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पश्चिमी रिंग रोड मुआवजे को लेकर किसानों का प्रदर्शन, भोपाल कूच रोका; वाटर कैनन और आंसू गैस के इस्तेमाल का आरोप

Indore: पश्चिमी रिंग रोड परियोजना के लिए अधिग्रहित की जा रही जमीन के चार गुना मुआवजे की मांग को लेकर करणी सेना परिवार और किसानों का आंदोलन सोमवार को तेज हो गया। ट्रैक्टरों के साथ भोपाल कूच के लिए निकले किसानों को शिप्रा चौराहे पर पुलिस और प्रशासन ने रोक दिया, जिसके बाद मौके पर तनाव की स्थिति बन गई। किसानों का आरोप है कि उन्हें आगे बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। प्रदर्शनकारियों के अनुसार इस कार्रवाई में सात किसान घायल हुए। इसके बाद किसान बरलाई जागीर में धरने पर बैठ गए और देर रात तक शिप्रा-सांवेर मार्ग पर डटे रहे। आंदोलन के दौरान किसानों ने सड़क किनारे भोजन बनाया और सरकार को सद्बुद्धि देने की कामना के साथ सुंदरकांड का पाठ भी किया। करणी सेना परिवार के इंदौर जिलाध्यक्ष ऋषिराज सिंह सिसोदिया ने कहा कि किसान पिछले तीन वर्षों से अपनी मांगों को लेकर प्रशासन को करीब 50 ज्ञापन सौंप चुके हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला। उनका कहना है कि किसान शांतिपूर्ण तरीके से मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुंचाने भोपाल जा रहे थे, लेकिन उन्हें बलपूर्वक रोक दिया गया। सिसोदिया ने दावा किया कि ग्रेटर रिंग रोड परियोजना से 39 गांवों के 991 किसान प्रभावित हो रहे हैं और लगभग 4,442 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण के दायरे में है। उनका आरोप है कि जहां जमीन की बाजार कीमत एक करोड़ से साढ़े तीन करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक है, वहीं किसानों को केवल 18 लाख से 42 लाख रुपये तक का मुआवजा दिया जा रहा है। करणी सेना के सदस्य रवींद्र कन्नौजिया ने भी आरोप लगाया कि प्रशासन ने डंपर लगाकर रास्ता बंद किया और वाटर कैनन व आंसू गैस का इस्तेमाल किया। उन्होंने बताया कि आंसू गैस का एक गोला उनके पैर के पास फटा, जिससे उन्हें चोट आई। वहीं किसान राम मकवाना का दावा है कि कार्रवाई में आठ से दस किसान घायल हुए, जिनमें कुछ को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। किसानों का कहना है कि वे इंदौर-देवास वेस्टर्न रिंग रोड परियोजना का विरोध नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि विकास कार्यों का स्वागत है, लेकिन उपजाऊ और सिंचित जमीन के बदले उचित मुआवजा मिलना चाहिए। किसानों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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रायपुर में सोनम वांगचुक के समर्थन में युवाओं का प्रदर्शन, NSUI के 5 कार्यकर्ता भूख हड़ताल पर बैठे

Raipur: छत्तीसगढ़ में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में युवाओं का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। राजधानी रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर चौक पर NSUI, विभिन्न छात्र संगठनों, सामाजिक संगठनों और युवाओं ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार तथा NEET पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन किया। इस दौरान NSUI के पांच कार्यकर्ता अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए। भूख हड़ताल पर बैठे कार्यकर्ताओं में हेमंत पाल, अनुज शुक्ला, इंडिया घृतलहरे, ड्रिंकल और सोनम शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों ने अपने खून से “धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो” लिखकर विरोध दर्ज कराया और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग की। इधर, धमतरी में सामाजिक कार्यकर्ता मितेश जैन ने गांधी मैदान में एक दिवसीय अनशन किया। वहीं बीजापुर में बस्तर संभाग के आदिवासी युवा छात्र संगठन ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर सोनम वांगचुक की मांगों पर सकारात्मक पहल करने की अपील की। छात्रों ने कहा- यह भविष्य की लड़ाई प्रदर्शन में शामिल युवाओं का कहना है कि वे दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन में शामिल नहीं हो सके, इसलिए रायपुर में रहकर शिक्षा सुधार और सोनम वांगचुक के समर्थन में आवाज उठा रहे हैं। उनका कहना है कि यह आंदोलन केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि देशभर के छात्रों और युवाओं के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने लाखों प्रतियोगी परीक्षार्थियों का भविष्य प्रभावित किया है। उन्होंने परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था लागू करने की मांग की। साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी दोहराई गई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान होना चाहिए। पहले दिन भी जुटे थे सैकड़ों लोग रविवार को आंदोलन के पहले दिन भी रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर चौक पर 500 से अधिक छात्र, युवा और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि एकत्र हुए थे। प्रदर्शन के बाद राज्यपाल के नाम ज्ञापन भी सौंपा गया था। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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इंदौर में भतीजे ने की ताऊ की हत्या, पुलिस को गुमराह करने के लिए रची साजिश, 48 घंटे में गिरफ्तार

इंदौर के राजनगर क्षेत्र में नशे की लत, कर्ज और पारिवारिक विवाद के चलते एक 19 वर्षीय युवक ने अपने ताऊ की चाकू मारकर हत्या कर दी। वारदात के बाद आरोपी ने पुलिस को गुमराह करने के लिए पड़ोसी की दीवार पर खून से सने हाथों के निशान बनाए, ताकि शक किसी और पर जाए। हालांकि पुलिस ने 48 घंटे के भीतर मामले का खुलासा करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। मृतक की पहचान 50 वर्षीय कमल कुमावत के रूप में हुई है। पुलिस पूछताछ में आरोपी चेतन कुमावत ने हत्या की बात स्वीकार कर ली। पूछताछ में कबूला जुर्म पुलिस के अनुसार, आरोपी चेतन कुमावत पहले संयुक्त परिवार में रहता था। बंटवारे के बाद ताऊ और उसके बीच रिश्ते खराब हो गए थे। पूछताछ में उसने बताया कि वह ब्राउन शुगर का आदी है और कर्ज में डूबा हुआ था। उसने ताऊ से पैसे मांगे, लेकिन उन्होंने देने से इनकार कर दिया। डीसीपी सुनील कुमार मेहता के मुताबिक, इसी बात से नाराज होकर चेतन ने रात करीब 2:30 बजे रसोई से चाकू उठाया और सो रहे ताऊ पर ताबड़तोड़ हमला कर उनकी हत्या कर दी। हत्या के बाद रची साजिश हत्या के बाद आरोपी ने अलमारी की चाबी तलाशने के लिए मृतक की जेब खंगाली, लेकिन नकदी नहीं मिली। शक से बचने के लिए उसने जेवरात को हाथ नहीं लगाया। इसके बाद उसने अपने खून से सने हाथ पड़ोसी की दीवार पर लगाए, ताकि ऐसा लगे कि आरोपी पड़ोसी के घर की ओर भागा है। वारदात के बाद उसने खून से सने कपड़े फेंक दिए, हाथ-पैर धोए और सो गया। सुबह किया सामान्य व्यवहार सुबह आरोपी रोज की तरह काम पर चला गया, लेकिन हाथ में चोट होने के कारण वापस घर लौट आया। इसके बाद वह ताऊ के कमरे में पहुंचा और शोर मचाकर परिजनों व पड़ोसियों को बुलाया। लोगों की मदद से कमल कुमावत को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने जांच के दौरान मिले साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर पूरे हत्याकांड का खुलासा करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। मामले में आगे की जांच जारी है। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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UCC

MP Assembly UCC Bill पेश होते ही BJP-Congress आमने-सामने, Rameshwar Sharma ने साधा निशाना

मध्य प्रदेश की राजनीति में Uniform Civil Code (UCC) को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव सरकार ने विधानसभा में UCC विधेयक पेश कर दिया है, जिसके बाद प्रदेश की सियासत गर्म हो गई है। जहां बीजेपी सरकार इसे समान अधिकार और एक कानून की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं कांग्रेस ने इसकी प्रक्रिया और जरूरत को लेकर सवाल उठाए हैं। विधानसभा में UCC Bill पेश होने के दौरान उस समय माहौल और गरमा गया, जब कांग्रेस के एक विधायक काले कपड़े पहनकर सदन पहुंचे। बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने इस पर नाराजगी जताते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि UCC जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर विरोध का तरीका सोचने वाला विषय है। MP Assembly में UCC Bill पेश, सरकार ने बताया ऐतिहासिक कदम मध्य प्रदेश सरकार लंबे समय से Uniform Civil Code लागू करने की तैयारी में जुटी थी। सरकार का कहना है कि UCC का उद्देश्य देश और प्रदेश के सभी नागरिकों के लिए समान कानून व्यवस्था तैयार करना है। प्रस्तावित कानून में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों में एक समान नियम लागू करने की बात कही जा रही है। सरकार का दावा है कि इससे समाज में कानूनी समानता बढ़ेगी और विशेष रूप से महिलाओं के अधिकारों को मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री मोहन यादव पहले भी कह चुके हैं कि हर नागरिक को समान अधिकार मिलना चाहिए और कानून सभी के लिए बराबर होना चाहिए। Black Dress को लेकर विधानसभा में बढ़ा विवाद UCC विधेयक के दौरान कांग्रेस विधायक के काले कपड़ों में पहुंचने को बीजेपी ने विरोध के संकेत के रूप में देखा। बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार का यह कदम जनता के हित और समानता से जुड़ा हुआ है। वहीं कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इतने बड़े कानूनी बदलाव से पहले सरकार को सभी वर्गों, विशेषज्ञों और आम लोगों से व्यापक चर्चा करनी चाहिए। विपक्ष ने UCC को लेकर सरकार से कई सवाल भी पूछे हैं। UCC को लेकर BJP और Congress की अलग-अलग राय बीजेपी का कहना है कि Uniform Civil Code से देश में समान नागरिक व्यवस्था मजबूत होगी और पुराने भेदभाव खत्म होंगे। पार्टी इसे सामाजिक सुधार से जोड़कर देख रही है। दूसरी ओर कांग्रेस का तर्क है कि UCC जैसे संवेदनशील मुद्दे पर जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए। पार्टी ने सरकार से विधेयक के सभी पहलुओं को स्पष्ट करने की मांग की है। MP में UCC पर आगे क्या होगा? अब सभी की नजरें विधानसभा में होने वाली बहस और आगे की प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं। UCC Bill पर चर्चा के बाद ही यह साफ होगा कि इसे किस रूप में आगे बढ़ाया जाएगा। मध्य प्रदेश में UCC अब सिर्फ एक कानून नहीं बल्कि बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। विधानसभा के अंदर और बाहर बीजेपी-कांग्रेस के बीच इस मुद्दे पर बयानबाजी आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।
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Maharashtra Politics: NCP और BJP के संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज

Maharashtra Politics: NCP और BJP के संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (NCP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच संभावित राजनीतिक बदलावों और भविष्य की रणनीति को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। हाल के दिनों में विभिन्न राजनीतिक घटनाक्रमों और नेताओं के बयानों के बाद इस मुद्दे पर चर्चा और तेज हो गई है। हालांकि, अब तक किसी भी नए राजनीतिक गठबंधन या बदलाव को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महाराष्ट्र की राजनीति लगातार बदलते समीकरणों के दौर से गुजर रही है। ऐसे में आने वाले समय में दलों की रणनीति और नेताओं के फैसले राज्य की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं। वहीं, विभिन्न दलों के नेता अपने-अपने स्तर पर राजनीतिक बयान दे रहे हैं। हालांकि, किसी भी संभावित गठबंधन या राजनीतिक फैसले को लेकर अंतिम तस्वीर आधिकारिक घोषणा के बाद ही साफ होगी। फिलहाल महाराष्ट्र की राजनीति में NCP और BJP को लेकर चर्चाएं जारी हैं। राजनीतिक हलकों के साथ-साथ आम लोगों की भी नजर आने वाले दिनों में होने वाले घटनाक्रमों पर बनी हुई है।
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खंडवा में सागर आरतानी बने भाजयुमो जिलाध्यक्ष, शुभम पटेल को मिली जिला महामंत्री की जिम्मेदारी

खंडवा। लंबे समय से लंबित भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के जिला अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर जारी इंतजार आखिरकार खत्म हो गया। भाजपा युवा मोर्चा ने सागर आरतानी को खंडवा जिले का नया जिलाध्यक्ष नियुक्त किया है। वहीं, अध्यक्ष पद के प्रमुख दावेदार रहे शुभम पटेल को संगठन ने जिला महामंत्री की जिम्मेदारी सौंपी है। सागर आरतानी, पूर्व जिलाध्यक्ष अनूप पटेल की जगह अब युवा मोर्चा की कमान संभालेंगे। उनकी नियुक्ति को लेकर पिछले कई दिनों से राजनीतिक और संगठनात्मक स्तर पर चर्चाएं चल रही थीं। सांसद गुट के समर्थन से मिली जिम्मेदारी जानकारी के मुताबिक, सागर आरतानी को सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल का समर्थन प्राप्त था। संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर पहले से नाराज चल रहे सांसद पाटिल ने पार्टी नेतृत्व के समक्ष गुटबाजी की शिकायत भी की थी। उन्होंने स्पष्ट तौर पर सागर आरतानी के नाम का समर्थन करते हुए प्रदेश संगठन को उनका नाम भेजा था। शुभम पटेल को बनाया गया जिला महामंत्री दूसरी ओर, अध्यक्ष पद की दौड़ में एबीवीपी से जुड़े शुभम पटेल भी मजबूत दावेदार माने जा रहे थे। उनके नाम पर संगठन के भीतर व्यापक सहमति बताई जा रही थी। हालांकि, अंतिम निर्णय में सागर आरतानी को जिलाध्यक्ष बनाया गया, जबकि संगठनात्मक संतुलन बनाए रखने के लिए शुभम पटेल को जिला महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई। नियुक्ति को लेकर चली थी लंबी कवायद सागर आरतानी की दावेदारी के दौरान कुछ नेताओं ने उनके कारोबारी होने और संगठनात्मक अनुभव को लेकर सवाल उठाए थे। वहीं, समर्थकों ने तर्क दिया कि भाजपा पहले भी विभिन्न व्यापारिक पृष्ठभूमि के कार्यकर्ताओं को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देती रही है। अंततः प्रदेश नेतृत्व ने दोनों प्रमुख दावेदारों को संगठन में अहम जिम्मेदारी देकर संतुलन साधने की कोशिश की है। अधिक जानकारी और ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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शराब पार्टी के बाद विवाद में युवक की मौत, परिजनों ने थाने के सामने किया चक्काजाम

ग्वालियर। ग्वालियर में दोस्तों के साथ हुई शराब पार्टी के बाद हुए विवाद ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। मामूली पैसों के विवाद में कथित धक्का लगने से घायल हुए 46 वर्षीय युवक की तीन दिन बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद आक्रोशित परिजनों ने शव को थाने के सामने रखकर चक्काजाम किया और आरोपियों पर हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की। माधोगंज थाना क्षेत्र के जामदार का बाड़ा निवासी मनोज सिसोदिया ने 17 जुलाई को अपने दोस्तों प्रवीण और सोनू काका के साथ शराब पार्टी की थी। पार्टी के बाद घर लौटे मनोज को याद आया कि उनके कुछ पैसे वहीं छूट गए हैं। जब वह पैसे लेने वापस पहुंचे तो इसी बात को लेकर तीनों के बीच विवाद हो गया। परिजनों का आरोप है कि कहासुनी के दौरान दोनों आरोपियों ने मनोज को धक्का दे दिया, जिससे वह नाली में गिर पड़े और उनका सिर पत्थर से टकरा गया। गंभीर रूप से घायल मनोज को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां तीन दिन तक उपचार के बाद रविवार को उनकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम के बाद परिजन शव लेकर सीधे माधोगंज थाने पहुंचे और सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन करते हुए पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ हत्या की एफआईआर दर्ज कर तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। जांच के दौरान सामने आए CCTV फुटेज में तीनों दोस्त एक साथ जाते दिखाई दे रहे हैं। फुटेज में विवाद के बाद मनोज को धक्का लगने की घटना भी नजर आती है। वहीं, मनोज के गिरने के बाद दोनों आरोपी उन्हें उठाकर सहारा देते हुए भी दिखाई दे रहे हैं। पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी दिव्या तिवारी ने बताया कि CCTV फुटेज, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच की जा रही है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उसी के अनुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिक जानकारी और ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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Rajouri Flood Rescue: बाढ़ के बीच Indian Army ने बच्चों समेत 11 लोगों की बचाई जान

Rajouri Flood Rescue: बाढ़ के बीच Indian Army ने बच्चों समेत 11 लोगों की बचाई जान

जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में भारी बारिश और बाढ़ जैसी स्थिति के बीच भारतीय सेना ने एक साहसिक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर बच्चों समेत 11 लोगों की जान बचाई। अचानक बढ़े पानी के कारण ये लोग सुरक्षित स्थान तक नहीं पहुंच पा रहे थे, जिसके बाद सेना ने तुरंत राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। जानकारी के अनुसार, तेज बहाव के कारण कई लोग बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में फंस गए थे। सूचना मिलते ही भारतीय सेना की टीम मौके पर पहुंची और हालात का आकलन करने के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद सेना के जवानों ने सभी 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। रेस्क्यू किए गए लोगों में बच्चे भी शामिल थे। सुरक्षित निकाले जाने के बाद सभी को आवश्यक सहायता और प्राथमिक देखभाल उपलब्ध कराई गई। समय रहते सेना की कार्रवाई से एक बड़ा हादसा टल गया। लगातार हो रही बारिश के कारण राजौरी और आसपास के इलाकों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने भी स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि वे नदी-नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों के पास जाने से बचें तथा मौसम विभाग और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। भारतीय सेना के इस त्वरित और साहसिक अभियान की स्थानीय लोगों ने सराहना की है। संकट की घड़ी में सेना की तत्परता ने एक बार फिर कई लोगों की जान सुरक्षित बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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भाजयुमो ने 15 जिलों के जिला अध्यक्षों की घोषणा की, सात जिलों में महामंत्रियों की भी नियुक्ति

भोपाल। भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर ने संगठन विस्तार के तहत मध्यप्रदेश के 15 जिलों में जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की घोषणा की है। इसके साथ ही सात जिलों में जिला महामंत्रियों के नाम भी घोषित किए गए हैं। जिन जिलों में जिला अध्यक्ष पद को लेकर अधिक दावेदार थे, वहां संगठन ने संतुलन बनाते हुए एक दावेदार को अध्यक्ष और दूसरे को महामंत्री की जिम्मेदारी सौंपी है। इन जिलों में बनाए गए जिला अध्यक्ष सात जिलों में जिला महामंत्री भी घोषित भाजयुमो की इस नियुक्ति सूची को आगामी संगठनात्मक गतिविधियों और चुनावी तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नए पदाधिकारियों को संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और युवाओं को पार्टी से जोड़ने की जिम्मेदारी दी गई है। अधिक जानकारी और ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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मौसम अपडेट – कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, जबकि कुछ इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति पर प्रशासन सतर्क।

मौसम अपडेट – कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, जबकि कुछ इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति पर प्रशासन सतर्क।

देश के कई राज्यों में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। लगातार हो रही बारिश को देखते हुए कई इलाकों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, पहाड़ी और नदी किनारे के क्षेत्रों में बाढ़ और भूस्खलन की आशंका को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। लगातार बारिश के कारण कई स्थानों पर जलभराव, नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने और यातायात प्रभावित होने की खबरें सामने आ रही हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में राहत एवं बचाव दलों को तैयार रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें। पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है। साथ ही स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।
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ड्डा का राहुल पर पलटवार: बोले- कांग्रेस बताए अपने राज्यों में पेपर लीक क्यों हुए, सरकार चर्चा को तैयार

पेपर लीक के मुद्दे पर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। केंद्रीय मंत्री और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस पहले यह बताए कि उसके शासन वाले राज्यों में पेपर लीक की घटनाएं क्यों हुईं। नड्डा ने कहा कि केंद्र सरकार इस गंभीर विषय पर संसद में विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहा है, जबकि सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के पक्ष में है। दरअसल, राहुल गांधी ने हाल ही में दावा किया था कि पिछले 10 वर्षों में देशभर में 152 पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं। उन्होंने इसे युवाओं के भविष्य से जुड़ा बड़ा मुद्दा बताते हुए सरकार पर परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित रखने में विफल रहने का आरोप लगाया था। इस पर जवाब देते हुए नड्डा ने कहा कि केवल आंकड़े पेश करने से काम नहीं चलेगा। कांग्रेस को यह भी बताना चाहिए कि जिन राज्यों में उसकी सरकारें रही हैं, वहां भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं क्यों हुईं और उन्हें रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए। उन्होंने दोहराया कि केंद्र सरकार परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है तथा संसद में इस विषय पर सार्थक चर्चा का स्वागत करती है।

अजमेर में मार्बल व्यापारी पर जानलेवा हमला, CCTV में कैद हुई वारदात

राजस्थान के अजमेर जिले के किशनगढ़ में बुधवार सुबह मार्बल व्यापारी पर चार बदमाशों ने लाठी-डंडों से हमला कर दिया। स्कॉर्पियो से आए हमलावरों ने गोदाम में घुसकर व्यापारी के साथ बेरहमी से मारपीट की। पूरी घटना गोदाम में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। गोदाम में घुसकर किया हमला गांधीनगर थाना क्षेत्र स्थित मार्बल एरिया में बुधवार सुबह करीब 8:20 बजे स्कॉर्पियो में सवार चार युवक गोदाम के बाहर पहुंचे। गोदाम में बैठे मार्बल व्यापारी गोवर्धन पर उन्होंने लाठी-डंडों से हमला कर दिया। व्यापारी ने शुरुआत में हमलावरों का मुकाबला करने की कोशिश की, लेकिन चारों बदमाशों ने उसे घेर लिया और जमीन पर गिराकर लगातार लाठियों से पीटा। वारदात के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए। सिर और हाथ में गंभीर चोट हमले में व्यापारी के सिर और हाथ में गंभीर चोटें आईं। घायल अवस्था में उन्हें तत्काल किशनगढ़ के राजकीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। पीड़ित ने दर्ज कराई शिकायत गांधीनगर थाना प्रभारी अनिल शर्मा ने बताया कि पीड़ित व्यापारी की शिकायत पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है। भाई के साथ गोदाम में मौजूद था व्यापारी पीड़ित गोवर्धन ने बताया कि वह बुधवार सुबह अपने भाई के साथ गोदाम में बैठा था। इसी दौरान स्कॉर्पियो में सवार चार युवक पहुंचे और बिना किसी बातचीत के अचानक हमला कर दिया। बदमाशों ने गोदाम के अंदर घुसकर उन्हें नीचे गिराया और लाठियों से बेरहमी से पीटा। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

BPCL को जून तिमाही में ₹3,962 करोड़ का घाटा, कच्चे तेल की महंगाई से बिगड़े नतीजे

भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने वित्त वर्ष 2026-27 की जून तिमाही (Q1) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी को इस तिमाही में ₹3,962 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ है। पिछले साल की समान तिमाही में कंपनी ने ₹6,124 करोड़ का मुनाफा कमाया था, जबकि मार्च तिमाही में ₹3,191 करोड़ का लाभ दर्ज किया गया था। 23% बढ़ा कंपनी का रेवेन्यू घाटे के बावजूद BPCL का परिचालन से राजस्व (Revenue from Operations) बढ़कर ₹1.59 लाख करोड़ पहुंच गया। यह पिछले साल की समान तिमाही के ₹1.29 लाख करोड़ के मुकाबले करीब 23% अधिक है। वहीं, मार्च तिमाही के ₹1.35 लाख करोड़ की तुलना में इसमें करीब 18% की वृद्धि दर्ज की गई। कच्चे तेल की महंगाई बनी घाटे की वजह कंपनी के अनुसार, अमेरिका-ईरान तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। इसके साथ ही शिपिंग (भाड़ा) और इंश्योरेंस लागत भी बढ़ गई। हालांकि, बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में नहीं डाला जा सका, जिससे कंपनी की लाभप्रदता प्रभावित हुई और तिमाही घाटे में बदल गई। शेयर में गिरावट नतीजों के बाद BPCL का शेयर 3% की गिरावट के साथ ₹309 पर बंद हुआ। BPCL के बारे में भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) देश की प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों में शामिल है। इसकी स्थापना 24 जनवरी 1976 को हुई थी। कंपनी मुंबई, कोच्चि, नुमालीगढ़ और बीना में रिफाइनरियों का संचालन करती है, जिनकी कुल रिफाइनिंग क्षमता 40 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष से अधिक है। BPCL पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, लुब्रिकेंट्स और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों के रिफाइनिंग व वितरण का कार्य करती है। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

फ्रांस की पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबू का इस्तीफा, विवादित कृषि बिल के विरोध में छोड़ा पद

फ्रांस की पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबू ने विवादित कृषि विधेयक के विरोध में इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। इस बिल में दो प्रतिबंधित कीटनाशकों के सीमित इस्तेमाल और सिंचाई के लिए बड़े जलाशय बनाने की अनुमति देने का प्रावधान है। वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों का कहना है कि इससे मधुमक्खियों, जैव विविधता और पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो सकता है। एसोसिएटेड प्रेस (AP) के अनुसार, बारबू बुधवार को राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को अपना इस्तीफा सौंपेंगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने पर्यावरण संरक्षण के अपने वादों से पीछे हटते हुए ऐसे प्रावधानों को मंजूरी दी, जिनका वह लगातार विरोध करती रही थीं। बिल के दो विवादित प्रावधान 1. प्रतिबंधित कीटनाशकों को मंजूरीविधेयक में एसेटामिप्रिड और फ्लुपाइराडीफ्यूरोन जैसे प्रतिबंधित कीटनाशकों के सीमित उपयोग की अनुमति दी गई है। इनका इस्तेमाल चुकंदर, सेब और चेरी जैसी फसलों में किया जा सकेगा। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि ये रसायन मधुमक्खियों और अन्य परागण करने वाले कीड़ों के लिए बेहद हानिकारक हैं, जिससे कृषि उत्पादन और पारिस्थितिकी तंत्र दोनों प्रभावित हो सकते हैं। 2. सिंचाई के लिए बड़े जलाशयों की अनुमतिबिल में किसानों को सिंचाई के लिए बड़े जलाशय और कृत्रिम तालाब बनाने की प्रक्रिया आसान करने का भी प्रावधान है। पर्यावरणविदों का तर्क है कि इससे भूजल और नदियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा और गर्मियों में जल संकट बढ़ सकता है। संसद से पास हुआ विधेयक फ्रांस की संसद में मंगलवार को पेश किए गए इस विधेयक को सीनेट ने 214 के मुकाबले 111 मतों से पारित कर दिया। सरकार का कहना है कि यह कानून किसानों की बढ़ती लागत और घटती आय को देखते हुए लाया गया है, ताकि वे यूरोप के अन्य देशों के किसानों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकें। बारबू ने जताई नाराजगी मोनिक बारबू ने कहा कि विवादित प्रावधान आखिरी समय में बिल में जोड़े गए और उन्हें हटाने पर सरकार ने कोई गंभीर चर्चा नहीं की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि पिछले नौ महीनों में उन्होंने जंगलों, स्वच्छ जल, साफ हवा और जैव विविधता की रक्षा के लिए काम किया, लेकिन अब वह अपने उद्देश्यों को पूरा करने की स्थिति में नहीं हैं। पहले भी विवादों में रहा कीटनाशक एसेटामिप्रिड और फ्लुपाइराडीफ्यूरोन नियोनिकोटिनॉइड समूह के कीटनाशक हैं। फ्रांस ने 2018 में एसेटामिप्रिड पर प्रतिबंध लगाया था। इससे पहले भी इस प्रतिबंध को हटाने की कोशिश हुई थी, लेकिन फ्रांस की सर्वोच्च अदालत ने पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर संभावित खतरे का हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया था। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

इंदौर में छात्र आंदोलन को मिला कांग्रेस का समर्थन, दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी धरने में पहुंचे

इंदौर के टंट्याभील चौराहे पर चल रहे छात्र आंदोलन को बुधवार रात कांग्रेस का खुला समर्थन मिला। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी धरना स्थल पहुंचे और छात्रों के बीच बैठकर उनके आंदोलन में शामिल हुए। इस दौरान कांग्रेस नेताओं और प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। टंट्याभील चौराहे पर पिछले कई दिनों से छात्र शिक्षा व्यवस्था, कथित पेपर लीक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन और सोनम वांगचुक को हिरासत में लिए जाने के बाद इंदौर में भी आंदोलन तेज हो गया है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र धरना स्थल पर पहुंचकर अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे हैं। बुधवार रात दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी ने छात्रों के बीच बैठकर आंदोलन का समर्थन किया। उनके साथ शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे सहित कई कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी धरने में शामिल हुए। दिग्विजय सिंह ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस पिछले 25 दिनों से यह मांग उठा रही है और उन्होंने स्वयं 21 जून को भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी थी। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com

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