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Bhopal में दूसरी रात भी लू का कहर, लोगों की बढ़ी परेशानी

Bhopal में दूसरी रात भी लू का कहर, लोगों की बढ़ी परेशानी

Bhopal में गर्मी ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। लगातार दूसरे दिन रात में भी लू चलने से लोगों को राहत नहीं मिल रही। आमतौर पर रात में तापमान थोड़ा कम हो जाता है, लेकिन इस बार रात भी दिन जैसी तप रही है। लोग घरों में बंद रहने को मजबूर हैं और कूलर-पंखे भी ज्यादा राहत नहीं दे पा रहे। देश के कई शहरों में गर्मी अपने चरम पर है। प्रयागराज और अकोला में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। तेज धूप और गर्म हवाओं ने लोगों को बेहाल कर दिया है। दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा नजर आ रहा है, क्योंकि लोग जरूरी काम होने पर ही बाहर निकल रहे हैं। गर्मी से राहत देने के लिए कई शहरों में नगर निगम की टीमें सड़कों पर पानी का छिड़काव कर रही हैं, ताकि तापमान थोड़ा कम किया जा सके और लोगों को राहत मिले। इसके बावजूद गर्म हवाओं का असर कम नहीं हो रहा। वहीं, ओडिशा में हालात इतने खराब हो गए हैं कि बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए स्कूलों को बंद कर दिया गया है। प्रशासन ने लोगों को दोपहर में बाहर न निकलने और ज्यादा से ज्यादा पानी पीने की सलाह दी है। डॉक्टरों का कहना है कि इस भीषण गर्मी में लापरवाही खतरनाक हो सकती है। हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए सिर ढककर निकलें, हल्के कपड़े पहनें और शरीर को हाइड्रेट रखें। गर्मी का यह दौर फिलहाल जारी रहने की संभावना है, ऐसे में सावधानी ही बचाव है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Raghav Chadha news

AAP Crisis: “आप” की झाड़ू क्यों बिखरी? | केजरीवाल की राजनीति पर बड़ा सवाल

संपादकीय – निखिल सिद्धभट्टी भारतीय घरों में झाड़ू सिर्फ सफाई का साधन नहीं, एक प्रतीक भी है—संगठन का, संतुलन का और टिकाऊपन का। कोई भी गृहिणी आपको बताएगी कि अच्छी झाड़ू वही होती है जिसकी हर एक तिनकी मजबूती से एक-दूसरे से जुड़ी हो और बीच में एक मजबूत आधार हो। लेकिन अगर वही झाड़ू सिर्फ दिखावे के लिए किसी चमकदार पाइप में कसकर बंद कर दी जाए, तो वह ज़्यादा दिन नहीं चलती। यही रूपक आज आम आदमी पार्टी (AAP) की स्थिति पर सटीक बैठता है। AAP की स्थापना भ्रष्टाचार के खिलाफ एक जनांदोलन के रूप में हुई थी। इसमें समाज के वे लोग जुड़े थे जो पारंपरिक राजनीति से दूर रहकर देश को एक नई दिशा देना चाहते थे—शांति भूषण, योगेंद्र यादव, आशुतोष, कुमार विश्वास और आगे चलकर राघव चड्ढा जैसे नाम इस विचारधारा के स्तंभ बने। यह वह जमात थी जो सिर्फ सत्ता नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन की बात करती थी। लेकिन समय के साथ यह झाड़ू बिखरती चली गई। सवाल उठता है—क्या यह बिखराव सिर्फ “ऑपरेशन लोटस” जैसी राजनीतिक रणनीतियों का परिणाम है? या इसके पीछे कुछ और गहरी वजहें हैं? निस्संदेह, भारतीय राजनीति में विपक्षी दलों को तोड़ने के आरोप नई बात नहीं हैं। “ऑपरेशन लोटस” का नाम भी इसी संदर्भ में बार-बार सामने आता है। लेकिन अगर हम ईमानदारी से विश्लेषण करें, तो यह मानना मुश्किल है कि AAP से जुड़े इतने शिक्षित, वैचारिक और स्वतंत्र सोच वाले लोग सिर्फ बाहरी दबाव में पार्टी छोड़ते चले गए। असली कारण कहीं अधिक आंतरिक दिखाई देता है। AAP के भीतर समय के साथ एक “वन मैन शो” की छवि उभरती गई। अरविंद केजरीवाल का नेतृत्व शुरुआत में आंदोलनकारी ऊर्जा से भरा हुआ था, लेकिन धीरे-धीरे उसी नेतृत्व में केंद्रीकरण और कथित “सिंडिकेट संस्कृति” की झलक दिखने लगी। निर्णय लेने की प्रक्रिया सीमित होती गई, असहमति के लिए जगह सिकुड़ती गई, और नतीजा यह हुआ कि एक-एक कर पार्टी के संस्थापक चेहरे किनारे होते चले गए। विडंबना यह भी है कि जो पार्टी भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़ी हुई थी, उसके कई प्रमुख नेता खुद भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरकर जेल तक पहुंच गए। इससे न केवल पार्टी की नैतिक साख को झटका लगा, बल्कि उसके मूल विचार को भी कमजोर किया। राघव चड्ढा जैसे युवा और प्रभावशाली नेता का लंबे समय तक पार्टी की सक्रिय गतिविधियों से दूरी बनाना भी एक संकेत था—एक ऐसा संकेत जिसे शायद समय रहते समझा नहीं गया। आज भी पार्टी के भीतर ऐसे कई चेहरे हैं जो खुलकर सामने नहीं आ रहे, लेकिन “घुटन” महसूस कर रहे हैं। अब सवाल यह नहीं है कि दोष किस पर डाला जाए—BJP, मोदी या अमित शाह पर। सवाल यह है कि क्या AAP अपने भीतर झांकने को तैयार है? अरविंद केजरीवाल के सामने आज सबसे बड़ी चुनौती आत्ममंथन की है। उन्हें यह समझना होगा कि AAP कोई पारंपरिक पार्टी नहीं थी, बल्कि एक विचार था—और विचार को आदेशों से नहीं, संवाद से चलाया जाता है। उन्हें अपने पुराने और नए साथियों के साथ बैठकर एक नया रास्ता तैयार करना होगा, न कि “सुपर CM” की छवि में सिमट जाना होगा। अगर समय रहते यह झाड़ू फिर से नहीं गूंथी गई, तो वह दिन दूर नहीं जब इस झाड़ू में सिर्फ एक ही तिनका बचेगा—और तब सफाई नहीं, सिर्फ प्रतीक रह जाएगा। अब वक्त है—हर तिनके को फिर से जोड़ने का। वरना इतिहास गवाह है, बिखरी हुई झाड़ू न घर साफ कर पाती है, न राजनीति।
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AAP

AAP में भूचाल 7 सांसदों का इस्तीफा, ‘Operation Lotus’ का आरोप

आम आदमी पार्टी (AAP) में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक तूफान देखने को मिल रहा है। ताज़ा जानकारी के अनुसार पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद Raghav Chadha समेत कुल 7 सांसदों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। इस खबर ने दिल्ली से लेकर पंजाब तक राजनीतिक हलचल तेज कर दी है और पार्टी के भीतर अस्थिरता की चर्चाएं बढ़ गई हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बाद AAP के वरिष्ठ नेता Sanjay Singh ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे महज इस्तीफा नहीं, बल्कि एक “सुनियोजित राजनीतिक साजिश” करार दिया है। संजय सिंह का कहना है कि पंजाब में आम आदमी पार्टी को कमजोर करने के लिए “Operation Lotus” जैसे प्रयास किए जा रहे हैं। अंदरूनी कलह या राजनीतिक रणनीति? 7 सांसदों के एक साथ इस्तीफे की खबर के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं—क्या यह पार्टी के भीतर बढ़ती असहमति का नतीजा है या फिर इसके पीछे कोई बड़ी राजनीतिक रणनीति काम कर रही है? हालांकि अभी तक पार्टी की ओर से इस पूरे मामले पर विस्तृत आधिकारिक सफाई नहीं आई है। कार्यकर्ताओं में चिंता, विपक्ष हमलावर इस घटनाक्रम के बाद आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं में चिंता का माहौल है। वहीं विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर AAP पर लगातार हमलावर हैं और इसे पार्टी की आंतरिक कमजोरी के रूप में पेश कर रहे हैं। पंजाब की राजनीति पर असर संभव राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह स्थिति आगे बढ़ती है तो इसका सीधा असर पंजाब की राजनीति पर पड़ सकता है, जहां AAP की सरकार पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रही है। संगठनात्मक स्तर पर भी पार्टी को झटका लग सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें AAP के आधिकारिक बयान पर टिकी हैं, जिससे यह साफ हो सके कि आखिर 7 सांसदों के इस्तीफे के पीछे असली वजह क्या है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Raghav Chadha

“आई एम द राइट मैन इन रॉन्ग पार्टी “:Raghav Chadha AAP से इस्तीफा और 7 सांसदों के साथ BJP में एंट्री

देश की राजनीति में इन दिनों आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा (Raghav Chadha) को लेकर बड़ी हलचल मची हुई है। सोशल मीडिया और कुछ राजनीतिक हलकों में यह दावा तेजी से फैल रहा है कि उन्होंने AAP से इस्तीफा दे दिया है और जल्द ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो सकते हैं। यहां तक कि यह भी कहा जा रहा है कि कुछ सांसद उनके साथ पार्टी बदल सकते हैं। हालांकि, अब तक इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। आखिर क्या है पूरा मामला? पिछले कुछ समय से AAP के भीतर संगठनात्मक बदलाव और नेतृत्व स्तर पर कुछ फैसलों के बाद राघव चड्ढा को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं। इसी बीच उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर तरह-तरह की अटकलें शुरू हो गईं। इन अटकलों ने तब और जोर पकड़ा जब सोशल मीडिया पर यह दावा वायरल हुआ कि Raghav Chadha AAP छोड़कर BJP में शामिल हो सकते हैं। कुछ पोस्ट्स में तो यह भी कहा गया कि उनके साथ कई सांसद भी पार्टी बदल सकते हैं। क्या राघव चड्ढा ने इस्तीफा दिया है? ताजा और उपलब्ध जानकारी के अनुसार: पहले भी उड़ चुकी हैं ऐसी खबरें यह पहली बार नहीं है जब राघव चड्ढा को लेकर ऐसी राजनीतिक चर्चाएं सामने आई हों। इससे पहले भी उनके पार्टी में स्थिति और भविष्य को लेकर कई तरह की अफवाहें फैल चुकी हैं, जिन्हें समय-समय पर खारिज किया गया है। राजनीतिक माहौल में बढ़ी अटकलें चुनावी माहौल और राजनीतिक सरगर्मियों के बीच इस तरह की खबरें अक्सर तेजी से फैलती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आता, तब तक इन दावों को केवल अटकल ही माना जाना चाहिए। राघव चड्ढा के AAP छोड़ने और BJP में जाने की खबरें फिलहाल अफवाह और अनकन्फर्म्ड रिपोर्ट्स हैं। किसी भी तरह के निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक बयान का इंतजार करना जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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EPFO

PF Withdrawal New System EPFO 3.0 से बदल जाएगा पूरा प्रोसेस, होगा फास्ट और डिजिटल

कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) जल्द ही अपना नया सिस्टम EPFO 3.0 लागू करने जा रहा है, जिसके बाद PF (Provident Fund) निकालने की प्रक्रिया पहले से कहीं ज्यादा आसान, तेज और डिजिटल हो जाएगी। अब पैसे के लिए लंबा इंतजार और दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। UPI और ATM से सीधे PF Withdrawal नई व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब PF का पैसा सीधे UPI और ATM के जरिए निकाला जा सकेगा। यानी बैंक या ऑनलाइन क्लेम की लंबी प्रक्रिया खत्म होने की ओर है। यह बदलाव कर्मचारियों के लिए बड़ी सुविधा लेकर आएगा। मिनटों में PF का पैसा आपके अकाउंट में EPFO 3.0 में सिस्टम को पूरी तरह रियल-टाइम प्रोसेसिंग से जोड़ा जा रहा है। जैसे ही आपका क्लेम अप्रूव होगा, पैसा कुछ ही मिनटों में आपके बैंक अकाउंट या UPI में पहुंच जाएगा। इससे पहले जहां कई दिन लग जाते थे, अब इंतजार काफी कम हो जाएगा। आसान और सिंपल होंगे PF के नियम नए सिस्टम में PF निकासी के नियमों को भी सरल किया जा रहा है। अब अलग-अलग कैटेगरी की जटिलता को कम करके इसे कुछ ही मुख्य श्रेणियों में रखा जाएगा, जिससे प्रोसेसिंग तेज और आसान हो सके। Auto Settlement की सुविधा भी होगी EPFO 3.0 में कई मामलों में क्लेम अपने आप सेटल हो जाएगा। यानी बिना ज्यादा डॉक्यूमेंट और बिना देरी के आपका PF प्रोसेस हो जाएगा। यह सुविधा खासकर छोटे और सामान्य क्लेम्स के लिए फायदेमंद होगी। जरूरत पर तुरंत मिलेगा बड़ा हिस्सा नई व्यवस्था के तहत कर्मचारी अपने PF का लगभग 75% तक हिस्सा जरूरत पड़ने पर तुरंत निकाल सकेंगे, जबकि बाकी राशि सुरक्षित रहेगी ताकि रिटायरमेंट फंड पर असर न पड़े। EPFO 3.0 का मुख्य उद्देश्य क्या है? इस नए सिस्टम का मकसद PF प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और बैंकिंग जैसी आसान बनाना है, ताकि: कब तक लागू होगा EPFO 3.0? EPFO 3.0 को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा और आने वाले समय में यह पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा। इसके बाद PF निकालने का अनुभव बिल्कुल डिजिटल बैंकिंग जैसा हो जाएगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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पवन खेड़ा

Breaking कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को बड़ा झटका, कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज की

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा (Pawan Khera) को बड़ा कानूनी झटका लगा है। गुवाहाटी हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) की याचिका खारिज कर दी है। यह मामला असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma की पत्नी Riniki Bhuyan Sharma से जुड़ा है, जिन्होंने पवन खेड़ा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। क्यों दर्ज हुआ केस? कोर्ट ने क्या कहा? हाई कोर्ट ने कहा कि मामला गंभीर आरोपों से जुड़ा है, इसलिए अग्रिम राहत नहीं दी जा सकती कोर्ट के फैसले के बाद अब गिरफ्तारी का खतरा बढ़ गया है पहले क्या हुआ था? अब आगे क्या? यह मामला सिर्फ एक कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि राजनीतिक बयानबाज़ी बनाम कानून की बड़ी टक्कर बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में यह केस नेशनल पॉलिटिक्स में बड़ा मुद्दा बन सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Amrit Bharat

UP to Maharashtra Train Varanasi से 2 Amrit Bharat Trains लॉन्च, यात्रियों को बड़ी राहत

रेल यात्रियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। 28 अप्रैल को वाराणसी से दो नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों की शुरुआत होने जा रही है। इस पहल से उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच सफर पहले से ज्यादा आसान, तेज और किफायती हो जाएगा। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन ट्रेनों को हरी झंडी दिखा सकते हैं। खास बात यह है कि लंबे समय से यूपी से महाराष्ट्र तक सीधी ट्रेन की मांग कर रहे यात्रियों के लिए यह शुरुआत किसी राहत से कम नहीं है। कौन से रूट पर चलेंगी ट्रेनें? नई अमृत भारत ट्रेनों का मुख्य रूट वाराणसी से पुणे (हडपसर) तक माना जा रहा है। यह रूट उन यात्रियों के लिए बेहद अहम है, जो नौकरी, पढ़ाई या धार्मिक कारणों से इन दोनों राज्यों के बीच यात्रा करते हैं। संभावित स्टॉपेज (ठहराव) यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ट्रेन कई बड़े स्टेशनों पर रुकेगी, जिनमें शामिल हैं: (अंतिम सूची रेलवे की आधिकारिक घोषणा के बाद स्पष्ट होगी) यात्रियों को क्या मिलेगा फायदा? इन ट्रेनों के शुरू होने से: Amrit Bharat Express क्या है? अमृत भारत एक्सप्रेस भारतीय रेलवे की एक नई सुपरफास्ट नॉन-एसी ट्रेन श्रेणी है। इसमें आम यात्रियों को ध्यान में रखते हुए बेहतर सीटिंग, मोबाइल चार्जिंग पॉइंट, और CCTV जैसी सुविधाएं दी गई हैं, ताकि लंबा सफर भी आरामदायक बन सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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GST

Delhi GST 162 अधिकारियों का तबादला, अनियमितताओं पर सरकार का बड़ा Action

दिल्ली के जीएसटी (GST) विभाग में अचानक हुए बड़े प्रशासनिक फेरबदल ने हलचल मचा दी है। विभाग में कुल 162 अधिकारियों और कर्मचारियों का ट्रांसफर किया गया है। इस कदम को सिर्फ एक सामान्य तबादला नहीं, बल्कि सिस्टम को सुधारने की बड़ी पहल के तौर पर देखा जा रहा है। क्या है पूरा मामला? हाल ही में विभाग के निरीक्षण के दौरान कामकाज में कई खामियां सामने आईं। कुछ जगहों पर अनियमितताओं की शिकायतें भी मिलीं, जबकि कई अधिकारी लंबे समय से एक ही पद और स्थान पर तैनात थे। ऐसे में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए एक साथ इतने बड़े स्तर पर ट्रांसफर का फैसला लिया। किन-किन पदों पर हुआ बदलाव? इस फेरबदल में विभाग के लगभग हर स्तर को शामिल किया गया है: यह दिखाता है कि बदलाव सिर्फ ऊपरी स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम को रीसेट करने की कोशिश की जा रही है। क्यों जरूरी था यह फैसला? सूत्रों के मुताबिक, यह कदम कई कारणों से उठाया गया: इन सभी मुद्दों को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने यह बड़ा फैसला लिया, ताकि विभाग की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाया जा सके। आम लोगों पर क्या होगा असर? इस फैसले का असर सिर्फ विभाग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आम करदाताओं (taxpayers) को भी इसका फायदा मिल सकता है: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bengal

Bengal मोदी का ममता सरकार पर हमला, कहा जनता चाहती है बदलाव

Bengal की राजनीति इन दिनों पूरी तरह गरमाई हुई है। चुनावी माहौल के बीच Narendra Modi ने एक बड़ी रैली में सत्तारूढ़ Trinamool Congress (TMC) पर तीखा हमला बोला। उनके बयान ने राज्य की सियासत में नई बहस छेड़ दी है। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कहा कि अब Bengal में बदलाव की लहर साफ दिखाई दे रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “टीएमसी का दीया बुझने वाला है, और जब दीया बुझता है तो वह फड़फड़ाता जरूर है।” इस एक लाइन ने पूरे राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। TMC सरकार पर लगाए गंभीर आरोप Narendra Modi ने Mamata Banerjee सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य में भ्रष्टाचार और अव्यवस्था बढ़ी है। उन्होंने दावा किया कि आम जनता अब बदलाव चाहती है और बीजेपी को एक विकल्प के तौर पर देख रही है। रैली में मौजूद लोगों की प्रतिक्रिया भी काफी जोश भरी रही, जिससे साफ संकेत मिला कि चुनावी मुकाबला इस बार बेहद दिलचस्प होने वाला है। Women Reservation पर क्या बोले PM Modi अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने महिलाओं के मुद्दे को भी मजबूती से उठाया। उन्होंने कहा, “हम देश की बेटियों के सपनों को कुचलने नहीं देंगे।” उन्होंने केंद्र सरकार के Women’s Reservation Bill का जिक्र करते हुए कहा कि यह कदम महिलाओं को राजनीति में आगे लाने के लिए मील का पत्थर साबित होगा। उनके अनुसार, इससे महिलाओं की भागीदारी और निर्णय लेने की शक्ति दोनों बढ़ेंगी। Election 2026 से पहले सियासी टकराव तेज बंगाल में जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे बीजेपी और टीएमसी के बीच बयानबाजी और तेज होती जा रही है। एक तरफ बीजेपी राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी है, तो दूसरी ओर टीएमसी अपनी सत्ता बचाने के लिए पूरी ताकत लगा रही है। ग्राउंड पर माहौल देखें तो यह सिर्फ चुनाव नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका है। आने वाले दिनों में रैलियां, आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक रणनीतियां और तेज होंगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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गर्मी

भीषण गर्मी का कहर UP-Rajasthan में 44°C+, Odisha में स्कूल बंद, Kerala में लू से मौत

देश इस समय भीषण गर्मी (Heatwave) की चपेट में है। उत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक तापमान लगातार नए रिकॉर्ड छू रहा है। बढ़ती गर्मी ने न सिर्फ जनजीवन को प्रभावित किया है, बल्कि अब यह लोगों की सेहत के लिए भी बड़ा खतरा बनती जा रही है। कई राज्यों में 44°C के पार तापमान उत्तर प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र के कई शहरों में पारा 44 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है।दोपहर होते-होते सड़कों पर सन्नाटा छा जाता है। तेज धूप और झुलसा देने वाली गर्म हवाएं लोगों को घरों में रहने पर मजबूर कर रही हैं। कामकाजी लोगों के लिए यह समय सबसे ज्यादा मुश्किल भरा साबित हो रहा है। Odisha में बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूल बंद भीषण गर्मी को देखते हुए ओडिशा के 4 जिलों में स्कूल बंद करने का फैसला लिया गया है।प्रशासन का कहना है कि बच्चों की सेहत से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। लगातार बढ़ते तापमान को देखते हुए यह कदम एहतियात के तौर पर उठाया गया है। Kerala में Heatstroke से एक की मौत दक्षिण भारत के केरल में भी गर्मी का असर अब साफ दिखाई देने लगा है।यहां लू (Heatstroke) लगने से एक व्यक्ति की मौत की खबर सामने आई है। आमतौर पर ठंडा रहने वाला यह राज्य भी इस बार गर्मी की चपेट में आ गया है, जिससे स्थानीय लोग भी हैरान हैं। आम लोगों की बढ़ती परेशानी गर्मी का असर सिर्फ तापमान तक सीमित नहीं है— लोगों का कहना है कि अप्रैल में ही जून जैसी गर्मी महसूस हो रही है, जो चिंता बढ़ाने वाली है। Heatwave से बचाव के जरूरी टिप्स हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Brazil Adventure Accident: रोमांचक जंप बना आखिरी सफर, 21 वर्षीय मारिया की मौत से सदमे में लोग

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Brazil में एडवेंचर एक्टिविटी के दौरान हुई एक दर्दनाक घटना ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है। 21 वर्षीय मारिया एडुआर्दा रोड्रिग्स डी फ्रेटास रोमांचक जंप का अनुभव लेने पहुंची थीं, लेकिन कुछ ही सेकंड में यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हादसे से कुछ समय पहले मारिया ने सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरें शेयर की थीं। उन्होंने मजाकिया अंदाज में लिखा था कि आखिर कौन उन्हें पुल से कूदने दे रहा है। हादसे के बाद उनका यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और लोगों ने इसे बेहद भावुक कर देने वाला बताया। एडवेंचर स्पोर्ट्स की सुरक्षा पर उठे सवाल इस घटना के बाद एडवेंचर स्पोर्ट्स और एडवेंचर टूरिज्म की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बंजी या रोप जंपिंग जैसी गतिविधियों में कई स्तरों पर सुरक्षा जांच की जाती है। विशेषज्ञों के मुताबिक यदि उपकरणों की अंतिम जांच या सुरक्षा प्रक्रिया में थोड़ी भी लापरवाही हो जाए तो इसके परिणाम बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं।
Gujarat Jama Masjid Controversy: भरुच की 700 साल पुरानी मस्जिद को लेकर नई बहस, वैज्ञानिक सर्वे की मांग

Gujarat Jama Masjid Controversy: भरुच की 700 साल पुरानी मस्जिद को लेकर नई बहस, वैज्ञानिक सर्वे की मांग

Gujarat के भरुच स्थित करीब 700 साल पुरानी जामा मस्जिद एक बार फिर चर्चा में आ गई है। हाल ही में सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो के बाद इस ऐतिहासिक स्थल के मूल स्वरूप को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। वीडियो में मस्जिद के कथित अंडरग्राउंड हिस्से में जैन तीर्थंकरों और हिंदू देवी-देवताओं से जुड़ी प्राचीन मूर्तियां तथा नक्काशीदार पत्थर दिखाई देने का दावा किया गया है। हालांकि इन दावों की अब तक स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मंदिर या जैन विहार होने का दावा कुछ हिंदू और जैन संगठनों के प्रतिनिधियों ने दावा किया है कि यह स्थल मूल रूप से किसी प्राचीन मंदिर या जैन विहार का हिस्सा था, जिसे बाद में मस्जिद में परिवर्तित कर दिया गया। इन दावों के बाद संबंधित पक्षों ने पूरे परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराने और ऐतिहासिक तथ्यों की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। ASI के संरक्षण में है स्मारक बताया जा रहा है कि यह ऐतिहासिक स्मारक फिलहाल Archaeological Survey of India (ASI) के संरक्षण में है। विवाद बढ़ने के बाद प्रशासन और ASI ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और परिसर के आसपास निगरानी बढ़ा दी गई है। प्रशासन सतर्क, जांच की मांग तेज स्थानीय प्रशासन का कहना है कि फिलहाल मामले पर नजर रखी जा रही है और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए गए हैं। वहीं, इतिहासकारों और विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वैज्ञानिक सर्वे और आधिकारिक जांच जरूरी है। सोशल मीडिया पर बढ़ी चर्चा वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है। कई लोग ऐतिहासिक तथ्यों की जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि प्रशासन ने लोगों से अफवाहों से बचने और शांति बनाए रखने की अपील की है।
India-Russia Oil Trade: रूस से सस्ते तेल की खरीद रिकॉर्ड स्तर पर, मई 2026 में बढ़ा आयात

India-Russia Oil Trade: रूस से सस्ते तेल की खरीद रिकॉर्ड स्तर पर, मई 2026 में बढ़ा आयात

India और Russia के बीच ऊर्जा व्यापार लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। पश्चिमी प्रतिबंधों और वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद भारत ने मई 2026 में रूस से रिकॉर्ड स्तर पर तेल और अन्य जीवाश्म ईंधनों का आयात किया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने मई महीने में रूस से करीब 6.7 अरब डॉलर मूल्य के हाइड्रोकार्बन खरीदे। इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी कच्चे तेल की रही। रिपोर्ट के अनुसार भारतीय रिफाइनरियों में सस्ते रूसी तेल की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। अप्रैल के मुकाबले 21% बढ़ा आयात यूरोपीय थिंक टैंक Centre for Research on Energy and Clean Air (CREA) की रिपोर्ट के अनुसार, रूस से कच्चे तेल का भारतीय आयात अप्रैल की तुलना में 21 फीसदी बढ़ा है। वहीं देश के कुल कच्चे तेल आयात में भी 8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। रिपोर्ट में बताया गया कि भारत ने मई में लगभग 4.8 अरब यूरो मूल्य का रूसी कच्चा तेल खरीदा, जो रूस से आयात किए गए कुल हाइड्रोकार्बन का करीब 83 फीसदी हिस्सा था। भारतीय रिफाइनरियों को मिल रहा फायदा विशेषज्ञों का मानना है कि रियायती दरों पर मिलने वाला रूसी तेल भारतीय रिफाइनरियों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है। इससे ईंधन लागत को नियंत्रित करने में मदद मिल रही है और घरेलू बाजार पर भी इसका असर दिखाई दे रहा है। वैश्विक दबाव के बीच मजबूत व्यापारिक रिश्ते यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर कई पश्चिमी देशों ने प्रतिबंध लगाए थे, लेकिन इसके बावजूद भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग लगातार मजबूत बना हुआ है। भारत ने हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार की नजर भारत पर ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में शामिल है, इसलिए रूस से बढ़ती खरीद पर वैश्विक बाजार और पश्चिमी देशों की नजर बनी हुई है।
Bengaluru Protest: केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर Cockroach Party का प्रदर्शन

Bengaluru Protest: केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर Cockroach Party का प्रदर्शन

Bengaluru में केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच पार्टी ने विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। पार्टी के अनुसार रविवार शाम 4 बजे फ्रीडम पार्क में समर्थक जुटेंगे और अपनी मांगों के समर्थन में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे। Freedom Park में होगा प्रदर्शन प्रदर्शन का आयोजन Freedom Park में किया जाएगा। पार्टी का कहना है कि प्रदर्शन पूरी तरह लोकतांत्रिक और अहिंसक तरीके से आयोजित होगा। कॉकरोच पार्टी के संस्थापक Abhijeet Deepke ने कहा कि पार्टी सरकार के सामने अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से रखना चाहती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन जनता की आवाज उठाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। समर्थकों से बड़ी संख्या में पहुंचने की अपील पार्टी ने अपने समर्थकों से बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है। सोशल मीडिया के जरिए भी लोगों को कार्यक्रम की जानकारी दी जा रही है।
West Bengal Fake Signature Case: CID मुख्यालय पहुंचे Abhishek Banerjee, फिर होगी पूछताछ

West Bengal Fake Signature Case: CID मुख्यालय पहुंचे Abhishek Banerjee, फिर होगी पूछताछ

West Bengal में विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर मामले को लेकर जांच तेज हो गई है। इसी केस में Abhishek Banerjee रविवार को एक बार फिर CID मुख्यालय पहुंचे, जहां उनसे पूछताछ की जा रही है। यह मामला विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति से जुड़े कथित फर्जी हस्ताक्षरों के आरोपों से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसी के मुताबिक पिछली पूछताछ में मिले जवाबों से पूरी संतुष्टि नहीं मिली थी, जिसके बाद उन्हें दोबारा तलब किया गया। कुणाल घोष को भी भेजा गया समन CID ने इस मामले में Kunal Ghosh को भी पूछताछ के लिए बुलाया है। जानकारी के अनुसार उन्हें दोपहर करीब 3 बजे भवानी भवन स्थित CID कार्यालय में पेश होने के निर्देश दिए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसी दोनों नेताओं को आमने-सामने बैठाकर भी सवाल-जवाब कर सकती है ताकि मामले के अलग-अलग पहलुओं को स्पष्ट किया जा सके। जरूरी दस्तावेज भी मांगे गए अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज भी अभिषेक बनर्जी से मांगे गए हैं। इन दस्तावेजों की मदद से जांच को आगे बढ़ाने और कथित फर्जी हस्ताक्षरों की सच्चाई सामने लाने की कोशिश की जा रही है। पहले भी हो चुकी है पूछताछ जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार CID इससे पहले भी अभिषेक बनर्जी से पूछताछ कर चुकी है। हालांकि कई सवालों के जवाबों को लेकर एजेंसी को स्पष्टता नहीं मिल पाई थी। इसी वजह से उन्हें दोबारा समन जारी किया गया।

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