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MP Board 12th Result 2026: सागर के टेलर के बेटे जय राजोरिया ने किया कमाल, प्रदेश में चौथा स्थान

माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा घोषित 12वीं बोर्ड परीक्षा परिणाम में मध्यप्रदेश के सागर जिले के छात्रों ने शानदार प्रदर्शन किया है। इस बार जिले के 5 विद्यार्थियों ने प्रदेश की मेरिट लिस्ट में जगह बनाई है। इनमें टेलर के बेटे जय राजोरिया ने 488 अंक हासिल कर जीव विज्ञान समूह में चौथा स्थान प्राप्त किया है। रिजल्ट घोषित होने के बाद शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय (एक्सीलेंस स्कूल) में खुशी का माहौल है। शिक्षकों ने टॉपर्स को फूलमाला पहनाकर सम्मानित किया और मिठाई खिलाकर जश्न मनाया। साधारण परिवार से उठकर बनाई बड़ी पहचान जय राजोरिया के पिता मनोज राजोरिया टेलरिंग का काम करते हैं और घर पर ही “गजानन टेलर” नाम से रेडीमेड कपड़ों की दुकान चलाते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद जय ने अपनी मेहनत से बड़ा मुकाम हासिल किया। NCERT से तैयारी, रोज 9-10 घंटे पढ़ाई जय ने बताया कि उन्होंने अपनी पढ़ाई का पूरा फोकस NCERT की किताबों पर रखा। उन्होंने कहा कि परिवार और शिक्षकों के सहयोग से ही वे यह सफलता हासिल कर पाए। मां बोलीं – “सोने को कहती थी, पर बेटा पढ़ता रहता था” जय की सफलता पर उनकी मां रचना राजोरिया भावुक हो गईं। उन्होंने बताया कि जय बचपन से ही पढ़ाई में आगे रहा है।“मैं उसे सोने के लिए कहती थी, लेकिन वह पढ़ाई करता रहता था। आज बेटे ने जो मुकाम हासिल किया है, उस पर हमें गर्व है।” सागर जिले का रिजल्ट सुधरा इस साल सागर जिले में 12वीं का कुल परिणाम 77.10% रहा, जो पिछले साल से 3.94% ज्यादा है। जिले के अन्य छात्रों ने भी प्रदेश मेरिट में 7वां, 8वां और 9वां स्थान हासिल किया है। पिछले 4 सालों का रिजल्ट लगातार बेहतर होते रिजल्ट से साफ है कि जिले में शिक्षा का स्तर तेजी से सुधर रहा है। 👉 ऐसी ही प्रेरणादायक खबरों और ताज़ा अपडेट के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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MP Board Result 2026: खंडवा की बेटियों का जलवा, 12वीं मेरिट में 4 छात्राओं ने बनाई जगह

माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा जारी 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा परिणाम में मध्यप्रदेश के खंडवा जिले की बेटियों ने शानदार प्रदर्शन कर सबका ध्यान खींचा है। इस साल 12वीं कक्षा की 4 छात्राओं ने प्रदेश की मेरिट लिस्ट में जगह बनाई है, जबकि 10वीं कक्षा में जिले का कोई छात्र मेरिट में स्थान नहीं बना पाया। कॉमर्स में 3 और बायोलॉजी में 1 छात्रा चमकी 12वीं के नतीजों में कॉमर्स स्ट्रीम से 3 छात्राओं ने प्रदेश स्तर पर शानदार प्रदर्शन किया: वहीं बायोलॉजी स्ट्रीम में शिक्षा एकेडमी सिल्टिया की छात्रा कामिनी कुशवाहा ने 10वां स्थान हासिल किया। जिला मेरिट में भी बेटियों का दबदबा जिला स्तर पर भी छात्राओं ने बाजी मारी।बेंस पब्लिक स्कूल की छात्रा मीनल खानचंदानी ने जिला मेरिट लिस्ट में पहला स्थान हासिल किया। खास बात यह है कि मीनल और स्टेट मेरिट में 6ठा स्थान पाने वाली आनंदी गंगराड़े एक ही स्कूल और क्लास की छात्राएं हैं। सफलता का मंत्र: समय का सही प्रबंधन स्टेट टॉपर आनंदी गंगराड़े ने अपनी सफलता का राज साझा करते हुए बताया कि उन्होंने समय का सही तरीके से उपयोग किया।स्कूल और कोचिंग के बीच समय बांटकर हर विषय को बराबर महत्व दिया। उन्होंने हर सब्जेक्ट के लिए अलग दिन तय कर रोजाना 2-2 घंटे पढ़ाई की। आनंदी ने बताया कि उन्होंने रटने की बजाय समझकर पढ़ाई की और मोबाइल से दूरी बनाकर पूरी तरह पढ़ाई पर फोकस किया। उनका सपना आगे चलकर CA (चार्टर्ड अकाउंटेंट) बनने का है। छात्रों के अंक 👉 ऐसी ही प्रेरणादायक खबरों और ताज़ा अपडेट के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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इंदौर वंदे मातरम विवाद: कांग्रेस की दो महिला पार्षदों पर FIR, बजट सत्र में हुआ था हंगामा

मध्यप्रदेश के इंदौर नगर निगम के बजट सत्र के दौरान राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर हुए विवाद में बड़ी कार्रवाई सामने आई है। जांच के बाद एमजी रोड थाना पुलिस ने कांग्रेस की दो महिला पार्षद—रुबीना इकबाल खान और फौजिया शेख अलीम—के खिलाफ बुधवार को एफआईआर दर्ज की है। यह इस मामले में पहली पुलिस कार्रवाई मानी जा रही है। पुलिस ने यह कदम भाजपा पार्षदों की शिकायत और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर उठाया है। 4 घंटे से ज्यादा चली पूछताछ, दर्ज हुए बयान एमजी रोड थाना पुलिस ने दोनों पार्षदों को पूछताछ के लिए बुलाया था। एसीपी विनोद दीक्षित के मुताबिक, भाजपा पार्षद दल की शिकायत के बाद पूरे मामले की जांच की गई और पर्याप्त आधार मिलने पर केस दर्ज किया गया। पुलिस ने दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(1) के तहत मामला दर्ज किया है, जिसमें समाज में वैमनस्य फैलाने और सौहार्द बिगाड़ने से जुड़ी धाराएं शामिल हैं। पार्षदों ने क्या कहा? पूछताछ के दौरान रुबीना इकबाल खान ने अपने विवादित बयान पर माफी मांगी। उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यताओं के कारण वे ‘वंदे मातरम’ नहीं गातीं और सुप्रीम कोर्ट भी इसकी अनुमति देता है। वहीं फौजिया शेख अलीम ने पुलिस को बताया कि संविधान उन्हें धार्मिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी देता है, इसलिए किसी को भी जबरन कोई गीत गाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। ऐसे शुरू हुआ था पूरा विवाद राजनीति भी हुई तेज इस विवाद के बाद दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया।कांग्रेस और भाजपा पार्षदों के बयानों से माहौल और गरमा गया, जिससे यह मुद्दा राजनीतिक रंग लेता नजर आया। “शहर के मुद्दों पर हो चर्चा” बाद में रुबीना इकबाल खान ने अपने बयान पर माफी मांगते हुए कहा कि शहर के विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा ज्यादा जरूरी है।वहीं फौजिया शेख अलीम के परिवार की ओर से भी अपील की गई कि विवाद खत्म कर विकास कार्यों पर ध्यान दिया जाए। 👉 ताज़ा अपडेट और पूरी खबर पढ़ने के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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MP Board 10th Result 2026: ग्रामीण और साधारण परिवारों के बच्चों ने किया कमाल, 90% से 99% तक अंक

मध्यप्रदेश के अलग-अलग जिलों से सामने आए 10वीं बोर्ड के परिणाम इस बार एक खास कहानी बता रहे हैं—मेहनत, संघर्ष और सपनों की। इस साल ग्रामीण इलाकों और सामान्य परिवारों के बच्चों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 90% से 99% तक अंक हासिल किए हैं। संघर्ष के बीच सफलता की कहानी इस बार के रिजल्ट में बड़ी संख्या में ऐसे छात्र सामने आए हैं, जिनके माता-पिता किसान, मजदूर, ड्राइवर, दुकानदार या छोटे व्यवसायी हैं। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद इन बच्चों ने साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती। कई जिलों के छात्रों ने बढ़ाया मान रीवा, ग्वालियर, भोपाल, इंदौर, सागर, भिंड, मुरैना, शाजापुर, सीधी, खंडवा, मंदसौर, उज्जैन और छतरपुर समेत कई जिलों के छात्रों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। गांव के बच्चों का दमदार प्रदर्शन गांवों से आने वाले छात्रों ने इस बार खास पहचान बनाई है। खेतों में काम करने और घर की जिम्मेदारियों के बीच पढ़ाई करने वाले इन छात्रों ने यह साबित कर दिया कि संसाधनों की कमी सफलता की राह में रुकावट नहीं बनती। कई छात्रों ने बताया कि उन्होंने सीमित मोबाइल और ऑनलाइन संसाधनों के बावजूद नियमित पढ़ाई और अनुशासन से यह सफलता हासिल की। प्रतिभाओं को मिल रहा मंच रिजल्ट जारी होने के बाद अब मेधावी छात्रों को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न प्लेटफॉर्म पर उनकी उपलब्धियों को साझा किया जा रहा है, ताकि अन्य छात्र भी उनसे प्रेरणा ले सकें। 👉 ऐसी ही प्रेरणादायक खबरों और ताज़ा अपडेट के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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MP Board Result 2026: 10वीं-12वीं के नतीजे घोषित, सरकारी स्कूलों ने मारी बाज़ी

मध्यप्रदेश में एमपी बोर्ड की 10वीं और 12वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम बुधवार को घोषित कर दिए गए। सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री निवास से रिजल्ट जारी किया। इस साल करीब 16 लाख छात्र-छात्राएं परीक्षा में शामिल हुए थे। इंदौर के छात्रों का शानदार प्रदर्शन इंदौर की तन्वी कुमावत ने 12वीं बायोलॉजी में शानदार प्रदर्शन करते हुए 500 में से 492 अंक हासिल किए और शहर में टॉप किया।कॉमर्स स्ट्रीम में याशी घनरिया ने 485 अंक हासिल कर प्रदेश में छठा स्थान पाया।वहीं पीसीएम विषय में अथर्व देशमुख ने प्रदेश में सातवीं रैंक हासिल की। 10वीं में कृष्णा खाजेकर का कमाल कक्षा 10वीं में शासकीय कन्या उमावि, राजेंद्र नगर की छात्रा कृष्णा खाजेकर ने 491 अंक हासिल किए। उन्होंने प्रदेश मेरिट में 9वां स्थान और जिला स्तर पर पहला स्थान प्राप्त किया। सरकारी स्कूलों का बेहतर रिजल्ट इंदौर जिले में इस बार सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन निजी स्कूलों से बेहतर रहा। यह आंकड़े बताते हैं कि सरकारी स्कूलों के छात्र इस साल बेहतर प्रदर्शन करने में आगे रहे। ऐसे चेक करें रिजल्ट छात्र घर बैठे अपना रिजल्ट ऑनलाइन देख सकते हैं। इसके लिए वे आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना रोल नंबर डालकर परिणाम देख सकते हैं: 👉 ताज़ा अपडेट और पूरी खबर पढ़ने के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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खंडवा बीजेपी में संगठन विस्तार तेज, अनूप पटेल बने ओबीसी मोर्चा जिलाध्यक्ष

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में भाजपा संगठन ने मोर्चा स्तर पर नई नियुक्तियों का दौर शुरू कर दिया है। एससी और एसटी मोर्चा के बाद अब ओबीसी मोर्चा की कमान अनूप पटेल को सौंपी गई है। अनूप पटेल को मंत्री विजय शाह का करीबी माना जाता है और वे फिलहाल पुरानी कार्यकारिणी के अनुसार युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। कुनबी पटेल समाज को साधने की रणनीति भाजपा का यह फैसला राजनीतिक नजरिए से भी अहम माना जा रहा है। पार्टी ने ओबीसी मोर्चा की जिम्मेदारी देकर कुनबी पटेल समाज को साधने की कोशिश की है। दरअसल, कांग्रेस भी इस समाज पर फोकस कर रही है और जिला कांग्रेस कमेटी ने अपने दो ब्लॉक अध्यक्ष इसी समाज से बनाए हैं। इसी के जवाब में भाजपा ने भी संतुलन साधते हुए अनूप पटेल को यह अहम जिम्मेदारी दी है। अन्य दावेदारों पर असर अनूप पटेल के ओबीसी मोर्चा जिलाध्यक्ष बनने के बाद अब पटेल समाज से जुड़े अन्य युवा नेताओं की दावेदारी कमजोर पड़ सकती है। खासकर मोर्चा संगठनों में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे कार्यकर्ताओं के लिए यह फैसला झटका माना जा रहा है। युवा मोर्चा में भी मुकाबला दिलचस्प इधर, युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष पद को लेकर भी खींचतान जारी है। सांसद समर्थक सागर आरतानी के सामने पटेल समाज के ही शुभम पटेल मजबूत दावेदार के रूप में उभरे हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े शुभम पटेल का युवाओं के बीच अच्छा नेटवर्क और जमीनी पकड़ मानी जाती है। छात्र राजनीति के जरिए उन्होंने मजबूत पहचान बनाई है। संगठन में बदलता ट्रेंड भाजपा संगठन में इन दिनों पेशेवर और प्रभावशाली चेहरों को प्राथमिकता दी जा रही है। ऐसे में कई जगहों पर पुराने और जमीनी कार्यकर्ताओं के उपेक्षित होने की चर्चा भी तेज हो गई है। खंडवा में ये नई नियुक्तियां आने वाले समय में संगठन और राजनीतिक समीकरणों को किस तरह प्रभावित करेंगी, इस पर सबकी नजर बनी हुई है। 👉 राजनीति और प्रदेश की हर बड़ी खबर के लिए विजिट करें —www.deshharpal.com
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ग्वालियर केंद्रीय जेल में अवैध गतिविधियों का वीडियो वायरल, न्यायिक जांच के आदेश

मध्य प्रदेश के ग्वालियर केंद्रीय जेल से जुड़ा एक चौंकाने वाला वीडियो सामने आया है, जिसने जेल व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो वायरल होने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पूरे मामले में न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं और विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। क्या है वीडियो में? बताया जा रहा है कि यह वीडियो एक जेल प्रहरी और एक बंदी द्वारा साझा किया गया है। इसमें जेल के अंदर भ्रष्टाचार, अवैध वसूली, कैदियों की प्रताड़ना, नशे की सप्लाई, पैसे लेकर बैरक बदलने और यहां तक कि वेश्यावृत्ति जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। खाने-पीने की चीजों में भी वसूली वीडियो में दावा किया गया है कि कैदियों से खाने-पीने की चीजों के लिए तय दरों से ज्यादा पैसे वसूले जा रहे हैं।आरोपों के मुताबिक— नशा और अन्य अवैध सुविधाओं के आरोप वीडियो में यह भी आरोप लगाया गया है कि जेल के अंदर पैसे देकर नशा उपलब्ध कराया जाता है। यहां तक कि ज्यादा पैसे देने पर वेश्यावृत्ति जैसी सुविधाएं मिलने की बात भी सामने आई है। नए कैदियों से प्रताड़ना के आरोप वीडियो में कहा गया है कि नए कैदियों को पैसे के लिए प्रताड़ित किया जाता है। जब तक उनके घर से पैसे नहीं आते, तब तक उन्हें मारपीट और जबरन काम कराया जाता है। कुछ कैदियों द्वारा आत्महत्या करने के आरोप भी सामने आए हैं, जिससे मामला और गंभीर हो गया है। बैरक बदलने के लिए लाखों की मांग आरोप है कि हवालात से दूसरी बैरक में शिफ्ट होने के लिए 50 हजार से 1 लाख रुपये तक की मांग की जाती है।एक कैदी ने दावा किया कि उसने 50 हजार रुपये देकर अपनी बैरक बदलवाई। प्रशासन की कार्रवाई और जांच वीडियो सामने आने के बाद जेल प्रशासन ने संबंधित प्रहरी को निलंबित कर दिया है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि उसकी बयानबाजी से जेल की छवि खराब हुई है। वहीं, जिला एवं सत्र न्यायालय के रजिस्ट्रार भूपेंद्र कुशवाह ने बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को संज्ञान में लेकर न्यायिक जांच के आदेश दिए गए हैं। अब सभी आरोपों की जांच न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा की जाएगी। 👉 ऐसी ही सटीक और भरोसेमंद खबरों के लिए विजिट करें — मध्य प्रदेश के ग्वालियर केंद्रीय जेल से जुड़ा एक चौंकाने वाला वीडियो सामने आया है, जिसने जेल व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो वायरल होने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पूरे मामले में न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं और विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। क्या है वीडियो में? बताया जा रहा है कि यह वीडियो एक जेल प्रहरी और एक बंदी द्वारा साझा किया गया है। इसमें जेल के अंदर भ्रष्टाचार, अवैध वसूली, कैदियों की प्रताड़ना, नशे की सप्लाई, पैसे लेकर बैरक बदलने और यहां तक कि वेश्यावृत्ति जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। खाने-पीने की चीजों में भी वसूली वीडियो में दावा किया गया है कि कैदियों से खाने-पीने की चीजों के लिए तय दरों से ज्यादा पैसे वसूले जा रहे हैं।आरोपों के मुताबिक— नशा और अन्य अवैध सुविधाओं के आरोप वीडियो में यह भी आरोप लगाया गया है कि जेल के अंदर पैसे देकर नशा उपलब्ध कराया जाता है। यहां तक कि ज्यादा पैसे देने पर वेश्यावृत्ति जैसी सुविधाएं मिलने की बात भी सामने आई है। नए कैदियों से प्रताड़ना के आरोप वीडियो में कहा गया है कि नए कैदियों को पैसे के लिए प्रताड़ित किया जाता है। जब तक उनके घर से पैसे नहीं आते, तब तक उन्हें मारपीट और जबरन काम कराया जाता है। कुछ कैदियों द्वारा आत्महत्या करने के आरोप भी सामने आए हैं, जिससे मामला और गंभीर हो गया है। बैरक बदलने के लिए लाखों की मांग आरोप है कि हवालात से दूसरी बैरक में शिफ्ट होने के लिए 50 हजार से 1 लाख रुपये तक की मांग की जाती है।एक कैदी ने दावा किया कि उसने 50 हजार रुपये देकर अपनी बैरक बदलवाई। प्रशासन की कार्रवाई और जांच वीडियो सामने आने के बाद जेल प्रशासन ने संबंधित प्रहरी को निलंबित कर दिया है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि उसकी बयानबाजी से जेल की छवि खराब हुई है। वहीं, जिला एवं सत्र न्यायालय के रजिस्ट्रार भूपेंद्र कुशवाह ने बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को संज्ञान में लेकर न्यायिक जांच के आदेश दिए गए हैं। अब सभी आरोपों की जांच न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा की जाएगी। 👉 ऐसी ही सटीक और भरोसेमंद खबरों के लिए विजिट करें —www.deshharpal.com
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सागर में विधायक की बेटी का विवादित वीडियो वायरल, युवक की जूतों से पिटाई; दोनों पक्षों के अलग-अलग आरोप

मध्य प्रदेश के सागर जिले की देवरी विधानसभा सीट से भाजपा विधायक बृजबिहारी पटेरिया की बेटी प्रियंका पटेरिया एक बार फिर चर्चा में हैं। उनका एक विवादित सीसीटीवी वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में प्रियंका एक युवक की जूतों से पिटाई करती नजर आ रही हैं। बताया जा रहा है कि यह घटना सोमवार की है, जबकि वीडियो मंगलवार को सामने आया। क्या है पूरा मामला? पीड़ित युवक राजेश शर्मा, जो मढ़ी जमुनिया का रहने वाला है, के अनुसार वह सोमवार को गौरझामर स्थित एक बैंक में काम से गया था। इसी दौरान उसे मैसेज मिला कि प्रियंका पटेरिया उसे बाहर बुला रही हैं। राजेश का कहना है कि जैसे ही वह उनकी कार के पास पहुंचा, प्रियंका कार से उतरीं और बिना कुछ कहे उस पर जूतों से हमला कर दिया। घटना के बाद युवक ने गौरझामर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। प्रियंका पटेरिया ने क्या कहा? दूसरी ओर, प्रियंका पटेरिया ने मारपीट की बात स्वीकार की है, लेकिन इसे अपनी मजबूरी बताया है। उनका आरोप है कि राजेश शर्मा काफी समय से उनका पीछा कर रहा था। प्रियंका के मुताबिक, युवक उनकी कार का पीछा करता था और कई बार खतरनाक तरीके से ओवरटेक करने की कोशिश भी कर चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि एक साल पहले दर्ज एक एफआईआर में भी राजेश का नाम सामने आया था, लेकिन इसके बावजूद उसकी हरकतें नहीं रुकीं। प्रियंका ने कहा, “मैंने उसे सिर्फ यह पूछने के लिए बुलाया था कि वह ऐसा क्यों कर रहा है, लेकिन बात बढ़ गई।” पुलिस जांच जारी मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस फिलहाल खुलकर कुछ भी कहने से बच रही है। हालांकि, शिकायत दर्ज कर ली गई है और वायरल सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच जारी है। यह मामला अब इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। 👉 ऐसी ही ताज़ा और भरोसेमंद खबरों के लिए विजिट करें — www.deshharpal.com
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रायसेन कृषि मेले का आज समापन: गडकरी होंगे शामिल, जीतू पटवारी को पुलिस ने रास्ते में रोका

मध्य प्रदेश के रायसेन में केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan के नेतृत्व में चल रहे तीन दिवसीय कृषि मेले का आज समापन हो रहा है। इस मौके पर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री Nitin Gadkari भी शामिल होंगे। मेले में जाने से पहले ही रोके गए जीतू पटवारी इधर, एमपी कांग्रेस अध्यक्ष Jitu Patwari ने भी मेले में पहुंचकर किसानों की समस्याएं उठाने का ऐलान किया था। लेकिन पुलिस की सख्ती के चलते वे रायसेन नहीं पहुंच सके। आनंद नगर इलाके में पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उनका रास्ता रोक लिया। काफी देर तक बहस के बाद भी उन्हें आगे जाने की अनुमति नहीं मिली, जिसके बाद वे अपने काफिले के साथ वापस लौट गए। “संवाद करना चाहता था, टकराव नहीं” जीतू पटवारी ने कहा कि उनका मकसद किसी तरह का विवाद खड़ा करना नहीं था, बल्कि वे संवाद करना चाहते थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने पहले ही अनुमति के लिए पत्र लिखा था और कहा था कि इजाजत मिलने पर ही मेले में जाएंगे। पटवारी के मुताबिक, सुबह उन्हें पुलिस अधिकारियों का फोन आया, जिसमें कहा गया कि सरकार नहीं चाहती कि वे मेले में आएं। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें रोकने के लिए रास्तों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। किसानों की हालत पर उठाए सवाल कृषि मेले के बीच पटवारी ने किसानों की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि मंडियों में किसानों को गेहूं का सही दाम नहीं मिल रहा है। उनका दावा है कि किसान 2 हजार रुपए से कम कीमत पर फसल बेचने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ बड़े-बड़े आयोजन हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ किसान परेशान हैं। दिग्विजय सिंह से मुलाकात, राज्यसभा पर बड़ा दावा इस घटनाक्रम के बीच पटवारी ने पूर्व मुख्यमंत्री Digvijaya Singh से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि पार्टी की रणनीति और संगठन को मजबूत करने पर चर्चा हुई। राज्यसभा चुनाव को लेकर पटवारी ने आत्मविश्वास जताते हुए कहा—“5 लाख परसेंट हमारा उम्मीदवार राज्यसभा जाएगा।” समापन में गडकरी की मौजूदगी, सुरक्षा कड़ी मेले के अंतिम दिन Nitin Gadkari के आगमन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। देशभर से आए कृषि विशेषज्ञ और कंपनियां मेले में नई तकनीकों का प्रदर्शन कर रही हैं। Shivraj Singh Chouhan इस आयोजन के जरिए किसानों को केंद्र की योजनाओं और आधुनिक तकनीक से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, विपक्ष के विरोध और जीतू पटवारी को रोके जाने की घटना ने मेले को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। 👉 अधिक जानकारी और ताज़ा अपडेट के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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ग्वालियर में आधी रात भीषण आग: मकान और वाहन जले, लोगों ने घर छोड़कर बचाई जान

मध्य प्रदेश के ग्वालियर के मुरार इलाके में रविवार और सोमवार की दरमियानी रात एक भीषण आग की घटना ने इलाके में दहशत फैला दी। रात करीब 2:30 बजे एक मकान में अचानक आग लग गई, जिसने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया। तेजी से फैली आग, आसपास के घर भी चपेट में यह घटना संकल्प हॉस्पिटल के पास प्रेमशंकर नारायण के बाड़े की है। आग इतनी तेजी से फैली कि इसकी लपटें आसपास के घरों तक पहुंच गईं। करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। मकान मालिक बल्ली कांदिल ने बताया कि घर के सामने निर्माण कार्य चल रहा था, जबकि पीछे परिवार रह रहा था। रात में पड़ोसियों ने आग लगने की सूचना दी, जिसके बाद वे मौके पर पहुंचे। लोगों ने बच्चों के साथ घर छोड़ा आग और धुएं से घबराकर आसपास के लोगों ने अपने बच्चों के साथ घर खाली कर सड़क पर शरण ली। कई घरों की दीवारें भी आग की गर्मी से झुलस गईं। ट्रैक्टर-स्कॉर्पियो समेत कई वाहन जलकर खाक इस आग में एक ट्रैक्टर, एक स्कॉर्पियो कार, तीन बाइक और एक स्कूटी पूरी तरह जल गए। घटना में लाखों रुपए के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय लोगों ने खुद बुझाई आग फायर ब्रिगेड के समय पर नहीं पहुंचने के आरोप के बीच, मकान मालिक और स्थानीय लोगों ने मिलकर बोरिंग पंप और पाइप से पानी डालकर आग बुझाने की कोशिश की। आसपास के घरों से भी लोगों ने मदद की, जिसके बाद आग पर काबू पाया जा सका। फायर ब्रिगेड पर लापरवाही का आरोप मकान मालिक का आरोप है कि सूचना देने के बावजूद दमकल टीम समय पर नहीं पहुंची और सुबह तक इंतजार करना पड़ा। आग लगने की वजह क्या? मकान मालिक के अनुसार, जहां आग लगी वहां बिजली कनेक्शन नहीं था, इसलिए शॉर्ट सर्किट की संभावना कम है। आशंका जताई जा रही है कि वाहनों में स्पार्किंग और पेट्रोल-डीजल की वजह से आग भड़क गई। सिथौली फैक्ट्री में भी लगी आग, टला बड़ा हादसा इसी रात ग्वालियर-झांसी हाईवे स्थित सिथौली रेलवे स्प्रिंग फैक्ट्री में भी कोयले के ढेर में आग लग गई। हालांकि कर्मचारियों की सतर्कता से 10-15 मिनट में ही आग पर काबू पा लिया गया। दमकल टीम भी मौके पर पहुंची और कोयले को ठंडा करने के लिए पानी डाला गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
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Bittu Tabahi

Bittu Tabahi ने बदली सोच, अकेले शुरू किया नदी सफाई अभियान; नगरपालिका भी हुई प्रभावित

नदी में गंदगी देखकर ज्यादातर लोग शिकायत करते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के एक युवक ने शिकायत करने के बजाय खुद कुछ करने की ठानी। स्थानीय स्तर पर ‘बिट्टू तबाही’ (Bittu Tabahi) के नाम से पहचाने जाने वाले इस युवक ने अकेले ही नदी की सफाई का जिम्मा उठा लिया। उनका यह जज्बा अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। बिट्टू ने नदी में जमा कचरे और गंदगी को देखकर सफाई अभियान शुरू किया। शुरुआत किसी बड़े इंतजाम या टीम के साथ नहीं हुई। उन्होंने अपने स्तर पर सफाई करना शुरू किया और लगातार इस काम में जुटे रहे। नदी को साफ रखने का लिया संकल्प बिट्टू का मानना है कि नदी सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि आसपास के लोगों और पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने नदी में जमा कचरे को हटाने की पहल की। उनका यह प्रयास धीरे-धीरे स्थानीय लोगों का ध्यान खींचने लगा। लोगों ने देखा कि बिना किसी दबाव या दिखावे के बिट्टू लगातार नदी की सफाई में लगे हुए हैं। नगरपालिका ने भी की पहल की सराहना बिट्टू के लगातार सफाई अभियान की जानकारी नगरपालिका तक पहुंची तो उनके प्रयास की सराहना की गई। एक युवक द्वारा अपने स्तर पर नदी को साफ रखने की कोशिश को अधिकारियों ने सकारात्मक कदम माना। इस पहल ने यह भी दिखाया कि अगर कोई व्यक्ति अपने आसपास के पर्यावरण को लेकर जिम्मेदारी महसूस करे, तो छोटी शुरुआत भी बड़ा संदेश दे सकती है। सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आया अभियान बिट्टू का नदी सफाई अभियान अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। उनके प्रयास को देखकर दूसरे लोगों में भी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने की उम्मीद है। आज नदियों में बढ़ता कचरा और प्रदूषण बड़ी चुनौती है। ऐसे में बिट्टू की पहल लोगों को यह संदेश देती है कि नदी को साफ रखना सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है। ‘बिट्टू तबाही’ ने दी एक अलग मिसाल बिट्टू की कहानी इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने बदलाव का इंतजार नहीं किया, बल्कि खुद बदलाव की शुरुआत करने का फैसला लिया। अकेले शुरू किया गया उनका यह सफाई अभियान अब दूसरों के लिए प्रेरणा बनता दिखाई दे रहा है। कई बार किसी बड़े बदलाव की शुरुआत बड़े अभियान से नहीं, बल्कि एक छोटे से कदम से होती है। बिट्टू का यह प्रयास उसी सोच की मिसाल है—अगर इरादा मजबूत हो, तो एक इंसान भी बदलाव की शुरुआत कर सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
UN

World Map में बड़ा बदलाव! UN ने Africa के असली Size को दिखाने का रास्ता साफ किया

दुनिया का नक्शा (World Map) देखते हुए शायद ही किसी ने सोचा होगा कि इसमें दिखाई देने वाले देशों और महाद्वीपों का आकार असलियत से अलग भी हो सकता है। लेकिन अब इसी मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र में एक अहम पहल हुई है। UN महासभा ने ऐसे World Map को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें धरती के अलग-अलग हिस्सों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाने की कोशिश की गई है। इस बदलाव के बाद नक्शे पर Africa पहले से काफी बड़ा दिखाई देगा, जबकि Europe और North America, खासकर US का आकार पुराने नक्शे की तुलना में छोटा नजर आ सकता है। प्रस्ताव को भारी समर्थन मिला, लेकिन अमेरिका ने इसका विरोध किया। पुराने World Map में आखिर समस्या क्या है? दुनिया के स्कूलों और कई नक्शों में लंबे समय से Mercator Projection का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसे 16वीं सदी में Gerardus Mercator ने तैयार किया था। उस समय इसका सबसे बड़ा फायदा समुद्री यात्राओं और Navigation में था। लेकिन Mercator Projection की एक खासियत ही इसकी सबसे बड़ी कमी भी बन गई। इसमें जैसे-जैसे कोई क्षेत्र Equator से दूर जाता है, उसका आकार नक्शे पर ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है। यही कारण है कि Greenland जैसे इलाके नक्शे पर अपनी वास्तविकता से बहुत बड़े नजर आते हैं। दूसरी तरफ Africa, जो दुनिया के सबसे बड़े महाद्वीपों में से एक है, अपेक्षाकृत छोटा दिखाई देता है। मसलन, सामान्य Mercator Map में Greenland और Africa का आकार देखकर किसी को लग सकता है कि दोनों लगभग बराबर हैं। असल में Africa का क्षेत्रफल Greenland से करीब 14 गुना ज्यादा है। Equal Earth Projection क्यों चर्चा में है? UN के प्रस्ताव में Equal Earth Projection जैसे नक्शों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इस Projection की खासियत यह है कि इसमें अलग-अलग महाद्वीपों के क्षेत्रफल को ज्यादा सही अनुपात में दिखाया जाता है। यानी नक्शे को देखकर Africa का वास्तविक विशाल आकार ज्यादा साफ समझ में आता है। Europe और North America भी Mercator Map की तुलना में छोटे दिखाई देते हैं। हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है—न तो Africa बड़ा हुआ है और न ही Europe या America छोटा। बदलाव सिर्फ उस तरीके में है, जिससे उन्हें नक्शे पर दिखाया जाता है। America ने UN के प्रस्ताव का विरोध क्यों किया? इस प्रस्ताव पर अमेरिका का रुख बाकी देशों से अलग रहा। मतदान के दौरान अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट किया। अमेरिकी पक्ष की ओर से यह सवाल उठाया गया कि संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक स्तर की बड़ी समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। वहीं प्रस्ताव के समर्थकों का मानना है कि नक्शा सिर्फ रास्ता या देश की लोकेशन बताने वाला साधन नहीं है। यह लोगों के मन में दुनिया की एक तस्वीर भी बनाता है। अफ्रीकी देशों की तरफ से लंबे समय से यह बात उठती रही है कि पुराने नक्शों में Africa का वास्तविक आकार सही तरीके से सामने नहीं आता। इसी सोच के साथ “Correct the Map” अभियान को आगे बढ़ाया गया। UN के फैसले से क्या सभी Maps बदल जाएंगे? यह मान लेना सही नहीं होगा कि अब अचानक हर जगह नया नक्शा दिखाई देने लगेगा। UN महासभा का यह फैसला कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। यानी Google Maps, स्कूल की किताबों, सरकारी दस्तावेजों या दूसरे Digital Platforms को तुरंत अपना नक्शा बदलना जरूरी नहीं है। इसका मकसद देशों, शैक्षणिक संस्थानों, मीडिया और दूसरे संगठनों को ऐसे Map Projections अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, जो दुनिया के क्षेत्रफल को ज्यादा सही तरीके से दिखाते हों। इसके बावजूद Mercator Projection पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है। Navigation और समुद्री यात्राओं जैसी जरूरतों में इसका इस्तेमाल आज भी उपयोगी माना जाता है। India पर क्या असर पड़ेगा? भारत को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस नए World Map से देश का आकार या सीमा बदल जाएगी? इसका जवाब है—नहीं। भारत की जमीन, क्षेत्रफल और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर इस प्रस्ताव का कोई असर नहीं पड़ेगा। सिर्फ नक्शे पर भारत और बाकी देशों को दिखाने का अनुपात बदल सकता है। अगर Equal Earth या इसी तरह की Projection का इस्तेमाल ज्यादा बढ़ता है तो आने वाले समय में School Geography Books, Educational Charts, News Graphics और Digital Maps में दुनिया की तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे सकती है। भारत के लिए इसका असर मुख्य रूप से शिक्षा और Geography की समझ के स्तर पर होगा। बच्चों और आम लोगों को यह समझने में मदद मिलेगी कि नक्शे पर दिखाई देने वाला आकार हमेशा किसी देश या महाद्वीप के वास्तविक क्षेत्रफल के बराबर नहीं होता। Africa के लिए इसे बड़ी उपलब्धि क्यों माना जा रहा है? इस पूरे विवाद में Africa सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र में है। समर्थकों का कहना है कि सदियों से इस्तेमाल हो रहे नक्शों ने अनजाने में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की एक असंतुलित तस्वीर बना दी है। Africa दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महाद्वीप है और इसके बावजूद Mercator Map में इसका आकार उसकी वास्तविक विशालता के मुकाबले कम नजर आता है। यही वजह है कि African countries और African Union की ओर से इस मुद्दे को लगातार उठाया गया। उनके लिए यह केवल Map Projection का मामला नहीं, बल्कि दुनिया के सामने Africa की वास्तविक तस्वीर रखने का भी सवाल है। क्या दुनिया सच में बदल गई? नहीं। दुनिया का भूगोल बिल्कुल नहीं बदला है। न कोई नया देश बना है, न किसी देश की सीमा बदली है और न ही Africa का क्षेत्रफल अचानक बढ़ गया है। बदलाव सिर्फ इतना है कि दुनिया को कागज या स्क्रीन पर किस तरह दिखाया जाए, इस पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा सामने आई है। एक तरह से देखें तो यह कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि नक्शा हमेशा पूरी तरह निष्पक्ष तस्वीर नहीं होता। उसे बनाने का तरीका तय करता है कि हमें दुनिया का कौन-सा हिस्सा कितना बड़ा या छोटा दिखाई देगा। आने वाले वर्षों में अगर Equal Earth जैसी projections को ज्यादा अपनाया जाता है, तो संभव है कि नई पीढ़ी के लिए World Map की तस्वीर वही न हो,...
Swatantra Bhardwaj

Swatantra Bhardwaj Detained: CJP Protest के बाद स्वतंत्र भारद्वाज हिरासत में

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP Protest के दौरान एक छात्रा के पिता के साथ कथित मारपीट का मामला अब फिर चर्चा में है। मामले में आरोपी बताए जा रहे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज (Swatantra Bhardwaj) को दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थकों के प्रदर्शन और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग के कुछ घंटे बाद हुई। Parliament Street Police Station के बाहर प्रदर्शन स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर CJP के प्रतिनिधि और समर्थक शुक्रवार को दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से मामले में जल्द कार्रवाई करने और आरोपी को गिरफ्तार करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुछ राजनीतिक नेता भी वहां पहुंचे। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बातचीत हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने मामले में कार्रवाई का भरोसा दिया और इसके बाद भारद्वाज को ट्रेस करने के लिए टीमें सक्रिय की गईं। क्या है पूरा मामला? यह विवाद जंतर-मंतर पर CJP के एक प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ कथित तौर पर मारपीट हुई थी। इस मामले में स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार के नाम FIR में शामिल किए गए थे। मामला उस समय और गरमा गया, जब स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े एक Podcast Video की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वीडियो में भारद्वाज ने घटना को लेकर आपत्तिजनक दावे किए थे। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई। Viral Video ने बढ़ाया विवाद वायरल वीडियो सामने आने के बाद CJP ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। संगठन का कहना था कि वीडियो में कथित तौर पर घटना को लेकर किए गए दावों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। वहीं दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही थी और मेडिकल रिपोर्ट में चोट को लेकर सोशल मीडिया पर किए गए कुछ दावों की पुष्टि नहीं हुई थी। Bulandshahr में पुलिस ने पकड़ा पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की टीमों ने स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में ट्रेस किया। रिपोर्टों में बताया गया कि पुलिस की कार्रवाई से पहले वह वहां से निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बाद में उन्हें हिरासत में ले लिया गया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थक स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इससे मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर चल रहा विवाद भी फिलहाल एक नए चरण में पहुंच गया है। FIR में SC/ST Act की धाराएं जोड़ने की जानकारी प्रदर्शन के बाद पुलिस की ओर से मामले में SC/ST Act से संबंधित धाराएं जोड़ने की बात सामने आई। पीड़ित की दोबारा मेडिकल जांच कराए जाने की जानकारी भी रिपोर्टों में दी गई है। हालांकि, मामले में अंतिम कानूनी स्थिति जांच और आगे की पुलिस कार्रवाई पर निर्भर करेगी। आरोपों की पुष्टि अदालत की प्रक्रिया में ही होगी। पुलिस के सामने अब आगे की जांच बड़ी चुनौती स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिए जाने के बाद अब पुलिस के सामने वायरल वीडियो, FIR में दर्ज आरोपों, मेडिकल रिपोर्ट और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच अहम होगी। फिलहाल इस मामले ने CJP Protest, Delhi Police और Social Media Influencer को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस को भी तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस की ओर से क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Saharanpur

UP Bulldozer Action: Saharanpur कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर चला बुलडोजर, मायावती-इकरा हसन ने उठाए सवाल

Saharanpur उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अदालत के आदेश के बाद प्रशासन ने शनिवार को मस्जिद के खिलाफ Bulldozer Action शुरू कर दिया। कार्रवाई की खबर फैलते ही इलाके में हलचल बढ़ गई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया। कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई। किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई अदालत के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन का एक्शन कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को लेकर जमीन के स्वामित्व और निर्माण की वैधता पर काफी समय से विवाद चल रहा था। प्रशासन का दावा है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है और निर्माण को अवैध माना गया है। मामला पहले सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पहुंचा। जुलाई में अदालत ने मस्जिद को हटाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही संबंधित पक्ष पर करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति लगाए जाने की बात भी सामने आई थी। इस फैसले को जिला अदालत में चुनौती दी गई थी। 4 सितंबर को जिला जज की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। इकरा हसन को सहारनपुर जाने से रोका मस्जिद पर कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन सहारनपुर जाने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इकरा हसन और पुलिस अधिकारियों के बीच इस दौरान तीखी बहस भी हुई। इसका वीडियो सामने आने के बाद मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। बाद में उनके आवास के बाहर पुलिस बल तैनात किए जाने की भी खबर सामने आई। इकरा हसन ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोका जा रहा है। उनका कहना था कि वह मौके पर जाकर हालात देखना चाहती थीं। मायावती ने सरकार से कार्रवाई रोकने को कहा सहारनपुर मस्जिद विवाद पर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सरकार से कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की और मामले को संवेदनशील बताते हुए सावधानी से कदम उठाने की बात कही। मायावती ने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह का तनाव बढ़ने से रोकना जरूरी है। उन्होंने लोगों से भी शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की। इमरान मसूद बोले- हाईकोर्ट जाएंगे सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया है। उनका कहना है कि मस्जिद की जमीन और उससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर उनका पक्ष अलग है। जिला अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद मसूद ने मामले को हाईकोर्ट ले जाने की बात कही है। उनका कहना है कि आगे की कानूनी लड़ाई अदालत में लड़ी जाएगी और उपलब्ध दस्तावेजों को वहां रखा जाएगा। प्रशासन और विपक्ष के दावे अलग-अलग पूरे विवाद में प्रशासन और मस्जिद पक्ष के दावे अलग हैं। प्रशासन जहां निर्माण को सरकारी जमीन पर हुआ अवैध निर्माण बता रहा है, वहीं मस्जिद से जुड़े लोग और कुछ विपक्षी नेता इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं। यही वजह है कि मामला सिर्फ बुलडोजर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। अब इसकी गूंज राजनीतिक मंच से लेकर अदालत तक सुनाई दे रही है। आगे क्या होगा? सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर हुई कार्रवाई के बाद अब सबकी नजर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर है। इमरान मसूद की ओर से हाईकोर्ट जाने की बात कही गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में अदालत में इस मामले को लेकर क्या रुख सामने आता है, यह महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई के बाद सहारनपुर में राजनीतिक माहौल गर्म है। एक तरफ अधिकारी कोर्ट के आदेश के पालन की बात कह रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Nepal

Nepal Flood: दार्चुला में Landslide का खतरा बढ़ा, Trishuli से भारतीय परिवार का Rescue; हजारों Missing

नेपाल (Nepal) में बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बाद हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। नदियों का जलस्तर बढ़ने, मलबा आने और पहाड़ी इलाकों में Landslide के खतरे ने राहत और बचाव अभियान को और मुश्किल बना दिया है। सबसे चिंता की बात यह है कि हादसे के कई दिन बाद भी हजारों लोगों का पता नहीं चल पाया है। हालांकि, इसी बीच Trishuli क्षेत्र से दो लोगों को नौ दिन बाद जिंदा निकालना राहत और उम्मीद की बड़ी खबर बनकर सामने आया है। दार्चुला में Landslide का खतरा, निचले इलाकों पर नजर नेपाल के पहाड़ी इलाकों में लगातार भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। दार्चुला समेत संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से निचले इलाकों को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। पहाड़ों से मलबा आने और नदियों में अचानक पानी बढ़ने की आशंका के बीच लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। बाढ़ से कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है। Trishuli से भारतीय नागरिकों का Rescue इस बीच त्रिशूली इलाके से तीन भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाले जाने की खबर सामने आई है। इनमें एक परिवार शामिल है। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, रेस्क्यू किए गए लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया और उनके भारत लौटने की प्रक्रिया में मदद की जा रही है। भारत सरकार नेपाल में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए लगातार नेपाली प्रशासन के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 166 भारतीय नागरिकों को Rescue किया गया है, जबकि 275 भारतीयों के लापता होने की जानकारी दी गई है। भारत ने राहत अभियान के लिए करीब 95 टन राहत सामग्री भी भेजी है। 9 दिन बाद Trishuli Tunnel से जिंदा निकले 2 मजदूर नेपाल में चल रहे Rescue Operation की सबसे बड़ी खबर Trishuli-3A Hydropower Project से आई। यहां सुरंग में फंसे संजय साह और कबीर महारजन को करीब नौ दिन बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया। दोनों को सुरंग के अंदर काफी गहराई से निकाला गया। बचाव दल ने पहले अंदर से आवाजें सुनीं और फिर संपर्क स्थापित होने के बाद ऑपरेशन तेज किया। आखिरकार दोनों को बाहर निकाल लिया गया। इस घटना ने उन परिवारों में भी उम्मीद जगाई है जिनके अपने लोग अभी तक लापता हैं। राहत दल अब अन्य संभावित Survivors तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं। 1300 के करीब मौतें, 5 हजार से ज्यादा लोग Missing इस प्राकृतिक आपदा का असर कितना बड़ा है, इसका अंदाजा मृतकों और लापता लोगों की संख्या से लगाया जा सकता है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार 1,294 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी और 5,053 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़ों में बदलाव देखने को मिल रहा है। कई इलाकों में घरों, सड़कों, पुलों और Hydropower Projects को भारी नुकसान पहुंचा है। बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं और राहत शिविरों में रह रहे हैं। Rescue Operation अभी भी जारी Trishuli Tunnel से दो लोगों को जिंदा निकाले जाने के बाद Rescue Teams का हौसला बढ़ा है। नेपाल सेना, पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञ लगातार प्रभावित इलाकों में Search Operation चला रहे हैं। Hydropower Projects के आसपास अभी भी बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका है। मलबा, पानी और क्षतिग्रस्त सुरंगें बचाव अभियान में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। इसके बावजूद टीमें लगातार नए रास्ते तलाश रही हैं। भारत ने नेपाल की मदद बढ़ाई नेपाल की इस मुश्किल घड़ी में भारत ने भी राहत और बचाव अभियान में सहयोग बढ़ाया है। भारतीय विशेषज्ञों और राहत सामग्री को नेपाल भेजा गया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत की टीमें Rescue, Medical और अन्य जरूरी सेवाओं में सहायता कर रही हैं। फिलहाल नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और पहाड़ी इलाकों में नए Landslide और Flood के खतरे से निपटना है। Trishuli Tunnel से नौ दिन बाद दो लोगों का जिंदा निकलना इस त्रासदी के बीच उम्मीद की एक किरण जरूर लेकर आया है। अब Rescue Teams की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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