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खंडवा में 32 साल के युवक की हार्ट अटैक से मौत, दोस्तों के साथ कार्यक्रम से लौट रहे थे घर

Khandwa के रामनगर क्षेत्र निवासी 32 वर्षीय सौरभ मालवीय की बुधवार देर शाम हार्ट अटैक से मौत हो गई। वे दोस्तों के साथ ग्राम सिंगोट में एक कार्यक्रम में शामिल होने गए थे। लौटते समय अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। जानकारी के अनुसार, रास्ते में सौरभ ने सीने में तेज दर्द की शिकायत की। उनके दोस्त ने तुरंत कार रोकी, लेकिन कुछ ही देर में उनकी हालत और गंभीर हो गई। इसके बाद दोस्त उन्हें तुरंत शहर के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। हालांकि, डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के मुताबिक अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में उनकी मौत हो चुकी थी। “मां वैष्णो जल” नाम से चलाते थे RO प्लांट सौरभ मालवीय रामनगर क्षेत्र में “मां वैष्णो जल” नाम से RO वाटर प्लांट संचालित करते थे। वे अपने मिलनसार और शांत स्वभाव के कारण इलाके में अच्छी पहचान रखते थे। उनके परिवार में मां, पत्नी और सात साल की बेटी है। सौरभ के अचानक निधन की खबर से परिवार और परिचित गहरे सदमे में हैं। 7 दिन पहले मनाई थी शादी की सालगिरह परिजनों ने बताया कि सौरभ की शादी की सालगिरह सिर्फ सात दिन पहले ही मनाई गई थी। वहीं उनकी मां पिछले एक साल से बीमार चल रही हैं। उनका इलाज मुंबई में चल रहा था और इसी महीने उन्हें वापस घर लाया गया था। ऐसे में सौरभ की अचानक मौत ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया है। घटना के बाद रामनगर क्षेत्र में शोक का माहौल है। अधिक जानकारी और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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भोपाल में 1.40 लाख के नकली नोटों के साथ युवक गिरफ्तार, खुद को बताता था MBBS डॉक्टर

Bhopal की कोहेफिजा पुलिस ने पश्चिम बंगाल के एक युवक को नकली नोटों के साथ गिरफ्तार किया है। आरोपी के पास से 500 रुपए के 280 नकली नोट बरामद हुए हैं। इनकी कुल कीमत करीब 1.40 लाख रुपए बताई जा रही है। पुलिस के मुताबिक आरोपी खुद को MBBS डॉक्टर बताता था। उसके पास से एक आईफोन, पेन ड्राइव और विदेशी सीरीज (+44) का मोबाइल नंबर भी मिला है। शुरुआती जांच में पुलिस को कुछ संदिग्ध गतिविधियों के संकेत मिले हैं। इसी वजह से आरोपी को कोर्ट में पेश कर 7 दिन की रिमांड पर लिया गया है। सैफिया कॉलेज ग्राउंड के पास हुई गिरफ्तारी कोहेफिजा थाना प्रभारी केजी शुक्ला ने बताया कि बुधवार दोपहर पुलिस को सूचना मिली थी कि एक युवक सैफिया कॉलेज ग्राउंड के पास कम कीमत में नकली नोट बेचने की कोशिश कर रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने घेराबंदी कर आरोपी को पकड़ लिया। पूछताछ में उसने अपना नाम सैफुल इस्लाम (27) निवासी पश्चिम बंगाल बताया। 2024 से कर रहा था नकली नोटों का कारोबार पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह साल 2024 से नकली नोटों के कारोबार में शामिल है। वह पहले भी दो बार भोपाल आकर नकली नोट चला चुका है। मई 2025 से वह भोपाल की गुलमोहर कॉलोनी में किराए से रह रहा था। इसी दौरान उसने शादी भी की थी। 300 रुपए लेकर देता था 500 का नकली नोट आरोपी ने पुलिस को बताया कि वह 2 लाख रुपए की नकली करेंसी करीब 60 हजार रुपए में खरीदकर लाया था। पिछले 10 दिनों में वह करीब 60 हजार रुपए के नकली नोट बाजार में चला चुका है। वह लोगों से 300 रुपए असली लेकर बदले में 500 रुपए का नकली नोट देता था। जल्दी अमीर बनने की चाह में उसने यह काम शुरू किया था। नेपाल और पाकिस्तान जैसे पेपर पर छपे नोट पुलिस के अनुसार जब्त किए गए नोट नेपाल और पाकिस्तान में इस्तेमाल होने वाले कागज जैसे पेपर पर छपे हैं। इसी वजह से पुलिस अब मामले की जांच अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय एंगल से भी कर रही है। साइबर ठगी से भी जुड़ सकते हैं तार जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी विदेशी नंबरों पर बातचीत करता था। पुलिस को शक है कि उसका संबंध साइबर ठगी गिरोह से भी हो सकता है। पुलिस के मुताबिक आरोपी फर्जी बैंक खाते उपलब्ध कराने का काम भी करता था। फिलहाल उससे पूछताछ जारी है और उसके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है। अधिक जानकारी और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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भोपाल नगर निगम को मिला नया मुख्यालय, ‘अटल भवन’ का CM मोहन यादव ने किया लोकार्पण

Bhopal के तुलसी नगर सेकंड स्टॉप पर भोपाल नगर निगम का नया मुख्यालय बनकर तैयार हो गया है। 43 करोड़ रुपए की लागत से बने इस भवन का नाम ‘अटल भवन’ रखा गया है। गुरुवार को मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने इसका लोकार्पण किया। अब शहरवासियों को नगर निगम के अलग-अलग कामों के लिए कई जगह भटकना नहीं पड़ेगा। निगम के ज्यादातर विभाग एक ही बिल्डिंग में काम करेंगे। प्रदेश की पहली जियोथर्मल तकनीक वाली नगरीय बिल्डिंग नगर निगम का यह नया मुख्यालय प्रदेश की पहली ऐसी नगरीय निकाय बिल्डिंग है, जिसमें जियोथर्मल तकनीक का उपयोग किया गया है। परिसर में लगाए गए सोलर पैनलों से करीब 300 किलोवाट बिजली तैयार होगी। लोकार्पण के साथ ही नीमच जिले में भोपाल निगम द्वारा स्थापित 10.5 मेगावॉट सोलर प्रोजेक्ट का भी शुभारंभ किया गया। एक जगह मिलेंगी सभी सुविधाएं नई बिल्डिंग में जनसुविधा केंद्र बनाया गया है, जहां नागरिकों को सभी विभागों से जुड़ी जानकारी और सेवाएं एक ही स्थान पर मिलेंगी। यहां बिल्डिंग परमिशन, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, विवाह पंजीयन, जल कार्य, सीवेज, राजस्व, स्वच्छ भारत मिशन, स्वास्थ्य, आईटी और स्मार्ट सिटी समेत कई विभाग संचालित होंगे। अभी अलग-अलग जगह चल रहे थे ऑफिस अब तक नगर निगम की कई शाखाएं शहर के अलग-अलग इलाकों में संचालित हो रही थीं। आईएसबीटी, माता मंदिर, शाहपुरा और फतेहगढ़ समेत कई जगहों पर विभागों के ऑफिस थे। नए मुख्यालय के शुरू होने से कामकाज आसान होने की उम्मीद है। नई बिल्डिंग में सामने आईं कुछ खामियां करीब 5 एकड़ जमीन पर बनी इस बिल्डिंग में कुछ कमियां भी सामने आई हैं। सबसे बड़ी कमी मीटिंग हॉल को लेकर बताई जा रही है। करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद मीटिंग हॉल नहीं बनाया गया। अब इसके लिए पास की 0.25 एकड़ जमीन मांगी गई है, जिस पर करीब 10 करोड़ रुपए खर्च होंगे। ग्रीन कॉन्सेप्ट पर तैयार हुआ भवन ‘अटल भवन’ को ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट पर तैयार किया गया है। परिसर में सोलर पैनल लगाए गए हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि पैनलों की दिशा उत्तर-दक्षिण होने से बिजली उत्पादन प्रभावित हो सकता है। किस फ्लोर पर कौन-सा विभाग? अधिक जानकारी और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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सागर में गर्भवती की मौत पर हंगामा: परिजनों ने डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाया

मध्य प्रदेश के सागर के मकरोनिया इलाके स्थित सेवा हॉस्पिटल में सोमवार रात एक गर्भवती महिला की मौत के बाद जमकर हंगामा हो गया। परिजनों ने डॉक्टर पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया और विरोध प्रदर्शन किया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और समझाइश देकर स्थिति को नियंत्रित किया। क्या है पूरा मामला? जानकारी के अनुसार, रहली निवासी 25 वर्षीय विद्या राय करीब 1.5 माह की गर्भवती थीं। इसके बाद उनके पेट में दर्द शुरू हुआ, जिसके चलते उन्होंने रहली और सागर में इलाज कराया। इलाज के दौरान बिगड़ी हालत सोमवार को परिजन उन्हें सागर लेकर आए, जहां सोनोग्राफी के बाद सफाई (अबॉर्शन) की सलाह दी गई।इसके बाद उन्हें सेवा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान अचानक उनकी हालत बिगड़ गई।डॉक्टरों ने उन्हें दूसरे अस्पताल रेफर करने की तैयारी की, लेकिन इससे पहले ही उनकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप—इलाज में लापरवाही मृतका के परिजनों का कहना है कि: परिजनों ने डॉक्टर की लापरवाही को मौत की वजह बताया और सख्त कार्रवाई की मांग की है। डॉक्टर का पक्ष भी सामने आया अस्पताल की डॉक्टर निधि मिश्रा ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि: उन्होंने कहा कि मरीज को बचाने की पूरी कोशिश की गई, लेकिन सफल नहीं हो सके। पुलिस ने शुरू की जांच हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामला शांत कराया।पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। 👉 ऐसी ही ग्राउंड रिपोर्ट और अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें: www.deshharpal.com
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उज्जैन यूनिवर्सिटी में सॉल्वर कांड पर बवाल: NSUI का प्रदर्शन, कुलगुरु का पुतला जलाने की कोशिश

मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में बीकॉम 6वें सेमेस्टर की परीक्षा में डमी कैंडिडेट बैठाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। आरोपियों पर केस दर्ज होने के बावजूद यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से कार्रवाई नहीं होने पर छात्र संगठन NSUI ने मंगलवार को जोरदार प्रदर्शन किया। कुलगुरु का पुतला जलाने की कोशिश प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने कुलगुरु के खिलाफ नारेबाजी की और पुतला दहन करने की कोशिश की।हालांकि, मौके पर मौजूद पुलिस ने पुतला छीनकर जलने से पहले ही रोक दिया। क्या है पूरा मामला? घटना 4 मई की है, जब वाग्देवी भवन में बीकॉम परीक्षा चल रही थी। इसकी जानकारी छात्र नेता तरुण परिहार ने दी, जिसके बाद युवती को परीक्षा से रोक दिया गया। पुलिस ने दर्ज किया केस मामला सामने आने के बाद पुलिस ने: NSUI का आरोप—प्रशासन चुप NSUI का आरोप है कि: इसी के विरोध में छात्रों ने यूनिवर्सिटी परिसर में प्रदर्शन किया। छात्रों की मांग क्या है? प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने मांग की: छात्र नेता तरुण परिहार ने कहा कि दोषियों पर तुरंत कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। अब क्या आगे? यह मामला यूनिवर्सिटी की परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मुद्दा और बड़ा रूप ले सकता है। 👉 ऐसी ही अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें: www.deshharpal.com
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खंडवा में तबादला घोटाला: सस्पेंड अधीक्षक हेमंत सिन्हा पर शिकंजा, 2 दिन में रिपोर्ट के आदेश

मध्य प्रदेश के खंडवा में जनजातीय कार्य विभाग में कथित तबादला घोटाले और अवैध वसूली के मामले में सस्पेंड अधीक्षक हेमंत सिन्हा पर अब शिकंजा कसता जा रहा है। मामले के सामने आने के बाद इंदौर कमिश्नर ने सख्त जांच के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने बनाई 2 सदस्यीय जांच टीम कमिश्नर के आदेश पर कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने दो सदस्यीय जांच दल गठित किया है।इस टीम को 2 दिन के भीतर तथ्यात्मक रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। जांच टीम में शामिल हैं: क्या हैं आरोप? मामला जिले के 125 छात्रावासों से जुड़े अधीक्षकों से अवैध वसूली का है।आरोप है कि हर महीने 1500 से 2000 रुपए तक वसूले जाते थे। इसके अलावा: बैंक डिटेल और UPI रिकॉर्ड मांगे गए जांच को निष्पक्ष रखने के लिए प्रशासन ने निर्देश दिए हैं कि: 61 ट्रांसफर आदेश रद्द, पहले ही हुआ सस्पेंशन मामले के उजागर होने के बाद: जयस ने भी उठाए सवाल जय आदिवासी युवा संगठन (जयस) ने भी इस मामले में शिकायत की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि: पहले भी विवादों में रह चुके अधिकारी रिटायर सहायक आयुक्त संतोष शुक्ला पर पहले भी कार्रवाई हो चुकी है।लोकायुक्त छापे में उनके पास करीब 6.5 करोड़ की संपत्ति सामने आई थी। इसके अलावा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भी एक मामले में उन्हें फटकार लगाई थी। अब आगे क्या? जांच रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में बड़ी कार्रवाई हो सकती है।प्रशासन फिलहाल पूरे मामले की गहराई से जांच कर रहा है। 👉 ऐसी ही एक्सक्लूसिव और ग्राउंड रिपोर्ट के लिए पढ़ते रहें: www.deshharpal.com
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जबलपुर में बड़ा सड़क हादसा: बस-ट्रैक्टर टक्कर में 50 से ज्यादा घायल, 6 की हालत गंभीर

मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में मंगलवार सुबह एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। कटनी से जबलपुर आ रही तेज रफ्तार यात्री बस गोसलपुर के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस हादसे में 50 से अधिक यात्री घायल हो गए, जिनमें 6 की हालत गंभीर बताई जा रही है। कैसे हुआ हादसा? घटना सुबह करीब 10:30 बजे एनएच 30 पर हुई।बताया जा रहा है कि बस ने आगे चल रहे गेहूं से भरे ट्रैक्टर को ओवरटेक करने की कोशिश की, लेकिन पीछे से टक्कर मार दी। स्थानीय लोगों ने बचाई जानें हादसे के तुरंत बाद आसपास के लोगों ने राहत कार्य शुरू किया। घायलों का इलाज जारी घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है: ड्राइवर की लापरवाही आई सामने पुलिस के अनुसार हादसे की मुख्य वजह बस चालक की लापरवाही है।ओवरटेक के दौरान बस ट्रैक्टर से टकरा गई। पुलिस ने: परिजनों को दी गई सूचना घटना की जानकारी घायलों के परिजनों को भी दे दी गई है। प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है। 👉 ऐसी ही ताजा और विश्वसनीय खबरों के लिए पढ़ते रहें: www.deshharpal.com
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भोपाल में अजीब निर्माण: शौचालय के सामने ही खड़ी कर दी दीवार, उपयोग से पहले ही बेकार

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक बार फिर गलत इंफ्रास्ट्रक्चर का मामला सामने आया है। यहां एक निर्माणाधीन सुलभ शौचालय के सामने ही दीवार खड़ी कर दी गई है, जिससे इसका उपयोग लगभग असंभव हो गया है। इस अजीब निर्माण का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वार्ड-40 में सामने आया मामला यह पूरा मामला जोन-11 के वार्ड 40, बाग उमराव दूल्हा और ऐशबाग इलाके का बताया जा रहा है। यहां पहले से बने 90 डिग्री एंगल वाले रेलवे ओवरब्रिज को लेकर भी विवाद रहा है। अब उसी के पास बने शौचालय के सामने दीवार खड़ी होने से नई समस्या खड़ी हो गई है। लोग बोले—‘विकास का अनोखा नमूना’ स्थानीय निवासी अलमास अली का कहना है कि यह शौचालय रेलवे की बाउंड्रीवाल के अंदर फंस गया है। उन्होंने बताया कि इस बारे में पहले ही अधिकारियों को लिखित शिकायत दी गई थी, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। 5 लाख रुपए खर्च, फिर भी बेकार निर्माण जानकारी के अनुसार, इस सार्वजनिक शौचालय के निर्माण पर करीब 5 लाख रुपए खर्च किए जा रहे हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि: पहले ही दी थी चेतावनी रहवासियों ने 11 फरवरी 2026 को ही आवेदन देकर कहा था कि: लेकिन इसके बावजूद गलत लोकेशन पर निर्माण शुरू कर दिया गया। अब क्या होगा? फिलहाल शौचालय का काम पूरा नहीं हुआ है, लेकिन जिस तरह से दीवार खड़ी की गई है, उससे साफ है कि उपयोग संभव नहीं होगा। यह मामला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। 👉 शहर और प्रदेश की ऐसी ही ग्राउंड रिपोर्ट के लिए पढ़ते रहें: www.deshharpal.com
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बरगी क्रूज हादसा: 13 मौतों के बाद भी लापरवाही, शव ले जाने से ऑपरेटर ने किया इनकार

जबलपुर के बरगी डैम में हुए क्रूज हादसे में अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है। प्राथमिक जांच में खराब मौसम के अलर्ट को नजरअंदाज करना हादसे की बड़ी वजह माना जा रहा है। इस बीच मृतकों के शवों के साथ हुई लापरवाही ने सिस्टम पर और सवाल खड़े कर दिए हैं। फ्लाइट ऑपरेटर ने शव ले जाने से किया इनकार हादसे में जान गंवाने वाले आर्डनेंस फैक्ट्री कर्मचारी कामराज आर और उनके 5 साल के बेटे श्रीतमिल के शव को फ्लाइट से ले जाने से ऑपरेटर ने इनकार कर दिया। तर्क दिया गया कि शवों से बदबू आ रही है और वे डीकंपोज हो रहे हैं। प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद हुआ रवाना मामले की जानकारी मिलते ही कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने तुरंत अधिकारियों को एयरपोर्ट भेजा। इसके बाद करीब एक घंटे की देरी से फ्लाइट त्रिची के लिए रवाना हो सकी। मौसम के कारण पहले भी टली उड़ान रविवार को खराब मौसम के कारण फ्लाइट उड़ान नहीं भर सकी थी। एम्बुलेंस से शव एयरपोर्ट ले जाए गए थे, लेकिन विमान लैंड न कर पाने के कारण उन्हें वापस अस्पताल लाना पड़ा। हादसे में 13 लोगों की मौत 30 अप्रैल को हुए इस हादसे में: एक ही परिवार में तीन मौतें कामराज मूल रूप से तमिलनाडु के त्रिची के रहने वाले थे। इस हादसे में उनकी पत्नी और छोटे बेटे की भी मौत हो गई। परिवार में अब केवल बड़ा बेटा ही बचा है। यह घटना न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर करती है, बल्कि हादसे के बाद राहत और संवेदनशीलता पर भी गंभीर सवाल उठाती है। 👉 ऐसी ही खबरों के लिए पढ़ते रहें: www.deshharpal.com
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उज्जैन यूनिवर्सिटी में सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश: BCom परीक्षा में फर्जी छात्रा पकड़ी गई

उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में बीकॉम 6वें सेमेस्टर की परीक्षा के दौरान फर्जी तरीके से परीक्षा दिलाने का मामला सामने आया है। एक छात्रा की जगह दूसरी छात्रा परीक्षा देती पकड़ी गई, जिससे विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ गए हैं। दूसरी छात्रा दे रही थी परीक्षा स्कूल ऑफ स्टडीज इन कॉमर्स में चल रही परीक्षा के दौरान सपना भदौरिया की जगह इंदौर से आई एक युवती परीक्षा देते पकड़ी गई। जांच के दौरान असली छात्रा का मोबाइल बंद मिला। सूचना के बाद हुई कार्रवाई एनएसयूआई नेता तरुण परिहार के अनुसार, उन्हें पहले ही सूचना मिली थी कि फर्जी तरीके से परीक्षा दिलाने की कोशिश होगी। इसके बाद अधिकारियों को सतर्क किया गया। जांच में खुला पूरा मामला कक्ष क्रमांक 10 में बैठी छात्रा के दस्तावेज और फोटो मिलान में गड़बड़ी मिली। पूछताछ में युवती ने अपना नाम प्रिशा साहू (इंदौर) बताया, जो बीटेक की छात्रा है। “परीक्षा दे दो, बाकी बाद में समझ लेंगे” प्रिशा ने बताया कि उसे ऋषभ नाम के युवक ने बुलाया था, जिसकी बहन सपना भदौरिया की जगह उसे परीक्षा देने के लिए कहा गया।उसने खुलासा किया कि उस पर दबाव बनाया गया और सिर्फ कॉपी में कुछ भी लिखने को कहा गया था। संगठित गिरोह की आशंका मामले में यह भी सामने आया है कि आरोपी पहले भी इस तरह की गतिविधियों में शामिल रहा है। इससे सॉल्वर गैंग के सक्रिय होने की आशंका जताई जा रही है। कुलगुरु ने दिए जांच के आदेश कुलगुरु अर्पण भारद्वाज मौके पर पहुंचे और मामले को गंभीर बताते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए। फिलहाल छात्रा से पूछताछ की जा रही है और मामला पुलिस को सौंपने की तैयारी है। यह घटना शिक्षा व्यवस्था में सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। 👉 ऐसी ही खबरों के लिए पढ़ते रहें: www.deshharpal.com
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रानी कमलापति स्टेशन पर दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट, 29 मिनट खड़ी रही ट्रेन

भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर मंगलवार सुबह दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट हो गई। घटना सुबह करीब 11:30 बजे की बताई जा रही है। सामान चढ़ाने और यात्रियों के आने-जाने को लेकर शुरू हुआ विवाद बढ़ गया, जिसके चलते ट्रेन करीब 29 मिनट तक स्टेशन पर खड़ी रही। आरोप है कि पैंट्री कर्मचारियों ने एकजुट होकर यात्रियों पर हमला किया। विवाद के दौरान कर्मचारियों द्वारा चेन पुलिंग किए जाने की बात भी सामने आई है। बताया गया कि ट्रेन रानी कमलापति स्टेशन पर पहले ही निर्धारित समय से 3 घंटे 33 मिनट की देरी से पहुंची थी। जीआरपी ने मौके पर पहुंचकर शांत कराया विवाद घटना की सूचना मिलने पर जीआरपी मौके पर पहुंची और यात्रियों व पैंट्री कर्मचारियों के बीच चल रहे विवाद को शांत कराया। जीआरपी टीआई अमित शर्मा के मुताबिक, पीड़ित यात्री बेंगलुरु जा रहा था। उन्होंने बताया कि रानी कमलापति स्टेशन पर इस मामले में शिकायत नहीं मिली। वहीं, नागपुर में जीरो पर प्रकरण दर्ज किए जाने की सूचना है। मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित जीआरपी के स्तर पर की जाएगी।

मध्यप्रदेश में पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए खर्च होंगे 7.5 करोड़ रुपए, 330 विकासखंडों में होगा खेल महोत्सव

मध्यप्रदेश में पारंपरिक और आंचलिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार करीब साढ़े सात करोड़ रुपए खर्च करने की तैयारी कर रही है। खेल विभाग ने इसके लिए छोटे शहरों में प्रशिक्षण केंद्र खोलने की योजना बनाई है। इसके साथ ही प्रदेश के सभी 330 विकासखंडों में हर साल पारंपरिक खेल महोत्सव आयोजित किए जाएंगे। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक खेलों को संरक्षण देना और ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं की पहचान करना है। सरकार की इस पहल से स्थानीय खेलों को प्रतियोगिताओं और व्यवस्थित प्रशिक्षण के जरिए आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। पिट्ठू से मलखंभ तक, कई खेल होंगे शामिल प्रस्तावित योजना में पिट्ठू, गदा और साइकिल रेस जैसे पारंपरिक व आंचलिक खेलों को शामिल किया गया है। इसके अलावा कबड्डी, खो-खो, पैदल चाल, तीरंदाजी और मलखंभ जैसे खेलों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। खेल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पारंपरिक खेल महोत्सव में विकासखंड स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इन स्पर्धाओं के लिए पूरे प्रदेश में एक समान नियम तैयार किए जाएंगे, ताकि खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं में भाग लेने के समान अवसर मिल सकें। छोटे शहरों में खुलेंगे प्रशिक्षण केंद्र खेल विभाग का मानना है कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में कई पारंपरिक खेल लंबे समय से स्थानीय संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। हालांकि, इन खेलों से जुड़े खिलाड़ियों को अक्सर औपचारिक प्रशिक्षण और बड़े स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का अवसर नहीं मिल पाता। प्रस्तावित प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से ऐसे खिलाड़ियों को व्यवस्थित प्रशिक्षण देने की योजना है। इससे स्थानीय स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान करने और उन्हें आगे बढ़ने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। आधुनिक खेलों से जोड़ने की भी तैयारी खेल विभाग इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करेगा। इसके बाद उन्हें आगे के प्रशिक्षण के लिए तैयार करने की योजना है। विभाग पारंपरिक खेलों से जुड़ी प्रतिभाओं को आधुनिक खेल व्यवस्था से जोड़ने के विकल्पों पर भी काम कर रहा है। इस पहल के जरिए पारंपरिक खेलों को नई पहचान देने के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं की खेलों में भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। पारंपरिक खेलों के केंद्र स्थापित किए जाएंगे: विश्वास सारंग खेल मंत्री विश्वास सारंग के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न अंचलों में कई देशी खेल प्रचलित हैं, लेकिन उन्हें बड़े पैमाने पर खेलने के अवसर सीमित हैं। अब इनके केंद्र स्थापित कर इन खेलों को बढ़ावा देने की योजना है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित योजना में टीम आधारित और व्यक्तिगत, दोनों तरह के खेलों को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

एशियन पैरा गेम्स में भारत का धमाकेदार प्रदर्शन, दूसरे दिन जीते 24 मेडल; कुल पदक 35 हुए

जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन पैरा गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी है। प्रतियोगिता के दूसरे दिन भारतीय खिलाड़ियों ने 24 मेडल जीते, जिनमें 5 गोल्ड, 6 सिल्वर और 13 ब्रॉन्ज शामिल हैं। इसके साथ ही भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक 9 गोल्ड, 11 सिल्वर और 15 ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए हैं। दूसरे दिन एथलेटिक्स में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला। पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारत ने गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज तीनों मेडल जीतकर शानदार उपलब्धि हासिल की। वहीं, निषाद कुमार ने हाई जंप में गेम्स रिकॉर्ड के साथ गोल्ड जीता। सिमरन शर्मा और दीप्ति जीवनजी ने भी क्रमशः 200 मीटर और 400 मीटर रेस में गोल्ड मेडल अपने नाम किए। शूटिंग में मनीष नरवाल ने सिल्वर मेडल जीता। इसके साथ ही उन्होंने 2028 में होने वाले लॉस एंजिलिस पैरालिंपिक्स के लिए कोटा भी हासिल किया। डिस्कस थ्रो में भारत का क्लीन स्वीप पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों ने तीनों पदक जीतकर अपना दबदबा कायम किया। देवेंद्र कुमार ने 781 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल हासिल किया। राकेश ने 771 पॉइंट्स लेकर सिल्वर, जबकि प्रदीप कुमार ने 669 पॉइंट्स के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता। इस मुकाबले की खास बात यह रही कि प्रदीप कुमार ने 51.15 मीटर का सबसे लंबा थ्रो किया, इसके बावजूद उन्हें ब्रॉन्ज मेडल मिला। इसकी वजह यह है कि इस स्पर्धा में अलग-अलग तरह की शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी एक साथ मुकाबला करते हैं। इसमें F43, F44, F62 और F64 कैटेगरी के खिलाड़ी शामिल थे। खिलाड़ियों की शारीरिक स्थिति और थ्रो करने की क्षमता में अंतर होने के कारण उनके प्रदर्शन का आकलन रजा पॉइंट्स सिस्टम के आधार पर किया जाता है। इस प्रणाली में खिलाड़ी की कैटेगरी के अनुसार प्रदर्शन को अंक दिए जाते हैं, जिससे अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के परिणामों की निष्पक्ष तुलना की जा सके। निषाद कुमार ने हाई जंप में जीता दूसरा गोल्ड भारतीय पैरा-एथलीट निषाद कुमार ने पुरुषों की हाई जंप T47 स्पर्धा में 2.02 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड मेडल जीता। यह इन गेम्स में उनका दूसरा गोल्ड है। इससे पहले वह लॉन्ग जंप में भी पहला स्थान हासिल कर चुके हैं। हाई जंप में खिलाड़ियों को एक निश्चित ऊंचाई पर रखी बार को बिना गिराए पार करना होता है। हर सफल प्रयास के बाद बार की ऊंचाई बढ़ाई जाती है और सबसे अधिक ऊंचाई पार करने वाला खिलाड़ी विजेता बनता है। T47 पैरा-एथलेटिक्स की वह श्रेणी है, जिसमें हाथ से जुड़ी शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। निषाद की इस उपलब्धि से भारत के पदक अभियान को मजबूती मिली है। प्रणव सूरमा को गोल्ड, राम रतन सिंह ने जीता सिल्वर पुरुषों की डिस्कस थ्रो F51/F52/F53 स्पर्धा में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। प्रणव सूरमा ने 932 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि राम रतन सिंह 809 पॉइंट्स लेकर दूसरे स्थान पर रहे और उन्हें सिल्वर मेडल मिला। प्रणव ने अपने छह प्रयासों में 11.66 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया। इस स्पर्धा में भी अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की तुलना रजा पॉइंट्स के आधार पर की जाती है। इसलिए केवल थ्रो की दूरी के आधार पर विजेता तय नहीं होता। प्रणव और राम रतन के अंकों ने उन्हें क्रमशः पहला और दूसरा स्थान दिलाया। भारत की पदक तालिका पर नजर दूसरे दिन के शानदार प्रदर्शन के बाद भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। एथलेटिक्स में लगातार मिल रही सफलताओं और शूटिंग में मनीष नरवाल की उपलब्धि ने भारतीय अभियान को नई गति दी है। प्रतियोगिता के अगले दिनों में भी भारतीय खिलाड़ियों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी।
SBI

SBI ग्राहकों का डेटा Dark Web पर मिलने से बढ़ी चिंता, जांच में जुटा बैंक

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के ग्राहकों की निजी जानकारी डार्क वेब पर मिलने का मामला सामने आया है। बैंक की शुरुआती जांच में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड में व्यक्तिगत जानकारी उजागर होने की पहचान की गई है। इनमें नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और पते जैसी जानकारियां शामिल हैं। इस खबर के सामने आने के बाद ग्राहकों की डेटा सिक्योरिटी को लेकर चिंता बढ़ गई है। SBI ने कहा है कि इस घटना से बैंक के सामान्य कामकाज, वित्तीय प्रदर्शन और सेवाओं पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। वहीं, डेटा कहां से आया, कितने ग्राहकों की जानकारी प्रभावित हुई और इसके पीछे क्या वजह रही, इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए जांच की जा रही है। SBI Data Leak: कैसे सामने आया डेटा लीक का मामला? बैंक के अनुसार, 16 अक्टूबर 2026 को उसे अपने Threat Intelligence Service Provider, Defence Cyber Agency और भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) से डार्क वेब पर ग्राहकों का डेटा उपलब्ध होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद SBI ने शुरुआती स्तर पर करीब 3.75 लाख रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। इस प्रक्रिया में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड ऐसे मिले, जिनमें व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी मौजूद थी। हालांकि, डार्क वेब पर मिले सभी रिकॉर्ड के बारे में अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। बैंक जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि डेटा कितना वास्तविक है और किस माध्यम से बाहर पहुंचा। ग्राहकों की कौन-सी निजी जानकारी हुई उजागर? शुरुआती जांच में सामने आए रिकॉर्ड में ग्राहकों से जुड़ी कई तरह की जानकारियां शामिल बताई गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं: इनमें से कुछ जानकारियों का इस्तेमाल साइबर ठग लोगों को निशाना बनाने के लिए कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी ग्राहक का नाम, मोबाइल नंबर और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी पता होने पर ठग खुद को बैंक कर्मचारी बताकर भरोसा जीतने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, इस मामले में ग्राहकों के बैंक खातों से पैसे निकलने या किसी खास तरह की धोखाधड़ी होने की पुष्टि नहीं हुई है। SBI ने जांच के लिए उठाए जरूरी कदम डेटा लीक की जानकारी मिलने के बाद बैंक ने अपने साइबर सिक्योरिटी प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए। साथ ही, मामले की विस्तृत जांच के लिए CERT-In से सूचीबद्ध एक स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी को नियुक्त किया गया है। जांच में यह पता लगाने पर ध्यान दिया जा रहा है कि डेटा का स्रोत क्या था, जानकारी कैसे उजागर हुई और इससे ग्राहकों की सुरक्षा पर कितना असर पड़ सकता है। बैंक के अनुसार, जांच के नतीजों के आधार पर जरूरी सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल डेटा लीक के पीछे किसी व्यक्ति या समूह की भूमिका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। क्या SBI ग्राहकों के बैंक खाते खतरे में हैं? डेटा लीक की खबर सुनकर ग्राहकों के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि क्या उनके बैंक खाते सुरक्षित हैं? यहां एक बात समझना जरूरी है। ग्राहकों का नाम, मोबाइल नंबर या पता सामने आने का मतलब यह नहीं है कि उनके बैंक खाते भी हैक हो गए हैं। निजी जानकारी का उजागर होना और खाते से पैसे निकलना दो अलग-अलग बातें हैं। SBI ने कहा है कि इस घटना से उसके मुख्य कामकाज और सेवाओं पर कोई महत्वपूर्ण असर नहीं पड़ा है। हालांकि, निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल करके फर्जी कॉल, मैसेज और ऑनलाइन ठगी की कोशिश की जा सकती है। इसलिए ग्राहकों को सावधानी बरतने की जरूरत है। Data Leak के बाद ग्राहकों को क्या करना चाहिए? डिजिटल बैंकिंग के दौर में थोड़ी सी लापरवाही भी परेशानी बढ़ा सकती है। ऐसे में SBI ग्राहकों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। 1. OTP और PIN किसी को न बताएं: बैंक अधिकारी बनकर फोन करने वाला व्यक्ति भी आपसे OTP, ATM PIN या CVV मांगे, तो जानकारी साझा न करें। 2. संदिग्ध लिंक से बचें: KYC अपडेट, बैंक खाता बंद होने या रिफंड मिलने के नाम पर आए अनजान लिंक पर क्लिक न करें। 3. बैंक खाते पर नजर रखें: अपने खाते के लेनदेन की नियमित जांच करें। कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन दिखे तो तुरंत बैंक से संपर्क करें। 4. फर्जी कॉल से सावधान रहें: अगर कोई व्यक्ति बैंकिंग जानकारी बताकर आपका भरोसा जीतने की कोशिश करे, तो उसकी पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। 5. साइबर ठगी होने पर शिकायत करें: वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 हेल्पलाइन या भारत सरकार के आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। ध्यान रखें कि किसी ठग के पास आपकी कुछ निजी जानकारी होने का मतलब यह नहीं है कि वह बैंक का अधिकृत प्रतिनिधि है। SBI Data Leak मामले में अब आगे क्या होगा? फिलहाल SBI डेटा लीक मामले की जांच जारी है। बैंक यह पता लगाने में जुटा है कि डार्क वेब पर उपलब्ध जानकारी कहां से आई और घटना का वास्तविक दायरा कितना बड़ा है। जांच पूरी होने के बाद ही डेटा लीक की वजह और ग्राहकों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर ज्यादा स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। तब तक ग्राहकों के लिए अपनी बैंकिंग जानकारी सुरक्षित रखना और संदिग्ध गतिविधियों से सतर्क रहना सबसे जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Delhi HighCourt

Delhi HighCourt: सौरव दास-आशुतोष रांका ने वापस ली याचिका, Bond की शर्तों पर कोर्ट के सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi HighCourt) में बुधवार, 21 अक्टूबर को CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर सुनवाई हुई। दोनों नेताओं ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ाई गई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट की टिप्पणियों के बाद दोनों ने अपनी याचिका वापस ले ली। जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद की बेंच ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि जब इस मामले में दूसरी कानूनी प्रक्रिया अपनाने का विकल्प मौजूद है, तो सीधे हाईकोर्ट का रुख क्यों किया गया। कोर्ट ने दोनों नेताओं की ओर से शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन के आरोपों पर भी टिप्पणी की। Jantar Mantar Protest Case: क्या है पूरा मामला? सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिया गया था। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किया गया था। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार कर उस स्थान पर प्रवेश किया था, जिसे प्रदर्शन स्थल के रूप में पहले ही अधिसूचित सूची से हटा दिया गया था। इसके बाद दोनों नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेजा गया। शुरुआत में उनकी हिरासत पांच दिन के लिए तय की गई थी। 19 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ाने का आदेश दिया था। इसी फैसले को चुनौती देते हुए दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। Court Remarks: बॉन्ड की शर्तों पर क्या कहा? सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड और उसके कथित उल्लंघन को लेकर सवाल उठाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि बैरिकेडिंग तोड़ने जैसी घटना के बाद दूसरे लोगों के भी नियमों का उल्लंघन करने की आशंका बढ़ सकती है। दोनों नेताओं की ओर से पेश वकील ने हिरासत बढ़ाने के आदेश और जमानतदारों से जुड़ी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका पक्ष था कि दोनों ने आवश्यक जमानतदार पेश किए थे, इसके बावजूद उन्हें हिरासत में रखा गया। हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले में उपलब्ध वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाने की बात कही। इसके बाद दोनों नेताओं की ओर से याचिका वापस लेने का फैसला किया गया। याचिका वापस लेने का क्या मतलब है? सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका वापस लिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि हाईकोर्ट ने हिरासत बढ़ाने के आदेश को सही ठहरा दिया है। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय दिए बिना याचिका वापस लेने की अनुमति दी। कोर्ट ने दोनों पक्षों को पहले स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष चल रही प्रक्रिया के नतीजे का इंतजार करने और जरूरत पड़ने पर उचित अपीलीय मंच का रुख करने की सलाह दी। इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और मजिस्ट्रेट के समक्ष होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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