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Drone Attack

Drone Attack in Moscow: मॉस्को एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला, DMK सांसद Kanimozhi का Delegation बाल-बाल बचा

मॉस्को, 23 मई 2025: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच मॉस्को एयरपोर्ट (Moscow Airport) पर एक बड़ा ड्रोन हमला (Drone Attack) उस समय हुआ जब DMK सांसद कनिमोझी (Kanimozhi) के नेतृत्व में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल (Indian Delegation) रूस पहुंचने वाला था। हमले के कुछ ही समय पहले यह प्रतिनिधिमंडल विनुकोवो अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (Vnukovo International Airport) पर लैंड करने वाला था, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। Drone Attack के चलते रूस में हड़कंप रूस के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, रूसी एयर डिफेंस सिस्टम (Russian Air Defense) ने मॉस्को की ओर आ रहे तीन ड्रोन (Three Drones) को समय रहते मार गिराया। इस हमले के बाद मॉस्को के तीन बड़े हवाई अड्डों – Vnukovo, Domodedovo और Sheremetyevo – पर कुछ समय के लिए उड़ानों पर रोक लगाई गई थी, लेकिन अब सभी हवाई सेवाएं बहाल कर दी गई हैं। एक ही सप्ताह में 485 ड्रोन हमले इस घटना से पहले, रूस ने दावा किया था कि 19 से 22 मई के बीच उसने 485 यूक्रेनी ड्रोन (Ukrainian Drones) को मार गिराया है। इन हमलों में मॉस्को, रियाज़ान और येल्त्स जैसे इलाकों को निशाना बनाया गया। येल्त्स के एक प्लांट से लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जबकि रियाज़ान की ऑयल रिफाइनरी में भारी आग लग गई थी। विदेशी डेलीगेशन पर बढ़ते खतरे ड्रोन हमले की टाइमिंग बेहद संवेदनशील थी क्योंकि उसी समय भारतीय सांसदों का डेलीगेशन रूस में लैंड कर रहा था। हालांकि, किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा और सभी सदस्य सुरक्षित हैं। यह घटना अंतरराष्ट्रीय डेलीगेशन की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाती है। रूस-यूक्रेन युद्ध में ड्रोन की भूमिका Russia-Ukraine War में अब ड्रोन हमले एक महत्वपूर्ण रणनीतिक हथियार बन चुके हैं। ये हमले न केवल सैन्य, बल्कि नागरिक इलाकों और उद्योगों को भी निशाना बना रहे हैं। इससे रूस की सुरक्षा तैयारियों की भी पोल खुल रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Harvard

Harvard Indian Students News: ट्रंप की कार्रवाई से 788 भारतीय छात्र संकट में SEVP रद्द

वॉशिंगटन, मई 2025 — अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की सख्त नीति के चलते Harvard University की SEVP (Student and Exchange Visitor Program) सर्टिफिकेशन रद्द कर दी गई है। इस फैसले से यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे 788 भारतीय छात्रों की शिक्षा और भविष्य पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। क्या है मामला? ट्रंप प्रशासन ने आरोप लगाया है कि हार्वर्ड ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों से जुड़ी गतिविधियों—खासकर कैंपस में हुए राजनीतिक विरोध प्रदर्शन—की उचित रिपोर्टिंग नहीं की। इस कारण यूनिवर्सिटी की SEVP मान्यता को निलंबित कर दिया गया है, जिससे अब वह नए या मौजूदा विदेशी छात्रों को वैध रूप से पढ़ा नहीं सकती। 🇮🇳 भारतीय छात्रों पर असर 72 घंटे में वापसी का मौका Harvard को अमेरिका सरकार की ओर से 6 प्रमुख शर्तों के साथ 72 घंटे का समय दिया गया है, जिनमें यह स्पष्ट करना शामिल है कि यूनिवर्सिटी ने किन अंतरराष्ट्रीय छात्रों के खिलाफ क्या कार्रवाई की। यदि यूनिवर्सिटी इन शर्तों को पूरा करती है, तो उसकी SEVP मान्यता बहाल की जा सकती है। कोर्ट से आंशिक राहत इस बीच कैलिफोर्निया की एक फेडरल अदालत ने ट्रंप प्रशासन के उस आदेश पर अस्थायी रोक लगा दी है, जिसके तहत हजारों अंतरराष्ट्रीय छात्रों के वीज़ा को रद्द किया जाना था। अदालत ने कहा कि हर छात्र के मामले को व्यक्तिगत रूप से जांचा जाना चाहिए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Jewish Museum

Washington DC गोलीकांड: Capital Jewish Museum के बाहर Israeli Embassy Staff की हत्या Elias Rodriguez गिरफ्तार

वॉशिंगटन डी.सी., 22 मई 2025 — अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डी.सी. में स्थित Capital Jewish Museum के बाहर हुई गोलीबारी में इज़राइली दूतावास (Israeli Embassy) से जुड़े दो कर्मचारियों की मौत हो गई। घटना के बाद सुरक्षा कर्मियों ने इलियास रोड्रिगेज (Elias Rodriguez) नामक संदिग्ध को मौके से गिरफ्तार कर लिया। दोनों पीड़ित—एक पुरुष और एक महिला—American Jewish Committee द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद संग्रहालय से बाहर आ रहे थे, जब उन पर अचानक गोलियां चला दी गईं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावर ने गिरफ्तारी के दौरान “Free, Free Palestine” का नारा लगाया, जिससे यह मामला राजनीतिक या वैचारिक नफरत से प्रेरित प्रतीत होता है। FBI और पुलिस कर रही आतंकवादी साजिश की जांच इस गोलीकांड की जांच FBI और स्थानीय पुलिस आतंकवादी घटना और Hate Crime (घृणा अपराध) के तौर पर कर रही है। अधिकारियों ने बताया कि मारे गए दोनों लोग एक-दूसरे के नज़दीक थे और जल्द ही सगाई करने वाले थे। कौन है Elias Rodriguez? 30 वर्षीय इलियास रोड्रिगेज, शिकागो का निवासी है। सोशल मीडिया पर कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, उसका संबंध Party for Socialism and Liberation (PSL) के शिकागो चैप्टर से हो सकता है, लेकिन अब तक किसी आधिकारिक स्रोत ने इसकी पुष्टि नहीं की है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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CPEC

CPEC विस्तार Afghanistan तक China-Pakistan की डील से India को कड़ी चुनौती

चीन (China), पाकिस्तान (Pakistan) और अफगानिस्तान (Afghanistan) ने एक अहम समझौते के तहत चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) को अफगानिस्तान तक विस्तार देने पर सहमति जताई है। इस परियोजना का उद्देश्य अफगानिस्तान को क्षेत्रीय व्यापार, परिवहन और ऊर्जा संपर्क का केंद्र बनाना है। यह डील न सिर्फ तीनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि भारत (India) के लिए एक नई रणनीतिक चुनौती भी पेश करेगी। CPEC क्या है और इसका अफगानिस्तान से क्या संबंध है? CPEC (China-Pakistan Economic Corridor) चीन की महत्वाकांक्षी Belt and Road Initiative (BRI) का हिस्सा है, जो पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से चीन के शिनजियांग तक फैला हुआ है। अब इस परियोजना को अफगानिस्तान तक बढ़ाया जा रहा है, जिससे रेलवे, सड़क, ऊर्जा पाइपलाइन और व्यापार नेटवर्क को मध्य एशिया तक जोड़ा जा सके। चीन और पाकिस्तान को उम्मीद है कि इस परियोजना से अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था को सहारा मिलेगा और तीनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध और मज़बूत होंगे। सुरक्षा और आतंकवाद: सबसे बड़ी चुनौती तालिबान शासन के तहत अफगानिस्तान की सुरक्षा स्थिति बेहद नाजुक है। ISIS-K जैसे आतंकी संगठनों की सक्रियता ने चीन और पाकिस्तान को चिंतित कर दिया है। हाल ही में काबुल में चीन के नागरिकों और संस्थानों पर हमलों के कारण चीन ने यह स्पष्ट किया है कि अगर सुरक्षा की गारंटी नहीं मिली तो वह CPEC विस्तार पर दोबारा विचार करेगा। अंतरराष्ट्रीय मान्यता और मानवाधिकार: निवेश में रोड़ा तालिबान सरकार को अभी तक अंतरराष्ट्रीय मान्यता नहीं मिली है। इसके अलावा, महिलाओं की शिक्षा और अधिकारों पर तालिबानी पाबंदियों को लेकर दुनिया भर में आलोचना हो रही है। इन परिस्थितियों में अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का विश्वास जीतना तालिबान सरकार के लिए मुश्किल साबित हो सकता है। भारत की नजर से: रणनीतिक और भौगोलिक खतरा भारत शुरू से ही CPEC का विरोध करता रहा है क्योंकि इसका एक हिस्सा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से होकर गुजरता है। अब CPEC का विस्तार अफगानिस्तान तक होने से भारत की सुरक्षा और रणनीतिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। यह चीन और पाकिस्तान के प्रभाव को भारत की उत्तरी सीमा तक पहुंचा सकता है। हालांकि भारत भी अफगानिस्तान के साथ संबंधों को मजबूत करने में जुटा है। हाल ही में भारत ने 160 अफगान ट्रकों को अटारी बॉर्डर से प्रवेश की अनुमति दी, जो दोनों देशों के बीच सहयोग को दर्शाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Golden Dome

ट्रंप का ‘Golden Dome’ प्रोजेक्ट: अमेरिका का नया अंतरिक्ष-आधारित मिसाइल डिफेंस सिस्टम

डोनाल्ड ट्रंप ने एक नई और बेहद महत्वाकांक्षी मिसाइल रक्षा प्रणाली की घोषणा की है, जिसे “Golden Dome” कहा जा रहा है। यह प्रोजेक्ट अमेरिका को बैलिस्टिक, क्रूज़ और हाइपरसोनिक मिसाइल जैसे घातक हमलों से बचाने के लिए डिजाइन किया गया है। इस रक्षा कवच का निर्माण ज़मीन और अंतरिक्ष दोनों क्षेत्रों में अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग करके किया जाएगा। क्या है Golden Dome सिस्टम? Golden Dome एक ऑल-इन-वन मिसाइल डिफेंस सिस्टम होगा जो दुश्मन की मिसाइलों को उनके लॉन्च के शुरुआती चरण (boost phase) से लेकर अंतिम टकराव (terminal phase) तक हर स्टेज पर इंटरसेप्ट करने में सक्षम होगा। मुख्य विशेषताएं: लागत और लॉन्च टाइमलाइन तुलना: Golden Dome बनाम Israel का Iron Dome विशेषता Iron Dome (इज़रायल) Golden Dome (अमेरिका) कवरेज क्षेत्र सीमित क्षेत्र पूरा अमेरिका तकनीक ज़मीन आधारित इंटरसेप्टर्स अंतरिक्ष आधारित हथियार और लेज़र टारगेट शॉर्ट-रेंज रॉकेट्स बैलिस्टिक, क्रूज़, हाइपरसोनिक मिसाइल्स चुनौतियाँ और आलोचनाएं हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Joe Biden

Joe Biden को हुआ Prostate Cancer: 2022 का ‘मेरे पास कैंसर है’ वीडियो फिर हुआ वायरल

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Joe Biden (जो बाइडेन) को हाल ही में aggressive prostate cancer (आक्रामक प्रोस्टेट कैंसर) होने की पुष्टि हुई है, जिसके बाद उनका 2022 का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। उस वीडियो में बाइडेन यह कहते हुए नजर आते हैं:“इसलिए मेरे पास भी, और मेरे साथ बड़े हुए इतने सारे लोगों के पास भी कैंसर है। क्या था 2022 का मामला? यह बयान जुलाई 2022 में मैसाचुसेट्स के समरसेट में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिया गया था। उस समय Joe Biden जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर बोल रहे थे और प्रदूषण के प्रभावों का जिक्र कर रहे थे। लोगों ने जब “मेरे पास कैंसर है” वाला बयान सुना, तो तुरंत चिंता जताई, लेकिन व्हाइट हाउस ने सफाई दी कि बाइडेन पुराने स्किन कैंसर (non-melanoma) की बात कर रहे थे, जिसका इलाज राष्ट्रपति बनने से पहले ही हो चुका था। अब क्यों हो रही है चर्चा? अब जब जो बाइडेन को prostate cancer हुआ है, और वह भी इतनी गंभीर अवस्था में कि हड्डियों तक फैल चुका है, तो लोगों को 2022 का वह बयान फिर से याद आ गया। वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, और कुछ लोग सोशल मीडिया पर सवाल उठा रहे हैं कि क्या बाइडेन की सेहत को लेकर पहले से कुछ छिपाया गया था? सियासी प्रतिक्रियाएं भी आई सामने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस मामले में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा:“मेलानिया और मैं जो बाइडेन की मेडिकल स्थिति जानकर दुखी हैं। हम जिल और पूरे परिवार को शुभकामनाएं देते हैं।” वहीं बराक ओबामा ने भी बाइडेन का समर्थन करते हुए कहा कि बाइडेन हमेशा से कैंसर रिसर्च और अवेयरनेस के पक्षधर रहे हैं और वह इस बीमारी से भी मजबूती से लड़ेंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Mukesh Ambani Meets Donald Trump and Qatar Emir in Doha: A Powerful Moment for India

Mukesh Ambani Meets Donald Trump and Qatar Emir in Doha: A Powerful Moment for India

भारत के सबसे अमीर व्यक्ति और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर Mukesh Ambani ने दोहा में दो बड़े अंतरराष्ट्रीय नेताओं से मुलाकात की। उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी से अहम बातचीत की। दोहा में हुई यह मुलाकात न सिर्फ कारोबारी दुनिया के लिए, बल्कि भारत के वैश्विक रिश्तों के लिहाज़ से भी बेहद अहम मानी जा रही है। क्या है इस मुलाकात का मतलब? मुकेश अंबानी की ये मीटिंग अंतरराष्ट्रीय संबंधों और निवेश की दिशा में एक बड़ा संकेत मानी जा रही है। एक तरफ अमेरिका जैसी वैश्विक शक्ति के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, तो दूसरी ओर कतर जैसे ऊर्जा समृद्ध देश के अमीर—इन दोनों नेताओं के साथ अंबानी की एक ही मंच पर मौजूदगी आने वाले समय में बड़ी साझेदारियों की ओर इशारा करती है। भारत के लिए गर्व की बात दुनिया के सबसे बड़े बिज़नेस लीडर्स और राजनयिकों के बीच जब कोई भारतीय चेहरा दिखता है, तो वह हर भारतीय के लिए गर्व की बात होती है। मुकेश अंबानी की इस हाई-प्रोफाइल मीटिंग ने भारत की ताकत और उसकी ग्लोबल पहचान को एक बार फिर दुनिया के सामने रखा है। इस मुलाकात से भारत, अमेरिका और खाड़ी देशों के बीच आर्थिक संबंधों को नई ऊर्जा मिल सकती है। निवेश, ऊर्जा, टेक्नोलॉजी और इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में आने वाले दिनों में नई घोषणाएं हो सकती हैं।
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Turkey

India-Pakistan Conflict: India-Turkey-Azerbaijan व्यापार संबंधों में आया मोड़

भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव का असर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के व्यापारिक रिश्तों पर भी दिखने लगा है। तुर्की (Turkey) और अज़रबैजान (Azerbaijan) जैसे देश खुलकर पाकिस्तान का समर्थन कर रहे हैं, जिससे भारत में इनके खिलाफ विरोध और व्यापारिक बहिष्कार की मांग तेज हो गई है। 🇹🇷 तुर्की (Turkey) के पाकिस्तान प्रेम से भारत में नाराज़गी बढ़ी तुर्की के राष्ट्रपति रेचप तैयप एर्दोआन ने हाल ही में कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का पक्ष लेते हुए भारत से बातचीत की अपील की। यह बयान भारत को नागवार गुज़रा और देश भर में तुर्की विरोधी माहौल बन गया। यह घटनाएं दिखाती हैं कि अब भारत केवल कूटनीति तक सीमित नहीं रहकर आर्थिक मोर्चे पर भी जवाब देने की नीति अपना रहा है। 🇦🇿 अज़रबैजान (Azerbaijan) की पाकिस्तान से बढ़ती नज़दीकी भारत को महंगी पड़ सकती है अज़रबैजान ने हाल ही में पाकिस्तान में $2 अरब डॉलर का निवेश करने की घोषणा की है। यह निवेश ऊर्जा, इन्फ्रास्ट्रक्चर और खनन क्षेत्रों में होगा। इसके अलावा दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग भी तेज़ी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अज़रबैजान भारत से व्यापारिक दूरी बना सकता है। भारत की रणनीतिक चाल: ईरान और आर्मेनिया के साथ नया व्यापार मार्ग भारत अब ईरान (Iran) और आर्मेनिया के साथ मिलकर एक नया व्यापार कॉरिडोर विकसित करने में जुटा है: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Anita Anand

Anita Anand बनी Canada की First Hindu Foreign Minister – अनीता आनंद ने भगवद गीता पर ली शपथ

कनाडा (Canada) में इतिहास रचते हुए भारतीय मूल की अनीता आनंद (Anita Anand) को देश की पहली हिंदू महिला विदेश मंत्री (First Hindu Woman Foreign Minister of Canada) नियुक्त किया गया है। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी (Mark Carney) द्वारा हाल ही में किए गए कैबिनेट फेरबदल (Cabinet Reshuffle) में उन्हें यह ऐतिहासिक जिम्मेदारी सौंपी गई। भगवद गीता पर रखकर ली शपथ – Cultural Identity की मिसाल अनीता आनंद ने भगवद गीता (Bhagavad Gita) पर हाथ रखकर शपथ ली, जो उनकी भारतीय सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक आस्था को दर्शाता है। यह कदम ना केवल उनके व्यक्तिगत मूल्यों का प्रतीक है, बल्कि कनाडा की विविधता (Diversity) को भी सम्मान देता है। Indian-Origin Anita Anand: भारतीय जड़ों से कनाडा की राजनीति तक अनीता का जन्म केंटविल, नोवा स्कोटिया (Kentville, Nova Scotia) में हुआ था। उनके माता-पिता भारत से कनाडा आकर बसे थे — मां पंजाब से और पिता तमिलनाडु से थे। उन्होंने क्वीन यूनिवर्सिटी, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, डालहौजी यूनिवर्सिटी और टोरंटो यूनिवर्सिटी से शिक्षा प्राप्त की। राजनीति में आने से पहले अनीता टोरंटो यूनिवर्सिटी में कानून की प्रोफेसर थीं। Anita Anand का Political Career राजनीति में अनीता आनंद का सफर बहुत प्रेरणादायक रहा है। वह पहले कनाडा की: रह चुकी हैं। अब उन्हें Foreign Affairs Ministry की कमान सौंपी गई है। Canada की Foreign Policy में नया मोड़ उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब कनाडा को अमेरिका, चीन और अन्य वैश्विक शक्तियों के साथ संबंधों को मजबूत करने की चुनौती है। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के संभावित दोबारा सत्ता में आने से ट्रेड और सिक्योरिटी पॉलिसी में बदलाव की संभावना है, जिससे अनीता आनंद को रणनीतिक संतुलन बनाना होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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US-China

US-China Trade Deal: अमेरिका-चीन में व्यापार घाटा कम करने पर बनी बड़ी डील, ट्रंप बोले ‘Great Progress’

अमेरिका और चीन (US-China) के बीच चल रहे व्यापार युद्ध (Trade War) को खत्म करने की दिशा में बड़ी सफलता मिली है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट (Scott Bessent) ने रविवार को जिनेवा में बताया कि दोनों देशों के बीच व्यापार घाटा (Trade Deficit) कम करने को लेकर “महत्वपूर्ण प्रगति” हुई है। उन्होंने कहा कि समझौते से जुड़े विस्तृत विवरण सोमवार को सार्वजनिक किए जाएंगे। बेसेन्ट ने पुष्टि की कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को वार्ता के नतीजों की पूरी जानकारी है और ये बातचीत “उत्पादक” रही। US-China क्या है समझौते की अहम बातें? अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीयर ने कहा कि यह एक ऐसा समझौता है जो अमेरिका के $1.2 ट्रिलियन के वैश्विक व्यापार घाटे को कम करने में मदद करेगा। उन्होंने कहा, “चीन के साथ हमारी यह डील यह दिखाती है कि दोनों देशों के मतभेद उतने गहरे नहीं थे जितना पहले सोचा गया था।” ग्रीयर के अनुसार, बातचीत बेहद रचनात्मक रही और चीनी अधिकारी “कड़े लेकिन व्यावसायिक” वार्ताकार थे। अब तक की सबसे अहम बैठक यह बैठक अमेरिका और चीन के शीर्ष नेताओं की पहली आमने-सामने बातचीत थी जबसे दोनों देशों ने एक-दूसरे के सामान पर 100% से अधिक टैरिफ (शुल्क) लगा रखे हैं। बेसेन्ट पहले ही कह चुके हैं कि द्विपक्षीय टैरिफ बहुत अधिक हैं और उन्हें कम करने की ज़रूरत है, लेकिन फिलहाल उन्होंने इस पर कोई ठोस जानकारी नहीं दी। व्हाइट हाउस का रुख व्हाइट हाउस के वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार केविन हैसेट ने कहा कि चीन अमेरिका के साथ अपने व्यापार संबंधों को सुधारने के लिए “बहुत उत्सुक” है। फॉक्स न्यूज़ से बात करते हुए उन्होंने बताया कि अमेरिका इस हफ्ते और भी देशों के साथ व्यापार समझौते कर सकता है। ट्रंप ने दी सकारात्मक प्रतिक्रिया राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा: “चीन के साथ आज जिनेवा में शानदार बातचीत हुई। कई मुद्दों पर सहमति बनी। GREAT PROGRESS MADE!” उन्होंने उम्मीद जताई कि चीन अमेरिकी व्यापार के लिए और दरवाजे खोलेगा जिससे दोनों देशों को फायदा होगा। बैठक कहाँ और कैसे हुई? यह गोपनीय बैठक जिनेवा झील के पास स्विट्ज़रलैंड के संयुक्त राष्ट्र राजदूत के विला में हुई। जगह शांत, हरी-भरी और कड़ी सुरक्षा से लैस थी। स्विट्ज़रलैंड को यह मेजबानी दोनों देशों के नेताओं से हालिया मुलाकातों के बाद मिली। अमेरिका का उद्देश्य क्या है? US-China के साथ $295 बिलियन डॉलर के सामानों के व्यापार घाटे को कम करना चाहता है। इसके साथ ही, वह चाहता है कि चीन अपनी घरेलू नीतियों में बदलाव कर एक उपभोक्ता-आधारित अर्थव्यवस्था अपनाए — जिससे वैश्विक खपत को बढ़ावा मिल सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Neha Bora

Neha Bora High Court: ‘न हमने कॉल दिया, न वहां गए’, CJP प्रदर्शन से किया किनारा

दिल्ली में CJP प्रदर्शन को लेकर विवाद अब अदालत तक पहुंच गया है। 22 अक्टूबर को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान नेहा बोरा (Neha Bora) ने साफ कहा कि उन्होंने कनॉट प्लेस में हुए प्रदर्शन के लिए न तो कोई कॉल दिया और न ही वह वहां गई थीं। उनके इस बयान के बाद CJP प्रदर्शन और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। Neha Bora की ओर से अदालत में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए। उनका कहना है कि जिस प्रदर्शन से उन्हें जोड़कर कार्रवाई की गई, उसमें उनकी भूमिका को लेकर लगाए गए आरोप सही नहीं हैं। अब इस मामले में सबकी नजर हाईकोर्ट की सुनवाई और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर है। Delhi High Court में नेहा बोरा ने क्या कहा? दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान नेहा बोरा की ओर से दलील दी गई कि उन्होंने 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में होने वाले प्रदर्शन का आह्वान नहीं किया था। उन्होंने यह भी कहा कि वह वहां मौजूद नहीं थीं। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। बचाव पक्ष के मुताबिक, नेहा को हिरासत में लेने की प्रक्रिया और उसके बाद जारी किए गए नोटिस के लिए पर्याप्त आधार नहीं बताया गया। नेहा बोरा ने अदालत में पुलिस की ओर से जारी उस नोटिस को भी चुनौती दी है, जिसमें शांति बनाए रखने के लिए 10 हजार रुपये का निजी मुचलका और एक जमानतदार देने की शर्त रखी गई थी। क्या है Neha Bora और CJP प्रदर्शन का पूरा मामला? यह पूरा विवाद 16 अक्टूबर को दिल्ली में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से जुड़ा है। इस मार्च के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विरोध दर्ज कराने की योजना थी। नेहा बोरा को 16 अक्टूबर को दिल्ली के मंडी हाउस इलाके में हिरासत में लिया गया था। इसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। बाद में उन्हें शांति बनाए रखने के लिए मुचलका देने से संबंधित नोटिस जारी किया गया। नेहा की ओर से अदालत में कहा गया कि मंडी हाउस में प्रस्तावित सभा और कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में होने वाले प्रदर्शन को एक ही मामला मानकर कार्रवाई करना उचित नहीं है। उन्होंने पुलिस के कदम को चुनौती देते हुए नोटिस की वैधता पर सवाल उठाए हैं। CJP Leaders Update: सौरव दास और आशुतोष रांका को भी मिली राहत CJP प्रदर्शन से जुड़े मामले में सौरव दास और आशुतोष रांका का नाम भी चर्चा में है। दोनों नेताओं को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े मामले में हिरासत में लिया गया था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, सात दिन की न्यायिक हिरासत के बाद 21 अक्टूबर को दोनों की रिहाई का आदेश दिया गया। इसके लिए उन्हें निजी और जमानती मुचलके भरने तथा निर्धारित शर्तों का पालन करने को कहा गया। दोनों नेताओं की हिरासत और नेहा बोरा की याचिका ने दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन की अनुमति, पुलिस की कार्रवाई और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के अधिकार को लेकर बहस तेज कर दी है। SIR Controversy: क्यों हो रहा है विरोध? मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्षी दलों और कुछ संगठनों ने सवाल उठाए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया में मतदाताओं के नाम प्रभावित होने की आशंका है। वहीं, चुनाव आयोग की प्रक्रिया और उससे जुड़े विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी जारी है। CJP से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया है। इसी बीच जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति, पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों से मुचलका भरवाने जैसे मुद्दे अदालत तक पहुंच गए हैं। अब आगे क्या होगा? दिल्ली हाईकोर्ट में नेहा बोरा की ओर से पुलिस के नोटिस और हिरासत की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। अब इस मामले में अदालत की आगे की कार्यवाही अहम होगी। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह दावा नहीं किया जा सकता कि हाईकोर्ट ने नेहा बोरा को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है या पुलिस का नोटिस रद्द कर दिया है। मामले में अंतिम आदेश की पुष्टि होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

न्यूजीलैंड क्रिकेट का बड़ा फैसला, MLC में नहीं करेगा निवेश; NZ20 लीग भी टली

न्यूजीलैंड क्रिकेट बोर्ड ने अमेरिका की मेजर लीग क्रिकेट (MLC) में निवेश नहीं करने का फैसला किया है। बोर्ड ने 2027 सीजन से पहले लीग की नई टीम शुरू करने के लिए अमेरिकी कंपनी ट्रू नॉर्थ स्पोर्ट्स (TNS) वेंचर्स के साथ साझेदारी की थी। हालांकि, अब न्यूजीलैंड क्रिकेट घरेलू क्रिकेट और अपने संसाधनों पर ध्यान केंद्रित करना चाहता है। मेजर लीग क्रिकेट में न्यूजीलैंड के कई प्रमुख खिलाड़ी हिस्सा लेते रहे हैं। इनमें रचिन रवींद्र, फिन एलन, डेवोन कॉनवे, टिम सेफर्ट और लॉकी फर्ग्यूसन जैसे नाम शामिल हैं। अप्रैल 2025 में हुई थी साझेदारी की घोषणा न्यूजीलैंड क्रिकेट ने अप्रैल 2025 में TNS वेंचर्स के साथ साझेदारी की घोषणा की थी। इस समझौते के तहत बोर्ड को 2027 में MLC की प्रस्तावित दो नई टीमों में से एक को शुरू करने और संचालित करने में सहयोग देना था। इसके लिए न्यूजीलैंड क्रिकेट को हाई-परफॉर्मेंस और संचालन से जुड़ी सहायता उपलब्ध करानी थी। हालांकि, अब बोर्ड ने इस योजना से पीछे हटने का निर्णय लिया है। न्यूजीलैंड क्रिकेट ने कहा- अभी सही समय नहीं न्यूजीलैंड क्रिकेट के CEO ज्योफ एलॉट ने कहा कि उन्हें इस साझेदारी के उद्देश्य और महत्वाकांक्षा पर भरोसा है। उनके मुताबिक, अमेरिकी बाजार में क्रिकेट के विस्तार की काफी संभावनाएं हैं, लेकिन विस्तृत आकलन के बाद बोर्ड को लगता है कि फिलहाल इस दिशा में आगे बढ़ने का सही समय नहीं है। एलॉट ने TNS और MLC के सह-संस्थापक समीर मेहता तथा विजय श्रीनिवासन का अवसर तलाशने में सहयोग के लिए आभार जताया। उन्होंने यह भी कहा कि न्यूजीलैंड क्रिकेट भविष्य में दोनों के साथ संपर्क बनाए रखेगा। न्यूजीलैंड की NZ20 टी-20 लीग भी टली न्यूजीलैंड में प्रस्तावित पुरुष और महिला टी-20 लीग NZ20 की शुरुआत भी टाल दी गई है। इस लीग की योजना मौजूदा सुपर स्मैश टूर्नामेंट की जगह एक नई प्रतियोगिता शुरू करने की थी। पहले NZ20 को जनवरी 2027 में शुरू करने की योजना थी, लेकिन अब इसकी शुरुआत दिसंबर 2027 तक के लिए टाल दी गई है। इससे न्यूजीलैंड क्रिकेट की घरेलू टी-20 प्रतियोगिता की योजनाओं में भी बदलाव हुआ है।

Zomato-Blinkit की पैरेंट कंपनी Eternal लाएगी Dark.ai, सीक्रेट चैट और प्राइवेसी पर होगा फोकस

जोमैटो और ब्लिंकइट की पैरेंट कंपनी एटरनल (Eternal) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में नया कदम उठाने की तैयारी कर रही है। कंपनी के प्रमुख दीपिंदर गोयल ने ‘Dark.ai’ नाम के नए AI ऐप के बारे में जानकारी दी है। इसका मुख्य फोकस यूजर्स की प्राइवेसी और संवेदनशील बातचीत की सुरक्षा पर होगा। गोयल के मुताबिक, इस ऐप को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि लोग अपनी निजी बातें, गोपनीय विचार, रिसर्च और जटिल सवाल बिना किसी झिझक के साझा कर सकें। फिलहाल कंपनी के कर्मचारी इसकी टेस्टिंग कर रहे हैं। डेटा सुरक्षा पर जोर, कंपनी भी नहीं पढ़ पाएगी चैट दीपिंदर गोयल ने बताया कि Dark.ai को कंपनी के अपने कंप्यूटर सिस्टम और सुरक्षित तकनीक पर चलाने की योजना है। इसमें एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन जैसी सुरक्षा व्यवस्था का इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है, ताकि बातचीत को अनधिकृत रूप से पढ़े जाने से बचाया जा सके। ऐप में एक विशेष मेमोरी सिस्टम भी होगा, जिस पर यूजर का नियंत्रण रहेगा। इसके जरिए यूजर अपनी जरूरत के अनुसार पुरानी बातचीत से जुड़ी जानकारी को सुरक्षित रख सकेंगे या हटा सकेंगे। हालांकि, ऐप की सुरक्षा व्यवस्था और डेटा प्रबंधन से जुड़े सभी तकनीकी विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इसलिए कंपनी के दावों की वास्तविक सीमा लॉन्च के समय उपलब्ध जानकारी से स्पष्ट होगी। स्टार्टअप, वैज्ञानिकों और रिसर्चर्स के लिए होगा उपयोगी Dark.ai को खास तौर पर उन लोगों और संस्थानों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है, जिन्हें संवेदनशील जानकारियों के साथ काम करना पड़ता है। इनमें स्टार्टअप संस्थापक, वैज्ञानिक, रिसर्चर्स, बड़ी कंपनियां और सरकारी कार्यालय शामिल हैं। गोयल के मुताबिक, इस AI को केवल यूजर को खुश करने के लिए जवाब देने के बजाय तथ्यों के आधार पर उत्तर देने के लिए तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य ऐसा सिस्टम बनाना है, जो यूजर की बातों से सहमत होने के बजाय अपनी समझ के अनुसार जवाब दे। मौजूदा AI ऐप्स की प्राइवेसी पर उठाए सवाल गोयल ने मौजूदा AI प्लेटफॉर्म्स पर डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि कई सेवाओं में यूजर डेटा सेव न करने का विकल्प चुनने के बाद भी बैकएंड पर जानकारी के प्रबंधन को लेकर स्पष्टता की कमी महसूस हो सकती है। उन्होंने कहा कि आम AI ऐप्स इस्तेमाल करते समय यूजर्स के मन में यह आशंका बनी रह सकती है कि उनकी बातचीत कोई पढ़ सकता है। उनके मुताबिक, इसी तरह का डर और अविश्वास लोगों को AI का पूरी क्षमता से इस्तेमाल करने से रोक सकता है। Dark.ai के जरिए कंपनी इस चिंता को कम करने और यूजर्स को निजी बातचीत के लिए अधिक सुरक्षित माहौल देने की कोशिश कर रही है। इसी साल लॉन्च की तैयारी, कीमत पर फैसला नहीं कंपनी की ओर से ऐप की लॉन्चिंग को लेकर इसी साल की तैयारी का संकेत दिया गया है। हालांकि, इसके काम करने की गति, इस्तेमाल किए जाने वाले AI मॉडल और अन्य तकनीकी विशेषताओं की विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है। ऐप मुफ्त होगा या इसके लिए सब्सक्रिप्शन लेना पड़ेगा, इस बारे में भी कंपनी ने कोई जानकारी नहीं दी है। इससे होने वाली संभावित कमाई को लेकर भी फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है। फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो और क्विक कॉमर्स सेवा ब्लिंकइट के बाद AI सॉफ्टवेयर क्षेत्र में एटरनल का यह संभावित कदम कंपनी के कारोबार के विस्तार की दिशा में अहम हो सकता है।

eMudhra में तकनीकी गड़बड़ी की जांच के लिए IT मंत्रालय ने बनाई स्पेशल टीम, सरकार बोली- भारतीय वेबसाइट्स और ऐप सुरक्षित

डिजिटल सुरक्षा सेवाएं देने वाली कंपनी ई-मुद्रा (eMudhra) में तकनीकी गड़बड़ी सामने आने के बाद आईटी मंत्रालय ने मामले की जांच के लिए विशेष टीम गठित की है। सरकार के मुताबिक, इस गड़बड़ी का असर कंपनी के विदेशी कारोबार तक सीमित है। भारतीय वेबसाइट्स और ऐप्स की सुरक्षा प्रभावित होने की बात सामने नहीं आई है। सरकार ने सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों से सावधान रहने की अपील की है। मामले की जांच साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की मदद से की जा रही है, ताकि गड़बड़ी की वजह और उसके संभावित प्रभाव का पता लगाया जा सके। eMudhra दो तरह की डिजिटल सुरक्षा सेवाएं देती है ई-मुद्रा का कारोबार मुख्य रूप से दो क्षेत्रों में फैला है। पहला, भारत में डिजिटल सिग्नेचर और eSign सेवाएं देना। दूसरा, विदेशी वेबसाइट्स के लिए डिजिटल सुरक्षा प्रमाणपत्र जारी करना। कंपनी से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, हालिया तकनीकी गड़बड़ी उसके विदेशी कारोबार से संबंधित डिजिटल सर्टिफिकेट्स में सामने आई। भारतीय डिजिटल सिग्नेचर और eSign सेवाओं पर इसका असर होने की जानकारी नहीं दी गई है। सिस्टम की खराबी से बने कमजोर सुरक्षा कोड ई-मुद्रा के मुताबिक, सिस्टम में तकनीकी खराबी के कारण कुछ कमजोर सुरक्षा कोड बन गए थे। एक साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ ने इस समस्या के बारे में एप्पल, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और मोजिला जैसी बड़ी टेक कंपनियों को अलर्ट किया। चिंता जताई गई कि इन कमजोर कोड का फायदा उठाकर साइबर हमलावर सुरक्षा प्रमाणपत्रों की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा सकते हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि इन कोड का इस्तेमाल करके वास्तव में कोई हमला हुआ था। गूगल और मोजिला ने प्रभावित सर्टिफिकेट्स पर की कार्रवाई तकनीकी गड़बड़ी की जानकारी मिलने के बाद ब्राउजर कंपनियों ने प्रभावित सुरक्षा प्रमाणपत्रों के खिलाफ कदम उठाए। इन कदमों का उद्देश्य प्रभावित प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल से जुड़े जोखिम को सीमित करना है। eMudhra का दावा- ग्राहक का डेटा चोरी नहीं हुआ ई-मुद्रा ने कहा है कि उसका मुख्य सिस्टम सुरक्षित है और किसी ग्राहक का डेटा चोरी नहीं हुआ है। कंपनी के अनुसार, जिस विदेशी कारोबार में गड़बड़ी सामने आई, उससे उसकी कुल कमाई का लगभग 1 प्रतिशत हिस्सा आता है। कंपनी प्रभावित विदेशी ग्राहकों को नए और सुरक्षित डिजिटल सर्टिफिकेट उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में भी जुटी है, ताकि उनकी सेवाएं जारी रह सकें। सरकार ने अफवाहों से बचने की अपील की आईटी मंत्रालय ने कहा है कि मामले की जांच की जा रही है और सोशल मीडिया पर चल रही अपुष्ट खबरों के आधार पर घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार की साइबर सुरक्षा टीम और विशेषज्ञ तकनीकी पहलुओं की पड़ताल कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद मामले से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल, गड़बड़ी के वास्तविक दायरे और संभावित प्रभाव को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
Gold

Gold Price Today: सोने के दाम में बड़ी गिरावट, 10 ग्राम का भाव ₹1.43 लाख पर

सोना (Gold) और चांदी (Silver) खरीदने का इंतजार कर रहे लोगों के लिए राहत की खबर है। पिछले तीन दिनों में दोनों कीमती धातुओं के भाव में अच्छी-खासी गिरावट आई है। सोना करीब ₹3,000 और चांदी लगभग ₹9,000 तक सस्ती हुई है। ऐसे में शादी-ब्याह के लिए गहने खरीदने या निवेश की योजना बना रहे लोगों की नजर अब बाजार के अगले रुख पर है। 22 अक्टूबर 2026 के बाजार अपडेट के मुताबिक, 10 ग्राम सोने की कीमत करीब ₹1.43 लाख और चांदी का भाव लगभग ₹2.01 लाख प्रति किलो बताया जा रहा है। हालांकि, अलग-अलग बाजारों में कीमतों का अंतर हो सकता है। Gold Rate Today: ₹1.43 लाख पर पहुंचा 10 ग्राम सोना Gold Price में आई गिरावट से खरीदारों को कुछ राहत जरूर मिली है। बीते तीन दिनों में भाव करीब ₹3,000 नीचे आने से उन लोगों के लिए खरीदारी का मौका बन सकता है, जो लंबे समय से कीमतें कम होने का इंतजार कर रहे थे। हालांकि, सोना खरीदने से पहले अपने शहर का ताजा भाव जरूर पता कर लें। 24 कैरेट सोने की कीमत और गहने बनाने में इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट सोने के भाव में अंतर होता है। इसके अलावा ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और GST भी देना पड़ता है। Silver Rate Today: चांदी ₹9,000 तक हुई सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली है। पिछले तीन दिनों में चांदी करीब ₹9,000 तक सस्ती हुई है और इसका भाव लगभग ₹2.01 लाख प्रति किलो के स्तर पर बताया जा रहा है। चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर उन ग्राहकों पर भी पड़ता है, जो त्योहारों पर चांदी के सिक्के, बर्तन या दूसरे सामान खरीदते हैं। हालांकि, खरीदारी से पहले स्थानीय बाजार में चांदी का ताजा भाव और शुद्धता की जानकारी लेना जरूरी है। सोना-चांदी के दाम क्यों गिर रहे हैं? Gold or Silver की कीमतें केवल घरेलू मांग से तय नहीं होतीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलाव, डॉलर की चाल, रुपये की स्थिति और ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की उम्मीदें भी इनके भाव पर असर डालती हैं। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी की कीमतें कमजोर होती हैं, तो भारतीय बाजार में भी इसका असर दिखाई दे सकता है। इसके अलावा मुनाफावसूली के कारण भी कीमतों में गिरावट आ सकती है। हालांकि, बाजार में आई गिरावट की किसी एक वजह को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा। कीमतों की चाल कई आर्थिक और वैश्विक कारकों पर निर्भर करती है। क्या अभी सोना और चांदी खरीदना सही रहेगा? अगर आप शादी या त्योहार के लिए गहने खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो मौजूदा गिरावट आपके लिए राहत की बात हो सकती है। लेकिन केवल तीन दिन की गिरावट देखकर यह मान लेना ठीक नहीं है कि आगे भी भाव लगातार कम होंगे। खरीदारी से पहले अलग-अलग ज्वेलर्स के रेट की तुलना करें। सोने पर हॉलमार्क और शुद्धता की जांच करें तथा बिल में मेकिंग चार्ज और GST का पूरा विवरण देखें। निवेश के लिहाज से भी जल्दबाजी करने के बजाय अपने बजट और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखना बेहतर है। आगे Gold-Silver Price में क्या बदलाव हो सकता है? आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार का रुख, अमेरिकी डॉलर, ब्याज दरों से जुड़ी खबरें और रुपये की चाल सोने-चांदी की कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में भाव में फिर तेजी आने या गिरावट जारी रहने, दोनों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कुल मिलाकर, तीन दिनों में सोने और चांदी के दाम में आई गिरावट ने खरीदारों को थोड़ी राहत दी है। अगर आप आज खरीदारी करने जा रहे हैं, तो पहले अपने शहर का ताजा भाव जरूर जांच लें, क्योंकि बाजार भाव और ज्वेलरी की अंतिम कीमत में अंतर हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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