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जबलपुर में किसान को मारी गोली, पुरानी रंजिश में कट्टे से किया हमला

Jabalpur जिले के पाटन थाना क्षेत्र में शनिवार सुबह एक किसान को गोली मार दी गई। ग्राम खमदेही में खेत जा रहे किसान पर बाइक सवार युवक ने कट्टे से फायर कर दिया। गोली किसान के पेट में लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल किसान को पहले पाटन स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद मेडिकल कॉलेज जबलपुर रेफर कर दिया गया। खेत जाते समय हुआ हमला जानकारी के अनुसार, खमदेही गांव निवासी धर्मेंद्र रैकवार शनिवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे अपने खेत की ओर जा रहा था। इसी दौरान गांव के बाहर बाइक से पहुंचे रामनारायण पटेल ने उसे रोक लिया। दोनों के बीच पहले कहासुनी हुई और फिर विवाद बढ़ गया। आरोप है कि गुस्से में आरोपी ने कट्टा निकालकर फायर कर दिया। गोली धर्मेंद्र के पेट में लगी और वह मौके पर ही गिर पड़ा। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। छह महीने पुरानी रंजिश गोली चलने की आवाज सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और घायल किसान को तुरंत अस्पताल पहुंचाया। घायल धर्मेंद्र ने पुलिस को बताया कि करीब छह महीने पहले रामनारायण के खेत में काम करने वाले कर्मचारियों से उसका विवाद हुआ था। उस समय दोनों पक्षों के बीच मारपीट भी हुई थी। पीड़ित का आरोप है कि उसी पुरानी रंजिश के चलते उस पर हमला किया गया। आरोपी की तलाश में जुटी पुलिस घटना की सूचना मिलते ही पाटन थाना प्रभारी गोपेंद्र सिंह बघेल पुलिस टीम के साथ अस्पताल पहुंचे और घायल के बयान दर्ज किए। पुलिस के मुताबिक शुरुआती जांच में मामला पुरानी दुश्मनी से जुड़ा नजर आ रहा है। टीआई गोपेंद्र सिंह बघेल ने बताया कि धर्मेंद्र खेत जाने से पहले गांव के नए सामुदायिक केंद्र में पानी डालने के लिए रुका था। इसी दौरान आरोपी वहां पहुंचा और मौका मिलते ही गोली चला दी। पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही है। अधिक जानकारी और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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Gwalior Crime News: उधार के पैसे मांगने पर युवक को पेट्रोल डालकर जलाया, 4 महीने बाद दर्ज हुई FIR

Gwalior Crime News: उधार के पैसे मांगने पर युवक को पेट्रोल डालकर जलाया, 4 महीने बाद दर्ज हुई FIR

मध्य प्रदेश के Gwalior से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक युवक ने आरोप लगाया है कि उधार दिए गए पैसे वापस मांगने पर एक महिला ने उस पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। गंभीर रूप से झुलसा युवक करीब चार महीने तक अस्पताल में भर्ती रहा। इलाज के बाद अब उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, जिसके आधार पर FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पैसे मांगने पर हुआ विवाद जानकारी के मुताबिक, युवक ने महिला को कुछ समय पहले उधार पैसे दिए थे। जब उसने अपने पैसे वापस मांगे, तो दोनों के बीच विवाद हो गया। आरोप है कि विवाद इतना बढ़ गया कि महिला ने पेट्रोल डालकर युवक को आग के हवाले कर दिया। गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती रहा युवक घटना में युवक बुरी तरह झुलस गया था। उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका लंबे समय तक इलाज चला। करीब चार महीने तक अस्पताल में रहने के बाद उसकी हालत में सुधार हुआ। अब दर्ज कराई शिकायत इलाज पूरा होने के बाद युवक ने पूरे मामले की शिकायत पुलिस से की। पुलिस ने शिकायत के आधार पर FIR दर्ज कर ली है और मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस जुटी जांच में पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों की जांच की जा रही है। पीड़ित के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। न्याय की उम्मीद चार महीने तक दर्द और इलाज का सामना करने के बाद युवक अब न्याय की उम्मीद कर रहा है। वहीं, पुलिस का कहना है कि जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि छोटे विवाद भी कभी-कभी गंभीर अपराध का रूप ले सकते हैं। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है।
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MP Teachers News: 1.5 लाख शिक्षकों के लिए TET पास करना अनिवार्य, सुप्रीम कोर्ट ने दिया 1 साल का अतिरिक्त समय

MP Teachers News: 1.5 लाख शिक्षकों के लिए TET पास करना अनिवार्य, सुप्रीम कोर्ट ने दिया 1 साल का अतिरिक्त समय

MP के करीब 1.5 लाख शिक्षकों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करना अनिवार्य होगा। हालांकि राहत देते हुए कोर्ट ने पात्रता परीक्षा पास करने के लिए एक साल का अतिरिक्त समय भी दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि बच्चों के भविष्य और शिक्षा की गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। इसलिए स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए आवश्यक योग्यता और पात्रता परीक्षा बेहद जरूरी है। क्या है पूरा मामला? मध्य प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक कार्यरत हैं, जिन्होंने अभी तक TET परीक्षा पास नहीं की है। इस मामले को लेकर लंबे समय से कानूनी प्रक्रिया चल रही थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि सभी संबंधित शिक्षकों को निर्धारित समय सीमा के भीतर TET पास करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए योग्य और प्रशिक्षित शिक्षकों की आवश्यकता है। बच्चों को बेहतर शिक्षा देना सरकार और शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी है। ऐसे में पात्रता परीक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी माना कि कई शिक्षक लंबे समय से सेवा दे रहे हैं, इसलिए उन्हें राहत देते हुए TET पास करने के लिए एक वर्ष का अतिरिक्त समय दिया गया है। 1.5 लाख शिक्षकों पर पड़ेगा असर इस फैसले का असर मध्य प्रदेश के करीब डेढ़ लाख शिक्षकों पर पड़ेगा। अब उन्हें निर्धारित अवधि के भीतर TET परीक्षा पास करनी होगी। यदि शिक्षक तय समय में पात्रता परीक्षा पास नहीं करते हैं, तो उनके भविष्य को लेकर प्रशासनिक निर्णय लिए जा सकते हैं। शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर जोर विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। पात्रता परीक्षा से यह सुनिश्चित होगा कि बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षक आवश्यक शैक्षणिक मानकों को पूरा करते हों। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि शिक्षक तय समय सीमा के भीतर TET परीक्षा पास कर पाते हैं या नहीं।
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ओंकारेश्वर में RTO और ट्रैफिक पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 13 यात्री बसों पर जुर्माना; 4 ऑटो जब्त

तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में श्रद्धालुओं और यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आरटीओ और ट्रैफिक पुलिस ने संयुक्त रूप से सघन वाहन चेकिंग अभियान चलाया। इस दौरान नियमों का उल्लंघन करने वाली 13 यात्री बसों पर कार्रवाई करते हुए 44 हजार 500 रुपए का जुर्माना वसूला गया। वहीं बिना जरूरी दस्तावेजों के चल रहे 4 ऑटो रिक्शा भी जब्त किए गए हैं। अभियान के दौरान जब्त किए गए ऑटो रिक्शा को मांधाता थाना परिसर में सुरक्षित खड़ा कराया गया है। कार्रवाई से वाहन चालकों में हड़कंप की स्थिति रही। 52 यात्री बसों की हुई जांच अतिरिक्त क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी दीपक मांझी ने बताया कि जांच अभियान के दौरान कुल 52 यात्री बसों की जांच की गई। इस दौरान बसों के फिटनेस सर्टिफिकेट, परमिट, बीमा और प्रदूषण प्रमाण पत्र (PUC) की बारीकी से जांच की गई। जिन वाहनों में दस्तावेजों की कमी या अन्य अनियमितताएं मिलीं, उनके खिलाफ मोटरयान अधिनियम के तहत चालानी कार्रवाई की गई। श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर प्रशासन का फोकस परिवहन विभाग का कहना है कि ओंकारेश्वर में हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में यात्रियों को सुरक्षित सफर उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। अधिकारियों ने साफ किया है कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और यातायात व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए आगे भी इस तरह के सघन जांच अभियान लगातार चलाए जाएंगे। अधिक खबरों और अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com।
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पुणे पोर्श केस में फिर मचा बवाल: जमानत के बाद पार्टी करता दिखा आरोपी परिवार, पीड़ितों के परिजनों में नाराजगी

महाराष्ट्र के पुणे में मई 2024 में हुए चर्चित पोर्श कार हादसे को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में आरोपी नाबालिग के पिता को जमानत मिलने के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें आरोपी परिवार पार्टी करता और डांस करता नजर आ रहा है। वीडियो सामने आने के बाद पीड़ित परिवारों में नाराजगी बढ़ गई है। यह मामला पुणे के कल्याणी नगर इलाके का है, जहां तेज रफ्तार पोर्श कार ने दो आईटी इंजीनियरों को कुचल दिया था। हादसे में दोनों युवकों की मौके पर ही मौत हो गई थी। बताया गया था कि कार एक 17 वर्षीय नाबालिग चला रहा था। एमपी के दो इंजीनियरों की गई थी जान मृतकों में मध्यप्रदेश के जबलपुर निवासी अश्विनी कोष्ठा और उमरिया के रहने वाले एक अन्य युवा इंजीनियर शामिल थे। हादसे के बाद पूरे देश में गुस्सा देखने को मिला था और जुवेनाइल जस्टिस सिस्टम पर भी सवाल उठे थे। घटना के बाद जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने आरोपी नाबालिग को कुछ शर्तों के साथ जमानत दे दी थी। वहीं आरोपी के पिता विशाल अग्रवाल और परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई थी। वायरल वीडियो पर भड़का पीड़ित परिवार अब सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने मामले को फिर चर्चा में ला दिया है। जबलपुर निवासी मृतक इंजीनियर अश्विनी कोष्ठा के पिता ने आरोपी परिवार के व्यवहार को बेहद असंवेदनशील बताया है। उन्होंने कहा कि जिस परिवार की लापरवाही से दो युवाओं की जान चली गई, उसी परिवार का इस तरह जश्न मनाना पीड़ित परिवारों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। उन्होंने कहा कि आरोपी परिवार में न शर्म बची है और न ही संवेदनशीलता। इस तरह की हरकतें न्याय व्यवस्था का मजाक उड़ाने जैसी हैं। पीड़ित परिवार ने आरोपी को मिली जमानत पर दोबारा विचार करने की मांग भी की है। आरोपी परिवार ने दी सफाई वहीं आरोपी परिवार ने वायरल वीडियो को पुराना बताया है। परिवार का कहना है कि यह वीडियो 2 सितंबर 2023 का है, जब गोवा में उनकी 25वीं शादी की सालगिरह मनाई गई थी। परिवार ने आरोप लगाया कि वीडियो को गलत तरीके से पेश कर माहौल बनाया जा रहा है। आरोपी पक्ष का यह भी कहना है कि यह उनका निजी वीडियो है, जिसे बिना अनुमति सोशल मीडिया पर वायरल किया गया। उन्होंने वीडियो लीक करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात भी कही है। सोशल मीडिया से लेकर कानूनी गलियारों तक चर्चा फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया से लेकर कानूनी गलियारों तक चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग लगातार इस केस में सख्त कार्रवाई और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं। अधिक खबरों और अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com।
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ग्वालियर रेत फड़ गोलीकांड: मुख्य आरोपी विष्णु दुबे और भतीजा गिरफ्तार, लाइसेंसी पिस्टल जब्त

ग्वालियर के महाराजपुरा थाना क्षेत्र में रेत फड़ पर हुई गोलीबारी और हत्या के मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी विष्णु दुबे और उसके भतीजे बृजमोहन को घटना के कुछ ही घंटों के भीतर गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपियों को गोहद से पकड़ा गया है। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल की गई लाइसेंसी पिस्टल भी जब्त कर ली है। बताया जा रहा है कि बुधवार सुबह करीब 10:30 बजे रेत फड़ पर किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। पुलिस पूछताछ में BSF से रिटायर्ड आरोपी विष्णु दुबे ने बताया कि उसका सत्यभान गुर्जर और भोला उर्फ महेंद्र गुर्जर से झगड़ा हुआ था। आरोपी के मुताबिक विवाद के दौरान उसके साथ अभद्र व्यवहार किया गया, जिससे वह गुस्से में आ गया। इसके बाद वह घर गया, लाइसेंसी पिस्टल लेकर वापस लौटा और फायरिंग कर दी। गोलीबारी में भोला उर्फ महेंद्र गुर्जर को पेट और सीने में दो गोलियां लगीं। गंभीर हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। वहीं सत्यभान गुर्जर भी गोली लगने से घायल हो गए, जिनका अस्पताल में इलाज जारी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, दोनों आरोपी फिलहाल महाराजपुरा थाना लॉकअप में हैं और उनसे लगातार पूछताछ की जा रही है। आरोपी विष्णु दुबे ने पूछताछ में यह भी कहा कि यदि मामले में निर्दोष लोगों को फंसाया गया तो विवाद और बढ़ सकता है। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया था। मृतक भोला गुर्जर के परिजनों ने पोस्टमार्टम के बाद शव को एयरपोर्ट तिराहे पर रखकर चक्का जाम कर दिया। परिजनों ने आरोपियों पर सख्त कार्रवाई, परिवार के एक सदस्य को नौकरी और लाइसेंसी हथियार देने की मांग की। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और समझाइश के बाद जाम खुलवाया। अधिकारियों ने निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया। इस बीच घटना का CCTV वीडियो भी सामने आया है, जिसमें झगड़े के बाद आरोपी विष्णु दुबे लाइसेंसी पिस्टल से भोला और सत्यभान गुर्जर पर फायरिंग करता दिखाई दे रहा है। फायरिंग के बाद आरोपी मौके से भाग निकला था। पुलिस ने गुरुवार को दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें पूछताछ के लिए रिमांड पर भेज दिया गया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की हर एंगल से जांच कर रही है।
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भोपाल में डेढ़ करोड़ का अवैध कफ सिरप फैक्ट्री का भंडाफोड़, STF की रेड में 700 से ज्यादा पेटियां जब्त

भोपाल के गांधी नगर इलाके में एसटीएफ ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब डेढ़ करोड़ रुपए कीमत का अवैध कफ सिरप पकड़ा है। यह कार्रवाई डोबरा पटेल सिटी कॉलोनी में गुरुवार देर रात की गई। छापेमारी के दौरान एसटीएफ ने 700 से ज्यादा पेटियां, कफ सिरप बनाने में इस्तेमाल होने वाली मशीनें और भारी मात्रा में नशीला सिरप बरामद किया। मामले में 10 लोगों को हिरासत में लिया गया है। जानकारी के मुताबिक, मकान में ‘आफ कफ’ नाम से अवैध रूप से नशीला कफ सिरप तैयार किया जा रहा था। गुप्त सूचना मिलने के बाद एसटीएफ की टीम ने रात करीब 12 बजे दबिश दी। कार्रवाई शुक्रवार सुबह 3 बजे तक चली। छापे के दौरान मकान के अलग-अलग कमरों में कफ सिरप की बोतलें और कार्टन भरे मिले। एसटीएफ ने बरामद कफ सिरप के सैंपल जांच के लिए भेज दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं आरोपियों से पूछताछ के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश भी जारी है। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस पूरी कार्रवाई की भनक स्थानीय गांधी नगर पुलिस को भी नहीं लगी। एसटीएफ अधिकारियों के अनुसार, लंबे समय से इलाके से अवैध नशीले कफ सिरप की सप्लाई की शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद गुप्त रूप से निगरानी की जा रही थी। जिस मकान में यह अवैध फैक्ट्री संचालित हो रही थी, वह किसी मालवीय नाम के व्यक्ति का बताया जा रहा है। हालांकि खबर लिखे जाने तक मकान मालिक से संपर्क नहीं हो सका था। एसटीएफ अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस अवैध कारोबार का नेटवर्क किन लोगों तक फैला हुआ है और इसकी सप्लाई प्रदेश के किन इलाकों में की जा रही थी। इस कार्रवाई के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि रिहायशी इलाके में इस तरह का अवैध कारोबार चल रहा है।
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गुना में पारिवारिक विवाद से परेशान विवाहिता मोबाइल टावर पर चढ़ी, 3 घंटे बाद प्रशासन ने सुरक्षित उतारा

मध्य प्रदेश के गुना जिले में गुरुवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब एक विवाहिता पारिवारिक विवाद से परेशान होकर गांव के मोबाइल टावर पर चढ़ गई। करीब तीन घंटे तक चले हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद पुलिस और प्रशासन की टीम ने समझाइश देकर महिला को सुरक्षित नीचे उतार लिया। मामला गुना जिले की कुंभराज तहसील के ग्राम खेजरा रामा का है। जानकारी के अनुसार, 23 वर्षीय निकिता की शादी करीब तीन साल पहले कुलदीप मीना से हुई थी। बताया जा रहा है कि ससुराल में लंबे समय से पारिवारिक विवाद चल रहा था। इसी बात से नाराज होकर गुरुवार सुबह करीब 5 बजे निकिता गांव में लगे मोबाइल टावर पर चढ़ गई। ग्रामीणों ने दी पुलिस को सूचना सुबह ग्रामीणों की नजर महिला पर पड़ी तो गांव में अफरा-तफरी मच गई। लोगों ने तुरंत पुलिस और प्रशासन को सूचना दी। खबर मिलते ही कुंभराज तहसीलदार कमल मंडेलिया, थाना प्रभारी पंकज त्यागी और पटवारी प्रवीण सिंह राणा टीम के साथ मौके पर पहुंचे। स्थिति को देखते हुए नगर परिषद और स्वास्थ्य विभाग की टीम को भी मौके पर बुलाया गया। समझाइश से शांत हुआ मामला महिला काफी नाराज थी और नीचे आने को तैयार नहीं हो रही थी। ऐसे में प्रशासन ने बल प्रयोग करने के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाया। अधिकारियों ने लाउडस्पीकर के जरिए महिला से लगातार संवाद किया और भरोसा दिलाया कि उसकी हर समस्या सुनी जाएगी। अधिकारियों ने महिला से कहा कि उसकी शिकायतों पर प्रशासन और कानून के दायरे में रहकर उचित कार्रवाई की जाएगी। लगातार समझाइश और भरोसे के बाद महिला का गुस्सा शांत हुआ और वह धीरे-धीरे टावर से नीचे उतर आई। सुरक्षित नीचे उतरने पर लोगों ने ली राहत की सांस महिला के सुरक्षित नीचे आने के बाद मौके पर मौजूद ग्रामीणों और अधिकारियों ने राहत की सांस ली। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने तुरंत महिला का प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण किया। घटना के बाद गांव में काफी देर तक लोगों की भीड़ जुटी रही। www.deshharpal.com पर पढ़ें देश-दुनिया और प्रदेश की ताजा खबरें।
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ईद पर इंदौर से दिखी गंगा-जमुनी तहजीब, शहर काजी ने गाय को राष्ट्रीय धरोहर बनाने की उठाई मांग

ईद के मौके पर देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर से गंगा-जमुनी तहजीब और सांप्रदायिक सौहार्द की खूबसूरत तस्वीर सामने आई। सदर बाजार स्थित ईदगाह में नमाज से पहले शहर काजी डॉ. इशरत अली ने भाईचारे, पर्यावरण संरक्षण और नशे से दूर रहने का संदेश दिया। उन्होंने खुले मंच से गाय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग की, जिसका वहां मौजूद हजारों नमाजियों ने हाथ उठाकर समर्थन किया। इसके बाद शांतिपूर्ण माहौल में ईद की नमाज अदा की गई। गाय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग शहर काजी डॉ. इशरत अली ने कहा कि गाय को दूसरी कौम के लोग बेहद सम्मान की नजर से देखते हैं। मुसलमानों पर अक्सर गोवंश को लेकर आरोप लगाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि गाय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाए, ताकि उसके वध पर पूरी तरह रोक लग सके। पानी बचाने और पर्यावरण बचाने की अपील अपने संबोधन में शहर काजी ने लोगों से पानी बचाने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि बारिश के पानी को जमीन में उतारना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। सिर्फ सरकार या प्रशासन के भरोसे नहीं रहना चाहिए। उन्होंने लोगों से ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने की भी अपील की। नशे के कारोबार पर जताई चिंता शहर काजी ने नशे के बढ़ते कारोबार पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि समाज के कुछ लोग खुद नशा बेच रहे हैं, जिससे युवा पीढ़ी बर्बाद हो रही है। उन्होंने कहा कि इंदौर में नशे का मुद्दा वे लगातार उठाते रहे हैं। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी इस विषय को गंभीरता से उठा चुके हैं। इंदौर की ईद एक और वजह से खास रही। यहां पिछले 50 वर्षों से एक हिंदू परिवार शहर काजी को उनके घर से ईदगाह तक लाने और वापस छोड़ने की परंपरा निभा रहा है। 50 साल पुरानी परंपरा बनी मिसाल इस बार भी सत्यनारायण सलवाडिया और उनके परिवार ने शहर काजी का फूल-मालाओं से स्वागत किया और उन्हें ससम्मान विशेष रूप से सजाई गई बग्घी में ईदगाह तक पहुंचाया। इस परंपरा को लोगों ने गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल बताया। खंडवा में भी उठी गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग बकरीद के मौके पर खंडवा के मुख्य ईदगाह समेत करीब 40 मस्जिदों में मुल्क की खुशहाली के लिए दुआ की गई। शहर काजी सैयद निसार अली ने केंद्र सरकार से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि खंडवा के मुस्लिम समाज ने वर्षों से हिंदू समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए गोवंश की कुर्बानी नहीं दी है। साथ ही उन्होंने गोवंश के नाम पर होने वाली मॉब लिंचिंग और अवैध कारोबार पर सख्त कार्रवाई की मांग भी की। धीरेंद्र शास्त्री ने भी किया समर्थन बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भी गाय को राष्ट्र माता घोषित करने की मांग को लेकर 27 जुलाई से राष्ट्रव्यापी अभियान चलाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि देशभर में हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा और जिलों में ज्ञापन सौंपे जाएंगे। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि अब देश में इस मुद्दे को लेकर माहौल बदल रहा है और सभी समाजों से समर्थन मिल रहा है www.deshharpal.com पर पढ़ें देश-दुनिया और प्रदेश की ताजा खबरें।
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Indore News: गांधी नगर में टेलर ने जहर खाकर दी जान, पड़ोसी की धमकियों और मारपीट से था परेशान

Indore News: गांधी नगर में टेलर ने जहर खाकर दी जान, पड़ोसी की धमकियों और मारपीट से था परेशान

मध्य प्रदेश के Indore शहर के गांधी नगर इलाके में एक टेलर की मौत का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि युवक ने जहरीला पदार्थ खा लिया था, जिसके बाद उसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों के मुताबिक, मृतक पिछले कई दिनों से मानसिक तनाव में था। उनका आरोप है कि पड़ोस में रहने वाले कुछ लोगों से उसका विवाद चल रहा था। करीब 10 दिन पहले दोनों पक्षों के बीच मारपीट भी हुई थी, जिसके बाद से उसे लगातार धमकियां मिल रही थीं। परिवार का कहना है कि इन घटनाओं से युवक काफी परेशान रहने लगा था। घटना वाले दिन भी वह तनाव में दिखाई दे रहा था। बाद में उसने जहरीला पदार्थ खा लिया। जब उसकी हालत बिगड़ी तो परिवार के लोग उसे तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं सके। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है और पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय लोगों के अनुसार मृतक मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। उसकी मौत के बाद परिवार में गहरा दुख है और इलाके में भी शोक का माहौल बना हुआ है।
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Bittu Tabahi

Bittu Tabahi ने बदली सोच, अकेले शुरू किया नदी सफाई अभियान; नगरपालिका भी हुई प्रभावित

नदी में गंदगी देखकर ज्यादातर लोग शिकायत करते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के एक युवक ने शिकायत करने के बजाय खुद कुछ करने की ठानी। स्थानीय स्तर पर ‘बिट्टू तबाही’ (Bittu Tabahi) के नाम से पहचाने जाने वाले इस युवक ने अकेले ही नदी की सफाई का जिम्मा उठा लिया। उनका यह जज्बा अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। बिट्टू ने नदी में जमा कचरे और गंदगी को देखकर सफाई अभियान शुरू किया। शुरुआत किसी बड़े इंतजाम या टीम के साथ नहीं हुई। उन्होंने अपने स्तर पर सफाई करना शुरू किया और लगातार इस काम में जुटे रहे। नदी को साफ रखने का लिया संकल्प बिट्टू का मानना है कि नदी सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि आसपास के लोगों और पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने नदी में जमा कचरे को हटाने की पहल की। उनका यह प्रयास धीरे-धीरे स्थानीय लोगों का ध्यान खींचने लगा। लोगों ने देखा कि बिना किसी दबाव या दिखावे के बिट्टू लगातार नदी की सफाई में लगे हुए हैं। नगरपालिका ने भी की पहल की सराहना बिट्टू के लगातार सफाई अभियान की जानकारी नगरपालिका तक पहुंची तो उनके प्रयास की सराहना की गई। एक युवक द्वारा अपने स्तर पर नदी को साफ रखने की कोशिश को अधिकारियों ने सकारात्मक कदम माना। इस पहल ने यह भी दिखाया कि अगर कोई व्यक्ति अपने आसपास के पर्यावरण को लेकर जिम्मेदारी महसूस करे, तो छोटी शुरुआत भी बड़ा संदेश दे सकती है। सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आया अभियान बिट्टू का नदी सफाई अभियान अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। उनके प्रयास को देखकर दूसरे लोगों में भी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने की उम्मीद है। आज नदियों में बढ़ता कचरा और प्रदूषण बड़ी चुनौती है। ऐसे में बिट्टू की पहल लोगों को यह संदेश देती है कि नदी को साफ रखना सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है। ‘बिट्टू तबाही’ ने दी एक अलग मिसाल बिट्टू की कहानी इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने बदलाव का इंतजार नहीं किया, बल्कि खुद बदलाव की शुरुआत करने का फैसला लिया। अकेले शुरू किया गया उनका यह सफाई अभियान अब दूसरों के लिए प्रेरणा बनता दिखाई दे रहा है। कई बार किसी बड़े बदलाव की शुरुआत बड़े अभियान से नहीं, बल्कि एक छोटे से कदम से होती है। बिट्टू का यह प्रयास उसी सोच की मिसाल है—अगर इरादा मजबूत हो, तो एक इंसान भी बदलाव की शुरुआत कर सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
UN

World Map में बड़ा बदलाव! UN ने Africa के असली Size को दिखाने का रास्ता साफ किया

दुनिया का नक्शा (World Map) देखते हुए शायद ही किसी ने सोचा होगा कि इसमें दिखाई देने वाले देशों और महाद्वीपों का आकार असलियत से अलग भी हो सकता है। लेकिन अब इसी मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र में एक अहम पहल हुई है। UN महासभा ने ऐसे World Map को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें धरती के अलग-अलग हिस्सों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाने की कोशिश की गई है। इस बदलाव के बाद नक्शे पर Africa पहले से काफी बड़ा दिखाई देगा, जबकि Europe और North America, खासकर US का आकार पुराने नक्शे की तुलना में छोटा नजर आ सकता है। प्रस्ताव को भारी समर्थन मिला, लेकिन अमेरिका ने इसका विरोध किया। पुराने World Map में आखिर समस्या क्या है? दुनिया के स्कूलों और कई नक्शों में लंबे समय से Mercator Projection का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसे 16वीं सदी में Gerardus Mercator ने तैयार किया था। उस समय इसका सबसे बड़ा फायदा समुद्री यात्राओं और Navigation में था। लेकिन Mercator Projection की एक खासियत ही इसकी सबसे बड़ी कमी भी बन गई। इसमें जैसे-जैसे कोई क्षेत्र Equator से दूर जाता है, उसका आकार नक्शे पर ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है। यही कारण है कि Greenland जैसे इलाके नक्शे पर अपनी वास्तविकता से बहुत बड़े नजर आते हैं। दूसरी तरफ Africa, जो दुनिया के सबसे बड़े महाद्वीपों में से एक है, अपेक्षाकृत छोटा दिखाई देता है। मसलन, सामान्य Mercator Map में Greenland और Africa का आकार देखकर किसी को लग सकता है कि दोनों लगभग बराबर हैं। असल में Africa का क्षेत्रफल Greenland से करीब 14 गुना ज्यादा है। Equal Earth Projection क्यों चर्चा में है? UN के प्रस्ताव में Equal Earth Projection जैसे नक्शों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इस Projection की खासियत यह है कि इसमें अलग-अलग महाद्वीपों के क्षेत्रफल को ज्यादा सही अनुपात में दिखाया जाता है। यानी नक्शे को देखकर Africa का वास्तविक विशाल आकार ज्यादा साफ समझ में आता है। Europe और North America भी Mercator Map की तुलना में छोटे दिखाई देते हैं। हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है—न तो Africa बड़ा हुआ है और न ही Europe या America छोटा। बदलाव सिर्फ उस तरीके में है, जिससे उन्हें नक्शे पर दिखाया जाता है। America ने UN के प्रस्ताव का विरोध क्यों किया? इस प्रस्ताव पर अमेरिका का रुख बाकी देशों से अलग रहा। मतदान के दौरान अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट किया। अमेरिकी पक्ष की ओर से यह सवाल उठाया गया कि संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक स्तर की बड़ी समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। वहीं प्रस्ताव के समर्थकों का मानना है कि नक्शा सिर्फ रास्ता या देश की लोकेशन बताने वाला साधन नहीं है। यह लोगों के मन में दुनिया की एक तस्वीर भी बनाता है। अफ्रीकी देशों की तरफ से लंबे समय से यह बात उठती रही है कि पुराने नक्शों में Africa का वास्तविक आकार सही तरीके से सामने नहीं आता। इसी सोच के साथ “Correct the Map” अभियान को आगे बढ़ाया गया। UN के फैसले से क्या सभी Maps बदल जाएंगे? यह मान लेना सही नहीं होगा कि अब अचानक हर जगह नया नक्शा दिखाई देने लगेगा। UN महासभा का यह फैसला कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। यानी Google Maps, स्कूल की किताबों, सरकारी दस्तावेजों या दूसरे Digital Platforms को तुरंत अपना नक्शा बदलना जरूरी नहीं है। इसका मकसद देशों, शैक्षणिक संस्थानों, मीडिया और दूसरे संगठनों को ऐसे Map Projections अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, जो दुनिया के क्षेत्रफल को ज्यादा सही तरीके से दिखाते हों। इसके बावजूद Mercator Projection पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है। Navigation और समुद्री यात्राओं जैसी जरूरतों में इसका इस्तेमाल आज भी उपयोगी माना जाता है। India पर क्या असर पड़ेगा? भारत को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस नए World Map से देश का आकार या सीमा बदल जाएगी? इसका जवाब है—नहीं। भारत की जमीन, क्षेत्रफल और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर इस प्रस्ताव का कोई असर नहीं पड़ेगा। सिर्फ नक्शे पर भारत और बाकी देशों को दिखाने का अनुपात बदल सकता है। अगर Equal Earth या इसी तरह की Projection का इस्तेमाल ज्यादा बढ़ता है तो आने वाले समय में School Geography Books, Educational Charts, News Graphics और Digital Maps में दुनिया की तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे सकती है। भारत के लिए इसका असर मुख्य रूप से शिक्षा और Geography की समझ के स्तर पर होगा। बच्चों और आम लोगों को यह समझने में मदद मिलेगी कि नक्शे पर दिखाई देने वाला आकार हमेशा किसी देश या महाद्वीप के वास्तविक क्षेत्रफल के बराबर नहीं होता। Africa के लिए इसे बड़ी उपलब्धि क्यों माना जा रहा है? इस पूरे विवाद में Africa सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र में है। समर्थकों का कहना है कि सदियों से इस्तेमाल हो रहे नक्शों ने अनजाने में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की एक असंतुलित तस्वीर बना दी है। Africa दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महाद्वीप है और इसके बावजूद Mercator Map में इसका आकार उसकी वास्तविक विशालता के मुकाबले कम नजर आता है। यही वजह है कि African countries और African Union की ओर से इस मुद्दे को लगातार उठाया गया। उनके लिए यह केवल Map Projection का मामला नहीं, बल्कि दुनिया के सामने Africa की वास्तविक तस्वीर रखने का भी सवाल है। क्या दुनिया सच में बदल गई? नहीं। दुनिया का भूगोल बिल्कुल नहीं बदला है। न कोई नया देश बना है, न किसी देश की सीमा बदली है और न ही Africa का क्षेत्रफल अचानक बढ़ गया है। बदलाव सिर्फ इतना है कि दुनिया को कागज या स्क्रीन पर किस तरह दिखाया जाए, इस पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा सामने आई है। एक तरह से देखें तो यह कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि नक्शा हमेशा पूरी तरह निष्पक्ष तस्वीर नहीं होता। उसे बनाने का तरीका तय करता है कि हमें दुनिया का कौन-सा हिस्सा कितना बड़ा या छोटा दिखाई देगा। आने वाले वर्षों में अगर Equal Earth जैसी projections को ज्यादा अपनाया जाता है, तो संभव है कि नई पीढ़ी के लिए World Map की तस्वीर वही न हो,...
Swatantra Bhardwaj

Swatantra Bhardwaj Detained: CJP Protest के बाद स्वतंत्र भारद्वाज हिरासत में

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP Protest के दौरान एक छात्रा के पिता के साथ कथित मारपीट का मामला अब फिर चर्चा में है। मामले में आरोपी बताए जा रहे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज (Swatantra Bhardwaj) को दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थकों के प्रदर्शन और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग के कुछ घंटे बाद हुई। Parliament Street Police Station के बाहर प्रदर्शन स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर CJP के प्रतिनिधि और समर्थक शुक्रवार को दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से मामले में जल्द कार्रवाई करने और आरोपी को गिरफ्तार करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुछ राजनीतिक नेता भी वहां पहुंचे। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बातचीत हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने मामले में कार्रवाई का भरोसा दिया और इसके बाद भारद्वाज को ट्रेस करने के लिए टीमें सक्रिय की गईं। क्या है पूरा मामला? यह विवाद जंतर-मंतर पर CJP के एक प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ कथित तौर पर मारपीट हुई थी। इस मामले में स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार के नाम FIR में शामिल किए गए थे। मामला उस समय और गरमा गया, जब स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े एक Podcast Video की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वीडियो में भारद्वाज ने घटना को लेकर आपत्तिजनक दावे किए थे। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई। Viral Video ने बढ़ाया विवाद वायरल वीडियो सामने आने के बाद CJP ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। संगठन का कहना था कि वीडियो में कथित तौर पर घटना को लेकर किए गए दावों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। वहीं दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही थी और मेडिकल रिपोर्ट में चोट को लेकर सोशल मीडिया पर किए गए कुछ दावों की पुष्टि नहीं हुई थी। Bulandshahr में पुलिस ने पकड़ा पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की टीमों ने स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में ट्रेस किया। रिपोर्टों में बताया गया कि पुलिस की कार्रवाई से पहले वह वहां से निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बाद में उन्हें हिरासत में ले लिया गया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थक स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इससे मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर चल रहा विवाद भी फिलहाल एक नए चरण में पहुंच गया है। FIR में SC/ST Act की धाराएं जोड़ने की जानकारी प्रदर्शन के बाद पुलिस की ओर से मामले में SC/ST Act से संबंधित धाराएं जोड़ने की बात सामने आई। पीड़ित की दोबारा मेडिकल जांच कराए जाने की जानकारी भी रिपोर्टों में दी गई है। हालांकि, मामले में अंतिम कानूनी स्थिति जांच और आगे की पुलिस कार्रवाई पर निर्भर करेगी। आरोपों की पुष्टि अदालत की प्रक्रिया में ही होगी। पुलिस के सामने अब आगे की जांच बड़ी चुनौती स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिए जाने के बाद अब पुलिस के सामने वायरल वीडियो, FIR में दर्ज आरोपों, मेडिकल रिपोर्ट और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच अहम होगी। फिलहाल इस मामले ने CJP Protest, Delhi Police और Social Media Influencer को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस को भी तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस की ओर से क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Saharanpur

UP Bulldozer Action: Saharanpur कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर चला बुलडोजर, मायावती-इकरा हसन ने उठाए सवाल

Saharanpur उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अदालत के आदेश के बाद प्रशासन ने शनिवार को मस्जिद के खिलाफ Bulldozer Action शुरू कर दिया। कार्रवाई की खबर फैलते ही इलाके में हलचल बढ़ गई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया। कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई। किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई अदालत के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन का एक्शन कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को लेकर जमीन के स्वामित्व और निर्माण की वैधता पर काफी समय से विवाद चल रहा था। प्रशासन का दावा है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है और निर्माण को अवैध माना गया है। मामला पहले सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पहुंचा। जुलाई में अदालत ने मस्जिद को हटाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही संबंधित पक्ष पर करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति लगाए जाने की बात भी सामने आई थी। इस फैसले को जिला अदालत में चुनौती दी गई थी। 4 सितंबर को जिला जज की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। इकरा हसन को सहारनपुर जाने से रोका मस्जिद पर कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन सहारनपुर जाने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इकरा हसन और पुलिस अधिकारियों के बीच इस दौरान तीखी बहस भी हुई। इसका वीडियो सामने आने के बाद मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। बाद में उनके आवास के बाहर पुलिस बल तैनात किए जाने की भी खबर सामने आई। इकरा हसन ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोका जा रहा है। उनका कहना था कि वह मौके पर जाकर हालात देखना चाहती थीं। मायावती ने सरकार से कार्रवाई रोकने को कहा सहारनपुर मस्जिद विवाद पर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सरकार से कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की और मामले को संवेदनशील बताते हुए सावधानी से कदम उठाने की बात कही। मायावती ने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह का तनाव बढ़ने से रोकना जरूरी है। उन्होंने लोगों से भी शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की। इमरान मसूद बोले- हाईकोर्ट जाएंगे सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया है। उनका कहना है कि मस्जिद की जमीन और उससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर उनका पक्ष अलग है। जिला अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद मसूद ने मामले को हाईकोर्ट ले जाने की बात कही है। उनका कहना है कि आगे की कानूनी लड़ाई अदालत में लड़ी जाएगी और उपलब्ध दस्तावेजों को वहां रखा जाएगा। प्रशासन और विपक्ष के दावे अलग-अलग पूरे विवाद में प्रशासन और मस्जिद पक्ष के दावे अलग हैं। प्रशासन जहां निर्माण को सरकारी जमीन पर हुआ अवैध निर्माण बता रहा है, वहीं मस्जिद से जुड़े लोग और कुछ विपक्षी नेता इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं। यही वजह है कि मामला सिर्फ बुलडोजर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। अब इसकी गूंज राजनीतिक मंच से लेकर अदालत तक सुनाई दे रही है। आगे क्या होगा? सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर हुई कार्रवाई के बाद अब सबकी नजर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर है। इमरान मसूद की ओर से हाईकोर्ट जाने की बात कही गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में अदालत में इस मामले को लेकर क्या रुख सामने आता है, यह महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई के बाद सहारनपुर में राजनीतिक माहौल गर्म है। एक तरफ अधिकारी कोर्ट के आदेश के पालन की बात कह रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Nepal

Nepal Flood: दार्चुला में Landslide का खतरा बढ़ा, Trishuli से भारतीय परिवार का Rescue; हजारों Missing

नेपाल (Nepal) में बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बाद हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। नदियों का जलस्तर बढ़ने, मलबा आने और पहाड़ी इलाकों में Landslide के खतरे ने राहत और बचाव अभियान को और मुश्किल बना दिया है। सबसे चिंता की बात यह है कि हादसे के कई दिन बाद भी हजारों लोगों का पता नहीं चल पाया है। हालांकि, इसी बीच Trishuli क्षेत्र से दो लोगों को नौ दिन बाद जिंदा निकालना राहत और उम्मीद की बड़ी खबर बनकर सामने आया है। दार्चुला में Landslide का खतरा, निचले इलाकों पर नजर नेपाल के पहाड़ी इलाकों में लगातार भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। दार्चुला समेत संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से निचले इलाकों को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। पहाड़ों से मलबा आने और नदियों में अचानक पानी बढ़ने की आशंका के बीच लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। बाढ़ से कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है। Trishuli से भारतीय नागरिकों का Rescue इस बीच त्रिशूली इलाके से तीन भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाले जाने की खबर सामने आई है। इनमें एक परिवार शामिल है। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, रेस्क्यू किए गए लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया और उनके भारत लौटने की प्रक्रिया में मदद की जा रही है। भारत सरकार नेपाल में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए लगातार नेपाली प्रशासन के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 166 भारतीय नागरिकों को Rescue किया गया है, जबकि 275 भारतीयों के लापता होने की जानकारी दी गई है। भारत ने राहत अभियान के लिए करीब 95 टन राहत सामग्री भी भेजी है। 9 दिन बाद Trishuli Tunnel से जिंदा निकले 2 मजदूर नेपाल में चल रहे Rescue Operation की सबसे बड़ी खबर Trishuli-3A Hydropower Project से आई। यहां सुरंग में फंसे संजय साह और कबीर महारजन को करीब नौ दिन बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया। दोनों को सुरंग के अंदर काफी गहराई से निकाला गया। बचाव दल ने पहले अंदर से आवाजें सुनीं और फिर संपर्क स्थापित होने के बाद ऑपरेशन तेज किया। आखिरकार दोनों को बाहर निकाल लिया गया। इस घटना ने उन परिवारों में भी उम्मीद जगाई है जिनके अपने लोग अभी तक लापता हैं। राहत दल अब अन्य संभावित Survivors तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं। 1300 के करीब मौतें, 5 हजार से ज्यादा लोग Missing इस प्राकृतिक आपदा का असर कितना बड़ा है, इसका अंदाजा मृतकों और लापता लोगों की संख्या से लगाया जा सकता है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार 1,294 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी और 5,053 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़ों में बदलाव देखने को मिल रहा है। कई इलाकों में घरों, सड़कों, पुलों और Hydropower Projects को भारी नुकसान पहुंचा है। बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं और राहत शिविरों में रह रहे हैं। Rescue Operation अभी भी जारी Trishuli Tunnel से दो लोगों को जिंदा निकाले जाने के बाद Rescue Teams का हौसला बढ़ा है। नेपाल सेना, पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञ लगातार प्रभावित इलाकों में Search Operation चला रहे हैं। Hydropower Projects के आसपास अभी भी बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका है। मलबा, पानी और क्षतिग्रस्त सुरंगें बचाव अभियान में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। इसके बावजूद टीमें लगातार नए रास्ते तलाश रही हैं। भारत ने नेपाल की मदद बढ़ाई नेपाल की इस मुश्किल घड़ी में भारत ने भी राहत और बचाव अभियान में सहयोग बढ़ाया है। भारतीय विशेषज्ञों और राहत सामग्री को नेपाल भेजा गया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत की टीमें Rescue, Medical और अन्य जरूरी सेवाओं में सहायता कर रही हैं। फिलहाल नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और पहाड़ी इलाकों में नए Landslide और Flood के खतरे से निपटना है। Trishuli Tunnel से नौ दिन बाद दो लोगों का जिंदा निकलना इस त्रासदी के बीच उम्मीद की एक किरण जरूर लेकर आया है। अब Rescue Teams की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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