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सागर मकरोनिया में दिनदहाड़े चोरी: महिला के घर पहुंचते ही चोर ने दिया धक्का, नकद और गहने लेकर फरार

मध्य प्रदेश के सागर के मकरोनिया इलाके में दिनदहाड़े चोरी की घटना सामने आई है, जिससे इलाके में दहशत का माहौल बन गया है। सूने मकान को बनाया निशाना दीनदयाल नगर मकरोनिया में रहने वाली गुड्डीबाई उपाध्याय सुबह करीब 11 बजे घर पर ताला लगाकर खाना बनाने के लिए गई थीं। इसी दौरान चोर ने सूना मकान देख गेट फांदकर घर में एंट्री कर ली। चोर ने घर का ताला तोड़कर अलमारी और पेटी में रखे नकद रुपए और गहनों पर हाथ साफ कर दिया। महिला के पहुंचते ही भागा चोर इसी बीच जब गुड्डीबाई घर लौटीं, तो उन्होंने अंदर चोर को देख लिया और चिल्लाने लगीं। पकड़े जाने के डर से चोर ने उन्हें धक्का दिया और मौके से भाग निकला। शोर सुनकर आसपास के लोग भी मौके पर जमा हो गए, लेकिन तब तक आरोपी फरार हो चुका था। किस्त के पैसे और गहने ले गया आरोपी पीड़िता के मुताबिक, घर में रखे करीब 11 हजार रुपए (किस्त भरने के लिए रखे पैसे) और पायल, टॉप्स, चूड़ियां, अंगूठी समेत अन्य गहने चोर ले गया। CCTV में कैद हुआ संदिग्ध घटना के पास लगे CCTV कैमरों की जांच की गई, जिसमें एक युवक गेट फांदकर घर में घुसते हुए नजर आया है। पुलिस जांच में जुटी मामले की शिकायत मकरोनिया थाने में दर्ज कराई गई है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है और CCTV फुटेज के आधार पर आरोपी की तलाश की जा रही है। यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि दिन में भी घरों की सुरक्षा को लेकर लापरवाही भारी पड़ सकती है। 👉 ऐसी ही लेटेस्ट और ग्राउंड रिपोर्ट के लिए जुड़े रहें www.deshharpal.com
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खंडवा में कांग्रेस का किसान आंदोलन: 9 अप्रैल को कलेक्टर घेराव, सरकार ने एक दिन पहले ही शुरू की गेहूं खरीदी

मध्य प्रदेश के खंडवा में कांग्रेस के किसान आंदोलन को लेकर सियासत तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के ऐलान के बाद अब 9 अप्रैल को जिले में बड़ा प्रदर्शन होने जा रहा है। सरकार ने बदली गेहूं खरीदी की तारीख कांग्रेस के आंदोलन के ऐलान के बाद सरकार भी सतर्क हो गई है। पहले जहां गेहूं खरीदी 10 अप्रैल से शुरू होनी थी, अब इसे एक दिन पहले यानी 9 अप्रैल से ही शुरू करने का फैसला लिया गया है। कांग्रेस ने शुरू की तैयारी खंडवा में जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) ने आंदोलन की तैयारियां तेज कर दी हैं। जिलाध्यक्ष उत्तमपालसिंह पुरनी ने पार्टी कार्यालय में बैठक लेकर पदाधिकारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपीं। ब्लॉक, मंडल और जिला स्तर के कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे बड़ी संख्या में शामिल हों और आंदोलन को सफल बनाएं। हर बूथ अध्यक्ष को कम से कम 10 लोगों को लाने का लक्ष्य दिया गया है। 5-6 हजार किसानों के जुटने का दावा कांग्रेस का दावा है कि इस आंदोलन में 5 से 6 हजार किसान शामिल होंगे, जिससे सरकार पर दबाव बनाया जाएगा। कलेक्टर कार्यालय का होगा घेराव 9 अप्रैल को दोपहर 12 बजे सभी कांग्रेस कार्यकर्ता और किसान महाराणा प्रताप प्रतिमा के पास एकत्र होंगे। इसके बाद रैली निकालकर कलेक्टर कार्यालय तक पहुंचेंगे और वहां घेराव कर ज्ञापन सौंपेंगे। इस दौरान गेहूं खरीदी, सिंचाई और अन्य स्थानीय समस्याओं को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज उठाई जाएगी। यह आंदोलन अब राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि किसानों के मुद्दों पर सीधी टक्कर देखने को मिल सकती है। 👉 ऐसी ही पॉलिटिकल और ग्राउंड रिपोर्ट के लिए जुड़े रहें www.deshharpal.com
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भोपाल में मंत्री विश्वास सारंग के बंगले में चोरी: स्टोर रूम से ट्रॉफियां और मोमेंटो ले गए चोर

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। यहां खेल एवं सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग के सरकारी बंगले में चोरी हो गई है। स्टोर रूम का ताला तोड़कर की वारदात जानकारी के मुताबिक, 2 और 3 अप्रैल की दरमियानी रात अज्ञात चोरों ने बंगले के स्टोर रूम का ताला तोड़ दिया और वहां रखी ट्रॉफियां, मोमेंटो और शील्ड लेकर फरार हो गए। इस घटना का पता 6 अप्रैल की सुबह तब चला, जब सिक्योरिटी गार्ड ने स्टोर रूम का टूटा ताला देखा और सामान गायब पाया। सम्मान में मिली थीं ट्रॉफियां पुलिस के अनुसार, चोरी हुई ट्रॉफियां और मोमेंटो मंत्री विश्वास सारंग को अलग-अलग कार्यक्रमों में सम्मान स्वरूप मिले थे। फिलहाल इनकी कुल कीमत का आकलन किया जा रहा है। CCTV नहीं होने से जांच में दिक्कत जांच में यह भी सामने आया है कि जिस स्टोर रूम में चोरी हुई, वहां CCTV कैमरे नहीं लगे थे। इसी वजह से चोरों की पहचान करना पुलिस के लिए चुनौती बन गया है। पुलिस जुटी जांच में टीटीनगर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपियों को पकड़ लिया जाएगा। यह घटना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, खासकर तब जब यह चोरी एक मंत्री के सरकारी बंगले में हुई हो। 👉 ऐसी ही लेटेस्ट और भरोसेमंद खबरों के लिए जुड़े रहें www.deshharpal.com
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खंडवा में रिटायर असिस्टेंट कमिश्नर संतोष शुक्ला पर घमासान, 61 ट्रांसफर आदेश रद्द, जांच कमेटी गठित

मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में जनजातीय कार्य विभाग से रिटायर हुए संतोष शुक्ला अब गंभीर विवादों में घिर गए हैं। ट्रांसफर-पोस्टिंग में गड़बड़ी के आरोप सामने आने के बाद उनके द्वारा जारी आदेशों को निरस्त कर दिया गया है और पूरे मामले की जांच शुरू हो गई है। 61 ट्रांसफर आदेश रद्द, जांच शुरू प्रभारी मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी के हस्तक्षेप के बाद शुक्ला द्वारा जारी सभी 61 ट्रांसफर-पोस्टिंग आदेश तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिए गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए एक आईएएस अधिकारी के नेतृत्व में जांच कमेटी गठित की गई है। शिकायतों में लेन-देन, अवैध वसूली और नियमों की अनदेखी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, शुक्ला ने सभी आरोपों को गलत बताते हुए अपने फैसलों को नियमों के तहत बताया है। रिटायरमेंट से पहले बनाया “प्लान” सूत्रों के मुताबिक, संतोष शुक्ला ने रिटायरमेंट के अंतिम दिनों में बड़े पैमाने पर ट्रांसफर-पोस्टिंग आदेश जारी किए। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने बाद किसे जिम्मेदारी मिलेगी, इसका भी प्लान तैयार कर लिया था। बताया जा रहा है कि उन्होंने अपने एक चहेते शिक्षक को असिस्टेंट कमिश्नर का चार्ज दिलाने के लिए नोटशीट तक बढ़ाई थी। कलेक्टर ने बदला फैसला यह मामला जब कलेक्टर ऋषव गुप्ता के पास पहुंचा, तो उन्होंने सीनियरिटी के आधार पर नीरज पाराशर का नाम आगे बढ़ाया। लेकिन शुक्ला और पाराशर के बीच पहले से विवाद था। शुक्ला नहीं चाहते थे कि पाराशर को चार्ज मिले। इसके बाद मामला मंत्री विजय शाह तक पहुंचा। आखिरकार विवाद बढ़ने पर कलेक्टर ने तीसरे विकल्प के रूप में डिप्टी कलेक्टर बजरंग बहादुर को असिस्टेंट कमिश्नर का प्रभार सौंप दिया। एक शिक्षक पर 4-4 पदों की जिम्मेदारी जिस शिक्षक नारायणसिंह को आगे बढ़ाया गया था, वह पहले से ही तीन स्कूलों के प्राचार्य और बीईओ (ब्लॉक शिक्षा अधिकारी) का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि एक व्यक्ति एक साथ चार-चार जिम्मेदारियां कैसे निभा सकता है। जांच अधिकारी को ही मिला प्रभार! दिलचस्प बात यह भी है कि जिन्हें असिस्टेंट कमिश्नर का प्रभार दिया गया, वही पहले विभागीय शिकायतों की जांच कमेटी का नेतृत्व कर चुके हैं। उनकी पुरानी जांच रिपोर्ट अभी तक लंबित है, जिससे नए फैसले पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। अब क्या आगे? पूरा मामला अब जांच के दायरे में है। रिपोर्ट आने के बाद ही तय होगा कि आरोप कितने सही हैं और संबंधित अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी। 👉 मामले से जुड़ी हर अपडेट के लिए विजिट करें: www.deshharpal.com
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भाजपा का 47वां स्थापना दिवस: 17 जिलों में नए कार्यालयों का भूमिपूजन, गांव-बस्ती अभियान की घोषणा

आज भारतीय जनता पार्टी (भारतीय जनता पार्टी) ने अपना 47वां स्थापना दिवस पूरे उत्साह के साथ मनाया। इस खास मौके पर मध्यप्रदेश के 17 जिलों में पार्टी कार्यालयों के निर्माण के लिए भूमिपूजन किया गया। राजधानी भोपाल स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में प्राथमिक और सक्रिय सदस्यों का बड़ा सम्मेलन आयोजित हुआ। यहां से मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल वर्चुअली जुड़कर कार्यक्रम का हिस्सा बने। सीएम का बयान: मजबूत नेतृत्व से हर समस्या का समाधान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि आज भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जो अपने दुश्मनों को उनके घर में घुसकर जवाब देता है। उन्होंने कहा कि मजबूत और सक्षम नेतृत्व होने पर देश की हर समस्या का समाधान संभव है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में देश और पार्टी दोनों मजबूत हुए हैं। सीएम ने भाजपा की तुलना फीनिक्स पक्षी से करते हुए कहा कि पार्टी की विचारधारा अटल और अमर है, जो हर चुनौती के बाद और मजबूत होकर उभरती है। अटल जी के दौर को भी किया याद मुख्यमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व को याद करते हुए कहा कि गठबंधन की सरकार होने के बावजूद उन्होंने 24 दलों के साथ सफलतापूर्वक शासन चलाया और अपने वादे पूरे किए। 62 जिलों में कार्यालय बनाने का लक्ष्य प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि पार्टी की विचारधारा सहभागिता पर आधारित है। उन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी, दीनदयाल उपाध्याय और अटल जी के विचारों को आगे बढ़ाने की बात कही। उन्होंने बताया कि फिलहाल 17 जिलों में कार्यालय निर्माण शुरू हो रहा है और लक्ष्य है कि अगले स्थापना दिवस से पहले प्रदेश के सभी 62 जिलों में भाजपा के अपने कार्यालय हों। हर कार्यालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा और पुस्तकालय भी होगा, जहां संगठन और विचारधारा से जुड़ी किताबें उपलब्ध रहेंगी। दिवंगत नेताओं के परिवारों का सम्मान सम्मेलन के दौरान पार्टी के दिवंगत नेताओं और कार्यकर्ताओं के परिजनों को सम्मानित किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव खुद मंच से उतरकर पूर्व विधायक स्वर्गीय रमेश शर्मा के परिजनों से मिलने पहुंचे, जिसने कार्यक्रम को भावुक बना दिया। 7 से 12 अप्रैल तक ‘गांव-बस्ती चलो अभियान’ भाजपा 7 से 12 अप्रैल तक पूरे प्रदेश में ‘गांव-बस्ती चलो अभियान’ चलाएगी। इस अभियान में सांसद, विधायक और सभी बड़े नेता गांव-गांव पहुंचेंगे। पार्टी ने निर्देश दिए हैं कि नेता सिर्फ भाषण न दें, बल्कि जनता के बीच जाकर योजनाओं का वास्तविक प्रभाव समझें और उसे सोशल मीडिया पर साझा करें। 👉 अधिक जानकारी और ताजा अपडेट के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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जबलपुर में डायल-112 की हालत खराब: बच्चों से धक्का लगवाकर स्टार्ट करनी पड़ी पुलिस गाड़ी

मध्य प्रदेश के जबलपुर से पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। यहां डायल-112 की इमरजेंसी वाहन को स्टार्ट करने के लिए बच्चों से धक्का लगवाना पड़ा। धक्का देकर स्टार्ट करनी पड़ी गाड़ी कटंगी थाना क्षेत्र में शुक्रवार रात डायल-112 (FRV) गाड़ी अचानक बंद हो गई। बैटरी खराब होने की वजह से गाड़ी स्टार्ट नहीं हुई, जिसके बाद उसे धक्का देकर चालू करना पड़ा। इस घटना का वीडियो शनिवार को सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसमें कुछ बच्चे पुलिस वाहन को धक्का देते नजर आ रहे हैं। पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले यह पहली बार नहीं है जब मध्य प्रदेश पुलिस की डायल-112 गाड़ियों की ऐसी हालत सामने आई हो। इससे पहले सितंबर 2025 में भी जबलपुर में नई गाड़ी को धक्का देने के बाद भी स्टार्ट नहीं किया जा सका था, तब उसे क्रेन से मैकेनिक के पास ले जाना पड़ा था। इमरजेंसी सेवा पर उठे सवाल डायल-112 जैसी इमरजेंसी सेवा का उद्देश्य लोगों को तुरंत मदद पहुंचाना है। लेकिन अगर गाड़ियां ही समय पर स्टार्ट न हों, तो गंभीर स्थिति में लोगों तक मदद कैसे पहुंचेगी, यह बड़ा सवाल बन गया है। सीएम ने दिखाई थी हरी झंडी गौरतलब है कि 14 अगस्त 2025 को डॉ. मोहन यादव ने भोपाल से डायल-112 सेवा की शुरुआत की थी। इसके तहत पूरे प्रदेश में करीब 1200 गाड़ियां तैनात की गईं। जबलपुर जिले को 47 वाहन दिए गए थे, जिन्हें आधुनिक तकनीक से लैस बताया गया था। आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं गाड़ियां डायल-112 वाहनों में GPS, वायरलेस, डिजिटल नेविगेशन और लाइव लोकेशन ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं दी गई हैं, ताकि आपातकालीन स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके। यह सेवा पुलिस, एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी सभी आपात सेवाओं को एक ही नंबर 112 पर उपलब्ध कराती है। अधिकारियों ने कंपनी को दी चेतावनी वीडियो सामने आने के बाद पुलिस अधिकारियों ने वाहन उपलब्ध कराने वाली कंपनी से बात कर भविष्य में ऐसी स्थिति न बनने की हिदायत दी है। यह घटना एक बार फिर सिस्टम की हकीकत सामने लाती है, जहां कागजों में आधुनिक सुविधाएं हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आती है। 👉 ऐसी ही ग्राउंड रिपोर्ट और सच्ची खबरों के लिए जुड़े रहें www.deshharpal.com
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सागर में घर में घुसी कोबरा नागिन: सो रही बच्ची के तकिए के पास बैठी, समय रहते टली बड़ी घटना

मध्य प्रदेश के सागर जिले के बड़तूमा गांव में शनिवार सुबह एक डराने वाली घटना सामने आई, जहां एक जहरीली कोबरा नागिन घर के अंदर घुस गई और सो रही बच्ची के बिल्कुल पास पहुंच गई। तकिए के पास बैठी थी नागिन जानकारी के मुताबिक, बड़तूमा निवासी प्रशांत ठाकुर के घर में उनकी छोटी बच्ची सो रही थी। तभी करीब ढाई फीट लंबी कोबरा प्रजाति की नागिन चुपचाप आकर उसके तकिए के पास बैठ गई। जैसे ही परिवार के लोगों की नजर उस पर पड़ी और उन्होंने आवाज की, नागिन तुरंत भागकर फ्रिज के नीचे छिप गई। घबराए माता-पिता ने बिना देर किए बच्ची को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। स्नेक कैचर को दी गई सूचना घटना की जानकारी तुरंत स्नेक कैचर बबलू पवार को दी गई। उन्होंने परिवार को सांप पर नजर बनाए रखने को कहा और खुद मौके पर पहुंचे। फ्रिज हटाकर किया गया रेस्क्यू स्नेक कैचर ने बताया कि नागिन फ्रिज के नीचे छिपी हुई थी। काफी सावधानी के साथ फ्रिज को हटाया गया और फिर सांप को सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया गया। उन्होंने बताया कि यह बेहद जहरीली कोबरा नागिन थी, जिसकी लंबाई करीब ढाई फीट थी। जंगल में छोड़ा गया सुरक्षित रेस्क्यू के बाद नागिन को सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया गया। गनीमत रही कि समय रहते बच्ची को बाहर निकाल लिया गया, वरना कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती थी। यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि घरों में भी सतर्क रहना कितना जरूरी है, खासकर गांव और खुले इलाकों में। 👉 ऐसी ही लेटेस्ट और जागरूक करने वाली खबरों के लिए जुड़े रहें www.deshharpal.com
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उज्जैन सड़क हादसा: मिनी बस-ट्रैक्टर टक्कर में युवक की मौत, गुस्साए ग्रामीणों ने बस में लगाई आग

c के उज्जैन में शुक्रवार रात एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। गरोठ रोड पर मिनी बस और ट्रैक्टर-ट्रॉली की टक्कर में एक युवक की मौत हो गई, जबकि चार लोग घायल हो गए। कैसे हुआ हादसा पुलिस के मुताबिक, दिल्ली से श्रद्धालुओं को लेकर आ रही मिनी बस ने तुलाहेड़ा टोल प्लाजा के पास ट्रैक्टर-ट्रॉली को पीछे से टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि ट्रैक्टर खाई में गिरकर पलट गया। इस हादसे में 21 वर्षीय विजय सोलंकी ट्रॉली के नीचे दब गया। वह करीब एक घंटे तक फंसा रहा और समय पर मदद नहीं मिलने के कारण उसकी मौत हो गई। चार लोग घायल, दो की हालत गंभीर हादसे में ट्रैक्टर सवार राजेश शर्मा, बस ड्राइवर शिवकुमार (अमृतसर), और यात्री बॉबी व धर्मेंद्र कुमार (दिल्ली) घायल हो गए। सभी को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां दो लोगों की हालत गंभीर होने पर उन्हें ICU में भर्ती किया गया। गुस्साए ग्रामीणों ने किया हंगामा युवक की मौत के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने हाईवे पर चक्काजाम कर दिया और टोल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। आरोप है कि हादसे के बाद क्रेन समय पर नहीं पहुंची, जिससे घायल युवक को निकालने में देरी हुई। इसी लापरवाही से नाराज होकर ग्रामीणों ने बस में तोड़फोड़ की और आग लगा दी। बस में रखा सामान जलकर पूरी तरह राख हो गया। पुलिस ने संभाला मोर्चा मौके पर तीन थानों की पुलिस पहुंची और हालात को काबू में किया। अधिकारियों ने ग्रामीणों को निष्पक्ष जांच और कार्रवाई का भरोसा दिलाया, जिसके बाद जाम खुलवाया गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि बस में सवार सभी श्रद्धालु पहले ही सुरक्षित उतर चुके थे और उन्हें दूसरे वाहनों से उज्जैन भेज दिया गया। यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम पर सवाल खड़े करता है। 👉 ऐसी ही लेटेस्ट और भरोसेमंद खबरों के लिए जुड़े रहें www.deshharpal.com
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खंडवा जनजातीय विभाग ट्रांसफर विवाद: रिटायरमेंट से पहले 61 तबादले, वसूली के आरोपों से मचा बवाल

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में जनजातीय कार्य विभाग में रिटायरमेंट से ठीक पहले बड़े पैमाने पर हुए ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। रिटायरमेंट से पहले 61 ट्रांसफर आदेश असिस्टेंट कमिश्नर संतोष शुक्ला ने 26 से 31 मार्च के बीच 61 ट्रांसफर के आदेश जारी किए। इनमें शिक्षक, हॉस्टल अधीक्षक और भृत्य शामिल हैं। कुछ मामलों में प्रमोशन भी दिए गए, जिससे मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया। बिना मंजूरी के आदेश जारी करने के आरोप आरोप है कि इन तबादलों में न तो प्रभारी मंत्री की मंजूरी ली गई और न ही कलेक्टर को इसकी जानकारी दी गई। खास बात यह है कि संतोष शुक्ला 31 मार्च को रिटायर हो चुके हैं, जिसके बाद अब उनके खिलाफ विभागीय जांच की मांग उठ रही है। वसूली के गंभीर आरोप जय आदिवासी युवा संगठन ने इस पूरे मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ट्रांसफर और पोस्टिंग के बदले पैसे लिए गए। बताया गया कि हॉस्टल अधीक्षक हेमंत सिन्हा के जरिए शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों से पैसे वसूले गए। कई लोगों ने ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के जरिए रकम ट्रांसफर की। इसके अलावा आरोप है कि हॉस्टल अधीक्षकों से हर महीने 1500 से 2000 रुपए तक की अवैध वसूली की जाती थी, जबकि प्रमोशन के नाम पर 5 से 10 हजार रुपए तक लिए गए। कई स्थानों पर अनियमितताओं का आरोप राजगढ़, पंधाना, हरसूद, खंडवा, मोजवाड़ी, जामन्या, बेदीमाल, खुटला, आसा और नेटीसराय जैसे कई स्थानों पर पोस्टिंग, निर्माण कार्य और वित्तीय लेनदेन में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। रिटायर्ड अधिकारी ने दी सफाई इस मामले में संतोष शुक्ला ने कहा कि उनकी तबीयत खराब थी और रिटायरमेंट वाले दिन वे दफ्तर भी नहीं गए थे। उन्होंने दावा किया कि सभी ट्रांसफर नियमों के अनुसार किए गए हैं। प्रभारी मंत्री का बड़ा बयान खंडवा जिले के प्रभारी मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने साफ कहा कि इन ट्रांसफर में उनकी कोई मंजूरी नहीं ली गई। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा हुआ है, तो सभी ट्रांसफर आदेश निरस्त कराए जाएंगे। पहले भी विवादों में रह चुके हैं अधिकारी संतोष शुक्ला पहले भी विवादों में रह चुके हैं। उन पर पहले आय से अधिक संपत्ति के मामले में लोकायुक्त कार्रवाई कर चुका है। साथ ही, 2023 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भी उन्हें एक मामले में फटकार लगाई थी। यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है और आने वाले दिनों में इस पर बड़ी कार्रवाई हो सकती है। 👉 ऐसी ही एक्सक्लूसिव और भरोसेमंद खबरों के लिए जुड़े रहें www.deshharpal.com Permalink (SEO Friendly):khandwa-tribal-department-transfer-scam-61-posting-controversy
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सीहोर में कांग्रेस का जनआक्रोश प्रदर्शन: किसानों की गेहूं तुलाई और महंगाई को लेकर सरकार पर साधा निशाना

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के अहमदपुर (देवीपुरा) में शुक्रवार को कांग्रेस ने जनआक्रोश प्रदर्शन किया। इस दौरान कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगों को जोरदार तरीके से उठाया। किसानों के मुद्दों पर घिरी सरकार जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजीव गुजराती ने कहा कि किसानों की गेहूं तुलाई शुरू न करना सरकार की सबसे बड़ी विफलता है। उन्होंने इसे किसानों के साथ सीधा धोखा बताया और कहा कि इससे किसान आर्थिक संकट में फंस रहे हैं। महंगाई और जरूरी सुविधाओं को लेकर भी नाराजगी इस प्रदर्शन में सिर्फ किसान ही नहीं, बल्कि आम जनता से जुड़े कई मुद्दों को उठाया गया। कांग्रेस ने बढ़ती महंगाई, गैस सिलेंडर की कमी, बिजली दरों में बढ़ोतरी और पेट्रोल-डीजल की समस्या को लेकर सरकार को घेरा। सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप राजीव गुजराती ने आरोप लगाया कि सरकार पूरी तरह संवेदनहीन हो चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकार को न किसानों की चिंता है और न ही आम लोगों की परेशानियों की कोई परवाह है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि किसानों के साथ अन्याय अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जनता जल्द ही इसका जवाब देगी। पहले भी हो चुका है प्रदर्शन गौरतलब है कि कांग्रेस इससे पहले भी सीहोर जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन कर चुकी है। उस दौरान भी किसानों और आम जनता की समस्याओं को लेकर ज्ञापन सौंपा गया था। 👉 ऐसी ही लेटेस्ट और भरोसेमंद खबरों के लिए जुड़े रहें deshharpal.com
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Bittu Tabahi

Bittu Tabahi ने बदली सोच, अकेले शुरू किया नदी सफाई अभियान; नगरपालिका भी हुई प्रभावित

नदी में गंदगी देखकर ज्यादातर लोग शिकायत करते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के एक युवक ने शिकायत करने के बजाय खुद कुछ करने की ठानी। स्थानीय स्तर पर ‘बिट्टू तबाही’ (Bittu Tabahi) के नाम से पहचाने जाने वाले इस युवक ने अकेले ही नदी की सफाई का जिम्मा उठा लिया। उनका यह जज्बा अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। बिट्टू ने नदी में जमा कचरे और गंदगी को देखकर सफाई अभियान शुरू किया। शुरुआत किसी बड़े इंतजाम या टीम के साथ नहीं हुई। उन्होंने अपने स्तर पर सफाई करना शुरू किया और लगातार इस काम में जुटे रहे। नदी को साफ रखने का लिया संकल्प बिट्टू का मानना है कि नदी सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि आसपास के लोगों और पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने नदी में जमा कचरे को हटाने की पहल की। उनका यह प्रयास धीरे-धीरे स्थानीय लोगों का ध्यान खींचने लगा। लोगों ने देखा कि बिना किसी दबाव या दिखावे के बिट्टू लगातार नदी की सफाई में लगे हुए हैं। नगरपालिका ने भी की पहल की सराहना बिट्टू के लगातार सफाई अभियान की जानकारी नगरपालिका तक पहुंची तो उनके प्रयास की सराहना की गई। एक युवक द्वारा अपने स्तर पर नदी को साफ रखने की कोशिश को अधिकारियों ने सकारात्मक कदम माना। इस पहल ने यह भी दिखाया कि अगर कोई व्यक्ति अपने आसपास के पर्यावरण को लेकर जिम्मेदारी महसूस करे, तो छोटी शुरुआत भी बड़ा संदेश दे सकती है। सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आया अभियान बिट्टू का नदी सफाई अभियान अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। उनके प्रयास को देखकर दूसरे लोगों में भी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने की उम्मीद है। आज नदियों में बढ़ता कचरा और प्रदूषण बड़ी चुनौती है। ऐसे में बिट्टू की पहल लोगों को यह संदेश देती है कि नदी को साफ रखना सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है। ‘बिट्टू तबाही’ ने दी एक अलग मिसाल बिट्टू की कहानी इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने बदलाव का इंतजार नहीं किया, बल्कि खुद बदलाव की शुरुआत करने का फैसला लिया। अकेले शुरू किया गया उनका यह सफाई अभियान अब दूसरों के लिए प्रेरणा बनता दिखाई दे रहा है। कई बार किसी बड़े बदलाव की शुरुआत बड़े अभियान से नहीं, बल्कि एक छोटे से कदम से होती है। बिट्टू का यह प्रयास उसी सोच की मिसाल है—अगर इरादा मजबूत हो, तो एक इंसान भी बदलाव की शुरुआत कर सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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World Map में बड़ा बदलाव! UN ने Africa के असली Size को दिखाने का रास्ता साफ किया

दुनिया का नक्शा (World Map) देखते हुए शायद ही किसी ने सोचा होगा कि इसमें दिखाई देने वाले देशों और महाद्वीपों का आकार असलियत से अलग भी हो सकता है। लेकिन अब इसी मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र में एक अहम पहल हुई है। UN महासभा ने ऐसे World Map को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें धरती के अलग-अलग हिस्सों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाने की कोशिश की गई है। इस बदलाव के बाद नक्शे पर Africa पहले से काफी बड़ा दिखाई देगा, जबकि Europe और North America, खासकर US का आकार पुराने नक्शे की तुलना में छोटा नजर आ सकता है। प्रस्ताव को भारी समर्थन मिला, लेकिन अमेरिका ने इसका विरोध किया। पुराने World Map में आखिर समस्या क्या है? दुनिया के स्कूलों और कई नक्शों में लंबे समय से Mercator Projection का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसे 16वीं सदी में Gerardus Mercator ने तैयार किया था। उस समय इसका सबसे बड़ा फायदा समुद्री यात्राओं और Navigation में था। लेकिन Mercator Projection की एक खासियत ही इसकी सबसे बड़ी कमी भी बन गई। इसमें जैसे-जैसे कोई क्षेत्र Equator से दूर जाता है, उसका आकार नक्शे पर ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है। यही कारण है कि Greenland जैसे इलाके नक्शे पर अपनी वास्तविकता से बहुत बड़े नजर आते हैं। दूसरी तरफ Africa, जो दुनिया के सबसे बड़े महाद्वीपों में से एक है, अपेक्षाकृत छोटा दिखाई देता है। मसलन, सामान्य Mercator Map में Greenland और Africa का आकार देखकर किसी को लग सकता है कि दोनों लगभग बराबर हैं। असल में Africa का क्षेत्रफल Greenland से करीब 14 गुना ज्यादा है। Equal Earth Projection क्यों चर्चा में है? UN के प्रस्ताव में Equal Earth Projection जैसे नक्शों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इस Projection की खासियत यह है कि इसमें अलग-अलग महाद्वीपों के क्षेत्रफल को ज्यादा सही अनुपात में दिखाया जाता है। यानी नक्शे को देखकर Africa का वास्तविक विशाल आकार ज्यादा साफ समझ में आता है। Europe और North America भी Mercator Map की तुलना में छोटे दिखाई देते हैं। हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है—न तो Africa बड़ा हुआ है और न ही Europe या America छोटा। बदलाव सिर्फ उस तरीके में है, जिससे उन्हें नक्शे पर दिखाया जाता है। America ने UN के प्रस्ताव का विरोध क्यों किया? इस प्रस्ताव पर अमेरिका का रुख बाकी देशों से अलग रहा। मतदान के दौरान अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट किया। अमेरिकी पक्ष की ओर से यह सवाल उठाया गया कि संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक स्तर की बड़ी समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। वहीं प्रस्ताव के समर्थकों का मानना है कि नक्शा सिर्फ रास्ता या देश की लोकेशन बताने वाला साधन नहीं है। यह लोगों के मन में दुनिया की एक तस्वीर भी बनाता है। अफ्रीकी देशों की तरफ से लंबे समय से यह बात उठती रही है कि पुराने नक्शों में Africa का वास्तविक आकार सही तरीके से सामने नहीं आता। इसी सोच के साथ “Correct the Map” अभियान को आगे बढ़ाया गया। UN के फैसले से क्या सभी Maps बदल जाएंगे? यह मान लेना सही नहीं होगा कि अब अचानक हर जगह नया नक्शा दिखाई देने लगेगा। UN महासभा का यह फैसला कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। यानी Google Maps, स्कूल की किताबों, सरकारी दस्तावेजों या दूसरे Digital Platforms को तुरंत अपना नक्शा बदलना जरूरी नहीं है। इसका मकसद देशों, शैक्षणिक संस्थानों, मीडिया और दूसरे संगठनों को ऐसे Map Projections अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, जो दुनिया के क्षेत्रफल को ज्यादा सही तरीके से दिखाते हों। इसके बावजूद Mercator Projection पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है। Navigation और समुद्री यात्राओं जैसी जरूरतों में इसका इस्तेमाल आज भी उपयोगी माना जाता है। India पर क्या असर पड़ेगा? भारत को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस नए World Map से देश का आकार या सीमा बदल जाएगी? इसका जवाब है—नहीं। भारत की जमीन, क्षेत्रफल और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर इस प्रस्ताव का कोई असर नहीं पड़ेगा। सिर्फ नक्शे पर भारत और बाकी देशों को दिखाने का अनुपात बदल सकता है। अगर Equal Earth या इसी तरह की Projection का इस्तेमाल ज्यादा बढ़ता है तो आने वाले समय में School Geography Books, Educational Charts, News Graphics और Digital Maps में दुनिया की तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे सकती है। भारत के लिए इसका असर मुख्य रूप से शिक्षा और Geography की समझ के स्तर पर होगा। बच्चों और आम लोगों को यह समझने में मदद मिलेगी कि नक्शे पर दिखाई देने वाला आकार हमेशा किसी देश या महाद्वीप के वास्तविक क्षेत्रफल के बराबर नहीं होता। Africa के लिए इसे बड़ी उपलब्धि क्यों माना जा रहा है? इस पूरे विवाद में Africa सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र में है। समर्थकों का कहना है कि सदियों से इस्तेमाल हो रहे नक्शों ने अनजाने में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की एक असंतुलित तस्वीर बना दी है। Africa दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महाद्वीप है और इसके बावजूद Mercator Map में इसका आकार उसकी वास्तविक विशालता के मुकाबले कम नजर आता है। यही वजह है कि African countries और African Union की ओर से इस मुद्दे को लगातार उठाया गया। उनके लिए यह केवल Map Projection का मामला नहीं, बल्कि दुनिया के सामने Africa की वास्तविक तस्वीर रखने का भी सवाल है। क्या दुनिया सच में बदल गई? नहीं। दुनिया का भूगोल बिल्कुल नहीं बदला है। न कोई नया देश बना है, न किसी देश की सीमा बदली है और न ही Africa का क्षेत्रफल अचानक बढ़ गया है। बदलाव सिर्फ इतना है कि दुनिया को कागज या स्क्रीन पर किस तरह दिखाया जाए, इस पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा सामने आई है। एक तरह से देखें तो यह कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि नक्शा हमेशा पूरी तरह निष्पक्ष तस्वीर नहीं होता। उसे बनाने का तरीका तय करता है कि हमें दुनिया का कौन-सा हिस्सा कितना बड़ा या छोटा दिखाई देगा। आने वाले वर्षों में अगर Equal Earth जैसी projections को ज्यादा अपनाया जाता है, तो संभव है कि नई पीढ़ी के लिए World Map की तस्वीर वही न हो,...
Swatantra Bhardwaj

Swatantra Bhardwaj Detained: CJP Protest के बाद स्वतंत्र भारद्वाज हिरासत में

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP Protest के दौरान एक छात्रा के पिता के साथ कथित मारपीट का मामला अब फिर चर्चा में है। मामले में आरोपी बताए जा रहे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज (Swatantra Bhardwaj) को दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थकों के प्रदर्शन और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग के कुछ घंटे बाद हुई। Parliament Street Police Station के बाहर प्रदर्शन स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर CJP के प्रतिनिधि और समर्थक शुक्रवार को दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से मामले में जल्द कार्रवाई करने और आरोपी को गिरफ्तार करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुछ राजनीतिक नेता भी वहां पहुंचे। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बातचीत हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने मामले में कार्रवाई का भरोसा दिया और इसके बाद भारद्वाज को ट्रेस करने के लिए टीमें सक्रिय की गईं। क्या है पूरा मामला? यह विवाद जंतर-मंतर पर CJP के एक प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ कथित तौर पर मारपीट हुई थी। इस मामले में स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार के नाम FIR में शामिल किए गए थे। मामला उस समय और गरमा गया, जब स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े एक Podcast Video की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वीडियो में भारद्वाज ने घटना को लेकर आपत्तिजनक दावे किए थे। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई। Viral Video ने बढ़ाया विवाद वायरल वीडियो सामने आने के बाद CJP ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। संगठन का कहना था कि वीडियो में कथित तौर पर घटना को लेकर किए गए दावों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। वहीं दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही थी और मेडिकल रिपोर्ट में चोट को लेकर सोशल मीडिया पर किए गए कुछ दावों की पुष्टि नहीं हुई थी। Bulandshahr में पुलिस ने पकड़ा पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की टीमों ने स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में ट्रेस किया। रिपोर्टों में बताया गया कि पुलिस की कार्रवाई से पहले वह वहां से निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बाद में उन्हें हिरासत में ले लिया गया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थक स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इससे मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर चल रहा विवाद भी फिलहाल एक नए चरण में पहुंच गया है। FIR में SC/ST Act की धाराएं जोड़ने की जानकारी प्रदर्शन के बाद पुलिस की ओर से मामले में SC/ST Act से संबंधित धाराएं जोड़ने की बात सामने आई। पीड़ित की दोबारा मेडिकल जांच कराए जाने की जानकारी भी रिपोर्टों में दी गई है। हालांकि, मामले में अंतिम कानूनी स्थिति जांच और आगे की पुलिस कार्रवाई पर निर्भर करेगी। आरोपों की पुष्टि अदालत की प्रक्रिया में ही होगी। पुलिस के सामने अब आगे की जांच बड़ी चुनौती स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिए जाने के बाद अब पुलिस के सामने वायरल वीडियो, FIR में दर्ज आरोपों, मेडिकल रिपोर्ट और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच अहम होगी। फिलहाल इस मामले ने CJP Protest, Delhi Police और Social Media Influencer को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस को भी तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस की ओर से क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Saharanpur

UP Bulldozer Action: Saharanpur कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर चला बुलडोजर, मायावती-इकरा हसन ने उठाए सवाल

Saharanpur उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अदालत के आदेश के बाद प्रशासन ने शनिवार को मस्जिद के खिलाफ Bulldozer Action शुरू कर दिया। कार्रवाई की खबर फैलते ही इलाके में हलचल बढ़ गई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया। कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई। किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई अदालत के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन का एक्शन कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को लेकर जमीन के स्वामित्व और निर्माण की वैधता पर काफी समय से विवाद चल रहा था। प्रशासन का दावा है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है और निर्माण को अवैध माना गया है। मामला पहले सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पहुंचा। जुलाई में अदालत ने मस्जिद को हटाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही संबंधित पक्ष पर करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति लगाए जाने की बात भी सामने आई थी। इस फैसले को जिला अदालत में चुनौती दी गई थी। 4 सितंबर को जिला जज की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। इकरा हसन को सहारनपुर जाने से रोका मस्जिद पर कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन सहारनपुर जाने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इकरा हसन और पुलिस अधिकारियों के बीच इस दौरान तीखी बहस भी हुई। इसका वीडियो सामने आने के बाद मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। बाद में उनके आवास के बाहर पुलिस बल तैनात किए जाने की भी खबर सामने आई। इकरा हसन ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोका जा रहा है। उनका कहना था कि वह मौके पर जाकर हालात देखना चाहती थीं। मायावती ने सरकार से कार्रवाई रोकने को कहा सहारनपुर मस्जिद विवाद पर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सरकार से कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की और मामले को संवेदनशील बताते हुए सावधानी से कदम उठाने की बात कही। मायावती ने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह का तनाव बढ़ने से रोकना जरूरी है। उन्होंने लोगों से भी शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की। इमरान मसूद बोले- हाईकोर्ट जाएंगे सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया है। उनका कहना है कि मस्जिद की जमीन और उससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर उनका पक्ष अलग है। जिला अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद मसूद ने मामले को हाईकोर्ट ले जाने की बात कही है। उनका कहना है कि आगे की कानूनी लड़ाई अदालत में लड़ी जाएगी और उपलब्ध दस्तावेजों को वहां रखा जाएगा। प्रशासन और विपक्ष के दावे अलग-अलग पूरे विवाद में प्रशासन और मस्जिद पक्ष के दावे अलग हैं। प्रशासन जहां निर्माण को सरकारी जमीन पर हुआ अवैध निर्माण बता रहा है, वहीं मस्जिद से जुड़े लोग और कुछ विपक्षी नेता इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं। यही वजह है कि मामला सिर्फ बुलडोजर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। अब इसकी गूंज राजनीतिक मंच से लेकर अदालत तक सुनाई दे रही है। आगे क्या होगा? सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर हुई कार्रवाई के बाद अब सबकी नजर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर है। इमरान मसूद की ओर से हाईकोर्ट जाने की बात कही गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में अदालत में इस मामले को लेकर क्या रुख सामने आता है, यह महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई के बाद सहारनपुर में राजनीतिक माहौल गर्म है। एक तरफ अधिकारी कोर्ट के आदेश के पालन की बात कह रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Nepal

Nepal Flood: दार्चुला में Landslide का खतरा बढ़ा, Trishuli से भारतीय परिवार का Rescue; हजारों Missing

नेपाल (Nepal) में बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बाद हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। नदियों का जलस्तर बढ़ने, मलबा आने और पहाड़ी इलाकों में Landslide के खतरे ने राहत और बचाव अभियान को और मुश्किल बना दिया है। सबसे चिंता की बात यह है कि हादसे के कई दिन बाद भी हजारों लोगों का पता नहीं चल पाया है। हालांकि, इसी बीच Trishuli क्षेत्र से दो लोगों को नौ दिन बाद जिंदा निकालना राहत और उम्मीद की बड़ी खबर बनकर सामने आया है। दार्चुला में Landslide का खतरा, निचले इलाकों पर नजर नेपाल के पहाड़ी इलाकों में लगातार भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। दार्चुला समेत संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से निचले इलाकों को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। पहाड़ों से मलबा आने और नदियों में अचानक पानी बढ़ने की आशंका के बीच लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। बाढ़ से कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है। Trishuli से भारतीय नागरिकों का Rescue इस बीच त्रिशूली इलाके से तीन भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाले जाने की खबर सामने आई है। इनमें एक परिवार शामिल है। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, रेस्क्यू किए गए लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया और उनके भारत लौटने की प्रक्रिया में मदद की जा रही है। भारत सरकार नेपाल में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए लगातार नेपाली प्रशासन के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 166 भारतीय नागरिकों को Rescue किया गया है, जबकि 275 भारतीयों के लापता होने की जानकारी दी गई है। भारत ने राहत अभियान के लिए करीब 95 टन राहत सामग्री भी भेजी है। 9 दिन बाद Trishuli Tunnel से जिंदा निकले 2 मजदूर नेपाल में चल रहे Rescue Operation की सबसे बड़ी खबर Trishuli-3A Hydropower Project से आई। यहां सुरंग में फंसे संजय साह और कबीर महारजन को करीब नौ दिन बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया। दोनों को सुरंग के अंदर काफी गहराई से निकाला गया। बचाव दल ने पहले अंदर से आवाजें सुनीं और फिर संपर्क स्थापित होने के बाद ऑपरेशन तेज किया। आखिरकार दोनों को बाहर निकाल लिया गया। इस घटना ने उन परिवारों में भी उम्मीद जगाई है जिनके अपने लोग अभी तक लापता हैं। राहत दल अब अन्य संभावित Survivors तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं। 1300 के करीब मौतें, 5 हजार से ज्यादा लोग Missing इस प्राकृतिक आपदा का असर कितना बड़ा है, इसका अंदाजा मृतकों और लापता लोगों की संख्या से लगाया जा सकता है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार 1,294 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी और 5,053 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़ों में बदलाव देखने को मिल रहा है। कई इलाकों में घरों, सड़कों, पुलों और Hydropower Projects को भारी नुकसान पहुंचा है। बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं और राहत शिविरों में रह रहे हैं। Rescue Operation अभी भी जारी Trishuli Tunnel से दो लोगों को जिंदा निकाले जाने के बाद Rescue Teams का हौसला बढ़ा है। नेपाल सेना, पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञ लगातार प्रभावित इलाकों में Search Operation चला रहे हैं। Hydropower Projects के आसपास अभी भी बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका है। मलबा, पानी और क्षतिग्रस्त सुरंगें बचाव अभियान में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। इसके बावजूद टीमें लगातार नए रास्ते तलाश रही हैं। भारत ने नेपाल की मदद बढ़ाई नेपाल की इस मुश्किल घड़ी में भारत ने भी राहत और बचाव अभियान में सहयोग बढ़ाया है। भारतीय विशेषज्ञों और राहत सामग्री को नेपाल भेजा गया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत की टीमें Rescue, Medical और अन्य जरूरी सेवाओं में सहायता कर रही हैं। फिलहाल नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और पहाड़ी इलाकों में नए Landslide और Flood के खतरे से निपटना है। Trishuli Tunnel से नौ दिन बाद दो लोगों का जिंदा निकलना इस त्रासदी के बीच उम्मीद की एक किरण जरूर लेकर आया है। अब Rescue Teams की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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