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CM Dr. Mohan Yadav ने की स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा, योजनाओं को बेहतर बनाने के दिए निर्देश

CM Dr. Mohan Yadav ने की स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा, योजनाओं को बेहतर बनाने के दिए निर्देश

CM Dr. Mohan Yadav ने गुरुवार को मंत्रालय में स्कूल शिक्षा विभाग की विभिन्न योजनाओं और विभागीय गतिविधियों की समीक्षा बैठक की। बैठक में प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था, छात्रों को मिलने वाली सुविधाएं और चल रही योजनाओं की प्रगति पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए योजनाओं का प्रभावी तरीके से क्रियान्वयन किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचना सरकार की प्राथमिकता है। साथ ही स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने और शिक्षा के स्तर में सुधार लाने पर भी जोर दिया गया। बैठक में विभागीय अधिकारियों ने विभिन्न योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। मुख्यमंत्री ने छात्रों के हित में चल रही योजनाओं को समय पर पूरा करने और शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के निर्देश दिए। सरकार का फोकस ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर है, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर भविष्य मिल सके। अधिक खबरों और अपडेट्स के लिए विजिट करें Deshharpal News हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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30,055 करोड़ की Cabinet मंजूरी से प्रदेश को विकास की नई रफ्तार

30,055 करोड़ की Cabinet मंजूरी से प्रदेश को विकास की नई रफ्तार

प्रदेश के विकास और आम लोगों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। Cabinet बैठक में करीब 30,055 करोड़ रुपये की योजनाओं और परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। सरकार का कहना है कि इन फैसलों से इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा, रोजगार के नए अवसर बनेंगे और जनता को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। कैबिनेट की स्वीकृति में सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाएं शामिल हैं। सरकार का फोकस खासतौर पर गांवों और छोटे शहरों तक विकास पहुंचाने पर है, ताकि हर वर्ग को योजनाओं का सीधा लाभ मिल सके। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक इन परियोजनाओं के लागू होने से प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को भी रफ्तार मिलेगी। निर्माण कार्यों और नई परियोजनाओं से युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। वहीं किसानों, महिलाओं और गरीब परिवारों के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं को भी मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्रदेश के समग्र विकास के लिए लगातार काम कर रही है। उनका कहना है कि जनता की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए फैसले लिए जा रहे हैं, ताकि शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों का भी तेजी से विकास हो सके। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी राशि की मंजूरी से आने वाले समय में प्रदेश में विकास कार्यों को नई गति मिलेगी और आम लोगों के जीवन स्तर में सुधार देखने को मिलेगा। प्रदेश और देश की हर बड़ी खबर के लिए जुड़े रहें Deshharpal News
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मुख्यमंत्री Dr. Mohan Yadav बोले- ग्रामीण विकास में रोजगार सहायकों की अहम भूमिका

मुख्यमंत्री Dr. Mohan Yadav बोले- ग्रामीण विकास में रोजगार सहायकों की अहम भूमिका, सरकार करेगी हितों की चिंता

मुख्यमंत्री Dr. Mohan Yadav ने कहा है कि ग्रामीण विकास योजनाओं को जमीन पर सफल बनाने में रोजगार सहायकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार रोजगार सहायकों के हितों और उनकी समस्याओं को लेकर गंभीर है और उनके भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गांवों के विकास, मनरेगा सहित विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में रोजगार सहायकों का बड़ा योगदान रहता है। वे ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार और जनता के बीच मजबूत कड़ी का काम करते हैं। उनकी मेहनत से कई विकास कार्य समय पर पूरे हो पाते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार कर्मचारियों और संविदा कर्मियों के हितों की रक्षा के लिए लगातार काम कर रही है। रोजगार सहायकों की मांगों और समस्याओं पर भी सकारात्मक रूप से विचार किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि ग्रामीण विकास को मजबूत बनाने के लिए जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों का सम्मान और सहयोग जरूरी है। इस दौरान रोजगार सहायकों ने भी अपनी विभिन्न मांगों को सरकार के सामने रखा। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि उनकी बातों को गंभीरता से सुना जाएगा और उचित निर्णय लिया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने और योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में रोजगार सहायकों की भूमिका लगातार अहम बनी हुई है। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें: Deshharpal News हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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रीवा में तेज रफ्तार कार ने तीन जैन महिला धर्मगुरुओं को कुचला: एक की मौत, दो की हालत गंभीर

रीवा में बुधवार को कलेक्ट्रेट के सामने दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। तेज रफ्तार कार ने सड़क किनारे पैदल जा रही तीन जैन महिला धर्मगुरुओं को टक्कर मार दी। हादसे में एक महिला धर्मगुरु की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। सागर की रहने वाली थीं मृतक धर्मगुरु मृत महिला धर्मगुरु की पहचान श्रुति मति माता के रूप में हुई है। वे सागर की रहने वाली थीं और सतना से रीवा प्रवास पर आई थीं। हादसे में घायल उपसमिति माता तमिलनाडु की निवासी हैं, जबकि आरिका माता जबलपुर की रहने वाली बताई गई हैं। सड़क किनारे पैदल जा रही थीं प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तीनों महिला धर्मगुरु सड़क किनारे पैदल जा रही थीं। तभी तेज रफ्तार कार अचानक अनियंत्रित होकर उनकी तरफ आ गई और जोरदार टक्कर मार दी। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद लोग तुरंत मदद के लिए पहुंचे और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। दो धर्मगुरुओं की हालत गंभीर घायल महिला धर्मगुरुओं का अस्पताल में इलाज जारी है। डॉक्टरों के मुताबिक दोनों की हालत नाजुक बनी हुई है। लोगों में आक्रोश घटना के बाद मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। गुस्साए लोगों ने आरोपी ड्राइवर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर हंगामा किया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को मौके पर पहुंचना पड़ा। मौके पर पहुंचे अधिकारी मामले की जानकारी मिलते ही बीएस जामोद, नरेंद्र सूर्यवंशी और गुरुकरण सिंह घटनास्थल पहुंचे। अधिकारियों ने लोगों को शांत कराया और कार्रवाई का भरोसा दिया। हादसे के बाद पूरे जैन समाज में शोक और आक्रोश का माहौल है। 👉 रीवा और मध्यप्रदेश की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में जिलेभर के मेडिकल स्टोर बंद: दवा व्यापारियों ने निकाली रैली

ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में बुधवार को जिला केमिस्ट एसोसिएशन और जिला औषधि विक्रेता संघ के आह्वान पर जिलेभर के दवा व्यापारियों ने एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल की। हड़ताल के चलते जिले के करीब एक हजार मेडिकल स्टोर बंद रहे। हालांकि नर्सिंग होम और अस्पतालों के मेडिकल स्टोर खुले रहे, जिससे मरीजों को इमरजेंसी दवाइयां मिलती रहीं। काली पट्टी बांधकर किया विरोध दवा व्यापारियों ने तीनबत्ती क्षेत्र में एकत्र होकर काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया। इसके बाद रैली निकालते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। छोटे व्यापारियों पर संकट का आरोप जिला केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक कुमार जैन ने कहा कि बिना स्पष्ट कानूनी प्रावधानों के ऑनलाइन दवा बिक्री लगातार बढ़ रही है, जिससे छोटे दवा व्यापारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बिना वैध डॉक्टर सलाह और बिना प्रमाणित ई-प्रिस्क्रिप्शन के दवाओं की होम डिलीवरी कर रहे हैं, जो लोगों की सेहत के लिए खतरा बन सकता है। ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक की मांग जिला औषधि विक्रेता संघ के सचिव अनिल कुमार जैन ने कहा कि देशभर में लाखों लाइसेंसधारी केमिस्ट इस व्यवस्था से प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 और नियम 1945 में ऑनलाइन दवा बिक्री का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, इसके बावजूद कई कंपनियां वर्षों से ऑनलाइन दवाएं बेच रही हैं। सरकार से रखीं कई मांगें दवा व्यापारियों ने सरकार से ऑनलाइन दवा बिक्री पर सख्त कार्रवाई की मांग की। साथ ही बिना सत्यापित ई-प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की बिक्री पूरी तरह बंद करने की मांग उठाई। ज्ञापन में जीएसआर 220 (ई) और जीएसआर 817 (ई) वापस लेने, प्रीडेटरी प्राइसिंग पर सख्त नीति बनाने और अवैध ई-फार्मेसी बंद करने जैसी मांगें भी शामिल रहीं। 👉 मध्यप्रदेश और देश-दुनिया की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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सागर में तेज रफ्तार ट्रक ने बाइक सवार दो छात्रों को कुचला: कॉलेज जाते समय दर्दनाक मौत, हाईवे पर चक्काजाम

सागर के कैंट थाना क्षेत्र में बुधवार को नेशनल हाईवे-44 पर हुए दर्दनाक सड़क हादसे में बाइक सवार दो कॉलेज छात्रों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने हाईवे पर चक्काजाम कर दिया। कॉलेज जाते समय हुआ हादसा मृतकों की पहचान संजय रजक (20) निवासी सेमरा हार्ट और नितिन अहिरवार (20) निवासी कोलुआ के रूप में हुई है। दोनों बीएससी प्रथम वर्ष के छात्र थे। जानकारी के अनुसार, दोनों छात्र बुधवार दोपहर बाइक से गांव से सागर कॉलेज जा रहे थे। इसी दौरान रानीपुरा के पास पीछे से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। ट्रक के पहिए के नीचे आए छात्र टक्कर लगते ही दोनों छात्र सड़क पर गिर पड़े और ट्रक के पहिए की चपेट में आ गए। हादसा इतना भयावह था कि दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना करीब दोपहर 12:30 बजे के आसपास की बताई जा रही है। ग्रामीणों ने किया चक्काजाम हादसे के बाद मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण जमा हो गए। गुस्साए लोगों ने विरोध में नेशनल हाईवे पर चक्काजाम कर दिया, जिससे करीब एक घंटे तक यातायात पूरी तरह बाधित रहा। सूचना मिलने पर कैंट थाना पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने कार्रवाई का आश्वासन देकर लोगों को शांत कराया, जिसके बाद जाम समाप्त हुआ। ट्रक छोड़कर फरार हुआ ड्राइवर हादसे के बाद गुजरात पासिंग ट्रक (GJ 01 KT 5296) का चालक वाहन मौके पर छोड़कर फरार हो गया। थाना प्रभारी रोहित डोंगरे ने बताया कि पुलिस ने ट्रक जब्त कर मामला दर्ज कर लिया है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और फरार चालक की तलाश की जा रही है। 👉 सागर और मध्यप्रदेश की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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36 लाख के एरियर भुगतान न करने पर PWD दफ्तर में दोबारा कुर्की कार्रवाई

लोक निर्माण विभाग द्वारा सेवानिवृत्त कर्मचारी के बकाया एरियर का भुगतान नहीं करने पर बुधवार को जिला न्यायालय के आदेश पर दोबारा कुर्की की कार्रवाई की गई। बताया जा रहा है कि विभाग ने पहले कोर्ट से लिखित में समय मांगा था, लेकिन तय अवधि गुजरने के बाद भी भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद कोर्ट की टीम को दोबारा कार्रवाई करनी पड़ी। 36 लाख रुपए का एरियर लंबित सेवानिवृत्त कर्मचारी कौशल किशोर राठौर का आरोप है कि विभाग ने लंबे समय तक उन्हें उनके पद के अनुसार वेतन नहीं दिया। इसके खिलाफ उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। मामला निचली अदालत से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां हर स्तर पर फैसला कर्मचारी के पक्ष में आया। अदालतों ने विभाग को बकाया वेतन और एरियर देने के निर्देश दिए थे। 2014 से रिटायरमेंट तक की राशि बाकी विभाग ने वर्ष 2013 तक का एरियर तो जारी कर दिया, लेकिन 2014 से लेकर रिटायरमेंट तक की करीब 36 लाख रुपए की राशि अब तक नहीं दी गई। लगातार आदेशों के बावजूद भुगतान नहीं होने पर कर्मचारी ने अवमानना और इजरा याचिका दायर की, जिसके बाद कोर्ट ने कुर्की और वसूली के आदेश जारी किए। पहले भी हुई थी कार्रवाई फरवरी में हुई पिछली कार्रवाई के दौरान विभाग ने कोर्ट को लिखित में भरोसा दिया था कि दो महीने के भीतर पूरा भुगतान कर दिया जाएगा। लेकिन तीन महीने बीतने के बाद भी भुगतान नहीं हुआ। इसी कारण कोर्ट की टीम को फिर से विभागीय संपत्तियों की कुर्की की कार्रवाई करनी पड़ी। कोर्ट ने दिए सख्त निर्देश न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 31 दिसंबर 2026 तक कुर्की के माध्यम से पूरी राशि वसूलकर भुगतान सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं। बुधवार को कोर्ट की टीम ने विभागीय संपत्तियों का आकलन किया और जरूरी दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी की। यदि इसके बाद भी भुगतान नहीं हुआ, तो विभाग की अन्य संपत्तियों पर भी सख्त कार्रवाई हो सकती है। 👉 मध्यप्रदेश की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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सागर के गांव में पानी के लिए त्राहिमाम: 2 किमी दूर से पानी ला रहे लोग, टंकी बनी लेकिन एक बूंद नहीं मिली

सागर जिले के ग्राम बम्होरी बीका में भीषण गर्मी के बीच जल संकट गहराता जा रहा है। गांव के लोग पीने के पानी के लिए रोज संघर्ष कर रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि महिलाओं को 1 से 2 किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ रहा है। गांव की रहने वाली वैजयंती बाई कोरी ने दर्द बयां करते हुए कहा,“गांव में पीने का पानी नहीं है। अभी तक नहाया भी नहीं है। बेटा मजदूरी पर गया है, वह आएगा तब पानी लेने जाएंगे। मैं जब से इस गांव में आई हूं, तब से पानी की परेशानी झेल रही हूं।” टंकी बनी, पाइपलाइन बिछी… लेकिन पानी नहीं गांव में नल-जल योजना के तहत करीब 2-3 साल पहले पानी की टंकी बनाई गई थी। घर-घर पाइपलाइन भी डाली गई, लेकिन आज तक लोगों को एक बूंद पानी नहीं मिला। ग्रामीणों का कहना है कि टंकी सिर्फ दिखावे के लिए खड़ी है। हालत यह है कि पानी सप्लाई शुरू होने से पहले ही कई जगह पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो चुकी है। 45 डिग्री गर्मी में बढ़ा संकट सागर जिले में इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है। तापमान 45 डिग्री के पार पहुंच चुका है। लगातार बढ़ती गर्मी के कारण जलस्त्रोत सूखने लगे हैं और गांवों में पानी का संकट गहरा गया है। ग्राम बम्होरी बीका में कुल 4 हैंडपंप हैं, लेकिन उनमें भी पर्याप्त पानी नहीं निकल रहा। निजी कुओं और बोर पर निर्भर ग्रामीण ग्रामीण सूरज पांडे बताते हैं कि गांव में शुरू से ही पानी की समस्या बनी हुई है। कई परिवार निजी कुओं और बोर से पानी के कनेक्शन लेकर पैसे देकर पानी भर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अगर बिजली चली जाए, तो गांव में पानी के लिए हाहाकार मच जाता है। पानी खरीदने को मजबूर लोग गांव में जिन परिवारों के पास निजी बोर या कुआं नहीं है, वे पानी खरीदकर अपनी जरूरत पूरी कर रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द नल-जल योजना शुरू करने और गांव में स्थायी जल व्यवस्था करने की मांग की है। 👉 मध्यप्रदेश और देश-दुनिया की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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ग्वालियर में दवा कारोबारियों की हड़ताल: 2200 मेडिकल स्टोर बंद, मरीजों को हुई परेशानी

ग्वालियर में बुधवार को ऑल इंडिया केमिस्ट एसोसिएशन के बैनर तले दवा कारोबारियों ने सांकेतिक हड़ताल की। हड़ताल के चलते शहर के करीब 2200 रिटेल मेडिकल स्टोर और थोक दवा कारोबार पूरी तरह बंद रहे। हालांकि सरकारी और निजी अस्पतालों के मेडिकल स्टोर इस आंदोलन से अलग रहे, जिससे अस्पतालों में भर्ती मरीजों को दवाइयों की उपलब्धता बनी रही। ऑनलाइन दवा कारोबार के विरोध में आंदोलन दवा कारोबारियों का कहना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री तेजी से बढ़ रही है, जिससे छोटे मेडिकल स्टोर प्रभावित हो रहे हैं। व्यापारियों का आरोप है कि बड़ी कॉरपोरेट कंपनियां भारी डिस्काउंट देकर बाजार का संतुलन बिगाड़ रही हैं। साथ ही बिना उचित जांच के ऑनलाइन दवा सप्लाई और नकली दवाइयों की बिक्री मरीजों की सेहत के लिए खतरा बन रही है। इन्हीं मांगों को लेकर यह सांकेतिक हड़ताल की गई। उग्र आंदोलन की चेतावनी दवा कारोबारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले समय में देशव्यापी और बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उनका कहना है कि मेडिकल क्षेत्र में पारदर्शिता और मरीजों की सुरक्षा के लिए ऑनलाइन दवा बिक्री पर सख्त नियम लागू किए जाने चाहिए। मेडिकल बाजारों में पसरा सन्नाटा हड़ताल का असर शहर के प्रमुख मेडिकल मार्केट में साफ दिखाई दिया। अधिकांश मेडिकल स्टोर बंद रहे, जिससे दवा लेने पहुंचे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कई मरीज और उनके परिजन जरूरी दवाइयां नहीं खरीद सके। मरीजों और परिजनों को हुई परेशानी दवा लेने पहुंचे बुजुर्ग हरिओम कश्यप ने बताया कि वह अपनी पत्नी की दवा लेने बाजार आए थे, लेकिन पूरा मेडिकल बाजार बंद मिला। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी फेफड़ों के संक्रमण से पीड़ित हैं और डॉक्टर ने नियमित दवा लेने की सलाह दी है। काफी देर तक भटकने के बाद भी उन्हें दवा नहीं मिल सकी। लोगों में नाराजगी हड़ताल के कारण आम लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली। कई लोगों का कहना था कि मेडिकल सेवाएं जरूरी सेवाओं में आती हैं, इसलिए ऐसी स्थिति में गंभीर मरीजों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था होनी चाहिए। वहीं दवा कारोबारियों का कहना है कि उनका आंदोलन मरीजों के खिलाफ नहीं, बल्कि दवा कारोबार को बचाने और नकली दवाओं पर रोक लगाने के लिए है। 👉 ग्वालियर और देश-दुनिया की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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इंदौर में अलग-अलग जगहों पर आगजनी: बेलमोर्ट पार्क ऑफिस, सब्जी दुकान और फर्नीचर बिल्डिंग में लगी आग

इंदौर में बुधवार सुबह अलग-अलग स्थानों पर आग लगने की घटनाओं से हड़कंप मच गया। बेलमोर्ट पार्क के ऑफिस, खंडवा रोड स्थित सब्जी दुकान और रेडिसन चौराहे के पास फर्नीचर बिल्डिंग में आग लग गई। हालांकि सभी घटनाओं में समय रहते आग पर काबू पा लिया गया और कोई जनहानि नहीं हुई। बेलमोर्ट पार्क ऑफिस में लगी आग लसूडिया क्षेत्र स्थित बेलमोर्ट पार्क के मेंटेनेंस ऑफिस में सुबह आग लग गई। यहां टाउनशिप बिल्डर का कार्यालय भी संचालित होता है। फायर ब्रिगेड के एएसआई सुशील कुमार दुबे ने बताया कि सुबह करीब 5 बजे गार्ड ने ऑफिस से धुआं निकलते देखा। आसपास मौजूद लोगों ने आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन आग तेजी से फैल गई। सूचना मिलने पर दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाया गया। आग में ऑफिस का फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक सामान और कई जरूरी दस्तावेज जलकर नष्ट हो गए। फिलहाल आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। खंडवा रोड पर सब्जी दुकान जली इधर, खंडवा रोड स्थित अनुराधा नगर में एक सब्जी दुकान में भी आग लग गई। दुकान संचालक बबली पत्नी प्रीतम सिंह बताई जा रही हैं। दमकल टीम ने करीब 1000 लीटर पानी डालकर आग पर नियंत्रण पाया, लेकिन तब तक दुकान का अधिकांश सामान जल चुका था। प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। फर्नीचर बिल्डिंग के सातवें माले में आग रेडिसन चौराहे के पास स्थित महिदपुर वाला फर्नीचर की बिल्डिंग के सातवें माले पर भी बुधवार सुबह करीब 10:30 बजे आग लग गई। सूचना मिलने के बाद दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और कर्मचारियों की मदद से आग पर जल्द काबू पा लिया गया। हालांकि आग के कारण पूरे भवन में धुआं भर गया था, जिससे लोगों में अफरा-तफरी मच गई। प्रारंभिक तौर पर यहां भी शॉर्ट सर्किट को आग लगने का कारण माना जा रहा है। घटना की सूचना पर विजयनगर थाना और खजराना थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची। 👉 इंदौर और देश-दुनिया की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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रानी कमलापति स्टेशन पर दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट, 29 मिनट खड़ी रही ट्रेन

भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर मंगलवार सुबह दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट हो गई। घटना सुबह करीब 11:30 बजे की बताई जा रही है। सामान चढ़ाने और यात्रियों के आने-जाने को लेकर शुरू हुआ विवाद बढ़ गया, जिसके चलते ट्रेन करीब 29 मिनट तक स्टेशन पर खड़ी रही। आरोप है कि पैंट्री कर्मचारियों ने एकजुट होकर यात्रियों पर हमला किया। विवाद के दौरान कर्मचारियों द्वारा चेन पुलिंग किए जाने की बात भी सामने आई है। बताया गया कि ट्रेन रानी कमलापति स्टेशन पर पहले ही निर्धारित समय से 3 घंटे 33 मिनट की देरी से पहुंची थी। जीआरपी ने मौके पर पहुंचकर शांत कराया विवाद घटना की सूचना मिलने पर जीआरपी मौके पर पहुंची और यात्रियों व पैंट्री कर्मचारियों के बीच चल रहे विवाद को शांत कराया। जीआरपी टीआई अमित शर्मा के मुताबिक, पीड़ित यात्री बेंगलुरु जा रहा था। उन्होंने बताया कि रानी कमलापति स्टेशन पर इस मामले में शिकायत नहीं मिली। वहीं, नागपुर में जीरो पर प्रकरण दर्ज किए जाने की सूचना है। मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित जीआरपी के स्तर पर की जाएगी।

मध्यप्रदेश में पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए खर्च होंगे 7.5 करोड़ रुपए, 330 विकासखंडों में होगा खेल महोत्सव

मध्यप्रदेश में पारंपरिक और आंचलिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार करीब साढ़े सात करोड़ रुपए खर्च करने की तैयारी कर रही है। खेल विभाग ने इसके लिए छोटे शहरों में प्रशिक्षण केंद्र खोलने की योजना बनाई है। इसके साथ ही प्रदेश के सभी 330 विकासखंडों में हर साल पारंपरिक खेल महोत्सव आयोजित किए जाएंगे। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक खेलों को संरक्षण देना और ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं की पहचान करना है। सरकार की इस पहल से स्थानीय खेलों को प्रतियोगिताओं और व्यवस्थित प्रशिक्षण के जरिए आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। पिट्ठू से मलखंभ तक, कई खेल होंगे शामिल प्रस्तावित योजना में पिट्ठू, गदा और साइकिल रेस जैसे पारंपरिक व आंचलिक खेलों को शामिल किया गया है। इसके अलावा कबड्डी, खो-खो, पैदल चाल, तीरंदाजी और मलखंभ जैसे खेलों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। खेल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पारंपरिक खेल महोत्सव में विकासखंड स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इन स्पर्धाओं के लिए पूरे प्रदेश में एक समान नियम तैयार किए जाएंगे, ताकि खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं में भाग लेने के समान अवसर मिल सकें। छोटे शहरों में खुलेंगे प्रशिक्षण केंद्र खेल विभाग का मानना है कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में कई पारंपरिक खेल लंबे समय से स्थानीय संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। हालांकि, इन खेलों से जुड़े खिलाड़ियों को अक्सर औपचारिक प्रशिक्षण और बड़े स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का अवसर नहीं मिल पाता। प्रस्तावित प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से ऐसे खिलाड़ियों को व्यवस्थित प्रशिक्षण देने की योजना है। इससे स्थानीय स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान करने और उन्हें आगे बढ़ने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। आधुनिक खेलों से जोड़ने की भी तैयारी खेल विभाग इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करेगा। इसके बाद उन्हें आगे के प्रशिक्षण के लिए तैयार करने की योजना है। विभाग पारंपरिक खेलों से जुड़ी प्रतिभाओं को आधुनिक खेल व्यवस्था से जोड़ने के विकल्पों पर भी काम कर रहा है। इस पहल के जरिए पारंपरिक खेलों को नई पहचान देने के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं की खेलों में भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। पारंपरिक खेलों के केंद्र स्थापित किए जाएंगे: विश्वास सारंग खेल मंत्री विश्वास सारंग के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न अंचलों में कई देशी खेल प्रचलित हैं, लेकिन उन्हें बड़े पैमाने पर खेलने के अवसर सीमित हैं। अब इनके केंद्र स्थापित कर इन खेलों को बढ़ावा देने की योजना है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित योजना में टीम आधारित और व्यक्तिगत, दोनों तरह के खेलों को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

एशियन पैरा गेम्स में भारत का धमाकेदार प्रदर्शन, दूसरे दिन जीते 24 मेडल; कुल पदक 35 हुए

जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन पैरा गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी है। प्रतियोगिता के दूसरे दिन भारतीय खिलाड़ियों ने 24 मेडल जीते, जिनमें 5 गोल्ड, 6 सिल्वर और 13 ब्रॉन्ज शामिल हैं। इसके साथ ही भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक 9 गोल्ड, 11 सिल्वर और 15 ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए हैं। दूसरे दिन एथलेटिक्स में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला। पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारत ने गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज तीनों मेडल जीतकर शानदार उपलब्धि हासिल की। वहीं, निषाद कुमार ने हाई जंप में गेम्स रिकॉर्ड के साथ गोल्ड जीता। सिमरन शर्मा और दीप्ति जीवनजी ने भी क्रमशः 200 मीटर और 400 मीटर रेस में गोल्ड मेडल अपने नाम किए। शूटिंग में मनीष नरवाल ने सिल्वर मेडल जीता। इसके साथ ही उन्होंने 2028 में होने वाले लॉस एंजिलिस पैरालिंपिक्स के लिए कोटा भी हासिल किया। डिस्कस थ्रो में भारत का क्लीन स्वीप पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों ने तीनों पदक जीतकर अपना दबदबा कायम किया। देवेंद्र कुमार ने 781 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल हासिल किया। राकेश ने 771 पॉइंट्स लेकर सिल्वर, जबकि प्रदीप कुमार ने 669 पॉइंट्स के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता। इस मुकाबले की खास बात यह रही कि प्रदीप कुमार ने 51.15 मीटर का सबसे लंबा थ्रो किया, इसके बावजूद उन्हें ब्रॉन्ज मेडल मिला। इसकी वजह यह है कि इस स्पर्धा में अलग-अलग तरह की शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी एक साथ मुकाबला करते हैं। इसमें F43, F44, F62 और F64 कैटेगरी के खिलाड़ी शामिल थे। खिलाड़ियों की शारीरिक स्थिति और थ्रो करने की क्षमता में अंतर होने के कारण उनके प्रदर्शन का आकलन रजा पॉइंट्स सिस्टम के आधार पर किया जाता है। इस प्रणाली में खिलाड़ी की कैटेगरी के अनुसार प्रदर्शन को अंक दिए जाते हैं, जिससे अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के परिणामों की निष्पक्ष तुलना की जा सके। निषाद कुमार ने हाई जंप में जीता दूसरा गोल्ड भारतीय पैरा-एथलीट निषाद कुमार ने पुरुषों की हाई जंप T47 स्पर्धा में 2.02 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड मेडल जीता। यह इन गेम्स में उनका दूसरा गोल्ड है। इससे पहले वह लॉन्ग जंप में भी पहला स्थान हासिल कर चुके हैं। हाई जंप में खिलाड़ियों को एक निश्चित ऊंचाई पर रखी बार को बिना गिराए पार करना होता है। हर सफल प्रयास के बाद बार की ऊंचाई बढ़ाई जाती है और सबसे अधिक ऊंचाई पार करने वाला खिलाड़ी विजेता बनता है। T47 पैरा-एथलेटिक्स की वह श्रेणी है, जिसमें हाथ से जुड़ी शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। निषाद की इस उपलब्धि से भारत के पदक अभियान को मजबूती मिली है। प्रणव सूरमा को गोल्ड, राम रतन सिंह ने जीता सिल्वर पुरुषों की डिस्कस थ्रो F51/F52/F53 स्पर्धा में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। प्रणव सूरमा ने 932 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि राम रतन सिंह 809 पॉइंट्स लेकर दूसरे स्थान पर रहे और उन्हें सिल्वर मेडल मिला। प्रणव ने अपने छह प्रयासों में 11.66 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया। इस स्पर्धा में भी अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की तुलना रजा पॉइंट्स के आधार पर की जाती है। इसलिए केवल थ्रो की दूरी के आधार पर विजेता तय नहीं होता। प्रणव और राम रतन के अंकों ने उन्हें क्रमशः पहला और दूसरा स्थान दिलाया। भारत की पदक तालिका पर नजर दूसरे दिन के शानदार प्रदर्शन के बाद भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। एथलेटिक्स में लगातार मिल रही सफलताओं और शूटिंग में मनीष नरवाल की उपलब्धि ने भारतीय अभियान को नई गति दी है। प्रतियोगिता के अगले दिनों में भी भारतीय खिलाड़ियों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी।
SBI

SBI ग्राहकों का डेटा Dark Web पर मिलने से बढ़ी चिंता, जांच में जुटा बैंक

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के ग्राहकों की निजी जानकारी डार्क वेब पर मिलने का मामला सामने आया है। बैंक की शुरुआती जांच में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड में व्यक्तिगत जानकारी उजागर होने की पहचान की गई है। इनमें नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और पते जैसी जानकारियां शामिल हैं। इस खबर के सामने आने के बाद ग्राहकों की डेटा सिक्योरिटी को लेकर चिंता बढ़ गई है। SBI ने कहा है कि इस घटना से बैंक के सामान्य कामकाज, वित्तीय प्रदर्शन और सेवाओं पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। वहीं, डेटा कहां से आया, कितने ग्राहकों की जानकारी प्रभावित हुई और इसके पीछे क्या वजह रही, इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए जांच की जा रही है। SBI Data Leak: कैसे सामने आया डेटा लीक का मामला? बैंक के अनुसार, 16 अक्टूबर 2026 को उसे अपने Threat Intelligence Service Provider, Defence Cyber Agency और भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) से डार्क वेब पर ग्राहकों का डेटा उपलब्ध होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद SBI ने शुरुआती स्तर पर करीब 3.75 लाख रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। इस प्रक्रिया में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड ऐसे मिले, जिनमें व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी मौजूद थी। हालांकि, डार्क वेब पर मिले सभी रिकॉर्ड के बारे में अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। बैंक जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि डेटा कितना वास्तविक है और किस माध्यम से बाहर पहुंचा। ग्राहकों की कौन-सी निजी जानकारी हुई उजागर? शुरुआती जांच में सामने आए रिकॉर्ड में ग्राहकों से जुड़ी कई तरह की जानकारियां शामिल बताई गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं: इनमें से कुछ जानकारियों का इस्तेमाल साइबर ठग लोगों को निशाना बनाने के लिए कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी ग्राहक का नाम, मोबाइल नंबर और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी पता होने पर ठग खुद को बैंक कर्मचारी बताकर भरोसा जीतने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, इस मामले में ग्राहकों के बैंक खातों से पैसे निकलने या किसी खास तरह की धोखाधड़ी होने की पुष्टि नहीं हुई है। SBI ने जांच के लिए उठाए जरूरी कदम डेटा लीक की जानकारी मिलने के बाद बैंक ने अपने साइबर सिक्योरिटी प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए। साथ ही, मामले की विस्तृत जांच के लिए CERT-In से सूचीबद्ध एक स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी को नियुक्त किया गया है। जांच में यह पता लगाने पर ध्यान दिया जा रहा है कि डेटा का स्रोत क्या था, जानकारी कैसे उजागर हुई और इससे ग्राहकों की सुरक्षा पर कितना असर पड़ सकता है। बैंक के अनुसार, जांच के नतीजों के आधार पर जरूरी सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल डेटा लीक के पीछे किसी व्यक्ति या समूह की भूमिका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। क्या SBI ग्राहकों के बैंक खाते खतरे में हैं? डेटा लीक की खबर सुनकर ग्राहकों के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि क्या उनके बैंक खाते सुरक्षित हैं? यहां एक बात समझना जरूरी है। ग्राहकों का नाम, मोबाइल नंबर या पता सामने आने का मतलब यह नहीं है कि उनके बैंक खाते भी हैक हो गए हैं। निजी जानकारी का उजागर होना और खाते से पैसे निकलना दो अलग-अलग बातें हैं। SBI ने कहा है कि इस घटना से उसके मुख्य कामकाज और सेवाओं पर कोई महत्वपूर्ण असर नहीं पड़ा है। हालांकि, निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल करके फर्जी कॉल, मैसेज और ऑनलाइन ठगी की कोशिश की जा सकती है। इसलिए ग्राहकों को सावधानी बरतने की जरूरत है। Data Leak के बाद ग्राहकों को क्या करना चाहिए? डिजिटल बैंकिंग के दौर में थोड़ी सी लापरवाही भी परेशानी बढ़ा सकती है। ऐसे में SBI ग्राहकों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। 1. OTP और PIN किसी को न बताएं: बैंक अधिकारी बनकर फोन करने वाला व्यक्ति भी आपसे OTP, ATM PIN या CVV मांगे, तो जानकारी साझा न करें। 2. संदिग्ध लिंक से बचें: KYC अपडेट, बैंक खाता बंद होने या रिफंड मिलने के नाम पर आए अनजान लिंक पर क्लिक न करें। 3. बैंक खाते पर नजर रखें: अपने खाते के लेनदेन की नियमित जांच करें। कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन दिखे तो तुरंत बैंक से संपर्क करें। 4. फर्जी कॉल से सावधान रहें: अगर कोई व्यक्ति बैंकिंग जानकारी बताकर आपका भरोसा जीतने की कोशिश करे, तो उसकी पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। 5. साइबर ठगी होने पर शिकायत करें: वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 हेल्पलाइन या भारत सरकार के आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। ध्यान रखें कि किसी ठग के पास आपकी कुछ निजी जानकारी होने का मतलब यह नहीं है कि वह बैंक का अधिकृत प्रतिनिधि है। SBI Data Leak मामले में अब आगे क्या होगा? फिलहाल SBI डेटा लीक मामले की जांच जारी है। बैंक यह पता लगाने में जुटा है कि डार्क वेब पर उपलब्ध जानकारी कहां से आई और घटना का वास्तविक दायरा कितना बड़ा है। जांच पूरी होने के बाद ही डेटा लीक की वजह और ग्राहकों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर ज्यादा स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। तब तक ग्राहकों के लिए अपनी बैंकिंग जानकारी सुरक्षित रखना और संदिग्ध गतिविधियों से सतर्क रहना सबसे जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Delhi HighCourt

Delhi HighCourt: सौरव दास-आशुतोष रांका ने वापस ली याचिका, Bond की शर्तों पर कोर्ट के सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi HighCourt) में बुधवार, 21 अक्टूबर को CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर सुनवाई हुई। दोनों नेताओं ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ाई गई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट की टिप्पणियों के बाद दोनों ने अपनी याचिका वापस ले ली। जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद की बेंच ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि जब इस मामले में दूसरी कानूनी प्रक्रिया अपनाने का विकल्प मौजूद है, तो सीधे हाईकोर्ट का रुख क्यों किया गया। कोर्ट ने दोनों नेताओं की ओर से शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन के आरोपों पर भी टिप्पणी की। Jantar Mantar Protest Case: क्या है पूरा मामला? सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिया गया था। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किया गया था। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार कर उस स्थान पर प्रवेश किया था, जिसे प्रदर्शन स्थल के रूप में पहले ही अधिसूचित सूची से हटा दिया गया था। इसके बाद दोनों नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेजा गया। शुरुआत में उनकी हिरासत पांच दिन के लिए तय की गई थी। 19 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ाने का आदेश दिया था। इसी फैसले को चुनौती देते हुए दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। Court Remarks: बॉन्ड की शर्तों पर क्या कहा? सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड और उसके कथित उल्लंघन को लेकर सवाल उठाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि बैरिकेडिंग तोड़ने जैसी घटना के बाद दूसरे लोगों के भी नियमों का उल्लंघन करने की आशंका बढ़ सकती है। दोनों नेताओं की ओर से पेश वकील ने हिरासत बढ़ाने के आदेश और जमानतदारों से जुड़ी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका पक्ष था कि दोनों ने आवश्यक जमानतदार पेश किए थे, इसके बावजूद उन्हें हिरासत में रखा गया। हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले में उपलब्ध वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाने की बात कही। इसके बाद दोनों नेताओं की ओर से याचिका वापस लेने का फैसला किया गया। याचिका वापस लेने का क्या मतलब है? सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका वापस लिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि हाईकोर्ट ने हिरासत बढ़ाने के आदेश को सही ठहरा दिया है। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय दिए बिना याचिका वापस लेने की अनुमति दी। कोर्ट ने दोनों पक्षों को पहले स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष चल रही प्रक्रिया के नतीजे का इंतजार करने और जरूरत पड़ने पर उचित अपीलीय मंच का रुख करने की सलाह दी। इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और मजिस्ट्रेट के समक्ष होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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