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Indian Railways

Indian Railways New Rules for Train Ticket Booking: वेटिंग टिकट वालों को अब आरक्षित कोच में चढ़ने की अनुमति नहीं

Indian Railways ने 1 मई 2025 से एक अहम बदलाव लागू किया है, जो वेटिंग टिकट (प्रतीक्षा सूची) वाले यात्रियों के लिए बड़ा बदलाव है। अब, यदि आपकी ट्रेन टिकट वेटिंग लिस्ट में है, तो आपको आरक्षित कोच जैसे स्लीपर या एसी कोच में यात्रा करने की अनुमति नहीं होगी। इस लेख में हम आपको भारतीय रेलवे के नए नियमों के बारे में पूरी जानकारी देंगे। भारतीय रेलवे का नया नियम: वेटिंग टिकट वाले यात्रियों के लिए क्या है बदलाव? Indian Railways ने हाल ही में वेटिंग टिकट वाले यात्रियों के लिए एक नया नियम लागू किया है। अब, यदि आपकी टिकट वेटिंग लिस्ट में है और चार्ट बनने के बाद भी कन्फर्म नहीं होती, तो आपको केवल जनरल (अनारक्षित) कोच में यात्रा करने की अनुमति होगी। इसका मतलब है कि स्लीपर, एसी या अन्य आरक्षित कोच में यात्रा करना अब संभव नहीं होगा। अगर ऐसा किया जाता है, तो यह रेलवे के नियमों का उल्लंघन माना जाएगा और यात्री को जुर्माना या ट्रेन से उतारने का सामना करना पड़ सकता है। एक ही PNR पर बुकिंग होने पर क्या होता है? यदि आप और आपके साथ यात्रा करने वाले अन्य लोग एक ही PNR पर टिकट बुक करते हैं और उनमें से कुछ कन्फर्म होते हैं जबकि कुछ वेटिंग लिस्ट में होते हैं, तो रेलवे थोड़ी छूट देती है। उदाहरण के तौर पर, यदि चार यात्री एक PNR पर बुकिंग करते हैं और उनमें से केवल दो की सीट कन्फर्म होती है, तो सभी यात्री ट्रेन में चढ़ सकते हैं। हालांकि, वेटिंग टिकट वाले यात्रियों को कन्फर्म सीट वाले यात्रियों के साथ बैठने के लिए एडजस्ट करना होगा। यह नियम अस्थायी तौर पर लागू है, और यदि रेलवे अधिकारी चाहे तो वेटिंग टिकट वाले यात्रियों को ट्रेन से उतार भी सकते हैं। इसलिए यह नियम पूरी तरह से यात्रियों के लिए सुरक्षित नहीं है, और उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके पास कन्फर्म टिकट हो। यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण सलाह हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Women hear better than men

Women Hear Better Than Men: महिलाएं मर्दों से ज्यादा जल्दी और साफ़ सुन लेती हैं?

Women Hear Better Than Men: अब यह सिर्फ एक धारणा नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक तथ्य है। हाल ही में ब्रिटेन और फ्रांस के वैज्ञानिकों ने 13 देशों में की गई Hearing research study के आधार पर यह दावा किया है कि महिलाएं आम तौर पर पुरुषों की तुलना में बेहतर सुनने की क्षमता रखती हैं। 🔬 क्या कहती है स्टडी?यह स्टडी ब्रिटिश और फ्रेंच रिसर्चर्स की टीम द्वारा की गई, जिसमें अलग-अलग देशों के लोगों की ऑडिटरी क्षमता (hearing ability) का विश्लेषण किया गया। नतीजों में साफ़ देखा गया कि महिलाओं की सुनने की संवेदनशीलता (auditory sensitivity) अधिक थी, खासकर हाई-फ्रीक्वेंसी साउंड्स में। 🧠 इसके पीछे साइंटिफिक कारण क्या हैं?विशेषज्ञों का मानना है कि यह अंतर हॉर्मोनल स्ट्रक्चर और ब्रेन प्रोसेसिंग के कारण होता है। महिलाओं का दिमाग साउंड प्रोसेसिंग में ज्यादा एक्टिव रहता है। एस्ट्रोजन हार्मोन भी इसमें मददगार होता है, जिससे सुनने की क्षमता तेज़ बनी रहती है। 👩‍⚕️ इसका असर रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कैसे पड़ता है?इस अंतर के कारण महिलाएं न सिर्फ बच्चों की रोने की आवाज़ जल्दी पकड़ती हैं, बल्कि आपसी बातचीत में भी ज्यादा अलर्ट रहती हैं। यही वजह है कि कॉल सेंटर्स और नर्सिंग जैसे प्रोफेशन में महिलाएं ज्यादा प्रभावी साबित होती हैं। 📢 क्यों है ये रिसर्च ज़रूरी?यह स्टडी सिर्फ सुनने की क्षमता पर नहीं, बल्कि हेल्थकेयर, एजुकेशन और कम्युनिकेशन से जुड़े फैसलों पर भी असर डाल सकती है। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि पुरुषों और महिलाओं के लिए हेल्थ डिवाइसेज़ और कम्युनिकेशन टूल्स अलग-अलग तरीके से डिज़ाइन किए जाने चाहिए। 📝 निष्कर्षअगर अगली बार कोई महिला बिना कहे आपकी बात पकड़ ले, तो हैरान मत होइए — यह साइंस का कमाल है!
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Heatwave Mental Impact

Heatwave Mental Impact: गर्मी सिर्फ शरीर नहीं, दिमाग को भी कर रही है बीमार

समाचार रिपोर्ट | देश हरपलगर्मी का असर अब सिर्फ डिहाइड्रेशन, सनबर्न या लू तक सीमित नहीं रहा। Heatwave Mental Impact अब एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य संकट की ओर इशारा कर रहा है। हाल के अध्ययनों और विशेषज्ञों की राय के अनुसार, जैसे सर्दियों में “SAD” यानी Seasonal Affective Disorder होता है, उसी तरह गर्मियों में भी डिप्रेशन और मूड डिसऑर्डर देखने को मिल रहे हैं। इसे Summer SAD या Reverse SAD भी कहा जाता है। गर्मी में बढ़ती धूप, ऊंचा तापमान और बिगड़ी नींद की वजह से ब्रेन के केमिकल्स जैसे सेरोटोनिन और मेलाटोनिन प्रभावित होते हैं। ये दो हार्मोन हमारे मूड और नींद को कंट्रोल करते हैं। जब इनमें गड़बड़ी आती है, तो मन उदास रहने लगता है, गुस्सा बढ़ जाता है और चिड़चिड़ापन हावी हो जाता है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, जब तापमान बहुत ज्यादा हो जाता है तो मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े इमरजेंसी केस 8% तक बढ़ जाते हैं। यानी सिर्फ शारीरिक नहीं, मानसिक स्तर पर भी हीटवेव का सीधा प्रभाव देखने को मिल रहा है। क्या होता है Summer SAD? Summer SAD एक प्रकार का मौसम-जनित मानसिक विकार है जो खासतौर पर गर्मियों में होता है। इसके लक्षण इस प्रकार हैं: यह स्थिति तब और भी गंभीर हो सकती है जब व्यक्ति पहले से मानसिक तनाव या डिप्रेशन से जूझ रहा हो। गर्मियों में मेंटल हेल्थ क्यों बिगड़ती है? गर्मी में हमारे शरीर और दिमाग को मौसम के अनुरूप ढलने में समय लगता है। कुछ प्रमुख कारण जो मानसिक स्थिति को प्रभावित करते हैं: क्या करें? कैसे बचें? निष्कर्ष:गर्मी का असर केवल त्वचा और शरीर तक सीमित नहीं है। हमारा दिमाग भी इस मौसम की मार झेलता है। अगर हर साल गर्मी में आपका मूड डाउन रहता है, गुस्सा आता है और सब कुछ उबाऊ लगता है, तो इसे हल्के में न लें। यह Summer SAD का संकेत हो सकता है। समय रहते पहचानें, सजग रहें और सही कदम उठाएं। देश हरपल पर ऐसे ही जरूरी और उपयोगी स्वास्थ्य समाचारों के लिए जुड़े रहें।
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Ramdev

शरबत जिहाद” टिप्पणी पर बवाल: Ramdev को Delhi High Court की फटकार, Rooh Afza पर दिए बयान से साम्प्रदायिक तनाव बढ़ने की आशंका

योग गुरु बाबा Ramdev एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने रूह अफ़ज़ा को लेकर उनकी विवादित टिप्पणी पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यह बयान “अंतरात्मा को झकझोर देता है” और समाज में सांप्रदायिक तनाव पैदा कर सकता है। Ramdev का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने दावा किया कि रूह अफ़ज़ा की बिक्री से मस्जिदें बनाई जा रही हैं और इसे उन्होंने “शरबत जिहाद” बताया। कोर्ट ने इस बयान को “गैरजिम्मेदाराना” और “गंभीर रूप से भड़काऊ” बताया। कोर्ट का कड़ा संदेश: जिम्मेदार लोग न फैलाएं नफरत हाई कोर्ट ने कहा कि बाबा रामदेव जैसे प्रभावशाली व्यक्तियों को बयान देने से पहले सामाजिक जिम्मेदारी समझनी चाहिए। इस तरह की टिप्पणियां भारत जैसे विविधता से भरे देश में सांप्रदायिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकती हैं। पहले भी सुप्रीम कोर्ट से मिल चुकी है चेतावनी यह कोई पहला मामला नहीं है जब रामदेव या पतंजलि कोर्ट के निशाने पर आए हों। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि द्वारा भ्रामक विज्ञापन चलाने और एलोपैथी को बदनाम करने पर कड़ी आपत्ति जताई थी। Ramdev और उनके सहयोगियों को अदालत की अवमानना मामले में बिना शर्त माफी मांगनी पड़ी थी। कोविड को लेकर भ्रामक दावे पर भी फटकार दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अन्य मामले में पतंजलि और रामदेव को आदेश दिया था कि वे एलोपैथी को कोविड-19 मौतों के लिए जिम्मेदार ठहराने वाले अपने दावे हटाएं। अदालत ने कहा था कि इस तरह की गलत जानकारी सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती है।
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Heart Attack While Studying for IIT: इंदौर में देर रात पढ़ाई करते वक्त छात्र को आया Silent Heart Attack, भाई के सामने तोड़ा दम

इंदौर (Desh Harpal News Desk):मध्य प्रदेश के इंदौर से एक बेहद दुखद और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। यहां IIT की तैयारी कर रहे एक 18 वर्षीय छात्र को अचानक Silent Heart Attack आया और उसने अपने बड़े भाई के सामने ही दम तोड़ दिया। इस हादसे ने न सिर्फ छात्र के परिवार को बल्कि पूरे छात्र समुदाय को गहरे सदमे में डाल दिया है। जानकारी के अनुसार, मृतक छात्र पीयूष मुरैना जिले का निवासी था और अपने बड़े भाई के साथ इंदौर के भंवरकुआं थाना क्षेत्र के चितावद इलाके में एक किराए के मकान में रहकर IIT entrance exam की तैयारी कर रहा था। हर दिन की तरह पीयूष देर रात पढ़ाई में व्यस्त था। तभी अचानक उसके सीने में तेज दर्द उठा। उसने तुरंत अपने बड़े भाई को इसकी जानकारी दी। भाई ने प्राथमिक इलाज के लिए घर पर रखी कुछ दवाइयाँ दीं, लेकिन आराम न मिलने पर उसे फौरन नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। दुर्भाग्यवश, अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने पीयूष को Dead on Arrival घोषित कर दिया। डॉक्टरों के मुताबिक यह मामला Silent Heart Attack का है। यानी ऐसा हार्ट अटैक जिसमें पहले से कोई खास लक्षण दिखाई नहीं देते और अचानक स्थिति गंभीर हो जाती है। पुलिस ने इस घटना की सूचना मिलने के बाद जांच शुरू कर दी है। फिलहाल पुलिस परिजनों और भाई के बयानों के आधार पर आगे की पड़ताल कर रही है। प्रारंभिक जांच में हार्ट अटैक को ही मौत का संभावित कारण बताया गया है। पीयूष की मौत से उसके दोस्तों और आसपास के छात्रों में शोक की लहर फैल गई है। पढ़ाई के लिए अपने घर से दूर आए इस होनहार छात्र की असामयिक मृत्यु ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या युवा छात्रों में बढ़ता मानसिक तनाव और अनहेल्दी लाइफस्टाइल इस तरह की घटनाओं का कारण बन रहे हैं? Desh Harpal आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा करेगा। तब तक अपने बच्चों और छात्रों की सेहत पर ध्यान दें—Health is as important as Hard Work.
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Whooping cough: New research से कूकर खांसी के भविष्य के Vaccines में आ सकती है क्रांतिकारी सुधार

नई दिल्ली – एक समय था जब कूकर खांसी (जिसे हूपिंग कफ या पर्टुसिस भी कहा जाता है) बच्चों की मृत्यु का एक प्रमुख कारण हुआ करती थी, खासकर अमेरिका और दुनिया के अन्य हिस्सों में। लेकिन 1940 के दशक में जब इसका टीका अस्तित्व में आया, तब इस जानलेवा बीमारी पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सका। हालांकि, बीते कुछ दशकों में यह देखने को मिला है कि टीकाकरण के बावजूद whooping cough(हूपिंग कफ) के मामले दोबारा बढ़ रहे हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि मौजूदा टीकों की प्रभावशीलता समय के साथ घट जाती है, जिससे इस बीमारी के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। अब एक नई रिसर्च ने इस दिशा में आशा की किरण दिखाई है। इस शोध में यह समझने की कोशिश की गई है कि शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (immune system) किस प्रकार हूपिंग कफ के बैक्टीरिया बोर्डेटेला पर्टुसिस पर प्रतिक्रिया करता है। वैज्ञानिकों ने पाया कि मौजूदा टीके शरीर में “मेमोरी टी-सेल्स” को उतनी मजबूती से सक्रिय नहीं करते, जो कि दीर्घकालिक प्रतिरक्षा के लिए जरूरी हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि यदि हम इस प्रतिक्रिया को बेहतर ढंग से समझ पाएं, तो ऐसे नए टीके विकसित किए जा सकते हैं जो लंबे समय तक प्रभावी रहेंगे और बच्चों को दोबारा इस बीमारी के खतरे से बचा सकेंगे। अमेरिका में हुए इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने विशेष रूप से बच्चों और किशोरों में प्रतिरक्षा प्रणाली की गतिविधियों का विश्लेषण किया। इसके अलावा उन्होंने यह भी अध्ययन किया कि क्यों वर्तमान टीके समय के साथ कम प्रभावी हो जाते हैं। यह शोध आने वाले समय में टीका वैज्ञानिकों को ऐसे फार्मूले बनाने में मदद करेगा, जो न केवल लंबे समय तक प्रभावी होंगे, बल्कि महामारी जैसी स्थितियों में भी ज्यादा सुरक्षा प्रदान कर पाएंगे। निष्कर्षयह रिसर्च इस बात की ओर इशारा करती है कि केवल बीमारी से बचाव ही नहीं, बल्कि टीकों की गुणवत्ता और टिकाऊपन में सुधार करना अब समय की मांग है। यदि यह नई रिसर्च सफलतापूर्वक प्रैक्टिकल रूप में लागू होती है, तो हूपिंग कफ जैसी घातक बीमारी को पूरी तरह खत्म करने का सपना जल्द ही साकार हो सकता है।
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भाजपा का समर्थ भारत निर्माण में अतुलनीय योगदान

सत्येंद्र जैन ,स्तंभकार विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी भाजपा ने स्थापना के 46 वे वर्ष में प्रवेश किया है।भाजपा के संस्थापक अटल बिहारी वाजपेयी,लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी,कुशा भाऊ ठाकरे, राजमाता विजयाराजे सिंधिया,सुन्दरलाल पटवा,प्यारेलाल खण्डेलवाल आदि नेताओं ने 1980 में पार्टी स्थापना के समय यह कल्पना भी नहीं की होगी कि इतने कम समय में ही भाजपा विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी का गौरव अर्जित कर लेगी।1984 में भाजपा की यात्रा मात्र 2 लोकसभा सीट से प्रारम्भ होकर वर्ष 2019 में 303 सीट तक पहुँची है।वर्तमान में भाजपा के 240 सांसद हैं। भाजपा चार दशकों की यात्रा में ही भारतीय राजनीति में शून्य से चलकर शिखर पर आरोहित हो गई है।विश्व की सर्वोच्च राजनीतिक पार्टी बन गई है। वर्तमान में भाजपा के लगभग 13 करोड़ से अधिक सदस्य हैं। मध्यप्रदेश भाजपा ने पौने दो करोड़ सदस्य बना कर देश में अग्रणी भूमिका निभा कर कीर्तिमान स्थापित किया है।भाजपा का शिखर पर आरोहण सामान्य बात नहीं है ।यह अतुलनीय विलक्षण उपलब्धि है। यह उपलब्धि भाजपा की भारतीय मूल्यों ,पंच निष्ठाओं एवं एकात्म मानववाद के सिद्धांत को आत्मरूप आधार मानकर ही हुई है।भाजपा के संविधान में भी एकात्म मानववाद और पंच निष्ठाओं को आधारभूत तत्व माना गया है ।जो भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रीय मूल्यों को संवर्धित करते हैं।विचार परिवार राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से राष्ट्र निर्माण के मंत्र,दिशा निर्देश सतत प्राप्त होने से उत्कृष्टता के पथ पर अग्रसर है।भाजपा ने अनेक संकल्प भारतीय जनसंघ की स्थापना के समय से ही अपने संकल्प पत्र, घोषणापत्र में सम्मिलित किए हैं।जम्मू कश्मीर में धारा 370 को निष्प्रभावी करना,अयोध्या में दिव्य,भव्य,नव्य राम मंदिर का निर्माण करना,समान नागरिक संहिता को लागू करना जैसे संकल्पों को सदैव घोषणापत्र में सम्मिलित किया है।उत्तराखंड में यूनीफॉर्म सिविल कोड लागू कर दिया गया है।अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति,पिछड़े वर्ग के साथ सामान्य निर्धन वर्ग को भी अब आरक्षण मिल रहा है।नारी शक्ति वंदन अधिनियम द्वारा देश की महिलाओं को राजनैतिक क्षेत्र लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण कार्य भाजपा ने किया है।भाजपा ने गौरवशाली,वैभवशाली,समृद्धशाली, शक्तिशाली,समर्थ भारत निर्माण के रोड मेप को जनता के समक्ष प्रस्तुत किया है।शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, उद्योग, रक्षा,विनिर्माण आदि क्षेत्रों में स्व तत्व की प्रधानता को महत्व दिया है। मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि आगामी शताब्दी में भी भाजपा का भविष्य उज्जवल रहेगा। भाजपा की सतत उन्नति की यह यात्रा महा विजय की यात्रा सिद्ध होगी। वर्तमान भाजपा की सफलता चार पीढ़ियों के सतत,अथक परिश्रम से ही संभव हुई है।भाजपा को विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बनाने का कीर्तिमान केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री, तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को जाता है ।अमित शाह ने राष्ट्र व्यापी सदस्यता अभियान चला कर,चीन की कम्युनिस्ट पार्टी को सदस्य संख्या में पछाड़ दिया। 11 करोड़ सदस्य बनाकर संसार की सर्वोच्च पार्टी बनाया। राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा के नेतृत्व में सदस्यता अभियान को गति दी गई है।आज विश्व के 60 से अधिक देशों के प्रतिनिधि भारतीय जनता पार्टी के संगठन विस्तार की सफलता का अध्ययन करने के लिए भारत आ चुके हैं।राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा से भेंट कर चुके हैं।मध्य प्रदेश में प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा से एवं अन्य राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष से भेंट कर चुके हैं।भाजपा की अप्रतिम सफलता से कार्यकर्ताओं, प्रतिनिधियों को गौरव बोध होता है।उनके दल की संरचना को समझने के लिए विश्व के देशों से प्रतिनिधि आ रहे हैं हैं ।दूसरे शब्दों में कहें कि भाजपा की संगठन रचना,भागीरथी परिश्रम की विपुल सफ़लता से हमारे राष्ट्र भारतवर्ष का विश्व में सम्मान बढ़ रहा है।यह हम सभी 140 करोड़ भारतीयों के लिए स्वाभिमान का विषय है। वर्तमान में राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने विश्व के 20 से अधिक देश जैसे अमेरिका,ऑस्ट्रेलिया जापान,जर्मनी,फ्रांस,ब्रिटेन आदि देशों के राजनीतिक दलों को भारतीय लोकतंत्र के उत्सव लोकसभा चुनाव 2024 को निकटता से देखने के लिए निमंत्रित भी किया था।यह अनूठी एवं सराहनीय पहल है। स्वतंत्रता के चौसठ वर्षों के बाद भाजपा की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की पूर्ण बहुमत की सरकार लगातार तीन बार से केंद्र में बनी है ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुयोग्य नेतृत्व में भारत का,भारत के लोगों का सर्वांगीण उत्थान हो रहा है।देश के 21 राज्यों – केंद्र शासित प्रदेशों में भाजपा एवं सहयोगी दलों की सरकारें हैं।देश भर में एक हजार तीन सौ से अधिक कार्यालयों का निर्माण हो रहा है।पाँच सौ से अधिक कार्यालय निर्मित होकर सुचारु रूप में प्रारंभ हो चुके हैं। मध्यप्रदेश में भाजपा की संरचना पर प्रकाश डालेंगे तो पाते हैं कि वर्तमान में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा एवं संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा की त्रिदेव रूपी त्रिवेणी, ट्रिनिटी के चमत्कारी नेतृत्व में प्रदेश भाजपा इकाई नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं।लोकसभा चुनाव में सभी 29 सीट जीत कर कांग्रेस को शून्य पर ला दिया है।वोट शेयर भी लगभग 59 प्रतिशत अर्जित कर कीर्तिमान रचा है।वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में पाँचवीं बार भाजपा की सरकार बनी है।163 विधायक विजयी हुए हैं। वोट शेयर भी बढ़कर लगभग 49 प्रतिशत हुआ है।प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा पुनः शुभंकर सिद्ध हुए हैं ।लगभग 64000 से अधिक बूथ्स का डिजिटलाइजेशन एवं लाख कार्यकर्ताओं का कैलाश पर्वत बूथ स्तर पर अपना कार्य कर रहा है।बूथ विजय संकल्प को सार्थक कर रहा है।अनेक अवसर पर विष्णु दत्त शर्मा के भागीरथी परिश्रम, बूथ डिजिटलाइजेशन के कार्य की भूरी-भूरी प्रशंसा स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने मुक्त कंठ से की है।देश के समस्त राज्य की इकाइयों को मध्यप्रदेश के संगठन से सीखने का आह्वान किया गया है।सदस्यता अभियान के संगठन महापर्व में मध्य प्रदेश का भाजपा संगठन अग्रणी है।विगत चुनाव में अभूतपूर्व सफलता भाजपा के संगठन कौशल,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार और मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव की सरकार के द्वारा चलाई जा रही सैकड़ों योजनाओं के धरातलीय क्रियान्वयन के परिणाम स्वरुप ही संभव हो पायी है।भविष्य के गौरवशाली,वैभवशाली,समृद्धशाली, शक्तिशाली,समर्थ भारत निर्माण में भाजपा का अतुलनीय योगदान है।
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Conocarpus tree Harmful Effects-भोपाल स्मार्ट सिटी पार्क में लगा ‘खतरनाक’ कॉनोकर्पस पेड़! इंसानी सेहत और पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा, तीन राज्यों में पहले ही लग चुका है बैन

भोपाल, देश हरपल।राजधानी भोपाल के श्यामला हिल्स स्थित स्मार्ट सिटी पार्क में लगे पेड़ अब विवाद का कारण बनते जा रहे हैं। यहां बड़े पैमाने पर लगाए गए कॉनोकर्पस (Conocarpus) नामक पेड़ को लेकर विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता जताई है। बताया जा रहा है कि यह पेड़ मानव स्वास्थ्य, पर्यावरण और जैव विविधता के लिए बेहद हानिकारक है। यही वजह है कि इस पेड़ को गुजरात, महाराष्ट्र और तेलंगाना जैसे राज्यों में प्रतिबंधित कर दिया गया है। लेकिन भोपाल जैसे शहर में इसे बड़े पैमाने पर लगाया जा रहा है, जो एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। क्या है कॉनोकर्पस? कॉनोकर्पस एक विदेशी प्रजाति का पेड़ है, जो मूल रूप से खाड़ी देशों और अमेरिका में पाया जाता है। इसे इसकी तेज़ बढ़त और कम समय में हरियाली देने की क्षमता के कारण भारत के कई हिस्सों में लगाया गया था। परंतु विशेषज्ञों के अनुसार यह केवल दिखावटी हरियाली है, इसकी जड़ें बेहद आक्रामक होती हैं और यह जमीन के नीचे की पाइपलाइनों, सीवरेज सिस्टम और यहां तक कि भवनों की नींव को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं। क्यों है खतरनाक? पर्यावरणविदों और विशेषज्ञों की चेतावनी पर्यावरणविदों का कहना है कि स्मार्ट सिटी जैसी परियोजनाओं में कॉनोकर्पस जैसे पेड़ लगाना पूरी तरह गलत और खतरनाक फैसला है। भोपाल जैसे शहर, जो झीलों और प्राकृतिक विविधता के लिए जाना जाता है, वहां इस तरह की पेड़ लगाने से भविष्य में गंभीर पारिस्थितिक संकट खड़ा हो सकता है। सरकार और नगर निगम की चुप्पी सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जब यह पेड़ पहले से ही तीन राज्यों में प्रतिबंधित हो चुका है, तब भी भोपाल में इसका बड़े पैमाने पर रोपण किया जा रहा है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या नगर निगम और स्मार्ट सिटी मिशन के अधिकारी इस प्रजाति के पेड़ के खतरों से अनजान हैं या जानबूझकर इसे नजरअंदाज कर रहे हैं? क्या हो अगला कदम? देश हरपल की अपील:भोपाल के नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों को चाहिए कि वे इस विषय में स्वर उठाएं और प्रशासन से जवाब मांगें। केवल दिखावटी हरियाली नहीं, बल्कि स्थायी और सुरक्षित हरियाली ही स्मार्ट सिटी की असली पहचान होनी चाहिए।
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Editor's Picks

N Chandrasekaran

N Chandrasekaran: Tata Sons के Chairman बने रहेंगे, 5 साल के Extension को Board की मंजूरी

Tata Group से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। N. Chandrasekaran एक बार फिर Tata Sons की कमान संभालेंगे। Tata Sons के Board ने उनके कार्यकाल को अगले 5 साल के लिए बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। उनका मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में पूरा होना था। चंद्रशेखरन के Extension को लेकर पिछले कुछ समय से काफी चर्चा चल रही थी। ऐसे में Board के इस फैसले से Tata Sons के नेतृत्व को लेकर स्थिति अब साफ हो गई है। N Chandrasekaran को मिला 5 Years Extension Tata Sons के Board ने N. Chandrasekaran को अगले पांच साल के लिए Chairman बनाए रखने की मंजूरी दी है। इससे वह फरवरी 2027 के बाद भी Tata Group की Holding Company Tata Sons का नेतृत्व करते रहेंगे। यह फैसला उस समय आया है जब कुछ महीने पहले उनके अगले कार्यकाल को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी। अब Board की मंजूरी के बाद उनके नेतृत्व को आगे जारी रखने का रास्ता साफ हो गया है। फरवरी 2026 में Extension पर नहीं बनी थी सहमति N. Chandrasekaran के नए कार्यकाल का मुद्दा पहले भी Tata Sons के Board के सामने आया था। फरवरी 2026 की बैठक में उनके पांच साल के Extension को लेकर पूरी सहमति नहीं बन पाई थी। इसके बाद चंद्रशेखरन ने फरवरी 2027 में अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद पद छोड़ने की बात कही थी। हालांकि, अब ताजा Board फैसले के बाद कहानी ने नया मोड़ ले लिया है। 1987 में TCS Intern से शुरू हुआ था सफर N. Chandrasekaran की सबसे खास बात उनका लंबा Tata Group career है। उन्होंने 1987 में Tata Consultancy Services यानी TCS से अपने करियर की शुरुआत की थी। एक Intern के तौर पर शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे कंपनी के सबसे बड़े पदों तक पहुंचा। TCS में उन्होंने अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालीं और आगे चलकर कंपनी के CEO और Managing Director बने। यानी जिस ग्रुप में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की थी, आज उसी Tata Group की Holding Company की जिम्मेदारी उनके हाथ में है। TCS CEO से Tata Sons Chairman तक चंद्रशेखरन 2009 में TCS के CEO और Managing Director बने। करीब आठ साल बाद, 2017 में उन्हें Tata Sons का Chairman बनाया गया। इसके बाद से वह Tata Group की रणनीति और बड़े कारोबारी फैसलों में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। उनके नेतृत्व में Tata Group ने Technology, Electronics, Semiconductors, Batteries और Aviation जैसे कई नए क्षेत्रों में अपना कारोबार बढ़ाने पर जोर दिया। Tata Group के लिए आगे का दौर अहम N. Chandrasekaran को पांच साल का नया कार्यकाल मिलने के बाद Tata Group के कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर उनका नेतृत्व जारी रहेगा। Tata Sons की भविष्य की Corporate Strategy, नए Business Investments और अलग-अलग कंपनियों के बीच तालमेल बढ़ाने जैसे मुद्दे उनके सामने अहम रहेंगे। फिलहाल Board के फैसले ने एक बात साफ कर दी है कि N. Chandrasekaran फरवरी 2027 के बाद भी Tata Sons की कमान संभालते रहेंगे। N Chandrasekaran Career Timeline एक TCS Intern से शुरू हुआ N. Chandrasekaran का सफर अब Tata Group के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच चुका है। नए पांच साल के कार्यकाल के साथ अब उनकी अगली पारी पर कारोबारी जगत की नजर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
MoU

Pakistan Drone Deal: Trump के बेटों से जुड़े Investment वाली Powerus का बड़ा MoU

पाकिस्तान और अमेरिका से जुड़ी एक डिफेंस डील इस समय चर्चा में है। अमेरिकी ड्रोन कंपनी Powerus ने पाकिस्तान आर्मी के साथ एक Memorandum of Understanding (MoU) साइन किया है। इस समझौते के तहत कंपनी को ड्रोन से जुड़े शुरुआती ऑर्डर की बात भी सामने आई है। इस डील की खास बात सिर्फ पाकिस्तान आर्मी के साथ हुआ समझौता नहीं है। Powerus का कनेक्शन अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के बेटों Donald Trump Jr. और Eric Trump से जुड़े निवेश से भी है। इसी वजह से यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में है। Pakistan Army के साथ हुआ Drone MoU Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक Powerus के को-फाउंडर Brett Velicovich ने बताया कि कंपनी ने पाकिस्तान आर्मी के साथ MoU किया है। यह समझौता Unmanned Aerial Systems (UAS) यानी मानवरहित हवाई सिस्टम से संबंधित है। कंपनी को इसके तहत शुरुआती ऑर्डर भी मिला है। हालांकि, ऑर्डर की कुल कीमत और ड्रोन सिस्टम से जुड़ी पूरी तकनीकी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। कंपनी ने सुरक्षा और गोपनीयता को इसकी वजह बताया है। Trump के बेटों से क्या है Connection? अब सवाल उठता है कि इस डील में Trump परिवार का नाम क्यों सामने आ रहा है? दरअसल, Powerus का Aureus Greenway Holdings के साथ मर्जर प्रस्तावित है। अमेरिकी नियामकीय दस्तावेजों के मुताबिक Donald Trump Jr. और Eric Trump की Aureus में निवेश हिस्सेदारी American Ventures नाम के फंड के जरिए है। प्रस्तावित मर्जर पूरा होने के बाद American Ventures की संयुक्त कंपनी में करीब 9.9% beneficial ownership हिस्सेदारी होने की उम्मीद जताई गई है। यानी Trump के बेटों का नाम Powerus के पाकिस्तान के साथ हुए समझौते में सीधे कंपनी चलाने या डील करने के तौर पर नहीं, बल्कि प्रस्तावित मर्जर और निवेश कनेक्शन के कारण जुड़ रहा है। Trump Jr. ने डील में भूमिका से किया इनकार Trump परिवार से जुड़े इस कनेक्शन के सामने आने के बाद डील को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, Donald Trump Jr. के प्रवक्ता ने कहा कि वह Powerus में passive investor हैं और कंपनी के रोजमर्रा के कामकाज या मैनेजमेंट में उनकी भूमिका नहीं है। प्रवक्ता के अनुसार Trump Jr. ने पाकिस्तान के साथ इस समझौते की बातचीत या कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने की प्रक्रिया में कोई भूमिका नहीं निभाई। Powerus के CEO Andrew Fox ने भी कहा कि कंपनी अपने कॉन्ट्रैक्ट कारोबारी योग्यता के आधार पर करती है। Pakistan में Manufacturing की भी तैयारी? Powerus की योजना सिर्फ ड्रोन सिस्टम उपलब्ध कराने तक सीमित रहने की नहीं बताई जा रही है। कंपनी ने पाकिस्तान में technology development और manufacturing से जुड़े संभावित अवसरों पर भी बात की है। अगर आगे इस दिशा में समझौते होते हैं, तो इससे पाकिस्तान में ड्रोन टेक्नोलॉजी और उत्पादन क्षमता को बढ़ावा देने की कोशिश की जा सकती है। Asim Munir से भी हुई मुलाकात Powerus के प्रतिनिधिमंडल की पाकिस्तान के सेना प्रमुख Field Marshal Syed Asim Munir से मुलाकात भी हुई। पाकिस्तान सेना के अनुसार बैठक में defence procurement, production और भविष्य में capacity building जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। हालांकि, सेना की ओर से जारी आधिकारिक बयान में Powerus के साथ हुए MoU का उल्लेख नहीं किया गया था। क्यों अहम है यह Drone Deal? आज के समय में ड्रोन टेक्नोलॉजी सैन्य क्षेत्र का अहम हिस्सा बन चुकी है। निगरानी से लेकर अलग-अलग defence applications तक इनका इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में एक अमेरिकी कंपनी का पाकिस्तान आर्मी के साथ ड्रोन टेक्नोलॉजी को लेकर समझौता महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। वहीं, Trump परिवार से जुड़े निवेश कनेक्शन ने इस पूरी खबर को और ज्यादा चर्चा में ला दिया है। फिलहाल MoU की पूरी financial details, शुरुआती ऑर्डर की कीमत और ड्रोन सिस्टम की विस्तृत तकनीकी जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए आने वाले समय में इस डील से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी पर नजर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Aaditya Thackeray

Aaditya Thackeray को ₹500 करोड़ का मानहानि नोटिस, Disha Salian के पिता ने मांगी माफी

दिशा सालियान (Disha Salian) की मौत से जुड़ा मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। दिशा के पिता सतीश सालियान ने शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे (Aaditya Thackeray) और महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख को ₹500 करोड़ का मानहानि नोटिस (Defamation Notice) भेजा है। नोटिस में दोनों नेताओं के कथित बयानों पर आपत्ति जताई गई है। साथ ही 7 दिन के भीतर माफी मांगने और संबंधित बयान वापस लेने की मांग की गई है। यह मामला ऐसे समय फिर चर्चा में आया है, जब दिशा सालियान की मौत को लेकर CBI ने FIR दर्ज कर जांच शुरू की है। लंबे समय से परिवार की ओर से मामले की दोबारा जांच की मांग की जाती रही है। 7 दिन में माफी और ₹500 करोड़ की मांग सतीश सालियान की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस में आदित्य ठाकरे और अनिल देशमुख से बिना शर्त सार्वजनिक माफी मांगने को कहा गया है। इसके साथ ही कथित बयानों को वापस लेने और ₹500 करोड़ का हर्जाना देने की मांग रखी गई है। नोटिस में यह भी कहा गया है कि माफी को प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के जरिए सार्वजनिक किया जाए। सतीश सालियान का कहना है कि कुछ बयानों से उनकी बेटी की मौत की जांच को लेकर उठाई गई उनकी मांग पर ही सवाल खड़े किए गए। CBI जांच के बाद फिर बढ़ी हलचल दिशा सालियान की मौत के मामले में CBI की FIR के बाद अब जांच का दायरा एक बार फिर चर्चा में है। रिपोर्टों के मुताबिक FIR में आदित्य ठाकरे समेत कई लोगों के नाम का उल्लेख किया गया है। हालांकि, किसी FIR में नाम आने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति दोषी साबित हो गया है। CBI की जांच के बाद ही सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी। 2020 में हुई थी दिशा सालियान की मौत दिशा सालियान की जून 2020 में मुंबई में मौत हुई थी। वह अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर थीं। दिशा की मौत के कुछ दिनों बाद सुशांत सिंह राजपूत की भी मौत हुई थी, जिसके बाद दोनों घटनाओं को लेकर काफी चर्चा हुई। शुरुआती जांच में दिशा की मौत को दुर्घटना के तौर पर दर्ज किया गया था। बाद में उनके परिवार की ओर से मामले की नए सिरे से जांच की मांग उठाई गई। इसी सिलसिले में सतीश सालियान ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख भी किया था। आदित्य ठाकरे ने आरोपों से किया इनकार CBI FIR में नाम सामने आने के बाद आदित्य ठाकरे ने दिशा सालियान से किसी तरह का संबंध होने से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि वह दिशा से कभी नहीं मिले थे। आदित्य ठाकरे की ओर से यह भी कहा गया कि उनका नाम लंबे समय से राजनीतिक और व्यक्तिगत कारणों से इस मामले से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने मामले की आधिकारिक जांच को आगे बढ़ने देने की बात कही है। अनिल देशमुख के बयान पर भी सवाल मानहानि नोटिस में अनिल देशमुख के पुराने बयान का भी जिक्र किया गया है। सतीश सालियान की ओर से आरोप लगाया गया है कि उनके बयान में दिशा मामले की जांच की मांग को आदित्य ठाकरे को बदनाम करने की कोशिश के तौर पर पेश किया गया। अब नोटिस के जरिए दिशा के पिता ने दोनों नेताओं से अपने कथित बयान वापस लेने और सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की है। अब आगे क्या होगा? फिलहाल इस पूरे मामले में दो स्तर पर कानूनी प्रक्रिया चल रही है। एक तरफ CBI दिशा सालियान केस की जांच कर रही है, वहीं दूसरी तरफ ₹500 करोड़ के Defamation Notice पर दोनों नेताओं के जवाब का इंतजार है। आने वाले दिनों में जांच से सामने आने वाले तथ्य और नोटिस पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया इस मामले को आगे की दिशा देगी। फिलहाल इतना साफ है कि करीब छह साल पुराना यह मामला एक बार फिर महाराष्ट्र की राजनीति और बॉलीवुड दोनों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
Gold Silver Price

Gold Silver Price ₹1.51 लाख के करीब पहुंचा सोना, चांदी में भी बड़ी गिरावट

Gold Silver Price सोना-चांदी खरीदने वालों के लिए आज बाजार से राहत भरी खबर सामने आई है। दोनों कीमती धातुओं के भाव में गिरावट दर्ज की गई है। सोने की कीमत ₹1,036 प्रति 10 ग्राम कम हुई है, जिसके बाद इसका भाव करीब ₹1.51 लाख प्रति 10 ग्राम रह गया है। वहीं, चांदी भी ₹2,862 प्रति किलो सस्ती हुई है। पिछले कुछ समय से सोने और चांदी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। ऐसे में आज की गिरावट उन लोगों के लिए अहम है, जो खरीदारी के लिए सही समय का इंतजार कर रहे हैं। Gold Price Today: सोने के भाव में आई गिरावट आज सोने की कीमत में ₹1,036 की कमी आई है। गिरावट के बाद सोना करीब ₹1.51 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। सोने की कीमत में रोजाना होने वाले बदलाव का सीधा असर ज्वेलरी खरीदने वालों पर पड़ता है। हालांकि, दुकान से गहना खरीदते समय सिर्फ Gold Rate ही नहीं, बल्कि मेकिंग चार्ज और GST भी कुल बिल में जुड़ते हैं। Silver Price Today: चांदी भी हुई ₹2,862 सस्ती सोने के साथ चांदी के भाव में भी आज अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली। चांदी की कीमत ₹2,862 प्रति किलो कम हुई है। इसके बाद इसका भाव करीब ₹2.30 लाख प्रति किलो के आसपास आ गया है। चांदी का इस्तेमाल ज्वेलरी के अलावा कई इंडस्ट्रियल सेक्टर में भी होता है। इसलिए इसकी कीमत पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार की गतिविधियों का असर देखने को मिलता है। इस महीने सोना करीब ₹5 हजार टूटा अगर पूरे महीने की बात करें तो सोने के भाव में करीब ₹5,000 प्रति 10 ग्राम की गिरावट दर्ज की गई है। यानी महीने की शुरुआत के मुकाबले सोना फिलहाल काफी नीचे आ चुका है। बाजार में सोने की कीमत को लेकर आगे भी उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की कीमत और निवेशकों की गतिविधियां Gold Rate को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल हैं। चांदी भी महीने में करीब ₹9 हजार सस्ती चांदी की कीमत में इस महीने गिरावट और ज्यादा देखने को मिली है। रिपोर्ट के मुताबिक, महीने के दौरान चांदी करीब ₹9,000 प्रति किलो तक सस्ती हुई है। हालांकि, गिरावट के बाद भी चांदी का भाव ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। ऐसे में खरीदारी करने वाले लोग बाजार के ताजा भाव पर नजर रख रहे हैं। Jewelry खरीदने से पहले यह बात जरूर जानें अगर आप सोने की ज्वेलरी खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो सिर्फ बाजार में बताए गए Gold Rate को देखकर अंतिम कीमत का अंदाजा न लगाएं। ज्वेलरी की कीमत में मेकिंग चार्ज, GST और अन्य शुल्क भी शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा अलग-अलग शहरों और ज्वेलर्स के यहां भाव में थोड़ा अंतर भी देखने को मिल सकता है। इसलिए खरीदारी से पहले अपने शहर का ताजा रेट जरूर चेक करें। क्या आगे और सस्ता होगा Gold और Silver? सोने और चांदी की कीमत आगे किस दिशा में जाएगी, इसे लेकर पक्की भविष्यवाणी करना मुश्किल है। फिलहाल दोनों धातुओं में गिरावट दर्ज हुई है और महीने के स्तर पर भी कीमतें नीचे आई हैं। आने वाले दिनों में International Market, Dollar Rate और निवेशकों की खरीद-बिक्री जैसे कारक Gold और Silver के भाव को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए अगर आप खरीदारी की तैयारी में हैं तो रोजाना के रेट पर नजर रखना फायदेमंद रहेगा।
EPFO

EPFO Rule Change: ₹25,000 तक Salary वालों को मिलेगा फायदा, ऐसे Calculate होगी Pension

EPFO New Rule नौकरी करने वाले लोगों के लिए EPFO से जुड़ी बड़ी खबर है। सरकार ने EPFO की wage ceiling ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने का फैसला किया है। नया बदलाव 17 सितंबर 2026 से लागू किया गया है। इससे बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारियों को EPFO के दायरे में आने का मौका मिलेगा, जो अब तक पुरानी salary limit की वजह से बाहर थे। सरकार के मुताबिक, इस फैसले से 51 लाख से ज्यादा अतिरिक्त कर्मचारी अनिवार्य EPFO coverage में आ सकते हैं। इसका मतलब है कि अब ₹15,000 से ज्यादा और ₹25,000 तक के वेतन वाले कर्मचारियों के लिए social security का दायरा बढ़ेगा। आखिर बदला क्या है? EPFO की wage ceiling काफी समय से ₹15,000 थी। अब इसे बढ़ाकर ₹25,000 कर दिया गया है। आसान भाषा में समझें तो पहले जहां ₹15,000 तक की सीमा को आधार बनाया जाता था, वहीं अब नई सीमा ₹25,000 हो गई है। इस बदलाव का फायदा उन पात्र कर्मचारियों को मिल सकता है जिनकी salary इस नई सीमा के भीतर आती है और जो EPFO की अनिवार्य coverage की शर्तें पूरी करते हैं। EPFO के तहत कर्मचारियों को EPF, EPS और EDLI जैसी social security schemes से जुड़े फायदे मिलते हैं। ₹25,000 Salary पर कितनी Pension बनेगी? अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर किसी कर्मचारी की salary ₹25,000 है तो retirement के बाद उसे कितनी pension मिल सकती है? यहां एक जरूरी बात समझना बहुत जरूरी है। सिर्फ ₹25,000 salary होने से pension की रकम तय नहीं होती। Pension की calculation में pensionable salary और pensionable service अहम भूमिका निभाते हैं। EPS में सामान्य calculation formula है: Monthly Pension = Pensionable Salary × Pensionable Service ÷ 70 मान लीजिए उदाहरण के तौर पर pensionable salary ₹25,000 है और कर्मचारी ने 30 साल की pensionable service पूरी की है। तो calculation होगी: ₹25,000 × 30 ÷ 70 = करीब ₹10,714 प्रति माह अगर service period 35 साल हो, तो: ₹25,000 × 35 ÷ 70 = ₹12,500 प्रति माह यानी 35 साल की service और ₹25,000 pensionable salary को आधार मानने पर calculation करीब ₹12,500 monthly pension की आती है। लेकिन इसे हर कर्मचारी की पक्की pension न समझें। असली रकम उसके service record और लागू EPS नियमों के अनुसार तय होगी। पहले ₹15,000 की Salary Ceiling पर क्या था Calculation? पुरानी ₹15,000 की ceiling को उदाहरण में लें और 35 साल की service मानें, तो calculation होगी: ₹15,000 × 35 ÷ 70 = ₹7,500 प्रति माह वहीं ₹25,000 को pensionable salary मानने पर यही calculation: ₹25,000 × 35 ÷ 70 = ₹12,500 प्रति माह इससे साफ है कि calculation में pensionable salary का कितना महत्व है। हालांकि नई wage ceiling लागू होने का मतलब यह नहीं है कि हर मौजूदा EPFO member की pension अपने आप बढ़कर ₹12,500 हो जाएगी। किन कर्मचारियों को मिलेगा फायदा? नई व्यवस्था का असर खास तौर पर उन कर्मचारियों पर पड़ेगा जिनका वेतन ₹15,000 से अधिक और ₹25,000 तक है और जो EPFO coverage की संबंधित शर्तों को पूरा करते हैं। सरकार का अनुमान है कि इससे 51 लाख से ज्यादा नए कर्मचारी अनिवार्य EPFO coverage में आ सकते हैं। इसका उद्देश्य ज्यादा कर्मचारियों को formal social security system से जोड़ना है, ताकि नौकरी के दौरान retirement savings और दूसरी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं का दायरा बढ़ सके। EPF, EPS और EDLI में क्या मिलता है? EPFO से जुड़ने के बाद पात्र कर्मचारियों को अलग-अलग योजनाओं के तहत अलग-अलग फायदे मिलते हैं। EPF: कर्मचारी के retirement corpus को तैयार करने में मदद करता है। EPS: पात्र सदस्य को नियमों के अनुसार retirement के बाद pension benefit देता है। EDLI: EPFO members के लिए insurance benefit से जुड़ी योजना है। इन सभी योजनाओं के अपने अलग नियम और eligibility conditions हैं। सरकार ने क्यों बढ़ाई Wage Ceiling? सरकार का तर्क है कि पिछले वर्षों में वेतन और रोजगार के स्वरूप में बदलाव आया है। ₹15,000 की पुरानी सीमा लंबे समय से लागू थी। ऐसे में wage ceiling को ₹25,000 करने से ज्यादा कर्मचारियों को social security network में लाने का रास्ता खुल सकता है। इस फैसले से केंद्र सरकार पर भी अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। सरकार के अनुमान के मुताबिक, wage ceiling बढ़ाने से सालाना करीब ₹11,339 करोड़ का अतिरिक्त खर्च हो सकता है। सबसे जरूरी बात: ₹25,000 Salary = ₹12,500 Pension नहीं अगर आप भी ₹25,000 salary लेते हैं तो इस खबर का सबसे जरूरी हिस्सा यही है कि ₹12,500 pension कोई fixed amount नहीं है। यह रकम सिर्फ एक example है, जिसमें ₹25,000 pensionable salary और 35 साल की service को formula में रखा गया है। आपकी actual pension कितनी होगी, यह आपके pensionable salary, pensionable service और लागू EPS provisions पर निर्भर करेगा।

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