खंडवा शहर में बढ़ती आवारा कुत्तों की संख्या और डॉग बाइट की घटनाओं के बीच नगर निगम ने एक बार फिर नसबंदी और टीकाकरण अभियान शुरू करने की तैयारी की है। निगम ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए करीब 21 लाख रुपए का टेंडर जारी किया है।
इस टेंडर के तहत आवारा कुत्तों की नसबंदी के साथ उनका इम्यूनाइजेशन यानी टीकाकरण भी किया जाएगा। यह काम Animal Birth Control Program के तहत कराया जाएगा और टेंडर की अवधि एक साल रखी गई है।
5 सितंबर तक जमा होंगे आवेदन
नगर निगम की ओर से शनिवार को जारी निविदा विज्ञप्ति के अनुसार, इच्छुक संस्थान और एजेंसियां 5 सितंबर 2026 शाम 5:30 बजे तक ऑनलाइन टेंडर जमा कर सकेंगी।
निविदाएं 7 सितंबर सुबह 10:30 बजे खोली जाएंगी। टेंडर के लिए धरोहर राशि 21 हजार रुपए और निविदा प्रपत्र शुल्क 5 हजार रुपए निर्धारित किया गया है।
नसबंदी के साथ कुत्तों का टीकाकरण भी
नगर निगम के इस अभियान का उद्देश्य केवल आवारा कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करना नहीं है। अभियान के दौरान पकड़े जाने वाले कुत्तों की नसबंदी के साथ उनका टीकाकरण भी किया जाएगा।
Animal Birth Control Program के तहत नसबंदी और इम्यूनाइजेशन का उद्देश्य आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने के साथ डॉग बाइट और अन्य संबंधित जोखिमों को कम करना है।
पिछले अभियान को लेकर उठ चुके हैं सवाल
खंडवा में आवारा कुत्तों की समस्या और नसबंदी अभियान को लेकर हाल ही में नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे। जनसुनवाई के दौरान नगर निगम नेता प्रतिपक्ष दीपक राठौर ने नसबंदी अभियान पर खर्च और शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को लेकर विरोध जताया था।
विरोध प्रदर्शन के दौरान एक युवक के कुत्ते की वेशभूषा में पहुंचने का मामला भी चर्चा में रहा था। इसके बाद मामला राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया। कलेक्टर ऋषव गुप्ता और निगम कमिश्नर प्रियंका राजावत को भी मीडिया के सामने स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी थी।
चार साल में खर्च हो चुके हैं 98 लाख रुपए
जानकारी के मुताबिक, खंडवा में पिछले चार साल के दौरान आवारा कुत्तों की नसबंदी पर करीब 98 लाख रुपए खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद शहर में आवारा कुत्तों की संख्या और डॉग बाइट को लेकर सवाल बने हुए हैं।
अब 21 लाख रुपए के नए टेंडर से नगर निगम को उम्मीद है कि नसबंदी और टीकाकरण अभियान को दोबारा गति मिलेगी। वहीं शहरवासियों की नजर इस बात पर रहेगी कि नए अभियान से आवारा कुत्तों की संख्या और डॉग बाइट की समस्या पर कितना असर पड़ता है।
