मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में भाजपा संगठन ने मोर्चा स्तर पर नई नियुक्तियों का दौर शुरू कर दिया है। एससी और एसटी मोर्चा के बाद अब ओबीसी मोर्चा की कमान अनूप पटेल को सौंपी गई है। अनूप पटेल को मंत्री विजय शाह का करीबी माना जाता है और वे फिलहाल पुरानी कार्यकारिणी के अनुसार युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं।
कुनबी पटेल समाज को साधने की रणनीति
भाजपा का यह फैसला राजनीतिक नजरिए से भी अहम माना जा रहा है। पार्टी ने ओबीसी मोर्चा की जिम्मेदारी देकर कुनबी पटेल समाज को साधने की कोशिश की है। दरअसल, कांग्रेस भी इस समाज पर फोकस कर रही है और जिला कांग्रेस कमेटी ने अपने दो ब्लॉक अध्यक्ष इसी समाज से बनाए हैं।
इसी के जवाब में भाजपा ने भी संतुलन साधते हुए अनूप पटेल को यह अहम जिम्मेदारी दी है।
अन्य दावेदारों पर असर
अनूप पटेल के ओबीसी मोर्चा जिलाध्यक्ष बनने के बाद अब पटेल समाज से जुड़े अन्य युवा नेताओं की दावेदारी कमजोर पड़ सकती है। खासकर मोर्चा संगठनों में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे कार्यकर्ताओं के लिए यह फैसला झटका माना जा रहा है।
युवा मोर्चा में भी मुकाबला दिलचस्प
इधर, युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष पद को लेकर भी खींचतान जारी है। सांसद समर्थक सागर आरतानी के सामने पटेल समाज के ही शुभम पटेल मजबूत दावेदार के रूप में उभरे हैं।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े शुभम पटेल का युवाओं के बीच अच्छा नेटवर्क और जमीनी पकड़ मानी जाती है। छात्र राजनीति के जरिए उन्होंने मजबूत पहचान बनाई है।
संगठन में बदलता ट्रेंड
भाजपा संगठन में इन दिनों पेशेवर और प्रभावशाली चेहरों को प्राथमिकता दी जा रही है। ऐसे में कई जगहों पर पुराने और जमीनी कार्यकर्ताओं के उपेक्षित होने की चर्चा भी तेज हो गई है।
खंडवा में ये नई नियुक्तियां आने वाले समय में संगठन और राजनीतिक समीकरणों को किस तरह प्रभावित करेंगी, इस पर सबकी नजर बनी हुई है।
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