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Deepak Prakash

Bihar Political MLC टिकट नहीं मिलने से Deepak Prakash पर संकट, छोड़ना पड़ेगा मंत्री पद?

बिहार की सियासत में इन दिनों उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और राज्य सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश (Deepak Prakash) को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। NDA की ओर से जारी विधान परिषद (MLC) उम्मीदवारों की सूची में नाम नहीं आने के बाद अब उनके मंत्री पद पर सवाल खड़े होने लगे हैं। 6 महीने का नियम बना बड़ी वजह दीपक प्रकाश फिलहाल बिहार सरकार में मंत्री हैं, लेकिन अभी तक वे विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं बन पाए हैं। संविधान के नियम के मुताबिक, किसी भी व्यक्ति को मंत्री बनने के बाद छह महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना जरूरी होता है। ऐसा नहीं होने पर मंत्री पद छोड़ना पड़ सकता है। इसी नियम को लेकर अब बिहार की राजनीति गर्म हो गई है। माना जा रहा था कि NDA उन्हें विधान परिषद भेज सकती है, लेकिन उम्मीदवारों की सूची आने के बाद तस्वीर बदलती नजर आई। सूची में उनका नाम नहीं होने से राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। NDA में सीट शेयरिंग बनी वजह? राजनीतिक जानकारों का कहना है कि गठबंधन के अंदर सीट शेयरिंग और राजनीतिक संतुलन की वजह से राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) को ज्यादा जगह नहीं मिल सकी। इसका असर सीधे तौर पर दीपक प्रकाश की दावेदारी पर पड़ा। उधर, उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी लगातार यह दावा कर रही है कि NDA में सबकुछ सामान्य है, लेकिन अंदरखाने चल रही हलचल कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। पार्टी समर्थकों के बीच भी यह सवाल उठ रहा है कि आखिर मंत्री बनाए जाने के बाद अब तक दीपक प्रकाश को सदन में पहुंचाने की रणनीति क्यों तय नहीं हो सकी। क्या निकलेगा कोई नया राजनीतिक रास्ता? सूत्रों की मानें तो आने वाले दिनों में कोई बड़ा राजनीतिक फैसला लिया जा सकता है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी चर्चा है कि परिवार या पार्टी स्तर पर ऐसा रास्ता तलाशा जा रहा है, जिससे दीपक प्रकाश का मंत्री पद बचाया जा सके। हालांकि अभी तक इस पर किसी तरह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। विपक्ष ने भी साधा निशाना इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। विपक्ष भी अब NDA पर निशाना साध रहा है और इसे गठबंधन के अंदर की खींचतान बता रहा है। वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले कुछ हफ्ते दीपक प्रकाश के राजनीतिक भविष्य के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं। अब आगे क्या? फिलहाल सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या NDA दीपक प्रकाश को सदन तक पहुंचाने के लिए कोई नया रास्ता निकालेगी या फिर उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Manipur

Manipur Protest Update: उखरुल में प्रदर्शन हुआ हिंसक, जवानों पर पेट्रोल डालने का आरोप

मणिपुर (Manipur) के उखरुल जिले में रविवार को उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब स्थानीय तंगखुल समुदाय की महिलाओं और असम राइफल्स के जवानों के बीच तीखी झड़प हो गई। विरोध प्रदर्शन के दौरान गुस्साई भीड़ ने सुरक्षा बलों के बनाए बंकर को नुकसान पहुंचाया। वहीं असम राइफल्स ने दावा किया है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने जवानों पर पेट्रोल डालने की कोशिश की। इस घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव बढ़ गया है। स्थानीय संगठनों के अनुसार, झड़प में करीब 22 महिलाएं घायल हुई हैं, जिनमें कई को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। कैसे शुरू हुआ विवाद? जानकारी के मुताबिक, उखरुल में पिछले कुछ दिनों से सुरक्षा बलों की मौजूदगी को लेकर लोगों में नाराजगी थी। इसी मुद्दे को लेकर बड़ी संख्या में महिलाएं प्रदर्शन करने पहुंचीं। शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन बाद में हालात बिगड़ गए। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि प्रदर्शनकारियों और जवानों के बीच पहले बहस हुई, जो देखते ही देखते धक्का-मुक्की और झड़प में बदल गई। इसी दौरान भीड़ ने असम राइफल्स के अस्थायी बंकर को तोड़ दिया। Assam Rifles ने क्या कहा? असम राइफल्स की ओर से जारी बयान में कहा गया कि ड्यूटी पर तैनात जवानों को प्रदर्शनकारियों ने घेर लिया था। सुरक्षा बलों का आरोप है कि कुछ महिलाओं ने जवानों पर पेट्रोल डालने की कोशिश की, जिससे हालात और ज्यादा बिगड़ गए। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि महिलाओं के साथ जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया गया। घटना के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। 22 महिलाएं घायल, कई अस्पताल में भर्ती स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, इस झड़प में करीब 22 तंगखुल महिलाएं घायल हुई हैं। कुछ महिलाओं को मामूली चोटें आईं, जबकि कई को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रशासन ने अभी तक घायलों की आधिकारिक संख्या जारी नहीं की है। इलाके में बढ़ा तनाव घटना के बाद उखरुल जिले में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी तरह की हिंसा को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। पहले भी हो चुके हैं ऐसे विवाद मणिपुर पिछले लंबे समय से जातीय हिंसा और तनाव की घटनाओं से जूझ रहा है। राज्य के कई हिस्सों में सुरक्षा बलों और स्थानीय समूहों के बीच टकराव की खबरें सामने आती रही हैं। उखरुल की यह ताजा घटना भी राज्य के संवेदनशील माहौल को दिखाती है, जहां हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Monsoon

Monsoon Alert 2026: 12 राज्यों में बारिश की एंट्री, Delhi Airport पर तूफान से 3 विमान डैमेज

देशभर में मानसून (Monsoon) अब पूरी तरह एक्टिव होता नजर आ रहा है। कई राज्यों में तेज बारिश, आंधी और ओलावृष्टि ने मौसम का मिजाज बदल दिया है। जहां मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली, वहीं राजस्थान में ओलों और तेज हवाओं ने मुश्किलें बढ़ा दीं। दूसरी तरफ दिल्ली में आए तेज तूफान का असर एयरपोर्ट तक पहुंच गया, जहां Air India के तीन विमान क्षतिग्रस्त हो गए। 12 राज्यों तक पहुंचा मानसून, मौसम हुआ सुहाना भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून तेजी से आगे बढ़ रहा है और अब तक 12 राज्यों में दस्तक दे चुका है। कई इलाकों में लगातार बारिश होने से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। लोगों को लंबे समय बाद गर्मी से राहत महसूस हुई। मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों में मानसून और तेजी से आगे बढ़ सकता है, जिससे उत्तर भारत के कई राज्यों में अच्छी बारिश देखने को मिलेगी। MP और UP में बारिश से मिली राहत मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और ग्वालियर समेत कई शहरों में तेज हवाओं के साथ बारिश हुई। कई जगहों पर बादल गरजे और मौसम अचानक ठंडा हो गया। लोग घरों से बाहर निकलकर बारिश का आनंद लेते नजर आए। उत्तर प्रदेश में भी लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और प्रयागराज सहित कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। गर्मी से परेशान लोगों के चेहरे पर राहत साफ दिखाई दी। हालांकि कुछ इलाकों में जलभराव की समस्या भी सामने आई। राजस्थान में आंधी और ओलावृष्टि से बढ़ी परेशानी राजस्थान में मौसम ने अलग ही रूप दिखाया। जयपुर, बीकानेर, अजमेर और नागौर सहित कई जिलों में तेज धूलभरी आंधी चली। कुछ इलाकों में ओले गिरने की खबरें भी सामने आई हैं। तेज हवाओं के कारण पेड़ गिर गए और बिजली सप्लाई भी प्रभावित हुई। किसानों को फसलों के नुकसान की चिंता सताने लगी है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के लिए अलर्ट जारी किया है। Delhi Airport पर तूफान का बड़ा असर राजधानी दिल्ली में रविवार शाम अचानक मौसम बिगड़ गया। तेज आंधी और बारिश के दौरान हवा की रफ्तार करीब 100 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई। इसका असर सीधे IGI Airport पर देखने को मिला। जानकारी के अनुसार तेज हवाओं की वजह से एयरपोर्ट पर मौजूद लोहे के स्टैंड उड़कर Air India के तीन विमानों से टकरा गए। इस घटना में विमानों को नुकसान पहुंचा है। घटना के बाद एयरपोर्ट अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है। खराब मौसम की वजह से कई फ्लाइट्स लेट हुईं और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। अगले कुछ दिनों तक जारी रहेगा बारिश का दौर IMD ने दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और आसपास के कई राज्यों में तेज बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग ने लोगों को सावधानी बरतने और खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार मानसून सामान्य से बेहतर रह सकता है, जिससे किसानों और आम लोगों दोनों को फायदा मिलने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Abhijeet Deepke

‘मैं हूं कॉकरोच’ Campaign हुआ तेज, Abhijeet Deepke करेंगे अलग-अलग राज्यों का दौरा

दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का आंदोलन अब देश के कई राज्यों तक पहुंचने की तैयारी में है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके (Abhijeet Deepke) ने ऐलान किया है कि आने वाले दिनों में देशभर में प्रदर्शन किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि वे खुद अलग-अलग शहरों में जाकर लोगों से मुलाकात करेंगे और इस अभियान को आगे बढ़ाएंगे। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ लगातार चर्चा में बनी हुई है। जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद इस संगठन का नाम तेजी से वायरल हुआ। प्रदर्शन के दौरान “मैं हूं कॉकरोच” जैसे पोस्टर और नारे लोगों के बीच चर्चा का विषय बने रहे। 13 जून तक शिक्षामंत्री के इस्तीफे की मांग अभिजीत दीपके ने शिक्षा मंत्रालय पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार जवाब नहीं दे रही है। उन्होंने मांग की कि 13 जून तक शिक्षामंत्री इस्तीफा दें। अगर ऐसा नहीं हुआ तो आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा। दीपके का कहना है कि यह सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि युवाओं की आवाज उठाने की कोशिश है। उन्होंने दावा किया कि देशभर से छात्रों और युवाओं का समर्थन उन्हें मिल रहा है। अलग-अलग राज्यों में जाएंगे अभिजीत दीपके अभिजीत दीपके ने कहा कि वे जल्द ही कई राज्यों और शहरों का दौरा करेंगे। पार्टी की टीम भी अलग-अलग जगहों पर प्रदर्शन और सभाओं की तैयारी में जुट गई है। उन्होंने समर्थकों से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन में शामिल होने की अपील की है। उनका कहना है कि आंदोलन अब सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे जमीन पर भी मजबूत किया जाएगा। बॉलीवुड और सोशल मीडिया से मिला सपोर्ट ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे युवाओं की नई आवाज बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे राजनीतिक स्टंट मान रहे हैं। इस बीच बॉलीवुड अभिनेत्री ऋचा चड्ढा समेत कुछ चर्चित चेहरों ने भी इस आंदोलन के समर्थन में पोस्ट शेयर किए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम, एक्स और यूट्यूब पर इस आंदोलन से जुड़े वीडियो और पोस्ट तेजी से वायरल हो रहे हैं। अभिजीत दीपके भी लगातार अपने समर्थकों से ऑनलाइन जुड़े हुए हैं। क्यों चर्चा में है ‘Cockroach Janata Party’? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सोशल मीडिया के दौर में अलग अंदाज वाले आंदोलन तेजी से लोगों का ध्यान खींचते हैं। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ भी इसी वजह से अचानक चर्चा में आई है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि 13 जून तक सरकार की तरफ से क्या प्रतिक्रिया आती है और यह आंदोलन आने वाले दिनों में कितना बड़ा रूप लेता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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राहुल गांधी

I.N.D.I.A Alliance Meeting: ममता-अखिलेश दिल्ली पहुंचे, राहुल गांधी को लेकर छिड़ा विवाद

दिल्ली में होने वाली I.N.D.I.A गठबंधन की अहम बैठक से पहले राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्म हो चुका है। राजधानी की सड़कों पर कांग्रेस और राहुल गांधी के खिलाफ लगे पोस्टरों ने नई बहस छेड़ दी है। पोस्टरों में राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता और राजनीतिक स्थिरता पर सवाल उठाए गए हैं। इन पोस्टरों के सामने आने के बाद विपक्षी राजनीति में हलचल और तेज हो गई है। वहीं कांग्रेस नेताओं ने इसे विपक्षी एकता को कमजोर करने की कोशिश बताया है। सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से चर्चा में बना हुआ है। दिल्ली पहुंचे ममता बनर्जी और अखिलेश यादव I.N.D.I.A गठबंधन की बैठक में शामिल होने के लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव दिल्ली पहुंच चुके हैं। इसके अलावा कई अन्य विपक्षी दलों के नेता भी राजधानी पहुंच रहे हैं। जानकारी के मुताबिक इस बैठक में करीब 23 विपक्षी दल हिस्सा ले सकते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बैठक आने वाले लोकसभा चुनावों के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है। विपक्षी दल केंद्र सरकार के खिलाफ साझा रणनीति तैयार करने की कोशिश में जुटे हैं। किन मुद्दों पर होगी चर्चा? सूत्रों के अनुसार बैठक में कई बड़े मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। इनमें महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं, संसद सत्र की रणनीति और राज्यों में सीट शेयरिंग जैसे विषय शामिल हैं। विपक्ष का फोकस केंद्र सरकार को एकजुट होकर घेरने पर रहेगा। हालांकि विपक्ष के अंदर नेतृत्व और सीट बंटवारे को लेकर पहले भी मतभेद सामने आते रहे हैं। ऐसे में इस बैठक को विपक्षी एकता की परीक्षा भी माना जा रहा है। Poster Controversy ने बढ़ाई सियासी गर्मी बैठक से पहले लगे पोस्टरों ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। कांग्रेस समर्थकों का कहना है कि यह विपक्षी गठबंधन को कमजोर करने की साजिश है। वहीं भाजपा समर्थक सोशल मीडिया पर इन पोस्टरों को लेकर लगातार प्रतिक्रिया दे रहे हैं। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि I.N.D.I.A गठबंधन की बैठक से विपक्ष जनता को क्या संदेश देता है और आगामी चुनावों के लिए किस रणनीति के साथ आगे बढ़ता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Jahangir Khan

TMC Leader Jahangir Khan Arrested: नेपाल बॉर्डर से भागने की कोशिश नाकाम, STF ने दबोचा

नेपाल बॉर्डर पर STF का बड़ा ऑपरेशन पश्चिम बंगाल की राजनीति में रविवार को बड़ा मोड़ आ गया, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता जहांगीर खान (Jahangir Khan) को नेपाल बॉर्डर के पास से गिरफ्तार कर लिया गया। STF की इस कार्रवाई के बाद राज्य की सियासत फिर गर्मा गई है। बताया जा रहा है कि जहांगीर खान देश छोड़कर भागने की कोशिश में था, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने समय रहते उसे पकड़ लिया। गुप्त सूचना के बाद हुई कार्रवाई सूत्रों के मुताबिक, STF को गुप्त जानकारी मिली थी कि TMC नेता सीमावर्ती इलाके के रास्ते नेपाल जाने की तैयारी कर रहा है। सूचना मिलते ही टीम ने बॉर्डर इलाके में निगरानी बढ़ाई और सर्च ऑपरेशन चलाया। इसी दौरान जहांगीर खान को हिरासत में लिया गया। पहले भी विवादों में रह चुका है नाम जहांगीर Khan का नाम पहले भी कई विवादों में सामने आ चुका है। चुनावी हिंसा और राजनीतिक तनाव से जुड़े मामलों में उसकी भूमिका को लेकर जांच एजेंसियां पहले से नजर बनाए हुए थीं। पुलिस काफी समय से उसकी तलाश कर रही थी। कोलकाता में होगी पूछताछ गिरफ्तारी के बाद उसे कड़ी सुरक्षा के बीच कोलकाता लाया जा रहा है, जहां STF और अन्य एजेंसियां उससे पूछताछ करेंगी। माना जा रहा है कि इस मामले में आगे और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। विपक्ष ने सरकार को घेरा इस घटना के बाद विपक्ष ने पश्चिम बंगाल सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि राज्य में कानून-व्यवस्था लगातार सवालों के घेरे में है। वहीं, TMC की तरफ से अभी तक इस गिरफ्तारी पर कोई बड़ा आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। बंगाल की राजनीति पर पड़ सकता है असर राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मामला बंगाल की राजनीति में और ज्यादा असर डाल सकता है। फिलहाल, STF की जांच और पूछताछ पर सभी की नजर बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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अमरनाथ यात्रा 2026: हाईटेक सुरक्षा कवच में होगी बाबा बर्फानी की यात्रा

Amarnath यात्रा 2026: हाईटेक सुरक्षा कवच में होगी बाबा बर्फानी की यात्रा

Amarnath यात्रा 2026 को लेकर इस बार सुरक्षा व्यवस्था पहले से ज्यादा मजबूत और हाईटेक बनाई जा रही है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने बालटाल मार्ग से लेकर पवित्र अमरनाथ गुफा तक CCTV कैमरों का बड़ा नेटवर्क तैयार किया है। अब यात्रा मार्ग के हर कदम पर नजर रखी जाएगी, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके। प्रशासन के अनुसार, यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियां इस बार तकनीक का सहारा लेकर पूरी यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने में जुटी हैं। पहाड़ी रास्तों, संवेदनशील इलाकों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर विशेष कैमरे लगाए जा रहे हैं, जो 24 घंटे निगरानी करेंगे। सिर्फ CCTV ही नहीं, बल्कि कंट्रोल रूम से लाइव मॉनिटरिंग की भी व्यवस्था की गई है। सुरक्षा बलों और प्रशासन की टीमें हर गतिविधि पर नजर रखेंगी। अगर कहीं भी कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई देती है, तो तुरंत अलर्ट जारी किया जाएगा। यात्रियों की सुविधा के लिए मेडिकल टीम, आपदा राहत दल और हेल्प सेंटर भी तैनात किए जाएंगे। प्रशासन का कहना है कि इस बार यात्रा को सुरक्षित, व्यवस्थित और श्रद्धालुओं के लिए आसान बनाने पर विशेष फोकस किया जा रहा है। हर साल की तरह इस बार भी देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा अमरनाथ के दर्शन के लिए पहुंचेंगे। ऐसे में हाईटेक सुरक्षा व्यवस्था श्रद्धालुओं को भरोसा और सुरक्षित माहौल देने का काम करेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Himachal में भूकंप के तीन झटकों से दहशत, कई मकान क्षतिग्रस्त; पालमपुर में अस्पताल की छत गिरी

Himachal में भूकंप के तीन झटकों से दहशत, कई मकान क्षतिग्रस्त; पालमपुर में अस्पताल की छत गिरी

Himachal Pradesh में शुक्रवार देर रात और शनिवार सुबह भूकंप के तीन तेज झटकों ने लोगों में दहशत फैला दी। लगातार आए झटकों से लोग डरकर अपने घरों से बाहर निकल आए। कई इलाकों में मकानों में दरारें आ गईं, जबकि कुछ जगहों पर दीवारें और छतें भी क्षतिग्रस्त हो गईं। सबसे ज्यादा असर कांगड़ा और पालमपुर इलाके में देखने को मिला। पालमपुर के एक सरकारी अस्पताल की छत का हिस्सा अचानक गिर गया। हादसे के समय अस्पताल में मरीज और स्टाफ मौजूद थे। गनीमत रही कि किसी की जान नहीं गई, लेकिन लोगों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि पहला झटका महसूस होते ही घरों में रखे सामान हिलने लगे। कई लोग डर के कारण पूरी रात घरों के बाहर खुले मैदानों और सड़कों पर बिताने को मजबूर हुए। बच्चों और बुजुर्गों में खासा डर देखने को मिला। प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और प्रभावित इलाकों का निरीक्षण शुरू किया। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और सतर्क रहें। जिन मकानों में दरारें आई हैं, वहां रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है। भूकंप के झटकों के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। लोग लगातार प्रशासन से अपडेट ले रहे हैं और किसी बड़े नुकसान की आशंका को लेकर चिंतित हैं। मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग हालात पर नजर बनाए हुए हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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CJI Surya Kant

CJI Surya Kant London Event Row: विदेश में लेक्चर के बीच विवाद, भारत का सख्त रुख

लंदन में आयोजित एक अकादमिक कार्यक्रम के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (CJI Surya Kant) के लेक्चर में कथित तौर पर हंगामे की स्थिति बन गई। इस घटना के बाद भारत में कड़ी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है और इसे संस्थागत गरिमा के खिलाफ बताया जा रहा है। London Event में आखिर हुआ क्या? रिपोर्ट्स के अनुसार, लंदन के एक विश्वविद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में CJI सूर्यकांत “AI, लोकतंत्र और अंतरराष्ट्रीय कानून” जैसे विषय पर संबोधन दे रहे थे। इसी दौरान कुछ लोगों ने बीच-बीच में सवाल उठाकर और आपत्ति जताकर कार्यक्रम में बाधा डालने की कोशिश की। कुछ देर के लिए माहौल असहज हो गया, हालांकि बाद में कार्यक्रम फिर से सामान्य रूप से आगे बढ़ा। भारत की सख्त प्रतिक्रिया इस घटना के बाद भारत की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। भारतीय उच्चायोग ने इसे “असभ्य और अनुचित व्यवहार” बताया और कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस तरह की हरकतें स्वीकार्य नहीं हैं। सरकारी और कूटनीतिक स्तर पर यह संदेश दिया गया कि न्यायपालिका जैसे संवेदनशील संस्थानों से जुड़े कार्यक्रमों में अनुशासन और मर्यादा बनाए रखना बेहद जरूरी है। Freedom of Speech vs Institutional Respect इस पूरे मामले ने एक बार फिर बहस छेड़ दी है कि: कुछ जानकारों का मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सवाल उठाना स्वाभाविक है, लेकिन उसे व्यवस्थित और सम्मानजनक तरीके से किया जाना चाहिए। सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज जैसे ही घटना से जुड़े वीडियो सामने आए, सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई।कुछ लोगों ने इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी बताया, तो कुछ ने इसे “अशोभनीय व्यवहार” करार दिया। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Nepal जा रही टूरिस्ट बस डंपर से टकराई, चालक समेत 12 यात्री घायल

Nepal जा रही टूरिस्ट बस डंपर से टकराई, चालक समेत 12 यात्री घायल

उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले में शुक्रवार सुबह एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। Nepal जा रही एक टूरिस्ट बस सामने चल रहे डंपर से टकरा गई। हादसे में बस चालक समेत करीब एक दर्जन यात्री घायल हो गए। हादसे के बाद लखनऊ-अयोध्या मार्ग पर करीब डेढ़ घंटे तक यातायात प्रभावित रहा और सड़क पर लंबा जाम लग गया। जानकारी के मुताबिक, बस में सवार यात्री नेपाल घूमने जा रहे थे। सुबह के समय तेज रफ्तार में चल रही बस अचानक अनियंत्रित होकर डंपर से भिड़ गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बस का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे के बाद यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर घायलों को बस से बाहर निकाला और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस और एंबुलेंस टीम ने घायलों को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। कुछ यात्रियों को मामूली चोटें आई हैं, जबकि चालक समेत कुछ लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। हादसे के चलते लखनऊ-अयोध्या हाईवे पर वाहनों की लंबी कतार लग गई। पुलिस ने क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त बस और डंपर को सड़क से हटवाया, जिसके बाद करीब डेढ़ घंटे बाद यातायात सामान्य हो सका। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि अगर समय रहते स्थानीय लोग मदद के लिए नहीं पहुंचते, तो हादसा और भी बड़ा हो सकता था। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi-NCR Weather Update: दिल्ली में धूल भरी आंधी के बाद बारिश का Alert, ओले गिरने की संभावना

Delhi-NCR में मौसम का मिजाज बदल गया है। कई इलाकों में धूल भरी आंधी चलने के बाद अब बारिश और ओलावृष्टि की संभावना ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम में इस बदलाव से तापमान में गिरावट आ सकती है, जिससे लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। मौसम विभाग (IMD) ने 15 अक्टूबर को दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं चलने का पूर्वानुमान जताया है। कुछ स्थानों पर ओले गिरने की भी आशंका है। ऐसे में लोगों को मौसम की स्थिति पर नजर रखने और सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। Delhi Weather Today: तेज हवाओं के साथ बारिश का अनुमान दिल्ली-NCR में मौसम बदलने के पीछे पश्चिमी विक्षोभ से जुड़ी गतिविधियां अहम मानी जा रही हैं। इसके प्रभाव से आसमान में बादल छाने, गरज-चमक होने और कई जगह बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, कुछ इलाकों में हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। तेज झोंकों के दौरान यह गति 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने की आशंका है। ऐसे में खुले स्थानों पर रहने वाले लोगों और वाहन चालकों को खास सावधानी बरतने की जरूरत है। Delhi-NCR Rain Alert: किन इलाकों में दिखेगा असर? दिल्ली के साथ नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में भी मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। अलग-अलग इलाकों में बारिश की तीव्रता अलग रह सकती है। कुछ जगहों पर गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने और ओले गिरने की आशंका भी जताई गई है। हालांकि, हर इलाके में एक जैसी बारिश होना जरूरी नहीं है। इसलिए घर से निकलने से पहले स्थानीय मौसम अपडेट जरूर देख लें। तापमान में गिरावट से मिलेगी राहत? अक्टूबर के महीने में दिल्ली-NCR में मौसम आमतौर पर धीरे-धीरे सुहावना होने लगता है। ऐसे में बारिश और बादलों के कारण तापमान में गिरावट आ सकती है। इससे दिन की गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, बारिश के बाद उमस और स्थानीय मौसम की स्थिति के आधार पर लोगों को अलग-अलग अनुभव हो सकता है। तापमान में कितनी गिरावट आएगी, यह आने वाले दिनों के मौसम पर निर्भर करेगा। आंधी और बारिश के दौरान इन बातों का रखें ध्यान मौसम में अचानक बदलाव के दौरान छोटी-सी लापरवाही भी परेशानी बढ़ा सकती है। इसलिए कुछ जरूरी सावधानियां अपनाना बेहतर रहेगा। 16 अक्टूबर से मौसम में बदलाव की उम्मीद मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 16 अक्टूबर से उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में बारिश की गतिविधियां कम हो सकती हैं। इसके बाद दिल्ली-NCR में भी मौसम धीरे-धीरे सामान्य होने की संभावना है। हालांकि, स्थानीय परिस्थितियों के कारण पूर्वानुमान में बदलाव हो सकता है। फिलहाल दिल्ली-NCR के लोगों के लिए जरूरी है कि वे मौसम को हल्के में न लें। बारिश से राहत जरूर मिल सकती है, लेकिन तेज हवाओं, बिजली चमकने और ओलावृष्टि की आशंका के बीच सतर्क रहना सबसे बेहतर होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Supreme Court

Supreme Court Decision: धर्म बदलने से क्या खत्म होगा आरक्षण? कोर्ट ने साफ की स्थिति

धर्म बदलने के बाद क्या आरक्षण का लाभ मिलता रहेगा? इस सवाल पर सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु से जुड़े एक अहम मामले में अपना फैसला सुनाया है। अदालत ने मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। यह मामला उन लोगों से जुड़ा है, जिन्होंने हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपनाया और इसके बाद पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम) यानी Backward Class (Muslim) श्रेणी में आरक्षण का लाभ लेने का दावा किया था। Supreme Court के फैसले के मुताबिक, केवल इस्लाम अपनाने से कोई व्यक्ति तमिलनाडु की अधिसूचित पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम) श्रेणी में अपने आप शामिल नहीं हो सकता। इस फैसले ने धर्म परिवर्तन और आरक्षण की पात्रता से जुड़े कानूनी सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। Supreme Court का क्या है पूरा फैसला? सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए मद्रास हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें कुछ समुदायों से इस्लाम अपनाने वाले लोगों को Backward Class (Muslim) श्रेणी में आरक्षण देने की व्यवस्था की गई थी। अदालत के फैसले का मुख्य आधार यह है कि किसी व्यक्ति की पहले की जातिगत पहचान के कारण उसे दूसरी धार्मिक श्रेणी में आरक्षण का पात्र अपने आप नहीं माना जा सकता। संबंधित आरक्षण श्रेणी के लिए निर्धारित कानूनी शर्तों को पूरा करना जरूरी है। इस मामले में फैसला तमिलनाडु की विशिष्ट आरक्षण व्यवस्था से जुड़ा है। इसलिए इसे देश में सभी तरह के आरक्षण पर लागू होने वाले एक समान प्रतिबंध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। कैसे शुरू हुआ धर्म परिवर्तन और Reservation का मामला? इस विवाद की शुरुआत तमिलनाडु सरकार के 9 मार्च 2024 के सरकारी आदेश से हुई थी। इस आदेश के तहत कुछ ऐसे लोगों को पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम) श्रेणी में शामिल करने की व्यवस्था की गई थी, जो पहले पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा वर्ग, विमुक्त समुदाय या अनुसूचित जाति से संबंधित थे और बाद में उन्होंने इस्लाम अपना लिया था। सरकार के इस फैसले को मद्रास हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। 25 जून 2026 को हाई कोर्ट ने सरकारी आदेश को रद्द कर दिया। इसके बाद तमिलनाडु सरकार ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की। राज्य सरकार का कहना था कि धर्म परिवर्तन करने से किसी व्यक्ति की सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन से जुड़ी परिस्थितियां जरूरी नहीं कि बदल जाएं। इसी आधार पर सरकार ने अपने आदेश का बचाव किया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। इसके साथ ही इस मामले में सरकार की चुनौती सफल नहीं रही। क्या धर्म बदलने पर खत्म हो जाएगा SC और OBC Reservation? Supreme Court के फैसले के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों को अब किसी भी तरह का आरक्षण नहीं मिलेगा। लेकिन इस मामले को समझते समय अलग-अलग आरक्षण श्रेणियों के नियमों पर ध्यान देना जरूरी है। यह फैसला मुख्य रूप से तमिलनाडु की Backward Class (Muslim) श्रेणी में पात्रता से संबंधित है। इसका अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने सभी धर्म परिवर्तन करने वालों के लिए हर प्रकार के आरक्षण पर एक समान रोक लगा दी है। अनुसूचित जाति (SC), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और राज्य की विशेष पिछड़ा वर्ग श्रेणियों के लिए अलग-अलग कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं। अनुसूचित जाति के दर्जे से जुड़े नियम Constitution (Scheduled Castes) Order, 1950 में दिए गए हैं। वहीं, अन्य श्रेणियों में पात्रता संबंधित कानूनों और अधिसूचनाओं के अनुसार तय होती है। इसलिए किसी व्यक्ति को आरक्षण मिलेगा या नहीं, यह उसकी संबंधित श्रेणी और उस पर लागू कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करता है। तमिलनाडु सरकार की दलील क्यों थी अहम? तमिलनाडु सरकार ने अपने आदेश के समर्थन में सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन का मुद्दा उठाया था। सरकार की दलील थी कि धर्म बदलने से किसी व्यक्ति के सामने मौजूद सामाजिक चुनौतियां अपने आप खत्म नहीं हो जातीं। दूसरी ओर, मामले में सवाल यह था कि क्या पुराने जातिगत दर्जे के आधार पर किसी व्यक्ति को मुस्लिम पिछड़ा वर्ग की अधिसूचित श्रेणी में शामिल किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इस विवाद में संबंधित आरक्षण श्रेणी की पात्रता और कानूनी शर्तों के महत्व को रेखांकित किया है। आम लोगों के लिए क्या है इसका मतलब? इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि आरक्षण का लाभ पाने के लिए केवल धर्म परिवर्तन या पुरानी जातिगत पहचान को पर्याप्त नहीं माना जा सकता। संबंधित श्रेणी के नियमों के तहत पात्रता साबित करना जरूरी है। धर्म परिवर्तन और आरक्षण से जुड़े मामलों में सामाजिक परिस्थितियों के साथ-साथ कानूनी प्रावधानों की भी अहम भूमिका होती है। इसी वजह से किसी एक मामले के फैसले को सभी राज्यों और सभी आरक्षण श्रेणियों पर सीधे लागू मानना सही नहीं होगा। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के इस मामले में मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। यह फैसला धर्म परिवर्तन के बाद आरक्षण की पात्रता को लेकर चल रही कानूनी बहस में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Delhi

Delhi Protest Case: इंटरनेट बंदी पर केंद्र ने मांगी माफी, आज Supreme Court में सुनवाई

Delhi में CJP (Cockroach Janta Party) के प्रदर्शन के दौरान इंटरनेट सेवाएं बंद करने और मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदियां लगाने का मामला लगातार चर्चा में है। 10 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन के बाद केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) को सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखना पड़ा। तीनों की ओर से अदालत में बिना शर्त माफी मांगी गई है। अब गुरुवार, 15 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं। इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने करीब 7,000 लोगों को हिरासत में लिए जाने का दावा किया है। वहीं, अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती कदम उठाए गए थे। अब अदालत यह देखेगी कि इन कदमों से उसके पहले के निर्देशों का उल्लंघन हुआ या नहीं। Internet Shutdown: केंद्र सरकार ने क्या सफाई दी? केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बिना शर्त माफी मांगी है। सरकार ने कहा कि अदालत के आदेश की जानबूझकर अवहेलना करने का कोई इरादा नहीं था। केंद्र के मुताबिक, दिल्ली पुलिस के अनुरोध पर रायसीना हिल्स के चार किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं 9 अक्टूबर की रात 10 बजे से 10 अक्टूबर की रात 10 बजे तक बंद की गई थीं। सरकार ने इसके पीछे संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति का हवाला दिया। केंद्र ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि प्रतिबंध सीमित इलाके और तय समय के लिए लगाया गया था। साथ ही, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अवमानना नोटिस वापस लेने का अनुरोध किया है। Delhi Metro के 45 स्टेशनों पर क्यों लगी पाबंदी? प्रदर्शन के दिन दिल्ली मेट्रो के कुछ स्टेशनों पर यात्रियों के प्रवेश और निकास को सीमित कर दिया गया था। इस फैसले के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा और मेट्रो सेवाओं पर लगे प्रतिबंधों को लेकर सवाल उठने लगे। DMRC ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि दिल्ली के कुल 303 मेट्रो स्टेशनों में से 45 पर पाबंदियां लगाई गई थीं। कॉर्पोरेशन के मुताबिक, उस दिन 271 ट्रेनों ने कुल 4,157 चक्कर लगाए। DMRC ने अपने हलफनामे में कहा कि संबंधित पाबंदियां दिल्ली पुलिस के निर्देशों के बाद लागू की गई थीं। मेट्रो प्रबंधन ने भी बिना शर्त माफी मांगते हुए कहा कि उसका उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। CJP Protest में 7 हजार लोगों को हिरासत में लेने का दावा इस पूरे विवाद में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने का मुद्दा भी अहम है। याचिकाकर्ताओं की ओर से करीब 7,000 लोगों को हिरासत में लिए जाने का दावा किया गया है। उन्होंने कार्रवाई के तरीके और उसकी वैधता पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान संभावित अव्यवस्था को देखते हुए एहतियाती कदम उठाए गए थे। पुलिस के मुताबिक, लोगों को अस्थायी केंद्रों में ले जाया गया और कुछ घंटों के भीतर रिहा कर दिया गया। हालांकि, हिरासत में लिए गए लोगों की सटीक संख्या और कार्रवाई की वैधता को लेकर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष सामने आना बाकी है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले क्या कहा था? प्रदर्शन से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को आम लोगों की आवाजाही और सार्वजनिक परिवहन को बाधित नहीं करने के निर्देश दिए थे। अदालत ने मेट्रो और रेल सेवाओं को सामान्य रूप से संचालित करने तथा इंटरनेट सेवाओं को बाधित न करने पर भी जोर दिया था। इसके बाद अदालत ने संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगते हुए अवमानना नोटिस जारी किए। अब केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और DMRC ने अपने हलफनामे दाखिल कर माफी मांगी है और अपने फैसलों के पीछे की परिस्थितियों को स्पष्ट किया है। CJP प्रदर्शन की वजह क्या थी? CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन का आह्वान किया था। प्रदर्शन से जुड़ी मांगों में SIR यानी Special Intensive Revision के तहत मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया का विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग शामिल थी। प्रदर्शन से पहले दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई और कुछ मेट्रो स्टेशनों पर आवाजाही सीमित कर दी गई। इंटरनेट बंद होने के बाद यह मामला और गंभीर हो गया, क्योंकि इससे आम लोगों के संचार और रोजमर्रा के कामकाज पर असर पड़ने को लेकर सवाल उठे। आज की Supreme Court Hearing में क्या होगा? 15 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में अदालत केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और DMRC के जवाबों पर विचार करेगी। इस दौरान इंटरनेट बंद करने, मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदी लगाने और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने से जुड़े मुद्दे अहम रहेंगे। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सुप्रीम कोर्ट अधिकारियों की माफी स्वीकार करेगा या कथित अवमानना के मामले में आगे की कार्रवाई करेगा। अदालत भविष्य में ऐसी परिस्थितियों में इंटरनेट सेवाओं और सार्वजनिक परिवहन पर प्रतिबंध लगाने से जुड़े निर्देशों पर भी विचार कर सकती है। फिलहाल, अधिकारियों ने अपना पक्ष रख दिया है। अब अदालत के फैसले से साफ होगा कि सुरक्षा के नाम पर लगाए गए प्रतिबंधों और आम नागरिकों की सुविधाओं के बीच संतुलन को लेकर आगे क्या दिशा तय होती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
मां स्कंदमाता

Navratri 2026: पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा, जानें महत्त्व, कथा और मंत्र

नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। भगवान कार्तिकेय को स्कंद भी कहा जाता है। उन्हें गोद में धारण करने के कारण देवी पार्वती के इस स्वरूप का नाम स्कंदमाता पड़ा। मां का यह रूप मातृत्व, प्रेम और करुणा का प्रतीक है। मां स्कंदमाता की कथा पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवी पार्वती ने भगवान स्कंद यानी कार्तिकेय को जन्म दिया, जो देवताओं की सेना के सेनापति बने। स्कंदमाता का स्वरूप एक मां की शक्ति और अपने संतान के प्रति अटूट स्नेह को दर्शाता है। मां का स्वरूप और महत्त्व पूजा विधि मंत्र: ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः। भोग: मां को केला अर्पित करने की परंपरा प्रचलित है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

मेरठ हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, पति सौरभ की हत्या के मामले में कोर्ट का फैसला

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई है। दोनों पर सौरभ की हत्या करने का आरोप साबित होने के बाद यह फैसला सुनाया गया। सजा सुनाते हुए जज ने वारदात को नृशंस हत्याकांड बताया और कहा कि इसमें माफी स्वीकार नहीं होगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कोर्ट में पेश हुए मुस्कान और साहिल सजा सुनाए जाने से पहले जेल में बंद मुस्कान और साहिल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत से जोड़ा गया। इस दौरान दोनों रोने लगे। जज ने मुस्कान से पूछा कि पति सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद वह क्या सजा चाहती है। इस पर मुस्कान ने कहा, “मेरी बच्चियों का ख्याल रखा जाए।” इसके बाद वह खामोश हो गई। वहीं, साहिल से भी यही सवाल पूछा गया, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। सजा के ऐलान के बाद रो पड़ीं सौरभ की मां अदालत के फैसले के बाद सौरभ राजपूत की मां भावुक हो गईं और रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि उन्हें शांति से न्याय मिल गया। इस मामले में सजा का ऐलान सौरभ के परिवार के लिए लंबे इंतजार के बाद आया है। 3 मार्च 2025 को हुई थी सौरभ की हत्या सौरभ राजपूत की हत्या 3 मार्च 2025 को हुई थी। मामले में सामने आए विवरण के अनुसार, हत्या के बाद शव के पांच टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में भर दिया गया था। इस वारदात ने पूरे देश में व्यापक चर्चा बटोरी थी। अदालत ने मामले में मुस्कान रस्तोगी और साहिल को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है।

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