद से सटे क्षेत्र में नमाजियों के पहुंचने के बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया है। मौके पर बैरिकेडिंग की गई है, तिरपाल बिछाई गई है और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। प्रशासन की ओर से पूरे क्षेत्र पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी तरह की स्थिति को शांतिपूर्ण तरीके से संभाला जा सके। संवेदनशीलता को देखते हुए आसपास के इलाकों में सुरक्षा इंतजाम बढ़ाए गए हैं। Bhojshala परिसर में प्रशासन का विशेष ध्यान धार की भोजशाला को लेकर लंबे समय से धार्मिक और ऐतिहासिक विवाद जुड़ा हुआ है। इसी कारण यहां होने वाली हर गतिविधि पर प्रशासन की नजर रहती है। नमाज के समय किसी तरह की अव्यवस्था न हो, इसके लिए पुलिस बल को अलर्ट मोड पर रखा गया है। मौके पर लगाए गए बैरिकेड लोगों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए लगाए गए हैं। वहीं, तिरपाल की व्यवस्था भी की गई है ताकि आने वाले लोगों को सुविधा मिल सके और व्यवस्था बनी रहे। क्या है Bhojshala विवाद? धार की भोजशाला एक प्राचीन और ऐतिहासिक स्थल है, जिसे लेकर हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे हैं। हिंदू पक्ष इसे मां वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष यहां कमाल मौला मस्जिद में नमाज की परंपरा का दावा करता है। इस विवाद को लेकर कई वर्षों से कानूनी प्रक्रिया चल रही है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा भी भोजशाला परिसर का सर्वे कराया जा चुका है, जिसके बाद यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। Police Deployment से लेकर Monitoring तक, प्रशासन सतर्क मौजूदा हालात को देखते हुए प्रशासन किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहता। पुलिसकर्मी क्षेत्र में तैनात हैं और आने-जाने वाले लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे शांति बनाए रखें और किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें। प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उसकी पहली प्राथमिकता है। सोशल मीडिया पर भी नजर प्रशासन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फैलने वाली अफवाहों पर भी नजर रख रहा है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि बिना पुष्टि किए किसी भी तरह की जानकारी साझा न करें, जिससे माहौल खराब हो सकता है। फिलहाल भोजशाला और कमाल मौला मस्जिद के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है और प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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शुभेंदु अधिकारी

JeM Terror Suspect Arrested: शुभेंदु अधिकारी पर हमले की कथित साजिश की जांच

पश्चिम बंगाल में सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता के बीच एक बड़ा मामला सामने आया है। राज्य की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से कथित तौर पर जुड़े एक संदिग्ध व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में यह आशंका जताई गई है कि आरोपी मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को निशाना बनाने की योजना से जुड़ा हो सकता है। हालांकि, जांच एजेंसियों ने अभी तक किसी अंतिम निष्कर्ष की पुष्टि नहीं की है और पूरे मामले की गहन जांच जारी है। कैसे हुआ खुलासा? सूत्रों के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों को कुछ समय से मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों और धमकी भरे इनपुट मिल रहे थे। इसके बाद STF ने तकनीकी निगरानी, खुफिया जानकारी और डिजिटल ट्रैकिंग के आधार पर एक विशेष अभियान चलाया। ऑपरेशन के दौरान एक संदिग्ध को हिरासत में लिया गया। प्रारंभिक पूछताछ में उसके प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से संपर्क होने की आशंका सामने आई। फिलहाल एजेंसियां इस दावे की पुष्टि के लिए हर पहलू की जांच कर रही हैं। इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की हो रही फोरेंसिक जांच गिरफ्तार आरोपी के पास से मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरण बरामद किए गए हैं। इन सभी को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपी अकेले काम कर रहा था या किसी बड़े आतंकी मॉड्यूल का हिस्सा था। उसके ईमेल, चैट, सोशल मीडिया गतिविधियों और संपर्कों की भी जांच की जा रही है। क्या सचमुच CM को बनाया गया था निशाना? अभी तक किसी सरकारी एजेंसी ने आधिकारिक तौर पर यह पुष्टि नहीं की है कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पर हमला निश्चित रूप से होने वाला था। जांच अधिकारी इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि आरोपी की मंशा क्या थी और क्या उसके पास किसी साजिश को अंजाम देने की वास्तविक तैयारी थी। यही वजह है कि एजेंसियां फिलहाल पूरे मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए हर सबूत की बारीकी से जांच कर रही हैं। बढ़ाई गई मुख्यमंत्री की सुरक्षा मामले के सामने आने के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सुरक्षा व्यवस्था की दोबारा समीक्षा की गई है। सुरक्षा एजेंसियां किसी भी तरह का जोखिम लेने के पक्ष में नहीं हैं। सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ समय में भी मुख्यमंत्री को लेकर कुछ धमकी भरे इनपुट मिले थे। ऐसे में मौजूदा गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत कर दी गई है। कई एजेंसियां कर रहीं संयुक्त जांच इस मामले की जांच केवल बंगाल STF तक सीमित नहीं है। जरूरत पड़ने पर केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों की भी मदद ली जा रही है। जांचकर्ताओं का फोकस इस बात पर है कि आरोपी के देश के भीतर या सीमा पार किसी आतंकी नेटवर्क से संबंध थे या नहीं। यदि जांच में किसी बड़े मॉड्यूल के संकेत मिलते हैं, तो आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं। अफवाहों से बचने की अपील मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे अपुष्ट दावों पर भरोसा न करें। केवल आधिकारिक जानकारी को ही सही मानें। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित साजिश कितनी गंभीर थी और इसके पीछे किन लोगों की भूमिका थी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ram Mandir

Ram Mandir चढ़ावा विवाद पर संसद में हंगामा, Pappu Yadav बने पुजारी, Rahul Gandhi ने दिया चंदा

संसद के मानसून सत्र में शुक्रवार को राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया गया। विपक्ष ने इस मामले को लेकर संसद परिसर से लेकर लोकसभा के अंदर तक विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव पुजारी के वेश में नजर आए। उनके हाथ में पूजा की थाली थी, जिसमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रतीकात्मक रूप से चंदा डालकर विरोध का समर्थन किया। इस अनोखे प्रदर्शन की तस्वीरें और वीडियो पूरे दिन चर्चा का विषय बने रहे। Ram Mandir Donation Row पर विपक्ष का विरोध विपक्ष का आरोप है कि अयोध्या स्थित राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे के प्रबंधन में गड़बड़ियां हुई हैं। इसी मुद्दे को लेकर INDIA गठबंधन के सांसदों ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया और सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान पप्पू यादव का पुजारी वाला रूप सभी का ध्यान खींचता नजर आया। उनके साथ मौजूद विपक्षी नेताओं ने सरकार पर सवाल उठाए, जबकि राहुल गांधी ने पूजा की थाली में प्रतीकात्मक चंदा डालकर इस विरोध को समर्थन दिया। लोकसभा में नहीं चल सकी कार्यवाही संसद की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने इस मुद्दे पर जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्ष लगातार सरकार से जवाब मांगता रहा, जबकि सत्ता पक्ष ने आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया। हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। कई बार शांति बनाए रखने की अपील के बावजूद जब स्थिति सामान्य नहीं हुई तो लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई। सरकार ने आरोपों को किया खारिज सरकार और भाजपा नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताया। उनका कहना है कि राम मंदिर ट्रस्ट पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर रहा है और चढ़ावे के प्रबंधन में किसी तरह की अनियमितता नहीं है। विपक्ष धार्मिक आस्था से जुड़े विषय को राजनीतिक मुद्दा बनाकर संसद की कार्यवाही बाधित कर रहा । वहीं विपक्ष का कहना है कि यदि सब कुछ पारदर्शी है तो स्वतंत्र जांच कराने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। जांच की मांग पर अड़ा विपक्ष विपक्ष ने मांग की है कि राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े सभी वित्तीय रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएं और पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए। उनका कहना है कि इससे श्रद्धालुओं के मन में उठ रहे सवालों का जवाब भी मिल सकेगा। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि मंदिर ट्रस्ट निर्धारित नियमों के तहत काम कर रहा है और बिना ठोस सबूतों के लगाए जा रहे आरोप केवल राजनीतिक बयानबाजी हैं। सोशल मीडिया पर छाया संसद का यह प्रदर्शन पप्पू यादव के पुजारी वाले अंदाज और राहुल गांधी द्वारा चढ़ावे की थाली में चंदा देने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं। किसी ने इसे विपक्ष का अनोखा विरोध बताया तो किसी ने इसे राजनीतिक प्रतीकवाद करार दिया। अब यह मुद्दा संसद के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का केंद्र बन गया है। आने वाले दिनों में इस विवाद पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस जारी रहने की संभावना है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bhiwandi

Bhiwandi में मरम्मत के दौरान गिरी 4 मंजिला Building, 9 लोगों की मौत; कई के मलबे में फंसे होने की आशंका

महाराष्ट्र के ठाणे जिले के भिवंडी (Bhiwandi) से शुक्रवार सुबह एक बेहद दुखद खबर सामने आई। शहर के एक रिहायशी इलाके में स्थित चार मंजिला (G+4) इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। इस हादसे में अब तक 9 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। राहत एवं बचाव टीमों का कहना है कि मलबे के नीचे अभी भी 4 से 5 लोगों के फंसे होने की आशंका बनी हुई है। सुबह-सुबह मचा हड़कंप प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसा सुबह उस समय हुआ जब आसपास के लोग अपने रोजमर्रा के काम में लगे हुए थे। अचानक तेज आवाज के साथ इमारत का बड़ा हिस्सा ढह गया। कुछ ही सेकंड में पूरा इलाका धूल के गुबार से भर गया और लोगों में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय नागरिक सबसे पहले मौके पर पहुंचे और मलबे में दबे लोगों को निकालने की कोशिश शुरू की। Repair Work के दौरान हुआ हादसा शुरुआती जानकारी के अनुसार, इमारत में मरम्मत (Repair Work) चल रहा था। इसी दौरान भवन का एक हिस्सा अचानक गिर गया और देखते ही देखते पूरी संरचना मलबे में तब्दील हो गई। हालांकि हादसे की असली वजह क्या थी, इसका पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा। Rescue Operation लगातार जारी घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल विभाग, नगर निगम और NDRF की टीमें मौके पर पहुंच गईं। जेसीबी मशीनों, क्रेन और अन्य आधुनिक उपकरणों की मदद से मलबा हटाया जा रहा है। कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, जबकि घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक पूरे मलबे की जांच नहीं हो जाती, तब तक राहत अभियान जारी रहेगा। बचाव दल हर संभावित जगह पर सावधानी से सर्च ऑपरेशन चला रहा है। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका प्रशासन ने फिलहाल 9 लोगों की मौत की पुष्टि की है। वहीं, राहत टीमों को आशंका है कि कुछ लोग अभी भी मलबे के नीचे दबे हो सकते हैं। ऐसे में मृतकों की संख्या बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। जर्जर इमारतों पर फिर उठे सवाल इस हादसे ने एक बार फिर महाराष्ट्र के पुराने और जर्जर भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई पुरानी इमारतें वर्षों से मरम्मत का इंतजार कर रही हैं, लेकिन समय रहते जरूरी कदम नहीं उठाए जाते। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे भवनों का नियमित स्ट्रक्चरल ऑडिट और समय पर मरम्मत बड़े हादसों को रोक सकती है। प्रशासन ने जांच के दिए आदेश हादसे के बाद जिला प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारी यह पता लगाएंगे कि इमारत की स्थिति क्या थी, मरम्मत का काम किसकी निगरानी में चल रहा था और कहीं सुरक्षा नियमों की अनदेखी तो नहीं हुई। यदि जांच में किसी तरह की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल क्या है स्थिति? राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। प्रशासन ने लोगों से घटनास्थल के आसपास भीड़ न लगाने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है। जैसे-जैसे मलबा हटाया जा रहा है, वैसे-वैसे हादसे से जुड़ी नई जानकारियां सामने आ रही हैं। पूरे राज्य की नजर अब इस रेस्क्यू ऑपरेशन पर बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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ITR

ITR Deadline 2026: आज चूके तो लगेगा ₹5,000 तक का जुर्माना, CA ने बताए 4 आसान Steps

अगर आपने अभी तक Income Tax Return (ITR) फाइल नहीं किया है, तो अब और इंतजार करना भारी पड़ सकता है। 31 जुलाई को ITR दाखिल करने की अंतिम तारीख है और इसके बाद रिटर्न भरने वालों को नियमों के अनुसार ₹5,000 तक की लेट फीस चुकानी पड़ सकती है। आयकर विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 5 करोड़ से ज्यादा टैक्सपेयर्स अपना रिटर्न दाखिल कर चुके हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी अंतिम समय का इंतजार कर रहे हैं। टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि आखिरी दिन पोर्टल पर ट्रैफिक काफी बढ़ जाता है। ऐसे में सर्वर धीमा होने या तकनीकी दिक्कत आने की संभावना रहती है। इसलिए अंतिम समय का जोखिम लेने के बजाय जल्द से जल्द ITR फाइल करना बेहतर रहेगा। देर से ITR भरने पर कितना लगेगा जुर्माना? अगर तय समय सीमा के बाद Income Tax Return दाखिल किया जाता है, तो आयकर कानून के तहत लेट फीस देनी पड़ सकती है। CA ने बताए ITR Filing के 4 आसान Steps चार्टर्ड अकाउंटेंट्स का कहना है कि थोड़ी तैयारी के साथ ITR भरना काफी आसान हो जाता है। इसके लिए इन चार बातों का ध्यान रखें। 1. जरूरी दस्तावेज पहले से तैयार रखें रिटर्न भरने से पहले PAN, Aadhaar, Form-16, AIS (Annual Information Statement), बैंक अकाउंट की जानकारी, निवेश और TDS से जुड़े दस्तावेज अपने पास रखें। इससे फाइलिंग के दौरान समय बचेगा। 2. सही ITR Form का चयन करें हर टैक्सपेयर के लिए ITR फॉर्म अलग हो सकता है। आपकी आय का स्रोत वेतन, बिजनेस, किराया या अन्य किसी माध्यम से है, उसी के अनुसार सही फॉर्म चुनें। गलत फॉर्म भरने पर रिटर्न अमान्य हो सकता है। 3. सभी जानकारी अच्छी तरह जांच लें रिटर्न सबमिट करने से पहले बैंक अकाउंट, PAN, TDS, आय और टैक्स की सभी जानकारियों का मिलान जरूर करें। छोटी-सी गलती भी बाद में नोटिस या रिफंड में देरी की वजह बन सकती है। 4. e-Verification करना बिल्कुल न भूलें ITR जमा करने के बाद Aadhaar OTP, Net Banking या Digital Signature के जरिए e-Verification जरूर करें। बिना e-Verification के आपका रिटर्न अधूरा माना जाएगा। आखिरी दिन इन बातों का रखें विशेष ध्यान समय पर ITR भरना क्यों है जरूरी? Income Tax Return केवल टैक्स भरने का दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह आपकी वित्तीय पहचान का भी महत्वपूर्ण रिकॉर्ड होता है। होम लोन, पर्सनल लोन, वीजा आवेदन, क्रेडिट प्रोफाइल और टैक्स रिफंड जैसी कई प्रक्रियाओं में ITR की जरूरत पड़ती है। इसलिए समय पर रिटर्न दाखिल करना भविष्य के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मेरठ हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, पति सौरभ की हत्या के मामले में कोर्ट का फैसला

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई है। दोनों पर सौरभ की हत्या करने का आरोप साबित होने के बाद यह फैसला सुनाया गया। सजा सुनाते हुए जज ने वारदात को नृशंस हत्याकांड बताया और कहा कि इसमें माफी स्वीकार नहीं होगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कोर्ट में पेश हुए मुस्कान और साहिल सजा सुनाए जाने से पहले जेल में बंद मुस्कान और साहिल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत से जोड़ा गया। इस दौरान दोनों रोने लगे। जज ने मुस्कान से पूछा कि पति सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद वह क्या सजा चाहती है। इस पर मुस्कान ने कहा, “मेरी बच्चियों का ख्याल रखा जाए।” इसके बाद वह खामोश हो गई। वहीं, साहिल से भी यही सवाल पूछा गया, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। सजा के ऐलान के बाद रो पड़ीं सौरभ की मां अदालत के फैसले के बाद सौरभ राजपूत की मां भावुक हो गईं और रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि उन्हें शांति से न्याय मिल गया। इस मामले में सजा का ऐलान सौरभ के परिवार के लिए लंबे इंतजार के बाद आया है। 3 मार्च 2025 को हुई थी सौरभ की हत्या सौरभ राजपूत की हत्या 3 मार्च 2025 को हुई थी। मामले में सामने आए विवरण के अनुसार, हत्या के बाद शव के पांच टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में भर दिया गया था। इस वारदात ने पूरे देश में व्यापक चर्चा बटोरी थी। अदालत ने मामले में मुस्कान रस्तोगी और साहिल को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है।

इंदौर में प्लॉट बेचने के नाम पर 7.80 लाख की ठगी का आरोप, ब्रोकर समेत दो पर FIR

शहर के एरोड्रम थाना क्षेत्र में प्लॉट बेचने के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि प्लॉट का सौदा करने के बाद ब्रोकर और प्लॉट मालिक ने फरियादी से 7 लाख 80 हजार रुपये ले लिए, लेकिन न तो प्लॉट की रजिस्ट्री कराई और न ही कब्जा दिया। शिकायत की जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। 9.30 लाख में तय हुआ था प्लॉट का सौदा पुलिस के मुताबिक, नंदबाग कॉलोनी निवासी विजय चौहान ने शिकायत में बताया कि उन्होंने नंदबाग में एक प्लॉट का सौदा 9 लाख 30 हजार रुपये में तय किया था। इस संबंध में एग्रीमेंट भी किया गया था। फरियादी ने आरोप लगाया कि उन्होंने नकद और ऑनलाइन माध्यम से कुल 7 लाख 80 हजार रुपये का भुगतान कर दिया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें प्लॉट का कब्जा नहीं मिला और रजिस्ट्री भी नहीं कराई गई। ब्रोकर ने परिचित बताकर कराया था सौदा विजय चौहान के अनुसार, धर्मेंद्र ठाकुर ने उन्हें बताया था कि नंदकिशोर मनावत उसका परिचित है और वह अपना प्लॉट बेचना चाहता है। इसके बाद धर्मेंद्र ने सौदे में ब्रोकर की भूमिका निभाई और इसके बदले 10 हजार रुपये लिए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि भुगतान के बाद जब उन्होंने रजिस्ट्री कराने और प्लॉट का कब्जा देने की मांग की, तो उन्हें लगातार टालमटोल का सामना करना पड़ा। 25 से ज्यादा केस होने की धमकी देने का आरोप फरियादी ने आरोप लगाया कि रजिस्ट्री और कब्जे के लिए दबाव बनाने पर धर्मेंद्र ठाकुर ने धमकी दी। शिकायत के मुताबिक, उसने कहा कि उसके खिलाफ 25 से ज्यादा मामले चल रहे हैं। साथ ही, उसके या नंदकिशोर मनावत के पास दोबारा आने पर अंजाम भुगतने की चेतावनी भी दी। 2.80 लाख रुपये लौटाए, 5 लाख बाकी होने का दावा विजय चौहान के मुताबिक, पुलिस में शिकायत करने की बात कहने के बाद नंदकिशोर मनावत ने 2 लाख 50 हजार रुपये नकद और 30 हजार रुपये ऑनलाइन वापस किए। हालांकि, फरियादी का आरोप है कि बाकी 5 लाख रुपये लौटाने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद विजय चौहान ने पुलिस अधिकारियों से शिकायत की। जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी बाकी है।

SIR के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों से मिले राहुल गांधी, दिल्ली पुलिस पर मारपीट के आरोप

नई दिल्ली। SIR के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन करने वाले छात्रों ने बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। इसके बाद राहुल गांधी और छात्रों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस पर मारपीट और हिरासत के दौरान दुर्व्यवहार करने के आरोप लगाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में NSUI के छात्रों, कार्यकर्ताओं और कंटेंट क्रिएटर्स ने अपने साथ हुई कथित घटनाओं की जानकारी दी। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। छात्रा ने कान पर चोट लगने का लगाया आरोप प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक छात्रा ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान पुलिसकर्मी ने उसके प्राइवेट पार्ट पर लात मारी। वहीं, दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा अदिरा ने दावा किया कि पुलिस की पिटाई के कारण उसके एक कान की सुनने की क्षमता चली गई। प्रदर्शनकारियों ने हिरासत के दौरान कथित ज्यादती और मारपीट से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है। RSS और भाजपा से जुड़े लोगों के कहने पर हिरासत का आरोप एक अन्य प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि पुलिस RSS और भाजपा से जुड़े लोगों के कहने पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले रही थी। यह आरोप भी प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाया गया है। राहुल गांधी ने सबूत सुरक्षित रखने को कहा राहुल गांधी ने छात्रों से घटनाओं से जुड़े वीडियो और अन्य सबूत सुरक्षित रखने को कहा। उन्होंने कहा कि इन सबूतों के आधार पर पुलिसकर्मियों से लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त तक, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी। प्रदर्शनकारियों के आरोपों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।

बांग्लादेश टेस्ट सीरीज से बाहर हुए शाई होप और अल्जारी जोसेफ, केविन विकहम को पहली बार मिला मौका

क्रिकेट न्यूज। वेस्टइंडीज को बांग्लादेश के खिलाफ आगामी दो टेस्ट मैचों की सीरीज से पहले बड़ा झटका लगा है। टीम के बल्लेबाज शाई होप और तेज गेंदबाज अल्जारी जोसेफ सीरीज से बाहर हो गए हैं। क्रिकेट वेस्टइंडीज (CWI) ने 23 वर्षीय टॉप ऑर्डर बल्लेबाज केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया है। ऑलराउंडर कीमो पॉल को भी टीम में जगह मिली है। CWI के मुताबिक, मेडिकल जांच और विशेषज्ञों की सलाह के बाद अल्जारी जोसेफ को सीरीज से हटाने का फैसला लिया गया। बोर्ड उनके कार्यभार को नियंत्रित कर चोट के जोखिम को कम करना चाहता है। वहीं, तीनों फॉर्मेट में लगातार खेलने के बाद शाई होप को आराम दिया गया है। चोट के खतरे को देखते हुए जोसेफ को आराम क्रिकेट वेस्टइंडीज ने बताया कि अल्जारी जोसेफ को टीम से बाहर रखने का फैसला उनकी सहमति से लिया गया है। बोर्ड के अनुसार, टेस्ट क्रिकेट में तेज गेंदबाजों को लंबे स्पेल में लगातार गेंदबाजी करनी पड़ती है। इससे छोटे फॉर्मेट की तुलना में कार्यभार और चोट का जोखिम बढ़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए जोसेफ के वर्कलोड को कम करने का फैसला किया गया है, ताकि उनके स्वास्थ्य और फिटनेस का ध्यान रखा जा सके। शाई होप को भी दिया गया आराम CWI ने कहा कि शाई होप तीनों फॉर्मेट में लगातार खेल रहे थे। ऐसे में उनके कार्यभार और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें टेस्ट सीरीज से आराम दिया गया है। बोर्ड का यह फैसला फरवरी 2027 में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप क्वालिफायर्स को ध्यान में रखकर भी लिया गया है। टीम प्रबंधन चाहता है कि खिलाड़ी आगामी महत्वपूर्ण मुकाबलों के लिए फिट रहें। केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में मौका शाई होप की गैरमौजूदगी में 23 वर्षीय टॉप ऑर्डर बल्लेबाज केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया गया है। इसके अलावा ऑलराउंडर कीमो पॉल को भी टीम में जगह मिली है। अब देखना होगा कि बांग्लादेश की घरेलू परिस्थितियों में वेस्टइंडीज की टीम नए संयोजन के साथ कैसा प्रदर्शन करती है। कोच डैरेन सैमी ने सीरीज जीत को बताया अहम वेस्टइंडीज के मुख्य कोच डैरेन सैमी ने कहा कि वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के मौजूदा चक्र की शुरुआत में टीम ने कुछ लक्ष्य तय किए थे। इनमें टेस्ट रैंकिंग के ऊपरी आधे हिस्से में जगह बनाना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के खिलाफ सीरीज जीतने से टीम अपने लक्ष्य के करीब पहुंच सकती है। सैमी के मुताबिक, बांग्लादेश को उसकी घरेलू परिस्थितियों में हराना चुनौतीपूर्ण होगा, लेकिन टीम इसके लिए तैयार है। 28 अक्टूबर से शुरू होगा पहला टेस्ट बांग्लादेश और वेस्टइंडीज के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेली जाएगी। पहला टेस्ट 28 अक्टूबर से ढाका में शुरू होगा, जबकि दूसरा टेस्ट 5 नवंबर से सिलहट में खेला जाएगा।

IMF ने बढ़ाया भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान, 2026 और 2027 में 7% विकास दर रहने की उम्मीद

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने साल 2026 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान 6.4% से बढ़ाकर 7% कर दिया है। वैश्विक तनाव, आर्थिक सुस्ती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का ध्यान खींचा है। मजबूत घरेलू मांग और सर्विसेज सेक्टर के बेहतर प्रदर्शन को भारत की तेज विकास दर की प्रमुख वजह माना गया है। IMF ने अक्टूबर 2026 की अपनी वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में भारत की विकास संभावनाओं को सकारात्मक बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा आयात पर निर्भर कई उभरती अर्थव्यवस्थाएं जहां दबाव का सामना कर रही हैं, वहीं भारत की आर्थिक गतिविधियों में मजबूती बनी हुई है। 2027 में भी 7% ग्रोथ का अनुमान IMF ने 2026 के लिए भारत की विकास दर के अनुमान में जुलाई के मुकाबले 0.6 प्रतिशत अंक और अप्रैल के मुकाबले 0.5 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी की है। वहीं, 2027 के लिए भी विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7% कर दिया गया है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2027 का अनुमान जुलाई के मुकाबले 0.3 प्रतिशत अंक और अप्रैल के मुकाबले 0.5 प्रतिशत अंक अधिक है। इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भी भारत में विकास की संभावनाओं को लेकर उम्मीद बनी हुई है। IMF से पहले विश्व बैंक और आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी भारत की विकास दर के अनुमान में बढ़ोतरी कर चुकी हैं। चीन की सुस्ती के बीच भारत पर नजर रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया की अर्थव्यवस्थाओं में मजबूती देखने को मिल रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी गतिविधियों में तेजी ने भी वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को प्रभावित किया है। भारत और चीन एशिया की आर्थिक गतिविधियों में अहम भूमिका निभा रहे हैं, हालांकि दोनों देशों की विकास संभावनाओं में अंतर दिखाई दे रहा है। IMF के अनुमान के अनुसार, चीन की विकास दर 2026 में 4.5% और 2027 में 4% रह सकती है। वैश्विक तनाव और ऊर्जा की ऊंची कीमतों को चीन की आर्थिक वृद्धि के सामने चुनौतियों में शामिल किया गया है। दुनिया की आर्थिक विकास दर पर दबाव IMF के मुताबिक, 2028 से 2031 के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था औसतन 3.2% की दर से बढ़ सकती है। यह 2000 से 2019 के बीच महामारी से पहले दर्ज औसत 3.7% की विकास दर से कम है। रिपोर्ट में वैश्विक तनाव, ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और ऊर्जा आयात पर निर्भर उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ने वाले दबाव को आर्थिक विकास के लिए चुनौती बताया गया है। ऐसे माहौल में भारत की अनुमानित विकास दर अपेक्षाकृत मजबूत दिखाई देती है। मजबूत घरेलू मांग और जनसांख्यिकी से मिल रहा सहारा भारत की आर्थिक मजबूती के पीछे बढ़ता घरेलू बाजार, मजबूत मांग, अनुकूल जनसांख्यिकी और सुधारों को अहम कारक माना गया है। सर्विसेज सेक्टर का बेहतर प्रदर्शन भी विकास दर को सहारा दे रहा है। हालांकि, बेहतर अनुमान के बावजूद चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव डाल सकती हैं। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय तनाव और वैश्विक मांग में कमजोरी का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

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