लोक निर्माण विभाग द्वारा सेवानिवृत्त कर्मचारी के बकाया एरियर का भुगतान नहीं करने पर बुधवार को जिला न्यायालय के आदेश पर दोबारा कुर्की की कार्रवाई की गई।
बताया जा रहा है कि विभाग ने पहले कोर्ट से लिखित में समय मांगा था, लेकिन तय अवधि गुजरने के बाद भी भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद कोर्ट की टीम को दोबारा कार्रवाई करनी पड़ी।
36 लाख रुपए का एरियर लंबित
सेवानिवृत्त कर्मचारी कौशल किशोर राठौर का आरोप है कि विभाग ने लंबे समय तक उन्हें उनके पद के अनुसार वेतन नहीं दिया। इसके खिलाफ उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
मामला निचली अदालत से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां हर स्तर पर फैसला कर्मचारी के पक्ष में आया। अदालतों ने विभाग को बकाया वेतन और एरियर देने के निर्देश दिए थे।
2014 से रिटायरमेंट तक की राशि बाकी
विभाग ने वर्ष 2013 तक का एरियर तो जारी कर दिया, लेकिन 2014 से लेकर रिटायरमेंट तक की करीब 36 लाख रुपए की राशि अब तक नहीं दी गई।
लगातार आदेशों के बावजूद भुगतान नहीं होने पर कर्मचारी ने अवमानना और इजरा याचिका दायर की, जिसके बाद कोर्ट ने कुर्की और वसूली के आदेश जारी किए।
पहले भी हुई थी कार्रवाई
फरवरी में हुई पिछली कार्रवाई के दौरान विभाग ने कोर्ट को लिखित में भरोसा दिया था कि दो महीने के भीतर पूरा भुगतान कर दिया जाएगा।
लेकिन तीन महीने बीतने के बाद भी भुगतान नहीं हुआ। इसी कारण कोर्ट की टीम को फिर से विभागीय संपत्तियों की कुर्की की कार्रवाई करनी पड़ी।

कोर्ट ने दिए सख्त निर्देश
न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 31 दिसंबर 2026 तक कुर्की के माध्यम से पूरी राशि वसूलकर भुगतान सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं।
बुधवार को कोर्ट की टीम ने विभागीय संपत्तियों का आकलन किया और जरूरी दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी की। यदि इसके बाद भी भुगतान नहीं हुआ, तो विभाग की अन्य संपत्तियों पर भी सख्त कार्रवाई हो सकती है।
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