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IMD Weather Alert: Delhi-NCR में बारिश, UP-Bihar में तूफानी मौसम, कई राज्यों में भारी वर्षा की चेतावनी

देश के कई हिस्सों में मानसून एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय हो गया है। राजधानी दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य भारत के कई राज्यों में मौसम का मिजाज बदल चुका है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अगले 24 से 48 घंटों के दौरान कई राज्यों में भारी बारिश, तेज आंधी और बिजली गिरने की आशंका जताई है। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने और मौसम से जुड़े ताजा अपडेट पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है। Delhi-NCR में गर्मी से मिलेगी राहत दिल्ली और एनसीआर के लोगों के लिए अच्छी खबर है। मौसम विभाग के अनुसार रविवार को पूरे दिन आसमान में बादल छाए रह सकते हैं और कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। बारिश के चलते तापमान में गिरावट आएगी और पिछले कुछ दिनों से महसूस की जा रही उमस से राहत मिलेगी। कुछ स्थानों पर तेज हवाएं भी चल सकती हैं, जिससे मौसम और सुहावना हो जाएगा। UP में कई जिलों के लिए Heavy Rain Alert उत्तर प्रदेश में मानसून लगातार सक्रिय बना हुआ है। मौसम विभाग ने पूर्वी और मध्य यूपी के कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। गोरखपुर, अयोध्या, वाराणसी, प्रयागराज, लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों में तेज बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है। लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है। सड़क यातायात भी प्रभावित होने की आशंका है। प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है। Bihar में तूफानी बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी बिहार में भी मौसम का असर तेज होता दिखाई दे रहा है। पटना, भागलपुर, पूर्णिया, मुजफ्फरपुर समेत कई जिलों में अगले 24 घंटे के दौरान भारी बारिश की संभावना है। इसके साथ ही 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। मौसम विभाग ने किसानों, यात्रियों और खुले स्थानों पर काम करने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। खराब मौसम के दौरान पेड़ों के नीचे खड़े होने और खुले मैदान में जाने से बचने की भी चेतावनी दी गई है। इन राज्यों में भी बरसेगा मानसून दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार के अलावा उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान के कुछ हिस्सों, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और पूर्वोत्तर भारत के अन्य राज्यों में भी भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है। पहाड़ी राज्यों में लगातार बारिश के चलते भूस्खलन और नदियों का जलस्तर बढ़ने की आशंका बनी हुई है। वहीं मैदानी इलाकों में जलभराव और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। किसानों और यात्रियों के लिए जरूरी सलाह मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि जिन क्षेत्रों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है, वहां खेती-किसानी से जुड़े कार्य मौसम को ध्यान में रखकर ही किए जाएं। यात्रा करने वाले लोग घर से निकलने से पहले मौसम का अपडेट जरूर देखें और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करें। IMD की एडवाइजरी हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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केतन अग्रवाल हत्याकांड: क्या कोर्ट में साबित हो पाएगा सिया गोयल पर हत्या का आरोप? जानिए पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती

नेशनल डेस्क | DeshHarpal पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में पुलिस का दावा है कि सिया गोयल ने अपने कथित बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी के साथ मिलकर मंगेतर केतन अग्रवाल की हत्या की। आरोप है कि दोनों ने लोहगढ़ किले से धक्का देकर केतन की जान ले ली क्योंकि सिया शादी नहीं करना चाहती थी। हालांकि, पुलिस की यह थ्योरी अदालत में साबित करना आसान नहीं होगा। कानून के जानकारों के अनुसार, केवल संदेह या परिस्थितियां पर्याप्त नहीं हैं। अभियोजन पक्ष को ठोस साक्ष्यों के जरिए यह साबित करना होगा कि केतन की मौत हादसा नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या थी। पुलिस ने किन आधारों पर बनाया आरोपी? जांच के दौरान पुलिस को कई ऐसे तथ्य मिले, जिनके आधार पर सिया गोयल और चेतन चौधरी को आरोपी बनाया गया। परिवार के शक से बदली जांच की दिशा शुरुआत में पुलिस इस घटना को हादसा मान रही थी। लेकिन अंतिम संस्कार के बाद केतन के परिजनों ने सिया के बदलते बयानों और व्यवहार पर सवाल उठाए। इसके बाद पुलिस ने हत्या के एंगल से जांच शुरू की। सिया के बदलते बयान पुलिस के मुताबिक, सिया ने घटना को लेकर अलग-अलग बयान दिए। पहले उसने कहा कि तेज हवा के कारण केतन गिर गए, बाद में पानी की बोतल देते समय संतुलन बिगड़ने की बात कही। दोनों बयानों में विरोधाभास मिलने पर पुलिस का शक गहरा गया। CCTV में संदिग्ध युवक लोहगढ़ किले के सीसीटीवी फुटेज में एक युवक हुडी पहनकर सिया और केतन के आसपास दिखाई दिया। पुलिस का दावा है कि यह युवक चेतन चौधरी था, जो अपनी पहचान छिपाने की कोशिश कर रहा था। मोबाइल लोकेशन और इंटरनेट रिकॉर्ड जांच में सामने आया कि घटना वाले दिन चेतन के मोबाइल का इंटरनेट कई घंटों तक बंद था। वहीं, उसके सहयोगी के मोबाइल की लोकेशन लोहगढ़ किले के आसपास मिली। पुलिस का दावा है कि चेतन मौके पर मौजूद था। हजारों कॉल्स का रिकॉर्ड पुलिस के अनुसार, सिया और चेतन के बीच जनवरी से घटना वाले दिन तक 2,000 से अधिक कॉल्स और करीब 338 घंटे बातचीत हुई थी। इसे पुलिस दोनों के करीबी रिश्ते और कथित साजिश का अहम आधार मान रही है। कोर्ट में क्या साबित करना होगा? कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि हत्या के मामले में केवल शक या परिस्थितियां पर्याप्त नहीं होतीं। यदि प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं हैं, तो पुलिस को परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की ऐसी मजबूत श्रृंखला पेश करनी होगी, जिससे यह साबित हो जाए कि केतन की मौत केवल हत्या से ही संभव थी और किसी अन्य संभावना की गुंजाइश नहीं बचती। इसके लिए पुलिस को यह साबित करना होगा कि— क्या कबूलनामा पर्याप्त होगा? पुलिस का दावा है कि दोनों आरोपियों ने पूछताछ में हत्या की बात स्वीकार की है। लेकिन भारतीय कानून के तहत पुलिस के सामने दिया गया कबूलनामा अपने आप में अदालत में स्वीकार्य साक्ष्य नहीं माना जाता। इसलिए अभियोजन पक्ष को स्वतंत्र और विश्वसनीय सबूत पेश करने होंगे। बचाव पक्ष को कैसे मिल सकता है फायदा? कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यदि अभियोजन की साक्ष्य श्रृंखला में एक भी महत्वपूर्ण कड़ी कमजोर पड़ती है या घटना की कोई वैकल्पिक संभावना सामने आती है, तो आरोपियों को संदेह का लाभ मिल सकता है। बचाव पक्ष यह दलील दे सकता है कि— ऐसी स्थिति में अदालत आरोपियों को दोषमुक्त भी कर सकती है। आरुषि-हेमराज केस जैसी चुनौती कानूनी जानकार इस मामले की तुलना आरुषि-हेमराज हत्याकांड से भी कर रहे हैं। उस मामले में भी परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर निचली अदालत ने सजा सुनाई थी, लेकिन बाद में हाईकोर्ट ने पर्याप्त सबूत नहीं मिलने पर आरोपियों को बरी कर दिया था। विशेषज्ञों का मानना है कि केतन अग्रवाल हत्याकांड में भी अंतिम फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि पुलिस अपने दावों को अदालत में कितनी मजबूती से साबित कर पाती है। अधिक राष्ट्रीय समाचार और एक्सप्लेनर पढ़ने के लिए विजिट करें deshharpal.com
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One Nation One Election

One Nation One Election Bill: 2029 में बदल सकती है चुनाव व्यवस्था, संसदीय समिति अध्यक्ष बोले- जनता का मिला समर्थन

भारत की चुनाव व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी के बीच One Nation One Election (एक देश, एक चुनाव) को लेकर चर्चा तेज हो गई है। संसदीय समिति के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने कहा है कि अगर सभी जरूरी प्रक्रियाएं समय पर पूरी हो जाती हैं तो 2029 के लोकसभा चुनाव से इस व्यवस्था को लागू किया जा सकता है। इस प्रस्ताव को लेकर संसदीय समिति लगातार काम कर रही है और देश के अलग-अलग राज्यों में विशेषज्ञों, राजनीतिक दलों और संबंधित पक्षों से बातचीत कर रही है। समिति का मकसद एक ऐसी चुनाव प्रणाली तैयार करना है, जिसमें लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने की संभावनाओं का अध्ययन किया जा सके। 99% लोगों ने किया One Nation One Election का समर्थन JPC अध्यक्ष पीपी चौधरी ने दावा किया कि समिति द्वारा किए गए संवाद और सुझाव प्रक्रिया के दौरान करीब 99 प्रतिशत लोगों ने One Nation One Election के विचार का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि देश में बार-बार चुनाव होने से प्रशासनिक व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण कई बार सरकारों के विकास कार्य और योजनाएं प्रभावित होती हैं। राज्यों से ली जा रही राय, विशेषज्ञों से हो रही चर्चा ‘एक देश, एक चुनाव’ को लागू करने से पहले राज्यों की भूमिका और उनकी चिंताओं को समझना जरूरी माना जा रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए संसदीय समिति राज्यों के विशेषज्ञों और अलग-अलग क्षेत्रों के जानकारों से सुझाव ले रही है। समिति चुनाव प्रक्रिया, संविधान में संभावित बदलाव, कानूनी चुनौतियों और चुनाव प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा कर रही है। क्या है One Nation One Election का पूरा विचार? One Nation One Election का मतलब है कि पूरे देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाएं। अभी भारत में अलग-अलग राज्यों में विधानसभा चुनाव अलग समय पर होते हैं, जबकि लोकसभा चुनाव अपने तय समय पर होते हैं। इस प्रस्ताव के तहत चुनावों को एक निश्चित चक्र में कराने की योजना है, जिससे बार-बार चुनाव कराने की जरूरत कम हो सकती है। एक साथ चुनाव कराने के क्या फायदे बताए जा रहे हैं? इस व्यवस्था के समर्थकों का मानना है कि इससे कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। समर्थकों का तर्क है कि लगातार चुनावी माहौल रहने से प्रशासनिक काम प्रभावित होते हैं, इसलिए एक साथ चुनाव व्यवस्था ज्यादा प्रभावी साबित हो सकती है। विपक्ष और विशेषज्ञों की अलग राय हालांकि, One Nation One Election को लेकर सभी की राय एक जैसी नहीं है। कुछ विपक्षी दल और विशेषज्ञ इसके कुछ पहलुओं पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि एक साथ चुनाव होने से राष्ट्रीय मुद्दे ज्यादा प्रभावी हो सकते हैं और स्थानीय मुद्दों को पर्याप्त महत्व नहीं मिल पाएगा। इसके अलावा राज्यों की स्वायत्तता और संवैधानिक व्यवस्था को लेकर भी चर्चा जारी है। 2029 में लागू होने की उम्मीद क्यों? संसदीय समिति फिलहाल सभी पक्षों से राय जुटाने और रिपोर्ट तैयार करने में लगी है। इसके बाद ही आगे की संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया पूरी होगी। अगर सरकार और संसद स्तर पर सभी जरूरी मंजूरी मिल जाती है, तो 2029 का लोकसभा चुनाव भारत में नई चुनाव व्यवस्था की शुरुआत का आधार बन सकता है। One Nation One Election सिर्फ चुनाव कराने का तरीका बदलने का प्रस्ताव नहीं है, बल्कि यह भारत की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकता है। आने वाले समय में संसदीय समिति की रिपोर्ट और सरकार के फैसले इस दिशा को तय करेंगे।
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INS Mahendragiri

INS Mahendragiri: Project 17A का स्वदेशी स्टेल्थ फ्रिगेट Navy में शामिल, समुद्री सुरक्षा होगी और मजबूत

भारत ने समुद्री सुरक्षा के मोर्चे पर एक और बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। स्वदेशी तकनीक से तैयार किया गया अत्याधुनिक स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट INS Mahendragiri अब आधिकारिक तौर पर भारतीय नौसेना का हिस्सा बन गया है। इस युद्धपोत के शामिल होने से न सिर्फ Indian Navy की ताकत बढ़ेगी, बल्कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी नई मजबूती मिलेगी। इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि INS महेंद्रगिरि केवल एक युद्धपोत नहीं, बल्कि भारत की तकनीकी क्षमता, स्वदेशी निर्माण और आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग की सफलता का प्रतीक है। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले वर्षों में भारत रक्षा निर्माण के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में अपनी मजबूत पहचान बनाएगा। INS Mahendragiri क्यों है इतना खास? INS Mahendragiri को भारतीय नौसेना के Project 17A के तहत विकसित किया गया है। यह नई पीढ़ी का स्टेल्थ फ्रिगेट है, जिसे आधुनिक समुद्री युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी स्टेल्थ तकनीक है, जिससे दुश्मन के रडार पर इसकी पहचान करना बेहद मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा यह जहाज हवा, समुद्र और पनडुब्बियों से होने वाले खतरों का मुकाबला करने में सक्षम है। आधुनिक तकनीक से लैस है युद्धपोत INS Mahendragiri को कई अत्याधुनिक हथियारों और सुरक्षा प्रणालियों से सुसज्जित किया गया है। इसमें आधुनिक मिसाइल सिस्टम, एडवांस रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और लंबी दूरी तक निगरानी करने वाले सेंसर लगाए गए हैं। युद्धपोत पर हेलीकॉप्टर संचालन की सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे समुद्र में निगरानी, खोज एवं बचाव अभियान और एंटी-सबमरीन ऑपरेशन अधिक प्रभावी ढंग से किए जा सकेंगे। Rajnath Singh ने गिनाईं आत्मनिर्भर भारत की उपलब्धियां रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि भारत अब रक्षा जरूरतों के लिए केवल आयात पर निर्भर रहने वाला देश नहीं रहा। सरकार की नीतियों और भारतीय रक्षा उद्योग के प्रयासों से आज देश में आधुनिक युद्धपोत, मिसाइल, हथियार और रक्षा उपकरण तैयार किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वदेशी रक्षा उत्पादन बढ़ने से देश की सुरक्षा मजबूत होने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं। इसके अलावा भारत का रक्षा निर्यात भी लगातार बढ़ रहा है, जो देश की बढ़ती तकनीकी क्षमता का प्रमाण है। Indian Navy की ताकत में होगा बड़ा इजाफा विशेषज्ञों का मानना है कि INS Mahendragiri के शामिल होने से भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता पहले से अधिक मजबूत होगी। यह युद्धपोत हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री निगरानी, व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा, समुद्री डकैती रोकने, मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों में अहम भूमिका निभाएगा। भारत जिस तेजी से इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी रणनीतिक मौजूदगी मजबूत कर रहा है, उसमें ऐसे आधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। Project 17A से मिल रही नई मजबूती Project 17A भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण की सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक है। इसके तहत तैयार किए जा रहे अत्याधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट भविष्य की समुद्री चुनौतियों को ध्यान में रखकर विकसित किए गए हैं। INS Mahendragiri इसी श्रृंखला का एक अहम युद्धपोत है, जो भारतीय नौसेना को नई तकनीक और बेहतर युद्ध क्षमता प्रदान करेगा। भारत बन रहा है रक्षा निर्माण का वैश्विक केंद्र पिछले कुछ वर्षों में भारत ने रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में तेज़ी से प्रगति की है। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी पहलों के कारण देश में स्वदेशी रक्षा उपकरणों का निर्माण लगातार बढ़ा है। सरकार का लक्ष्य भारत को वैश्विक रक्षा निर्माण और निर्यात का प्रमुख केंद्र बनाना है, जिसमें नौसेना के लिए तैयार किए जा रहे आधुनिक युद्धपोत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
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Delhi

Red Fort Bomb Threat: ईमेल से मिली धमकी के बाद लाल किले में सघन तलाशी, Delhi Police जांच में जुटी

देश की राजधानी Delhi के ऐतिहासिक लाल किले (Red Fort) को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गई हैं। शनिवार को एक धमकी भरा ईमेल मिलने के बाद दिल्ली पुलिस, बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वॉड और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी। पूरे लाल किला परिसर की गहन तलाशी ली गई। हालांकि शुरुआती जांच में कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली, लेकिन मामले को गंभीर मानते हुए जांच कई स्तरों पर जारी है। इस घटना के बाद न केवल दिल्ली बल्कि मुंबई सहित अन्य सुरक्षा एजेंसियों को भी अलर्ट कर दिया गया है। साइबर एक्सपर्ट धमकी भेजने वाले तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। ईमेल से मिली धमकी, तुरंत हरकत में आई पुलिस जानकारी के मुताबिक, लाल किले को उड़ाने की धमकी ईमेल के जरिए दी गई थी। सूचना मिलते ही पुलिस कंट्रोल रूम सक्रिय हुआ और कुछ ही मिनटों में सुरक्षा बलों की टीमें मौके पर पहुंच गईं। बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वॉड ने लाल किले के हर हिस्से की बारीकी से जांच की। कई घंटे तक चले सर्च ऑपरेशन में किसी तरह का विस्फोटक या संदिग्ध सामान नहीं मिला। इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती गई। मुंबई तक पहुंची जांच, Cyber Team कर रही पड़ताल धमकी भरे ईमेल की तकनीकी जांच के दौरान कुछ डिजिटल सुराग मिलने के बाद मुंबई पुलिस को भी सतर्क किया गया है। साइबर सेल ईमेल की आईपी डिटेल, सर्वर और अन्य तकनीकी जानकारियों की जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि ईमेल किसी शरारती तत्व ने भेजा है या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश है। फिलहाल सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। Red Fort की सुरक्षा पहले से ज्यादा कड़ी घटना के बाद लाल किले की सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत कर दी गई है। प्रवेश द्वारों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। आने वाले पर्यटकों की जांच पहले से अधिक सख्ती के साथ की जा रही है। वहीं आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी भी बढ़ा दी गई है। इसके अलावा दिल्ली के अन्य संवेदनशील स्थानों और प्रमुख सरकारी इमारतों की सुरक्षा की भी समीक्षा की जा रही है। पहले भी मिल चुकी हैं ऐसी धमकियां बीते कुछ वर्षों में देश के कई एयरपोर्ट, स्कूल, अस्पताल, धार्मिक स्थलों और सरकारी संस्थानों को ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकियां मिल चुकी हैं। अधिकांश मामलों में ये धमकियां फर्जी निकलीं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां हर सूचना को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई करती हैं ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते टाला जा सके। पुलिस ने लोगों से की अपील दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। यदि किसी को कोई संदिग्ध वस्तु, लावारिस बैग या संदिग्ध गतिविधि दिखाई देती है तो उसकी जानकारी तुरंत पुलिस को देने के लिए कहा गया है। फिलहाल लाल किले पर स्थिति पूरी तरह सामान्य है। जांच एजेंसियां धमकी भरे ईमेल की असली सच्चाई सामने लाने और जिम्मेदार व्यक्ति तक पहुंचने के लिए लगातार काम कर रही हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Nripendra Mishra

Ayodhya राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर Nripendra Mishra हुए भावुक, SP के पोस्टर से तेज हुई सियासत

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला अब धार्मिक आस्था के साथ-साथ राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया है। मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा (Nripendra Mishra) ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे “राम मंदिर पर कलंक” बताया। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी (SP) ने इस मुद्दे को लेकर भाजपा सरकार और मंदिर प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए पोस्टर जारी किया, जिसके बाद प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। नृपेंद्र मिश्रा ने जताई नाराजगी राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी इस तरह की घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल धन की चोरी का नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा, “मुझे इस घटना से छोटापन महसूस हो रहा है। यह राम मंदिर के लिए एक कलंक है।” उनके मुताबिक, मंदिर में आने वाला हर श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ दान देता है। ऐसे में यदि उस दान के साथ किसी भी तरह की अनियमितता होती है, तो इससे लोगों का भरोसा प्रभावित होता है। क्या है पूरा मामला? राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे को लेकर कथित गड़बड़ी की शिकायत सामने आई थी। इसके बाद मंदिर प्रशासन और संबंधित अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी। शुरुआती जांच में कुछ कर्मचारियों से पूछताछ की गई है और उपलब्ध रिकॉर्ड तथा अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। हालांकि, अभी जांच जारी है और किसी भी व्यक्ति को आधिकारिक तौर पर दोषी घोषित नहीं किया गया है। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। SP ने पोस्टर जारी कर सरकार को घेरा इस मामले के सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी ने सोशल मीडिया और पोस्टर के जरिए भाजपा सरकार पर निशाना साधा। पार्टी के पोस्टर पर लिखा था— “राम नाम जपना, चढ़ाया दान अपना।” इस पोस्टर के जरिए सपा ने मंदिर में दान की सुरक्षा और पारदर्शिता पर सवाल उठाए तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। पोस्टर सामने आने के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया। भाजपा का जवाब भाजपा नेताओं का कहना है कि सरकार इस मामले को पूरी गंभीरता से देख रही है। उनका दावा है कि यदि जांच में कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पार्टी ने विपक्ष पर धार्मिक मुद्दे का राजनीतिक फायदा उठाने का आरोप भी लगाया। श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है मामला राम मंदिर देश और विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे से जुड़ी किसी भी तरह की कथित गड़बड़ी स्वाभाविक रूप से लोगों की चिंता बढ़ाती है। कई श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर में दान पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ दिया जाता है, इसलिए उसकी सुरक्षा और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करना मंदिर प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। जांच रिपोर्ट का इंतजार फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है। मंदिर ट्रस्ट और प्रशासन का कहना है कि सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी और यदि किसी की भूमिका सामने आती है तो कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जाएगी। अब सभी की नजर जांच के नतीजों पर है। यह मामला न केवल मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली बल्कि श्रद्धालुओं के विश्वास और राजनीतिक माहौल, दोनों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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FTA

India-New Zealand Relations: FTA को मिली रफ्तार, PM Modi बोले- भारत में होगा ₹1.72 लाख करोड़ का निवेश

भारत और न्यूजीलैंड के रिश्तों में एक नया अध्याय जुड़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्यूजीलैंड दौरे के दौरान दोनों देशों ने व्यापार, निवेश, शिक्षा, तकनीक और सुरक्षा जैसे कई अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। इस यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धि Free Trade Agreement (FTA) को आगे बढ़ाने की दिशा में बनी सहमति और 18 महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर मानी जा रही है। दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी बताया कि न्यूजीलैंड भारत में करीब ₹1.72 लाख करोड़ का निवेश करेगा। माना जा रहा है कि इससे दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को नई मजबूती मिलेगी और भारत में रोजगार व निवेश के नए अवसर भी बनेंगे। FTA पर बढ़ी रफ्तार, व्यापार को मिलेगा फायदा भारत और न्यूजीलैंड पिछले काफी समय से Free Trade Agreement (FTA) पर बातचीत कर रहे हैं। अब दोनों देशों ने इस प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है। अगर यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो दोनों देशों के बीच व्यापार पहले से अधिक आसान हो जाएगा। कई उत्पादों पर आयात-निर्यात शुल्क कम होने की संभावना है, जिससे भारतीय उद्योग, कृषि उत्पाद और सेवा क्षेत्र को भी फायदा मिल सकता है। 18 बड़े फैसलों में किन क्षेत्रों पर रहा फोकस? प्रधानमंत्री मोदी और न्यूजीलैंड के नेतृत्व के बीच हुई बैठक में कई अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। इनमें शामिल हैं— इन समझौतों का उद्देश्य केवल व्यापार बढ़ाना नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना भी है। ₹1.72 लाख करोड़ का Investment क्यों है खास? प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि न्यूजीलैंड भारत में लगभग ₹1.72 लाख करोड़ का निवेश करेगा। यह निवेश इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिक तकनीक, ऊर्जा, कृषि और अन्य विकास परियोजनाओं में किया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे विदेशी निवेश बढ़ेगा, नए उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। Auckland में भारतीय समुदाय को करेंगे संबोधित दौरे के दूसरे दिन प्रधानमंत्री मोदी न्यूजीलैंड के Auckland में भारतीय समुदाय के एक बड़े कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में करीब 40 हजार लोगों के पहुंचने की संभावना है। भारतीय समुदाय लंबे समय से इस कार्यक्रम का इंतजार कर रहा है। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी भारत-न्यूजीलैंड संबंधों, प्रवासी भारतीयों की भूमिका और भविष्य की साझेदारी पर विस्तार से बात कर सकते हैं। भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह दौरा? न्यूजीलैंड के साथ मजबूत होते रिश्ते भारत की आर्थिक और रणनीतिक नीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, व्यापार का दायरा विस्तार करने और विदेशी निवेश आकर्षित करने की दिशा में यह यात्रा एक अहम कदम मानी जा रही है। यदि आने वाले समय में India-New Zealand FTA पर अंतिम मुहर लगती है, तो दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियां तेज होंगी और निवेश का दायरा भी बढ़ेगा। इससे भारतीय कंपनियों, किसानों, स्टार्टअप और सेवा क्षेत्र को नए अवसर मिल सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Monsoon

India Monsoon Update: बारिश से कई राज्यों में तबाही, UP हादसे के बाद Uttarakhand-Himachal में सड़कें ठप

देशभर में मानसून (Monsoon) अब राहत से ज्यादा मुसीबत बनता नजर आ रहा है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और मिजोरम समेत कई राज्यों में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। कहीं तेज बहाव में वाहन बह रहे हैं तो कहीं भूस्खलन से सड़कें बंद हो गई हैं। पिछले तीन दिनों में बारिश से जुड़े अलग-अलग हादसों में कम से कम 15 लोगों की मौत हो चुकी है। कई इलाकों में बचाव अभियान लगातार जारी है, जबकि मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी भारी बारिश की चेतावनी दी है। UP में उफनते पानी में बह गई कार उत्तर प्रदेश में तेज बारिश के बीच एक दर्दनाक हादसा सामने आया। उफनते नाले पर बने पुल को पार करते समय एक कार अचानक तेज बहाव की चपेट में आ गई और देखते ही देखते पानी में बह गई। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत पुलिस और राहत दल को सूचना दी। बचाव टीमों ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। लगातार बारिश के कारण प्रदेश के कई जिलों में नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। प्रशासन ने लोगों से जलभराव वाले क्षेत्रों और तेज बहाव वाले पुलों से दूर रहने की अपील की है। Uttarakhand और Himachal में बारिश बनी बड़ी चुनौती पहाड़ी राज्यों उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही बारिश ने हालात बेहद कठिन बना दिए हैं। भूस्खलन और सड़क धंसने की घटनाओं के कारण दोनों राज्यों में कुल 438 सड़कें बंद हैं। कई गांवों का जिला मुख्यालयों से संपर्क टूट गया है और लोगों को जरूरी सामान पहुंचाने में भी परेशानी हो रही है। राज्य सरकारें युद्ध स्तर पर सड़कें खोलने का प्रयास कर रही हैं। जेसीबी मशीनों और राहत दलों की मदद से मलबा हटाया जा रहा है, लेकिन लगातार हो रही बारिश राहत कार्यों को प्रभावित कर रही है। Mizoram में चार दिनों से फंसे पर्यटक पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम में भी मौसम ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लगातार बारिश और भूस्खलन के चलते कई प्रमुख सड़कें बंद हो गई हैं। इसके कारण बड़ी संख्या में पर्यटक पिछले चार दिनों से अलग-अलग इलाकों में फंसे हुए हैं। स्थानीय प्रशासन ने राहत अभियान तेज कर दिया है। फंसे हुए लोगों तक भोजन, पीने का पानी और अन्य जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है, जबकि सुरक्षित रास्ते तैयार करने का काम भी जारी है। तीन दिन में 15 लोगों की मौत देश के विभिन्न राज्यों में बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से जुड़े हादसों में पिछले तीन दिनों के दौरान कम से कम 15 लोगों की जान जा चुकी है। कई लोग घायल हुए हैं, जबकि कुछ अब भी लापता बताए जा रहे हैं। प्रशासन और आपदा राहत एजेंसियां लगातार प्रभावित इलाकों में खोज एवं बचाव अभियान चला रही हैं। IMD का अलर्ट, अगले कुछ दिन रहेंगे भारी भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों के लिए भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार कुछ इलाकों में अचानक बाढ़ (Flash Flood), भूस्खलन और जलभराव की स्थिति बन सकती है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचना चाहिए और नदी-नालों के किनारे जाने से परहेज करना चाहिए। प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना इस समय सबसे सुरक्षित विकल्प है। राहत कार्य तेज, लोगों से सतर्क रहने की अपील NDRF, SDRF और स्थानीय प्रशासन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार राहत एवं बचाव कार्य कर रही हैं। बंद सड़कों को खोलने, फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और जरूरतमंद परिवारों को राहत सामग्री उपलब्ध कराने का काम जारी है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि मौसम की ताजा जानकारी पर नजर रखें, अफवाहों से बचें और खराब मौसम के दौरान बिना जरूरी कारण यात्रा न करें। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ दिनों तक सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव साबित होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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PM Modi

India New Zealand FTA: PM Modi के दौरे से व्यापारिक रिश्तों को नई उड़ान, Auckland Speech होगा खास

PM Modi की विदेश यात्रा इस समय सुर्खियों में है। ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद पीएम मोदी अब न्यूजीलैंड पहुंच चुके हैं, जहां उनका जोर दोनों देशों के बीच India-New Zealand Relations को और मजबूत करने पर रहेगा। इस दौरे में सबसे अहम मुद्दा Free Trade Agreement (FTA) Deal है, जिसे लेकर दोनों देशों के बीच अंतिम चरण की बातचीत होने की उम्मीद है। पीएम मोदी के न्यूजीलैंड दौरे को आर्थिक, कूटनीतिक और प्रवासी भारतीयों से जुड़ाव के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री ऑकलैंड में भारतीय समुदाय के एक बड़े कार्यक्रम को भी संबोधित करेंगे, जिसमें करीब 40 हजार भारतीयों के शामिल होने की संभावना है। FTA Deal से बढ़ेंगे व्यापार के नए अवसर भारत और न्यूजीलैंड के बीच प्रस्तावित FTA Agreement दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को नई दिशा दे सकता है। इस समझौते का उद्देश्य व्यापार को आसान बनाना, निवेश को बढ़ावा देना और दोनों देशों के कारोबारियों के लिए नए अवसर तैयार करना है। FTA लागू होने के बाद भारत से न्यूजीलैंड जाने वाले कई उत्पादों और सेवाओं के लिए बाजार में पहुंच बेहतर हो सकती है। वहीं न्यूजीलैंड की कंपनियों के लिए भी भारत के बड़े बाजार में निवेश के नए रास्ते खुल सकते हैं। PM Modi Auckland Speech पर भारतीय समुदाय की नजर प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्राओं में प्रवासी भारतीयों से मुलाकात हमेशा खास हिस्सा रही है। न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में होने वाले कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग पीएम मोदी का स्वागत करेंगे। भारतीय समुदाय के साथ यह संवाद दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर मजबूत रिश्तों को दिखाता है। विदेशों में बसे भारतीय भारत की संस्कृति, व्यापार और कूटनीति को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। India-New Zealand Partnership में नई उम्मीदें पीएम मोदी के इस दौरे में व्यापार के अलावा शिक्षा, तकनीक, रक्षा सहयोग, पर्यटन और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। भारत और न्यूजीलैंड पिछले कई वर्षों से अपने संबंधों को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। दोनों देश लोकतांत्रिक मूल्यों और आर्थिक सहयोग के आधार पर साझेदारी को विस्तार देने पर काम कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया के बाद न्यूजीलैंड दौरे का क्या है महत्व? प्रधानमंत्री मोदी की ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड यात्रा भारत की वैश्विक कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत अपनी भूमिका को मजबूत करने के साथ-साथ मित्र देशों के साथ आर्थिक साझेदारी बढ़ाने पर ध्यान दे रहा है। न्यूजीलैंड दौरे से दोनों देशों के रिश्तों में नई ऊर्जा आने की उम्मीद है। अब सभी की नजर FTA Deal के ऐलान और पीएम मोदी के Auckland Address पर बनी हुई है।
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Bihar

Bihar Government Action: Fake Degree वाले Teachers की बढ़ी मुश्किलें

Bihar में शिक्षक भर्ती से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा विभाग से लेकर शिक्षक समुदाय तक हलचल बढ़ा दी है। फर्जी डिग्री और संदिग्ध प्रमाणपत्रों के सहारे सरकारी नौकरी हासिल करने वाले करीब 3000 शिक्षकों पर अब कार्रवाई की तलवार लटक रही है। शिक्षा विभाग ने ऐसे शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच तेज कर दी है। अगर जांच में प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाते हैं तो संबंधित शिक्षकों की नौकरी खत्म की जा सकती है। इतना ही नहीं, नौकरी के दौरान मिली Salary भी ब्याज सहित वापस लेने की तैयारी की जा रही है। Fake Degree Case में कैसे सामने आया मामला? बिहार में सरकारी शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की जांच प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है। इसी दौरान कई शिक्षकों के शैक्षणिक दस्तावेजों में गड़बड़ी सामने आई। कुछ डिग्रियों की मान्यता और सत्यता पर सवाल उठने के बाद विभाग ने विस्तृत जांच शुरू की। जांच में जिन शिक्षकों के दस्तावेज गलत या फर्जी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ नियमों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। नौकरी जाने के साथ Salary Recovery का खतरा सरकार का मानना है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी पाना एक गंभीर मामला है। ऐसे मामलों में सिर्फ सेवा समाप्त करना ही नहीं, बल्कि सरकारी धन की वसूली भी की जा सकती है। विभाग की योजना के अनुसार, दोषी पाए जाने वाले शिक्षकों से नौकरी के दौरान प्राप्त वेतन को ब्याज के साथ वापस लेने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। योग्य उम्मीदवारों के हित में बड़ा कदम शिक्षा विभाग का कहना है कि सरकारी नौकरी में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए नौकरी पाने वालों की वजह से योग्य अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित होते हैं। इस कार्रवाई को शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को साफ और भरोसेमंद बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद होगा अंतिम फैसला फिलहाल सभी संदिग्ध शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया जारी है। अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट और नियमों के आधार पर लिया जाएगा। जिन शिक्षकों के प्रमाणपत्र सही पाए जाएंगे, उन्हें राहत मिल सकती है, लेकिन फर्जी दस्तावेज साबित होने पर कार्रवाई तय मानी जा रही है। बिहार में 3000 शिक्षकों पर होने वाली इस कार्रवाई ने शिक्षा विभाग में नई चर्चा शुरू कर दी है। अब सबकी नजर जांच के अंतिम परिणाम और सरकार के अगले आदेश पर बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sugar

Sugar Rate Hike: त्योहारों से पहले चीनी के दाम बढ़े, Blinkit-Swiggy पर खरीदना हुआ Limited

चीनी (Sugar), जो हर घर की रसोई की रोजमर्रा की जरूरत है, इन दिनों लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है। पिछले कुछ हफ्तों में चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसी बीच Blinkit, Swiggy Instamart, BigBasket और D-Mart जैसे रिटेल और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर चीनी की खरीद को लेकर लिमिट लगाई गई है। कई जगहों पर ग्राहक एक बार में 3 से 5 किलो तक ही चीनी खरीद पा रहे हैं। यानी अगर घर में ज्यादा मात्रा में चीनी खरीदने की जरूरत है, तो एक साथ बड़ी खरीदारी करना अब आसान नहीं है। Sugar Price: एक महीने में तेजी से बढ़े दाम Sugar की कीमतों में हालिया तेजी ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब ₹48 प्रति किलो के आसपास थी, जो अगस्त में बढ़कर ₹55 से ऊपर पहुंच गई। इसके बाद कुछ बाजारों में कीमतें और ऊपर गई हैं। शहर और बाजार के हिसाब से कीमतों में अंतर जरूर है, लेकिन जिस रफ्तार से दाम बढ़े हैं, उसका असर घर के मासिक बजट पर साफ दिखाई दे रहा है। Online Grocery पर क्यों लगाई गई खरीद Limit? Blinkit और Swiggy Instamart जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर खरीदारी की लिमिट लगाए जाने के पीछे मुख्य वजह उपलब्ध स्टॉक को संतुलित रखना मानी जा रही है। त्योहारी सीजन में चीनी की मांग अचानक बढ़ जाती है। मिठाइयों से लेकर घर में बनने वाले पकवानों तक, इस दौरान चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसे में कंपनियां ज्यादा मात्रा में खरीदारी को रोककर स्टॉक को ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, यह लिमिट हर जगह एक जैसी नहीं है। कुछ स्थानों पर 5 किलो तक की खरीद की अनुमति है, जबकि कुछ जगहों पर इससे कम मात्रा की सीमा दिखाई दे रही है। चीनी महंगी होने की क्या है वजह? चीनी के दाम बढ़ने के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। घरेलू उत्पादन में कमी, मौसम से जुड़ी परेशानियां, बढ़ती मांग और बाजार में स्टॉक को लेकर गतिविधियां कीमतों पर दबाव बना रही हैं। त्योहारी सीजन भी इस समय एक बड़ा फैक्टर है। रक्षाबंधन के बाद अब आने वाले त्योहारों में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने की उम्मीद है। इसका सीधा असर चीनी की खपत पर पड़ सकता है। सरकार ने Duty-Free Sugar Import को दी मंजूरी बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने और घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के Duty-Free Import की अनुमति दी है। सरकार का लक्ष्य बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों पर दबाव कम करना है। इसके अलावा बड़े थोक खरीदारों के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा में भी बदलाव किया गया है। इससे बाजार में जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करने की गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है। आम लोगों के लिए क्या मतलब? फिलहाल इसका सबसे सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो महीने का राशन एक साथ खरीदते हैं। जहां दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खरीद सीमा लागू है, वहां लोगों को जरूरत के हिसाब से छोटी मात्रा में चीनी खरीदनी पड़ सकती है। दूसरी तरफ, सरकार की ओर से सप्लाई बढ़ाने के कदमों के बाद बाजार में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। अगर नई चीनी समय पर बाजार में पहुंचती है और त्योहारी मांग के मुताबिक स्टॉक उपलब्ध रहता है, तो कीमतों में आगे राहत मिल सकती है। Sugar Price पर आगे रहेगी नजर चीनी के बढ़ते दाम इस समय सिर्फ घरेलू बजट का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि आने वाले त्योहारी सीजन के लिए भी अहम हैं। सरकार, मिलों और रिटेल कंपनियों के फैसलों पर अब बाजार की नजर रहेगी। फिलहाल ग्राहकों के लिए बेहतर यही है कि जरूरत के मुताबिक ही खरीदारी करें और अलग-अलग दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कीमतों की तुलना कर लें। आने वाले दिनों में सप्लाई की स्थिति साफ होने के साथ चीनी के दाम में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
Gold-Silver

Gold-Silver Price: त्योहार से पहले मिली राहत, सोना-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट

Gold-Silver Price Today: रक्षाबंधन की खरीदारी के बीच सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए बाजार से राहत वाली खबर आई है। 27 अगस्त 2026 को सोने और चांदी दोनों के भाव में गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम सस्ता होकर ₹1,58,477 पर आ गया। वहीं, 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 घटकर करीब ₹2,40,168 रह गया। त्योहार से ठीक पहले कीमतों में आई इस कमी से उन लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है, जो राखी के मौके पर बहन या परिवार के लिए सोने-चांदी की ज्वेलरी खरीदने का मन बना रहे हैं। Gold Price Today: सोने के भाव में ₹2,860 की गिरावट 27 अगस्त को 24 कैरेट सोने की कीमत में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली। IBJA आधारित आंकड़ों के अनुसार, सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम टूटकर ₹1,58,477 पर पहुंच गया। वहीं, 23 कैरेट सोना करीब ₹1,57,842, 22 कैरेट सोना लगभग ₹1,45,165 और 18 कैरेट सोना करीब ₹1,18,858 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर रहा। हालांकि, यहां एक बात ध्यान रखना जरूरी है कि शहर और ज्वेलर के हिसाब से Gold Rate थोड़ा अलग हो सकता है। ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और दूसरे शुल्क भी जुड़ते हैं। Silver Price Today: चांदी भी हुई ₹2,791 सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट आई है। 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 कम होकर करीब ₹2,40,168 पर आ गया। चांदी में पिछले दिनों तेजी देखने को मिली थी, इसलिए मौजूदा गिरावट के बावजूद इसका भाव काफी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में चांदी की मांग बढ़ने से इसकी कीमत पर भी असर पड़ सकता है। Raksha Bandhan से पहले क्यों खास है Gold-Silver Price? रक्षाबंधन के मौके पर लोग सिर्फ राखी और मिठाई ही नहीं खरीदते, बल्कि कई परिवार इस दिन सोने या चांदी की छोटी ज्वेलरी खरीदना भी पसंद करते हैं। ऐसे में त्योहार से एक दिन पहले Gold और Silver के दाम में आई गिरावट खरीदारों के लिए अच्छी खबर मानी जा रही है। अगर आप भी खरीदारी की तैयारी कर रहे हैं तो बाजार में जाने से पहले अपने शहर का ताजा रेट जरूर देख लें। ऑनलाइन दिखने वाला IBJA या बुलियन रेट और ज्वेलरी शॉप का अंतिम बिल एक जैसा होना जरूरी नहीं है। सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान सोने की ज्वेलरी खरीदते समय केवल Gold Rate देखना काफी नहीं है। बिल बनते समय मेकिंग चार्ज, GST और अन्य शुल्क जुड़ सकते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले ज्वेलर से पूरी कीमत का ब्रेकअप मांगना बेहतर रहेगा। साथ ही, सोने की शुद्धता के लिए BIS Hallmark जरूर जांचें। इससे आपको खरीदे जा रहे सोने की शुद्धता के बारे में भरोसा मिलता है। आगे क्या हो सकता है Gold और Silver का भाव? सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, ब्याज दरों की उम्मीद और निवेशकों की खरीदारी जैसे कई फैक्टर कीमती धातुओं के भाव को प्रभावित करते हैं। इसलिए आज आई गिरावट को देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि आने वाले दिनों में कीमतें लगातार नीचे जाएंगी। बाजार की चाल बदलने में ज्यादा समय नहीं लगता। Gold-Silver Price Today का सीधा अपडेट रक्षाबंधन से पहले 24 कैरेट Gold करीब ₹2,860 सस्ता होकर ₹1,58,477 प्रति 10 ग्राम और Silver करीब ₹2,791 गिरकर ₹2,40,168 प्रति किलो पर आ गई है। अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने जा रहे हैं, तो अंतिम खरीदारी से पहले अपने स्थानीय बाजार का लेटेस्ट रेट जरूर जांचें।
Raksha Bandhan

Raksha Bandhan 2026: राखी बांधने से पहले जान लें Bhadra का समय, ये है शुभ Muhurat

Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन के रिश्ते में प्यार, अपनापन और थोड़ी-सी नोकझोंक हमेशा बनी रहती है। इन्हीं खूबसूरत रिश्तों को सेलिब्रेट करने वाला रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। राखी को लेकर इस बार एक सवाल काफी लोगों के मन में है—27 अगस्त या 28 अगस्त, आखिर किस दिन भाई की कलाई पर राखी बांधना शुभ रहेगा? पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। Raksha Bandhan 2026 Date: 27 या 28 अगस्त? रक्षाबंधन सावन मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे के बाद शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे तक रहेगी। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए इसी दिन रक्षाबंधन मनाने की परंपरा रहेगी। यानी बहनें 28 अगस्त को भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। Rakhi Shubh Muhurat 2026: इस समय बांधें राखी 28 अगस्त को राखी बांधने के लिए सुबह का समय शुभ माना जा रहा है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार सुबह करीब 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का समय बताया गया है। हालांकि, शुभ मुहूर्त में शहर के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए अगर आप किसी खास शहर में हैं, तो वहां के पंचांग से समय जरूर मिला लें। Bhadra Kaal: इस बार नहीं होगी बड़ी परेशानी रक्षाबंधन पर भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता। यही वजह है कि हर साल राखी बांधने से पहले लोग भद्रा समाप्त होने का इंतजार करते हैं। इस बार राहत की बात यह है कि 28 अगस्त को राखी बांधने के प्रमुख समय में भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। ऐसे में बहनों को राखी बांधने के लिए भद्रा खत्म होने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। Raksha Bandhan 2026: एक नजर में पूरी जानकारी जानकारी विवरण रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार पर्व सावन पूर्णिमा पूर्णिमा शुरुआत 27 अगस्त की सुबह पूर्णिमा समाप्त 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे राखी बांधने का शुभ समय सुबह करीब 5:57 से 9:48 बजे तक भद्रा 28 अगस्त के प्रमुख राखी मुहूर्त में नहीं Rakhi बांधने की पूजा विधि रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करके भगवान का ध्यान करें और पूजा की तैयारी करें। राखी की थाली में रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, फूल, मिठाई और राखी रखें। भाई को आसन पर बैठाकर पहले तिलक लगाएं। इसके बाद अक्षत लगाकर आरती करें और शुभ मुहूर्त में उसकी कलाई पर राखी बांधें। फिर मिठाई खिलाकर भाई के सुखी और खुशहाल जीवन की कामना करें। भाई भी बहन को प्यार और सम्मान के साथ उपहार देता है और हर परिस्थिति में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प करता है। Raksha Bandhan का असली मतलब क्या है? राखी का धागा देखने में भले ही छोटा हो, लेकिन इसके पीछे छिपी भावना बहुत बड़ी है। बचपन में एक-दूसरे से लड़ने वाले भाई-बहन जब बड़े होते हैं तो यही रिश्ता सबसे मजबूत सहारा बन जाता है। रक्षाबंधन इसी भरोसे और अपनापन को फिर से महसूस करने का दिन है। इसलिए इस बार राखी बांधते समय सिर्फ मुहूर्त ही नहीं, बल्कि उस रिश्ते की मिठास को भी याद रखें, जो जिंदगी के हर पड़ाव पर साथ चलती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Kanpur

Kanpur Plane Crash: अचानक नीचे गिरा Training Plane, दो पायलटों की मौत

उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur) से गुरुवार को एक बेहद दुखद खबर सामने आई। गंगा बैराज के पास नत्थूपुरवा गांव के नजदीक एक Twin-Engine Training Aircraft खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में सवार इंस्ट्रक्टर पायलट और ट्रेनी पायलट की मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने इलाके को घेरकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। Training Flight के दौरान हुआ हादसा मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विमान ट्रेनिंग उड़ान पर था और इसी दौरान हादसे का शिकार हो गया। यह चार सीटों वाला ट्विन-इंजन विमान था। शुरुआती जानकारी में बताया गया कि विमान नीचे गिरने से पहले आसपास के लोगों ने तेज आवाज सुनी थी। हालांकि, उस आवाज की वजह क्या थी, इसे लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि विमान गंगा बैराज के करीब नत्थूपुरवा गांव के पास खुले खेत में गिरा। हादसा आबादी वाले इलाके से कुछ दूरी पर हुआ, जिसके बाद स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। हादसे के बाद मची अफरा-तफरी विमान के खेत में गिरने की सूचना मिलते ही पुलिस और इमरजेंसी टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। दुर्घटनाग्रस्त विमान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था और उसका मलबा खेत में बिखरा मिला। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित किया और दोनों पायलटों को मलबे से बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। शुरुआती रिपोर्टों में एक पायलट की मौत और दूसरे के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई थी। बाद में पुलिस अधिकारियों के हवाले से दोनों पायलटों की मौत की पुष्टि हुई। Crash की असली वजह अभी सामने नहीं आई कानपुर Plane Crash की वजह फिलहाल साफ नहीं है। शुरुआती स्तर पर विमान के अचानक नियंत्रण खोने और नीचे गिरने की बात सामने आई है, लेकिन तकनीकी खराबी, इंजन से जुड़ी समस्या या किसी अन्य कारण की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अधिकारियों की ओर से दुर्घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। विमान के मलबे, उड़ान से जुड़ी जानकारी और घटनास्थल से मिले सबूतों की जांच के बाद ही Crash की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी। Aviation Safety पर फिर उठे सवाल कानपुर में हुआ यह हादसा Flight Training के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल खड़े करता है। हालांकि, अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसा किस वजह से हुआ और क्या इसके पीछे कोई तकनीकी या संचालन संबंधी कारण था। फिलहाल प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर मौजूद हैं और मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। कानपुर विमान हादसे से जुड़ी नई जानकारी जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी। Kanpur Plane Crash Latest Update: गंगा बैराज के पास Training Aircraft के क्रैश होने से दो पायलटों की मौत ने इलाके में शोक का माहौल पैदा कर दिया है। हादसे की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही साफ होगी।
Share Market

Share Market Today: Sensex 77,250 के करीब, Nifty भी टूटा; जानें बाजार में क्यों आई गिरावट

भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) में गुरुवार, 27 अगस्त को कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty बढ़त के साथ खुले, लेकिन कुछ ही देर बाद बाजार की चाल बदल गई। बिकवाली बढ़ने से दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में पहुंच गए। सुबह 10:30 बजे Sensex 123.89 अंक की गिरावट के साथ 77,349.05 पर था, जबकि Nifty 24.60 अंक टूटकर 24,183.15 पर कारोबार कर रहा था। Sensex-Nifty पर बढ़ा दबाव गुरुवार की शुरुआत बाजार के लिए सकारात्मक रही। Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से निवेशकों को कुछ राहत मिली, लेकिन यह बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं पाई। Nifty 24,200 के स्तर के नीचे चला गया, वहीं Sensex भी शुरुआती बढ़त गंवाकर कमजोर हो गया। इससे पहले सुबह 10:13 बजे Reuters के आंकड़ों में Sensex 77,379.50 और Nifty 24,191.85 पर था। यानी उस समय दोनों इंडेक्स में हल्की गिरावट दर्ज की जा रही थी। FMCG और Media Shares में बिकवाली सेक्टोरल कारोबार की बात करें तो FMCG शेयरों पर दबाव नजर आया। शुरुआती कारोबार में Nifty FMCG इंडेक्स भी लाल निशान में था। इसके साथ ही Media शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। सुबह 10:30 बजे Nifty Media करीब 0.60 फीसदी नीचे 1,601.30 पर कारोबार कर रहा था। Media इंडेक्स इससे पहले लगातार दो कारोबारी सत्रों में बढ़त दर्ज कर चुका था। ऐसे में आज की गिरावट को कुछ हद तक मुनाफावसूली से भी जोड़कर देखा जा रहा है। HDFC Bank बना बाजार पर दबाव का बड़ा कारण आज बाजार में HDFC Bank का प्रदर्शन भी निवेशकों के रडार पर रहा। शेयर में करीब 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। Reuters के मुताबिक, अमेरिका में बैंक और उसके दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ दायर एक securities lawsuit की खबर के बाद शेयर पर दबाव बढ़ा। Upstox के अनुसार, HDFC Bank में बिकवाली के चलते Sensex दिन के ऊपरी स्तर से करीब 300 अंक नीचे आया, जबकि Nifty 24,200 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे फिसल गया। Global Market से मिले-जुले संकेत भारतीय बाजार को एक तरफ Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से सहारा मिला। Brent crude करीब 87.4 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया था। ईरान और ओमान के बीच Strait of Hormuz को लेकर बातचीत आगे बढ़ने की खबरों से तेल आपूर्ति को लेकर चिंता कुछ कम हुई है। दूसरी ओर, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों को लेकर बनी चिंता ने निवेशकों को थोड़ा सतर्क रखा। यही वजह रही कि एशियाई बाजारों में मजबूती के बावजूद भारतीय बाजार में तेजी टिक नहीं सकी। निवेशकों की नजर अब बाजार की अगली चाल पर फिलहाल घरेलू बाजार में तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। एक तरफ कच्चे तेल में नरमी और मजबूत ग्लोबल टेक्नोलॉजी संकेत सकारात्मक हैं, तो दूसरी तरफ HDFC Bank जैसे बड़े शेयरों में कमजोरी और सेक्टोरल बिकवाली बाजार पर दबाव बना रही है। ऐसे माहौल में Sensex और Nifty की आगे की दिशा, 24,200 के आसपास Nifty की चाल और प्रमुख सेक्टर्स में खरीदारी-बिकवाली पर निवेशकों की नजर रहेगी। बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय लेना बेहतर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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