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ओंकारेश्वर में RTO और ट्रैफिक पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 13 यात्री बसों पर जुर्माना; 4 ऑटो जब्त

तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में श्रद्धालुओं और यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आरटीओ और ट्रैफिक पुलिस ने संयुक्त रूप से सघन वाहन चेकिंग अभियान चलाया। इस दौरान नियमों का उल्लंघन करने वाली 13 यात्री बसों पर कार्रवाई करते हुए 44 हजार 500 रुपए का जुर्माना वसूला गया। वहीं बिना जरूरी दस्तावेजों के चल रहे 4 ऑटो रिक्शा भी जब्त किए गए हैं। अभियान के दौरान जब्त किए गए ऑटो रिक्शा को मांधाता थाना परिसर में सुरक्षित खड़ा कराया गया है। कार्रवाई से वाहन चालकों में हड़कंप की स्थिति रही। 52 यात्री बसों की हुई जांच अतिरिक्त क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी दीपक मांझी ने बताया कि जांच अभियान के दौरान कुल 52 यात्री बसों की जांच की गई। इस दौरान बसों के फिटनेस सर्टिफिकेट, परमिट, बीमा और प्रदूषण प्रमाण पत्र (PUC) की बारीकी से जांच की गई। जिन वाहनों में दस्तावेजों की कमी या अन्य अनियमितताएं मिलीं, उनके खिलाफ मोटरयान अधिनियम के तहत चालानी कार्रवाई की गई। श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर प्रशासन का फोकस परिवहन विभाग का कहना है कि ओंकारेश्वर में हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में यात्रियों को सुरक्षित सफर उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। अधिकारियों ने साफ किया है कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और यातायात व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए आगे भी इस तरह के सघन जांच अभियान लगातार चलाए जाएंगे। अधिक खबरों और अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com।
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पुणे पोर्श केस में फिर मचा बवाल: जमानत के बाद पार्टी करता दिखा आरोपी परिवार, पीड़ितों के परिजनों में नाराजगी

महाराष्ट्र के पुणे में मई 2024 में हुए चर्चित पोर्श कार हादसे को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में आरोपी नाबालिग के पिता को जमानत मिलने के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें आरोपी परिवार पार्टी करता और डांस करता नजर आ रहा है। वीडियो सामने आने के बाद पीड़ित परिवारों में नाराजगी बढ़ गई है। यह मामला पुणे के कल्याणी नगर इलाके का है, जहां तेज रफ्तार पोर्श कार ने दो आईटी इंजीनियरों को कुचल दिया था। हादसे में दोनों युवकों की मौके पर ही मौत हो गई थी। बताया गया था कि कार एक 17 वर्षीय नाबालिग चला रहा था। एमपी के दो इंजीनियरों की गई थी जान मृतकों में मध्यप्रदेश के जबलपुर निवासी अश्विनी कोष्ठा और उमरिया के रहने वाले एक अन्य युवा इंजीनियर शामिल थे। हादसे के बाद पूरे देश में गुस्सा देखने को मिला था और जुवेनाइल जस्टिस सिस्टम पर भी सवाल उठे थे। घटना के बाद जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने आरोपी नाबालिग को कुछ शर्तों के साथ जमानत दे दी थी। वहीं आरोपी के पिता विशाल अग्रवाल और परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई थी। वायरल वीडियो पर भड़का पीड़ित परिवार अब सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने मामले को फिर चर्चा में ला दिया है। जबलपुर निवासी मृतक इंजीनियर अश्विनी कोष्ठा के पिता ने आरोपी परिवार के व्यवहार को बेहद असंवेदनशील बताया है। उन्होंने कहा कि जिस परिवार की लापरवाही से दो युवाओं की जान चली गई, उसी परिवार का इस तरह जश्न मनाना पीड़ित परिवारों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। उन्होंने कहा कि आरोपी परिवार में न शर्म बची है और न ही संवेदनशीलता। इस तरह की हरकतें न्याय व्यवस्था का मजाक उड़ाने जैसी हैं। पीड़ित परिवार ने आरोपी को मिली जमानत पर दोबारा विचार करने की मांग भी की है। आरोपी परिवार ने दी सफाई वहीं आरोपी परिवार ने वायरल वीडियो को पुराना बताया है। परिवार का कहना है कि यह वीडियो 2 सितंबर 2023 का है, जब गोवा में उनकी 25वीं शादी की सालगिरह मनाई गई थी। परिवार ने आरोप लगाया कि वीडियो को गलत तरीके से पेश कर माहौल बनाया जा रहा है। आरोपी पक्ष का यह भी कहना है कि यह उनका निजी वीडियो है, जिसे बिना अनुमति सोशल मीडिया पर वायरल किया गया। उन्होंने वीडियो लीक करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात भी कही है। सोशल मीडिया से लेकर कानूनी गलियारों तक चर्चा फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया से लेकर कानूनी गलियारों तक चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग लगातार इस केस में सख्त कार्रवाई और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं। अधिक खबरों और अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com।
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ग्वालियर रेत फड़ गोलीकांड: मुख्य आरोपी विष्णु दुबे और भतीजा गिरफ्तार, लाइसेंसी पिस्टल जब्त

ग्वालियर के महाराजपुरा थाना क्षेत्र में रेत फड़ पर हुई गोलीबारी और हत्या के मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी विष्णु दुबे और उसके भतीजे बृजमोहन को घटना के कुछ ही घंटों के भीतर गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपियों को गोहद से पकड़ा गया है। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल की गई लाइसेंसी पिस्टल भी जब्त कर ली है। बताया जा रहा है कि बुधवार सुबह करीब 10:30 बजे रेत फड़ पर किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। पुलिस पूछताछ में BSF से रिटायर्ड आरोपी विष्णु दुबे ने बताया कि उसका सत्यभान गुर्जर और भोला उर्फ महेंद्र गुर्जर से झगड़ा हुआ था। आरोपी के मुताबिक विवाद के दौरान उसके साथ अभद्र व्यवहार किया गया, जिससे वह गुस्से में आ गया। इसके बाद वह घर गया, लाइसेंसी पिस्टल लेकर वापस लौटा और फायरिंग कर दी। गोलीबारी में भोला उर्फ महेंद्र गुर्जर को पेट और सीने में दो गोलियां लगीं। गंभीर हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। वहीं सत्यभान गुर्जर भी गोली लगने से घायल हो गए, जिनका अस्पताल में इलाज जारी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, दोनों आरोपी फिलहाल महाराजपुरा थाना लॉकअप में हैं और उनसे लगातार पूछताछ की जा रही है। आरोपी विष्णु दुबे ने पूछताछ में यह भी कहा कि यदि मामले में निर्दोष लोगों को फंसाया गया तो विवाद और बढ़ सकता है। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया था। मृतक भोला गुर्जर के परिजनों ने पोस्टमार्टम के बाद शव को एयरपोर्ट तिराहे पर रखकर चक्का जाम कर दिया। परिजनों ने आरोपियों पर सख्त कार्रवाई, परिवार के एक सदस्य को नौकरी और लाइसेंसी हथियार देने की मांग की। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और समझाइश के बाद जाम खुलवाया। अधिकारियों ने निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया। इस बीच घटना का CCTV वीडियो भी सामने आया है, जिसमें झगड़े के बाद आरोपी विष्णु दुबे लाइसेंसी पिस्टल से भोला और सत्यभान गुर्जर पर फायरिंग करता दिखाई दे रहा है। फायरिंग के बाद आरोपी मौके से भाग निकला था। पुलिस ने गुरुवार को दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें पूछताछ के लिए रिमांड पर भेज दिया गया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की हर एंगल से जांच कर रही है।
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भोपाल में डेढ़ करोड़ का अवैध कफ सिरप फैक्ट्री का भंडाफोड़, STF की रेड में 700 से ज्यादा पेटियां जब्त

भोपाल के गांधी नगर इलाके में एसटीएफ ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब डेढ़ करोड़ रुपए कीमत का अवैध कफ सिरप पकड़ा है। यह कार्रवाई डोबरा पटेल सिटी कॉलोनी में गुरुवार देर रात की गई। छापेमारी के दौरान एसटीएफ ने 700 से ज्यादा पेटियां, कफ सिरप बनाने में इस्तेमाल होने वाली मशीनें और भारी मात्रा में नशीला सिरप बरामद किया। मामले में 10 लोगों को हिरासत में लिया गया है। जानकारी के मुताबिक, मकान में ‘आफ कफ’ नाम से अवैध रूप से नशीला कफ सिरप तैयार किया जा रहा था। गुप्त सूचना मिलने के बाद एसटीएफ की टीम ने रात करीब 12 बजे दबिश दी। कार्रवाई शुक्रवार सुबह 3 बजे तक चली। छापे के दौरान मकान के अलग-अलग कमरों में कफ सिरप की बोतलें और कार्टन भरे मिले। एसटीएफ ने बरामद कफ सिरप के सैंपल जांच के लिए भेज दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं आरोपियों से पूछताछ के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश भी जारी है। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस पूरी कार्रवाई की भनक स्थानीय गांधी नगर पुलिस को भी नहीं लगी। एसटीएफ अधिकारियों के अनुसार, लंबे समय से इलाके से अवैध नशीले कफ सिरप की सप्लाई की शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद गुप्त रूप से निगरानी की जा रही थी। जिस मकान में यह अवैध फैक्ट्री संचालित हो रही थी, वह किसी मालवीय नाम के व्यक्ति का बताया जा रहा है। हालांकि खबर लिखे जाने तक मकान मालिक से संपर्क नहीं हो सका था। एसटीएफ अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस अवैध कारोबार का नेटवर्क किन लोगों तक फैला हुआ है और इसकी सप्लाई प्रदेश के किन इलाकों में की जा रही थी। इस कार्रवाई के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि रिहायशी इलाके में इस तरह का अवैध कारोबार चल रहा है।
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गुना में पारिवारिक विवाद से परेशान विवाहिता मोबाइल टावर पर चढ़ी, 3 घंटे बाद प्रशासन ने सुरक्षित उतारा

मध्य प्रदेश के गुना जिले में गुरुवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब एक विवाहिता पारिवारिक विवाद से परेशान होकर गांव के मोबाइल टावर पर चढ़ गई। करीब तीन घंटे तक चले हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद पुलिस और प्रशासन की टीम ने समझाइश देकर महिला को सुरक्षित नीचे उतार लिया। मामला गुना जिले की कुंभराज तहसील के ग्राम खेजरा रामा का है। जानकारी के अनुसार, 23 वर्षीय निकिता की शादी करीब तीन साल पहले कुलदीप मीना से हुई थी। बताया जा रहा है कि ससुराल में लंबे समय से पारिवारिक विवाद चल रहा था। इसी बात से नाराज होकर गुरुवार सुबह करीब 5 बजे निकिता गांव में लगे मोबाइल टावर पर चढ़ गई। ग्रामीणों ने दी पुलिस को सूचना सुबह ग्रामीणों की नजर महिला पर पड़ी तो गांव में अफरा-तफरी मच गई। लोगों ने तुरंत पुलिस और प्रशासन को सूचना दी। खबर मिलते ही कुंभराज तहसीलदार कमल मंडेलिया, थाना प्रभारी पंकज त्यागी और पटवारी प्रवीण सिंह राणा टीम के साथ मौके पर पहुंचे। स्थिति को देखते हुए नगर परिषद और स्वास्थ्य विभाग की टीम को भी मौके पर बुलाया गया। समझाइश से शांत हुआ मामला महिला काफी नाराज थी और नीचे आने को तैयार नहीं हो रही थी। ऐसे में प्रशासन ने बल प्रयोग करने के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाया। अधिकारियों ने लाउडस्पीकर के जरिए महिला से लगातार संवाद किया और भरोसा दिलाया कि उसकी हर समस्या सुनी जाएगी। अधिकारियों ने महिला से कहा कि उसकी शिकायतों पर प्रशासन और कानून के दायरे में रहकर उचित कार्रवाई की जाएगी। लगातार समझाइश और भरोसे के बाद महिला का गुस्सा शांत हुआ और वह धीरे-धीरे टावर से नीचे उतर आई। सुरक्षित नीचे उतरने पर लोगों ने ली राहत की सांस महिला के सुरक्षित नीचे आने के बाद मौके पर मौजूद ग्रामीणों और अधिकारियों ने राहत की सांस ली। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने तुरंत महिला का प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण किया। घटना के बाद गांव में काफी देर तक लोगों की भीड़ जुटी रही। www.deshharpal.com पर पढ़ें देश-दुनिया और प्रदेश की ताजा खबरें।
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ईद पर इंदौर से दिखी गंगा-जमुनी तहजीब, शहर काजी ने गाय को राष्ट्रीय धरोहर बनाने की उठाई मांग

ईद के मौके पर देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर से गंगा-जमुनी तहजीब और सांप्रदायिक सौहार्द की खूबसूरत तस्वीर सामने आई। सदर बाजार स्थित ईदगाह में नमाज से पहले शहर काजी डॉ. इशरत अली ने भाईचारे, पर्यावरण संरक्षण और नशे से दूर रहने का संदेश दिया। उन्होंने खुले मंच से गाय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग की, जिसका वहां मौजूद हजारों नमाजियों ने हाथ उठाकर समर्थन किया। इसके बाद शांतिपूर्ण माहौल में ईद की नमाज अदा की गई। गाय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग शहर काजी डॉ. इशरत अली ने कहा कि गाय को दूसरी कौम के लोग बेहद सम्मान की नजर से देखते हैं। मुसलमानों पर अक्सर गोवंश को लेकर आरोप लगाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि गाय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाए, ताकि उसके वध पर पूरी तरह रोक लग सके। पानी बचाने और पर्यावरण बचाने की अपील अपने संबोधन में शहर काजी ने लोगों से पानी बचाने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि बारिश के पानी को जमीन में उतारना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। सिर्फ सरकार या प्रशासन के भरोसे नहीं रहना चाहिए। उन्होंने लोगों से ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने की भी अपील की। नशे के कारोबार पर जताई चिंता शहर काजी ने नशे के बढ़ते कारोबार पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि समाज के कुछ लोग खुद नशा बेच रहे हैं, जिससे युवा पीढ़ी बर्बाद हो रही है। उन्होंने कहा कि इंदौर में नशे का मुद्दा वे लगातार उठाते रहे हैं। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी इस विषय को गंभीरता से उठा चुके हैं। इंदौर की ईद एक और वजह से खास रही। यहां पिछले 50 वर्षों से एक हिंदू परिवार शहर काजी को उनके घर से ईदगाह तक लाने और वापस छोड़ने की परंपरा निभा रहा है। 50 साल पुरानी परंपरा बनी मिसाल इस बार भी सत्यनारायण सलवाडिया और उनके परिवार ने शहर काजी का फूल-मालाओं से स्वागत किया और उन्हें ससम्मान विशेष रूप से सजाई गई बग्घी में ईदगाह तक पहुंचाया। इस परंपरा को लोगों ने गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल बताया। खंडवा में भी उठी गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग बकरीद के मौके पर खंडवा के मुख्य ईदगाह समेत करीब 40 मस्जिदों में मुल्क की खुशहाली के लिए दुआ की गई। शहर काजी सैयद निसार अली ने केंद्र सरकार से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि खंडवा के मुस्लिम समाज ने वर्षों से हिंदू समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए गोवंश की कुर्बानी नहीं दी है। साथ ही उन्होंने गोवंश के नाम पर होने वाली मॉब लिंचिंग और अवैध कारोबार पर सख्त कार्रवाई की मांग भी की। धीरेंद्र शास्त्री ने भी किया समर्थन बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भी गाय को राष्ट्र माता घोषित करने की मांग को लेकर 27 जुलाई से राष्ट्रव्यापी अभियान चलाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि देशभर में हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा और जिलों में ज्ञापन सौंपे जाएंगे। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि अब देश में इस मुद्दे को लेकर माहौल बदल रहा है और सभी समाजों से समर्थन मिल रहा है www.deshharpal.com पर पढ़ें देश-दुनिया और प्रदेश की ताजा खबरें।
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Indore News: गांधी नगर में टेलर ने जहर खाकर दी जान, पड़ोसी की धमकियों और मारपीट से था परेशान

Indore News: गांधी नगर में टेलर ने जहर खाकर दी जान, पड़ोसी की धमकियों और मारपीट से था परेशान

मध्य प्रदेश के Indore शहर के गांधी नगर इलाके में एक टेलर की मौत का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि युवक ने जहरीला पदार्थ खा लिया था, जिसके बाद उसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों के मुताबिक, मृतक पिछले कई दिनों से मानसिक तनाव में था। उनका आरोप है कि पड़ोस में रहने वाले कुछ लोगों से उसका विवाद चल रहा था। करीब 10 दिन पहले दोनों पक्षों के बीच मारपीट भी हुई थी, जिसके बाद से उसे लगातार धमकियां मिल रही थीं। परिवार का कहना है कि इन घटनाओं से युवक काफी परेशान रहने लगा था। घटना वाले दिन भी वह तनाव में दिखाई दे रहा था। बाद में उसने जहरीला पदार्थ खा लिया। जब उसकी हालत बिगड़ी तो परिवार के लोग उसे तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं सके। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है और पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय लोगों के अनुसार मृतक मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। उसकी मौत के बाद परिवार में गहरा दुख है और इलाके में भी शोक का माहौल बना हुआ है।
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इंदौर में पानी संकट पर कांग्रेस का प्रदर्शन, राजबाड़ा में धरना; महिलाओं ने खाली मटके लेकर जताया विरोध

Indore में पानी संकट पर कांग्रेस का प्रदर्शन, राजबाड़ा में धरना; महिलाओं ने खाली मटके लेकर जताया विरोध

Indore में बढ़ते पानी संकट को लेकर बुधवार को राजनीतिक माहौल गर्म हो गया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राजबाड़ा क्षेत्र में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हुईं, जो खाली मटके और बोतलें लेकर विरोध जताने पहुंचीं। “लोग जहरीला पानी पी रहे हैं” — कांग्रेस का आरोप कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि शहर के कई इलाकों में लोगों को साफ पानी नहीं मिल रहा है और मजबूरी में दूषित पानी पीना पड़ रहा है।नेता जितेंद्र (जितू) पटवारी ने कहा कि जनता को “जहरीला पानी” पीने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जो गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा कर सकता है। नगर निगम गेट पर भी हंगामा प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता नगर निगम कार्यालय तक पहुंचे, जहां गेट पर जमकर नारेबाजी हुई और कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और प्रदर्शन को आगे बढ़ने से रोका। महिलाओं की भी भागीदारी धरने में शामिल महिलाओं ने खाली मटके और पानी की बोतलें दिखाकर सरकार और नगर निगम के खिलाफ नाराजगी जताई।उनका कहना था कि कई इलाकों में नियमित जल आपूर्ति नहीं हो रही, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है।
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Bhopal के रचना टॉवर में कार में आग: इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर से शुरू हुई आग, फिर पूरी कार जलकर खाक

Bhopal के रचना टॉवर में कार में आग: इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर से शुरू हुई आग, फिर पूरी कार जलकर खाक

Bhopal के रचना टॉवर परिसर में शुक्रवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एक कार में अचानक आग लग गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, आग की शुरुआत पास खड़ी एक इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (ई-स्कूटर) से हुई, जिसके बाद आग तेजी से फैलती गई और पास खड़ी कार इसकी चपेट में आ गई। कैसे हुआ हादसा? प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार: मौके पर मची अफरा-तफरी आग लगते ही रचना टॉवर परिसर में मौजूद लोगों में दहशत फैल गई।लोग तुरंत सुरक्षित दूरी पर चले गए और सूचना फायर ब्रिगेड को दी गई। दमकल की टीम मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। शुरुआती आशंका: बैटरी फेल्योर? प्रारंभिक जांच में माना जा रहा है कि: हालांकि, असली वजह की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
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Petrol

MP सहित कई राज्यों में Oil Supply Operation तेज, जनता से Panic Buying न करने की अपील

भोपाल। देश के कई हिस्सों में पेट्रोल, डीज़ल और रसोई गैस की मांग अचानक बढ़ने के बाद सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने राहत देने वाला कदम उठाया है। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने रविवार की छुट्टी के बावजूद अपने टर्मिनल और भंडारण केंद्र चालू रखे, ताकि आम लोगों को ईंधन की कमी का सामना न करना पड़े। तेल कंपनियों का कहना है कि उनका पूरा फोकस इस समय निर्बाध ईंधन आपूर्ति बनाए रखने पर है। इसी वजह से सप्लाई नेटवर्क को 24 घंटे एक्टिव मोड में रखा गया। मध्य प्रदेश में इन शहरों से जारी रही सप्लाई मध्य प्रदेश में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने इटारसी और रतलाम स्थित लोकेशनों से लगातार संचालन किया। वहीं हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने सागर और जबलपुर से सप्लाई व्यवस्था संभाली। कंपनियों के अधिकारियों के मुताबिक, बढ़ती मांग को देखते हुए स्टोरेज, ट्रांसपोर्ट और डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी जिले में पेट्रोल या डीज़ल की कमी न हो। 24×7 मोड में काम कर रही हैं टीमें तेल कंपनियों ने बताया कि सप्लाई टीम, टर्मिनल स्टाफ, ट्रांसपोर्ट नेटवर्क और कई चयनित पेट्रोल पंप लगातार चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं।उद्देश्य साफ है—देशभर में ईंधन की आवाजाही बिना रुकावट जारी रहे और लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े। इस दौरान कंपनियों ने “हम सदैव आपके साथ हैं” संदेश के साथ लोगों को भरोसा दिलाया कि पर्याप्त मात्रा में ईंधन उपलब्ध है। Panic Buying से बचने की अपील तेल विपणन कंपनियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे घबराहट में अतिरिक्त खरीदारी न करें। कंपनियों के अनुसार, पेट्रोल, डीज़ल और एलपीजी की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है और लगातार निगरानी की जा रही है। लोगों से यह भी कहा गया है कि किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें। अधिकारियों ने क्या कहा इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, मध्य प्रदेश राज्य कार्यालय के मुख्य महाप्रबंधक एवं राज्य प्रमुख अजय कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि बढ़ती मांग को देखते हुए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों तक समय पर ईंधन पहुंचाना कंपनियों की प्राथमिकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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रानी कमलापति स्टेशन पर दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट, 29 मिनट खड़ी रही ट्रेन

भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर मंगलवार सुबह दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट हो गई। घटना सुबह करीब 11:30 बजे की बताई जा रही है। सामान चढ़ाने और यात्रियों के आने-जाने को लेकर शुरू हुआ विवाद बढ़ गया, जिसके चलते ट्रेन करीब 29 मिनट तक स्टेशन पर खड़ी रही। आरोप है कि पैंट्री कर्मचारियों ने एकजुट होकर यात्रियों पर हमला किया। विवाद के दौरान कर्मचारियों द्वारा चेन पुलिंग किए जाने की बात भी सामने आई है। बताया गया कि ट्रेन रानी कमलापति स्टेशन पर पहले ही निर्धारित समय से 3 घंटे 33 मिनट की देरी से पहुंची थी। जीआरपी ने मौके पर पहुंचकर शांत कराया विवाद घटना की सूचना मिलने पर जीआरपी मौके पर पहुंची और यात्रियों व पैंट्री कर्मचारियों के बीच चल रहे विवाद को शांत कराया। जीआरपी टीआई अमित शर्मा के मुताबिक, पीड़ित यात्री बेंगलुरु जा रहा था। उन्होंने बताया कि रानी कमलापति स्टेशन पर इस मामले में शिकायत नहीं मिली। वहीं, नागपुर में जीरो पर प्रकरण दर्ज किए जाने की सूचना है। मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित जीआरपी के स्तर पर की जाएगी।

मध्यप्रदेश में पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए खर्च होंगे 7.5 करोड़ रुपए, 330 विकासखंडों में होगा खेल महोत्सव

मध्यप्रदेश में पारंपरिक और आंचलिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार करीब साढ़े सात करोड़ रुपए खर्च करने की तैयारी कर रही है। खेल विभाग ने इसके लिए छोटे शहरों में प्रशिक्षण केंद्र खोलने की योजना बनाई है। इसके साथ ही प्रदेश के सभी 330 विकासखंडों में हर साल पारंपरिक खेल महोत्सव आयोजित किए जाएंगे। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक खेलों को संरक्षण देना और ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं की पहचान करना है। सरकार की इस पहल से स्थानीय खेलों को प्रतियोगिताओं और व्यवस्थित प्रशिक्षण के जरिए आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। पिट्ठू से मलखंभ तक, कई खेल होंगे शामिल प्रस्तावित योजना में पिट्ठू, गदा और साइकिल रेस जैसे पारंपरिक व आंचलिक खेलों को शामिल किया गया है। इसके अलावा कबड्डी, खो-खो, पैदल चाल, तीरंदाजी और मलखंभ जैसे खेलों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। खेल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पारंपरिक खेल महोत्सव में विकासखंड स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इन स्पर्धाओं के लिए पूरे प्रदेश में एक समान नियम तैयार किए जाएंगे, ताकि खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं में भाग लेने के समान अवसर मिल सकें। छोटे शहरों में खुलेंगे प्रशिक्षण केंद्र खेल विभाग का मानना है कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में कई पारंपरिक खेल लंबे समय से स्थानीय संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। हालांकि, इन खेलों से जुड़े खिलाड़ियों को अक्सर औपचारिक प्रशिक्षण और बड़े स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का अवसर नहीं मिल पाता। प्रस्तावित प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से ऐसे खिलाड़ियों को व्यवस्थित प्रशिक्षण देने की योजना है। इससे स्थानीय स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान करने और उन्हें आगे बढ़ने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। आधुनिक खेलों से जोड़ने की भी तैयारी खेल विभाग इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करेगा। इसके बाद उन्हें आगे के प्रशिक्षण के लिए तैयार करने की योजना है। विभाग पारंपरिक खेलों से जुड़ी प्रतिभाओं को आधुनिक खेल व्यवस्था से जोड़ने के विकल्पों पर भी काम कर रहा है। इस पहल के जरिए पारंपरिक खेलों को नई पहचान देने के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं की खेलों में भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। पारंपरिक खेलों के केंद्र स्थापित किए जाएंगे: विश्वास सारंग खेल मंत्री विश्वास सारंग के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न अंचलों में कई देशी खेल प्रचलित हैं, लेकिन उन्हें बड़े पैमाने पर खेलने के अवसर सीमित हैं। अब इनके केंद्र स्थापित कर इन खेलों को बढ़ावा देने की योजना है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित योजना में टीम आधारित और व्यक्तिगत, दोनों तरह के खेलों को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

एशियन पैरा गेम्स में भारत का धमाकेदार प्रदर्शन, दूसरे दिन जीते 24 मेडल; कुल पदक 35 हुए

जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन पैरा गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी है। प्रतियोगिता के दूसरे दिन भारतीय खिलाड़ियों ने 24 मेडल जीते, जिनमें 5 गोल्ड, 6 सिल्वर और 13 ब्रॉन्ज शामिल हैं। इसके साथ ही भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक 9 गोल्ड, 11 सिल्वर और 15 ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए हैं। दूसरे दिन एथलेटिक्स में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला। पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारत ने गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज तीनों मेडल जीतकर शानदार उपलब्धि हासिल की। वहीं, निषाद कुमार ने हाई जंप में गेम्स रिकॉर्ड के साथ गोल्ड जीता। सिमरन शर्मा और दीप्ति जीवनजी ने भी क्रमशः 200 मीटर और 400 मीटर रेस में गोल्ड मेडल अपने नाम किए। शूटिंग में मनीष नरवाल ने सिल्वर मेडल जीता। इसके साथ ही उन्होंने 2028 में होने वाले लॉस एंजिलिस पैरालिंपिक्स के लिए कोटा भी हासिल किया। डिस्कस थ्रो में भारत का क्लीन स्वीप पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों ने तीनों पदक जीतकर अपना दबदबा कायम किया। देवेंद्र कुमार ने 781 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल हासिल किया। राकेश ने 771 पॉइंट्स लेकर सिल्वर, जबकि प्रदीप कुमार ने 669 पॉइंट्स के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता। इस मुकाबले की खास बात यह रही कि प्रदीप कुमार ने 51.15 मीटर का सबसे लंबा थ्रो किया, इसके बावजूद उन्हें ब्रॉन्ज मेडल मिला। इसकी वजह यह है कि इस स्पर्धा में अलग-अलग तरह की शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी एक साथ मुकाबला करते हैं। इसमें F43, F44, F62 और F64 कैटेगरी के खिलाड़ी शामिल थे। खिलाड़ियों की शारीरिक स्थिति और थ्रो करने की क्षमता में अंतर होने के कारण उनके प्रदर्शन का आकलन रजा पॉइंट्स सिस्टम के आधार पर किया जाता है। इस प्रणाली में खिलाड़ी की कैटेगरी के अनुसार प्रदर्शन को अंक दिए जाते हैं, जिससे अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के परिणामों की निष्पक्ष तुलना की जा सके। निषाद कुमार ने हाई जंप में जीता दूसरा गोल्ड भारतीय पैरा-एथलीट निषाद कुमार ने पुरुषों की हाई जंप T47 स्पर्धा में 2.02 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड मेडल जीता। यह इन गेम्स में उनका दूसरा गोल्ड है। इससे पहले वह लॉन्ग जंप में भी पहला स्थान हासिल कर चुके हैं। हाई जंप में खिलाड़ियों को एक निश्चित ऊंचाई पर रखी बार को बिना गिराए पार करना होता है। हर सफल प्रयास के बाद बार की ऊंचाई बढ़ाई जाती है और सबसे अधिक ऊंचाई पार करने वाला खिलाड़ी विजेता बनता है। T47 पैरा-एथलेटिक्स की वह श्रेणी है, जिसमें हाथ से जुड़ी शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। निषाद की इस उपलब्धि से भारत के पदक अभियान को मजबूती मिली है। प्रणव सूरमा को गोल्ड, राम रतन सिंह ने जीता सिल्वर पुरुषों की डिस्कस थ्रो F51/F52/F53 स्पर्धा में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। प्रणव सूरमा ने 932 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि राम रतन सिंह 809 पॉइंट्स लेकर दूसरे स्थान पर रहे और उन्हें सिल्वर मेडल मिला। प्रणव ने अपने छह प्रयासों में 11.66 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया। इस स्पर्धा में भी अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की तुलना रजा पॉइंट्स के आधार पर की जाती है। इसलिए केवल थ्रो की दूरी के आधार पर विजेता तय नहीं होता। प्रणव और राम रतन के अंकों ने उन्हें क्रमशः पहला और दूसरा स्थान दिलाया। भारत की पदक तालिका पर नजर दूसरे दिन के शानदार प्रदर्शन के बाद भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। एथलेटिक्स में लगातार मिल रही सफलताओं और शूटिंग में मनीष नरवाल की उपलब्धि ने भारतीय अभियान को नई गति दी है। प्रतियोगिता के अगले दिनों में भी भारतीय खिलाड़ियों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी।
SBI

SBI ग्राहकों का डेटा Dark Web पर मिलने से बढ़ी चिंता, जांच में जुटा बैंक

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के ग्राहकों की निजी जानकारी डार्क वेब पर मिलने का मामला सामने आया है। बैंक की शुरुआती जांच में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड में व्यक्तिगत जानकारी उजागर होने की पहचान की गई है। इनमें नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और पते जैसी जानकारियां शामिल हैं। इस खबर के सामने आने के बाद ग्राहकों की डेटा सिक्योरिटी को लेकर चिंता बढ़ गई है। SBI ने कहा है कि इस घटना से बैंक के सामान्य कामकाज, वित्तीय प्रदर्शन और सेवाओं पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। वहीं, डेटा कहां से आया, कितने ग्राहकों की जानकारी प्रभावित हुई और इसके पीछे क्या वजह रही, इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए जांच की जा रही है। SBI Data Leak: कैसे सामने आया डेटा लीक का मामला? बैंक के अनुसार, 16 अक्टूबर 2026 को उसे अपने Threat Intelligence Service Provider, Defence Cyber Agency और भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) से डार्क वेब पर ग्राहकों का डेटा उपलब्ध होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद SBI ने शुरुआती स्तर पर करीब 3.75 लाख रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। इस प्रक्रिया में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड ऐसे मिले, जिनमें व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी मौजूद थी। हालांकि, डार्क वेब पर मिले सभी रिकॉर्ड के बारे में अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। बैंक जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि डेटा कितना वास्तविक है और किस माध्यम से बाहर पहुंचा। ग्राहकों की कौन-सी निजी जानकारी हुई उजागर? शुरुआती जांच में सामने आए रिकॉर्ड में ग्राहकों से जुड़ी कई तरह की जानकारियां शामिल बताई गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं: इनमें से कुछ जानकारियों का इस्तेमाल साइबर ठग लोगों को निशाना बनाने के लिए कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी ग्राहक का नाम, मोबाइल नंबर और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी पता होने पर ठग खुद को बैंक कर्मचारी बताकर भरोसा जीतने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, इस मामले में ग्राहकों के बैंक खातों से पैसे निकलने या किसी खास तरह की धोखाधड़ी होने की पुष्टि नहीं हुई है। SBI ने जांच के लिए उठाए जरूरी कदम डेटा लीक की जानकारी मिलने के बाद बैंक ने अपने साइबर सिक्योरिटी प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए। साथ ही, मामले की विस्तृत जांच के लिए CERT-In से सूचीबद्ध एक स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी को नियुक्त किया गया है। जांच में यह पता लगाने पर ध्यान दिया जा रहा है कि डेटा का स्रोत क्या था, जानकारी कैसे उजागर हुई और इससे ग्राहकों की सुरक्षा पर कितना असर पड़ सकता है। बैंक के अनुसार, जांच के नतीजों के आधार पर जरूरी सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल डेटा लीक के पीछे किसी व्यक्ति या समूह की भूमिका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। क्या SBI ग्राहकों के बैंक खाते खतरे में हैं? डेटा लीक की खबर सुनकर ग्राहकों के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि क्या उनके बैंक खाते सुरक्षित हैं? यहां एक बात समझना जरूरी है। ग्राहकों का नाम, मोबाइल नंबर या पता सामने आने का मतलब यह नहीं है कि उनके बैंक खाते भी हैक हो गए हैं। निजी जानकारी का उजागर होना और खाते से पैसे निकलना दो अलग-अलग बातें हैं। SBI ने कहा है कि इस घटना से उसके मुख्य कामकाज और सेवाओं पर कोई महत्वपूर्ण असर नहीं पड़ा है। हालांकि, निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल करके फर्जी कॉल, मैसेज और ऑनलाइन ठगी की कोशिश की जा सकती है। इसलिए ग्राहकों को सावधानी बरतने की जरूरत है। Data Leak के बाद ग्राहकों को क्या करना चाहिए? डिजिटल बैंकिंग के दौर में थोड़ी सी लापरवाही भी परेशानी बढ़ा सकती है। ऐसे में SBI ग्राहकों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। 1. OTP और PIN किसी को न बताएं: बैंक अधिकारी बनकर फोन करने वाला व्यक्ति भी आपसे OTP, ATM PIN या CVV मांगे, तो जानकारी साझा न करें। 2. संदिग्ध लिंक से बचें: KYC अपडेट, बैंक खाता बंद होने या रिफंड मिलने के नाम पर आए अनजान लिंक पर क्लिक न करें। 3. बैंक खाते पर नजर रखें: अपने खाते के लेनदेन की नियमित जांच करें। कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन दिखे तो तुरंत बैंक से संपर्क करें। 4. फर्जी कॉल से सावधान रहें: अगर कोई व्यक्ति बैंकिंग जानकारी बताकर आपका भरोसा जीतने की कोशिश करे, तो उसकी पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। 5. साइबर ठगी होने पर शिकायत करें: वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 हेल्पलाइन या भारत सरकार के आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। ध्यान रखें कि किसी ठग के पास आपकी कुछ निजी जानकारी होने का मतलब यह नहीं है कि वह बैंक का अधिकृत प्रतिनिधि है। SBI Data Leak मामले में अब आगे क्या होगा? फिलहाल SBI डेटा लीक मामले की जांच जारी है। बैंक यह पता लगाने में जुटा है कि डार्क वेब पर उपलब्ध जानकारी कहां से आई और घटना का वास्तविक दायरा कितना बड़ा है। जांच पूरी होने के बाद ही डेटा लीक की वजह और ग्राहकों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर ज्यादा स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। तब तक ग्राहकों के लिए अपनी बैंकिंग जानकारी सुरक्षित रखना और संदिग्ध गतिविधियों से सतर्क रहना सबसे जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Delhi HighCourt

Delhi HighCourt: सौरव दास-आशुतोष रांका ने वापस ली याचिका, Bond की शर्तों पर कोर्ट के सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi HighCourt) में बुधवार, 21 अक्टूबर को CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर सुनवाई हुई। दोनों नेताओं ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ाई गई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट की टिप्पणियों के बाद दोनों ने अपनी याचिका वापस ले ली। जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद की बेंच ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि जब इस मामले में दूसरी कानूनी प्रक्रिया अपनाने का विकल्प मौजूद है, तो सीधे हाईकोर्ट का रुख क्यों किया गया। कोर्ट ने दोनों नेताओं की ओर से शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन के आरोपों पर भी टिप्पणी की। Jantar Mantar Protest Case: क्या है पूरा मामला? सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिया गया था। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किया गया था। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार कर उस स्थान पर प्रवेश किया था, जिसे प्रदर्शन स्थल के रूप में पहले ही अधिसूचित सूची से हटा दिया गया था। इसके बाद दोनों नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेजा गया। शुरुआत में उनकी हिरासत पांच दिन के लिए तय की गई थी। 19 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ाने का आदेश दिया था। इसी फैसले को चुनौती देते हुए दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। Court Remarks: बॉन्ड की शर्तों पर क्या कहा? सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड और उसके कथित उल्लंघन को लेकर सवाल उठाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि बैरिकेडिंग तोड़ने जैसी घटना के बाद दूसरे लोगों के भी नियमों का उल्लंघन करने की आशंका बढ़ सकती है। दोनों नेताओं की ओर से पेश वकील ने हिरासत बढ़ाने के आदेश और जमानतदारों से जुड़ी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका पक्ष था कि दोनों ने आवश्यक जमानतदार पेश किए थे, इसके बावजूद उन्हें हिरासत में रखा गया। हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले में उपलब्ध वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाने की बात कही। इसके बाद दोनों नेताओं की ओर से याचिका वापस लेने का फैसला किया गया। याचिका वापस लेने का क्या मतलब है? सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका वापस लिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि हाईकोर्ट ने हिरासत बढ़ाने के आदेश को सही ठहरा दिया है। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय दिए बिना याचिका वापस लेने की अनुमति दी। कोर्ट ने दोनों पक्षों को पहले स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष चल रही प्रक्रिया के नतीजे का इंतजार करने और जरूरत पड़ने पर उचित अपीलीय मंच का रुख करने की सलाह दी। इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और मजिस्ट्रेट के समक्ष होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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