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Supreme Court

महिला आरक्षण कानून में Delay पर Supreme Court नाराज़ Center को भेजा Notice

देश में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के लिए लाया गया Women Reservation Bill 2023 (महिला आरक्षण कानून) एक बार फिर सुर्खियों में है। Supreme Court ने इस कानून को लागू करने में हो रही देरी पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है और पूछा है कि आखिर महिलाओं को 33% आरक्षण का लाभ कब मिलेगा? क्या है मामला? साल 2023 में संसद ने संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम पारित किया था, जिसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया गया था।लेकिन इस कानून की एक शर्त यह थी कि इसे तभी लागू किया जाएगा जब नई जनगणना (Census) और परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इस देरी को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई, जिसमें कहा गया कि महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने में ऐसी शर्त लगाना मनमाना और असंवैधानिक है। Supreme Court की सख्ती सोमवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला महिलाओं के समान अधिकार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़ा है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि आखिर कब तक इंतजार करना होगा?अदालत ने सरकार को चार हफ्तों में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है और पूछा कि जनगणना व परिसीमन की प्रक्रिया कब पूरी होगी। क्यों हो रही है देरी? सरकार की ओर से पहले कहा गया था कि Women Reservation Law तभी लागू होगा जब नई जनगणना और परिसीमन पूरी होगी। लेकिन अभी तक जनगणना की तारीख तय नहीं हुई है।इस वजह से कानून के लागू होने की प्रक्रिया अधर में लटकी है, जबकि महिलाओं के अधिकारों की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों की राय संविधान विशेषज्ञों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का नोटिस सरकार पर दबाव बढ़ा सकता है। अगर अदालत सक्रिय हुई, तो आने वाले वर्षों में Women Reservation Act के लागू होने की राह आसान हो सकती है।विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि जनगणना और परिसीमन को बहाना बनाकर महिला आरक्षण में देरी करना न्यायसंगत नहीं है। आगे क्या? अब अगली सुनवाई में केंद्र सरकार को अदालत को बताना होगा कि यह कानून कब लागू किया जा सकता है। अगर कोर्ट सख्त रुख अपनाता है, तो सरकार को Women Reservation Bill के अमल के लिए टाइमलाइन तय करनी पड़ सकती है। महिला आरक्षण कानून को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप देश में महिलाओं की राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में अहम साबित हो सकता है। अगर यह कानून जल्द लागू होता है, तो लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी ऐतिहासिक रूप से बढ़ेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bihar

Bihar चुनाव 2025 फेज़-2 Amit Shah vs Rahul Gandhi बिहार में दूसरे चरण की सियासी जंग तेज़

बिहार चुनाव 2025 (Bihar Assembly Election 2025) का दूसरा चरण अब राज्य की राजनीति में नया उत्साह भर चुका है। 11 नवंबर 2025 को बिहार की 20 ज़िलों की 122 विधानसभा सीटों पर वोटिंग होगी। पहले चरण में 121 सीटों पर रिकॉर्ड 64.7% वोटिंग दर्ज की गई थी। अब दूसरे चरण की जंग में एनडीए (NDA) और महागठबंधन (Mahagathbandhan) दोनों अपनी पूरी ताकत झोंक चुके हैं। दूसरा चरण – हाईवोल्टेज प्रचार और राजनीतिक टक्कर दूसरे चरण के लिए प्रचार 10 नवंबर को समाप्त हुआ।गृहमंत्री अमित शाह ने अपने भाषणों में कहा कि “एनडीए सरकार ने बिहार को पिछड़ेपन से निकालकर विकास की राह पर लाया है। महिलाएं आज सुरक्षित हैं और युवाओं को रोजगार मिल रहा है।”वहीं, राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने केंद्र और राज्य सरकार पर बेरोज़गारी, महंगाई और पलायन के मुद्दों को लेकर जमकर हमला बोला। राहुल गांधी ने कहा, “बिहार का युवा नौकरी मांगता है, लेकिन सरकार सिर्फ जुमले देती है।” महिला वोटर बनीं गेम चेंजर इस चरण में कुल 3.70 करोड़ मतदाता वोट डालेंगे, जिनमें 1.74 करोड़ महिलाएं शामिल हैं।सभी दल जानते हैं कि महिला वोटर इस बार ‘किंगमेकर’ बन सकती हैं।एनडीए महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण को अपना मुख्य एजेंडा बना रही है, वहीं महागठबंधन शिक्षा और रोजगार पर वादा कर रहा है। युवाओं और रोजगार पर सियासी जंग इस चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा रोजगार और माइग्रेशन (Migration) है।एनडीए का दावा है कि उनके शासन में विकास तेज़ी से हुआ है, जबकि महागठबंधन इसे “फेल्ड गवर्नेंस” बता रहा है।ग्रामीण इलाकों में मतदाता इस बार बेरोजगारी और बढ़ती महंगाई को लेकर खासे नाराज़ दिखाई दे रहे हैं। प्रमुख इलाके और उम्मीदवार सीमांचल, कोसी, मगध, अंगिका और शाहाबाद जैसे क्षेत्र इस चरण में सबसे अहम हैं।कई बड़े नेता इन इलाकों से किस्मत आजमा रहे हैं और यहां का परिणाम सरकार बनाने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। चुनावी कैलेंडर अब पूरा बिहार इस बात पर नज़र गड़ाए है कि क्या Modi-Nitish की जोड़ी सत्ता में वापसी करेगी या Tejashwi-Rahul की जोड़ी नई कहानी लिखेगी।महिलाओं और युवाओं का वोट इस बार तय करेगा कि Bihar 2025 में किसकी सरकार बनेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi

Delhi Air Quality पराली कम जली फिर भी राजधानी की हवा ‘Toxic’ बनी रही

Delhi में प्रदूषण का स्तर सोमवार को थोड़ा कम हुआ है, लेकिन हवा अब भी ज़हरीली (toxic) बनी हुई है। सोमवार सुबह 6:00 बजे राजधानी का औसत Air Quality Index (AQI) 346 दर्ज किया गया, जो “Very Poor Category” में आता है। रविवार को यह आंकड़ा 391 तक पहुंच गया था, यानी हवा तब “Severe” श्रेणी में थी। Delhi AQI Today: कई इलाकों में अब भी ‘Severe’ प्रदूषण केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के कुछ इलाकों में हालात अब भी बेहद खराब हैं — इन जगहों पर हवा इतनी दूषित है कि स्वस्थ व्यक्ति को भी सांस लेने में परेशानी हो सकती है। हवा की रफ्तार से मिली मामूली राहत मौसम विभाग (IMD) और पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि रविवार रात से हवा की गति (wind speed) बढ़ने के कारण प्रदूषण के स्तर में थोड़ी गिरावट आई है। इसके साथ ही, पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने के मामलों (stubble burning cases) में भी कमी आई है, जिससे दिल्ली की हवा को अस्थायी राहत मिली है। हालांकि, हवा में मौजूद PM2.5 और PM10 कण अब भी खतरनाक स्तर पर हैं, जो फेफड़ों और दिल से जुड़ी बीमारियों को बढ़ा सकते हैं। GRAP-3 फिलहाल होल्ड पर, Stage 1 और 2 जारी CAQM (Commission for Air Quality Management) की सब-कमेटी ने स्थिति की समीक्षा करने के बाद फिलहाल GRAP-3 (Graded Response Action Plan – Stage 3) लागू न करने का फैसला लिया है।फिलहाल GRAP के पहले दो चरण लागू हैं, जिनमें शामिल हैं — अगर आने वाले दिनों में AQI 400 से ऊपर जाता है, तो Stage-3 लागू किया जा सकता है। जनता में चिंता, एक्टिविस्ट बोले ‘Air Emergency’ Delhi की हवा में लगातार गिरती गुणवत्ता को देखते हुए कई environment activists और नागरिक संगठनों ने इंडिया गेट (India Gate) पर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने “Delhi Needs Clean Air Now” जैसे स्लोगन उठाए और सरकार से Air Emergency घोषित करने की मांग की। डॉक्टरों की हेल्थ एडवाइस डॉक्टरों ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है — Weather Update: आने वाले दिनों में क्या रहेगा हाल IMD के अनुसार, अगले 48 घंटों में हवा की गति बढ़ सकती है, जिससे प्रदूषण स्तर में थोड़ी और गिरावट संभव है। हालांकि, तापमान गिरने और नमी बढ़ने से स्मॉग की परत फिर से गाढ़ी हो सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Faridabad

Faridabad RDX Case डॉक्टर के घर से मिला विस्फोटक और हथियारों का जखीरा, NIA और ATS की जांच शुरू

Faridabad दिल्ली के नजदीक फरीदाबाद में पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने एक बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम कर दिया है। धौज इलाके में एक Doctor के किराए के कमरे से 300 किलो RDX, AK-47 राइफल और सैकड़ों कारतूस बरामद किए गए हैं। यह ऑपरेशन दिल्ली-NCR को हिला देने वाले एक बड़े Terror Attack से पहले ही किया गया, जिससे बड़ी तबाही टल गई। कैसे हुआ खुलासा (Faridabad RDX Case Investigation) खुफिया एजेंसियों को जम्मू-कश्मीर में terror posters लगाने की जांच के दौरान एक सुराग मिला। उसी सुराग से हरियाणा पुलिस ने फरीदाबाद के धौज इलाके में छापा मारा। वहां से भारी मात्रा में Explosives और Ammunition मिला।कमरा करीब 3 महीने पहले किराए पर लिया गया था, लेकिन वहां कोई नहीं रहता था। पुलिस को शक है कि यह कमरा सिर्फ Explosives Storage के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। Doctor का Terror Connection (Doctor Adil Ahmed Rathar Link) मुख्य आरोपी Dr. Adil Ahmed Rathar कश्मीर का रहने वाला बताया जा रहा है। वह पहले Kashmir और Saharanpur (UP) में मेडिकल प्रैक्टिस करता था। जांच एजेंसियों को शक है कि उसका संबंध Ansar Ghazwat-ul-Hind (AGH) और Jaish-e-Mohammad (JeM) जैसे आतंकी संगठनों से है।डॉ. आदिल के साथ एक और नाम Dr. Mozammil Shakeel का भी सामने आया है। दोनों से पूछताछ चल रही है कि इतने Explosives का इस्तेमाल कहां और कब होना था। क्या मिला पुलिस को (Faridabad Seizure Details) पुलिस और ATS की संयुक्त कार्रवाई में बरामद सामग्री: इतनी बड़ी मात्रा में RDX से Delhi या NCR में बड़े पैमाने पर Blast की साजिश रची जा सकती थी। Delhi-NCR में High Alert इस बरामदगी के बाद दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में सुरक्षा एजेंसियों ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है।बॉर्डर चेकिंग बढ़ा दी गई है और खुफिया विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि RDX कहां से लाया गया, किसके लिए था और इसका Target क्या था। पुलिस का बयान हरियाणा पुलिस के अधिकारियों ने कहा कि, “यह अब तक की सबसे बड़ी बरामदगी में से एक है। अगर समय पर कार्रवाई नहीं होती, तो दिल्ली-NCR में बड़ा ब्लास्ट हो सकता था।” एजेंसियां अब Cross-Border Network और Local Support System की जांच कर रही हैं। जांच जारी (NIA & ATS Investigation) मामले की जांच NIA, IB और ATS कर रही हैं। शुरुआती जांच में पता चला है कि आरोपी डॉक्टर ने फर्जी नाम और दस्तावेजों से किराए पर कमरा लिया था। मकान मालिक और स्थानीय लोगों से पूछताछ जारी है। फरीदाबाद में मिली 300 किलो RDX की बरामदगी देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी सफलता है। इस कार्रवाई ने एक बड़े Terror Attack को समय रहते रोक दिया। अब जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने में जुटी हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Winter Session

1 December से 19 December तक Parliament का Winter Session सरकार लाएगी अहम Bills

संसद का Winter Session 2025 इस साल 1 दिसंबर से 19 दिसंबर तक आयोजित किया जाएगा। इस प्रस्ताव को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) ने मंजूरी दे दी है। इसकी घोषणा केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) ने शनिवार को की। सरकार ने उम्मीद जताई है कि यह सत्र रचनात्मकऔर अर्थपूर्ण होगा, जिससे देश की जनता की उम्मीदों को मजबूती मिलेगी। Kiren Rijiju ने की Positive Discussion की अपील केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने X (Twitter) पर पोस्ट करते हुए कहा — “हम आशा करते हैं कि यह Winter Session रचनात्मक और सार्थक होगा, जो हमारे लोकतंत्र को मजबूत करेगा और जनता की आकांक्षाओं को पूरा करेगा।” उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि इस सत्र में महत्वपूर्ण Bills पर चर्चा को प्राथमिकता दी जाए और हंगामे से बचा जाए। Parliament Winter Session में ये अहम Bills हो सकते हैं पेश सूत्रों के मुताबिक, Winter Session में सरकार कुछ प्रमुख विधेयक (Bills) पेश कर सकती है — Monsoon Session में हंगामे के बाद सरकार की उम्मीदें पिछले Monsoon Session के दौरान विपक्ष के विरोध और लगातार हंगामे के कारण कई बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी थी।अब सरकार चाहती है कि Winter Session में शांतिपूर्ण बहस और नीति-निर्माण पर फोकस रहे। Parliament Sessions का Annual Calendar भारत की संसद में हर साल तीन मुख्य सत्र होते हैं — इनमें से Winter Session वर्ष का आखिरी और सबसे रणनीतिक सत्र माना जाता है, जिसमें कई अहम नीतियों और Bills पर मुहर लगती है। Session Details क्या है उम्मीद? यह सत्र सरकार और विपक्ष दोनों के लिए अहम रहेगा। सरकार जहां सुधारवादी एजेंडा आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी, वहीं विपक्ष मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति में रहेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Modi

Modi Rally Highlights बिहार की जनता ने दिखाया जोश, विपक्ष पर तीखा प्रहार

पटना (Bihar Election 2025): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार में दो बड़ी जनसभाओं को संबोधित करते हुए विपक्ष पर तीखे वार किए। उन्होंने कहा कि बिहार अब “जंगल राज” नहीं, बल्कि “Vikas Raj” की राह पर है। मोदी ने जनता से NDA को भारी बहुमत देने की अपील की और कहा कि “अब बिहार को रोकने की ताकत किसी में नहीं है।” Modi Rally in Bihar: जनता का जोश और विकास का संदेश प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को बेतिया और समस्तीपुर में विशाल जनसभाएं कीं। दोनों जगहों पर भारी भीड़ उमड़ी और ‘Modi-Modi’ के नारे गूंजे।मोदी ने कहा – “बिहार के लोगों ने अब ठान लिया है कि विकास की गाड़ी को कोई नहीं रोक सकता। हमने बिहार में सड़क, बिजली और रोजगार के लिए जो काम किए हैं, वो अब गति पकड़ चुके हैं।” उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि “जो लोग जात-पात और नफरत की राजनीति करते हैं, वो अब जनता के मूड को नहीं समझ पा रहे।” AI Video Controversy: मोदी की चेतावनी – ‘AI से मतदाताओं को गुमराह न करें’ प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कहा कि चुनाव के दौरान कुछ दल Artificial Intelligence (AI) का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं। उन्होंने जनता को आगाह किया कि “सोशल मीडिया पर फैलने वाले फेक AI वीडियो से सावधान रहें, ये सब भ्रम फैलाने की चाल है।” Election Commission ने भी सभी पार्टियों को चेतावनी दी है कि किसी भी AI-generated वीडियो या फोटो को “synthetic” या “digitally created” के रूप में स्पष्ट रूप से टैग करना अनिवार्य होगा। हाल ही में कांग्रेस पर पीएम मोदी का AI वीडियो शेयर करने के आरोप लगे थे, जिसे कोर्ट ने तुरंत हटाने का आदेश दिया। इस पर BJP नेता गिरिराज सिंह ने कहा – “अगर मैं नेहरू और माउंटबेटन का AI वीडियो बनाऊं तो कांग्रेस क्या करेगी?” Lalu Yadav का तंज और BJP की पलटवार RJD प्रमुख लालू यादव ने भी मोदी की रैली पर चुटकी लेते हुए कहा – “प्रधानमंत्री के भाषण में झूठ की बारिश होगी, जनता छाता लेकर जाए।”इस पर BJP नेताओं ने पलटवार किया कि “लालू जी अब पुराने बिहार की याद दिला रहे हैं, जबकि जनता नया बिहार बना रही है।” Bihar Election 2025: मुद्दे, माहौल और जनता की उम्मीदें इस बार के बिहार चुनाव में तीन बड़े मुद्दे प्रमुख हैं — विशेषज्ञों के अनुसार, बिहार में इस बार सोशल मीडिया और डिजिटल कैम्पेन निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। बिहार का चुनावी संग्राम सिर्फ रैलियों का नहीं, बल्कि Digital Battle भी बन चुका है।एक तरफ मोदी का “Vikas Model”, दूसरी तरफ विपक्ष की “AI Strategy” — दोनों की टक्कर से इस चुनाव में नया इतिहास बन सकता है। मोदी के संदेश ने स्पष्ट कर दिया है कि बिहार अब “Fake AI” से नहीं, बल्कि Real Development से आगे बढ़ेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Vande Bharat

Vande Bharat Trains का उद्घाटन पीएम मोदी ने बनारस से दिखाई हरी झंडी

वरानसी, 8 नवंबर 2025: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज बनारस रेलवे स्टेशन से चार नई Vande Bharat Express ट्रेनें हरी झंडी दिखाकर रवाना की। इन नई ट्रेनों का उद्देश्य यात्रा समय कम करना, आधुनिक रेल नेटवर्क बढ़ाना, और देश में पर्यटन व आर्थिक कनेक्टिविटी को मजबूत करना है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ये ट्रेनें भारत की मेक इन इंडिया पहल और आधुनिक रेल इंफ्रास्ट्रक्चर का प्रतीक हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इन ट्रेन सेवाओं से नागरिकों को तेज़, सुरक्षित और आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलेगा। नई Vande Bharat Trains और उनके Route Key Features Regional और Tourism Impact इन नई ट्रेन सेवाओं से न केवल यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि क्षेत्रीय विकास और पर्यटन वृद्धि में भी मदद मिलेगी। खासकर बनारस और खजुराहो जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र अब और अधिक आसानी से जुड़ेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “वंदे भारत ट्रेनें भारत की नई तकनीक और विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। ये देशवासियों की जिंदगी आसान बनाने के साथ-साथ भारत को विश्व स्तर पर आधुनिक रेल सेवाओं में अग्रणी बनाएंगी।” हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Supreme Court

Supreme Court ने दिया बड़ा आदेश Stray Dogs और Cattle अब नहीं दिखेंगे Public Places पर

भारत के सड़कों पर बढ़ते आवारा पशुओं (Stray Animals) और डॉग बाइट्स (Dog Bite Cases) की घटनाओं को देखते हुए Supreme Court of India ने शुक्रवार (7 नवंबर 2025) को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। अदालत ने सभी राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों को आदेश दिया है कि वे 8 हफ्तों के भीतर सरकारी संस्थानों के चारों ओर Boundary Wall (बाड़) लगाएं और राष्ट्रीय व राज्य राजमार्गों (Highways) से सभी आवारा जानवरों को हटाएं। Government Institutions में Fence लगाना होगा ज़रूरी सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, खेल परिसर और सरकारी दफ्तरों में बाड़ लगाना अब अनिवार्य होगा, ताकि आवारा कुत्ते, गाय या सांड जैसी पशुओं का प्रवेश न हो सके।राज्यों को निर्देश दिया गया है कि वे 2 हफ्तों के भीतर ऐसी संस्थाओं की लिस्ट तैयार करें और 8 हफ्तों के अंदर fencing का काम पूरा करें। कोर्ट ने कहा, “ये कदम जनता की सुरक्षा और स्वच्छता दोनों के लिए ज़रूरी हैं। कोई भी संस्था इस आदेश की अनदेखी नहीं कर सकती।” Highways और Roads से हटेंगे Cattle और Stray Animals अदालत ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर जानवरों का घूमना यातायात में बाधा डालता है और Accidents (दुर्घटनाओं) का बड़ा कारण बन चुका है।इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को निर्देश दिया कि सभी मवेशियों और आवारा पशुओं को सुरक्षित Animal Shelters में रखा जाए और सड़कों को पूरी तरह खाली किया जाए। इसके साथ ही जिला प्रशासन और नगर निगमों को हर 3 महीने में रिपोर्ट पेश करनी होगी, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आदेश का पालन सही ढंग से हो रहा है। Stray Dogs को Schools और Hospitals से हटाने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्कूलों, हॉस्पिटल्स और अन्य पब्लिक प्लेसेज़ में पाए जाने वाले आवारा कुत्तों को पकड़कर वहीं दोबारा छोड़ने की अनुमति नहीं होगी।उन्हें Vaccination और Sterilization के बाद निर्धारित आश्रय गृहों में रखा जाएगा, ताकि बच्चों, मरीजों और आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। क्यों दिया गया यह फैसला? हाल के वर्षों में देशभर में Dog Bite Cases और Cattle-related Road Accidents में भारी बढ़ोतरी देखी गई है।कई मामलों में बच्चों और बुजुर्गों की जान भी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला सिर्फ पशु नियंत्रण का नहीं बल्कि Public Safety और Human Rights का है। पालन न करने पर सख्त कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि किसी राज्य या संस्था ने यह आदेश समय सीमा में पूरा नहीं किया, तो उस पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।साथ ही केंद्र सरकार से कहा गया है कि वह एक Monitoring Agency बनाकर राज्यों के काम की निगरानी करे। जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की नहीं, जनता की भी कोर्ट ने कहा कि आम नागरिक भी इसमें भागीदार बनें — सड़कों पर कूड़ा या पशुओं के लिए खाना न फेंकें, जिससे वे सड़कों की ओर आकर्षित होते हैं।यह आदेश मानव सुरक्षा और पशु कल्याण के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में अहम कदम है। Supreme Court का यह फैसला देशभर में Public Safety को लेकर बड़ा बदलाव लाने वाला है। इससे सड़कों पर सुरक्षा बढ़ेगी, स्कूलों और हॉस्पिटलों में स्वच्छता सुनिश्चित होगी और आवारा जानवरों के कल्याण के लिए भी एक स्थायी व्यवस्था बनेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bihar

Bihar Election 2025 बढ़ी हुई वोटिंग से नीतीश कुमार की ‘घर वापसी’ के संकेत

Bihar विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण की वोटिंग खत्म हो चुकी है और इस बार जनता का उत्साह पिछले चुनावों से कहीं अधिक देखने को मिला।चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, पहले चरण में 121 सीटों पर 64.69% मतदान हुआ है — जो कि 2020 के पहले चरण (56.1%) की तुलना में लगभग 8.6% ज्यादा है।अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह बढ़ी हुई वोटिंग नीतीश कुमार की सत्ता में वापसी का संकेत है? Voting Pattern से क्या मिल रहा है संकेत? Bihar के पिछले 20 सालों के चुनावी इतिहास में जब-जब वोटिंग में बढ़ोतरी हुई है, तब-तब नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू (JDU) ने सत्ता में वापसी की है।2005, 2010 और 2015 में मतदान प्रतिशत में उछाल आया था और हर बार नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने।विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार भी बढ़ी हुई वोटिंग NDA के लिए शुभ संकेत हो सकती है। Nitish Kumar vs Tejashwi Yadav: जनता का मूड किसके पक्ष में? वोटिंग में वृद्धि आमतौर पर जनता के अंदर बदलाव की इच्छा या सक्रिय भागीदारी को दर्शाती है।इस बार युवा वर्ग और पहली बार वोट डालने वालों की संख्या भी ज्यादा रही।राजद (RJD) नेता तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) बेरोजगारी और युवाओं के मुद्दे पर जनता से अपील कर रहे हैं, जबकि नीतीश कुमार “विकास और स्थिरता” की बात कर रहे हैं।ऐसे में यह तय करना मुश्किल है कि बढ़ी हुई वोटिंग का फायदा किसे मिलेगा — NDA को या महागठबंधन को। किस इलाकों में हुआ Record Voting पहले चरण में नालंदा, गया, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया और भागलपुर जैसे जिलों में रिकॉर्ड वोटिंग दर्ज हुई है।इनमें से कई जिले नीतीश कुमार के पारंपरिक गढ़ माने जाते हैं।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर आने वाले चरणों में भी यही ट्रेंड जारी रहा, तो Nitish Kumar की वापसी की संभावना और मजबूत हो सकती है। पिछले चुनावों से तुलना वर्ष औसत वोटिंग प्रतिशत परिणाम 2005 45.6% नीतीश कुमार पहली बार CM बने 2010 52.7% NDA की बड़ी जीत 2015 56.8% महागठबंधन की सरकार, नीतीश फिर CM 2020 57.1% एनडीए की मुश्किल जीत 2025 64.69% (पहला चरण) ट्रेंड नीतीश के हक में? Bihar Politics में नया मोड़ बढ़ी हुई वोटिंग सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि यह Bihar की राजनीति में एक नया बदलाव दर्शाती है।चाहे यह जनता की नाराजगी हो या विकास पर भरोसा — लेकिन इतना तय है कि 2025 का चुनाव नीतीश कुमार बनाम तेजस्वी यादव के बीच सीधी टक्कर बन चुका है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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वंदे मातरम

वंदे मातरम के 150 साल पूरे, पीएम मोदी बोले “यह हमारी आत्मा की आवाज़ है”

भारत का राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम (Vande Mataram)’ अपनी 150वीं वर्षगांठ मना रहा है। इस ऐतिहासिक मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में एक भव्य कार्यक्रम में हिस्सा लिया और इस अवसर पर Commemorative Coin और Stamp जारी किए। यह आयोजन देश की आज़ादी, एकता और सांस्कृतिक गर्व का प्रतीक बन गया है — जहां पूरा भारत “वंदे मातरम” के स्वर में एकजुट हुआ। देशभर में एक साथ गूंजा ‘Vande Mataram’ सुबह 9:50 बजे देश के कोने-कोने में स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी दफ्तरों और सार्वजनिक स्थलों पर लोगों ने एक स्वर में ‘वंदे मातरम’ का सामूहिक गायन किया। यह आयोजन सिर्फ एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि एकता और देशभक्ति का राष्ट्रीय संदेश था। Vande Mataram की कहानी: 1875 से 2025 तक का सफर ‘वंदे मातरम’ की रचना 7 नवंबर 1875 को बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय (Bankim Chandra Chatterjee) ने की थी। बाद में इसे उनकी प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ (1882) में शामिल किया गया। यह गीत भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा बन गया — आज़ादी की रैलियों और आंदोलनों में “वंदे मातरम” की गूंज ने देशवासियों में जोश भर दिया। 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने इसे राष्ट्रीय गीत (National Song) का दर्जा दिया, और तय किया कि इसे राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ के समान सम्मान मिलेगा। PM Modi बोले – “Vande Mataram हमारी आत्मा की आवाज़ है” कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा – “वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं, यह हमारी आत्मा की आवाज़ है। यह भारत की माटी, मातृभूमि और हमारी अस्मिता का प्रतीक है। 150 वर्षों से यह गीत हमें एकता और समर्पण की भावना से जोड़ता आ रहा है।” 150 Years Celebration: Coin और Stamp ने बनाया ऐतिहासिक पल कार्यक्रम में जारी किए गए स्मारक सिक्के (Commemorative Coin) और डाक टिकट (Stamp) पर “150 Years of Vande Mataram” अंकित है। संस्कृति मंत्रालय ने घोषणा की है कि आने वाले एक वर्ष तक देशभर में “Vande Mataram@150” के तहत विशेष कार्यक्रम, कला प्रदर्शनी, छात्र प्रतियोगिताएं और डिजिटल कैंपेन चलाए जाएंगे। क्यों खास है ‘Vande Mataram’ का 150वां जश्न सोशल मीडिया पर ट्रेंड हुआ #VandeMataram150Years कार्यक्रम के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर #VandeMataram150Years, #VandeMataram और #PMModi जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे।लोगों ने अपने पोस्ट, वीडियो और रील्स के ज़रिए गीत को समर्पित संदेश साझा किए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rahul Gandhi

Mallikarjun Kharge Shuddhikaran Row: मंच ‘शुद्ध’ कराने पर बवाल, Rahul Gandhi ने BJP-RSS को घेरा

 उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष Rahul Gandhi मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद कथित तौर पर मंच के ‘शुद्धिकरण’ को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इस मामले को लेकर Rahul Gandhi ने BJP और RSS पर जातिगत भेदभाव तथा ‘मनुवादी सोच’ को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। वहीं, BJP ने आरोपों से दूरी बनाते हुए मामले की जांच कराने की बात कही है। क्या है Haldwani Shuddhikaran विवाद? मल्लिकार्जुन खड़गे ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस की रैली को संबोधित किया था। रैली के कुछ दिन बाद कथित तौर पर कुछ लोगों ने मैदान में पूजा-पाठ और हवन कर ‘शुद्धिकरण’ किया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई खड़गे के दलित समुदाय से होने के कारण की गई। पार्टी ने इसे छुआछूत और जातिगत भेदभाव की मानसिकता का उदाहरण बताया है। हालांकि, BJP की ओर से कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया गया है। BJP नेताओं का कहना है कि रैली के दौरान लगाए गए कुछ नारों से धार्मिक भावनाएं आहत हुई थीं और इसी वजह से धार्मिक अनुष्ठान किया गया था। BJP ने इस कार्रवाई को खड़गे की जाति से जोड़ने पर भी सवाल उठाए हैं। Mallikarjun Kharge ने राज्यसभा में उठाया मुद्दा मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मामले को राज्यसभा में भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके भाषण के बाद उस मंच का ‘शुद्धिकरण’ किया गया, जिससे उन्हें बेहद अपमानित महसूस हुआ। खड़गे ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी व्यक्ति को उसकी जाति के आधार पर अपवित्र मानना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। उन्होंने इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ Untouchability Act के तहत कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग की। खड़गे का कहना है कि ऐसी घटनाएं केवल किसी एक व्यक्ति का अपमान नहीं हैं, बल्कि देश में सामाजिक समानता और संवैधानिक मूल्यों पर भी सवाल खड़े करती हैं। Rahul Gandhi का BJP-RSS पर हमला हल्द्वानी के इस विवाद पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कथित ‘शुद्धिकरण’ को दलितों के अपमान से जोड़ते हुए BJP और RSS पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इस तरह की सोच BJP-RSS की कथित ‘मनुवादी मानसिकता’ को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और छुआछूत तथा जातिगत भेदभाव के लिए आधुनिक भारत में कोई जगह नहीं होनी चाहिए। कांग्रेस ने इस मुद्दे को सामाजिक न्याय और दलित सम्मान से जोड़ते हुए सरकार से दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। क्या Rahul Gandhi ने SC/ST Act के तहत FIR की मांग की? इस मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार SC/ST Act के तहत FIR दर्ज कराने की स्पष्ट मांग राहुल गांधी की ओर से नहीं बताई गई है। रिपोर्टों में मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा Untouchability Act के तहत मामला दर्ज करने और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग का उल्लेख है। वहीं, राहुल गांधी ने घटना को दलितों के अपमान, जातिगत भेदभाव और कथित मनुवादी सोच से जोड़कर BJP-RSS पर राजनीतिक हमला किया। इसलिए खबर को पेश करते समय राहुल गांधी के बयान और खड़गे की कानूनी कार्रवाई की मांग को अलग-अलग रखना जरूरी है। BJP ने क्या कहा? BJP ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया है। पार्टी की ओर से कहा गया कि वह किसी भी तरह के भेदभावपूर्ण व्यवहार का समर्थन नहीं करती। केंद्रीय मंत्री और BJP के वरिष्ठ नेता जेपी नड्डा ने मामले की जांच का आश्वासन दिया। BJP नेताओं का कहना है कि घटना के पीछे धार्मिक कारण हो सकते हैं और इसे खड़गे की जाति से जोड़ना उचित नहीं है। अब इस मामले में जांच के परिणाम महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि इसी से यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित ‘शुद्धिकरण’ किसने कराया और इसके पीछे वास्तविक कारण क्या था। कांग्रेस ने राज्यपाल से भी की शिकायत मामले को लेकर कांग्रेस नेताओं ने उत्तराखंड के राज्यपाल से मुलाकात कर कथित ‘शुद्धिकरण’ की निष्पक्ष जांच की मांग भी की है। कांग्रेस का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की जाति के आधार पर किसी सार्वजनिक स्थान या मंच को ‘अपवित्र’ माना गया है, तो यह गंभीर सामाजिक और संवैधानिक मुद्दा है। Haldwani Row बना Political मुद्दा हल्द्वानी का ‘शुद्धिकरण’ विवाद अब स्थानीय घटना से आगे बढ़कर राष्ट्रीय राजनीति का मुद्दा बन गया है। कांग्रेस इसे Dalit dignity, social equality और constitutional values से जोड़ रही है, जबकि BJP कांग्रेस पर घटना को राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगा रही है। फिलहाल दोनों पक्षों के दावों के बीच इस मामले में जांच और संभावित कानूनी कार्रवाई पर सबकी नजर है। विवाद के आगे बढ़ने के साथ Rahul Gandhi, Mallikarjun Kharge, Haldwani Shuddhikaran Row, FIR और SC/ST Act जैसे मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में बने हुए हैं।
H-1B

H-1B Rules में बड़ा बदलाव: Trump हटाएंगे 60 Days Grace Period? Indian IT Professionals पर असर

अमेरिका में काम करने वाले भारतीय H-1B visa holders के लिए Donald Trump administration की immigration policies लगातार चिंता बढ़ा रही हैं। अब H-1B के तहत मिलने वाली 60 Days Grace Period को खत्म करने की तैयारी की खबरों ने भारतीय IT professionals के बीच नई चिंता पैदा कर दी है। अगर यह प्रस्ताव अंतिम रूप से लागू होता है, तो नौकरी जाने के बाद H-1B workers को अमेरिका में नई नौकरी तलाशने के लिए मिलने वाली मौजूदा 60 दिनों की राहत खत्म हो सकती है। इसके साथ ही H-1B visa से जुड़ी बढ़ी हुई लागत और दूसरे proposed immigration changes भी भारतीय professionals के लिए अमेरिका में नौकरी और long-term career planning को प्रभावित कर सकते हैं। क्या है H-1B 60 Days Grace Period? मौजूदा नियमों के तहत, अगर किसी H-1B worker की नौकरी समाप्त हो जाती है, तो कुछ परिस्थितियों में उसे अधिकतम 60 दिन या उसके authorized stay की समाप्ति तक, जो भी पहले हो, अमेरिका में रहने की अनुमति मिल सकती है। इस दौरान कर्मचारी: टेक्नोलॉजी सेक्टर में layoffs के दौरान यह grace period H-1B workers के लिए एक महत्वपूर्ण safety net बन गई है। Trump Administration क्यों बदलना चाहती है H-1B Rules? Trump administration लंबे समय से अमेरिकी workers को प्राथमिकता देने और foreign workers पर अमेरिकी कंपनियों की निर्भरता कम करने की नीति पर जोर देती रही है। प्रस्तावित बदलावों का व्यापक उद्देश्य H-1B program में ज्यादा सख्ती और oversight लाना है। हालांकि, 60-day grace period को खत्म करने का प्रस्ताव अभी अंतिम रूप से लागू नियम नहीं माना जा सकता। अंतिम regulatory process और effective date यह तय करेंगे कि बदलाव वास्तव में कब और किस रूप में लागू होगा। Indians पर सबसे बड़ा असर क्या होगा? H-1B program में भारतीय professionals की बड़ी हिस्सेदारी होने के कारण किसी भी बड़े बदलाव का असर भारतीयों पर विशेष रूप से पड़ सकता है। 1. Layoff के बाद बढ़ेगा Immigration Pressure अगर किसी भारतीय H-1B employee की नौकरी चली जाती है, तो मौजूदा 60 दिनों का buffer उपलब्ध नहीं होने पर उसे बहुत तेजी से नया employer या दूसरा वैध immigration option तलाशना पड़ सकता है। इससे layoffs का असर सिर्फ नौकरी खोने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अमेरिका में रहने की स्थिति भी तुरंत चिंता का विषय बन सकती है। 2. IT Professionals पर ज्यादा असर भारतीय H-1B workers की बड़ी संख्या technology और specialized professional roles में काम करती है। इसलिए software engineers, IT consultants, data professionals और दूसरे skilled workers के लिए नौकरी बदलने की समय-सीमा महत्वपूर्ण हो सकती है। नई व्यवस्था में companies के बीच job switch करने की प्रक्रिया को पहले से ज्यादा जल्दी पूरा करना जरूरी हो सकता है। 3. कम समय में Job Search का दबाव 60 दिन की grace period खत्म होने की स्थिति में कर्मचारी के पास नई नौकरी तलाशने के लिए कम flexibility होगी। ऐसे में कुछ workers को: H-1B Fee में भारी बढ़ोतरी से भी बढ़ी चिंता H-1B program में प्रस्तावित एक और बड़ा बदलाव इसकी लागत से जुड़ा है। Trump administration ने नए H-1B petitions से जुड़ी $103,265 की proposed fee को लेकर कदम उठाए हैं। यह समझना जरूरी है कि इसका अर्थ यह नहीं है कि हर H-1B employee को अपनी जेब से करीब $100,000 देना होगा। यह मुख्य रूप से employer-side cost से जुड़ा प्रस्ताव है। फिर भी इतनी बड़ी लागत कंपनियों के hiring decisions को प्रभावित कर सकती है। Indian IT Companies के लिए क्या बदल सकता है? H-1B rules में सख्ती और बढ़ी हुई लागत का असर भारतीय IT companies की US business strategy पर भी पड़ सकता है। कंपनियां संभावित रूप से: इसका मतलब यह हो सकता है कि आने वाले समय में भारतीय IT professionals के लिए US onsite opportunities की competition और बढ़ जाए। H-4 Visa पर रहने वाले परिवारों पर भी असर H-1B employee की immigration स्थिति का असर उसके परिवार पर भी पड़ सकता है। H-4 status पर अमेरिका में रहने वाले spouse और children के लिए भी primary H-1B holder की स्थिति महत्वपूर्ण होती है। अगर principal H-1B worker को नौकरी जाने के बाद जल्दी नया immigration solution नहीं मिलता, तो परिवार को भी relocation या दूसरे immigration options पर विचार करना पड़ सकता है। इसका असर बच्चों की schooling, spouse की employment और परिवार की financial planning पर भी पड़ सकता है। क्या हर H-1B worker को नौकरी जाते ही अमेरिका छोड़ना पड़ेगा? यह सबसे महत्वपूर्ण बात है। 60-day grace period खत्म करने का प्रस्ताव अगर लागू होता भी है, तो उसकी वास्तविक conditions अंतिम नियम में स्पष्ट होंगी। इसके अलावा H-1B worker की स्थिति उसके individual immigration circumstances, pending petitions, authorized stay और उपलब्ध दूसरे legal options पर निर्भर कर सकती है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि grace period हटते ही हर H-1B worker को नौकरी खत्म होने के अगले दिन अमेरिका छोड़ना पड़ेगा। क्या भारतीयों के लिए US में Jobs खत्म हो जाएंगी? ऐसा कहना भी सही नहीं होगा। अमेरिका की technology, healthcare, research, engineering और दूसरे specialized sectors में skilled professionals की मांग बनी हुई है। लेकिन नए नियमों से H-1B sponsorship की लागत और immigration uncertainty बढ़ सकती है। इसका सबसे बड़ा असर नए applicants और ऐसे professionals पर पड़ सकता है जिन्हें employer sponsorship की जरूरत है। H-1B Indians के लिए आगे क्या महत्वपूर्ण होगा? भारतीय H-1B professionals को आने वाले समय में immigration policy में होने वाले बदलावों पर नजर रखनी होगी। खासकर ये चार चीजें महत्वपूर्ण रहेंगी: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
PM Modi

PM Modi in Uzbekistan: SCO Summit से पहले पीएम मोदी का बड़ा बयान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) शनिवार को Uzbekistan और Kyrgyz Republic के चार दिवसीय दौरे के लिए रवाना हो गए। 29 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक चलने वाली इस यात्रा में पीएम मोदी पहले उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद जाएंगे। इसके बाद वह किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित होने वाले 26वें Shanghai Cooperation Organisation (SCO) Summit में हिस्सा लेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने दौरे से पहले कहा कि भारत SCO के सदस्य देशों के साथ मिलकर ऐसा क्षेत्र बनाने की दिशा में काम करेगा, जो आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से मुक्त हो। उन्होंने SCO के लिए भारत की प्राथमिकताओं को Security, Connectivity और Opportunity से जोड़ा है। PM Modi Uzbekistan Visit: द्विपक्षीय संबंधों पर होगी अहम बातचीत उज्बेकिस्तान की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। दोनों नेताओं के बीच भारत और उज्बेकिस्तान के संबंधों को और मजबूत करने के लिए कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। इस दौरान Trade and Investment, Defence, Energy, Education और Digital Connectivity जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होगा। भारत के लिए उज्बेकिस्तान Central Asia का एक महत्वपूर्ण साझेदार है। ऐसे में पीएम मोदी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच आर्थिक, सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। Tashkent में Shastri Memorial और Mahatma Gandhi Centre जाएंगे PM Modi ताशकंद में प्रधानमंत्री मोदी Lal Bahadur Shastri Memorial और Mahatma Gandhi Centre का दौरा भी करेंगे। इन कार्यक्रमों के जरिए भारत और उज्बेकिस्तान के बीच ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित किया जाएगा। भारत और Central Asia के बीच सदियों पुराने व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। मौजूदा दौर में दोनों पक्ष इन रिश्तों को आधुनिक आर्थिक और रणनीतिक सहयोग में बदलने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। SCO Summit 2026 में Terrorism पर भारत का सख्त रुख उज्बेकिस्तान दौरे के बाद पीएम मोदी 31 अगस्त और 1 सितंबर को बिश्केक में होने वाले 26वें SCO Summit में शामिल होंगे। यह सम्मेलन SCO की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। SCO Summit में regional security, terrorism, extremism, connectivity और economic cooperation जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। भारत लंबे समय से आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत कार्रवाई की वकालत करता रहा है। पीएम मोदी ने कहा है कि भारत SCO के माध्यम से ऐसे क्षेत्र के निर्माण के लिए काम करेगा, जो terrorism, separatism और extremism से मुक्त हो। उनका यह संदेश SCO Summit में भारत की सुरक्षा प्राथमिकताओं को स्पष्ट करता है। Security और Connectivity पर भी रहेगा फोकस SCO के मंच पर भारत के लिए Security, Connectivity और Opportunity प्रमुख प्राथमिकताएं हैं। मध्य एशिया के साथ बेहतर connectivity भारत के आर्थिक और रणनीतिक हितों के लिए महत्वपूर्ण है। व्यापार मार्गों, ऊर्जा सहयोग, डिजिटल कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा देने से भारत और Central Asian देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूती मिल सकती है। प्रधानमंत्री मोदी SCO Summit के दौरान अन्य सदस्य देशों के नेताओं के साथ Bilateral Meetings भी कर सकते हैं। इन बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर बातचीत की संभावना है। World Nomad Games के Opening Ceremony में शामिल होंगे PM Modi किर्गिस्तान दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी 6th World Nomad Games के Opening Ceremony में भी शामिल होंगे। यह आयोजन Central Asia की पारंपरिक संस्कृति, खेल और विरासत को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करता है। पीएम मोदी की इस कार्यक्रम में भागीदारी भारत और किर्गिस्तान के बीच people-to-people और cultural ties को और मजबूत करने का अवसर भी होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
RBI

EMI नहीं चुकाई तो क्या होगा? RBI Loan Recovery Rules में बदलाव, जानिए Bank क्या नहीं कर सकता

अगर आपने Personal Loan, Home Loan, Car Loan या किसी अन्य तरह का Loan लिया है और किसी वजह से EMI समय पर नहीं चुका पा रहे हैं, तो आपके लिए RBI के Loan Recovery Rules जानना बेहद जरूरी है। EMI डिफॉल्ट होने पर बैंक या NBFC बकाया रकम की Recovery कर सकता है, लेकिन इसके लिए उसे RBI के नियमों का पालन करना जरूरी है। कई लोग यह मान लेते हैं कि EMI मिस होने के बाद Recovery Agent घर आकर धमका सकता है या किसी भी समय फोन कर सकता है। ऐसा नहीं है। RBI ने Loan Recovery के दौरान ग्राहकों के सम्मान, Privacy और उचित व्यवहार को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए हैं। EMI Miss होने पर सबसे पहले क्या होता है? अगर आपकी EMI तय तारीख पर जमा नहीं होती है, तो बैंक इसे Overdue Payment के रूप में दर्ज कर सकता है। Loan Agreement के मुताबिक बैंक बकाया रकम के साथ लागू ब्याज या अन्य वैध Charges की मांग कर सकता है। अगर EMI लगातार Miss होती रहती है, तो बैंक ग्राहक से संपर्क कर सकता है और बकाया रकम चुकाने के लिए कह सकता है। लंबे समय तक भुगतान न होने पर बैंक अपने नियमों और लागू कानून के अनुसार Recovery Process आगे बढ़ा सकता है। इसलिए RBI के नियमों का मतलब यह नहीं है कि EMI नहीं चुकाने पर बैंक पैसा नहीं मांग सकता। नियम मुख्य रूप से यह तय करते हैं कि Recovery किस तरीके से की जा सकती है। RBI Loan Recovery Rules: Bank आपको कब कॉल कर सकता है? RBI के निर्देशों के अनुसार Overdue Loan की Recovery के लिए ग्राहक से सुबह 8 बजे से पहले और शाम 7 बजे के बाद संपर्क नहीं किया जाना चाहिए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि Recovery Agent ग्राहकों को अनुचित समय पर फोन करके परेशान न करें। अगर कोई Recovery Agent लगातार देर रात या सुबह-सुबह कॉल करता है, तो ग्राहक इस मामले की शिकायत संबंधित Bank या NBFC से कर सकता है। Recovery Agent आपको धमका नहीं सकता Loan की Recovery के लिए Bank या NBFC Recovery Agent की मदद ले सकता है, लेकिन Agent को ग्राहक के साथ धमकी, गाली-गलौज, अपमानजनक व्यवहार या मानसिक दबाव बनाने की अनुमति नहीं है। Recovery का उद्देश्य बकाया रकम की वसूली करना है, ग्राहक को डराना या परेशान करना नहीं। RBI ने Regulated Entities को अपने Recovery Agents की गतिविधियों पर उचित निगरानी रखने की जिम्मेदारी भी दी है। परिवार और दोस्तों को भी परेशान नहीं कर सकता Bank अगर आपकी EMI बकाया है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि Recovery Agent आपके परिवार, दोस्तों या परिचितों को परेशान करके आप पर दबाव बनाए। ग्राहक की Privacy और सम्मान का ध्यान रखना जरूरी है। किसी व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करना या उसके कर्ज की जानकारी का अनुचित तरीके से इस्तेमाल करना Recovery का स्वीकार्य तरीका नहीं है। क्या Bank घर आकर Recovery कर सकता है? बकाया Loan की Recovery के लिए Bank या उसका अधिकृत Recovery Agent ग्राहक से संपर्क कर सकता है। हालांकि, Recovery करते समय निर्धारित नियमों और कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। अगर Loan के बदले कोई Asset जैसे Car, Property या अन्य Security रखी गई है, तो Default की स्थिति में Bank के पास कानून और Loan Agreement के तहत Recovery के अधिकार हो सकते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि Recovery Agent अपनी मर्जी से जबरन सामान या संपत्ति पर कब्जा कर सकता है। Loan Default होने पर Credit Score पर भी असर पड़ सकता है EMI का लगातार भुगतान न करने का असर केवल Bank Recovery तक सीमित नहीं रहता। Loan Repayment History आपके Credit Profile को प्रभावित कर सकती है। अगर Loan Account में लगातार Default होता है, तो भविष्य में Loan या Credit Card लेने में परेशानी हो सकती है। इसलिए आर्थिक परेशानी होने पर EMI को नजरअंदाज करने के बजाय Bank से समय रहते संपर्क करना बेहतर होता है। Recovery Agent परेशान करे तो क्या करें? अगर कोई Recovery Agent RBI के नियमों का उल्लंघन करता है, तो ग्राहक को सबसे पहले संबंधित Bank या NBFC के Grievance Redressal Mechanism में शिकायत करनी चाहिए। शिकायत करते समय कॉल रिकॉर्ड, SMS, WhatsApp Message, Email या अन्य उपलब्ध सबूत सुरक्षित रखना उपयोगी हो सकता है। अगर Bank या NBFC से शिकायत का समाधान नहीं होता है, तो पात्र मामलों में RBI की Ombudsman व्यवस्था के तहत शिकायत की जा सकती है। क्या EMI नहीं भरने पर Bank Loan माफ कर देगा? नहीं। RBI के Recovery Rules का उद्देश्य ग्राहकों को अनुचित Recovery Practices से सुरक्षा देना है। इसका मतलब यह नहीं है कि EMI नहीं भरने पर Loan अपने आप माफ हो जाएगा। Bank अपने Loan Agreement और लागू कानून के अनुसार बकाया रकम की Recovery कर सकता है। लंबे समय तक Default की स्थिति में कानूनी कार्रवाई भी संभव है। EMI भरने में परेशानी हो तो क्या करें? अगर आपको लगता है कि किसी महीने या आने वाले समय में EMI भरना मुश्किल हो सकता है, तो Bank या NBFC से जल्द संपर्क करें। अपनी Financial Situation के बारे में जानकारी देकर उपलब्ध विकल्पों के बारे में पूछें। सबसे जरूरी बात यह है कि Recovery Agent के दबाव में आकर किसी अनजान व्यक्ति के Personal Account में पैसा जमा न करें। Payment हमेशा Bank/NBFC के अधिकृत माध्यम से ही करें। RBI Loan Recovery Rules का सबसे जरूरी सार EMI समय पर नहीं चुकाने पर Bank आपसे बकाया रकम की मांग कर सकता है और नियमों के अनुसार Recovery Process शुरू कर सकता है। लेकिन Recovery के दौरान Bank या उसके Agent को ग्राहक की Privacy और सम्मान का ध्यान रखना होगा। याद रखें: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CNG Price

Delhi CNG Price: CNG के दाम में ₹3.89 की बढ़ोतरी, अब ₹86.98 प्रति किलो मिलेगा गैस

दिल्ली-NCR में CNG इस्तेमाल करने वाले वाहन चालकों को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। CNG Price Hike के तहत इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने CNG की कीमत में ₹3.89 प्रति किलो की बढ़ोतरी की है। नई कीमतें 29 अगस्त 2026 से लागू हो गई हैं। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में CNG का रेट ₹83.09 प्रति किलो से बढ़कर ₹86.98 प्रति किलो हो गया है। यह 2026 में दिल्ली-NCR में CNG की पांचवीं कीमत बढ़ोतरी है। लगातार हो रही बढ़ोतरी से CNG कार चलाने वाले लोगों के साथ-साथ ऑटो, टैक्सी, कैब और कमर्शियल वाहनों के ड्राइवरों पर भी ईंधन खर्च का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। Delhi CNG Price: अब कितना हुआ CNG का रेट? IGL की नई कीमतों के मुताबिक दिल्ली-NCR के अलग-अलग शहरों में CNG के दाम इस प्रकार हैं: दिल्ली में CNG की कीमत में सीधे ₹3.89 प्रति किलो की वृद्धि हुई है। इसका मतलब है कि जो वाहन रोजाना बड़ी मात्रा में CNG की खपत करते हैं, उनके लिए महीने का fuel budget पहले की तुलना में और बढ़ जाएगा। Why CNG Price Increased: क्यों बढ़े CNG के दाम? IGL के अनुसार, CNG की कीमत बढ़ाने की मुख्य वजह imported LNG की बढ़ी हुई लागत है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में LNG की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर गैस की supply और import cost पर पड़ा है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण LNG की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ी है। इसके चलते global energy market में कीमतों पर दबाव बना हुआ है। IGL ने इसी बढ़ी हुई input cost के एक हिस्से को CNG की कीमतों में शामिल किया है। 2026 में पांचवीं बार महंगी हुई CNG दिल्ली-NCR में वर्ष 2026 के दौरान CNG की कीमतों में यह पांचवीं बढ़ोतरी है। इससे पहले भी इस साल अलग-अलग चरणों में CNG के दाम बढ़ाए गए थे। बार-बार होने वाली price hike के कारण CNG को economical fuel मानकर इस्तेमाल करने वाले वाहन मालिकों की लागत लगातार बढ़ रही है। हालांकि पेट्रोल और डीजल की तुलना में CNG अभी भी कई वाहन चालकों के लिए एक महत्वपूर्ण alternative fuel बनी हुई है। CNG Price Hike का आम लोगों पर क्या असर होगा? CNG की कीमत बढ़ने का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो रोजाना लंबी दूरी तय करते हैं। निजी CNG कारों के अलावा auto-rickshaw, taxi, cab और commercial vehicles चलाने वालों की operating cost भी बढ़ेगी। ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए बढ़ती fuel cost का सीधा असर उनकी daily earnings पर पड़ सकता है। अगर CNG की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो भविष्य में इसका असर transportation charges और passenger fares पर भी देखने को मिल सकता है। CNG महंगी होने से बढ़ सकता है Monthly Fuel Budget उदाहरण के तौर पर, अगर कोई वाहन प्रतिदिन 5 किलो CNG की खपत करता है, तो ₹3.89 प्रति किलो की अतिरिक्त कीमत के कारण उसका खर्च करीब ₹19.45 प्रतिदिन बढ़ जाएगा। 30 दिनों में यह अतिरिक्त खर्च लगभग ₹584 हो सकता है। जिन commercial vehicles की रोजाना CNG consumption इससे कहीं अधिक है, उनके लिए अतिरिक्त मासिक खर्च भी काफी ज्यादा होगा। आगे CNG के दाम पर क्या रहेगा असर? CNG की कीमतों पर आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय LNG prices, global gas supply और पश्चिम एशिया की स्थिति का असर महत्वपूर्ण रहेगा। अगर imported gas की लागत ऊंची बनी रहती है, तो domestic CNG prices पर भी दबाव बना रह सकता है। फिलहाल दिल्ली-NCR के लोगों को 29 अगस्त से CNG के लिए ₹3.89 प्रति किलो ज्यादा भुगतान करना होगा। दिल्ली में नई CNG कीमत ₹86.98 प्रति किलो पहुंच गई है, जबकि नोएडा और गाजियाबाद में यह ₹95.59 प्रति किलो हो गई है। CNG Price Hike 2026 की यह पांचवीं बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब बढ़ती fuel और transportation costs पहले से ही आम लोगों के बजट को प्रभावित कर रही हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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