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तरुण तेजपाल

2013 Rape Case: तरुण तेजपाल को राहत नहीं, Supreme Court ने दिया Surrender का निर्देश

2013 के रेप केस में दोषी ठहराए गए पूर्व तहलका एडिटर तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी Surrender से छूट की मांग खारिज कर दी। कोर्ट ने साफ कहा कि उन्हें दो हफ्ते के भीतर सरेंडर करना होगा। तरुण तेजपाल ने बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उन्हें मामले में दोषी ठहराते हुए 10 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई गई थी। अब उनकी अपील पर अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी। Supreme Court ने क्या कहा? सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान तेजपाल की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सरेंडर से राहत देने की मांग की। उनका पक्ष था कि मुख्य अपील पर सुनवाई होने तक तेजपाल को जेल जाने से छूट दी जाए। वहीं, गोवा सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसका विरोध किया। सरकार का कहना था कि अदालत के आदेश के मुताबिक पहले सरेंडर किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल सरेंडर से राहत देने से इनकार कर दिया और दो सप्ताह के अंदर सरेंडर करने का निर्देश दिया। साथ ही सरेंडर सर्टिफिकेट अदालत में दाखिल करने को कहा गया है। 10 साल की सजा के खिलाफ Supreme Court पहुंचे तेजपाल यह मामला 2013 का है। आरोप एक महिला सहकर्मी से जुड़े यौन उत्पीड़न के मामले का है। मामले की सुनवाई के दौरान तेजपाल ने आरोपों से इनकार किया था। 2021 में गोवा की ट्रायल कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था। इसके बाद गोवा सरकार ने इस फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी। 6 अगस्त 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलट दिया। हाईकोर्ट ने तेजपाल को दोषी ठहराते हुए उन्हें 10 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके बाद तेजपाल ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। Goa Government ने Life Imprisonment की मांग की मामला यहीं खत्म नहीं हुआ है। गोवा सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर तेजपाल की सजा बढ़ाने की मांग की है। सरकार की मांग है कि 10 साल की सजा को बढ़ाकर आजीवन कारावास किया जाए। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के सामने अब दोषसिद्धि और सजा से जुड़े कई अहम पहलू हैं। अब आगे क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल तेजपाल को दो हफ्ते के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है। इसके बाद उनकी मुख्य अपील पर 22 सितंबर को सुनवाई होनी है। यानी आने वाले दिनों में यह मामला एक बार फिर अदालत में केंद्र में रहेगा। तेजपाल की ओर से हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है, जबकि गोवा सरकार सजा बढ़ाने की मांग कर रही है। फिलहाल सबसे अहम बात यही है कि सुप्रीम कोर्ट ने सरेंडर से राहत नहीं दी है और तेजपाल को निर्धारित समय के भीतर कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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TRE-4

Patna में TRE-4 Protest तेज: छात्रों और पुलिस में झड़प, Water Cannon का इस्तेमाल; परीक्षा Pattern पर विवाद

बिहार की राजधानी पटना में TRE-4 Exam को लेकर अभ्यर्थियों का गुस्सा अब सड़कों पर दिखाई दे रहा है। शिक्षक भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों का कहना है कि परीक्षा के नियमों में बदलाव से उनकी परेशानी बढ़ गई है। अपनी मांगों को लेकर बड़ी संख्या में अभ्यर्थी प्रदर्शन कर रहे हैं। मंगलवार को प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब छात्रों ने आगे बढ़ने की कोशिश की और पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग की। हालात बिगड़ने पर Water Cannon का इस्तेमाल किया गया। प्रदर्शन के दौरान एक छात्रा के घायल होने की भी खबर सामने आई है। TRE-4 Exam Pattern को लेकर सबसे ज्यादा नाराजगी अभ्यर्थियों का मुख्य विरोध BPSC TRE-4 परीक्षा के Pattern को लेकर है। छात्रों की मांग है कि परीक्षा को एक चरण में कराया जाए और भर्ती प्रक्रिया को पहले की तरह सरल एवं स्पष्ट रखा जाए। छात्रों का कहना है कि परीक्षा के नियमों में बदलाव से उनकी तैयारी प्रभावित हो रही है। उनका यह भी कहना है कि प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में उम्मीदवार महीनों मेहनत करते हैं, इसलिए परीक्षा से जुड़े नियमों में किसी भी बदलाव की जानकारी पहले से स्पष्ट होनी चाहिए। Single Stage Exam और No Negative Marking की मांग प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थी Single Stage Examination की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही वे No Negative Marking की व्यवस्था चाहते हैं। छात्रों का तर्क है कि Negative Marking होने से परीक्षा में प्रश्न हल करने की रणनीति बदल जाएगी। उनका कहना है कि अगर परीक्षा का पैटर्न बदला जा रहा है तो BPSC को अभ्यर्थियों की चिंताओं को भी गंभीरता से सुनना चाहिए। Patna में प्रदर्शन के दौरान बढ़ा तनाव TRE-4 अभ्यर्थियों का प्रदर्शन पटना के गर्दनीबाग इलाके में लंबे समय से चल रहा है। मंगलवार को प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर आगे बढ़ने की कोशिश की। पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोकने की कोशिश की। इसके बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव बढ़ गया। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए Water Cannon का इस्तेमाल किया। इस दौरान धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। प्रदर्शन के दौरान एक छात्रा के घायल होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि चोट की परिस्थितियों को लेकर अलग-अलग दावे हैं, इसलिए इस मामले में आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना जरूरी है। BPSC के बयान से भी नाराज हुए छात्र TRE-4 परीक्षा को लेकर विवाद केवल परीक्षा Pattern तक सीमित नहीं है। हाल में BPSC के परीक्षा नियंत्रक की एक टिप्पणी को लेकर भी अभ्यर्थियों में नाराजगी देखने को मिली थी। विवाद बढ़ने के बाद संबंधित अधिकारी की ओर से बयान पर खेद जताया गया। लेकिन छात्रों की नाराजगी पूरी तरह खत्म नहीं हुई। अभ्यर्थियों का कहना है कि उनकी असली चिंता परीक्षा व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया को लेकर है। आंदोलन को मिला राजनीतिक समर्थन TRE-4 अभ्यर्थियों के आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। विपक्षी नेताओं ने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से उनकी समस्याओं का समाधान करने की अपील की है। RJD नेता तेजस्वी यादव ने भी प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने की मांग की। छात्रों की मांग साफ, अब सरकार के फैसले का इंतजार प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि वे किसी टकराव के लिए सड़क पर नहीं आए हैं। उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि TRE-4 Exam Pattern को लेकर स्थिति साफ की जाए और उम्मीदवारों के हित में फैसला लिया जाए। अब निगाहें बिहार सरकार और BPSC के अगले कदम पर हैं। अगर छात्रों की मांगों पर जल्द कोई स्पष्ट फैसला नहीं आता है, तो आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है। फिलहाल पटना का TRE-4 Protest बिहार में सरकारी शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं की चिंता को सामने ला रहा है। छात्रों के लिए यह सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि उनके लंबे समय से देखे जा रहे सरकारी नौकरी के सपने से जुड़ा मामला है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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UPI

UPI के 10 साल पूरे: ₹1.78 करोड़ से हजारों करोड़ तक पहुंचा सफर, PM Modi ने किया याद

भारत में आज मोबाइल से चंद सेकंड में पैसे भेजना जितना आसान लगता है, दस साल पहले इसकी कल्पना भी इतनी आम नहीं थी। UPI यानी Unified Payments Interface ने इसी बदलाव को संभव बनाया। साल 2016 में शुरू हुआ UPI अब अपने 10 साल पूरे कर चुका है और इस दौरान इसने भारत के Digital Payment सिस्टम की पूरी तस्वीर बदल दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने UPI की 10वीं वर्षगांठ पर सोशल मीडिया के जरिए इस खास सफर को याद किया। उन्होंने UPI को भारत की डिजिटल तरक्की की एक बड़ी मिसाल बताते हुए इससे जुड़े लोगों के योगदान की सराहना की। ₹1.78 करोड़ से शुरू होकर ₹24,162 करोड़ तक पहुंचा UPI UPI की शुरुआत के समय इसके जरिए होने वाले लेनदेन बेहद कम थे। शुरुआती दौर में इसका सालाना ट्रांजैक्शन करीब ₹1.78 करोड़ था। लेकिन अगले कुछ वर्षों में स्मार्टफोन, इंटरनेट और Digital Banking के बढ़ते इस्तेमाल ने UPI को तेजी से आगे बढ़ाया। आज यही आंकड़ा बढ़कर करीब ₹24,162 करोड़ सालाना ट्रांजैक्शन तक पहुंच गया है। यह बदलाव सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं है, बल्कि बताता है कि भारतीयों ने डिजिटल पेमेंट को कितनी तेजी से अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में अपनाया। चाय की दुकान से बड़े कारोबार तक पहुंचा QR Payment UPI की असली ताकत उसकी सादगी रही। सड़क किनारे चाय बेचने वाला हो या बड़ा कारोबारी, QR Code ने सभी के लिए डिजिटल भुगतान का रास्ता आसान कर दिया। अब किसी दुकान पर कैश नहीं है तो परेशानी नहीं। मोबाइल निकाला, QR Code स्कैन किया और Payment पूरा। यही सुविधा UPI को आम लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय बनाने में अहम रही। Cashless India की दिशा में बड़ा कदम UPI ने भारत में Cashless Economy को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। छोटे भुगतान से लेकर बड़े लेनदेन तक, डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल लगातार बढ़ा है। खास बात यह है कि इसके लिए ग्राहक को अलग से कोई जटिल प्रक्रिया अपनाने की जरूरत नहीं पड़ती। बैंक अकाउंट और मोबाइल के जरिए भुगतान करना काफी आसान हो गया है। PM Modi ने UPI के सफर को बताया खास UPI के 10 साल पूरे होने के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक खास पोस्ट साझा किया। उन्होंने इस डिजिटल पेमेंट सिस्टम के विकास को भारत की तकनीकी क्षमता और Innovation से जोड़ते हुए इससे जुड़े लोगों की तारीफ की। UPI ने न केवल देश के भीतर भुगतान को आसान बनाया, बल्कि भारत के Digital Public Infrastructure की चर्चा को भी दुनिया तक पहुंचाया है। भारत से बाहर भी बढ़ी UPI की पहचान पिछले कुछ वर्षों में UPI की चर्चा भारत के बाहर भी बढ़ी है। अलग-अलग देशों के साथ Digital Payment Connectivity बढ़ने से भारतीय यात्रियों और कारोबारियों के लिए भी भुगतान के नए रास्ते खुले हैं। इससे भारत के उस मॉडल को भी मजबूती मिली है, जिसमें Technology को आम लोगों की जरूरतों से जोड़कर बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जाता है। 10 साल बाद भी UPI की कहानी जारी 2016 में शुरू हुआ UPI आज करोड़ों लोगों की रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है। ₹1.78 करोड़ से ₹24,162 करोड़ तक पहुंचा इसका सफर भारत में Digital Payment Revolution की तस्वीर सामने रखता है। आने वाले समय में UPI को और सुरक्षित, तेज और सुविधाजनक बनाने की दिशा में काम जारी रहने की उम्मीद है। फिलहाल, UPI के 10 साल पूरे होना इस बात का प्रमाण है कि सही Technology जब आम आदमी के हाथ में पहुंचती है, तो बदलाव बहुत बड़े स्तर पर दिखाई देता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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TMC

TMC vs Rebel MPs: 20 सांसदों की Disqualification पर Supreme Court का बड़ा कदम

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों की सदस्यता को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। पार्टी की ओर से दायर याचिका पर शीर्ष अदालत ने संबंधित सांसदों को नोटिस जारी किया है। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। मामला केवल सांसदों की सदस्यता तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में दल-बदल कानून, लोकसभा स्पीकर के अधिकार और अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला लेने में हो रही देरी जैसे अहम सवाल भी हैं। 20 सांसदों की Disqualification का क्या है मामला? TMC का आरोप है कि उसके टिकट पर चुनाव जीतने वाले 20 सांसदों ने बाद में पार्टी से अलग रुख अपनाया और दूसरे राजनीतिक संगठन के साथ जाने की कोशिश की। पार्टी ने इसे संविधान की दसवीं अनुसूची यानी Anti-Defection Law के तहत कार्रवाई योग्य बताया है। TMC की ओर से इन सांसदों की सदस्यता खत्म करने की मांग करते हुए लोकसभा स्पीकर के समक्ष अयोग्यता याचिकाएं दाखिल की गई थीं। पार्टी का कहना है कि इन याचिकाओं पर अपेक्षित तेजी से फैसला नहीं हुआ। हालांकि, बागी सांसदों की ओर से अलग दलील रखी गई है। उनका कहना है कि उनका कदम कानूनी राजनीतिक विलय के दायरे में आता है और इसलिए उन्हें दल-बदल कानून के तहत अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। Abhishek Banerjee ने उठाया मामला इस मामले को लेकर TMC के महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने पहले लोकसभा स्पीकर से भी जल्द फैसला लेने की मांग की थी। पार्टी की ओर से कहा गया कि अयोग्यता याचिकाओं को लंबे समय तक लंबित रखना उचित नहीं है। जब मामला आगे नहीं बढ़ा तो TMC ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। पार्टी की प्रमुख मांग है कि अयोग्यता याचिकाओं पर Time-Bound Decision लिया जाए। SC के Notice से क्या बदलेगा? सुप्रीम कोर्ट का नोटिस जारी होना फिलहाल यह नहीं बताता कि 20 सांसदों को अयोग्य घोषित कर दिया गया है। अदालत अब संबंधित पक्षों का जवाब सुनकर मामले की कानूनी स्थिति पर विचार करेगी। यही वजह है कि इस मामले में अगली सुनवाई को बेहद अहम माना जा रहा है। अदालत के सामने यह सवाल भी रहेगा कि अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला लेने में देरी की स्थिति में न्यायिक हस्तक्षेप की सीमा क्या हो सकती है। Anti-Defection Law पर भी नजर भारत में दल-बदल रोकने के लिए संविधान की दसवीं अनुसूची में प्रावधान किए गए हैं। किसी सांसद के पार्टी बदलने या पार्टी के निर्देशों के खिलाफ जाने की स्थिति में अयोग्यता का सवाल उठ सकता है। हालांकि, कानून में कुछ अपवाद भी मौजूद हैं। TMC और बागी सांसदों के बीच विवाद इसी कानूनी ढांचे की अलग-अलग व्याख्या से जुड़ा हुआ है। इसलिए मामला सिर्फ राजनीतिक लड़ाई नहीं, बल्कि संसदीय कानून के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बन गया है। आगे क्या होगा? अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर है। 20 बागी सांसदों को नोटिस मिलने के बाद मामले में सभी पक्षों की दलीलें सामने आएंगी। इसके बाद अदालत यह तय कर सकती है कि अयोग्यता याचिकाओं को लेकर आगे किस तरह की प्रक्रिया अपनाई जाए। फिलहाल इतना साफ है कि TMC के 20 Rebel MPs का Disqualification Case अब संसद से निकलकर देश की सबसे बड़ी अदालत तक पहुंच चुका है। आने वाले दिनों में इस मामले का राजनीतिक असर जितना महत्वपूर्ण होगा, उतना ही इसकी कानूनी दिशा पर भी नजर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gurugram

Gurugram में बारिश बनी आफत! Waterlogging से सड़कें जाम, School-Office पर बड़ा फैसला

गुरुग्राम (Gurugram) में सोमवार को हुई तेज बारिश ने एक बार फिर शहर की तैयारियों की पोल खोल दी। कुछ घंटों की बारिश के बाद ही कई इलाकों में पानी भर गया। सड़कें तालाब जैसी नजर आने लगीं और कई प्रमुख मार्गों पर वाहनों की रफ्तार थम गई। हालात ऐसे बने कि लोगों को घंटों ट्रैफिक में फंसे रहना पड़ा। बारिश और जलभराव को देखते हुए प्रशासन ने मंगलवार, 25 अगस्त को स्कूलों में Online Classes चलाने और सरकारी व निजी संस्थानों के कर्मचारियों को Work From Home (WFH) की सलाह दी। तेज बारिश के बाद सड़कें बनीं जलमग्न गुरुग्राम में बारिश के बाद राजीव चौक, IFFCO चौक, रेलवे रोड, ओल्ड दिल्ली रोड, मेहरौली रोड, बसई रोड और नरसिंहपुर समेत कई इलाकों में जलभराव की शिकायतें सामने आईं। कुछ अंडरपास और निचले इलाकों में भी पानी जमा होने से लोगों की परेशानी बढ़ गई। दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे समेत कई व्यस्त सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। ऑफिस से लौट रहे लोगों और जरूरी काम से बाहर निकले लोगों को काफी समय तक जाम का सामना करना पड़ा। School Buses फंसीं, Parents की बढ़ी चिंता बारिश का सबसे ज्यादा असर उस समय दिखाई दिया जब कई स्कूल बसें जलभराव वाले रास्तों में फंस गईं। बच्चों के देर से घर पहुंचने की खबरों के बाद अभिभावकों की चिंता बढ़ गई। ऐसे हालात को देखते हुए अगले दिन स्कूलों में ऑफलाइन पढ़ाई के बजाय Online Classes कराने का फैसला लिया गया। इससे बच्चों और शिक्षकों को जलभराव वाले रास्तों से आने-जाने की परेशानी से बचाने की कोशिश की गई। Offices के लिए WFH Advisory गुरुग्राम प्रशासन ने 25 अगस्त के लिए Work From Home Advisory जारी की। कॉरपोरेट, सरकारी और निजी संस्थानों से कर्मचारियों को संभव हो तो घर से काम कराने की अपील की गई। इस फैसले का मकसद सिर्फ कर्मचारियों की परेशानी कम करना नहीं है। प्रशासन के मुताबिक, अगर कम लोग सड़कों पर निकलेंगे तो ट्रैफिक का दबाव घटेगा और जलभराव वाले इलाकों में राहत एवं निकासी का काम तेजी से किया जा सकेगा। बारिश ने फिर उठाए Drainage System पर सवाल गुरुग्राम देश के बड़े कॉरपोरेट और IT हब में गिना जाता है। यहां रोजाना हजारों लोग काम के लिए अलग-अलग इलाकों से आते-जाते हैं। ऐसे में बारिश के बाद सड़कों पर पानी भरना और ट्रैफिक व्यवस्था का बिगड़ना सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि शहर के Urban Infrastructure के लिए भी बड़ी चुनौती है। हर साल मानसून के दौरान जलभराव की तस्वीरें सामने आने के बाद एक सवाल बार-बार उठता है—क्या गुरुग्राम का Drainage System तेज बारिश का सामना करने के लिए पर्याप्त है? Delhi-NCR में भी बारिश का असर गुरुग्राम के अलावा दिल्ली-NCR के कई इलाकों में भी भारी बारिश का असर देखने को मिला। कई जगह जलभराव और ट्रैफिक की समस्या सामने आई। मौसम विभाग ने भी क्षेत्र में बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया था। फिलहाल प्रशासन की कोशिश जलभराव वाले इलाकों से पानी निकालने, ट्रैफिक को नियंत्रित करने और लोगों को सुरक्षित रखने की है। Gurugram Rain से लोगों को मिला एक और सबक गुरुग्राम में कुछ घंटों की बारिश ने शहर की चमकती तस्वीर के पीछे की एक पुरानी समस्या फिर सामने ला दी। सड़कें डूबने के बाद स्कूलों को Online और कर्मचारियों को WFH करना पड़ा। अब नजर इस बात पर है कि बारिश थमने के बाद प्रशासन सिर्फ पानी निकालने तक सीमित रहता है या अगले मानसून से पहले Drainage System को मजबूत करने की ठोस तैयारी भी होती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Hijab

School में Hijab पहनने पर Allahabad HC का फैसला, मुस्लिम छात्रा को नहीं मिली राहत

स्कूल की यूनिफॉर्म और हिजाब (Hijab) को लेकर चल रही बहस के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने प्रयागराज के एक निजी स्कूल की मुस्लिम छात्रा की याचिका खारिज कर दी। छात्रा ने स्कूल की तय यूनिफॉर्म के साथ Headscarf यानी हिजाब पहनने की अनुमति मांगी थी। अदालत ने कहा कि याचिका में ऐसा पर्याप्त आधार नहीं दिया गया, जिससे यह साबित हो कि स्कूल में हेडस्कार्फ पहनना इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा है। क्या है Hijab और School Uniform का पूरा मामला? मामला प्रयागराज के टैगोर पब्लिक स्कूल से जुड़ा है। छात्रा ने अपनी मां के माध्यम से हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उसका कहना था कि वह कक्षा 6 से 10 तक इसी स्कूल में पढ़ी और इस दौरान हेडस्कार्फ पहनती रही। उस समय स्कूल की ओर से इस पर आपत्ति नहीं जताई गई थी। कक्षा 11 में पहुंचने के बाद स्कूल के ड्रेस कोड को लेकर विवाद सामने आया। छात्रा चाहती थी कि उसे निर्धारित यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की अनुमति दी जाए। मामला बढ़ने के बाद परिवार ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। School का क्या था पक्ष? स्कूल की ओर से कहा गया कि संस्थान में सभी विद्यार्थियों के लिए एक समान Dress Code लागू है। स्कूल एक निजी और CBSE से संबद्ध संस्थान है और उसकी यूनिफॉर्म नीति सभी छात्रों पर समान रूप से लागू होती है। स्कूल ने यह भी तर्क दिया कि ड्रेस कोड का मकसद विद्यार्थियों के बीच समानता और अनुशासन बनाए रखना है। किसी एक विद्यार्थी के लिए अलग नियम बनाने से यूनिफॉर्म की एकरूपता प्रभावित हो सकती है। Allahabad High Court ने क्या फैसला दिया? जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की डिविजन बेंच ने छात्रा की याचिका खारिज कर दी। अदालत के सामने मुख्य सवाल यह था कि क्या स्कूल में हेडस्कार्फ पहनना ऐसी Essential Religious Practice है, जिसके आधार पर छात्रा को स्कूल की निर्धारित यूनिफॉर्म से अलग पहनावे की अनुमति दी जानी चाहिए। कोर्ट ने माना कि छात्रा की ओर से इस दावे को साबित करने के लिए पर्याप्त सामग्री पेश नहीं की गई। इसी आधार पर अदालत ने स्कूल के ड्रेस कोड में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। पहले हिजाब पहनती थी छात्रा, फिर विवाद क्यों हुआ? मामले में छात्रा की ओर से यह महत्वपूर्ण दलील दी गई कि वह कई सालों से स्कूल में हेडस्कार्फ पहनती आ रही थी। लेकिन कोर्ट ने इस तर्क को पर्याप्त नहीं माना। अदालत ने स्पष्ट किया कि अतीत में स्कूल की ओर से किसी नियम पर आपत्ति नहीं जताए जाने का मतलब यह नहीं है कि भविष्य में भी उसी व्यवस्था को जारी रखना छात्रा का स्थायी कानूनी अधिकार बन जाता है। यानी स्कूल अगर बाद में अपने तय Uniform Rules को लागू करता है, तो केवल पुरानी व्यवस्था के आधार पर उसे रोकना जरूरी नहीं है। Court ने Uniform को लेकर क्या कहा? हाईकोर्ट ने स्कूल के यूनिफॉर्म नियम को भी मामले का महत्वपूर्ण हिस्सा माना। अदालत के अनुसार, यदि ड्रेस कोड सभी विद्यार्थियों पर समान रूप से लागू होता है और उसके पीछे अनुशासन तथा संस्थान की पहचान जैसे उद्देश्य हैं, तो केवल व्यक्तिगत पसंद के आधार पर उसमें बदलाव की मांग स्वीकार करना जरूरी नहीं है। यही वजह रही कि इस मामले में कोर्ट ने स्कूल प्रशासन के पक्ष में फैसला दिया। Karnataka Hijab Case का भी हुआ जिक्र इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कर्नाटक हिजाब केस का भी संदर्भ दिया। 2022 में कर्नाटक हाईकोर्ट ने भी हिजाब को इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा मानने से इनकार किया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि उसके सामने ऐसा पर्याप्त आधार नहीं रखा गया है, जिसके चलते वह उस दृष्टिकोण से अलग निष्कर्ष पर पहुंचे। हालांकि हिजाब और धार्मिक स्वतंत्रता का संवैधानिक मुद्दा व्यापक है और अलग परिस्थितियों में अदालतों के सामने इसके अलग पहलू उठ सकते हैं। क्या हर स्कूल में अब हिजाब पर रोक लग गई? नहीं। इस फैसले को इस तरह समझना सही नहीं होगा कि देश के सभी स्कूलों में हिजाब पर एक समान रोक लगा दी गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला एक विशेष स्कूल की यूनिफॉर्म नीति और उसके सामने रखे गए तथ्यों से जुड़ा है। इसलिए अलग स्कूल, अलग ड्रेस कोड या अलग परिस्थितियों में कानूनी स्थिति अलग हो सकती है। Hijab vs Uniform: क्यों अहम है यह फैसला? इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस फैसले ने एक बार फिर Religious Freedom और School Dress Code के बीच संतुलन की बहस को चर्चा में ला दिया है। एक तरफ धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत अधिकारों का सवाल है, तो दूसरी तरफ स्कूल की यूनिफॉर्म, अनुशासन और समानता का मुद्दा है। फिलहाल इस मामले में हाईकोर्ट ने छात्रा को स्कूल की निर्धारित यूनिफॉर्म के साथ हेडस्कार्फ पहनने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। फैसला आने के बाद यह मुद्दा एक बार फिर सार्वजनिक बहस के केंद्र में आ गया है।
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Patna Airport

Patna Airport पर Bird Strike से हड़कंप, 164 यात्रियों वाली फ्लाइट की Safe Landing

पटना एयरपोर्ट (Patna Airport) पर सोमवार सुबह एक बार फिर विमान की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाने वाली घटना सामने आई। दिल्ली से पटना आ रही एक फ्लाइट लैंडिंग के दौरान पक्षी से टकरा गई। विमान में 164 यात्री सवार थे। गनीमत रही कि पायलट ने विमान को सुरक्षित रनवे पर उतार लिया और हादसे में किसी यात्री के घायल होने की खबर नहीं है। Landing के दौरान विमान से टकराया पक्षी दिल्ली से पटना पहुंची फ्लाइट जब लैंडिंग के लिए नीचे आ रही थी, तभी विमान से पक्षी टकरा गया। पायलट ने तुरंत एयरपोर्ट कंट्रोल को इसकी जानकारी दी। इसके बाद एयरपोर्ट पर सुरक्षा व्यवस्था को अलर्ट कर दिया गया। विमान के सुरक्षित उतरने के बाद यात्रियों को बाहर निकाला गया। इसके बाद तकनीकी टीम ने विमान की जांच की। शुरुआती जांच में किसी बड़े नुकसान की बात सामने नहीं आई। यात्रियों के लिए यह पल निश्चित तौर पर डराने वाला रहा होगा। हालांकि, क्रू की सतर्कता और समय पर उठाए गए सुरक्षा कदमों के कारण स्थिति नियंत्रण में रही। 7 दिन में Bird Hit की दूसरी घटना पटना एयरपोर्ट पर Bird Hit का यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि एक सप्ताह के भीतर यह दूसरी ऐसी घटना बताई जा रही है। इससे पहले भी दिल्ली-पटना रूट पर आने वाली फ्लाइट पक्षी से टकराई थी। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने एयरपोर्ट के आसपास पक्षियों की मौजूदगी और रनवे की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। टेक-ऑफ और लैंडिंग के दौरान Bird Strike को विमानन सुरक्षा के लिहाज से गंभीर माना जाता है। बारिश के मौसम में बढ़ती है चुनौती मानसून के दौरान एयरपोर्ट के आसपास हरियाली और कीड़े-मकौड़ों की संख्या बढ़ने से पक्षियों की गतिविधियां भी बढ़ सकती हैं। यही वजह है कि बारिश के मौसम में एयरपोर्ट प्रशासन को रनवे और उसके आसपास के इलाके की लगातार निगरानी करनी पड़ती है। पटना एयरपोर्ट के आसपास Bird Activity को कम करने के लिए अलग-अलग सुरक्षा उपाय किए जाते हैं। रनवे क्षेत्र में पक्षियों की गतिविधि पर नजर रखने के साथ उन्हें दूर रखने के लिए Bird Chasers जैसी व्यवस्था का इस्तेमाल भी किया जाता है। 164 यात्रियों की सुरक्षित लैंडिंग सबसे बड़ी राहत इस घटना में सबसे राहत वाली बात यही रही कि 164 यात्रियों से भरा विमान सुरक्षित पटना पहुंच गया। किसी यात्री के घायल होने की सूचना नहीं है। विमान की तकनीकी जांच के बाद ही आगे की उड़ान से जुड़े फैसले लिए जाते हैं। हालांकि, एक ही सप्ताह में Bird Hit की दो घटनाएं सामने आने के बाद एयरपोर्ट प्रशासन के सामने चुनौती साफ है। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए रनवे के आसपास Bird Movement को नियंत्रित करना बेहद जरूरी है। क्यों गंभीर है Bird Strike? विमान के उड़ान भरते या उतरते समय पक्षी से टकराव को Bird Strike कहा जाता है। छोटे स्तर की घटना में नुकसान सीमित रह सकता है, लेकिन बड़े पक्षी या तेज गति से टकराव की स्थिति में विमान के महत्वपूर्ण हिस्से प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए एयरपोर्ट पर Bird Control System विमान सुरक्षा का अहम हिस्सा माना जाता है। फिलहाल पटना एयरपोर्ट की इस घटना में बड़ी राहत यही है कि विमान सुरक्षित उतर गया और सभी 164 यात्री सुरक्षित रहे। लेकिन लगातार हो रही Bird Hit की घटनाएं एयरपोर्ट के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत जरूर दिखाती हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Balen Shah

Balen Shah से मोहभंग? Nepal के Gen-Z PM के 150 दिन, उपलब्धियों से ज्यादा विवाद

नेपाल की राजनीति में बालेन शाह (Balen Shah) का नाम कभी बदलाव, युवा सोच और पुरानी व्यवस्था को चुनौती देने वाले नेता के तौर पर लिया जाता था। Gen-Z के बीच उनकी लोकप्रियता ने उन्हें अलग पहचान दिलाई और सत्ता तक पहुंचाया। लेकिन प्रधानमंत्री बनने के करीब 150 दिन बाद सवाल उठने लगा है—क्या जनता का अपने इस नए नेता से मोहभंग होने लगा है? बालेन शाह के सामने अब वह चुनौती है, जो किसी भी नए नेता के लिए सबसे मुश्किल होती है। चुनावी वादों और उम्मीदों को जमीन पर उतारना। शुरुआती महीनों में सरकार ने कई फैसलों को अपनी उपलब्धि बताया है, लेकिन संसद से दूरी, राजनीतिक संवाद और जनता से जुड़े विवादों ने उनकी सरकार की छवि को झटका दिया है। Balen Shah के 150 दिन: उम्मीद बड़ी, सवाल भी बड़े बालेन शाह ने 27 मार्च 2026 को नेपाल के प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। इससे पहले काठमांडू के मेयर के तौर पर उन्होंने अपनी सख्त और सीधे फैसले लेने वाली कार्यशैली से खूब सुर्खियां बटोरी थीं। यही वजह थी कि जब उनकी पार्टी RSP को चुनाव में बड़ी सफलता मिली तो युवाओं को लगा कि नेपाल की राजनीति में अब कुछ अलग होने वाला है। लेकिन प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्हें सिर्फ लोकप्रिय नेता नहीं, बल्कि एक पूरी सरकार चलाने वाले मुखिया के तौर पर खुद को साबित करना पड़ा। सरकार का दावा है कि उसके शुरुआती एजेंडे पर अच्छी प्रगति हुई है। हालांकि, विपक्ष और आलोचकों की नजर में तस्वीर इतनी आसान नहीं है। Parliament से दूरी बनी बड़ा मुद्दा बालेन शाह की कार्यशैली पर सबसे ज्यादा सवाल उनकी Parliament Attendance को लेकर उठ रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, शुरुआती 39 संसदीय बैठकों में प्रधानमंत्री केवल 5 बैठकों में मौजूद रहे। विपक्षी सांसदों ने इसे गंभीर मुद्दा बनाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को संसद में उपस्थित होकर सरकार के कामकाज और नीतियों पर जवाब देना चाहिए। अब संसद के स्पीकर ने बालेन शाह को 26 अगस्त को सदन में मौजूद होकर सांसदों के सवालों का जवाब देने को कहा है। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जिस नेता से युवाओं ने पारदर्शिता और जवाबदेही की उम्मीद की थी, उसी की संसद में कम मौजूदगी अब राजनीतिक बहस का विषय बन गई है। जनता के मुद्दों पर सरकार घिरी काठमांडू में अनौपचारिक बस्तियों और जमीन पर रहने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर भी सरकार को आलोचना झेलनी पड़ी। प्रभावित लोगों ने पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। जुलाई में एक राइड-शेयर ड्राइवर की मौत के बाद भी सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठे। इस घटना ने अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने वाले लोगों और प्रशासन के बीच तनाव को सामने ला दिया। इन घटनाओं ने सरकार के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है—सख्त प्रशासन और संवेदनशील शासन के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए? Foreign Policy पर भी बढ़ी नजर प्रधानमंत्री बनने के बाद बालेन शाह की विदेश नीति भी चर्चा में रही। भारत और चीन जैसे पड़ोसी देशों के साथ संबंध नेपाल के लिए हमेशा संवेदनशील मुद्दा रहे हैं। बालेन शाह के कुछ बयानों और राजनयिक गतिविधियों को लेकर राजनीतिक बहस हुई। हालांकि बाद में उन्होंने भारत और चीन के राजदूतों से मुलाकात भी की। RSP प्रमुख रबी लामिछाने की भारत यात्रा और वहां हुई मुलाकातों ने भी नेपाल की राजनीति में अलग चर्चा पैदा की। इससे यह सवाल उठा कि पार्टी और सरकार के बीच विदेश नीति को लेकर तालमेल कितना मजबूत है। RSP के अंदर भी सबकुछ ठीक है? बालेन शाह के लिए एक और चुनौती अपनी ही पार्टी के भीतर बेहतर तालमेल बनाए रखना है। रिपोर्टों के मुताबिक, 21 अगस्त को RSP की केंद्रीय समिति की अहम बैठक में बालेन शाह शामिल नहीं हुए। बैठक में स्थानीय चुनावों की तैयारियों समेत कई राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा होनी थी। प्रधानमंत्री का बैठक में शामिल नहीं होना पार्टी के भीतर उनकी भूमिका और नेतृत्व को लेकर अटकलों का कारण बना। हालांकि, इसे सीधे तौर पर किसी बड़े राजनीतिक टकराव का संकेत मानना जल्दबाजी होगी। Gen-Z का भरोसा अब सबसे बड़ी परीक्षा बालेन शाह की राजनीति की सबसे बड़ी ताकत Gen-Z और युवा मतदाताओं का समर्थन रही है। भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और पुराने राजनीतिक दलों से नाराज युवाओं ने उन्हें बदलाव के चेहरे के रूप में देखा। लेकिन सरकार बनने के बाद तस्वीर बदलती है। अब सिर्फ भाषण या लोकप्रिय छवि काफी नहीं है। रोजगार, महंगाई, प्रशासन, भ्रष्टाचार और रोजमर्रा की समस्याओं पर जनता ठोस नतीजे चाहती है। यही वजह है कि बालेन शाह के लिए आने वाले महीने बेहद अहम हैं। Balen Shah का Report Card: पास या फेल? 150 दिनों के आधार पर बालेन शाह सरकार को सीधे तौर पर Fail कहना सही नहीं होगा। सरकार ने कुछ फैसलों और प्रशासनिक सुधारों को अपनी उपलब्धि बताया है। लेकिन दूसरी तरफ संसद से दूरी, जनता से जुड़े विवाद और राजनीतिक संवाद की कमी ने कई सवाल खड़े किए हैं। असल परीक्षा अब शुरू होती है। बालेन शाह को यह साबित करना होगा कि वह सिर्फ Gen-Z के लोकप्रिय नेता नहीं, बल्कि नेपाल को लंबे समय तक प्रभावी तरीके से चलाने वाले प्रधानमंत्री भी हैं। जनता ने उन्हें बदलाव के नाम पर मौका दिया है। अब जनता को नारे नहीं, Result चाहिए। यही आने वाले समय में बालेन शाह के राजनीतिक भविष्य का सबसे बड़ा पैमाना बनेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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शिवराज सिंह चौहान

2029 में बदल सकता है Election System! शिवराज सिंह चौहान बोले- 2034 तक इंतजार जरूरी नहीं

One Nation One Election को लेकर देश की राजनीति में फिर से चर्चा तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के एक बयान ने इस मुद्दे को नई हवा दे दी है। चौहान ने कहा है कि देश को एक साथ चुनाव की व्यवस्था के लिए 2034 तक इंतजार करने की जरूरत नहीं है, इसे 2029 में ही लागू किया जा सकता है। उनके इस बयान के बाद अब सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की है कि क्या 2029 Lok Sabha Election के साथ देश में विधानसभा चुनाव भी एक साथ कराए जा सकते हैं। क्या 2029 में बदल जाएगा Election System? One Nation One Election का मतलब लोकसभा और राज्यों की विधानसभा के चुनाव एक साथ कराना है। इसका मकसद देश में बार-बार होने वाले चुनावों की प्रक्रिया को कम करना और एक तय चुनावी चक्र तैयार करना है। शिवराज सिंह चौहान के बयान ने इस संभावना को लेकर राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है। हालांकि, इसे लागू करने के लिए कई संवैधानिक और कानूनी बदलाव जरूरी होंगे। इसलिए अंतिम फैसला संसद की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा। One Nation One Election पर JPC कर रही विचार इस प्रस्ताव से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर Joint Parliamentary Committee (JPC) विचार कर रही है। समिति में इस व्यवस्था के फायदे, चुनौतियां और संभावित कानूनी प्रावधानों पर चर्चा हो रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर किसी राज्य में सरकार अपना कार्यकाल पूरा करने से पहले गिर जाती है या विधानसभा भंग हो जाती है, तो एक साथ चुनाव की व्यवस्था कैसे बनी रहेगी। इसी तरह लोकसभा की स्थिति को लेकर भी स्पष्ट नियम बनाने होंगे। सरकार के मुताबिक क्या होगा फायदा? One Nation One Election के समर्थकों का मानना है कि बार-बार चुनाव कराने से सरकारी संसाधनों और प्रशासनिक व्यवस्था पर दबाव पड़ता है। चुनाव के दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारियों और सुरक्षा बलों की तैनाती करनी पड़ती है। इसके अलावा Model Code of Conduct लागू होने के कारण कई नए सरकारी फैसलों और योजनाओं की घोषणा पर भी रोक लग जाती है। समर्थकों का कहना है कि चुनावों को एक साथ कराने से प्रशासन को लंबे समय तक विकास कार्यों पर ध्यान देने का मौका मिल सकता है। भारत में पहले हो चुके हैं Simultaneous Elections भारत में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने का प्रयोग पहले भी हो चुका है। आजादी के बाद शुरुआती चुनावों में लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ होते थे। 1952, 1957, 1962 और 1967 में देश में बड़े पैमाने पर चुनाव एक साथ हुए थे। बाद में कुछ राज्यों की विधानसभाएं समय से पहले भंग हुईं और धीरे-धीरे लोकसभा तथा विधानसभा चुनावों का चक्र अलग होता चला गया। विपक्ष की क्या है चिंता? One Nation One Election को लेकर विपक्षी दलों की अपनी चिंताएं हैं। उनका कहना है कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने से राज्य स्तर के मुद्दों और क्षेत्रीय दलों को नुकसान हो सकता है। विपक्ष की ओर से संघीय ढांचे को लेकर भी सवाल उठाए जाते रहे हैं। उनका तर्क है कि केंद्र और राज्य के चुनावों में मतदाताओं के सामने अलग-अलग मुद्दे होते हैं, इसलिए दोनों चुनावों को एक साथ कराना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकता है। अब 2029 पर रहेगी नजर फिलहाल One Nation One Election को लेकर अंतिम फैसला अभी बाकी है। कानून में बदलाव और संविधान संशोधन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह साफ होगा कि इसे किस समय से लागू किया जा सकता है। लेकिन शिवराज सिंह चौहान के 2029 वाले बयान ने चुनावी राजनीति में नई बहस जरूर छेड़ दी है। अगर जरूरी कानूनी प्रक्रिया समय पर पूरी हो जाती है, तो 2029 का लोकसभा चुनाव भारत की चुनावी व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। यानी अभी सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि One Nation One Election कब लागू होगा, बल्कि असली चर्चा अब इस बात पर है कि क्या देश 2034 से पहले ही यानी 2029 में एक साथ चुनाव की ओर कदम बढ़ा देगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Yogi

Yogi vs Congress: अयोध्या में Fish Feast पर घमासान, अजय राय ने मांगा सबूत

अयोध्या में कांग्रेस नेता अजय राय के दौरे के बाद शुरू हुआ Fish Feast विवाद अब उत्तर प्रदेश की सियासत में बड़ा मुद्दा बन गया है। सावन के बीच अयोध्या में मछली भोज की खबर सामने आने के बाद बीजेपी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। CM Yogi ने अजय राय के साथ-साथ राहुल गांधी को भी निशाने पर लिया, जबकि कांग्रेस नेता ने आरोपों पर सबूत मांगा है। हनुमानगढ़ी में दर्शन, फिर Fish Feast पर विवाद अजय राय अयोध्या पहुंचे थे। यहां उन्होंने हनुमानगढ़ी में दर्शन किए। उनके दौरे के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों की ओर से स्वागत कार्यक्रम भी रखा गया। इसी कार्यक्रम से कथित तौर पर जुड़े Fish Feast की खबर सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद शुरू हो गया। बीजेपी नेताओं और संतों ने सवाल उठाया कि धार्मिक नगरी अयोध्या में सावन के दौरान इस तरह का आयोजन क्यों किया गया। मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक इस पर खूब चर्चा होने लगी। योगी आदित्यनाथ का कांग्रेस पर हमला विवाद के बीच CM Yogi ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने अजय राय के अयोध्या दौरे और कथित मछली भोज को लेकर सवाल खड़े किए। Yogi ने कहा कि अगर किसी को मछली खानी थी तो अयोध्या से बाहर जाकर खा सकता था। उनके बयान के बाद यह मुद्दा और गरमा गया। मुख्यमंत्री ने इसी दौरान कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने राहुल गांधी पर देश की विरासत और सनातन परंपराओं को लेकर आपत्तिजनक राजनीति करने का आरोप लगाया। योगी ने राहुल गांधी पर कथित रूप से ‘अर्बन नक्सली’ सोच से प्रभावित होने का भी आरोप लगाया। अजय राय का पलटवार- तस्वीर दिखाइए योगी के आरोपों के बाद अजय राय ने भी जवाब दिया। कांग्रेस नेता ने कहा कि यदि उनके खिलाफ मछली भोज में शामिल होने का आरोप लगाया जा रहा है तो इसका प्रमाण सामने रखा जाए। अजय राय ने चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनकी ऐसी तस्वीर सामने आती है, जिसमें वह मछली भोज करते नजर आएं, तो वह इस्तीफा देने तक को तैयार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना ठोस सबूत के उनके खिलाफ राजनीतिक माहौल बनाया जा रहा है। BJP और Congress में बढ़ी बयानबाजी अयोध्या का यह मामला अब सिर्फ एक कार्यक्रम या भोजन तक सीमित नहीं है। बीजेपी इसे धार्मिक भावनाओं से जोड़कर कांग्रेस पर हमला कर रही है, जबकि कांग्रेस आरोपों के सबूत मांग रही है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, अयोध्या जैसे संवेदनशील और धार्मिक शहर से जुड़ा मामला होने के कारण इस विवाद का राजनीतिक असर सामान्य विवादों की तुलना में ज्यादा हो सकता है। क्या है पूरा विवाद? दरअसल, अजय राय के अयोध्या दौरे के दौरान उनके स्वागत कार्यक्रम और कथित मछली भोज को लेकर विवाद शुरू हुआ। बीजेपी ने इसे मुद्दा बनाकर कांग्रेस पर निशाना साधा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस मामले पर बयान दिया। दूसरी ओर, अजय राय ने खुद मछली भोज में शामिल होने के आरोप को चुनौती देते हुए सबूत सार्वजनिक करने की मांग की है। ऐसे में विवाद के केंद्र में यही सवाल है कि कार्यक्रम में वास्तव में क्या हुआ और उसमें अजय राय की भूमिका क्या थी। फिलहाल अयोध्या का यह Fish Feast विवाद यूपी की राजनीति में चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है। बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sugar

Sugar Rate Hike: त्योहारों से पहले चीनी के दाम बढ़े, Blinkit-Swiggy पर खरीदना हुआ Limited

चीनी (Sugar), जो हर घर की रसोई की रोजमर्रा की जरूरत है, इन दिनों लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है। पिछले कुछ हफ्तों में चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसी बीच Blinkit, Swiggy Instamart, BigBasket और D-Mart जैसे रिटेल और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर चीनी की खरीद को लेकर लिमिट लगाई गई है। कई जगहों पर ग्राहक एक बार में 3 से 5 किलो तक ही चीनी खरीद पा रहे हैं। यानी अगर घर में ज्यादा मात्रा में चीनी खरीदने की जरूरत है, तो एक साथ बड़ी खरीदारी करना अब आसान नहीं है। Sugar Price: एक महीने में तेजी से बढ़े दाम Sugar की कीमतों में हालिया तेजी ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब ₹48 प्रति किलो के आसपास थी, जो अगस्त में बढ़कर ₹55 से ऊपर पहुंच गई। इसके बाद कुछ बाजारों में कीमतें और ऊपर गई हैं। शहर और बाजार के हिसाब से कीमतों में अंतर जरूर है, लेकिन जिस रफ्तार से दाम बढ़े हैं, उसका असर घर के मासिक बजट पर साफ दिखाई दे रहा है। Online Grocery पर क्यों लगाई गई खरीद Limit? Blinkit और Swiggy Instamart जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर खरीदारी की लिमिट लगाए जाने के पीछे मुख्य वजह उपलब्ध स्टॉक को संतुलित रखना मानी जा रही है। त्योहारी सीजन में चीनी की मांग अचानक बढ़ जाती है। मिठाइयों से लेकर घर में बनने वाले पकवानों तक, इस दौरान चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसे में कंपनियां ज्यादा मात्रा में खरीदारी को रोककर स्टॉक को ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, यह लिमिट हर जगह एक जैसी नहीं है। कुछ स्थानों पर 5 किलो तक की खरीद की अनुमति है, जबकि कुछ जगहों पर इससे कम मात्रा की सीमा दिखाई दे रही है। चीनी महंगी होने की क्या है वजह? चीनी के दाम बढ़ने के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। घरेलू उत्पादन में कमी, मौसम से जुड़ी परेशानियां, बढ़ती मांग और बाजार में स्टॉक को लेकर गतिविधियां कीमतों पर दबाव बना रही हैं। त्योहारी सीजन भी इस समय एक बड़ा फैक्टर है। रक्षाबंधन के बाद अब आने वाले त्योहारों में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने की उम्मीद है। इसका सीधा असर चीनी की खपत पर पड़ सकता है। सरकार ने Duty-Free Sugar Import को दी मंजूरी बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने और घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के Duty-Free Import की अनुमति दी है। सरकार का लक्ष्य बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों पर दबाव कम करना है। इसके अलावा बड़े थोक खरीदारों के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा में भी बदलाव किया गया है। इससे बाजार में जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करने की गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है। आम लोगों के लिए क्या मतलब? फिलहाल इसका सबसे सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो महीने का राशन एक साथ खरीदते हैं। जहां दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खरीद सीमा लागू है, वहां लोगों को जरूरत के हिसाब से छोटी मात्रा में चीनी खरीदनी पड़ सकती है। दूसरी तरफ, सरकार की ओर से सप्लाई बढ़ाने के कदमों के बाद बाजार में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। अगर नई चीनी समय पर बाजार में पहुंचती है और त्योहारी मांग के मुताबिक स्टॉक उपलब्ध रहता है, तो कीमतों में आगे राहत मिल सकती है। Sugar Price पर आगे रहेगी नजर चीनी के बढ़ते दाम इस समय सिर्फ घरेलू बजट का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि आने वाले त्योहारी सीजन के लिए भी अहम हैं। सरकार, मिलों और रिटेल कंपनियों के फैसलों पर अब बाजार की नजर रहेगी। फिलहाल ग्राहकों के लिए बेहतर यही है कि जरूरत के मुताबिक ही खरीदारी करें और अलग-अलग दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कीमतों की तुलना कर लें। आने वाले दिनों में सप्लाई की स्थिति साफ होने के साथ चीनी के दाम में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
Gold-Silver

Gold-Silver Price: त्योहार से पहले मिली राहत, सोना-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट

Gold-Silver Price Today: रक्षाबंधन की खरीदारी के बीच सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए बाजार से राहत वाली खबर आई है। 27 अगस्त 2026 को सोने और चांदी दोनों के भाव में गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम सस्ता होकर ₹1,58,477 पर आ गया। वहीं, 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 घटकर करीब ₹2,40,168 रह गया। त्योहार से ठीक पहले कीमतों में आई इस कमी से उन लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है, जो राखी के मौके पर बहन या परिवार के लिए सोने-चांदी की ज्वेलरी खरीदने का मन बना रहे हैं। Gold Price Today: सोने के भाव में ₹2,860 की गिरावट 27 अगस्त को 24 कैरेट सोने की कीमत में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली। IBJA आधारित आंकड़ों के अनुसार, सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम टूटकर ₹1,58,477 पर पहुंच गया। वहीं, 23 कैरेट सोना करीब ₹1,57,842, 22 कैरेट सोना लगभग ₹1,45,165 और 18 कैरेट सोना करीब ₹1,18,858 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर रहा। हालांकि, यहां एक बात ध्यान रखना जरूरी है कि शहर और ज्वेलर के हिसाब से Gold Rate थोड़ा अलग हो सकता है। ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और दूसरे शुल्क भी जुड़ते हैं। Silver Price Today: चांदी भी हुई ₹2,791 सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट आई है। 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 कम होकर करीब ₹2,40,168 पर आ गया। चांदी में पिछले दिनों तेजी देखने को मिली थी, इसलिए मौजूदा गिरावट के बावजूद इसका भाव काफी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में चांदी की मांग बढ़ने से इसकी कीमत पर भी असर पड़ सकता है। Raksha Bandhan से पहले क्यों खास है Gold-Silver Price? रक्षाबंधन के मौके पर लोग सिर्फ राखी और मिठाई ही नहीं खरीदते, बल्कि कई परिवार इस दिन सोने या चांदी की छोटी ज्वेलरी खरीदना भी पसंद करते हैं। ऐसे में त्योहार से एक दिन पहले Gold और Silver के दाम में आई गिरावट खरीदारों के लिए अच्छी खबर मानी जा रही है। अगर आप भी खरीदारी की तैयारी कर रहे हैं तो बाजार में जाने से पहले अपने शहर का ताजा रेट जरूर देख लें। ऑनलाइन दिखने वाला IBJA या बुलियन रेट और ज्वेलरी शॉप का अंतिम बिल एक जैसा होना जरूरी नहीं है। सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान सोने की ज्वेलरी खरीदते समय केवल Gold Rate देखना काफी नहीं है। बिल बनते समय मेकिंग चार्ज, GST और अन्य शुल्क जुड़ सकते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले ज्वेलर से पूरी कीमत का ब्रेकअप मांगना बेहतर रहेगा। साथ ही, सोने की शुद्धता के लिए BIS Hallmark जरूर जांचें। इससे आपको खरीदे जा रहे सोने की शुद्धता के बारे में भरोसा मिलता है। आगे क्या हो सकता है Gold और Silver का भाव? सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, ब्याज दरों की उम्मीद और निवेशकों की खरीदारी जैसे कई फैक्टर कीमती धातुओं के भाव को प्रभावित करते हैं। इसलिए आज आई गिरावट को देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि आने वाले दिनों में कीमतें लगातार नीचे जाएंगी। बाजार की चाल बदलने में ज्यादा समय नहीं लगता। Gold-Silver Price Today का सीधा अपडेट रक्षाबंधन से पहले 24 कैरेट Gold करीब ₹2,860 सस्ता होकर ₹1,58,477 प्रति 10 ग्राम और Silver करीब ₹2,791 गिरकर ₹2,40,168 प्रति किलो पर आ गई है। अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने जा रहे हैं, तो अंतिम खरीदारी से पहले अपने स्थानीय बाजार का लेटेस्ट रेट जरूर जांचें।
Raksha Bandhan

Raksha Bandhan 2026: राखी बांधने से पहले जान लें Bhadra का समय, ये है शुभ Muhurat

Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन के रिश्ते में प्यार, अपनापन और थोड़ी-सी नोकझोंक हमेशा बनी रहती है। इन्हीं खूबसूरत रिश्तों को सेलिब्रेट करने वाला रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। राखी को लेकर इस बार एक सवाल काफी लोगों के मन में है—27 अगस्त या 28 अगस्त, आखिर किस दिन भाई की कलाई पर राखी बांधना शुभ रहेगा? पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। Raksha Bandhan 2026 Date: 27 या 28 अगस्त? रक्षाबंधन सावन मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे के बाद शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे तक रहेगी। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए इसी दिन रक्षाबंधन मनाने की परंपरा रहेगी। यानी बहनें 28 अगस्त को भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। Rakhi Shubh Muhurat 2026: इस समय बांधें राखी 28 अगस्त को राखी बांधने के लिए सुबह का समय शुभ माना जा रहा है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार सुबह करीब 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का समय बताया गया है। हालांकि, शुभ मुहूर्त में शहर के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए अगर आप किसी खास शहर में हैं, तो वहां के पंचांग से समय जरूर मिला लें। Bhadra Kaal: इस बार नहीं होगी बड़ी परेशानी रक्षाबंधन पर भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता। यही वजह है कि हर साल राखी बांधने से पहले लोग भद्रा समाप्त होने का इंतजार करते हैं। इस बार राहत की बात यह है कि 28 अगस्त को राखी बांधने के प्रमुख समय में भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। ऐसे में बहनों को राखी बांधने के लिए भद्रा खत्म होने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। Raksha Bandhan 2026: एक नजर में पूरी जानकारी जानकारी विवरण रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार पर्व सावन पूर्णिमा पूर्णिमा शुरुआत 27 अगस्त की सुबह पूर्णिमा समाप्त 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे राखी बांधने का शुभ समय सुबह करीब 5:57 से 9:48 बजे तक भद्रा 28 अगस्त के प्रमुख राखी मुहूर्त में नहीं Rakhi बांधने की पूजा विधि रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करके भगवान का ध्यान करें और पूजा की तैयारी करें। राखी की थाली में रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, फूल, मिठाई और राखी रखें। भाई को आसन पर बैठाकर पहले तिलक लगाएं। इसके बाद अक्षत लगाकर आरती करें और शुभ मुहूर्त में उसकी कलाई पर राखी बांधें। फिर मिठाई खिलाकर भाई के सुखी और खुशहाल जीवन की कामना करें। भाई भी बहन को प्यार और सम्मान के साथ उपहार देता है और हर परिस्थिति में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प करता है। Raksha Bandhan का असली मतलब क्या है? राखी का धागा देखने में भले ही छोटा हो, लेकिन इसके पीछे छिपी भावना बहुत बड़ी है। बचपन में एक-दूसरे से लड़ने वाले भाई-बहन जब बड़े होते हैं तो यही रिश्ता सबसे मजबूत सहारा बन जाता है। रक्षाबंधन इसी भरोसे और अपनापन को फिर से महसूस करने का दिन है। इसलिए इस बार राखी बांधते समय सिर्फ मुहूर्त ही नहीं, बल्कि उस रिश्ते की मिठास को भी याद रखें, जो जिंदगी के हर पड़ाव पर साथ चलती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Kanpur

Kanpur Plane Crash: अचानक नीचे गिरा Training Plane, दो पायलटों की मौत

उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur) से गुरुवार को एक बेहद दुखद खबर सामने आई। गंगा बैराज के पास नत्थूपुरवा गांव के नजदीक एक Twin-Engine Training Aircraft खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में सवार इंस्ट्रक्टर पायलट और ट्रेनी पायलट की मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने इलाके को घेरकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। Training Flight के दौरान हुआ हादसा मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विमान ट्रेनिंग उड़ान पर था और इसी दौरान हादसे का शिकार हो गया। यह चार सीटों वाला ट्विन-इंजन विमान था। शुरुआती जानकारी में बताया गया कि विमान नीचे गिरने से पहले आसपास के लोगों ने तेज आवाज सुनी थी। हालांकि, उस आवाज की वजह क्या थी, इसे लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि विमान गंगा बैराज के करीब नत्थूपुरवा गांव के पास खुले खेत में गिरा। हादसा आबादी वाले इलाके से कुछ दूरी पर हुआ, जिसके बाद स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। हादसे के बाद मची अफरा-तफरी विमान के खेत में गिरने की सूचना मिलते ही पुलिस और इमरजेंसी टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। दुर्घटनाग्रस्त विमान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था और उसका मलबा खेत में बिखरा मिला। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित किया और दोनों पायलटों को मलबे से बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। शुरुआती रिपोर्टों में एक पायलट की मौत और दूसरे के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई थी। बाद में पुलिस अधिकारियों के हवाले से दोनों पायलटों की मौत की पुष्टि हुई। Crash की असली वजह अभी सामने नहीं आई कानपुर Plane Crash की वजह फिलहाल साफ नहीं है। शुरुआती स्तर पर विमान के अचानक नियंत्रण खोने और नीचे गिरने की बात सामने आई है, लेकिन तकनीकी खराबी, इंजन से जुड़ी समस्या या किसी अन्य कारण की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अधिकारियों की ओर से दुर्घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। विमान के मलबे, उड़ान से जुड़ी जानकारी और घटनास्थल से मिले सबूतों की जांच के बाद ही Crash की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी। Aviation Safety पर फिर उठे सवाल कानपुर में हुआ यह हादसा Flight Training के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल खड़े करता है। हालांकि, अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसा किस वजह से हुआ और क्या इसके पीछे कोई तकनीकी या संचालन संबंधी कारण था। फिलहाल प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर मौजूद हैं और मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। कानपुर विमान हादसे से जुड़ी नई जानकारी जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी। Kanpur Plane Crash Latest Update: गंगा बैराज के पास Training Aircraft के क्रैश होने से दो पायलटों की मौत ने इलाके में शोक का माहौल पैदा कर दिया है। हादसे की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही साफ होगी।
Share Market

Share Market Today: Sensex 77,250 के करीब, Nifty भी टूटा; जानें बाजार में क्यों आई गिरावट

भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) में गुरुवार, 27 अगस्त को कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty बढ़त के साथ खुले, लेकिन कुछ ही देर बाद बाजार की चाल बदल गई। बिकवाली बढ़ने से दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में पहुंच गए। सुबह 10:30 बजे Sensex 123.89 अंक की गिरावट के साथ 77,349.05 पर था, जबकि Nifty 24.60 अंक टूटकर 24,183.15 पर कारोबार कर रहा था। Sensex-Nifty पर बढ़ा दबाव गुरुवार की शुरुआत बाजार के लिए सकारात्मक रही। Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से निवेशकों को कुछ राहत मिली, लेकिन यह बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं पाई। Nifty 24,200 के स्तर के नीचे चला गया, वहीं Sensex भी शुरुआती बढ़त गंवाकर कमजोर हो गया। इससे पहले सुबह 10:13 बजे Reuters के आंकड़ों में Sensex 77,379.50 और Nifty 24,191.85 पर था। यानी उस समय दोनों इंडेक्स में हल्की गिरावट दर्ज की जा रही थी। FMCG और Media Shares में बिकवाली सेक्टोरल कारोबार की बात करें तो FMCG शेयरों पर दबाव नजर आया। शुरुआती कारोबार में Nifty FMCG इंडेक्स भी लाल निशान में था। इसके साथ ही Media शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। सुबह 10:30 बजे Nifty Media करीब 0.60 फीसदी नीचे 1,601.30 पर कारोबार कर रहा था। Media इंडेक्स इससे पहले लगातार दो कारोबारी सत्रों में बढ़त दर्ज कर चुका था। ऐसे में आज की गिरावट को कुछ हद तक मुनाफावसूली से भी जोड़कर देखा जा रहा है। HDFC Bank बना बाजार पर दबाव का बड़ा कारण आज बाजार में HDFC Bank का प्रदर्शन भी निवेशकों के रडार पर रहा। शेयर में करीब 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। Reuters के मुताबिक, अमेरिका में बैंक और उसके दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ दायर एक securities lawsuit की खबर के बाद शेयर पर दबाव बढ़ा। Upstox के अनुसार, HDFC Bank में बिकवाली के चलते Sensex दिन के ऊपरी स्तर से करीब 300 अंक नीचे आया, जबकि Nifty 24,200 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे फिसल गया। Global Market से मिले-जुले संकेत भारतीय बाजार को एक तरफ Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से सहारा मिला। Brent crude करीब 87.4 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया था। ईरान और ओमान के बीच Strait of Hormuz को लेकर बातचीत आगे बढ़ने की खबरों से तेल आपूर्ति को लेकर चिंता कुछ कम हुई है। दूसरी ओर, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों को लेकर बनी चिंता ने निवेशकों को थोड़ा सतर्क रखा। यही वजह रही कि एशियाई बाजारों में मजबूती के बावजूद भारतीय बाजार में तेजी टिक नहीं सकी। निवेशकों की नजर अब बाजार की अगली चाल पर फिलहाल घरेलू बाजार में तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। एक तरफ कच्चे तेल में नरमी और मजबूत ग्लोबल टेक्नोलॉजी संकेत सकारात्मक हैं, तो दूसरी तरफ HDFC Bank जैसे बड़े शेयरों में कमजोरी और सेक्टोरल बिकवाली बाजार पर दबाव बना रही है। ऐसे माहौल में Sensex और Nifty की आगे की दिशा, 24,200 के आसपास Nifty की चाल और प्रमुख सेक्टर्स में खरीदारी-बिकवाली पर निवेशकों की नजर रहेगी। बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय लेना बेहतर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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