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Bhopal के अयोध्या बायपास को NGT की मंजूरी, पर्यावरण नियमों का पालन करना होगा  Bhopal के अयोध्या बायपास को NGT की मंजूरी, पर्यावरण नियमों का पालन करना होगा 

Bhopal के अयोध्या बायपास को NGT की मंजूरी, पर्यावरण नियमों का पालन करना होगा

मध्य प्रदेश की राजधानी Bhopal के अयोध्या बायपास परियोजना को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की दिल्ली बेंच ने बायपास निर्माण को अनुमति दे दी है। हालांकि ट्रिब्यूनल ने साफ कहा है कि परियोजना से जुड़े सभी पर्यावरणीय नियमों और शर्तों का सख्ती से पालन करना होगा। इस फैसले के बाद लंबे समय से अटकी परियोजना को राहत मिली है। माना जा रहा है कि बायपास बनने से भोपाल शहर के ट्रैफिक दबाव को काफी हद तक कम करने में मदद मिलेगी। पर्यावरण शर्तों के साथ मिली मंजूरी NGT की दिल्ली बेंच ने अपने आदेश में कहा कि निर्माण कार्य के दौरान पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे, इसके लिए तय मानकों का पालन जरूरी होगा। परियोजना से जुड़े विभागों को प्रदूषण नियंत्रण, हरियाली संरक्षण और जल स्रोतों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना होगा। ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि यदि किसी शर्त का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। लंबे समय से चल रहा था विवाद अयोध्या बायपास परियोजना को लेकर पर्यावरणीय प्रभाव और पेड़ों की कटाई जैसे मुद्दों पर आपत्तियां उठाई गई थीं। इसी वजह से मामला NGT तक पहुंचा था। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दिल्ली बेंच ने यह फैसला सुनाया।
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सागर में हाई वोल्टेज ड्रामा: पति-पत्नी ढाई साल की बेटी संग BSNL टावर पर चढ़े, पुलिस-एनडीआरएफ मौके पर

मध्य प्रदेश के सागर जिले में गुरुवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब एक पति-पत्नी अपनी ढाई साल की मासूम बेटी के साथ BSNL के ऊंचे टावर पर चढ़ गए। मामला कैंट थाना क्षेत्र स्थित पीली कोठी के पीछे टेकरी का है। 800 फीट ऊंचे टावर पर बैठा परिवार जानकारी के मुताबिक बलराम अहिरवार अपनी पत्नी कृष्णा देवी अहिरवार और ढाई साल की बेटी को लेकर करीब 800 फीट ऊंचे BSNL टावर पर चढ़ गया। तेज गर्मी और तपती दोपहरी में परिवार को टावर पर बैठे देख इलाके में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस ने समझाने की कोशिश की घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और युवक को फोन कर नीचे उतरने के लिए समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह नहीं माना। स्थिति गंभीर होती देख पुलिस ने तुरंत NDRF टीम को बुलाया और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। पुलिस कार्रवाई से नाराज था परिवार प्रारंभिक जानकारी के अनुसार परिवार पुलिस की कार्रवाई से परेशान था। आरोप है कि मोतीनगर पुलिस ने उन पर झूठा मामला दर्ज किया और मारपीट कर जेल भेजा। भाई ने सुनाई पूरी कहानी बलराम के भाई ने बताया कि टावर पर चढ़ने से पहले उसकी मुलाकात हुई थी। उस दौरान बलराम ने कहा था कि पुलिस ने उनके साथ मारपीट की और बेवजह जेल भेज दिया। इसी से नाराज होकर उसने यह कदम उठाया। फिलहाल पुलिस और प्रशासन परिवार को सुरक्षित नीचे उतारने की कोशिश में जुटा है। मध्य प्रदेश की हर बड़ी खबर सबसे पहले पढ़ें:www.deshharpal.com
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इंदौर में शर्मनाक बाल विवाह: 13 साल की बच्ची की 42 वर्षीय युवक से जबरन शादी, 13 लोगों पर केस

इंदौर के रंगवासा क्षेत्र से मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां पारिवारिक दबाव और रिश्तों की अजीब शर्तों के चलते महज 13 साल की बच्ची की शादी 42 साल के युवक से जबरन करा दी गई। मामले का खुलासा होने के बाद राऊ पुलिस ने दूल्हे, उसके परिजनों और बच्ची के दादा-दादी समेत 13 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पोते की शादी के लिए पोती का “सौदा” महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी रजनीश सिन्हा के अनुसार, बच्ची के दादा अपने 19 वर्षीय पोते की शादी करवाना चाहते थे। लेकिन पोते की होने वाली पत्नी ने शर्त रखी कि वह शादी तभी करेगी, जब उसकी ननद यानी 13 वर्षीय बच्ची की शादी उसके 42 वर्षीय सगे चाचा से कराई जाए। परिवार ने इस शर्त को मान लिया और मासूम बच्ची की जिंदगी दांव पर लगा दी। पहले दी थी शादी नहीं करने की लिखित सहमति विभाग को पहले ही बाल विवाह की सूचना मिल गई थी। 25 अप्रैल को होने वाली शादी को लेकर फ्लाइंग स्क्वाड ने दोनों पक्षों को बुलाकर समझाइश दी थी। उस समय परिवार ने लिखित में भरोसा दिया था कि शादी नहीं कराई जाएगी। चोरी-छिपे उज्जैन ले जाकर कराई शादी इसके बावजूद 26 अप्रैल की रात आरोपी बच्ची और उसके 19 वर्षीय भाई को चोरी-छिपे उज्जैन ले गए। चिंतामन गणेश मंदिर के बाहर दोनों को दूल्हा-दुल्हन के कपड़े पहनाए गए और रात में मांग भरकर शादी करा दी गई। शादी के बाद दोनों बच्चों को वापस इंदौर छोड़ दिया गया, जबकि दूल्हे अपने गांव दयाखेड़ा लौट गए। विरोध करने पर दादी ने की पिटाई फ्लाइंग स्क्वाड प्रभारी महेंद्र पाठक के मुताबिक, शादी के बाद परिवार बच्ची पर ससुराल जाने का दबाव बना रहा था। जब बच्ची ने विरोध किया तो उसकी दादी ने बेरहमी से मारपीट की। आखिरकार बच्ची की मां ने हिम्मत दिखाते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग और बाल कल्याण समिति से शिकायत की, जिसके बाद पूरा मामला उजागर हुआ। उम्र छिपाने के लिए बनाई फर्जी मार्कशीट जांच में सामने आया कि बच्ची और उसके भाई की उम्र छिपाने के लिए कथित तौर पर फर्जी अंकसूची तैयार करवाई गई थी।अधिकारियों के मुताबिक, शिक्षा विभाग इस मामले की अलग से जांच कर रहा है। रिपोर्ट आने के बाद आरोपियों पर जालसाजी और सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर की धाराएं भी लगाई जा सकती हैं। पुलिस ने शुरू की कार्रवाई बाल कल्याण समिति के निर्देश पर पुलिस ने 13 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। प्रशासन का कहना है कि बाल विवाह और दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। समाज और प्रदेश की ऐसी ही बड़ी खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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CM Dr. Mohan Yadav ने की स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा, योजनाओं को बेहतर बनाने के दिए निर्देश

CM Dr. Mohan Yadav ने की स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा, योजनाओं को बेहतर बनाने के दिए निर्देश

CM Dr. Mohan Yadav ने गुरुवार को मंत्रालय में स्कूल शिक्षा विभाग की विभिन्न योजनाओं और विभागीय गतिविधियों की समीक्षा बैठक की। बैठक में प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था, छात्रों को मिलने वाली सुविधाएं और चल रही योजनाओं की प्रगति पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए योजनाओं का प्रभावी तरीके से क्रियान्वयन किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचना सरकार की प्राथमिकता है। साथ ही स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने और शिक्षा के स्तर में सुधार लाने पर भी जोर दिया गया। बैठक में विभागीय अधिकारियों ने विभिन्न योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। मुख्यमंत्री ने छात्रों के हित में चल रही योजनाओं को समय पर पूरा करने और शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के निर्देश दिए। सरकार का फोकस ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर है, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर भविष्य मिल सके। अधिक खबरों और अपडेट्स के लिए विजिट करें Deshharpal News हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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30,055 करोड़ की Cabinet मंजूरी से प्रदेश को विकास की नई रफ्तार

30,055 करोड़ की Cabinet मंजूरी से प्रदेश को विकास की नई रफ्तार

प्रदेश के विकास और आम लोगों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। Cabinet बैठक में करीब 30,055 करोड़ रुपये की योजनाओं और परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। सरकार का कहना है कि इन फैसलों से इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा, रोजगार के नए अवसर बनेंगे और जनता को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। कैबिनेट की स्वीकृति में सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाएं शामिल हैं। सरकार का फोकस खासतौर पर गांवों और छोटे शहरों तक विकास पहुंचाने पर है, ताकि हर वर्ग को योजनाओं का सीधा लाभ मिल सके। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक इन परियोजनाओं के लागू होने से प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को भी रफ्तार मिलेगी। निर्माण कार्यों और नई परियोजनाओं से युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। वहीं किसानों, महिलाओं और गरीब परिवारों के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं को भी मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्रदेश के समग्र विकास के लिए लगातार काम कर रही है। उनका कहना है कि जनता की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए फैसले लिए जा रहे हैं, ताकि शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों का भी तेजी से विकास हो सके। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी राशि की मंजूरी से आने वाले समय में प्रदेश में विकास कार्यों को नई गति मिलेगी और आम लोगों के जीवन स्तर में सुधार देखने को मिलेगा। प्रदेश और देश की हर बड़ी खबर के लिए जुड़े रहें Deshharpal News
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मुख्यमंत्री Dr. Mohan Yadav बोले- ग्रामीण विकास में रोजगार सहायकों की अहम भूमिका

मुख्यमंत्री Dr. Mohan Yadav बोले- ग्रामीण विकास में रोजगार सहायकों की अहम भूमिका, सरकार करेगी हितों की चिंता

मुख्यमंत्री Dr. Mohan Yadav ने कहा है कि ग्रामीण विकास योजनाओं को जमीन पर सफल बनाने में रोजगार सहायकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार रोजगार सहायकों के हितों और उनकी समस्याओं को लेकर गंभीर है और उनके भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गांवों के विकास, मनरेगा सहित विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में रोजगार सहायकों का बड़ा योगदान रहता है। वे ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार और जनता के बीच मजबूत कड़ी का काम करते हैं। उनकी मेहनत से कई विकास कार्य समय पर पूरे हो पाते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार कर्मचारियों और संविदा कर्मियों के हितों की रक्षा के लिए लगातार काम कर रही है। रोजगार सहायकों की मांगों और समस्याओं पर भी सकारात्मक रूप से विचार किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि ग्रामीण विकास को मजबूत बनाने के लिए जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों का सम्मान और सहयोग जरूरी है। इस दौरान रोजगार सहायकों ने भी अपनी विभिन्न मांगों को सरकार के सामने रखा। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि उनकी बातों को गंभीरता से सुना जाएगा और उचित निर्णय लिया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने और योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में रोजगार सहायकों की भूमिका लगातार अहम बनी हुई है। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें: Deshharpal News हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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रीवा में तेज रफ्तार कार ने तीन जैन महिला धर्मगुरुओं को कुचला: एक की मौत, दो की हालत गंभीर

रीवा में बुधवार को कलेक्ट्रेट के सामने दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। तेज रफ्तार कार ने सड़क किनारे पैदल जा रही तीन जैन महिला धर्मगुरुओं को टक्कर मार दी। हादसे में एक महिला धर्मगुरु की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। सागर की रहने वाली थीं मृतक धर्मगुरु मृत महिला धर्मगुरु की पहचान श्रुति मति माता के रूप में हुई है। वे सागर की रहने वाली थीं और सतना से रीवा प्रवास पर आई थीं। हादसे में घायल उपसमिति माता तमिलनाडु की निवासी हैं, जबकि आरिका माता जबलपुर की रहने वाली बताई गई हैं। सड़क किनारे पैदल जा रही थीं प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तीनों महिला धर्मगुरु सड़क किनारे पैदल जा रही थीं। तभी तेज रफ्तार कार अचानक अनियंत्रित होकर उनकी तरफ आ गई और जोरदार टक्कर मार दी। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद लोग तुरंत मदद के लिए पहुंचे और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। दो धर्मगुरुओं की हालत गंभीर घायल महिला धर्मगुरुओं का अस्पताल में इलाज जारी है। डॉक्टरों के मुताबिक दोनों की हालत नाजुक बनी हुई है। लोगों में आक्रोश घटना के बाद मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। गुस्साए लोगों ने आरोपी ड्राइवर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर हंगामा किया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को मौके पर पहुंचना पड़ा। मौके पर पहुंचे अधिकारी मामले की जानकारी मिलते ही बीएस जामोद, नरेंद्र सूर्यवंशी और गुरुकरण सिंह घटनास्थल पहुंचे। अधिकारियों ने लोगों को शांत कराया और कार्रवाई का भरोसा दिया। हादसे के बाद पूरे जैन समाज में शोक और आक्रोश का माहौल है। 👉 रीवा और मध्यप्रदेश की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में जिलेभर के मेडिकल स्टोर बंद: दवा व्यापारियों ने निकाली रैली

ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में बुधवार को जिला केमिस्ट एसोसिएशन और जिला औषधि विक्रेता संघ के आह्वान पर जिलेभर के दवा व्यापारियों ने एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल की। हड़ताल के चलते जिले के करीब एक हजार मेडिकल स्टोर बंद रहे। हालांकि नर्सिंग होम और अस्पतालों के मेडिकल स्टोर खुले रहे, जिससे मरीजों को इमरजेंसी दवाइयां मिलती रहीं। काली पट्टी बांधकर किया विरोध दवा व्यापारियों ने तीनबत्ती क्षेत्र में एकत्र होकर काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया। इसके बाद रैली निकालते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। छोटे व्यापारियों पर संकट का आरोप जिला केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक कुमार जैन ने कहा कि बिना स्पष्ट कानूनी प्रावधानों के ऑनलाइन दवा बिक्री लगातार बढ़ रही है, जिससे छोटे दवा व्यापारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बिना वैध डॉक्टर सलाह और बिना प्रमाणित ई-प्रिस्क्रिप्शन के दवाओं की होम डिलीवरी कर रहे हैं, जो लोगों की सेहत के लिए खतरा बन सकता है। ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक की मांग जिला औषधि विक्रेता संघ के सचिव अनिल कुमार जैन ने कहा कि देशभर में लाखों लाइसेंसधारी केमिस्ट इस व्यवस्था से प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 और नियम 1945 में ऑनलाइन दवा बिक्री का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, इसके बावजूद कई कंपनियां वर्षों से ऑनलाइन दवाएं बेच रही हैं। सरकार से रखीं कई मांगें दवा व्यापारियों ने सरकार से ऑनलाइन दवा बिक्री पर सख्त कार्रवाई की मांग की। साथ ही बिना सत्यापित ई-प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की बिक्री पूरी तरह बंद करने की मांग उठाई। ज्ञापन में जीएसआर 220 (ई) और जीएसआर 817 (ई) वापस लेने, प्रीडेटरी प्राइसिंग पर सख्त नीति बनाने और अवैध ई-फार्मेसी बंद करने जैसी मांगें भी शामिल रहीं। 👉 मध्यप्रदेश और देश-दुनिया की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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सागर में तेज रफ्तार ट्रक ने बाइक सवार दो छात्रों को कुचला: कॉलेज जाते समय दर्दनाक मौत, हाईवे पर चक्काजाम

सागर के कैंट थाना क्षेत्र में बुधवार को नेशनल हाईवे-44 पर हुए दर्दनाक सड़क हादसे में बाइक सवार दो कॉलेज छात्रों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने हाईवे पर चक्काजाम कर दिया। कॉलेज जाते समय हुआ हादसा मृतकों की पहचान संजय रजक (20) निवासी सेमरा हार्ट और नितिन अहिरवार (20) निवासी कोलुआ के रूप में हुई है। दोनों बीएससी प्रथम वर्ष के छात्र थे। जानकारी के अनुसार, दोनों छात्र बुधवार दोपहर बाइक से गांव से सागर कॉलेज जा रहे थे। इसी दौरान रानीपुरा के पास पीछे से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। ट्रक के पहिए के नीचे आए छात्र टक्कर लगते ही दोनों छात्र सड़क पर गिर पड़े और ट्रक के पहिए की चपेट में आ गए। हादसा इतना भयावह था कि दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना करीब दोपहर 12:30 बजे के आसपास की बताई जा रही है। ग्रामीणों ने किया चक्काजाम हादसे के बाद मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण जमा हो गए। गुस्साए लोगों ने विरोध में नेशनल हाईवे पर चक्काजाम कर दिया, जिससे करीब एक घंटे तक यातायात पूरी तरह बाधित रहा। सूचना मिलने पर कैंट थाना पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने कार्रवाई का आश्वासन देकर लोगों को शांत कराया, जिसके बाद जाम समाप्त हुआ। ट्रक छोड़कर फरार हुआ ड्राइवर हादसे के बाद गुजरात पासिंग ट्रक (GJ 01 KT 5296) का चालक वाहन मौके पर छोड़कर फरार हो गया। थाना प्रभारी रोहित डोंगरे ने बताया कि पुलिस ने ट्रक जब्त कर मामला दर्ज कर लिया है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और फरार चालक की तलाश की जा रही है। 👉 सागर और मध्यप्रदेश की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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36 लाख के एरियर भुगतान न करने पर PWD दफ्तर में दोबारा कुर्की कार्रवाई

लोक निर्माण विभाग द्वारा सेवानिवृत्त कर्मचारी के बकाया एरियर का भुगतान नहीं करने पर बुधवार को जिला न्यायालय के आदेश पर दोबारा कुर्की की कार्रवाई की गई। बताया जा रहा है कि विभाग ने पहले कोर्ट से लिखित में समय मांगा था, लेकिन तय अवधि गुजरने के बाद भी भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद कोर्ट की टीम को दोबारा कार्रवाई करनी पड़ी। 36 लाख रुपए का एरियर लंबित सेवानिवृत्त कर्मचारी कौशल किशोर राठौर का आरोप है कि विभाग ने लंबे समय तक उन्हें उनके पद के अनुसार वेतन नहीं दिया। इसके खिलाफ उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। मामला निचली अदालत से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां हर स्तर पर फैसला कर्मचारी के पक्ष में आया। अदालतों ने विभाग को बकाया वेतन और एरियर देने के निर्देश दिए थे। 2014 से रिटायरमेंट तक की राशि बाकी विभाग ने वर्ष 2013 तक का एरियर तो जारी कर दिया, लेकिन 2014 से लेकर रिटायरमेंट तक की करीब 36 लाख रुपए की राशि अब तक नहीं दी गई। लगातार आदेशों के बावजूद भुगतान नहीं होने पर कर्मचारी ने अवमानना और इजरा याचिका दायर की, जिसके बाद कोर्ट ने कुर्की और वसूली के आदेश जारी किए। पहले भी हुई थी कार्रवाई फरवरी में हुई पिछली कार्रवाई के दौरान विभाग ने कोर्ट को लिखित में भरोसा दिया था कि दो महीने के भीतर पूरा भुगतान कर दिया जाएगा। लेकिन तीन महीने बीतने के बाद भी भुगतान नहीं हुआ। इसी कारण कोर्ट की टीम को फिर से विभागीय संपत्तियों की कुर्की की कार्रवाई करनी पड़ी। कोर्ट ने दिए सख्त निर्देश न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 31 दिसंबर 2026 तक कुर्की के माध्यम से पूरी राशि वसूलकर भुगतान सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं। बुधवार को कोर्ट की टीम ने विभागीय संपत्तियों का आकलन किया और जरूरी दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी की। यदि इसके बाद भी भुगतान नहीं हुआ, तो विभाग की अन्य संपत्तियों पर भी सख्त कार्रवाई हो सकती है। 👉 मध्यप्रदेश की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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Bittu Tabahi

Bittu Tabahi ने बदली सोच, अकेले शुरू किया नदी सफाई अभियान; नगरपालिका भी हुई प्रभावित

नदी में गंदगी देखकर ज्यादातर लोग शिकायत करते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के एक युवक ने शिकायत करने के बजाय खुद कुछ करने की ठानी। स्थानीय स्तर पर ‘बिट्टू तबाही’ (Bittu Tabahi) के नाम से पहचाने जाने वाले इस युवक ने अकेले ही नदी की सफाई का जिम्मा उठा लिया। उनका यह जज्बा अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। बिट्टू ने नदी में जमा कचरे और गंदगी को देखकर सफाई अभियान शुरू किया। शुरुआत किसी बड़े इंतजाम या टीम के साथ नहीं हुई। उन्होंने अपने स्तर पर सफाई करना शुरू किया और लगातार इस काम में जुटे रहे। नदी को साफ रखने का लिया संकल्प बिट्टू का मानना है कि नदी सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि आसपास के लोगों और पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने नदी में जमा कचरे को हटाने की पहल की। उनका यह प्रयास धीरे-धीरे स्थानीय लोगों का ध्यान खींचने लगा। लोगों ने देखा कि बिना किसी दबाव या दिखावे के बिट्टू लगातार नदी की सफाई में लगे हुए हैं। नगरपालिका ने भी की पहल की सराहना बिट्टू के लगातार सफाई अभियान की जानकारी नगरपालिका तक पहुंची तो उनके प्रयास की सराहना की गई। एक युवक द्वारा अपने स्तर पर नदी को साफ रखने की कोशिश को अधिकारियों ने सकारात्मक कदम माना। इस पहल ने यह भी दिखाया कि अगर कोई व्यक्ति अपने आसपास के पर्यावरण को लेकर जिम्मेदारी महसूस करे, तो छोटी शुरुआत भी बड़ा संदेश दे सकती है। सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आया अभियान बिट्टू का नदी सफाई अभियान अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। उनके प्रयास को देखकर दूसरे लोगों में भी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने की उम्मीद है। आज नदियों में बढ़ता कचरा और प्रदूषण बड़ी चुनौती है। ऐसे में बिट्टू की पहल लोगों को यह संदेश देती है कि नदी को साफ रखना सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है। ‘बिट्टू तबाही’ ने दी एक अलग मिसाल बिट्टू की कहानी इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने बदलाव का इंतजार नहीं किया, बल्कि खुद बदलाव की शुरुआत करने का फैसला लिया। अकेले शुरू किया गया उनका यह सफाई अभियान अब दूसरों के लिए प्रेरणा बनता दिखाई दे रहा है। कई बार किसी बड़े बदलाव की शुरुआत बड़े अभियान से नहीं, बल्कि एक छोटे से कदम से होती है। बिट्टू का यह प्रयास उसी सोच की मिसाल है—अगर इरादा मजबूत हो, तो एक इंसान भी बदलाव की शुरुआत कर सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
UN

World Map में बड़ा बदलाव! UN ने Africa के असली Size को दिखाने का रास्ता साफ किया

दुनिया का नक्शा (World Map) देखते हुए शायद ही किसी ने सोचा होगा कि इसमें दिखाई देने वाले देशों और महाद्वीपों का आकार असलियत से अलग भी हो सकता है। लेकिन अब इसी मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र में एक अहम पहल हुई है। UN महासभा ने ऐसे World Map को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें धरती के अलग-अलग हिस्सों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाने की कोशिश की गई है। इस बदलाव के बाद नक्शे पर Africa पहले से काफी बड़ा दिखाई देगा, जबकि Europe और North America, खासकर US का आकार पुराने नक्शे की तुलना में छोटा नजर आ सकता है। प्रस्ताव को भारी समर्थन मिला, लेकिन अमेरिका ने इसका विरोध किया। पुराने World Map में आखिर समस्या क्या है? दुनिया के स्कूलों और कई नक्शों में लंबे समय से Mercator Projection का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसे 16वीं सदी में Gerardus Mercator ने तैयार किया था। उस समय इसका सबसे बड़ा फायदा समुद्री यात्राओं और Navigation में था। लेकिन Mercator Projection की एक खासियत ही इसकी सबसे बड़ी कमी भी बन गई। इसमें जैसे-जैसे कोई क्षेत्र Equator से दूर जाता है, उसका आकार नक्शे पर ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है। यही कारण है कि Greenland जैसे इलाके नक्शे पर अपनी वास्तविकता से बहुत बड़े नजर आते हैं। दूसरी तरफ Africa, जो दुनिया के सबसे बड़े महाद्वीपों में से एक है, अपेक्षाकृत छोटा दिखाई देता है। मसलन, सामान्य Mercator Map में Greenland और Africa का आकार देखकर किसी को लग सकता है कि दोनों लगभग बराबर हैं। असल में Africa का क्षेत्रफल Greenland से करीब 14 गुना ज्यादा है। Equal Earth Projection क्यों चर्चा में है? UN के प्रस्ताव में Equal Earth Projection जैसे नक्शों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इस Projection की खासियत यह है कि इसमें अलग-अलग महाद्वीपों के क्षेत्रफल को ज्यादा सही अनुपात में दिखाया जाता है। यानी नक्शे को देखकर Africa का वास्तविक विशाल आकार ज्यादा साफ समझ में आता है। Europe और North America भी Mercator Map की तुलना में छोटे दिखाई देते हैं। हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है—न तो Africa बड़ा हुआ है और न ही Europe या America छोटा। बदलाव सिर्फ उस तरीके में है, जिससे उन्हें नक्शे पर दिखाया जाता है। America ने UN के प्रस्ताव का विरोध क्यों किया? इस प्रस्ताव पर अमेरिका का रुख बाकी देशों से अलग रहा। मतदान के दौरान अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट किया। अमेरिकी पक्ष की ओर से यह सवाल उठाया गया कि संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक स्तर की बड़ी समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। वहीं प्रस्ताव के समर्थकों का मानना है कि नक्शा सिर्फ रास्ता या देश की लोकेशन बताने वाला साधन नहीं है। यह लोगों के मन में दुनिया की एक तस्वीर भी बनाता है। अफ्रीकी देशों की तरफ से लंबे समय से यह बात उठती रही है कि पुराने नक्शों में Africa का वास्तविक आकार सही तरीके से सामने नहीं आता। इसी सोच के साथ “Correct the Map” अभियान को आगे बढ़ाया गया। UN के फैसले से क्या सभी Maps बदल जाएंगे? यह मान लेना सही नहीं होगा कि अब अचानक हर जगह नया नक्शा दिखाई देने लगेगा। UN महासभा का यह फैसला कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। यानी Google Maps, स्कूल की किताबों, सरकारी दस्तावेजों या दूसरे Digital Platforms को तुरंत अपना नक्शा बदलना जरूरी नहीं है। इसका मकसद देशों, शैक्षणिक संस्थानों, मीडिया और दूसरे संगठनों को ऐसे Map Projections अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, जो दुनिया के क्षेत्रफल को ज्यादा सही तरीके से दिखाते हों। इसके बावजूद Mercator Projection पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है। Navigation और समुद्री यात्राओं जैसी जरूरतों में इसका इस्तेमाल आज भी उपयोगी माना जाता है। India पर क्या असर पड़ेगा? भारत को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस नए World Map से देश का आकार या सीमा बदल जाएगी? इसका जवाब है—नहीं। भारत की जमीन, क्षेत्रफल और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर इस प्रस्ताव का कोई असर नहीं पड़ेगा। सिर्फ नक्शे पर भारत और बाकी देशों को दिखाने का अनुपात बदल सकता है। अगर Equal Earth या इसी तरह की Projection का इस्तेमाल ज्यादा बढ़ता है तो आने वाले समय में School Geography Books, Educational Charts, News Graphics और Digital Maps में दुनिया की तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे सकती है। भारत के लिए इसका असर मुख्य रूप से शिक्षा और Geography की समझ के स्तर पर होगा। बच्चों और आम लोगों को यह समझने में मदद मिलेगी कि नक्शे पर दिखाई देने वाला आकार हमेशा किसी देश या महाद्वीप के वास्तविक क्षेत्रफल के बराबर नहीं होता। Africa के लिए इसे बड़ी उपलब्धि क्यों माना जा रहा है? इस पूरे विवाद में Africa सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र में है। समर्थकों का कहना है कि सदियों से इस्तेमाल हो रहे नक्शों ने अनजाने में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की एक असंतुलित तस्वीर बना दी है। Africa दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महाद्वीप है और इसके बावजूद Mercator Map में इसका आकार उसकी वास्तविक विशालता के मुकाबले कम नजर आता है। यही वजह है कि African countries और African Union की ओर से इस मुद्दे को लगातार उठाया गया। उनके लिए यह केवल Map Projection का मामला नहीं, बल्कि दुनिया के सामने Africa की वास्तविक तस्वीर रखने का भी सवाल है। क्या दुनिया सच में बदल गई? नहीं। दुनिया का भूगोल बिल्कुल नहीं बदला है। न कोई नया देश बना है, न किसी देश की सीमा बदली है और न ही Africa का क्षेत्रफल अचानक बढ़ गया है। बदलाव सिर्फ इतना है कि दुनिया को कागज या स्क्रीन पर किस तरह दिखाया जाए, इस पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा सामने आई है। एक तरह से देखें तो यह कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि नक्शा हमेशा पूरी तरह निष्पक्ष तस्वीर नहीं होता। उसे बनाने का तरीका तय करता है कि हमें दुनिया का कौन-सा हिस्सा कितना बड़ा या छोटा दिखाई देगा। आने वाले वर्षों में अगर Equal Earth जैसी projections को ज्यादा अपनाया जाता है, तो संभव है कि नई पीढ़ी के लिए World Map की तस्वीर वही न हो,...
Swatantra Bhardwaj

Swatantra Bhardwaj Detained: CJP Protest के बाद स्वतंत्र भारद्वाज हिरासत में

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP Protest के दौरान एक छात्रा के पिता के साथ कथित मारपीट का मामला अब फिर चर्चा में है। मामले में आरोपी बताए जा रहे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज (Swatantra Bhardwaj) को दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थकों के प्रदर्शन और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग के कुछ घंटे बाद हुई। Parliament Street Police Station के बाहर प्रदर्शन स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर CJP के प्रतिनिधि और समर्थक शुक्रवार को दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से मामले में जल्द कार्रवाई करने और आरोपी को गिरफ्तार करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुछ राजनीतिक नेता भी वहां पहुंचे। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बातचीत हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने मामले में कार्रवाई का भरोसा दिया और इसके बाद भारद्वाज को ट्रेस करने के लिए टीमें सक्रिय की गईं। क्या है पूरा मामला? यह विवाद जंतर-मंतर पर CJP के एक प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ कथित तौर पर मारपीट हुई थी। इस मामले में स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार के नाम FIR में शामिल किए गए थे। मामला उस समय और गरमा गया, जब स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े एक Podcast Video की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वीडियो में भारद्वाज ने घटना को लेकर आपत्तिजनक दावे किए थे। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई। Viral Video ने बढ़ाया विवाद वायरल वीडियो सामने आने के बाद CJP ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। संगठन का कहना था कि वीडियो में कथित तौर पर घटना को लेकर किए गए दावों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। वहीं दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही थी और मेडिकल रिपोर्ट में चोट को लेकर सोशल मीडिया पर किए गए कुछ दावों की पुष्टि नहीं हुई थी। Bulandshahr में पुलिस ने पकड़ा पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की टीमों ने स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में ट्रेस किया। रिपोर्टों में बताया गया कि पुलिस की कार्रवाई से पहले वह वहां से निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बाद में उन्हें हिरासत में ले लिया गया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थक स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इससे मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर चल रहा विवाद भी फिलहाल एक नए चरण में पहुंच गया है। FIR में SC/ST Act की धाराएं जोड़ने की जानकारी प्रदर्शन के बाद पुलिस की ओर से मामले में SC/ST Act से संबंधित धाराएं जोड़ने की बात सामने आई। पीड़ित की दोबारा मेडिकल जांच कराए जाने की जानकारी भी रिपोर्टों में दी गई है। हालांकि, मामले में अंतिम कानूनी स्थिति जांच और आगे की पुलिस कार्रवाई पर निर्भर करेगी। आरोपों की पुष्टि अदालत की प्रक्रिया में ही होगी। पुलिस के सामने अब आगे की जांच बड़ी चुनौती स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिए जाने के बाद अब पुलिस के सामने वायरल वीडियो, FIR में दर्ज आरोपों, मेडिकल रिपोर्ट और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच अहम होगी। फिलहाल इस मामले ने CJP Protest, Delhi Police और Social Media Influencer को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस को भी तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस की ओर से क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Saharanpur

UP Bulldozer Action: Saharanpur कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर चला बुलडोजर, मायावती-इकरा हसन ने उठाए सवाल

Saharanpur उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अदालत के आदेश के बाद प्रशासन ने शनिवार को मस्जिद के खिलाफ Bulldozer Action शुरू कर दिया। कार्रवाई की खबर फैलते ही इलाके में हलचल बढ़ गई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया। कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई। किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई अदालत के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन का एक्शन कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को लेकर जमीन के स्वामित्व और निर्माण की वैधता पर काफी समय से विवाद चल रहा था। प्रशासन का दावा है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है और निर्माण को अवैध माना गया है। मामला पहले सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पहुंचा। जुलाई में अदालत ने मस्जिद को हटाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही संबंधित पक्ष पर करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति लगाए जाने की बात भी सामने आई थी। इस फैसले को जिला अदालत में चुनौती दी गई थी। 4 सितंबर को जिला जज की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। इकरा हसन को सहारनपुर जाने से रोका मस्जिद पर कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन सहारनपुर जाने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इकरा हसन और पुलिस अधिकारियों के बीच इस दौरान तीखी बहस भी हुई। इसका वीडियो सामने आने के बाद मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। बाद में उनके आवास के बाहर पुलिस बल तैनात किए जाने की भी खबर सामने आई। इकरा हसन ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोका जा रहा है। उनका कहना था कि वह मौके पर जाकर हालात देखना चाहती थीं। मायावती ने सरकार से कार्रवाई रोकने को कहा सहारनपुर मस्जिद विवाद पर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सरकार से कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की और मामले को संवेदनशील बताते हुए सावधानी से कदम उठाने की बात कही। मायावती ने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह का तनाव बढ़ने से रोकना जरूरी है। उन्होंने लोगों से भी शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की। इमरान मसूद बोले- हाईकोर्ट जाएंगे सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया है। उनका कहना है कि मस्जिद की जमीन और उससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर उनका पक्ष अलग है। जिला अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद मसूद ने मामले को हाईकोर्ट ले जाने की बात कही है। उनका कहना है कि आगे की कानूनी लड़ाई अदालत में लड़ी जाएगी और उपलब्ध दस्तावेजों को वहां रखा जाएगा। प्रशासन और विपक्ष के दावे अलग-अलग पूरे विवाद में प्रशासन और मस्जिद पक्ष के दावे अलग हैं। प्रशासन जहां निर्माण को सरकारी जमीन पर हुआ अवैध निर्माण बता रहा है, वहीं मस्जिद से जुड़े लोग और कुछ विपक्षी नेता इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं। यही वजह है कि मामला सिर्फ बुलडोजर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। अब इसकी गूंज राजनीतिक मंच से लेकर अदालत तक सुनाई दे रही है। आगे क्या होगा? सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर हुई कार्रवाई के बाद अब सबकी नजर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर है। इमरान मसूद की ओर से हाईकोर्ट जाने की बात कही गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में अदालत में इस मामले को लेकर क्या रुख सामने आता है, यह महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई के बाद सहारनपुर में राजनीतिक माहौल गर्म है। एक तरफ अधिकारी कोर्ट के आदेश के पालन की बात कह रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Nepal

Nepal Flood: दार्चुला में Landslide का खतरा बढ़ा, Trishuli से भारतीय परिवार का Rescue; हजारों Missing

नेपाल (Nepal) में बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बाद हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। नदियों का जलस्तर बढ़ने, मलबा आने और पहाड़ी इलाकों में Landslide के खतरे ने राहत और बचाव अभियान को और मुश्किल बना दिया है। सबसे चिंता की बात यह है कि हादसे के कई दिन बाद भी हजारों लोगों का पता नहीं चल पाया है। हालांकि, इसी बीच Trishuli क्षेत्र से दो लोगों को नौ दिन बाद जिंदा निकालना राहत और उम्मीद की बड़ी खबर बनकर सामने आया है। दार्चुला में Landslide का खतरा, निचले इलाकों पर नजर नेपाल के पहाड़ी इलाकों में लगातार भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। दार्चुला समेत संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से निचले इलाकों को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। पहाड़ों से मलबा आने और नदियों में अचानक पानी बढ़ने की आशंका के बीच लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। बाढ़ से कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है। Trishuli से भारतीय नागरिकों का Rescue इस बीच त्रिशूली इलाके से तीन भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाले जाने की खबर सामने आई है। इनमें एक परिवार शामिल है। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, रेस्क्यू किए गए लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया और उनके भारत लौटने की प्रक्रिया में मदद की जा रही है। भारत सरकार नेपाल में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए लगातार नेपाली प्रशासन के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 166 भारतीय नागरिकों को Rescue किया गया है, जबकि 275 भारतीयों के लापता होने की जानकारी दी गई है। भारत ने राहत अभियान के लिए करीब 95 टन राहत सामग्री भी भेजी है। 9 दिन बाद Trishuli Tunnel से जिंदा निकले 2 मजदूर नेपाल में चल रहे Rescue Operation की सबसे बड़ी खबर Trishuli-3A Hydropower Project से आई। यहां सुरंग में फंसे संजय साह और कबीर महारजन को करीब नौ दिन बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया। दोनों को सुरंग के अंदर काफी गहराई से निकाला गया। बचाव दल ने पहले अंदर से आवाजें सुनीं और फिर संपर्क स्थापित होने के बाद ऑपरेशन तेज किया। आखिरकार दोनों को बाहर निकाल लिया गया। इस घटना ने उन परिवारों में भी उम्मीद जगाई है जिनके अपने लोग अभी तक लापता हैं। राहत दल अब अन्य संभावित Survivors तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं। 1300 के करीब मौतें, 5 हजार से ज्यादा लोग Missing इस प्राकृतिक आपदा का असर कितना बड़ा है, इसका अंदाजा मृतकों और लापता लोगों की संख्या से लगाया जा सकता है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार 1,294 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी और 5,053 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़ों में बदलाव देखने को मिल रहा है। कई इलाकों में घरों, सड़कों, पुलों और Hydropower Projects को भारी नुकसान पहुंचा है। बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं और राहत शिविरों में रह रहे हैं। Rescue Operation अभी भी जारी Trishuli Tunnel से दो लोगों को जिंदा निकाले जाने के बाद Rescue Teams का हौसला बढ़ा है। नेपाल सेना, पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञ लगातार प्रभावित इलाकों में Search Operation चला रहे हैं। Hydropower Projects के आसपास अभी भी बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका है। मलबा, पानी और क्षतिग्रस्त सुरंगें बचाव अभियान में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। इसके बावजूद टीमें लगातार नए रास्ते तलाश रही हैं। भारत ने नेपाल की मदद बढ़ाई नेपाल की इस मुश्किल घड़ी में भारत ने भी राहत और बचाव अभियान में सहयोग बढ़ाया है। भारतीय विशेषज्ञों और राहत सामग्री को नेपाल भेजा गया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत की टीमें Rescue, Medical और अन्य जरूरी सेवाओं में सहायता कर रही हैं। फिलहाल नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और पहाड़ी इलाकों में नए Landslide और Flood के खतरे से निपटना है। Trishuli Tunnel से नौ दिन बाद दो लोगों का जिंदा निकलना इस त्रासदी के बीच उम्मीद की एक किरण जरूर लेकर आया है। अब Rescue Teams की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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