लद्दाख के अधिकारों और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को लेकर अनशन कर रहे सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनकी तबीयत को देखते हुए अस्पताल में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। करीब 600 जवानों की तैनाती के बीच वांगचुक का इलाज चल रहा है।
इस बीच Sonam Wangchuk ने सरकार के सामने बातचीत का रास्ता खुला रखा है। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें सरकार की ओर से भरोसा मिलता है कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा, तो वह अपना अनशन आज ही खत्म करने के लिए तैयार हैं।
मेदांता अस्पताल में बढ़ाई गई सुरक्षा, 600 जवान तैनात
सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल लाया गया। सुरक्षा को देखते हुए अस्पताल परिसर और आसपास बड़ी संख्या में पुलिस और सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है।
प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि किसी भी तरह की स्थिति से निपटा जा सके। वहीं डॉक्टरों की टीम लगातार उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है।
Sonam Wangchuk बोले- समाधान चाहिए, टकराव नहीं
अनशन के दौरान सोनम वांगचुक ने साफ किया कि उनका उद्देश्य सरकार के साथ टकराव नहीं, बल्कि बातचीत के जरिए समाधान निकालना है। उन्होंने कहा कि अगर केंद्र सरकार उनकी मांगों पर ठोस आश्वासन देती है तो वह अपना आंदोलन समाप्त करने पर विचार कर सकते हैं।
वांगचुक का कहना है कि लद्दाख के लोगों की पहचान, जमीन, रोजगार और पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर उनकी चिंताएं हैं और इन मुद्दों पर गंभीर चर्चा जरूरी है।
JP Nadda का बयान- आपकी चिट्ठी मिली, सरकार कर रही चर्चा
इस पूरे मामले में केंद्रीय मंत्री और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा (JP Nadda) ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक की ओर से भेजी गई चिट्ठी सरकार को मिल गई है और इस विषय पर चर्चा की जा रही है।
नड्डा के बयान के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि केंद्र सरकार और सोनम वांगचुक के बीच बातचीत का रास्ता आगे बढ़ सकता है।
लद्दाख को लेकर क्या मांग कर रहे हैं सोनम वांगचुक?
सोनम वांगचुक लंबे समय से लद्दाख के भविष्य और स्थानीय लोगों के अधिकारों को लेकर आवाज उठा रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
- लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) में शामिल करने की मांग।
- स्थानीय लोगों के जमीन और रोजगार अधिकारों की सुरक्षा।
- हिमालयी क्षेत्र के पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रभावी कदम।
- विकास योजनाओं में स्थानीय लोगों की भागीदारी।
अब बातचीत पर टिकी नजरें
सोनम वांगचुक के बयान और जेपी नड्डा के जवाब के बाद अब सभी की नजर सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संभावित बातचीत पर है। अगर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती है तो लंबे समय से चल रहा यह मुद्दा समाधान की दिशा में बढ़ सकता है।
फिलहाल सोनम वांगचुक मेदांता अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में हैं और आगे की रणनीति सरकार की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगी।
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