Gujarat के भरुच स्थित करीब 700 साल पुरानी जामा मस्जिद एक बार फिर चर्चा में आ गई है। हाल ही में सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो के बाद इस ऐतिहासिक स्थल के मूल स्वरूप को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
वीडियो में मस्जिद के कथित अंडरग्राउंड हिस्से में जैन तीर्थंकरों और हिंदू देवी-देवताओं से जुड़ी प्राचीन मूर्तियां तथा नक्काशीदार पत्थर दिखाई देने का दावा किया गया है। हालांकि इन दावों की अब तक स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मंदिर या जैन विहार होने का दावा
कुछ हिंदू और जैन संगठनों के प्रतिनिधियों ने दावा किया है कि यह स्थल मूल रूप से किसी प्राचीन मंदिर या जैन विहार का हिस्सा था, जिसे बाद में मस्जिद में परिवर्तित कर दिया गया।
इन दावों के बाद संबंधित पक्षों ने पूरे परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराने और ऐतिहासिक तथ्यों की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।
ASI के संरक्षण में है स्मारक
बताया जा रहा है कि यह ऐतिहासिक स्मारक फिलहाल Archaeological Survey of India (ASI) के संरक्षण में है। विवाद बढ़ने के बाद प्रशासन और ASI ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और परिसर के आसपास निगरानी बढ़ा दी गई है।
प्रशासन सतर्क, जांच की मांग तेज
स्थानीय प्रशासन का कहना है कि फिलहाल मामले पर नजर रखी जा रही है और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए गए हैं। वहीं, इतिहासकारों और विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वैज्ञानिक सर्वे और आधिकारिक जांच जरूरी है।
सोशल मीडिया पर बढ़ी चर्चा
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है। कई लोग ऐतिहासिक तथ्यों की जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि प्रशासन ने लोगों से अफवाहों से बचने और शांति बनाए रखने की अपील की है।
