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सागर में ऑनलाइन बेटिंग के बड़े नेटवर्क का खुलासा, भोपाल से मुख्य आरोपी गिरफ्तार; 2.69 करोड़ कैश जब्त

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सागर पुलिस ने ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस ने भोपाल से मुख्य आरोपी ऋषभ पटेल को गिरफ्तार किया है। उसके घर की तलाशी में 2 करोड़ 69 लाख 42 हजार 700 रुपए नकद और करीब 30 लाख रुपए के सोने के जेवर मिले। पुलिस ने नोट गिनने की मशीन और कई दस्तावेज भी जब्त किए हैं।

पुलिस के मुताबिक, यह नेटवर्क टेलीग्राम चैनल और वेबसाइट के जरिए क्रिकेट समेत दूसरे मैचों पर ऑनलाइन बेटिंग कराता था। बेटिंग से आने वाली रकम को अलग-अलग बैंक खातों में घुमाने और कैश कराने के लिए करीब 30 फर्जी फर्में बनाई गई थीं। शुरुआती जांच में इन फर्मों से जुड़े खातों में 5.50 करोड़ रुपए से ज्यादा का लेन-देन सामने आया है।

पति-पत्नी के विवाद और पंचर बनाने वाले की शिकायत से खुला नेटवर्क

इस पूरे मामले की शुरुआत एक घरेलू विवाद और बाद में सामने आई एक बैंक खाता शिकायत से हुई।

9 अगस्त को एक महिला ने थाने पहुंचकर अपने पति पर प्रताड़ना का आरोप लगाया था। उसने पुलिस को बताया कि पति के पास काफी रुपए हैं और उसके कई लड़कियों से संबंध हैं। पुलिस ने पति को थाने बुलाकर पूछताछ की।

इसके कुछ दिन बाद 13 अगस्त को मकरोनिया थाने में पंचर बनाने वाले रोहित पटेल ने शिकायत की। उसने बताया कि उसके दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर उसके नाम पर ग्लैमर इंटरप्राइजेस नाम से फर्म बनाई गई है। इसी फर्म के नाम से फेडरल बैंक की मकरोनिया शाखा में करंट अकाउंट भी खोला गया था।

पुलिस ने खाते की जांच की तो फरवरी 2026 से अब तक करीब 90 लाख रुपए का लेन-देन सामने आया। इसके बाद पुलिस ने फर्म और उससे जुड़े बैंक खातों की जांच शुरू की।

5 से 7 हजार रुपए देकर लिए जाते थे दस्तावेज

जांच के दौरान पुलिस ने धर्मेंद्र नाहर और सोनू दांगी को गिरफ्तार किया। पूछताछ में फर्जी फर्मों और बैंक खातों के नेटवर्क की जानकारी सामने आई।

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने बेरोजगार और जरूरतमंद लोगों को 5 से 7 हजार रुपए कमीशन देने का लालच देकर उनके दस्तावेज लिए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर अलग-अलग नामों से फर्म बनाई गईं और बैंक में करंट अकाउंट खुलवाए गए।

इन खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन बेटिंग से आने वाली रकम के लेन-देन और उसे कैश कराने के लिए किया जाता था। पुलिस को आशंका है कि सागर और बुंदेलखंड के दूसरे इलाकों में भी कई लोगों के दस्तावेज इस नेटवर्क में इस्तेमाल किए गए हैं।

टेलीग्राम चैनल से 100 से 150 लोगों को खिलाते थे बेटिंग

पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी ऋषभ पटेल ने 2019-20 में भोपाल के एक कॉलेज से बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई के दौरान ऑनलाइन गेमिंग शुरू की थी। बाद में उसने ऑनलाइन बेटिंग के कारोबार में कदम रखा।

शुरुआत में वह ऑनलाइन सट्‌टे की टिप देता था। इसके बाद उसने दो ऑनलाइन बेटिंग वेबसाइट के एडमिन राइट्स लिए और टेलीग्राम चैनल बनाया। पुलिस के मुताबिक, इस चैनल के जरिए एक समय में 100 से 150 लोगों को ऑनलाइन बेटिंग कराई जाती थी।

आरोपी मुख्य रूप से क्रिकेट मैचों और आईपीएल पर बेटिंग कराते थे। पुलिस के अनुसार, अमित विश्वकर्मा वेबसाइट के जरिए इस नेटवर्क में उसकी मदद करता था।

बैंक से ऑनलाइन रकम, बदले में लेते थे कैश

पुलिस की जांच में सामने आया कि बेटिंग से आने वाली रकम को कैश कराने के लिए भी अलग नेटवर्क बनाया गया था। अंडा कारोबारियों के बैंक खातों में ऑनलाइन रकम ट्रांसफर की जाती थी और बदले में उनसे नकद पैसा लिया जाता था।

पुलिस को इस रकम को रियल एस्टेट में लगाने के संकेत भी मिले हैं। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क से कितनी रकम अलग-अलग कारोबारों में लगाई गई।

30 फर्जी फर्मों का सामने आया नेटवर्क

जांच में करीब 30 फर्जी फर्मों के दस्तावेज मिले हैं। इनमें बिल्डिंग मटेरियल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ट्रेडिंग, टूर एंड ट्रैवल्स और खाद्य कारोबार जैसे अलग-अलग कामों के नाम पर फर्म बनाई गई थीं।

इन फर्मों से जुड़े बैंक खातों की शुरुआती जांच में 5.50 करोड़ रुपए से ज्यादा का ट्रांजैक्शन सामने आया है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इन फर्मों के रजिस्ट्रेशन और बैंक खाते खुलवाने में दस्तावेजों का सत्यापन किस तरह किया गया।

घर में मिले नोटों से भरे बैग

सागर पुलिस ने भोपाल पुलिस की मदद से ऋषभ पटेल के घर पर दबिश दी। तलाशी के दौरान एक कमरे में नोटों से भरे कई बैग मिले। वहीं नोट गिनने की मशीन भी रखी हुई थी।

पुलिस ने मौके से 2 करोड़ 69 लाख 42 हजार 700 रुपए नकद और करीब 30 लाख रुपए के सोने के जेवर जब्त किए। पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में जेवर ऑनलाइन बेटिंग से हुई कमाई से खरीदे जाने की बात सामने आई है।

6 आरोपी गिरफ्तार, दो की तलाश जारी

पुलिस ने अब तक धर्मेंद्र नाहर, सोनू दांगी, अमित विश्वकर्मा, विपिन गिरि, स्वर्णेंद्र पांडे और ऋषभ पटेल को गिरफ्तार किया है। वहीं सरमन उर्फ शुभम अहिरवार और ऋषिकेशव चौहान की तलाश की जा रही है।

एसपी अनुराग सुजानिया के मुताबिक, अमित विश्वकर्मा और ऋषभ पटेल को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से दोनों को 8 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। जांच में छत्तीसगढ़ में भी नेटवर्क से जुड़े कुछ लोगों के बारे में जानकारी मिली है।

पुलिस अब फर्जी फर्मों, बैंक खातों और दस्तावेजों की जांच के साथ इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और पैसों के पूरे लेन-देन का पता लगाने में जुटी है।

Muskan Negi

muskannegi1302@gmail.com

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Pellet Gun

Pellet Gun Case: राहुल गांधी का धरना रंग लाया, पुलिस ने दर्ज की FIR

पैलेट गन (Pellet Gun) से घायल छात्र के मामले में शुक्रवार को दिल्ली की सियासत गरमा गई। कांग्रेस नेता राहुल गांधी पीड़ित साहिल लोचब को साथ लेकर संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचे और FIR दर्ज करने की मांग की। पुलिस से बातचीत के बाद भी जब कार्रवाई को लेकर स्थिति साफ नहीं हुई तो राहुल गांधी वहीं धरने पर बैठ गए। कुछ देर बाद मामले में FIR दर्ज होने की खबर सामने आई। पीड़ित को साथ लेकर थाने पहुंचे राहुल गांधी राहुल गांधी शुक्रवार को साहिल लोचब के साथ संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचे। साहिल ने आरोप लगाया है कि 20 जुलाई को दिल्ली में हुए प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल से उन्हें चोट लगी थी। पीड़ित की शिकायत पर FIR दर्ज कराने की मांग को लेकर राहुल गांधी ने पुलिस अधिकारियों से बातचीत की। उनका कहना था कि अगर किसी व्यक्ति के घायल होने की शिकायत सामने आई है तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। FIR की मांग पर धरने पर बैठ गए राहुल पुलिस स्टेशन में बातचीत के बाद राहुल गांधी ने FIR दर्ज करने की मांग दोहराई। कार्रवाई में देरी को लेकर उन्होंने वहीं धरना शुरू कर दिया। इस दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा समेत पार्टी के कई नेता भी मौके पर पहुंचे। राहुल गांधी ने कहा कि वह पीड़ित को न्याय दिलाने और मामले में कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित कराने के लिए वहां बैठे हैं। उनके धरने के बाद पुलिस स्टेशन के आसपास सुरक्षा भी बढ़ा दी गई। आखिर क्या है Pellet Gun Case? यह मामला 20 जुलाई को दिल्ली में हुए एक छात्र प्रदर्शन से जुड़ा बताया जा रहा है। साहिल लोचब ने शिकायत में कथित पैलेट गन से घायल होने की बात कही है। घटना को लेकर पुलिस की भूमिका और बल प्रयोग के आरोपों पर भी सवाल उठाए गए हैं। दिल्ली पुलिस की ओर से मामले से जुड़े आरोपों की जांच का पक्ष सामने आया है। वहीं सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुलिस और अर्धसैनिक बलों के कथित अत्यधिक बल प्रयोग से जुड़े आरोपों की जांच के लिए हाई-पावर्ड एक्सपर्ट कमेटी गठित किए जाने की बात भी सामने आई है। धरने के बीच सामने आई FIR की जानकारी राहुल गांधी के धरने के बीच शाम को खबर सामने आई कि दिल्ली पुलिस ने साहिल लोचब को लगी पैलेट चोटों के मामले में FIR दर्ज कर ली है। इसके बाद राहुल गांधी की मांग पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर चर्चा तेज हो गई। हालांकि, FIR दर्ज होना जांच की शुरुआत है। अब जांच में यह सामने आना बाकी है कि घटना वास्तव में कैसे हुई, पैलेट गन का इस्तेमाल किस परिस्थिति में हुआ और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है। BJP ने राहुल गांधी पर साधा निशाना राहुल गांधी के धरने को लेकर BJP ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी पुलिस स्टेशन पर धरना देकर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। BJP का कहना है कि मामले से जुड़े आरोपों की जांच पहले से अलग स्तर पर चल रही है। वहीं कांग्रेस का कहना है कि घायल छात्र की शिकायत पर FIR दर्ज होना उसका कानूनी अधिकार है और राहुल गांधी उसी मांग को लेकर पीड़ित के साथ खड़े हुए। अब जांच पर टिकी नजर पैलेट गन मामले में FIR दर्ज होने के बाद अब सबसे ज्यादा नजर पुलिस जांच पर रहेगी। घटना से जुड़े वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और मेडिकल रिपोर्ट जैसे साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय हो सकती है। राहुल गांधी के धरने ने इस मामले को राष्ट्रीय राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। फिलहाल FIR दर्ज होने के बाद अगला बड़ा सवाल यही है कि जांच में क्या सामने आता है और जिम्मेदारी किस पर तय होती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

बिलासपुर में मकान के बेसमेंट से टनों कृषि दवाइयां जब्त, बिना लाइसेंस भंडारण का आरोप

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में कृषि विभाग ने एक मकान के बेसमेंट से बड़ी मात्रा में कीटनाशक और कृषि में इस्तेमाल होने वाली दवाइयां जब्त की हैं। विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की तो कृषि दवाओं और खाद के भंडारण से जुड़े जरूरी लाइसेंस और दस्तावेज नहीं मिले। अधिकारियों के मुताबिक, बरामद सामग्री की मात्रा काफी ज्यादा है और इसकी तौल व लिस्टिंग का काम किया जा रहा है। आशंका है कि कृषि दवाइयां उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से मंगाई गई थीं और बिलासपुर में बिक्री के लिए रखी गई थीं। लोखंडी के मकान में मिला स्टॉक कृषि विभाग को सूचना मिली थी कि लोखंडी इलाके में एक मकान के बेसमेंट में बड़ी मात्रा में कीटनाशक और कृषि दवाइयां रखी गई हैं। सूचना के बाद विभाग की टीम मौके पर पहुंची और बेसमेंट की जांच शुरू की। जांच के दौरान बड़ी संख्या में कृषि दवाइयां और अन्य सामग्री मिली। विभाग अब बरामद स्टॉक से जुड़े दस्तावेज और लाइसेंस की जांच कर रहा है। एक्सपायर या नकली दवाओं की भी आशंका कार्रवाई के दौरान मिली कुछ कृषि दवाओं के एक्सपायर या नकली होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अधिकारियों के मुताबिक, दवाओं के सैंपल की जांच और रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इनमें से कोई दवा नकली या निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप नहीं है। अगर ऐसा पाया जाता है तो मामले में आगे कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। बिना लाइसेंस भंडारण की जांच कृषि दवाओं और कीटनाशकों के भंडारण और बिक्री के लिए निर्धारित नियम और लाइसेंस जरूरी होते हैं। बेसमेंट में इतनी बड़ी मात्रा में कृषि सामग्री मिलने के बाद विभाग ने संबंधित दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि दवाइयां कहां से लाई गईं, किसके नाम पर थीं और इन्हें रखने या बेचने के लिए जरूरी अनुमति ली गई थी या नहीं। कार्रवाई के दौरान मकान मालिक नहीं मिला जिस मकान के बेसमेंट से कृषि दवाइयां बरामद हुई हैं, वह गाजियाबाद निवासी आशु सिंह पाल का बताया जा रहा है। कार्रवाई के दौरान वह मौके पर मौजूद नहीं था। फिलहाल कृषि विभाग ने बरामद सामग्री को जब्त कर लिया है। स्टॉक की गिनती और तौल के बाद पूरी सूची तैयार की जा रही है। दस्तावेजों और दवाओं की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। एसएसपी ने पुलिस टीम को भेजा मामले की जानकारी मिलने के बाद बिलासपुर एसएसपी रजनेश सिंह ने भी इसे गंभीरता से लिया। उन्होंने सकरी थाना पुलिस की टीम को मौके पर भेजा। कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, बरामद सामग्री की मात्रा टनों में है। फिलहाल उसकी गिनती, तौल और लिस्टिंग की प्रक्रिया चल रही है। कार्रवाई के दौरान संयुक्त संचालक कृषि राजेश राठौर, सहायक संचालक कृषि अनिल शुक्ला, सहायक संचालक शशांक शिंदे समेत कृषि विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

गुना में 3.74 करोड़ की वित्तीय गड़बड़ी का मामला, DPM भोपाल अटैच

गुना में मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन में सामने आई 3.74 करोड़ रुपए की वित्तीय गड़बड़ी के मामले में अब जिला परियोजना प्रबंधक (DPM) पर भी कार्रवाई हुई है। राज्य आजीविका मिशन के CEO ने DPM सोनू सुशीला यादव को भोपाल अटैच कर दिया है। जारी आदेश के मुताबिक, गुना में चल रही जांच पूरी होने तक DPM को जिला मुख्यालय से हटाया गया है। मामले में वित्तीय रिकॉर्ड, पोर्टल पर दर्ज जानकारी और बैंक खातों की जांच की जा रही है। LOKOS पोर्टल के आंकड़ों से सामने आई गड़बड़ी मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत जिले में स्व-सहायता समूह और उनके सामुदायिक संगठन बनाए गए हैं। इन समूहों से जुड़े वित्तीय लेन-देन की जानकारी भारत सरकार के LOKOS पोर्टल पर दर्ज की जाती है। पोर्टल पर समूहों को मिली राशि, भुगतान की तारीख और अन्य वित्तीय जानकारी का रिकॉर्ड रहता है। इसी रिकॉर्ड का मिशन की वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (FDM) से मिलान किया गया था। 90.25 लाख रुपए की राशि पर उठे सवाल मई में FDM और LOKOS पोर्टल के आंकड़ों के मिलान के दौरान प्रतिज्ञा सीएलएफ, विकासखंड गुना से संबंधित करीब 90.25 लाख रुपए की राशि में अंतर सामने आया। FDM पोर्टल पर यह राशि दिखाई दे रही थी, लेकिन बैंक रिकॉर्ड और बैंक स्टेटमेंट की जांच में इतनी राशि की वास्तविक प्राप्ति नहीं मिली। इसके बाद विभागीय स्तर पर मामले की जांच शुरू की गई। जिला और राज्य स्तर पर जांच जारी मामला सामने आने के बाद जिला पंचायत CEO ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की। टीम को वित्तीय गड़बड़ी की जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए। इसके बाद मामले की शिकायत राज्य स्तर पर भी की गई, जिसके आधार पर राज्य की टीम ने भी जांच शुरू कर दी है। फिलहाल वित्तीय अभिलेखों, पोर्टल पर की गई प्रविष्टियों और संबंधित बैंक खातों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने तक DPM भोपाल अटैच मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य आजीविका मिशन के CEO ने DPM सोनू सुशीला यादव को जांच पूरी होने तक भोपाल अटैच कर दिया है। अब जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि पोर्टल पर दर्ज राशि और बैंक खातों में वास्तविक लेन-देन के बीच अंतर कैसे आया और इसमें किस स्तर पर लापरवाही या वित्तीय अनियमितता हुई। जांच पूरी होने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।

मध्यप्रदेश की जेलों में अब बंदियों की होगी साइको-सोशल काउंसलिंग, भोपाल सेंट्रल जेल में खुलेगा पहला सेंटर

मध्यप्रदेश की जेलों में बंद कैदियों के मानसिक स्वास्थ्य और व्यवहार में सुधार के लिए नई पहल शुरू की जा रही है। अब बंदियों को केवल सजा काटने तक सीमित रखने के बजाय उनके मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन और सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए जेल विभाग की ओर से भोपाल केंद्रीय जेल में पहला साइको-सोशल काउंसलिंग सेंटर स्थापित किया जाएगा। इसके परिणामों के आधार पर इस व्यवस्था को प्रदेश की अन्य जेलों में भी चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। जेल विभाग और RRU के बीच हुआ MOU इस पहल के लिए मध्यप्रदेश जेल विभाग और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (RRU), गांधीनगर, गुजरात के बीच साइको-सोशल काउंसलिंग के क्षेत्र में सहयोग के लिए एमओयू हुआ है। जेल महानिदेशक डॉ. वरुण कपूर की पहल पर जेल मुख्यालय में हुए एमओयू कार्यक्रम में विशेष महानिदेशक जी. अखेतो सेमा, उप महानिरीक्षक (कल्याण) एमआर पटेल सहित जेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। RRU की ओर से डॉ. नूरिन चौधरी, डॉ. गीतेश कुमार सिंह, प्रदीप रूसिया, तनु पी चंदेल और शुभम जैन सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। 28 जेल अधिकारी-कर्मचारियों को दिया गया प्रशिक्षण जेल महानिदेशक डॉ. वरुण कपूर ने बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर RRU की साइको-सोशल काउंसलिंग योजना का अध्ययन किया। इसके बाद विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों को भोपाल बुलाकर 6 से 12 जुलाई तक सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान प्रदेश की अलग-अलग जेलों के 28 अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया। इनमें मेल नर्स, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, मुख्य प्रहरी और प्रहरी शामिल रहे। प्रशिक्षण में मानसिक तनाव से गुजर रहे बंदियों की पहचान करने और उनकी काउंसलिंग करने के तरीके बताए गए। प्रशिक्षण के बाद बंदियों की काउंसलिंग शुरू प्रशिक्षण प्राप्त अधिकारियों और कर्मचारियों ने संबंधित जेलों में जाकर तनावग्रस्त बंदियों की काउंसलिंग की। जेल महानिदेशक ने काउंसलिंग से मिले फीडबैक और परिणामों की समीक्षा की। जेल विभाग के अनुसार, शुरुआती स्तर पर बंदियों के मानसिक सुधार की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आए। इसके बाद इस व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए RRU के साथ एमओयू की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। गुजरात में मास्टर ट्रेनर तैयार होंगे एमओयू के तहत जेल विभाग के चयनित अधिकारी और कर्मचारी राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, गांधीनगर जाकर मास्टर ट्रेनर कोर्स करेंगे। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद ये अधिकारी जेल विभाग में मास्टर ट्रेनर के रूप में काम करेंगे और प्रदेश की अन्य जेलों के अधिकारियों-कर्मचारियों को साइको-सोशल काउंसलिंग का प्रशिक्षण देंगे। इससे जेलों में मानसिक तनाव से जूझ रहे बंदियों की पहचान, उनकी जरूरतों को समझने और उन्हें जरूरी मनो-सामाजिक सहयोग देने के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार किया जा सकेगा। भोपाल केंद्रीय जेल से होगी शुरुआत जेल विभाग की इस योजना का पहला चरण केंद्रीय जेल भोपाल से शुरू होगा। यहां साइको-सोशल काउंसलिंग सेंटर स्थापित किया जाएगा। इसके अनुभव और परिणामों के आधार पर सेंटर और काउंसलिंग व्यवस्था को प्रदेश की अन्य जेलों में भी चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। जेल विभाग का उद्देश्य बंदियों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने, भावनात्मक संतुलन कायम करने और सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन की दिशा में सहयोग देना है, ताकि जेल से बाहर आने के बाद वे बेहतर जीवन की ओर आगे बढ़ सकें।

बड़वानी में बीईओ को हटाने की मांग पर प्रदर्शन, सेंधवा विधायक को डेढ़ घंटे कार्यालय में रोका

बड़वानी जिले के निवाली में विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) मनोज मराठे को पद से हटाने और निलंबित करने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच सेंधवा विधायक मोंटू सोलंकी को पुलिस ने उनके कार्यालय में करीब डेढ़ घंटे तक रोककर रखा। विधायक अपने समर्थकों के साथ निवाली में चल रहे प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे थे। प्रशासनिक अधिकारियों से चर्चा और कार्रवाई का लिखित आदेश नहीं मिलने के बाद वे 300 से अधिक समर्थकों के साथ प्रदर्शन में शामिल होने के लिए रवाना हो गए। बीईओ को निलंबित करने की मांग जयस की ओर से बीईओ मनोज मराठे को हटाने की मांग को लेकर पिछले चार दिनों से निवाली में धरना दिया जा रहा है। बताया गया है कि बीईओ के खिलाफ सेंधवा ग्रामीण थाने में आपराधिक प्रकरण दर्ज है और उन पर एक शिक्षक को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है। इसी मामले को लेकर विधायक मोंटू सोलंकी भी आंदोलन में शामिल होने जा रहे थे। उन्होंने बीईओ के वित्तीय अधिकार तत्काल वापस लेने और उन्हें निलंबित करने की मांग की। अधिकारियों ने दिया कार्रवाई का आश्वासन विधायक को कार्यालय में रोके जाने के दौरान सेंधवा एसडीओपी अजय वाघमारे ने उनसे चर्चा की। पुलिस और प्रशासन की ओर से कार्रवाई का मौखिक आश्वासन दिया गया, लेकिन विधायक को निलंबन से संबंधित कोई लिखित आदेश नहीं दिया गया। करीब डेढ़ घंटे तक इंतजार करने के बाद विधायक अपने समर्थकों के साथ निवाली के लिए रवाना हो गए। विधायक ने प्रशासन पर लगाए संरक्षण के आरोप विधायक मोंटू सोलंकी ने आरोप लगाया कि आपराधिक मामले में आरोपी अधिकारी को शासन और प्रशासन का संरक्षण मिल रहा है। उन्होंने कहा कि बीईओ के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। विधायक ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की और आंदोलन को दबाने की कोशिश की गई तो प्रदर्शन को और उग्र किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

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