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बिलासपुर में हाईकोर्ट वकील की संदिग्ध मौत: परिजनों और अधिवक्ताओं ने उठाए पुलिस जांच पर सवाल

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हाईकोर्ट के वकील राहुल अग्रवाल की रहस्यमयी मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस इसे आत्महत्या या हादसा बता रही है, लेकिन परिवार और साथी वकील इसे संदिग्ध मान रहे हैं। अब वकीलों ने कलेक्टर और एसएसपी से मिलकर विशेष जांच टीम (Special Investigation Team) बनाने की मांग की है। घटना की रात घर नहीं लौटे राहुल, 22 घंटे बाद नदी में मिला शव जानकारी के अनुसार, 30 वर्षीय वकील राहुल अग्रवाल 10 नवंबर की रात करीब एक बजे अपने साथी वकील के घर से निकले थे, लेकिन घर नहीं पहुंचे। अगले दिन उनकी बाइक पुराने अरपा पुल के पास संदिग्ध हालत में खड़ी मिली। इसके करीब 22 घंटे बाद राहुल की लाश अरपा नदी से बरामद हुई। उनके शरीर पर चोट के निशान पाए गए, जिससे मामला और भी रहस्यमय बन गया। वकीलों ने जताई हत्या की आशंका वकीलों का कहना है कि यह न तो आत्महत्या है और न ही कोई साधारण हादसा। उनके अनुसार, यह किसी “संदेहास्पद या अप्राकृतिक कारण” से हुई मौत है। अधिवक्ताओं ने कहा कि पुलिस की जांच कई सवालों के जवाब नहीं दे पा रही है, जिससे परिवार और कानूनी समुदाय दोनों ही असंतुष्ट हैं। स्पेशल टीम से जांच की मांग अधिवक्ताओं के एक दल ने कलेक्टर संजय अग्रवाल और एसएसपी रजनेश सिंह से मुलाकात कर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि जांच में सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और घटनास्थल पर मिले साक्ष्यों का गहराई से विश्लेषण किया जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो। घटना से पहले क्या हुआ था राहुल अग्रवाल, जो मूल रूप से भाटापारा के रहने वाले थे, पिछले 7-8 साल से बिलासपुर के मंगला स्थित ग्रीन गार्डन कॉलोनी में रह रहे थे। 6 नवंबर को वे हाईकोर्ट में प्रेक्टिस के लिए गए थे। शाम को नेहरू चौक पर अपने दोस्त मुकेश राठिया से मिले, फिर दोनों सिरगिट्टी स्थित महिंद्रा शोरूम से कार लेकर ट्रांसपोर्ट नगर पहुंचे, जहां उन्होंने पार्टी की। इसके बाद वे मुकेश के मोपका स्थित घर गए, जहां एक और दोस्त अभिषेक आचार्य भी थोड़ी देर के लिए आया। इसके बाद राहुल घर नहीं लौटे, और अगली सुबह उनकी लाश नदी में मिली। 👉 ऐसी और खबरों के लिए विजिट करें: www.deshharpal.com
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बिलासपुर में हाईकोर्ट वकील ने अरपा पुल से लगाई छलांग, प्रेमिका की सगाई से था दुखी

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक दर्दनाक घटना सामने आई है। हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकील राहुल अग्रवाल (30) ने अरपा नदी पुल से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि राहुल अपनी प्रेमिका से शादी करना चाहता था, लेकिन उसकी सगाई किसी और से हो गई, जिससे वह मानसिक तनाव में था। यह घटना सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र की है। गुरुवार रात से लापता, शुक्रवार को नदी में मिला शव राहुल अग्रवाल भाटापारा का रहने वाला था और पिछले कई सालों से बिलासपुर की ग्रीन गार्डन कॉलोनी, मंगला में रह रहा था। गुरुवार को वह रोज़ की तरह हाईकोर्ट गया था। शाम को उसने अपने दोस्त मुकेश राठिया से मुलाकात की और दोनों ने सिरगिट्टी और ट्रांसपोर्ट नगर इलाके में साथ समय बिताया। देर रात 1.30 बजे राहुल ने घर जाने की बात कही और बाइक से निकल गया, लेकिन घर नहीं पहुंचा। सुबह जब राहुल का फोन बंद मिला तो परिजनों को शक हुआ। उन्होंने सिविल लाइन थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने तलाश शुरू की और रामसेतु ब्रिज पर राहुल की बाइक लावारिस हालत में खड़ी मिली। इसके बाद उसके नदी में कूदने की आशंका जताई गई। अरपा नदी से बरामद हुआ शव शुक्रवार की रात करीब 10.30 बजे कुछ युवकों ने अरपा नदी में एक शव देखा और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची सिटी कोतवाली पुलिस और SDRF टीम ने रात करीब 1 बजे शव को बाहर निकाला। दोस्तों ने टी-शर्ट देखकर शव की पहचान राहुल अग्रवाल के रूप में की। प्रेमिका की सगाई से टूट गया था राहुल पुलिस जांच में पता चला कि राहुल का एक लड़की से प्रेम संबंध था और वह उससे शादी करना चाहता था। लेकिन लड़की के परिवार ने उसकी सगाई किसी और जगह तय कर दी, जिससे राहुल गहरे तनाव में था।परिवार और दोस्तों का कहना है कि यही कारण हो सकता है कि उसने यह कदम उठाया। पढ़ाई और करियर राहुल ने गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई (2013–2018) की थी। कुछ साल तक वह एक महिला वकील के साथ एसोसिएट के रूप में काम करता रहा, बाद में उसने स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस शुरू की थी। पुलिस जांच जारी सिटी कोतवाली टीआई देवेश सिंह राठौर ने बताया कि शुरुआती जांच में मामला आत्महत्या का लग रहा है। शव का पोस्टमॉर्टम कराया गया है, और रिपोर्ट आने के बाद ही सटीक कारणों का पता चल सकेगा। 🔸 For more such news and updates, visit www.deshharpal.com
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छत्तीसगढ़ सरकार NEET-PG में 25 लाख रुपए की NOC शर्त बदल सकती है – छात्रों को मिलेगी बड़ी राहत

छत्तीसगढ़ में NEET-PG स्टेट काउंसलिंग से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्य सरकार उन नियमों में बदलाव करने पर विचार कर रही है, जिनके तहत सरकारी सेवा कर रहे डॉक्टरों को NOC के लिए 25 लाख रुपए की जमीन या FD बतौर सुरक्षा जमा करनी पड़ती है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जयसवाल ने बताया कि, “यह नियम पिछली सरकार के समय लागू किया गया था। वर्तमान सरकार इस पर गंभीरता से विचार कर रही है। छात्रों से भी इस संबंध में चर्चा हुई है। प्रक्रिया शुरू हो गई है और जल्द ही सभी के हित में समाधान निकाला जाएगा।” 25 लाख रुपए की शर्त से छात्रों की मुश्किलें बढ़ीं NEET-PG में चयनित कई सरकारी डॉक्टर इस शर्त के कारण आगे की पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। कई के पास इतनी संपत्ति या नकदी नहीं है कि वे बॉन्ड की शर्त पूरी कर सकें। डॉ लक्ष्य शर्मा, जो पिछले 7 महीने से सुकमा में ड्यूटी कर रहे हैं, ने बताया — “मेरी NEET में 20,000 रैंक आई है। मैं पीजी करना चाहता हूं, लेकिन गांव की जमीन पर पहले से लोन है और FD के लिए पैसे नहीं हैं। माता-पिता ने कह दिया कि इतनी बड़ी रकम नहीं दे सकते, इसलिए पढ़ाई छोड़ दो।” वहीं अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज की डॉ आफरीन खान ने कहा, “हम दो साल की बॉन्ड पोस्टिंग की शर्त पूरी करने को तैयार हैं। मैंने एक साल पूरा भी कर लिया है, लेकिन 25 लाख की संपत्ति जुटाना हमारे लिए असंभव है।” डॉक्टर फेडरेशन ने कहा – नियम संविधान के खिलाफ छत्तीसगढ़ डॉक्टर फेडरेशन ने इस नियम को आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के खिलाफ बताया है। संगठन का कहना है कि यह शिक्षा के अधिकार और समान अवसर के संवैधानिक सिद्धांतों के विपरीत है।फेडरेशन ने मांग की है कि आर्थिक रूप से कमजोर उम्मीदवारों के लिए नोटरी कृत एफिडेविट को वैकल्पिक दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जाए। स्वास्थ्य मंत्री ने डॉक्टरों की प्रमुख मांगों पर जरूरी कार्रवाई का आश्वासन दिया है। 🔗 For more such updates, visit:www.deshharpal.com
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छत्तीसगढ़: कॉलेज छात्रा के साथ दोस्ती के बहाने दुष्कर्म, अश्लील वीडियो बनाकर करता रहा ब्लैकमेल, युवती हुई प्रेग्नेंट तो कराया गर्भपात

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। सूरजपुर के रहने वाले एक युवक ने कॉलेज छात्रा से पहले दोस्ती की, फिर प्यार और शादी का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया। आरोपी ने युवती का अश्लील वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल किया और लगातार शारीरिक शोषण करता रहा। जब युवती गर्भवती हुई, तो युवक ने धमकाकर उसका गर्भपात करा दिया। पुलिस ने अब आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। दोस्ती से शुरू हुआ रिश्ता, प्यार और शादी का झांसा बना जाल सरकंडा थाना क्षेत्र की 19 वर्षीय छात्रा ने बताया कि करीब एक साल पहले उसकी पहचान सूरजपुर के मानपुर थाना क्षेत्र के जामा मस्जिद के पास रहने वाले साजिद अहमद (25) से हुई थी। साजिद भी सरकंडा में किराए के मकान में रहता था। सोशल मीडिया के जरिए दोनों की बात शुरू हुई और धीरे-धीरे दोस्ती प्यार में बदल गई। किराए के घर में किया दुष्कर्म, छिपकर बनाया वीडियो फरवरी महीने में साजिद ने युवती को घूमाने के बहाने अपने किराए के घर बुलाया, जहां शादी का झूठा वादा कर उसने उसके साथ दुष्कर्म किया और मोबाइल से उसका अश्लील वीडियो बना लिया। 40 फोटो और वीडियो से करता रहा ब्लैकमेल आरोपी ने युवती के करीब 40 फोटो और वीडियो बनाकर धमकाना शुरू कर दिया। वह कहता था कि अगर उसने बात नहीं मानी तो ये वीडियो सोशल मीडिया और उसके परिचितों को भेज देगा। डर के कारण युवती लगातार उसके झांसे में आती रही और इसी दौरान वह प्रेग्नेंट हो गई। शादी का दबाव डालने पर कराया गर्भपात, दी जान से मारने की धमकी जब युवती ने शादी का दबाव बनाया तो आरोपी ने धमकाकर उसका गर्भपात करा दिया और बाद में जान से मारने की धमकी दी। मानसिक और शारीरिक रूप से टूट चुकी युवती ने आखिरकार अपनी मां को सारी बात बताई। फिर दोनों ने मिलकर सरकंडा थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार टीआई निलेश पांडेय ने बताया कि पुलिस ने आरोपी साजिद अहमद को गिरफ्तार कर लिया है। उसके खिलाफ दुष्कर्म, ब्लैकमेलिंग और धमकी की धाराओं में केस दर्ज किया गया है। For more information and latest updates, visit: www.deshharpal.com
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बिलासपुर में पूर्व पार्षद पति से विवाद के बाद युवक की मौत, एक महीने बाद होनी थी शादी

बिलासपुर शहर में एक दर्दनाक घटना सामने आई है। पूर्व पार्षद पति पूर्णानंद चंद्रा और युवक सिद्धार्थ पांडेय के बीच हुए विवाद के बाद युवक की अचानक मौत हो गई। यह मामला सरकंडा थाना क्षेत्र का है। बताया जा रहा है कि विवाद के बाद सिद्धार्थ घर लौटा, जहां सीने में दर्द उठने पर उसकी तबीयत बिगड़ गई और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया। पैसों के विवाद से जुड़ा था झगड़ा जानकारी के मुताबिक, दोनों के बीच पैसों या जमीन के लेनदेन को लेकर विवाद चल रहा था। बुधवार रात बंगालीपारा निवासी सिद्धार्थ और पूर्णानंद के बीच फिर से झगड़ा हुआ। आरोप है कि पूर्व पार्षद पति ने सिद्धार्थ से धक्का-मुक्की और मारपीट की। शिकायत लेकर पहुंचा था थाने, नहीं हुई कार्रवाई घटना के बाद सिद्धार्थ सरकंडा थाने पहुंचा और पुलिस से शिकायत की, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं की गई। पुलिस ने उसे मेडिकल जांच कराने को कहा, पर उसने मना कर दिया।इसके बाद वह घर लौट आया और थोड़ी देर बाद सीने में तेज दर्द महसूस हुआ। परिवार वाले उसे अस्पताल ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। शादी से पहले मौत ने तोड़ा परिवार का दिल सिद्धार्थ पांडेय की एक महीने बाद शादी होने वाली थी। घर में शादी की तैयारियां चल रही थीं। परिवार खुशियों में डूबा था, लेकिन अचानक हुई इस घटना ने सबको सदमे में डाल दिया। जमीन और पैसों का पुराना विवाद शहर में चर्चा है कि सिद्धार्थ और पूर्णानंद चंद्रा के बीच जमीन के सौदे और पैसों के लेनदेन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था।बताया गया है कि एक सप्ताह पहले भी दोनों में कहासुनी हुई थी। सिद्धार्थ ने जान से मारने की धमकी मिलने के बाद थाने में लिखित आवेदन दिया था, जिस पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की थी। पुलिस बोली – हार्ट अटैक से हुई मौत सीएसपी निमितेश सिंह परिहार ने बताया कि प्राथमिक जांच में युवक की मौत हार्ट अटैक से होना सामने आई है।पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में शरीर पर किसी चोट के निशान नहीं मिले, हालांकि बिसरा जांच के लिए भेजा गया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और परिजनों के आरोपों की भी पुष्टि की जा रही है। अधिक जानकारी और अपडेट्स के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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छत्तीसगढ़ के वीर पुलिसकर्मियों की कहानियां: नक्सली से इंस्पेक्टर बने संजय पोटाम से लेकर जांबाज अफसरों का साहस

छत्तीसगढ़ में 11 पुलिस अफसर और जवानों को वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इनमें दंतेवाड़ा में तैनात इंस्पेक्टर संजय पोटाम का नाम भी शामिल है। कभी नक्सलियों के खेमे में रहकर काम करने वाले संजय ने अत्याचार से तंग आकर आत्मसमर्पण किया और फिर पुलिस में शामिल होकर नक्सलियों के खिलाफ मोर्चा संभाला। संजय ने पहले पुलिस के लिए गुप्त सैनिक के रूप में काम शुरू किया। लगातार अभियानों में बहादुरी दिखाने के बाद वह कॉन्स्टेबल बने और सात साल में पाँच बार प्रमोशन पाकर इंस्पेक्टर के पद तक पहुंचे। नक्सलियों के तौर-तरीकों की उनकी गहरी समझ ने कई ऑपरेशनों में पुलिस को बड़ी सफलता दिलाई। रणनीति को उनके खिलाफ किया इस्तेमाल संजय ने नक्सलियों के बीच रहकर उनकी रणनीतियां और भागने के रास्ते समझे। जब वह पुलिस के साथ ऑपरेशन पर गए, तो इन्हीं जानकारियों का इस्तेमाल कर नक्सलियों को मात दी, जिससे कम नुकसान में बड़ी जीत मिली। दो महिला नक्सलियों को किया ढेर इंस्पेक्टर चैतराम गुरुपंच ने बताया कि 14 मार्च 2003 को कटे कल्याण इलाके में नक्सलियों के एंबुश में फंसने के बाद जवाबी कार्रवाई में दो महिला नक्सलियों को मार गिराया गया। IED ब्लास्ट में घायल हुए जवान को बचाया हेड कॉन्स्टेबल दिनेश भास्कर ने एक ऑपरेशन में वीरता दिखाई, जब IED ब्लास्ट में एक आरक्षक के दोनों पैर उड़ गए। खतरनाक हालात में भी उन्होंने मोर्चा संभाला। रायपुर के इंस्पेक्टर भुनेश्वर कुमार साहू का साहस निरीक्षक साहू को भी वीरता पदक मिला। उन्होंने नक्सलियों से घिरे होने के बावजूद अपनी टीम का मनोबल बनाए रखा और जवाबी कार्रवाई में नेतृत्व किया। अब तक वह 25 से अधिक सफल नक्सल अभियानों का नेतृत्व कर चुके हैं। और खबरें पढ़ें: www.deshharpal.com
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बिलासपुर में सिटी बस सेवा बंद होने पर हाईकोर्ट नाराज़, कलेक्टर और कमिश्नर से मांगा शपथपत्र

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शहर में सिटी बस सेवा बंद होने पर कड़ी नाराज़गी जताई है। चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने परिवहन सचिव से पूछा कि उन्होंने शपथपत्र में बसों को चालू बताकर झूठी जानकारी क्यों दी। इस पर परिवहन सचिव ने बताया कि उन्हें यह जानकारी नगर निगम से मिली थी। कोर्ट ने कलेक्टर और नगर निगम कमिश्नर को निर्देश दिया है कि बसों की वैकल्पिक व्यवस्था होने तक उठाए गए कदम और सिटी बस सेवा का रोडमैप प्रस्तुत करें। कोर्ट में सवाल-जवाब गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान परिवहन सचिव एस प्रकाश हाईकोर्ट में मौजूद रहे। चीफ जस्टिस ने उनसे पूछा कि शपथपत्र में छह में से पांच सिटी बसें चालू होने का उल्लेख क्यों किया गया, जबकि हकीकत में बसें बंद हैं। सचिव ने बताया कि बिलासपुर नगर निगम कमिश्नर ने 18 जुलाई को पत्र भेजकर उन्हें यह जानकारी दी थी, उसी आधार पर शपथपत्र दिया गया। भुगतान न होने से बंद हुई सेवा परिवहन सचिव ने कोर्ट को बताया कि नगर निगम के सचिव (कमिश्नर) ने जानकारी दी कि बस ऑपरेटर्स को भुगतान नहीं होने के कारण सिटी बस सेवा बंद हो गई है। राज्य सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया कि जल्द वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी और इस संबंध में शपथपत्र भी प्रस्तुत किया जाएगा। कलेक्टर और कमिश्नर से व्यक्तिगत शपथपत्र की मांग सुनवाई में नगर निगम के वकील ने कहा कि निगम जल्द कदम उठाकर सिटी बस सेवा बहाल करेगा। इस पर हाईकोर्ट ने कलेक्टर (समिति अध्यक्ष) और नगर निगम कमिश्नर (समिति सचिव) से व्यक्तिगत शपथपत्र देने के निर्देश दिए, जिसमें वर्तमान स्थिति और भविष्य की कार्ययोजना का उल्लेख हो। अब इस मामले की अगली सुनवाई 22 अगस्त को होगी। 📢 ऐसी और ताज़ा खबरों के लिए विजिट करें: www.deshharpal.com
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छत्तीसगढ़ में लागू होगी पुलिस कमिश्नर प्रणाली, रायपुर से होगी शुरुआत

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर छत्तीसगढ़ में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने का ऐलान किया। सीएम की घोषणा के बाद अब पुलिस महकमे के अधिकारी इस आदेश को जल्द ही अमल में लाने की तैयारी में हैं। रायपुर में इसके लिए सेटअप लगभग तैयार है। लंबे समय से पुलिस कमिश्नर प्रणाली पर चर्चा हो रही थी, जिसे अब औपचारिक रूप से लागू करने का निर्देश जारी कर दिया गया है। रायपुर से होगी शुरुआत कमिश्नर प्रणाली 10 लाख से अधिक आबादी वाले जिलों में लागू की जाएगी। साय सरकार ने पहले चरण में इसे रायपुर में शुरू करने का फैसला लिया है। यदि यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो इसे बिलासपुर, दुर्ग समेत अन्य बड़े जिलों में भी लागू किया जाएगा। इस व्यवस्था से पुलिस के अधिकार और निर्णय क्षमता में बढ़ोतरी होगी। पुलिस को स्वतंत्र फैसले लेने की शक्ति कमिश्नर प्रणाली में सीनियर पुलिस अधिकारियों को दंड प्रक्रिया संहिता के तहत सीधे कार्रवाई के अधिकार मिलते हैं। इससे अपराधियों पर तुरंत रोकथाम और कार्रवाई संभव होगी। प्रतिबंधात्मक आदेश से लेकर अपराध नियंत्रण तक, पुलिस स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सकेगी। सेटअप और पदों का ढांचा कमिश्नर के अधिकार और फायदे कमिश्नर को कलेक्टर के कई अधिकार भी मिलेंगे। अब शांति भंग की आशंका में हिरासत, गुंडा एक्ट, गैंगस्टर एक्ट और रासुका जैसी धाराएं पुलिस बिना कलेक्टर की अनुमति के लागू कर सकेगी। होटल, बार और हथियारों के लाइसेंस, धरना-प्रदर्शन की अनुमति, दंगों में बल प्रयोग और जमीन विवाद जैसे मामलों का निपटारा भी पुलिस स्तर पर हो सकेगा। कैसे करेगा काम कमिश्नर का मुख्यालय स्थापित किया जाएगा और एडीजी स्तर के आईपीएस को पुलिस कमिश्नर बनाया जाएगा। शहर को कई जोन में बांटा जाएगा, प्रत्येक जोन में डीसीपी तैनात होगा, जो अपने क्षेत्र का जिम्मा संभालेगा। इसके नीचे एसीपी होंगे, जो 2 से 4 थानों की निगरानी करेंगे। 📢 ऐसी और ताज़ा खबरों के लिए विजिट करें: www.deshharpal.com
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बिलासपुर रेलवे जोन में टिकट माफिया पर बड़ा एक्शन, ढाई साल में 756 दलालों से 2.43 करोड़ के टिकट जब्त

बिलासपुर।दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने अवैध टिकट दलालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। पिछले ढाई साल में बिलासपुर, रायपुर और नागपुर रेल मंडल में 756 से ज्यादा टिकट दलालों को पकड़ा गया है और इनसे 2.43 करोड़ रुपए के ई-टिकट जब्त किए गए हैं। यह कार्रवाई रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और वाणिज्य विभाग की संयुक्त मुहिम का हिस्सा है। ई-टिकट सिस्टम में सेंध, यात्रियों को हो रही थी परेशानी ये टिकट दलाल IRCTC के ई-टिकट सिस्टम में सेंध लगाकर आम यात्रियों के लिए कृत्रिम संकट खड़ा कर देते हैं। बाद में यही टिकट मनमानी कीमतों पर बेचते हैं। इससे असली यात्रियों को न तो समय पर टिकट मिल पाता है और न ही सही कीमत पर। 1 जनवरी से 30 जून 2025 तक 136 दलाल पकड़े गए ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 के पहले 6 महीनों में ही 136 अवैध दलाल पकड़े गए हैं। इनके पास से 33.30 लाख रुपए के टिकट जब्त किए गए। 2023 और 2024 में हुआ बड़ा खुलासा जून में ही 30 दलाल सलाखों के पीछे रेलवे हर महीने 2 से 3 स्पेशल ड्राइव चलाकर टिकट माफिया पर शिकंजा कस रहा है। हाल ही में जून में 30 अवैध दलालों को गिरफ्तार किया गया है। इस अभियान में RPF की गुप्तचर शाखा भी सक्रिय रूप से शामिल है। Deshharpal का निवेदन – टिकट हमेशा IRCTC जैसे आधिकारिक माध्यमों से ही बुक करें। और ऐसी ही सच्ची, असरदार खबरों के लिए जुड़े रहिए – www.deshharpal.com
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अब बिलासपुर को मिलेगा मेडिकल सिटी का तोहफा, नहीं जाना पड़ेगा रायपुर इलाज के लिए

एजुकेशन हब के बाद अब बिलासपुर मेडिकल सुविधाओं के क्षेत्र में भी बड़ी छलांग लगाने जा रहा है। शहर में जल्द ही मेडिकल सिटी विकसित की जाएगी, जहां मरीजों को एक ही स्थान पर तमाम जांच और इलाज की सुविधाएं मिलेंगी। यह परियोजना ना केवल स्वास्थ्य के क्षेत्र में बदलाव लाएगी, बल्कि हजारों लोगों की जिंदगी आसान बनाएगी। कई बार जांच के लिए जाना पड़ता था बाहर अभी तक बिलासपुर के मरीजों को जटिल जांचों और विशेष इलाज के लिए निजी डायग्नोस्टिक सेंटर या रायपुर तक का सफर करना पड़ता है। शहर में जिला अस्पताल, सिम्स और अपोलो जैसे बड़े अस्पताल तो हैं, लेकिन कई आधुनिक मेडिकल सुविधाओं का एकीकृत केंद्र अब तक नहीं था। अब एक ही जगह होगा इलाज और जांच नगर निगम कमिश्नर अमित कुमार ने बताया कि मेडिकल सिटी की योजना पूरी तरह तैयार है। इसमें आधुनिक जांच सुविधाएं, विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं, और मल्टी-स्पेशियलिटी हेल्थ सेंटर्स एक ही परिसर में मौजूद होंगे। परियोजना के लिए फंडिंग का तरीका भी तय है— कहां बनेगी मेडिकल सिटी? ये हैं संभावित स्थान नगर निगम फिलहाल तीन प्रमुख जगहों पर जमीन तलाश रहा है: डीपीआर तैयार होगा, फिर आगे की प्रक्रिया शुरू प्रोजेक्ट को धरातल पर लाने के लिए सबसे पहले डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार की जाएगी। इसके लिए कंसल्टेंट की नियुक्ति होगी और शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा। जमीन फाइनल होते ही निर्माण और विकास की प्रक्रिया तेज कर दी जाएगी। Deshharpal की खास राय: बिलासपुर के लिए यह प्रोजेक्ट एक बड़ी सौगात की तरह है। मेडिकल सिटी बनने से आम आदमी को इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा और साथ ही आसपास के जिलों के लोगों को भी फायदा मिलेगा। उम्मीद है कि यह योजना जल्द ही साकार होगी और छत्तीसगढ़ को हेल्थकेयर के क्षेत्र में एक नई पहचान देगी। 📌www.deshharpal.com – आपके शहर, आपके सरोकार की आवाज
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eMudhra में तकनीकी गड़बड़ी की जांच के लिए IT मंत्रालय ने बनाई स्पेशल टीम, सरकार बोली- भारतीय वेबसाइट्स और ऐप सुरक्षित

डिजिटल सुरक्षा सेवाएं देने वाली कंपनी ई-मुद्रा (eMudhra) में तकनीकी गड़बड़ी सामने आने के बाद आईटी मंत्रालय ने मामले की जांच के लिए विशेष टीम गठित की है। सरकार के मुताबिक, इस गड़बड़ी का असर कंपनी के विदेशी कारोबार तक सीमित है। भारतीय वेबसाइट्स और ऐप्स की सुरक्षा प्रभावित होने की बात सामने नहीं आई है। सरकार ने सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों से सावधान रहने की अपील की है। मामले की जांच साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की मदद से की जा रही है, ताकि गड़बड़ी की वजह और उसके संभावित प्रभाव का पता लगाया जा सके। eMudhra दो तरह की डिजिटल सुरक्षा सेवाएं देती है ई-मुद्रा का कारोबार मुख्य रूप से दो क्षेत्रों में फैला है। पहला, भारत में डिजिटल सिग्नेचर और eSign सेवाएं देना। दूसरा, विदेशी वेबसाइट्स के लिए डिजिटल सुरक्षा प्रमाणपत्र जारी करना। कंपनी से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, हालिया तकनीकी गड़बड़ी उसके विदेशी कारोबार से संबंधित डिजिटल सर्टिफिकेट्स में सामने आई। भारतीय डिजिटल सिग्नेचर और eSign सेवाओं पर इसका असर होने की जानकारी नहीं दी गई है। सिस्टम की खराबी से बने कमजोर सुरक्षा कोड ई-मुद्रा के मुताबिक, सिस्टम में तकनीकी खराबी के कारण कुछ कमजोर सुरक्षा कोड बन गए थे। एक साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ ने इस समस्या के बारे में एप्पल, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और मोजिला जैसी बड़ी टेक कंपनियों को अलर्ट किया। चिंता जताई गई कि इन कमजोर कोड का फायदा उठाकर साइबर हमलावर सुरक्षा प्रमाणपत्रों की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा सकते हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि इन कोड का इस्तेमाल करके वास्तव में कोई हमला हुआ था। गूगल और मोजिला ने प्रभावित सर्टिफिकेट्स पर की कार्रवाई तकनीकी गड़बड़ी की जानकारी मिलने के बाद ब्राउजर कंपनियों ने प्रभावित सुरक्षा प्रमाणपत्रों के खिलाफ कदम उठाए। इन कदमों का उद्देश्य प्रभावित प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल से जुड़े जोखिम को सीमित करना है। eMudhra का दावा- ग्राहक का डेटा चोरी नहीं हुआ ई-मुद्रा ने कहा है कि उसका मुख्य सिस्टम सुरक्षित है और किसी ग्राहक का डेटा चोरी नहीं हुआ है। कंपनी के अनुसार, जिस विदेशी कारोबार में गड़बड़ी सामने आई, उससे उसकी कुल कमाई का लगभग 1 प्रतिशत हिस्सा आता है। कंपनी प्रभावित विदेशी ग्राहकों को नए और सुरक्षित डिजिटल सर्टिफिकेट उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में भी जुटी है, ताकि उनकी सेवाएं जारी रह सकें। सरकार ने अफवाहों से बचने की अपील की आईटी मंत्रालय ने कहा है कि मामले की जांच की जा रही है और सोशल मीडिया पर चल रही अपुष्ट खबरों के आधार पर घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार की साइबर सुरक्षा टीम और विशेषज्ञ तकनीकी पहलुओं की पड़ताल कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद मामले से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल, गड़बड़ी के वास्तविक दायरे और संभावित प्रभाव को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
Gold

Gold Price Today: सोने के दाम में बड़ी गिरावट, 10 ग्राम का भाव ₹1.43 लाख पर

सोना (Gold) और चांदी (Silver) खरीदने का इंतजार कर रहे लोगों के लिए राहत की खबर है। पिछले तीन दिनों में दोनों कीमती धातुओं के भाव में अच्छी-खासी गिरावट आई है। सोना करीब ₹3,000 और चांदी लगभग ₹9,000 तक सस्ती हुई है। ऐसे में शादी-ब्याह के लिए गहने खरीदने या निवेश की योजना बना रहे लोगों की नजर अब बाजार के अगले रुख पर है। 22 अक्टूबर 2026 के बाजार अपडेट के मुताबिक, 10 ग्राम सोने की कीमत करीब ₹1.43 लाख और चांदी का भाव लगभग ₹2.01 लाख प्रति किलो बताया जा रहा है। हालांकि, अलग-अलग बाजारों में कीमतों का अंतर हो सकता है। Gold Rate Today: ₹1.43 लाख पर पहुंचा 10 ग्राम सोना Gold Price में आई गिरावट से खरीदारों को कुछ राहत जरूर मिली है। बीते तीन दिनों में भाव करीब ₹3,000 नीचे आने से उन लोगों के लिए खरीदारी का मौका बन सकता है, जो लंबे समय से कीमतें कम होने का इंतजार कर रहे थे। हालांकि, सोना खरीदने से पहले अपने शहर का ताजा भाव जरूर पता कर लें। 24 कैरेट सोने की कीमत और गहने बनाने में इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट सोने के भाव में अंतर होता है। इसके अलावा ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और GST भी देना पड़ता है। Silver Rate Today: चांदी ₹9,000 तक हुई सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली है। पिछले तीन दिनों में चांदी करीब ₹9,000 तक सस्ती हुई है और इसका भाव लगभग ₹2.01 लाख प्रति किलो के स्तर पर बताया जा रहा है। चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर उन ग्राहकों पर भी पड़ता है, जो त्योहारों पर चांदी के सिक्के, बर्तन या दूसरे सामान खरीदते हैं। हालांकि, खरीदारी से पहले स्थानीय बाजार में चांदी का ताजा भाव और शुद्धता की जानकारी लेना जरूरी है। सोना-चांदी के दाम क्यों गिर रहे हैं? Gold or Silver की कीमतें केवल घरेलू मांग से तय नहीं होतीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलाव, डॉलर की चाल, रुपये की स्थिति और ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की उम्मीदें भी इनके भाव पर असर डालती हैं। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी की कीमतें कमजोर होती हैं, तो भारतीय बाजार में भी इसका असर दिखाई दे सकता है। इसके अलावा मुनाफावसूली के कारण भी कीमतों में गिरावट आ सकती है। हालांकि, बाजार में आई गिरावट की किसी एक वजह को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा। कीमतों की चाल कई आर्थिक और वैश्विक कारकों पर निर्भर करती है। क्या अभी सोना और चांदी खरीदना सही रहेगा? अगर आप शादी या त्योहार के लिए गहने खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो मौजूदा गिरावट आपके लिए राहत की बात हो सकती है। लेकिन केवल तीन दिन की गिरावट देखकर यह मान लेना ठीक नहीं है कि आगे भी भाव लगातार कम होंगे। खरीदारी से पहले अलग-अलग ज्वेलर्स के रेट की तुलना करें। सोने पर हॉलमार्क और शुद्धता की जांच करें तथा बिल में मेकिंग चार्ज और GST का पूरा विवरण देखें। निवेश के लिहाज से भी जल्दबाजी करने के बजाय अपने बजट और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखना बेहतर है। आगे Gold-Silver Price में क्या बदलाव हो सकता है? आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार का रुख, अमेरिकी डॉलर, ब्याज दरों से जुड़ी खबरें और रुपये की चाल सोने-चांदी की कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में भाव में फिर तेजी आने या गिरावट जारी रहने, दोनों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कुल मिलाकर, तीन दिनों में सोने और चांदी के दाम में आई गिरावट ने खरीदारों को थोड़ी राहत दी है। अगर आप आज खरीदारी करने जा रहे हैं, तो पहले अपने शहर का ताजा भाव जरूर जांच लें, क्योंकि बाजार भाव और ज्वेलरी की अंतिम कीमत में अंतर हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Amit Shah

Amit Shah Statement: धरने से कुछ नहीं होगा, जनता के बीच जाएं- विपक्ष को शाह की सलाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि सिर्फ धरना-प्रदर्शन करने से जनता का भरोसा नहीं जीता जा सकता। अगर विपक्ष को राजनीति में आगे बढ़ना है, तो उसे जनता के बीच जाकर काम करना होगा। शाह ने कांग्रेस को लेकर दावा किया कि पार्टी अगले 30 साल तक सत्ता में नहीं लौट पाएगी। उन्होंने अपने बयान में राहुल गांधी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी राजनीति और विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों पर सवाल उठाए। अमित शाह का यह बयान ऐसे समय आया है, जब देश में चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूची और कथित वोट चोरी को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच सियासी टकराव जारी है। कांग्रेस लगातार चुनाव आयोग से जवाब मांग रही है, जबकि भाजपा विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक हताशा से जोड़ रही है। Amit Shah Statement: कांग्रेस पर क्यों बरसे गृह मंत्री? अमित शाह ने अपने संबोधन में कांग्रेस की राजनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव जीतने के लिए केवल विरोध प्रदर्शन करना काफी नहीं है। राजनीतिक दलों को जनता की समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए काम करना चाहिए। शाह के मुताबिक, विपक्ष को अपनी चुनावी हार की वजहों पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति पर निशाना साधते हुए दावा किया कि पार्टी की मौजूदा राजनीति उसे लंबे समय तक सत्ता से दूर रख सकती है। हालांकि, कांग्रेस के अगले 30 साल तक सत्ता में नहीं आने का बयान अमित शाह का राजनीतिक दावा है। इसे किसी निश्चित चुनावी नतीजे के तौर पर नहीं देखा जा सकता। Rahul Gandhi का नाम लिए बिना क्या बोले अमित शाह? अमित शाह ने राहुल गांधी का नाम लिए बिना विपक्ष के धरने और प्रदर्शनों पर टिप्पणी की। उनके बयान को कांग्रेस और राहुल गांधी की ओर से चुनाव आयोग के खिलाफ उठाए जा रहे सवालों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। शाह का कहना है कि विपक्ष को जनता के बीच जाकर अपना समर्थन बढ़ाना चाहिए। केवल आरोप लगाने या सड़कों पर उतरने से चुनावी राजनीति में सफलता नहीं मिलती। दूसरी तरफ, कांग्रेस का तर्क है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। पार्टी और INDIA गठबंधन के नेता मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। Vote Chori और SIR पर भाजपा-विपक्ष में टकराव देश की राजनीति में वोट चोरी और SIR यानी Special Intensive Revision का मुद्दा लगातार चर्चा में है। राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची में नाम हटाए जाने और चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि इन मामलों में स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। वहीं, भाजपा इन आरोपों को खारिज करती रही है और विपक्ष पर चुनावी हार के बाद संस्थाओं पर सवाल उठाने का आरोप लगाती है। इस विवाद में दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हैं। मतदाता सूची से जुड़े आरोपों की सच्चाई समझने के लिए आधिकारिक आंकड़ों, चुनाव आयोग के जवाब और उपलब्ध प्रमाणों को देखना जरूरी है। चुनाव आयोग को लेकर भी जारी है सियासी लड़ाई मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दलों का विरोध पहले भी सामने आ चुका है। विपक्ष ने मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों पर जवाब मांगा है। वहीं, भाजपा का कहना है कि चुनावी नतीजों को लेकर बेबुनियाद आरोप लगाने के बजाय विपक्ष को अपनी रणनीति पर ध्यान देना चाहिए। इस मुद्दे ने भाजपा और INDIA गठबंधन के बीच राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। आने वाले समय में यह विवाद चुनावी भाषणों और विपक्षी अभियानों में भी अहम भूमिका निभा सकता है। Amit Shah ने AAP पर भी साधा निशाना अमित शाह ने अपने संबोधन में आम आदमी पार्टी (AAP) की राजनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने विपक्षी दलों को सलाह दी कि वे आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर जनता के लिए काम करें। दिल्ली की राजनीति में भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच लंबे समय से टकराव रहा है। ऐसे में शाह का बयान विपक्ष पर राजनीतिक दबाव बनाने के साथ-साथ भाजपा के चुनावी संदेश को मजबूत करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। आगे क्या होगा? कांग्रेस के सामने क्या चुनौती है? अमित शाह के बयान से साफ है कि भाजपा कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शनों को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है। दूसरी ओर, कांग्रेस चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर जवाब मांगने की अपनी रणनीति पर कायम है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि विपक्ष अपने आरोपों के समर्थन में क्या तथ्य सामने रखता है और चुनाव आयोग इन सवालों पर क्या जवाब देता है। साथ ही, यह भी देखना होगा कि इन मुद्दों का आने वाले चुनावों में मतदाताओं पर कितना असर पड़ता है। फिलहाल, अमित शाह का 30 साल वाला बयान राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। लेकिन आखिरकार चुनाव में किसे जनता का समर्थन मिलेगा, इसका फैसला मतदाता ही करेंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Ranbir Kapoor

Ranbir Kapoor Controversy: सच्चाई और अच्छाई पर गलत बोल गए रणबीर, अब मांगी माफी

बॉलीवुड एक्टर रणबीर कपूर (Ranbir Kapoor) अपने एक बयान को लेकर चर्चा में हैं। दशहरे के मौके पर कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सच्चाई और अच्छाई को लेकर कुछ ऐसा कह दिया, जिस पर सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे। वीडियो वायरल हुआ तो लोगों ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया। अब रणबीर कपूर ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी है। उन्होंने सफाई दी कि बोलते समय उनकी जुबान फिसल गई थी और वह कुछ और कहना चाहते थे। दशहरे पर क्या बोल गए रणबीर कपूर? दरअसल, दशहरे के मौके पर Ranbir Kapoor कोलकाता में एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इस दौरान वह बुराई पर अच्छाई की जीत के संदेश के बारे में बात कर रहे थे। लेकिन अपनी बात रखते समय वह ‘सच्चाई और अच्छाई की जीत’ की जगह उनके अंत होने जैसी बात कह गए। उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इसके बाद कई यूजर्स ने उनके शब्दों पर सवाल उठाए, तो कुछ ने मजाकिया अंदाज में प्रतिक्रिया दी। मामला इसलिए भी चर्चा में आया क्योंकि रणबीर कपूर अपनी आगामी फिल्म ‘रामायण’ में भगवान राम की भूमिका निभा रहे हैं। ट्रोलिंग के बाद Ranbir Kapoor ने मांगी माफी बयान को लेकर विवाद बढ़ने के बाद रणबीर कपूर ने चेन्नई में आयोजित ‘रामायण’ के म्यूजिकल इवेंट में इस पर सफाई दी। उन्होंने माना कि उस समय बोलते हुए उनकी जुबान फिसल गई थी। Ranbir ने बताया कि वह कहना चाहते थे कि बुराई कितनी भी ताकतवर क्यों न हो, आखिरकार जीत सच्चाई और अच्छाई की ही होती है। लेकिन शब्दों के गलत इस्तेमाल के कारण उनकी बात का अर्थ बदल गया। उन्होंने अपनी गलती के लिए माफी भी मांगी। अभिनेता ने हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी समझाया कि कभी-कभी वह कहना कुछ चाहते हैं, लेकिन उनके मुंह से कुछ और निकल जाता है। उनकी इस सफाई के बाद यह साफ हुआ कि उनका इरादा दशहरे के संदेश के उलट बात कहने का नहीं था। Social Media पर क्यों होने लगे Ranbir Kapoor ट्रोल? Ranbir Kapoor का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कुछ लोगों ने इसे जुबान फिसलने की सामान्य गलती बताया, जबकि कुछ यूजर्स ने सार्वजनिक मंच पर बोलते समय ज्यादा सावधानी बरतने की बात कही। फिल्म ‘रामायण’ में भगवान राम का किरदार निभाने की वजह से भी यह बयान लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। हालांकि, रणबीर ने ज्यादा देर तक इस मामले पर चुप रहने के बजाय अपनी बात स्पष्ट की और गलती स्वीकार कर ली। Ranbir Kapoor की अपकमिंग फिल्म Ramayana भी चर्चा में रणबीर कपूर इन दिनों निर्देशक नितेश तिवारी की फिल्म ‘रामायण’ को लेकर भी सुर्खियों में हैं। फिल्म में साई पल्लवी माता सीता, यश रावण, सनी देओल हनुमान और रवि दुबे लक्ष्मण की भूमिका में नजर आएंगे। फिल्म के पहले भाग की रिलीज 5 नवंबर 2026 को तय बताई गई है। ऐसे में फिल्म के प्रमोशन के दौरान रणबीर कपूर के बयान ने भी लोगों का ध्यान खींचा है। Ranbir Kapoor Controversy: क्या है पूरा मामला? इस पूरे विवाद की शुरुआत दशहरे के कार्यक्रम में बोले गए गलत शब्दों से हुई। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद रणबीर कपूर को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उनकी जुबान फिसल गई थी और वह अच्छाई व सच्चाई की जीत की बात कर रहे थे। फिलहाल, रणबीर कपूर की माफी के बाद इस मामले में उनकी सफाई सामने आ चुकी है। अब दर्शकों की नजर उनकी फिल्म ‘रामायण’ पर है, जिसे लेकर पहले से ही काफी उत्सुकता बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

छत्तीसगढ़ में परीक्षा में नकल और गड़बड़ी के मामलों की सुनवाई के लिए 3 स्पेशल कोर्ट गठित

छत्तीसगढ़ में प्रतियोगी परीक्षाओं और अन्य सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल व गड़बड़ी से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए तीन स्पेशल कोर्ट बनाई गई हैं। राज्य शासन ने रायपुर, बिलासपुर और कोरिया के डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस कोर्ट को विशेष अदालत के रूप में नामित किया है। कोरिया जिले की स्पेशल कोर्ट बैकुंठपुर में होगी। इस संबंध में कानून एवं विधायी कार्य विभाग ने अधिसूचना जारी की है। इन अदालतों में सार्वजनिक परीक्षाओं के दौरान नकल और अनुचित तरीकों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों की सुनवाई की जाएगी। 2024 के कानून के तहत गठित हुईं विशेष अदालतें राज्य में यह व्यवस्था पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 के तहत की गई है। अधिसूचना में कानून की धारा 12-क की उपधारा (2) का उल्लेख किया गया है। इसी प्रावधान के तहत राज्य शासन ने तीन जिलों के डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस कोर्ट को स्पेशल कोर्ट के रूप में नामित किया है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष न्यायिक व्यवस्था उपलब्ध कराना है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से परामर्श के बाद जारी हुई अधिसूचना छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश कृष्ण राम महापात्र से परामर्श के बाद राज्य शासन ने यह अधिसूचना जारी की है। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल रजनीश श्रीवास्तव ने संबंधित जिलों के डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जजों को अधिसूचना की प्रतियां भेजकर आवश्यक निर्देश दिए हैं। तीनों विशेष अदालतें अपने-अपने न्यायिक क्षेत्राधिकार में आने वाले परीक्षा संबंधी गड़बड़ी के मामलों की सुनवाई करेंगी। इस व्यवस्था के तहत प्रतियोगी परीक्षाओं और अन्य सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल या अनुचित तरीकों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार सुना जाएगा।

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